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INS अरिदमन और INS तारागिरी के साथ समंदर में ताकतवर हुई इंडिया, दुश्मन को मिलेगा डर

विशाखापट्टनम  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखकर INS अरिदमन नामक भारत के तीसरे स्वदेशी न्यूक्लियर पनडुब्बी के लॉन्च का संकेत दे दिया. उन्होंने लिखा कि यह कोई शब्द नहीं, यह ताकत है, ‘अरिदमन’. यह पनडुब्बी भारत की समुद्री न्यूक्लियर सुरक्षा को और मजबूत करेगी. इसके अलावा वो  विशाखापट्टनम में एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को भी नौसेना को सौपेंगे।  INS अरिदमन में लंबी दूरी की मिसाइलें लगाई गई हैं जो दुश्मन को ज्यादा दूर से निशाना बना सकेंगी. अब यह पनडुब्बी अंतिम समुद्री परीक्षण पूरा कर चुकी है. जल्द ही स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड में शामिल हो जाएगी. इससे पहले INS अरिहंत 2016 में और INS अरिघात अगस्त 2024 में सेवा में शामिल हो चुकी हैं।  राजनाथ सिंह का पोस्ट और विशाखापट्टनम दौरा राजनाथ सिंह इन दिनों विशाखापट्टनम में हैं जहां भारत की सभी न्यूक्लियर पनडुब्बियों को बनाया जाता है. आज वे यहां स्वदेशी बनी एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी को कमीशन करेंगे. इसी दौरान उन्होंने अरिदमन के बारे में पोस्ट किया. नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने दिसंबर 2025 में ही कहा था कि अप्रैल-मई के बीच यह पनडुब्बी सेवा में आ जाएगी. अब अंतिम परीक्षण पूरे हो चुके हैं।  पिछली पनडुब्बियों से क्या फर्क है INS अरिहंत और INS अरिघात की तुलना में अरिदमन ज्यादा बेहतर है. इसमें आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब लगाए गए हैं जबकि अरिहंत में सिर्फ चार थे. मतलब यह एक साथ ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगी. इसमें आठ K-4 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं जिनकी रेंज 3500 किलोमीटर है या फिर 24 K-15 मिसाइलें जिनकी रेंज 750 किलोमीटर है. इससे भारत की समुद्री न्यूक्लियर ताकत बहुत बढ़ जाएगी. पनडुब्बी का हल्का डिजाइन इसे और चुपके से चलने में मदद करेगा।  समुद्री सुरक्षा में नई ताकत अरिदमन के शामिल होने से भारत कंटीन्यूअस एट-सी डिटेरेंस बना सकेगा. यानी हमेशा कम से कम एक न्यूक्लियर पनडुब्बी समुद्र में गश्त पर रहेगी. इससे दुश्मन कभी भी हमला करने का सोचेगा तो सोच-समझकर सोचेगा. यह पनडुब्बी भारत की नो फर्स्ट यूज न्यूक्लियर नीति को मजबूत करती है. स्वदेशी रूप से बनी होने से विदेशी पार्ट्स पर निर्भरता कम हुई है. देश की डिफेंस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिला है।  INS अरिदमन क्या है? INS अरिदमन एक एडवांस न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो अरिहंत-क्लास का हिस्सा है. इसे 'S4' कोडनेम के साथ विकसित किया गया है. इसकी लंबाई करीब 125 मीटर और वजन 7,000 टन है, जो इसे पहले मॉडलों से 1000 टन ज्यादा भारी बनाता है. यह पनडुब्बी भारतीय नौसेना के एडवांस्ड तकनीक वाहन (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विशाखापत्तनम में बनाई गई है।  यह क्यों खास है? बढ़ी हुई ताकत: INS अरिदमन में 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो इसे 24 छोटी रेंज की K-15 मिसाइलें (750 किमी रेंज) या 8 लंबी रेंज की K-4 मिसाइलें (3500 किमी रेंज) ले जाने की क्षमता देते हैं. यह पहले की पनडुब्बियों की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली है।  चुपके की तकनीक: इसमें बेहतर सोनार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग और शोर-कम करने वाली तकनीक है, जिससे यह दुश्मन के लिए पता करना मुश्किल हो जाता है।  लंबी दूरी: K-4 मिसाइलों के साथ यह दुश्मन के गहरे इलाकों को निशाना बना सकती है, जो भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी है।  स्वदेशी तकनीक: इस पनडुब्बी में करीब 70% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।  भारत को क्या फायदा होगा? न्यूक्लियर ट्रायड मजबूत: INS अरिदमन के साथ भारत की जमीन, हवा और समुद्र से न्यूक्लियर हमले की क्षमता (न्यूक्लियर ट्रायड) और मजबूत होगी. यह भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति को सपोर्ट करता है, यानी दुश्मन पहले हमला करे तो जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना।  चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सुरक्षा: चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए यह पनडुब्बी एक मजबूत जवाबी ताकत होगी।  समुद्री सुरक्षा: अरब सागर और हिंद महासागर में भारत की मौजूदगी बढ़ेगी, जो क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है।  रणनीतिक संतुलन: यह पनडुब्बी भारत को अपने दुश्मनों के खिलाफ दूसरा हमला (सेकंड स्ट्राइक) करने की क्षमता देती है, जो शांति बनाए रखने में मदद करेगी।  INS तारागिरी के फीचर्स  यह स्वदेशी रूप से बनी प्रोजेक्ट 17A की स्टील्थ फ्रिगेट है. इसका मतलब है कि यह दुश्मन के रडार में आसानी से नहीं पकड़ी जाती. यह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) मुंबई में बनाई गई है. इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा सामान भारत में ही बना है।  यह फ्रिगेट करीब 6670 टन वजन की है. इसकी लंबाई 149 मीटर है. यह 52 km/hr की स्पीड से चल सकती है. लंबी यात्रा के लिए इसका रेंज 10186 किलोमीटर तक है. इसमें दो डीजल इंजन और दो गैस टर्बाइन लगे हैं जो इसे तेज और लंबे समय तक चलने की ताकत देते हैं।  इसका डिजाइन बहुत चिकना और स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाला है. रडार, इंफ्रारेड और आवाज को कम करने वाली खास सामग्री इस्तेमाल की गई है ताकि दुश्मन इसे आसानी से न देख सके. इसमें 225 नाविकों की टीम काम करती है।  इसमें क्या हथियार लगे हैं INS तारागिरी में दुनिया के बेहतरीन हथियार लगाए गए हैं. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक सतह से सतह मारने वाली मिसाइलें हैं जो दुश्मन के जहाजों को दूर से नष्ट कर सकती हैं. मीडियम रेंज की सतह से हवा में मारने वाली मिसाइलें भी हैं. दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढने और मारने के लिए खास एंटी-सबमरीन सिस्टम है।  इसके अलावा 127 मिलीमीटर का बड़ा मुख्य तोप भी लगा है. सब कुछ आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा है ताकि पल भर में फैसला लिया जा सके. यह फ्रिगेट समुद्र, हवा और पानी के नीचे तीनों तरह की लड़ाई लड़ सकती है।  यह क्यों महत्वपूर्ण है तारागिरी प्रोजेक्ट 17A की सात फ्रिगेट्स में से चौथी है. इससे पहले वाली शिवालिक क्लास से यह ज्यादा बड़ी, बेहतर और स्टील्थ वाली है. इसका मकसद भारतीय नौसेना को और ताकतवर बनाना है खासकर हिंद महासागर में. यह न सिर्फ लड़ाई के लिए है बल्कि मानवीय मदद, आपदा राहत और डिप्लोमेसी के कामों में भी इस्तेमाल होगी। 

