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पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री

वस्त्रोद्योग के लिए नई कौशल विकास व्यवस्था तैयार हो, ग्रामोद्योग और माटीकला क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को मिले नई गति : मुख्यमंत्री पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होगा कुशल मानव संसाधन, प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने पर जोर ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन और विपणन सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वस्त्र क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कौशल विकास कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उद्योगों को समय पर प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित न होकर युवाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ना होना चाहिए। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समर्थ योजना के अंतर्गत अब तक 2.28 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 1.60 लाख से अधिक प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है और कुल प्रशिक्षार्थियों में उनका हिस्सा 87 प्रतिशत से अधिक है। वहीं उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को वस्त्र क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी बदलाव अत्यंत तेजी से हो रहे हैं। ऑटोमेशन, आधुनिक मशीनरी तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स जैसे नए क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समयानुकूल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक उपयोगी और रोजगारपरक बनाया जाए। बैठक में अधिकारियों ने वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कौशल विकास व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें उद्योगों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता, पारदर्शिता, निगरानी और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं के विकास पर भी चर्चा हुई। माटीकला क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है। मिट्टी से निर्मित उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बड़ी संख्या में कारीगर परिवारों की आजीविका का आधार भी हैं। उन्होंने माटीकला उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने, कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, सोलर चाक उपलब्ध कराने, नई तकनीक, बेहतर उपकरण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक 1,331 इकाइयों की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में 3,302.37 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है तथा 557.18 लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराई गई है। माटीकला महोत्सवों, प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 300 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लंबित ऋण प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक उद्योगों को केवल संरक्षण की नहीं, बल्कि नवाचार, ब्रांडिंग, डिजिटलीकरण और आधुनिक बाजार से जुड़ाव की आवश्यकता है। माटीकला के उत्पादों को ई-कॉमर्स, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन प्रणालियों से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रशिक्षण, बैंकों से समन्वय बनाकर वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, विपणन और रोजगार सृजन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

सीएम मान ने 355 युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, धुरी की रैली को लेकर हरियाणा सरकार पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज अलग-अलग विभागों में उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे। चंडीगढ़ के म्युनिसिपल भवन में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गयया। अब तक पंजाब सरकार 65,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दे चुकी है।इस दाैरान मान ने कहा कि आज अलग-अलग विभागों के 355 युवा लड़के-लड़कियों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। आने वाले दिनों में पंजाब सरकार इन युवा लड़के-लड़कियों को और भी कई नौकरियां देगी। ये नौकरियां मेरिट के आधार पर दी जाएंगी।  युवाओं ने खुद अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इसके लिए उन्हें कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ा और न ही किसी सिफारिश की जरूरत पड़ी। इसलिए मैं सभी को बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं।  भाजपा पर साधा निशाना इस दाैरान सीएम ने भाजपा पर निशाना साधा। मान ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री धुरी आए थे और आप जानते ही हैं कि उनके सामने कितने लोग बैठे थे। वह एक फ्लॉप शो था। पंजाब के लोग भाजपा को बिल्कुल भी पसंद नहीं करेंगे क्योंकि पंजाब की जनता और किसानों ने भाजपा का नफरत भरा चेहरा देख लिया है।   युवाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार के व्यापक दृष्टिकोण को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब न सिर्फ नौकरियां पैदा कर रहा है बल्कि ऐसे मौके भी पैदा कर रहा है जो युवाओं को अपने प्रदेश में रहने, आगे बढ़ने और सफल होने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने हुनरमंद युवाओं के पलायन के रुझान को पलटने, 65,000 ठेका कर्मचारियों के लिए रेगुलर नौकरी का रास्ता खोलने, 25 नई आई.टी.आई. और 13 मौजूदा आई.टी.आई. संस्थानों के अपग्रेडेशन के माध्यम से हुनर विकास में बड़े निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप सरकार पंजाब के युवाओं को देश में रहकर ही अपना भविष्य बनाने के लिए उन्हें विश्वास भरने, उचित मौके और हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। तकनीकी शिक्षा, सहकारिता, स्थानीय निकायों, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता, पशुपालन, लोक निर्माण, आवास निर्माण एवं शहरी विकास तथा अन्य विभागों में नए चुने गए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दिन पंजाब सरकार के राज्य के युवाओं को रोजगार और सुशासन के माध्यम से सशक्त बनाने के चल रहे मिशन में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस अवसर की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “आज 355 और युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिससे अब तक दी गई सरकारी नौकरियों की कुल संख्या 67,037 हो गई है। ये सारी नौकरियां पूरी तरह योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर दी गई हैं। ऐसे समय में जब देश भर में नीट जैसे पेपर लीक हो रहे हैं, पंजाब ने ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ भर्ती प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करके और शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में शीर्ष स्थान हासिल करके मिसाल कायम की है। मैं नव-नियुक्त उम्मीदवारों से अपील करता हूं कि वे सरकारी दफ्तरों में वरिष्ठ नागरिकों और आम लोगों के काम को प्राथमिकता दें। ‘आप’ सरकार युवाओं के विदेशों की ओर पलायन को रोकने और उन्हें पंजाब में ही तरक्की के मौके प्रदान करके उनके सपनों को पंख देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नव-नियुक्त उम्मीदवारों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारी सरकार में उम्मीदवारों के चयन का एकमात्र मापदंड कड़ी मेहनत, समर्पण और योग्यता है। वह दिन गए जब सरकारी नौकरियां रिश्वत, सिफारिशों या राजनीतिक संबंधों के आधार पर बांटी जाती थीं। आज योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से नौकरियां दी जा रही हैं। इन युवाओं ने सफलता प्राप्त करने के लिए दिन-रात मेहनत की है और यह उनके सफर की सिर्फ शुरुआत है। उनके लिए तरक्की की उड़ान भरने के लिए आसमान खुला है और मैं सभी उम्मीदवारों को आगे और बड़े मुकाम हासिल करने के लिए प्रयासरत रहने की सलाह देता हूं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज से ये नव-नियुक्त कर्मचारी सरकारी परिवार का एक अभिन्न अंग बन गए हैं और ये कर्मचारी खुशहाल व रंगला पंजाब के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा, “हम सब एकजुट होकर रंगला पंजाब की शान को बहाल करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे। आपके हर एक की अब समाज और राज्य के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सरकार ने आपको मौके देकर अपना फर्ज निभाया है। अब आपकी बारी है कि आप ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ लोगों की सेवा करें। पंजाब सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब के रिकॉर्ड की तुलना देश के अन्य हिस्सों की वर्तमान स्थिति से की। उन्होंने कहा, “2017 से अब तक देश भर में लगभग 93 परीक्षा पेपर लीक होने की रिपोर्ट मिली है। नीट समेत प्रमुख परीक्षाओं से जुड़ी ऐसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को निराश किया है। हालांकि, 2022 में हमारी सरकार के सत्ता संभालने के बाद पंजाब में एक भी पेपर लीक होने की घटना सामने नहीं आई है। इसका कारण यह है कि राज्य में एक ईमानदार सरकार काम कर रही है। होनहार विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और मेहनत के आधार पर नौकरियां और मौके मिल रहे हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा मेरिट के आधार पर अब तक 67,037 सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं और हर नियुक्ति भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद या पक्षपात से मुक्त होकर की गई है। शिक्षा क्रांति के तहत सरकार द्वारा किए गए शिक्षा सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में शानदार बदलाव लाया है। उन्होंने कहा, “जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली थी तो स्कूल शिक्षा में पंजाब देश भर में 27वें स्थान पर था। आज नीति आयोग के अनुसार पंजाब ने स्कूल शिक्षा में केरल जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहले नंबर पर कब्जा कर लिया है। यह उपलब्धि इसलिए संभव हुई क्योंकि हमने सरकारी स्कूलों को मजबूत करने और विश्व स्तरीय शैक्षणिक बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य भर के स्कूल अब … Read more

