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लाड़ली लक्ष्मी योजना की कड़वी सच्चाई: 21 साल में 58 हजार पंजीयन, 12 ही ग्रेजुशन तक पहुंची

भोपाल  मध्य प्रदेश में साल 2007 में शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना को मॉडल मानकर कई राज्यों ने इसे अपनाया, लेकिन मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मियां ही इस योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पा रही हैं. साल 2007 में जिन 58 हजार 73 बच्चियों ने पंजीयन कराया था. कांग्रेस द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में खुलासा हुआ. योजना के तहत राज्य सरकार अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से बच्चियों को कुल 1 लाख 43 हजार रुपए देती है, लेकिन सिर्फ 20 फीसदी छात्राएं ही ग्रेजुएशन के अंतिम साल तक पहुंच पा रही हैं. हालांकि विभागीय मंत्री ने कहा कि इसमें बढोत्तरी हो रही है. क्या है लाड़ली लक्ष्मी योजना, कैसे मिलता है लाभ मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 2007 में मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की थी. योजना के तहत 1 जनवरी 2006 और इसके बाद जन्मी बच्चियों का पंजीयन कराया गया. शर्त रखी गई कि माता-पिता दोनों मध्य प्रदेश के मूल निवासी हों, उनकी दो संतानें हों और दो संतानों के बाद परिवार द्वारा नियोजन कराया गया हो. इसके साथ ही वे आयकरदाता न हों. इस योजना में पंजीयन कराने वाली बालिकाओं को कक्षा 6वीं, 9वीं, 11वीं और 12वीं में प्रवेश लेने पर सरकार स्कॉलरशिप देती है. कक्षा 12 वीं के बाद स्नातक में प्रवेश पर 25 हजार रुपए और 21 साल की आयु पूरी होने पर 1 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है. इसके लिए लाड़ली लक्ष्मी को वेबसाइट पर ग्रेजुएशन में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी है. 2007 में पंजीयन कराने वाली 12 बच्चियां ही ग्रेजुएट जब योजना शुरू हुई, उस दौरान 2007 में 58 हजार 73 लाड़ली लक्ष्मियों का पंजीयन कराया गया. इनमें से सिर्फ 12 लाड़लियों को ही स्नातक अंतिम साल पूरा करने पर राशि उपलब्ध कराई जा सकी. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने लिखित जवाब दिया है. इसमें बताया गया कि इस योजना में पंजीयन कराने वाले लाड़लियों में से सिर्फ 52.33 फीसदी बच्चियां ही 6वीं तक पढ़ाई पूरी कर सकी हैं. इनमें से सिर्फ 19.97 फीसदी बच्चियों ने 12 वीं कक्षा में एडमिशन लिया. लेकिन इसके आगे की पढ़ाई करने वाली लाड़िलयों की संख्या लगातार घटती गई. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल कहते हैं कि स्नातक तक पहुंचने वाली लाड़ली लक्ष्मियों की संख्या सिर्फ 5.83 फीसदी और पोस्ट ग्रेजुएट तक सिर्फ 0.33 फीसदी बच्चियां ही पहुंच पाईं. बेटियों के उच्च शिक्षित होने की दशा में ये आंकड़े चिंताजनक हैं. 52.35 लाख में से 19.97 लाख पहुंची 12वीं में विधानसभा में दी गई जानकारी में पताचला कि 2007 से 2025 के दौरान लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत प्रदेश में 52.35 लाख लाड़ली लक्ष्मियों का पंजीयन कराया गया. लेकिन साल-दर-साल बच्चियां जैसे-जैसे बड़ी हुईं और उनकी क्लास बढ़ती गई तो इन बच्चियों की संख्या कम होती चली गई. योजना में पंजीयन कराने वाली बच्चियों में से वर्ष 2025 तक के दौरान जब 26.13 लाख बच्चियां ने कक्षा छठी में जाने की उम्र पूरी की तो इनमें से सिर्फ 13.68 लाख ने ही प्रवेश किया. यानी सिर्फ 52.35 फीसदी लक्ष्मियों ने ही एडमिशन लिया. क्लास बढ़ते ही ऐसे घटती गई संख्या इसके बाद कक्षा 9 कक्षा में प्रवेश लेने वाली छात्राओं का प्रतिशत घटकर 42.21 फीसदी रह गया. 11 वीं क्लॉस में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या 24.72 फीसदी रह गई. 12 वीं क्लास में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या 19.97 फीसदी रहा गई. स्नातक में एडमिशन लेने वाली छात्राओं का प्रतिशत सिर्फ 5.38 फीसदी रह गया. स्नातकोत्तर तक पहुंचने वाली सिर्फ 0.33 फीसदी लाड़ली लक्ष्मियां ही रह गईं. सत्ता पक्ष व विपक्ष के अपने-अपने तर्क कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल कहते हैं "लाड़ली लक्ष्मी की शर्तों के अनुसार जिन बच्चियों ने कक्षा 12वीं में प्रवेश लिया है, उन्हीं को एक लाख की राशि 21 वर्ष पूर्ण करने पर दी जाएगी. आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2027 में करीबन 5 हजार और 2028 में सिर्फ 40 हजार लाड़ली लक्ष्मियां को ही लाभ मिल सकेगा. सरकार ने इस योजना में बच्चियों की शैक्षणिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया." वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया कहती हैं "इस योजना का बेहत सकारात्मक असर दिखाई दिया है. बड़ी क्लास तक पहुंचने वाली बच्चियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. आने वाले समय में इसके और सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे." 

