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प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मातृ वंदन योजना में छत्तीसगढ़ ने ऐसे ही नहीं मारी बाजी शिकायतों का तेज निराकरण और मंजूरी पर फोकस कर हासिल किया देश में पहला स्थान प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना से सुरक्षित मातृत्व को दिया जा रहा बढ़ावाः मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय  आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर राज्य स्तर के अधिकारियों ने सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की उपलब्धि रायपुर प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को लाभार्थियों तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है। इससे एक बार फिर साबित हुआ है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में  डबल इंजन की सरकार न सिर्फ जनकल्याणकारी योजनाओं को तेजी से अमल में लाती है, बल्कि प्रशासनिक सक्रियता से उसे हर तबके तक समय पर पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करती है।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रोत्साहित करने की इस केंद्रीय योजना के तेजी से क्रियान्वयन और शिकायतों का त्वरित निपटान कर छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना का राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वयन भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर पर्यवेक्षक, परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों तक के सेवा, समर्पण और दृढ़ निश्चय से हासिल की गई उपलब्धि है। जच्चा एवं बच्चा का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। ऐसे मिली उपलब्धि प्रशासनिक अमले द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लगातार मॉनिटरिंग की गई और लाभार्थियों के पंजीयन पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। इस योजना का लाभ लेने के लिए वर्ष 2023-24 में जहां 1,75,797 गर्भवती महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया था, वहीं वर्ष 2024-25 में 2,19,012 रजिस्ट्रेशन किए गए। इसे ही लक्ष्य मानते हुए वर्ष 2025-26 में  फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया जो लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है। रजिस्ट्रेशन के बाद इसे तुरंत मंजूरी देने पर फोकस किया गया। तय प्रक्रिया के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा फार्म भरने, पर्यवेक्षक द्वारा इसके सत्यापन और परियोजना अधिकारी और राज्य स्तर पर मंजूरी देने में तेजी लाई गई। भरे गए  आवेदनों के 83 प्रतिशत का परीक्षण कर इसे भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से छत्तीसगढ़ को मिली स्वीकृति की दर भी सबसे ज्यादा 83.87 रही है। इसके बाद तीसरी कैटेगरी शिकायतों के निराकरण के संबंध में आंकड़ों का परीक्षण किया गया। लाभार्थियों की ज्यादातर शिकायतें भुगतान न होने को लेकर थी। इस पर तत्काल ध्यान दिया गया और कोई कमी थी तो उसे दूर किया गया। हालांकि राज्य सरकार ने सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार के आंकड़ों में 30 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों की संख्या 7 प्रतिशत पाई गई है। इसके बावजूद 93 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण कर राज्य पहले स्थान पर रहा।  यदि तीन वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत कुल 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिनमें से 5,40,624 को स्वीकृति दे दी गई।  गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और उससे पूर्व पौष्टिक आहार व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार इस योजना के तहत 5 हजार रुपये और दूसरी बेटी के जन्म पर एकमुश्त 6 हजार रुपये देती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है। गर्भवती महिलाओं के रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपये, 6 माह बाद 2,000 रुपये और बच्चे के जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये का भुगतान किया जाता है। इसका मकसद संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

इफ्तार पार्टी पड़ी भारी: नाव पर बिरयानी खाने के बाद गंगा में हड्डी फेंकने पर 14 अरेस्ट

