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PM आवास योजना-शहरी 2.0 में तेजी के निर्देश, पात्र परिवारों को समय पर मिलेगा पक्का घर

पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 में तेजी लाने के निर्देश, पात्र परिवारों को तय समय पर मिले पक्का घर मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों को दिए निर्देश, लाभार्थी चयन से आवास निर्माण तक प्रक्रिया प्रभावी बनाने पर जोर पात्र परिवारों को आवास सुविधा से वंचित न रहने देने का लक्ष्य, अनावश्यक विलंब पर सख्ती के निर्देश पीएम आवास योजना-शहरी में यूपी लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने पीएम मोदी और सीएम योगी का जताया आभार लखनऊ,   योगी सरकार में जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 की प्रगति की समीक्षा की गई। नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों के चयन से लेकर आवास निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि योजना का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।  लखनऊ स्थित राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री एके शर्मा ने कहा कि हमारा लक्ष्य प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को अपना पक्का घर उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभागीय अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता और तेजी के साथ कार्य करें, ताकि कोई भी पात्र परिवार आवास की सुविधा से वंचित न रहे। पीएम आवास योजना में यूपी लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित सोमवार को प्रदेश को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि पर नगर विकास मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एके शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी ने प्रदेश के लाखों परिवारों के अपने पक्के घर के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार की प्राथमिकता है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले पात्र और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध हो तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिले। इसी दिशा में विभाग लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद, सचिव अनुज कुमार झा, निदेशक सूडा महेंद्र बहादुर सिंह, विशेष सचिव प्रवीण लक्ष्यकार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

आकाशवाणी में प्रवेश को लेकर राहुल-प्रियंका पर FIR, जबरन घुसने का लगा आरोप

नई दिल्ली  राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। दोनों पर आकाशवाणी भवन में जबरन घुसने का आरोप है। एक दिन पहले ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। धरना देते हुए राहुल गांधी कई नेताओं के साथ आकाशवाणी भवन के अंदर एक पेड़ के नीचे बैठ गए थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी ले लिया था। अब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया गया है। FIR होने पर पीछे नहीं हटेंगे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने के मामले में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हैरानी जताई है। इमरान मसूद ने कहा है कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उनके साथ सांसद भी। वे कहीं भी जबरदस्ती नहीं घुसे। हम आखिर तक लड़ेंगे। सिर्फ FIR की वजह से हम पीछे नहीं हटेंगे। इमरान मसूद ने जताया विरोध ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसद आकाशवाणी भवन परिसर में जमा हुए थे। वे चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्ष का यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में केंद्रित था, जिसमें विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। काशवाणी भवन परिसर में थे घुसे पुलिस की ओर से आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद पहले विपक्ष के नेता सड़क पर बैठ गए और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। बाद में राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को पुलिस बैरिकेड पर चढ़ते हुए देखा गया। पुलिस की ओर से रोके जाने के बावजूद कांग्रेस नेता और अन्य प्रदर्शनकारी स्वागत द्वार से आकाशवाणी भवन परिसर में घुस गए। बिना इजाजत आकाशवाणी भवन में घुसने की मिली थी शिकायत दिल्ली पुलिस को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, उनके समर्थकों और उनके साथ मौजूद सांसदों के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वे कल शाम बिना इजाज़त आकाशवाणी ऑफिस में घुस गए थे. इसी शिकायत के आधार पर कांग्रेस नेताओं पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. मालूम हो कि आकाशवाणी भवन में राहुल गांधी के धरने के दौरान की तस्वीरों में पवन खेड़ा, दीपेंद्र हुड्डा, चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई कांग्रेसी नेता नजर आए थे।  आकाशवाणी भवन में 8 घंटे तक धरने पर रहे थे राहुल गांधी मालूम हो कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के कई नेता मंगलवार को आकाशवाणी परिसर में करीब 8 घंटे तक धरने पर रहे. बाद में पुलिस ने इन सभी को हिरासत में ले लिया. पुलिस रात करीब आठ बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस तथा कुछ सहयोगी दलों के नेताओं को हिरासत में लेकर उन्हें बस में बैठाकर ले गयी. पार्टी ने बताया कि बाद में, राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया।  सुबह विपक्षी सांसदों ने निकाला था मार्च  इससे पहले मंगलवार सुबह, विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन के घटक दलों के सांसदों ने संसद मार्ग से निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला. हालांकि, पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और कई सांसदों तथा नेताओं को हिरासत में ले लिया. विपक्षी दलों की मांग है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाया जाए और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द किया जाए।  पेड़ के नीचे दिखे राहुल-प्रियंका प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य सांसदों को आकाशवाणी भवन और नीति आयोग कार्यालय के पास संसद स्ट्रीट पर रोक दिया गया। बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा को परिसर के अंदर एक पेड़ के नीचे बैठे देखा गया। हिरासत में लेकर छोड़ दिया पुलिस ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आकाशवाणी भवन में प्रदर्शन को रातभर जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रदर्शनकारियों को परिसर छोड़ने के लिए कहा गया। पुलिस ने कहा कि इनकार करने वालों को हिरासत में लिया जाएगा। बाद में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका और 'इंडिया ब्लॉक' के अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।

