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योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद ग्रामीण बैंकिंग लेनदेन में पहली बार आई इतनी रफ्तार

बीसी सखियों ने बनाया रिकॉर्ड, 45 हजार करोड़ का किया वित्तीय लेनदेन, कमीशन में मिले 120 करोड़ योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद ग्रामीण बैंकिंग लेनदेन में पहली बार आई इतनी रफ्तार 50 हजार करोड़ रुपए के वित्तीय लेनदेन की ओर अग्रसर प्रदेश की बीसी सखियां आजीविका मिशन के जरिए एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया लेनदेन में प्रयागराज पहले स्थान पर, बरेली दूसरे और शाहजहांपुर तीसरे नंबर पर लखनऊ योगी सरकार में प्रदेश के गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की मुहिम ने बड़ा असर दिखाया है। बीसी सखी योजना के माध्यम से गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच रहीं हैं और 40 हजार से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहीं हैं। प्रदेश में पहली बार योगी सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण बैंकिंग को इतनी रफ्तार मिली है। बीसी सखियां गांवों में बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में काम करते हुए खातों में पैसे जमा-निकासी, आधार आधारित लेनदेन और सरकारी योजनाओं का भुगतान जैसी सेवाएं लोगों तक पहुंचा रहीं हैं। इससे ग्रामीणों को बैंक जाने की परेशानी कम हुई है और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार का रास्ता भी खुला है। प्रदेश की बीसी सखियां अब तेजी से वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा दे रहीं हैं। यह आंकड़ा जल्द ही 50 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंचने की ओर अग्रसर है। ग्रामीण महिलाएं अब तक लगभग 45 हजार करोड़ रुपए का वित्तीय लेनदेन कर चुकीं हैं। इसके अंतर्गत उन्हें लगभग 120 करोड़ का कमीशन मिला है। कई बीसी सखियां हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक कमीशन भी अर्जित कर रहीं हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। उद्यमिता और बैंकिंग के जरिए अलग पहचान बना रहीं महिलाएं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर आजीविका मिशन के माध्यम से अब तक एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब उद्यमिता, बैंकिंग और विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के जरिए अपनी अलग पहचान बना रहीं हैं। 50 हजार से अधिक बीसी सखियों को प्रशिक्षण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला के अनुसार प्रदेश में अब तक 50,225 बीसी सखियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से करीब 40 हजार महिलाएं सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहीं हैं। बीसी सखियों के जरिए होने वाले लेनदेन में प्रयागराज अव्वल बीसी सखियों के जरिए होने वाले लेनदेन के मामले में प्रयागराज जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है, जहां 1030 बीसी सखियां सक्रिय हैं। इसके बाद बरेली में 890 और शाहजहांपुर में 813 बीसी सखियां कार्य कर रहीं हैं। योजना का दायरा और बढ़ाने की तैयारी बीसी सखी मॉडल ने गांवों में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। आने वाले समय में इस योजना का दायरा और बढ़ाने की तैयारी है, जिससे प्रदेश के और अधिक गांवों में आर्थिक बदलाव की रफ्तार तेज होगी।

