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1 अप्रैल से MP में पेंशन भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव, जिला पेंशन कार्यालय बंद, SBI को मिलेगा पूरा जिम्मा, जानें प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार राज्य के लगभग साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पेंशन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करने वाली है। नई व्यवस्था के तहत, अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सीधे अपने उसी खाते में पेंशन आएगी।  राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के मकसद से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र 'एग्रीगेटर बैंक' के रूप में नियुक्त किया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगा। बता दें कि एमपी में पेंशन की मौजूदा व्यवस्था में कई समस्याएं हैं इसकी वजह से पेंशन भुगतान की प्रक्रिया में अक्सर देरी होती है। साथ ही तकनीकी बाधाओं की वजह से भी पेंशन मिलने में दिक्कत होती है। सरकार ने जिला पेंशन कार्यालयों को भी बंद करने का फैसला किया है। मौजूदा व्यवस्था की 4 प्रमुख समस्याएं मौजूदा पेंशन प्रणाली कई जटिलताएं और चुनौतियां हैं। इसकी वजह से पेंशनर्स को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमुख रूप से 4 समस्याएं हैं…     बैंक बदलने की मजबूरी: कई मामलों में, पेंशनभोगियों को पेंशन लेने के लिए उन्हीं बैंकों में अकाउंट बनाए रखना पड़ता था, जहां उनका सैलरी अकाउंट था।     तकनीकी असमानता: महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि या वेतनमान में संशोधन जैसी स्थितियों में पेंशन राशि को अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है। यह कार्य सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से किया जाता है, और यह सुविधा केवल 4 प्रमुख बैंकों में ही उपलब्ध है। जिन बैंकों में यह सिस्टम नहीं है, वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लगता है, जिससे पेंशनर्स को एरियर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।     PPO हस्तांतरण में देरी: सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का पेंशन अदायगी आदेश (PPO) संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और समन्वय की कमी के कारण अक्सर सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन शुरू होने में देरी होती है।     वेतनमान फिक्सेशन की त्रुटियां: कर्मचारियों के वेतनमान फिक्सेशन (Pay Fixation) में फिट-मेंट फैक्टर, मूल वेतन या महंगाई भत्ते की गणना में हुई मामूली गलती भी पेंशन प्रक्रिया को रोक देती है, जिसे सुधारने में महीनों लग जाते है। पेंशनर्स का आरोप- कर्मचारी रिश्वत लेते हैं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी इन समस्याओं के अलावा एक और मुद्दे पर ध्यान दिलाते हैं। उनके मुताबिक अभी पेंशन प्रकरणों का काम जिला और संभागीय पेंशन दफ्तरों के पास है। जैसे ही कोई कर्मचारी रिटायर होता है और उसका प्रकरण जब पेंशन कार्यालय में जाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी एक ही प्रकार की कई आपत्तियां लगाते हैं। इन आपत्तियों को वो बार बार लगाकर कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को भेजते हैं। जोशी के मुताबिक वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि रिटायर्ड कर्मचारी उनकी सेवा करें( रिश्वत) और इसके बदले वो उनका पीपीओ जारी करें। मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव होगा     पूरी प्रोसेस को सेंट्रलाइज्ड किया जा रहा है। राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हस्तांतरित करेगी, जिसमें राज्य सरकार का मुख्य खाता है।     SBI एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए, प्रदेश के सभी पेंशनभोगियों के बैंक खातों में पेंशन की राशि वितरित करेगा, चाहे उनका खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो।     अब तक जो क्लेम और कमीशन 11 अलग-अलग बैंकों को मिलता था, वह अब केवल SBI को मिलेगा, क्योंकि पेंशन वितरण का पूरा प्रबंधन और क्लेम भेजने की जिम्मेदारी सिर्फ SBI की होगी। प्रशासनिक स्तर पर बदलाव: बंद होंगे जिला पेंशन कार्यालय इस सुधार प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में स्थित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा। हालांकि, संभागीय मुख्यालयों में स्थित कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया अब भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। इस प्रणाली की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता और सीक्रेसी है। अब किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन का निर्धारण कौन-सा अधिकारी कर रहा है। उदाहरण के लिए, भिंड में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की पेंशन फाइल का निर्धारण जबलपुर में बैठा कोई भी डिप्टी डायरेक्टर कर सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव पर पूरी तरह से रोक लगेगी। SBI ने शुरू की तैयारी, 2 लाख PPO होंगे ट्रांसफर इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए SBI ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में लगभग 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं, और इस साल 22 हजार और कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। SBI ने अन्य 10 बैंकों से 2 लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़े पैमाने के कार्य को पूरा होने में 3 से 4 महीने लगने का अनुमान है।

