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अमेरिका की नई योजना: 50 साल पुराना फौजी भर्ती सिस्टम अब होगा बदलने

वाशिंगटन अमेरिका अपने फौजी भर्ती के सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव दशकों में पहली बार हो रहा है और इसे वियतनाम युद्ध के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।  अभी तक अमेरिका में 18 से 25 साल के हर लड़के को खुद जाकर एक सरकारी सूची में अपना नाम दर्ज कराना पड़ता था. इसे 'सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम' में रजिस्ट्रेशन कहते हैं. लेकिन अब सरकार इस पूरी प्रोसेस को बदलने जा रही है. नए नियम के तहत यह रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाएगी, यानी लड़के को खुद कुछ नहीं करना होगा, सरकार खुद उसका नाम दर्ज कर लेगी. यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो सकता है।  सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम क्या होता है और यह क्यों जरूरी है? सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम एक अमेरिकी सरकारी व्यवस्था है. इसका सीधा मतलब है एक ऐसी सूची जिसमें उन लड़कों के नाम होते हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर फौज में बुलाया जा सकता है।  अमेरिका में अभी फौज में जाना जरूरी नहीं है, यानी कोई जबरदस्ती नहीं है. लेकिन अगर कभी देश पर बड़ा संकट आए और फौज को बहुत ज्यादा जवानों की जरूरत पड़े, तो सरकार इसी सूची से लोगों को बुला सकती है. इसे 'ड्राफ्ट' कहते हैं।  अमेरिका ने आखिरी बार ड्राफ्ट वियतनाम युद्ध के दौरान लागू किया था, जो करीब 50 साल पहले की बात है. उसके बाद से अमेरिका ने कभी किसी को जबरदस्ती फौज में नहीं बुलाया. लेकिन सूची बनाने का काम जारी रहा।  अभी का नियम यह है कि 18 साल का होने के 30 दिन के अंदर हर लड़के को खुद जाकर इस सूची में नाम दर्ज कराना होता है. अगर कोई ऐसा नहीं करता तो यह कानूनी जुर्म है. इसके लिए जुर्माना, जेल और सरकारी नौकरियों और सुविधाओं से भी हाथ धोना पड़ सकता है।  नया बदलाव क्या है और कैसे काम करेगा नए नियम के तहत अब यह रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी. सरकार खुद अपने पास मौजूद डेटा का इस्तेमाल करके योग्य लड़कों के नाम सूची में दर्ज कर लेगी।  यह बदलाव अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस ने 2026 के राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में मंजूरी दी है. इस कानून में कहा गया है कि सरकार के अलग-अलग विभागों के पास जो डेटा है, जैसे कि पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या दूसरे सरकारी रिकॉर्ड, उसे आपस में जोड़कर सीधे सेलेक्टिव सर्विस की सूची में नाम डाले जाएं।  कुछ अमेरिकी राज्यों में पहले से ही ऐसा होता है जहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते वक्त सेलेक्टिव सर्विस में रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाती है. लेकिन अब यह पूरे देश में एक जैसा होगा. सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम का कहना है कि यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो जाएगा।  यह बदलाव अभी क्यों हो रहा है? यह सवाल जरूरी है कि आखिर अमेरिका को अभी यह बदलाव क्यों करना पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया में बढ़ता तनाव. इस वक्त पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में हालात बहुत गंभीर हैं. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चल रहा है. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका पहले से ईरान पर हमले कर चुका है।  ऐसे माहौल में अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अगर कभी बड़े पैमाने पर फौज की जरूरत पड़े तो उसके पास एक पूरी और सटीक सूची हो।  पुराने सिस्टम में एक बड़ी दिक्कत यह थी कि कई लड़के खुद रजिस्ट्रेशन नहीं कराते थे, चाहे लापरवाही से या जानबूझकर. इससे सूची अधूरी रहती थी. नए सिस्टम से यह समस्या खत्म हो जाएगी क्योंकि रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी।  इसका मतलब क्या है, क्या अमेरिका फिर से जबरदस्ती फौज भर्ती करेगा यह साफ कर देना जरूरी है कि इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अभी किसी को जबरदस्ती फौज में भर्ती करेगा. अमेरिकी फौज अभी भी पूरी तरह स्वेच्छा पर आधारित है, यानी जो चाहे वो जाए. ड्राफ्ट यानी जबरदस्ती भर्ती तभी होती है जब कांग्रेस इसकी अनुमति दे और राष्ट्रपति इस पर दस्तखत करें. अभी ऐसा कोई आदेश नहीं है।  यह बदलाव सिर्फ तैयारी है, एहतियात है. सरकार चाहती है कि अगर कभी ऐसी नौबत आए तो सूची पहले से तैयार हो और कोई नाम छूटे नहीं।  लेकिन इस बदलाव ने अमेरिका में एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है. कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह आने वाले किसी बड़े युद्ध की तैयारी का संकेत है. दुनिया में जिस तरह का माहौल है, उसे देखते हुए यह बदलाव सिर्फ एक कागजी काम नहीं लग रहा। 