टैरिफ विवाद के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर नए सिरे से होगी चर्चा, सरकार ने बदला रुख

नई दिल्ली.  केंद्र सरकार अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर दोबारा विचार करने की योजना बना रही है. यूएस सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने टैरिफ को अवैध बताकर खत्म किए जाने के बाद अब भारत डील रीनेगोशिएट करने के लिए मजबूत स्थिति में पहुंच गया है. मनीकंट्रोल ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से लिखा है कि सरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हर पहलू को परख रही है इसलिए दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर बात भी टाल दी गई थी. वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका के टैरिफ सिस्टम में आए बदलावों के कारण मौजूदा डील के फायदे खत्म हो गए हैं, इसलिए अब भारत नई रणनीति के साथ बातचीत करने की तैयारी में है ताकि दूसरे देशों के मुकाबले बढ़त हासिल की जा सके. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत का यू टर्न सरकारी अधिकारी ने बताया कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बातचीत पर क्या असर पड़ेगा, लेकिन सरकार सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है. एक अन्य सूत्र के अनुसार, भारत कुछ प्रावधानों पर नए सिरे से बातचीत करना चाहता है ताकि उसे दूसरे देशों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके. पहले 18 प्रतिशत टैरिफ रेट भारत को मामूली बढ़त देता था, लेकिन अब जब अमेरिका ने ग्लोबल टैरिफ 15 प्रतिशत कर दिया है, तो यह फायदा खत्म हो गया है. इसी वजह से सरकार उन सेक्टरों की पहचान कर रही है जहां ट्रेड डील के जरिए ज्यादा रियायत या छूट हासिल की जा सकती है. टली भारत अमेरिका ट्रेड मीटिंग, डील पर फिर से मंथन भारत और यूएस के अधिकारियों के बीच तीन दिन की ट्रेड मीटिंग 23 फरवरी से शुरू होने वाली थी, जिसमें अंतरिम ट्रेड डील की शर्तों को अंतिम रूप दिया जाना था. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी और दोनों देशों ने आगे व्यापक समझौते की दिशा में रोडमैप जारी किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, जिसने ट्रंप प्रशासन के रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करार दिया, भारत सरकार अब पूरी बातचीत की समीक्षा कर रही है. 18 प्रतिशत से शून्य तक का खेल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने रेसिप्रोकल टैरिफ को खत्म कर दिया, जिससे 18 प्रतिशत वाला प्रस्तावित रेट भी प्रभावी रूप से शून्य हो गया. इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया, जिसे एक दिन बाद 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की गई. फिलहाल भारत के लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर 15 प्रतिशत टैरिफ लागू है, जिसकी कुल वैल्यू करीब 48.4 अरब डॉलर है. हालांकि, स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों पर सेक्शन 232 के तहत अलग से टैरिफ लागू है, जिसकी वैल्यू 8 से 9 अरब डॉलर के बीच है. 34 अरब डॉलर के निर्यात पर छूट का प्लान अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क के तहत करीब 34 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात को टैरिफ से छूट मिलने की संभावना है. ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत प्रस्तावित टैरिफ में फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरणों को छूट दी गई है और सिविल एविएशन प्रोडक्ट्स को नए कैटेगरी के रूप में जोड़ा गया है. इन छूटों पर बातचीत मार्च तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे दोबारा समीक्षा के लिए खोल दिया गया है. छूट वाले सेक्टरों में फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरण, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और सिविल एविएशन कंपोनेंट्स शामिल हैं. भारत की बड़ी कमिटमेंट, अमेरिका से खरीद बढ़ाने का वादा यूएस इंडिया अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क के फैक्टशीट के अनुसार, भारत अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने या खत्म करने की योजना बना रहा है. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, फ्रेश और प्रोसेस्ड फ्रूट, सोयाबीन ऑयल, वाइन और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं. भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा एनर्जी, आईसीटी, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने की भी मंशा जताई है.  

