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मुख्यमंत्री भगवंत मान की बड़ी पहल से पंजाब की 97 प्रतिशत महिलाओं को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने पूरे पंजाब में ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ को मंजूरी देकर इस योजना को शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए और बाकी सभी महिलाओं को 1000 रुपए सम्मान राशि मिलेगी। इस योजना से पंजाब की 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ योजना पूरे राज्य में शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपए और बाकी सभी महिलाओं को 1000 रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि दी जाएगी। यह योजना महिलाओं को स्वतंत्र और सशक्त बनाकर उनकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह स्कीम महिलाओं को वित्तीय रूप से मजबूत करेगी, जिससे वे बचत और निवेश कर सकेंगी तथा घर-परिवार के लिए जरूरी इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम बनेंगी।” इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने आगे कहा, “इस योजना से 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की संभावना है, जो इसे देश की सबसे महिला-हितैषी सामाजिक सुरक्षा पहलों में शामिल करता है। यह योजना राज्य भर में महिलाओं को सीधी आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और महिलाओं के सशक्तिकरण के तहत उनके लिए वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के प्रति सरकार के विजन को दर्शाती है।” यह योजना सीधा लाभ प्रदान करने के लिए तैयार की गई है, जिसमें वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस स्कीम के तहत एक परिवार में योग्य महिलाओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं होगी और एक ही परिवार की कई महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकेंगी। मौजूदा सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगियों को भी इस योजना के तहत अपनी पेंशन के अलावा पूरा वित्तीय लाभ मिलेगा, जिससे इसकी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ेगी। पंजाब में 18 साल या उससे अधिक उम्र की महिलाएं, जो वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हैं, जिनके पास पंजाब निवास वाला आधार कार्ड और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर कार्ड है, इस योजना के तहत लाभार्थी के रूप में रजिस्टर होने के योग्य होंगी। इस पहल को और मजबूत करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पहले ही 9,300 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की जा चुकी है और योजना के पैमाने व पहुंच को देखते हुए यह पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे बड़ी महिला-हितैषी सामाजिक कल्याण पहलों में से एक होने की उम्मीद है। योजनाबंदी विभाग में सीधी भर्ती के तहत 70 पद भरने को मंजूरी कैबिनेट ने योजनाबंदी विभाग में सीधी भर्ती के तहत 70 पद भरने की मंजूरी दे दी है। आर्थिक नीति एवं योजना बोर्ड और सांख्यिकी विभाग, पंजाब के विलय की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस अभ्यास को देखते हुए भरे जाने वाले रिक्त पदों की आवश्यकता को संशोधित किया गया है। इसलिए अधिकारियों की कमेटी द्वारा सीधी भर्ती के 70 पद भरने की मंजूरी दी गई है। पी.एस.पी.सी.एल. और पी.एस.टी.सी.एल. के सी.एम.डी. तथा डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए शर्तों में संशोधन कैबिनेट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) और पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ट्रांसको) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (सी.एम.डी.) तथा डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए जरूरी योग्यताओं और अनुभव संबंधी शर्तों में संशोधन करने की भी मंजूरी दे दी है। पछवाड़ा कोयला खदान में मानव शक्ति एवं सहायक स्टाफ नियुक्त करने को मंजूरी कैबिनेट ने झारखंड के जिला पाकुड़ स्थित पछवाड़ा केंद्रीय कोयला खदान (पीसीसीएम) के संचालन और रखरखाव के लिए पी.एस.पी.सी.एल. द्वारा ठेके के आधार पर मानव शक्ति और सहायक स्टाफ नियुक्त करने को भी हरी झंडी दे दी है। इसके लिए एक अधिकृत कमेटी बनाने का फैसला किया गया है, जिसमें प्रबंधकीय सचिव को चेयरमैन और चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर तथा डायरेक्टर/जनरेशन, पी.एस.पी.सी.एल. को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। इस कमेटी को पछवाड़ा केंद्रीय कोयला खदान, पाकुड़ के संचालन और रखरखाव के लिए सक्षम मानव शक्ति/सहायक स्टाफ की ठेके पर भर्ती और विस्तार संबंधी सभी मंजूरियां देने के लिए अधिकृत किया गया है। लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधन कैबिनेट ने लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों/शेडों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधनों को भी मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों के अनुसार बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के पास गिरवी रखे गए औद्योगिक प्लॉट फ्रीहोल्ड में बदले जा सकते हैं, बशर्ते संबंधित बैंक द्वारा प्राप्त ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ जमा करवाया गया हो और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किया गया हो। ऐसे मामलों में जहां मौजूदा टाइटल दस्तावेजों में अनार्जित वृद्धि संबंधी कोई धारा नहीं है (भले ही यह पहले के टाइटल दस्तावेजों में मौजूद हो), 5 प्रतिशत की कन्वर्जन फीस लागू होगी। पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) (संशोधन) बिल-2026 कैबिनेट ने पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) (संशोधन) बिल, 2026 को पेश करने की मंजूरी दे दी है ताकि राज्य भर में औद्योगिक क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एस.पी.वी.) की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता को मजबूत किया जा सके। प्रस्तावित संशोधन औद्योगिक पार्कों के विस्तार और औद्योगिक एस्टेटों से बाहर नए औद्योगिक क्लस्टरों के विस्तार के कारण वर्षों में उभरी प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों को हल करेंगे। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कें, स्ट्रीट लाइटें, पार्क, सुरक्षा, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य साझा सुविधाओं जैसे साझा बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए सेवा शुल्क वसूलने और इनके उपयोग के लिए सुचारू प्रणाली विकसित की जाएगी। सभी औद्योगिक क्षेत्रों में एस.पी.वी. तैयार किए जाएंगे जो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड होंगे। ये एस.पी.वी. औद्योगिक क्षेत्रों में साझे बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव के लिए बिना लाभ-बिना नुकसान के आधार पर काम करेंगे। साथ ही एस.पी.वी. के कार्यों की निगरानी और विवादों के समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करने हेतु जिला निगरानी प्राधिकरण स्थापित किया जाएगा। एन.एच.ए.आई. प्रोजेक्ट्स के लिए सतलुज नदी से गाद निकालने को मंजूरी कैबिनेट ने राज्य में विभिन्न हाईवे प्रोजेक्ट्स के निर्माण के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एन.एच.ए.आई.) को साधारण मिट्टी देने के लिए सतलुज नदी से … Read more