नंदा देवी जहाज का भारत वापसी, होर्मुज से लाया 47 हजार मीट्रिक टन LPG

वडीनार होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से शिवालिक के बाद, एक और LPG टैंकर 'नंदा देवी' भारत आ चुका है. 'नंदा देवी' होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार करते हुए वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है. यह जहाज अपने साथ 47 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर आया है. यह जहाज गुजरात के वाडीनार बंदरगाह पर पहुंच चुका है. मिडिल ईस्ट में गहराते संकट के बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाला यह दूसरा जहाज़ है। एक दिन पहले, दूसरा LPG टैंकर 'शिवालिक' गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर 46,000 मीट्रिक टन से ज़्यादा LPG लेकर पहुंचा था. इसमें इतनी LPG थी जो भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के करीब 32.4 लाख स्टैंडर्ड घरेलू सिलेंडरों के बराबर थी। अधिकारियों का अनुमान था कि यह अकेला जहाज़ भारत की कुल LPG आयात की ज़रूरत का लगभग एक दिन का हिस्सा पूरा कर सकता है। मंत्रालय ने क्या बताया था? शनिवार को जहाज़रानी मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया था कि शिवालिक और नंदा देवी के क्रमशः 16 मार्च और 17 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है. सिन्हा ने कहा था, “फ़ारसी खाड़ी इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. फ़ारसी खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज़ मौजूद थे. इनमें से दो जहाज़- शिवालिक और नंदा देवी सुरक्षित रूप से गुज़र गए और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं। नंदा देवी के गुजरात बंदरगाह पर पहुंचने के बाद 24 हजार मीट्रिक टन LPG तमिलनाडु भेजी जाएगी. LPG आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीद दो जहाज़ों के आने से भारत की LPG आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीद है, जिससे कमी के व्यापक डर को दूर किया जा सकेगा. फ़िलहाल, कई शहरों में लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जबकि छोटे कारोबारी (होटल, रेस्टोरेंट और सड़क किनारे दुकानें चलाने वाले) इस बात से चिंतित हैं कि इस कमी की वजह से उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (विपणन एवं तेल शोधन) सुजाता शर्मा ने कहा, "कच्चे तेल और रिफाइनरियों के संबंध में, हमारे पास कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति है और हमारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। खुदरा दुकानों पर स्टॉक की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। हम अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर पर्याप्त पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करते हैं; इसलिए, हमें आयात की कोई आवश्यकता नहीं है। पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे प्राकृतिक गैस के संबंध में, मैंने कल आपका ध्यान सरकार के उद्देश्य की ओर दिलाया था, जहां भी वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को एलपीजी आपूर्ति में कठिनाइयों या व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें पीएनजी कनेक्शन में परिवर्तित किया जाना चाहिए।" इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए, GAIL (गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) ने विभिन्न सीजीडी ऑपरेटरों के साथ एक बैठक आयोजित की और उन्हें सलाह दी कि वे जहां भी संभव हो, सभी पात्र वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने में तेजी लाएं… कांडला बंदरगाह में 22 जहाजों को हैंडल करने का इंतजाम तनाव के माहौल में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरकर भारत आने वाला पहला जहाज लाइबेरिया का था, जो सीधे मुंबई पहुंचा था। लेकिन, उसके बाद कांडला बंदरगाह में 72 घंटों के अंदर 22 जहाजों को हैंडल करने का इंतजाम किया गया है। 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा 'नंदा देवी' उधर जानकारी के अनुसार 'नंदा देवी'46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा है। भारत के कई इलाकों में इस समय जिस तरह से एलपीजी की किल्लत बताई जा रही है, ऐसे मौके पर देश के लिए ईरान से बात करके इस तरह से होर्मुज के रास्ते एलपीजी टैंकर ले आना बहुत बड़ी उपलब्धि है। ईरान से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते अबतक भारत पहुंचे जहाज     ईरान युद्ध के बाद भारत पहुंचने वाला सबसे पहला तेल टैंकर लाइबेरिया का शेनलॉन्ग।     यह मुंबई बंदरगाह पहुंचा, लेकिन इसने होर्मुज स्ट्रेट पार करने के लिए 'डार्क ट्रांजिट' का इस्तेमाल किया।     ईरान से जब भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई तो सबसे पहले जिस एलपीजी टैंकर को गुजरने की इजाजत मिली, वह 'शिवालिक' है।     सूत्रों के अनुसार 'शिवालिक' भी अभी अंतरराष्ट्रीय जल में है और इंडियन नेवी इसे एस्कॉर्ट करके भारत ला रही है। 

राज्यसभा चुनाव में NDA ने जीते 22 सीटें, कांग्रेस को मिली 6 सीटें, नफा-नुकसान का विश्लेषण