‘मध्यप्रदेश की विरासत अद्भुत’, CM डॉ. यादव ने ट्रैवल मार्ट में इन्फ्लुएंसर्स से किया संवाद

मध्यप्रदेश की विरासत है अद्भुत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2026 में इन्फ्लुएंसर्स से किया सीधा संवाद मध्यप्रदेश की धरोहर की कहानियों को पहुंचाया जाएगा देश-दुनिया तक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश वीरांगना रानी दुर्गावती जैसी साहसी नारियों की कर्मभूमि है जिसने राष्ट्र की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री अतुलनीय है। यही नहीं आज के दौर की बात करें तो जो चीते विलुप्त प्राय: हो गए थे उनकी मध्यप्रदेश में बसाहट को सफलता मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, वन सम्पदा और सांस्कृतिक विशेषताओं को बढ़ावा देने के लिए देश के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2026 को संबोधित कर रहे थे। स्थानीय सयाजी होटल में हुई राष्ट्रीय स्तर की इन्फ्लुएंसर्स मीट में देशभर से लगभग 200 से अधिक इन्फ्लुएंसर्स पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की पीढ़ी को इतिहास के गौरवशाली पक्ष से परिचित करवाना आवश्यक है। इसमें इन्फ्लुएंसर्स की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में ही पर्यटन के क्षेत्र में स्कूल की पुरानी इमारत को सम्राट विक्रमादित्य होटल में परिवर्तित करने का सफल नवाचार हुआ है। होमस्टे लोकप्रिय हो रहे हैं। श्रीनगर की डल झील में ही नहीं अब भोपाल के भोजताल में शिकारे पर्यटकों को सैर करवाने का कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में डॉ. इलैया राजा टी., प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि मध्यप्रदेश में फिल्म निर्माण के लिए एक समृद्ध और अनुकूल इको-सिस्टम विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर हो रहा है। मध्यप्रदेश को केवल फिल्म शूटिंग ही नहीं, बल्कि पोस्ट-प्रोडक्शन सहित संपूर्ण फिल्म निर्माण का हब बनाने के प्रयास किया जा रहे हैं। मध्यप्रदेश की विविध लोकेशन्स, समृद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य इसे फिल्म निर्माताओं के लिए एक विशिष्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं। प्रसिद्ध शेफ एवं टेलीविजन पर्सनल्टी रणवीर बरार , अभिनेता अमित सियाल, कंटेंट क्रिएटर्स मारूफ कलमन ने कहा कि मध्यप्रदेश से जुड़ी वास्तविक और खूबसूरत कहानियों को समझने के लिए मध्यप्रदेश में आना होगा। यहां के लोगों से मिलकर अनुभव प्राप्त करने होंगे। हम जब किसी जगह को स्थानीय नजरिए से देखते हैं, तभी उसकी असली पहचान और उसकी अनकही कहानियां सामने आती हैं। 9 श्रेणियों में हुए इन्फ्लुएंसर्स सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न गतिविधियों के दौरान उत्कृष्ट योगदान देने वाले इन्फ्लुएंसर्स को सम्मानित किया। इस इन्फ्लुएंसर्स मीट का उद्देश्य मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों, स्थानीय अनुभवों और प्रदेश की अनूठी कहानियों को सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है। देश और प्रदेश के इन्फ्लुएंसर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मध्यप्रदेश की विविध पर्यटन संभावनाओं को पर्यटकों तक पहुंचाएंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक फन क्विज़ का आयोजन किया गया, जिसमें मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, पर्यटन स्थलों और खान-पान से जुड़े रोचक प्रश्न पूछे गए। इन्फ्लुएंसर्स ने उत्साह के साथ इसमें भाग लिया और प्रदेश की विविधताओं के बारे में नई जानकारियां साझा कीं। इस गतिविधि ने कार्यक्रम को संवादात्मक बनाने के साथ-साथ प्रतिभागियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत से और करीब से जोड़ा। हैंडलूम और आर्ट एंड क्राफ्ट को केंद्र में रखकर विशेष फैशन शो का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्राणपुर, महेश्वर, कुक्षी, धार, केरियाखेड़ी और भैरवगढ़ क्राफ्ट एवं हैंडलूम विलेज की थीम को आधुनिक फैशन के साथ प्रस्तुत किया गया। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की परियोजना का उद्देश्य प्रदेश के विशिष्ट स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प एवं हथकरघा को पर्यटन से जोड़ते हुए इन्हें व्यापक बाजार और नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाना है। इन्फ्लुएंसर्स मीट के माध्यम से इन स्थानीय उत्पादों और शिल्प परंपराओं को देशभर से आए डिजिटल क्रिएटर्स के सामने प्रस्तुत किया गया, जिससे इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, खान-पान, वन्य-जीवन, विरासत और स्थानीय पर्यटन अनुभवों को डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।  

