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ट्रंप-मोदी की दोस्ती पर बड़ा खुलासा, सर्जियो गोर बोले- सुबह 6 बजे अचानक किया PM मोदी को फोन

 नई दिल्ली भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलने को लेकर हुए विवाद को खारिज करते हुए कहा कि "लेटरहेड पर लिखे नाम" से कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है. अमेरिकी राजदूत ने इस बात को खारिज किया कि भारत-अमेरिका के बीच संबंध कमजोर हो रहे हैं।  US-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत आज भी किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ ज़्यादा सैन्य अभ्यास करता है और रक्षा अधिकारियों के बीच नियमित द्विपक्षीय दौरे होते हैं।  गोर की ये टिप्पणी 'इंडो-पैसिफिक कमांड' से 'इंडो' शब्द हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद सामने आई हैं. 1947 में बनी US पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे पुरानी यूनिफाइड कमांड्स में से एक है, जिसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है।  लेटरहेड से क्या फर्क पड़ता है US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत को देखते हुए पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर 'इंडो-पैसिफिक कमांड' कर दिया गया था. इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका ने इस यूनिफाइड कमांड का पुराना नाम बहाल कर दिया।   गोर ने कहा, "मैं बस एक बात कहना चाहता हूं क्योंकि नाम बदलने को लेकर बहुत से लोगों ने काफी हंगामा किया था. मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लेटरहेड पर क्या नाम लिखा है, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है।  अमेरिकी राजदूत ने कहा, "हां, नाम बदला गया; लेकिन हम अभी भी वहां मौजूद हैं. भारत आज भी किसी भी दूसरे देश की तुलना में अमेरिका के साथ कहीं ज़्यादा मिलिट्री एक्सरसाइज़ करता ह. हर महीने कुछ न कुछ होता रहता है, चाहे भारतीय सैनिक यहां आएं या अमेरिकी सैनिक उस क्षेत्र में जाएं। उन्होंने कहा कि अगले दो हफ़्तों में भारतीय नौसेना का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका का दौरा करेगा।  कमजोर नहीं हुए हैं भारत-अमेरिका के संबंध गोर ने उन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध कमजोर हो गए हैं; उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर रिश्ते मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, "तो जो विशेषज्ञ ऑनलाइन बैठकर ट्वीट करते हैं और कहते हैं कि यह रिश्ता मुश्किल में है, उन्हें असलियत देखनी चाहिए. चाहे व्यापार हो, रक्षा हो या लोगों के बीच आपसी संबंध हों. हर मामले में यह रिश्ता मजबूत स्थिति में है।  गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देते हैं और व्यापार, तकनीक, रक्षा और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  भारत में अमेरिकी राजदूत ने एक घटना का जिक्र किया जब ट्रंप ने मियामी से मोदी को फोन करने का फैसला किया; ये तब हुआ था जब ट्रंप वहां 'अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप' (UFC) के मुकाबले देख रहे थे।  भारत में सुबह 6 बज रहे थे, ट्रंप बोले- PM मोदी को फोन लगाइए… गोर ने बताया, "यह कुछ महीने पहले की बात है. राष्ट्रपति मियामी में UFC कार्यक्रम में थे और हम बैकस्टेज बैठे थे, तभी उन्होंने मुझसे कहा, 'चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।  गोर ने ट्रंप की बात याद करते हुए कहा, "मैंने कहा सर वहां (भारत में) सुबह के 6 बजे हैं.' उन्होंने कहा, 'वह (मोदी) जाग रहे होंगे. वह (मोदी) मेरी तरह ही हैं।  गोर ने बताया कि जब तक वह नई दिल्ली में कुछ लोगों से बात कर पाते, तब तक ट्रंप UFC के मंच पर पहुंच चुके थे और आखिरकार मोदी के साथ बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई।  गोर ने कहा कि इस घटना से ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच के रिश्ते की असलियत पता चलती है।  अमेरिकी राजदूत गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा, "इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि जब आप किसी के दोस्त होते हैं, तो हर चीज पहले से तय करने की ज़रूरत नहीं होती." उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति सच में प्रधानमंत्री को अपना दोस्त मानते हैं।  उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के साथ उनका जुड़ाव उनके पहले कार्यकाल से ही है. भारत से जुड़ी उनकी अच्छी यादें हैं. और यह एक बहुत बड़ा फायदा है।  गोर ने कहा, "अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है." उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दो साल दशकों तक चलने वाले द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने के लिए बहुत अहम होंगे।  गोर ने बताया कि ये अगले दो साल रिश्ते को आने वाले कई दशकों के लिए एक नई दिशा देंगे. इसलिए जो भी इसमें शामिल हो रहा है, वह इसे एक लंबे समय के प्रोजेक्ट के तौर पर देखे. यह एक या दो साल का मामला नहीं है, बल्कि हम आज जो बोएंगे, वही हमें आने वाले दशकों तक आगे ले जाएगा। 

