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1 मार्च से बदलेंगे अहम नियम: ट्रेन टिकट, LPG, UPI से लेकर सिम तक की कीमतों में बदलाव

नई दिल्‍ली हर महीने आर्थिक बदलाव होते हैं, जो लोगों की मंथली खर्च को प्रभावित करते हैं. मार्च 2026 में भी कई महत्‍वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, जिसमें एलपीजी गैस से लेकर सिम और रेलवे टिकट संबंधी नियम शामिल हैं. ये बदलाव आपकी जेब को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं. आइए जानते हैं अगले महीने से कौन-कौन से नियम बदल रहे हैं.  एलपीजी गैस सिलेंडर  हर महीने की शुरुआत में एलपीजी के दाम में बदलाव आता है. पिछले कुछ समय से कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में ही बदलाव देखा गया है. रसोई गैस सिलेंडर के दाम अभी भी स्थिर हैं. पिछले महीने कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में लगभग ₹49 तक बढ़ोतरी की थी. इस महीने भी इसमें बदलाव की उम्‍मीद की जा रही है.   रेलवे टिकट  1 मार्च 2026 से जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने का नियम बदलने जा रहा है. अब भारतीय रेलवे का पुराना UTS ऐप 1 मार्च से बंद किया जा सकता है, जिसकी जगह पर अब नया RailOne ऐप पूरी तरह से एक्टिव हो जाएगा. इस नए एप पर जनरल टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और लोकल यात्रा से जुड़ी सभी चीजें उपलब्ध होंगी.   सिम बाइंडिंग का नियम सरकार डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए 1 मार्च से सिम बाइंडिंग का नया नियम लेकर आ रही है. इस नियम के तहत आपका WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप्‍स अब सीधे आपके सिम से लिंक रहेंगे. अगर आप अपने फोन से सिम निकालते हैं तो ये ऐप्‍स तुरंत काम करना बंद कर देंगे. आप वाई-फाई या किसी अन्‍य नेटवर्क के माध्‍यम से भी इन ऐप्‍स को बिना सिम के ऑपरेट नहीं कर पाएंगे.  UPI पेमेंट  1 मार्च से डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सुरक्षा को और मजबूत किया जाने वाला है. बड़ी रकम का ऑनलाइन ट्रांसफर अब सिर्फ UPI PIN से नहीं होगा, बल्कि बैंक हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए अतिरिक्त बायोमेट्रिक्स या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होने जा रहा है.  मिनिमम बैलेंस का नियम देश के बड़े सरकारी बैंक 1 मार्च 2026 से मिनिमम बैलेंस को लेकर बदलाव करने जा रहे हैं. पहले किसी एक दिन बैंक अकाउंट में बैलेंस कम होने पर पेनल्‍टी  लग जाती थी, लेकिन अब एवरेज मंथली बैलेंस के आधार पर पेनल्‍टी लगाई जाएगी.   CNG, PNG और ATF के रेट पेट्रोलियम डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को हवाई जहाज में इस्‍तेमाल होने वाले एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ CNG (सीएनजी) और पीएनजी (PNG) के दामों में बदलाव करती हैं.  उम्‍मीद है कि 1 मार्च से भी इन  नियमों में बदलाव हो सकता है.

भील समुदाय से निशानेबाजी सीखे थे आजाद, उनके जन्मस्थान पर होगा बड़ा पार्क, CM का ऐलान

आलीराजपुर महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की विरासत को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार उनकी जन्मस्थली भाभरा में एक बड़ा पार्क बनाएगी। इस बात की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  की। आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ में स्थित भाभरा में हुआ था और उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को देश के लिए अपनी जान दे दी थी। महानायक की पुण्यतिथि पर भाभरा में आयोजित 'आजाद स्मृति समारोह' में बोलते हुए, यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद नगर (भाभरा) में उनके नाम पर एक बड़ा पार्क बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद 14 साल की छोटी सी उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे और आजादी की लड़ाई में उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। भील समुदाय से सीखी थी निशानेबाजी यादव ने आजाद को एक बेहतरीन निशानेबाज बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना बचपन अलीराजपुर के भील समुदाय के बच्चों के बीच बिताया था और उनसे ही निशानेबाजी की कला भी सीखी थी। यादव ने कहा, ' आजाद की विरासत से जुड़ी जगहों को भी संस्कृति विभाग की मदद से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।' आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को संजोया जा रहा यादव ने कहा, 'राज्य सरकार आदिवासी महापुरुषों की विरासत को बचाने के लिए समर्पित है। खरगोन में टंट्या भील के नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाई गई है। इसी तरह, आजादी की लड़ाई के दूसरे आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को भी संजोकर रखा जा रहा है।' आलीराजपुर जिले को मिली 171 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात इस दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में 171 करोड़ रुपए की लागत वाले 49 विकास कार्यों का उद्घाटन और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि जिले में 1,800 करोड़ रुपए की लागत वाले नर्मदा सिंचाई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, और इसके पूरा होने पर 170 गांवों को पानी मिलेगा। उदगढ़ में मशहूर आदिवासी त्योहार भगोरिया में शामिल हुए यादव ने कहा कि इस अनुभव ने उनका दिल खुशी से भर दिया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि MP सरकार ने भगोरिया को राष्ट्रीय त्योहार के तौर पर मनाने का फैसला किया है। भगोरिया त्योहार होली से ठीक पहले मनाया जाता है, जिसमें हर हफ़्ते मेले लगते हैं जो पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासियों के रंगीन त्योहारों को दिखाते हैं। ये मेले अलीराजपुर, झाबुआ, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में 100 से ज्यादा जगहों पर लगते हैं।