वाराणसी धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में गंगा की लहरों पर एक बेहद विवादास्पद मामला सामने आया है। पवित्र गंगा नदी के बीचों-बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने और उसमें मांसाहार (चिकन बिरयानी) का सेवन कर उसके अवशेषों (हड्डियों) को गंगा में फेंकने के आरोप में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।   भाजयुमो ने दी तहरीर, वीडियो से हुआ खुलासा इस पूरी घटना का खुलासा तब हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में कुछ लोग गंगा के बीच नाव पर बैठकर इफ्तार करते और मांसाहार का सेवन करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने सोमवार रात कोतवाली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। तहरीर के साथ साक्ष्य के तौर पर वीडियो भी उपलब्ध कराया गया, जिसके आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू की। इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने (धारा 295A व अन्य) और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। भाजयुमो नेता रजत जायसवाल का कहना है कि मां गंगा सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों की आस्था का केंद्र हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां गंगा जल के आचमन और पूजन के लिए आते हैं। ऐसे में गंगा की गोद में मांसाहार परोसना और उसकी हड्डियां पानी में फेंकना न केवल पर्यावरणीय अपराध है, बल्कि यह जानबूझकर हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कुत्सित प्रयास है। नाविक और बजड़ा मालिक पर भी गिरेगी गाज हिंदूवादी संगठनों ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। पुलिस ने न केवल बिरयानी खाने वाले 14 लोगों को दबोचा है, बल्कि उस नाव की भी पहचान कर ली गई है जिस पर यह आयोजन हुआ था। पुलिस अब नाव मालिक और उसके चालक के खिलाफ भी लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। संगठनों की मांग है कि नाविकों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे नावों पर किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि न होने दें जिससे काशी की गरिमा धूमिल हो। एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह के अनुसार भाजयुमो नेता की तरफ से शिकायत मिली थी कि गंगा जी में नाव पर इफ्तार पार्टी हो रही है और चिकन बिरयानी का सेवन किया जा रहा है। इस बारे में इंस्टाग्राम पर वीडियो भी वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुुए तत्काल केस दर्ज किया गया। इसके बाद जगह जगह दबिश दी गई और 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आगे की कार्रवाई भी की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिलाओं को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश, सरकार को मिला महत्वपूर्ण आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि तीन महीने और उससे अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली मांओं को मातृत्व अवकाश मिलेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पितृत्व अवकाश के लेकर सरकार फैसला करेगी. पहले के नियम के मुताबिक तीन महीने के बच्चे को गोद लेने पर 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता था. शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) की धारा 60(4) के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें गोद लेने वाली मां को मातृत्व लाभ केवल तभी देने की बात कही गई थी जब बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रावधान की व्याख्या करते हुए कहा कि जो महिला कानूनी रूप से किसी बच्चे को गोद लेती है या जो कमीशनिंग मदर है, उसे बच्चे को सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह तक मातृत्व लाभ का अधिकार होगा. इस फैसले को गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें समानता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित होगा। जस्टिस जेबी पार्दीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि परिवार की परिभाषा केवल जैविक संबंधों के आधार पर ही तय नहीं की जा सकती. फैसले में जोर दिया गया कि गोद लेना परिवार बढ़ाने का उतना ही वैध तरीका है जितना जैविक तरीका. ऐसे में एक गोद दिए गए बच्चे का अधिकारी भी एक बायोलॉजिकल बच्चे जैसा है. जजों ने आगे कहा कि एक गोल लिए गए बच्चे को पालन पोषण में माता-पिता भावनात्मक रूप से उतना ही जड़े होते हैं जितना एक बॉयोलॉजिकल बच्चे को पालने में होता है. इसमें बच्चे की उम्र से कुछ भी लेना देना नहीं है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना की तिथियों का निर्धारण, 44 हजार जोड़े होंगे लाभान्वित

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना की तिथियों का निर्धारण,  44 हजार जोड़े हो सकेंगे लाभान्वित भोपाल  गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आयोजित किए जाने वाले मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाह योजना के लिए तिथियों का निर्धारण किया गया है। इनमें अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, देवउठनी ग्यारस (तुलसी विवाह) 20 नवंबर 2026, बसंत पंचमी 11 फरवरी 2027 तथा एक अन्य तिथि स्थानीय मांग और कलेक्टर के निर्णय अनुसार निर्धारित की जा सकती है। वर्ष 2026-27 में पक्ष 44 हजार से अधिक विवाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर राज्य सरकार 242 करोड़ से अधिक राशि व्यय करेगी। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाय योजना के प्रभावी व्यवस्थि और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजन के लिए विभाग द्वारा सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेने वाले जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 और अधिकतम संख्या 200 निर्धारित की गई है। प्रदेश के 55 जिलों में इन अवसरों पर 800 जोड़े यानिकी 44 हजार जोड़ों का विवाह संभव हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 51 हजार 899 मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना तथा 28 हजार 362 मुख्यमंत्री निकाह कराए गए हैं। इन हितग्राहियों से 321 करोड़ 41 लाख 58 हजार की सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराया जा सकता है। योजना में 49 हजार रूपये की राशि कन्या के बैंक खाते में तथा 6 हजार रूपये की राशि आयोजन समिति को कुल 55 हजार रूपये प्रति विवाह खर्च किया जाता है।  

