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बस्तर से मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का संदेश, मुनगा अपनाएं, सुपोषण बढ़ाएं और पर्यावरण बचाएं

हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण : बस्तर से मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिया पोषण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बस्तर संभाग के सुकमा जिले के प्रवास के दौरान सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, लस्केपारा (छिंदगढ़) की पोषण वाटिका में नन्हें बच्चों के साथ मुनगा एवं पपीता के पौधों का पौधरोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘‘हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण’’ का संदेश देते हुए पौष्टिक आहार, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों को मुनगा और पपीता के पोषण संबंधी महत्व, इनके स्वास्थ्य लाभ तथा संतुलित आहार में उनकी उपयोगिता के बारे में सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के हाथों से भी पौधे लगवाए और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मुनगा को "सुपोषण वृक्ष" के रूप में पहचान मिल चुकी है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां और फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं तथा कुपोषण की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पपीता भी विटामिन एवं खनिज तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है, जो बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों के अभिभावकों से अपने घरों एवं आंगनों में मुनगा के पौधे लगाने की अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने आसपास पौष्टिक वृक्ष लगाए, तो घर के समीप ही पोषक आहार उपलब्ध होगा और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन, सुपोषित परिवार और हरित भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प भी है। राज्य सरकार द्वारा संचालित सुपोषण अभियान के अंतर्गत पोषण वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। बस्तर अंचल से शुरू हुआ यह संदेश प्रदेश में पोषण, स्वास्थ्य और हरियाली के प्रति जनजागरूकता का प्रभावी अभियान बनकर उभर रहा है।

शुजालपुर को मिली बड़ी सौगात, दो मेट्रोपॉलिटन एरिया का मिलेगा लाभ; CM डॉ. मोहन यादव का ऐलान

शुजालपुर अंचल को मिलेगा दो मेट्रोपॉलिटन एरिया का लाभ: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शाजापुर और शुजालपुर क्षेत्र विकास की नई मंजिलें तय करेगा। आने वाले वक्त में जहां इंदौर- उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया में बड़ा भू-भाग सम्मिलित होने से इस अंचल की प्रगति तीव्र होगी, वहीं भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया से भी जुड़े होने का लाभ क्षेत्र को प्राप्त होगा। विकास के नए कीर्तिमान बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति और विकास के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के नेतृत्व में आए शुजालपुर क्षेत्र के नागरिकों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर शुजालपुर क्षेत्र के नागरिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गणमाला पहनाकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य महेश केवट भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुजालपुर शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां विधि महाविद्यालय की मंजूरी के साथ अन्य विषयों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए भी राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी। प्रदेश में विकास के सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्य हो रहा है। इसका लाभ शुजालपुर को भी मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी देकर विकास की राह आसान की है। इस क्रम में आने वाले वर्षों में पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के कारण सम्पूर्ण शाजापुर जिला लाभांवित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश गेहूं के उत्पादन में और किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी के कार्य में अग्रणी है। कृषक कल्याण वर्ष में कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ दुग्ध व्यवसाय के माध्यम से किसानों और पशुपालकों को लाभ दिलवाने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल से मंदसौर के नए हाई-वे के साथ ही शुजालपुर में हेलीपैड निर्माण और स्टेडियम निर्माण के कार्य भी किए जाएंगे। मंत्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थी काल से शुजालपुर क्षेत्र को अपना माना है। क्षेत्र की जनता ने विभिन्न सौगातें मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अभिनंदन का निर्णय लिया। कार्यक्रम में राजेश मोहन श्रीवास्तव, हेमराज सिंह सिसोदिया, कैलाश सोनी, अशोक नायक, योगेंद्र आदि उपस्थित थे।  

शहीद ASI रामू राम नाग को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दी श्रद्धांजलि, परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस

शहादत को नमन : मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर दी श्रद्धांजलि शहीद की माताजी से की आत्मीय भेंट, अंत्योदय कार्ड जारी करने के दिए निर्देश रायपुर   महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुकमा जिले के जगरगुंडा स्थित शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा एवं जनसेवा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने शहीद की माताजी से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान प्रदेश और देश की अमूल्य धरोहर है तथा उनके परिवारों का सम्मान और संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों को शहीद परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए शहीद की माताजी के लिए अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण करने को कहा, ताकि उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, विश्वास और शांति के नए युग की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में प्रदेश के वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखना हम सभी का दायित्व है। शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

नवविकास की राह पर बस्तर, जगरगुंडा पहुंचकर पहली महिला मंत्री बनीं लक्ष्मी राजवाड़े

नवविकास की राह पर अग्रसर बस्तर :जगरगुण्डा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनी  लक्ष्मी राजवाड़े कभी नक्सल प्रभाव का प्रतीक रहे इलाकों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत रायपुर बस्तर अब भय और हिंसा की पहचान से आगे बढ़कर विकास, विश्वास और जनसहभागिता के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे सुदूर अंचलों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आजीविका के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। इसी परिवर्तनशील बस्तर की तस्वीर को और सशक्त करने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूर्वर्ती और सिलगेर पहुंचीं। विशेष महत्व की बात यह रही कि श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं। वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में उनका आगमन विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति का प्रतीक बनकर उभरा। दौरे के दौरान मंत्री ने पूर्वर्ती एवं सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया तथा अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय समय बिताया, ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण चर्चा में रहते थे, वहीं आज महिला स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और नई संभावनाओं का सृजन कर रही हैं। प्रवास के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा स्थित कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। ग्रामीण महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि पहली बार कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे जगरगुंडा पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और संवाद करने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत करने वाली है तथा यह अनुभव कराती है कि विकास की मुख्यधारा अब वास्तव में उनके गांव तक पहुंच चुकी है। श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण निर्मित हुआ है। जगरगुंडा, पूर्वर्ती और सिलगेर जैसे क्षेत्रों में आज बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएं बदलते बस्तर की सशक्त पहचान बन चुकी हैं।

‘राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का ध्येय था’, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का था ध्येय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर और अरविंद मोघे सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. शालिगराम तोमर राष्ट्र सेवी थे। उन्होंने राष्ट्र की सेवा करने वाले अनेक कार्यकर्ता भी तैयार किए। राष्ट्र सेवा और राष्ट्रसेवियों का निर्माण उनके जीवन का प्रमुख ध्येय था। वे सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अनूठा परिवार भाव रखते थे। उनकी कार्य शैली से युवा सहज ही उनके सेवा प्रकल्पों के साथ जुड़ जाते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मानस भवन में स्व. शालिगराम तोमर स्मृति राष्ट्र सेवी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। नवलय संस्था द्वारा इस वर्ष वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर पुणे और अरविंद मोघे को सम्मानित किया गया। दोनों समाज सेवियों ने विद्यार्थी परिषद, श्रमिक कल्याण, वनवासी कल्याण के साथ ही अनेक सामाजिक क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. शालिगराम तोमर ने एक कक्ष के कार्यालय से संगठन से कार्य करते हुए उसे विराट रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। उनके आदर्श जीवन से हजारों लाखों युवाओं ने प्रेरणा ली और सामाजिक क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए स्वयं को तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मानित समाज सेवियों को बधाई दी और संस्था के उद्देश्यों एवं सम्मान कार्यक्रम की सराहना की। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के जीवन को संवारने में स्व. शालिगराम का समर्पण और सहयोग यादगार रहेगा। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्व. शालिगराम के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाये। सेवानिवृत्त न्यायाधीश और संगठन पदाधिकारी अशोक पांडे ने कहा कि स्व. शालिगराम राष्ट्र सेवा का भाव रखते थे। राज्यसभा सदस्य रजनीश अग्रवाल ने नवलय संस्था को एक प्रेरणापुंज की स्मृति में सम्मान स्थापित करने के लिए बधाई दी। महासमुंद छत्तीसगढ़ से आए डॉ. विमल चोपड़ा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने सम्मान के लिए चयनित समाज सेवियों देवधर और मोघे को एक लाख रूपए की सम्मान निधि, शॉल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। दोनों समाजसेवियों के प्रशस्ति पत्र का वाचन भी किया गया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, वरिष्ठ समाज सेवी शशि भाई सेठ, विभीषण सिंह, अनेक लोकतंत्र सेनानी, नागरिक और समाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

भारत के अलग-अलग राज्यों के लोग हैं एकता की मिसाल, राज्यपाल पटेल का बड़ा संदेश

विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल हमारी आत्मीयता, साम्यता का मंच स्थापना दिवस लोक भवन में मनाया गया पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारत की विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध में शक्कर घुल जाती है, उसी तरह से मध्यप्रदेश में बंगाल के मूल निवासी घुल मिल गये हैं। हमारी अनेकता में एकता की आत्मीयता और साम्यता को राज्य स्थापना दिवस के आयोजन साकार करते है। आयोजन के मंच पर हमारी वेशभूषा, गीत, नृत्य में समाई हमारी सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक मिलती है। पश्चिम बंगाल की प्रस्तुतियों में उन्हें गुजरात के गरबा नृत्य और वेशभूषा में असम राज्य की झलक दिखाई दी। राज्यपाल पटेल आज लोकभवन में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के प्रसंग में आयोजित समारोह में सम्मिलित भोपालवासी बंगाली मूल के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डा. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न कालीबाड़ियों के सदस्य उपस्थित थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़, राष्ट्रीय एकात्मकता को नई शक्ति प्रदाय करने और राज्यों के मध्य परस्पर सांस्कृतिक संवाद, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के प्रयास अद्भुत है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने गत वर्ष लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल पर एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व का ऐतिहासिक आयोजन कराया था। पर्व में सभी राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांस्कृतिक दलों और बच्चों की सहभागिता से एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मंच प्रदान किया गया था। कार्यक्रम में 300 बच्चों ने कार्यक्रम में सहभागिता की थी। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली विरासत को समृद्ध बनाने में बंगाल राज्य का योगदान अतुलनीय है। प्रधानमंत्री मोदी स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर विगत वर्षों से देश की युवाओं की आकांक्षाओं के अनुसार विकसित भारत निर्माण के लिए युवाओं के साथ संवाद करते हैं। लोक भवन के  आयोजन में 7 से 60 साल के कलाकारों की सहभागिता और महिलाओं की बहुलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बदलते भारत की झलक और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में श्रीमती सपना गुहा ने स्वागत उद्बोधन में बंगाल की समृद्ध परम्पराओं, सांस्कृतिक विरासत के साथ ग्रामीण जन जीवन की सरलता और सांस्कृतिक छटा की रुपरेखा प्रस्तुत की सांस्कृतिक आयोजन की सूत्रधार श्रीमती महुआ चटर्जी ने “हमारा बंगाल रे” की थीम पर बंगाल के लोकगीत, नृत्य और जन जीवन को बाउल, झूमर, धमाइल, भटयाली लोक संगीत की प्रस्तुति के द्वारा सभागार में पश्चिम बंगाल के जन जीवन को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि का स्थापना दिवस का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक विकास पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव से परिचित कराने वाली लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। राज्यपाल का कार्यक्रम में बंगाली समाज के सचिव सर्वसलिल चटर्जी, निलॉय घोष ने अभिनन्दन किया। आभार प्रदर्शन डा. एन. बनर्जी ने किया। संचालन सहायक सत्कार अधिकारी सुसृष्टि श्रीवास्तव ने किया।  

DA Hike Update: 8वां वेतन आयोग लागू होने से पहले बढ़ सकता है महंगाई भत्ता, लाखों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनसे जुड़े सभी हितधारक इस समय दो बड़े फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। पहला, महंगाई भत्ते (DA) में संशोधन की घोषणा और दूसरा, 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में हो रही प्रगति। चूंकि 8वां वेतन आयोग अभी विचार-विमर्श के दौर में है, इसलिए मौजूदा 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत जल्द ही एक और डीए में इजाफे की घोषणा हो सकती है। डीए में बढ़ोतरी सेवारत कर्मचारियों और पेंशनर्स को साल में दो बार दी जाती है। आइए, 26 जून 2026 तक के सबसे ताजा अपडेट को समझते हैं… DA की चर्चा क्यों हो रही है? महंगाई भत्ते में संशोधन साल में दो बार किया जाता है, एक बार जनवरी में और दूसरी बार जुलाई में। ऐसा बढ़ती जीवन लागत की भरपाई के लिए किया जाता है और सरकार इसे केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लाभ के लिए प्रदान करती है। यह संशोधन अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के 12 महीने के औसत से जुड़ा होता है। चूंकि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं हुई हैं, कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत ही डीए संशोधन मिलता रहेगा। जुलाई 2026 के डीए संशोधन की आज व्यापक चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि महंगाई और CPI-IW के ट्रेंड एक और इजाफे की ओर इशारा कर रहे हैं। महंगाई के लेटेस्ट आंकड़े क्या बताते हैं? सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के ताजा आंकड़े साफ दिखाते हैं कि खुदरा महंगाई लगातार ऊंची बनी हुई है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें अब भी अहम वजह बनी हुई हैं। मई 2026 में खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 की तुलना में बढ़ गई। समग्र सीपीआई मुद्रास्फीति मई में 3.93 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 3.48 प्रतिशत से अधिक है। ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 3.74 प्रतिशत से बढ़कर 4.25 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी महंगाई 3.16 प्रतिशत से उछलकर 3.53 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य महंगाई भी अप्रैल के 4.20 प्रतिशत के मुकाबले मई में 4.78 प्रतिशत दर्ज की गई। महंगाई में खासकर खाने-पीने की कीमतों में आई यह तेजी इस उम्मीद को बल देती है कि सरकार जल्द ही डीए में एक और संशोधन और समायोजन पर विचार कर सकती है। हालांकि, अंतिम वृद्धि का निर्णय सीपीआई-आईडब्ल्यू के आंकड़ों और कैबिनेट की मंजूरी पर ही निर्भर करेगा। अभी कितना महंगाई भत्ता मिल रहा है और कितना बढ़ सकता है? सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इस समय नवीनतम संशोधन के बाद मूल वेतन का 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। जुलाई 2026 की डीए वृद्धि की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, जबकि महीना शुरू होने में बस कुछ ही दिन बाकी हैं। मुद्रास्फीति के रुझानों और CPI-IW की गतिविधियों के आधार पर 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद बन रही है, लेकिन अंतिम आंकड़ा आधिकारिक गणना और केंद्र सरकार के अपडेट के बाद ही तय होगा। यह लाभ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू होता है। 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठनों की क्या मांगें हैं? पिछले कुछ महीनों से कर्मचारी संघों, स्टेक होल्डर ग्रुप्स और विभिन्न संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें महंगाई से निपटने के लिए उच्च न्यूनतम वेतन, कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने, भत्तों में संशोधन और भुगतान ढांचे में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं। केंद्रीय सरकारी कर्मचारी एवं कामगार परिसंघ ने ज्यादा न्यूनतम वेतन, बेहतर पेंशन लाभ और भत्तों की समीक्षा की बात रखी है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन ने सैलरी स्ट्रक्चर में संशोधन, विसंगतियों को दूर करने और बेहतर सेवा लाभों की मांग की है। वहीं, नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (NJCA) से जुड़े समूह बेहतर फिटमेंट फैक्टर, वेतन असमानताओं में सुधार और कर्मचारी-हितैषी सुधारों पर जोर दे रहे हैं। कर्मचारी समूहों का मानना है कि अगली वेतन संरचना तय करते समय बढ़ती लागत, लगातार बढ़ती महंगाई, कर्मचारियों का मनोबल, उनकी आजीविका का भविष्य और जीवन-यापन के खर्चों में हो रहे बदलावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया पर ताजा अपडेट 8वां वेतन आयोग अब विचार-विमर्श के चरण में प्रवेश कर चुका है। 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद से इसे सात महीने पूरे हो चुके हैं। आयोग सिफारिशें तैयार करने से पहले फीडबैक जुटाने के लिए दिल्ली, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हितधारकों से मुलाकात कर रहा है। हाल ही में 22-23 जून 2026 को लखनऊ में बैठकें हुईं, जिनमें कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों और वेतन संबंधी चिंताओं पर चर्चा की गई। आयोग के ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी विचार-विमर्श जारी रखने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है और फिटमेंट फैक्टर, संशोधित सैलरी मैट्रिक्स, पेंशन सुधार या लागू होने की तारीख को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

मोदी कैबिनेट में बदलाव की आहट! कई मंत्रियों की छुट्टी तय?, TMC और शिवसेना के बागियों की एंट्री की चर्चा

नई दिल्ली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन में अगले कुछ दिनों में बड़े स्तर पर फेरबदल हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार में मंत्रिमंडल के विस्तार और संगठनात्मक बदलाव दोनों पर गंभीरता से मंथन चल रहा है. इस कवायद में कुछ नए चेहरों को सरकार में जगह मिल सकती है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं।  सूत्रों के अनुसार, हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद एनडीए का कुनबा मजबूत हुआ है. ऐसे में सहयोगी दलों और हाल में एनडीए के साथ आए नेताओं को भी सरकार में प्रतिनिधित्व देने की तैयारी की जा रही है. इसी क्रम में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से कुछ अहम नेताओं के नाम चर्चा में हैं।  टीएमसी के एक बागी को कैबिनेट में जगह सूत्रों का कहना है कि शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैबिनेट रैंक के साथ शामिल किया जा सकता है. वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों में काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी राय के नामों पर भी विचार चल रहा है. इनमें से किसी एक को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।  इसके अलावा शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) से अलग हुए सांसद संजय दीना पाटिल का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है. माना जा रहा है कि सहयोगी दलों और नए राजनीतिक साथियों को उचित प्रतिनिधित्व देकर एनडीए अपने राजनीतिक विस्तार को और मजबूत करना चाहता है।  कुछ मंत्रियों का बदलेगा रोल सूत्रों के मुताबिक, केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियां भी बदली जा सकती हैं. उत्तर प्रदेश और दिल्ली बीजेपी की कमान संभाल चुके पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को संगठन में अधिक सक्रिय भूमिका देने के लिए केंद्र सरकार से मुक्त किया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो उनके स्थान पर नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।  जानकारी यह भी है कि भाजपा सरकार में शामिल कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके बदले सरकार में अपेक्षाकृत युवा नेताओं को अवसर देकर नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश की जा सकती है।  सिर्फ सरकार ही नहीं, बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में भी व्यापक बदलाव की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कम से कम दो महिला उपाध्यक्षों की नियुक्ति कर सकती है. इसके अलावा त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद दिए जाने पर विचार चल रहा है। 

बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक अभियान: 7 लाख वर्कर्स देंगे ऑनलाइन टेस्ट, सफल होने पर मिलेगा Digital Learning Certificate

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आज देशभर में बूथ और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए बड़े स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस दौरान करीब 7 लाख कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा संगठन ऐप के माध्यम से कराई जाएगी। पार्टी के अनुसार, 65 हजार से अधिक बूथ समितियों के कार्यकर्ता और मंडल स्तर के मोर्चा पदाधिकारी इस डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य संगठन को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना और कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा एवं योजनाओं की बेहतर जानकारी देना है। संगठन ऐप के जरिए होगा प्रशिक्षण डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम के तहत कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा, संगठन का सफर, नेतृत्व और केंद्र की मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संगठन ऐप पर ऑनलाइन परीक्षा आयोजित होगी। संगठन एप के जरिए मिलेगी ट्रेनिंग बीजेपी की 65 हजार से ज्यादा बूथ समितियों में शामिल कार्यकर्ताओं और मंडल स्तर के 6 मोर्चों की कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारियों को संगठन एप के जरिए डिजिटल लर्निंग यानी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में चार पाठ्यक्रम संगठन एप पर दिए जाएंगे। इनमें बीजेपी की विचारधारा, पार्टी का सफर, नेतृत्व, मोदी सरकार की विकास योजनाएं जैसे चार पाठ्यक्रम शामिल होंगे। कार्यकर्ता अपने मोबाइल पर हर पाठ्यक्रम के वीडियो देखकर उस पाठ्यक्रम से संबंधित शब्दावली के उत्तर ऑनलाइन दर्ज करेंगे। चारों पाठ्यक्रमों के सवाल-जवाब पूरे होने के बाद उनके मोबाइल पर प्रशिक्षित होने का सर्टिफिकेट जनरेट होगा। इस प्रशिक्षण को लेकर सभी जिला अध्यक्षों को कार्ययोजना भेज दी गई है। यह महाअभियान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से शुरू होकर उनकी जयंती 6 जुलाई 2026 तक पूरे 14 दिनों तक चलेगा। बीजेपी क्यों और कैसे कराने जा रही है यह कोर्स? बीजेपी इस बड़े अभियान को पूरी तरह अचूक बनाने के लिए इसे अपने नियमित कार्यक्रमों से जोड़ रही है। रणनीति के अनुसार, बूथ अध्यक्ष और 'मन की बात' प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि 'मन की बात' कार्यक्रम के तुरंत बाद बूथ समिति के सभी सदस्यों को मौके पर ही संगठन ऐप खुलवाकर डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का प्रशिक्षण पूरा कराया जाए और सर्टिफिकेट डाउनलोड करवाया जाए । तीन सदस्यों की टीम भी बनाई इसके साथ ही, शक्ति केंद्र प्रभारियों और मंडल कार्यकारिणी को सभी बूथों पर प्रवास (दौरा) करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे हर कार्यकर्ता के स्मार्टफोन में इस प्लेटफॉर्म की जानकारी और ट्रेनिंग सुनिश्चित कर सकें । बीजेपी यह कदम इसलिए उठा रही है ताकि उसका पूरा कैडर 'कागज-रहित' और 'हाई-टेक' हो सके। इस पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए जिलों में (1+2 सदस्यों की) विशेष डिजिटल प्रशिक्षण टीमें बनाई गई हैं, जिनकी कमान प्रदेश स्तर पर संयोजक शैलेन्द्र बरूआ (प्रदेश उपाध्यक्ष) और सदस्यों के रूप में राजेन्द्र सिंह, सुयश त्यागी संभाल रहे हैं। 6 जुलाई तक पूरा होगा अभियान बीजेपी ने इस डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को 6 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पार्टी पहले ही जिला और मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर चुकी है। अब अंतिम चरण में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कार्यकर्ताओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि डिजिटल प्रशिक्षण से संगठन की कार्यशैली अधिक प्रभावी होगी और कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं व संगठनात्मक गतिविधियों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।  

