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राज्यसभा में 13 नई सीटों से बीजेपी बहुमत के और करीब, अब लक्ष्य कितना दूर?

 नई दिल्ली देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के फाइनल नतीजे घोषित हो गए हैं, जिसमें 26 निर्विरोध चुने गए तो 11 सीटों पर मतदान के जरिए फैसला हो सका है. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए को 22 सीटों पर जीत हासिल हुई है तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं है. राज्यसभा के इस चुनाव से बीजेपी की संसद के उच्च सदन में ताकत काफी बढ़ गई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी भी वह दूर है। हालांकि, बीजेपी के अगुवाई वाला एनडीए गठबंधन बहुमत का आंकड़ा 2024 में ही हासिल कर चुका. अब राज्यों में बीजेपी की ताकत बढ़ने के बाद उसकी ताकत संसद के उच्च सदन यानि राज्यसभा में भी बढ़ी है. इसकी का नतीजा है कि 10 राज्यों की 37  राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ही नहीं एनडीए की सीटें बढ़ गई है। राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 245 है, जिसके लिहाज से बहुमत के लिए किसी भी दल को 123 सदस्यों की जरूरत होती है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव के बाद बीजेपी का नंबर कितना हो गया है और बहुमत से कितनी दूर है. इसके अलावा 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों से सदन के गणित पर क्या असर पड़ेंगे?  राज्यसभा में बीजेपी बहुमत से कितनी दूर देश के 10 राज्यों की जिन 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, वो सीटें अप्रैल में खाली हो जाएंगी. चुनाव आयोग राज्यसभा सदस्यों के 6 साल के कार्यकाल पूरे होने से एक महीने पहले उनकी सीटों पर चुनाव करा लेता है. इसकी कड़ी में 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं.चुनाव से पूर्व बीजेपी के राज्यसभा में कुल 103 सांसद हैं, जिसमें से पार्टी के 9 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 9 राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल खत्म होने से बीजेपी की सीटें उच्च सदन में कम होकर 94 पर हो रही है, लेकिन बीजेपी ने 37 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में  13 राज्यसभा जीतने में कामयाब रही है. इस तरह बीजेपी की सीटें बढ़कर 107 हो गई हैं. बीजेपी की राज्यसभा सीटें पहले से चार ज्यादा हो रही हैं, लेकिन उसके बाद भी बहुमत से दूर है। बीजेपी को राज्यसभा में अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए 16 राज्यसभा सीट की जरूरत है. बीजेपी को 16 राज्यसभा की सीटों को जिताने के लिए 2026 के जून और नवंबर के चुनाव का ही नहीं बल्कि 2028 तक इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि इसके बाद पार्टी राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ा सकती है। 37 राज्यसभा सीटें के चुनाव से क्या बदलेगा? देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं, जिसमें सात राज्यों के 26 राज्यसभा सदस्य पहले निर्विरोध निर्वाचित चुन लिए गए थे. तीन राज्यों की 11 सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए और उसके बाद नतीजे आए हैं.इस तरह 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं। हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों में से एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि विपक्ष को सिर्फ दो राज्यसभा सीटें ही मिल सकी है. बीजेपी ने 5 सीटें जीती हैं और उसके सहयोगियों को 4 सीट मिली है. कांग्रेस और बीजेडी एक-एक राज्यसभा सीटें ही मिल सकी हैं. राज्यसभा की जिन 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्य चुने गए हैं, उसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी। राज्यसभा चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो 37 सीटों में एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं. इसमें बीजेपी को 13 सीटें मिली तो जबकि 9 सीटें उसके सहयोगी ने जीती हैं. विपक्ष को मिली 15 राज्यसभा सीटों में कांग्रेस ने 6 सीटें, टीएमसी ने 4 सीटें, डीएमके ने 3 सीटें, शरद पवार की एनसीपी को एक सीटें और एक सीट बीजेडी को मिली है। चुनाव पहले और नतीजे आने के समीकरण को देखते हैं तो एनडीए को 10 सीटों का फायदा तो विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान हुआ. चुनाव से पहले एनडीए के पास 12 राज्यसभा सीटें थी, लेकिन अब बढ़कर 22 हो गई हैं जबकि विपक्ष के पास 25 राज्यसभा सीटें थी, जो अब घटकर के 15 रह गई हैं। राज्यसभा में एनडीए की कुल ताकत क्या है?  राज्यसभा में एनडीए की चुनाव से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का आंकड़ा 131 सदस्यों का था, लेकिन 37 सीटों पर नतीजे के बाद अब एनडीए गठबंधन के सदस्यों की संख्या 141 हो गई है. बीजेपी के 107, AIADMK के पांच, जेडीयू के 4, एनसीपी के 4, टीडीपी के 2, UPPL के दो, शिवसेना के 2, जेडीएस के 1, आरएलडी के एक, एजीपी के 1,आरएलएसएम के एक, एनपीप के एक, PMK के एक और निर्दलीय तीन राज्यसभा सदस्य हैं. इसके अलावा 6 मनोनीत राज्यसभा सदस्यों का समर्थन भी बीजेपी को है। राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को झटका लगा है, उसकी सीटें घट गई हैं. विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लाक' की सीटें राज्यसभा में 74 पर पहुंच गई हैं, उसमें कांग्रेस के पास 28 सीटें, टीएमसी की 13, डीएमके की 8, सपा की 4, सीपीआई (एम) की तीन, नेशनल कॉफ्रेंस की 3, आरजेडी की 3, सीपीआई की 2, मुस्लिम लीग की 2, जेएमएम, शरद पवार की एनसीपी की एक, शिवसेना (य़ूबीटी) की एक, डीएमडीके की एक और तीन अन्य दल के सदस्य हैं.    एनडीए और इंडिया ब्लॉक से अलग रहने वाले दलों की संख्या राज्यसभा में देखें तो वह 28 है, उसमें आम आदमी पार्टी की 10, वाईएसआर कांग्रेस की 7, बीजेडी की 6, बीआरएस की 3, बसपा की एक की एमएनएफ की एक सीट है. इसके अलावा दो राज्यसभा खाली हैं. साथ ही यह भी बता दें कि राज्यसभा की 12 सीटों पर सदस्यों को राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जाता है. ऐसे में बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए का नंबर उच्च सदन में बहुमत से ज्यादा है। राज्यसभा में बहुमत से क्या हासिल करेगी राज्यसभा में बहुमत से बीजेपी भले ही दूर है, लेकिन एनडीए के नंबर काफी मजबूत है. मोदी सरकार के लिए … Read more