पति की हत्या के बाद पत्नी का ‘कातिल’ ड्रामा, रोते-रोते वायरल हुआ वीडियो

धार  मध्य प्रदेश के धार में एक पत्नी ने इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की तरह अपने पति की हत्या कर दी. दो दिन पहले हुई घटना में पुलिस के सामने रो-रोकर बताया कि घर में लुटेरे घुसे थे जिन्होंने घटना को अंजाम दिया. लेकिन महिला की चालाकी पुलिस के सामने ज्यादा देर तक नहीं चली और पुलिस की सख्ती के बाद रटे तोते की तरह उसने सब उगल दिया. प्रेमी की खातिर उसने पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी. पुलिस ने आरोपी पत्नी प्रियंका और उसके प्रेमी कमलेश को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि सह-आरोपी सुरेन्द्र अभी फरार है. मामले में रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे हैं।  परिजन ने लगाए प्रियंका पर गंभीर आरोप इधर अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद मृतक की मां लक्ष्मीबाई और बहन ज्योति सहित रिश्तेदार सदमें में हैं. मृतक की मां और बहन ने बताया कि, ''प्रियंका और देव कृष्ण का विवाह लगभग 11 वर्ष पूर्व हुआ था. बाद में 2021 में प्रियंका का गौना कर ससुराल ले आए थे, लेकिन शुरू से ही प्रियंका का व्यवहार पति और घरवालों के प्रति ठीक नहीं था. वह बात-बात पर विवाद करती थी और परेशान करती थी. साथ ही घर के लोगों से कई बार हाथापाई भी करती थी. यहां तक की प्रियंका द्वारा दिनभर मोबाइल फोन चलाने के चलते भी कई बार विवाद हुआ. वह रंग को लेकर भी भैया को ताने मारती थी।  रंग को लेकर मारती थी ताना पूछताछ में प्रियंका ने पुलिस को बताया कि, पति का रंग काला था, इसलिए वह मुझे अच्छा नहीं लगता था. पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि, प्रियंका और देवकृष्ण का 2011 में बाल विवाह हुआ था. लेकिन विदाई नहीं हुई थी. इसी बीच प्रियंका की जिंदगी में 2017 में कमलेश की एंट्री हो गई, कमलेश उसका दूर का जीजा बताया जा रहा है. जिसके बाद से वह पति देवकृष्ण से दूरी बनाने लगी थी. चूंकि शादी पहले हो चुकी थी, इसलिए 21 में ससुराल गौना कर प्रियंका को घर ले आए थे. लेकिन ससुराल वालों के साथ उसका व्यवहार अच्छा नहीं रहा।  गालियां देती थी, केस में फंसाने की धमकी भी देती थी देवकृष्ण की मां लक्ष्मीबाई ने बताया कि, ''रात में पड़ोसन का फोन आया था. कमरे में जाकर देखा तो बेटा औंधा पड़ा था. पलटाने पर वह खून से सना मिला. घर का दरवाजा खुला था और हमलावर भाग चुके थे.'' मां ने बताया कि, ''प्रियंका उन्हें बेटे से दूर रखती थी और धमकाती थी. वह गालियां देती थी और केस में फंसाने की धमकी भी देती थी. कमलेश से उसका अफेयर लंबे समय से चल रहा था और इसी वजह से घर में लगातार विवाद होता था।  धार में राजा राघुवंशी की तरह हत्याकांड धार जिले के राजोद थाना क्षेत्र के गोंदीखेड़ा चारण में हुए सनसनीखेज लूट और हत्या के मामले का पुलिस ने चंद घंटों में खुलासा कर दिया है. इस पूरे हत्याकांड की साजिश मृतक की पत्नी प्रियंका ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर रची थी. पुलिस ने पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार हैं. 7 अप्रैल की रात मिर्ची व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित की हत्या को पहले लूट की वारदात बताया गया था. पत्नी प्रियंका पुरोहित ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर पति की हत्या कर दी और उसे बंधक बनाकर सोने-चांदी के आभूषण व नगदी लूटकर फरार हो गए।  हत्या के बाद गढ़ी लूट की कहानी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर विशेष टीमों का गठन किया. एसपी मयंक अवस्थी के निर्देशन में एएसपी पारुल बेलापुरकर और एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार के मार्गदर्शन में पुलिस ने जांच शुरू की. घटनास्थल पर फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट, डॉग स्क्वॉड और साइबर टीम की मदद से बारीकी से जांच की गई. जांच के दौरान पुलिस को कई अहम तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य मिले, जिससे संदेह की दिशा मृतक की पत्नी प्रियंका की ओर गया. पूछताछ के दौरान प्रियंका ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह किया, लेकिन सख्ती और मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।  सुपारी देकर करवाई पति की हत्या प्रियंका ने बताया कि, ''उसका राजगढ़ निवासी कमलेश पुरोहित से लंबे समय से प्रेम संबंध था और पति से परेशान होकर उसने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची. आरोपी कमलेश ने अपने साथी सुरेन्द्र भाटी निवासी छडावद को 1 लाख रुपये देकर देवकृष्ण की हत्या करवाई और पूरी घटना को लूट का रूप देने की योजना बनाई गई. हत्या के बाद घर में सामान बिखेरकर लूट की झूठी कहानी रची गई, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।  एसपी मयंक अवस्थी ने बताया कि, ''शुरू में लूट की कहानी सामने आई थी, लेकिन जांच में पत्नी पर शक हुआ. पूछताछ में प्रियंका ने कबूल किया कि कमलेश के साथ मिलकर उसने हत्या की साजिश रची थी. योजना के तहत दरवाजा खुला छोड़ा गया. कमलेश और सुरेंद्र घर में घुसे और सो रहे देवकृष्ण की धारदार हथियार से हत्या कर दी. बाद में इशारा मिलने पर प्रियंका ने 10-15 मिनट बाद शोर मचाया. पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।  मृतक की मां ने बताया कि, ''प्रियंका तीन-चार दिन ही ससुराल में रहती थी और विवाद करके मायके चले जाती थी. अब घटना के बाद मां और बहन आरोपियों के खिलाफ फांसी की सजा की मांग कर न्याय दिलाने की बात कर रही हैं. फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है, इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।  वो बयान, जिसने प्रियंका पर शक पैदा किया पुलिस जांच में प्रियंका के बयान विरोधाभासी पाए गए. उसने घुसपैठ के अलग-अलग तरीके बताए, जो सही नहीं थे. घटनास्थल की स्थिति भी उसकी कहानी से मेल नहीं खाती थी. जांच में सामने आया कि कमलेश शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है. वह ढाबा चलाता था, प्रियंका से उसके संबंध 2017 से थे. साजिश के तहत सुरेंद्र को एक लाख रुपए में हत्या का जिम्मा दिया गया था. 50 … Read more

