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आज से T20 वर्ल्ड कप सुपर-8! 9 दिन, 12 मैच और हर पल रोमांच

कोलंबो आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में लीग मुकाबलों का दौर समाप्त हो चुका है. यह टूर्नामेंट अब अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है. 20 टीमों के इस मेगा टूर्नामेंट में अब केवल आठ टीमें बची हैं, जो सुपर-8 राउंड में जंग लड़ेंगी. सुपर-8 मुकाबलों की शुरुआत शनिवार (21 फरवरी) से होगी. सुपर-8 का पहला मुकाबला आज पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे से खेला जाएगा. ग्रुप स्टेज में कई करीबी मुकाबले और उलटफेर देखने को मिले हैं.आईसीसी की ओर से प्री-सीड की गई आठ टीमों में से सात ने सुपर-8 में जगह बनाई. जबकि ऑस्ट्रेलिया सुपर-8 में जगह नहीं बना पाया और उसके स्थान पर जिम्बाब्वे ने एंट्री ली. कुल मिलाकर भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे सुपर-8  में पहुंचने वाली टीम्स हैं. इन आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुप्स में बांटा गया है. ग्रुप-1 में सहमेजबान भारत के अलावा  वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे और साउथ अफ्रीका की टीम्स हैं. इन चारों टीमों ने अपने-अपने ग्रुप में टॉप किया था. ग्रुप-2 में पाकिस्तान, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और सहमेजबान श्रीलंका आमने-सामने होंगे. यह ग्रुप भी बेहद प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है, जहां हर मैच सेमीफाइनल की दौड़ तय करेगा. सुपर-8 चरण में मुकाबले सिंगल राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में खेले जाएंगे, यानी हर टीम अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों से एक-एक मैच खेलेगी. दोनों ग्रुप से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. भारतीय टीम का कब-कब मैच? सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली भारतीय टीम सुपर-8 स्टेज में अपना पहला मुकाबला 22 फरवरी (रविवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलेगी. इसके बाद उसका दूसरा मुकाबला 26 फरवरी (गुरुवार) को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ निर्धारित है. सुपर-8 स्टेज में भारतीय टीम अपना आखिरी मुकाबला 1 मार्च (रविवार) को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेलने वाली है. बता दें कि सुपर 8 में भारतीय टीम के सभी मैच शाम 7 बजे से होंगे. सुपर-8 चरण 21 फरवरी से शुरू होकर 1 मार्च तक चलेगा. कुल 9 दिन चलने वाले सुपर-8 स्टेज में 12 मुकाबले खेले जाएंगे, इसके बाद टूर्नामेंट अपने निर्णायक दौर में प्रवेश करेगा, जहां चार टीमें खिताब के लिए भिड़ेंगी. 4 और 5 मार्च को सेमीफाइनल मुकाबले निर्धारित हैं. जबकि मौजूदा वर्ल्ड कप का फाइनल 8 मार्च को आयोजित होगा. सुपर 8 का ग्रुप ग्रुप-1: भारत, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे ग्रुप-2: श्रीलंका, इंग्लैंड, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड सुपर-8 और नॉकआउट मैचों का शेड्यूल तारीख टीम्स वेन्यू समय 21 फरवरी न्यूजीलैंड vs पाकिस्तान RPS, कोलंबो शाम 7 बजे 22 फरवरी इंग्लैंड vs श्रीलंका पल्लेकेले दोपहर 3 बजे 22 फरवरी भारत vs साउथ अफ्रीका अहमदाबाद शाम 7 बजे 23 फरवरी जिम्बाब्वे vs वेस्टइंडीज वानखेड़े, मुंबई शाम 7 बजे 24 फरवरी इंग्लैंड vs पाकिस्तान पल्लेकेले शाम 7 बजे 25 फरवरी न्यूजीलैंड vs श्रीलंका RPS, कोलंबो शाम 7 बजे 26 फरवरी साउथ अफ्रीका vs वेस्टइंडीज अहमदाबाद दोपहर 3 बजे 26 फरवरी भारत vs जिम्बाब्वे चेन्नई शाम 7 बजे 27 फरवरी इंग्लैंड vs न्यूजीलैंड RPS, कोलंबो शाम 7 बजे 28 फरवरी पाकिस्तान vs श्रीलंका पल्लेकेले शाम 7 बजे 1 मार्च जिम्बाब्वे vs साउथ अफ्रीका दिल्ली दोपहर 3 बजे 1 मार्च भारत vs वेस्टइंडीज कोलकाता शाम 7 बजे 4 मार्च पहला सेमीफाइनल कोलंबो/कोलकाता शाम 7 बजे 5 मार्च दूसरा सेमीफाइनल वानखेड़े, मुंबई शाम 7 बजे 8 मार्च फाइनल अहमदाबाद/ कोलंबो शाम 7 बजे

