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योगी सरकार ने कौशल विकास मिशन की शुरुआत की, पहले दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्य तय किए गए

योगी सरकार में कौशल विकास मिशन का बड़ा कदम, पहले दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्य आवंटित पहली बार ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक कर प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन किया गया प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई डिजिटल इम्पैनलमेंट और ‘स्मार्ट टॉप-अप’ से बढ़ेगी गुणवत्ता व जवाबदेही एआई आधारित प्रशिक्षण और समावेशी प्राथमिकता से युवाओं को मिलेगा बेहतर रोजगार अवसर लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश में कौशल विकास को नई गति देते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्यों का आवंटन 957 ट्रेनिंग पार्टनर्स को जारी कर दिया। इस वर्ष पहली बार ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक कर प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन किया गया। इसी आधार पर प्राइवेट, इंडस्ट्रियल और सरकारी पार्टनर्स को लक्ष्य आवंटित किए गए, जिससे जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित हुई है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर इस प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया गया है। प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। साथ ही ‘स्मार्ट टॉप-अप’ व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थान बैच समाप्ति से पहले अतिरिक्त लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। अब इम्पैनलमेंट, लक्ष्य आवंटन और भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन होंगे। 23 फरवरी 2026 के नए नियमों के तहत संस्थाओं को उनकी ग्रेडिंग और प्रशिक्षण गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि एआई सहित आधुनिक कौशल प्रशिक्षण, हर वर्ग को प्राथमिकता प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ‘एआई फॉर ऑल’, सॉफ्ट स्किल्स, लाइव क्लास और इंडस्ट्रियल विजिट को अनिवार्य किया गया है। साथ ही 33% महिलाओं, 5% दिव्यांगजनों और वंचित वर्ग के युवाओं को प्राथमिकता देना सुनिश्चित किया गया है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। मिशन अब ‘क्वांटिटी’ से ‘क्वालिटी’ की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल पारदर्शिता और समयबद्ध रणनीति से युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।  विगत वर्ष जहां ट्रेनिंग पार्टनर्स को पूरे वर्ष के लिए 1.10 लाख प्रशिक्षणार्थियों का एकमुश्त लक्ष्य आवंटित किया गया था, वहीं इस वर्ष रणनीति में सुधार करते क्वार्टरली यानी कि तीन महीने में लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्रथम तीन माह के लिए 99,075 प्रशिक्षणार्थियों का लक्ष्य जारी किया गया है। इसके अंतर्गत अच्छा प्रदर्शन करने वाले ट्रेनिंग पार्टनर्स को उनकी क्षमता के अनुसार 'टॉप-अप' (अतिरिक्त लक्ष्य) की विशेष सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

हाईकोर्ट सख्त: जग्गी केस में अमित जोगी को तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करना होगा

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया है। इससे पहले कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में रीओपन किया गया। मामले की जांच करने वाली एजेंसी सीबीआई ने कोर्ट में 11 हजार पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी। इसी विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर अमित जोगी पर भी चार्ज लगाए गए थे और आज अंतिम सुनवाई के बाद उन्हें दोषी माना गया है। अब उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करना होगा, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान स्व. रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश थी। सीबीआई ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या से जुड़े पर्याप्त सबूत शामिल हैं। इधर हाईकोर्ट के फैसले पर अमित जोगी ने कहा कि कोर्ट ने बिना पूरी सुनवाई का मौका दिए दोषी करार दिया, जो उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। 2003 में हुई थी एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। जानिए कौन थे रामावतार जग्गी कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था। ये पाए गए थे दोषी जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे। मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है वहीं इस मामले में अमित जोगी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि आज उच्च न्यायालय ने बिना सुनवाई का अवसर दिए मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया। मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है। अमित जोगी ने कहा, अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है। मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा। मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूं। मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूं। सत्य की जीत अवश्य होगी। प्रिय मित्रों और शुभचिंतकों 🙏 आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए। मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।… – 𝐀𝐦𝐢𝐭 𝐀𝐣𝐢𝐭 𝐉𝐨𝐠𝐢 (@AmitJogi) April 2, 202