सरकार का बड़ा फैसला: धर्म स्वातंत्र्य विधेयक लौटाकर नए संशोधनों के साथ सर्वसम्मति से पारित

रायपुर. विधानसभा बजट सत्र के दौरान मंगलवार को गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्यपाल द्वारा लौटाए गए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 पर विचार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विचार के उपरांत आसंदी ने सरकार को विधेयक वापस लेने की अनुमति दी. विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 को वापस लेने के अलावा राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. जिसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया. इसके साथ मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन का प्रस्ताव और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विधानसभा में दोनों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ. एक के बाद एक प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों के स्वीकार होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों से सम्बंधित अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुआ. विपक्ष ने चर्चा में भाग नहीं लिया. क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक? छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था. सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.     जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान     कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.     विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है. उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश: CM साय ने विधानसभा परिसर में तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ किया

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश: CM साय ने विधानसभा परिसर में तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का किया शुभारंभ रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने शिविर में स्वयं स्वास्थ्य जांच कराकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियों में कमी आने के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक हो गई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने से व्यक्ति समय रहते जागरूक रहकर आवश्यक सावधानी अपनाते हुए गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त समाज और समृद्ध राज्य की नींव होते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह द्वारा की गई इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को जागरूक करते हैं, बल्कि उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित भी करते हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, संचालक स्वास्थ्य  संजीव कुमार झा, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक  रितेश अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

MP में LPG संकट: घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में सुधार, कमर्शियल गैस की कमी पर ऑयल कंपनियों का ध्यान

भोपाल  मध्य प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की कमी से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग अभी भी प्रभावित है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में कमर्शियल गैस की सप्लाई रोक दिए जाने से लगभग 50 हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट सोमवार को गैस के बिना काम करने को मजबूर रहे। भोपाल के भौंरी स्थित ऑयल कंपनी डिपो से कमर्शियल सिलेंडर ट्रकों में लोड किए जा रहे हैं, लेकिन इन्हें होटल और रेस्टोरेंट तक पहुंचाने के आदेश अभी जारी नहीं हुए हैं। जिला फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, पुलिस, सेना और रेलवे कैंटीन जैसे आवश्यक सेवाओं को ही गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया, भौंरी स्थित डिपो से कमर्शियल सिलेंडर के ट्रक लोड हो रहे हैं, लेकिन फिलहाल होटल और रेस्टोरेंट को सिलेंडर देने के आदेश नहीं है। इसलिए सोमवार को अस्पताल, शैक्षणिक संस्थाएं, पुलिस, सेना-रेलवे कैंटिंग को ही सिलेंडर की सप्लाई की गई है। महाराष्ट्र में 70% सप्लाई, एमपी में भी हो एमपी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया, एसोसिएशन को महाराष्ट्र के उपहार गृहों में 70 प्रतिशत रिलीफ यानी, सिलेंडर दिए जाने के आदेश मिले हैं। एमपी में भी ये आदेश आ सकते हैं। फिलहाल सोमवार को कमर्शियल सिलेंडर नहीं दिया गया। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में समस्या बनी रही। यदि इन्हें भी सिलेंडर मिलेंगे तो यह होटल इंडस्ट्री के लिए 'ऑक्सीजन' मिलने जैसा रहेगा। पिछले 7 दिन से सप्लाई नहीं होने से भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म हो रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन, डीजल भट्‌ठी के इंतजाम जरूर किए हैं, लेकिन यह बहुत ही खर्चिला है। इसलिए मेन्यू में बदलाव करने की गाइडलाइन जारी की। सिलेंडर की कमी और ग्राहकों की संख्या कम होने के बावजूद प्रदेश के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट से कर्मचारियों को नहीं निकाला गया। प्रदेश के होटल कारोबारियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से कमर्शियल गैस की आपूर्ति बाधित है। इसके कारण भोपाल, इंदौर सहित कई बड़े शहरों में होटल और रेस्टोरेंट का गैस स्टॉक खत्म होने लगा है। मध्य प्रदेश होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी के मुताबिक महाराष्ट्र में होटल उद्योग को लगभग 70 प्रतिशत गैस सप्लाई देने के निर्देश जारी किए गए हैं और उम्मीद है कि इसी तरह का निर्णय मध्य प्रदेश में भी जल्द लिया जाएगा। गैस की कमी के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन चूल्हे और डीजल भट्टियों का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि यह विकल्प काफी महंगा साबित हो रहा है। इसी वजह से कई स्थानों पर होटल संचालकों ने अस्थायी रूप से मेन्यू में बदलाव करने के निर्देश भी जारी किए हैं। बावजूद इसके, होटल उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि अब तक किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला गया है। उधर घरेलू गैस सिलेंडरों की स्थिति में कुछ सुधार देखा गया है। गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार प्रदेश में घरेलू सिलेंडर बुकिंग से जुड़ी लगभग 50 प्रतिशत समस्याएं कम हो गई हैं। भोपाल में ही सोमवार को करीब 12 हजार से अधिक बुकिंग दर्ज की गईं। हालांकि कई उपभोक्ता भविष्य की संभावित कमी को देखते हुए अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे बाजार में घबराहट की स्थिति बनी हुई है। घरेलू गैस बुकिंग की 50% समस्या हुई कम गैस एजेंसी संचालकों की माने तो प्रदेश में घरेलू सिलेंडर की बुकिंग की 50% समस्या खत्म हो गई है। भोपाल में सोमवार को 12 हजार से अधिक बुकिंग आई। हालांकि, पैनिक स्थिति ज्यादा है। यानी, लोग भविष्य में सिलेंडर न मिलने की समस्या आने पर अतिरिक्त सिलेंडर जमा कर रहे हैं। इधर, सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। राजधानी में ही सोमवार को करीब 50 सिलेंडर जब्त किए गए। गैस किल्लत को लेकर प्रदेश में प्रदर्शन का दौर गैस की किल्लत के चलते पूरे प्रदेश में प्रदर्शन का दौर भी जारी है। सोमवार को भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चाय की दुकान लगाई। नाले में पाइप लगाकर उससे निकलने वाली गैस से चाय बनाने की कोशिश की। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए पोस्टर में लिखा था- कृपया मोदी जी की सलाह मानें। रसोई गैस के पीछे न भागें, गंदे नाले की गैस का उपयोग करें। मंदसौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ठेले पर गैस सिलेंडर रखकर रैली निकाली। प्रधानमंत्री के खिलाफ नरेंदर-सरेंडर के नारे लगाए। गैस संकट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पार्टी कार्यकर्ताओं ने अनोखा प्रदर्शन करते हुए नाले की गैस से चाय बनाने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए पोस्टरों में केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। मंदसौर सहित अन्य जिलों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर के साथ रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम लोगों और कारोबारियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद बनी हुई है।