रिस्की ऐप्स पर बड़ी कार्रवाई: AI की मदद से Google ने बचाए करोड़ों यूजर्स

नई दिल्ली गूगल ने गुरुवार को 2025 में एंड्रॉयड इकोसिस्टम को सिक्योर रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी है. अपने ऐनुअल सिक्योरिटी अपडेट में कंपनी ने बताया कि कैसे गूगल प्ले को सुरक्षित बनाने के लिए लाखों ऐप्स को ब्लॉक किया गया है. कंपनी ने लाखों ऐसे ऐप्स को ब्लॉक किया है जो मालवेयर फैला सकते थे.  इतना ही नहीं ये ऐप्स फाइनेंशियल फ्रॉड्स, छिपे हुए सब्सक्रिप्शन और प्राइवेसी में दखल के जरिए यूजर्स को नुकसान पहुंचा सकते थे. इससे पहले किसी यूजर को कोई नुकसान हो गूगल ने इन्हें अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है. कंपनी ने बताया है कि उन्होंने AI टूल की मदद से ऐसे ऐप्स को पहचाना है.  17.5 लाख ऐप्स को किया ब्लॉक गूगल ने बताया कि 2025 में 17.5 लाख ऐप्स को Google Play पर पब्लिश होने से पहले ही ब्लॉक कर दिया गया है, क्योंकि उन्होंने कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन किया था. कंपनी ने इसकी जानकारी 19 फरवरी को रिलीज हुए ब्लॉक में दी है. साथ ही कंपनी ने 80 हजार डेवलपर्स को भी बैन किया है, जो ऐसी एक्टिविटी से जुड़े हुए थे.  दिग्गज टेक कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उन्होंने 2,55,000 ऐप्स को यूजर के सेंसिटिव और गैरजरूरी डेटा तक पहुंचने से रोका है. गूगल ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को मजबूत किया है और प्राइवेसी फॉर्वर्ड डेवलपमेंट को प्रमोट करने की बात कही है.  AI कैसे कर रहा है गूगल की मदद? ऐप डिस्कवरी में लोगों के भरोसे को बनाए रखने के लिए गूगल ने एंटी-स्पैम सिस्टम को बेहतर किया है. इसकी वजह से 16 लाख स्पैम रेटिंग और रिव्यूज को ब्लॉक किया गया है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड रिव्यूज भी शामिल हैं. इसके अलावा रिव्यू बॉम्बिंग कैपेन की वजह से ऐप्स को होने वाले नुकसान को भी कम किया गया है.  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स और डेवलपर्स दोनों को फायदा हुआ है. कंपनी ने बताया है कि उसका जेनरेटिव AI पावर्ड रिव्यू सिस्टम किसी ऐप को कैसे एनालाइज करता है. ये सिस्टम किसी ऐप की अर्ली लाइफ साइकिल डेवपलमेंट को एनालाइज करने, मैलवेयर, स्पाईवेयर और फाइनेशियल स्कैम को डिटेक्ट करने में मदद करता है.

मौसम चेतावनी: मध्य प्रदेश में 4 दिन तक आंधी और बारिश, भोपाल‑जबलपुर में सुबह होगी बरसात

