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क्या लॉटरी सिस्टम तय करेगा मुंबई का अगला मेयर? शिंदे मॉडल पर सियासी हलचल

मुंबई  महाराष्ट्र के नगर महापालिका परिषद चुनाव नतीजों की चर्चा दिल्ली तक हो रही है, लेकिन सभी की निगाहें मुंबई के मेयर पद पर लगी हुई हैं. पिछले 28 सालों से बीएमसी पर काबिज रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को करारी मात खानी पड़ी है. ऐसे में बीजेपी को पहली बार मुंबई में मिली भारी जीत के बाद सवाल उठ रहा है कि देश की सबसे समृद्ध माने जाने वाली महानगर पालिका बीएमसी के मेयर कौन बनेगा?  मुंबई नगर महापालिका चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो शिंदे के शिवसेना के साथ बीएमसी पर अपना कब्जा जमाए रखने का नंबर गेम भी हैं. इसके बाद भी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया में वक्त लगेगा, इसलिए इस बीच कई उतार चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं.  बीएमसी के नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा.  मुंबई नगर प्रशासन द्वारा नवनिर्वाचित पार्षतों की बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में यह चुनाव होने की संभावना है, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा?  शिंदे के 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा मेयर मुंबई में बीएमसी का मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (शहरी विकास विभाग) के द्वारा तय होता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण का फैसला शिंदे के विभाग के द्वारा तय किया जाना है.   बीएमसी में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है. महाराष्ट्र का शहरी विकास विभाग मेयर पद के श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया कराता है.  मेयर पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया को चुनाव के पहले तय नहीं किया. इसी कारण किस महापालिका मे कौन सी जाति या वर्ग का मेयर होगा ये अभी तक तय नहीं हुआ है. ऐसे में मुंबई के मेयर का पद भी तय नहीं है. पुरुष, महिला, ओबीसी, अनुसूचित जाति के आधार पर रोटेशन अभी तय होना है. माना जा रहा है कि इसी हफ्ते अब एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाला शहरी विकास विभाग मेयर पद के आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपना सकता है. ऐसे में पहले शहरी विकास विभाग के द्वारा मेयर का आरक्षण तय होगा. सूत्रों की मानें तो 22 जनवरी को आरक्षण तय हो सकता है और उसके बाद मेयर ही कौन बनेगा, उसे लेकर फैसला होगा.  महाराष्ट्र में कैसे होगा नए मेयरों का चुनाव मेयर पद पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएमसी के नए मेयर का चुनाव होगा. इस तरह से महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जो इस बार भी जीतकर आईं है, लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. इसके चलते उनका मेयर बनने की राह काफी मुश्किल है.  बीएमसी मेयर को काफी ताकतवर माना जाता है और इस पद के लिए दावेदारी भी बड़ी होती है. मुंबई के बीएमसी में अलग-अलग वॉर्डों से कुल 227 पार्षद (नगर सेवक) चुनाव जीतकर आए हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है. ऐसे में जिस पार्टी का बहुमत होता है, वही मेयर पद की उम्मीदवारी में सबसे बड़ी दावेदार होती है.  नगर महापालिका चुनाव जीतकर आने वाले पार्षद ही मेयर का चुनाव करते हैं. मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं. एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है. ऐसे में प्रशासन नवनिर्वाचित निगम पार्षदों की विशेष बैठक बुलाएगा, जिसमें मेयर और उपमेयर का चुनाव होगा. 28 जनवरी को नगर प्रशासन पार्षदों की विशेष बैठक बुला सकता है. बैठक में मेयर पद के लिए सभी निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और जिसे सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही मेयर चुना जाएगा. हालांकि. यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा पार्षदों वाली पार्टी का उम्मीदवार ही मेयर बने, लेकिन बीते वर्षों के अनुभव बताते हैं कि आमतौर पर बहुमत या मजबूत गठबंधन वाली पार्टी इस पद पर काबिज होती रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी पहली बार मुंबई में अपने मेयर बना सकती है.  मेयर के साथ उपमेयर का भी होगा चुनाव शहरी विकास विभाग (यूडीडी) इसी हफ्ते मेयर पद के आरक्षण को लेकर लॉटरी निकालेगा. इसमें यह तय होगा कि मेयर पद सामान्य वर्ग, महिला या किसी आरक्षित श्रेणी के लिए होगा. आरक्षण की घोषणा के बाद पात्र पार्षद नामांकन दाखिल करेंगे और उसके कुछ दिनों बाद मेयर का चुनाव कराया जाएगा. इस तरह मेयर चुनाव जनवरी के अंतिम सप्ताह में होना तय माना जा रहा है. मेयर के साथ उपमेयर का भी चुनाव होगा. इसके अलावा स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन के पद भी सभी की निगाहें हैं.  बीएमसी में भले ही मेयर का पद सबसे बड़ा हो, लेकिन असली ताकत किसी और के पास होती है. सबसे अमीर नगरपालिका में दो विंग होती है, पहली राजनीतिक विंग और दूसरी प्रशासनिक विंग. राजनीतिक विंग के मुखिया मेयर होते है जबकि प्रशासनिक विंग को नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) हेड करते हैं. ऐसे में बीजेपी के पास अपने दम पर मेयर बनाने का नंबर नहीं है, जिसके चलते शिंदे के समर्थन से ही बीएमसी पर कब्जा जमा सकता है. इस वजह से शिंदे की बार्गेनिंग पावर बढ़ गई है और उनकी नजर भी बीएमसी के अहम पद है.  बीजेपी और एकनाथ शिंदे में होगी शह-मात मेयर चुनाव की प्रक्रिया के तहत पहले आरक्षण तय किया जाता है, फिर विशेष बैठक में सभी पार्षद मतदान करते हैं. साधारण बहुमत हासिल करने वाला उम्मीदवार मेयर और उपमेयर घोषित किया जाता है. हालांकि, किसी दल के पास अगर स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तो गठबंधन और चुनाव के बाद की राजनीतिक बातचीत निर्णायक भूमिका निभाती है. मुंबई में इस बार मेयर चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार 227 निर्वाचित पार्षदों के साथ 10 नामांकित पार्षद भी होंगे। मार्च 2023 में मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन … Read more