व्हाइट हाउस का बयान: ‘भारत टेक्नोलॉजी का पावरहाउस’, लेकिन AI पर दी चेतावनी

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख विज्ञान सलाहकार ने कहा है कि भारत एक ‘तकनीकी महाशक्ति’ है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को आगे बढ़ाने की व्हाइट हाउस की योजना में उसकी अहम भूमिका है. उन्होंने भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम की सराहना की. राष्ट्रपति के सहायक और व्हाइट हाउस के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय के निदेशक माइकल क्रैटसिओस ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘भारत एक तकनीकी महाशक्ति है.’ विकासशील देशों को क्या चेतावनी दे रहे? हाल ही में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में शामिल होकर लौटे टॉप अमेरिकन साइंटिफिक एडवाइजर ने कहा, ‘भारत हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार करता है, उसके पास मजबूत घरेलू प्रतिभा है और वह अच्छे उत्पाद और एप्लिकेशन विकसित कर रहा है.’ उन्होंने कहा कि विकसित और विकासशील देशों के बीच AI अपनाने की रफ्तार में अंतर हर दिन बढ़ रहा है. उनके मुताबिक दुनिया को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में देखा जा सकता है और दोनों के लिए अलग तरह के उपायों की जरूरत है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विकासशील देश स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा ढांचा, कृषि और आम नागरिकों से जुड़ी सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में AI को प्राथमिकता नहीं देंगे, तो वे एक अहम मोड़ पर पीछे छूट सकते हैं. व्हाइट हाउस इस दिशा में ‘अमेरिकन AI एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम’ को आगे बढ़ा रहा है. क्रैटसिओस ने कहा कि अब तक विकासशील देशों के सामने एक कठिन विकल्प होता था, लेकिन यह कार्यक्रम उन्हें बेहतर तकनीक, वित्तीय सहायता और लागू करने में सहयोग का नया रास्ता देता है. उन्होंने ‘वास्तविक AI स्वायत्तता’ का मतलब समझाते हुए कहा कि इसका अर्थ है सर्वोत्तम तकनीक का अपने लोगों के हित में उपयोग करना और वैश्विक बदलावों के बीच अपने देश की दिशा खुद तय करना. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रणनीति किसी एक प्रतिस्पर्धी देश के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह इस बात के बारे में है कि यूनाइटेड स्टेट्स के पास दुनिया की सबसे अच्छी एआई टेक्नोलॉजी है और कई देश इसे अपने इकोसिस्टम में चाहते हैं.’ भारत को बताया मजबूत पार्टनर मानकों के बारे में उन्होंने कहा कि एआई के अगले चरण में ‘एजेंट’ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. ये एजेंट किस तरह आपस में संवाद करें और मिलकर काम करें, इसके लिए एक समान मानकों की जरूरत होगी. इसके लिए अमेरिकी संस्थान NIST ने पहल शुरू की है, ताकि ये सिस्टम्स सुरक्षित और प्रभावी तरीके से साथ काम कर सकें. वित्तीय संसाधन भी एक बड़ी चुनौती हैं, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए. क्रैटसिओस ने कहा कि एआई का पूरा ढांचा महंगा होता है. इसमें ‘डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर्स, पावर जेनरेशन’ जैसी बुनियादी सुविधाएं जरूरी होती हैं. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन, एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक और दूसरी एजेंसियों के ज़रिए सपोर्ट जुटा रहा है. उन्होंने एक यूएस टेक कॉर्प्स की भी घोषणा की. उन्होंने कहा, ‘ये पीस कॉर्प्स वॉलंटियर्स की तरह होंगे, बस फोकस टेक्नोलॉजी पर होगा. हम टेक्निकल बैकग्राउंड वाले ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं जो एआई सॉल्यूशन्स को इम्प्लीमेंट करने में मदद करना चाहते हैं.’ क्रैट्सियोस ने कहा कि भारत ‘लंबे समय से इस मामले में एक मजबूत पार्टनर रहा है कि यूनाइटेड स्टेट्स विदेशों में टेक्नोलॉजी कैसे शेयर करता है.’ उन्होंने बताया कि अमेरिकी बड़ी तकनीकी कंपनियों के भारत में डाटा सेंटर और शोध केंद्र मौजूद हैं, जिससे दोनों देशों के बीच एआई क्षेत्र में सहयोग और गहरा हो रहा है.

मध्य प्रदेश में चतुर्भुज फ्लाईओवर का आगाज, सागर में बढ़ेगी कनेक्टिविटी और सफर होगा आसान