2200 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट से गाजियाबाद बनेगा यूपी का इंटीग्रेटेड अर्बन हब

2200 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट से यूपी का प्रवेश द्वार गाजियाबाद बनेगा इंटीग्रेटेड अर्बन हब पश्चिमी यूपी को पहली बार इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की सौगात, जल्द हो सकता है शिलान्यास विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम के चारो तरफ बसेगी एरोसिटी, बढ़ेगा पर्यटन व रोजगार आधुनिक शॉपिंग मॉल, रिटेल जोन, हाईटेक बिजनेस हब और बनेंगे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर बनेगा प्रमुख आकर्षण, स्पोर्ट्स एकेडमी, स्मार्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और ग्रीन स्पेस की रहेगी सुविधा लखनऊ उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार गाजियाबाद अब एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है। करीब 2200 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम और एरोसिटी प्रोजेक्ट न केवल इस शहर की पहचान बदलने जा रहा है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सौगात मिलने जा रही है। इसके साथ ही यह क्षेत्र इतने बड़े स्तर के इंटीग्रेटेड अर्बन डेवलपमेंट मॉडल का हिस्सा बनेगा, जिससे गाजियाबाद प्रदेश का बड़ा पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा। इसके साथ ही यहां लाखों की संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से टर्निंग प्वाइंट साबित होंगे। सबसे अहम बात यह है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास जल्द ही होने की संभावना है, जिससे वर्षों से अटकी योजना अब जमीन पर उतरने के करीब पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन पर आधारित यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद को स्पोर्ट्स, टूरिज्म और हाईटेक अर्बन डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र बनाएगा। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर प्रमुख आकर्षण रहेगा। 417 एकड़ में खेल, व्यापार, पर्यटन और आधुनिक जीवनशैली का होगा समेकित विकास गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी नंद किशोर कलाल ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन (मोर्टी क्षेत्र) में प्रस्तावित इस योजना के तहत 37 एकड़ में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम विकसित किया जाएगा, जबकि इसके आसपास 380 एकड़ में लगभग 1800 करोड़ रुपये की लागत से एरोसिटी टाउनशिप बसाई जाएगी। दोनों को मिलाकर एक ऐसा इंटीग्रेटेड अर्बन हब तैयार किया जाएगा, जहां खेल, व्यापार, पर्यटन और आधुनिक जीवनशैली का समेकित विकास होगा। 2014-15 में बनी थी योजना, पहले की सरकार में नहीं हो सका कोई काम दरअसल, इस परियोजना की रूपरेखा 2014-15 में तैयार हुई थी, लेकिन लंबे समय तक यह आगे नहीं बढ़ सकी। उस दौर में विकास की गति अपेक्षित नहीं रही और गाजियाबाद को उसकी क्षमता के अनुरूप पहचान नहीं मिल पाई। पहले की सरकार के दौरान रही सुस्ती के कारण यह प्रोजेक्ट वर्षों तक ठहराव में रहा, लेकिन अब योगी सरकार में इसे प्राथमिकता में रखते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। पश्चिमी यूपी पहली बार अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों की करेगा मेजबानी करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं वाला होगा। इसमें करीब 30,000 से अधिक दर्शकों की क्षमता, आधुनिक मीडिया सेंटर और हाईटेक लाइटिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी, जो इसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएंगी। इस स्टेडियम के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पहली बार बड़े अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों की मेजबानी का अवसर मिलेगा। काम करने, रहने और मनोरंजन के लिए बनेगा संपूर्ण डेस्टिनेशन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी नंद किशोर कलाल ने बताया कि स्टेडियम के चारो ओर विकसित होने वाली एरोसिटी इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी ताकत होगी। इसमें बड़े होटल, लक्जरी रिजॉर्ट्स, आधुनिक शॉपिंग मॉल, रिटेल जोन, हाई-टेक बिजनेस हब, ऑफिस स्पेस और एंटरटेनमेंट सेंटर विकसित किए जाएंगे। एयरपोर्ट के नजदीक होने के कारण यह क्षेत्र देश-विदेश के पर्यटकों और निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बनेगा। यह परियोजना सिर्फ स्टेडियम या टाउनशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि एक नए अर्बन मॉडल के रूप में विकसित की जा रही है। इसमें स्पोर्ट्स एकेडमी, स्मार्ट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स, ग्रीन स्पेस और आउटडोर खेल सुविधाएं भी शामिल होंगी, जिससे यह क्षेत्र रहने, काम करने और मनोरंजन के लिए एक संपूर्ण डेस्टिनेशन बनेगा। होटल, रिटेल और सर्विस सेक्टर तक बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, बढ़ेगा निवेश गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) बोर्ड से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे यूपी क्रिकेट एसोसिएशन के साथ जॉइंट वेंचर मॉडल पर विकसित किया जाएगा। सभी सुविधाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है, ताकि यह प्रोजेक्ट भविष्य में निवेश और विकास का बड़ा केंद्र बन सके। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने से गाजियाबाद और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को व्यापक आर्थिक लाभ मिलेगा। निर्माण से लेकर होटल, रिटेल और सर्विस सेक्टर तक बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, निवेश बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना आने वाले समय में पश्चिमी यूपी के विकास की दिशा और गति दोनों तय करती नजर आएगी।