उत्तर प्रदेश का सोलर अभियान: 2025-26 में 3.47 लाख संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य

सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग, 2025-26 में रिकॉर्ड 3.47 लाख संयंत्र स्थापित मार्च में सर्वाधिक 52,729 इंस्टॉलेशन, कुल क्षमता 1161 मेगावाट के पार अप्रैल से मार्च तक इंस्टालेशन में हुई लगातार बढ़ोतरी, अंतिम तिमाही में जबरदस्त उछाल ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ता प्रदेश, कुल क्षमता 1524 मेगावाट से अधिक लखनऊ उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए रिकॉर्ड 3,47,729 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए हैं। इस दौरान राज्य की कुल स्थापित क्षमता 1161.756 मेगावाट तक पहुंच गई, जो प्रदेश की ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी को दर्शाता है।    माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष की शुरुआत अप्रैल 2025 में 15,836 इंस्टॉलेशन से हुए थे, जो मई और जून में बढ़कर क्रमशः 18,509 और 18,494 तक पहुंच गए। जुलाई से इस रफ्तार में बड़ी उछाल देखने को मिली, जहां 29,850 संयंत्र स्थापित हुए और क्षमता 100 मेगावाट के पार पहुंच गई। अगस्त और सितंबर में भी यह गति बरकरार रही, जबकि अक्टूबर में थोड़ी गिरावट के बाद नवंबर और दिसंबर में फिर से तेजी आई। नवंबर में 30,894 और दिसंबर में 31,164 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए।     वास्तविक तेजी वर्ष के अंतिम तीन महीनों में देखने को मिली। जनवरी 2026 में 33,314, फरवरी में 35,804 और मार्च में रिकॉर्ड 52,729 संयंत्र स्थापित किए गए, जो पूरे वर्ष का सर्वाधिक आंकड़ा रहा। केवल मार्च माह में ही 173.84 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो किसी एक माह में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है।    यूपीनेडा के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि अंतिम तिमाही में आई यह तेजी सरकार की प्रभावी नीतियों, सब्सिडी योजनाओं और जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन का परिणाम है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली भी उपलब्ध हो रही है।    इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में तेजी से उभर रहा है। उत्तर प्रदेश पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में नंबर वन राज्य बन गया है। कुल मिलकर उत्तर प्रदेश में कुल 4,48,233 सोलर रूफटॉप इंस्टॉल किए जा चुके हैं, जिससे रोजाना 1524  मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। लगातार बढ़ती इंस्टॉलेशन दर यह संकेत देती है कि आने वाले समय में प्रदेश ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को और तेजी से हासिल करेगा।

ईरान ने कहा, दूसरा अमेरिकी F-35 जेट किया गया गिरा

तेहरान  अमेरिका-ईरान जंग का आज 35वां दिन है. जंग भीषण होती जा रही है. इस बीच ईरान ने आज एक बड़ा दावा किया है. ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने बमबारी करने आए एक और अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को मार गिराया है. हालांकि, इसकी अभी स्वंतत्र एजेंसियों से पुष्टि नहीं हो सकी है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी फाइटर जेट को उसने सेंट्रल ईरान में मार गिराया. ये दूसरा F-35 जेट है जिसे मार गिराने का ईरान ने दावा किया है. साथ ही ईरानी सेना ने कहा कि हिट हुए इस विमान के पायलट के बचने के चांस कम ही हैं।  F-35 अमेरिका का सबसे मजबूत स्टील्थ फाइटर जेट माना जाता है. ईरान ने इससे पहले एक और F-35 फाइटर जेट को हिट किया था और जिसमें काफी नुकसान पहुंचा था।  ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने इस हाई-टेक विमान को सेंट्रल ईरान के ऊपर सटीक निशाना बनाया. ईरान का दावा है कि यह फाइटर जेट ब्रिटेन के 'आरएएफ लाकेनहीथ' (RAF Lakenheath) बेस की एक खास स्क्वाड्रन से जुड़ा हुआ था. हालांकि, अभी तक अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन ईरान अपनी बात पर पूरी तरह अड़ा हुआ है।  ईरानी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही मिसाइल विमान से टकराई, उसमें जोरदार धमाका हुआ और वह मलबे में तब्दील हो गया. सेना का मानना है कि इतनी भीषण टक्कर और विस्फोट के बाद पायलट का बच पाना लगभग नामुमकिन है. गौर करने वाली बात यह है कि यह दूसरा मौका है जब ईरान ने अमेरिका के सबसे एडवांस फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया है. इससे पहले भी एक जेट को बुरी तरह नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी।  इससे पहले 19 मार्च 2026 को भी ईरान ने दुनिया को तब हैरान कर दिया था, जब उसने पहली बार इस 'अदृश्य' माने जाने वाले स्टील्थ जेट को मार गिराया था. युद्ध के इतिहास में यह पहली बार था जब कोई F-35 किसी हमले का शिकार हुआ हो. दिलचस्प बात यह थी कि उस वक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के पास अब कोई डिफेंस सिस्टम नहीं बचा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद ईरान ने उसी F-35 को ट्रैक किया, लॉक किया और सीधे ढेर कर दिया. अब एक बार फिर ईरान ने वैसा ही दावा किया है।  F-35 को दुनिया का सबसे स्मार्ट और 'अदृश्य' विमान माना जाता है. इसे इस तरह बनाया गया है कि यह दुश्मन के राडार की पकड़ में न आए और चुपके से हमला कर सके. अगर ईरान का यह दावा सच निकलता है, तो यह अमेरिकी वायुसेना के लिए बहुत बड़ा तकनीकी और सामरिक झटका साबित होगा।  

मध्य प्रदेश में 12 लाख कर्मचारियों को राहत, DA में 3% की बढ़ोतरी, मई में मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