 नई दिल्ली बिहार, हरियाणा और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के आगे विपक्षी की सारी कोशिश बेकार साबित हुईं. बीजेपी ने ऐसी रणनीति बनाई कि बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ हाथ मिलान भी काम नहीं आ सका तो ओडिशा में कांग्रेस और बीजेडी की जोड़ी भी कोई कमाल नहीं कर सकी। तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है. बीजेपी ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें जीत सकती है. राज्यसभा के ये नतीजे सोमवार को हुए चुनाव के है, लेकिन फाइनल आंकड़ा अलग है। देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले ही निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए और उसके बाद नतीजे आए हैं. इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं। 37 राज्यसभा सीटों का फाइनल नतीजा अप्रैल-2026 में खाली होने वाली 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो गए हैं और अब फाइनल नतीजे भी आ गए. 37 राज्यसभा सीटों में 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्यों का चुन लिया गया था, जिसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी. अब सोमवार को हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए, जिसमें एनडीए 9 और विपक्ष दो सीटें जीती है. इस तरह से चुनाव का फाइनल स्कोर देखें तो एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं। राज्यसभा चुनाव में एनडीए को मिली 22 सीटों में देखें तो 13 सीटें बीजेपी ने जीती हैं जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. जेडीयू ने 2, शिंद की शिवसेना एक, अजित पवार की एनसीपी एक, पीएमके एक, AIADMK एक, यूपीपीएल एक, आरएलएसएम एक और एक सीट पर बीजेपी के समर्पित निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती है। वहीं, विपक्ष को मिली 15 राज्यशभा सीटों के पार्टी के लिहाज से देखें तो कांग्रेस को 6 सीटें टीएमसी को 4 सीटें, डीएमके को 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है। राज्यसभा में किसे नफा और किसे नुकसान राज्यसभा चुनाव पहले और नतीजे आने के बाद देखते हैं तो एनडीए को 10 सीटों का फायदा हुआ और विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, लेकिन अब बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर के 15 रह गई हैं। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े देखें तो बीजेपी के पास 9 सीटें थी, जो अब बढ़कर 13 हो गई हैं. जेडीयू ने अपनी दोनो सीटों को बरकरार रखा है.  इसके अलावा AIADMK, ने अपनी एक सीट, पीएमके ने भी अपनी एक सीट तो आरएलएसएम ने अपनी-अपनी एक-एक सीट को बचाए रखा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में थी, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास थी, जो बढ़कर अब 6 हो गई हैं. इस तरह कांग्रेस को दो सीटों का फायदा मिला है. टीएमसी ने अपनी 4 सीटें बरकार रखी हैं. डीएमके 4 सीटों से घटकर 3 पर रह गई है। आरजेडी के पास 2 सीटें थी, जो अब घटकर जीरो हो गई है. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास थी, लेकिन उन्हें एक सीट भी नहीं मिली. इसके चार सीटें अन्य दलों के पास थी, जिसमें दो सीटें बीजेडी के पास थी, जिसमें से एक सीट ही उसे मिल सकी. बीआरएस ने अपनी एकलौती सीट भी गंवा दी। राज्यवार राज्यसभा चुनाव के नतीजे क्या रहे? महाराष्ट्र से 7 राज्यसभा सीटों में बीजेपी को चार, एनसीपी और शिवसेना को एक-एक सीट मिली है. इसके अलावा एक सीट पर विपक्ष से शरद पवार चुने गए हैं.  बीजेपी को दो सीट का फायदा तो कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की एनसीपी को एक सीट का घाटा हुआ. अजित पवार और शिंदे को एक-एक सीट का लाभ मिला। तमिलनाडु की  छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव में डीएमके को एक सीट का नुकसान तो कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला है. AIADMK और पीएमके अपनी एक-एक सीट बचाने में कामयाब रहीं. पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में टीएमसी अपनी चार सीटें बचाए रखा तो बीजेपी को एक सीट का लाभ और लेफ्ट को नुकसान हुआ। बिहार की पांच राज्यसभ सीटों में जेडीयू ने अपनी दोनों सीटें बचाए रखा तो आरजेडी को 2 सीट का नुकसान. बीजेपी को दो सीट का लाभ हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट बचा लिया है.  ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में बीजेपी अपनी दोनों सीटें बचाए रख लिया तो बीजेडी को एक सीट का नुकसान हुआ है.  इसके अलावा एक सीट बीजेपी ने अपने समर्थन से निर्दलीय को जिता लिया. असम की तीन राज्यसभा सीटों में बीजेपी अपनी दोनों सीटें बचा ली है तो असम गढ़ परिषद के पास एक सीट का नुकसान हुआ। छत्तीसगढ़ में बीजेपी को एक सीट का फायदा तो कांग्रेस को एक सीट का नुकसान हुआ. तेलंगाना की दोनों सीटें कांग्रेस जीत ली है, उसे एक सीट का लाभ मिला है तो बीआरएस को एक सीट का नुकसान. हरियाणा की दो सीटों में बीजेपी और कांग्रेस एक-एक सीट जीती हैं, लेकि बीजेपी को एक सीट का नुकसान हुआ है.  हिमाचल में कांग्रेस को एक सीट का लाभ मिला तो बीजेपी को नुकसान। 