कल से MP में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी-बारिश और गरज-चमक के साथ तेज गर्मी का असर

भोपाल प्रदेश में बीते कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच अब मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 18 मार्च से एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिसका असर करीब आधे मध्यप्रदेश में नजर आएगा। इस सिस्टम के चलते तीन दिन तक आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर बना रह सकता है।राजधानी भोपाल समेत इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी मौसम बदलेगा। हालांकि इससे पहले मंगलवार तक गर्मी का असर बरकरार रहेगा और दिन में तेज धूप लोगों को परेशान करेगी।मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हो रहा यह सिस्टम 17 मार्च की रात से असर दिखाना शुरू करेगा, जो 18 से 20 मार्च के बीच मध्यप्रदेश में व्यापक प्रभाव डालेगा।  फिलहाल प्रदेश के ऊपर दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक ट्रफ सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन इनका खास असर अभी दिखाई नहीं दे रहा है. इसी वजह से कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।  खंडवा रहा सबसे गर्म शहर प्रदेश में सोमवार को सबसे ज्यादा गर्मी खंडवा में दर्ज की गई. यहां अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. इसके अलावा नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, रायसेन, सिवनी, मंडला, टीकमगढ़, सागर और खजुराहो में भी तापमान 37 डिग्री या उससे ज्यादा दर्ज किया गया।  अगर बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर में 35.8°C, भोपाल में 35.2°C, इंदौर और उज्जैन में करीब 35°C के आसपास तापमान रिकॉर्ड किया गया. वहीं ग्वालियर में अधिकतम तापमान 34.1°C रहा।  वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बदलेगा मौसम मौसम विभाग के मुताबिक आज रात से उत्तर-पश्चिम भारत में एक स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने जा रहा है. इसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा. इसी वजह से 18 मार्च से 20 मार्च के बीच प्रदेश के कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आएगा. कई जगहों पर तेज हवा, गरज-चमक और बारिश होने की संभावना जताई गई है।  18 मार्च को इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने 18 मार्च को ग्वालियर, मुरैना, दतिया, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, छिंदवाड़ा, सिवनी, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।  19 मार्च को इन इलाकों में बदलेगा मौसम 19 मार्च को इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।  20 मार्च को भोपाल-जबलपुर समेत कई शहरों में असर 20 मार्च को भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है।  अप्रैल-मई में चलेगी लू मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अबकी बार अप्रैल और मई में हीट वेव यानी, लू चलेगी। 15 से 20 दिन तक लू चल सकती है। मार्च के दूसरे सप्ताह में नर्मदापुरम में लगातार 3 दिन तक तीव्र लू वाला मौसम रहा। मौसम विभाग ने बताया कि मार्च के आखिरी सप्ताह से लू का असर दिखाई देने लगेगा। मार्च में तीनों मौसम का असर मध्यप्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच सकता है, जबकि रात में 14 से 20 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। नर्मदापुरम में लगातार तीन दिन तक पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। अप्रैल-मई सबसे ज्यादा गर्म रहेंगे मौसम विभाग ने इस साल अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। इन दो महीने के अंदर ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी गर्म रहेंगे। फरवरी में 4 बार ओले-बारिश हुई इस बार फरवरी में मौसम का मिजाज चार बार बदला। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा। बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार दर्ज किया गया भोपाल: 20.0°C इंदौर: 19.0°C जबलपुर: 19.6°C ग्वालियर: 17.1°C उज्जैन: 15.8°C

PMAY 2.0: मुख्यमंत्री ने 90,000 लाभार्थियों के खाते में 900 करोड़ की पहली किस्त ट्रांसफर की