MP-MLA कोर्ट का अहम फैसला: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा

दतिया   मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा चुनाव में शिकस्त देकर दतिया सीट से विधायक चुने गए राजेंद्र भारती को एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष बेंच ने आज 3 साल की सजा सुना दी है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने 25 साल पुराने भूमि विकास सहकारी बैंक घोटाले मामले में राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया है। साथ ही, इसपर फैसला देते हुए 3सालर्ष की जेल की सजा और जुर्माना लगाया है। आपको बता दें कि, एक दिन पहले बुधवार को कोर्ट ने उन्हें धोखाधड़ी केस में दोषी करार दे दिया था, जिसके बाद फैसला आज के लिए सुरक्षित रखा गया था और आज इसपर विधायक को सजा सुनाई है। कोर्ट ने राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश, 420 धोखाधड़ी, 467, 468 जालसाजी और 471 जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करने के तहत दोषी ठहराया है। इसी मामले में सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी माना गया है। क्या है मामला ? आपको बता दें कि, विधायक को हुई सजा से जुड़ा ये मामला दतिया जिले में स्थित भूमि विकास सहकारी बैंक से जुड़ा है। मामला उस समय का है, जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। आरोप है कि, उन्होंने बैंक लिपिक के साथ मिलकर 10 लाख रुपए की एफडी में हेरफेर किया था। एफडी की अवधि और दस्तावेजों में बदलाव कर वो तय समय से अधिक समय तक ऊंची ब्याज दर पर पैसा निकालते रहे थे। सजा के बाद भी राहत खास बात ये है कि, इस मामले में एमपी एमएलए कोर्ट ने जहां दोषी करार देते हुए उन्हें 3 साल की सजा सुनाई तो वहीं दूसरी तरफ साथ में जमानत भी दे दी है। कोर्ट की इस राहत से उन्हें तुरंत ही जेल नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि, कानूनी तौर पर 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता रद्द करने का नियम है। ऐसे में अब कोर्ट से सजा का फैसला आने के बाद उनकी विधायकी पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकिस अब भी राजेंद्र भारती के पास कुछ विकल्प मौजूद हैं, जिसके आदार पर वो अपनी सजा को चुनौती दे सकते हैं। कांग्रेस का हमला एमपी एमएलए कोर्ट के फैसला आने के बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने राजेन्द्र भारती केस को भाजपा का षणयंत्र बताया है। साथ ही, उम्मीद जताते हुए कहा कि, जल्द ही उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिल जाएगी। खास बातें -कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा और जुर्माना भी लगाया। -25 साल पुराने केस में एमपी एमएलए कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला। -सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को जमानत भी दी। -60 दिन के भीतर अपर कोर्ट में अपील करने का मौका भी मिला। -पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा चुनाव में शिकस्त देकर चुने गए विधायक।

औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता और निगरानी के लिए ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली होगी लागू

औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता एवं प्रभावी निगरानी के लिए ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली होगी लागू यूपीसीडा की 50वीं बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी, औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति ड्रोन मॉनिटरिंग, ई-ऑक्शन, भूमि बैंक विस्तार और तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर अहम फैसले तृतीय पक्ष निरीक्षण और ड्रोन सिस्टम से गुणवत्ता व पारदर्शिता होगी सुनिश्चित 75% आवंटन के बाद 25% भूमि ई-ऑक्शन से, निवेशकों को मिलेगा अवसर सहारनपुर-बदायूं समेत कई जिलों में कनेक्टिविटी के साथ औद्योगिक विस्तार को स्वीकृति लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की 50वीं बोर्ड बैठक लोक भवन, लखनऊ में अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप आयोजित इस बैठक में औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण एवं निवेश प्रोत्साहन से जुड़े कुल 34 प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर प्रमुख प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में विकास एवं अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु तृतीय पक्ष निरीक्षण (TPIA) एजेंसी के चयन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया, जिसके माध्यम से सिविल, विद्युत एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी। कम्पिल कताई मिल, मऊ आइमा, बहादुरगंज, सलेमपुर एवं बाराबंकी के औद्योगिक क्षेत्रों के मानचित्रों को स्वीकृति प्रदान की गई। वहीं बलिया, हाथरस, फतेहपुर, बाराबंकी एवं चित्रकूट के औद्योगिक क्षेत्रों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए संशोधन के निर्देश दिए गए तथा संशोधित तलपट (लेआउट) मानचित्र को स्वीकृति दी गई। भूमि बैंक को सुदृढ़ करने हेतु नीतिगत संशोधन के निर्देश दिए गए। साथ ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने के लिए संशोधित योजना तैयार करते हुए प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया। एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत यह तय किया गया कि आवंटन योग्य भूमि का 75 प्रतिशत आवंटन पूर्ण होने के पश्चात शेष 25 प्रतिशत भूमि का आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि प्रचलित परियोजनाओं में विकास कार्यों को जारी रखते हुए समानांतर रूप से आवंटन प्रक्रिया संचालित की जाए, ताकि निवेश में तेजी लाई जा सके। सहारनपुर एवं बदायूं में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के संदर्भ में निर्देश दिए गए कि अधिग्रहण से पूर्व सड़क संपर्क (रोड कनेक्टिविटी) एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए, जिससे औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि अवस्थापना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) विकास हेतु शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए वित्तपोषण का प्रभावी उपयोग करते हुए एक वर्ष के भीतर बुनियादी सुविधाओं का तीव्र विकास सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित कर एक माह के भीतर उनका निस्तारण किया जाए। अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि यूपीसीडा का लक्ष्य केवल औद्योगिक भूखंडों का आवंटन करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक विश्वस्तरीय औद्योगिक ईकोसिस्टम का निर्माण करना है, जहां तकनीक, पारदर्शिता और दक्षता के आधार पर उद्यमियों को बेहतर वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि ड्रोन आधारित निगरानी, डिजिटल सेवाएं और पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया जैसे निर्णय प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में तेजी से अग्रसर करेंगे। अंत में अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि सहारनपुर और बदायूं जैसे क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के दौरान कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि औद्योगिक विकास को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके।