High Court Verdict: इस्लाम अपनाने के बाद OBC दर्जा और आरक्षण का लाभ नहीं, कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में धर्म परिवर्तन और आरक्षण को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिसके तहत हिंदू धर्म की पिछड़ी, अति-पिछड़ी या अनुसूचित जाति से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को 'बैकवर्ड क्लास मुस्लिम' का दर्जा और आरक्षण देने की बात कही गई थी। जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस पी बी बालाजी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपनाने के बाद सिर्फ एक मुस्लिम होता है। पीठ ने कहा, “कोई भी शख्स इस्लाम अपनाने के बाद सिर्फ 'एक मुसलमान' रह जाता है, बस बात यहीं खत्म। वह बैकवर्ड क्लास मुस्लिम के दर्जे या आरक्षण का दावा कतई नहीं कर सकता।" क्या था मामला? यह मामला थूथुकुडी जिले के रहने वाले समीर अहमद की याचिका के बाद सामने आया। पहले उसका नाम परमशिवम था। परमशिवम का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था। 2015 में उसने इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम समीर अहमद रख लिया और मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी की। धर्म परिवर्तन के बाद समीर ने तहसीलदार के पास 'मुस्लिम लेब्बाई' जाति का कम्युनिटी सर्टिफिकेट पाने के लिए आवेदन किया। इस जाति को तमिलनाडु में 'पिछड़े वर्ग के मुसलमानों' का दर्जा प्राप्त है। तहसीलदार ने समीर का आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद समीर ने हाईकोर्ट का रुख किया और तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें कनवर्टेड मुस्लिमों को आरक्षण देने की बात कही गई थी। तमिलनाडु सरकार ने दलील दी कि कनवर्ट होने वाले व्यक्ति को आरक्षण इसीलिए दिया जा रहा है ताकि वह अपनी पुरानी आरक्षित श्रेणी का लाभ उठा सके। हालांकि हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की दलील को खारिज कर दिया। क्या बोला मद्रास हाईकोर्ट? कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि मुस्लिम समाज में भी कई ऐसे समुदाय मौजूद हैं, लेकिन इन समुदायों की सदस्यता केवल जन्म से तय होती है। बेंच ने कहा, “बेझिझक यह कहा जा सकता है कि वे हिंदू धर्म की जातियों के समान हैं। जैसे जाति जन्म से तय होती है, वैसे ही कोई व्यक्ति जन्म से ही राउथर, मरक्कयार या दक्कनी मुस्लिम होता है। यह कहना बेतुका है कि किसी को राउथर मुस्लिम में बदला जा सकता है।” मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के इस सरकारी आदेश को संविधान और इस्लाम दोनों के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। बेंच ने साल 1951 के 'जी माइकल बनाम एस वेंकटेश्वरन' मामले का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया था कि जब कोई हिंदू इस्लाम अपनाता है, तो वह 'सिर्फ एक मुसलमान' बनता है और मुस्लिम समाज में उसका स्थान उसकी पिछली जाति से तय नहीं होता। सिर्फ आरक्षण के लिए नहीं दे सकते लाभ अदालत ने कहा, "ईसाई मिशनरियों और इस्लामिक उपदेशकों ने दशकों और सदियों तक यह प्रचार किया कि उनके धर्मों में सामाजिक समानता है, जबकि हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था है। धर्म-परिवर्तन के लिए ऐसा रुख अपनाने के बाद, अब यह दावा करना गलत है कि इस्लाम में भी ऊंच-नीच है। हमारी राय में, कुछ समुदायों को 'पिछड़ा' और बाकी को 'अगड़ा' मानना ​​कुरान की शिक्षाओं के खिलाफ है। इस्लाम एक ऐसा समाज बनाना चाहता है जिसमें सब बराबर हों। अल्लाह की नजर में सब समान हैं। वहां कोई सामाजिक ऊंच-नीच नहीं है।" अदालत ने कहा कि राज्य सरकार सिर्फ इसलिए विभिन्न जातियों के कनवर्टेड मुस्लिमों का एक समूह बनाकर उन्हें आरक्षण नहीं दे सकती कि वे लाभ उठाते रहें।