19 मार्च को राम मंदिर में राष्ट्रपति करेंगी राम यंत्र की स्थापना

एक और ऐतिहासिक उत्सव की साक्षी बनेगी रामनगरी अयोध्या 19 मार्च को राम मंदिर में राष्ट्रपति करेंगी राम यंत्र की स्थापना राम मंदिर के द्वितीय तल पर होगी राम यंत्र की स्थापना, सात हजार लोगों को किया गया है आमंत्रित लगभग सात हजार लोगों को किया गया है आमंत्रित योगी आदित्यनाथ सरकार ने तैयार की भव्य कार्यक्रम की रूपरेखा दो वर्ष पहले अयोध्या पहुंचा था राम यंत्र अयोध्या  योगी सरकार के नेतृत्व में रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव की साक्षी बनने जा रही है। राम जन्मभूमि मंदिर में 19 मार्च को राम यंत्र की विधिवत स्थापना होने जा रही है, जिसमें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी वर्ष प्रतिपदा के शुभ अवसर पर आयोजित हो रहा है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश सरकार और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस आयोजन को अत्यंत भव्य बनाने की रूपरेखा तैयार की है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने बताया कि राम यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा गया था। वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र देवताओं का निवास माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने की क्षमता रखता है। वर्तमान में इस यंत्र की राजा राम के समक्ष नियमित पूजा-अर्चना चल रही है। 19 मार्च तक यह यंत्र राम मंदिर के दूसरे तल पर पहुंच जाएगा। नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुके हैं, जिनमें दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के विद्वान आचार्य शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 7000 लोग इस ऐतिहासिक समारोह में मौजूद रहेंगे। इसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ऐसे संभ्रात लोग भी मौजूद रहेंगे, जिन्होंने निर्माण कार्यों में महती भूमिका निभाई है। सुबह 11 बजे के बाद पहुंचेगी राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सुबह करीब 11 बजे अयोध्या पहुंचेंगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनका स्वागत करेंगे। राष्ट्रपति राम मंदिर परिसर में प्रवेश कर राम यंत्र की पूजा-अर्चना करेंगी। अभिजित मुहूर्त में ठीक 11:55 बजे यंत्र की स्थापना का मुख्य अनुष्ठान संपन्न होगा। राष्ट्रपति मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस पवित्र कार्य में भाग लेंगी। पूजन के बाद राष्ट्रपति प्रसाद ग्रहण करेंगी और भोजन के पश्चात वापस रवाना होंगी।  माता अमृतानंदनमयी अपने एक हजार भक्तों के साथ ट्रेन से पहुंचेंगी अयोध्या कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लगभग 300 संत व विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। केरल की पूज्य माता अमृतानंदनमयी अपने एक हजार भक्तों के साथ ट्रेन से अयोध्या पहुंचेंगी। मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले संभ्रांत व्यक्तियों को भी विशेष निमंत्रण भेजा गया है। इनमें एलएंडटी, टाटा कंपनी के प्रतिनिधि, गुजरात के आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई का परिवार और परिसर के विकास में भूमिका निभाने वाले अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, पत्थर-लकड़ी-संगमरमर की नक्काशी करने वाले, स्तंभों पर मूर्तियां उकेरने वाले, भगवान की प्रतिमा बनाने वाले और वस्त्र तैयार करने वाली फर्मों के लगभग 1800 कार्यकर्ता भी आमंत्रित हैं।  सिर्फ आमंत्रित सिख ही ला सकेंगे कृपाण आयोजन को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। सभी अतिथियों को विशेष पास जारी किए जाएंगे, जिन पर क्यूआर कोड अंकित होगा। मंदिर परिसर में मोबाइल फोन, हथियार या कोई सुरक्षाकर्मी साथ ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल सिख धर्म के अनुयायी ही कृपाण लेकर प्रवेश कर सकेंगे। चूंकि यह चैत्र नवरात्र का पहला दिन है, इसलिए अतिथियों के लिए फलाहारी भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है। आम श्रद्धालुओं के लिए रामलला के दर्शन सामान्य रूप से जारी रहेंगे, हालांकि कुछ समय के लिए समय-सारिणी में बदलाव संभव है। मंदिर की सजावट व व्यवस्था पर दिया जा रहा विशेष ध्यान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की है। मंदिर परिसर की साफ-सफाई, सजावट और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले हजारों कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने का भी अवसर प्रदान करेगा। अयोध्या में यह आयोजन पूरे देश के लिए आस्था और गौरव का क्षण साबित होगा।

