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जिसे उड़ान से था प्यार, वही बना प्लेन क्रैश की साजिश का आरोपी

दुबई जिस पायलट को कभी उड़ान भरने का जुनून था… जिसे उड़ान से प्यार था, उस हमाम-अल-हम्मामी ने दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान में अपने को-पायलट स्मित मछार पर हमले की कोशिश की. विमान में सवार 170 यात्रियों की जान को जोखिम में डाला. जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि हमाम-अल-हम्मामी की सोच में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया और उसे दुबई-तेल-अवीव जैसे संवेदनशील रूट पर उड़ान के लिए क्यों चुना गया. जानकारी के मुताबिक, फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 के को-पायलट हमाम अल हम्मामी ने जून 2022 में अरबी भाषा में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. इसमें उसने उड़ान के प्रति अपना प्यार जाहिर किया था. उसने पोस्ट में लिखा था, 'एविएशन और फ़्लाइट ट्रेनिंग को जो चीज़ इतनी ख़ूबसूरत बनाती है, वह यह है कि इसमें कुछ भी रोज़मर्रा जैसा नहीं होता. कुछ ऐसे पल होते हैं जिन्हें आप कभी भूल नहीं सकते, जैसे आपकी पहली सोलो फ्लाइट, या यात्रियों के साथ पहली बार विमान को लैंड कराना.' पहले भी चरमपंथी साइट्स देखता था जांचकर्ता इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि ओमानी नागरिक हम्मामी की सोच में इतना बड़ा बदलाव क्यों आया और उसने 170 से ज़्यादा लोगों को ले जा रहे विमान को क्रैश करने की कोशिश करने से पहले विमान में मौजूद कुल्हाड़ी से अपने कैप्टन पर कई बार हमला क्यों किया. हमाम-अल-हम्मामी के बैकग्राउंड के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि एविएशन में उसके पहले नियोक्ता यानी एम्प्लोयर सरकारी कंपनी ओमान एयर ने उसे उड़ान भरने से रोक दिया था. अधिकारियों को पता चला था कि वह चरमपंथी वेबसाइटें देखता था, इसलिए उन्होंने उसे उड़ान भरने से रोक दिया था. इसके बाद हम्मामी को डी-रेडिकलाइज़ेशन प्रोग्राम से गुजरना पड़ा और उसे डेस्क जॉब दी गई. हालांकि, बाद में उसे संयुक्त अरब अमीरात में नई नौकरी मिल गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमान को दूसरे देशों से हम्माम की जांच-पड़ताल करने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला था. हालांकि, जांच जारी रहने के कारण UAE और फ्लाईदुबई ने जांच जारी रहने के करणा इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. विमान क्रैश की थी मंशा: हम्मामी ने कबूला UAE के अटॉर्नी जनरल ने शनिवार सुबह कहा कि फ्लाइट 1073 के को-पायलट ने आतंकवादी घटना को अंजाम देने की कोशिश की थी. UAE की एक सुरक्षा टीम गुरुवार सुबह हम्मामी को UAE वापल से आई. पूछताछ की जा रही है. एक सऊदी अधिकारी ने बताया कि पूछताछ में हम्मामी ने माना कि वह जान-बूझकर प्लेन क्रैश करना चाहता था. उसने पूछताछ में कहा कि उसे मौत से डर नहीं है. सऊदी अरब, UAE और इजरायल, तीनों देशों ने कहा है कि इस बात की जांच की जा रही है कि क्या हम्मामी के किसी बाहरी ताकतों से कोई संबंध थे. सऊदी अधिकारी के अनुसार, हम्मामी के पिता ओमानी जबकि मां सीरिया की है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों और X पर उसके अब डिलीट हो चुके अकाउंट (जिसे कुछ लोगों ने वेरिफाई किया था) के मुताबिक, वह लंबे समय से दुबई में रह रहा था. UAE में की पढ़ाई हम्मामी ने सीरिया में लंबा गृहयुद्ध झेलते हुए अपना बचपन बिताया. हम्मामी ने UAE में पढ़ाई की, एविएशन के क्षेत्र में कदम रखा औक सरकारी कंपनी ओमान एयर में नौकरी पा ली. मोरक्को की सरकारी मीडिया के मुताबिक, जब उसे वहां उड़ान भरने से रोक दिया गया, तो उसने 2025 में मोरक्को की प्रमुख एयरलाइन 'रॉयल ​​एयर मारोक' में नौकरी पाने की कोशिश की. महिलाओं पर की अपमानजनक टिप्पणी यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता के अनुसार, हम्मामी ने बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से एविएशन मैनेजमेंट में रिमोट-लर्निंग कोर्स भी पूरा किया था. फ्लाईदुबई ने इस साल फरवरी में उसे नौकरी पर रखा था. UAE आमतौर पर पायलटों को नौकरी पर रखते समय व्यापक सुरक्षा जांच करता है. लेकिन उसके बैकग्राउंड की जानकारी के लिए क्या किया, इसके बारे में अब तक पता नहीं चल पाया है. हम्मामी के डिलीट हो चुके X अकाउंट की 3,000 से ज़्यादा पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं. इसमें उसने महिलाओं को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की है. 

SING फोरम 2026 में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधिमंडल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा नामांकन के उपरांत सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) द्वारा आयोजित प्रथम ‘सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026’ में सहभागिता के लिए सिंगापुर प्रवास पर है। सिंगापुर प्रवास के पहले दिन मुख्यमंत्री साय एवं छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने विश्व प्रसिद्ध ‘गार्डन्स बाय द बे’ के जनरल मैनेजर, मास्टर प्लानिंग जेसन येओ तथा डायरेक्टर लिम चियाप सॉन्ग सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठक की। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल को गार्डन्स बाय द बे की मास्टर प्लानिंग, सतत डिजाइन और उद्यान प्रबंधन से जुड़ी उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों की जानकारी दी गई। दोनों पक्षों के बीच उद्यानिकी, वनस्पति संरक्षण, शहरी हरियाली, ईको-टूरिज्म और क्षमता विकास के क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ समृद्ध वनों और जैव विविधता से परिपूर्ण प्रदेश है। गार्डन्स बाय द बे की विशेषज्ञता और अनुभवों का लाभ नवा रायपुर में बॉटनिकल गार्डन के विकास के साथ ही प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर लैंडस्केपिंग और हरित क्षेत्रों के विस्तार में लिया जा सकता है। इससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं को नया विस्तार मिलेगा, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के लीडरशिप डिनर में शामिल हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री साय शाम को SING फोरम की पूर्व संध्या पर सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा आयोजित लीडरशिप डिनर में शामिल हुए। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले, सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के चेयरमैन मार्क ली और सीईओ कोक पिंग सून उपस्थित थे। लीडरशिप डिनर में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के सदस्यों के साथ मास्टरकार्ड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, नेस्ले और द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा छत्तीसगढ़ के 7 सदस्यीय और हरियाणा के 26 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी सहभागिता की। यह आयोजन भारतीय राज्यों और सिंगापुर के व्यावसायिक समुदाय के बीच निवेश, व्यापार और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को लेकर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को तेजी से उभरते निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश की प्रगतिशील औद्योगिक नीति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए किए गए सुधारों तथा एमएसएमई, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक अवसरों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर के उद्योग जगत को ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण की यात्रा में सहभागी बनने और प्रदेश में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 5 अक्टूबर को SING फोरम 2026 में सहभागिता करेंगे। इसके पश्चात 6 अक्टूबर को सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व के साथ आयोजित सीईओ राउंडटेबल में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं और आर्थिक साझेदारी के अवसरों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

सीएम योगी का ऐलान- फिर आऊंगा भदोही, विश्वविद्यालय के विधिवत लोकार्पण के साथ लोगो-कुलगीत-थीम गीत और नए भवन के निर्माण को बढ़ाएंगे आगे

भदोही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को संत रविदास नगर भदोही के युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात देते हुए कहा कि अब यहां के नौजवानों की डिग्री पर उनके अपने जिले और अपने विश्वविद्यालय की पहचान होगी। जिले के पीजी कॉलेज को काशी नरेश विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दिए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही के युवाओं की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। जिले के कॉलेजों को विश्वविद्यालय से जोड़ने की कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। अब यहां के नौजवानों को मिलने वाली डिग्री पर काशी नरेश विश्वविद्यालय, संत रविदास नगर भदोही का नाम होगा। मुख्यमंत्री ने इसे केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं, बल्कि जिले की अपनी शैक्षणिक पहचान स्थापित होने से जोड़ते हुए कहा कि सरकार इस संस्था में बेहतरीन सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगी।  मुख्यमंत्री भदोही, औराई एवं ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों में ₹1,340 करोड़ से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, चाभी और नियुक्ति पत्र भी वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज जो ये पैसा इन तीर्थों के विकास के लिए खर्च हो पा रहा है, विरासत और पूर्वजों की धरोहर का संरक्षण का कार्य और उसका सुंदरीकरण हो रहा है। 2017 के पहले यह पैसा, इन तीर्थों को नहीं मिलता था। यही पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल के नाम पर जमीनों को कब्जा करने का माध्यम बन जाता था। डबल इंजन की सरकार ने उस कब्जे की प्रवृत्ति को रोका, विरासत का संरक्षण करते हुए तीर्थों के विकास को और आस्था को सम्मान देने का काम किया। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया और माफिया मुक्त, कर्फ्यू मुक्त उत्तर प्रदेश बना कर, उपद्रव मुक्त उत्तर प्रदेश बना करके अब उत्सव युक्त उत्तर प्रदेश बनाने का काम किया है। विश्वविद्यालय में विकसित की जाएंगी आधुनिक सुविधाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय की सौगात को भदोही की वर्षों पुरानी आकांक्षा से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से लंबित परियोजनाओं को उनकी सरकार ने फिर से आगे बढ़ाने का काम किया है। इसी क्रम में भदोही के लोग लंबे समय से अपने जिले में विश्वविद्यालय की मांग कर रहे थे। मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय की स्थापना पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन भदोही के जनप्रतिनिधियों ने उनसे मिलकर जिले के लिए अलग विश्वविद्यालय की आवश्यकता बताई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भदोही आने पर उन्होंने यहां विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया था। आज उन्हें यह बताते हुए प्रसन्नता है कि काशी नरेश विश्वविद्यालय के रूप में यहां के पीजी कॉलेज को मान्यता दे दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब भदोही के युवाओं को मिलने वाली डिग्री उनके अपने जिले के विश्वविद्यालय के नाम से होगी। उन्होंने कहा कि अपने जिले की पहचान अपने विश्वविद्यालय से, अपनी संस्थाओं से होती है। सरकार काशी नरेश विश्वविद्यालय को केवल नाम तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि यहां बेहतरीन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि विश्वविद्यालय के विकास की आगे की रूपरेखा भी तैयार है। उन्होंने कहा कि वह विश्वविद्यालय के लिए अलग से भदोही आएंगे। तब विश्वविद्यालय का विधिवत लोकार्पण होगा, उसके लोगो, कुलगीत और थीम गीत को आगे बढ़ाया जाएगा तथा नए भवन के निर्माण का शिलान्यास भी कराया जाएगा।  विश्वविद्यालय के बाद मेडिकल कॉलेज की दिशा में भी आगे बढ़ रहा भदोही मुख्यमंत्री ने भदोही के लिए उच्च शिक्षा के साथ स्वास्थ्य शिक्षा की दिशा में भी आगे बढ़ने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ नहीं, बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ की है। भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय बन चुका है और आने वाले समय में यहां मेडिकल कॉलेज का कार्य भी आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकास के सारे काम एक-एक कर पूरे किए जा रहे हैं। विकास के साथ विरासत का सम्मान और गरीब कल्याण की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के गरीब, युवा, महिला, कारीगर और श्रमिक तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भदोही की बदलती पहचान को उसके विश्व प्रसिद्ध कालीन उद्योग से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि संत रविदास नगर भदोही पहले से कालीन उद्योग के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब तेजी से हो रहे विकास के साथ यह नई पहचान लेकर आगे बढ़ रहा है। इंडिया कारपेट एक्सपो के गोल्डन जुबली आयोजन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें करीब 250 एग्जीबिटर्स और 450 विदेशी खरीदार आए हैं। इनमें 106 खरीदार ब्रिक्स देशों से हैं और कुल 65 देशों से आए खरीदार भदोही के कारीगरों के हुनर को वैश्विक पहचान दे रहे हैं। सरकार कारीगरों को टेक्नोलॉजी, ट्रेड और एक्सपोर्ट की सुविधा देने के साथ कारपेट एक्सपो जैसे आयोजनों के माध्यम से उनके उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचा रही है।  विंध्य एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा संत रविदास नगर मुख्यमंत्री ने भदोही की भौगोलिक स्थिति को विकास की बड़ी संभावना बताते हुए कहा कि एक ओर बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी और दूसरी ओर संगम नगरी प्रयागराज है तथा दोनों के बीच संत रविदास नगर स्थित है। यहां विरासत भी है और डबल इंजन सरकार की गति से विकास भी। उन्होंने बताया कि जब गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में आगे बढ़ाने की बात आई तो उन्होंने संत रविदास नगर को भी इससे जोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास एकांगी नहीं हो सकता, विकास सबको साथ लेकर चलता है और इसी भावना के साथ सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने भदोही की पहचान को सद्गुरु संत रविदास की विरासत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ही यह बात कही गई थी कि कालीन उद्योग के लिए विख्यात भदोही आने वाले समय में समाज को जोड़ने का संदेश देने वाले सद्गुरु रविदास जी महाराज के नाम से भी जाना जाएगा। संत रविदास के समतामूलक समाज के संदेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 600 वर्ष पहले उन्होंने ऐसे राज की कामना की थी, जहां सभी को अन्न मिले और बिना भेदभाव के सभी को … Read more

होर्मुज पर ईरान का बड़ा ऐलान, अमेरिका की शर्तें मानने तक नहीं खुलेगा दुनिया का अहम समुद्री रास्ता

तेहरान ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना रुख और भी सख्त कर दिया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर आधारित सात बुनियादी शर्तों को नहीं मानता, तब तक होर्मुज का रास्ता जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खोला जाएगा। समय बर्बाद करने और एकतरफा शर्तें थोपने का दौर खत्म – गालिबाफ अल जजीरा के अनुसार, ईरानी संसद अध्यक्ष घालीबाफ ने कहा कि तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सात दिवसीय रोडमैप पेश करने के बाद वाशिंगटन ने एक मध्यस्थ के माध्यम से कुछ प्रस्ताव भेजे थे। इन प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया देते हुए गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को यह समझना चाहिए कि समय बर्बाद करने और एकतरफा मांगें थोपने का दौर अब बीत चुका है। ईरान का रुख स्पष्ट और दृढ़ है। जब तक इस्लामाबाद मेमोरेंडम पर आधारित उसकी सभी सात शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खुलेगा। युद्ध और बातचीत, दोनों के लिए तैयार अमेरिका की गतिविधियों और दबाव बनाने की रणनीति पर गालिबाफ ने कहा कि ईरान न तो दिखावे से प्रभावित होता है और न ही किसी कार्रवाई से डरता है। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य मोर्चे पर अपनी पूरी ताकत के साथ तैयार है और विरोधियों का नए सरप्राइज के साथ सामना करेगा। साथ ही, देश सैन्य श्रेष्ठता स्थापित करने और ईरानी लोगों के बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक चैनलों का उपयोग करना भी जारी रखेगा। गालिबाफ ने कहा, "हम लड़ेंगे भी और बातचीत भी करेंगे।" ईरान की शर्तें गौरतलब है कि पिछले महीने ईरान ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के सामने औपचारिक शर्तों का एक मसौदा पेश किया था। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में कदम तभी उठाए जाएंगे जब इन शर्तों पर सहमति बन जाएगी। शर्तों में मुख्य रूप से शामिल हैं…     सभी मोर्चों पर युद्ध की तुरंत और पूर्ण समाप्ति।     विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को बिना किसी शर्त के जारी करना।     ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाना।     ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिका के किसी भी तरह के हस्तक्षेप को स्थायी रूप से रोकना।     ईरान के क्षेत्रीय विरोधियों और दुश्मनों के साथ अमेरिकी सैन्य सहयोग का अंत।     ईरान की संप्रभुता और क्षेत्र पर सभी अमेरिकी हमलों को पूरी तरह रोकना।     इस्लामाबाद मेमोरेंडम के आधार पर तय किए गए अन्य वादों को लागू करना।

लक्षद्वीप में बड़ा बदलाव: तीन गुना पर्यटक, नए एयरफील्ड और INS जटायु से बढ़ी समुद्री सुरक्षा

नई दिल्ली जनवरी 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप में स्नॉर्कलिंग करते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं. इसके बाद 'बॉयकॉट मालदीव' बनाम 'एक्सप्लोर लक्षद्वीप' की बहस शुरू हो गई. अब दो साल बाद इन 36 द्वीपों पर पर्यटन से लेकर बुनियादी ढांचे और सामरिक मौजूदगी तक बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है. आजतक ने अगत्ती, कवरत्ती, मिनिकॉय और बिटरा पहुंचकर यह जानने की कोशिश की कि पिछले दो वर्षों में लक्षद्वीप में क्या बदला है. असल में लक्षद्वीप 36 द्वीपों का समूह है, जो कोच्चि से करीब 220 से 440 किलोमीटर दूर स्थित है. इसका कुल भू-क्षेत्र महज 32 वर्ग किलोमीटर है. इनमें केवल 10 द्वीप- कवरत्ती, अगत्ती, अमिनी, कदमत, किल्तान, चेतलात, बिटरा, एंड्रॉट, कल्पेनी और मिनिकॉय आबाद हैं. पीएम मोदी की यात्रा के बाद तीन गुना बढ़े पर्यटक दशकों तक लक्षद्वीप तक पहुंच आसान नहीं थी. अगत्ती में केवल एक छोटा एयरस्ट्रिप था और साप्ताहिक जहाज यहां पहुंचने का प्रमुख जरिया थे. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ने लक्षद्वीप को देश के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से ला दिया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के बाद यहां पर्यटकों की संख्या तीन गुना बढ़ी है. नए बीच रिसॉर्ट, होमस्टे और हेलिकॉप्टर कनेक्टिविटी की योजनाओं पर काम हो रहा है. केंद्र सरकार ऐसे बुनियादी ढांचे पर भी जोर दे रही है, जिसका इस्तेमाल आम नागरिकों के साथ सुरक्षाबल भी कर सकें. अगत्ती एयरफील्ड के विस्तार की योजना है, ताकि यहां बड़े ATR और सैन्य परिवहन विमान उतर सकें. वहीं मिनिकॉय में नौसेना बेस के साथ नया सैन्य-सिविल एयरफील्ड विकसित किया जा रहा है. INS जटायु से बढ़ी नौसेना की ताकत 2023 तक लक्षद्वीप में नौसेना की प्रमुख मौजूदगी कवरत्ती स्थित INS द्वीपरक्षक और मिनिकॉय में एक छोटे नौसैनिक डिटैचमेंट तक सीमित थी. INS द्वीपरक्षक 2012 में कमीशन हुआ था, जबकि मिनिकॉय में नौसैनिक डिटैचमेंट 1980 के दशक की शुरुआत में स्थापित किया गया था. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के करीब दो महीने बाद 6 मार्च 2024 को तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने मिनिकॉय में INS जटायु को कमीशन किया. इससे पुराने डिटैचमेंट को पूर्ण स्वतंत्र नौसैनिक इकाई में बदल दिया गया. मिनिकॉय लक्षद्वीप का सबसे दक्षिणी द्वीप है और महत्वपूर्ण आठ डिग्री तथा नौ डिग्री चैनल के पास स्थित है. यह मालदीव से करीब 524 किलोमीटर और थुराकुनु द्वीप से लगभग 70 नॉटिकल मील दूर है. INS जटायु समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और समुद्री मार्गों की निगरानी में अहम भूमिका निभा रहा है. बिटरा में तीसरा नौसैनिक ठिकाना बनाने की तैयारी करीब 200 लोगों की आबादी वाला बिटरा लक्षद्वीप का सबसे छोटा आबाद द्वीप है. सूत्रों के मुताबिक, यहां नौसेना का फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट किया जा रहा है. इसका मकसद उत्तरी लक्षद्वीप में निगरानी की कमियों को दूर करना और नौसेना की ऑपरेशनल पहुंच बढ़ाना है. हालांकि स्थानीय लोगों में इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है. उन्हें नौकरियों और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद है, वहीं छोटे और संवेदनशील द्वीप पर विस्थापन की चिंता भी है. अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे पर्यटन ही नहीं बल्कि सुरक्षा भी बड़ी वजह है. हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी रिसर्च जहाजों की मौजूदगी और सोमालिया के पास समुद्री डकैती की घटनाओं के बीच लक्षद्वीप सामरिक रूप से अहम है. मार्च 2024 में नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान विमानवाहक पोत INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य की लक्षद्वीप के पास तैनाती ने भी भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संदेश दिया.

चंडीगढ़ का स्कूल बना ‘सुपर स्मार्ट’, PM SHRI दर्जे के बाद हाईटेक हुई पढ़ाई, बच्चों को मिल रही नई सुविधाएं

चंडीगढ़. शहर के धनास स्थित पीएम श्री गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने आधुनिक शिक्षा की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। पीएम श्री का दर्जा मिलने के बाद स्कूल में शिक्षा के साथ तकनीक और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है। अब यहां विद्यार्थियों को पारंपरिक तरीके के साथ-साथ हाईटेक और मनोरंजक तरीके से पढ़ाया जा रहा है। स्कूल के मुख्य गेट से प्रवेश करते ही विद्यार्थियों और अभिभावकों का स्वागत वाटरफॉल से होता है। इसके अलावा स्कूल की दीवारों पर बनाए गए आकर्षक म्यूरल परिसर को नया और जीवंत रूप देते हैं। स्कूल का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां पढ़ाई बोझिल न लगे और बच्चे गतिविधियों के जरिए विषयों को आसानी से समझ सकें। कॉपी-किताब के साथ स्मार्ट पैनल से पढ़ाई पीएम श्री स्कूल बनने के बाद यहां कक्षाओं में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। विद्यार्थी अब स्मार्ट पैनल की मदद से विभिन्न विषयों को इंटरैक्टिव तरीके से समझ रहे हैं। डिजिटल माध्यम से पढ़ाई होने के कारण विद्यार्थियों को कठिन विषयों को विजुअल और प्रैक्टिकल तरीके से समझने का अवसर मिल रहा है। इससे कक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अटल टिंकरिंग लैब में प्रयोग से सीख रहे विद्यार्थी स्कूल में अटल टिंकरिंग लैब भी उपलब्ध है, जहां विद्यार्थी विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जुड़े प्रयोग कर सकते हैं। लैब के माध्यम से बच्चों में समस्या समाधान, रचनात्मक सोच और नई चीजें बनाने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। यहां विद्यार्थी केवल किताबों तक सीमित न रहकर प्रयोग और गतिविधियों के जरिए सीखने का अनुभव हासिल कर रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं से बदला स्कूल का माहौल पीएम श्री योजना के तहत स्कूल में आधुनिक सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया गया है। परिसर को आकर्षक बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए सीखने का बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। धनास सेक्टर-14 वेस्ट स्थित यह स्कूल अब पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीक, नवाचार और गतिविधि आधारित शिक्षा को जोड़कर विद्यार्थियों को नया अनुभव दे रहा है।

रूसी ड्रोन ने तबाह किया भारतीय कंपनी का यूक्रेन प्लांट, एक की मौत और कई घायल

 कीव यूक्रेन में भारत के कुसुम ग्रुप का एक बड़ा फार्मा प्लांट रूसी ड्रोन के हमले की चपेट में आ गया। इस हमले में एक की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। यूक्रेन के सुमी में फार्मा प्लांट की मुख्य इमारत अधिकांश रूप से तबाह हो गई है। कुसुम ग्रुप 1994 में शुरू हुआ था। यह भारतीय दवाइयों को यूक्रेन में एक्सपोर्ट करने वाला एक डिस्ट्रीब्यूटर था। इसे फिलहाल भारतीय नागरिक राजीव गुप्ता चला रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि मृतकों और घायल लोगों की संख्या बढ़ सकती है। हमले के बाद जो विजुअल सामने आए हैं, उसमें दिखाई दे रहा है कि इलाके से धुएं की लपट निकल रही है। कुसुम ग्रुप ने साल 2002 में, दूसरी कंपनियों के प्रोडक्ट्स को डिस्ट्रीब्यूट करना बंद कर दिया। इसके बाद उसने अपने खुद के ब्रांड्स की मार्केटिंग शुरू कर दी। इसके बाद यह ग्रुप मैन्युफैक्चरिंग में लग गया। साल 2007 में भारत और 2009 में यूक्रेन के सुमी में ग्रुप ने प्लांट खोले। इसके बाद दो और ब्रांचेज भी खोलीं। यह समूह 50 से अधिक ज्यादातर उत्पाद बनाता है और उन्हें नौ से अधिक देशों में बेचता है। इन देशों में मुख्य रूप से यूक्रेन, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान और फिलीपींस शामिल हैं। युद्ध के समय भी कर रहा था काम गौरतलब है कि सुमी प्लांट ने रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी काम कर रहा था। लेकिन अब इसे गंभीर नुकसान पहुंचा है। नुकसान का अनुमान कम से कम 400 करोड़ रुपए है। गर्मी के समय से, मॉस्को ने यूक्रेन में रोजाना दर्जनों तेज और अपेक्षाकृत सस्ते जेट-चालित शाहेद ड्रोन लॉन्च किए हैं। इनके खिलाफ यूक्रेन की एयर डिफेंस टीमों को कठिनाई का सामना करना पड़ा क्योंकि इंटरसेप्टर ड्रोन उन्हें पकड़ने में बहुत धीमे थे। यूक्रेन ने इस सप्ताह अपने घरेलू रूप से बनाए गए बैलिस्टिक मिसाइल एफपी-7 के पहले युद्ध उपयोग की भी घोषणा की, जिसकी सीमा लगभग 250 किमी है। जेलेंस्की ने क्या लिखा वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक्स पर एक पोस्ट में रूस के हमले की निंदा की। साथ ही उन्होंने मारे गए व्यक्ति के परिवार और प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज सुबह, रूसियों ने एक बार फिर कीव में पिवनिचनी पुल पर ड्रोन से हमला किया। उन्होंने सुमी में एक दवा गोदाम पर ड्रोन से हमला किया। दुख की बात है कि एक व्यक्ति की मौत हो गई। परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं। जेलेंस्की ने आगे लिखा कि निप्रो में, एक कम्यूनिकेशन सेंटर पर भी हमला हुआ है, जिसमें छह लोग घायल हो गए।

प्रसूता की मौत से राजगढ़ में मचा बवाल, पूर्व विधायक-परिजनों ने जताया आक्रोश; जांच के आदेश

राजगढ़. प्रसव के बाद जिला अस्पताल में एक प्रसूता की मौत हो गई, जिसके बाद परिजन ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने आरोप लगाए कि प्रसूता को न डॉक्टर ने देखा, न नर्स ने। जानकारी लगने के बाद एसडीएम, तहसीलदार व टीआई मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाया। उधर पूर्व विधायक बापूसिंह भी पहुंचे व काफी देर तक परिसर में धरने पर बैठे रहे। जानकारी के मुताबिक प्रसूता अमेरपुरा निवासी अमरीबाई पति दिनेश तंवर (19) को शनिवार रात को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव के बाद वह ठीक थी, लेकिन बाद में ब्लीडिंग होने लगी। स्टाफ ने परिजनों को बताया तो उन्होंने कहा की कपड़े बदल दो, लेकिन ब्लीडिंग नहीं रुकी। जब दोबारा स्टाफ से कहा तो उन्होंने सुनने से इंकार कर दिया। डॉक्टर व नर्स ने देखा तक नहीं। सास सहित परिजन रातभर स्टाफ से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिला। रविवार अलसुबह करीब 3 बजे प्रसूता ने दम तोड़ दिया। बच्चे को जन्म देने के बाद बिगड़ी तबीयत जानकारी के मुताबिक अमरीबाई को शनिवार रात को प्रसव लिए जिला अस्पताल लाया गया था। यह उसका पहला प्रसव था। आधी रात के बाद उसका सामान्य प्रसव हुआ और स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उसे सामान्य वार्ड में भर्ती कर दिया गया। परिजन के मुताबिक कुछ देर बाद अमरीबाई को तेज रक्तस्राव शुरू हो गया। सास धापूबाई का आरोप है कि उन्होंने नर्सिंग स्टाफ को कई बार इसकी जानकारी दी, लेकिन उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया गया। हालत बिगड़ने के बाद स्टाफ सक्रिय हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सास धापूबाई ने ड्यूटी नर्स पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि रक्तस्राव के कारण बहू के कपड़े भीग रहे थे। नर्सिंग स्टाफ को स्थिति बताई, लेकिन उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। उल्टा मुझे डांटकर भगा दिया। कहा की 'खून ही तो बह रहा है। ' इस बात को लेकर महिला काफी आहत हुई लेकिन रिश्वत ले चुके नर्सिंग स्टाफ ने जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई। परिजन का आरोप है कि लगातार रक्तस्राव के बावजूद प्रसूता को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। नर्स बोली – 'बार-बार मत आना, मुझे सोने दो' प्रसूता की सास धापूबाई ने बताया की वह दो-तीन बार नर्सिंग स्टाफ को बता चुकी थीं कि बहू का रक्तस्राव बंद नहीं हो रहा है। लेकिन स्टॉफ सुबह देखने की बात कहकर वापस भेज दिया गया। सास का आरोप है कि नर्स ने उन्हें बार-बार परेशान नहीं करने और वापस नहीं आने की बात कही। कहा की यहां बार बार मत आना, मुझे सोने दो। रुपए लेकर की सामान्य डिलिवरी हंगामे के दौरान परिजनो ने रुपए लेने के भी आरोप लगाए । उनका कहना है कि नर्स ने 1500 रुपए और सफाईकर्मी ने 500 रुपए मांगे। रुपए देने के बाद ही प्रसव कराया गया। परिजन ने बच्चे की स्थिति को लेकर भी प्रसव से पहले अलग-अलग बातें बताए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बच्चा टेढ़ा है, उल्टा है, गले में नाल निपटी हुई है, लेकिन जैसे ही रुपए दिए तो सब बहाने खत्म हो गए और सामान्य प्रसव करा दिया अस्पताल में हंगामा, पति रास्ते से लौटा घटना की जानकारी लगते ही पूर्व विधायक बापूसिंह तंवर व हेमराज कल्पोनी भी जिला अस्पताल जा पहुंचे थे। वह परिजनों के साथ अस्पताल में धरने पर बैठ गए। काफी देर तक परिजनों नाराज लोग हंगामा करते रहे। अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही के आरोप लगाते रहे। वह पीएम करने को तैयार नहीं थे, बाद में बमुश्किल प्रशासन की समझाइश के बाद मामला शांत हो सका। उधर अमरीबाई का पति दिनेश तंवर (21) मजदूरी के लिए जोधपुर जा रहा था। सामान्य प्रसव की जानकारी मिलने के बाद वह रात की बस से रवाना हो गया था। बाद में पत्नी की हालत बिगड़ने की सूचना मिली तो परिजन ने उसे रास्ते से वापस बुलाया। एसडीएम ने दिया जांच के निर्देश हंगामे की सूचना पर तहसीलदार विनीत गोयल और कोतवाली टीआई मंजू मखेनिया मौके पर पहुंचीं। परिजन एसडीएम को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसडीएम निधि भारद्वाज अस्पताल पहुंचीं व परिजन से चर्चा की। एसडीएम ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रेडक्रॉस से सहायता राशि देने की बात कही गई। आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। इसके बाद प्रसूता का पोस्टमॉर्टम कराया गया और शव परिजन को सौंप दिया गया।

हमले के बाद दो पायलटों ने संभाली कॉकपिट की कमान, लेकिन 45 मिनट तक यात्रियों को डर- कहीं विमान ईरान न पहुंच जाए