भोपाल   मध्यप्रदेश में मौसम इस समय 'दोहरी रंगत' दिखा रहा है। एक तरफ जहां गुलाबी ठंड की विदाई का समय है, वहीं दूसरी ओर आसमान से बरसती आफत ने प्रदेशवासियों को चिंता में डाल दिया है। नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से शनिवार, 21 फरवरी 2026 को प्रदेश के 28 जिलों में बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार और शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने उज्जैन और भोपाल संभाग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे रबी की फसलों को बड़ा नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया है। प्रदेश के आधे हिस्से में पानी-पानी मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल और उज्जैन समेत प्रदेश के 17 जिलों में बारिश दर्ज की गई। उज्जैन में सर्वाधिक 1 इंच के आसपास बारिश हुई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। ठंड के आखिरी दौर में हर हफ्ते बदलता यह मौसम का मिजाज विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहा है। शुक्रवार को बारिश का दौर जारी रहा और शनिवार को भी इसके थमने के आसार नहीं हैं। 17 जिलों में जमकर बारिश बता दें कि उज्जैन सहित शाजापुर, देवास, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, झाबुआ, इंदौर, भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, सागर, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बारिश हुई है। प्रदेश में कहीं से ओले की सूचना सामने नहीं आई है। वहीं बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, कई जिलों में ठंड बढ़ गई है। बारिश-आंधी और बिजली का अलर्ट मप्र मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं के साथ बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया है। जिन शहरों में सावधानी बरतने को कहा गया है, उनमें राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के जिले शामिल हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में 'गाज' (आकाशीय बिजली) गिरने की भी संभावना है, इसलिए लोग पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में जाने से बचें। फसलों को नुकसान की आशंका तेज हवाओं का असर खासतौर पर रतलाम, शाजापुर और उज्जैन में ज्यादा देखा गया। यहां गेहूं की खड़ी फसलें झुक गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसलें लंबे समय तक जमीन पर पड़ी रहीं तो दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। पिछले तीन दिनों में करीब 25 जिलों में आंधी के कारण फसल नुकसान की संभावना जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू करा दिया है। राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर रही हैं। अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम 22 फरवरी को बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, हालांकि आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। 23 फरवरी को दक्षिणी हिस्सों में सक्रिय सिस्टम के प्रभाव से बारिश होने की संभावना जताई गई है। 24 फरवरी को दक्षिण-पूर्वी जिलों में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है। इंदौर में तापमान में खासी गिरावट इंदौर में शुक्रवार को मौसम अचानक बदल गया। दिन का अधिकतम तापमान चार डिग्री गिरकर 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रात के तापमान में भी एक डिग्री की कमी आई और पारा 15 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। देर रात शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई। शनिवार सुबह हल्की ठंड महसूस की गई, हालांकि दिन में धूप निकलने से मौसम सुहावना बना रहा। फरवरी में लगातार बदल रहा मौसम इस महीने की शुरुआत से ही मौसम अस्थिर बना हुआ है। फरवरी के पहले पखवाड़े में दो बार आंधी, बारिश और ओले गिर चुके हैं, जिससे फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसका असर 19 और 20 फरवरी को भी रहा। अब 23 और 24 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह फरवरी में चौथी बार मौसम परिवर्तन होगा। कल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर 22 फरवरी को एक पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होगा। इसका प्रभाव अगले दिन से मध्य प्रदेश में दिखाई दे सकता है। 23 फरवरी को नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में वर्षा की संभावना है। 24 फरवरी को सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बारिश हो सकती है। तापमान का हाल बारिश के बावजूद रात के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है, लेकिन हवाओं ने सिहरन बढ़ा दी है। कल्याणपुर 10.4°C के साथ सबसे ठंडा इलाका रहा, वहीं शहडोल और उमरिया में पारा 10 से 12°C के बीच बना हुआ है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि खेतों में खड़ी गेंहू और चने की फसलें तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव और नमी के कारण दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है और पैदावार में गिरावट आने की पूरी आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल बड़े स्तर पर ओलावृष्टि की सूचना कहीं से नहीं मिली है।

मतदाता सूची अपडेट: भोपाल में 3.80 लाख नाम हटाए गए, 120+ उम्र के 125 वोटर्स अब नहीं होंगे शामिल