बलिया से लेकर बिजनौर तक की यात्रा को अब मात्र 10 घंटे में पूरा कर सकते हैं: सीएम

लखनऊ को भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटीज में स्थापित करने का है लक्ष्य, इस अभियान में एचसीएल बने भागीदारः मुख्यमंत्री योगी एचसीएल टेक के लखनऊ कैंपस की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले पांच वर्षों में कम से कम 50 एआई स्टार्टअप्स को लखनऊ में स्थापित करने, उन्हें मजबूत बनाने और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में सरकार पूरा सहयोग देगी: मुख्यमंत्री लखनऊ को केवल आईटी सर्विसेज का केंद्र नहीं, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी और डीप टेक का प्रमुख केंद्र बनाना होगा: सीएम एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया, दोनों की साझा यात्रा पर हर व्यक्ति को गौरव की अनुभूति: सीएम अब बड़े गर्व के कहता हूं कि भारत की सबसे यंग वर्कफोर्स मेरे पास है और उसकी प्रतिभा मेरी सबसे बड़ी सामर्थ्य है: मुख्यमंत्री योगी बलिया से लेकर बिजनौर तक की यात्रा को अब मात्र 10 घंटे में पूरा कर सकते हैं: सीएम लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का संकल्प लखनऊ को भारत की अग्रणी एआई इनोवेशन सिटीज में स्थापित करने का है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिसमें विश्व स्तर के कम से कम 50 एआई स्टार्टअप्स को लखनऊ में स्थापित करने, उन्हें मजबूत बनाने और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए सरकार पूरा सहयोग देगी। मुख्यमंत्री ने एचसीएल टेक को भी इस अभियान में भागीदार बनने का आह्वान किया। एचसीएल टेक लखनऊ कैंपस की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एचसीएल को इसके लिए ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ को केवल आईटी सर्विसेज का केंद्र नहीं, बल्कि एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी और डीप टेक का प्रमुख केंद्र बनाना होगा। इसके लिए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर आगे बढ़ना होगा। एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया उन्होंने कहा कि एचसीएल की पांच दशक की यात्रा के संस्थापक शिव नाडर ने इसी उत्तर प्रदेश से शुरुआत की थी। आज यूपी की धरती से शुरू हुई यह यात्रा वैश्विक पहचान बना चुकी है। दस वर्ष पहले शिव नाडर के विजन के साथ लखनऊ में एचसीएल कैंपस की स्थापना ने इस यात्रा को नई पहचान दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एचसीएल ने लखनऊ को चुना और लखनऊ ने एचसीएल को अपनाया। दोनों की साझा यात्रा आज उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एससीएल कैंपस की सफलता के पीछे कर्मचारियों की मेहनत के साथ किसी मां की दुआ, किसी पिता का सपना और किसी परिवार का विश्वास भी जुड़ा है। जब लखनऊ की बेटी यहां से अपने करियर की उड़ान भरती है तो केवल उसकी जिंदगी नहीं बदलती, बल्कि पूरे परिवार का जीवन बदलता है। उसकी सफलता आने वाली अनेक बेटियों के लिए नई राह और प्रेरणा बनती है। युवा वर्कफोर्स यूपी की सबसे बड़ी ताकत उन्होंने कहा कि दस वर्ष पहले यूपी के युवाओं को बेहतर करियर के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर जाना पड़ता था। आज स्थिति बदल गई है। यूपी का युवा अपने करियर के लिए लखनऊ को चुन रहा है और दुनिया भर का युवा यूपी में आ रहा है। मुख्यमंत्री ने एचसीएल के कर्मचारियों से कहा कि वे केवल कंपनी के कर्मचारी नहीं, बल्कि अब उत्तर प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी जमीन के साथ उसकी युवा और प्रतिभाशाली वर्कफोर्स है। आज वे गर्व से कहते हैं कि भारत की सबसे युवा वर्कफोर्स यूपी में है और उसकी प्रतिभा प्रदेश की सबसे बड़ी सामर्थ्य है। उन्होंने कहा कि दस वर्ष पहले उत्तर प्रदेश की पहचान को लेकर अलग तरह की चर्चाएं होती थीं। आज प्रदेश की पहचान बदल चुकी है। एक समय वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया की चर्चा होती थी, आज वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन की चर्चा होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। बलिया से बिजनौर तक करीब 1200 किलोमीटर की दूरी अब लगभग 10 घंटे में तय की जा सकती है, जबकि एक दशक पहले यही दूरी तय करने में कई दिन लगते थे। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में यूपी की नई पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का करीब 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जबकि देश में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट में यूपी का योगदान करीब 60 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले आईटी और आईटीईएस के माध्यम से प्रदेश का निर्यात करीब 12 से 15 हजार करोड़ रुपये था, जो अब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्षों में इसे 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इसी प्रकार इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी एक दशक पहले करीब 3,800 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 45,000 करोड़ रुपये हो गया है। वर्ष 2030 तक इसे दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। आईटी सेक्टर अब केवल नोएडा तक सीमित नहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि आईटी सेक्टर अब केवल नोएडा तक सीमित नहीं है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ और आगरा में आईटी पार्क संचालित हैं। प्रदेश में सात सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क कार्यरत हैं, जबकि वाराणसी, बरेली, कानपुर और गोरखपुर में नए आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। गौतमबुद्ध नगर में 12 आईटी और आईटीईएस स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं। नई स्टार्टअप नीति के तहत नोएडा और लखनऊ को यू हब यानी डीप टेक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। लखनऊ में देश की पहली एआई सिटी और व्यापक एआई इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। एचसीएल का विकास केवल बिजनेस तक सीमित नहीं मुख्यमंत्री ने एचसीएल के सामाजिक सरोकारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि एचसीएल टेक ने उत्तर प्रदेश में केवल बिजनेस नहीं किया, बल्कि सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सीतापुर और बुलंदशहर में आवासीय कैंपस और स्कूलों के माध्यम से बच्चों के जीवन में बदलाव लाने का प्रयास किया … Read more