दुबई दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर हुए खौफनाक हमले और 17,000 फीट की अचानक गिरावट के बाद जहां पूरी दुनिया भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार और इजरायली यात्रियों के अदम्य साहस को सलाम कर रही है, वहीं इस चमत्कार के पीछे दो ऐसे गुमनाम 'हीरो' भी शामिल हैं, जिनकी पहचान घटना के 4 दिन बाद भी रहस्य बनी हुई है। ये दो पायलट यात्री के रूप में विमान में ही सफर कर रहे थे। जब कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन पर हमला कर विमान को क्रैश कराने की कोशिश की, तब इन दोनों जांबाज पायलटों ने छलांग लगाकर कॉकपिट में प्रवेश किया और बेकाबू हो चुके बोइंग 737 को सुरक्षित संभाला। 'यात्रियों की भीड़ के ऊपर से छलांग लगाकर पहुंचे कॉकपिट' एसोसिएटेड प्रेस (AP) को दिए इंटरव्यू में विमान की दूसरी पंक्ति में बैठे इजरायली यात्री डैनियल श्लिचटर ने उस रोमांचक और डरावने मंजर को याद करते हुए बताया, "कॉकपिट के भीतर जब खूनी जंग छिड़ी और कैप्टन स्मित मच्छार ने किसी तरह दरवाजा खोला, तो यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को खींचकर बाहर निकाला। उसी वक्त यात्री के रूप में सफर कर रहे एक पायलट ने हमलावर को दबोचने वाले यात्रियों की भीड़ के ऊपर से कूदकर सीधे कॉकपिट के कंट्रोल पैनल तक छलांग लगा दी।" श्लिचटर ने बताया कि तुरंत ही उनका दूसरा साथी (दूसरा रिजर्व पायलट) भी कॉकपिट में घुसा और उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ताकि कोई और अंदर न आ सके। क्या होता है 'डेडहेडिंग' कई लोगों के मन में सवाल था कि आखिर एक ही विमान में दो अतिरिक्त पायलट क्यों सफर कर रहे थे? विमानन विशेषज्ञों और यात्री डैनियल श्लिचटर के अनुसार, यह कोई संयोग नहीं बल्कि एविएशन इंडस्ट्री में अपनाई जाने वाली एक प्रक्रिया है जिसे 'डेडहेडिंग' कहा जाता है। ये दोनों पायलट ड्यूटी पर थे और उन्हें तेल अवीव से दुबई लौटने वाली रिटर्न फ्लाइट को उड़ाना था। सामान्य उड़ानों में एक्स्ट्रा पायलट नहीं होते, लेकिन इस विमान में उनका मौजूद होना किसी 'चमत्कार' से कम नहीं था। 'कहीं ये प्लेन ईरान तो नहीं ले जा रहे?' 45 मिनट का खौफनाक सस्पेंस हमलावर को-पायलट को काबू में किए जाने के बाद जब दो नए पायलटों ने कॉकपिट का दरवाजा बंद कर लिया, तो शुरुआत में केबिन में बैठे यात्री घबरा गए थे हमले के कारण विमान के टेल सेक्शन (रडर) को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे प्लेन को हवा में स्थिर करने में नए पायलटों को 10 से 15 मिनट का समय लगा। श्लिचटर ने बताया, "शुरुआत में कॉकपिट से कोई एनाउंसमेंट नहीं हुआ। हमें लगा कि कहीं ये दोनों भी तो आतंकवादी नहीं हैं? कहीं ये प्लेन को ईरान या किसी अनजान जगह तो नहीं हाईजैक करके ले जा रहे? क्योंकि हम उस इलाके के बहुत करीब थे।" करीब 45 मिनट के सस्पेंस के बाद पायलटों ने अनाउंसमेंट कर बताया कि विमान को सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर उतारा जा रहा है और सब कुछ ठीक है। तब जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली। एयरलाइन ने साधी चुप्पी, क्यों छिपाई जा रही है पहचान? फ्लाईदुबई ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि केबिन में मौजूद 'ऑन-ड्यूटी क्रू मेंबर्स' ने ही विमान को लैंड कराया, लेकिन सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों का हवाला देते हुए उनके नामों और नागरिकता का खुलासा करने से इनकार कर दिया है। डैनियल श्लिचटर ने कहा, "जिन्होंने कॉकपिट में घुसकर तुरंत मोर्चा संभाला, वे सच्चे हीरो हैं। हम अपनी जिंदगी के लिए उनके उतने ही आभारी हैं जितने कि उन यात्रियों के जिन्होंने हमलावर को दबोचा था।"

ग्वालियर जिला अस्पताल में बिजली संकट से हड़कंप, 6 घंटे बंद रही बिजली; 7 ऑपरेशन टले

ग्वालियर. जिला अस्पताल मुरार में शनिवार को करीब छह घंटे बिजली गुल रहने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। बिजली आपूर्ति बाधित होने का सबसे ज्यादा असर ऑपरेशन, जांच और ब्लड बैंक पर पड़ा। नेत्र और सर्जरी विभाग में ऑपरेशन के लिए चिन्हित सात मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े। इनमें नेत्र विभाग में चार और सर्जरी विभाग के तीन मरीज शामिल हैं। वहीं एक्स-रे और सीटी जांच भी घंटों बंद रही। जांच के लिए इंतजार कर रहे कई मरीज बिजली नहीं आने पर बिना जांच कराए ही वापस लौट गए। बिना बिजली मरीज रहे परेशान जनरेटर से सीटी जांच के लिए बिजली सप्लाई शुरू की गई, इसके बाद जांच हो सकीं। बिजली गुल होने के दौरान अस्पताल के ओपीडी हिस्से में जनरेटर से आपूर्ति की जा रही थी, लेकिन अस्पताल के अन्य हिस्सों में बिजली नहीं होने से मरीज और उनके स्वजन परेशान होते रहे। आर्थोपेडिक विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल नजर आए। पंखे और कूलर बंद होने के कारण स्वजन हाथ के पंखे से मरीजों को हवा करते दिखाई दिए। ऑपरेशन के बाद मरीजों को इस वार्ड में शिफ्ट किया जाता है ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहा। ब्लड बैंक में तापमान नियंत्रण बिगड़ा बिजली गुल होने से ब्लड बैंक में भी तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था प्रभावित हुई। ब्लड खराब होने की आशंका को देखते हुए ब्लड बैंक प्रभारी ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद ब्लड बैंक के लिए आरएमओ डॉक्टर जेपीएन शर्मा, सहायक प्रबंधक डॉक्टर राजेश बिरथरिया ने जनरेटर से अस्थायी बिजली व्यवस्था कराई। हालांकि, इस दौरान रक्त लेने पहुंचे मरीजों के स्वजन को भी इंतजार करना पड़ा। रोजाना 150 एक्स-रे, छह घंटे बाद शुरू हुई जांच अस्पताल में ओपीडी के दौरान रोजाना करीब 150 एक्स-रे किए जाते हैं। शनिवार को बिजली गुल रहने के कारण एक्स-रे जांच करीब छह घंटे प्रभावित रही। बिजली बहाल होने के बाद ही एक्स-रे सहित अन्य जांच दोबारा शुरू हो सकीं।