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 के अंतर्गत 90,000 लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से जारी की 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त  पिछली सरकारों में पाले गए माफियाओं ने गरीबों का हक छीना,  जमीनें कब्जाईं, अब उन्हीं जमीनों पर गरीबों के लिए घर बनेंगे: मुख्यमंत्री माफिया से मुक्त जमीनों पर हाईराइज आवास बनाने के निर्देश, गरीबों के साथ-साथ शिक्षकों, वकीलों, डॉक्टरों व पत्रकारों के लिए भी आवास योजना जिन्होंने वर्षों शोषण किया, उसकी भरपाई अब ब्याज सहित करने का समय आ गया: सीएम योगी डबल इंजन सरकार 25 करोड़ जनता को परिवार मानकर योजनाओं का लाभ पहुंचा रही: सीएम सरकार का लक्ष्य केवल मकान देना नहीं, बल्कि गरीबों को सम्मानजनक जीवन देना है: योगी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 के अंतर्गत 90,000 लाभार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रथम किस्त के रूप में 900 करोड़ रुपये की अनुदान राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि जिन्होंने वर्षों तक आम जनता का शोषण किया है, उस शोषण की भरपाई अब ब्याज सहित वापस करने का समय आ गया है। जिन माफियाओं ने गरीबों का हक छीना, जमीनें कब्जाईं, अब उन्हीं जमीनों पर गरीबों के लिए घर बनेंगे। डबल इंजन सरकार की नीति के तहत “25 करोड़ जनता ही परिवार” मानकर बिना भेदभाव हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है, और यही उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ छवि से निकालकर देश का ग्रोथ इंजन बना रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल मकान देना नहीं, बल्कि गरीबों को सम्मानजनक जीवन देना है, जहां घर के साथ शौचालय, बिजली, पानी और सभी बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित हों।  62 लाख परिवारों को मिला आवास मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसके पास अपना घर हो। मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है और उसमें अपना पक्का मकान बनाने की क्षमता है। जैसे अन्य जीव शरण के लिए ठौर-ठिकाना बनाते हैं, उसी तरह घर मनुष्य के जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है। इस मूल आवश्यकता को पूरा करने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथों में लिया, जिसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 62 लाख परिवारों को इस योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। अब 25 करोड़ जनता ही हमारा परिवार मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले गरीबों के लिए आवास योजनाएं होने के बावजूद उनका लाभ नहीं मिल पाता था, क्योंकि प्रदेश सरकार में इच्छाशक्ति की कमी थी। जब व्यक्ति स्वार्थ में डूब जाता है तो उसकी संवेदनाएं समाप्त हो जाती हैं और वह केवल अपने परिवार तक सीमित रह जाता है। इसी कारण उस समय की सरकारें भी परिवार और नातेदारों तक सीमित थीं। लेकिन 2017 के बाद डबल इंजन सरकार ने “25 करोड़ प्रदेशवासी ही परिवार हैं” की सोच के साथ काम करते हुए हर जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना अपनी प्राथमिकता बना लिया। हर गरीब के साथ सरकार की संवेदना मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार की संवेदना हर गांव, गरीब, युवा, महिला, किसान और श्रमिक के साथ है। इसी क्रम में 90,000 से अधिक लाभार्थियों को आवास के लिए ₹1 लाख की पहली किस्त दी जा रही है। इसमें सहारनपुर में 10,214 लाभार्थियों को, प्रतापगढ़ में 7,991, शाहजहांपुर में 4,325, फिरोजाबाद में 4,266, प्रयागराज में 3,331, जालौन में 3,174, सीतापुर में 3,078, गोरखपुर में 3,063, बरेली में 3,017, अलीगढ़ में 2,883, बदायूं में 2,712, महाराजगंज में 2,701, मेरठ में 2,626, अमरोहा में 2,175, हरदोई में 1,895, बुलंदशहर में 1,826, कुशीनगर में 1,562, बहराइच में 1,529, आगरा में 1,473, मऊ में 1,470, बांदा में 1,437, बिजनौर में 1,364, गाजियाबाद में 1,209, देवरिया में 1,138 और गोंडा में 1,121 लाभार्थियों को यह पहली किस्त प्रदान की गई है। कुल ₹900 करोड़ से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में भेजी गई है। यह तकनीक के प्रभावी उपयोग का उदाहरण है, जहां बिना किसी बिचौलिए के पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है और सभी के मकान बनने का रास्ता साफ हो रहा है। ‘बीमारू’ से ‘ग्रोथ इंजन’ बना यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि पहले गरीब और वंचित को बिना भेदभाव योजना का लाभ मिले। यही किसी भी कल्याणकारी शासन की पहचान है। इसी दृष्टिकोण के साथ किए गए कार्यों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश आज ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है। डबल इंजन सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गांव, गरीब, किसान, युवा व महिलाओं के लिए समर्पित प्रयासों के चलते यह संभव हुआ है। साथ ही, बासंतीय नवरात्रि और रामनवमी से पहले गरीबों को आवास मिलना उनके लिए विशेष खुशी का विषय है, जिससे उनके सपनों को नए पंख मिले हैं। आवास के साथ समग्र विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि लाभार्थियों को केवल आवास ही नहीं, बल्कि राशन योजना, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, आयुष्मान भारत के तहत ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा और निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों व दिव्यांगजनों को ₹12,000 वार्षिक पेंशन जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। प्रदेश में 1 करोड़ 6 लाख लोगों को पेंशन दी जा रही है और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। 25 करोड़ जनता को परिवार मानने की भावना से बिना भेदभाव दलितों, वंचितों, पिछड़ों, गरीबों और महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है। इससे न केवल जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि लोगों की ऊर्जा और क्षमता से प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है और अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। 75% निर्माण पर अगली किस्त मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न जनपदों में संवाद के दौरान उन्होंने लाभार्थी परिवारों की खुशी को स्वयं देखा। सहारनपुर, फतेहपुर, महाराजगंज, देवरिया, प्रयागराज और गोरखपुर में महिलाओं ने बताया कि पहली किस्त मिलते ही उन्होंने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। सीएम ने कहा कि 75 प्रतिशत कार्य पूरा होते ही लाभार्थी तुरंत अगली किस्त की मांग करें और अधिकारियों द्वारा ₹1 लाख की अगली किस्त तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि निर्माण में तेजी आए। साथ ही, जिलों में नोडल अधिकारी तैनात कर सस्ती और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री … Read more

काबुल में आतंकी ठिकाने बताकर पाकिस्तान ने 400 लोगों की जान ली, जिनमें मरीज और आम लोग भी शामिल