भोपाल  अप्रैल की शुरुआत मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है। प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 3 फीसदी महंगाई भत्ता और राहत भत्ता बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया है। आगे अब एरियर 6 किस्तों में मिलेगा, 4200 रुपए तक सैलरी में बढ़ोतरी होगी, बढ़ी हुई राशि अप्रेल की सैलरी में जोड़कर मई में दी जाएगी। सरकार ने पेंशनरों को भी बड़ी सौगात दी है, उनकी मंहगाई राहत 58% और 257% तक बढ़ गई है। जारी आदेश के अनुसार सातवें वेतनमान के अंतर्गत कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अब दिनांक एक जुलाई 2025 से (भुगतान माह अगस्त 2025 से) 55 प्रतिशत से 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत होगा वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2025 से कुल 58 प्रतिशत देय माना जाएगा। सरकार द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 3 प्रतिशत की इस वृद्धि के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत हो जाएगा। यह निर्णय राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा। 6 किश्तों में होगा एरियर का भुगतान वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों को महंगाई भत्ते में हुई वृद्धि का लाभ एक जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक की एरियर राशि का भुगतान 6 समान किश्तों में दिया जाएगा। इन किश्तों का भुगतान मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026 में किया जाएगा। सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान वित्त विभाग ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं या जिनका निधन हो गया है, उन्हें अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। भुगतान संबंधी अन्य निर्देश महंगाई भत्ते की गणना में 50 पैसे या उससे अधिक राशि को अगले पूर्ण रुपए में जोड़ा जाएगा। जबकि 50 पैसे से कम राशि को छोड़ दिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि महंगाई भत्ते का कोई भी हिस्सा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वेतन का भाग नहीं माना जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि महंगाई भत्ते के भुगतान पर होने वाला व्यय संबंधित विभाग के स्वीकृत बजट प्रावधान के भीतर ही सुनिश्चित किया जाए।

योगी सरकार के 9 वर्षों में विकास के पहिए ने पकड़ी रफ्तार, तराई के 1500 गांवों में फैला दूध का कारोबार

तराई में आई श्वेतक्रांति से 51 हजार महिलाएं बनीं उद्यमी योगी सरकार के 9 वर्षों में विकास के पहिए ने पकड़ी रफ्तार, तराई के 1500 गांवों में फैला दूध का कारोबार हर महीने 03, 13 और 23 तारीख को आता है सभी के खाते में पैसा तराई के छह जिलों में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बना रहीं रिकॉर्ड एक लाख लीटर से ज्यादा प्रतिदिन की बिक्री से महिलाओं ने किया सवा दो सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार लखनऊ  उत्तर प्रदेश के तराई और आसपास के क्षेत्र अब महिला सशक्तीकरण और आर्थिक क्रांति का नया केंद्र बन चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आई श्वेतक्रांति ने बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर जैसे जिलों की दिशा और दशा बदल दी है। यहां 1500 गांवों में फैले दुग्ध व्यवसाय के जरिए 51 हजार महिलाएं उद्यमी बनकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। इन सभी महिलाओं के खाते में हर महीने 03, 13 और 23 तारीख को पैसा आ जाता है। सृजनी एमपीसीएल के नेतृत्व में तराई के इन जिलों में अब हर सुबह दूध संग्रहण किया जाता है, जहां महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उत्पादन से लेकर संग्रहण और विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं। परिणामस्वरूप क्षेत्र में प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक दूध का कारोबार हो रहा है और अब तक महिलाएं सवा दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यवसाय कर चुकीं हैं। जो क्षेत्र पहले विकास की दौड़ में पिछड़े माने जाते थे, वहीं योगी सरकार के कार्यकाल में अब महिलाओं की मेहनत से नई आर्थिक पहचान बन रही है और गांव-गांव में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक बन रहीं महिलाएं इस परिवर्तन के पीछे उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसने महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम किया। इसी का परिणाम है कि महिलाएं अब केवल सहयोगी नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक बन गईं हैं। छह हजार से अधिक गांवों में सक्सेज मॉडल  प्रदेश स्तर पर भी यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश आज दुग्ध उत्पादन में देश में अग्रणी बन चुका है, जहां ग्रामीण महिलाएं प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहीं हैं। 31 जिलों में महिलाओं ने पांच हजार करोड़ रुपये का कारोबार किया है और छह हजार से अधिक गांवों में इस मॉडल ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। तराई की यह श्वेतक्रांति केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी सशक्त उदाहरण है। महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान: जौनपुर ने लक्ष्य से अधिक लोन वितरित कर जीती बाजी

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान में लक्ष्य से अधिक लोन वितरित कर जौनपुर ने मारी बाजी    वित्तीय वर्ष 2025-26 में पौने चार लाख से अधिक युवाओं ने किया आवेदन     पिछले एक साल प्रदेश भर के एक लाख 45 हजार से अधिक युवाओं को वितरित किया गया लोन     प्रदेश के युवाओं के सपनों को पंख दे रहा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान    लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश को वन ट्रिलियन डालर की इकॉनमी बनाने की दिशा में लगातार आवश्यक कदम उठा रहे हैं। इसी के तहत प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) योजना प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन गयी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में पौने चार लाख से अधिक आवेदन आए, जबकि योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 लाख ऋण वितरण का लक्ष्य रखा था। आंकड़ों से साफ है कि सीएम युवा योजना युवाओं को आकर्षित कर रही है और वह इससे जुड़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं। योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में पूरे प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त कर बाजी मारी है, जबकि दूसरे स्थान पर आजमगढ़ व तीसरे स्थान पर हरदोई है।    पौने चार लाख से अधिक युवाओं ने किया आवेदन  योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर नहीं दे रही, बल्कि उन्हें रोजगार देने वाला मजबूत उद्यमी बनने के लिए सक्षम बना रही है। इसी का असर है कि प्रदेश के युवा अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। इसी कड़ी में सीएम युवा योजना प्रदेश के युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.5 लाख लक्ष्य के सापेक्ष पूरे प्रदेश से 3,86,092 युवाओं ने लोन के लिए आवेदन किया। इनमें 3,30,441 आवेदनों को बैंक को अग्रसारित किया गया। 1,45,454 आवेदनों को बैंक ने लोन देने पर स्वीकृति दी। अब तक 1,38,304 युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन वितरित किया जा चुका है।     जौनपुर में सबसे अधिक 4,092 युवाओं को लोन वितरित सीएम युवा योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में पूरे प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जौनपुर के जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जिले में विशेष अभियान चलाकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंकों से संपर्क कर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को अभियान के तहत 2,700 युवाओं को लोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष 9,785 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 8,406 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इनमें 4,092 आवेदकों को लोन वितरित किया जा चुका है। ऐसे में लक्ष्य के सापेक्ष 151.56 प्रतिशत ऋण वितरण किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि लक्ष्य से अधिक लोन वितरित कर जौनपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। पूरे वित्तीय वर्ष जौनपुर की स्थिति पहले स्थान पर बनी रही। आजमगढ़ में ब्लॉक स्तर पर वर्कशाप का आयोजन कर युवाओं को दिया जा रहा योजना का लाभ  आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जिले के अधिक से अधिक युवाओं को सीएम युवा योजना का लाभ देने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। योजना का लाभ देने में अप्रैल 2025 से पहले जिला 25वें स्थान पर था। अप्रैल के बाद योजना का लाभ हर जरूरतमंद युवा तक पहुंचाने के लिए ब्लॉक स्तर पर लगातार वर्कशाप आयोजित की जा रही हैं। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बैंकर्स और आवेदकों को आमने-सामने बैठाकर काउंसिलिंग करायी जा रही है। यही वजह है कि पिछले कई माह से आजमगढ़ योजना का लाभ देने में पूरे प्रदेश में लगातार दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में आजमगढ़ को योजना के तहत 2,700 ऋण वितरण का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष 8,871 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 7,751 आवेदनों को बैंक भेजा गया, जिसमें 4,049 को लोन वितरित किया जा चुका है। इस तरह लक्ष्य की तुलना में 149.96 प्रतिशत सफलता हासिल कर आजमगढ़ पूरे राज्य में दूसरे स्थान पर रहा है।  झांसी, लखीमपुर-खीरी, अंबेडकरनगर, बहराइच, चित्रकूट और बलिया का भी शानदार प्रदर्शन  हरदोई के जिलाधिकारी अनुनय झा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चला कर सीएम युवा योजना का लाभ दिया जा रहा है। हर माह बैंकों से साथ बैठक की जा रही है, ताकि आवेदकों की किसी भी समस्या को तत्काल दुरुस्त किया जा सके। यही वजह है कि पूरे प्रदेश में योजना का लाभ देने में हरदोई ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। हरदोई को वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2,900 ऋण वितरण का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष 11,977 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 9,701 आवेदनों को बैंक भेजा गया, जिसमें 3,226 आवेदकों को लोन वितरित किया जा चुका है। इसके अलावा झांसी ने चौथा और लखीमपुर खीरी ने प्रदेश में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। योजना का लाभ देने में अंबेडकर नगर, बहराइच, चित्रकूट और बलिया का भी प्रदर्शन शानदार रहा।

मालदा हिंसा के प्रमुख आरोपी को बागडोगरा एयरपोर्ट से गिरफ्तार, भागने की थी योजना

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में हुई हालिया हिंसा और तनाव के मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. बंगाल पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम के मास्टरमाइंड माने जा रहे अधिवक्ता और एआईएमआईएम (AIMIM) नेता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी उस समय हुई जब इस्लाम बागडोगरा एयरपोर्ट से राज्य छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोफक्करुल इस्लाम के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद से ही उसकी तलाश जारी थी. खुफिया जानकारी मिली थी कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए सिलीगुड़ी के पास बागडोगरा हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाला है. पुलिस की एक विशेष टीम ने जाल बिछाकर उसे टर्मिनल के पास से धर दबोचा।  इस्लाम पेशे से वकील है, जिसे कानून की अच्छी समझ है, फिर भी वह पुलिस की नजरों से बच नहीं सका. मोफक्करुल इस्लाम का राजनीतिक प्रोफाइल काफी सक्रिय रहा है।  वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का एक प्रमुख चेहरा है. उसने साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उत्तर दिनाजपुर जिले की इटाहार (Itahar) सीट से AIMIM के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था. जांच में सामने आया है कि पिछले दिनों सुजापुर और कालियाचक के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व भी इस्लाम ही कर रहा था।  पुलिस-प्रशासन को दी थी चुनौती हाल ही में सामने आए एक वीडियो में इस्लाम बेहद आक्रामक तेवर में जिले के आला अधिकारियों को ललकारता नजर आ रहा है. वीडियो में उसे कैमरे के सामने चिल्लाते हुए सुना जा सकता है, 'ओए डीएम , एसपी .. सीआईडी कहां हो? आईबी कहां है? तुम सब कहां हो? यहां आओ…" प्रशासन के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी और भीड़ को उकसाने के बाद से ही वह पुलिस के राडार पर था।  पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस्लाम की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है. आरोप है कि सुजापुर में हुए विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित तरीके से उसी ने लीड किया था. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई गहरी साजिश थी या यह अचानक भड़का हुआ आक्रोश था. फिलहाल वह पुलिस की हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। 

हनुमान जी का जीवन: मुख्यमंत्री साय ने साझा की उनकी प्रेरणादायक कथा

अनन्य रामभक्त हनुमान जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक- मुख्यमंत्री साय राम नाम से गुंजायमान हुआ नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर मुख्यमंत्री ने पवित्र नर्मदा कुंड के जीर्णोद्धार का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री हनुमान उत्सव एवं राम कथा कार्यक्रम में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर के स्टेशन चौक स्थित नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर में आयोजित हनुमान उत्सव एवं राम कथा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम के अनन्य भक्त हनुमान का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। बल, बुद्धि और विद्या के दाता हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि हमारे जीवन में निष्ठा, सेवा और समर्पण कैसा होना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने पवित्र नर्मदा कुंड के जीर्णोद्धार का भूमिपूजन किया। राम कथा के दौरान नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर राम नाम से गुंजायमान हो उठा।  मुख्यमंत्री ने नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर में विधि-विधान से हनुमान का दर्शन और आरती पूजन किया। उन्होंने हनुमान जी से छत्तीसगढ़ वासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उल्लेखनीय है कि हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर 01 से 05 अप्रैल तक नर्मदा कुंड मंदिर में स्वामी राजीव लोचन दास जी द्वारा राम कथा का भी आयोजन किया जा रहा है।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय को कहा छत्तीसगढ़ प्रभु राम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु राम ने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया। रामायण काल में वर्णित दंडकारण्य अबूझमाड़ क्षेत्र का इलाका है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा प्रभु रामलला दर्शन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अभी तक लगभग 42 हजार भक्त रामलला के दर्शन कर चुके हैं। 5 हजार से अधिक बुजुर्ग विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन कर चुके हैं। तीर्थयात्रा के लिए 19 जगहों को चिन्हांकित किया गया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभी हमने धर्मांतरण रोकने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया है। इस कानून के अंतर्गत देश के सभी प्रदेशों से कठोर नियम बनाए गए हैं। इन कड़े प्रावधानों से निश्चित ही धर्मांतरण पर अंकुश लगेगा। गौ माता के भी संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार द्वारा सुरभि गौधाम योजना लागू की गई है। इसके तहत 29 गौधाम का शुभारंभ किया गया है। सुरभि गौधाम में गौमाता के लिए चारे और अन्य व्यवस्था के साथ ही गौपालकों को गोबर के विभिन्न उत्पाद के निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रत्येक जिले में 10 सुरभि गौधाम के साथ प्रदेश में 330 गौधाम का निर्माण किया जाएगा।  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में रुद्र सेना और रुद्र शक्ति के पोस्टर का विमोचन भी किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा,विधायक किरण सिंहदेव और पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला, नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर के महंत सुरेंद्र दास जी, राम गर्ग, श्रीमती विभा अवस्थी सहित गणमान्यजन और भक्तगण उपस्थित थे।

ट्रंप का धमकी भरा कदम: फार्मा सेक्टर पर 100% टैरिफ, भारत पर भी पड़ सकता है असर

नई दिल्ली ईरान-अमेरिका जंग के बीच ट्रंप सरकार कुछ दवा कंपनियों पर टैरिफ लगाने के बारे में सोच रही है. अगर ये कंपन‍िया ट्रंप सरकार की शर्त नहीं मानती हैं, तो उन्‍हें 100 फीसदी तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. खासकर उन कंपनियों पर, जो अमेरिका में अपनी दवाएं इम्‍पोर्ट करती हैं. इसका मतलब है कि भारत से भी अमेरिका भेजे जाने वाले दवाओं पर इसका असर पड़ सकता है।  ब्‍लूमबर्ग के मुताबिक, अगर दवा निर्माता कंपनियां अमेरिका में कम कीमतों की गारंटी देने वाले समझौतों पर नहीं पहुंच पाती हैं, तो ट्रंप प्रशासन गुरुवार को ही उन पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकता है. ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ये शुल्क 100 प्रतिशत तक लागू हो सकता है. यह पहल व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत की गई जांच के बाद की गई है।  अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार के फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका में आने वाली ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में घबराहट दिखी और कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्यादा असर Sun Pharmaceutical Industries पर देखा गया, जिसके शेयर करीब 4-5% तक टूटकर 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए. वहीं, Divi’s Laboratories, Biocon, Lupin, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla और Zydus Lifesciences जैसे बड़े नामों में भी 2 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी करीब 2.5% नीचे फिसल गया।  Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का कहना है कि अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं, तो उनकी दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएगा. उनका फोकस “मेड इन अमेरिका” को बढ़ावा देना और घरेलू रोजगार बढ़ाना है. यही वजह है कि इस तरह के टैरिफ को ट्रंप लगाने की तैयारी कर रहे है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फिलहाल बाजार में जो गिरावट दिखी है, वह ज्यादा सेंटिमेंट आधारित है. भारत से अमेरिका को जो दवाएं भेजी जाती हैं, उनमें ज्यादातर हिस्सा जेनरिक दवाओं का होती है. ये सस्ती दवाएं होती हैं और अभी तक टैरिफ का फोकस ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ही है. इसलिए सीधे तौर पर सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।  किन फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर? फिर भी कुछ कंपनियां ज्यादा प्रभावित दिखीं. जैसे सन फार्मा अमेरिका में कुछ स्पेशलिटी और ब्रांडेड दवाएं भी बेचती है. इसी वजह से उसके शेयरों पर दबाव ज्यादा रहा. वहीं Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसी कंपनियां API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) बनाती हैं, जिनका निर्यात अमेरिका और यूरोप में होता है, इसलिए उनमें भी हल्की कमजोरी दिखी।  जेनरिक दवाओं का हिस्सा 90% से ज्यादा हालांकि, एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि कई भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका में निवेश कर रही हैं. Biocon ने हाल ही में न्यू जर्सी में अपनी यूनिट शुरू की है. ऐसे में जिन कंपनियों का लोकल प्रेजेंस है, उन पर टैरिफ का असर सीमित रह सकता है. भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है, जिसमें 90% से ज्यादा हिस्सा जेनरिक दवाओं का होता है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह गिरावट कम समय के लिए भी हो सकती है. अगर कंपनियां अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ाती हैं और स्ट्रैटजी में बदलाव करती हैं, तो भविष्य में इसका फायदा भी मिल सकता है।  ट्रंप का यह बयान बाजार के लिए एक झटका जरूर है, लेकिन भारतीय फार्मा सेक्टर की बुनियादी मजबूती अभी भी बरकरार है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टैरिफ नीति किस हद तक लागू होती है और कंपनियां इसके अनुसार खुद को कैसे ढालती हैं। 

भोपाल मेट्रो का संचालन समय बदला, अब सुबह 11 बजे से शाम 4.30 बजे तक ही चलेगी

भोपाल  राजधानी में मेट्रो यात्रियों के लिए समय में बदलाव किया गया है।आज 3 अप्रैल, शुक्रवार से मेट्रो ट्रेनें अब सुबह 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक संचालित होंगी। अब तक मेट्रो सेवाएं दोपहर 12 बजे से शाम 7:30 बजे तक चल रही थीं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी काम पूरा होते ही समय को फिर से सामान्य किया जा सकता है। मेट्रो का संचालन फिलहाल सुभाष नगर स्टेशन से लेकर एम्स तक हो रहा है, जिसमें कुल आठ स्टेशन शामिल हैं। यह रूट शुरुआत से ही ट्रायल और सीमित संचालन के तहत चलाया जा रहा है।  टनल बनाने का काम जल्द होगा शुरू मेट्रो परियोजना के तहत अंडरग्राउंड टनल बनाने का काम भी अब तेजी पकड़ने वाला है। टनल बोरिंग मशीन (TBM) अगले दो-तीन दिनों में खुदाई शुरू करेगी। मशीन को हाल ही में 24 मीटर गहराई तक उतारा गया है और फिलहाल उसकी तकनीकी सेटिंग का काम चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मशीन प्रतिदिन करीब 14 मीटर तक खुदाई कर सकती है, लेकिन भोपाल की पथरीली जमीन को देखते हुए यह गति घटकर 5 से 7 मीटर प्रतिदिन रहने की संभावना है। पहली मशीन द्वारा करीब 50 मीटर टनल तैयार करने के बाद दूसरी TBM  को भी उतारा जाएगा। दोनों मशीनों के जरिए टनल निर्माण का काम आगे बढ़ाया जाएगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू हुआ है। करीब 30 किमी के लिए हुए 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं होने के कारण मेट्रो प्रबंधन को मजबूरन केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। सिग्नलिंग के काम के चलते ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का ट्रैक प्रभावित रहेगा। हालांकि, प्रबंधन ने यह साफ नहीं किया है कि काम कब तक चलेगा और मेट्रो कब तक इसी टाइमिंग पर चलती रहेगी। 20 दिसंबर-25 को शुरू हुई थी मेट्रो भोपाल मेट्रो का उद्घाटन पिछले साल 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्‌टर ने किया था। इसके अगले दिन यानी, 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। मेट्रो को शुरुआत में अच्छे पैसेंजर मिले, लेकिन बाद में संख्या घटती गई। वर्तमान में मेट्रो में न के बराबर यात्री सफर कर रहे हैं। 5 जनवरी को पहली बार टाइमिंग और फेरे बदले गए थे। शुरुआत में 17 फेरे और सुबह 9 बजे से मेट्रो दौड़ने लगी थी। जब बदलाव हुआ तो फेरे घटकर 13 हो गए। वहीं, टाइमिंग दोपहर 12 से शाम 7.30 बजे तक कर दी गई थी। वर्तमान में इसी टाइमिंग पर मेट्रो का संचालन हो रहा था। तीसरी बार शेड्यूल बनने के बाद फेरे 13 से घटकर 9 हो गए हैं। इनमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 5 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 4 फेरे शामिल हैं। डेढ़ साल तक चलेगा निर्माण कार्य टनल की खुदाई पूरी होने में करीब दो महीने लग सकते हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। पूरा निर्माण कार्य पूरा होने में कम से कम डेढ़ साल का समय लगने का अनुमान है। यह टनल ओल्ड रेलवे स्टेशन क्षेत्र से पुल पातरा की ओर निकलेगा और इसमें अप और डाउन दोनों दिशाओं के लिए अलग-अलग मेट्रो लाइन बनाई जाएंगी।  भोपाल में लागू हुई नई कलेक्टर गाइडलाइन, मेट्रो ट्रैक के किनारे जाम जस के तस!  नये फाइनेंशियल ईयर के शुरू होने के साथ ही राजधानी भोपाल में नई कलेक्टर गाइडलाइन भी लागू हो गई है. जिसके बाद अब भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदने से लेकर रजिस्ट्री कराना महंगा हो गया है. नई गाइडलाइन में भोपाल मेट्रो ट्रैक के प्रॉपर्टी रेट को लगातार दूसरे साल भी नहीं बढ़ाया गया है. जिसके पीछे वजह इन इलाकों में रेट कम रखकर यहां तेजी से डेवलपमेंट करना बताई जा रही है. कलेक्टर गाइडलाइन में तय दर 13 हजार रुपए वर्गमीटर से लेकर 40 हजार वर्गमीटर तक तय हुई है. जिसके बाद हर वर्गफीट 1300 रुपए से लेकर 4000 रुपए पंजीयन शुल्क लगेगा।  भोपाल मेट्रो के किनारे तेज होगा डेवलपमेंट वर्क, एक ही जगह रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल स्पेस और मार्केट बनाने की प्लानिंग मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकार भोपाल मेट्रो कॉर्रिडोर के आस-पास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) वर्क को बूस्ट देने के लिए लगातार दूसरे साल कलेक्टर गाइडलाइन में मेट्रो के किनारे की जमीन के रेट नहीं बदले गए हैं. प्रदेश सरकार इन इलाकों में एक ही जगह पर रेजिडेंशियल-कॉमर्शियल और मार्केट स्पेस बनाने पर प्लांनिग कर रही है।  पुराने भोपाल इतना हुआ प्रति वर्गमीटर प्रॉपर्टी का रेट अगर बात की जाए मेट्रो कॉर्रिडोर किनारे सबसे महंगी जमीन की तो भोपाल में करोंद इलाके में रेट सबसे हाई हैं. जहां नई गाइडलाइन में करोंद इलाके में रजिस्ट्री दर 40 हजार रुपए वर्गमीटर निर्धारित की गई है. इसके अलावा पुराने भोपाल में नए प्रॉपर्टी के रेट 12 हजार रुपए वर्गमीटर से 15 हजार वर्गमीटर निर्धारित किया गया है।