samacharsecretary.com

AI और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटरों की बिजली मांग 800% तक बढ़ेगी, 2031-32 तक 13.56 गीगावॉट की जरूरत

नई दिल्ली देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा सेंटरों की बिजली मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है। 2031-32 तक डेटा सेंटरों से बिजली की मांग 13.56 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। अभी देश में डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ रही है। यह 2020 में 375 मेगावॉट थी, जो 2025 तक बढ़कर करीब 1,500 मेगावॉट हो गई है। अगले करीब 7 सालों में बिजली मांग 800% बढ़ने का अनुमान है। सरकार के अनुसार AI विकास को बढ़ावा देने के लिए 14 सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के जरिए 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें स्टार्टअप, शोध संस्थानों और शिक्षण संस्थानों को औसतन 65 रुपए प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि देश के प्रमुख डेटा सेंटर मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर में स्थित हैं। 65% भारतीय AI का इस्तेमाल कर चुके हैं भारत में AI का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 65% भारतीय लोगों ने कम से कम एक बार जनरेटिव AI (जैसे चैटबॉट या AI ऐप) का इस्तेमाल किया है। देश की आबादी लगभग 140 करोड़ है। इसका करीब 65% यानी लगभग 90–95 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में AI टूल का उपयोग कर चुके हैं। भारत में AI ऐप डाउनलोड तेजी से बढ़े हैं और 2025 में भारतीयों ने लगभग 0.6 अरब (60 करोड़) AI ऐप डाउनलोड किए। लोग AI का इस्तेमाल पढ़ाई, सवालों के जवाब, ट्रांसलेशन, काम की उत्पादकता बढ़ाने और कंटेंट बनाने के लिए कर रहे हैं। संसद में अन्य मंत्रालयों के सवाल-जवाब… देश में 16 साल में 4 गुना बढ़े सी-सेक्शन प्रसव भारत में 16 साल में सी-सेक्शन प्रसव 4 गुना से ज्यादा बढ़े। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि 2008-09 में 12.03 लाख ऑपरेशन से प्रसव हुए थे, जो 2024-25 में 54.35 लाख हो गए। कुल प्रसव 1.88 करोड़ से 1.98 करोड़ हुए। 2024-25 में 27.46% प्रसव सी-सेक्शन रहे। इसी अवधि में मातृ मृत्यु दर 212 से 88 और शिशु मृत्यु दर 57 से 25 हो गई। बांग्लादेश में फरवरी 2026 तक 3100 हिंसक घटनाएं विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर 3,100 घटनाओं में हिंसा हुई। मानवाधिकार संगठनों के इन आंकड़ों में घरों, संपत्तियों, कारोबार और पूजा स्थलों पर हमले भी शामिल हैं। ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर संशोधन बिल लोकसभा में पेश सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 पेश किया। इस बिल का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में बदलाव करना है, ताकि ट्रांसजेंडर लोगों की स्पष्ट परिभाषा तय की जा सके और उन्हें बेहतर कानूनी सुरक्षा मिल सके। मौजूदा कानून में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा साफ नहीं है, इसलिए नई परिभाषा तय करने का प्रस्ताव है। बिल में जरूरत पड़ने पर सलाह देने के लिए एक विशेष अथॉरिटी बनाने की बात कही गई है। ट्रांसजेंडर लोगों को सरकारी दस्तावेजों में जरूरी बदलाव कराने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। अपहरण या जबरन नुकसान जैसे गंभीर अपराधों पर कड़ी और अलग-अलग सजा देने की बात भी बिल में है।

बंगाल चुनाव: BJP के प्रमुख नेताओं को चुनाव में उतारने की योजना, CM कैंडिडेट कौन बनेगा?

कलकत्ता  भाजपा पश्चिम बंगाल और केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित चेहरे के बगैर चुनाव लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में सभी 294 सीटों पर और केरल में एनडीए के दलों के साथ सभी 140 सीटों पर लड़ेगी। पश्चिम बंगाल में पार्टी पूर्व सांसदों के साथ ही लोकसभा में मौजूदा सांसदों को भी विधानसभा चुनाव मैदान में उतार सकती है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों के साथ चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा पश्चिम बंगाल में इस बार पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी और वह अपने अधिकांश मौजूदा विधायकों के साथ पूर्व सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतार रही है। पार्टी रणनीति के तहत मौजूदा सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। हालांकि, पार्टी इस बार भी किसी को बतौर मुख्यमंत्री पेश नहीं करेगी। सीएम कैंडिडेट कौन? केरल को लेकर पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा एनडीए के दो सहयोगी दलों ट्वेंटी 20 और भारतीय जन धर्म सेना के साथ सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा खुद 90 से 100 सीटों पर लड़ेगी और बाकी 40 सीट दोनों सहयोगियों को लगभग आधी-आधी बांटेगी। भाजपा ने पिछली बार 115 सीट पर और भारतीय जन धर्म सेना ने 21 सीट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा इस बार बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ेगी। उसने पिछली बार मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया था, लेकिन उसका खाता भी नहीं खुला था। सूत्रों का कहना है कि इस बार चुनावी पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ केंद्र सरकार का नाम और काम रहेगा। राज्य के नेताओं में केरल भाजपा के प्रमुख राजीव चंद्रखेशर, ट्वेंटी 20 के प्रमुख साबू एम. जैकब और भारतीय जन धर्म सेना के प्रमुक टी. वेल्लापेल्ली का चेहरा भी रहेगा। केरल में भाजपा स्थानीय निकायों के नतीजों से काफी उत्साहित है। खासकर राजधानी तिरुवनंतपुरम में पार्टी ने पहली बार अपना मेयर बनाया है।

हिमालय के जंगलों में गिरावट, सरकारी रिपोर्ट ने किया खुलासा- 2 साल में 2.2% ग्रीन कवर गायब

 नई दिल्ली भारतीय हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर एक परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है. केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि साल 2021 से 2023 के बीच हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 'ट्री कवर' में 2.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए मंत्री ने 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट' (ISFR) 2023 के आंकड़े पेश किए. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में ट्री कवर 15,427.11 वर्ग किलोमीटर था, जो कि 2023 में घटकर 15,075.5 वर्ग किलोमीटर रह गया। ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ दो सालों में हिमालय की हरियाली में बड़ी कमी आई है. इस क्षेत्र में जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित कुल 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। कार्बन स्टॉक में मामूली बढ़ोतरी एक तरफ जहां पेड़ों की संख्या कम हुई है, वहीं जंगलों में मौजूद कुल कार्बन स्टॉक में बहुत मामूली बढ़ोतरी देखी गई है. 2021 में ये 3,272.68 मिलियन टन था, जो 2023 में बढ़कर 3,273.10 मिलियन टन हो गया है. कार्बन स्टॉक का बढ़ना पर्यावरण के लिए अच्छा संकेत माना जाता है क्योंकि ये वातावरण से कार्बन सोखने की क्षमता को दिखाता है। जंगलों की स्थिति पर बात करते हुए मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, 'जंगलों का स्वास्थ्य सिर्फ उनकी हरियाली से नहीं मापा जाता. ये कई इकोलॉजिकल और बायोफिजिकल स्टैंडर्ड्स पर निर्भर करता है। भारतीय वन सर्वेक्षण क्यों करता है जंगलों की स्टडी? भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जंगलों की सेहत जांचने के लिए कई तरह के आंकड़े जुटाता है. इसमें मिट्टी की गहराई, मिट्टी का कटाव, वनस्पति की विशेषताएं और जंगलों को होने वाले खतरों की स्टडी की जाती है. ये सभी कारक मिलकर ये तय करते हैं कि किसी खास समय में जंगलों की स्थिति क्या है। हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण में हो रहे ये बदलाव विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि ये क्षेत्र न सिर्फ जैव विविधता बल्कि भारत की प्रमुख नदियों का भी स्रोत है।  

ईरान ने 14 दिन की जंग में US को भीख मंगवाया, दुबई बना घोस्ट टाउन! अमीरों ने छोड़ा ‘सबसे सुरक्षित’ शहर

दुबई ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग के कारण दुबई में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। पहले दुनिया के सबसे सुरक्षित और चमकदार शहरों में शुमार दुबई अब लगभग खाली नजर आ रहा है। विदेशी निवासी और पर्यटक बड़े पैमाने पर शहर छोड़ चुके हैं, जबकि बीचेस, पार्टी पूल, बीच क्लब और रेस्तरां सुनसान पड़े हैं। केवल स्थानीय मजदूर वर्ग ही बचा हुआ है जो अब खाली जगहों पर काम कर रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, शहर की यह स्थिति ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के हमलों से पैदा हुई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद, ईरान ने पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यूएई (अबू धाबी और अन्य इलाकों) में अमेरिकी बेस होने के कारण, ईरान ने यहां सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इसी तनाव ने दुबई की चकाचौंध को खौफ में बदल दिया है। दुबई से सामने आ रहे वीडियो में चकाचौंध से भरा रहने वाला यह शहर किसी घोस्ट टाउन जैसा दिख रहा है। 14 दिन की जंग में ही अमेरिका को भीख मंगवा दिया  अमेरिका और ईरान के भी जंग के साथ बयानबाजी भी काफी तेज हो गई है. ईरान के खर्ग द्वीप को तबाह करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बीच तेहरान ने भी बेहद चुभने वाला कटाक्ष किया है। शिया मुल्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि मात्र 14 दिन की जंग में हमने अमेरिका से भीख मंगवा दिया है. ईरान का यह बयान रूस से तेल खरीदने की अमेरिकी अपील को लेकर आया है. दरअसल, अमेरिका ने दुनिया के देशों से रूस से तेल खरीदने की अपील की है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल को थामा जा सके। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा है. वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अरागची ने यूरोपीय देशों को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि वे अमेरिका के इस ‘अवैध जंग’ को सपोर्ट कर रहे हैं. उनको लगता है कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी का इस अवैध जंग को सपोर्ट कर रूस के खिलाफ वाशिंगटन का समर्थन हासिल कर लेंगे. लेकिन, यह एक बकवास सोच है। ईरान के हमलों का असर: 1700 मिसाइल-ड्रोन, लेकिन 90% रोक दिए गए ईरान ने अमेरिकी-इजराइली हमलों के जवाब में पिछले दो हफ्तों में लगभग 1700 मिसाइलें और ड्रोन दुबई समेत यूएई पर दागे। यूएई की एयर डिफेंस सिस्टम ने करीब 90% हमलों को रोक लिया, लेकिन गिरते मलबे (डेब्री) ने बड़ा नुकसान पहुंचाया। बुर्ज अल अरब होटल, फेयरमॉन्ट द पाम, दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर, दुबई एयरपोर्ट और कई स्काईस्क्रेपर्स को नुकसान पहुंचा। एयरपोर्ट पर दो ड्रोनों के गिरने से चार लोग घायल हुए और उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं। दुबई मीडिया ऑफिस ने शुरुआत में कोई घटना नहीं हुई कहा, लेकिन तस्वीरें और रिपोर्ट्स ने सच्चाई उजागर कर दी। शहर खाली क्यों? एक्सपैट्स ने सामान बांधा, पालतू जानवर सड़कों पर छोड़े द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में रहने वाले हजारों अमीर विदेशी निवासी और पर्यटक शहर छोड़ चुके हैं। स्कूलों की स्प्रिंग ब्रेक शुरू होने के बावजूद पश्चिमी बच्चे नदारद हैं। बीच क्लबों और रेस्तरां में सन लाउंजर्स खाली पड़े हैं, जबकि पहले यहां इन्फ्लुएंसर्स और टूरिस्टों की भीड़ रहती थी। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई विदेशी निवासियों ने कहा कि जन-जीवन लगभग सामान्य है, लेकिन फोन पर शेल्टर अलर्ट, आसमान में फ्लैश और गिरते डेब्री की आग सब कुछ बदल देती है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिमी देशों के पेशेवर और रईस लोग चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भारी रकम चुकाकर भाग रहे हैं। रातों-रात शहर छोड़ने की जल्दबाजी में कई लोग अपने पालतू जानवरों तक को सड़कों पर लावारिस छोड़ गए हैं। एयरपोर्ट पर उड़ानें सीमित हैं, जिससे हजारों लोग फंस गए थे। अमेरिका ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए चार्टर फ्लाइट्स शुरू की हैं। टूरिज्म धड़ाम, जुमेराह बीच वीरान 'गल्फ टाइम्स' के अनुसार मध्य पूर्व में इस युद्ध के कारण पर्यटन उद्योग को रोजाना करीब 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। जुमेराह बीच रेजीडेंस (JBR), रेस्टोरेंट्स और दुबई मॉल जैसे इलाके, जहां पैर रखने की जगह नहीं होती थी, आज लगभग सुनसान पड़े हैं। दुनिया के सबसे बड़े फेरिस व्हील 'ऐन दुबई' के पहिए भी थम गए हैं। फंस गए आम मजदूर इस पूरी स्थिति का सबसे डरावना पहलू यह है कि जहां पैसे वाले लोग दुबई छोड़कर निकल गए, वहीं दक्षिण एशियाई देशों (भारत, पाकिस्तान, नेपाल आदि) के लाखों ब्लू-कॉलर वर्कर, टैक्सी ड्राइवर और होटल कर्मचारी यहीं फंस गए हैं। काम ठप होने से इनकी सैलरी रुक गई है और फ्लाइट्स का किराया तीन गुना तक बढ़ जाने के कारण इनके लिए स्वदेश लौटना नामुमकिन सा हो गया है। राहत की बात यह है कि इस अस्थिरता के बीच भारत सरकार और एयरलाइंस के प्रयासों से 1 से 7 मार्च के बीच 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक यूएई और खाड़ी देशों से सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। सरकार की प्रतिक्रिया और फ्री स्पीच पर अंकुश यूएई सरकार ने एयर डिफेंस को मजबूत किया और नागरिकों को आश्वासन दिया। लेकिन पुलिस ने चेतावनी दी है- हमले की तस्वीरें या वीडियो शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अब तक 21 लोगों पर अफवाह फैलाने का केस दर्ज किया जा चुका है, जिनमें एक 60 वर्षीय ब्रिटिश टूरिस्ट भी शामिल है। ब्रिटिश एंबेसी ने नागरिकों को सावधान किया है कि यूएई कानून बहुत सख्त हैं। कुल मिलाकर दुबई की स्थिति अभी भी 'खतरे से बाहर' नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर क्षति या हताहत नहीं हुए हैं। शहर की चमक कम हुई है, लेकिन मजदूर वर्ग और कुछ स्थानीय निवासियों के साथ जीवन जारी है। तेल की कीमतें, उड़ानें और पर्यटन पर असर वैश्विक स्तर पर पड़ रहा है।

कोविड पीड़ितों के लिए मुआवजा: ‘नो-फॉल्ट’ कंपेंसेशन पॉलिसी से मिलेगा न्याय या बढ़ेगी चुनौती?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें केंद्र सरकार को कोविड-19 वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट्स या इससे होने वाली मौतों के लिए 'नो-फॉल्ट' कंपेंसेशन पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया गया है. इस फैसले के अनुसार, प्रभावित परिवारों को यह साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि मौत या कोई गंभीर इफेक्ट्स के लिए राज्य सरकार किसी भी तरह से जिम्मेदार है. राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान के दौरान होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए राहत प्रदान करे. यह फैसला उन याचिकाओं पर आया है, जहां वैक्सीन लेने के बाद मौत या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का दावा किया गया था. यह निर्णय न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। हालांकि इस फैसले को लागू करने में बहुत सी व्यावहारिक चुनौतियां हैं. क्योंकि इसके कार्यान्वयन में इतनी तरह की जटिलताएं हैं जिसका निदान करना असंभव हो सकता है.पर एक देश और समाज के रूप में, हमें इस फैसले की गहराई को समझना होगा. यह फैसला अव्यावहारिक लग सकता है लेकिन लंबे समय में महत्वपूर्ण साबित होगा. फैसले की पृष्ठभूमि में कोविड महामारी के दौरान भारत में चलाया गया दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान है. करोड़ों लोगों को वैक्सीन दी गई, जिसने संक्रमण दर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, सरकारी आंकड़ों से भी पता चलता है कि कुछ मामलों में वैक्सीन के बाद मौतें हुईं  हैं. यह बात तो वैक्सीन बनाने वालों ने भी स्वीकार किया था कि कुछ मामलों में साइड इफेक्ट संभव है. दुनिया की कोई भी वैक्सीन अपने आप को हंड्रेड परसेंट सुरक्षित होने का दावा नहीं कर सकती हैं. पर दुनिया भर में तरह तरह के वैक्सीन आम जनता के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए लगाईं जाती हैं. शायद यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार को आधार बनाते हुए कहा कि जब वैक्सीनेशन राज्य-प्रायोजित कार्यक्रम है, तो प्रभावितों को अदालतों में लंबी लड़ाई लड़ने के बजाय सीधा मुआवजा मिलना चाहिए. 'नो-फॉल्ट' का मतलब है कि बिना दोष साबित किए राहत, जो कई विकसित देशों में पहले से लागू है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह भारत जैसे विकासशील देश में व्यावहारिक है? सबसे बड़ी चुनौती कार्यान्वयन की है. वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को साबित करना वैज्ञानिक रूप से जटिल है. कोविड वैक्सीन जैसे कोविशील्ड या कोवैक्सिन के बाद देश में बहुत सी मौतें हुईं हैं, लेकिन क्या हर दावे की जांच कैसे हो सकती है? अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पॉलिसी बनाने का आदेश दिया है, लेकिन सरकार कोई ऐसी सर्वसुलभ प्रक्रिया बना पाएगी . इसमें संदेह है. उदाहरण के लिए, अमेरिका या यूके में ऐसी पॉलिसी है, लेकिन उनके पास मजबूत स्वास्थ्य डेटा सिस्टम हैं। भारत में ग्रामीण इलाकों को छोड़िए शहरों में भी मेडिकल रिकॉर्ड इस तरह के नहीं हैं कि अदालत में यह साबित किया जा सके कि अमुक व्यक्ति की मौत कोविड के चलते हुई है. ग्रामीण इलाकों में तो मेडिकल रिकॉर्ड माशा अल्ला है. अब सवाल उठता है कि क्या वैक्सीन और मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए विशेषज्ञ पैनल बनाए जाएंगे? अगर हां, तो क्या सरकार के पास इतने प्रशासनिक संसाधन है कि वह इसे क्रियान्वित कर सकेगी? स्वास्थ्य मंत्रालय पहले से ही AEFI (एडवर्स इफेक्ट्स फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन) की निगरानी करता है, लेकिन मौतों के मामलों में जांच लंबी चलती है. नई पॉलिसी से दावों की बाढ़ आ सकती है, जिसमें वास्तविक और फर्जी दोनों शामिल होंगे.देश में दलालों के रैकेट सक्रिय हो जाएगा जो सामान्य मौतों को भी कोविड से हुई मौत साबित करना शुरू कर देंगे.   दुरुपयोग की आशंका से सिस्टम चरमरा सकता है, और वित्तीय बोझ जो बढ़ेगा वो अलग से है। इसके अलावा, यह फैसला वैक्सीन उत्पादकों की जिम्मेदारी को भी प्रभावित कर सकता है. वर्तमान में, वैक्सीन कंपनियां इंडेम्निटी क्लॉज के तहत सुरक्षित हैं, यानी वे सीधे जिम्मेदार नहीं. अगर राज्य मुआवजा देगा, तो क्या यह कंपनियों को और लापरवाह बना देगा? वैश्विक स्तर पर देखें तो WHO की COVAX योजना में भी ऐसी प्रावधान हैं, लेकिन भारत जैसे देश में जहां वैक्सीन आयात और उत्पादन दोनों होते हैं, यह जटिल हो जाता है। इन सब के बावजूद इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि एक लोकतांत्रिक समाज में, राज्य की जिम्मेदारी सिर्फ वैक्सीन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसके जोखिमों को भी संभालना है. महामारी ने दिखाया कि वैक्सीनेशन सामूहिक प्रयास था, लेकिन कुछ लोगों ने व्यक्तिगत कीमत चुकाई. ऐसे में, 'नो-फॉल्ट' पॉलिसी न्याय सुनिश्चित करती है. यह अनुच्छेद 21 को मजबूत करती है, जो जीवन के अधिकार को सिर्फ नकारात्मक (हानि न करने) नहीं, बल्कि सकारात्मक (रक्षा करने) रूप में देखता है। अदालत ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य संरक्षण का दायित्व निभाए, जो सार्वजनिक विश्वास बढ़ाएगा. कल्पना कीजिए, अगर भविष्य में कोई नई महामारी आई, तो लोग वैक्सीन से डरेंगे नहीं क्योंकि वे जानेंगे कि दुर्घटना में सहायता मिलेगी. यह सामाजिक न्याय का प्रतीक है, जहां गरीब परिवारों को अदालतों की लंबी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी. कई मामलों में, जैसे दो युवतियों की मौत पर याचिका, परिवारों ने संघर्ष किया. यह फैसला उन्हें राहत देगा और समाज को संदेश देगा कि राज्य अपने नागरिकों के साथ खड़ा है।

राजगढ़ में गैस एजेंसियों के लिए नए नियम, अधिक पैसे लेने पर कलेक्टर ने कार्रवाई का किया ऐलान

 राजगढ़  कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा जिले में आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं, विशेष रूप से एलपीजी गैस की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोकने तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। गैस वितरकों के लिए स्टॉक और दरों का प्रदर्शन अनिवार्य जारी आदेश के अनुसार राजगढ़ जिले में संचालित सभी एलपीजी गैस वितरकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने गैस गोदाम/एजेंसी परिसर के बाहर प्रतिदिन उपलब्ध स्टॉक एवं दरों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करेंगे। इसके साथ ही गैस वितरण से संबंधित वाहनों पर भी स्टिकर एवं बैनर लगाकर सही जानकारी का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेंगे। शिकायत निवारण और मूल्य नियंत्रण के निर्देश आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक गैस वितरक अपने उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण हेतु टोल-फ्री नंबर जारी कर उसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करेंगे तथा प्राप्त शिकायतों की विधिवत पंजी संधारित करेंगे। साथ ही निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर गैस रिफिलिंग नहीं की जाएगी। साप्ताहिक रिपोर्ट और वैधानिक कार्रवाई कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि सभी गैस एजेंसियां प्रत्येक सप्ताह वितरण से संबंधित जानकारी संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उपलब्ध कराएंगी। नियमों का पालन नहीं करने पर “द्रवित पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश 2000” के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी पर रोक इसके अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति, संस्था अथवा समूह द्वारा सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित भ्रामक अथवा गलत जानकारी पोस्ट अथवा शेयर नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 सहित अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

सामाजिक सद्भाव बढ़ाने का प्रभावी तरीका है सामूहिक विवाह: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सामाजिक सद्भाव बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं सामूहिक विवाह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले बेटियों के जन्म से ही विवाह की सताती थी चिंता, अब सरकार कर रही बेटियों का कन्यादान मुख्यमंत्री कन्या/विवाह योजना से जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का बस रहा है घर शुजालपुर में हुआ सर्व धर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन सम्मेलन में हुआ 162 बेटियों का विवाह और 38 बेटियों का निकाह भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी संस्कृति के मूल में सामाजिकता है, सद्भाव है और इस सद्भाव को बढ़ाने में सामूहिक विवाह सम्मेलन एक बड़ा ही मजबूत और कारगर माध्यम है। बेटियों के पाणिग्रहण संस्कार से बड़ा पुण्य का, कोई दूसरा काम हो ही नहीं सकता। पहले बेटी के जन्म होने के साथ ही उसके परिवार को बेटी की शादी की चिंता सताती थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार बेटियों का कन्यादान और विदाई कर रही है। इस योजना से प्रदेश के गरीब-वंचित और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का घर बस रहा है। जन्म से लेकर पढ़ाई, नौकरी, मातृत्व और विवाह तक हमारी सरकार हर कदम पर बहनों-बेटियों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि मितव्ययिता बेहद जरूरी है। इसलिए शादी-ब्याह में होने वाले फिजूलखर्चों से हमेशा बचें। अपने बेटे-बेटियों का विवाह/निकाह सामान्य समारोह या सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही करें। इससे जो धन बचे, वह अपने बच्चों के बेहतर जीवन के लिए बचाकर रखें। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने अपने पुत्र का विवाह भी सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही कराया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से शुजालपुर (जिला शाजापुर) में हुए सर्व धर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार बेटियों के सम्मान, इनके सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के लिए सदैव ही प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवविवाहित जोड़ों को बधाई और सफल वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया। सम्मेलन में 200 बेटियों का सामूहिक विवाह/निकाह सम्पन्न हुआ। इसमें 162 बेटियों का विधि-विधान से विवाह और 38 बेटियों का कबूलियत निकाह कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नवविवाहित जोड़े को मंगलाशीष के तौर पर सरकार की ओर से गृहस्थी के लिए 49-49 हजार रूपए दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक विवाह सम्मेलन वर-वधु को जन्म-जन्मांतर तक साथ देने की अमरता की बेला का उत्सव है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह सामूहिक विवाह सम्मेलन आगे और भी अधिक विशाल बनेगा तथा सभी जरूरतमंद परिवारों के लिए सबसे बड़े मददगार के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने विवाह सम्मेलन में कहा कि हमारी सरकार ने समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं बनाई हैं। सामाजिक सुरक्षा और सद्भाव के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना ने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। आज के दौर में विवाह आयोजनों में फिजूलखर्ची बढ़ रही है। यह समाज के हित में नहीं है। इसलिए सभी को अपने पुत्र-पुत्रियों का विवाह सामूहिक विवाह और ऐसे आयोजनों में ही कराने की ओर बढ़ना होगा।  परमार ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सभी का जीवन प्रेम, विश्वास, सम्मान और संस्कारों से परिपूर्ण रहे। सर्व धर्म सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिंह सिसोदिया, जनपद पंचायत शुजालपुर की अध्यक्षा मती सीताबाई रामचन्दर पाटोदिया, उपाध्यक्ष मती मंजूबाई गोविन्दसिंह मेवाड़ा, नगर पालिकाध्यक्ष शुजालपुर मती बबीता परमार,  विजय सिंह बैस,  कृपाल सिंह मेवाड़ा,  अशोक नायक,  नरेन्द्र सिंह यादव,  देवेन्द्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं वर-वधु के परिजन उपस्थित थे।  

सिंगरौली में हिंसक झड़प: अडाणी पावर प्लांट में आगजनी और तोड़फोड़, पुलिस की गाड़ियां पलटीं

सिंगरौली जिले के माढ़ा थाना क्षेत्र के बंधौरा क्षेत्र स्थित अडाणी पावर प्लांट में झारखंड निवासी श्रमिक की मौत के बाद शनिवार को हालात तनावपूर्ण हो गए। गुस्साए मजदूरों ने सुबह जमकर हंगामा किया और ठेकेदार कंपनी के कार्यालय में आग लगा दी। पावर प्लांट की एक साइट में भी आगजनी की गई। परिसर में खड़ी 12 से अधिक गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की और उन्हें पलटा दिया। थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी के वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में करीब 200 पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। शव छिपाने का आरोप लगाया अडाणी ग्रुप से जुड़े बंधौरा पावर प्लांट में करीब 10 हजार श्रमिक काम करते हैं। ठेका कंपनी पावर मेक के तहत काम करने वाले झारखंड निवासी श्रमिक लल्लन सिंह (38) पुत्र रामदास चंद्रवंशी, निवासी गढ़वा, झारखंड की शुक्रवार रात आवास पर मौत हो गई। इस दौरान अफवाह फैली कि श्रमिक की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हुई है। मजदूरों का आरोप था कि श्रमिक की मौत के बाद कंपनी प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और शव को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। शीशे तोड़े, गाड़ियों में भी आग लगाई आक्रोशित मजदूरों ने ठेका कंपनी के कार्यालय परिसर में खड़े वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और कुछ वाहनों में आग भी लगा दी। आगजनी के कारण परिसर में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागते नजर आए। सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ काफी आक्रोशित थी। कंपनी के कर्मचारियों से भी मारपीट की गई, जिससे वे मौके से भाग खड़े हुए। कुछ श्रमिक भी सामान समेटकर चले गए हैं। मौके पर पहुंचे अधिकारी, भारी पुलिस बल तैनात पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया। पुलिस ने किसी तरह मजदूरों को समझाकर माहौल शांत कराया। मजदूरों का कहना था कि मृत श्रमिक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मृतक मजदूर का शव झारखंड रवाना कर दिया गया है। कंपनी का दावा, हृदयाघात से हुई मौत कंपनी प्रबंधन का कहना है कि श्रमिक की मौत उसके आवास पर हुई है। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हृदयाघात बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रबंधन का कहना है कि नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच की बात कह रहा है। कंपनी के सिक्योरिटी इंचार्ज राकेश कुमार का कहना है कि तोड़फोड़ और आगजनी से करोड़ों का नुकसान हुआ है।  

‘‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस से साइंटिफिक हुआ फसल आंकलन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़कर फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार की ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली से उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) से विश्लेषण किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आंकलन को वैज्ञानिक आधार मिला है और किसानों को योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म और ‘सारा’ एप्लिकेशन से क्रॉप मैपिंग और फसल गिरदावरी की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। डीप लर्निंग तकनीक से ‘सारा’ ऐप द्वारा प्राप्त लाखों तस्वीरों का विश्लेषण कर खेत स्तर पर बोई गई फसलों के प्रकार का सत्यापन किया जाता है, जिससे फसलों की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन संभव हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्मार्ट क्रॉप मैपिंग और पहचान के लिए उपग्रह चित्रों और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल का उपयोग कर भूमि खंड (खसरा) स्तर पर फसलों की पहचान की जा रही है। साथ ही अधिसूचित फसलों के लिए ‘पटवारी हल्का’ स्तर पर उपज का पूर्वानुमान भी लगाया जा रहा है। इससे कृषि योजना निर्माण, खाद्यान्न खरीद व्यवस्था और फसल बीमा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है। इस तकनीकी पहल से फसल पहचान और आकलन की सटीकता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। वर्ष-2022 में जहाँ सटीकता 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष-2025 तक यह बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत हो गई है। हाल के रबी और खरीफ सीजन में इस प्रणाली से 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया गया है, जिससे रीयल-टाइम फसल पहचान संभव हुई है। इस प्रणाली से 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों में बोई गई फसलों का डिजिटल मैपिंग किया गया है। साथ ही प्रमुख फसलों की पहचान और डिजिटल फसल गिरदावरी का सत्यापन भी किया जा रहा है। वर्ष 2023 से ‘पटवारी हल्का’ स्तर के लगभग 22 हजार क्षेत्रों में फसल उत्पादन का आंकलन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भू-स्थानिक (जियो-स्पेशियल) तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित यह प्रणाली किसानों, सर्वेक्षकों और फसल बीमा कंपनियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। इससे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर आकलन संभव होगा, जिससे किसानों को मुआवजा सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्व विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से विकसित यह पहल मध्यप्रदेश की कृषि व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को आय सुरक्षा और बेहतर कृषि प्रबंधन का लाभ मिलेगा।  

I love India, love Modi’, प्रेसिडेंट ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकवाद का सबसे बड़ा निर्यातक बताया

 नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक और धुर-दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता लौरा लूमर ने कहा है कि दुनिया को पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात "इस्लामी आतंकवाद" है. लौरा लूमर ने सुझाव दिया कि अमेरिका को पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के साथ बिल्कुल भी गलबहियां नहीं करनी चाहिए. लौरा लूमर अपनी मुस्लिम विरोधी बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं. वे स्वयं को गौरवशाली प्राउड इस्लामोफोब कहती हैं. लौरा ने जिहाद फैलाने के लिए पाकिस्तान को खुले तौर पर लताड़ा। लौरा लूमर के साथ गरमागरम चर्चा हुई. इस्लामी आतंकवाद पर तीखी टिप्पणी करते हुए लूमर ने आरोप लगाया कि दुनिया भर में हुए कई आतंकवादी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़े हो सकते हैं. ट्रंप के चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ लगातार दिखने वालीं लौरा ने जोर देकर कहा कि भारत और ब्रिटेन में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े थे। लौरा ने कहा, "दुनिया को पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात इस्लामी आतंकवाद है, और मेरा मानना ​​है कि अमेरिका को पाकिस्तानी सरकार के साथ बिल्कुल भी नज़दीकी नहीं बढ़ानी चाहिए," लौरा ने कहा कि उन्होंने कई बार अमेरिकी सरकार की इस बात के लिए आलोचना की है।  लौरा लूमर ने बातचीत के बीच कहा कि, "पाकिस्तान एक खुले तौर पर जिहादी और शरिया-समर्थक देश के तौर पर काम करता है, और जब आप दुनिया भर में हुए कई इस्लामी आतंकी हमलों को देखते हैं, तो अक्सर उनका कोई न कोई तार पाकिस्तान से जुड़ा होता है।  'आतंकवाद ज्यादातर पाकिस्तान से आ रहा है' अपने दावे को मजबूत करने के लिए लूमर ने पिछले हफ़्ते एक पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को दोषी ठहराए जाने का ज़िक्र किया. मर्चेंट पर ट्रंप और अमेरिका के बड़े नेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोप था। लौरा लूमर ने आगे कहा कि इस घटना से एक बात साफ हो जाती है. ज़्यादातर आतंकवाद मुख्य रूप से पाकिस्तान से ही आ रहा है. उन्होंने कहा कि आप देखते हैं कि जब भी भारत पर इस्लामिक आतंक का हमला होता है, ब्रिटेन पर इस्लामिक आतंक का हमला होता है, आप देख रहे होंगे कि यूके का इस्लामिक टेकओवर हो गया है। अमेरिकी दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट ने कहा कि उन्होंने इस बारे में राष्ट्रपति ट्रंप से बात की है, और उन्होंने कहा है कि वे ओवल ऑफिस में इस्लामिक नेताओं की मीटिंग नहीं देखना चाहती हैं. लेकिन वे अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और मैं उन्हें नहीं कह सकती हूं कि उन्हें क्या नहीं करना चाहिए. राष्ट्रपति ट्रंप को डिप्लोमैटिक होना पड़ता है और उन्हें दुनिया भर के नेताओं से मिलना पड़ता है. मैं समझती हूं कि राष्ट्रपति ट्रंप को जो करना होता है वे वही करते हैं. कोई सबसे बड़ी गलती यही करेगा कि वह राष्ट्रपति को बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए. मैं उनके लीडरशिप में विश्वास करती हूं। इमिग्रेशन पर अपनी विवादित टिप्पणियों और कट्टर विचारों के लिए जानी जाने वाली और ट्रंप की कट्टर समर्थक लूमर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में PM मोदी को "एक शानदार नेता और मेरा अच्छा दोस्त" बताया है। लौरा लूमर का ये पहला भारत दौरा है. कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया कि वे प्राय: कितनी बार राष्ट्रपति ट्रंप से बात करती हैं. तो लौरा ने कहा कि इस सप्ताह मैंने तीन बार उनसे बात की है. मैं व्हाइट हाउस में उनसे मिलती रहती हूं. कुल मिलाकर मेरी उनसे बात होती रहती है. लौरा लूमर ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ हमारी दोस्ती इस वजह से महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वे मुझ पर भरोसा करते हैं कि मैं उन्हें सलाह दे सकती हूं कि कौन उनका वफादार है और कौन नहीं। कार्यक्रम में लौरा ने कहा कि वे काफी रिसर्च करती रहती हैं और देखती रहतीं है कि राष्ट्रपति के अंडर काम करने वाले कौन-कौन लोग हैं जो उनके एजेंडे को डिरेल करने में लगे रहते हैं या फिर अमेरिका फर्स्ट एजेंडा को नुकसान पहुंचाते हैं. मैं उनको तमाम चीजों पर अपडेट करती रहती हूं. लौरा से जब पूछा गया कि क्या वे ट्रंप प्रशासन में काम करना चाहेंगी. इस पर उन्होंने कहा कि ये उनके लिए गर्व की बात होगी. लौरा ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के कई लोग उन्हें राष्ट्रपति तक पहुंचने से रोकते रहते हैं। लौरा लूमर ने कहा कि लोगों को बुरा लग सकता है लेकिन 'इस्लाम डेथ कल्ट' है और दुनिया के लिए कैंसर है।