भारत ने वेस्टइंडीज को 8 विकेट से रौंदा, श्रेयस अय्यर ने जड़ा तूफानी शतक

लखनऊ  कप्तान श्रेयस अय्यर के तूफानी शतक की बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज को पहले टी-20 मुकाबले में आठ विकेट से हरा दिया। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 171 रन बनाए। जवाब में भारत ने महज 14.4 ओवर में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। यह टीम इंडिया की लगातार 10वीं टी-20 जीत है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम 19.1 ओवर में 171 रन पर सिमट गई। कप्तान शाई होप ने 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, जबकि शेरेफन रदरफोर्ड ने 56 रन बनाकर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। भारत की ओर से डेब्यू कर रहे नमन धीर ने प्रभावी गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट हासिल किए। कुलदीप यादव और अक्षर पटेल को दो-दो सफलताएं मिलीं। भारतीय गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर शिकंजा कसते हुए पूरी टीम को 20 ओवर से पहले ही पवेलियन भेज दिया। 172 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और चौथे ओवर तक टीम ने 35 रन पर दो विकेट गंवा दिए। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने ईशान किशन के साथ मिलकर वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की जमकर खबर ली। श्रेयस ने महज 42 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और 43 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। उनकी पारी में 10 चौके और छह छक्के शामिल रहे। ईशान किशन ने भी उनका शानदार साथ दिया और 27 गेंदों पर नाबाद 37 रन बनाए। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 67 गेंदों में 137 रन की अटूट साझेदारी की। अपने पहले शतक को लेकर अय्यर ने क्या कहा? पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में श्रेयस अय्यर अपने पहले T20I शतक को लेकर काफी भावुक और खुश नजर आए। उन्होंने शतक लगाने के इस अहसास को बेहद खास बताया और कहा कि वे लंबे समय से T20I में अपना पहला शतक लगाने का सपना देख रहे थे, जो आज पूरा हो गया। इस पल को याद करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह पारी साबित करती है कि अगर आप मेहनत करें, तो सपने सच जरूर होते हैं। टीम की माइंडसेट को लेकर अय्यर ने दिया बड़ा बयान भारतीय टीम की माइंडसेट को लेकर अय्यर ने कहा कि जीत का अहसास हमेशा खास और अलग होता है और ड्रेसिंग रूम में भी इसी बात पर चर्चा होती है। टीम का सीधा नियम है कि जिस खिलाड़ी का दिन हो, वह मैच खत्म करके ही लौटे। आज उनका दिन था, जबकि पिछले कुछ मैचों में बाकी बल्लेबाजों ने फिनिश किया था। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया है और अगर भारत इसी आक्रामक सोच के साथ खेलता रहा, तो T20 क्रिकेट की सबसे खतरनाक टीमों में से एक बनेगा। श्रेयस अय्यर ने शतक लगाकर अपने नाम किए कई रिकॉर्ड श्रेयस अय्यर T20I में शतक जड़ने वाले भारत के तीसरे कप्तान बन गए हैं, उनसे पहले यह कारनामा सिर्फ रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव ही कर पाए हैं। हालांकि, लक्ष्य का पीछा करते हुए शतक बनाने वाले श्रेयस भारत के पहले कप्तान हैं। इस मामले में उन्होंने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2019 में वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 94 रन बनाए थे। टी20 क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए शतक लगाने वाले श्रेयस चौथे भारतीय खिलाड़ी बने हैं। उनसे पहले रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव और केएल राहुल यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। कप्तान के तौर पर शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय श्रेयस अय्यर का यह टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला शतक है। इसके साथ ही वह भारतीय 'r20I कप्तानों की उस खास सूची में शामिल हो गए, जिसमें उनसे पहले रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव का नाम है। रोहित शर्मा ने कप्तान रहते हुए टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीन शतक लगाए हैं, जबकि सूर्यकुमार यादव ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2023 में शतकीय पारी खेली थी। श्रेयस की इस ऐतिहासिक पारी ने भारत को आसान जीत दिलाने के साथ रिकॉर्ड बुक में भी उनका नाम दर्ज करा दिया।