सीएम योगी के निर्देश पर गन्ना विभाग और यूपीएसआरएलएम के बीच हुआ एमओयू

गन्ना उत्पादन, पौध तैयार करने और वैल्यू एडिशन में सक्रिय भागीदारी निभाएंगी महिलाएं  सीएम योगी के निर्देश पर गन्ना विभाग और यूपीएसआरएलएम के बीच हुआ एमओयू उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तीकरण के लिए नई पहल  लखनऊ योगी सरकार ने प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और कृषि आधारित गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के बीच हाल ही में एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अब प्रदेश की ‘आधी आबादी’ गन्ना उत्पादन, पौध तैयार करने और वैल्यू एडिशन जैसी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएगी। गन्ने से जुड़े अन्य उत्पाद बनाने का भी दिया जाएगा प्रशिक्षण गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस. ने बताया कि एमओयू का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को गन्ना आधारित आजीविका से जोड़ना है। इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर मिलेगा। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 47.5 लाख गन्ना किसान चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति करते हैं। इसमें करीब 2.95 लाख महिला किसान शामिल हैं। इसके अलावा 57 हजार से अधिक महिला किसान 3,000 से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गन्ने की उन्नत किस्मों की पौध तैयार करने का कार्य कर रही हैं। ये समूह गन्ने की नई प्रजातियों के तेजी से प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस पहल के तहत महिलाओं को केवल पौध उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें गन्ने से जुड़े अन्य कार्यों जैसे प्रसंस्करण, जैविक उत्पाद निर्माण, गुड़ और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्माण में भी प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन पर दिया जा रहा जोर गन्ना आयुक्त का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि प्रदेश के समग्र विकास में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है। इसी सोच के तहत योगी सरकार लगातार महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता दे रही है। चाहे ‘मिशन शक्ति’ अभियान हो या स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने की योजनाएं, हर स्तर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को संगठित कर उन्हें गन्ना क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकेंगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और उत्पादकता वृद्धि में भी योगदान देंगी। यह पहल गन्ना उत्पादन प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव ला सकती है। महिला समूहों द्वारा तैयार की जा रही उन्नत किस्मों की पौध से गन्ने की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन मिलेगा। साथ ही, वैल्यू एडिशन के जरिए उत्पादों का बाजार मूल्य भी बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि आएगी।