यूएनएफपीए एंबेसेडर कृति सेनन ने विद्यार्थियों से किया संवाद, जेंडर इक्वैलिटी का दिया संदेश

भोपाल.  यूएनएफपीए इंडिया की गुडविल एंबेसेडर एवं फिल्म अभिनेत्री सुकृति सेनन गुरुवार को भोपाल के शिवाजी नगर स्थित शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय का भ्रमण किया। यहां पर उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद भी किया। सुसेनन ने विद्यार्थियों को जेंडर इक्वैलिटी के प्रति जागरूक किया। साथ ही समानता एवं परस्पर सम्मान के लिए प्रेरित भी किया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नई शिक्षा नीति के अनुरूप विकसित जीवन कौशल शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत ‘उमंग स्कूल हेल्थ एवं वेलनेस कार्यक्रम’, ‘उज्ज्वल बदलाव हमसे है’ और ‘सशक्त’ जैसे नवाचार किये जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विशेष रूप से बालिकाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर सशक्त बनाना है। इन सभी नवाचारों को प्रदेश के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूलों में प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। सुकृति सेनन ने ‘उमंग’ कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रम को विस्तार से समझा। उन्होंने प्रदेश के 12 जिलों से आए "हेल्थ एंड वेलनेस" एंबेसडर एवं विद्यार्थियों से संवाद कर अनुभवों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग एवं यूएनएफपीए के बीच बेहतर समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सामाजिक बदलाव लाने की दिशा में की जा रही पहलें अत्यंत सराहनीय हैं। ‘उज्ज्वल बदलाव हमसे है’ कार्यक्रम में उन्होंने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अब स्कूलों में ही विद्यार्थियों को छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट और दहेज जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध जागरूक करने के प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। सुकृति ने स्कूल शिक्षा विभाग की अपर परियोजना संचालक (सेकेंडरी एजुकेशन) श्रीमती नंदा बलवे कुशरे से भी मुलाकात की। उन्होंने नवीन शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होते ही विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें और साइकिल उपलब्ध कराए जाने जैसी व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों से जुड़े अनुभव भी साझा किए गए। इन अनुभवों को जानने के बाद कृति सेनन ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति इन शैक्षिक पहलुओं को अपने जीवन में अपनाए, तो समाज में व्याप्त कई बुराइयों और कुरीतियों पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सकती है। लोक शिक्षण संचालनालय के डिप्टी डायरेक्टर महेश जैन, प्राचार्य सुधाकर पाराशर, यूएनएफपीए से चीफ पॉलिसी एंड पार्टनरशिप जयदीप विश्वास, स्टेट हेड सुनील जैकब तथा स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर अनुराग सोनवलकर उपस्थित रहे।  

आर्मी चीफ का बयान: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में नमाज के वक्त नहीं करते थे हमला, सबका मालिक एक