मुख्यमंत्री साय का संदेश: सकारात्मक सोच और जवाबदेही से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ

सकारात्मक सोच, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे शासन की योजनाओं का लाभ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार 2026 के तहत बालोद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों की विस्तृत समीक्षा लंबित राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण, पीएम आवास निर्माण में तेजी और पीएम सूर्यघर योजना के विस्तार पर दिया विशेष जोर रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बालोद तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में संचालित विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की व्यापक समीक्षा की। समीक्षा बैठक में कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राजस्व प्रकरणों, ग्रामीण एवं शहरी विकास, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत उन्होंने जनसमस्या निवारण शिविरों और चौपालों के माध्यम से सीधे लोगों से संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद प्रशासनिक अमले ने आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए समर्पित भाव से कार्य किया है और इस प्रतिबद्धता को आगे भी बनाए रखना होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच, जवाबदेही और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि शासन की किसी भी योजना का पात्र हितग्राही लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण और स्वामित्व योजना पर जोर मुख्यमंत्री साय ने दोनों जिलों में लंबित राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा नक्शा सुधार से संबंधित मामलों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना तथा राजस्व अभिलेखों के अद्यतन कार्यों में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास और पीएम सूर्यघर योजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाने के निर्देश प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण एवं शहरी) की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पहले अधिकतम स्वीकृत आवासों का निर्माण पूर्ण किया जाए, ताकि हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण कार्यों को गति देने के लिए अधिक से अधिक कारीगरों को मेसन प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति भी सुनिश्चित हो सके। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 तक प्रदेश में पांच लाख सौर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य प्राप्त करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाए तथा योजना से मिलने वाले आर्थिक और ऊर्जा संबंधी लाभों की जानकारी लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। किसानों को खाद-बीज की कमी न हो, नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दें मुख्यमंत्री साय ने खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के संबंध में किसानों को जागरूक किया जाए तथा इसके लाभों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के सभी पात्र किसानों को योजना से लाभान्वित करने और एग्रीस्टैक पंजीयन कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। धान उपार्जन और धान उठाव की समीक्षा करते हुए उन्होंने समयबद्ध उठाव सुनिश्चित करने तथा स्थानीय स्तर पर राइस मिलों की स्थापना के लिए उद्योग विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक पहल करने को कहा। महिला सशक्तिकरण, आजीविका और कुपोषण उन्मूलन पर विशेष फोकस बिहान योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री निर्माण में महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने तथा दोनों जिलों में इस कार्य को प्रारंभ करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थिति, कुपोषित बच्चों की संख्या और सुपोषण अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए कुपोषण उन्मूलन के लिए संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 20 हजार 245 तथा बालोद जिले में 36 हजार 312 लखपति दीदी तैयार हो चुकी हैं। इसके अलावा औराटोला को लखपति ग्राम के रूप में विकसित किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बरसात पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि वर्षा ऋतु के दौरान संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और जिला अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने टीबी मुक्त पंचायत अभियान, संस्थागत प्रसव तथा विभिन्न जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। बालोद जिले में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने आवश्यक रोकथाम, जागरूकता और उपचार संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पेयजल, सड़क और डिजिटल सेवाओं की प्रगति की समीक्षा जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने गर्मी और आगामी वर्षा ऋतु के दौरान निर्बाध पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मोहला-मानपुर क्षेत्र में स्वीकृत 60 किलोमीटर सड़क निर्माण में से 50 किलोमीटर कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा शेष 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऐसे मार्गों की भी समीक्षा की जो वर्षा ऋतु में आवागमन के लिए कठिन हो जाते हैं और उन्हें बारिश से पहले दुरुस्त करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ऑफिस, ई-डिस्ट्रिक्ट और अटल डिजिटल सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिक सेवाओं … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह संग लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया

यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को साइंटिफिक तरीके से बढ़ाएगा क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह संग लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया यूपी के पास देश के 35-36 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन की क्षमता, जरूरत इसे तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की: सीएम योगी सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का जताया आभार, कहा- क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र से होगा यूपी को बड़ा लाभ राज्य सरकार चाहती है कि मौसम की और सटीक जानकारी के लिए उसका अपना सेटेलाइट हो: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किए गए कार्यों के परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ मिलेगा। यूपी देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य है। महज 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि में यूपी देश का 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन करता है। समय पर मौसम, बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि या ओलावृष्टि की जानकारी नहीं मिलेगी तो हम किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना मौसम की और सटीक जानकारी प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  मुख्यमंत्री ने सोमवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह संग बटन दबाकर क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। इसे लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को परिवर्तित कर स्थापित किया गया है। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि हम लोग सीजन में अतिवृष्टि-अनावृष्टि, आकाशीय बिजली आदि के संबंध में मेट्रोलॉजिकल व अन्य विभागों की बैठक में चर्चा करते थे कि समय पर सटीक जानकारी मिलने से सही रणनीति संभव होती है। आज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लखनऊ खुद को मेट्रोलॉजिकल रीजनल सेंटर के रूप में स्थापित कर रहा है। य़ह यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीएम ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति आभार भी जताया।  12 वर्ष में आए परिवर्तन का दिखता है लाभ सीएम ने कहा कि आजादी के बाद इस विषय पर अपेक्षित ध्यान न देने का परिणाम था कि अन्नदाता किसान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को रोकने वाले प्रयास भी अधूरे रहे। लेकिन, पिछले 12 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जो अभियान प्रारंभ किया, उसका परिणाम सभी देख रहे हैं। 12 वर्ष पहले बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, आकाशीय बिजली के खतरों के बारे में जो जानकारी मिलती थी, होता उससे ठीक उल्टा था, लेकिन अब मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है। आपदा से तीन घंटे पहले मोबाइल पर अलर्ट  सीएम ने कहा कि 13 मई को आंधी-तूफान से प्रदेश के कुछ जनपदों में जनधन की काफी हानि हुई थी। बैठक में मैंने पूछा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम क्यों काम नहीं कर रहा था। पता चला कि सिस्टम तो काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का अभाव है। फिर रात में पूरे प्रदेश के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मैंने कहा कि जब आपको अलर्ट मिल रहा है तो आपको भी स्थानीय स्तर पर लोगों व संस्थाओं को अलर्ट करना चाहिए। इस बैठक के चौथे-पांचवें दिन भी आपदा आई, लेकिन तीन घंटे पहले सबके मोबाइल पर अलर्ट आना प्रारंभ हो गया।  सीएम ने किया सहारनपुर की घटना का जिक्र सीएम ने सहारनपुर की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां शिवालिक पहाड़ी की तलहटी में मां शाकम्भरी देवी का मंदिर है। देहरादून व शिवालिक पहाड़ियों में भारी बरसात हुई। यहां बारिश होने से एकत्र होने वाला जल बाढ़ जैसा माहौल पैदा कर देता है। उस समय मंदिर में कीर्तन चल रहा था, काफी श्रद्धालु मौजूद थे, लेकिन मौसम विभाग ने समय से सही जानकारी दी तो सभी को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया, जिससे जनधन की व्यापक हानि रुक गई। अर्ली वार्निंग सिस्टम का लाभ  सीएम ने कहा कि मीरजापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि कई जनपदों में आकाशीय बिजली का खतरा बहुत रहता है। हर वर्ष 100-150 लोगों की मौत होती थी। चार-पांच वर्ष पहले प्रयागराज से पटना के बीच एक ही दिन में 90 मौतें हुई थीं। इसमें यूपी के 30 व बिहार के 60 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एमडीएमए, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की बैठक में मैंने पूछा कि आखिर इन मौतों को कौन रोकेगा। क्या इसे तकनीक से रोका नहीं जा सकता, तब विभाग ने बताया कि यह संभव है। अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का परिणाम है कि उक्त जिलों में हर वर्ष होने वाली मौत के आंकड़े घटकर महज दर्जन भर रह गए। लोगों को भी ऐसे मौसम में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए।   अपना सेटेलाइट चाहती है राज्य सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी को सदैव डॉ. जितेंद्र सिंह का सकारात्मक सहयोग मिलता है। मौसम की पूर्व जानकारी किसानों की आमदनी बढ़ाने और आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अनावृष्टि व ओलावृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमने इसरो से भी अनुरोध किया था कि राज्य सरकार चाहती है कि उसके पास अपना सेटेलाइट हो, जो मौसम की और सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके। चिड़िया व जानवरों का व्यवहार बता देता था मौसम का रुख मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य ने जबसे बुद्धिमत्ता का उपयोग प्रारंभ किया होगा, उसके लिए सबसे पहले मौसम की जानकारी, आकाश में चमकती बिजली, बादलों से होने वाली वर्षा जैसी स्थितियां कौतूहल का विषय बनीं। ऋषि-मुनियों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंचांग का निर्माण किया। आज भी ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर की गई गणना मौसम की सटीक जानकारी का आधार बनती है। लोक कहावतों, लोक परंपराओं में भी हम देखते थे कि अमुक चिड़िया की बोली या जानवरों का व्यवहार परिवर्तन मौसम की पूर्व जानकारी देने का माध्यम बनता था। मौसम चक्र में आया एक महीने का अंतर सीएम ने कहा कि क्लाईमेट चेंज होने से मौसम चक्र में लगभग एक महीने का अंतर आया है। यही हाल रहा … Read more

