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मध्यप्रदेश में 5 अप्रैल तक ओले और आंधी-बारिश, 30 जिलों में बारिश का अलर्ट, निमाड़ में गिरेंगे ओले

भोपाल  मध्यप्रदेश में इन दिनों आंधी-बारिश का मजबूत सिस्टम सक्रिय है। इसके चलते पिछले 72 घंटों से कई इलाकों में तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि हो रही है। बुधवार को प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में मौसम बदला रहा, वहीं गुरुवार को भोपाल और इंदौर समेत 30 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। खासतौर पर निमाड़ क्षेत्र के धार, बड़वानी और झाबुआ में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। भोपाल-इंदौर सहित 30 जिलों में अलर्ट अगले 24 घंटे के दौरान जिन जिलों में बारिश होने की संभावना है, उनमें ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बड़वानी, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, देवास और शाजापुर शामिल हैं। 50 किमी प्रति घंटे तक चलेगी आंधी मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को छिंदवाड़ा, सिवनी और पांढुर्णा में तेज आंधी चल सकती है, जिसकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। अन्य जिलों में भी 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। बुधवार को भी कई जिलों में मौसम ने करवट ली। भोपाल में गरज-चमक के साथ बारिश हुई, जबकि सीहोर में आंधी और बारिश के साथ ओले गिरे। इसके अलावा इंदौर, देवास, उज्जैन, खंडवा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, रायसेन, विदिशा, रतलाम, मंदसौर, खरगोन, बड़वानी, शहडोल, शाजापुर और बालाघाट समेत कई जिलों में मौसम बदला रहा। बारिश के साथ गर्मी भी बरकरार अजीब मौसम के बीच गर्मी का असर भी बना हुआ है। नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि रतलाम, मंडला, खजुराहो, रायसेन, दमोह और सागर में भी पारा 38-39 डिग्री के बीच रहा। बड़े शहरों में जबलपुर 38.4°C, भोपाल 37.4°C, इंदौर 36.5°C, ग्वालियर 36.1°C और उज्जैन 35.6°C दर्ज किया गया। क्यों बदल रहा मौसम? प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन सक्रिय है, वहीं उत्तर-पश्चिमी हिस्से में भी दो सिस्टम काम कर रहे हैं। 7 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी एक्टिव होगा, जिससे 10 अप्रैल तक मौसम ऐसा ही बना रह सकता है। अप्रैल के दूसरे हफ्ते से सिस्टम कमजोर पड़ते ही तेज गर्मी का दौर शुरू होगा। महीने के आखिरी तक ग्वालियर, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में तापमान 44-45 डिग्री तक पहुंच सकता है।    

धार भोजशाला केस: हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से शुरू होगी लगातार सुनवाई, मुस्लिम पक्ष ने पेश किए मस्जिद होने के प्रमाण