हरियाणा, दिल्ली, यूपी के लिए जा रही कारें, ग्वालियर मेले में रिकॉर्ड प्री-बुकिंग और रोड टैक्स छूट

ग्वालियर  ग्वालियर व्यापार मेले में आने वाले खरीदारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार द्वारा ग्वालियर व्यापार मेले में वाहनों की खरीद पर 50 प्रतिशत रोड टैक्स छूट की अधिसूचना  जारी कर दी गई है। अधिसूचना जारी होते ही अब व्यापार मेले में रोड टैक्स छूट का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि सीएम ने कैबिनेट में 13 जनवरी को छूट की घोषणा कर दी थी। लंबे समय से व्यापारी संगठनों और वाहन विक्रेताओं द्वारा रोड टैक्स में छूट की मांग की जा रही थी। अधिसूचना जारी होने के बाद व्यापार मेले में वाहन बिक्री में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। खासतौर पर दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। यदि आप नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो ग्वालियर व्यापार मेला इस समय सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। मेले में वाहनों पर रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट दी जा रही है, वहीं डीलर्स की ओर से भी आकर्षक ऑफर मिल रहे हैं। पिछले साल 2025 के मेले में रोड टैक्स छूट के बाद वैगन-आर LXI CNG की कीमत 6 लाख 57 हजार 80 रुपए थी, जबकि 2026 में लगभग वही ऑफर मिलने के बावजूद यही कार 6 लाख 40 हजार 396 रुपए में उपलब्ध है, यानी ग्राहकों को पिछले साल की तुलना में करीब 17 हजार रुपए का अतिरिक्त फायदा हो रहा है। मेला शुरू होने के बाद 25 दिन में अब तक 8 हजार से अधिक वाहनों की बुकिंग हो चुकी है। रोड टैक्स छूट का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद 19 जनवरी से टैक्स में छूट मिलना शुरू होगी और इसके साथ ही वाहनों की डिलीवरी भी शुरू कर दी जाएगी। खास बात यह है कि ग्वालियर व्यापार मेले से हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश तक के लोग वाहन खरीदने पहुंच रहे हैं।  उज्जैन नहीं, ग्वालियर से खरीद रहे वाहन… ये है वजह ग्वालियर व्यापार मेला 25 दिसंबर से शुरू हुआ है, जबकि उज्जैन का विक्रमोत्सव मेला 16 जनवरी से शुरू हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों मेलों में वाहन खरीद पर 50 फीसदी रोड टैक्स में छूट का ऐलान किया है। उज्जैन मेले में भी कारें सस्ती मिल रही हैं, लेकिन इंदौर और उज्जैन के आसपास के शहरों के लोग लग्जरी कारों के लिए ग्वालियर मेले का रुख कर रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि ग्वालियर मेला पुराना और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए भरोसेमंद माना जाता है। दूसरा अहम कारण रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ा है। उज्जैन से वाहन खरीदने पर MP 13 रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है, जिसे 13 अंक से जुड़ी मान्यताओं के कारण कई व्यापारी और कारोबारी शुभ नहीं मानते। वहीं, ग्वालियर से वाहन खरीदने पर MP 07 रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है, जिसे लोग अधिक शुभ मानते हैं। इसी का असर यह है कि पिछले वर्ष 50 लाख से 2 करोड़ रुपए कीमत की 128 लग्जरी कारें ग्वालियर व्यापार मेले से खरीदी गई थीं। मूल निवासी प्रमाण पत्र देना होगा सामान्य तौर पर दूसरे प्रदेश के लोगों को टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलेगा। उत्तर प्रदेश, राजस्थान या अन्य राज्यों के लोग यदि यह छूट लेना चाहते हैं तो उन्हें ग्वालियर में निवास का प्रमाण देना होगा। इसके लिए कम से कम दो साल का किरायानामा, आधार कार्ड में स्थानीय पता या ग्वालियर में रहने वाले किसी रिश्तेदार के नाम से वाहन का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि, प्रदेश के अन्य शहर का एड्रेस प्रूफ भी मान्य होगा। ग्वालियर व्यापार मेले में टैक्स छूट से बढ़ेगा व्यापार, सिंधिया बोले—विकास और व्यापार पूरक मध्य प्रदेश सरकार ने माधवराव सिंधिया व्यापार ग्वालियर मेले में बिकने वाले वाहनों पर रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में छूट देने का फैसला किया है। इस निर्णय को लेकर व्यापारिक संगठनों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त किया है। व्यापारियों ने जताया केंद्रीय मंत्री का आभार व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि व्यापार और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत व्यापारिक गतिविधियां किसी भी क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का आधार होती हैं। ऑटोमोबाइल टैक्स में 50% छूट का फैसला गौरतलब है कि हाल ही में राज्य सरकार ने ग्वालियर व्यापार मेला और उज्जैन व्यापार मेला के संदर्भ में बड़ा निर्णय लेते हुए ऑटोमोबाइल पर लगने वाले मोटरयान कर में 50% की छूट देने का ऐलान किया था। इस फैसले से मेले में वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। व्यापारिक संगठनों ने की मुलाकात मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन, ग्वालियर मेला व्यापारी संघ और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, ग्वालियर के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष मोटरयान कर में छूट का प्रस्ताव रखने और इस संबंध में पत्र लिखने पर केंद्रीय मंत्री का आभार जताया। सिंधिया ने कहा व्यापार और उद्योग विकास की रीढ़ केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि व्यापार और उद्योग किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ होते हैं। उन्होंने राज्य सरकार के इस निर्णय को स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर व्यापार, उद्योग और रोजगार सृजन के लिए लगातार कार्य करती रहेंगी। ग्वालियर-चंबल अंचल को मिलेगी नई गति प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह निर्णय न केवल व्यापारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि इससे ग्वालियर-चंबल अंचल में व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी। वाहन बिक्री में बढ़ोतरी की उम्मीद व्यापारिक संगठनों के अनुसार, रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स में दी गई छूट से व्यापार मेले में वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे स्थानीय व्यापारियों, ऑटोमोबाइल डीलर्स और सहायक उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए भी बेहद लाभकारी साबित होगा। चैंबर ऑफ कॉमर्स में आने का निमंत्रण इस अवसर पर मध्य प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को चैंबर ऑफ कॉमर्स में आने का औपचारिक आमंत्रण भी दिया। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि उनके मार्गदर्शन में व्यापारिक समुदाय को आगे भी इसी … Read more

सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, विजय शाह केस में कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े गंभीर आरोपों पर होगी चर्चा