Kuno Cheetah Update: जंगल से बाहर निकलने वाले चीतों की होगी खास निगरानी, 10 साल का लैंडस्केप प्लान तैयार

ग्वालियर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब उनके दायरे की निगरानी भी कूनो की सीमाओं से आगे बढ़ाई जा रही है। चीते जब पार्क से निकलकर आसपास के जंगलों या दूसरे जिलों की ओर रुख करें तो उनकी सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून के वन विशेषज्ञ ग्वालियर-चंबल संभाग के वन अधिकारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। योजना का मकसद ऐसे वन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां चीतों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। साथ ही, किसी चीते के दूसरे जिले में पहुंचने की स्थिति में वन अमले को उसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए तैयार किया जाएगा। 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन में जुटेगा पूरा डेटा योजना के तहत वन क्षेत्रों में 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन बनाए जाएंगे। प्रत्येक जोन में सिर्फ चीतों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का डेटा जुटाया जाएगा। इसमें पेड़-पौधे, घास, मवेशी, शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों के साथ पक्षियों की मौजूदगी तक दर्ज की जाएगी। क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का भी रिकॉर्ड तैयार होगा। इसी विस्तृत डेटा के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि संबंधित क्षेत्र चीतों के लिए कितना अनुकूल है और वहां उनकी मौजूदगी की स्थिति में किस तरह के प्रबंधन की जरूरत होगी। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होगा सर्वे चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान के तहत डेटा कलेक्शन और अन्य प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने लगने का अनुमान है। फिलहाल यह योजना आगामी 10 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इसके लागू होने के बाद चीतों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग के पास उनके आवास, भोजन, पानी और आसपास मौजूद वन्यजीवों से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे किसी चीते के कूनो से बाहर निकलने पर तत्काल प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी। दूसरे जिले और राज्य तक पहुंच चुके हैं चीते कूनो से चीतों का बाहर निकलना कोई नई बात नहीं है। अब तक कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर पड़ोसी जिलों और यहां तक कि दूसरे राज्य के इलाकों तक पहुंच चुके हैं और बाद में वापस लौटे हैं। फिलहाल बाहर निकलने वाले चीतों की ट्रैकिंग मुख्य रूप से कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन की टीम करती है। नए लैंडस्केप प्लान के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग के दूसरे वन क्षेत्रों में भी स्थानीय अमले को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा। कूनो की टीम जैसा प्रशिक्षित होगा स्थानीय वन अमला इस योजना का एक अहम हिस्सा वन अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग है। कूनो के विशेषज्ञों की तरह ही ग्वालियर-चंबल के वन अमले को चीतों के व्यवहार और उनकी शारीरिक स्थिति को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में चीते की चाल, बैठने का तरीका, व्यवहार और गतिविधियों से उसकी स्थिति का अंदाजा लगाने जैसी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यहां तक कि उसके पेट की स्थिति, शिकार करने की स्थिति, पानी की जरूरत और किसी तरह की परेशानी के संकेतों को भी पहचानने पर जोर रहेगा। इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई चीता कूनो से निकलकर संभाग के किसी दूसरे वन क्षेत्र में पहुंचता है तो वहां तैनात कर्मचारी शुरुआती स्तर पर ही उसकी स्थिति को समझकर जरूरी कदम उठा सकेंगे। हर सैंपल जोन का बनेगा अलग रिकॉर्ड प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग सैंपल जोन आवंटित कर डेटा कलेक्शन कराया जाएगा। इसमें क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राकृतिक परिस्थितियां, वनस्पति, वन्यजीव और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। आने वाले समय में यही डेटा चीतों की निगरानी और उनके प्रबंधन का आधार बनेगा।  