नई दिल्ली पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों के मासूम पर्यटकों पर किए गए हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर सीमा पार पल रहे आतंकियों के ठिकाने नेस्तनाबूद कर दिए। 'ऑपरेसन सिंदूर' को लेकर आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक इंटरव्यू में कई ऐसी बातें बताई जिससे भारतीय सेना की बहादुरी के साथ ही उसकी इंसानियत भी नजर आती है। जनरल द्विवेदी ने कहा, 'जब भी हमें अपने टारगेट पर हमला होता था तो यह समय कुछ भी हो सकता था लेकिन इतना ध्यान जरूर रखा जाता था कि यह नमाज का वक्त ना हो। अगर आतंकी कैंप में भी लोग नमाज पढ़ रहे हों तो हमला ना किया जाए। क्योंकि सबका मालिक एक है।' आर्मी चीफ ने आगे कहा, भारतीय सेना को अगर पता चलता था कि नमाज हो रही है तो हमले का समय बदल दिया जाता था। उन्होंने कहा कि भले ही स्थिति युद्द वाली रही हो लेकिन भारतीय सेना ने संयम बरता और दुश्मनों की भी इबादत का सम्मान किया। बदल गया है युद्ध इससे पहले रण संवाद मंच को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर, विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की दिशा में भारत की प्रगति का सबसे शक्तिशाली साधन था। लेकिन हमें विभिन्न क्षेत्रों का एकीकरण और तालमेल का लक्ष्य प्राप्त करना होगा।’ सेना प्रमुख ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद गठित युद्ध सूचना संगठन और मनोवैज्ञानिक रक्षा प्रभाग के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ''हमारे प्रयासों का 15 प्रतिशत हिस्सा दुष्प्रचार अभियान से निपटने पर केंद्रित था।' हालांकि, उन्होंने चेताया कि प्रमुख चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, विशेष रूप से रणनीतिक, परिचालन और सामरिक स्तरों पर संचालन में समन्वय स्थापित करने और 'हाइब्रिड या ग्रे-ज़ोन' युद्ध के बढ़ते प्रचलन से निपटने में। उन्होंने कहा, 'ये आमतौर पर पारंपरिक सैन्य सीमा से नीचे होते हैं, जिनका उद्देश्य दुश्मन की कमजोरियों का फायदा उठाना होता है।' थलसेना प्रमुख ने कहा कि एमडीओ की उनकी कल्पना ऐसी नहीं है जिसमें सेना के छह अलग अलग क्षेत्र अलग-अलग समानांतर काम करें, बल्कि सभी ''बदलते हालात के हिसाब से लगातार आपसी तालमेल में हों, जहां परिस्थिति के अनुसार महत्व बदलता रहे और नेतृत्व भी बदलता रहे।'' उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल भौगोलिक सीमाओं या किसी एक सेना की प्रधानता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विभिन्न क्षेत्र, हितधारकों और संघर्ष के अलग-अलग स्तर के बीच लगातार होने वाले आपसी समन्वय से परिभाषित होता है। युद्धक्षेत्र में हो रहे बदलावों पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि एमडीओ के कारण युद्ध का स्वरूप ऐसा हो गया है, जहां अलग-अलग स्तर और दिशाओं में एक साथ ऑपरेशन चलते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कमांडरों को सामरिक से लेकर रणनीतिक स्तर तक, विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी विकसित करनी चाहिए। एकीकरण के परिचालन महत्व को रेखांकित करते हुए, जनरल द्विवेदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बताया जनरल द्विवेदी ने कहा, ''यह जमीनी खुफिया नेटवर्क, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) से मिली जानकारियों का मेल था जिसने थल सेना और वायु सेना की संयुक्त कार्रवाई को लक्ष्य निर्धारित करने में मदद की, वहीं नौसेना की तैनाती में बदलाव ने रणनीतिक आकलन को आकार दिया। किसी एक क्षेत्र ने इस अभियान का फैसला नहीं किया।''जनरल द्विवेदी ने एकीकृत युद्ध समूहों, रुद्र ब्रिगेड, ड्रोन इकाइयों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संरचनाओं और साइबर ऑपरेशन नोड्स के संचालन सहित कई संरचनात्मक सुधारों का भी जिक्र किया।

बंगाल में UCC और 45 दिन में सातवां वेतन, महिलाओं को 3000 रुपये की सहायता… बीजेपी का मेनिफेस्टो जारी किया अमित शाह ने