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट में आज मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई होगी। यह याचिका उनके उस विवादित बयान से संबंधित है, जो उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ दिया था। मंत्री विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में यह अपील की है कि मामले में दर्ज FIR को रद्द किया जाए। शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने तर्क दिया था कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया है, जिसे ऑनलाइन साझा किया गया था और इसे अदालत के रिकॉर्ड में रखा जाएगा। शीर्ष अदालत ने तब कहा था, ऑनलाइन माफी क्या होती है? हमें उनकी मंशा और ईमानदारी पर संदेह होने लगा है। आप माफी को रिकॉर्ड पर रखें। हमें इसे देखना होगा। उसने मंत्री के बयानों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को 13 अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। पीठ ने कहा था कि शाह के बयानों के बजाय उन लोगों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए थे जिनकी भावनाएं आहत हुई थीं। उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के लिए शाह को फटकार लगाई और पुलिस को उनके खिलाफ शत्रुता व नफरत को बढ़ावा देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। छह महीने बाद होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह के बयान मामले पर पिछले साल 28 जुलाई को सुनवाई हुई थी। इसके छह महीने बाद आज सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई होगी। जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर फटकार लगाई थी महू में पिछले साल 11 मई को दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम को मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- 'उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।' शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।' मंत्री शाह ने एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती बता दें कि मंत्री विजय शाह ने 11 मई को महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताया था। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर मंत्री के खिलाफ 14 मई को महू के मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके खिलाफ विजय शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सोमवार 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विजय शाह के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट ने माफी मांग ली है। इस पर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आप लोगों के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। आप पब्लिक फिगर हैं। आपको बोलते समय अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए। जुलाई में सुनवाई पर कोर्ट ने माफी पर जताई थी नाराजगी पिछले साल 28 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी को लेकर भाजपा मंत्री विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने शाह के मामले में सुनवाई की थी। कोर्ट ने शाह द्वारा सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को निष्ठाहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। यह देखते हुए कि अपने माफीनामे वाले वीडियो में शाह ने जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात स्वीकार नहीं की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा– वह आत्मचिंतन करें कि अपनी सजा कैसे चुकाएं। आपकी वह सार्वजनिक माफी कहां है? हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। बैंक खाते फ्रीज करने के नियमों पर आज सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया से जुड़ी एक अहम याचिका को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। यह याचिका केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से इस विषय पर एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग करती है। बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में आज शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की याचिका पर सुनवाई होगी। मजीठिया ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें असमान संपत्ति मामले में जमानत नहीं दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगा और तय करेगा कि क्या उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। इस सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला नेताओं की संपत्ति और जवाबदेही के संबंध में अहम माना जाता है। बीएस येदियुरप्पा POCSO केस और चुनावी रजिस्टर सुधार पर भी सुनवाई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। बीएस येदियुरप्पा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और आज कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा।वहीं चुनाव आयोग से जुड़ा है। कुछ याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के सारांश संशोधन प्रक्रिया को चुनौती दी है, जिसके तहत निर्वाचन रजिस्टर में सुधार किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट आज इस याचिका पर भी विचार करेगा। 

दिल्ली-NCR में कांपी धरती, भूकंप के झटकों से मचा हड़कंप

नई दिल्‍ली दिल्ली में सोमवार की सुबह भूकंप का हल्का झटका महसूस किया गया. रिक्‍टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई है. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तर दिल्ली में दर्ज किया गया है. सुबह 8:44 बजे भूकंप का झटका दर्ज किया गया और भूकंप का केंद्र जमीन की सतह के काफी पास रहा. दिल्‍ली में आए भूकंप का केंद्र जमीन से महज 5 किलोमीटर नीचे था. दिल्‍ली भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है और उच्‍च जोखिम वाले सिस्‍मिक जोन 4 में आता है. भूकंप का केंद्र दिल्‍ली जरूर था, लेकिन भूकंप का झटका बेहद हल्‍का था. ऐसे में जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. भूकंप के बाद दिल्‍ली-एनसीआर में हालात सामान्‍य हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 2.8 तीव्रता के भूकंप से किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं होती है.  इस महीने कई जगहों पर दर्ज किए गए भूकंप  भारत के विभिन्‍न इलाकों में जनवरी महीने के दौरान कई भूकंप दर्ज किए गए हैं. शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात गुजरात के कच्छ जिले में 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी. गांधीनगर स्थित भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) ने बताया था कि भूकंप शुक्रवार देर रात एक बजकर 22 मिनट पर आया और इसका केंद्र जिले के खावड़ा से लगभग 55 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व में था. भूकंप संवेदनशील जोन-4 में आता है दिल्ली-NCR भूकंप के झटके एक बार फिर याद दिलाते हैं कि दिल्ली-एनसीआर भूकंप संवेदनशील जोन-4 में आता है और यहां भूकंप के बड़े झटके कभी भी आ सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे झटके बड़े भूकंप का संकेत भी हो सकते हैं, इसलिए लोगों को तैयार रहना चाहिए. अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन सुबह के इस झटके ने लोगों को डरा दिया है. इससे पहले बुधवार 14 जनवरी को भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इस भूंकप का केंद्र हरियाणा के सोनीपत स्थित गोहाना था, जिसकी तीव्रता रीक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई. इस भूकंप के झटके दिल्ली तक झटके महसूस किए गए और कई लोग घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए थे. क्यों आते हैं भूकंप? भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारी धरती की सतह मुख्य रूप से सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी है. ये प्लेट्स लगातार हरकत करती रहती हैं और अक्सर आपस में टकराती हैं. इस टक्कर के परिणामस्वरूप प्लेट्स के कोने मुड़ सकते हैं और अत्यधिक दबाव के कारण वे टूट भी सकती हैं. ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर फैलने का रास्ता खोजती है और यही ऊर्जा जब जमीन के अंदर से बाहर आती है, तो भूकंप आता है. भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है दिल्‍ली  भारत के भूकंप संवेदनशील इलाकों में दिल्‍ली भी शामिल है. दिल्ली भूकंप के लिहाज से बहुत जोखिम वाले जोन 4 में है. जोन 2 कम जोखिम वाले, जोन 3 मध्यम जोखिम वाले और जोन 5 सबसे अधिक जोखिम वाले इलाके हैं. दिल्ली ऐसा इलाका है, जहां पर बहुत जोखिम वाले भूकंप आ सकते हैं. साथ ही हिमालयी इलाके में आने वाले भूकंप की जद से भी दिल्‍ली बहुत दूर नहीं है.  खासतौर पर पर सेंट्रल हिमालय जहां 8 या उससे अधिक की तीव्रता का भूकंप आने की आशंका बनी रहती है.   इसलिए आता है भूकंप  पृथ्वी की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों में अक्‍सर हलचल है और इसके कारण ही भूकंप आते हैं. पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी होती है और यह धीमी गति से खिसकती हैं. हालांकि जब यह प्लेटें आपस में टकराती हैं तो ऊर्जा का बड़ा विस्फोट होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं.

चांदी की कीमत में बड़ा वृद्धि — ₹13,000 की तेज बढ़त, सोने के ताज़ा रेट देखें

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) को लेकर गिरावट के सारे अनुमान धरे के धरे नजर आ रहे हैं और दोनों कीमती धातुएं हर रोज रिकॉर्ड तोड़ती दिख रही हैं. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को चांदी ने तो खुलते ही ऐसा गदर मचाया कि 1Kg Silver Price 3 लाख रुपये के पार निकल गया. चांदी ने इतिहास में पहली बार ये स्तर पार किया है. वहीं दूसरी ओर सोने का भाव (Gold Rate) भी ताबड़तोड़ तेजी के साथ नए शिखर पर पहुंच गया.  चांदी रुकने वाली नहीं Silver Price रुकता नजर नहीं आ रहा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोमवार को ओपन होने के साथ ही चांदी की कीमत 13,553 रुपये चढ़ गई और इसके साथ ही इसने तीन लाख का आंकड़ा पहली बार पार करते लिया. 1 किलो चांदी का नया ऑल टाइम हाई लेवल 3,01,315 रुपये प्रति किलो हो गया है. पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को MCX Silver Rate 2,87,762 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था.  जनवरी में अब तक ₹65000 महंगी बीते साल 2025 में धमाल मचाने के बाद चांदी की कीमत ने इस साल के पहले महीने में भी शुरुआत से ही गदर मचाए रखा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Silver Price In January 2026 में अब तक 65,614 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गया है. जी हां 2025 के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर को 1 किलो चांदी की कीमत 2,35,701 रुपये थी, जो कि अब 3,01,315 रुपये प्रति किलो पर पहुंच चुकी है.  झटके में 2900 रुपये महंगा हुआ सोना अब बात करें, सोने की कीमतों के बारे में तो MCX Gold Rate चांदी की तरह ही भागता हुआ नजर आया है. बीते सप्ताह शुक्रवार को 5 फरवरी वाले सोने का वायदा भाव 1,42,517 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और सोमवार को खुलने के साथ ही ये 1,45,500 रुपये के नए हाई लेवल पर पहुंच गया. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो 10 Gram 24 Karat Gold Rate 2983 रुपये बढ़ गया है.  वहीं इस साल की शुरुआत से अब तक गोल्ड प्राइस में आए उछाल पर गौर करें, तो 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का दाम 1,35,804 रुपये था, जिसके हिसाब से ये अब तक 9,696 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया है.  क्यों चमक रहे सोना-चांदी?  सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के पीछे के कारणों की बात करें, तो ग्लोबल टेंशन को सबसे अहम वजह माना जा सकता है, ट्रंप टैरिफ से एक बार फिर से ये बढ़ी है और Greenland पर कब्जा करने के ट्रंप के प्लान में रुकावट डालते नजर आ रहे यूरोपीय देशों पर भी अमेरिका ने टैरिफ जड़ दिया है. इससे टेंशन और भी बढ़ गई है और निवेशक फिर से सुरक्षित ठिकाने की तलाश में Gold-Silver का रुख करने लगे हैं और इनकी कीमतों में तेज उछाल आया है.  