बुंदेलखंड में चीतों की नई दहाड़, CM मोहन यादव आज 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती रिजर्व में छोड़ेंगे 2 चीते

सागर  वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर आज सात अक्तूबर को सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस रिजर्व में दो चीतों को खुले वातावरण में छोड़ेंगे। इस पहल से बुंदेलखंड की धरती पर वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी। उक्त आशय की जानकारी खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दी है। उन्होंने कहा कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों का आगमन सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के लिए अत्यंत गौरव की बात है। खुले मैदानों और घास के क्षेत्रों के प्रमुख वन्यजीव चीते की मौजूदगी से इस क्षेत्र की जैव विविधता को एक विशिष्ट पहचान मिलेगी। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा। चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के यहां पहुंचेंगे, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। सागर और बुंदेलखंड के लिए बड़ी सौगात मंत्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। यह योजना केवल वन्यजीवों को बसाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। चीतों की सुरक्षा और मेहमाननवाजी के लिए रिजर्व क्षेत्र में लगभग 439 हेक्टेयर का विशेष सुरक्षित और अनुकूल वातावरण वाला क्षेत्र विकसित किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सतत निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है। प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है तथा संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब यह अभियान मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीतें रहेंगे। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा। बढ़ेगा वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय रोजगार मंत्री राजपूत के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की ओर आकर्षित होंगे। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसायी और हस्तशिल्प कलाकारों को रोजगार तथा आय के नए अवसर मिलेंगे। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को तीव्र गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़कर देश में चीता पुनर्स्थापना अभियान की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। उसी व्यापक अभियान की अगली कड़ी के रूप में अब प्रदेश के अन्य उपयुक्त वनों में चीतों को बसाया जा रहा है। 

UPI पर चार्ज पड़ा तो बदलेंगे पेमेंट का तरीका! 76% यूजर्स एक्स्ट्रा फीस देने को तैयार नहीं