सागर  एक महानगर की तरह आकार ले रहे सागर शहर में मध्य प्रदेश के पहले चतुर्भुज फ्लाईओवर की उम्मीद को अब पंख लग गए हैं. दरअसल, केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने सेतुबंधन योजना के तहत सागर के उपनगर मकरोनिया के यातायात दबाव को कम करने के लिए 155 करोड़ की लागत से फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर के लिए स्वीकृति दे दी है. खास बात ये है कि इसके साथ ही मकरोनिया से जबलपुर और कानपुर रोड को जोड़ने के लिए फोरलेन की स्वीकृति भी मिल गयी है. इसके पहले भी मकरोनिया फ्लाईओव्हर के लिए स्वीकृति मिल गयी थी, लेकिन स्थानीय व्यापारियों के विरोध के चलते प्रोजेक्ट रुक गया था. सागर में बनेगा मध्य प्रदेश का पहला चतुर्भुजी फ्लाईओवर आखिरकार सागर शहर के उपनगर मकरोनिया में यातायात दबाव कम करने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के डीपीआर बनाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है. पिछले करीब तीन सालों से मकरोनिया पर चार दिशाओं में चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर के लिए प्रयासरत स्थानीय विधायक प्रदीप लारिया के प्रयासों से ये प्रोजेक्ट स्वीकृति की ओर बढ़ रहा है. जल्द ही इस फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए टेंडर बुलाए जाएंगे. डीपीआर बनने के बाद फ्लाईओवर के लिए अंतिम स्वीकृति मिलेगी. चार भुजाओं वाले फ्लाईओवर में क्या खास है दरअसल, सागर का मकरोनिया चौहारा एक ऐसा चौराहा है, जहां से कानपुर, जबलपुर, नागपुर, झांसी मार्ग जुड़ते हैं. यहीं से छतरपुर, रीवा, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, झांसी, ललितपुर और सभी मार्ग जुड़ते हैं. इसके साथ ही सागर के उपनगर के रूप में विकसित हो रहे इस इलाके में बड़ी-बड़ी कंपनियों के शोरूम और आउटलेट्स आने के कारण काफी ट्रैफिक का दबाव रहता है. बाहर और स्थानीय यातायात के दबाव के चलते इस चौराहे पर हमेशा जाम की स्थिति रहती है. इसलिए विधायक प्रदीप लारिया द्वारा यहां पर चार भुजाओं वाला एक चतुर्भुजी फ्लाईओवर का प्रस्ताव सेतुबंधन योजना के तहत केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी के समक्ष रखा गया था. चतुर्भुज फ्लाईओवर की खासियत     मकरोनिया चौराहा सागर पर बनेगा फ्लाईओवर     2.2 किमी लंबा होगा फ्लाईओवर     155 करोड़ रुपए आयेगी फ्लाईओवर की लागत     कानपुर, नागपुर, झांसी मार्ग और सागर शहर की कनेक्टिविटी कानपुर-जबलपुर रोड के लिए फोरलेन इसके अलावा मकरोनिया चौराहे से कानपुर रोड और जबलपुर रोड को कनेक्ट करने के लिए फोरलेन के लिए भी लगभग हरी झंडी मिल गयी है. फिलहाल ये मार्ग मकरोनिया से लेकर बहेरिया तक टू-लेन है. जिस पर कानपुर और जबलपुर तरफ से आने वाले भारी वाहनों का दबाव रहता है. दूसरी तरफ नेशनल हाइवे 44 से भी इसी मार्ग के जरिए कनेक्टिविटी है, जो आगे जाकर भोपाल, बीना और दूसरे मार्गों से जुड़ता है. अब ये फोरलेन बन जाने के कारण यातायात की रफ्तार बढ़ेगी. क्या कहना है स्थानीय विधायक का नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने बताया कि "आए दिन मकरोनिया में जाम की स्थिति बनी रहती है. यहां पर फ्लाईओव्हर की आवश्यकता थी. उसके लिए सेतुबंधन योजना के जरिए 2022 में फ्लाईओवर स्वीकृत कराया था, लेकिन व्यापारियों के विरोध के कारण फ्लाईओवर नहीं बन पाया. फिर से इसके लिए प्रयास के बाद फ्लाईओवर की हमें प्रारंभिक स्वीकृति मिली है. अभी डीपीआर के टेंडर के लिए स्वीकृति मिली है. हमें 155 करोड़ के फ्लाईओवर और साथ ही मकरोनिया से बहेरिया तक 15 करोड़ के फोरलेन की सौगात मिली है. कुल मिलाकर 180 करोड़ के डीपीआर की स्वीकृति मिली है. साथ ही छतरपुर तक के पुल पुलिया, सागर कानपुर मार्ग बनने के दौरान छूटे हैं, उनको भी इस डीपीआर में समाहित किया है. बहुत जल्दी डीपीआर के लिए टेंडर होंगे, फिर डीपीआर बनेगी और डीपीआर से बाद अंतिम स्वीकृति मिलेगी. कुल मिलाकर फ्लाईओवर का मार्ग अब खुल गया है और मकरोनिया अब इस फ्लाईओव्हर के कारण तेज गति से विकास करेगा. "