भोपाल  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो जाएगी। जिलों में निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची का प्रकाशन कर बताएंगे कि किस विधानसभा सीट में कितने मतदाताओं के नाम काटे और जोड़े गए हैं। इसके बाद अब चुनाव आयोग की एसआईआर की कार्यवाही भी कम्प्लीट हो जाएगी। अब ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से नाम जोड़ने और हटवाने की प्रक्रिया चलती रहेगी। एसआईआर की कार्यवाही पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत उनके मंत्रियों के क्षेत्र से 8 लाख 20 हजार 255 नाम काटे गए थे। इसके बाद नए नाम जोड़ने को लेकर तय समय-सीमा में सिर्फ 1 लाख 69 हजार 753 आवेदन जमा किए गए। सबसे अधिक नाम मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग के विधानसभा क्षेत्र से कटे थे उसी तरह नए नाम जोड़ने के लिए सबसे अधिक आवेदन जमा हुए थे। पूरे प्रदेश की बात करें तो 42 लाख 74 हजार से अधिक नाम काटने की कार्यवाही एसआईआर में की गई और इसके विपरीत नए नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 9 लाख 89 हजार 991 लोगों ने आवेदन जमा किए गए थे। नए नाम जोड़ने के लिए जिन विधानसभा क्षेत्रों में दस हजार से अधिक आवेदन जमा किए गए थे, उसमें मंत्री कृष्णा गौर की गोविंदपुरा विधानसभा सीट सबसे आगे है। यहां 17888 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की सीट नरेला में 15115 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए थे। भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट जिसके विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, वहां से 13024 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए। इंदौर जिले में इंदौर 2 विधानसभा सीट से 10446 और इंदौर 5 विधानसभा क्षेत्र से 11040 नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए। राऊ सीट के लिए 12700, नागदा खाचरौद सीट के लिए 11047 आवेदन जमा कराए गए। भोपाल में 120+ उम्र के 125 वोटर्स स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में भोपाल की वोटर संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पहले सर्वे और फिर दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। बता दें, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर यानी, बीएलओ अपने-अपने बूथ पर बैठें। इस दौरान उन्होंने नए फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए। एसआईआर में जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में रखा गया कि उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिन के अंदर उनका रिकॉर्ड देखा। 14 फरवरी तक ये काम पूरा हो गया। अब फाइनल मतदाता सूची शनिवार को जारी होगी। पहले इतनी थी मतदाता संख्या एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल की मतदाता संख्या 21 लाख 25 हजार 908 थी, जो अब 17 लाख 45 हजार 453 हो गई है। इस तरह वोटर लिस्ट से 3 लाख 80 हजार 455 मतदाता कम हो जाएंगे। उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे जानकारी के अनुसार, शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। इनमें शतक यानी, 100 या इससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी। इस उम्र की कैटेगिरी में करीब 125 मतदाता हैं। सबसे कम आवेदन वाले विधानसभा में राजनगर और बीना का नाम छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए सबसे कम 1138 आवेदन आए थे। राजनगर कांग्रेस के पूर्व एमएलए विक्रम सिंह नातीराजा का क्षेत्र है। इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने को लेकर विवादों में चल रही कांग्रेस की एमएलए निर्मला सप्रे भी उन विधायकों में शामिल हैं जिनके यहां नए नाम जोड़ने के लिए कम आवेदन जमा हुए थे। बीना विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के बाद नाम जोड़ने के लिए 1288 आवेदन जमा हुए। इन विधानसभा सीट में भी दो हजार से कम आवेदन आए चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक टिमरनी विधानसभा सीट से 1463 आवेदन मिले थे। भगवानपुरा सीट से 1556 और रतलाम ग्रामीण के लिए 1629 आवेदन जमा कराए गए तो जावद सीट के लिए 1649 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से 1742 आवेदन आए। पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह की सीट अनूपपुर से 1750 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले थे। वहीं शमशाबाद विधानसभा सीट के लिए 1781 आवेदन जमा किए गए। भीकनगांव के लिए 1794, बदनावर सीट से 1799, बड़वाह सीट के लिए 1838 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा क्षेत्र से 1934 आवेदन जमा हुए थे। मंत्री कृष्णा और सारंग के क्षेत्र में सबसे अधिक नाम कटे एसआईआर में सबसे अधिक नाम गोविन्दपुरा से विधायक और मोहन सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से काटे गए थे। भोपाल जिले की इस विधानसभा सीट से 97052 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। दूसरे स्थान पर इंदौर-5 से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया का विधानसभा क्षेत्र है। मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र से 81235 और 75014 वोटर्स के नाम काटे गए। एसआईआर में सबसे कम 6034 नाम नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से कटे। एसआईआर ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इसमें भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर के इंदौर-1, ग्वालियर जिले की ग्वालियर विधानसभा, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा, इंदौर जिले की इंदौर -1 विधानसभा शामिल है। मुख्यमंत्री के यहां 37728, विस अध्यक्ष के यहां 13920 नाम कटे थे एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विधानसभा सीट उज्जैन दक्षिण से 37728 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र के 13920 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं। कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र गंधवानी से 14712 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अटेर विधानसभा कांग्रेस … Read more

साध्वी की मौत का खुलासा! 18 दिन की पड़ताल में CCTV और कॉल डिटेल से सामने आया सच

 जोधपुर राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है. एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया.  28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया. पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई.  वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला. आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है. जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी. साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है. लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था. एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में … Read more

ट्रंप का बड़ा दांव! 10% वैश्विक टैरिफ से भारत और अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर कितनी मार?