नई दिल्ली यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) भुगतान पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में करीब 10% और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की गिरावट आ सकती है. LocalCircles के मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है. सर्वे के मुताबिक, MDR लागू होने के बाद अधिक राशि वाले UPI भुगतान का एक हिस्सा कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बैंक ट्रांसफर की ओर जा सकता है।  ₹2,000 से अधिक के भुगतान UPI वैल्यू का 67% LocalCircles के CEO सचिन तापड़िया के मुताबिक, यह अनुमान MDR लागू होने से पहले किए गए अलग-अलग मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे पर आधारित है. अगस्त में ₹2,000 से अधिक के भुगतान मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का केवल करीब 4% थे, लेकिन इनका हिस्सा कुल मर्चेंट UPI भुगतान की वैल्यू में 67% था. इन भुगतानों की कुल राशि करीब ₹6 लाख करोड़ प्रति माह बैठती है।  अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही. इनमें मर्चेंट भुगतान की संख्या 15.51 अरब और वैल्यू ₹8.95 लाख करोड़ रही. ऐसे में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान संख्या में कम होने के बावजूद UPI की कुल वैल्यू पर बड़ा असर डाल सकते हैं।  MDR लगने पर 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका 2 अक्टूबर को जारी LocalCircles के कंज्यूमर सर्वे में 76% लोगों ने कहा कि अगर UPI इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे बड़े भुगतानों के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं. केवल 14% लोगों ने कहा कि अगर मर्चेंट MDR का बोझ उन पर डालता है तो वे अतिरिक्त राशि देकर भी UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे।  अगर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर मर्चेंट ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लेता है, तो 27% लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड की ओर जाने की बात कही. 14% डेबिट कार्ड और 4% बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का इस्तेमाल कर सकते हैं. भविष्य में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड और इतने ही लोगों ने कैश को पसंदीदा विकल्प बताया. 13% ने डेबिट कार्ड और 11% ने बैंक ट्रांसफर को प्राथमिकता दी. वहीं, केवल 20% लोगों ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद UPI उनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला माध्यम रहेगा।  UPI वॉल्यूम पर 4% असर का अनुमान LocalCircles के मुताबिक, MDR लागू होने के पहले पूरे महीने में UPI की कुल वैल्यू में करीब 10% की गिरावट आ सकती है. वहीं, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की कमी का अनुमान है।  इस 4% गिरावट में करीब 1% सीधा असर उन ट्रांजैक्शन पर पड़ सकता है जिन पर MDR लागू होगा. बाकी करीब 3% गिरावट उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार में बदलाव से हो सकती है. यानी जहां मर्चेंट अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे, वहां ग्राहक UPI के बजाय दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।  ### ₹2,000 तक UPI भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क MDR एक तरह का शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक और भुगतान कंपनियों को दिया जाता है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति से मर्चेंट (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा।  सरकार ने 14 सितंबर को ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो चार्ज जारी रखने का फैसला किया था. UPI QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट भी प्रस्तावित MDR से बाहर रहेंगे. LocalCircles का अनुमान है कि मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का करीब 96% हिस्सा इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होगा।  सरकार ने कहा- ग्राहकों से MDR नहीं वसूला जाएगा सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में कहा था कि इस शुल्क की जिम्मेदारी ग्राहकों की नहीं है. सरकार भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जिसके जरिए बैंक मर्चेंट्स की निगरानी कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि MDR ग्राहकों से न वसूला जाए।  ज्यादातर मर्चेंट MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं LocalCircles के 32,796 मर्चेंट्स के सर्वे में 41% ने कहा कि वे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं देंगे. वहीं, 9% मर्चेंट UPI भुगतान स्वीकार ही नहीं करते. सिर्फ 17% मर्चेंट 0.4% या उससे अधिक MDR वहन करने के लिए तैयार दिखे. 15% ने कहा कि वे अधिकतम 0.04% MDR ही स्वीकार करेंगे।  LocalCircles के मुताबिक, MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं होने वाले मर्चेंट कीमत बढ़ा सकते हैं, अलग से शुल्क लगा सकते हैं या ग्राहकों को कैश, कार्ड और बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों की ओर भेज सकते हैं।  जीरो MDR व्यवस्था में हो रहा बदलाव प्रस्तावित MDR व्यवस्था UPI पर लंबे समय से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. UPI के विस्तार में इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगस्त में संसद ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया था. इससे RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने पर लगी व्यापक रोक हट गई और केंद्र को यह तय करने की अनुमति मिली कि किन भुगतान माध्यमों को शुल्क मुक्त रखा जाएगा।  सरकार ने UPI सिस्टम को बनाए रखने की लागत का भी हवाला दिया है. UPI ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहन राशि वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹3,631 करोड़ पहुंच गई थी, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वित्तीय सेवा विभाग ने संसदीय समिति को बताया है कि लंबे समय तक जीरो MDR व्यवस्था को बनाए रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता।  नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं होगा. ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े भुगतान पर ₹5 का फ्लैट शुल्क होगा, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान पर 0.02% … Read more

8th Pay Commission: जनवरी 2026 से लागू होंगी सिफारिशें तो DA पर भी पड़ेगा असर, जानें क्या बदलेगा