सेंसेक्स में 1100 अंक की गिरावट, जानें शेयर बाजार में भूचाल आने के तीन प्रमुख कारण

मुंबई  शेयर बाजार में जिसका डर था वही हुआ. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को विदेशों से मिल रहे रेड सिग्नल के बीच सेंसेक्स-निफ्टी की बेहद खराब शुरुआत हुआ और मार्केट ओपनिंग के साथ ही क्रैश (Stock Market Crash) हो गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद की तुलना में 1100 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी ने भी 300 अंक से ज्यादा फिसलकर कारोबार शुरू किया. बैंकिंग शेयरों में कोहराम मचा नजर आया और Axis Bank, HDFC Bank, Kotak Bank के शेयर बुरी तरह फिसल गए. हालांकि, शुरुआती तेज गिरावट में हल्की रिकवरी होती भी दिखाई दे रही थी।  सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही क्रैश  शेयर मार्केट में सोमवार को कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,583 की तुलना में बुरी तरह टूटकर 72,565 के लेवल पर खुला और महज कुछ ही मिनटों ये इंडेक्स फिसलते हुए 72,391 के लेवल पर आ गया. यानी ओपनिंग के साथ ही ये 1192 अंक का गोता लगा गया।  बात एनएसई निफ्टी इंडेक्स की करें, तो ये अपने पिछले शुक्रवार के बंद 22,819 की तुलना में फिसलकर 22,549 पर खुला और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए 349 अंक की गिरावट लेकर 22,470 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया।  सबसे ज्यादा टूटे ये शेयर सोमवार को बाजार में आए भूचाल के बीच बैंकिंग स्टॉक्स में सबसे तेज गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में ही Axis Bank Share (4%), Kotak Bank Share (3%), HDFC Bank Share (2.50%), ICICI Bank Share (1.70%) और SBI Share (1.10%) की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा बीएसई की लार्जकैप में Bajaj Finance Share (2%), Bharti Airtel Share (1.50%) फिसल गए।   विदेशों से आए थे रेड सिग्नल  भारतीय शेयर बाजार में तगड़ी गिरावट के संकेत पहले से ही विदेशों बाजारों से मिल रहे थे. जापान, कोरिया से हांगकांग तक एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ दिखाई दिया था. Japan का निक्केई इंडेक्स 2382 अंक या 4.50 फीसदी क्रैश होकर  50,566 के स्तर पर आ गया था. Hongkong का हैंगसेंग इंडेक्स भी 490 अंक या 1.95 फीसदी टूटकर 24,469 पर ट्रेड कर रहा था।  साउथ  कोरिया के कोस्पी इंडेक्स की बात करें, तो यह भी क्रैश नजर आया और 215 अंक या 3.96% फिसलकर 5,223 पर कारोबार कर रहा था. इसके अलावा DAX (312 अंक), CAC (67 अंक) और FTSE-100 इंडेक्स भी रेड जोन में था।  शेयर बाजार में गिरावट के तीन बड़े कारण पहला: Stock Market Crash के पीछे के बड़े कारणों की बात करें, तो एशियाई बाजारों में मचे कोहराम की सीधा असर सेंसेक्स-निफ्टी पर दिखा है. Gift Nifty भी क्रैश नजर आ रहा था।  दूसरा: शेयर मार्केट में गिरावट का दूसरा कारण क्रूड ऑयल की कीमत में अचानक आया बड़ा उछाल है. जी हां, सोमवार को ऑयल मार्केट में भी हड़कंप मचा है और Brent Crude Price एक झटके में उछलकर 116 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. महंगाई का जोखिम बढ़ने के खतरे से शेयर बाजार भी सहमा नजर आया।  तीसरा: अमेरिका और ईरान में तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है. अटैक जारी हैं और डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की बड़ी तैयारी कर ली है. इससे ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है और शेयर बाजार धड़ाम हो गए हैं। 