नई दिल्ली अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ पर ट्रंप की जोरदार हार हुई है. US Supreme Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए Donald Trump को बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है. इस हार के बाद ट्रंप ने 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ (10% Global Tariff) लगाने का ऐलान कर दिया है. आइए समझते हैं इसका भारत समेत दुनिया के तमाम देशों पर क्या असर होने वाला है और क्या अब पहले से लागू टैरिफ के बजाय सिर्फ 10% टैरिफ ही देना होगा? कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फोड़ा टैरिफ बम सबसे पहले बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से US Reciprocal Tariff को अवैध करार दिए जाने के बाद ट्रंप के तेवर गर्म हो गए हैं. कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों के बाद ही राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश पर साइन कर दिए और दुनिया के सभी देशों से आयात पर 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ जड़ दिया. इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने अकाउंट से एक पोस्ट शेयर कर भी दी है.  क्या भारत और दूसरे देशों पर सिर्फ 10% टैरिफ?  Donald Trump के टैरिफ को गैरकानूनी बताए जाने और इसके बाद ट्रंप द्वारा नए ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) का ऐलान करने के बाद बड़ा सवाल ये है कि भारत समेत तभी देशों को अब सिर्फ 10% ही टैरिफ देना होगा. तो एएनआई की रिपोर्ट में इसे लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि हां, जब तक कोई अन्य प्राधिकरण लागू नहीं किया जाता, तब तक 10% टैरिफ ही लागू रहेगा. इसका मतलब 18% नहीं, अब भारतीय सामानों के आयात पर अमेरिका में 10 फीसदी टैरिफ रह सकता है. हालांकि, यहां ट्रंप के बयान पर गौर करें, तो उन्होंने कहा था कि 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा.  IEEPA की जगह लेगा नया टैरिफ?  ट्रंप ने बीते साल 2025 के अप्रैल महीने में अमेरिका के लिए लिब्रेशन डे करार देते हुए टैरिफ का ऐलान किया था, जो 10 फीसदी से 50 फीसदी तक था. ये रेसिप्रोकल टैरिफ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाया था और कोर्ट ने इस संबंध में साफ किया है कि ऐसा करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं है और ये सिर्फ इमरजेंसी के हालात में यूज होता है. ऐसे में अधिकारी ने साफ किया कि हां, ये IEEPA के तहत लागू किए गए टैरिफ की जगह लेगा, जब तक कोई नया सिस्टम लागू नहीं किया जाता.  कितने दिन तक लागू रहेगा नया टैरिफ?  Donald Trump ने सुप्रीम कोर्ट में मिली टैरिफ पर हार के बाद आनन-फानन में 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश दे दिया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि करीब पांच महीने या 150 दिनों के लिए लागू रहेगा. क्या ट्रंप लगा सकते हैं अधिक टैरिफ?   इस सवाल का जबाव भी खुद डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है और प्रेस कॉन्फ्रेंस में 10% ग्लोबल टैरिफ पर बात करते हुए संकेत दिया है कि उचित टैरिफ तय करने के लिए जरूरी जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर Tariff Hike किया जा सकता है.  ट्रंप ने क्यों लगाया नया ग्लोबल टैरिफ?  White House के अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका का नया 10% ग्लोबल टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी व्यापार एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भुगतान संतुलन संबंधी समस्याओं और अनुचित व्यापार प्रथाओं का समाधान करना है. इसके साथ ही उन्होंने सभी ट्रेड पार्टनर्स को Trade Deals का पालन करने की सलाह भी दी है. 