कोलकाता भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए संकल्प पत्र (घोषणापत्र) जारी कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी का संकल्प पत्र जारी किया. इस मौके पर अमित शाह ने कहा- ‘पिछला 15 साल बंगाल की जनता के लिए डराने वाले रहे. कम्युनिष्ट शाषण से मुक्ति के लिए बंगाल की जनता ने ममता दीदी को सरकार सौंपा था. पांच साल कम पड़े ऐसा कहकर दूसरा मेंडेट भी प्राप्त किया. इसके बाद अपने सिंडिकेट, गुंडे और घुसपैठिए की मदद से तीसरी बार भी बहुमत हासिल किया. मगर इन 15 साल में बंगाल की जनता ने जिन आशाओं के साथ सत्ता सौंपी थी वो भयभित है, निराश है जनता और मन से परिवर्तन चाहती है।  अमित शाह ने आगे कहा कि पिछले 15 साल में बीजेपी ने रचनात्मक विपक्ष के रूप में मान्यता हासिल की है. आज हम पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में काम कर रहे हैं. इन्हीं 10 सालों में पूरे देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकाभिमुक्त शासन कैसे हो सकता है इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित किया है. ना केवल देश की सारी समस्याओं का निराकरण करने में सफलता प्राप्त करना. इसके अलावा पूरी दुनिया में विकास की रेस में पिछड़े देश को सारे घाटे की भरपाई करते हुए फ्रंट रनर के रूप में स्थापित करने का काम नरेंद्र मोदी ने किया है।  शाह ने आगे कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामख्या तक फैले देश में हर तबके, हर वर्ग, हर जाति के लोगों की सभी आकांक्षाओं को संयोज कर, एक मजबूत शिक्षित और विकसित भारत का रूप देश की जनता के सामने रखा है. इसके लिए हमने 12 साल में अत्यंत प्रयास किया है. पिछले दिनों हमने बंगाल की जनता के सामने चार्चशीट रखी थी, जो इस बात की परिचायक थी कि ममता बनर्जी की सरकार को लेकर पूरे बंगाल में घोर निराशा व्याप्त है. वहीं बीजेपी का संकल्प पत्र भरोसे की शपथ है. हमारा संकल्प पत्र बंगाल का विकसित बनाने का रोडमैप है. बंगाली नये वर्ष के दिन इस संकल्प के हमारी यात्रा प्रचार के जरिए शुरू होगी और गुरुदेव की जन्म जयंती के आसपास ही भय के कोहरे से बाहर आकर भरोसे का शासन बंगाल में प्रस्थापित करेगी. हमें पूरा विश्वास है कि बंगाल की जनता हमें पांच साल सेवा करने का मौका देगी।  बीजेपी के संकल्प पत्र की जरूरी घोषणाएं- :     हमारी सरकार घुसपैठ के प्रति जीरो टॉलरेंस के साथ आगे बढ़ेगी. मैं बंगाल की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि एक बार बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाइए हम डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट पॉलिसी के तहत चुन-चुनकर एक-एक घुसपैठिए को बंगाल के बाहर निकालने का काम करेंगे.     सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशन भागियों के लिए डीए सुनिश्चित किया जाएगा. 45 दिन के अंदर 7वां वेतन आयोग लागू किया जाएगा.     मध्यम वर्ग, लोअर मिडिल क्लास और गरीब में महिलाओं की हालत बहुत दयनीय है. बीजेपी की सरकार बनी तो हर माता-बहन के बैंक खाते में हर महीने एक से पांच तारीख तक 3 हजार रुपये ट्रांसफर करेगी.     नरेंद्र मोदी ढेर सारी योजनाएं जिसमें आयुष्मान भारत समेत तमाम योजनाओं को बंगाल में लागू करेंगे.     महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए मुफ्त एनबीटी टीकाकरण, कैंसर की स्क्रिनिंग, हर प्रसूता को इंट्यूशनल डिलिवरी का फायदा हम सुनिश्चत करेंगे.     हम छह माह के अंदर पश्चिम बंगाल के अंदर UCC कॉमन सिविल कोड लागू करेंगे. हम बंगाल में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून लागू करेंगे.     हम सुनिश्चित करेंगे कि बंगाल सीमा के माध्यम से भारत के बाहर एक भी गौर तस्करी ना हो.     एक करोड़ स्वरोजागर और रोजगार पैदा करेंगे. इसके लिए इंडस्ट्री लगाएंगे, स्टॉर्टअप को बढ़ावा देंगे.     बेरोजगार युवाओं को 3 हजार रुपये मासिक सहायता दी जाएगी.     टीएमसी के 15 साल के भ्रष्टाचार को लेकर श्वेतपत्र जारी करेंगे. भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों में भेजेंगे.     जितनी भी राजनीतिक हिंसा हुई है, चाहे वो किसी भी दल के खिलाफ हुई हों, उसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में कमिशन बनाकर सारे केस को त्वरित गति से अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।      काननू और व्यवस्था के ऊपर एक श्वेतपत्र जारी करेंगे. इसके दो हिस्से होंगे. पहले पार्ट में पिछले 15 साल में किस प्रकार से कानून व्यवस्था को कैसे पाताल लोक तक गिराया गया. दूसरे पार्ट में कानून व्यवस्थ को सुनिश्चित करने का तरीका बताएंगे.     तीन श्वेतपत्र भ्रष्टाचार के खिलाफ, राजनीतिक हिंसा के खिलाफ और कानून और व्यवस्था को रीस्टोर करने के लिए तीनों श्वेतपत्र बंगाल की बहुत सारी समस्याओं का एक साथ समाधान करेंगे. ऐसा बीजेपी को भरोसा है।      महिला सुरक्षा के लिए बंगाल में ही पुलिस बटालियन, दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड और आत्म रक्षा प्रशिक्षण के लिए एक अलग से स्क्वाड बनाया जाएगा।      धान, आलू और आम की खेती के लिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल पाए इसके लिए एक योजना लेकर आएंगे. हर किसान का एक-एक दाना धान बंगाल सरकार 3100 रुपये की दर से खरीद लेगी, जिससे धान किसानों को सस्ते दरों पर अपनी फसल ना बेचनी पड़े.     बंगाल की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए पहले सौ दिनों में एक रोडमैप लेकर आएंगे.     बंगाल को ब्लयू इकोनॉमी का प्रमुख निर्यातक केंद्र बनाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए एक योजना दी जाएगी.     पुराने चाय बागानों को पुर्नजीवन और दार्जलिंग टी ब्रांड को विश्व प्रसिद्ध बनाने के लिए हम एक कमिशन बनाएंगे. यह कमिशन चाय बागानों के श्रमिक, चाय के उचित मूल्य और विश्व के बाजार में चाय के निर्णात की भावनाओं को तलाशेगा. यह रिपोर्ट एक साल में सरकार को सौंपा जाएगा, ताकि बाकी बचे चार साल में चाय बागानों को खुशहाल बनाया जा सके.     जूट उद्योग के आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार की योजनाओं को हम बंगाल में नीचे तक लागू करवाएंगे.     उत्तर बंगाल के अलग-अलग जिलों में एम्स, आईआईएम, आईआईटी और फैशन डिजाइनिंग के संस्थान खोले जाएंगे.  