काबुल अफ़गानिस्तान के उप-सरकारी प्रवक्ता ने मंगलवार सुबह बताया कि अफ़गान राजधानी काबुल में नशा करने वालों का इलाज करने वाले एक अस्पताल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 हो गई है।  सोशल मीडिया पोस्ट में हमदुल्ला फितरत ने कहा कि सोमवार देर रात हुए इस हमले में अस्पताल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया. उन्होंने बताया कि अब तक 400 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 250 अन्य के घायल होने की खबर है।  फितरत ने आगे कहा कि बचाव दल इमारत में लगी आग पर काबू पाने और मलबे से शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।  पाकिस्तान क्या बोला? पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के दावे को झूठा और जनता की राय को गुमराह करने के मकसद से किया गया बताकर खारिज कर दिया. पाकिस्तान ने कहा कि उसने सोमवार को काबुल और नंगरहार प्रांत में केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।  अफ़गानिस्तान की तालिबान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्ला फ़ितरत के मुताबिक, काबुल के उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हमला स्थानीय समय के अनुसार रात लगभग 9 बजे (16:30 GMT) हुआ. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह हॉस्पिटल 2,000 बेड की सुविधा वाला है और इस हमले में इमारत का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।  'हम फिर से उठ खड़े होंगे…' अफगानिस्तानी क्रिकेटर राशिद खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "काबुल में पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण आम नागरिकों के हताहत होने की ताज़ा रिपोर्टों से मुझे गहरा दुख हुआ है. आम नागरिकों के घरों, शिक्षण संस्थानों या चिकित्सा सुविधाओं को निशाना बनाना एक युद्ध अपराध है. इंसानी जानों के प्रति इस तरह की शदीद गफलत, खासकर रमज़ान के पवित्र महीने में, बेहद घिनौनी और गहरी चिंता का विषय है. इससे केवल फूट और नफ़रत ही बढ़ेगी।  उन्होंने आगे कहा कि मैं संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अन्य एजेंसियों से अपील करता हूं कि वे इस ताज़ा जुल्म जांच करें और इसके दोषियों को जवाबदेह ठहराएं. इस मुश्किल घड़ी में मैं अपने अफ़ग़ान लोगों के साथ खड़ा हूं. हम इस सदमे से उबरेंगे और एक राष्ट्र के रूप में हम फिर से उठ खड़े होंगे. हम हमेशा ऐसा ही करते आए हैं।  'जेट ने बम गिराए…' स्थानीय टेलीविज़न चैनलों ने ऐसे फुटेज दिखाए, जिनमें दमकलकर्मी एक इमारत के मलबे के बीच उठ रही लपटों को बुझाने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे थे।  हॉस्पिटल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करने वाले 31 साल के ओमिद स्तानिकज़ई ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि हमले से पहले उन्होंने आसमान में लड़ाकू विमानों को गश्त करते हुए सुना था. हमारे चारों ओर सैन्य टुकड़ियां थीं. जब इन सैन्य टुकड़ियों ने जेट पर गोलीबारी की, तो जेट ने बम गिराए और आग लग गई. सभी मृतक और घायल नागरिक थे।  पाकिस्तान के द्वारा यह हमला अफ़ग़ान अधिकारियों के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच उनकी साझा सीमा पर गोलीबारी हुई थी और अफ़ग़ानिस्तान में चार लोग मारे गए थे. यह घटना ऐसे वक्त में हुई है, जब इन पड़ोसी देशों के बीच पिछले कई वर्षों की सबसे भीषण लड़ाई तीसरे हफ़्ते में प्रवेश कर गई है।  'इंसानियत के खिलाफ जुर्म…' अफ़ग़ान सरकार के एक और प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने इससे पहले सोशल मीडिया पर अस्पताल पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया है. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान सरकार इस तरह के कृत्य को सभी सिद्धांतों के खिलाफ और इंसानियत के खिलाफ जुर्म मानती है।  'आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर…' पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के प्रवक्ता मुशर्रफ़ ज़ैदी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया।  सोशल मीडिया पोस्ट में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में सैन्य ठिकानों और आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को सटीक रूप से निशाना बनाया गया, जिसमें अफ़ग़ान तालिबान के तकनीकी उपकरणों और गोला-बारूद के गोदाम शामिल हैं. इसके साथ ही काबुल और नंगरहार में मौजूद अफ़ग़ानिस्तान-स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों को भी निशाना बनाया गया. मंत्रालय ने आगे कहा कि इन ठिकानों का इस्तेमाल बेकसूर पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।