प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

एचपीवी टीकाकरण अभियान: मध्यप्रदेश में 14 वर्ष की एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण हुआ पूर्ण प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने प्रदेश में 14 वर्ष आयु वर्ग की एक लाख से अधिक किशोरी बालिकाओं के सफल एचपीवी टीकाकरण पर स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिला प्रशासन तथा सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 को अजमेर, राजस्थान से इस विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ किया था। मध्यप्रदेश इस अभियान के अंतर्गत एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कर देश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण वाला राज्य बन गया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, राजगढ़ और खरगोन जिलों का इस उपलब्धि में विशेष योगदान रहा है। प्रदेश में अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता में समन्वय स्थापित किया गया और स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत विभाग सहित विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी 14 वर्ष आयु की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और शेष पात्र बालिकाओं का टीकाकरण भी शीघ्र पूर्ण किया जाएगा।  

2026 में IPL से हो सकती है इन 5 दिग्गजों की विदाई, धोनी भी शामिल

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन की शुरुआत 28 मार्च को होने जा रही है. आईपीएल 2026 का ओपनर मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में होना है. अभी भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने शुरुआती 20 मुकाबलों का ही शेड्यूल जारी किया है. बाकी मैचों का शेड्यूल जल्द आने की संभावना है। आगामी आईपीएल सीजन कुछ दिग्गज खिलाड़ियों के लिए आखिरी साबित हो सकता है. इन खिलाड़ियों ने वर्षों तक अपनी टीमों के लिए शानदार प्रदर्शन किया है और लीग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है. लेकिन अब उम्र, फिटनेस और टीम कॉम्बिनेशन को देखते हुए ये प्लेयर्स आगामी सीजन के बाद आईपीएल से रिटायरमेंट लेने का फैसला कर सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही पांच खिलाड़ियों के बारे में… 1.महेंद्र सिंह धोनी: चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आईपीएल के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में शामिल हैं. हालांकि उनकी उम्र और फिटनेस को देखते हुए माना जा रहा है कि 2026 सीजन उनके लिए आखिरी हो सकता है. जुलाई 2026 में धोनी 45 साल के हो जाएंगे. पिछले कुछ सीजन में घुटने की समस्या के बावजूद उन्होंने छोटी लेकिन प्रभावी इनिंग्स खेलकर टीम को जीतें दिलाईं. सीएसके के सीईओ काशी विश्वनाथन ने पुष्टि की है कि वह इस पूरे सीजन में खेलेंगे, लेकिन कई फैन्स मानते हैं कि यह उनका इमोशनल फेयरवेल सीजन हो सकता है. धोनी की ही कप्तानी में सीएसके ने अपने पांचों आईपीएल खिताब जीते हैं। 2. सुनील नरेन: कैरेबियाई बॉलिंग ऑलराउंडर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में एक रहे हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए उन्होंने आईपीएल में 192 विकेट लिए हैं और हाल के वर्षों में विस्फोटक ओपनर के रूप में भी खुद को साबित किया है. देखा जाए तो नरेन ने बल्ले से आईपीएल में 1780 रन बनाए हैं. मई में 38 साल के होने जा रहे नरेन पहले ही इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं. अब बढ़ती उम्र और फिटनेस चुनौतियों के कारण वह आईपीएल 2026 के बाद इस लीग से बतौर प्लेयर विदा ले सकते हैं। 