फॉरेस्ट रेस्ट हाउस “राम वाटिका” में स्थापित भगवान राम की प्रतिमा को नमन कर प्राप्त किया आशीर्वाद

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  आज अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर स्थित रामगढ़ के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस "राम वाटिका" में स्थापित भगवान  राम की प्रतिमा को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की, इसके साथ ही उन्होंने "एक पेड़ माँ के नाम 3.0" अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधारोपण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान को मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि माँ के नाम पर लगाया गया एक पौधा न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएँ तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लें, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा जा सके। भगवान  राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु  राम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता का अनुपम आदर्श है, जो युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से प्रभु  राम द्वारा प्रशस्त आदर्श पथ पर चलते हुए सेवा, सद्भाव एवं समर्पण के भाव से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में सहभागी बनने का आह्वान किया। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, लुण्ड्रा विधायक  प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक  रामकुमार टोप्पो सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए : राज्यमंत्री बागरी

नमामि गंगे मिशन अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिये क्षमता वर्धन कार्यशाला प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए : राज्यमंत्री बागरी भोपाल राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी के मुख्य आतिथ्य में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने संबंधी दो दिवसीय क्षमता वर्धन कार्यशाला का शुभारंभ भोपाल में किया गया। राज्यमंत्री श्रीमती बागरी ने कहा कि भारत में नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का केंद्र हैं। आमजन नदियों के जल को सर्वाधिक शुद्ध एवं पवित्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में डीपीआर तैयार करने संबंधी दिया जाने वाला प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए, जिससे भविष्य में तैयार होने वाली परियोजनाएँ नदी संरक्षण के उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें। राज्यमंत्री श्रीमती बागरी ने कहा कि डीपीआर तैयार करते समय प्राकृतिक स्रोतों की उपयोगिता तथा उनके संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति की पूजा का मूल उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है, क्योंकि नदियों और वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। वृक्ष प्राकृतिक रूप से नदियों को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बरसाती नालों की नियमित सफाई पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे नदियों को प्रदूषण से बचाने में प्रभावी सहायता मिलती है। उन्होंने बहुउद्देशीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक बृजेन्द्र स्वरूप ने कहा कि नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा की सहायक नदियों, विशेष रूप से बेतवा नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप नमामि गंगे मिशन कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन के पाँच प्रमुख स्तंभों— अविरल गंगा, निर्मल गंगा, जन गंगा, ज्ञान गंगा और अर्थ गंगा—की जानकारी देते हुए इनके महत्व पर प्रकाश डाला। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी आमंत्रित विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला बेतवा नदी के पुनर्जीवन के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी। कार्यक्रम में नमामि गंगे मिशन के निदेशक धीरज जोशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय पर्यावरण विशेषज्ञ सीताराम टैगोर ने किया।  

मंत्री केदार कश्यप बोले- आदिवासी समाज के सशक्त नेतृत्व और शिक्षा से बन रहा नया छत्तीसगढ़

