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वोट प्रतिशत के विश्लेषण ने बदली तस्वीर! AAP की सीटें घटने के संकेत, कांग्रेस और BJP को बढ़त की उम्मीद

चंडीगढ़  पंजाब में हाल ही में हुए 8 नगर निगमों और 75 नगर कौंसिलों के चुनाव के पार्टीवाइज वोटिंग के आंकड़े सामने आ गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा वोट % सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को मिला है। मगर, यह 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम है।  वोटिंग से ये भी स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस अभी भी AAP के मुकाबले वोटरों के बीच मजबूत विकल्प है। जिन क्षेत्रों में निगम और कौंसिल के चुनाव हुए, उनमें 68 विधानसभा सीटें आती हैं। अगर कांग्रेस को इन निकाय चुनावों में मिले वोट % को देखें तो उन्हें फायदा हो सकता है। इसी तरह भाजपा को भी शहरों में बढ़त मिलती नजर आ रही है। वहीं अकाली दल फिर फिसड्‌डी साबित हुआ है। इसके बीच चौंकाने वाली बात ये है कि अगर अकाली दल और भाजपा आपस में गठजोड़ कर लें तो 2027 के चुनाव में कांग्रेस की जगह वह AAP को टक्कर दे सकती है। निकाय चुनाव में मिले वोट % से 2027 के लिए क्या संकेत:- एंटी-इन्कम्बेंसी भी बिगाड़ेगी आप का गणित 2022 में AAP ने 42% से ज्यादा वोट शेयर के साथ एकतरफा चुनाव जीता था। 117 में से 92 सीटें AAP को मिलीं थीं। वहीं इन चुनाव वाले क्षेत्रों में आप ने 68 में से 54 सीटें जीती थीं। अब 2026 के स्थानीय चुनावों में AAP का वोट शेयर बड़े शहरों में 36.80% और छोटे शहरों में 35.24% पर आ गया है। वोट शेयर का यह 6% से 7% का नुकसान करीब 20 से 25 सीटों का नुकसान कर सकता है। 2022 में कांग्रेस सत्ता में थी और कांग्रेस के खिलाफ जो एंटी-इन्कम्बेंसी थी, उसका फायदा AAP को मिला था, वह अब 2027 में AAP के खिलाफ जा सकता है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप का कहना है कि शहरी और अर्ध-शहरी सीटों पर जहां त्रिकोणीय मुकाबला है, वहां विपक्ष का वोट बढ़ना AAP के जीत के मार्जिन को खत्म कर सकता है। निकाय चुनाव में सत्ता पक्ष को हमेशा ज्यादा वोट मिलते हैं जबकि विधानसभा चुनाव में एंटी इन्कम्बेंसी भी आप को झेलनी पड़ेगी। ऐसे में आप की सीटें इससे भी कम हो सकती है। आप का वोट शेयर खिसकने से कांग्रेस का फायदा पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि नगर कौंसिल के चुनावों में कांग्रेस का 21.89% वोट शेयर यह दिखाता है कि उसका कैडर और पारंपरिक वोटर अभी भी जमीन पर मौजूद है। अकाली दल के कमजोर होने का सीधा फायदा ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कांग्रेस को मिल रहा है। जो लोग AAP सरकार से नाराज होंगे, उनके लिए कांग्रेस अभी भी सबसे बड़ा मुख्य विकल्प बनकर उभर रही है। इसके अलावा सरकार की एंटी इन्कम्बेंसी का फायदा भी कहीं न कहीं कांग्रेस को मिलेगा। ऐसे में कांग्रेस की सीटें 20 से ज्यादा हो सकती हैं। भाजपा शहरी क्षेत्रों में लगातार कर रही ग्रोथ पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि नगर निगमों यानि बड़े शहरों में भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जिन आठ नगर निगमों में चुनाव हुआ है, वहां पर 2021 के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर लगभग दो गुना हो गया। नगर निगमों में वोट शेयर 9 फीसदी से बढ़कर 17.58 फीसदी हो गया। इन 8 नगर निगम सीटों में से भाजपा 5-6 सीटें सीधे जीत सकती है, और नगर कौंसिल के दायरे में आने वाली 60 सीटों में से भी 3-5 सीटों पर चौंकाने वाले नतीजे दे सकती है। कुल मिलकार कर 68 सीटों में से 8 से 11 सीटें जीत सकती है। वहीं सरकार की एंटी इन्कंबेंसी का फायदा भी भाजपा को मिल सकता है। इसके अलावा भाजपा ने छोटे शहरों में बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल करना शुरू कर दिया है। इन चुनावों में भी बड़े चेहरों का फायदा भाजपा को मिला है। भाजपा ने पहली बार अबोहर नगर निगम जीता है। शहरी क्षेत्रों में शिरोमणि अकाली दल ग्राफ डाउन अकाली दल का वोट शेयर शहरों में 9% और कस्बों में 11% पर आ गया है। इस वोट शेयर के साथ विधानसभा सीट जीतना बेहद मुश्किल होता है। शिअद केवल उन 1 या 2 पारंपरिक सीटों पर ही सिमट कर रह जाएगी। शिअद का कोर वोटर पंथक वोट माना जाता रहा है अब वो भी पार्टी से कटता नजर आ रहा है। ऐसे में शहरी क्षेत्रों में अकाली दल का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। SAD-BJP से गठबंधन हुआ तो मिलेगी मजबूती शिअद और भाजपा गठबंधन होता है तो आंकड़े कुछ और हो जाएंगे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि इन निकाय चुनावों में भाजपा और अकाली दल का वोट प्रतिशत जोड़ दिया जाए तो इनकी स्थिति और बेहतर हो जाती है। उनका कहना है कि शिअद को नगर निगम में 8.98 प्रतिशत वोट मिले और भाजपा को 17.58 प्रतिशत वोट मिले। दोनों का वोट प्रतिशत जोड़ा जाए तो यह 26.5 प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है। जो कि कांग्रेस के वोट प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह नगर काैंसिल में भी है। शिअद को 11.80% और भाजपा को 9.46% वोट मिले हैं जो कि मिलाकर 21.5 प्रतिशत के आसपास हो जाता है जो कि कांग्रेस के लगभग बराबर है।

21 जून की Re-NEET परीक्षा पर NTA का सख्त पहरा, एयरफोर्स से पेपर ट्रांसपोर्ट; सुरक्षा के खास इंतजाम

 नई दिल्ली देश में नीट (NEET) परीक्षा को लेकर मचे देशव्यापी बवाल और पेपर लीक के कड़े अनुभवों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार इस बार सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम कर रही है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. आगामी नीट री-एग्जा को पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' और सुरक्षित बनाने के लिए अब देश की सबसे भरोसेमंद ताकत यानी भारतीय वायुसेना (IAF) को मैदान में उतार दिया गया है।  'इंडिया टुडे' को टॉप सोर्सेज (शीर्ष सूत्रों) से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, नीट री-टेस्ट के दौरान प्रश्नपत्रों को लीक होने से बचाने और उनकी सुरक्षित डिलीवरी के लिए भारतीय वायुसेना लॉजिस्टिक सपोर्ट (लॉजिस्टिक्स सहायता) प्रदान करेगी।  आसमान से होगी प्रश्नपत्रों की सुरक्षित लैंडिंग: 18 जगहों से उठेंगे पैकेट्स सूत्रों के मुताबिक, इस बार प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन की जिम्मेदारी किसी प्राइवेट कूरियर या सामान्य सरकारी डाक के भरोसे नहीं छोड़ी जा रही है. सुरक्षा का घेरा इतना कड़ा है कि नीट री-टेस्ट के प्रश्नपत्रों (Question Papers) को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का जिम्मा खुद भारतीय वायुसेना के जिम्मे होगा.सूत्रों ने बताया है कि वायुसेना देश के 18 चुनिंदा और महत्वपूर्ण स्थानों से प्रश्नपत्रों के पैकेट्स को अपनी कस्टडी में लेगी और उन्हें तय समय पर सुरक्षित केंद्रों तक पहुंचाएगी।  रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सुरक्षा व्यवस्था केवल पेपर सेटिंग तक सीमित नहीं है। प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षित भंडारण के लिए भी बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है। सरकार भारतीय वायुसेना (Air Force) की मदद से प्रश्नपत्रों को विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि किसी भी स्तर पर लीक या छेड़छाड़ की आशंका को खत्म किया जा सके। इसके अलावा पारंपरिक बैंक स्ट्रॉन्ग रूम के बजाय अधिक सुरक्षित स्थानों की भी पहचान की जा रही है। NTA ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। हाल के दिनों में टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर री-एग्जाम का कथित पेपर बिकने के दावों के बाद एजेंसी सतर्क हो गई है। NTA ने ऐसे दावों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताते हुए चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 21 जून को होने वाली यह पुनर्परीक्षा देश और विदेश के कुल 551 भारतीय शहरों तथा 14 विदेशी शहरों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा पहले की तरह पेन-एंड-पेपर मोड में होगी। NTA ने उम्मीदवारों के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप भी जारी कर दी है, जबकि एडमिट कार्ड अलग से जारी किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षा केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि NTA और पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। इसलिए इस बार “जीरो-ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल” पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें किसी एक व्यक्ति को पूरी प्रक्रिया की जानकारी न हो और हर स्तर पर निगरानी बनी रहे। 'हर चुनौती से निपटने के लिए हैं तैयार' सुरक्षा एजेंसियों और रक्षा सूत्रों का कहना है कि नीट परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार किसी भी स्तर का जोखिम नहीं लेना चाहती. वायुसेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न कराने के लिए जिस भी तरह के सहयोग या सपोर्ट की आवश्यकता होगी, उसके लिए सेना पूरी तरह मुस्तैद और तैयार है।  इस कदम का सीधा मकसद सॉल्वर गैंग और लीक माफियाओं के उस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है, जो प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र के बीच के रास्ते में पेपर लीक की वारदातों को अंजाम देते थे। 

सिर्फ बोलकर उड़ाए Instagram अकाउंट! Meta AI चैटबॉट के जरिए 20 हजार यूजर्स हुए शिकार

  नई दिल्ली इंस्टाग्राम को Meta के AI ने ही हैक कर डाला. ये सुनने में अटपटा सा लग सकता है, लेकिन ऐसा ही हुआ है. हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों नहीं, बल्कि 20,000 से ज्यादा इंस्टाग्राम अकाउंट्स एक नए तरह के साइबर हमले का शिकार हुए हैं।  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार हैकिंग का तरीका पुराना नहीं, बल्कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा हुआ है. दरअसल हैकर्स ने Meta AI को मैनिपुलेट करके इंस्टाग्राम अकाइंट हैक कर लिया।  MetaAI यूज करके हैक हुए इंस्टाग्राम अकाउंट्स Meta ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि उनके AI सिस्टम से जुड़ी एक कमजोरी का फायदा उठाकर हैकर्स ने यूजर्स के अकाउंट्स तक पहुंच बना ली. यह मामला इसलिए और बड़ा हो जाता है क्योंकि इंस्टाग्राम, जो कि Meta के तहत आता है, दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक है और करोड़ों लोग इस पर रोज एक्टिव रहते हैं।  यह साइबर अटैक किसी पासवर्ड चोरी या लिंक क्लिक करने जैसा नॉर्मल मामला नहीं था. रिपोर्ट्स के मुताबिक हैकर्स ने Meta AI चैटबॉट सिस्टम का इस्तेमाल करके सिक्योरिटी लेयर्स को बायपास किया।  आसान भाषा में कहें तो उन्होंने सिस्टम को इस तरह से ट्रिक किया कि AI खुद ही उन्हें जरूरी एक्सेस दे बैठा. यानी इंसान नहीं, बल्कि मशीन से ही गलती करवाई गई।  AI ने दे दिया अकाउंट का सेंसिटिव डेटा इस घटना ने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जिस AI को कंपनियां फ्यूचर का सबसे सुरक्षित और स्मार्ट सिस्टम बता रही थीं, क्या वही अब सबसे बड़ा खतरा बन रहा है? कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि हैकर्स ने सीधे एआई से ऐसे सवाल पूछे या ऐसे कमांड दिए, जिससे सिस्टम ने अनजाने में अकाउंट से जुड़ी सेंसिटिव जानकारी शेयर कर दी।  यह तरीका ट्रेडिशनल हैकिंग से बिल्कुल अलग है. यहां कोड तोड़ा नहीं गया, बल्कि सिस्टम को समझाकर या बहकाकर उससे काम निकलवाया गया।  यही वजह है कि इस तरह के हमले को AI मैनिपुलेशन या प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसा नाम दिया जा रहा है. इसमें हैकर सिस्टम को सीधे हैक नहीं करता, बल्कि उसे ऐसे कमांड देता है जिससे वह खुद ही नियम तोड़ देता है।  इंस्टाग्राम भेज रहा है लोगों को सिक्योरिटी अलर्ट इस घटना के बाद इंस्टाग्राम ने यूजर्स को अलर्ट जारी करना शुरू कर दिया है. कई यूजर्स को सिक्योरिटी नोटिफिकेशन भी मिले हैं, जिनमें उनसे पासवर्ड बदलने और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करने को कहा गया है. लेकिन असली चिंता यह है कि अगर सिस्टम लेवल पर ही खामी है, तो सिर्फ पासवर्ड बदलने से कितना फर्क पड़ेगा? टेक इंडस्ट्री के अंदर भी इसको लेकर हलचल तेज हो गई है. क्योंकि अब तक AI को लेकर जो चर्चा हो रही थी, वह ज्यादातर उसकी ताकत और संभावनाओं पर थी. लेकिन इस हैकिंग से लगता है कि मामला उल्टा पड़ा तो करोड़ों अकाउंट्स एक साथ ही हैक हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक AI के जरिए सैकड़ों हाई प्रोफाइल इंस्टाग्राम अकाइउंट को हैक करके उनका डेटा डार्क वेब पर बिक्री के लिए लगा दिया गया. मेटा ने कहा है कि इस प्रॉब्लम को अब फिक्स कर दिया गया है।  हालांकि भले ही इश्यू फिक्स हो गया हो, लेकिन AI चैटबॉट को मैनिपुलेट करके हैकिंग का ये जरिए लगातार बढ़ रहा है और आगे भी ऐसी समस्या आ सकती हैं। 

मौसम पूर्वानुमान में यूपी को बड़ी ताकत, लखनऊ में नया मौसम विज्ञान केंद्र शुरू, सीएम योगी ने किया उद्घाटन

 लखनऊ सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह के साथ बटन दबाकर लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ में इस केंद्र की स्थापना से उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि महज 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि में यूपी देश का 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन करता है। समय पर मौसम, बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि या ओलावृष्टि की जानकारी नहीं मिलेगी तो हम किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 सालों में किए गए कामों के परिणाम अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। सीएम ने सहारनपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां शिवालिक पहाड़ी की तलहटी में मां शाकम्भरी देवी का मंदिर है। देहरादून व शिवालिक पहाड़ियों में भारी बरसात हुई। यहां बारिश होने से एकत्र होने वाला जल बाढ़ जैसा माहौल पैदा कर देता है। उस समय मंदिर में कीर्तन चल रहा था, काफी श्रद्धालु मौजूद थे, लेकिन मौसम विभाग ने समय से सही जानकारी दी तो सभी को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया, जिससे जनधन की व्यापक हानि रुक गई। उन्होंने कहा कि यूपी में अब आपदा से तीन घंटे पहले मोबाइल पर अलर्ट मिलने लगे हैं। उन्होंने बताया कि 13 मई को आंधी-तूफान से प्रदेश के कुछ जिलों में जनधन की काफी हानि हुई थी। बैठक में मैंने पूछा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम क्यों काम नहीं कर रहा था। पता चला कि सिस्टम तो काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का अभाव है। फिर रात में पूरे प्रदेश के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मैंने कहा कि जब आपको अलर्ट मिल रहा है तो आपको भी स्थानीय स्तर पर लोगों व संस्थाओं को अलर्ट करना चाहिए। इस बैठक के चौथे-पांचवें दिन भी आपदा आई, लेकिन तीन घंटे पहले सबके मोबाइल पर अलर्ट आना प्रारंभ हो गया। सीएम योगी ने कहा कि हम लोग सीजन में अतिवृष्टि-अनावृष्टि, आकाशीय बिजली आदि के संबंध में मेट्रोलॉजिकल और अन्य विभागों की बैठक में चर्चा करते थे कि समय पर सटीक जानकारी मिलने से सही रणनीति संभव होती है। आज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लखनऊ खुद को मेट्रोलॉजिकल रीजनल सेंटर के रूप में स्थापित कर रहा है। य़ह यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीएम ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति आभार भी जताया। 12 वर्ष में आए परिवर्तन का दिखता है लाभ सीएम ने कहा कि आजादी के बाद इस विषय पर अपेक्षित ध्यान न देने का परिणाम था कि अन्नदाता किसान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को रोकने वाले प्रयास भी अधूरे रहे। लेकिन, पिछले 12 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जो अभियान प्रारंभ किया, उसका परिणाम सभी देख रहे हैं। 12 वर्ष पहले बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, आकाशीय बिजली के खतरों के बारे में जो जानकारी मिलती थी, होता उससे ठीक उल्टा था, लेकिन अब मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है। अर्ली वार्निंग सिस्टम का लाभ सीएम योगी ने कहा कि मीरजापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि कई जनपदों में आकाशीय बिजली का खतरा बहुत रहता है। हर वर्ष 100-150 लोगों की मौत होती थी। चार-पांच वर्ष पहले प्रयागराज से पटना के बीच एक ही दिन में 90 मौतें हुई थीं। इसमें यूपी के 30 व बिहार के 60 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एमडीएमए, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की बैठक में मैंने पूछा कि आखिर इन मौतों को कौन रोकेगा। क्या इसे तकनीक से रोका नहीं जा सकता, तब विभाग ने बताया कि यह संभव है। अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का परिणाम है कि उक्त जिलों में हर वर्ष होने वाली मौत के आंकड़े घटकर महज दर्जन भर रह गए। लोगों को भी ऐसे मौसम में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए। अपना सेटेलाइट चाहती है राज्य सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी को सदैव डॉ. जितेंद्र सिंह का सकारात्मक सहयोग मिलता है। मौसम की पूर्व जानकारी किसानों की आमदनी बढ़ाने और आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और ओलावृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमने इसरो से भी अनुरोध किया था कि राज्य सरकार चाहती है कि उसके पास अपना सेटेलाइट हो, जो मौसम की और सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके। चिड़िया और जानवरों का व्यवहार बता देता था मौसम का रुख मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य ने जबसे बुद्धिमत्ता का उपयोग प्रारंभ किया होगा, उसके लिए सबसे पहले मौसम की जानकारी, आकाश में चमकती बिजली, बादलों से होने वाली वर्षा जैसी स्थितियां कौतूहल का विषय बनीं। ऋषि-मुनियों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंचांग का निर्माण किया। आज भी ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर की गई गणना मौसम की सटीक जानकारी का आधार बनती है। लोक कहावतों, लोक परंपराओं में भी हम देखते थे कि अमुक चिड़िया की बोली या जानवरों का व्यवहार परिवर्तन मौसम की पूर्व जानकारी देने का माध्यम बनता था। मौसम चक्र में आया एक महीने का अंतर सीएम ने कहा कि क्लाईमेट चेंज होने से मौसम चक्र में लगभग एक महीने का अंतर आया है। यही हाल रहा तो देश-दुनिया के सामने भीषण खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। हमने स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन किया है तो प्रकृति भी हमसे विमुख होती दिख रही है। यदि हम संस्कारों को पुनर्जीवित और धऱती मां के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन कर लें तो इसे सुधारने में मदद मिल सकती है। समय पर मौसम विभाग की जानकारी मिलने से किसानों व अर्थव्यवस्था को होने वाली क्षति तथा खाद्यान्न संकट टालने में सफल हो सकते हैं। किसानों को देते हैं पांच लाख की सहायता सीएम योगी ने आकाशीय बिजली से मौतों पर दुख जताते हुए कहा कि किसान, सह किसान (बटाईदार) और पारिवारिक सदस्य की आपदा में मौत होने पर सरकार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा के तहत तत्काल पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराती है। गंगा, यमुना, सरयू, राप्ती व गंडक समेत कई नदियों में बाढ़ … Read more

नव भारत साक्षरता अभियान में बड़ी सफलता, योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर

नव भारत साक्षरता अभियान: योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर – 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए प्रदेशभर में चलाया जा रहा नव भारत साक्षरता कार्यक्रम – वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी साक्षरता परीक्षा – 11.68 लाख से अधिक नव साक्षरों ने सफलतापूर्वक हासिल की साक्षरता – वर्ष 2026-27 में भी व्यापक अभियान चलाकर निरक्षरता उन्मूलन को दी जाएगी नई गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और निरक्षरता मुक्त प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में संचालित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहा है।  15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक प्रदेश में 11.68 लाख से अधिक लोगों को साक्षर बनाया जा चुका है। यह अभियान शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता, जागरूकता और सामाजिक सशक्तीकरण को नई मजबूती दे रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को चिह्नित कर वालंटियर्स और प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के सहयोग से साक्षर बनाया जा रहा है। कार्यक्रम के अन्तर्गत लाभार्थियों को पढ़ना, लिखना और गणना करना सिखाने के साथ-साथ दैनिक जीवन में उपयोगी बुनियादी ज्ञान से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में अधिक प्रभावी भागीदारी कर सकें। लाखों लोगों को साक्षर बनाकर सरकार न केवल निरक्षरता के खिलाफ लड़ाई को मजबूती दे रही है, बल्कि आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। घर-घर पहुंच रही शिक्षा की रोशनी अभियान के अंतर्गत चिह्नित वालंटियर्स को प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करते हैं। प्रदेशभर में संचालित ये कक्षाएं हजारों लोगों के जीवन में नया आत्मविश्वास पैदा कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नागरिकों को जागरूक, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना भी है। 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी परीक्षा, 11.68 लाख हुए सफल नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में अब तक सात साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इन परीक्षाओं में कुल 13,81,530 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 11,68,292 प्रतिभागी सफल घोषित हुए। वर्ष 2022-23 में आयोजित परीक्षा में 1.46 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि वर्ष 2025-26 में आयोजित नवीनतम परीक्षा में 4.01 लाख से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता दर्ज की गई। यह आंकड़े अभियान की बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता के गवाह हैं। वर्ष 2026-27 के लिए तैयार नई कार्ययोजना योगी सरकार नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को वर्ष 2026-27 में और अधिक व्यापक एवं परिणामोन्मुख बनाने की तैयारी कर चुकी है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश के सभी जनपदों को 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को चिह्नित कर उन्हें साक्षर बनाने का लक्ष्य सौंपा गया है। इसके अंतर्गत चिह्नित असाक्षरों को वालंटियर्स से जोड़ा जाएगा, जिन्हें प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करेंगे। अभियान की प्रगति का नियमित अनुश्रवण होगा तथा भारत सरकार के निर्देशानुसार वर्ष में दो बार साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित कर नव साक्षरों की उपलब्धियों का आकलन किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर, जागरूक और समाज की मुख्यधारा का सक्रिय भागीदार बनाना है।

RJD में अंदरूनी कलह के संकेत? MLC टिकट विवाद के बीच रोहिणी आचार्य की पोस्ट चर्चा में

 पटना राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) द्वारा विधान परिषद चुनाव के लिए सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और पार्टी नेता रोहिणी आचार्य ने इस फैसले पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट साझा की है. उनकी पोस्ट को पार्टी के भीतर असंतोष और आंतरिक मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।  रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का नाम लिए बिना ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने लिखा कि गुटबाजी – भीतरघात – विश्वासघात , मक्कारी जिसकी फितरत , विरोधियों से जिसकी मिलीभगत, नजदीकियों की बात बता कर उगाही – वसूली करना जिसका धंधा, जो अपनी झूठी धौंस जताने के लिए पार्टी कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं – पदाधिकारियों को सामने बिठा कर बहन – बेटियों के बारे में ओछी – अमर्यादित बातें करता है, उसको कैसे "उसके" ही द्वारा उम्मीदवार बना दिया गया।   रोहिणी की पोस्ट से चर्चाओं का दौर शुरू रोहिणी ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि क्या पार्टी में अब समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं व नेताओं की कमी हो गई है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने और पार्टी को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी जिन लोगों को सौंपी गई है, वे ऐसे व्यक्तियों को आगे बढ़ा रहे हैं. जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।  आरजेडी नेता की इस टिप्पणी को सीधे तौर पर सुनील कुमार सिंह की उम्मीदवारी से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि रोहिणी ने अपने पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उसी फैसले के खिलाफ प्रतिक्रिया माना जा रहा है. उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बिहार में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।  रोहिणी ने पार्टी के भविष्य को लेकर भी जताई चिंता रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि पार्टी की स्थापना के समय से लेकर आज तक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े एक नहीं अनेकों समर्पित, सम्मानित , जमीन से जुड़े कट्टर लालूवादी अल्पसंख्यक चेहरे हैं. यादव , दलित , पिछड़े व वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ व युवा लोग हैं , ऐसे लोगों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी हित में तो कतई नहीं है।  फिलहाल आरजेडी की ओर से रोहिणी आचार्य की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन उनकी पोस्ट ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 

योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, पांच जिलों में विकसित हो रहे आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क

उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना को मिली रफ्तार योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, पांच जिलों में विकसित हो रहे आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में 326 एकड़ से अधिक भूमि पर पीपीपी मॉडल से होंगे पार्क विकसित-योगी भूमि हस्तांतरण से लेकर प्री-फिजिबिलिटी और आधारभूत सुविधाओं के कार्यों में तेजी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं परिधान विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। योगी सरकार ने वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में पांच बड़े टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना बनाई है। इन पार्कों के लिए कुल 326 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित की गई है और सभी भूमि पार्सलों के हस्तांतरण को मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल चुकी है।    इस योजना के तहत वाराणसी के रामना में 75 एकड़, अमरोहा में 79.825 एकड़, बरेली के बहेड़ी में 79.580 एकड़, संत कबीर नगर के मगहर में 39.490 एकड़ तथा बिजनौर के नगीना में 52.910 एकड़ भूमि पर पार्क विकसित किए जाएंगे। सभी परियोजनाएं सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर स्थापित होंगी। सरकार का लक्ष्य निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करना है।    परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्राधिकरण गठन की अधिसूचना जारी की जा चुकी है तथा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। राष्ट्रीय वस्त्र अनुसंधान संस्था (NITRA) द्वारा वाराणसी पार्क की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है, जबकि शेष चार पार्कों की संशोधित प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उद्योग जगत के सुझावों को शामिल करते हुए इन रिपोर्टों को अंतिम रूप दिया जाएगा।    वाराणसी के रामना टेक्सटाइल पार्क को शीघ्र विकसित करने के लिए संपर्क मार्ग निर्माण का कार्य भी आगे बढ़ रहा है। सड़क निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुबंध की कार्यवाही प्रगति पर है। वहीं बिजली आपूर्ति के लिए 132 केवी उपकेंद्र, ट्रांसमिशन लाइन और 33 केवी विद्युत अवसंरचना की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे पार्क को निर्बाध विद्युत उपलब्ध कराई जा सके।     योगी सरकार पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप परियोजनाओं को विकसित करने पर भी विशेष जोर दे रही है। पर्यावरण स्वीकृति, भूजल उपयोग और वन विभाग की अनापत्ति से संबंधित प्रक्रियाएं जारी हैं। इसके साथ ही चार अन्य पार्कों के लिए मास्टर डेवलपर चयन हेतु पीपीपी आधारित निविदा दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। उद्योगों से मिले सकारात्मक प्रतिसाद के बाद सरकार को इन परियोजनाओं में बड़े निवेश की उम्मीद है।    राज्य सरकार का मानना है कि संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल निर्माण, रेडीमेड गारमेंट्स, तकनीकी वस्त्र और निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