ग्रामीण डाक सेवक देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की है नींव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नागरिकों के हित में भारतीय डाक व्यवस्था ने अपनी सार्थक भूमिका सिद्ध की है। ब्रिटिश काल से प्रारंभ व्यवस्थाओं को नया स्वरूप मिलता गया। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डाक व्यवस्था में निर्णायक परिवर्तन आये हैं और डाक विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने की ठोस पहल हुई है। एक समय सिर्फ चिट्ठियां पहुंचाने वाला विभाग अब बाबा महाकाल के प्रसाद के वितरण के लिए नई पोस्टल सेवा लागू करने तक अपनी यात्रा तय कर चुका है। डाक घरों के माध्यम से नागरिकों को बीमा योजनाओं, बचत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। खाते प्रारंभ करने से लेकर तीव्र गति से स्पीड पोस्ट और अन्य माध्यमों से ग्राहकों को लाभान्वित किया जा रहा है। ग्रामीण डाक सेवक भारत की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्था की मजबूत नींव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे स्थित कार्तिक मेला ग्राउंड में आयोजित ग्रामीण डाक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता केंद्रीय संचार मंत्री  ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डाक सेवकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि अपने अथक परिश्रम से गांव-गांव तक डाक तथा अन्‍य जनउपयोगी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने वाले ग्रामीण डाक सेवकों की देश के निर्माण में अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण भूमिका है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मध्‍यपद्रेश के उत्‍कृष्‍ट कार्य करने वाले ग्रामीण डाक नायकों को सम्‍मानित किया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री  सिंधिया के द्वारा भारतीय डाक विभाग से उज्‍जैन के  महाकालेश्‍वर मंदिर तथा  ओंकारेश्‍वर ज्‍योर्तिलिंग मंदिर की प्रसादी आमजन तक पहुंचाने के लिए पोस्‍टल सेवा का शुभारंभ किया गया। इसके अतिरिक्त उज्‍जैन के प्रसिद्ध स्‍थानों के संकलन पर आधारित पि‍क्‍टोरियल पोस्‍ट कार्ड का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण डाक सेवक हमारे सैनिक तथा हमारी ताकत है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में डाक विभाग सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। हमारे देश में प्राचीन काल से ही डाक पहुंचाने की परंपरा रही है। हमारे देश में डाक सेवकों का हृदय से सम्मान रहा है। बदलते दौर में देश के पोस्ट ऑफिस तीव्र गति से कार्य कर रहे हैं। डाक विभाग को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है। विभाग को शत प्रतिशत कम्‍प्‍युटरीकृत तथा डिजिटलाईज किया जा रहा है। आमजन के हित में दिन रात अपनी भूमिका को सराहनीय रूप से निभाने के लिए हमारा डाक विभाग बधाई का पात्र है। सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण जीवन उपयोगी कार्यों में भी डाक विभाग की महती भूमिका है।  ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में डाक विभाग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मध्‍यप्रदेश में 16 हजार 800 से ज्यादा ऊर्जावान ग्रामीण डाक सेवक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का काम कर रहे है। डाक विभाग को सबसे बड़ी लाजिस्‍टि‍क शक्ति के रूप में करेंगे स्‍थापित : केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया केंद्रीय संचार मंत्री  सिंधिया ने कहा कि सभी ग्रामीण डाक सेवक मेरे परिवार के सदस्य हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में डाक विभाग देश के विकास में अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है। डाक विभाग को तक‍नीकी रूप से सुदृढ बनाने के लिए कई कदम उठाए गए है। हमारा संकल्‍प है कि देश के डाक विभाग को विश्‍व की सबसे बड़ी लाजिस्‍टि‍क शक्ति के रूप में स्‍थापित करेंगे। केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया ने कहा कि देश में ग्रामीण डाक सेवक एक सैनिक की भांती कार्य कर रहे हैं। रेगिस्तान हो या पहाड़ों की चोटियां या मैदानी क्षेत्र हर एक स्‍थान पर ग्रामीण डाक सेवक निर्भीक रूप से पहुंचकर आमजन की सेवा कर रहे है। दुर्गम स्‍थलों जहां कोई अन्‍य व्‍यक्ति जाने की हिम्‍मत नहीं करता है वहां भी हमारा डाक सेवक अपनी सेवाएं दे रहा है। सर्दी, गर्मी, बरसात की परवाह किए बगैर डाक सेवक अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रहा है। ग्रामीण डाक सेवक का मान-सम्मान शासन का संकल्प है। डाक सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में 30 करोड़ पोस्ट ऑफिस बचत खातों को खुलवाने तथा उनमें लगभग 22 लाख करोड़ की रुपए की राशि जमा कराने में ग्रामीण डाक सेवक की महत्‍वपूर्ण भूमिका है। आज पूरे देश में 3 करोड़ 80 लाख सुकन्या समृद्धि खाते हैं, जो हमारे ग्रामीण डाक सेवकों ने खुलवाएं हैं। देश में 2 करोड़ पासपोर्ट बनवाने में तथा 15 करोड़ से अधिक आधार कार्ड वितरण में भी हमारे डाक सेवकों ने महत्‍वूर्ण भूमिका निभाई है। अब केंद्रीय विद्यालयों में ग्रामीण डाक सेवकों के बच्चों को भी प्रवेश मिलेगा। डाकघरों को मुनाफे का केंद्र बनाया जाएगा। पार्सल वितरण क्षेत्र में अब महत्वपूर्ण भूमिका डाक घरों द्वारा निभाई जाएगी। डाक विभाग में डिजिटल सिस्टम, ट्रैकिंग सिस्टम अपनाए जाएंगे। सामग्री वितरण शत-प्रतिशत रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। दुर्गम क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की भी सेवाएं ली जाएगी। विभाग अब ड्रोन का भी उपयोग करेगा। केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया ने कहा कि विभाग द्वारा तकनीकी दक्षता में वृद्धि, उपभोक्ता का विश्वास, अच्छा व्यवहार तथा ऑन टाइम डिलीवरी पर ध्‍येय केंद्रीत किया गया है। समय सीमा पर फोकस किया जा रहा है। 24 घंटे, 48 घंटे जैसी समय-सीमा में पार्सल अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचाने पर कार्य विभाग करेंगा। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला बाल विकास राज्‍य मंत्री सु सावि‍त्री ठाकुर, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  अनिल फिरोजिया, राज्‍यसभा सांसद  उमेश नाथ जी महाराज, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा, महापौर  मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्‍यक्ष मती कलावती यादव,  संजय अग्रवाल,  राजेन्‍द्र भारती सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण डाक सेवक उपस्थित थे।  

भोजशाला सर्वे रिपोर्ट पर बड़ा खुलासा: दो साल पहले ही पक्षकारों तक पहुंच चुकी थी रिपोर्ट

इंदौर धार भोजशाला मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जिस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट सीलबंद मान रहा था, वह दो साल से पक्षकारों के पास है। यह खुलासा सोमवार को उस वक्त हुआ जब हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सर्वेक्षण रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट पूर्व में ही पक्षकारों को सौंपी जा चुकी है, लेकिन यह जानकारी न शासन ने सुप्रीम कोर्ट को दी न पक्षकारों ने, हालांकि इसके पीछे किसी की कोई दुर्भावना नहीं थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट पक्षकारों के पास है, वे चाहें तो इसे लेकर अपने सुझाव, आपत्ति 16 मार्च से पहले लिखित में कोर्ट में दे सकते हैं। आपत्ति, सुझाव पर सुनवाई के बाद कोर्ट इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए नियत कर देगी। बता दें कि भोजशाला मामले को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील चल रही है। सोमवार को इन सभी की सुनवाई एक साथ हुई। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को आदेश दिया था कि वह ज्ञानवापी की तरह भोजशाला का भी विज्ञानी सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह सर्वे 98 दिन चला जिसके बाद एएसआई ने 2189 पेज की सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। 4 जुलाई 2024 को हाई कोर्ट के आदेश पर इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि सभी पक्षकारों को उपलब्ध करवाई गई थी। इस बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया जिसके बाद कोर्ट ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखने के आदेश दिए थे।   जिन पक्षकारों के पास एएसआई सर्वे रिपोर्ट की प्रति है उन्होंने बताया कि-     एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सर्वे में पाए गए स्तंभों और स्तंभों की कला और वास्तुकला से यह कहा जा सकता है ये स्तंभ पहले मंदिर का हिस्सा थे, बाद में मस्जिद के स्तंभ बनाते समय उनका पुन: उपयोग किया गया था।     मौजूदा संरचना में चारों दिशाओं खड़े 106 और आड़े 82 इस तरह से कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इन सभी की वास्तुकला से इस बात की पुष्टि होती है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिरों का ही हिस्सा थे।     उन्हें वर्तमान संरचना के लिए पुनर्उपयोग में लाने के लिए उन पर उकेरी गई देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को विकृत कर दिया गया।     मानव और जानवरों की कई आकृतियां, जिन्हें मस्जिदों में रखने की अनुमति नहीं है, उन्हें छैनी जैसे किसी वस्तु का इस्तेमाल कर विकृत किया गया था।     एएसआई ने रिपोर्ट में यह दावा भी किया है कि मौजूदा संरचना में संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे कई शिलालेख मिले हैं, जो भोजशाला के ऐतिहासिक, साहित्यिक और शैक्षिक महत्व को उजागर करते हैं।     एएसआई टीम को सर्वे में एक ऐसा शिलालेख मिला जिस पर परमार वंश के राजा नरवर्मन का उल्लेख है। नरवर्मन ने 1094-1133 इस्वी के बीच शासन किया था। सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि पश्चिम क्षेत्र में लगाए गए कई स्तंभों पर उकेरे गए ''कीर्तिमुख'', मानव, पशु और मिश्रित चेहरों वाले सजावटी सामग्री को नष्ट नहीं किया गया था।