आदिवासी समाज के सशक्त नेतृत्व और शिक्षा से नए छत्तीसगढ़ का निर्माण हो रहा है : मंत्री केदार कश्यप छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन का हुआ लोकार्पण, उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान शिक्षा, संगठन और संस्कार से समाज होगा मजबूत, युवाओं से आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप आज रायपुर के महादेव घाट में आयोजित छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन लोकार्पण, सम्मान समारोह एवं वार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए। उन्होंने नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण किया और शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों एवं प्रतिभाओं को सम्मानित किया। शिक्षा और संगठन समाज की सबसे बड़ी ताकत               मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी शिक्षा, संगठन और संस्कार होते हैं। आज आदिवासी समाज के युवा शिक्षा, प्रशासन, तकनीक, व्यवसाय, खेल और जनप्रतिनिधित्व सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह नए और विकसित होते छत्तीसगढ़ का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि आज दूरस्थ क्षेत्रों के आदिवासी युवा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी और जनप्रतिनिधि बनकर समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। सामाजिक भवन बनेगा विकास और मार्गदर्शन का केंद्र               मंत्री कश्यप ने कहा कि सामाजिक भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की एकता, संवाद, संस्कार और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन का केंद्र है। यहां विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सांस्कृतिक गतिविधियों, सामाजिक कार्यक्रमों और समाज के विकास से जुड़े कार्यों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। शासकीय योजनाओं से आदिवासी समाज को मिल रहा सशक्त आधार               कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति, छात्रवृत्ति, आवासीय विद्यालय, कौशल विकास, वनाधिकार, स्वरोजगार, लघु वनोपज का बेहतर मूल्य तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण जैसी योजनाओं से आदिवासी समाज को आगे बढ़ाया जा रहा है। युवाओं को आगे बढ़ाने का किया आह्वान              मंत्री केदार कश्यप ने समाज के वरिष्ठजनों से अपनी समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, डिजिटल तकनीक और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की अपील की।             कार्यक्रम के अंत में मंत्री केदार कश्यप ने सामाजिक भवन के निर्माण के लिए समाज को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि संगठित समाज, शिक्षित युवा और सशक्त नेतृत्व के बल पर छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज विकास और प्रगति की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

डॉलर पर बढ़ा वैश्विक दबाव! सेंट्रल बैंक घटा सकते हैं होल्डिंग्स, बदल सकता है आर्थिक समीकरण