संजीव अरोड़ा केस में प्रवर्तन निदेशालय की ताबड़तोड़ रेड, कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

लुधियाना  पंजाब की भगवंत मान सरकार के पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक्शन तेज कर लिया है. ईडी ने सुबह-सुबह यूपी से पंजाब तक छापेमारी की है. संजीव अरोड़ा को ईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था वो अभी गुरुग्राम की जेल में बंद हैं।  ईडी ने संजीव अरोड़ा से जुड़े जिस मामले में देश के अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की है, वो दुबई को मोबाइल फोन के फर्जी एक्सपोर्ट से जुड़ा है. कई जगहों पर सुबह से छापेमारी चल रही है. यूपी के नोएडा और बरेली, दिल्ली और पंजाब के जालंधर शहर में ईडी की कार्रवाई जारी है।  अधिकारियों के अनुसार, जिन परिसरों में सर्च ऑपरेशन चल रहा है, उनमें हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड मामले में जांच के दायरे में आए व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़े आवास और व्यावसायिक कार्यालय दोनों शामिल हैं।  केजरीवाल बोले- हिंदू व्यापारियों पर ईडी की रेड आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने ईडी को ईडी पार्टी बताते हुए कहा, 'ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है. ED पार्टी पंजाब के छोटे-छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है. मेरी सभी व्यापारियों से अपील है- घबराने की कोई बात नहीं है, पूरा पंजाब और पंजाब सरकार आपके साथ है, हम सब मिलकर ED पार्टी का मुकाबला करेंगे।      ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है। ED पार्टी पंजाब के छोटे छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है। पंजाब, यूपी और दिल्ली-NCR में 6 ठिकानों पर छापेमारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (Hampton Sky Realty Ltd.) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में 6 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जारी जांच के क्रम में लुधियाना और जालंधर (पंजाब), बरेली (उत्तर प्रदेश) तथा दिल्ली-नोएडा क्षेत्र में एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन परिसरों पर तलाशी ली जा रही है उनमें मामले से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के आवासीय एवं व्यावसायिक कार्यालय शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की जांच के तहत की जा रही है। तलाशी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है और एजेंसी द्वारा बरामद सामग्री का विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। संजीव अरोड़ा के खिलाफ एक्शन क्यों? संजीव अरोड़ा को ED ने 100 करोड़ रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें उनसे जुड़ी कुछ इकाइयां शामिल हैं. अरोड़ा से जुड़ी कंपनी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) ने फर्जी दस्तावेजों और फर्जी निर्यात के जरिए करीब ₹102.5 करोड़ की अवैध कमाई की और GST रिफंड लेकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया. बता दें कि HSRL को पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। 

Stock Market Bounce Back: बाजार में आई जबरदस्त रिकवरी, टाटा से इंडिगो तक निवेशकों की चांदी