मध्य प्रदेश में BJP की तैयारी तेज, 1800 कार्यकर्ताओं को जल्द मिलेगी जिम्मेदारी

भोपाल एमपी बीजेपी में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं में और जोश जगाने सांग​ठनिक स्तर पर गहन विचार विमर्श चल रहा है। इसके अंतर्गत अब कुछ पद बांटे जाने का निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रदेशभर के 18 सौ नेता-कार्यकर्ताओं को जल्द ही अहम दायित्व दिया जाएगा। इसके लिए पार्टी ने की पहल की है। नगरीय निकाय चुनावों से पहले पकड़ मजबूत करने खास एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें जिलों के अनुभवी नेताओं को एल्डरमैन बनाकर एडजस्ट करने की तैयारी की है। प्रादेशिक भाजपा नेताओं के मुताबिक लंबे अरसे से राजनीतिक नियुक्तियों के इंतजार में बैठे जिलों के वरिष्ठ नेताओं को एल्डरमैन में एडजस्ट करने की तैयारी कर चुकी है। इस पर जिले से प्रदेश संगठन के बीच समन्वय और सहमति बनाई जा चुकी है। हालांकि एल्डरमैन की परिषदों में कोई संवैधानिक भूमिका नहीं होती है पर इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को अहमियत का अहसास जरूर होता है। एल्डरमैन को वोटिंग का अधिकार नहीं होता है और परिषदों की बैठक में भी इन्हें हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है। पर पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते पार्षद या अध्यक्ष इनसे चर्चा कर मार्गदर्शन लेते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अब कभी भी एल्डरमैन की घोषणा हो सकती है। दरअसल, भाजपा नगरीय निकायों में होने वाली एल्डरमैन की नियुक्ति में उन्हीं चेहरों को तवज्जो देगी, जिसके अनुभव का लाभ पार्टी को चुनाव में मिले। साथ ही परिषदों के कामकाज और विकास कार्यों की भी मॉनीटरिंग करवाई जा सके। बता दें, संगठन द्वारा नियुक्त एल्डरमैन न तो परिषदों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं और न ही इनके पास वोटिंग का अधिकार होता है। कुल मिलाकर इनकी भूमिका मार्गदर्शक के रूप में होती है। 413 निकायों में 18 सौ से अधिक नेता होंगे एडजस्ट निकायों में नेताओं को एडजस्ट करने का फॉर्मूला पार्टी ने तैयार किया है। 413 निकायों में करीब 1800 सक्रिय कार्यकर्ताओं को एडजस्ट किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक निकायों में 10 लाख से अधिक आबादी वाले 12 निकायों में 4-4 एल्डरमैन और 10 लाख से कम आबादी वाले में 8-8 की नियुक्ति की जाएगी। ऐसे ही नगर पालिकाओं में 6-6 और नगर परिषदों में 4-4 का फॉर्मूला तय हुआ है।

अब मिलेगा सस्ता पेट्रोल! इथेनॉल ब्लेंड से 8 रुपये तक कम होगी कीमत

नई दिल्ली 1 अप्रैल 2026 से देशभर में नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ कई महत्वपूर्ण नियम लागू होने जा रहे हैं। इसी क्रम में पेट्रोल से जुड़ा एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिलेगा। सरकार ने अब पूरे देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अनिवार्य करने का फैसला किया है। इसके तहत पेट्रोल पंपों पर न्यूनतम 95 ऑक्टेन स्तर और 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन ही उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक परिस्थितियों के कारण पेट्रोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में यह नया ईंधन न केवल सस्ता साबित हो सकता है, बल्कि पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी माना जा रहा है। क्या है इथेनॉल मिश्रित ईंधन और क्यों हो रहा लागू इथेनॉल एक जैविक ईंधन है, जो मुख्य रूप से गन्ने जैसी फसलों से प्राप्त शर्करा के किण्वन से तैयार किया जाता है। जब इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है, तो यह मिश्रित ईंधन बनता है। 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण को ई-20 कहा जाता है। सरकार का लक्ष्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना है। यही कारण है कि अब इस प्रकार के ईंधन को देशभर में अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है। आने वाले समय में इथेनॉल की मात्रा और बढ़ाकर इसे और अधिक प्रभावी बनाने की योजना भी है। कीमत और बचत का गणित इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है। यह सामान्य पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर लगभग 8 रुपये तक सस्ता हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति हर महीने औसतन 40 लीटर ईंधन का उपयोग करता है, तो उसे करीब 300 रुपये से अधिक की बचत हो सकती है। इस तरह यह आम उपभोक्ताओं के लिए राहत देने वाला कदम साबित हो सकता है। पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था को लाभ यह ईंधन पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जा रहा है क्योंकि यह कम प्रदूषण फैलाता है। इथेनॉल के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। साथ ही, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। पुरानी गाड़ियों के लिए क्या है स्थिति हालांकि नई तकनीक की गाड़ियां इस ईंधन के अनुरूप तैयार की जा रही हैं, लेकिन पुरानी गाड़ियों के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हो सकती हैं। लंबे समय तक उपयोग करने पर ईंधन प्रणाली के कुछ हिस्सों पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, ईंधन दक्षता में थोड़ी कमी भी देखी जा सकती है। इसलिए पुराने वाहन उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहकर इसका उपयोग करना चाहिए। भविष्य की योजना क्या है सरकार आने वाले वर्षों में इथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। लक्ष्य है कि धीरे-धीरे इस अनुपात को बढ़ाकर अधिकतम स्तर तक पहुंचाया जाए, जिससे देश पूरी तरह वैकल्पिक ईंधन की दिशा में आगे बढ़ सके। यह बदलाव न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एमपी में इलाज के खर्चे के मुकाबले केरल से 4 गुना सस्ते, बावजूद इसके 43% लोग खुद कर रहे हैं ट्रीटमेंट का खर्च