सुनील गावस्कर का सनराइजर्स पर हमला: पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पैसा देना भारतीयों की हत्या में योगदान जैसा

मुंबई  इंग्लैंड की क्रिकेट लीग 'द हंड्रेड' में भारतीय कंपनी सन ग्रुप के स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी के पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने का मामला शांत नहीं हुआ है। सनराइजर्स लीड्स ने हाल में हुई नीलामी में अबरार अहमद को खरीदा था। इस पर भारत में सोशल मीडिया पर काफी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। अब महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने कहा है कि तीखी प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक हैं। उन्होंने सनराइजर्स लीड्स के कदम की बेहद तल्ख शब्दों में आलोचना की है। गावस्कर ने कहा है कि पाकिस्तानी क्रिकेटरों को दी गई फीस भारतीयों की मौत में योगदान देना है। काव्या मारन सनराइजर्स लीड्स की सह-मालकिन हैं। द हंड्रेड की नीलामी में उनकी फ्रेंचाइजी ने पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को 1 लाख 90 हजार पाउंड में खरीदा जो भारतीय रुपये में करीब 2.3 करोड़ है। इतना ही नहीं, सनराइजर्स के कोच डेनियल वेटोरी ने नीलामी के बाद ये भी कहा कि पाकिस्तान के एक और स्पिनर उस्मान तारिक भी फ्रेंचाइजी के रेडार पर थे। सुनील गावस्कर ने मिड-डे के लिए अपने कॉलम में लिखा है, ‘द हंड्रेड में एक भारतीय ओनर की फ्रेंचाइजी द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने पर मचा हंगामा बिल्कुल भी हैरान नहीं करता। जब से नवंबर 2008 में मुंबई हमला हुआ, भारतीय फ्रेंचाइजी ओनर्स ने आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया। देरी से ही सही, यह असहास हुआ कि किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को दी जाने वाली फीस, अप्रत्यक्ष तौर पर भारतीय सैनिकों और आम नागरिकों की मौत में योगदान देना है। पाकिस्तानी खिलाड़ी खुद को मिले पैसे पर अपनी सरकार को इनकम टैक्स देते हैं। उससे हथियार और बारूद खरीदे जाते हैं। इसी वजह से भारतीय संस्थाओं ने पाकिस्तानी कलाकारों और स्पोर्ट्सपर्सन को बुलाना बंद कर दिया।’ गावस्कर ने आगे लिखा है, ‘कोई भारतीय संस्था या उसकी कोई ओवरसीज सब्सिडियरी जो पेमेंट कर रही है, अगर मालिक भारतीय है तब वह भारतीयों के हताहत होने में योगदान कर रहा/रही है। यह बहुत ही सामान्य बात है। द हंड्रेड की टीम के कोच डेनियल वेटोरी न्यूजीलैंड से हैं। वह शायद इस सामान्य सी बात को नहीं समझ पाए होंगे, इसलिए वह अपनी टीम में कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों को चाहते थे। लेकिन ओनर को हालात की समझ होनी चाहिए और उन्हें इस खरीद को हतोत्साहित करना चाहिए था। क्या एक ऐसे फॉर्मेट के टूर्नामेंट को जीतना जिसे कोई दूसरा देश नहीं खेलता, भारतीयों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।’ आईपीएल की 2008 में जब शुरुआत हुई तब पाकिस्तानी खिलाड़ी भी उसमें खेले थे। उसी साल नवंबर को मुंबई में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भीषण हमला किया था। मुंबई आतंकी हमले के बाद आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने पर रोक लग गई। उसके 11 साल बाद 2019 में पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले में आत्मघाती हमला हुआ था। अभी पिछले साल पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर सैलानियों की बर्बर हत्या की थी।

एमजीएम इंदौर में बनेगा अत्याधुनिक अस्पताल भवन, क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं होंगी मजबूत: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