इंडोनेशिया में भूकंप का कहर: 7.4 तीव्रता, सुनामी और भारी तबाही

जकार्ता इंडोनेशिया में भयंकर भूकंप आया है. इंडोनेशिया में भूकंप के बाद एक और खतरा मंडरा रहा है. वह खतरा है सुनामी का. जी हां इंडोनेशिया में जलजले के बाद अब सुनामी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. इंडोनेशिया के जलक्षेत्र में आज यानी गुरुवार की सुबह जोरदार भूकंप आया. रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई. इसके बाद भूकंप से सुनामी की छोटी लहरें उठीं. इस भूकंप-सुनामी के डेडली कॉम्बिनेशन में एक व्यक्ति की मौत हो गई और घरों एवं इमारतों को नुकसान पहुंचा।  दरअसल, यूएसजीएस यानी संयुक्त राज्य अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि गुरुवार तड़के पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद एक अमेरिकी निगरानी एजेंसी ने भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में सुनामी की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 7.4 थी और इसका केंद्र मोलूका सागर में 35 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप के केंद्र से 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं, खासकर इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों में. यूएसजीएस ने भी भूकंप के केंद्र से उतनी ही दूरी पर स्थित क्षेत्रों में खतरनाक सुनामी लहरों की संभावना के संबंध में चेतावनी दी।  इंडोनेशिया में भूंकप इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान एवं भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप के आधे घंटे से भी कम समय में कई निगरानी केंद्रों में सुनामी की लहरें दर्ज की गईं. इनमें बिटुंग में आंठ इंच और पश्चिम हलमाहेरा में एक फुट ऊंची लहरें शामिल हैं. होनोलुलु स्थित प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि दक्षिणी फिलीपीन के दावाओ में दो इंच ऊंची लहरें उठीं लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है।  इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार उत्तरी सुलावेसी प्रांत के तटीय शहर बिटुंग और आसपास के इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी प्रांत उत्तर मलुकु के टेरनेट शहर में 10 से 20 सेकंड तक भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।  भूकंप-सुनामी से कितनी तबाही प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि टेरनेट के कुछ हिस्सों में थोड़ा नुकसान हुआ है. स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि बटांग दुआ द्वीप जिले में एक गिरजाघर प्रभावित हुआ है और दक्षिण टेरनेट में दो घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. बिटुंग में नुकसान का आकलन अभी जारी है. इंडोनेशिया की खोज और बचाव एजेंसी ने बताया कि उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा जिले में 70 वर्षीय महिला की मौत हो गई और एक अन्य निवासी घायल हो गया।  तटीय इलाके में खतरा बरकरार आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहरी ने एक बयान में कहा, ‘‘इस समय सावधानी बरतने की जरूरत है, खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जब तक अधिकारी अनुमति न दें तब तक वे जलक्षेत्र में नहीं जाएं. भूकंप के बाद समुद्र तट से दूर कम से कम दो झटके और महसूस किए गए. अधिकारियों ने बताया कि दोनों झटकों से सुनामी का खतरा नहीं है।  क्यों खतरा मंडरा रहा इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह ‘प्रशांत अग्नि वलय’ पर स्थित है. यह ज्वालामुखियों और भ्रंश रेखाओं का एक विशाल 40,000 किलोमीटर लंबा चाप है, जो टेक्टोनिक प्लेटों की आपसी हलचल से बना है. प्रशांत महासागर को घेरने वाली यह घोड़े की नाल के आकार की बेल्ट दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत भूकंपों का कारण बनती है और यह अपनी लगातार होने वाली भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधियों के लिए जानी जाती है।  यहां पिछले महीने में भी आया था भूकंप यूएसजीएस के अनुसार, अभी पिछले महीने ही 3 मार्च को सुमात्रा के तट से दूर समुद्र में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे वहां के लोग सहम गए थे, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. वह भूकंप सुमात्रा के उत्तर-पूर्वी सिरे के पास समुद्र में उत्पन्न हुआ था, जिसके कारण उस क्षेत्र में, जहां अक्सर भूकंप के झटके आते रहते हैं, कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर भाग निकले थे. इसी बीच, इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने इस भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की और बताया कि यह 13 किलोमीटर की गहराई पर आया था। 

पंजाब में स्मार्ट राशन कार्ड लॉन्च, 1.5 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा फायदा, पहचान प्रक्रिया होगी सरल