भोपाल  मध्यप्रदेश में इलाज का खर्च भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है, खासकर केरल के मुकाबले। आम धारणा के विपरीत कि बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का मतलब महंगा इलाज है, आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के लोग औसतन अपनी जेब से केवल ₹1,739 सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा ₹7,889 है। इस कमी के बावजूद, मध्यप्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के कुल खर्च का लगभग 43% अपनी जमा-पूंजी या उधारी से निकालना पड़ता है। 10 साल में स्वास्थ्य खर्च में उल्लेखनीय कमी लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का स्वरूप काफी बदल गया है। 2014-15 में हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए कुल स्वास्थ्य खर्च का 72% खुद वहन करना पड़ता था। सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज के दायरे के विस्तार ने इस भार को 43% तक घटा दिया है। केरल और मध्यप्रदेश की तुलना केरल को अक्सर देश का सबसे मजबूत स्वास्थ्य मॉडल माना जाता है, लेकिन वहां के लोग अभी भी अपने इलाज के लिए ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। केरल में आम व्यक्ति को सालाना ₹7,889 खर्च करना पड़ता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह खर्च केवल ₹1,739 है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि कम संसाधनों के बावजूद मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य योजनाएं आम आदमी के लिए अधिक सुलभ साबित हो रही हैं। आम आदमी की जेब पर कितना भार?     मध्यप्रदेश: यहां कुल स्वास्थ्य खर्च का केवल 43.3% ही जनता को अपनी जेब से देना पड़ रहा है ।     केरल: केरल की जनता को आज भी इलाज पर कुल खर्च का 59.1% हिस्सा खुद वहन करना पड़ता है ।     उत्तर प्रदेश: यूपी में स्थिति और भी गंभीर है, वहां लोग अपने इलाज का 63.7% पैसा खुद भर रहे हैं। दस साल पहले 72% पैसा खुद खर्च करना पड़ता था लोकसभा में सामने आए आंकड़ों को देखें तो मध्यप्रदेश में 2014-15 के दौरान हालात चिंताजनक थे। तब हर व्यक्ति को इलाज के लिए 72% पैसा खुद के बैंक खाते या उधारी से चुकाना पड़ता था । लेकिन पिछले 7-8 वर्षों में सरकारी दखल ने इस आंकड़े को 43.3% पर लाकर खड़ा कर दिया है । आम आदमी की जेब पर असर मध्यप्रदेश में कुल स्वास्थ्य खर्च का 43.3% जनता अपनी जेब से देती है। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 63.7% है, जबकि केरल में यह 59.1% है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश के लोग देश के कई राज्यों की तुलना में कम आर्थिक बोझ उठाते हैं। सरकारी पहल और भविष्य की संभावनाएं मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं के प्रभाव ने आम जनता पर खर्च का बोझ कम किया है। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और मुफ्त इलाज के दायरे में विस्तार ने इसे संभव बनाया है। यदि इसी तरह योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में जनता पर खर्च और भी घट सकता है। जेब से खर्च की स्थिति ताजा आंकड़ों (2021-22) के मुताबिक, मध्यप्रदेश में एक व्यक्ति को साल भर में अपने स्वास्थ्य पर औसतन ₹1,739 अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। 2014-15 में प्रति व्यक्ति यह खर्च ₹1,808 था, जो कुल हेल्थ बजट का 72% होता था। आज की स्थिति मेंअब यह हिस्सा घटकर 43.3% रह गया है। अफसरों का तर्क है कि सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज का दायरा बढ़ा है। केरल के मुकाबले एमपी के लोग 'किस्मत वाले' अगर तुलना करें, तो हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल स्टाफ के मामले में समृद्ध केरल जैसे राज्य में भी लोगों को अपनी जेब से बहुत ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है। केरल में प्रति व्यक्ति अपनी जेब से ₹7,889 खर्च करने पड़ते हैं। मध्यप्रदेश में यह खर्च महज ₹1,739 है । राष्ट्रीय औसत: देश का औसत खर्च ₹2,600 है, यानी मध्यप्रदेश के लोग राष्ट्रीय औसत से भी कम पैसा अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।