 अधोसंरचना विकास कार्यों की वृहद समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में एमजीएम मेडिकल कॉलेज इन्दौर में प्रस्तावित नवीन आधुनिक चिकित्सालय भवन सहित विभिन्न विकास कार्यों पर चर्चा कर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी दिशा में चिकित्सा अधोसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इन्दौर में प्रस्तावित नवीन आधुनिक चिकित्सालय भवन के निर्माण से बिस्तरों की संख्या में वृद्धि होगी, साथ ही विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों, अत्याधुनिक आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, आधुनिक रेडियोलॉजी एवं प्रयोगशाला सुविधाओं के माध्यम से मरीजों को बेहतर एवं त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रस्तावित अत्याधुनिक आकस्मिक चिकित्सा विभाग इन्दौर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा सिद्ध होगा। साथ ही चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, अध्ययन क्षेत्र तथा प्रशिक्षण विधाओं का भी विकास किया जा रहा है। परिसर में आंतरिक मार्गों के चौड़ीकरण, समुचित पार्किंग व्यवस्था, आधुनिक लॉन्ड्री, सीएसएसडी, सेंट्रल लैब, ब्लड बैंक तथा सीवरेज और ईफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण एवं अधोसंरचना विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, ताकि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकतम लाभ मिल सके। बैठक में आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस, एमडी बीडीसी सिबी चक्रवर्ती सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि नवीन चिकित्सालय भवन को भवन विकास नियमन एवं मानदण्डों के अनुसार उच्च-भवन के रूप में सभी आवश्यक बिल्डिंग सर्विसेस के साथ विकसित किया जाएगा। इसमें कुल लगभग 1450 बिस्तरों की व्यवस्था प्रस्तावित है, जिसमें मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, मातृत्व एवं शिशु, नेत्र, त्वचा, ईएनटी तथा इमरजेंसी मेडिसिन जैसे विभिन्न विभाग शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त 200 बिस्तरीय आईसीयू यूनिट, 16 मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, 2 इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर, आधुनिक रेडियोलॉजी विभाग, सेंट्रल लैब एवं ब्लड बैंक जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित भवन, वर्तमान सुपर स्पेशियलिटी भवन एवं निर्माणाधीन कैंसर चिकित्सालय के मध्य निर्मित किया जाएगा, जिससे सभी चिकित्सा सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। साथ ही 210 बिस्तरीय अत्याधुनिक आकस्मिक चिकित्सा विभाग भी स्थापित किया जाएगा, जो इन्दौर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के रोगियों के लिए और अधिक सुविधाजनक होगा। परियोजना अंतर्गत नर्सिंग महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए 550 बिस्तरीय नवीन छात्रावास, 250 सीट क्षमता का मिनी ऑडिटोरियम, विभिन्न संकायों के अध्ययन क्षेत्र, प्रयोगशालाएँ तथा प्राध्यापकों के कक्ष भी विकसित किए जाएंगे। परिसर में आंतरिक मार्गों का चौड़ीकरण, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, आधुनिक लॉन्ड्री, सीएसएसडी, स्टोर तथा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं ईफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।  

विधानसभावार कृषि सम्मेलन के लिए कृषि विभाग देगा 5 लाख रुपए

प्रत्येक विधानसभा में आयोजित होंगे कृषि सम्मेलन डेढ़ साल में प्रदेश का दूध संकलन 25 प्रतिशत बढ़कर हुआ 12.50 लाख लीटर प्रतिदिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ कृषि अभिमुखीकरण कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में विभिन्न विभाग मिलकर कृषि विकास और कृषक कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी उपायों पर क्रियान्वयन तेज किया जाएगा। कृषक कल्याण वर्ष का लाभ किसानों के परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश, देश का इकलौता राज्य है, जो 5 रुपए में किसानों को बिजली का कनेक्शन उपलब्ध करवा रहा है। ये किसानों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में कृषक कल्याण वर्ष में सक्रिय सहभागिता जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किए गए कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री द्वय श्री जगदीश देवड़ा और श्री राजेन्द्र शुक्ल सहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पवार सहित मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि, एफपीओ के पदाधिकारी एवं प्रबुद्धजन शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मध्यप्रदेश के पुराने विधानसभा भवन का पवित्र स्थान है। इस स्थान पर कृषक कल्याण योजनाओं पर केन्द्रित कार्यशाला राज्य सरकार के कृषि क्षेत्र को दी जा रही प्राथमिकता का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।उन्हें साकार करने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले डेढ़ साल में प्रदेश का दूध कलेक्शन 25 प्रतिशत बढ़ा है। अब प्रदेश में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध कलेक्शन किया जा रहा है। दूध का मूल्य भी 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र में नरवई प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीन उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण के लिए माता यशोदा योजना शुरू करने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। टूरिज्म डिपार्टमेंट ने होम स्टे की योजना शुरू की है। होम स्टे संचालकों के लिए 20 लाख रुपये तक की आय जीएसटी से मुक्त रखी गई है। लघु-कुटीर उद्योग के क्षेत्र में शहद उत्पादन से किसान लाभ कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यशाला में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल हुए हैं। राज्य की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इन 16 विभागों के अंतर्गत आ जाता है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर करने के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्रों की दुकानें खुलेंगी, जिनसे लघु कृषकों को खेती के लिए किराये पर यंत्र उपलब्ध करवाए जाएंगे। विधायक अपने क्षेत्र में 4 से 5 कृषि सम्मेलन करें, इसके लिए कृषि विभाग ने प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपए आवंटित करने का निर्णय किया है। इन प्रयासों से कृषि कल्याण के लिए सकारात्मक वातावरण बनेगा। किसान सौर बिजली उत्पादन की सभी योजनाओं का लाभ उठाएं। लघु-कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए भी कार्य करें। प्रदेश प्रभारी श्री महेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश अब हजार और लाख में नहीं, मिलियन, बिलियन और ट्रिलियन में बात करने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से कृषि में चौथे स्थान पर है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश कई खाद्यान्नों के उत्पादन में देश में, पहले और दूसरे स्थान पर हैं। मध्यप्रदेश चौथे स्थान पर भी रहते हुए देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के किसानों को सस्ती दरों पर बिजली और सिंचाई के लिए पम्प उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 54 लाख हैक्टेयर है। राज्य सरकार ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के सपने को साकार करते हुए सिंचाई का रकबा आगामी वर्षों में 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में दूध एवं डेयरी क्षेत्र में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश की कृषि विकास दर तेजी के साथ बढ़ी है। इसी प्रकार प्रदेश का बजट वर्ष 2003-24 में 23 हजार था, जो अब 4 लाख 38 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल है तो कल है का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास

म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।  

छत्तीसगढ़ का सामूहिक विवाह बना विश्व रिकॉर्ड, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

6,412 जोड़ों के साथ सामाजिक समरसता के साथ ऐतिहासिक मिसाल रायपुर, छत्तीसगढ़ ने सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और संवेदनशील शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह समारोह को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। एक ही दिन में हजारों जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ ने सामाजिक एकता और अंत्योदय की भावना का ऐसा प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी देशभर में सराहना हो रही है। 10 फरवरी को राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सान्निध्य में पूरे प्रदेश से कुल 6,412 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। इनमें से 1,316 जोड़ों का विवाह रायपुर में प्रत्यक्ष रूप से संपन्न हुआ, जबकि शेष जोड़े प्रदेश के विभिन्न जिलों से वर्चुअल माध्यम से इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़े। सभी विवाह धार्मिक परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुरूप संपन्न कराए गए, जिससे यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामाजिक समरसता और सामूहिक खुशियों का विराट उत्सव बन गया। इस ऐतिहासिक आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और गौरव का विषय है। इस समारोह की विशेषता यह भी रही कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़ों ने अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न किए। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, आपसी सद्भाव और सर्वधर्म समभाव की भावना का जीवंत प्रतीक बन गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सम्मान, विश्वास और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन गई है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटियों का विवाह बड़ी चिंता का विषय होता था, लेकिन इस योजना ने उस चिंता को दूर कर हजारों परिवारों के जीवन में नई खुशियां और विश्वास का संचार किया है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में की गई थी और वर्तमान सरकार इसे और अधिक व्यापक स्वरूप देते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और सामाजिक समरसता को और मजबूत बनाया जाए। यह ऐतिहासिक आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब शासन की योजनाएं संवेदनशीलता, जनभागीदारी और सामाजिक सहयोग के साथ लागू होती हैं, तब वे केवल सरकारी योजनाएं नहीं रह जातीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बन जाती हैं। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करती है।

ट्रंप को चार दोस्तों ने दिया धोखा, होर्मुज में अकेले पड़े! तेल संकट में डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति हुई विफल