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुविधाजनक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि पंजाब में अब पारंपरिक राशन कार्ड की जगह QR कोड आधारित स्मार्ट राशन कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे लाखों लाभार्थियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। क्यों जरूरी था यह बदलाव? पुरानी व्यवस्था में कई लाभार्थियों को राशन लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। खासतौर पर वे लोग जिनके बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) ठीक से मैच नहीं होते थे या ई-केवाईसी बार-बार फेल हो जाती थी, उन्हें राशन मिलने में देरी होती थी। नई QR कोड तकनीक इन समस्याओं का समाधान करने के लिए लाई गई है। कितने लोगों को मिलेगा लाभ? पंजाब में करीब 1.5 करोड़ लोग PDS प्रणाली के तहत राशन लेते हैं, जबकि राज्य में लगभग 39 लाख राशन कार्ड हैं। सरकार का लक्ष्य मई से पहले 80% लाभार्थियों तक नए QR कोड कार्ड पहुंचाने का है, ताकि गेहूं वितरण शुरू होने से पहले व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सके। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्यभर में हजारों पात्र परिवार E-KYC और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के दौरान लगातार समस्याओं का सामना कर रहे थे। खासकर अंगूठे के निशान का मेल न होना, बुजुर्गों के घिसे हुए फिंगरप्रिंट और EPoS मशीनों में तकनीकी खराबियां बड़ी वजह रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, नए स्मार्ट कार्ड अब राशन लाभार्थियों के लिए एक वैध पहचान माध्यम के रूप में काम करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल बायोमेट्रिक फेल होने के कारण किसी भी पात्र परिवार को गेहूं के हक से वंचित न होना पड़े। लुधियाना वेस्ट के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सरताज सिंह चीमा मीडिया ने बताया कि इस चरणबद्ध योजना का उद्देश्य डिपो नेटवर्क में लाभार्थियों की पहचान प्रक्रिया को और सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कार्ड तैयार हैं और अगले 2-3 दिनों में डिपो होल्डरों के जरिए धीरे-धीरे लाभार्थियों तक पहुंचने शुरू हो जाएंगे। स्मार्ट कार्ड में लाभार्थियों की जरूरी जानकारी जैसे श्रेणी, राशन कार्ड नंबर, परिवार प्रमुख का विवरण और जारी करने की जानकारी शामिल होगी, जिससे गेहूं वितरण के दौरान तेज और विश्वसनीय पहचान संभव हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह सुधार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में मौजूद खामियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बार-बार अंगूठा सत्यापन की समस्या कम होगी और असली लाभार्थियों को समय पर उनका गेहूं मिल सकेगा। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थियों को मुफ्त गेहूं दिया जाता है, ऐसे में उनकी पहचान में किसी भी प्रकार की रुकावट गरीब परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। राज्य स्तर पर यह योजना बड़े पैमाने पर लागू की जा रही है, जिसमें करीब 39 लाख राशन कार्ड और 1.5 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि स्मार्ट कार्ड व्यवस्था लागू होने से डिपो पर विवाद कम होंगे, लाभार्थियों की पहचान बेहतर होगी और पूरे पंजाब में गेहूं वितरण प्रक्रिया अधिक सुगम हो जाएगी। राज्य सरकार इस पहल को एक बड़े कल्याणकारी और पारदर्शिता बढ़ाने वाले सुधार के रूप में देख रही है, जिससे कोई भी पात्र परिवार तकनीकी कारणों से वंचित न रह जाए। जिला स्तर पर वितरण शुरू होने के साथ ही आने वाले दिनों में पंजाब की राशन प्रणाली में स्मार्ट कार्ड आधारित पहचान का बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पहले ही छप चुके हैं लाखों कार्ड सरकार ने QR कोड आधारित करीब 10 लाख प्लास्टिक राशन कार्ड पहले ही तैयार कर लिए हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से जिलों और राशन डिपो तक पहुंचाया जा रहा है। शेष कार्डों की आपूर्ति भी तेजी से जारी है, ताकि कोई भी पात्र परिवार इस सुविधा से वंचित न रहे। अब नहीं ले जाना होगा आधार या अन्य दस्तावेज नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को सिर्फ QR कोड वाला राशन कार्ड दिखाना होगा। राशन डिपो पर अब आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे प्रक्रिया तेज और आसान होगी। कहीं भी मिलेगा राशन इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत पोर्टेबिलिटी है। यानी लाभार्थी अपने निर्धारित डिपो के अलावा किसी अन्य डिपो से भी राशन प्राप्त कर सकेंगे। QR कोड स्कैन होते ही उनकी जानकारी सामने आ जाएगी और उन्हें बिना किसी परेशानी के अनाज मिल सकेगा। नए स्मार्ट कार्ड से मिलेगी लाभार्थियों को वैध पहचान अधिकारियों के अनुसार, नए स्मार्ट कार्ड अब राशन लाभार्थियों के लिए एक वैध पहचान माध्यम के रूप में काम करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल बायोमेट्रिक फेल होने के कारण किसी भी पात्र परिवार को राशन के हक से वंचित न होना पड़े। डिपो होल्डरों के जरिए लाभार्थियों तक पहुंचेगे स्मार्ट कार्ड लुधियाना वेस्ट के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक सरताज सिंह चीमा मीडिया ने बताया कि इस चरणबद्ध योजना का उद्देश्य डिपो नेटवर्क में लाभार्थियों की पहचान प्रक्रिया को और सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट कार्ड तैयार हैं और अगले 2-3 दिनों में डिपो होल्डरों के जरिए धीरे-धीरे लाभार्थियों तक पहुंचने शुरू हो जाएंगे। इससे खासकर उन मामलों में राहत मिलेगी, जहां अंगूठे के निशान के मेल न खाने से गेहूं वितरण में दिक्कत आ रही थी। यह वितरण पंजाब के राशन डिपो नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें जिला प्रशासन और डिपो धारक अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करेंगे। e-KYC से मिलेगी राहत स्मार्ट कार्ड में लाभार्थियों की जरूरी जानकारी जैसे श्रेणी, राशन कार्ड नंबर, परिवार प्रमुख का विवरण और जारी करने की जानकारी शामिल होगी। जिससे गेहूं वितरण के दौरान तेज और विश्वसनीय पहचान संभव हो सकेगी। इस पहल से खासकर बुजुर्गों, मजदूरों और उन परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो बार-बार e-KYC में फेल हो रहे थे या बायोमेट्रिक गड़बड़ी के कारण उनका राशन अटक जाता था। पात्र लाभार्थियों को मुफ्त मिलता है राशन अधिकारियों का कहना है कि यह सुधार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में मौजूद खामियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बार-बार अंगूठा सत्यापन की समस्या कम होगी और असली लाभार्थियों को समय पर उनका गेहूं मिल सकेगा। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थियों को मुफ्त गेहूं दिया जाता है, ऐसे में उनकी पहचान में किसी भी प्रकार की रुकावट … Read more

मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: जरूरतमंदों को आवास और बीमारों के इलाज की होगी व्यवस्था

जरूरतमंद को आवास और बीमार के इलाज की होगी व्यवस्था: मुख्यमंत्री जनता दर्शन: गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की करीब 100 लोगों से मुलाकात लोगों की समस्याएं सुनकर दिया भरोसा, हर समस्या का कराएंगे सन्तुष्टिपरक निस्तारण गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंद लोगों को आवास दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय संबल दिया। सीएम ने कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है।  गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 100 लोगों से मुलाकात की। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र लिए और निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और सन्तुष्टिपरक होना चाहिए। उन्होंने पुलिस से जुड़े मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जनता दर्शन में एक महिला ने आवास की समस्या बताई। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की आवास योजना के तहत आवास दिलाया जाएगा। गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद मांगने आए लोगों को मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। जनता दर्शन में कुछ महिलाओं के साथ आए बच्चों को चॉकलेट देकर सीएम योगी ने उन्हें खूब पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया।

तेल के दामों में फिर बढ़ोतरी, डीजल ₹25 और पेट्रोल ₹7.4 महंगा, नायरा के बाद इस कंपनी ने भी बढ़ाए रेट

नई दिल्‍ली  नायरा के बाद निजी क्षेत्र की कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने भी पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए उछाल के कारण तेल के दाम बढ़ाए गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेल ने डीजल की कीमतों में सीधे ₹25.01 प्रति लीटर की वृद्धि की है. पेट्रोल की कीमतों में ₹7.41 प्रति लीटर की बढोतरी की गई है. इस वृद्धि के बाद सामान्य डीजल की कीमत शेल इंडिया के पंपों पर ₹123.52 और प्रीमियम वेरिएंट की कीमत ₹133.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।  वहीं, बेंगलुरु में अब सामान्य पेट्रोल ₹119.85 और पावर वेरिएंट ₹129.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. स्थानीय करों (VAT) और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में इन कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में शेल के आउटलेट्स पर अब ग्राहकों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।  सरकारी कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार के हस्तक्षेप के कारण खुदरा कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, वहीं निजी कंपनियों को ऐसा करने पर सरकार से कोई वित्तीय मुआवजा या सब्सिडी नहीं मिलती. घाटे से बचने के लिए निजी कंपनियों के पास कीमतों को बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।  कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे मुख्य कारण कच्‍चे तेल के बढ़े दाम हैं. फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60 फीसदी तक का उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी आयात करता है। 