न्यूयॉर्क क्‍या डॉलर के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं, अब डॉलर दुनिया में दबदबे वाली करेंसी नहीं रहेगी या क्‍या दुनिया को डॉलर का विकल्‍प मिल गया है? एक रिपोर्ट में ऐसा खुलासा किया गया है, जिसके बाद आपके भी मन में ये सभी सवाल घूमने लगेंगे. रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक सर्वे के हवाले से कहा गया है कि दुनिया अब डॉलर रिजर्व को कम करने की तैयारी कर रही है. दुनिया में ऐसा पहली बार होने जा रहा है।  यह सर्वे ऑफिशियल मॉनिटरी एंड फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस फोरम (OMFIF) की ओर से की गई है. इस सर्वे में कहा गया है कि पहली बार दुनिया के केंद्रीय बैंक आने वाले 10 सालों में अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में अमेरिकी डॉलर की हिस्‍सेदारी बढ़ाने के बजाय घटाने की योजना बना रहे हैं, जो यह संकेत देता है कि फॉरेक्‍स रिजर्व पोर्टफोलियो को दुनिया डाइवर्सिफाइड रखना चाहती है।  पहले क्‍यों होती थी सिर्फ डॉलर बढ़ाने की बात?  दरअसल, दुनिया में सबसे स्थिर करेंसी डॉलर मानी जाती रही है और पूरी दुनिया डॉलर में ही एक दूसरे देश से कारोबार कर रहे हैं. चाहे तेल का आयात हो या किसी फूड आइटम्‍स का निर्यात डॉलर में ही लेनदेन होता रहा है, लेकिन अब स्थिति‍ धीरे-धीरे बदल रही है. कई देश लोकल करेंसी में आयात-निर्यात करना शुरू कर चुके हैं और अमेरिका के दबाव वाली राजनीति से नाराज भी दिख रहे हैं. सर्वे में खुलासा हुआ है कि ऐसा पहली बार है कि ज्‍यादातर देश डॉलर होल्डिंग्‍स को अगले 10 साल में कम करने जा रहे हैं।  क्‍यों हो रही डॉलर घटाने की बात?  सर्वे के अनुसार, केंद्रीय बैंकों को तीन बड़े रिस्‍क दिखाई दे रहे हैं, जो डॉलर को लेकर पैदा हुए हैं. इसमें सबसे बड़ा अमेरिकी राजनीतिक अनिश्‍चतता, जिससे डॉलर की स्थिर रहने पर सवाल खड़ा हुआ है. दुसरा कई देशों के साथ अमेरिका का जियो-पॉलिटिकल टेंशन, जिस कारण डॉलर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. खासकर ईरान जंग के दौरान डॉलर में अस्थिरता काफी दिखाई दी है. तीसरी सबसे बड़ी वजह ग्‍लोबल फाइनेंशियल सिस्‍टम का मल्‍टीपोलर होना यानी ज्‍यादातर देश अब सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि अलग-अलग करेंसी में एक दूसरे के साथ ट्रेड कर रहे हैं. इसका सीधा मतलब है कि दुनियाभर के देश अब सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं।  डॉलर की जगह कौन-कौन सी करेंसी ज्‍यादा पसंद हैं  अभी डॉलर का विकल्‍प स्‍पष्‍ट तौर पर दिखाई नहीं देता है, लेकिन अगर ऐसा ही रहा तो बहुत जल्‍द दुनिया डॉलर को पीछे छोड़कर किसी दूसरे करेंसी की ओर बढ़ेगी. सर्वे में कहा गया है कि डॉलर की जगह सबसे ज्‍यादा पसंद किए जाने वाली चीजों में सोना, यूरो, ब्रिटिश पाउंड, चीनी युआन, नॉर्वे की क्रोन और न्‍यूजीलैंड डॉलर है. हालांकि, सर्वे का यह भी कहना है कि यूरो और युआन की अपनी लिमिटेशन हैं, यही कारण है कि वे डॉलर का पूर्ण विकल्‍प नहीं बन पाए हैं।  सोने का बढ़ रहा रिजर्व रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सर्वे से पहले एक अन्‍य सर्वे में कहा गया है कि रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. कई देशों के लिए सोना अब जियो-पॉलिटिकल रिस्‍क के खिलाफ सुरक्षा और रिजर्व को डाइवर्सिफाई रखने का प्रमुख साधन बनता जा रहा है।  डॉलर का वजूद मिट जाएगा? रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक ऐसा नहीं दिखाई देता है कि डॉलर का प्रभुत्‍व दुनिया से खत्‍म हो जाएगा, क्‍यों डॉलर अभी दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व करेंसी है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और सुरक्षित निवेश के रूप में उसकी भूमिका बहुत मजबूत बनी हुई है. बदलाव अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे हो रहा है।  भारत पर क्‍या असर होगा?  अगर डॉलर से निर्भरता कम होती है तो भारत जैसे देश अपनी करेंसी को बढ़ावा दे सकते हैं और दुनिया के साथ रुपये में कारोबार बढ़ सकता है. साथ ही अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने और अन्य मुद्राओं का हिस्सा बढ़ा सकते हैं. हालांकि, ये अचानक नहीं होगा, बल्कि डॉलर का दबदबा धीरे-धीरे कम हो सकता है। 

योगी सरकार के प्रयासों से UP में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई रफ्तार

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

TMC अकाउंट फ्रीज मामला: हाईकोर्ट ने अर्जेंट सुनवाई से किया इनकार, ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें

कलकत्ता कलकत्ता हाईकोर्ट से मंगलवार को ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ दायर याचिका पर अर्जेंट सुनवाई करने से स्पष्ट मना कर दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य कर रहे हैं. उन्होंने ममता गुट की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि इस केस की सुनवाई भी आम मामलों की तरह ही होगी, यानी जो नंबर तय है, उसी लिस्टिंग के अनुसार सुनवाई की जाएगी। ममता गुट के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट को बताया कि टीएमसी के तीन बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है. इस वजह से इन खातों से किसी भी तरह का पेमेंट और लेन-देन नहीं हो पा रहा है. वकील ने कहा कि इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की भारी रकम फंसी हुई है. उन्होंने इस संकट को देखते हुए कोर्ट से तुरंत सुनवाई करने की अपील की, लेकिन अदालत ने उनकी ये मांग मानने से साफ इनकार कर दिया। बैंक खातों में 440 करोड़ जमा तृणमूल कांग्रेस के जिन तीन बैंक खातों पर रोक लगाई गई है, उनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। यह कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक कुछ विधायकों द्वारा बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद की गई है। शिकायत में उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कर खातों की विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।विधायकों ने अपनी शिकायत में बैंक खातों में जमा धन के स्रोत पर सवाल उठाते हुए सभी लेन-देन की जांच कराने की मांग की। उन्होंने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का आग्रह किया कि खातों में जमा धन वैध स्रोतों से आया है या फिर कथित अवैध गतिविधियों, जैसे 'कट मनी' की वसूली, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और घोटालों से अर्जित रकम से जुड़ा हुआ है। बता दें कि फलता के चुनाव के बाद कई ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें लोगों को कटमनी वापस की गई थी। दरअसल सरकारी योजनाओं को लाभ देने के लिए वसूला गया धन कट मनी कहा जाता है। आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार में धड़ल्ले से लोगों से कटमनी वसूली जाती थी। तय समय से होगी सुनवाई सोमवार को मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग किये जाने पर अदालत ने बैंक, पुलिस और राज्य सरकार को पक्षकार बनाने तथा उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था. मंगलवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फिर से त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. न्यायमूर्ति ने दोहराया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी. इस मामले में राज्य सरकार भी एक पक्ष है. राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि यदि त्वरित सुनवाई संभव नहीं है, तो कम से कम गुरुवार को पक्षों को अपनी दलीलें रखने का अवसर दिया जाये।  बागी विधायकों की शिकायत पर हुई कार्रवाई टीएमसी के इन बैंक खातों पर ये कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े कुछ विधायकों की शिकायत के बाद हुई है. इन विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने इस मामले की पूरी जांच करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।  इन बागी विधायकों ने खातों में जमा करोड़ों रुपयों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने जांच टीम से मांग की है कि इस पैसे के सोर्स की जांच की जाए. वे पता लगाना चाहते हैं कि ये पैसा ईमानदारी की कमाई का है या फिर किसी गलत काम से आया है. उन्हें शक है कि ये पैसा कट-मनी (कमीशन), पब्लिक फंड की हेराफेरी और किसी बड़े घोटाले का हो सकता है। 

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर, सचिन अहीर के फैसले से उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ीं