शिवराज सिंह ने सड़क पर घायल युवक को मदद दी, अपनी गाड़ी से भेजवाया अस्पताल

 भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक फिर मिशाल पेश की है. जिसकी लोग तारीफ कर रहे हैं. हुआ ये कि वह भोपाल से ग्वालियर जा रहे थे, इस दौरान एक युवक सड़क पर घायल पड़ा था, जबकि उसे भीड़ ने घेरकर रखा था. इस दौरान जब शिवराज सिंह की नजर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया और खुद अपनी गाड़ी से युवक को अस्पताल पहुंचवाया. इसको लेकर उन्होंने खुद एक्स पर एक पोस्ट किया है. एक्स पर किए पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैं भोपाल से ग्वालियर की ओर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था. रास्ते में सड़क किनारे एक घायल युवक अचेत अवस्था में दिखाई दिया. चारों ओर भीड़ थी, लोग खड़े थे, देख रहे थे. पर कोई आगे नहीं बढ़ रहा था. मैंने तुरंत गाड़ी रुकवाई. घायल युवक के पास पहुंचा और अपनी गाड़ी में तत्काल अस्पताल पहुंचाया. साथ ही डॉक्टर से बातचीत कर समुचित उपचार की व्यवस्था की.  श्यामला हिल्स के पास रुका काफिला जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री का काफिला श्यामला हिल्स क्षेत्र से गुजर रहा था. किलोल पार्क के पास सड़क किनारे एक व्यक्ति घायल अवस्था में दिखाई दिया. यह देखते ही शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल काफिला रुकवाया और स्वयं वाहन से उतरकर घायल के पास पहुंचे. उन्होंने आसपास मौजूद लोगों से तुरंत अस्पताल ले जाने को कहा. इतना ही नहीं, मंत्री ने घायल युवक को खुद सहारा देकर उठाया और अपने ही काफिले की गाड़ी से अस्पताल भिजवाया. जाते समय उन्होंने घायल से कहा कि तुम अस्पताल जाओ, हम फोन करवा रहे हैं. एक्स पर लिखा, नर सेवा ही नारायण सेवा इस घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ''नर सेवा ही नारायण सेवा.'' उन्होंने कहा कि, ''मानवीय संवेदना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है. ग्वालियर के लिए रवाना होते समय रास्ते में घायल युवक को देखकर उन्होंने तत्काल मदद सुनिश्चित की.''   वीडियो वायरल , सोशल मीडिया पर सराहना घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. समर्थकों और आम नागरिकों ने केंद्रीय मंत्री की संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की. कई लोगों ने इसे जनप्रतिनिधि के कर्तव्य और मानवीय मूल्यों का उदाहरण बताया. बताया जा रहा है कि मंत्री अपने आवास से एयरपोर्ट जा रहे थे, तभी उनके सामने यह घटना दिखी. जिसके बाद केंद्रीय मंत्री ने प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर घायल को मदद पहुंचाई. पहले भी दिखा चुके हैं संवेदनशीलता यह पहला मौका नहीं है जब शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह मानवीय पहल की हो. जुलाई 2025 में भी भोपाल के अवधपुरी इलाके में एक कार्यक्रम में जाते समय चेतक ब्रिज पर हादसे में घायल युवक की उन्होंने मदद की थी. उस समय भी उन्होंने काफिला रुकवाकर घायल को अस्पताल पहुंचाया और उपचार की व्यवस्था कराई थी.  शिवराज ने लोगों से की ये अपील हमने अक्सर देखा है कि इस तरह की घटनाओं में हम मदद के लिए हाथ बढ़ाने की बजाय तमाशबीन बनकर देखते रहते हैं, जिससे कीमती समय व्यर्थ हो जाता है और घायल व्यक्ति का जीवन खतरे में पड़ जाता है. एक अध्ययन के अनुसार हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार मिल जाए, तो लगभग 50% जीवन बचाए जा सकते हैं. सोचिए, हमारी छोटी सी मदद और समय पर बढ़ाया गया एक हाथ कितनी माताओं की गोद सूनी होने से बचा सकता है. कितने बच्चों के सिर से पिता का साया हटने से रोक सकता है और कितनी बहनों के विश्वास को टूटने से बचा सकता है. मित्रों, किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा पुण्य है. सेवा ही सच्चा धर्म है और परोपकार ही हमारा कर्तव्य है. जब भी ऐसी स्थिति सामने आए तो आगे बढ़िए और मदद कीजिए. आपकी एक मदद किसी का जीवन बचा सकती है.  

बड़ी जीत की तलाश में पाकिस्तान, आखिरी मैच में सम्मान बचाने उतरेगा श्रीलंका

पाल्लेकल अगर मगर की कठिन डगर पर फंसा पाकिस्तान सेमीफाइनल में जगह बनाने की अपनी उम्मीद को जीवंत रखने के लिए शनिवार को यहां वाले टी20 विश्व कप सुपर आठ के अपने अंतिम मैच में बड़ी जीत हासिल करने की कोशिश करेगा जबकि संघर्षरत श्रीलंका सम्मानजनक विदाई लेने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा। पाकिस्तान का प्रदर्शन अभी तक अच्छा नहीं रहा है और वह अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर है। इस ग्रुप से इंग्लैंड पहले ही सेमीफाइनल में जगह बना चुका है जबकि न्यूजीलैंड और पाकिस्तान अंतिम चार में जगह बनाने की होड़ में हैं। श्रीलंका अपने पहले दो मैच हार कर पहले ही सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया है। अगर पाकिस्तान और न्यूजीलैंड की बात करें तो कीवी टीम बेहतर स्थिति में नजर आ रही है। न्यूजीलैंड के तीन अंक हैं और उसका नेट रन रेट (3.050) भी पाकिस्तान से बेहतर है। पाकिस्तान का अभी तक केवल एक अंक है और उसका नेट रन रेट भी माइनस 0.461 है। लेकिन पाकिस्तान के लिए अभी सारी उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं और वह सेमीफाइनल में जगह बना सकता है बशर्ते इंग्लैंड शुक्रवार को न्यूजीलैंड को बड़े अंतर से हरा दे और इसके बाद सलमान आगा की अगुवाई वाली टीम श्रीलंका पर बड़ी जीत हासिल कर दे। पाकिस्तान के बल्लेबाजों और गेंदबाजों के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चुनौती है क्योंकि अभी तक टूर्नामेंट में वे अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। पाकिस्तान की तरफ से सलामी बल्लेबाज साहिबजादा फरहान ही अभी तक अच्छा प्रदर्शन कर पाए हैं। उन्होंने 70.75 की औसत से 283 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं। उनका स्ट्राइक रेट 158.10 है। फरहान को छोड़कर पाकिस्तान की टीम का कोई भी अन्य विशेषज्ञ बल्लेबाज इस प्रतियोगिता में तिहरे अंक का आंकड़ा नहीं छू पाया है। उसकी तरफ से सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में ऑलराउंडर शादाब खान दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने 111 रन बनाए हैं। कप्तान सलमान आगा (44 रन), साइम अयूब (70) और स्टार बल्लेबाज बाबर आजम (91) ने निराश ही किया है। ऐसे में पाकिस्तान की उम्मीदें फखर जमां पर टिकी होंगी। पाकिस्तान के गेंदबाजी आक्रमण में में उस्मान तारिक (10 विकेट) की मौजूदगी से उसे मजबूती मिली है। इसके अलावा शाहीन शाह अफरीदी ने इंग्लैंड के खिलाफ चार विकेट लेकर कुछ हद तक फॉर्म हासिल कर ली है। उस मैच में हालांकि वह अपनी टीम को जीत दिलाने में नाकाम रहे थे। श्रीलंका के पास अपने उत्साही प्रशंसकों को खुश करने का यह आखिरी मौका है लेकिन इसके लिए उसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना पड़ेगा। श्रीलंका इस टूर्नामेंट का सह मेजबान है। पिछली बार जब 2011 में श्रीलंका सह-मेजबानी कर रहा था, तब वह उपविजेता रहा था। दासुन शनाका की टीम ने शानदार शुरुआत की और ग्रुप चरण में ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त देकर खिताब के दावेदारों में अपना नाम शामिल कर लिया था। लेकिन श्रीलंका उस जीत के बाद जिम्बाब्वे, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार तीन मैच हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पथुम निसांका का शतक सुदूर अतीत की किसी घटना जैसा लगता है, क्योंकि श्रीलंका खेल की प्रत्येक विभाग में जूझ रहा है। श्रीलंका की बल्लेबाजी में गहराई और दृढ़ता दोनों की कमी रही है, जिसके चलते वे नियमित रूप से जल्दी विकेट गंवाते रहे हैं और दबाव वाली परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं। उसके गेंदबाज भी विरोधी टीम के बल्लेबाजों के लिए खास परेशानी नहीं खड़ी कर पाए हैं। श्रीलंका के गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड को मैच के आखिरी पांच ओवरों में तेजी से रन बनाने का मौका दिया, जबकि मैच पूरी तरह से उनके नियंत्रण में था। इसके बाद बल्लेबाज भी नहीं चल पाए और उसकी टीम को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। आलम यह था कि अपनी टीम के निराशाजनक प्रदर्शन से क्षुब्ध श्रीलंका के प्रशंसक न्यूजीलैंड के जयकारे लगा रहे थे। टीम इस प्रकार हैं: श्रीलंका: दासुन शनाका (कप्तान), कुसल मेंडिस (विकेटकीपर), कामिल मिशारा, पथुम निसांका, कुसल परेरा (विकेटकीपर), पवन रत्नायके, चैरिथ असलांका, दुशान हेमंथा, जेनिथ लियानगे, कामिंडु मेंडिस, दुष्मंथा चमीरा, दिलशान मदुशंका, प्रमोद मदुशन, महीश थीक्षाना, दुनिथ वेललागे। पाकिस्तान: सलमान अली आगा (कप्तान), बाबर आजम, फखर जमां, ख्वाजा नफे (विकेट कीपर), साहिबजादा फरहान, उस्मान खान (विकेट कीपर), फहीम अशरफ, मोहम्मद नवाज, सैम अयूब, शादाब खान, अबरार अहमद, नसीम शाह, सलमान मिर्जा, शाहीन शाह अफरीदी, उस्मान तारिक। मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे शुरू होगा।  

विधानसभा में मंत्री विजयवर्गीय का बड़ा बयान: अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जल्द होगा कड़ा कदम

भोपाल ध्य प्रदेश की विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने  अवैध कॉलोनियों को लेकर बड़ी घोषणा की। सीधी विधायक रीति पाठक के प्रश्न काल में पूछे सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि अब अवैध कॉलोनियों पर कड़ा कानून लागू किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तीन महीने के भीतर सख्त नियम लागू होंगे।   विजयवर्गीय ने सीधी जिले के सवाल पर कहा कि सरकार ने शहर के पुराने बस स्टैंड को गिराकर नया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए लगभग 7 करोड़ रुपए की राशि पहले ही स्वीकृत कर दी थी। विकास कार्य में देरी के कारण मंत्री ने बताया कि निविदा प्रक्रिया में समय लगने के कारण अभी तक कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है, लेकिन इसे जल्द ही शुरू करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण का काम अगले कुछ महीनों में प्रारंभ कर दिया जाएगा। अवैध कॉलोनियों पर सख्त रुख सीधी नगरपालिका क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में बिना रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन के कई अवैध कॉलोनियों का निर्माण हुआ है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीइसके अलावा, जिन अवैध कॉलोनियों को वैध किया जा सकता है, उन पर विचार किया जाएगा और जो वैध नहीं हो सकतीं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि  सीवर लाइन निर्माण परियोजना सीधी नगरपालिका क्षेत्र के लिए लंबे समय से मांग की जा रही सीवर लाइन निर्माण परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति जल्द ही जारी कर दी जाएगी। मंत्री ने बताया कि यह परियोजना शहरवासियों के लिए जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विधायक ने किया इस एलान का स्वागत सीधी विधायक रीति पाठक ने मंत्री के इस एलान का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न केवल शहर का विकास होगा, बल्कि अवैध कॉलोनियों की समस्या पर भी सख्त कदम उठाए जाने से नागरिकों को राहत मिलेगी। 

मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण

हर आंगनबाड़ी केंद्र का होगा स्वयं का भवन-मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री का निर्देश, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के खुद के भवन नहीं, उनका कराएं निर्माण  प्रदेश में 1.89 लाख केंद्र, 76 हजार को नए भवनों की आवश्यकता सीएसआर से सहयोग लें, राज्य सरकार भी करेगी सहयोग: मुख्यमंत्री  प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल की उपयोगिता पर करें विचार: मुख्यमंत्री   नए आंगनबाड़ी भवनों में होगा आधुनिक व समावेशी सुविधाओं का समावेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके स्वयं के भवनों में संचालित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 03 से 06 वर्ष आयु के बच्चे आते हैं और ये केंद्र प्री-प्राइमरी के रूप में भी उपयोगी हैं। ऐसे में बच्चों की सुविधा, पठन-पाठन की उत्कृष्ट व्यवस्था तथा भवनों का आकर्षक स्वरूप सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 76 हजार केंद्र अभी अपने स्वयं के भवनों में नहीं चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों के निर्माण में कॉरपोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) का सहयोग लिया जा सकता है और आवश्यकतानुसार राज्य सरकार भी वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए प्री-फैब्रिकेटेड मॉडल अपनाया जा सकता है। उन्होंने एक मानक मॉडल तैयार कर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जहाँ भी संभव हो, प्राथमिक विद्यालयों के प्रांगण में ही बाल-मित्र आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाए, ताकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित एकीकृत सेवाएँ एक ही स्थान पर सहजता से उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा के दौरान कहा कि बच्चों, गर्भवती माताओं और समुदाय को सुरक्षित, स्वच्छ तथा आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों की बुनियाद हैं। राज्य सरकार आंगनबाड़ी ढाँचे को पूरी तरह रूपांतरित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। यह मिशन ‘स्वस्थ बचपन-समर्थ उत्तर प्रदेश’ को नई गति देगा। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रस्तावित नए आंगनबाड़ी भवनों का मॉडल समावेशी एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें पेयजल सुविधा, विद्युत व्यवस्था, शौचालय, खेल-आधारित गतिविधियों हेतु पर्याप्त ‘प्ले एरिया’, किचन शेड, हॉट-कुक्ड मील की व्यवस्था, लो-हाइट वॉश यूनिट, बाल-मित्र शौचालय, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु पृथक कक्ष तथा रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सहित पोषण वाटिका जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होंगी।

कक्षा 1 से 12वीं तक मप्र में सरकारी स्कूलों के नामांकन में लगातार गिरावट दर्ज

भोपाल  मप्र के सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन लगातार कम हो रहा है। 2015-16 से 2024-25 के बीच कक्षा 1 से 12वीं तक के नामांकन में 22.03 लाख तक कमी दर्ज की गई है। विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि नामांकन में गिरावट की वैज्ञानिक जांच के लिए 8 मई 2025 को 'अटल बिहारी सुशासन संस्थान' को पत्र लिखा गया था। हैरानी की बात यह है कि विभाग द्वारा रिमाइंडर के बावजूद 10 महीने बीत जाने पर भी संस्थान ने अब तक कार्ययोजना पेश नहीं की है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि विभाग 'कागजी छात्र' दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रहा है और असली आंकड़ों को छिपाकर हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। दस साल में 22 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी जीतू पटवारी ने कहा है कि पिछले 10 सालों में सरकारी स्कूलों से 22 लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं, जिससे नामांकन में भारी गिरावट आई है। उन्होंने इसे सरकार की शिक्षा नीति की पूरी नाकामी करार देते हुए दावा किया कि जहां दुनिया के विकसित देशों में बच्चे अंतरिक्ष और मंगल ग्रह पर पानी की खोज कर रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, ब्लैकबोर्ड, किताबें और ठीक-ठाक भवन ढूंढने को मजबूर हैं। जीतू पटवारी ने सरकार से किए सवाल बता दें कि विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जानकारी दी है कि 2015-16 से 2024-25 के बीच कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक के स्टूडेंट्स के नामांकन में 22.03 लाख की कमी आई है। इसे लेकर पिछले साल मई में सरकार ने अटल बिहारी सुशासन संस्थान को पत्र लिखकर नामांकन मे गिरावट की वैज्ञानिक जांच करने को कहा था। लेकिन लगभग दस महीने बीत जाने पर भी संस्थान की तरफ से इसे लेकर कोई एक्शन प्लान प्रस्तुत नहीं किया गया है जबकि इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग उन्हें रिमाइंडर भी दे चुका है। इसी मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इन बच्चों को “लापता” की श्रेणी में रखते हुए सरकार से सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ‘प्रदेश में लाड़ली बहनें लापता होने के बाद अब स्कूल के बच्चे भी लापता हो रहे हैं।’ विपक्ष का आरोप है कि गिरावट का खेल साल 2008-09 से ही शुरू हो गया था, लेकिन सरकार केवल 2015-16 के बाद के समय की जांच करा रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2008 से 2015 के बीच ही 40.62 लाख बच्चे कम हो चुके थे, जिसे जांच में शामिल नहीं किया गया है। विधायक ने इस पूरे मामले को शिक्षा के नाम पर हो रहे बड़े 'घोटाले' से जोड़ते हुए इसकी सीबीआई जांच और सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। एक साल में ही एक लाख छात्रों का अंतर… जानकारी में सबसे बड़ा खुलासा आंकड़ों की विसंगति को लेकर हुआ है। जानकारी में सामने आई अलग-अलग सूचियों में छात्र संख्या मेल नहीं खा रही है। वर्ष 2015-16 के लिए ही एक सूची में संख्या 22.62 लाख है, तो दूसरी में 23.57 लाख बताई गई है। एक ही साल के डेटा में एक लाख बच्चों का अंतर आया है। आंकड़े छिपाकर करोड़ों का भ्रष्टाचार हैरानी की बात यह है कि विभाग ने बार-बार संस्थान को याद दिलाया है। इसके बाद भी 10 महीने से ज्यादा का वक्त गुजरने के बाद भी संस्थान ने अब तक अपनी योजना नहीं दी है। विपक्ष का कहना है कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम दिखाकर वाह-वाही लूट रहा है। असली आंकड़े छिपा कर हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। शिक्षा के नाम पर हो रहा घोटाले विपक्ष का कहना है कि बच्चों की संख्या में गिरावट का सिलसिला 2008-09 से ही शुरू हुआ था। सरकार केवल 2015-16 के बाद के आंकड़ों की ही जांच कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक 2008 से 2015 तक ही 40.62 लाख बच्चे कम हो गए थे। इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विधायक ने इस मुद्दे को शिक्षा के नाम पर हो रहे बड़े घोटाले से जोड़ा है। साथ ही सीबीआई से जांच कराने और सरकार से श्वेत पत्र* जारी करने की मांग की है। एक साल में एक लाख बच्चों का फर्क जानकारी में एक बड़ा खुलासा हुआ है जो आंकड़ों की गलती को लेकर है। अलग-अलग सूचियों में बच्चों की संख्या मैच नहीं कर रही है। जैसे कि 2015-16 के लिए एक सूची में 22.62 लाख बच्चों की संख्या दी गई है। वहीं दूसरी सूची में यह संख्या 23.57 लाख बताई गई है। यानी एक ही साल के आंकड़ों में एक लाख बच्चों का फर्क है।     *श्वेत पत्र क्या होता है।     श्वेत पत्र एक तरह का दस्तावेज होता है, जिसे किसी खास समस्या को समझने या उसका समाधान बताने के लिए तैयार किया जाता है। ये दस्तावेज सरकार, कंपनियां या गैर-लाभकारी संगठन उस मुद्दे पर अपने विचार और आंकड़े लोगों तक पहुंचाने के लिए जारी करते हैं। इसमें किसी नीति या समस्या का विश्लेषण किया जाता है, और अक्सर इसमें कोई समाधान या सुझाव भी दिए जाते हैं।     इस दस्तावेज को 'श्वेत पत्र' इसलिए कहा जाता है क्योंकि पहले इसके कवर का रंग सफेद होता था। यह दस्तावेज सार्वजनिक जानकारी और पारदर्शिता को दिखाता है, यानी कि यह जानकारी लोगों के लिए खुली होती है।

लाड़ली बहना योजना पर ताजातरीन खबर: लाखों बहनों के नाम कटे, मंत्री ने बताया कारण

भोपाल  मध्य प्रदेश की चर्चित योजना लाड़ली बहना योजना एक बार फिर सियासी तूफान के बीच आ गई है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार को घेरते हुए बड़ा सवाल उठाया कि योजना से लगातार बहनों के नाम काटे जा रहे हैं और नए पंजीयन पूरी तरह बंद पड़े हैं। वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने सदन में लिखित जवाब देते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। मंत्री के मुताबिक, पहले योजना में 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 बहनें पंजीकृत थीं, जो अब घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई हैं। यानी अब तक 5 लाख 77 हजार 474 बहनों के नाम काटे जा चुके हैं। 60 साल की उम्र होते ही लाडली बहना योजना से कट जाता है महिलाओं का नाम मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना का लाभ 60 साल की उम्र तक की महिलाओं को दिया जाता है. अब बड़ी विडंबना यह है कि जैसे ही इस योजना की पात्र महिलाएं 60 साल की होती हैं. सिस्टम अपने आप लाभार्थी का नाम हटा देता है. इसके बाद यह महिला वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले सकती हैं, लेकिन मौजूदा समय में लाडली बहनों को ₹1500 की राशि दी जा रही है और पेंशन के तहत मात्र ₹600 मिलते हैं. ऐसे में बुजुर्ग महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने कम पैसे में अपना गुजारा करने की होती है. देखा जाए तो 60 वर्ष की उम्र होते ही सीधे ₹900 प्रति माह की राशि में कटौती हो जाती है. लाडली बहन योजना का लाभ नहीं ले पा रही बहनों के बीच जब न्यूज 18 की टीम पहुंची, तो उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कई महीने से उनका नाम कटा हुआ है लाडली बहन योजना के पैसे नहीं मिल रहे हैं. वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिल रही है और कई महिलाओं के घर में दिव्यांग बच्चे हैं उनके पास भी कोई सहायता राशि नहीं आ रही है. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने साधा निशाना महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में कांग्रेस विधायकों के सवालों के लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त 2023 के बाद कोई नया पंजीयन नहीं किया गया है और वर्तमान में नए पंजीयन शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. राशि बढ़ाने को लेकर भी कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने बहनों से जो वादा किया था वो नहीं निभा रही है. न तो 3 हजार दे रहे हैं और न नए नाम जोड़ रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कही ये बात लाडली बहन योजना को लेकर जारी सियासत और महिलाओं के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कहा कि योजना की शर्तों के अनुसार सभी बहनों को लाभ दिया जा रहा है. हमारी सरकार सबका ध्यान रखती है. आंकड़ों के अनुसार योजना की शुरुआत में पंजीकृत महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 थी, जो अब घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई है. सरकार का कहना है कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर कई महिलाओं के नाम सूची से हटे हैं, जिसके कारण संख्या में कमी आई है. विधानसभा में लाडली बहना योजना की लाभार्थियों की आयु वर्ग अनुसार स्थिति भी सामने आई है. 55 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 7.89 लाख, 35 से 55 वर्ष में 71.63 लाख, 23 से 35 वर्ष में 45.26 लाख महिलाएं लाभ ले रही हैं. इधर, 25,395 महिलाओं का भुगतान समग्र आईडी डिलीट होने के कारण फिलहाल बंद है. सरकार का कहना है कि समग्र आईडी पुनः सक्रिय होने पर भुगतान फिर से शुरू किया जाएगा. विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी देखने को मिला. कांग्रेस ने नए पंजीयन शुरू करने और पात्र महिलाओं को योजना से जोड़ने की मांग की. विपक्ष का आरोप है कि जब नए पंजीयन नहीं हो रहे, तो कुछ जिलों में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने के दावे कैसे किए जा रहे हैं. लाडली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है. ऐसे में लाभार्थियों की घटती संख्या और भुगतान अटकने का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन चुका है. नाम कटने की बड़ी वजहें क्या हैं? मंत्री ने साफ कहा कि बहनों के नाम कटने के प्रमुख कारण ये हैं: 60 साल की उम्र पूरी होना (इसके बाद योजना की पात्रता खत्म) लाभार्थी की मृत्यु ,अन्य अपात्रता सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 60 साल की उम्र पार करने के कारण 1.51 लाख से ज्यादा महिलाएं योजना से बाहर हो चुकी हैं। विपक्ष का बड़ा आरोप कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आरोप लगाया कि नाम कटने का सिलसिला लगातार जारी है, जबकि नए पंजीयन बंद हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल पूरे होते ही लाड़ली बहना की राशि बंद हो जाती है और दूसरी पेंशन योजनाओं में सिर्फ 600 रुपये महीना मिलता है। बजट में योजना की राशि 3000 रुपये करने का वादा भी अधूरा रह गया है। सवालों के घेरे में सरकार लाखों बहनों के नाम कटने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि: क्या भविष्य में नए पंजीयन शुरू होंगे? जिन बहनों के नाम कटे, उनके लिए कोई वैकल्पिक राहत योजना आएगी? 3000 रुपये की घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला थी या कभी लागू होगी? इस मुद्दे ने विधानसभा से लेकर सड़कों तक सियासी गर्मी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में लाड़ली बहना योजना पर सरकार को और जवाब देने पड़ सकते हैं।

87 शराब दुकानों से 1432 करोड़ का लक्ष्य, कीमतें बढ़ सकती हैं, ड्यूटी नहीं बढ़ेगी, ठेकों को मुनाफे के लिए खपत बढ़ानी होगी

भोपाल  अबकी बार भोपाल की 87 शराब ठेकों से सरकार को 239 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा मिल सकते हैं। पिछले साल रिजर्व प्राइस (आरपी) 1073 करोड़ रुपए थी, जबकि उच्चतम ऑफर राशि 1139 करोड़ रुपए मिली थी। इस बार रिजर्व प्राइस ही 1432 करोड़ रुपए रखी गई है। 2 मार्च को 29 दुकानों की नीलामी होगी। बता दें कि राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति लागू कर दी है। नई व्यवस्था में शराब दुकानों को छोटे-छोटे समूहों में बांटा गया है। भोपाल की 87 दुकानों को 20 ग्रुप में बांटा है। जिनके आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के जरिए होगी। इनमें से 7 ग्रुप की 29 दुकानों के लिए पहले फेज में टेंडर की प्रोसेस शुरू की गई है। 2 मार्च को सुबह 10.30 से दोपहर 2 बजे तक टेंडर सबमिट होंगे। इसी दिन शाम 6 बजे से डिस्ट्रिक कमेटी की मौजूदगी में टेंडर खोलने की कार्रवाई होगी। इन ग्रुपों के लिए प्रक्रिया बागसेवनिया ग्रुप की 5 दुकान, हबीबगंज फाटक ग्रुप की 4 दुकान, भानपुर चौराहा ग्रुप की 5 दुकान, स्टेशन बजरिया ग्रुप की 5 दुकान, खजूरीकलां ग्रुप की 3 दुकान, जहांगीराबाद ग्रुप की 4 दुकान और गुनगा ग्रुप की 3 दुकानों के लिए यह टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। 20% बढ़ी ठेके की कीमत वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नीलामी की प्रक्रिया में ठेके 1193 करोड़ रुपए से ज्यादा में हुए थे, जो टारगेट से 11 प्रतिशत यानी, 120 करोड़ रुपए अधिक थे। इस बार 1432 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस रखी गई है। बता दें कि वर्तमान मूल्य में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी कर आरक्षित मूल्य तय किया गया है। इसका असर अब समूहों की कीमतों पर दिखने लगा है। भोपाल में इस बार सबसे महंगा समूह पिपलानी का है। इसमें 4 दुकानें – पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर हैं। 20 फीसदी आरक्षित मूल्य बढ़ने के बाद इस समूह की कीमत 127 करोड़ 77 लाख 60 हजार 551 रुपए हो गई है। इससे पहले वर्ष 2025-26 में इन दुकानों का वार्षिक मूल्य 106 करोड़ 48 लाख से ज्यादा था। इसी तरह बागसेवनिया समूह की कीमत करीब 101 करोड़ से बढ़कर 121 करोड़ 89 लाख से ज्यादा हो गई है। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नीति में किए गए बदलावों के आधार पर ही ई-टेंडर के जरिए दुकानों का आवंटन होगा। छोटे समूह बनाए जाने से ज्यादा बोलीदाता सामने आएंगे व सरकार को फायदा मिलेगा। इससे नए लोगों को भी भागीदारी का मौका मिलेगा। 239 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे विभाग की माने तो नई व्यवस्था से सरकार के खजाने में सीधे 238 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे। टेंडर फाइनल होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। होटल-बार के लाइसेंस की शर्तों में होगा बदलाव पहले यह थी व्यवस्था     अब तक ज्यादातर जिलों में सिंगल टेंडर के जरिए ठेके दिए गए थे।     प्रदेश में करीब 3500 शराब दुकानें हैं और इनका संचालन लगभग 600 से अधिक समूहों में होता रहा है। बड़े समूहों की वजह से सीमित कंपनियां ही टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले पाती थीं।     भोपाल का उदाहरण देखें तो यहां 87 शराब दुकानें हैं। इन पर 4 कंपनियों का कब्जा है। यह बदलाव हो सकता है     अब 2 से 5 दुकानों के छोटे समूह बनाए जाएंगे।     प्रदेश में करीब 1,000 समूह बनने की संभावना है।     भोपाल में 25 से 30 समूह बन सकते हैं।     टेंडर के जरिए ठेके दिए जाएंगे।     हाेटल-बार और रेस्तरां बार के लाइसेंस की शर्तों में बदलाव किया जाएगा। होटल-बार में पहले 20 कमरों की संख्या काे घटाकर 10 किया जा सकता है। ठेकों के टेंडर रेंडमाइजेशन सिस्टम से होंगे नई नीति में पहली बार शराब ठेकों के टेंडर रेंडमाइजेशन सिस्टम से होंगे। कौन-सा समूह पहले खुलेगा, यह कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ से तय होगा। पहले सभी टेंडर एक साथ जारी होते थे, अब क्रमवार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। नई दुकानें या अहाते नहीं खुलेंगे, मौजूदा ढांचे में ही ठेके दिए जाएंगे। सरकार फिलहाल आबकारी ड्यूटी बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। पिछले साल के मुकाबले अंग्रेजी की खपत ज्यादा भोपाल में शराब से राज्य सरकार को अब तक करीब 1,015 करोड़ का राजस्व मिल चुका है। बिक्री के आंकड़ों में बढ़ोतरी दिखी है। पिछले साल जहां करीब 1,300 करोड़ रुपए की शराब बिकी थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा 1,800 करोड़ पार कर चुका है, यानी करीब 500 करोड़ की वृद्धि। वहीं देशी शराब की खपत 61% घटकर 71.31 लाख प्रूफ लीटर से 27.63 लाख पर आ गई। इसके उलट विदेशी शराब 55% बढ़कर 45.07 लाख से 70.26 लाख प्रूफ लीटर पहुंच गई। बीयर की खपत भी बढ़ी है। सिंगल टेंडर की जगह मल्टी-ग्रुप मॉडल लागू होगा सरकार का मानना है कि छोटे समूह बनने से अधिक प्रतिस्पर्धा होगी और ओवरचार्जिंग की शिकायतें कम होंगी। सिंगल टेंडर व्यवस्था में ओवरचार्जिंग की शिकायतें बढ़ी थीं।

कूनो नेशनल पार्क में 8 चीते होंगे शामिल, आज शनिवार सुबह CM मोहन यादव करेंगे स्वागत और रिलीज

 श्योपुर/ग्वालियर MP के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था भारत आ रहा है. बोत्सवाना से एयरलिफ्ट किए गए इन 8 चीतों (6 मादा और 2 नर) का स्वागत खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे. चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि बोत्सवाना से छह मादा और दो नर चीतों का बैच शुक्रवार रात 9 बजे से 10 बजे के बीच इंडियन एयर फोर्स (IAF) के एयरक्राफ्ट से ग्वालियर के लिए उड़ान भरी।  ग्वालियर से, दो IAF हेलीकॉप्टर चीतों को कुनो नेशनल पार्क ले जाएंगे, जहां उनके शनिवार सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच पहुंचने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से ग्वालियर तक की उड़ान का समय लगभग नौ से 10 घंटे का रहा . उन्होंने कहा कि यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच होगा, इससे पहले नामीबिया और साउथ अफ्रीका से चीते लाए गए थे. इसके साथ ही, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 46 हो जाएगी. क्वारंटाइन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे. उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड हैं. पिछली बार की तरह, IAF चीतों को अफ्रीका से लाकर उन्हें फिर से बसाने के प्रोग्राम में मदद करेगी, ठीक वैसे ही जैसे उसने फरवरी 2023 में SA से चीते को लाते समय किया था. आबादी को 50 तक बढ़ाना लक्ष्य प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने कहा कि इससे पहले, सितंबर 2022 में एक प्राइवेट जेट से 8 चीतों को नामीबिया से ग्वालियर लाया गया था, जिसके बाद IAF के हेलीकॉप्टरों ने उन्हें पार्क पहुंचाया था. और चीतों के आने से भारत का चीता रिवाइवल प्रोग्राम और मजबूत होगा. केंद्र सरकार के सपोर्ट से, हमारा मकसद जल्द से जल्द आबादी को 50 तक बढ़ाना है. पिछले साल, भारत में 12 शावकों का जन्म हुआ, हालांकि तीन शावकों समेत छह जिंदा नहीं बचे. इस साल, 7 फरवरी से 18 फरवरी के बीच, दो बार में 8 शावक पैदा हुए. KNP में 39 शावक पैदा हो चुके 2023 से KNP में कुल 39 शावक पैदा हुए हैं, जिनमें से 27 जिंदा हैं. नामीबिया में जन्मी ज्वाला और आशा, साउथ अफ्रीका में जन्मी गामिनी, वीरा और निरवा, और भारत में जन्मी मुखी, सभी ने KNP में बच्चे दिए हैं. तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में भेज दिया गया है, जबकि 35 अभी भी KNP में हैं. बता दें कि दुनिया का सबसे तेज जमीन पर रहने वाला जानवर चीता, भारत में लगभग सात दशक पहले खत्म हो गया था. दोबारा उसे बसाए जाने का प्रोजेक्ट चल रहा है. इसकी शुरुआत साल 2022 में कर दी गई थी. यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच है. इससे पहले नामीबिया (2022) और दक्षिण अफ्रीका (2023) से चीते लाए गए थे.