चंडीगढ़ BJP ऑफिस अटैक में पाकिस्तान मेड ग्रेनेड का प्रयोग, संदिग्धों के 2 और वीडियो हुए सार्वजनिक

चंडीगढ़ चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी के मुख्यालय के बाहर हुए ब्लास्ट में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इस हमले में GHD2P हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है। जानकारी के अनुसार, विस्फोट के बाद यह करीब 5 से 10 मीटर के दायरे में बेहद घातक साबित हो सकता है। वहीं इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है। इससे पहले 2 नए वीडियो सामने आए। हमले से कुछ मिनट पहले वीडियो में BJP ऑफिस के पास स्थित एक अन्य दफ्तर के बाहर 2 संदिग्ध खड़े दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरे वीडियो में हमले के बाद दोनों संदिग्ध सड़क के दूसरी ओर भागते हुए कैद हुए हैं। बुधवार शाम को पंजाब बीजेपी के मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट हुआ था। इससे मौके पर खड़ी कई कारों के शीशे टूट गए और आसपास की दीवार पर छर्रों के निशान बन गए। घटना के 2 वीडियो वायरल हुए, जिसमें से एक में व्यक्ति ग्रेनेड बम फेंकता दिखा। जबकि, दूसरे वीडियो में बाइक पर जाते दो लोग दिखे, जिन्हें हमलवार बताया गया। वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हुई, जिसमें इस हमले की जिम्मेदारी खालिस्तानी संगठन ने ली। अब तक पुलिस ने इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की है। चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर ने कहा था कि क्रूड जैसी चीज फेंकी गई है। चंडीगढ़ पुलिस और सीएफएसएल की टीम बीजेपी ऑफिस के बाहर जांच में जुटी हुई हैं। 30 फुट दूरी से फेंका गया ग्रेनेड BJP मुख्यालय के बाहर करीब 30 फुट दूरी से ग्रेनेड फेंका गया था। दीवार की ऊंचाई लगभग 3 फुट है, जबकि उसके ऊपर करीब 2 फुट ऊंची एल्यूमीनियम ग्रिल लगी हुई है। जिस जगह ग्रेनेड गिरा, वहां से बीजेपी दफ्तर के मुख्य द्वार की दूरी करीब 25 फीट बताई जा रही है। मुख्य द्वार के पास सुरक्षा कर्मियों के लिए केबिन बना हुआ है, जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दो जवान राउंड द क्लॉक तैनात रहते हैं। वहीं मुख्य गेट पर चंडीगढ़ पुलिस के कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं। हालांकि जिस स्थान पर ग्रेनेड गिरा, वहां अकसर आने वाले लोग अपनी गाड़ियां पार्क करते हैं और घटना के समय भी वहां वाहन खड़े थे। खालिस्तानी आतंकी सुखजिंदर सिंह बब्बर ने इस घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा गया है कि चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में हुए ग्रेनेड हमले के पीछे वही है। पोस्ट में कहा गया है कि भारतीय सिस्टम चाहे पंजाब के सिख युवाओं के खिलाफ कितने भी कदम उठा ले, इसका जवाब दिया जाएगा। खालसा पंथ उचित प्रतिक्रिया करेगा। गुरदासपुर में रणजीत सिंह की हत्या का जिक्र करते हुए उसके आरोपियों को भी न बख्शने की बात कही गई है। पंजाब की धरती खालसा की धरती पोस्ट के अंत में खालिस्तान समर्थक नारे भी लिखे गए हैं, जिनमें खालिस्तान के समर्थन और खालसा राज की बात दोहराई गई है। इस में कहा गया है कि पंजाब की धरती खालसा की धरती है। पंजाब में खालिस्तान बनेगा खालिस्तान जिंदाबाद, खालसा राज करेगा। वायरल पोस्ट में संगठन की ओर से इस वारदात को अंजाम देने का जिक्र करते हुए पंजाब के डीआईजी संदीप गोयल को भी चेतावनी दी गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें एक शख़्स ग्रेनेड की पिन निकाल कर फेंकते हुए दिख रहा है। हमले की जांच में पुलिस को सीसीटीवी में दो संदिग्ध दिखे हैं। दोनों लोगों को मोटरसाइकिल पर बीजेपी ऑफिस के आसपास घूमते देखा गया। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। कहीं पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष तो नहीं थे निशाना? पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस घटना के तार प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने की आशंका है। इसके अलावा इस हमले को पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी कुमार शर्मा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। करीब 15 दिन पहले एसएसपी पठानकोट ने अश्वनी शर्मा को सतर्क रहने और सार्वजनिक स्थानों पर कम जाने की चेतावनी दी थी। घटना से दो दिन पहले तक शर्मा पार्टी कार्यालय में मौजूद थे और बुधवार सुबह ही दिल्ली में एक कार्यक्रम के लिए रवाना हुए थे। क्रूड बम का इस्तेमाल किया: एसएसपी चंडीगढ़ सेक्टर-37 में पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर बुधवार शाम करीब 4:48 बजे जोरदार धमाके से भाजपा कार्यालय के बाहर खड़ी कार का शीशा टूट गया। काले रंग की एक एक्टिवा क्षतिग्रस्त हो गई और चारदीवारी पर 50 से अधिक स्थानों पर छर्रों के निशान देखने को मिले। चण्डीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने कहा कि विस्फोट के लिए क्रूड बम का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने बताया कि इससे पहले क्रूड बम का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में एक घटना में किया गया था। घटना के बाद केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीमों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए। वहीं, घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