नक्सल उन्मूलन के बाद बालाघाट जिले में तेज करें विकास की गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सल उन्मूलन के बाद विकास की गति को और तेज किया जाएं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा दिए गए निर्देश एवं प्रचार की गई कार्य योजना के फलस्वरूप प्रदेश से नक्सल तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण में सफलता मिली है। नक्सलवाद की समस्या से बरसों प्रभावित रहे बालाघाट जिले सहित अन्य प्रभावित स्थानों पर अब तीव्र गति से कार्य करने की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश सरकार विकास कार्यों की गति तेज करने को प्राथमिकता दे रही है। जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को भी विभिन्न महोत्सवों से मंच देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को समत्व भवन में आगामी माह बालाघाट में होने वाले जनजातीय महोत्सव के संबंध में विचार-विमर्श हुआ। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव आदि बैठक में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय महोत्सव में सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के साथ ही विभिन्न विभाग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिविर आयोजित करें। धरती आबा अभियान में हितग्राहियों को लाभान्वित करने और स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र में मेगा स्वास्थ्य शिविर और सिकल सेल स्क्रीनिंग का कार्य किया जाए। शिक्षा सुविधाओं के विस्तार, महिलाओं और बच्चों के कल्याण, रोजगार प्रदान करने, दिव्यांग नागरिकों को हित लाभ प्रदान करने और पूर्व वर्षों में नक्सल गतिविधियों के कारण प्रभावित हुए परिवारों की आवश्यक सहायता के लिए कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "एक बगिया मां के नाम" कार्यक्रम अंतर्गत गतिविधियों के आयोजन, आराधना स्थलों पर सुविधाओं के विकास के कार्य भी किए जाएं। जनजातीय संस्कृति विशेषकर बैगा समुदाय से जुड़े लोक नृत्यों, खेतों में बोवनी के कार्य से पूर्व आयोजित किए जाने वाले बिदरी, बीज पंडूम और बड़ा देव पूजा के कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। महोत्सव में जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बोरा दौड़, मटका रेस, तीरंदाजी स्पर्धाएं भी होंगी। बैगा महिलाओं की विशिष्ट गोदाना कला के प्रदर्शन और कार्यशाला के साथ कोदो कुटकी और महुआ आदि से बने पारम्परिक व्यंजनों के फूड स्टॉल भी लगाए जाएंगे। पारम्परिक जड़ी-बूटियों की जानकारों और औषधीय ज्ञान रखने वालों का सम्मेलन भी प्रस्तावित है। स्व-सहायता समूहों के सदस्यों द्वारा निर्मित उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे। बालाघाट के साथ ही निकटवर्ती जिलों और छत्तीसगढ़ से भी जनजातीय समाज इस महोत्सव में भागीदारी करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय महोत्सव में होने जाने वाली गतिविधियों और विभागों की सहभागिता की जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि जनजातीय महोत्सव में स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, उच्च शिक्षा, वन, महिला एवं बाल विकास, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, नवीन और नवकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास एवं रोजगार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम, सहकारिता, संस्कृति, पर्यटन, खनिज साधन, गृह और जनसम्पर्क विभाग द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया जाएगा।  

एक वक्त था जब ईसीजी भी नहीं था, आज वही प्रदेश जीवन की रक्षा कर रहा है

एक रात, जब ईसीजी भी नसीब नहीं था… आज वही प्रदेश जीवन बचा रहा डॉ. शरत चंद्रा ने सुनाया 2005 का अनुभव, बताया-कैसे बदली उत्तर प्रदेश में हृदय के उपचार की तस्वीर लखनऊ सीएसआई के एनआईसी-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीड़ भरे सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का भी था जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमाओं को बहुत करीब से महसूस किया था। उन्होंने वर्ष 2005 की एक घटना साझा की।  उन्होंने बताया कि दिसंबर की एक रात करीब 10 बजे चंदौसी स्थित उनके घर से पिता का फोन आया कि बेटा सीने में दर्द हो रहा है, क्या करूं? एक डॉक्टर बेटे के रूप में उन्होंने सहज ही कहा- पापा, कहीं पास में जाकर ईसीजी करा लीजिए। पिता ने कहा कि इस समय रात में ईसीजी कहां हो पाएगा, सुबह ही कराएंगे। डॉ. चंद्रा ने कहा कि उस रात सिर्फ मेरे पिता ही नहीं, मैं भी जागता रहा। अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन वह रात उनके मन में एक सवाल छोड़ गई कि क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है?  उन्होंने कहा कि आज, दो दशक बाद, उसी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता। ‘हृदय सेतु’ जैसे प्रयासों ने बड़े संस्थानों जैसे एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को जिला अस्पतालों से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, वहीं अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध है। अब मरीज को केवल दूरी नहीं, बल्कि समय से भी लड़ना नहीं पड़ता।  अपने संबोधन के अंत में डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, यह भरोसे का बदलाव है। एक समय था जब रात में ईसीजी भी संभव नहीं था, और आज वही प्रदेश जीवन बचाने के लिए हर पल तैयार खड़ा है। यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, यही उत्तम प्रदेश है।

स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला – स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को नई दिशा देगा वाइस चांसलर मीट-2026: CM साय