वाशिंगटन दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है. ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी में दुनिया की महाशक्तियां और उनके पुराने सहयोगी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे, लेकिन हकीकत इसके उलट निकली।   दरअसल, ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से अपील की थी कि वे भी इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज तैनात करें।   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है और यहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल और गैस की आपूर्ति होती है. ट्रंप का तर्क था कि चूंकि इन देशों का तेल और व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इनकी ही होनी चाहिए. ट्रंप ने ट्वीट किया था, "दुनिया के बाकी देश अपने जहाजों की सुरक्षा खुद क्यों नहीं करते? हम सालों से उनकी रक्षा कर रहे हैं।  जापान का दो टूक जवाब सबसे बड़ा झटका टोक्यो से लगा. जापान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज में किसी भी तरह के समुद्री सुरक्षा अभियान (Maritime Security Operations) पर विचार नहीं कर रही है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने भी खींचे हाथ ऑस्ट्रेलिया, जिसे प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का सबसे वफादार साथी माना जाता है, उसने भी ट्रंप की मांग को ठुकरा दिया है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने स्पष्ट किया कि वे होर्मुज में अपना युद्धपोत नहीं भेजेंगे. वहीं, दक्षिण कोरिया ने थोड़ी कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया लेकिन मंशा साफ कर दी. सियोल ने कहा कि वे इस अनुरोध की 'बारीकी से समीक्षा' करेंगे, लेकिन फिलहाल युद्धपोत भेजने की कोई योजना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेत है. जिस 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां सुरक्षा के नाम पर ट्रंप का साथ देने के लिए कोई भी अपना युद्धपोत जोखिम में डालने को तैयार नहीं है। तेल और गैस संकट पर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने पुरी दुनिया के लिए अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का फैसला किया था। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे खुलवाने के लिए दूसरे देशों से साथ आने की अपील कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने 7 देशों का नाम लिया और कहा कि अमेरिका तो यहां से सिर्फ 1 फीसदी तेल ही लेता है। उन्होंने कहा कि ये रास्ता चीन समेत कई देशों के लिए जरूरी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन समेत अन्य देश जो इस समस्या से प्रभावित हैं वो इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजेंगे और रास्ता खुलवाने में अहम भूमिका निभाएंगे। अमेरिका के साथ मिलकर कई देश युद्धपोत भेजेंगे तो होर्मुज खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता का 100 फीसदी नष्ट कर दिया है, लेकिन उनके लिए एक- दो ड्रोन भेजना, बारूदी सुरंग फोड़ना या जलमार्ग के आसपास कहीं भी कम दूरी की मिसाइल दागना आसान है, चाहे वे कितनी ही बुरी तरह हार चुके हों। क्या है प्लान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत तट पर बमबारी करते रहेंगे और ईरानी पोत को निशाने पर लेते रहेंगे। अमेरिकी नौसेना ईरानी पोतों को पानी में डुबाने का सिलसिला जारी रखेगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी तरह से हम जल्द ही होर्मुज को खुलवा लेंगे और ये रास्ता सुरक्षित रास्ता और स्वतंत्र होगा। मालूम हो अमेरिका लंबे समय से इस रास्ते को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल अवरोध बिंदु बताता रहा है। पल्ला झड़ाया और मदद का वादा भी किया ट्रंप ने कहा, 'मैं इन देशों से मांग कर रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।' फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास तेल तक अपनी पहुंच है। ट्रंप ने कहा कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बहुत कम तेल मिलता है। हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या चीन इस गठबंधन में शामिल होगा। अब तक कोई नहीं हुआ तैयार तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद उनकी अपील पर अभी तक किसी देश ने ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ऑस्ट्रेलिया ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलवाने के लिए अपने पोत भेजने से इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की कैबिनेट की सदस्य कैथरीन किंग ने एक इंटरव्यू में कहा, 'हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपना जहाज नहीं भेजेंगे। हम जानते हैं कि वह इलाका कितना अहम है, लेकिन न तो हमसे ऐसा करने के लिए कहा गया है और न ही हम इसमें अपना योगदान दे रहे हैं। जापानी संसद में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा कि जापान की युद्धपोत तैनात करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा, 'जहाज भेजने को लेकर हमने अब तक कोई फैसले नहीं लिए हैं। हम अभी पता लगा रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानून के दायरे में रहकर क्या किया जा सकता है।' कुछ देश अभी विचार कर रहे हैं दक्षिण कोरिया ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन के साथ चर्चाएं जारी हैं। साथ ही कहा गया है कि कोई भी कदम गहन समीक्षा के बाद ही उठाया जाएगा। ट्रंप टाल सकते हैं चीन यात्रा रविवार को ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि वह उम्मीद कर रहे हैं की राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन मदद के लिए तैयार हो सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सहयोग नहीं किया गया, तो वह अपनी यात्रा टाल सकते हैं। ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि चीन को भी मदद करनी चाहिए, क्योंकि चीन को स्ट्रेट्स से 90 फीसदी तेल मिलता है।'    

मुख्यमंत्री ने कहा- इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बनाएंगे, लॉरेंस को VIP सुविधाएं दी गईं; BJP सरकार आई तो धर्म की लड़ाई होगी