मुंबई  लोकसभा के छह सांसदों के साथ छोड़ने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और गहरा जख्म मिला है. आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेता सचिन अहीर ने भी बगावत कर दी है. अहीर अब एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. मंगलवार को उन्होंने विधान परिषद उपसभापति पद के लिए महायुति के उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया. यह चुनाव बुधवार को होना है. सचिन अहीर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में पर्चा भरा. इस मौके पर डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार भी मौजूद थीं. वर्ली में आदित्य ठाकरे का राजनीतिक आधार मजबूत करने में अहीर का बड़ा रोल रहा है. ऐसे में उनका जाना ठाकरे परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. सचिन अहीर साल 2019 में एनसीपी छोड़कर शिवसेना में आए थे. उन्हें 2022 में एमएलसी बनाया गया था।  बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने इस टूट के लिए उद्धव ठाकरे और संजय राउत के अहंकार को जिम्मेदार ठहराया है. बावनकुले ने साफ कहा कि बीजेपी का अहीर के इस कदम से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि ठाकरे गुट अपने कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं देता. यही वजह है कि पार्टी में भारी नाराजगी है और नेता लगातार साथ छोड़ रहे हैं।  शिवसेना के दोनों गुटों में यह सियासी जंग काफी तेज हो गई है. कुछ ही दिन पहले पार्टी के छह सांसदों ने भी शिंदे गुट जॉइन किया था. पार्टी के नेता इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दे रहे हैं. विधान परिषद चुनाव से पहले यह बगावत महाविकास अघाड़ी के लिए खतरे की घंटी है।  शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने क्या दावा किया? इस बड़े सियासी फेरबदल पर एनसीपी शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा, ‘सचिन अहीर पहले हमारी पार्टी में थे. फिर वह उद्धव ठाकरे के साथ गए और अब शिंदे गुट में चले गए.’ उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए काफी खतरनाक बताया. रोहित ने आरोप लगाया कि पैसे और सत्ता के दम पर नेताओं को खरीदा जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि शिंदे गुट अब उनकी पार्टी को भी निशाना बना सकता है।  हालांकि उन्होंने दावा किया कि शिंदे गुट को अब वैसी सफलता नहीं मिलेगी. वहीं ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे ने एक अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस चुनाव में जगन्नाथ अभ्यंकर महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार हैं। 

मध्य प्रदेश में प्रमोशन पर नई हलचल, 10 साल बाद बढ़ी प्रक्रिया; आरक्षण नियमों पर फिर छिड़ा विवाद

भोपाल  प्रदेश में पदोन्नति की तैयारी है। इसके लिए पदोन्नति के पदों का निर्धारण किया जाना है, लेकिन पुराने नियमों के आधार पर ही आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। शेष पद अनारक्षित श्रेणी में रहेंगे, लेकिन मेरिट में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी भी आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो संबंधित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसका आशय ये हुआ कि अनारक्षित (सामान्य) वर्ग नुकसान में रहेगा क्योंकि उसका कोटा कम हो जाएगा। इसका ही विरोध सामान्य वर्ग के कर्मचारी कर रहे हैं। मंत्रालय सहित कई विभाग ऐसे हैं, जहां उच्च स्तर पर आरक्षित वर्ग का कब्जा हो गया है। पदोन्नति नियम का पूरा मामला देखने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के स्थापना से जुड़े अधिकारियों के साथ सोमवार को मंत्रालय में बैठक की। इसमें बताया गया कि नए नियम के अनुसार भी कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे, यानी चिह्नित पदों पर केवल अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदोन्नति हो सकेगी। यदि किसी संवर्ग में पदोन्नत के लिए आरक्षित वर्ग का अधिकारी-कर्मचारी पात्र नहीं पाया जाता है तो वह स्थान रिक्त रहेगा। उसे किसी दूसरे वर्ग से भरा नहीं जाएगा। वहीं, अनारक्षित श्रेणी में जितने भी पद आएंगे, उसमें भी अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को अवसर मिलेगा, क्योंकि अनारक्षित का मतलब सभी वर्गों से लिया गया है। इसे मेरिट से भी जोड़ा गया है। इसके मायने यह हुए कि किसी आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की गोपनीय चरित्रावली ए प्लस प्लस रहती है और दूसरा कोई नहीं रहता है तो वह ऊपर आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सभी विभागों से कहा गया है कि वे पदोन्नति के लिए तैयारी करके रख लें। वरिष्ठता सूची भी देख लें। उल्लेखनीय है कि पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नति की तैयारी करने के निर्देश मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। इसका आधार हाई कोर्ट द्वारा नियम पर किसी प्रकार का स्थगन न देने को बनाया गया है। वहीं, निर्णय सुरक्षित रखा गया है लेकिन अब संभावना यही है कि पहले बेंच गठित होगी और अंतिम सुनवाई करके निर्णय सुनाया जाएगा। दो साल के पदों के हिसाब से होगी पदोन्नति विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति दो साल के हिसाब से होगी। एक बार की बैठक में आगे के पदों के लिए भी व्यवस्था कर ली जाएगी। पदोन्नति के पद पांच के लिए एक बार निर्धारित हो जाएंगे। इसके फिर कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी संवर्ग में पहले से ही पदोन्नति से पद भरे हुए हैं तो वहां पदोन्नति नहीं होगी। दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी होंगे लाभान्वित भले ही दस साल बाद पदोन्नति का अवसर बन रहा हो, मगर दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रतिनियुक्ति के पद भी पदोन्नति की श्रेणी में आएंगे। किसी के लिए कोई पद रोककर नहीं रखा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट कर दी गई है कि पदोन्नति 2025 के नियम लागू होने के बाद से दी जाएगी।  

सिवनी में धान महोत्सव, CM डॉ. मोहन यादव किसानों के खातों में भेजेंगे ₹2.82 करोड़; कई सौगातें भी मिलेंगी

सिवनी  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए 1 जुलाई का दिन खास रहने वाला है. सिवनी में आयोजित होने वाले धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव हजारों किसानों को आर्थिक सौगात देंगे. कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए कोदो और कुटकी की खेती करने वाले 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी।  सरकार की ओर से यह राशि 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दी जा रही है. इसका उद्देश्य श्रीअन्न यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना है, ताकि किसान इस फसल की ओर ज्यादा आकर्षित हों और उनकी आय में भी इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि इस पहल से प्रदेश में कोदो और कुटकी के उत्पादन को नई रफ्तार मिलेगी।  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के 3,941 कोदो एवं कुटकी उत्पादक किसानों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे डीबीटी के जरिए अंतरित करेंगे।यह राशि 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। सिवनी में धान महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में धान महोत्सव का आयोजन सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. जिला प्रशासन ने आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।  कलेक्टर नेहा मीना की निगरानी में प्रशासन ने हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक की व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, बिजली और यातायात जैसी सभी जरूरी सुविधाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं. अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं ताकि कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सके।  विकास परियोजनाओं की भी देंगे सौगात धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सिर्फ किसानों को प्रोत्साहन राशि ही नहीं देंगे, बल्कि जिले को कई विकास कार्यों की सौगात भी मिलेगी. कार्यक्रम में विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा. इससे जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।  सरकार का मानना है कि किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देना भविष्य की कृषि नीति का अहम हिस्सा है. ऐसे में धान महोत्सव किसानों के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का मंच भी साबित हो सकता है।  वर्ष 2026 'कृषक कल्याण वर्ष': आयोजित होगा धान महोत्सव मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चालू वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में खरीफ सीजन की शुरुआत के मौके पर कार्यक्रम स्थल पर 'धान महोत्सव' का भी आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में अच्छी बारिश, बेहतर पैदावार और अन्नदाताओं की समृद्धि की कामना के साथ ही किसानों को आधुनिक तरीके से धान की बोनी करने का संदेश दिया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, बड़ी संख्या में जुटेंगे किसान निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ अंजली शाह, अपर कलेक्टर सीएल चनाप सहित सभी संबंधित विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी वीआईपी और आम नागरिकों के लिए पार्किंग, पेयजल, बिजली और स्वच्छता की पुख्ता व्यवस्था समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले के किसानों और आम जनता में खासा उत्साह देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की संभावना है। प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख आकर्षण होंगे—     धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र     प्राकृतिक एवं प्रमाणित बीजों की प्रदर्शनी     कस्टम हायरिंग सेंटर     प्राकृतिक एवं नैचुरल फार्मिंग मॉडल     जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद     पीएमएफएमई योजना के उत्पाद     आम की विभिन्न उन्नत किस्में     स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद     लघु वनोपज आधारित उत्पाद     स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद     पोषण आहार प्रदर्शनी     कृषिका एप की जानकारी प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कृषि नवाचारों और विकास उपलब्धियों की जानकारी किसानों एवं नागरिकों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन ने तैयारियों को दिया अंतिम रूप मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, यातायात प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के अधिकारी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।