चार चुनावी राज्यों में महिलाओं के लिए 24 हजार करोड़, तमिलनाडु में समर पैकेज, असम में बिहू बोनस

नई दिल्ली अगले महीने भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें से चार प्रमुख राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने चुनावी रणनीति के तहत सीधे कैश ट्रांसफर करने का बड़ा निर्णय लिया है। ये चारों राज्य महिलाओं के बैंक खातों में कुल 24,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का वादा कर रहे हैं। इन राज्यों का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए, तो यह सहायता चालू रहेगी। तमिलनाडु का समर पैकेज और बिहार बोनस तमिलनाडु में, DMK सरकार ने विशेष समर पैकेज के तहत महिलाओं के खातों में 2-2 हजार रुपये डाल दिए हैं। इस कार्यक्रम को लेने के पीछे सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हों। वहीं, असम की भाजपा सरकार ने बिहू समारोह के लिए महिलाओं को 4-4 हजार रुपये देने का ऐलान किया है, ताकि त्योहार का आनंद बढ़ सके। केरल और बंगाल की योजनाएं केरल में वामपंथी सरकार ने ‘स्त्री सुखम’ नकद योजना शुरू की है, जिसके तहत 10 लाख महिलाएं हर महीने 1,000 रुपये प्राप्त कर रही हैं। दूसरी ओर, बंगाल की तृणमूल सरकार ने लक्ष्मी भंडार स्कीम को लागू करते हुए फरवरी में 500 रुपये की वृद्धि की थी। ममता बनर्जी की सरकार का यह प्रयास अगले चुनाव में एक बार फिर से लाभ हुनाने का है। महिलाओं का प्रभाव और वोटिंग ट्रेंड इन चारों राज्यों में लगभग 4.1 करोड़ महिलाएं इन योजनाओं की लाभार्थी हैं, जो कुल वोटरों का 23% हैं। इसलिए ये योजनाएं चुनावी गणित में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रहीं हैं। पिछले 5 साल में देखा गया है कि महिलाओं को नकद सहायता देने वाले राज्यों की संख्या 1 से बढ़कर 15 हो गई है। इन राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा महिलाएं लाभ उठा रही हैं। राज्य बजट और कैश ट्रांसफर की रुख इतना ही नहीं, झारखंड जैसा राज्य तो अपने ग्रामीण विकास बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर करने में खर्च कर रहा है। ये सभी योजनाएं जबकि खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बावजूद लागू हो रही हैं। हालांकि, यह भी देखने को मिल रहा है कि कई राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर ध्यान दे रहे हैं। अब 15 राज्य दे रहे महिलाओं को नगद सहायता बीते 5 साल में हुए चुनावों का ट्रेंड देखें तो पता चला है कि महिलाओं को कैश ट्रांसफर देने वाले राज्यों की संख्या एक से बढ़कर 15 हो गई है। ये राज्य 13 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को 2.46 लाख करोड़ रु. तक सालाना नकद पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं, जो इन राज्यों के कुल बजट का 0.7% है। झारखंड जैसा राज्य अपने ग्रामीण विकास के कुल बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर में दे रहा है। लेकिन, ट्रेंड ये भी है कि जो राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर खर्च कर रहे हैं, वहां कई योजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं। नकद स्कीमों के चलते महाराष्ट्र-कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों को अपने अहम खर्चों में कटौती करनी पड़ी है। मुफ्त योजनाएं और अन्य लाभ महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कैश ट्रांसफर योजनाएं केवल महिलाओं के लिए नहीं हैं। तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशन कार्डधारकों को मुफ्त फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस सिलेंडर मुफ्त प्रदान किए जा रहे हैं। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम अब 62 लाख लोगों को लाभ पहुंचा रही है, और पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। बेरोजगारी से निपटने के प्रयास बंगाल में करीब 1,500 करोड़ रुपये बेरोजगार युवाओं के लिए पेंशन योजना पर खर्च किए जा रहे हैं। इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें नौकरी की तलाश में मदद करना है। इस समय चारों राज्यों में महिलाओं को केन्द्रित करके चुनावी जंग लड़ी जा रही है। इन राज्यों में गेमचेंजर बनीं कैश ट्रांसफर वाली योजनाएं     मध्य प्रदेश: (2023): ‘लाड़ली बहना’ योजना के तहत 1.31 करोड़ महिलाओं को 1250 रुपए/माह; कई सीटों पर बढ़त।     कर्नाटक (2023): ‘गृह लक्ष्मी’ योजना (2000 रु./माह) ने कांग्रेस को जीत दिलाई।     ओडिशा (2024): ‘सुभद्रा’ योजना से भाजपा को पहली बार सत्ता।     महाराष्ट्र (2024): ‘लाड़की बहिन’ योजना (1500 रुपए/माह), बड़ा महिला वोट आधार।     झारखंड (2024): ‘मैया सम्मान’ योजना का चुनावी असर। हेमंत सोरेन की वापसी हुई। चुनावी राज्यों में ये भी ‘मुफ्त’ योजनाएं… तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशनकार्डधारकों को मुफ्त ​फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस ​सिलेंडर मुफ्त। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम में अब 62 लाख लोग। पेंशन भी 600 रु. बढ़ाकर 2 हजार रु. की। बंगाल में 1500 करोड़ रु. बेरोजगार युवा पेंशन पर खर्च हो रहे हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत: MP में पूरी टैक्स छूट योजना बढ़ सकती है 2 साल

भोपाल प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दो वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट बढ़ा सकती है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने परिवहन विभाग को अभिमत के लिए पत्र लिखा है। यहां से अभिमत मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। पहले दी गई थी एक साल की छूट पिछले वर्ष मार्च 2025 में राज्य सरकार ने ईवी नीति लागू करते हुए इलेक्ट्रिक दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में एक वर्ष की छूट दी थी। यह छूट 27 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। अब इसे दो वर्ष तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। रेट्रोफिटिंग पर भी मिल सकती है राहत ईवी नीति में 15 साल पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर दी गई छूट भी समाप्त हो गई है। इसके तहत दो पहिया पर 5 हजार, तीन पहिया पर 10 हजार और कार पर 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान था। इस छूट को बढ़ाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। पांच शहरों को बनाया जाएगा मॉडल शहर नीति के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल इलेक्ट्रिक व्हीकल शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही नीति अवधि के अंत तक 80 प्रतिशत सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। कमर्शियल वाहनों को 2027 तक छूट कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे ई-बस, ट्रक, ट्रैक्टर और एंबुलेंस को वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दी गई छूट 2027 तक जारी रहेगी। अधिकारियों का क्या कहना आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे का कहना है कि ईवी पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दो वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। इससे पहले परिवहन विभाग से अभिमत लिया जा रहा है।

सुरक्षा में हाईटेक कदम: टेकनपुर अकादमी के साथ 20 ड्रोन खरीद का बड़ा सौदा

ग्वालियर  पुनीत श्रीवास्तव, ग्वालियर. मप्र पुलिस अब अपनी एक्शन पावर को डिजिटल और आसमानी ऊंचाई देने जा रही है। दंगों और उपद्रव की स्थिति में अब पुलिसकर्मियों को भीड़ के करीब जाकर जोखिम लेने की जरूरत नहीं होगी। सेना और बीएसएफ की तर्ज पर प्रदेश पुलिस टीयर गैस लॉन्चर ड्रोन से लैस होने जा रही है। ग्वालियर के पास स्थित बीएसएफ अकादमी टेकनपुर की टीयर गैस यूनिट ने इन ड्रोन्स को खास तौर पर तैयार किया है। पुलिस मुख्यालय ने पहली खेप में 20 ड्रोन्स का सौदा किया है, जिनकी डिलीवरी का इंतजार अब अंतिम चरण में है। एडीजी प्लानिंग योगेश चौधरी ने बताया कि ड्रोन्स से प्रदेश में पुलिस की ताकत और तकनीक में इजाफा होगा। ड्रोन की डिलीवरी मिलने के बाद उन्हें संवेदनशीलता के आधार पर जिलों में वितरित करने के साथ ऑपरेटिंग का प्रशिक्षण भी दिलाएंगे। दंगाइयों पर काबू पाने का रामबाण इलाज साबित होगा पुलिस को दंगे या अन्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश के लिए परंपरागत उपायों के साथ ही अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेना जरूरी हो चुका है। इसके लिए ड्रोन बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। इसकी मदद से भीड़ में छिपे बदमाशों की पहचान बहुत आसान हो जाएगी। इतना ही नहीं रात में भी उनके चेहरे पहचाने जा सकेंगे। ड्रोन की सहायता से 300 मीटर तक आंसू गैस छोड़ी जा सकेगी खास बात यह है कि ड्रोन की सहायता से 300 मीटर तक आंसू गैस छोड़ी जा सकेगी। इसमें पूरी घटना रिकॉर्ड होंगी और कई मीटर दूर से इसे संचालित किया जा सकेगा।

हलवारा एयरपोर्ट से लुधियाना में अप्रैल से बुकिंग शुरू होगी, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा – मई में उड़ान संभव

लुधियाना  केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के लोगों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने बताया कि लुधियाना के हलवारा हवाई अड्डे से बहुत जल्द उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। लंबे समय से लोग इस एयरपोर्ट के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे और अब आखिरकार यह सपना पूरा होने जा रहा है। रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे पंजाब के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने जानकारी दी कि अप्रैल महीने से ही हलवारा एयरपोर्ट से फ्लाइट्स की बुकिंग शुरू हो जाएगी। पहली उड़ान 10 से 15 मई के बीच शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआत में यहां से 160 सीटों वाला ए320 इकोनॉमी एयरक्राफ्ट उड़ान भरेगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में दिल्ली और हलवारा के बीच रोजाना दो फ्लाइट्स चलाई जाएंगी। एक फ्लाइट सुबह होगी और दूसरी दोपहर में। इससे न सिर्फ लोगों को सफर करने में आसानी होगी, बल्कि व्यापार और कारोबार को भी काफी फायदा मिलेगा। अब तक लुधियाना और आसपास के इलाकों के लोगों को हवाई यात्रा के लिए चंडीगढ़ या अमृतसर जाना पड़ता था, लेकिन हलवारा एयरपोर्ट शुरू होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। बिट्टू ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद किया और कहा कि उनके विजन और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने की वजह से ही ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स संभव हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम पंजाब के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से सिर्फ यात्रा ही आसान नहीं होगी, बल्कि इसका असर पंजाब की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। व्यापार बढ़ेगा, नए निवेश आएंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। खासकर लुधियाना जैसे औद्योगिक शहर के लिए यह एक बहुत बड़ी सुविधा साबित होगी, क्योंकि यहां के कारोबारियों को अब देश के दूसरे हिस्सों में जाने के लिए ज्यादा समय नहीं लगेगा। व्यापार और यात्रा को मिलेगा बड़ा बूस्ट बिट्टू ने कहा कि हलवारा एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पंजाब में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। इसे राज्य के विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पीएम मोदी का जताया आभार बिट्टू ने इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। बिट्टू ने कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता से ही ऐसे प्रोजेक्ट संभव हो पा रहे हैं। इस नई शुरुआत के साथ पंजाब अब देश-विदेश से बेहतर कनेक्टिविटी की ओर बढ़ रहा है और विकास की नई उड़ान भरने को तैयार है। ग्लाडा और AAI का ज्वाइंट वैंचर है एयरपोर्ट इसमें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और पंजाब सरकार की 49 फीसदी है। पंजाब सरकार की तरफ से यह काम ग्लाडा ने करवाया है। इस तरह एयरपोर्ट ग्लाडा और एएआई का ज्वाइंट वेंचर है। एयरपोर्ट निर्माण पर खर्च की गई कुल राशि टर्मिनल बिल्डिंग आदि के निर्माण पर लगभग ₹70 करोड़ के करीब खर्च हुए। इसमें से ₹27 करोड़ मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग के लिए और ₹27 करोड़ विमानों के खड़े होने और टैक्सी-वे (Tarmac) के लिए खर्च किए गए हैं। इसके अलावा एप्रोच रोड के निर्माण पर भी 10 करोड़ के करीब खर्च किए गए। वहीं 161.27 एकड़ जमीन के बदले किसानों को लगभग ₹39.40 करोड़ का मुआवजा वितरित किया गया। किसानों को प्रति एकड़ मुआवजा लगभग ₹20.61 लाख (पुनर्वास भत्ते सहित) तय किया गया था।