पर्यावरण संरक्षण, जैव संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने सरकार प्रतिबद्ध: मंत्री कश्यप

मंत्री  केदार कश्यप के विभागों के लिए 3 हजार 622 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित पर्यावरण संरक्षण, जैव संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने सरकार प्रतिबद्ध: मंत्री  कश्यप वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को ई-कुबेर योजना हेतु मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार  वन आवरण के मामले में राज्य देश में तीसरे स्थान पर वन्यप्राणी संरक्षण एवं संवर्धन तथा उनके रहवास विकास हेतु 320 करोड़ रूपए का प्रावधान  ग्रामीण बस योजना, ई-मॉनिटरिंग और किसानों को ब्याज मुक्त ऋण  80 मार्गों पर लगभग 560 गांवों को पहली बार सुगम आवागमन की सुविधा  रायपुर  वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता, परिवहन तथा संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप के विभागों से संबंधित 3 हजार 622 करोड़ 86 लाख 35 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लिए 2 हजार 867 करोड़ 30 लाख रूपए, सहकारिता विभाग के लिए 389 करोड़ 40 लाख 85 हजार रूपए, परिवहन विभाग के लिए 243 करोड़ 50 लाख 50 हजार रूपए और राज्य विधानमंडल के लिए 122 करोड़ 65 लाख रूपए शामिल हैं।  मंत्री  कश्यप ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि हमारी सरकार पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा वनवासियों की आजीविका को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए आगामी वर्षा ऋतु में लगभग 3.50 करोड़ पौधे रोपने और वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही बिगड़े बांस वनों के पुनरोद्धार के लिए 80 करोड़ रुपये और बिगड़े वनों के सुधार के लिए 310 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 की परिकल्पना की है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को पूर्ण विकसित एवं समृद्ध राज्य बनाना है।  इसी तरह नदी तटों पर भू-क्षरण रोकने के लिए 7 करोड़ रुपये तथा भू-जल संरक्षण योजना के लिए 120 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इसके अलावा राष्ट्रीय और राज्य मार्गों के किनारे वृक्षारोपण के लिए भी 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सदन में कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए 320.58 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि बाघ संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ योजना के तहत 23.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंत्री  कश्यप ने बताया कि दूरस्थ अंचलों में निवासरत वनवासियों को बारहमासी आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वन मार्गों में रपटा पुल-पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। इस योजनांतर्गत इस वर्ष 5 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही सड़कें तथा मकान निर्माण के लिए 11 करोड़ रूपए का बजट प्रास्तावित है। इसी तरह काष्ठ एवं बांस कूपों के विदोहन के उपरांत प्राकृतिक पुनरोत्पादन को बढ़ावा देने इस योजना के लिए 300 करोड़ रूपए का बजट रखा गया है। वहीं ए.एन.आर. योजनांतर्गत भी 300 करोड़ रूपए का प्रावधान है। इसी तरह वनवासियों को उनके मालिकाना हक की भूमि में ईमारती  लकड़ी के विदोहन के लिए 183 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री  कश्यप ने बताया कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को ई-कुबेर योजना हेतु मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसी तरह कांगेर वैली नेशनल पार्क को यूनेस्को से विश्व विरासत स्थल के रूप में चिन्हांकन हेतु चयनित किया गया है। वहीं वन विभाग में मानव संसाधन में वृद्धि करने के लिए वनरक्षकों 1484 एवं सहायक ग्रेड-3 के 50 पदों पर भर्ती की जा रही है।   मंत्री  कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में चरणपादुका वितरण योजना को फिर से शुरू किया गया है। इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 50 करोड़ रुपये रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 44.25 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है और भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार वन आवरण के मामले में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।  मंत्री  कश्यप ने बताया कि राज्य में जैव विविधता संरक्षण और वेटलैंड विकास को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। बिलासपुर जिले के कोपरा जलाशय को रामसर सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य का पहला एवं भारत वर्ष का 96वाँ रामसर स्थल अधिसूचित किया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से राज्य की जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और जल जीवन के प्रति हमारे सरकार की प्रतिबद्धता मजबूत हुई है। इसी प्रकार छत्तीसगढ अंजोर विजन-2047 के ज्ञमल डपसमेजवदमे ठल 2030 के अनुरूप वर्ष 2030 तक 20 वेटलैण्ड्स को रामसर स्थल के रूप में नामित करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जाएगा। इसी परिप्रेक्ष्य में बेमेतरा जिले के गिधवा-परसदा वेटलैण्ड कॉम्पलेक्स को रामसर स्थल अधिसूचित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। परिवहन-सहकारिता-संसदीय कार्य   मंत्री  कश्यप ने सदन में परिवहन, सहाकारिता और संसदीय कार्य विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा में कहा कि ग्रामीण परिवहन व्यवस्था, सहकारिता क्षेत्र और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के लिए हमारी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसके तहत परिवहन विभाग के लिए 243.50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। सरकार ने दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए “मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना” को विस्तार देने की घोषणा की है। योजना के तहत बस संचालकों को तीन वर्षों तक मासिक कर में पूर्ण छूट और अधिकतम 26 रुपये प्रति किलोमीटर की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वर्तमान में वनांचल के 80 मार्गों पर 81 बसें संचालित हो रही हैं, जिससे लगभग 560 गांवों को पहली बार सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है। परिवहन मंत्री  कश्यप ने बताया कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत एएनपीआर और रडार कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए आठ नए जिलों में ई-ट्रैक केंद्र स्थापित करने हेतु 15 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने … Read more

फरवरी में भारत का व्यापारिक घाटा कम होकर 27.1 अरब डॉलर हुआ

नई दिल्ली  भारत का वस्तु व्यापारिक घाटा फरवरी में कम होकर 27.1 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पिछले महीने 34.68 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से  दी गई। बीते महीने देश का वस्तु निर्यात बढ़कर 36.61 अरब डॉलर हो गया है, जो कि जनवरी में 36.56 अरब डॉलर था। वहीं, आयात कम होकर 63.71 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पहले 71.24 अरब डॉलर था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का वस्तु निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में 402.93 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 395.66 अरब डॉलर था। यह समीक्षा अवधि में सालाना आधार पर 1.84 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था और जिसके चलते मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हो गया है। इसी जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात होता है।  जलडमरूमध्य के बंद होने से मध्य पूर्व के देशों को चावल जैसी वस्तुओं के भारत के निर्यात पर भी असर पड़ा है। पहले, भारत के ऊर्जा आयात का लगभग 50 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था, लेकिन अब इसमें विविधता आ गई है और इसका एक बड़ा हिस्सा रूस से आ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के रणनीतिक तेल भंडार और 40 आपूर्तिकर्ता देशों से ऊर्जा आयात में विविधता लाने से वैश्विक ऊर्जा संकटों का सामना करने की देश की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। इस लचीलेपन के कारण ईरान युद्ध से उत्पन्न व्यवधान के बावजूद भारत में कोई ऊर्जा संकट नहीं आया है, क्योंकि सरकार आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन के माध्यम से स्थिति को संभाल रही है। जहाज और बंदरगाह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, भारत ईरान के साथ भी सीधे संपर्क में है ताकि उसके व्यापारिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल सके। भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से लगभग 80,800 मीट्रिक टन मुरबान कच्चे तेल के साथ सुरक्षित रूप भारत के लिए रवाना हुआ। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। बयान में आगे कहा गया कि इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, जिनमें लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है, शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और वर्तमान में भारत की ओर रवाना हैं। इनके सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने वाले हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे दो महीने में होगा तैयार, मेरठ से प्रयागराज का सफर आसान, बस यह काम बाकी है

प्रयागराज  प्रयागराज-मेरठ के बीच 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। रविवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार ने मेरठ में निरीक्षण के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक्सप्रेसवे को शीघ्र ही जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  मेरठ पहुंचे सीईओ ने मंडलायुक्त भानुचंद्र गोस्वामी और डीएम डॉ. वीके सिंह के साथ गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण की प्रगति के साथ ही औद्योगिक गलियारा विस्तार और टोल प्लाजा की तकनीक के बारे में जानकारी ली।  साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा उन्होंने खड़खड़ी टोल प्लाजा पर अशोक के पौधे भी लगाए। सीईओ ने बताया कि तीसरे चरण में केवल एक्सप्रेसवे की साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा है। यह काम भी एक माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। मेरठ जिले में 22 किमी एक्सप्रेसवे अक्तूबर 2025 में ही पूरा हो गया था।    खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार बिजौली के निकट खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार है और इसका परीक्षण भी हो चुका है। छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे का विस्तार कर आठ लेन का किया जा सकेगा। मेरठ से बदायूं तक के प्रथम सेक्टर में 130 किलोमीटर की लंबाई में 129 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। एक्सप्रेसवे पर चार जगह लड़ाकू विमानों के लिए हवाई पट्टियां गंगा एक्सप्रेसवे पर केवल वाहन ही नहीं दौड़ेंगे, बल्कि आपातकाल की स्थिति में लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे पर चार स्थानों पर लड़ाकू विमानों के उतरने के लिए हवाई पट्टियां बनाई जा रही हैं। इनमें से शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किलोमीटर लंबी पट्टी तैयार कर दी गई है।    एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार की सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाएगी। तीसरे चरण के अधूरे काम को तेजी से पूरा किया जा रहा है। सीईओ ने यूपीडा की परियोजना क्रियान्वयन इकाई के परियोजना निदेशक राकेश मोघा और गंगा एक्सप्रेसवे की संचालन एजेंसी आईआरबी के मुख्य प्रबंधक अनूप सिंह से एक्सप्रेसवे की प्रगति की जानकारी जानी। उन्होंने टोल पर बिना बैरियर के वाहनों के प्रवेश को लेकर अपनाई जा रही तकनीक को भी जाना। टोल पर बिना रुके गुजरेंगे वाहन गंगा एक्सप्रेसवे पर बिजौली के निकट खड़खड़ी में बनाए गए टोल प्लाजा पर वाहनों का प्रवेश बिना बैरियर के ही होगी। यह एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके तहत वाहनों को टोल प्रवेश के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। यह जानकारी आईआरबी के मुख्य महाप्रबंधक अनूप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में निकास के दौरान भी इसी प्रकार टोल कट जाएगा। इस नई व्यवस्था से गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी लाइन नहीं लगेगी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार ने निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी हापुड़ और अन्य अधिकारियों के काफिले के साथ गंगा एक्सप्रेसवे का बदायूं तक निरीक्षण करने के लिए निकल गए। औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा मनोज कुमार ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे शीघ्र ही औद्योगिक गलियारा आकार लेता दिखेगा। इसके लिए काफी भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। विदेशी कंपनियां भी इस औद्योगिक गलियारे में अपनी यूनिट स्थापित करने के लिए आ रही हैं। आने वाले समय में यूपी उद्योग प्रदेश बन जाएगा। पूरा देश गंगा एक्सप्रेसवे किनारे बनने वाले औद्योगिक गलियारे की तरफ देखेगा। यह गलियारा प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा बयान- जल है तो कल है, बूंद-बूंद बचाने के लिए किए जाएंगे हर संभव प्रयास

तीसरा जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश प्रदेश में 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान 100 दिवसीय अभियान में जल संरक्षण के होंगे कार्य नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।  