चंडीगढ़ पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने चुनाव के समय जनता से किए अधिकतर वादों को पूरा किया है और कई ऐसे काम भी किए गए हैं जिनकी घोषणा पहले नहीं की गई थी। सबसे पहले मुख्यमंत्री ने सीएम मान के साथ 4 साल बुकलेट को लांच किया। इसके बाद उन्होंने अपने 4 साल में पूरे किए वादों और आने वाले उनके प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 117 में से 92 सीटों पर जीत मिली थी और 16 मार्च 2022 को उन्होंने खटकड़ कलां में शपथ लेकर सरकार की शुरुआत की थी। चार वर्षों में बिजली, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और खेल के क्षेत्र में बड़े फैसले लिए गए हैं। CM ने कहा कि अमृतसर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बना रहे हैं। इसके लिए जमीन देख रहे हैं। इसके लिए एयरपोर्ट और होटलों की शर्त पूरी कर रहे हैं। मान ने कहा कि कांग्रेस सांसद सुखजिंदर रंधावा गैंगस्टरों का सरगना है। उसने अपने गैंगस्टर पैदा कर रखे थे। सीएम ने कहा कि इस चुनाव में हमारा मुकाबला खुद से है। दूसरी किसी पार्टी से वह मुकाबला नहीं मानते। पंजाब में अगर BJP सरकार बनी तो धर्म की लड़ाई होगी। सीएम मान ने कहा कि पंजाब आकर अमित शाह गैंगस्टरों की बात करते हैं, लेकिन गुजरात की साबरमती जेल में गैंगस्टर लॉरेंस को VIP फैसिलिटी में रखा गया है। उसे वहां से कोई कहीं न ले जा सके। उसकी जान को खतरा बताया जाता है। उन्होंने कहा कि पहले कोयले की खान से भी कमीशन खाया जाता था। हमने अपनी खान चालू कराई, जिससे थर्मल प्लांट चलाकर बिजली संकट को दूर किया गया। इससे पहले उन्होंने पिछले 4 साल में किए सरकार के कामकाज का बुकलेट जारी किया। 300 यूनिट मुफ्त बिजली से की शुरुआत  मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में लोगों को मुफ्त बिजली देने के फैसले को लेकर शुरुआत में विरोधियों ने कई सवाल उठाए थे, लेकिन सरकार ने जुलाई 2022 से ही यह योजना लागू कर दी। उन्होंने कहा कि आज लगभग 90 प्रतिशत परिवारों को मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा किसानों को दिन के समय आठ घंटे बिना रुकावट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। सीएम मान ने कहा कि संगरूर में मेडिकल कॉलेज बनना था, अब तक चालू भी हो जाता। मगर SGPC ने विरोध कर दिया। अब नई जगह तय की गई है। सीएम ने कहा कि भाजपा ने 15 लाख रुपए का वादा किया। फिर चुनाव के बाद कहा कि ये तो जुमला था। रोजगार के नाम पर PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि पकौड़े तलना भी रोजगार है। बता दें कि साल 2022 में AAP को पंजाब में 117 में से 92 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी। इस लैंडस्लाइड विक्ट्री के बाद CM भगंवत मान ने 16 मार्च 2022 को खटकड़ कलां में शपथ ली थी। स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 881 आम आदमी क्लीनिक खोले जा चुके हैं और जल्द ही दो सौ और खोले जाएंगे। इन केंद्रों पर लाखों लोग मुफ्त उपचार और जांच का लाभ ले चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत हजारों लोगों का इलाज कराया जा रहा है। जालंधर व मोहाली में होंगे एशिया कप हॉक मैच खेलों के क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय बाद पंजाब को एशिया कप हॉकी प्रतियोगिता की मेजबानी मिलने जा रही है। यह मुकाबले जालंधर के बल्टन पार्क मैदान और मोहाली में आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब की खेल परंपरा को नई पहचान मिलेगी और युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का नया क्रिकेट मैदान बनाया जाएगा। उनका कहना था कि राज्य में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार निवेश कर रही है और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार आने से पहले राज्य में नहरों के पानी का उपयोग लगभग 21 से 22 प्रतिशत तक ही सीमित था, जबकि अब यह बढ़कर 70 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसके लिए नहर प्रणाली को मजबूत बनाने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे पर कहा कि पिछले चार वर्षों में करीब 65 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। साथ ही उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए निवेश आकर्षित किया गया है। नशे के खिलाफ जंग जारी नशा तस्करी के खिलाफ अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और उनकी संपत्तियों को भी जब्त किया जा रहा है। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक राज्य से नशा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क सुरक्षा बल की स्थापना के बाद सड़क हादसों में होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाने और खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भी कई योजनाएं चल रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना भी की और कहा कि राज्य के विकास के लिए जरूरी वित्तीय सहायता समय पर मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में पंजाब विकास और खेल दोनों क्षेत्रों में नई पहचान बनाएगा। विरोधियों को घेरा सीमए मान ने सीएम मान ने विरोधियों को भी घेरा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात की जाती है, जबकि दूसरी तरफ कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात की साबरमती जेल में रखा गया है। मुख्यमंत्री ने शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल के गैंगस्टरों पर कार्रवाई करने संबंधी बयान पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार न तो गैंगस्टरों को चुनाव में टिकट देती है और न ही … Read more

नेतन्याहू ने जो वीडियो शेयर किया था, उससे खारिज हुई मौत की अफवाह, Grok ने उसे डीपफेक बताया!