धार  मध्य प्रदेश की इंदौर हाईकोर्ट डिवीजन बेंच में आज (गुरुवार) धार स्थित भोजशाला मामले में सुनवाई हुई. इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी. 6 अप्रैल दिन सोमवार को दोपहर ढाई बजे से इंदौर हाईकोर्ट में रोज सुनवाई होगी. मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में मस्जिद होने के दस्तावेज पेश किए, जिसपर अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी. मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह सिविल सूट का मामला है. हाईकोर्ट ने इसपर कहा कि सिविल सूट की सुनवाई 10 अप्रैल को धार स्थित जिला कोर्ट में होगी. कोर्ट ने सभी पार्टी को 10 तारीख को धार कोर्ट में मौजूद होने के आदेश दिए. कोर्ट ने बिल्कुल स्पष्ट किया कि 10 अप्रैल को धार जिले की कोर्ट में सिर्फ सिविल सूट पर सुनवाई होगी, बाकी पांच याचिका जो धार भोजशाला विवाद को लेकर लगी हुई हैं, उनपर इंदौर हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से लगातार सुनवाई होगी. हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद भी जुड़े थे।  हिंदू पक्ष के वकील श्रीश दुबे ने कहा कि मुस्लिम पक्ष वीडियो-फोटो के लिए सुप्रीम कोर्ट गया था. उस याचिका में जो आदेश हुआ था, उससे माननीय न्यायालय को अवगत कराया है. हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 अप्रैल तय की है. अदालत सभी एप्लिकेशन को क्रमवार सुनेगी।  आपको बता दें कि एएसआई ने 98 दिनों तक भोजशाला का सर्वे किया और दो हजार से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की थी। इसके बाद दो जजों ने भी धार जाकर भोजशाला व मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया। पिछली सुनवाई में मुस्लिम पक्ष ने एएसआई द्वारा किए गए सर्वे पर सवाल उठाए थे और उसके तथ्यों को खारिज किया। उनका कहना था कि सर्वे ठीक तरीके से नहीं किया गया। इसके साथ ही कोर्ट से सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी के डेटा की मांग भी की गई थी। कोर्ट में सौंपे सभी दस्तावेज मुस्लिम पक्ष के वकील अरशद वारसी ने कहा कि हमारे द्वारा कोर्ट को पहले ही बताया जा चुका था कि यह जो मामला है, चूंकि मल्टीपल डिस्प्यूटेड पार्ट्स इसमें शामिल हैं, तो इसलिए इसको सभी सूट में सुना जाना आवश्यक है. हमने कोर्ट से अपील की थी कि इसमें सभी पार्टी को सिविल सूट में भेजा जाए. हमने कोर्ट में सभी दस्तावेज दिए हैं. उसमें सुनवाई की अगली तारीख 10 अप्रैल है. कोर्ट ने सभी पार्टी को अपने-अपने जवाबों के साथ हाजिर होने के लिए कहा है. वहीं इस मामले में इंदौर हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से लगातार सुनवाई की जाएगी।  क्या है भोजशाला विवाद? मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला विवाद दशकों पुराना है. यह जिले के एक ऐतिहासिक परिसर को लेकर है. हिंदुओं का मानना है कि यह वाग्देवी (सरस्वती माता) का मंदिर है, जिसे 11वीं सदी में राजा भोज ने बनवाया था. हिंदू इसे मंदिर और प्राचीन संस्कृत अध्ययन केंद्र मानते हैं. वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता है. उनका दावा है कि यह एक इस्लामिक स्थल है और यहां सदियों से नमाज अदा की जाती रही है. हालांकि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के कब्जे में है। 

सरकार का बड़ा कदम: 40 केमिकल-पॉलिमर पर आयात शुल्क शून्य, पेट्रोकेमिकल और रेजिन उद्योग को मिलेगी राहत

इंदौर  वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) ने 1 अप्रैल 2026 को गजट ऑफ इंडिया में दो असाधारण अधिसूचनाएं जारी कर पेट्रोकेमिकल उद्योग को बड़ी राहत दी है। अधिसूचना के तहत 40 महत्वपूर्ण रसायनों, मोनोमर्स और पॉलिमर पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को शून्य कर दिया गया है। वहीं एक अन्य अधिसूचना के तहत अमोनियम नाइट्रेट पर कृषि अवसंरचना और विकास उपकर भी शून्य कर दिया गया है। यह छूट आज यानी 2 अप्रैल से लागू होगी और 30 जून तक प्रभावी रहेगी। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के अध्यक्ष योगेश मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार ने लोकहित में यह फैसला लिया है। इससे मध्य प्रदेश के काफी उद्योगों को फायदा होगा। यह उद्योग को एक प्रकार से संजीवनी मिलने जैसा है। सरकार के इस फैसले से कच्चे माल की आयात लागत कम होगी। घरेलू विनिर्माण इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और अंतिम उत्पादों के दाम नियंत्रण में रहेंगे। यह छूट मुख्य रूप से प्लास्टिक, पेंट, रेजिन, फार्मास्यूटिकल, उर्वरक, पॉलीमर और विशेष रसायन उद्योग को लाभ पहुंचाएगी। उद्योग जगत पर क्या असर पड़ेगा?     प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग को सीधा फायदा     पेंट, कोटिंग्स और रेजिन निर्माताओं की उत्पादन लागत घटेगी     उर्वरक और फार्मास्यूटिकल कंपनियों को कच्चे माल सस्ता मिलेगा     टेक्सटाइल, पैकेजिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर को अप्रत्यक्ष लाभ     छोटे-मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए विशेष राहत, क्योंकि ये ज्यादातर आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं।  40 से ज्यादा केमिकल्स पर जीरो ड्यूटी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक 40 से अधिक केमिकल प्रोडक्ट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को तीन महीने के लिए शून्य कर दिया गया है। इसमें एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, मेथनॉल और विनाइल क्लोराइड जैसे अहम केमिकल्स शामिल हैं, जो कई इंडस्ट्रीज की बैकबोन माने जाते हैं। प्रोडक्ट पहले BCD (%) कैटेगरी एनहाइड्रस अमोनिया 6.5% बेसिक केमिकल टोल्यून (Toluene) 6.5% एरोमैटिक केमिकल स्टाइरीन (Styrene) 6.5% मोनोमर डाइक्लोरोमीथेन 6.5% सॉल्वेंट विनाइल क्लोराइड मोनोमर (VCM) 6.5% मोनोमर मेथनॉल 6.5% फीडस्टॉक केमिकल आइसोप्रोपाइल अल्कोहल (IPA) 6.5% इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) 6.5% इंटरमीडिएट प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA) 6.5% पॉलिएस्टर रॉ मैटेरियल फिनॉल 6.5% इंडस्ट्रियल केमिकल एसीटिक एसिड 6.5% इंटरमीडिएट टोल्यून डायआइसोसाइनेट (TDI) 7.5% पॉलियूरीथेन फीडस्टॉक पॉलीओल्स 7.5% पॉलियूरीथेन इंटरमीडिएट ABS 7.5% पॉलिमर PVC 10% पॉलिमर PET 10% पॉलिमर पॉलीयूरीथेन 7.5% पॉलिमर एपॉक्सी रेजिन 7.5% स्पेशलिटी केमिकल किन सेक्टर्स को मिलेगा सीधा फायदा  इस फैसले का सबसे बड़ा असर कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर पड़ेगा। पॉलिमर्स और रेजिन जैसे ABS, PVC, PET और पॉलीयूरीथेन की लागत घटने से इन इंडस्ट्रीज के लिए इनपुट कॉस्ट कम होगी और मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है। इंपोर्ट लागत घटेगी, लेकिन चुनौतियां बरकरार ड्यूटी हटने से इंपोर्ट की लैंडेड कॉस्ट कम होगी, खासकर उन केमिकल्स में जहां भारत आयात पर ज्यादा निर्भर है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि सप्लाई टाइटनेस और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं इस राहत के असर को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं। एंटी-डंपिंग ड्यूटी जारी रहेगी सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से एंटी-डंपिंग और सेफगार्ड ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी जहां पहले से ये ड्यूटी लागू है, वहां वह जारी रहेगी।  FTA देशों का एडवांटेज घटेगा इस कदम से FTA और CEPA के तहत मिलने वाला टैरिफ एडवांटेज अस्थायी रूप से कम हो सकता है। क्योंकि अब सभी देशों के लिए बेसिक ड्यूटी समान रूप से शून्य हो गई है, जिससे कीमतों का अंतर कम हो जाएगा।

राजनीतिक हलचल तेज: नीतीश कुमार देंगे इस्तीफा, 14 अप्रैल को नया मुख्यमंत्री संभालेगा पद

पटना. बिहार में नई सरकार (Bihar New Government Formation) के गठन की प्रक्रिया अगले दस दिनों बाद शुरू हो जाएगी। नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। संभावना है कि 14 अप्रैल को बिहार में नए मुख्यमंत्री पद का शपथ होगा। नए मुख्यमंत्री के साथ नए मंत्रिमंडल का भी शपथग्रहण होगा। नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए हो रहे रवाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नौ अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार, दस अप्रैल को वह राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को वह दिल्ली लौटेंगे और अगले दिन यानी 12 अप्रैल को उनका इस्तीफा होगा। 13 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर एनडीए सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर विधिवत मुहर लग जाएगी। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज भी मौजूद रहेंगे। उसी दिन एनडीए के नए विधायक दल के नेता राज्यपाल को अपनी सरकार बनाने का दावा भी पेश करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नए कार्यकाल का इसी महीने आरंभ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चौथा कार्यकाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी महीने आरंभ करेंगे। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार देश भर के विभिन्न प्रदेशों से जदयू के पदाधिकारी पटना पहुंचेंगे और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेंगे। राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी होनी है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार का संबोधन होगा। यह पहली बार होगा जब वह मुख्यमंत्री पद पर रहे बिना जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करेंगे। 16 मार्च को राज्यसभा का सदस्य चुने गए थे नीतीश नीतीश कुमार इसी महीने की 16 तारीख को राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हुए थे। संवैधानिक प्राविधानों के अनुसार राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें अगले 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देना था। इस संवैधानिक वजहों से 30 मार्च को नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उसी दिन कुछ ही घंटे के भीतर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया था।

उज्जैन साइंस सेंटर का होगा लोकार्पण वैज्ञानिक, खगोलविद और शोधार्थी करेंगे संवाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का तारामंडल परिसर में शुभारंभ करेंगे। साथ ही उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण भी करेंगे। सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला डिजिटल प्लेनेटेरियम परिसर में आयोजित किया गया है। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री  धर्मेन्द्र प्रधान, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  गजेन्द्र सिंह शेखावत, इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन और विचारक लेखक  सुरेश सोनी भी शामिल होंगे। बाबा महाकाल और सम्राट विक्रमादित्य की पावन नगरी उज्जैन प्राचीन काल से ही काल गणना और खगोल विज्ञान के अनुसंधान की वैश्विक धुरी रही है। एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और शोधकर्ता यहां बौद्धिक समागम के लिये एकत्रित हो रहे हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को शोध और विचार प्रस्तुत करने का साझा मंच उपलब्ध कराएगा। उज्जैन में 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित नव-निर्मित साइंस सेंटर में गैलरी ऑन साइंस, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन एवं स्टूडेंट एक्टिविटी हॉल, हेरिटेज थीम आधारित गैलरी और एग्जिबिट डेवलपमेंट लैब जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आमजन में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा। सम्मेलन में यूएवी (मानवरहित विमान), आरसी (रिमोट कंट्रोल) तकनीक और सैटेलाइट निर्माण जैसे विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही सूर्य के सन स्पॉट का सुरक्षित अवलोकन, टेलीस्कोप से रात्रि आकाश का अध्ययन, विद्यार्थी-शिक्षक संवाद तथा अंतरिक्ष तकनीक आधारित प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित होंगे, जिनका उद्देश्य युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को बढ़ावा देना है। सम्मेलन म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान शामिल हैं। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों के प्रतिनिधिय सहभागिता करेंगे। उज्जैन-डोंगला को ग्लोबल मेरिडियन बनाने पर होगी चर्चा उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां से कर्क रेखा गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान्ह रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक ‘टाइम स्केल सेंटर’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इनमें विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स और कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इनमें नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रो. यासुहाइड होबारा, इसरो के अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. निलेश देसाई, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, भारतीय खगोल विज्ञान संस्थान बेंगलुरु की निदेशक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम और अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शामिल होंगे। व्याख्यान, टेक्नोलॉजी एक्सपो और स्टार्ट-अप कॉन्फ्रेंस होंगे प्रमुख आकर्षण तीन दिवसीय सम्मेलन में व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्ट-अप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रदर्शनी में भारतीय ज्ञान परंपरा, काल गणना और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी अवधारणाओं के साथ आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें इसरो, सीएसआईआर, टीआईएफआर, आईआईटी इंदौर, डीआरडीओ, ब्रह्मोस एयरोस्पेस तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थान अपनी तकनीकी उपलब्धियां प्रदर्शित करेंगे। वराहमिहिर से डॉ. विक्रम साराभाई तक के खगोल विज़न पर होगा चिंतन उज्जैन प्राचीन काल से काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के दूरदर्शी विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगी नई दिशा उज्जैन में आयोजित यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी नई गति देगा। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सम्मेलन के समापन दिवस 5 अप्रैल को प्राप्त सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्य योजना पर भी चर्चा की जाएगी।  

विकसित भारत की कल्पना साकार हो रही है, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से सफर हुआ आसान

विकसित भारत की कल्पना हो रही है साकार, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से राह हुई आसान रायपुर गाँव में कभी बस की पहुँच नहीं थी, आज वहाँ बस के आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखते ही बच्चे हाथ हिलाकर खुशी जाहिर करते हैं और हॉर्न की आवाज़ सुनते ही लोग घरों से बाहर निकल आते हैं—एक नई उम्मीद के साथ। यह उम्मीद अब शहर मुख्यालय, नगर मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसान पहुँच की है।             यात्री बस में बैठकर लोग उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्हें पैदल या किसी निजी वाहन के सहारे दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता था। अब हालात बदल चुके हैं। स्कूल के बच्चे समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी भी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुँच पा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ़ सुविधा का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण परिवारों के सपनों का है जो विकसित भारत की कल्पना को अपने जीवन में साकार होते देख रहे हैं।             यह परिवर्तन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से संभव हो पाया है। इस योजना के तहत आज बसें उन गाँवों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले कभी बस नहीं पहुँची थी। पहाड़ी अंचल की महिलाओं को मिली राहत            जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने के लिए किसी से लिफ्ट लेनी पड़ती थी, निजी वाहन या पैदल जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह बहुत कठिन था। अब ग्रामीण बस से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। वे कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।” ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान          बस में सफर कर रहे ग्राम मरंगी निवासी श्री दशरथ भगत हँसते हुए बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी, इसलिए पैदल ही आना-जाना करना पड़ता था। बस का नाम लेते ही उसका चेहरा खिल गया l उन्होंने बताया कि “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”        यात्री श्री मंगलराम बताते हैं कि पहले वे छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाया करते थे। “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”            मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुँचने में भी बड़ी सुविधा मिली है। यह योजना ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है और जशपुर जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राह खोल रही है।

मुख्यमंत्री का आदेश: निर्माण कार्यों में तेजी लाएं, गुणवत्ता का ध्यान रखें

निर्माण कार्यों में लाएं तेजी, गुणवत्ता का रखें पूरा ध्यान: मुख्यमंत्री गोरखपुर में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने अफसरों को दिए निर्देश बरसात पूर्व करा लें अधिकाधिक निर्माण कार्य: मुख्यमंत्री अगले दौरे में हो सकता है घंटाघर स्थित मल्टीलेवल पार्किंग सह कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को विकास से जुड़े निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने सभी कार्यों में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखने की हिदायत भी दी है। उन्होंने दो तिहाई से अधिक भौतिक प्रगति वाली विकास परियोजनाओं में और तेजी लाते हुए उन्हें मानसून की दस्तक से पहले पूर्ण कराने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने यह संकेत भी दिए कि वह अपने अगले दौरे में घंटाघर के बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग सह कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण और पांडेय हाता क्षेत्र में बनने वाले नए कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास कर सकते हैं।  सीएम योगी  देर शाम गोरखनाथ मंदिर के सभाकक्ष में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने जिले और महानगर में निर्माणाधीन सभी प्रमुख विकास परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति की जानकारी ली। समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विकास परियोजना की एक समय सीमा तय होती है और उसे उसी अवधि में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जाए। इसमें किसी भी स्तर पर उदासीनता या लापरवाही नहीं होनी चाहिए। यह व्यावहारिक रूप से समझना होगा कि बरसात का मौसम शुरू होने पर खुले में होने वाला निर्माण कार्य प्रभावित होता है, इसलिए विकास की जितनी भी परियोजनाओं पर काम चल रहा है, उनसे संबंधित अधिकाधिक निर्माण कार्य बरसात से पहले पूरे कर लिए जाएं।  समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने कहा कि अभी बारिश का मौसम शुरू होने में समय है, लेकिन समय रहते यह सुनिश्चित करना होगा कि बरसात होने पर कहीं भी जलभराव न होने पाए। जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में काफी अच्छा काम हुआ है, इसे लगातार उत्कृष्टता की ओर ले जाने की आवश्यकता है। समय रहते सभी नालों की सफाई का काम पूरा करने का निर्देश देने के साथ सीएम योगी ने कहा कि जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए गोड़धोइया नाला परियोजना पर गंभीरता से ध्यान देकर इसे जल्द पूर्ण कराने का प्रयास हो।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विरासत गलियारा के निर्माण की प्रगति, घंटाघर स्थित बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग सह कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स की अद्यतन स्थिति के बारे में जानकारी ली। साथ ही उन्होंने पांडेय हाता में बनने वाले नए कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स की कार्ययोजना के बारे में पूछा। उन्होंने नगर आयुक्त को निर्देशित किया कि वे अपने स्तर पर लोकार्पण और शिलान्यास की पूरी तैयारी रखें। सीएम योगी ने पटरी व्यापारियों के व्यवस्थित पुनर्वास पर जोर देते हुए यह निर्देश भी दिए कि पटरी व्यापारियों को वेंडिंग जोन में सम्मानजनक जगह और पूरी सहूलियत दी जाए।

अमित शाह ने ममता को दी चुनौती, कहा- 15 दिन तक बंगाल में ही रहूंगा

 कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है. चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच सीधे टक्कर देखने को मिली रही है. इसी क्रम में शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में नंदीग्राम पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ललकारते हुए बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने घोषणा की कि वह आगामी 15 दिनों तक लगातार पश्चिम बंगाल में ही रहकर चुनावी कमान संभालेंगे।  गुरुवार को अमित शाह कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि  मैं बंगाल चुनाव में 15 दिन तक बंगाल में ही रहने वाला हूं. मैं यहां खासतौर पर शुवेंदु अधिकारी के नामांकन के लिए आया हूं. शुभेंदु की जीत बंगाल में परिवर्तन की नींव रखेगी।  'बंगाल में होगी दीदी की हार' अमित शाह ने ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली बार दीदी नंदीग्राम में हार गई थीं और इस बार वह भवानीपुर के साथ-साथ पूरे बंगाल को खो देंगी. उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी का नामांकन बंगाल में टीएमसी के पतन की शुरुआत है. शाह ने जोर देकर कहा कि नंदीग्राम की जनता इस बार फिर से इतिहास दोहराएगी और ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।  'मैंने पूरे बंगाल का किया दौरा' उन्होंने दावा करते हुए कहा कि मैंने पूरे बंगाल का दौरा किया है और जहां भी जाता हूं, वहां एक ही आवाज़ गूंज रही है- ममता बनर्जी को बाय-बाय कर दो. चुनाव से पहले ही बंगाल का दौरा करें, जहां भी जाएं, हर जगह यही आवाज़ सुनाई दे रही है कि सरकार को विदा कर दो और ममता बनर्जी को बाय-बाय कह दो।  गृह मंत्री ने बंगाल की ज्वलंत समस्याओं को उठाते हुए कहा कि बंगाल की जनता टीएमसी की टोलबाजी और गुंडागर्दी से पूरी तरह त्रस्त है.आए दिन हो रहे बम धमाकों और बेरोजगारी से युवा परेशान हैं. राज्य में आए दिन होने वाले बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने घुसपैठियों को संरक्षण दिया है, जिससे राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है।  शाह ने युवाओं से वादा किया कि भाजपा सरकार आने पर बेरोजगारी को खत्म किया जाएगा और विकास की नई लहर लाई जाएगी, ताकि बंगाल फिर से अपनी पुरानी पहचान पा सके। 

AAP का बड़ा कदम: राघव चड्डा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया

नई दिल्ली राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ा झटका मिला है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है. इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी कैंची चली है. जी हां, आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा की जगह अब नया उपनेता चुना लिया है. अब आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक मित्तल राज्यसभा में उपनेता होंगे. आम आदमी पार्टी ने इस बाबत राज्यसभा सचिवालय को पत्र सौंपा है।  सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को यह भी सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए. दरअसल, राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे. लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे. चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।      सूत्र बताते हैं कि पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं. वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे।  राघव चड्ढा केजरीवाल के बरी होने पर भी चुप थे हालांकि, आम आमदी पार्टी ने इस फैसले के पीछे का कारण नहीं बताया है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है. राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।  राघव चड्ढा पर यह एक्शन क्यों? पहली वजह: जब दिल्ली में शराब कांड मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कईयों को जमानत मिली तब उस पर भी वह चुप थे।  दूसरी वजह: राघव राज्यसभा में पार्टी के कोटे से तय किए हुए समय में बोल रहे थे. इस वजह से पार्टी के अन्य सांसदों को मौका या तो नहीं मिल पाता था या कम मिलता था।  तीसरी वजह: पार्टी का स्टैंड सही से नहीं रख पा रहे थे या पार्टी के मुद्दों पर बोलने से बचते थे।  चौथी वजह: आप का अंदरूनी कलह  बहरहाल, राघव चड्डा ने इस पर अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. इस घटना से आम आदमी पार्टी का अंदरूनी कलह सामने आ गया है. राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल सीमित संख्या में सांसद हैं. संजय सिंह जेल में होने के बाद राघव चड्डा को अनौपचारिक रूप से उपनेता की जिम्मेदारी दी गई थी. वे कई महत्वपूर्ण बहसों में सक्रिय रहे. लेकिन पार्टी का कहना है कि व्यक्तिगत स्टाइल के बजाय सामूहिक फैसला जरूरी है।  राघव ने किन-किन मुद्दों को उठाया:     राइट टू रिकॉल (जनता को नेता वापस बुलाने का अधिकार)     मिडिल क्लास पर टैक्स बोझ:     खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा:     गिग वर्कर्स (10 मिनट डिलीवरी वाले कामगारों) की सुरक्षा     एयरपोर्ट पर महंगा चाय-पानी और फ्लाइट टिकट की समस्याएं  

बागेश्वर धाम में हनुमान जन्मोत्सव की धूम, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, देश-विदेश से पहुंचे हजारों लोग

छतरपुर  मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम में हनुमान जन्मोत्सव का भव्य और दिव्य उत्सव शुरु हो गया है। यहां देश और दुनिया से हजारों श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है। गुरुवार सुबह से ही महा आरती का क्रम जारी है। भक्त लगातार बालाजी महाराज के दर्शन कर रहे हैं। हजारों लोगों की भीड़ में यहां आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। ऋतु अनुसार षोडशोपचार पूजन और गाय के पवित्र दुग्ध से महाभिषेक के साथ बालाजी का भव्य श्रृंगार किया गया है। दरबार में 56 भोग, मिठाइयां, ताजे फल और सुगंधित फूलों से अद्भुत सजावट की गई है, जो यहां बालाजी के दर्शन करने आने वाले भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रही है। महा आरती की दिव्य ध्वनि से गूंज उठा धाम विशेष श्रृंगार के बाद जैसे ही बालाजी के पट खोले गए, महा आरती की दिव्य ध्वनि से पूरा धाम गूंज उठा। भक्त अपनी श्रद्धा भाव के साथ दर्शन – पूजन कर रहे हैं। इस तरह यहां आस्था की सुगम धारा निरंतर बह रही है। भीड़ को देखते हुए बालाजी के पट सामान्य समय से अधिक यानी एक घंटे ज्यादा खोलकर रखे गए हैं, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु बालाजी का दर्शन लाभ ले सकें। पुंडरीक गोस्वामी सुनाएंगे हनुमान कथा हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व पर श्री धाम वृंदावन के प्रख्यात कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी महाराज बागेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। गुरुवार शाम 4 बजे से 6 बजे तक श्रद्धालु उनके श्रीमुख से हनुमान जी की विशेष कथा का श्रवण करेंगे। पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि, रामनवमी और महाशिवरात्रि की तर्ज पर अब प्रतिवर्ष हनुमान जन्मोत्सव भी इसी भव्यता के साथ मनाया जाएगा। 21 हजार दीपों से होगी महाआरती उत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में शाम को 21 हजार लोग एक साथ बालाजी की महाआरती में शामिल होंगे। इसके बाद शाम 6 बजे से मानस सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के विद्वान मानस मर्मज्ञ रामचरितमानस का रसपान कराएंगे। इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश देना है। भोजपुरी गायक रितेश पांडे देंगे प्रस्तुति भक्तिमय शाम को और खास बनाने के लिए प्रसिद्ध भोजपुरी गायक रितेश पांडे अपनी प्रस्तुति देंगे। उनके साथ ही गुजरात से आए कलाकार भी विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे। इस संबंध में पंडित शास्त्री ने बताया कि, अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ क्षेत्रीय कलाकारों को मंच प्रदान कर प्रोत्साहित करने का काम किया जा रहा है, ताकि स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले।