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फ्लाईदुबई विमान में सह-पायलट ने कैप्टन पर किया कुल्हाड़ी से हमला, 14 हजार फीट नीचे गिरा विमान

 तेल अवीव  दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमानी सह-पायलट द्वारा कैप्टन मच्छर पर जानलेवा हमले की जांच के दौरान इजरायल के परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में आने वाले विदेशी विमानों के पायलटों की बैकग्राउंड चेक करना उसका काम नहीं है, ऐसी उड़ानें कभी भी 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं हो सकतीं इजरायली ब्राडकास्टर कान के अनुसार, परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने कहा कि चालक दल के सदस्यों की पहचान और उनकी जांच करने का काम सुरक्षा अधिकारियों का है, न कि परिवहन मंत्रालय का। मंत्रालय के सुरक्षा विभाग ने मीडिया को बताया कि विदेशों में उनके अपने कर्मचारी तैनात नहीं होते जो हर व्यक्ति की जांच कर सकें। विभाग के एक प्रतिनिधि के अनुसार, सुरक्षा के मामले में कुछ भी 100 प्रतिशत तय नहीं होता और मंत्रालय यह गारंटी नहीं दे सकता कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी या विदेशी एयरलाइनों की उड़ानें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक के आरोप इजरायली मीडिया आउटलेट चैनल 12 के अनुसार, इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट पर उन देशों के पायलटों के प्रवेश पर रोक लगाने में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। अब्राहम समझौते के तहत ऐसे देशों के पायलटों के इजरायल में उड़ान भरने पर प्रतिबंध है जिन्होंने यहूदियों के देश को औपचारिक मान्यता नहीं दी है। ओमान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, फिर भी जांच में यह खुलासा हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में दर्जनों ओमानी पायलट फ्लाईदुबई की उड़ानों से तेल अवीव आ चुके थे, क्योंकि इजरायल ने इसकी निगरानी का जिम्मा खुद संभालने के बजाय एयरलाइनों के भरोसे छोड़ दिया था। फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हवा में क्या हुआ था? दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने भारतीय मूल के मुख्य कैप्टन स्मित मछार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। विमान पर कब्जा करने की कोशिश के दौरान बोइंग 737 विमान 30 सेकंड से भी कम समय में लगभग 14,000 फीट नीचे गिर गया था। आवाज सुनकर यात्रियों और केबिन क्रू ने कॉकपिट में घुसकर आरोपी सह-पायलट पर काबू पाया। इसके बाद उसी विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दूसरे पायलटों ने 170 से अधिक यात्रियों और चालक दल से भरे विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इस मामले की आतंकी हमले के रूप में जांच कर रहा है।

रायपुर में AGRATHON 4.0 का आयोजन, देशभर के धावकों ने दौड़ में लिया हिस्सा

रायपुर. राजधानी रायपुर में रविवार को सर्वसमाज के लिए AGRATHON 4.0 – “Vande Mataram – Run For Nation” का आयोजन किया गया. अग्रवाल सभा रायपुर एवं अग्रवाल युवा मंडल रायपुर की ओर से आयोजित इस मैराथन में करीब 3500 से 4000 लोगों ने हिस्सा लिया. राष्ट्रप्रेम, स्वास्थ्य और सामाजिक एकता के संदेश के साथ आयोजित इस दौड़ में युवाओं के साथ महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया. AGRATHON में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, नोएडा सहित देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी पहुंचे. सुबह से ही मरीन ड्राइव पर बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे और पूरा परिसर उत्साह से सराबोर नजर आया. दौड़ की शुरुआत तेलीबांधा तालाब परिसर स्थित मरीन ड्राइव से सुबह करीब 6 बजे हुई. प्रतिभागी खालसा स्कूल से होते हुए केनाल रोड पहुंचे और निर्धारित मार्ग से वापस तेलीबांधा तालाब स्थित मरीन ड्राइव पहुंचे. आयोजन में विजेताओं के लिए विभिन्न पुरस्कार भी रखे गए. कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. वहीं रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा, बेमेतरा SP-IPS त्रिलोकी बंसल सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे. आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सहयोगी संस्थानों और स्वयंसेवकों का भी विशेष योगदान रहा. इस अवसर पर अग्रवाल सभा रायपुर के अध्यक्ष विजय अग्रवाल ने कहा कि इस बार सर्वसमाज के लिए AGRATHON – “Vande Mataram – Run For Nation” थीम पर आयोजन किया गया है. इसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन किए जाएंगे. अग्रवाल युवा मंडल के अध्यक्ष CA सौरभ अग्रवाल ने कहा कि कई वर्षों से AGRATHON दौड़ का आयोजन किया जा रहा है. इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा इसमें शामिल होने पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि इस बार की दौड़ बेहद खास और ऐतिहासिक होने वाली है. इस अवसर पर My Bharat की ओर से अग्रवाल युवा मंडल का सम्मान भी किया गया. आयोजन में समाज एवं युवा मंडल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई. मीडिया प्रभारी उदित अग्रवाल ने कहा कि AGRATHON 4.0 को मिली प्रतिक्रिया से यह साबित हुआ है कि स्वास्थ्य, राष्ट्रप्रेम और समाजहित जैसे उद्देश्यों के लिए पूरा समाज एकजुट होकर आगे आ सकता है. देश के विभिन्न राज्यों से लोगों का रायपुर पहुंचकर आयोजन में शामिल होना गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि AGRATHON अब केवल रायपुर तक सीमित आयोजन नहीं रहा, बल्कि देशभर के लोगों को जोड़ने वाला मंच बन रहा है. कार्यक्रम में मनमोहन अग्रवाल, रेमचंद अग्रवाल, किसन अग्रवाल, जे.पी. अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, संजय चौधरी, संजय अग्रवाल, राजेश हैलीवाल, शैलेश अग्रवाल, राम अग्रवाल, दीपक गुप्ता सहित अग्रवाल समाज एवं युवा मंडल के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और कार्यकर्ता उपस्थित रहे.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की बड़ी कूटनीतिक पहल, यूक्रेन ने माना भारतीय प्रस्ताव को सबसे व्यापक

कीव रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में भारत ने यु्द्धविराम का प्रस्ताव दिया है। पिछले लगभग साढ़े चार साल से रूस के साथ उलझे यूक्रेन ने भी इस प्रस्ताव के मिलने की पुष्टि की है। जेलेंस्की के खास और यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भारत द्वारा दिए गए युद्ध विराम के प्रस्ताव को सबसे सही और व्यापक करार दिया है। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल ही में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी इस बात का जिक्र किया था कि पीएम मोदी लगातार युद्ध को खत्म करने की बात करते हैं। यूरोपियन प्रावदा की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि युद्धविराम के लिए उन्हें चार देशों से प्रस्ताव मिले हैं। इसमें भारत, तुर्किए, मिस्त्र और अमेरिका से युद्धविराम प्रस्ताव मिले हैं। इसमें से भारत का प्रस्ताव 'सबसे व्यापक' है। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा कि वह इन सभी प्रस्तावों पर अलग-अलग तरीकों से विचार करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, प्रमुख रूप से युद्धविराम तभी हो पाएगा, जब इसमें एनर्जी सेंटरों और पोर्ट्स पर हमलों को बंद करना और काला सागर की स्थिति को भी शामिल किया जाएगा। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने भारत के प्रस्ताव को बताया सबसे व्यापक यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इस पूरे मामले में भारत के प्रस्ताव को सबसे व्यापक करार दिया। उन्होंने कहा, "हमें जो चार प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। हम एनर्जी सेक्टर और ब्लैक सी (काला सागर) से जुड़े युद्धविराम के लिए तैयार हैं। लेकिन इसी संयोजन में। यह पूरी तरह से ऊर्जा से जुड़ा युद्धविराम होना चाहिए, इसमें बंदरगाह के इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित सभी एनर्जी सेंटरों पर हमलों को रोका जाए। उन्होंने तुर्किए और मिस्त्र द्वारा आए प्रस्ताव पर भी बात की। सिबिहा ने कहा कि तुर्की और मिस्र ने भी ऐसे ही प्रस्ताव दिए हैं, जिनमें यूक्रेन से अनाज का एक्सपोर्ट फिर से शुरू करने के लिए ब्लैक सी में युद्धविराम का सुझाव दिया गया था। इसके अलावा अमेरिका का प्रस्ताव इस बात पर जोर देता है कि यूक्रेन और रूस एनर्जी से जुड़े युद्धविराम पर सहमत हों। जेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक के लिए तैयार यूक्रेन- सिबिहा यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि जेलेंस्की और पुतिन के बीच होने वाली बैठक का नतीजा युद्धविराम भी हो सकता है। यूक्रेन इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की और पुतिन के बीच बैठक के नतीजों में से युद्धविराम एक हो सकता है। हम युद्धविराम के अलग-अलग तरीकों के लिए तैयार हैं, जिसमें कॉन्टैक्ट लाइन पर बिना किसी शर्त वाला युद्धविराम भी शामिल है।" रूस और यूक्रेन युद्ध खत्म कराने पर जोर देता रहा है भारत भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि रूस और यूक्रेन का युद्ध जल्द से जल्द बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाए। इसके अलावा भारत शुरुआत से ही दोनों पक्षों से भी इस बात को कहता हुआ आया है कि वह युद्ध खत्म करने में मदद करने को तैयार है। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि इस युद्ध का असर खाने-पीने की चीजों, ईंधन और फर्टिलाइजर की सुरक्षा पर पड़ा है, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों पर। आंद्री सिबिहा की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन ने भी शांति को लेकर पीएम मोदी के विचारों की तारीफ की थी। एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी हर मुलाकात के दौरान युक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाते हैं। उन्होंने कहा, "वह इस मामले में गहरी दिलचस्पी लेते हैं और उनके पास आपसी सहमति वाले समाधान खोजने के लिए बेहतरीन विचार हैं। इस लिहाज से, निश्चित रूप से निष्पक्ष रुख अपनाते हैं और साथ ही संघर्ष को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित को स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया

 यरुशलम  दुबई से इजरायल जा रही 'फ्लाईदुबई' फ्लाइट में हुए जानलेवा हमले को अपनी बहादुरी और सूझबूझ से टालने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की चारों तरफ तारीफ हो रही है। इस बहादुरी से प्रभावित होकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित को 'दुनिया का हीरो' बताया है। साथ ही उन्हें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है। बता दें कि इससे पहले इजरायली पीएम ने शनिवार को अस्पताल में भर्ती 38 वर्षीय कैप्टन स्मित से फोन पर बात की और उनका हालचाल जाना। जानिए कॉकपिट की खौफनाक कहानी? बुधवार को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 174 यात्रियों को लेकर इजरायल जा रही थी। विमान में ओमान का नागरिक हमम अल-हम्मामी को-पायलट के तौर पर मौजूद था। कैप्टन स्मित ने सुनाई पूरी कहानी कैप्टन स्मित ने नेतन्याहू को बातचीत के दौरान बताया कि हमले से ठीक पहले को-पायलट ने दुआ करने की इच्छा जताई थी। सम्मानस्वरूप कैप्टन स्मित ने सामने की तरफ देखना शुरू कर दिया और को-पायलट दुआ करने लगा। कैप्टन ने बताया कि करीब 4-5 मिनट बाद अचानक उनके सिर के पिछले हिस्से पर जोर का प्रहार हुआ। पहले कैप्टन को लगा कि विमान में कोई बहुत बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन जब लगातार वार होने लगे तब उन्हें समझ आया कि हमला विमान पर नहीं, बल्कि कॉकपिट के अंदर उनके अपने साथी द्वारा किया जा रहा है। को-पायलट ने कॉकपिट में रखे इमरजेंसी 'क्रैश एक्स' से उन पर हमला किया था। कैप्टन स्मित ने दिखाया था गजब का संयम इस हमले के बीच भी कैप्टन स्मित ने गजब का संयम दिखाया। विमान का आपातकालीन सिग्नल एक्टिवेट किया गया और विमान ने 34,000 फीट की ऊंचाई से अचानक 17,000 फीट से ज्यादा की तेजी से नीचे उतरते हुए सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग की। इस दौरान विमान का रडर भी क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन यात्रियों की जान बच गई।  

छत्तीसगढ़ में आज CG SET परीक्षा, दो शिफ्टों में 6622 अभ्यर्थी देंगे एग्जाम

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (SET) आज दो शिफ्टों में आयोजित की जाएगी. Paper-I सुबह 10 बजे से 11:15 बजे तक, जबकि Paper-II दोपहर 2 बजे से शाम 4:15 बजे तक होगा. परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद उसमें दर्ज परीक्षा केंद्र, जिला और शिफ्ट की टाइमिंग को ध्यान से जरूर जांच लें. परीक्षा के संचालन हेतु डिप्टी कलेक्टर आस्था बोरकर को नोडल अधिकारी और सहायक संचालक शिक्षा लक्ष्मण कावड़े को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। परीक्षा के लिए पीजी कॉलेज कांकेर, कन्या कॉलेज भीरावाही, सेजस मॉडल कॉलेज, कृषि रिसर्च सेंटर सिंगारभाट, नरहरदेव स्कूल, शहीद गैंदसिंह कॉलेज चारामा, डाइट कांकेर, शासकीय महिला आईटीआई सहित सिंगारभाट, बरदेभाठा, ईमलीपारा, लखनपुरी, चारामा, पोटगांव, कोदागांव व धनेलीकन्हार के विभिन्न हायर सेकेंडरी व हाई स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर समय पर उपस्थिति और जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। व्यापमं द्वारा परीक्षार्थियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें परीक्षार्थी को 2 घंटे पहले अपने केंद्र पहुंचना होगा। परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे के पहले तक प्रवेश मिलेगा।

भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत: तुर्की-पाकिस्तान के रक्षा समझौते से अलग हुआ मिस्र

नई दिल्ली  तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के मक्का पैक्ट में मिस्र के भी शामिल होने को लेकर चर्चाएं लगातार चल रही थीं। हालांकि, अब मिस्र ने इसे लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, ब्रिक्स समिट के दौरान जब मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, तो मक्का समझौते, उसके क्षेत्रीय और व्यापक असर पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। इस दौरान मिस्र ने तुर्की को भारत के लिए ठेंगा दिखा दिया। मक्का पैक्ट से मिस्र क्यों बना रहा दूरी? मिस्र ने भारत की चिंताओं और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते में शामिल न होने का फैसला किया था। जानकारों ने बताया कि नई दिल्ली और काहिरा अरब दुनिया के एक अहम स्तंभ के तौर पर मिस्र के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए काम करेंगे। मिस्र ब्रिक्स का सदस्य है और 2024 में इस समूह में शामिल हुआ था। भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत तुर्की के बार-बार सुझावों के बावजूद मिस्र अब तक मक्का समझौते में शामिल होने से दूर रहा है। ऐसा उसने किसी का पक्ष न लेने की अपनी रणनीति और भारत के साथ बढ़ते रिश्तों के कारण किया है। पश्चिम एशिया के जानकारों का कहना है कि मक्का समझौते की उपयोगिता सीमित है क्योंकि नाटो या पुराने वारसा समझौते के विपरीत, इन तीनों देशों का कोई साझा दुश्मन या एक नेता नहीं है। इस बात की भी संभावना कम है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में सऊदी अरब सैन्य मदद के जरिए पाकिस्तान की सहायता के लिए आगे आएगा। मिस्र हमेशा अरब देशों की गुटबाजी से रहा दूर अरब देशों में सबसे शक्तिशाली सेना वाला मिस्र ऐतिहासिक रूप से गुटबाजी की राजनीति से दूर रहा है। उत्तरी और पूर्वोत्तर अफ्रीका में स्थिरता के स्तंभ के तौर पर अपनी भूमिका निभाता रहा है। काहिरा के पड़ोसी देश इजरायल के साथ जटिल संबंध हैं। जिसके साथ उसके राजनयिक रिश्ते हैं। वह सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच किसी एक का पक्ष नहीं लेना चाहता। इस तरह से मिस्र ने भारत के साथ अपने बढ़ते रिश्तों की वजह से मक्का समझौते पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया।  

ड्रोन खतरे का जवाब बनेगी भारत की ‘ज्वाला’! माइक्रो-मिसाइल के रॉकेट मोटर्स का सफल परीक्षण

 नई दिल्ली भारत की निजी रक्षा कंपनी आईजी डिफेंस ने अपने ज्वाला माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम के तहत दो सॉलिड रॉकेट मोटर्स का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण 3 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब चार बजे किया गया. यह उपलब्धि कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है. ज्वाला भारत का पहला स्वदेशी निजी माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम है जो हार्ड-किल काउंटर-यूएएस यानी ड्रोन को नष्ट करने वाला सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है।  आधुनिक युद्धों में ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल वायु रक्षा के लिए नई चुनौती बन गया है. सस्ते और बड़ी संख्या में ड्रोन भेजने की क्षमता ने किफायती जवाबी उपायों की जरूरत बढ़ा दी है. ज्वाला इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाई जा रही है ताकि मौजूदा वायु रक्षा परतों के साथ मिलकर ड्रोन खतरों से बड़े पैमाने पर निपटा जा सके।  आज के संघर्षों में ड्रोन झुंड आम हो गए हैं. ये सस्ते होने के साथ प्रभावी भी साबित हो रहे हैं. महंगी मिसाइलों से हर ड्रोन को मार गिराना आर्थिक रूप से संभव नहीं है. इसलिए सस्ती और बड़ी संख्या में उत्पादित की जा सकने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग बढ़ी है।  आईजी डिफेंस के एवीपी विंग कमांडर अनूप शर्मा ने कहा कि ड्रोन खतरा तेजी से बदल रहा है और काउंटर-यूएएस सिस्टम को भी उसी गति से विकसित होना चाहिए. ज्वाला ठीक इसी सोच के साथ बनाई जा रही है. सफल प्रोपल्शन टेस्ट इस स्वदेशी हार्ड-किल क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यह मिसाइल न सिर्फ सस्ती होगी बल्कि बड़े पैमाने पर तैनात की जा सकेगी जिससे मिसाइल भंडार की गहराई भी बढ़ेगी।   ग्रिड सिस्टम के साथ इंटीग्रेटेड आर्किटेक्चर   ज्वाला को अकेले मिसाइल के रूप में नहीं बल्कि आईजी डिफेंस के व्यापक ग्रिड इकोसिस्टम के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है. ग्रिड डिफेंड एक एआई आधारित बैटल मैनेजमेंट सिस्टम है जो सेंसर, इफेक्टर्स और कमांड सिस्टम को जोड़ता है. यह सिस्टम डिटेक्शन, पहचान, ट्रैकिंग, खतरे का आकलन और एंगेजमेंट मैनेजमेंट को एक साथ लाता है. ग्रिड कई सेंसरों से जानकारी लेकर साझा तस्वीर बनाता है, हवाई खतरों को ट्रैक करता है और उपलब्ध हथियारों को निर्देशित करता है।  इस तरह सेंसर से शूटर तक का पूरा आर्किटेक्चर तैयार होता है जिसमें ज्वाला हार्ड-किल इंटरसेप्टर का काम करती है और ग्रिड बुद्धिमत्ता व मिशन मैनेजमेंट उपलब्ध कराता है. कंपनी के फाउंडर और सीईओ बोधिसत्त्व संघप्रिय ने कहा कि वे ज्वाला को बुद्धिमान रक्षा आर्किटेक्चर का हिस्सा बना रहे हैं ताकि डिटेक्शन से लेकर एंगेजमेंट तक अधिकृत मिशन स्वायत्त तरीके से पूरे हो सकें।  यह विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी दर्शाता है. आईजी डिफेंस स्वदेशी प्रोपल्शन, इंटरसेप्टर और काउंटर-यूएएस तकनीकों पर काम कर रही है. सफल परीक्षण के बाद कंपनी सिस्टम की परिपक्वता, विश्वसनीयता, विनिर्माण क्षमता और स्केलेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित करेगी।  आधुनिक युद्ध में ड्रोन खतरे के खिलाफ सस्ती और प्रभावी प्रणाली तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. ज्वाला और ग्रिड का संयोजन महंगी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा. यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय निजी कंपनियां अब जटिल रक्षा तकनीकों में भी आगे बढ़ रही हैं और देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रही हैं। 

इंदौर में 4.5 लाख वोटरों को राहत! हटे नामों का फिर होगा सत्यापन, पात्र मतदाताओं के नाम जुड़ेंगे

इंदौर. निर्वाचक नामावली में नाम जुड़वाने से छूट गए और विभिन्न कारणों से विलोपित किए गए मतदाताओं को एक और मौका मिलेगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश ने शुक्रवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्वाचक नामावली के निरंतर अद्यतन और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि विलोपित मतदाताओं के प्रकरणों का दोबारा परीक्षण कर पात्र पाए जाने पर उनके नाम नियमानुसार मतदाता सूची में शामिल किए जाएं। वीसी में दिए गए छूटे मतदाताओं की पहचान के निर्देश – वीसी में इंदौर से कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा, उप जिला निर्वाचन अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से छूट गए हैं, उनकी भी पहचान की जाए। जिन मतदान केंद्रों में बाद में परिवर्तन हुआ है, वहां पुरानी और वर्तमान सूचियों का मिलान कर छूटे हुए पात्र मतदाताओं की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 के साथ लगाया जाने वाला घोषणा पत्र केवल एसआईआर के दौरान ही उपयोग था। गैर-एसआईआर अवधि में निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रपत्रों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। अभियान की होगी साप्ताहिक समीक्षा – बैठक में डीएसई प्रकरणों का तेजी से निराकरण, रिक्त बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर पदों को भरने तथा अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए। अभियान की साप्ताहिक समीक्षा होगी और जिला स्तर पर प्रतिदिन की प्रगति की जानकारी ली जाएगी। गौरतलब है कि इंदौर में साढ़े चार लाख के करीब मतदाताओं के नाम हटाए गए थे।एसआइआर के बाद सूची में 24.20 मतदाता शामिल थे। दो दिन में उपलब्ध कराई जाएगी सूची – दो दिन के भीतर बीएलओ और बीएलए को छूटे नामों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। एईआरओ को सूची तैयार कराने और ईआरओ को प्रतिदिन इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए ईआरओ स्तर पर हेल्पडेस्क भी स्थापित किए जाएंगे। यहां मतदाता सूची में नाम जुड़वाने सहित निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी और आवश्यक सहायता मिलेगी। नवीन बसाहटों में भी डोर-टू-डोर सर्वे कर पात्र मतदाताओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिहार दौरे पर नवंबर में पहुंचेंगे प्रधानमंत्री मोदी, भागलपुर में कार्यक्रम की तैयारी; इन परियोजनाओं का हो सकता है ऐलान

पटना   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर में बिहार आएंगे। अधिक संभावना है कि पीएम का कार्यक्रम भागलपुर में आयोजित हो। 20 नवंबर के करीब प्रस्तावित दौरे की तारीख मानी जा रही है। इसको लेकर राज्य सरकार तैयारी में जुटी है। सर्वाधिक संभावना है कि सुल्तानगंज क्षेत्र में मुंगेर और बांका के नजदीक के स्थल को आयोजन स्थल बनाया जाए। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पीएम के प्रस्तावित कार्यक्रम में पीरपैंती थर्मल पावर स्टेशन का शिलान्यास, कहलगांव के विक्रमशिला के पास नये सेंट्रल यूनिवर्सिटी का शिलान्यास, सुल्तानगंज में अजगैवीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास शामिल हो सकता है। पीएम केंद्र ही नहीं, राज्य सरकार की योजनाओं का भी उद्घाटन-शिलान्यास करेंगे। भवन निर्माण विभाग ने करीब 3242.95 करोड़ की 459 योजनाओं का ब्योरा पीएमओ को भेजा है। शेष विभागों से भी ब्योरा तलब किया गया है। पीएमओ को भेजी गई सूची में भागलपुर की तीन योजनाओं का नाम उद्घाटन के लिए है। तीन-तीन करोड़ की राशि से निर्मित जगदीशपुर प्रखंड की सन्हौली, शाहकुंड प्रखंड की सजौर और मकंदपुर पंचायत सरकार भवन शामिल हैं। इन तीनों निर्मित पंचायत सरकार भवनों का उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे। पीएमओ को भेजी गई शिलान्यास में भागलपुर की कोई योजना शामिल नहीं है। जबकि बांका में भरको, तारडीह, गरीबपुर, पवई, खड़िहारा, सबलपुर, सोनडीहा, मोथावाड़ी, लकरामा, ककवारा, दुधारी, कंझिया, दक्षिणी कटेली, महिला विशनपुर, लोंगाय, करहरिया, तेलिया पहाड़, कोरिया, धनुषवार, सापडहर, सिकंदरपुर, डहुआ, सांगा, चिलकारा, बभनगामा, फागा, कैरी और गोकुला में निर्मित पंचायत सरकार भवनों का उद्घाटन किया जाएगा। इन पंचायत सरकार भवनों के निर्माण में 2.50 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। विभाग और योजनाओं का प्रस्तावित उद्घाटन-शिलान्यास विभाग का नाम योजनाओं की संख्या स्वीकृत राशि (करोड़ में) कला-संस्कृति 02 34.70 पिछड़ा-अतिपिछड़ा कल्याण 01 3.29 भवन निर्माण 02 75.15 वाणिज्य कर 01 23.06 सहकारिता 02 6.76 सामान्य प्रशासन 08 38.80 गृह (कारा) 07 13.65 गृह (आरक्षी) 01 63.11 अल्पसंख्यक कल्याण 04 18.02 पंचायती राज 345 948.46 मद्य निषेध-निबंधन 01 5.61 ग्रामीण विकास 55 1070.02 एससीएसटी कल्याण 17 369.87 तकनीकी शिक्षा 08 231.02 युवा रोजगार-कौशल 03 18.81 सूचना प्रावैधिकी 02 322.62 कुल 459 3242.95 अनुमति बगैर उद्घाटन-शिलान्यास नहीं कराने की हिदायत विभाग के अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त सह विशेष सचिव सुरेश कुमार प्रभाकर ने योजनाओं का ब्योरा जिला में पदस्थ कार्यपालक अभियंताओं को भेजा है। इसमें हिदायत दी गई है कि सूची में शामिल योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास प्रधानमंत्री द्वारा होना प्रस्तावित है। ऐसे में इन योजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किसी अन्य माननीय द्वारा विभाग से बगैर अनुमति के नहीं कराया जाना है। कार्यपालक अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि उद्घाटन योग्य तीनों पंचायत सरकार भवनों का अंतिम कार्य चल रहा है।

चबाने वाले तंबाकू का खौफनाक असर, स्टडी में 2.51 लाख मौतों का दावा

 नई दिल्ली तंबाकू खाना सेहत के लिए हानिकारक है. पैकेट पर साफ शब्दों में लिखी यह वॉर्निंग बताती है कि इसके नियमित उपयोग से जान भी जा सकती  है. इसके बावजूद तंबाकू चबाते की आदत दुनियाभर में गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है. Institute for Health Metrics and Evaluation (IHME) की नई स्टडी के मुताबिक, 2023 में दुनिया भर में चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल से करीब 2.51 लाख मौतें जुड़ी थीं।  इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण एशिया में देखने को मिला, जहां करीब 2.10 लाख मौतें दर्ज की गईं, जो दुनियाभर में तंबाकू से हुई कुल मौतों का लगभग 84 फीसदी है. यह रिसर्च Global Burden of Disease Study 2023 का हिस्सा है और The Lancet Global Health में प्रकाशित हुई है।  इसमें 1990 से 2023 तक 204 देशों और क्षेत्रों में चबाने वाले तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान का आकलन किया गया. खास बात यह है कि स्टडी ने चबाने वाले तंबाकू को दूसरे तरह के बिना धुएं वाले तंबाकू से अलग करके देखा है। स्टडी के मुताबिक, 2023 में 15 साल  और उससे ज्यादा उम्र के करीब 24.1 करोड़ लोग चबाने वाला तंबाकू इस्तेमाल कर रहे थे. पुरुषों में इसका इस्तेमाल महिलाओं के मुकाबले दोगुना ज्यादा है. 1990 से 2023 के बीच किसी भी देश में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज नहीं की गई।  वहीं 24 देशों में इस्तेमाल करने वालों की संख्या में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई. इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र दक्षिण एशिया रहा. यहां 15 साल से ज्यादा उम्र के 14.6 फीसदी लोग चबाने वाले तंबाकू इस्तेमाल कर रहे थे. देशवार देखें तो पलाऊ में यह दर 24.4, बांग्लादेश में 23.4 और नेपाल में 17.5 फीसदी रही।  भारत समेत 10 देशों में पुरुषों पर सबसे ज्यादा असर दुनियाभर में तंबाकू चबाने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है. 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण एशिया में हर 5 में से एक पुरुष तंबाकू का सेवन कर रहा है. वहीं महिलाओं की बात करें तो हर 10 में से 1 महिला तंबाकू का इस्तेमाल करती है. इसके साथ ही रिसर्च में यह भी पाया गया कि देशों और महिलाओं-पुरुषों के बीच पैटर्न काफी अलग है. बांग्लादेश में 30 साल से ज्यादा उम्र के हर आयु वर्ग में महिलाओं में इसका इस्तेमाल पुरुषों से ज्यादा था।  स्ट्रोक और मुंह का कैंसर बड़ा खतरा स्टडी ने चबाने वाले तंबाकू से जुड़े छह प्रमुख स्वास्थ्य परिणामों का आकलन किया. स्ट्रोक, होंठ और मुंह का कैंसर, खाने की नली का कैंसर, दूसरे तरह के गले के कैंसर, गले के निचले हिस्से का कैंसर और नाक-गले के बीच होने वाला कैंसर।  इनमें स्ट्रोक से सबसे ज्यादा दर्ज किया गया. इसके बाद होंठ और मुंह के कैंसर दूसरे नंबर पर है. वहीं दुनिया भर में चबाने वाले तंबाकू से होंठ और मुंह के कैंसर से जुड़ा स्वास्थ्य नुकसान 17.3 फीसदी था. दक्षिण एशिया में यह आंकड़ा बढ़कर 30.5 फीसदी हो गया।  1990 के मुकाबले स्वास्थ्य नुकसान 116% बढ़ा स्टडी के मुताबिक, 1990 से 2023 के बीच चबाने वाले तंबाकू से जुड़ी बीमारी, विकलांगता और समय से पहले मौत के आंकड़ों में 116 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. 2023 में यह आंकड़ा 64.8 लाख तक पहुंच गया. इनमें से 61.7 लाख लोगों ने समय से पहले अपनी जान गंवाई।  रिसर्चर्स का कहना है कि स्मोकिंग की तुलना में चबाने वाले तंबाकू पर अब तक कम ध्यान दिया गया है. सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं, इससे होने वाले नुकसान को लेकर गलत धारणाएं, सीमित निगरानी और कुछ ग्रामीण तथा कम आय वाले समुदायों में ज्यादा इस्तेमाल इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं।  रिसर्च के मुताबिक, इस नुकसान को कम करने के लिए तंबाकू रोकथाम और इसे छोड़ने की योजनाओं में चबाने वाले और बिना धुएं वाले तंबाकू को भी ज्यादा गंभीरता से शामिल करना जरूरी है. इसके लिए उम्र, लिंग, देश, स्थानीय आदतों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के हिसाब से अलग रणनीति बनानी होगी।