सरकारी कर्मचारियों–पेंशनर्स के लिए खुशखबरी, केंद्र सरकार का अहम फैसला

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। अब गंभीर बीमारी के इलाज के बाद भारी-भरकम बिलों के रीम्बर्समेंट के लिए सरकारी दफ्तरों की लंबी फाइलों और 'साहब' की मंजूरी का महीनों इंतजार नहीं करना होगा। सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर दिया है। क्या है नया नियम? (10 लाख तक की सीधी मंजूरी) 16 फरवरी, 2026 को जारी नए ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के अनुसार, अब मंत्रालयों के विभाग प्रमुख (HOD) बिना किसी बाहरी वित्तीय सलाह (IFD) के 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम को सीधे मंजूरी दे सकेंगे। पहले की सीमा: केवल 5 लाख रुपये। अब: 10 लाख रुपये तक के बिलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगा। तेजी से पैसा पाने के लिए 2 जरूरी शर्तें अगर आप चाहते हैं कि आपका क्लेम बिना किसी देरी के पास हो, तो इन दो बातों का ध्यान रखना होगा: नियमों का पालन: क्लेम में CGHS या CS(MA) के मौजूदा नियमों में किसी भी प्रकार की छूट (Relaxation) न मांगी गई हो। निर्धारित दरें: अस्पताल का बिल पूरी तरह से सरकार द्वारा तय (CGHS Rates) दरों के अनुसार होना चाहिए। नोट: यदि बिल सरकारी रेट से अधिक है और आप अतिरिक्त भुगतान के लिए छूट चाहते हैं, तो फाइल अभी भी पुरानी लंबी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी। सेटेलमेंट लिमिट में भी भारी इजाफा सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की लिमिट को भी 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जिनके बिल पूरी तरह सरकारी दरों पर आधारित हैं। इससे भुगतान में होने वाली तकनीकी देरी को लगभग खत्म कर दिया गया है। आवेदन प्रक्रिया: पेंशनभोगी ध्यान दें इलाज के बाद पैसा वापस पाने की प्रक्रिया अब बेहद सरल है। समय सीमा: अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 6 महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है। कहां करें आवेदन: पेंशनभोगी अपने संबंधित वेलनेस सेंटर के CMO (Chief Medical Officer) को फाइल जमा करें। जरूरी दस्तावेज की चेकलिस्ट:     भरा हुआ क्लेम फॉर्म।     डिस्चार्ज समरी और रेफरल स्लिप।     अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें।     इमरजेंसी की स्थिति में 'इमरजेंसी सर्टिफिकेट'।     CGHS कार्ड की कॉपी और कैंसिल चेक। एंबुलेंस का खर्च भी होगा वापस क्या आपको पता है कि अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस का किराया भी सरकार देती है? नियम के मुताबिक, शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तब मिलता है जब डॉक्टर यह प्रमाणित कर दे कि मरीज की हालत ऐसी थी कि उसे किसी दूसरे वाहन से ले जाना जानलेवा हो सकता था।  

मेरठ में पीएम मोदी की जनसभा आज, शहर में लागू हुआ रूट डायवर्जन प्लान

मेरठ मेरठ में 22 फरवरी को प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने व्यापक डायवर्जन प्लान जारी किया है। इसके तहत कार्यक्रम के दिन भारी वाहनों (कमर्शियल) के साथ-साथ निजी कारों और बसों के लिए भी रास्तों में बदलाव किया गया है। यह प्लान सुबह 08:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक पूरी तरह प्रभावी रहेगा। गाजियाबाद से मेरठ: राजनगर एक्सटेंशन, दुहाई, मुरादनगर और मोदीनगर से मेरठ की ओर आने वाले भारी वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। ये वाहन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे या पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का उपयोग कर सकेंगे।  मुजफ्फरनगर से मेरठ: सठेड़ी पुलिस चौकी पुल से भारी वाहन एनएच-58 होकर अपने गंतव्य को जा सकेंगे।  मुरादाबाद/हापुड़ से मेरठ: टियाला अंडरपास से भारी वाहन किठौर और परीक्षतगढ़ होते हुए बिजनौर या मुजफ्फरनगर की ओर निकाले जाएंगे।  शहर के अंदर: बिजली बम्बा चौराहा से शाप्रिक्स माॅल की ओर सभी प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। परतापुर इंटरचेंज और काशी टोल प्लाजा पर भी भारी वाहनों के लिए विशेष पाबंदियां रहेंगी। मेरठ-परतापुर से मोदीनगर की ओर जाने वाली सड़क रहेगी बंद मेरठ शहर से दिल्ली जाने वाले वाहन: मेरठ शहर से दिल्ली जाने वाले वाहन मेरठ शहर से रुड़की रोड, मोदीपुरम पुल, सरधना पुल, रोहटा पुल, बागपत पुल- एनएच-58 से काशी टोल प्लाजा से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे होते हुए जा सकेगे। मेरठ शहर से दिल्ली जाने वाले वाहन :  बिजली बंबा चौराहे से होते हुए हापुड़ से दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे मार्ग से भी दिल्ली जा सकेगे। दिल्ली से मेरठ शहर में आने वाले वाहन: दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे से काशी टोल प्लाजा से एनएच-58 होते हुए बागपत पुल, रोहटा पुल, सरधना पुल, मोदीपुरम, रुड़की रोड होते हुए मेरठ शहर में आ सकेगे। दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन : दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे होते हुए हापुड़ से बिजली बंबा चौराहे से भी मेरठ शहर में आ सकेगे। मेरठ से दिल्ली आने व जाने वाले वाहन : परतापुर इन्टरचेंज से दिल्ली रोड होते हुए मेरठ शहर में प्रवेश नहीं कर सकेगे। यातायात प्रबंधन के दौरान किसी भी प्रकार की आपात कालीन सेवाऐ एवं एम्बुलेंस बाधित नहीं रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रमण कार्यक्रम के कारण मेरठ-परतापुर से मोदीनगर की ओर कोई भी वाहन नहीं चलेगा। मेरठ-मोदीनगर-दिल्ली मार्ग बंद रहेगा। अभी तक दिल्ली के न्यू अशोक नगर तक पहुंच रही नमो भारत रेल अगले तीन दिनों में सराय काले खां तक पहुंचने लगेगी। इससे यात्रियों की नमो रेल के साथ भारतीय रेलवे, दिल्ली मेट्रो और बस तक सीधी पहुंच होगी। शुक्रवार को इस ट्रेन का ट्रायल रन होगा। अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार पहली बार नमो रेल सरायकाले खां से बेगमपुल तक चलेगी।उद्घाटन के साथ ही आम लोग के लिए कॉरिडोर खोल दिया जाएगा जिससे सराय काले खां मेगा ट्रांसपोर्ट हब से यात्री अपनी मंजिल के लिए आसानी से दूसरा वाहन पकड़ सकेंगे। मेरठ साउथ नमो स्टेशन से आगे बेगमपुल स्टेशन तक जाना भी संभव होगा।   बस, कार और निजी वाहनों के लिए मार्ग  दिल्ली/गाजियाबाद से: मोदीनगर से कादराबाद पुलिस चौकी से आगे बाएं मुड़कर कार/बस पार्किंग स्थल की ओर जा सकेंगे।  मुजफ्फरनगर/शामली से: गंगनहर पटरी होते हुए सिवालखास पुल से बाएं मुड़कर पार्किंग की ओर जा सकेंगे।  हापुड़ से: थाना खरखौदा तिराहे से मोहिउद्दीनपुर होते हुए पार्किंग स्थल पहुंचेंगे।  मवाना/परीक्षितगढ़ से: मवाना से आने वाले वाहन दौराला और गंगनहर पटरी मार्ग से होते हुए सिवालखास पुल के रास्ते पार्किंग तक जा सकेंगे। बार-बार बदलता रहा ट्रैफिक प्लान यातायात पुलिस ने बृहस्पतिवार देर रात करीब 10 बजे ट्रैफिक प्लान जारी किया था। इसके कुछ देर बाद इस प्लान को बदल दिया गया और रात 12 बजे नया प्लान जारी किया। इसके कुछ देर बाद इसमें भी संशोधन कर दिया गया।  

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की तैयारी तेज, 1.81 लाख किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक एक लाख 81 हजार 793 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। पंजीयन की कार्यवाही 7 मार्च तक जारी रहेगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन जरूर करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 27 हजार 175, उज्जैन में 73 हजार 398, ग्वालियर में 3358, चम्बल में 1449, जबलपुर में 12 हजार 342, नर्मदापुरम में 11 हजार 698, भोपाल में 41 हजार 268, रीवा में 3242, शहडोल में 726 और सागर संभाग में 7137 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज दतिया को देंगे 532 करोड़ रूपये के विकास की सौगातें

सिंध नदी पर नव निर्मित सेतु का करेंगे लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दतिया जिले की तहसील सेवढ़ा में आयोजित कार्यक्रम में 532 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इसमें मुख्य रूप से सिंध नदी पर नव निर्मित सेतु का लोकार्पण शामिल हैं। साथ ही सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बसई सहित अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सनकुआ धाम के समीप स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में पूजन-अर्चन भी करेंगे। कृषि उपज मंडी प्रांगण सेवढ़ा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 299.32 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और 233.24 करोड़ रुपये की लागत के 21 कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करेंगे। साथ ही विभिन्न शासकीय योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित करेंगे।