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी डीए में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। साल की दूसरी छमाही के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान इसी महीने यानी अक्टूबर में ही होने की उम्मीद है। आठवें वेतन आयोग के दौर में यह दूसरी बार होगा जब सरकार महंगाई भत्ते का ऐलान करेगी। इससे पहले अप्रैल महीने में भी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए को 2 पर्सेंट बढ़ाया गया था। कब हुआ था 8वें वेतन आयोग का गठन वैसे तो सरकार ने पिछले साल जनवरी महीने में ही आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया था लेकिन 2025 के नवंबर महीने में टर्म्स ऑफ रेफरेंस और समिति का गठन हुआ। इससे एक महीने पहले यानी अक्टूबर 2025 में सातवें वेतन आयोग के आखिरी दौर में सरकार ने डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया था। बता दें कि सातवें वेतन आयोग की अवधि दिसंबर 2025 में खत्म हो गई। अब ऐसा माना जा रहा है कि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जब लागू करेगी तो जनवरी 2026 से ही प्रभावी होगा। अप्रैल में पहली बार डीए का ऐलान आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद सरकार ने अप्रैल महीने में पहली बार डीए का ऐलान किया था। यह ऐलान जनवरी से जून छमाही के लिए किया गया था। डीए में 2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई और इसका कैल्कुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत ही किया गया। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का भत्ता 60 पर्सेंट है। कितनी हो सकती है बढ़ोतरी? केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल 60 पर्सेंट की दर से डीए मिल रहा है। AICPI-IW के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर DA में 4 से 5 पर्सेंट बढ़ोतरीका अनुमान लगाया जा रहा है। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 64 पर्सेंट से 65 पर्सेंट का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, अंतिम डीए दर का फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। बता दें कि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों के पूरे वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की समीक्षा कर रहा है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। इसके आधार पर नए वेतन ढांचे में बेसिक पे में बड़ा बदलाव हो सकता है। वहीं, डीए पर क्या फैसला होगा, इसके बारे में वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद ही फैसला होगा। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें मई या जून 2027 तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी।

लाड़ली बहना 41वीं किस्त: दुर्गा पूजा से पहले मिल सकते हैं ₹1,500, लाभार्थी जरूर करें ये काम

भोपाल  त्योहार के समय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी योजनाओं के पैसे जल्द मिलेंगे. मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना चलायी जाती है. जिसमें हर महीने 1500 रुपये की किस्त सीधे बैंक अकाउंट में भेजे जाते हैं. सितंबर महीने में मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त जारी की गई थी, जो 13 सितंबर को महिलाओं के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था. वहीं अब महिलाओं को अक्टूबर महीने में आने वाली 41वीं किस्त का इंतजार है।  'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' राज्य की करीब 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल बन चुकी है. अब सभी लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का दुर्गा पूजा से पहले मिलने का बेसब्री से इंतजार है।  कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त? सरकार हर महीने लाड़ली बहना योजना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करती है. ऐसे में लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त 10 से 12 अक्टूबर के बीच जारी करने की पूरी संभावना है. सरकार ने कई बार त्योहार के अवसर पर समय से पहले योजना के पैसे जारी करती है. 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है तो माना जा रहा है कि सरकार दुर्गा पूजा से पहले ही महिलाओं के अकाउंट में 41वीं किस्त भेज सकती है. आधिकारिक घोषणा होते ही राशि सीधे महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी।  किस्त आने से पहले कर लें जरूरी काम कई बार तकनीकी समस्याओं या बैंक की जानकारी में गड़बड़ी की वजह से किस्त रुक जाती है. ऐसे में पैसे ट्रांसफर होने से पहले ये जरूरी काम जरूर जांच लें।  पात्र महिलाओं का बैंक अकाउंट आधार से लिंक होना जरूरी है. वरना किस्त रोकी जा सकती है।  बैंक में जाकर सुनिश्चित करें कि आपके खाते पर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सुविधा चालू है।  समग्र पोर्टल पर आपकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए. अधूरा ई-केवाईसी होने पर अगली किस्त रुक सकती है।  कैसे चेक करे किस्त का स्टेटस? अगर आप देखना चाहते हैं आपका आवेदन स्वीकृत है या नहीं या पिछली किस्तों का स्टेटस क्या है, तो आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibehna.mp.gov.in पर जाएं. यहां आप आवेदन एवं भुगतान की स्थिति के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपने समग्र आईडी या आवेदन नंबर दर्ज करें. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा उससे वेरिफाई करें. इसके बाद आपके सामने भुगतान की सारी जानकारी दिखने लगेगी।  बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत? अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं।  किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी।  ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस     सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.     वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.     अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें     इसके बाद कैप्चा भरें.     रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.     वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.     लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट पैसा नहीं आए तो क्या करें? अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है।  इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें।