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विक्रमोत्सव 2026 में एमपी टूरिज्म पवेलियन होगा मुख्य आकर्षण, पर्यटन स्थलों की होगी विस्तार से जानकारी

उज्जैन विक्रमोत्सव 2026 के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल के बीच वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है, जिसका भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होगा। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से बी.एल.डब्ल्यू. मैदान आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन में हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। वहीं इस दौरान मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत के साथ पर्यटन स्थलों के आकर्षक रूप में प्रदर्शित करता एमपी टूरिज्म पवेलियन आकार्षण का केंद्र होगा। सीएम की परिकल्पना से तैयार हुआ 'सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य' मुख्यमंत्री डॉ. यादव की परिकल्पना से तैयार पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के भाव निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अनुभव है। इसमें 200 से ज्यादा कलाकार हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां भव्य युद्ध लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्या झलकियां शामिल है। महान सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महा काव्य कथा इस महानाट्य में जीवंत होती है। प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा आयोजन सचिव, मुख्‍यमंत्री और पर्यटन डॉ. इलैयराजा टी. ने कहा कि, विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत वाराणसी में आयोजित यह महानाट्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, न्यायप्रियता और गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इस विशेष अवसर पर एमपी टूरिज्म पवेलियन इस दिशा में एक आकर्षक केंद्र बनेगा, जो आगंतुकों को प्रदेश की विविधता और वैभव से परिचित कराएगा। एमपी टूरिज्म पवेलियन बनेगा आकार्षण का केंद्र 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में एमपी टूरिज्म पवेलियन में प्रदेश की पारंपरिक कला और अद्भुत कारीगरी देखने को मिलेगी। खजूर की पत्तियों से बनी टेराकोटा कलाकृतियां भी लोगों का ध्यान आकर्षित करेगी। बुंदेली, गोंड और भील पेंटिंग्स में जनजातीय संस्कृति की झलक भी दिखेगी। एमपी के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल्स भी लगेंगे। फूट कोर्ट में इंदौर के प्रसिद्ध पोहा–जलेबी, मक्के के कीस, मालवा की कचौरी, डिंडौरी के उड़ल दाल व कोदो भात और कुटकी के गुड वाली खीर–जलेबी, बघेलखंडी निमोना और पुड़ी, बेड़ई पुड़ी और हींग वाले आलू जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ बुंदेलखंडी स्ननाटा छाछ, लेमन पुदिना, आम पना, सब्जा शिकंजी, गुलाब मलाई लस्सी, मावा बाटी जैसे शीतपेयों और मिष्ठान का नागरिक आनंद ले सकेंगे।  

12वें चरण की शराब दुकान नीलामी कल, आबकारी विभाग को मिलेगा पांच हजार करोड़ का राजस्व, टेंडर आज 2 बजे खुलेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत 1 अप्रैल से शराब के नए ठेके भले ही शुरू हो गए हों, लेकिन अब भी 650 समूह और दुकानें नीलामी से बाहर हैं। हालांकि इनमें से कई दुकानों को होल्ड पर रखा गया है, जिन्होंने आरपी से 20 प्रतिशत से ज्यादा पर आॅफर दिए हैं। कई बची हुई दुकानों के लिए बुधवार को 11वें राउंड की नीलामी आयोजित की गई। आबकारी विभाग के अनुसार, 11वें राउंड में 21 शराब दुकानें 130.97 करोड़ रुपए में बिकीं, जबकि इनका कुल रिजर्व प्राइस (आरपी) 150.60 करोड़ रुपए था। यानी इस राउंड में नीलामी आरपी से कम दर पर हुई। वहीं 10वें और 11वें राउंड में आरपी से 20 प्रतिशत से अधिक कम दर पर आए ऑफर को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। इनके बारे में सरकार एक-दो दिनों  में निर्णय लेगी। जिन दुकानों की नीलामी नहीं हो सकी, वहां फिलहाल आबकारी अमले द्वारा अस्थाई रूप से शराब की बिक्री की जा रही है, ताकि राजस्व प्रभावित न हो। विभाग के सामने अब भी सालाना लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है, जिसके लिए करीब 5,080 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाना बाकी है। प्रदेश में कुल 3,553 शराब दुकानें हैं, जिनमें से अब तक 11 राउंड 1200 समूहों और दुकानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। बची हुई दुकानों के लिए अब 12वें राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 3 अप्रैल दोपहर 2 बजे तक ई-टेंडर भरे जाएंगे और इसके तुरंत बाद टेंडर खोले जाएंगे।  बीओक्यू की शर्त फिर लागू, 30  फीसदी कम पर दे सकते हैं ऑफर 12वें राउंड में इस बार केवल ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यानी नीलामी (आॅक्शन) नहीं होगी। साथ ही बीओक्यू की शर्त को फिर से लागू कर दिया गया है। अब ठेकेदारों को आरपी से 30 प्रतिशत कम तक आॅफर देने की अनुमति होगी। इससे पहले के राउंड में यह सीमा हटा दी गई थी, जिसके चलते कई जगह 50 प्रतिशत तक कम आॅफर आए थे। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-टेंडर में ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% कम तक ही मान्य होगा। यानी 70% से कम का कोई भी ऑफर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे न्यूनतम बोली की सीमा तय की गई है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10वें और 11वें चरण में प्राप्त ऐसे प्रस्ताव, जो आरक्षित मूल्य के 80% या उससे अधिक हैं, उन्हें स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। वहीं 80% से कम के उच्चतम ऑफर्स को फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे आवेदकों को दोबारा ईएमडी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। समूह और इकाई स्तर पर होगी नीलामी इस चरण में शराब दुकानों की नीलामी समूह के साथ-साथ समूह में शामिल प्रत्येक दुकान के लिए अलग-अलग भी की जाएगी। राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए जिला समितियां सीमित संख्या में समूहों का पुनर्गठन करेंगी, जिसे आबकारी आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। जिन जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक है, वहां किसी भी समूह का मूल्य जिले के कुल आरक्षित मूल्य के 20% से ज्यादा नहीं रखा जाएगा। ई-टेंडर का शेड्यूल ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और ऑफर जमा करने की प्रक्रिया आज सुबह 11 बजे से शुरू हुई है, जो 3 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक चलेगी। टेंडर खोलने की प्रक्रिया 3 अप्रैल को दोपहर 2:05 बजे से शुरू होगी। अब तक 1200 समूहों की नीलामी 29 मार्च तक 1200 समूहों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जिससे लगभग 15,409.94 करोड़ रुपए का राजस्व तय हुआ है। यह आरक्षित मूल्य से 3.61% अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में इसमें 24.34% की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य स्तर पर 19,952.89 करोड़ रुपए के लक्ष्य में से अब तक 77.23% नीलामी हो चुकी है, जबकि करीब 5,080.35 करोड़ रुपए का कार्य अभी शेष है। विभाग को उम्मीद है कि लगातार ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी बनी रहेगी। अब तक की नीलामी का आंकड़ा –  वर्ष 2026-27 लक्ष्य: 19,952 करोड़ रुपए – कुल नीलामी: 1200 समूह – रिजर्व प्राइस: 14,872.54 करोड़ रुपए – प्राप्त राजस्व: 15,409.94 करोड़ रुपए – आरपी से वृद्धि: 3.61 प्रतिशत – पिछले वर्ष से वृद्धि: 24.34 प्रतिशत – अभी बाकी राजस्व: 5,080 करोड़ रुपए

भाजपा का बड़ा कदम, मध्य प्रदेश के 18 जिलों में नए जिला कार्यालय बनाएगी, एक साल में होंगे तैयार

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के 18 जिलों में नए और आधुनिक जिला कार्यालय बनाने जा रही है। इन सभी कार्यालयों का निर्माण एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। भाजपा के स्थापना दिवस 6 अप्रैल को सभी 18 जिलों में एक साथ इन कार्यालयों का भूमिपूजन किया जाएगा। पार्टी इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में है। पार्टी प्रत्येक जिला कार्यालय के निर्माण पर करीब डेढ़ करोड़ से ढाई करोड़ रुपए तक खर्च करेगी। इन भवनों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि संगठनात्मक कामकाज बेहतर तरीके से हो सके।  8 से 12 हजार वर्गफीट में बनेंगे भवन इन नए कार्यालयों का निर्माण 8 हजार से 12 हजार वर्गफीट क्षेत्र में किया जाएगा। छोटे जिलों में थोड़े छोटे और बड़े जिलों में बड़े भवन बनाए जाएंगे। सभी सुविधाओं से होंगे लैस हर जिला कार्यालय में मीटिंग हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, डिजिटल सुविधा, कंप्यूटर कक्ष और कार्यकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था होगी। कुछ जगहों पर छोटे गेस्ट रूम भी बनाए जाएंगे। पार्टी ने तय किया है कि सभी कार्यालयों का निर्माण एक साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, ताकि 2027 तक इनका उपयोग शुरू हो सके। इन जिलों में बनेंगे कार्यालय इन नए कार्यालयों का निर्माण प्रदेश के कई जिलों में किया जाएगा, जिनमें प्रमुख रूप से सीधी, शहडोल, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पन्ना, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी, बालाघाट, सिंगरौली और आगर-मालवा शामिल हैं। 

पेट के मोटापे की समस्या: भारत में 10 में से 6 महिलाएं शिकार, कमर के साइज से जानें खतरा

भोपाल  भारत में 30 से 49 साल की हर दस में पांच-छह महिलाओं को पेट की चर्बी की समस्या है. पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं इससे जूझ रही हैं. डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण. BMI से बेहतर कमर नापना जरूरी, क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. भारत में मोटापे की परिभाषा बदल रही है क्योंकि एक्सपर्ट अब सिर्फ वेट मशीन पर दिखने वाले वजन से ही लोगों को ओवरवेट या मोटापे का शिकार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे अब कमर के बढ़ते साइज से भी मोटापे का पता लगा रहा हैं।  डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं 'एब्डोमिनल ओबेसिटी' यानी पेट के मोटापे का ज्यादा शिकार हो रही हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 से 49 साल की उम्र वाली 10 में से करीब 6 महिलाएं इस समस्या से घिरी हुई हैं।  एक्सपर्ट्स इसे एक मेटाबॉलिक इमरजेंसी मान रहे हैं।  क्या कहती है रिसर्च? आमतौर पर हम मोटापे को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से नापते हैं, लेकिन यह स्टडी बताती है कि BMI शरीर की असल स्थिति छुपा सकता है क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. कई बार वजन सामान्य होने के बावजूद पेट पर जमी चर्बी अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक होती है इसलिए कमर की माप मापना सही रहेगा।  स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण है।  स्टडी बताती है कि भारत में महिलाओं में एब्डॉमिनल ऑबेसिटी पुरुषों से ज्यादा है. NFHS-5 (2019-21) डेटा से पता चलता है कि भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं. महिलाओं के लिए 80 सेमी और पुरुषों के लिए 94 सेमी से अधिक कमर का घेरा इस खतरे की श्रेणी में आता है. यह समस्या अब गांवों और मिडिल क्लास तक फैल चुकी है।  फोर्टिस C-DOC के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं, 'कमर नापना आसान है. हर डॉक्टर को मेजरमेंट टेप रखना चाहिए. यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर का संकेत देता है. BMI एशियंस के लिए सटीक नहीं इसलिए वेस्ट सर्कम्फरेंस (कमर का घेरा) पर फोकस करें. यह ट्रेंड टीनएजर्स में भी दिख रहा, जो बचपन की कुपोषण के बाद फास्ट लाइफस्टाइल से प्रभावित हैं।  कारण और जोखिम रिसर्च के मुताबिक, उम्र बढ़ना, शहरों में रहना, अधिक कमाई और नॉन-वेज खाना महिलाओं में पेट की चर्बी बढ़ा रहा. लीवर-पैंक्रियास के आसपास फैट मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ाता है. स्टडी चेतावनी देती है इससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और यहां तक कि ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  खासकर मिड एज की लड़कियों में यह ट्रेंड अधिक देखा जा रहा है जो कम उम्र में खराब न्यूट्रिशन और फिर अचानक बदली हुई लाइफस्टाइल का नतीजा है।  कैसे रोक सकते हैं इस समस्या को एक्सपर्ट्स कहते हैं, टेप से कमर नापें और रूटीन चेकअप कराएं. हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. अब जनरल ऑबेसिटी नहीं बल्कि एब्डॉमिनल पर भी ध्यान देने की जरूरत है. ये समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है इसलिए शहरी महिलाओं को खास ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स अब सलाह दे रहे है कि वजन चेक करने के साथ-साथ अपनी कमर का घेरा नापना भी उतना ही जरूरी हो गया है। 

Rupee vs Dollar: RBI का बड़ा फैसला, रुपये में आई 12 साल की सबसे बड़ी तेजी

नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को लेकर कुछ कड़े फैसले लिए हैं, जिस कारण रुपये में गिरावट सिर्फ थमी ही नहीं, बल्कि बड़ी उछाल आई है. RBI द्वारा करेंसी में अस्थिरता को कम करने के लिए अतिरिक्‍त उपाय पेश करने के लिए एक दिन बाद यह तेजी आई है।  2 अप्रैल को डॉलर की तुलना में रुपये में 12 सालों से ज्‍यादा समय में सबसे अधिक तेजी देखी गई है, जबकि बैंक अपने ऑफशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन को कम करना जारी रखे हुए थे. करेंसी मार्केट खुलने के बाद करेंसी ट्रेड फिर से शुरू होने पर रुपया डॉलर के मुकाबले 1.8 प्रतिशत तक बढ़कर 93.17 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे ज्‍यादा है।  क्‍यों आई इतनी बड़ी तेजी?  1 अप्रैल को, RBI ने फॉरेक्‍स मार्केट के नियम को कड़ा किया है. आरबीआई ने बैंकों को रेजिडेंस और नॉन-रेजिडेंस कस्‍टमर्स को रुपये के नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड (एक तरह का फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट) जारी करने से रोक दिया. नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड एक तरह का कॉन्‍ट्रैक्‍ट है, जो  फ्यूचर में रुपया का स्‍तर क्‍या होगा? उस आधार पर खरीदारी करने की अनुमति देता है. एक तरह से आप इसे करेंसी में डेरिवेटिव ट्रेडिंग भी कह सकते हैं. बस इसी कॉन्‍ट्रैक्‍ट को जारी करने से आरबीआई ने रोक लगा दी है. आरबीआई ने यह भी कहा कि कंपनियां रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट को दोबारा बुक नहीं कर सकतीं।  रुपये में गिरावट के कई कारण  सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रही है. मार्च महीने में ही विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने 1.11 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग कर डाली थी. इसके साथ ही जंग के शुरू होने से दुन‍िया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है. साथ ही होमुर्ज के रास्‍ते के बंद होने की वजह से कच्‍चे तेल के दाम में लगातार तेजी रही है, जिस कारण रुपये में लगातार गिरावट रही है।  वहीं रुपये पर बैंकों के शुद्ध खुले पदों के जोखिम को सीमित करने के लिए आरबीआई द्वारा कदम उठाए जाने के बावजूद, 30 मार्च को करेंसी में 95 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया. हालांकि, ट्रंप के ईरान वॉर को लेकर दिए गए संबोधन के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।   कच्‍चे तेल के भाव में उछाल  ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान जंग को लेकर अपने लक्ष्‍यों को लगभग हासिल कर ही लिया है. 2 से 3 हफ्तों के दौरान हम एक बड़ा कदम उठाएंगे. हालांकि उन्‍होंने जंग को समाप्‍त करने की कोई समयसीमा नहीं बताई, जिस कारण कच्‍चे तेल के भाव में तगड़ी उछाल देखने को मिली और यह 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया। 

ट्रंप ने किया मैक्रों का मजाक, कहा- उनकी पत्नी बहुत बुरा बर्ताव करती हैं

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का मजाक उड़ाया है। एक लंच के दौरान ट्रंप ने कहा, "मैंने फ्रांस के मैक्रों को फोन किया, जिनकी पत्नी उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती हैं। अब भी उस मुक्के से उबर रहे हैं, जो उन्होंने मुंह पर मारा था।" ट्रंप का यह कमेंट एक वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और यह व्हाइट हाउस के यूट्यूब चैनल पर भी अपलोड कर दिया गया। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने पर वीडियो को ब्लॉक कर दिया गया। ट्रंप ने यह कमेंट पिछले साल मई के उस वीडियो को लेकर की थी, जिसमें मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट वियतनाम यात्रा के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति को धक्का देते हुए कैमरे में कैद हो गई थीं। हालांकि, बाद में मैक्रों ने दुष्प्रचार बताते हुए खारिज कर दिया था। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच उन्होंने खुद फ्रांस से सैन्य मदद मांगी थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हमें उनकी जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी मैंने उनसे मदद मांगी।" ट्रंप ने कहा, "और मैंने कहा, इमैनुएल, हम खाड़ी में थोड़ी मदद पाकर खुश होंगे, भले ही हम बुरे लोगों और बैलिस्टिक मिसाइलों को खत्म करने के मामले में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। हमें थोड़ी मदद मिल जाए तो अच्छा रहेगा। अगर आप ऐसा कर सकें, तो क्या आप कृपया तुरंत कुछ जहाज भेज सकते हैं?'' इसके बाद ट्रंप ने मैक्रों के फ्रेंच लहजे में नकल करते हुए कहा, ''नहीं नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते डोनाल्ड, हम यह युद्ध जीतने के बाद कर सकते हैं।'' ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि नहीं हमें युद्ध जीतने के बाद कोई मदद की जरूरत नहीं है। पत्नी संग वायरल हुआ था मैक्रों का वीडियो पिछले साल मैक्रों और उनकी पत्नी का वीडियो सामने आया था, जो चर्चा का विषय बन गया। इसमें दिखाया गया कि दक्षिण-पूर्व एशिया की अपनी आधिकारिक यात्रा शुरू करने के लिए वियतनाम पहुंचने पर, राष्ट्रपति की पत्नी ने अचानक एक झटके के साथ उनका चेहरा एक तरफ हटा दिया। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही प्लेन का दरवाजा खुलता है, तुरंत सामने मैक्रों दिखाई देते हैं। उसी दौरान उनकी पत्नी का हाथ सामने आता है और मैक्रों के चेहरे को दूसरी ओर धक्का देती हैं। यह घटना वहां मौजूद क्रू भी देखती है और सामने लगे कैमरे में भी कैद होती है। जब मैक्रों को पता चलता है कि वीडियो बनाया जा चुका है, तो वह झेंपते हुए एक हल्की सी स्माइल पास करते हैं और कैमरे के सामने हाथ हिलाते हैं। बता दें कि मैक्रों ने ब्रिगिट मैक्रों से शादी की थी, जोकि उनकी हाईस्कूल में टीचर थीं। दोनों का रिश्ता तब शुरू हुआ था, जब मैक्रों की उम्र महज 15 साल थी। उस समय ब्रिगिट एमियंस के ला प्रोविडेंस स्कूल में 39 साल की टीचर थीं। दोनों के बीच लगभग 25 साल का गैप होने के बाद भी, साल 2007 में शादी कर ली थी।

नीतीश कुमार 11 अप्रैल को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से करेंगे मुलाकात और बिहार में नई सरकार के गठन पर होगी चर्चा

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बस चंद दिनों तक ही सीएम रहेंगे. नई सरकार की सुगबुगाहट प्रदेश में तेज हो गई है. एक तरफ नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेंगे तो दूसरी ओर बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा. कौन होगा इसकी तस्वीर साफ नहीं हुई है लेकिन कुछ ही दिनों में सब कुछ सामने होगा. खबर है कि नीतीश कुमार 09 अप्रैल को दिल्ली के रवाना होंगे. वहीं 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर वे शपथ लेंगे. 11 अप्रैल को पीएम मोदी से दिल्ली में बिहार में बनने वाली नई सरकार पर चर्चा के लिए मुलाकात हो सकती है. इसके बाद नीतीश कुमार 11 अप्रैल की शाम या फिर 12 अप्रैल को पटना लौट आएंगे. 13 अप्रैल को हो सकती है पटना में बैठक सूत्रों की मानें तो बिहार में बनने वाली नई सरकार पर रायशुमारी, चर्चा के लिए 13 अप्रैल को पटना में एनडीए की बैठक हो सकती है. 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के बाद नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसके बाद एनडीए विधानमंडल की बैठक बुलायी जाएगी जिसमें नेता चुना जाएगा. 18 अप्रैल के आसपास बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है. इस तारीख से अगर देखें तो अब नीतीश कुमार कुछ ही दिनों तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. प्रदेश के कामकाज को नहीं छोड़ रहे नीतीश बता दें कि एक तरफ जहां नई सरकार की तैयारी हो रही है और नीतीश कुमार को सीएम पद छोड़ना है इन सबके बीच वे प्रदेश के विकास कार्यों को पूरा करने में जुटे हैं. गुरुवार (02 अप्रैल, 2026) को नीतीश कुमार ने शहर की विभिन्न निर्माणाधीन योजनाओं का निरीक्षण किया. वे पाटलिपुत्रा कॉलोनी में निर्माणाधीन पार्क नंबर 113 का निरीक्षण करने पहुंचे. यहां लोगों के घूमने-फिरने, जिम, बच्चों के खेल-कूद की सुविधाएं सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली. इसके बाद पाटलि पथ पर रूककर नेहरू पथ को पाटलिपथ से जोड़ने के लिए किए जा रहे निर्माण कार्य के संबंध में जानकारी ली. रूपसपुर नहर के समीप रूककर खगौल नेहरू पथ-अशोक राजपथ को जोड़नेवाले रूपसपुर नहर पथ के प्रस्तावित फोरलेन चौड़ीकरण कार्य एवं मजबूतीकरण कार्य के संबंध में जानकारी ली. सगुना मोड़ के पास रूककर रूपसपुर नहर से सगुना मोड़ तक नेहरू पथ के दोनों तरफ भूमिगत नाला के साथ पथ के चौड़ीकरण के संबंध में जानकारी ली.  

नक्सल सन्नाटे से विकास की रफ्तार तक: ककनार घाटी में लौटी सामान्य जिंदगी

रायपुर बस्तर की भौगोलिक विषमताओं और कठिन परिस्थितियों के बीच विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी। ककनार घाटी के नीचे बसे सुदूर गांव कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम जो कभी वामपंथी आतंक के गढ़ माने जाते थे, आज मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। इन गांवों के निवासियों के लिए पक्की सड़क का निर्माण एक ऐसा सपना था, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था, क्योंकि घाटी की दुर्गम ढलान और माओवाद के साये ने विकास के हर रास्ते को अवरुद्ध कर रखा था। लेकिन आज उन्हीं संकरी पगडंडियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर बनी नई सड़क में बस का दौड़ना बस्तर की बदलती तस्वीर का सबसे सशक्त प्रमाण है। ज्ञात हो कि बस्तर जिले में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना की शुरूआत बीते 04 अक्टूबर 2025 को केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के द्वारा की गई थी। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के माध्यम से जिले के चार चयनित मार्गों पर बस सेवा संचालित की जा रही है।          मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत शुरू हुई यह बस सेवा केवल एक वाहन नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की एक कड़ी है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार रायपुर द्वारा स्वीकृत समय-सारणी के अनुसार यह बस प्रतिदिन कोण्डागांव जिले के मर्दापाल से अपनी यात्रा शुरू करती है और ककनार घाटी के नीचे बसे उन गांवों को जोड़ती है जहाँ कभी पैदल चलना भी जोखिम भरा था। घाटी के इन दुर्गम अंचलों से होते हुए बस धरमाबेड़ा और ककनार जैसे पड़ावों को पार कर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचती है। इससे उन लोगों का सफर अब सुगम हो गया है जिन्होंने दशकों तक केवल सड़क और बस का इंतजार किया था।          वामपंथी समस्या के कमजोर पड़ने और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते अब इन संवेदनशील इलाकों में सड़कों का निर्माण संभव हो पाया है। पक्की सड़कों के इस जाल ने न केवल परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि ककनार घाटी के नीचे बसे ग्रामीणों के मन से अलगाव का डर भी खत्म कर दिया है। अब शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए ग्रामीणों को मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता। यह निरंतर बस सेवा इस बात का प्रतीक है कि बस्तर का वह हिस्सा जो कभी अंधेरे में खोया हुआ माना जाता था, अब पूरी रफ्तार के साथ प्रगति की राह पर अग्रसर है। घाटी की ऊंचाइयों से उतरकर यह बस आज हर ग्रामीण के घर तक शासन की योजनाओं और खुशहाली का संदेश पहुँचा रही है। इस बारे में चंदेला के सरपंच  तुलाराम नाग कहते हैं कि करीब दो साल पहले तक इस ईलाके में माओवादी समस्या के कारण विकास थम सी गई थी लेकिन आज सड़क बन जाने के साथ ही विकास को एक नई दिशा मिल चुकी है। इस ईलाके में स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र की सेवाओं के साथ ही उचित मूल्य दुकान में खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी सामग्री सुलभ हो रही है वहीं समीपस्थ ग्राम ककनार में साप्ताहिक बाजार की रौनक देखते ही बनती है। क्षेत्र के ककनार सरपंच  बलीराम बघेल बताते हैं कि पहले उन्हे अपने तहसील मुख्यालय लोहण्डीगुड़ा और जिला मुख्यालय तक जाने मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सड़क के बन जाने से बारहमासी आवागमन की सुविधा मिल रही है।

इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 4% रोड टैक्स लागू, खरीदना पड़ेगा महंगा सौदा

भोपाल  राज्य परिवहन विभाग ने ईवी रजिस्ट्रेशन के नियमों में संशोधन किया है। अब तक जिन इलेक्ट्रिक वाहनों पर शून्य रोड टैक्स लगता था, उन पर अब चार प्रतिशत तक टैक्स वसूलने की तैयारी कर ली गई है। इस फैसले से उन खरीदारों को बड़ा झटका लगा है, जो पर्यावरण संरक्षण और टैक्स बचत के नाम पर महंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने की योजना बना रहे थे। नए नियमों के लागू होने के बाद गणित पूरी तरह बदल गया है। 20 लाख की कार पर अब 80 हजार रुपये अतिरिक्त उदाहरण के तौर पर, पहले जहां 20 लाख रुपये की इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स के नाम पर शून्य भुगतान करना पड़ता था, वहीं अब चार प्रतिशत टैक्स के हिसाब से खरीदार को लगभग 80 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। यह बदलाव न केवल कारों पर, बल्कि टू-व्हीलर और कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर भी असर डालेगा। परिवहन विभाग का कहना है कि प्रदेश में ईवी की बढ़ती संख्या और बुनियादी ढांचे (चार्जिंग स्टेशन आदि) के विकास के लिए राजस्व जुटाना आवश्यक है, इसलिए यह फैसला लिया गया है। बिक्री की रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका हालांकि ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ईवी की बिक्री की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। लोग अब पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड गाड़ियों के साथ ईवी की कीमतों की तुलना नए सिरे से करेंगे। टैक्स में इस बढ़ोत्तरी के कारण हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच का अंतर कम हो जाएगा, जिससे ग्राहकों का रुझान बदल सकता है। शासन के निर्देशानुसार इलेक्ट्रिक वाहनों के टैक्स स्लैब में संशोधन किया गया है। अब तक ईवी को बढ़ावा देने के लिए शत-प्रतिशत छूट दी जा रही थी। अब चार प्रतिशत का टैक्स प्रभावी किया गया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। – जितेंद्र शर्मा, आरटीओ, भोपाल  

हाईकोर्ट की फटकार: ‘इतना अश्लील गाना’ पर हनी सिंह और बादशाह को आदेश, विवादित गाने को हटाने का निर्देश

नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाते हुए मशहूर रैपर हनी सिंह और बादशाह के पुराने विवादित गाने ‘माफिया मुंडीर’ (वॉल्यूम 1) को लेकर बड़ा आदेश दिया है. अदालत ने साफ कहा है कि इस गाने को यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटा दिया जाए. 2000 के दशक का यह गाना लंबे समय से अपने लीरिक्स और कॉन्टेंट को लेकर विवादों में रहा है, लेकिन अब कोर्ट ने इस पर कानूनी हथौड़ा चला दिया है।  हाईकोर्ट के जज ने मामले की सुनवाई के दौरान इस गाने की कॉन्टेंट पर गहरी नाराजगी और चिंता जताई. जज ने हनी सिंह और बादशाह को फटकार लगाते हुए कहा कि इस गाने के बोल बेहद अश्लील, अभद्र और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले हैं. जज ने कड़े शब्दों में कहा कि इस गाने ने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है. कोर्ट का कहना है कि कोई भी सभ्य समाज ऐसे कंटेंट को इंटरनेट पर मौजूद रहने की अनुमति नहीं दे सकता जो महिलाओं के प्रति इतना अपमानजनक और भद्दा हो।  नए कलाकारों के लिए सीख यह फैसला डिजिटल स्पेस में मौजूद कॉन्टेंट की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. सालों पहले रिलीज हुए इस गाने पर कोर्ट का यह कमेंट उन कलाकारों के लिए भी एक मैसेज है जो अपने काम में अभद्रता परोसते हैं. अब देखना यह है कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इस आदेश का कितनी जल्दी पालन करते हैं और क्या आने वाले समय में ऐसे अन्य गानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी. अपने आदेश में कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि गायक हनी सिंह और बादशाह दोनों ने इस गाने को गाने से इनकार किया है, लेकिन एक कॉन्सर्ट के दौरान इस गाने के बोल प्रस्तुत किए गए थे. मामले को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई है और इस तरह के कंटेंट पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘माफिया मुंडीर’ हनी सिंह, रफ्तार और बादशाह जैसे कलाकारों का एक ग्रुप था, जो रैप की दुनिया में बेहद पॉपुलर हुआ, लेकिन आपसी मतभेदों की वजह से टूट गया. हनी सिंह ने अब जनवरी 2026 में ‘माफिया मुंडीर 2.0’ (इंटरनेशनल सीजन 1) के साथ कमबैक का ऐलान किया था।