मुंबई  शेयर बाजार में जारी गिरावट पर ब्रेक लगा नजर आ रहा है और सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को सेंसेक्स-निफ्टी ने उबरते हुए तेज शुरुआत की. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स 74000 के पार खुला, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने भी 23,200 के पार निकलकर कारोबार शुरू किया. इस तेजी के बीच बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल 30 कंपनियों में से 25 के शेयर तेजी के साथ ग्रीन जोन में ट्रेड करते हुए नजर आए. सबसे ज्यादा तेजी टाटा की कंपनी Trent और IndiGo के शेयर में दिखी।  सेंसेक्स-निफ्टी की धांसू शुरुआत  मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशों से पॉजिटिव संकेत मिल रहे थे और कारोबार की शुरुआत भी धांसू हुई. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,524 की तुलना में तेज रफ्तार के साथ उछला और 74,035 के लेवल पर खुला. एनएसई निफ्टी ने भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ग्रीन जोन में ओपनिंग की. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स पिछले बंद 23,123 के मुकाबले खुलते ही 23,259 पर पहुंच गया।  इन 10 शेयरों में जोरदार तेजी शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही कई दिग्गज कंपनियों के शेयर छलांग लगाते हुए नजर आए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में Trent Share (2.50%), ICICI Bank Share (2%), Axis Bank Share (1.75%) और IndiGo Share (1.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था।  तो वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल IDFC First Bank Share (3.50%), TI India Share (2.80%), Nykaa Share (2.30%), Bharat Forge Share (2.10%) और Yes Bank Share (2%) की उछाल में नजर आए. स्मॉलकैप कैटेगरी में देखें, तो सबसे तेज उछाल Radington Share  में आई और ये 3 फीसदी की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था।  शेयर बाजार में तेजी का बड़ा कारण Stock Market में अचानक आई इस तेजी के पीछे के कारणों की बात करें, तो सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट को माना जा सकता है, जिससे महंगाई का जोखिम कम हुआ है और निवेशकों को सेंटीमेंट सुधरा है।  दरअसर, बीते कारोबारी दिन सोमवार को ईरान-इजरायल संघर्ष बढ़ने के बीच Crude Oil Price में आग लगी हुई नजर आई थी और ब्रेंट क्रूड की कीमत 5 फीसदी के आसपास उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी, लेकिन फिर एक दम से तेल की दाम गिर गए और खबर लिखे जाने तक Brent Crude Price 93 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा था।  इसके अलावा एशियाई शेयर बाजारों में तेजी के चलते भी निवेशकों की धारणा में बदलाव देखने को मिला. जापान का निक्केई से लेकर साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स तक खुलने के साथ ही तूफानी तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे। 

परमाणु शक्ति में भारत की बढ़त, हथियारों की संख्या 190 हुई; पाकिस्तान की क्षमता पर भी रिपोर्ट में खुलासे

नई दिल्ली वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महाशक्तियों के बीच अविश्वास के माहौल के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बेहद चौंकाने वाली और रिपोर्ट सामने आई है. रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट' (SIPRI) ने अपनी सालाना 'सिपरी ईयरबुक 2026' जारी कर दी है. परमाणु हथियारों की संख्या और उनके प्रभाव को कम करने के लिए दशकों से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयास अब पूरी तरह से उल्टे होते दिख रहे हैं।  दुनिया के कई देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बार फिर परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं. उनका मॉडर्न कर रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर परमाणु युद्ध या किसी गलतफहमी के कारण होने वाले परमाणु एस्केलेशन का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है।  इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भारत ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है. भारत का परमाणु हथियार भंडार साल 2025 के 180 वॉरहेड्स से बढ़कर साल 2026 में 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है।  इस बढ़ोतरी के साथ ही भारत रणनीतिक रूप से अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल गया है, जिसकी परमाणु क्षमता इस दौरान बिना किसी बदलाव के 170 वॉरहेड्स पर ही रुकी हुई है. सिपरी की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत तेजी से और बहुत ही परिपक्वता के साथ अपनी रणनीतिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।  भारत की छलांग और पाकिस्तान की स्थिरता भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने परमाणु बलों और मिसाइल डिलीवरी सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में भारत अब स्पष्ट बढ़त बना चुका है. जहां भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं. वहीं पाकिस्तान के पास केवल 170 वॉरहेड्स हैं. रिपोर्ट में भारत को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऑपरेशनल शिफ्ट का जिक्र किया गया है।  भारत और चीन जैसे उभरते हुए परमाणु संपन्न देश अब शांति काल के दौरान भी अपनी मिसाइलों पर छोटी संख्या में परमाणु वॉरहेड तैनात कर सकते हैं. यह भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस में आए एक बड़े बदलाव को दर्शाता है. भारत अब किसी भी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में बेहद कम समय में जवाबी कार्रवाई करने के लिए खुद को तैयार कर चुका है. हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए टकरावों ने परमाणु प्रतिरोध और संकट की स्थिति में स्थिरता से जुड़े पुराने सिद्धांतों को कड़ी चुनौती दी है, जिसके कारण दोनों ही देश सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं।  मामूली गिरावट के बीच आधुनिकीकरण की आंधी यदि हम पूरी दुनिया के स्तर पर देखें, तो सिपरी का अनुमान है कि जनवरी 2026 तक दुनिया का कुल परमाणु भंडार 12187 वॉरहेड्स था. अगर इसकी तुलना एक साल पहले यानी 2025 से की जाए, तो तब यह संख्या 12241 थी. कुल संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भ्रामक हो सकती है।  देश अपने पुराने और सेवामुक्त हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं. नए, अधिक घातक परमाणु प्रणालियों की तैनाती को तेज कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह ट्रेंड पूरी तरह पलट सकता है और कुल संख्या फिर से बढ़ सकती है।  इस समय दुनिया भर के कुल 12,187 परमाणु हथियारों में से लगभग 9,745 वॉरहेड्स को सैन्य भंडारों में संभावित उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है. इनमें से लगभग 4,012 वॉरहेड्स को मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा चुका है।  सबसे डराने वाली बात यह है कि दुनिया भर में करीब 2,100 से 2,200 परमाणु वॉरहेड्स को 'हाई ऑपरेशनल अलर्ट' पर रखा गया है, यानी ये वो हथियार हैं जिन्हें महज कुछ ही मिनटों के आदेश पर दागा जा सकता है. इस श्रेणी में सबसे ज्यादा हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं।  कौन सा देश है किस पायदान पर?   परमाणु हथियारों की होड़ में आज भी शीतयुद्ध के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी यानी रूस और अमेरिका ही सबसे आगे खड़े हैं. वैश्विक स्तर पर इन दोनों देशों का ही दबदबा है…     रूस: रूस इस समय दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना हुआ है, जिसके पास कुल 5420 वॉरहेड्स का विशाल भंडार है।      अमेरिका: अमेरिका इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसके पास वर्तमान में 5,042 वारहेड्स मौजूद हैं।      चीन: भारत का पड़ोसी देश चीन भी अपने परमाणु बेड़े को बहुत आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है. चीन का परमाणु भंडार 600 से बढ़कर 620 वॉरहेड्स हो गया है।      फ्रांस: इस साल की रिपोर्ट में फ्रांस ने सबको चौंकाया है. फ्रांस ने अपने भंडार में सबसे तेज बढ़ोतरी करते हुए इसे 290 से सीधे 370 वॉरहेड्स तक पहुंचा दिया है।      ब्रिटेन: यूनाइटेड किंगडम (UK) ने अपनी रणनीतिक क्षमता को स्थिर रखा है. उसके पास वर्तमान में 225 वॉरहेड्स हैं।      इजरायल: मिडिल ईस्ट में जारी भारी युद्ध और तनाव के बावजूद इजरायल का अनुमानित परमाणु भंडार बिना किसी बदलाव के 90 वॉरहेड्स पर ही बना हुआ है।      उत्तर कोरिया: अपनी सनकी मिसाइल नीतियों के लिए जाना जाने वाला उत्तर कोरिया भी लगातार घातक हथियार बना रहा है. उसका भंडार 50 से बढ़कर 60 वॉरहेड्स हो गया है।  दुनिया के ये सभी नौ देश (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल) अपने परमाणु शस्त्रागार को नया रूप दे रहे हैं. कई नई परमाणु-सक्षम प्रणालियों को सेना में शामिल कर रहे हैं।  सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के उपकरण के रूप में परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता वैश्विक शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है. सैन्य प्रौद्योगिकी में नए विकास, वैश्विक स्तर पर हथियारों के नियंत्रण के समझौतों का कमजोर होना और महाशक्तियों के बीच बढ़ती राजनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता ने दुनिया को एक बेहद खतरनाक चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। 

लंबे बिजली कट पर अब भरपाई करेगी कंपनी, 4 घंटे से अधिक बाधित रही सप्लाई तो मिलेगा हर्जाना

भोपाल  मध्य प्रदेश विद्युत विभाग ने जबलपुर में बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी खुशखबरी दी है। शहर में 4 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा। बिजली सप्लाई बंद होने के कारणों का पता लगाने के बाद बिजली विभाग मुआवजे की राशि निर्धारित करेगा। प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही ऐसा नया नियम लागू होने वाला है, जिसके बाद बिना सूचना के होने वाली बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने के लिए अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बिजली कंपनी की गलती साबित होने पर मुआवजे की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू होगी। यानी अब घंटों बिजली गुल रहने और शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या पर लगाम लग सकती है। अब खुद मिलेगा मुआवजा सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है। इसमें इस व्यवस्था को बहुत कड़ा और साफ कर दिया गया है। इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बदलाव करके बिजली सप्लाई की क्वालिटी और उसे ठीक करने का एक समय तय किया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो मुआवजा अपने आप आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। स्मार्ट मीटर से खुलेगी कंपनियों की पोल अक्सर बिजली कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि बिजली सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही कटी थी। अब ऐसा नहीं चल पाएगा। जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कब कटी और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा। इस डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से कंपनियां झूठ नहीं बोल पाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को उनका हक आसानी से मिल जाएगा। अभी ऐसी स्थिति अभी विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों ने अघोषित या तय सीमा से ज्यादा बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को हर्जाना देने का प्रावधान तय किया है। सामान्य फॉल्ट जैसे फ्यूज उडना या तार टूटना को 1 से 3 घंटे के भीतर ठीक करना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे का समय तय है। ट्रांसफार्मर जलने पर 12 घंटे में आपूर्ति का समय है। प्रतिघंटा 25 रुपए से 100 रुपए तक है। इस संशोधन से स्मार्ट मीटर दिलाएगा मुआवजा नए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में इस व्यवस्था को और स्पष्ट बनाया जा रहा है। नए संशोधन बिल की धारा 58 में संशोधन के तहत बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बहाली की बेसलाइन तय की जा रही है। स्मार्ट मीटर में क्षेत्र की बिजली कटौती का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होगा। ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे और शहरों में 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं आई, तो स्वतः मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जो सीधे उनके बिजली खाते या अगले बिल में क्रेडिट होगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कटने और जुड़ने का समय सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे कंपनियों को यह झूठ बोलने का मौका नहीं मिलेगा कि बिजली सिर्फ 10 मिनट के लिए कटी थी। बिजली गुल हो तो ये रखें ध्यान बिजली कटते ही तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत नंबर रखें। बिजली कब कटी और कितने घंटे बाद आई, इसका रिकॉर्ड रखें। कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 45 दिनों में समस्या का समाधान करना अनिवार्य है। बिजली सुधारने के लिए अभी के नियम? विद्युत नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह के फॉल्ट को ठीक करने का एक समय तय किया गया है। कंपनियां इस समय के अंदर बिजली बहाल नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा। खराबी का प्रकार  शहर के लिए समय सीमा  ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय सीमा  सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) 1 से 3 घंटे 4 घंटे ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना 12 घंटे 12 घंटे बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना 2 घंटे 4 घंटे यदि आपके इलाके में बिना किसी पहली सूचना के 4 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति  बंद रहती है, तो आप अभी भी उपभोक्ता फोरम से मुआवजे की मांग कर सकते हैं। बिजली गुल होने पर इन 4 बातों का रखें ध्यान बिजली कटते ही सबसे पहले बिजली कंपनी के टोल-फ्री नंबर या व्हाट्सएप नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को कहीं लिख कर सुरक्षित रख लें। बिजली किस समय कटी थी और कितने घंटे बाद वापस आई। इसका अपने पास एक रिकॉर्ड जरूर रखें। अगर कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी आपके बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती है, तो बिजली उपभोक्ता, उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपनी शिकायत दे सकते हैं। इस फोरम के लिए 45 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो ने कहा कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा। नए बिजली बिल के तहत यदि उपभोक्ताओं को शिकायत करने या मुआवजा पाने का अधिकार मिलता है, तो पात्र लोगों को उसका फायदा जरूर दिया जाएगा।

BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा इंदौर, कृषि क्षेत्र के मुद्दों पर जुटेंगे 20 देशों के प्रतिनिधि