स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला – स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को नई दिशा देगा वाइस चांसलर मीट-2026 : मुख्यमंत्री श्रीविष्णुदेव साय आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक औषधीय ज्ञान के संगम से सशक्त होगा छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य मॉडल: मुख्यमंत्री साय मेडिसिटी हब और नए मेडिकल कॉलेज से बदलेगा प्रदेश का स्वास्थ्य परिदृश्य सुकमा में “मुख्यमंत्री बस्तर स्वास्थ्य योजना” का होगा शुभारम्भ रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित ऑल इंडिया हेल्थ साइंसेज वाइस चांसलर मीट-2026 को संबोधित करते हुए इसे प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर देशभर से आए कुलपतियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पहली बार आयोजित इस एकदिवसीय सम्मेलन के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में नवाचारों का व्यापक आदान-प्रदान होगा, जो आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मंच से निकले विचार न केवल नीति निर्माण को दिशा देंगे, बल्कि आमजन तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी सहायक होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज, 14 नर्सिंग कॉलेज तथा एक होम्योपैथी कॉलेज का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला हैं और इसी दृष्टिकोण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक की सहायता मिलना उनके लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्रामीणों को कर्ज लेने या जमीन बेचने जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है और स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बढ़ा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियां, जो पहले सीमित वर्ग तक मानी जाती थीं, अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रही हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा “आरोग्य मंदिर” जैसी पहल की जा रही है, जिसका उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश में तीन आयुर्वेदिक एम्स स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है, जो औषधीय पौधों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। इसी संदर्भ में उन्होंने हेमचंद मांझी को आयुर्वेद के क्षेत्र में पद्मसम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पास कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के तेजी से विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र में मेडिसिटी हब विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5000 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेशवासियों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके कार्यकाल में रायपुर में एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों का शुभारंभ किया गया है। भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे महान शिक्षा केंद्रों का धनी रहा है और चिकित्सा व अध्यात्म दोनों क्षेत्रों में विश्व गुरु के रूप में स्थापित रहा है। आयुर्वेद को ऋग्वेद का उपवेद बताते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का भाव सदैव विद्यमान रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने तीन प्रकार के टीकों का विकास कर न केवल अपने 140 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि अन्य देशों की भी सहायता कर वैश्विक स्तर पर मानवता का परिचय दिया। मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सकों को समाज में भगवान के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थान बताते हुए उनसे सेवा भाव के साथ संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में नए मार्ग प्रशस्त करेगा और इसके सकारात्मक परिणाम आम जनता तक पहुंचेंगे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र की अनेक चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में नवाचार के तहत हिंदी माध्यम की सुविधा प्रारंभ की गई है तथा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी होंगी। उन्होंने चिकित्सकों से सेवा भाव और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 5 नए मेडिकल कॉलेज, 14 नर्सिंग कॉलेज और 2 मानसिक अस्पताल सहित स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है तथा 275 अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 13 अप्रैल से सुकमा में मुख्यमंत्री बस्तर स्वास्थ्य योजना के तहत 36 लाख लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग और आयुष्मान कार्ड निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि नक्सल समस्या के समाप्त होने के बाद छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की दिशा में अग्रसर होगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव आयुष मंत्रालय को भेजे जाएंगे और यह आयोजन स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में प्रेरक भूमिका निभाएगा। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर विधायक इंद्र कुमार साहू, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विशेष आमंत्रित अतिथि डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा, भारतीय स्वास्थ्य विद्यापीठ के अध्यक्ष डॉ. राजीव सूद तथा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।

वृंदावन में यमुना नदी में नाव पलटने से 6 श्रद्धालुओं की मौत, कई लापता; CM योगी ने हादसे पर जताया संज्ञान, रेस्क्यू के निर्देश

वृंदावन  उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बड़ा हादसा हो गया. यहां श्रद्धालुओं से भरी एक नाव यमुना नदी में पलट गई. इस दुर्घटना में 6 लोगों की मौत की पुष्टि जिला प्रशासन ने की है, जबकि 14 से अधिक लोगों को बचा लिया गया. हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए तुरंत रेस्क्यू अभियान तेज करने के निर्देश दिए. प्रशासन और राहत टीमें मौके पर लगातार बचाव कार्य में जुटी हैं।  जानकारी के अनुसार, पंजाब से आए श्रद्धालु यमुना नदी में घूमने के लिए मोटर बोट पर सवार थे, लेकिन अचानक बोट असंतुलित होकर पलट गई. इसमें सभी लोग नदी में गिर गए।  दिल को झकझोर देने वाली है ये घटना : सीएम योगी सीएम योगी ने एक्स पर लिखा कि जनपद मथुरा में नाव पलटने से हुई मौतें बेहद दुखद और दिल को झकझोर देने वाली हैं. उन्होंने कहा कि इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं. उन्होंने अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य तेज करने और घायलों का बेहतर इलाज कराने के निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।  हादसा दोपहर पौने 3 बजे केशी घाट पर हुआ, जो श्रीबांके बिहार मंदिर से करीब ढाई किमी की दूरी पर है. नाव पीपा पुल से टकराने के बाद नदी में पलट गई. स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की टीमें करीब 50 स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में लापता लोगों की तलाश कर रही हैं. बताया जा रहा है कि तेज हवा के कारण नाव पर नियंत्रण नहीं रहा और वह पीपा पुल से टकराकर यमुना नदी में पलट गई।  मथुरा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने कहा, 'केशी घाट के पास यमुना नदी के एक हिस्से में नाव डूब गई है. अब तक 22 लोगों को नदी से बाहर निकाला जा चुका है. बचाए गए लोगों को एम्बुलेंस और पुलिस वाहन (पीआरवी) की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. हम फिलहाल स्थिति का जायजा ले रहे हैं ताकि पता चल सके कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लोगों की जान गई है… यहां एक पोंटून पुल है. चूंकि यह पुल जर्जर हालत में था, इसलिए एक एजेंसी पोंटूनों की मरम्मत का काम कर रही थी. आशंका है कि यह दुर्घटना इसी मरम्मत कार्य के दौरान हुई होगी।