रेलवे की बड़ी सौगात: सिंगरौली से रांची तक नई ट्रेन, यात्रियों को मिलेगा सीधा कनेक्शन

भोपाल यात्रियों की सुविधाओं में विस्तार करते हुए रेलवे मंत्रालय ने रांची रोड, टोरी और गढ़वा रोड के रास्ते एक जोड़ी नई ट्रेन के परिचालन को हरी झंडी दे दी है। आगामी 27 फरवरी से भोपाल-धनबाद-भोपाल एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 11631/11632) का नियमित परिचालन शुरू हो जाएगा। धनबाद मंडल के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलाई जाएगी, जिससे मध्य प्रदेश और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। आधुनिक कोचों से लैस होगी ट्रेन और संचालन का शेड्यूल यह नई ट्रेन अत्याधुनिक 22 एलएचबी (HLB) कोचों के साथ पटरी पर उतरेगी। इसमें वातानुकूलित प्रथम श्रेणी का एक, वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के दो, वातानुकूलित तृतीय श्रेणी के कोचों के साथ शयनयान श्रेणी और साधारण श्रेणी के चार कोच शामिल होंगे। शेड्यूल के अनुसार, गाड़ी संख्या 11631 भोपाल-धनबाद एक्सप्रेस 27 फरवरी से प्रत्येक शुक्रवार, सोमवार और गुरुवार को भोपाल से संचालित होगी। वहीं, गाड़ी संख्या 11632 धनबाद-भोपाल एक्सप्रेस का परिचालन 1 मार्च से प्रत्येक बुधवार, शनिवार और रविवार को किया जाएगा। समय सारणी और प्रमुख ठहराव गाड़ी संख्या 11631 भोपाल से रात 20:55 बजे रवाना होगी। यह बीना, दमोह और कटनी मुरवाड़ा के रास्ते अगले दिन सुबह 8:45 बजे सिंगरौली, 10:20 बजे चोपन, 11:20 बजे रेणुकूट, 12:35 बजे गढ़वा और 13:20 बजे डालटेनगंज पहुंचेगी। इसके बाद दोपहर 14:52 बजे टोरी, शाम 17:05 बजे रांची रोड और अन्य स्टेशनों पर रुकते हुए रात 20:20 बजे धनबाद पहुंचेगी। वापसी का रूट और समय वापसी में गाड़ी संख्या 11632 धनबाद से सुबह 7:20 बजे प्रस्थान करेगी। यह सुबह 9:45 बजे रांची रोड, 11:20 बजे तोरी, दोपहर 12:46 बजे डालटेनगंज, 12:35 बजे गढ़वा, 12:08 बजे रेणुकूट, शाम 16:05 बजे चोपन और 18:50 बजे सिंगरौली स्टेशन पर रुकते हुए अगले दिन सुबह 7:00 बजे भोपाल पहुंचेगी। इस नई रेल सेवा के शुरू होने से इन क्षेत्रों के रेल यात्रियों को आवागमन में काफी सुगमता होगी।

डबल हादसे से दहला भागलपुर, बस से गिरने के बाद ट्रक की चपेट में आए मजदूर

बिहपुर (भागलपुर)  एनएच-31 पर झंडापुर थाना क्षेत्र के दयालपुर और बगड़ी ओवरब्रिज के बीच जुगाड़ गाड़ी से जा रहे मजदूरों को बस ने टक्कर मार दी। इसके बाद मजदूरों की गाड़ी से टकरा कर ऑटो भी पलट गया। फिर पीछे से आ रहे ट्रक ने मजदूरों को रौंद दिया। इस हादसे में 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस घटनास्थल पर पहुंच कर राहत और बचाव कार्य कर रही है। बताया जा रहा है कि सभी मजदूर समेली कटिहार के रहने वाले थे। वहीं, मृतकों में एक बच्चा खगड़िया जिले के मानसी का रहने वाला था। इस संबंध में अन्य विवरण की प्रतीक्षा है।  

सिंगापुर में सीएम Yogi Adityanath की बड़ी उपलब्धि: जेवर एयरपोर्ट को मिला 4,458 करोड़ का निवेश

सिंगापुर/लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन राज्य को वैश्विक निवेश का एक और तोहफा मिला है। सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एविएशन सर्विस सेक्टर की अग्रणी कंपनी सैट्स के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत कंपनी गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दो प्रमुख परियोजनाएं स्थापित करेगी। पहला एक अत्याधुनिक कार्गो कॉम्प्लेक्स और दूसरा एक विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचेन। इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर कंपनी 4,458 करोड़ रुपए निवेश करेगी। एमओयू के अनुसार, सैट्स लिमिटेड जेवर एयरपोर्ट परिसर में एक अत्याधुनिक कार्गो कॉम्प्लेक्स का निर्माण करेगी। यह कार्गो कॉम्प्लेक्स न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एयर फ्रेट और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनेगा। इस परियोजना से निर्यात-आयात गतिविधियों को गति मिलेगी, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ होगा। जेवर एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के साथ विकसित किया जा रहा है, जिससे यह कार्गो कॉम्प्लेक्स अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक रणनीतिक हब के रूप में उभरेगा। एमओयू के दूसरे प्रमुख निवेश के तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही एक अत्याधुनिक विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचेन की स्थापना की जाएगी। यह किचेन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराएगा। विशेष बात यह है कि यहां तैयार किया गया भोजन केवल जेवर एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी सप्लाई पूरे उत्तर भारत के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर भी की जाएगी। इससे क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी तथा हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री के सिंगापुर दौरे का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को उत्तर प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना है। दूसरे दिन हुए इस एमओयू को राज्य के एविएशन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चालू होने के साथ ही यह कार्गो कॉम्प्लेक्स और एयर कैटरिंग सुविधा उत्तर भारत के आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देंगे और प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर ज्यादा मजबूत स्थिति में स्थापित करेंगे।

प्राचीन माँ बीजासन मंदिर में बुजुर्गों-महिलाओं-दिव्यांगों को रहत देने बनेगा रोप-वे

बूंदी. हाड़ौती की आराध्य देवी माँ बीजासन के दरबार में अब भक्तों को 750 से अधिक सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी नहीं रहेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इन्द्रगढ़ में 18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रोप-वे का शिलान्यास किया। इन्द्रगढ़ (बूंदी) स्थित माँ बीजासन मंदिर राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र का एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी शक्तिपीठ है। यह मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। इन्द्रगढ़ माताजी: रोप-वे से सुगम होंगे दर्शन इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वर्तमान में यहाँ पहुँचने के लिए भक्तों को कड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। रोप-वे बनने से सबसे अधिक लाभ बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को होगा। अब वे मिनटों में पहाड़ी के शिखर पर स्थित मंदिर तक पहुँच सकेंगे। ओम बिरला ने कहा कि इस सुविधा के आने से श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और गाइडों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर पर्यावरण और पर्यटन का अद्भुत तालमेल चूंकि बीजासन माता मंदिर अभयारण्य क्षेत्र (रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पास) में स्थित है, इसलिए विकास कार्यों में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है।     इको-फ्रेंडली प्रोजेक्ट: रोप-वे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों और वन संपदा को न्यूनतम नुकसान हो।     पर्यटन मानचित्र पर इन्द्रगढ़: बिरला ने विश्वास जताया कि आगामी कुछ वर्षों में इन्द्रगढ़ राजस्थान के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरेगा। दो बार हो चुकी रोप-वे की घोषणा बीजासन माता मंदिर पर पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी रोपवे की घोषणा हुई थी, लेकिन रोप-वे की घोषणा केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। और धरातल पर नहीं आ पाई। ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि प्राचीनता: माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सिद्ध संत बाबा कृपानाथ जी महाराज ने यहाँ कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने स्वयं पर्वत की चट्टान चीरकर दर्शन दिए थे। नाम का रहस्य: 'बीजासन' नाम देवी दुर्गा के उस स्वरूप को दर्शाता है जो राक्षस रक्तबीज का संहार करने के बाद उसके ऊपर आसन लगाकर विराजमान हुई थीं। स्थापना: कहा जाता है कि बूंदी के शासक राव शत्रुसाल के भाई इंद्रसाल ने इन्द्रगढ़ नगर बसाया था और पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को भव्य रूप दिया। मंदिर की भौगोलिक स्थिति और वास्तुकला स्थान: यह मंदिर बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 160 किमी और कोटा से करीब 75 किमी दूर है। पहाड़ी और सीढ़ियाँ: मंदिर पहाड़ी की चोटी पर एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है। वर्तमान में भक्तों को माता के दर्शन के लिए करीब 750 से 1000 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। प्रवेश: गुफा के अंदर माता की स्वयंभू (स्वयं प्रकट) प्रतिमा विराजमान है। मंदिर परिसर से अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। धार्मिक महत्व और मान्यताएँ नवदुर्गा स्वरूप: यहाँ माँ बीजासन को दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में सात बहनों (नवदुर्गा के स्वरूप) की पूजा का भी विधान है। मनोकामना पूर्ण: भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। विशेष रूप से निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहाँ आते हैं। अखंड ज्योति: मंदिर में एक अखंड ज्योति 24 घंटे प्रज्वलित रहती है, जिसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। प्रमुख उत्सव और मेले नवरात्रि मेला: साल में दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के दौरान यहाँ विशाल मेला लगता है। इस समय राजस्थान ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं। धार्मिक आयोजन: नवरात्रि में यहाँ विशेष मंगल आरती, भोग आरती और संध्या आरती का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होना पुण्यदायी माना जाता है।