योगी सरकार का बड़ा कदम, खाद्य लाइसेंस नियमों में बदलाव, 1 अप्रैल से कारोबारियों के लिए नई व्यवस्था लागू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को बड़ी राहत देते हुए योगी सरकार ने खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत अब हर साल खाद्य लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य नहीं होगा। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होगी। सरकार ने यह बदलाव खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार का अनुज्ञापन और पंजीकरण) संशोधन विनियम, 2026 के तहत किया है। गजट में प्रकाशन के साथ ही नियम प्रभावी हो चुके हैं और इन्हें एक अप्रैल से लागू किया जाएगा। लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं नए नियमों के अनुसार नगर निगम या स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत ठेले-खोमचे और फेरीवाले अब स्वतः ही भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) में पंजीकृत माने जाएंगे। इससे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा इस व्यवस्था के दायरे में छोटे खुदरा विक्रेता, स्ट्रीट फूड विक्रेता, अस्थायी स्टॉल संचालक, फूड ट्रक संचालक और कुटीर स्तर के खाद्य उद्योग भी शामिल होंगे। जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर अब पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा। हालांकि सभी खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यापारी वार्षिक शुल्क या फूड सेफ्टी अनुपालन से जुड़ा रिटर्न जमा नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस या पंजीकरण स्वतः निलंबित माना जाएगा। निरीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव किया सरकार ने निरीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। अब खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण जोखिम आधारित प्रणाली के तहत किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर थर्ड पार्टी से फूड सेफ्टी ऑडिट भी कराया जा सकेगा। टर्नओवर सीमा में भी बढ़ोतरी व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल के मुताबिक पहले व्यापारी एक से पांच वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस लेते थे। समय पर नवीनीकरण न कराने पर लाइसेंस निरस्त हो जाता था और उन्हें दोबारा जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा नियमों में टर्नओवर की सीमा भी बढ़ा दी गई है। पहले 12 लाख रुपये सालाना टर्नओवर तक के कारोबारियों को पंजीकरण मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई वहीं पहले पांच करोड़ रुपये तक के कारोबारियों को राज्य स्तर से लाइसेंस मिलता था और उससे अधिक टर्नओवर पर केंद्र से लाइसेंस लेना पड़ता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है। हालांकि जिन कारोबारियों के लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता 31 मार्च तक है, उन्हें फिलहाल नवीनीकरण कराना होगा। इसके बाद नए नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे।  

फास्टैग वार्षिक पास की कीमत एक अप्रैल से बढ़ेगी, छत्तीसगढ़ के हाईवे यात्रियों को होगा नुकसान

रायपुर  राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों को एक अप्रैल से फास्टैग वार्षिक पास के लिए अधिक भुगतान करना होगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए फास्टैग वार्षिक पास शुल्क 3,000 रुपये से बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दिया है। यह नई दर एक अप्रैल से लागू होगी। इसका असर छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों पर भी पड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार शुल्क में यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क निर्धारण एवं संग्रहण नियम 2008 के प्रविधानों के तहत की गई है। लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर यात्रा की सुविधा फास्टैग वार्षिक पास गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है और इसके जरिये राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे के लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर यात्रा की सुविधा मिलती है। छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़ और धमतरी से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई टोल प्लाजा संचालित हैं। इन मार्गों पर नियमित आवाजाही करने वाले निजी वाहन चालक इस वार्षिक पास का उपयोग कर रहे हैं। पास लेने के बाद बार-बार टोल भुगतान की जरूरत नहीं होती, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है। 31 मार्च तक पुराने दाम पर मौका जो वाहन चालक नियमित रूप से हाईवे पर सफर करते हैं, वे 31 मार्च तक 3,000 रुपये में वार्षिक पास खरीद या रिचार्ज करा सकते हैं। एक अप्रैल से नई दर 3,075 रुपये लागू हो जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मुताबिक यह वार्षिक पास एक वर्ष की वैधता या 200 टोल क्रॉसिंग तक मान्य रहता है। पास खरीदने के बाद यह दो घंटे के भीतर वाहन के मौजूदा फास्टैग से लिंक होकर सक्रिय हो जाता है। इसके लिए एकमुश्त शुल्क का भुगतान मोबाइल एप या वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता है। किन वाहनों को मिलेगी सुविधा फास्टैग वार्षिक पास केवल गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए मान्य है। निजी कार और अन्य निजी उपयोग के वाहन इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। फास्टैग वार्षिक पास योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2025 को की गई थी। देशभर में इसे अच्छा प्रतिसाद मिला है और अब तक 56 लाख से अधिक निजी वाहन मालिक इस सुविधा से जुड़ चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था राष्ट्रीय राजमार्गों पर कैशलेस और सुगम यात्रा को बढ़ावा देने में मदद कर रही है। ऐसे होगा पास सक्रिय एकमुश्त शुल्क का भुगतान करने के बाद वार्षिक पास दो घंटे के भीतर वाहन के मौजूदा फास्टैग से लिंक होकर सक्रिय हो जाता है। इसके लिए राजमार्ग यात्रा मोबाइल एप या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है।