3. ईशांत शर्मा: भारतीय तेज गेंदबाज ईशात शर्मा ने आईपीएल में कुल 7 टीमों के लिए मुकाबले खेले हैं. ईशांत का अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग खत्म हो चुका है और वो नवंबर 2021 के बाद से टीम इंडिया से बाहर हैं. युवा तेज गेंदबाजों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच आईपीएल 2026 उनके करियर का अंतिम सीजन बन सकता है. ईशांत ने भारत के लिए 105 टेस्ट मैचों में 311 विकेट लिए और टीम की यादगार जीतों का हिस्सा रहे. आईपीएल के पिछले दो-तीन सीजन में ईशांत ने सहयोगी गेंदबाज की भूमिका निभाई है. फिलहाल गुजरात टाइटन्स (GT) का हिस्सा ईशांत अब 37 साल के हो चुके हैं और जल्द ही अपने करियर को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। 4. अजिंक्य रहाणे: तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने आईपीएल में 5032 रन बनाए हैं और वो 6 टीमों के लिए खेल चुके हैं. 2023 के सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ उनका शानदार पुनरुत्थान देखने को मिला था. बाद में वो कोलकाता नाइट राइडर्स से जुड़े. पिछले साल उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी भी की, जहां टीम 8वें स्थान पर रही. इस सीजन भी रहाणे ही कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी करते नजर आ सकते हैं. जून में 38 साल के होने जा रहे रहाणे के लिए यह सीजन आखिरी हो सकता है। 5. मिचेल स्टार्क: ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क भी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिनका आईपीएल 2026 के बाद भविष्य अनिश्चित माना जा रहा है. स्टार्क दुनिया के सबसे खतरनाक बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स को 2024 में खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाने के बाद स्टार्क दिल्ली कैपिटल्स (DC) से जुड़े. 36 साल की उम्र और इंटरनेशनल क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए वह अपना वर्कलोड कम कर सकते हैं, इसलिए आईपीएल में बतौर खिलाड़ी उनका ये आखिरी सीजन हो सकता है. स्टार्क पहले ही टी20 इंटरनेशनल को अलविदा कह चुके हैं और उनका फोकस टेस्ट एवं ओडीआई क्रिकेट पर है।

ममता बनर्जी का मास्टरस्ट्रोक: TMC ने हर सीट पर उतारे प्रत्याशी, भवानीपुर से खुद संभाला मोर्चा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए सभी 294 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी। टीएमसी द्वारा जारी इस लिस्ट में ममता बनर्जी समेत पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज टीएमसी नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, हाल ही में टीएमसी में शामिल हुए पवित्र कर को नंदीग्राम से टिकट दिया गया है, जहां उनका भी मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों विधानसभा सीटों से टिकट दिया है। इसके साथ ही सुजापुर सीट से सबीना यास्मीन, जंगीपुर सीट से जाकिर हुसैन, सागरदिघी सीट से बायरन बिस्वास, दिनहाटा सीट से उदयन गुहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, सिलीगुड़ी सीट से गौतम देव चुनाव मैदान में उतरे हैं। खगराम सीट से आशीष मारजीत चुनाव लड़ेंगे। करीमपुर सीट से सोहम चक्रवर्ती चुनाव लड़ेंगे। कंडी सीट से अपूर्व सरकार चुनाव लड़ेंगे। सिताई सीट से संगीता रॉय बसुनिया चुनाव लड़ेंगी। कृष्णानगर उत्तर सीट से अभिनव भट्टाचार्य चुनाव लड़ेंगे। नवद्वीप सीट से पुण्डरीकाक्ष साहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, हरिन्घाटा सीट से राजीव विश्वास चुनाव लड़ेंगे। स्वरूपनगर सीट से बीना मंडल चुनाव लड़ेंगी। राजगंज सीट से सपना बर्मन चुनाव लड़ेंगी। हबरा सीट से ज्योतिप्रिया मल्लिक चुनाव लड़ेंगे। कृष्णानगर नगर दक्षिण सीट से उज्जवल विश्वास चुनाव लड़ेंगे। राणाघाट दक्षिण सीट से सौगत कुमार बर्मन चुनाव लड़ेंगे। कल्याणी सीट से अतींद्रनाथ मंडल चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले, सोमवार को भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे। वहीं, वाम दल ने भी अपनी लिस्ट जारी की थी। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे, पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