केंद्र सरकार का अहम फैसला: तेल संकट के दौरान 40 पेट्रोकेमिकल पर कस्टम ड्यूटी की गई शून्य

नई दिल्‍ली ईरान युद्ध के कारण बढ़ते तेल संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए 40 महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को पूरी तरह से माफ कर दिया है. वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार, 2 अप्रैल को इस संबंध में एक आदेश जारी किया. इस कदम का उद्देश्य कच्चे माल की कीमतों में होने वाली बेतहाशा वृद्धि से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सुरक्षित रखना है. मंत्रालय के अनुसार, इन उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी की छूट 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी।  पेट्रोकेमिकल्स लगभग हर उद्योग में इस्‍तेमाल होते हैं. सरकार के इस फैसले प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल (कपड़ा), फार्मास्युटिकल (दवा), ऑटो कंपोनेंट्स और केमिकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ होगा. ड्यूटी हटने से इन उद्योगों की उत्पादन लागत कम होगी और इनको कीमतें बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ नहीं पड़ेगा।  इन पर शून्‍य हुआ शुल्‍क     केमिकल्स: एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, मेथनॉल और फिनोल.     इंडस्ट्रियल कच्‍चा माल: एसेटिक एसिड, प्यूरिफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड (PTA), और एपॉक्सी रेजिन।      पॉलिमर: एथिलीन के पॉलिमर और विभिन्न प्रकार के फॉर्मल्डिहाइड।  निर्यातकों को भी राहत ईरान युद्ध के कारण समुद्री व्‍यापार में आई रुकावट को देखते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने निर्यातकों को भी बड़ी सहायता दी है. पिछले महीने ही सरकार ने सभी पात्र निर्यात उत्पादों के लिए निर्यातित उत्पादों पर शुल्कों और करों की छूट योजना (RoDTEP) के तहत दरें और वैल्यू कैप बहाल कर दिए गए हैं. यह उन निर्यातकों के लिए बड़ी राहत है जो खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते माल ढुलाई (Freight) खर्च और युद्ध से जुड़े जोखिमों के कारण व्यापारिक नुकसान झेल रहे थे।  देश में नहीं ईंधन की कमी सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है. यह रणनीतिक भंडार किसी भी अल्पकालिक आपूर्ति बाधा से निपटने के लिए सक्षम है. सरकार लगातार वैश्विक स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते तलाश रही है ताकि देश की विकास दर पर कोई आंच न आए।