दिल्ली बर्ड एटलस लॉन्च: 195 लोगों की टीम ने किया 2 साल का सर्वे

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली केवल राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं, बल्कि पक्षियों की असाधारण विविधता का भी महत्वपूर्ण ठिकाना है. दुनिया की राजधानियों में पक्षी प्रजातियों की समृद्धि के मामले में दिल्ली दूसरे स्थान पर मानी जाती है. इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी कि शहर के किस हिस्से में कौन-सी पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं. इस कमी को दूर करते हुए दिल्ली का पहला बर्ड एटलस तैयार किया गया है, जो राजधानी की जैव विविधता का विस्तृत और वैज्ञानिक दस्तावेज माना जा रहा है. दो वर्षों में तैयार हुआ दिल्ली का पहला पक्षी मानचित्र दिल्ली सरकार के वन विभाग और बर्ड काउंट इंडिया के संयुक्त प्रयास से तैयार किए गए इस एटलस का उद्देश्य शहर में पक्षियों के वितरण, उनकी संख्या और उनके आवास से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रूप से संकलित करना था. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इसका औपचारिक लोकार्पण किया. वैज्ञानिक तरीके से हुआ सर्वे पक्षी सर्वेक्षण को अधिक सटीक बनाने के लिए पूरे दिल्ली क्षेत्र को 6.6 वर्ग किलोमीटर के ग्रिड में विभाजित किया गया. प्रत्येक ग्रिड को आगे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया और उनमें से चयनित क्षेत्रों में विस्तृत अध्ययन किया गया. कुल 145 उपक्षेत्रों में सर्वेक्षण किया गया, जो राजधानी के लगभग 11 प्रतिशत भूभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं. अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया पक्षी विविधता की संतुलित और वैज्ञानिक तस्वीर सामने लाने के लिए अपनाई गई. 195 प्रतिभागियों ने संभाली जिम्मेदारी सर्वेक्षण कार्य में पक्षी विशेषज्ञों, प्रकृति प्रेमियों और बर्डवॉचरों की टीमों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. दो से पांच सदस्यों वाली टीमों ने विभिन्न मौसमों में क्षेत्रीय निरीक्षण किए. सर्दियों और गर्मियों के दौरान कुल चार चरणों में अध्ययन किया गया, जिससे स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रकार के पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की जा सके. इस पूरी प्रक्रिया में 195 प्रतिभागियों ने योगदान दिया. रिकॉर्ड में दर्ज हुईं 221 प्रजातियां एटलस के पहले वर्ष में 221 पक्षी प्रजातियों की पहचान और रिकॉर्डिंग की गई. इनमें सबसे बड़ी संख्या कीटभक्षी पक्षियों की रही, जिनकी 108 प्रजातियां दर्ज की गईं. इसके अलावा 37 प्रजातियां बीज और वनस्पतियों पर निर्भर पाई गईं, जबकि 34 प्रजातियां सर्वाहारी श्रेणी में शामिल रहीं. छोटे जीवों और मृत पशुओं पर निर्भर 33 प्रजातियां भी दर्ज की गईं. फल और फूलों के रस पर निर्भर पक्षियों की संख्या सबसे कम रही और ऐसी केवल 9 प्रजातियां सामने आईं. संकटग्रस्त और दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता और उम्मीद सर्वेक्षण के दौरान कई ऐसी प्रजातियां भी दर्ज की गईं, जिन्हें संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. इनमें ब्लैक-बेलीड टर्न जैसी संकटग्रस्त प्रजाति के अलावा ओरिएंटल डार्टर, एशियाई वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-हेडेड आइबिस और पेंटेड स्टॉर्क जैसे निकट संकटग्रस्त पक्षी भी शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रजातियों की मौजूदगी दिल्ली के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की अहमियत को दर्शाती है. यमुना के बाढ़ क्षेत्र और अरावली बने पक्षी विविधता के बड़े केंद्र विशेषज्ञों के अनुसार अरावली क्षेत्र, यमुना का बाढ़ मैदान, साहिबी नदी के आसपास के इलाके और सेंट्रल एशियन फ्लाइवे जैसे प्राकृतिक कारक दिल्ली को पक्षियों के लिए अनुकूल आवास प्रदान करते हैं. यही वजह है कि राजधानी में बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षी सालभर दिखाई देते हैं. नीति निर्माण से लेकर संरक्षण तक, कई क्षेत्रों में होगा एटलस का उपयोग दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एटलस को केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि भविष्य की योजना निर्माण का महत्वपूर्ण उपकरण बताया है. उनके अनुसार पक्षियों के वितरण और मौसमी गतिविधियों का यह दस्तावेज आवास पुनर्स्थापन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी विकास की योजनाओं को दिशा देने में मदद करेगा. अन्य जीव-जंतुओं पर भी ऐसे अध्ययन की जरूरत बर्ड काउंट इंडिया के क्षेत्रीय समन्वयक पंकज गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार द्वारा राज्य स्तर पर पक्षियों के वितरण का इस तरह का डेटा पहली बार तैयार किया गया है. उनका मानना है कि इसी तरह के व्यापक सर्वेक्षण अन्य वन्यजीवों, पौधों और कीटों के लिए भी किए जाने चाहिए, ताकि राजधानी की संपूर्ण जैव विविधता का वैज्ञानिक डेटाबेस विकसित किया जा सके.  

विपक्षी एकता को मिली नई धार! INDIA ब्लॉक की बैठक में तय हुए 5 अहम एजेंडे

 नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के दो साल बाद विपक्षी एकजुटता को नई धार देने के मकसद से इंडिया ब्लॉक की 7वीं बैठक दिल्ली में हुई. कांग्रेस की अगुवाई में करीब ढाई घंटे चली बैठक में 25 दलों के नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई. बैठक में नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई. इंडिया ब्लॉक ने नियमित अंतराल पर बैठकें करने का फैसला लिया।  इंडिया ब्लॉक की इस बैठक में कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत 25 दलों के 34 नेता और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल शामिल हुए. दोपहर 12 शुरू हुई बैठक करीब ढाई घंटे से ज्यादा चली. इंडिया ब्लॉक में शामिल प्रमुख दलों के नेता दोपहर 3 बजे जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।  प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में 25 दलों के नेता शामिल हुए और 5 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी. उन्होंने कहा कि बैठक में नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक और सीबीएसई रिवैल्यूएशन में अनियमितताओं के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष ने इन दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि ये देश के युवाओं के साथ धोखा है. उन्होंने इंडिया ब्लॉक की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।  इंडिया ब्लॉक की बैठक में इन 5 मुद्दों पर सहमति बनी     एसआईआर, मतदाता सूची में कथित हस्तक्षेप और चुनावों की निष्पक्षता के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति बनी है. यह पत्र उन्हें जल्द से जल्द सौंपा जाएगा।      लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले गंभीर मामलों को देखते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. उनके कार्यकाल में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है, जिसके कारण आज बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।      हम देश की गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचारों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे. जनहित से जुड़े इन विषयों पर केंद्र सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें हम अपने सभी मुद्दे और सुझाव रखेंगे।      इंडिया ब्लॉक के सभी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे. हमारी अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित होगी।      संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय जारी रहेगा. इसके लिए नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में प्रतिदिन सुबह एक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।  खड़गे ने बताया कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी गठबंधन नियमित बैठकें करेगा. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'बैठक में एसआईआर, वोट की लूट और चुनाव में धांधली के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने पर सहमति बनी है. यह पत्र जल्द ही भारत के मुख्य न्यायाधीश को सौंप दिया जाएगा. दूसरा बिंदु यह है कि शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग पर सर्वसम्मति से सहमति बनी है. क्योंकि उनकी देखरेख में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है। 

बंगाल में जांच एजेंसियों को बड़ी राहत! शुभेंदु सरकार ने CBI पर लगी रोक हटाई

 कोलकाता पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सीबीआई को जांच करने की पूरी छूट देने का बड़ा फैसला किया है. होम एंड हिल अफेयर्स विभाग की तरफ से 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट, 1946 के तहत सीबीआई को राज्य में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मियों और उनसे जुड़े मामलों की जांच करने की अनुमति दी गई है।  इस नोटिफिकेशन का सीधा मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को राज्य में कुछ मामलों की जांच करने के लिए फिर से सामान्य सहमति (General Consent) दे दी है, लेकिन यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है।  यह अधिकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत दिया गया है. नोटिफिकेशन 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो रहा है।  किन मामलों में जांच कर सकेगी CBI?     केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     अगर किसी शख्स पर केंद्रीय कर्मचारियों या केंद्रीय उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप हो, तो उनके खिलाफ भी जांच की जा सकेगी. किन मामलों में CBI सीधे जांच नहीं कर सकेगी? पश्चिम बंगाल सरकार के नियंत्रण वाले राज्य सरकारी कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई सीधे जांच नहीं कर सकती है. ऐसे मामलों में सीबीआई को पहले राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी. यह कहना कि 'बंगाल ने CBI को सभी मामलों की जांच की पूरी छूट दे दी' पूरी तरह सही नहीं होगा. नोटिफिकेशन पढ़ने पर साफ है कि छूट मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय उपक्रमों और उनसे जुड़े मामलों के लिए दी गई है. राज्य सरकार के अधिकारियों पर CBI अभी भी बिना अनुमति सीधे जांच नहीं कर सकती।  भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की सीबीआई को दी खुली छूट  मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछली सरकार ने 4 वर्षों से सीबीआई की कार्रवाई को रोक रखा था. कानून के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या अभियोजन शुरू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है।  ममता बनर्जी पर भ्रष्ट नौकरशाहों को संरक्षण देने का आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने जान-बूझकर इन फाइलों को अटकाये रखा, ताकि उनके खास अधिकारियों को बचाया जा सके. मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल 3 प्रमुख विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच की सीबीआई को आवश्यक मंजूरी दे दी गयी है. इसकी प्रतियां केंद्रीय एजेंसी को भेज दी गयी हैं।  रडार पर शिक्षक भर्ती और नगर निकाय भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड     शिक्षक भर्ती घोटाला (WBSSC) स्कूलों में अवैध नियुक्तियों से जुड़ा मामला है. इस केस में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ अब सीबीआई सीधे आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी।      नगर निकाय भर्ती घोटाला वो केस है, जिसमें बंगाल के विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई नौकरियों की बंदरबांट हुई थी. अब इसकी जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।  कानून का हथियार बनाकर भ्रष्टाचारियों को दिया गया था सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने कानून को ढाल बनाकर भ्रष्टाचारियों को कवच प्रदान किया था. उन्होंने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है. जो फाइलें सचिवालय की आलमारियों में बंद थीं, उन्हें अब खोल दिया गया है, ताकि जनता का पैसा लूटने वालों को सजा मिल सके।