यरुशलम इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. पिछले हफ्ते से इंटरनेट पर उनके बारे में अजीब तरह की अफवाहें चल रही थीं. कुछ यूजर्स दावा कर रहे थे कि नेतन्याहू की मौत हो गई है या उन्हें ईरानी अटैक में मार दिया गया है। इन अफवाहों की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें दावा किया गया कि नेतन्याहू के हाथ में 6 उंगलियां दिखाई दे रही हैं. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे AI जनरेटेड वीडियो बताया और सवाल उठाए कि कहीं यह असली व्यक्ति की जगह डिजिटल डबल तो नहीं है. यही से नेतन्याहू जिंदा हैं या नहीं जैसी थ्योरी फैलने लगी। चूंकि वो अब तक लाइव नहीं आए हैं, इसलिए इस तरह के अफवाहों को बल मिल रहा है. इसी बीच उनके X हैंडल से एक नया वीडियो पोस्ट किया गया है. हालांकि इंटरनेट पर लोग इस वीडियो पर भी सवाल उठा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये वीडियो AI जेनेरेटेड तो नहीं है, लेकिन इसमें नेतन्याहू के बॉडी डबल का यूज किया गया है. हालांकि Elon Musk का Grok इस वीडियो को भी नकली बता रहा है। क्या नया वीडियो Deepfake है? रविवार को नेतन्याहू के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक नया वीडियो सामने आया. इस वीडियो में वह एक कैफे में खड़े दिखाई देते हैं और कॉफी पीते हुए मजाकिया अंदाज में उन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हैं। वीडियो में वह कहते हैं कि लोग कह रहे हैं कि वह मर चुके हैं, लेकिन वह खुद कॉफी पीते हुए दिखाई दे रहे हैं। Grok ने नए वीडियो को बताया Deepfake यानी नकली एलन मस्क की कंपनी xAI के AI चैटबॉट Grok ने इस वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने जब Grok से पूछा कि यह वीडियो असली है या नहीं, तो चैटबॉट ने जवाब दिया कि यह AI से बना Deepfake वीडियो हो सकता है। Grok ने कहा कि वीडियो में कई ऐसे संकेत हैं जो AI जनरेशन की ओर इशारा करते हैं. कुछ यूजर्स ने वीडियो में अजीब लिप सिंक, कप में कॉफी का असामान्य स्तर और बैकग्राउंड के कुछ अस्वाभाविक हिस्सों की ओर भी ध्यान दिलाया. इसी वजह से इंटरनेट पर बहस और तेज हो गई कि यह वीडियो असली है या AI से बनाया गया। कैफे की तस्वरीरें भी की गई हैं जारी हालांकि इस बीच उस कैफे की तरफ से तस्वीरें भी जारी की गईं, जहां नेतन्याहू को कॉफी लेते हुए देखा गया था. कैफे ने कहा कि प्रधानमंत्री सच में वहां आए थे और तस्वीरें उसी समय की हैं. इससे यह दावा भी किया गया कि नेतन्याहू बिल्कुल जिंदा और सक्रिय हैं। दरअसल यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं. इसी माहौल में नेतन्याहू की मौत से जुड़ी अफवाहें भी तेजी से फैलने लगीं कि ईरान द्वारा किए गए हमले मे उनकी मौत हो गई है। AI की वजह से हो रही कन्फ्यूजन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि AI के दौर में असली और नकली वीडियो में फर्क करना कितना मुश्किल होता जा रहा है. Deepfake तकनीक से बनाए गए वीडियो इतने असली लग सकते हैं कि आम लोगों के लिए सच और झूठ में फर्क करना आसान नहीं रहता। अब सोशल मीडिया पर बहस जारी है. कुछ लोग कह रहे हैं कि वीडियो असली है और AI चैटबॉट ने गलती की है, जबकि कुछ यूजर्स अभी भी इसे Deepfake मान रहे हैं।

मध्य प्रदेश में LPG संकट: गैस की कमी से ठंडी पड़ी रसोई, होटल-ढाबे बंद होने के कगार पर, 3 दीनदयाल रसोई हुई बंद

भोपाल  मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस का गंभीर संकट सामने आ गया है। घरेलू रसोई से लेकर होटल-ढाबों तक चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। एक ओर घरेलू गैस सिलेंडर के लिए आम लोग घंटों लाइन में खड़े हैं, तो दूसरी ओर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई लगभग बंद होने से होटल-रेस्टोरेंट और ढाबे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इस संकट की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय हालात को माना जा रहा है। Strait of Hormuz में तनाव और समुद्री मार्ग प्रभावित होने से भारत के एलपीजी आयात पर असर पड़ा है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश के कई शहरों-भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन-से गैस की किल्लत और आम लोगों की परेशानी की खबरें सामने आ रही हैं। राजधानी भोपाल में सबसे ज्यादा परेशानी राजधानी भोपाल में गैस संकट ने लोगों की रसोई पर सीधा असर डाला है। जहांगीराबाद, बोगदा पुल, कोहेफिजा, टीटी नगर और शिवाजी नगर जैसे इलाकों में सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है। जहांगीराबाद की निवासी शीबा खान बताती हैं कि 13 मार्च को मोबाइल पर गैस डिलीवरी का मैसेज आया था, लेकिन तीन दिन बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि मजबूरी में रिश्तेदारों के यहां खाना बनाना पड़ रहा है और बच्चों को भी परेशानी हो रही है। इसी तरह बोगदा पुल निवासी मोहम्मद रियाज ने गैस नहीं मिलने पर इंडक्शन चूल्हा खरीद लिया। उनका कहना है कि तीन दिन तक घर में गैस नहीं थी, इसलिए बिजली से खाना बनाना पड़ रहा है। शहर में इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है और दुकानदारों के अनुसार बिक्री में लगभग 70-80 प्रतिशत तक उछाल आया है। एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी लाइनें लग रही हैं। कई जगह ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम भी दबाव के कारण धीमा या क्रैश हो रहा है। लोगों का कहना है कि पहले जहां सिलेंडर 2-3 दिन में मिल जाता था, अब 5-7 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा नए नियम के अनुसार अब सिलेंडर की अगली बुकिंग 25 दिन बाद ही संभव है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है। कमर्शियल सिलेंडर संकट से होटल-ढाबे संकट में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई लगभग ठप होने से होटल और ढाबों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। प्रदेश में 19 किलो वाले सिलेंडर की सप्लाई पिछले कई दिनों से प्रभावित बताई जा रही है। ऑयल कंपनियों-Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum-के अनुसार उपलब्ध सीमित स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल, रेलवे, सेना और अन्य आपात सेवाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली का कहना है कि राजधानी में करीब 1500 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना हजारों कमर्शियल सिलेंडर की जरूरत होती है। जिनके पास थोड़ा स्टॉक है, वे कुछ दिन काम चला रहे हैं, लेकिन अगर सप्लाई जल्द शुरू नहीं हुई तो कई होटल बंद हो सकते हैं। ग्वालियर में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण चार में से तीन दीनदयाल रसोई बंद हो गई हैं। इससे जरूरतमंदों को मिलने वाले भोजन की थालियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहां औसतन 3700 थालियां वितरित होती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 1300 रह गई है। वर्तमान में केवल अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर स्थित दीनदयाल रसोई ही चालू है। यहीं से सीमित मात्रा में भोजन तैयार कर इंटक मैदान भेजा जा रहा है। झांसी रोड बस स्टैंड की रसोई भी पूरी तरह बंद हो चुकी है। यदि सिलेंडर की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो अंतरराज्यीय बस स्टैंड की रसोई भी बंद हो सकती है। कई छोटे ढाबों और चाय-नाश्ते की दुकानों ने लकड़ी या कोयले के चूल्हे का सहारा लेना शुरू कर दिया है, लेकिन यह तरीका महंगा और असुविधाजनक है। अन्य शहरों में भी बढ़ी परेशानी सिर्फ भोपाल ही नहीं, बल्कि इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में भी कमर्शियल गैस की किल्लत की शिकायतें सामने आ रही हैं। व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। सरकार का दावा: घरेलू गैस की कमी नहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उनके अनुसार पैनिक बुकिंग और अफवाहों के कारण वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है। सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। हाल ही में भोपाल में एक बंद गोदाम से सैकड़ों सिलेंडर जब्त किए गए। जिला कलेक्टरों को भी स्टॉक की निगरानी और अवैध बिक्री पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आम आदमी और छोटे कारोबार पर असर एलपीजी संकट का असर सबसे ज्यादा आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर दिखाई दे रहा है।     कई घरों में खाना पकाने में मुश्किल     महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित     चाय-नाश्ता और छोटे ढाबों की कमाई ठप     ब्लैक मार्केट में सिलेंडर की कीमत कई गुना तक बढ़ी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन जल्द सामान्य नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। संकट सिर्फ गैस का नहीं, रोजी-रोटी का एलपीजी की यह किल्लत अब सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रही। यह लाखों परिवारों की रोजी-रोटी और छोटे कारोबार की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने लगी है। लोग अब इंडक्शन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन यह अस्थायी समाधान ही है। अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में गैस संकट और गहरा सकता है।