इंदौर  मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक बेहद बड़े और प्रतिष्ठित आयोजन का मुख्य केंद्र बनने जा रही है। जी-20 शिखर सम्मेलन और प्रवासी भारतीय दिवस की शानदार सफलता के बाद अब इस साफ-सुथरे शहर को 'ब्रिक्स' (BRICS) देशों की बेहद महत्वपूर्ण कृषि बैठक की मेजबानी करने का गौरव मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय समागम में भारत सहित दुनिया के 11 प्रमुख सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और केंद्रीय मंत्री शामिल होने जा रहे हैं। आपको बता दें कि यह आयोजन इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि ब्रिक्स देशों के पास पूरी दुनिया की करीब 42 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि मौजूद है। ऐसे में यह शक्तिशाली समूह खेती-किसानी से जुड़ी वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श करेगा। सोमवार से ही विदेशी मेहमानों और राजनयिकों का इंदौर आगमन शुरू हो जाएगा। बैठक के साथ-साथ इन विदेशी प्रतिनिधियों को मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से रूबरू कराने की भी विशेष तैयारी की गई है। इसके तहत उनके भ्रमण कार्यक्रम में इंदौर के मशहूर खान-पान केंद्र 'छप्पन दुकान', ऐतिहासिक 'राजवाड़ा पैलेस' और पारंपरिक 'ग्रामीण हाट-बाजार' जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थलों को शामिल किया गया है। यह महा-मंथन एक ऐसे नाजुक समय में होने जा रहा है जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज), वैश्विक खाद्य संकट और तेजी से बढ़ती आबादी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच पर पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए कृषि उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर व सीमित उपयोग पर जो भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे, वे आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि रणनीतियों और नीतियों को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। तकनीक, डिजिटल खेती और किसानों की आय पर रहेगा मुख्य फोकस आगामीआज 9 जून से शुरू होने जा रही ब्रिक्स कृषि कार्य समूह (AWG) की इस तीन दिवसीय बैठक में कई तकनीकी और नीतिगत विषयों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना, बदलते मौसम का फसलों पर पड़ने वाला असर, कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का विस्तार और किसानों की आर्थिक स्थिति व आय को मजबूत करने के उपाय इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल रहेंगे। बदलते दौर को देखते हुए इस बैठक में पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक विषयों पर विशेष मंथन किया जाएगा। इसके तहत डिजिटल कृषि (डिजिटल एग्रीकल्चर), प्रिसिजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा आधारित फसल प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर बात होगी। वैज्ञानिक और नीति-निर्धारक यह साझा रणनीति तैयार करेंगे कि किस तरह इन तकनीकों के दम पर कम से कम संसाधनों, कम पानी और कम लागत में अधिक से अधिक पैदावार हासिल की जा सके। इसके अलावा, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान के बीच खेती को टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और घाटे से उबारकर लाभकारी बनाने के लिए सभी सदस्य देश अपने-अपने सफल अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। ब्रिक्स समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएं  1. खाद्य सुरक्षा, पोषण-किसानों की आजीविका 2. कृषि व्यापार और आपसी सहयोग 3. जलवायु अनुकूल और सतत कृषि 4. नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी  42 फीसदी खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा- ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ यह विश्व के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बन गया है। वैश्विक नजरिए से यह समूह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की लगभग 42 फीसदी कृषि भूमि, 68  प्रतिशत कृषि और करीब 42 फीसदी खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास है। अधिकारियों ने अब तक आठ बैठकें की संवाददाताओं से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी हर नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । भारत की अध्यक्षता में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 सत्रों में 8 सफल बैठकें होंगी। चार वर्गों पर मुख्य फोकस छोटे और सीमांत किसान हमारी हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे। कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषयों-खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी को सशक्त बनाने पर विशेष काम किया जा रहा है। भारत पहले भी तीन सम्मेलनों की अध्यक्षता कर चुका इस मंच पर होने वाला सहयोग पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है । भारत इससे पहले भी साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है, जिसके दौरान 2016 में 'ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच' जैसी बड़ी पहल शुरू की गई थी। 'हमारी नीति में छोटे जोत वाले किसान' शिवराज सिंह चौहान ने कहा अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी प्रत्येक नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इस बार इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत … Read more

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 8वें वेतन आयोग को लेकर 14 लाख रुपये एरियर की अटकलें तेज

नई दिल्ली 8th Pay Commission: 8वें पे कमीशन ने एक बार फिर से लोगों को सुझाव देने की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया है। अब 15 जून तक सभी स्टेकहोल्डर्स अपना सुझाव 8वें वित्त आयोग को दे सकते है। पहले यह डेडलाइन 5 मार्च 2026 थी। उसके बाद डेडलाइन को बढ़ाकर 30 अप्रैल किया गया। फिर इसे आगे बढ़ाते हुए 31 मई कर दिया गया था। इस प्रक्रिया में लगातार आगे बढ़ा जा रहे डेडलाइन की वजह से लग रहा है कि पे कमीशन अपनी रिपोर्ट जमा करने में अभी समय लेगा। ऐसे में कर्मचारियों के बीच देरी वजह से एरियर को लेकर भी खूब चर्चाएं हो रही हैं। 14 लाख रुपये तक मिलेगा एरियर? रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को 5 लाख रुपये से 14 लाख रुपये तक एरियर मिल सकता है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल पर होता है। 7वां वित्त आयोग 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसे में 8वां वित्त आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है। लेकिन पे कमीशन की रिपोर्ट तैयार ना होने की वजह से अभी भी कर्मचारियों को 7वें पे कमीशन के हिसाब से ही सैलरी मिल रही है। एक बार आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाए उसके बाद कर्मचारियों को 8वें पे कमीशन के हिसाब से सैलरी मिलेगी। क्योंकि पे कमीशन 1 जनवरी से प्रभावी है। इसलिए एक बड़ा अमाउंट एरियर के तौर पर कर्मचारियों को मिलेगा। कैसे तय होगा एरियर का भुगतान सबकुछ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा। 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है उसी के आधार पर आगे का फैसला होगा। 7वें वित्त आयोग के दौरान 2.57 फिटमेंट फैक्टर रखा गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 8वें पे कमीशन के दौरान 3.68 फिटमेंट फैक्टर रह सकता है। अगर यह फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर 66240 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा। मंथली सैलरी में सरकारी कर्मचारियों के 48240 रुपये की बढ़ोतरी होगी। अगर 10 महीने का एरियर देखें तो यह 482400 रुपये के स्तर पर पहुंचता है। कैबिनेट सचिव के पोस्ट के अधिकारी का बेसिक पे इस समय 7वें पे कमीशन के अनुसार 482400 रुपये है। अगर 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तब की स्थिति में बेसिक पे बढ़कर 920000 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। मंथली सैलरी 670000 रुपये बढ़ जाएगी। ऐसे में महज 2 महीने का ही एरियर 1340,000 रुपये हो जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2.28 से 2.86 फिटमेंट फैक्टर रखा जा सकता है।