उज्‍जैन के गुरुकुल से शिक्षा प्राप्‍त कर कृष्‍ण बने जगत गुरु सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने पर विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का बढ़ा गौरव : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आज विक्रम विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर अत्यधिक आनन्द का अनुभव हो रहा है। उन्होंने दीक्षान्त समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए सभी के यशस्वी एवं मंगलमय भविष्य की कामना की। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि उज्‍जैन नगरी में आते ही एक अलग प्रकार की अनुभूति होती है। सम्राट विक्रमादित्‍य विश्‍वविद्यालय में ही एक विद्यार्थी ने शिक्षा प्राप्‍त की और आज वे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने। मंगलवार को राज्यपाल  पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30 वां दीक्षांत समारोह स्‍वर्ण जयंती सभागृह सम्पन्न हुआ। राज्‍यपाल  पटेल ने कहा कि प्रदेश का राज्‍यपाल बनने के अगले ही दिन वे भगवान  महाकालेश्‍वर के दर्शन के लिए आए और यहीं से उन्‍हें प्रदेश के सतत विकास और देश की प्रगति के लिए प्रयासरत रहने की प्रेरणा प्राप्‍त हुई। राज्‍यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज दीक्षांत के साथ आप सभी ने समाज के उत्‍थान और देश की एकता के लिए शपथ ली है। विश्‍वविद्यालय से जो संस्‍कार आपको मिले है उन्‍हें जीवन भर स्‍मरण रखकर कार्य करें। आपके माता-पिता ने आपको शिक्षित करने के लिए बहुत कष्‍ट उठाए है इसलिए पढ़ लिखकर अपने माता-पिता की सेवा करें। आप जीवन में कुछ भी बन जाओं परंतु अपने माता-पिता और गुरु के प्रति सदैव आभारी रहना, उनकी सेवा करना। शिक्षित होने का उद्देश्‍य मात्र उपाधि अथवा प्रमाण-पत्र पाना नहीं बल्कि समाज और देश की उन्‍नति में योगदान देकर एक जिम्‍मेदार नागरिक भी बनना है। भगवान कृष्ण ने उज्जैन को बनाया अपनी शिक्षा स्थली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केन्द्र उज्जैन को भगवान कृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना। चौसठ कलाओं और 14 विद्याओं की यह धरती शौर्य के प्रतीक सुशासन के पुरोधा, विक्रम संवत के प्रवर्तक, भारतीय सांस्कृतिक चेतना के रक्षक और न्यायप्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि 7 दशकों के उस समर्पण का परिणाम है, जिसने दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ स्कॉलर सौंपे हैं। विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने से विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का गौरव बढ़ा है। ऐसे विश्वविद्यालय की उपाधियों से विभूषित होना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीक्षांत समारोह में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी-लिट), गोल्ड मेडल और स्नातक उपाधियां प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन में सीखने की एक नई शुरुआत है, यह जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट है। बेहतर जीवन के लिए विद्यार्थियों को सीखने की ललक सदैव बनाए रखना होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी देश और प्रदेश के समग्र विकास में सहभागी बनेंगे और जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने कर्तव्य का पूर्ण निष्ठा के साथ निवर्हन करते हुए अपने परिवार, समाज और देश का गौरव बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को ससम्मान उपाधियां प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई है। यह विश्वविद्यालय प्रसिद्ध कवि  शिवमंगल सिंह सुमन और पद्म विष्णु धर वाकणकर जैसी महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है। नवाचार में अग्रणी यह विश्वविद्यालय, कृषि अध्ययन शाला और डेयरी टेक्नालॉजी जैसे आधुनिक विषयों को आरंभ करने के लिए पहल करने में भी प्रदेश में प्रथम रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय को विभिन्न यंत्रों के लिए 51 लाख रुपए, 5 ड्रोन तथा अध्ययन यात्रा के लिए एक बस प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। पिछला वर्ष प्रदेश में निवेश और रोजगार के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उज्जैन वर्ष 2028 में भव्य और दिव्य सिंहस्थ का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन से लेकर उनके मां क्षिप्रा के जल से स्नान तक की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार अभी से हर संभव तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के आयोजन में स्वच्छता, यात्री मार्गदर्शन, डिजिटल हेल्प आदि का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नवरात्रि और गुड़ी पड़वा की मंगलकामनाएं भी दीं। नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन और भर्तृहरि छात्रावास भवन का किया लोकार्पण राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन का लोकार्पण एवं एमईआरयू परियोजना अंतर्गत नव श्रृंगारित भर्तृहरि छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सम्पादित पुस्तकों ईकोस एण्ड एक्सप्रेशन्स, कंटूर्स ऑफ थॉट, रागात्मिका सहित 4 पुस्तकों का विमोचन भी किया। उपाधियाँ प्रदान करने के बाद विश्‍वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को उपदेश देकर शपथ दिलाई। निकली अकादमिक शोभायात्रा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यपरिषद सदस्‍यों व संकाय अध्‍यक्षों के साथ समूह चित्र खिंचवाया। इसके बाद दीक्षांत समारोह की अकादमिक शोभा यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर निगम अध्‍यक्ष  कलावती यादव शामिल रहें। सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर अर्पित की पुष्पांजलि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर स्थित सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर पुष्पांजलि अर्पित की। एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रगीत वंदेमातरम और राष्ट्रगान जन-गण-मन हुआ। अतिथियों ने माँ वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का किया अवलोकन राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य अतिथियों ने हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आचार्य विद्यासागर पीठ एवं संस्‍था द्वारा अतिथियों को हाथ से बनी हथकरघा सामग्री भेंट की। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और कुल सचिव  अनिल कुमार शर्मा ने राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ, पारिजात का पौधा, शॉल, फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्य परिषद के सदस्यों के द्वारा अन्य अतिथियों का भी सम्मान और स्वागत किया गया। … Read more

कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने का संकल्प, Shivraj Singh Chouhan ने किसानों की आय बढ़ाने पर दिया जोर

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय और सुरक्षा बढ़ाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जैसे तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों की जगह लाभदायक फसलों को बढ़ावा देना, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, फसल बीमा योजना में सुधार और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना। संसद के निचले सदन में सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों से तंबाकू की खेती छोड़ने की अपील की है और इसके बदले कई फायदे वाली फसलों की पहचान की है। इनमें हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन्स, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, ताकि किसानों की नकद आय सुरक्षित बनी रहे।  मंत्री ने कहा कि देश के ज्यादातर किसानों के पास छोटी जमीन होती है, इसलिए केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इसको देखते हुए सरकार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) के कई मॉडल तैयार किए हैं, जिनका अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन भी किया जा रहा है। इन मॉडलों के तहत किसान अनाज (गेहूं और धान), सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ अपना सकते हैं। इससे उन्हें पूरे साल स्थिर और ज्यादा आय मिल सकती है। चौहान ने आगे बताया कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाया गया है और इस सीजन में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दालों जैसे तूर, मसूर और उड़द के लिए भी व्यवस्था की है, जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी पूरी उपज बेच सकते हैं और सरकार उसे खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे दाल उत्पादक किसानों को बड़ा सहारा मिला है। फसल बीमा योजना को लेकर उन्होंने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा पाने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अगर किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है तो उसे मुआवजा मिलना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगर 21 दिनों के भीतर बीमा राशि किसान के खाते में नहीं आती है, तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इससे किसानों को देरी का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और फसल बीमा या अन्य योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि रक्षक पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाती है, वहां दोषियों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान सहित कई राज्यों में फसल बीमा के तहत हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए हैं, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिला है।

रीवा जिले की पनवार माईक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 228 करोड़ 42 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों और अनुरक्षण के लिए 4 हजार 525 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। साथ ही रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं पर 40 रूपये प्रति क्विंटल के मान से बोनस दिए जाने का निर्णय लिया है। मंत्रि-परिषद ने उज्जैन शहर में चिमनगंज मंडी से इंदौर गेट तक 4-लेन एवं निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2-लेन ऐलिवेटेड कॉरीडोर के निर्माण के लिए 945 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके साथ रीवा की पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 228 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इसी तरह मंत्रि-परिषद ने पशुपालन विभाग का नाम गौपालन एवं पशुपालन किये जाने की भी स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार उपार्जित गेहूं में से भारत सरकार द्वारा स्वीकार न की जाने वाली सरप्लस मात्रा का निस्तारण मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन द्वारा खुली निविदा के माध्यम से किया जाकर इस पर होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। किसानों को बोनस राशि का भुगतान विभागीय मद में बजट प्रावधान कराकर तथा सरप्लस मात्रा के निस्तारण व्यय की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजनांतर्गत आवंटित बजट से किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 4,525 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों और अनुरक्षण के लिए 4 हजार 525 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार उज्जैन शहर में चिमनगंज मंडी (इंद्रा नगर) चौराहा से इंदौर गेट तक 4-लेन ऐलिवेटेड कॉरिडोर एवं निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2 लेन ऐलिवेटेड कॉरिडोर लंबाई 5.32 कि.मी. के निर्माण कार्य को विभागीय सूचकांक से मुक्त रखते हुए लागल राशि 945 करोड़ 20 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 और जन भागीदारी अंतर्गत विकास हेतु अनुदान योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 7 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। एनडीबी से वित्त पोषण पुल और सड़क निर्माण की योजना की निरंतरता के लिए 50 करोड़ 10 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-6 की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 1543 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-7 की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 1,476 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। शासकीय आवास गृह, विश्राम गृहों के रखरखाव और अनुरक्षण के लिये 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए के लिए 200 करोड़ 35 रूपये की स्वीकृति दी गई है। कार्यालय भवनों के रखरखाव, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनुरक्षण कार्य एवं शौर्य स्मारक के संचालन और संधारण हेतु 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए के लिए 300 करोड़ 70 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। रीवा की पनवार माईक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 228 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा रीवा की पनवार माईक्रो सिंचाई परियोजना लागत राशि 228 करोड़ 42 लाख रूपयें, सैंच्य क्षेत्र 7350 हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है। परियोजना से रीवा जिले की जवा एवं त्योंथर तहसील के 37 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन कर मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम को वित्त विभाग के अंतर्गत किए जाने का अनुमोदन दिया गया है। "मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम" को एमएसएमई से वित्त विभाग को आवंटित किये जाने से राज्य पर कोई वित्तीय भार नहीं आयेगा। पशुपालन विभाग का नाम गौपालन एवं पशुपालन किये जाने की मंजूरी मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियमों की अनुसूची में संशोधन की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का नाम संशोधित कर गौपालन एवं पशुपालन विभाग और संचालनालय, पशुपालन एवं डेयरी का नाम परिवर्तित कर संचालनालय,गौपालन एवं पशुपालन किये जाने का अनुमोदन किया गया है।  

सिंहस्थ-2028 में आने वाले सभी श्रद्धालु होंगे हमारे अतिथि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को उज्जैन में 662 करोड़ रूपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। इसमें उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा क्रियान्वित नगर विकास योजनाएँ, सिंहस्थ-2028 संबंधी कार्य एवं गीता भवन का भूमि-पूजन शामिल है। राज्यपाल  पटेल ने कहा है कि उज्जैन विकास की 662 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत वाली विभिन्न योजनाओं का भूमि-पूजन केवल अवसंरचनाओं का निर्माण मात्र नहीं है। यह उज्जैन के गौरवशाली भविष्य और सांस्कृतिक एवं अभ्युदय का शंखनाद है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के माध्यम से समर्थ, समृद्ध और सशक्त विकसित भारत के दिव्य संकल्प की सिद्धि का प्रतीक भी है। उन्होंने त्रिवेणी विहार में इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर 'गीता भवन' निर्माण के निर्णय के लिए डॉ. मोहन यादव की सरकार को बधाई दी। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कन्या-पूजन के साथ किया। कार्यक्रम में भूमि-पूजन और विकास कार्यों का प्रेजेंटेशन किया गया। शुरूआत में राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 के विकास कार्यों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से बनने वाले ये निर्माण कार्य केवल कंक्रीट के ढाँचे नहीं होंगे, बल्कि उज्जैन के नये ‘स्वर्ण युग’ की आधारशिला हैं, जो दुनिया के सामने सुनियोजित विकास के प्रतीक बनेंगे। इन विशाल निर्माण कार्यों और उत्कृष्ट नगरीय सुविधाओं से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी। रोजगार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि महाकाल महालोक के निर्माण के बाद से उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। लाखों लोग महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिवर्तन का नया दौर शुरू हो गया है, अब हम सबका लक्ष्य और संकल्प विकसित भारत ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल एवं विद्युत संरक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता तथा ‘अतिथि देवो भव’ की भावना के अनुरूप श्रद्धालुओं को उच्च गुणवत्ता की सुविधाएँ और सेवाओं की उपलब्धता के द्वारा उज्जैन की आदर्श आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में पहचान बनाने में उज्जैनवासियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि गीता भवन निर्माण हमारी भावी पीढ़ी में सुसंस्कारों के बीजारोपण और सनातन ज्ञान-पुंज को सम्पूर्ण विश्व में आलोकित करने का दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी कदम है। गीता भवन युवाओं, शोधार्थियों और नागरिकों को भारतीय ज्ञान-परंपरा, दर्शन और संस्कृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा, जो समाज में भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों की मजबूती और विस्तार में सहयोगी होगा। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य बोध और मानव कल्याण का सर्वकालिक मार्गदर्शक ग्रंथ है। फल की इच्छा किए बिना कार्य करने वाले जीवन में सफल होते है। ‘भगवद् गीता’ के दर्शन का यह ज्ञान नई पीढ़ी में नैतिकता, अनुशासन और सकारात्मक विचारों के आधार को मजबूत बनाएगा। प्रदेश में सनातन परंपरा पुनउर्त्थान के सशक्त केंद्र के रूप में गीता भवन भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैचारिक संवाद को नई दिशा देने के माध्यम बनेंगे। ‍सिंहस्थ-2028 सनातन संस्कृति का होगा वैश्विक-समागम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि ‍सिंहस्थ-2028 सनातन संस्कृति का वैश्विक-समागम है। हमारा कर्तव्य, दायित्व और जवाबदारी सिंहस्थ में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को गरिमापूर्वक सुविधाजनक दर्शन करने के प्रति है। सिंहस्थ-2028 में उज्जैन आने वाला प्रत्येक व्यक्ति हमारा अतिथि होगा। सिंहस्थ-2028 का वैभव इस बार "भूतो न भविष्यति" को साकार करते हुए अद्वितीय होगा। राज्य सरकार के प्रयासों को भारत सरकार का साथ मिल रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने 3 हजार 839 करोड़ की लागत से NH- 752 D के बदनावर-पेटलावद थांदला खंड को फोर लेन करने की स्वीकृति दी है। यह इस बात का प्रमाण है कि केंद्र और राज्य मिलकर सिंहस्थ-2028 को अविस्मरणीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधे जोड़कर विकास की नई धुरी बनेगा। राज्य सरकार ने सिहंस्थ-2028 महापर्व की भव्यता और जन सुविधाओं के लिए 13 हजार 851 करोड़ रुपए के कार्यों की ऐतिहासिक स्वीकृति दी है। वर्ष 2026-27 के बजट में सिहंस्थ के लिए 3060 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान रखा गया है, यह उज्जैन के भविष्य को बदलने का रोडमेप है। हम उज्जैन को सुविधा और शुचिता का ऐसा मॉडल बनाएंगे जो पूरी दुनिया में आध्यात्मिक नगरी के साथ आधुनिकतापूर्वक कदम से कदम मिलाकर चलने का उदाहरण बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में गीता भवन सहित अन्य विकास कार्यों के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, हिन्दू नववर्ष की पावन बेला में उज्जैन को विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। सिंहस्थ-2028 विकास कार्यों को समर्पित है, जो तय सीमा में पूर्ण होंगे। उज्जैन को 662 करोड़ 46 लाख की लागत से विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी है। आज 77 करोड़ 14 लाख की लागत से गीता भवन की आधारशिला रखी गई है। इसके साथ ही 30 करोड़ 68 लाख की लागत से विक्रम नगर रेलवे ओवर ब्रिज और 11 सड़क निर्माण कार्यों का भी भूमि-पूजन हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 में किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। पशुपालन विभाग ने सवा साल में श्रेष्ठ कार्य करते हुए 25 प्रतिशत दूध उत्पादन बढ़ाया है। सभी पशुपालक इसके लिए बधाई के पात्र हैं। किसानों को 5 से 8 रुपए लीटर अधिक मूल्य का लाभ मिला है। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय, पीएम एक्सीलेंस कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जरूरी बदलाव किए गए हैं। स्कूली बच्चों को आने-जाने के लिए साइकिलें, ड्रेस, किताबें नि:शुल्क वितरित की जा रही हैं। टॉपर बच्चों को स्कूटी, मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप की सौगात मिल रही है। अब प्रदेश के बच्चों को नवीन माता यशोदा योजना अंतर्गत स्कूलों में नि:शुल्क दूध के पैकेट मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन वह नगरी है, जहां सम्राट विक्रमादित्य के गौरवशाली अतीत को जीवंत करते हुए आज 30वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ है। उज्जैन में भगवान कृष्ण … Read more

सीएम योगी का ऐलान: यूपी में टीचर्स, वकील और पत्रकारों को मिलेंगे फ्लैट

 लखनऊ सीएम योगी ने प्रदेश में शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों के लिए भी आवासीय योजनाएं विकसित करने की बात कही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया है कि जिन लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए बहुमंजिला मकान  तैयार किए जाएंगे. सीएम योगी ने कहा कि माफियाओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा था, जिन्हें अब मुक्त कराकर उपयोग में लाया जा रहा है. जहां ऐसी जमीन शेष है, उसे भी खाली कराया जाएगा और मकान बनवाकर शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने  कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बड़ी मात्रा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे थे. इन जमीनों को अब मुक्त कराया गया है और उनका उपयोग आम लोगों के हित में किया जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी ऐसी जमीनें अब भी कब्जे में हैं, उन्हें प्राथमिकता से खाली कराया जाए. इन जमीनों पर हाईराइज मकान विकसित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके. मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर माफिया की जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल भी इसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। अब सिर्फ गरीब ही नहीं, हर वर्ग पर फोकस अधिकारियों का कहना है कि अब तक आवास योजनाएं मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए केंद्रित थीं, लेकिन इस बार सरकार ने दायरा बढ़ाने की बात कही है. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0) के तहत 90 हजार लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई. यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई, जिससे वे अपने घर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकें. सरकार का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके। जो हक छीना, अब वही लौटेगा मुख्यमंत्री ने सख्त शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक गरीबों का हक छीना और जमीनों पर कब्जा किया, अब समय आ गया है कि वही संसाधन समाज के हित में वापस आएं. उनका कहना था कि यह केवल योजना नहीं, बल्कि एक तरह से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया है, जिसमें छिने हुए अधिकार वापस दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 62 लाख परिवारों को विभिन्न योजनाओं के तहत आवास उपलब्ध कराया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. यह केवल एक भौतिक जरूरत नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय भी है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय को दिया। 25 करोड़ जनता ही परिवार  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले योजनाएं होने के बावजूद उनका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता था. अब सरकार 25 करोड़ प्रदेशवासी ही परिवार हैं” की सोच के साथ काम कर रही है. इसी कारण बिना भेदभाव हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. उनका कहना था कि जब शासन का नजरिया व्यापक होता है, तभी योजनाओं का असर जमीन पर दिखता है। बीमारू से ग्रोथ इंजन तक का दावा मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बदलती छवि का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने इसे विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे में सुधार और जनकल्याणकारी नीतियों का परिणाम बताया. सरकार का कहना है कि अब केवल घर देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उसके साथ सभी जरूरी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं. लाभार्थियों को शौचालय, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ अन्य योजनाओं का भी लाभ दिया जा रहा है. जैसे कि उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं।

ICC लगाएगी बैन, बांग्लादेश क्रिकेट में नया बखेड़ा, सरकार को दी गई चेतावनी

 नई दिल्ली  बांग्लादेश क्रिकेट में इस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि बोर्ड के मामलों में हस्तक्षेप से इंटरनेशनल लेवल पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दरअसल, खेल मंत्रालय ने पिछले साल हुए BCB चुनाव में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है. इस कमेटी को 11 मार्च से 15 कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच में 'अनियमितता, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग' जैसे आरोपों की पड़ताल की जाएगी। क्रिकइंफो की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- BCB ने अपने बयान में साफ किया कि इस मामले को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल (ICC) के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा हो चुकी है. बोर्ड का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए क्रिकेट बोर्ड में सरकारी दखल ICC के नियमों के खिलाफ माना जाता है, जिससे बांग्लादेश पर बैन का खतरा भी पैदा हो सकता है. इससे पहले जिम्बाब्वे और श्रीलंका जैसे देशों पर इसी वजह से कार्रवाई हो चुकी है. ध्यान रहे ICC ने पहले भी सरकारी दखल के लिए जिम्बाब्वे और श्रीलंका समेत कई क्रिकेट बोर्ड को सस्पेंड किया था। सरकार से सीधे बातचीत की मांग BCB ने कहा कि वह शिकायत करने से पहले नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल से सीधे बात करना चाहता है, ताकि गजट के 'इरादे और असर' को समझा जा सके. साथ ही बोर्ड ने जांच कमेटी को पूरी तरह खत्म करने की मांग भी रखी है, ताकि क्रिकेट की स्थिरता बनी रहे। तमीम इकबाल के आरोप से भड़का विवाद पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने BCB अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर चुनाव प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया. तमीम का दावा था कि चुनाव से पहले अमीनुल ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कुछ जिलों के काउंसलर बदलने को कहा. इसके अलावा नामांकन की तारीख दो बार बढ़ाने का भी आरोप लगाया गया. हालांकि, अमीनुल इस्लाम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। चुनाव के बाद भी नहीं थमा बवाल 1 अक्टूबर को तमीम इकबाल ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी. 6 अक्टूबर को चुनाव हुए, लेकिन इसके बाद भी विवाद थमा नहीं. ढाका क्लब अधिकारियों और कई अन्य समूहों ने चुनाव में 'इंजीनियरिंग' का आरोप लगाया. नतीजों के कुछ घंटों के भीतर ही खेल मंत्रालय को अपने एक निदेशक उम्मीदवार को वापस लेना पड़ा. उनके राजनीतिक संबंध सोशल मीडिया पर सामने आ गए। ढाका लीग का बहिष्कार BCB चुनाव के बाद हालात और बिगड़ गए. ढाका के कई क्लब (कैटेगरी-2) ने मौजूदा बोर्ड को 'गैरकानूनी' करार दिया और 2025-26 सीजन की ढाका लीग का बहिष्कार कर दिया।