आधी राह पर इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन, अधूरे ब्रिज-फ्लाईओवर से अटका काम; 2027 तक पूरा करने का दावा

इंदौर उज्जैन में होने वाले वर्ष 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए इंदौर से उज्जैन को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क को चार लेन से छह लेन में बदलने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। पिछले साल जनवरी में शुरू हुए इस निर्माण कार्य को अब एक वर्ष पूरा हो चुका है। विभाग का दावा है कि अब तक परियोजना का लगभग 47 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है, हालांकि पुलों और फ्लाईओवर का काम अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। तय समय सीमा और लक्ष्य इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन 15 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। लक्ष्य के अनुसार, इस सिक्स लेन सड़क का निर्माण 15 जनवरी तक पूरा किया जाना है। वर्तमान प्रगति को देखते हुए अधिकारियों का मानना है कि आने वाले एक साल में निर्माण की गति को और अधिक बढ़ाना होगा ताकि समय सीमा में प्रोजेक्ट को जनता को समर्पित किया जा सके। एमपीआरडीसी के डिविजनल मैनेजर गगन भंवर ने बताया कि सड़क और ब्रिज का काम तेजी से चल रहा है और लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।   48 किलोमीटर का कायाकल्प गौरतलब है कि वर्ष 2016 के सिंहस्थ से पहले इस मार्ग को फोर लेन किया गया था। अब लवकुश चौराहा (इंदौर) से हरिफाटक ब्रिज (उज्जैन) तक की 48 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर एक-एक अतिरिक्त लेन जोड़ी जा रही है। इस पूरी परियोजना में यातायात को सुगम बनाने के लिए तीन फ्लाईओवर, आठ अंडरपास और तीन बड़े ब्रिज का निर्माण शामिल है। फिलहाल निनौरा से बारोली के बीच सड़क चौड़ीकरण का कार्य दोनों दिशाओं में समानांतर रूप से चल रहा है। शुरुआती अड़चनें और मानसून का प्रभाव परियोजना की शुरुआत में निर्माण एजेंसी को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक डायवर्जन की योजना बनाने, अतिक्रमण हटाने और स्थानीय व्यवस्थाओं के तालमेल के कारण शुरुआती महीनों में काम की गति प्रभावित हुई। इसके बाद मानसून की बारिश ने भी निर्माण कार्यों में बाधा डाली। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि अब सभी तकनीकी और प्राकृतिक अड़चनों को पार कर लिया गया है और एक साथ कई हिस्सों में निर्माण कार्य को गति दी गई है।   अतिक्रमण हटाने की चुनौती सड़क चौड़ीकरण के लिए राहत की बात यह है कि नई जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विभाग के पास पहले से ही पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। हालांकि, वर्षों से खाली पड़ी इस जमीन पर कई स्थानों पर अतिक्रमण हो गया है। विशेषकर लवकुश चौराहा से बारोली तक के हिस्से में सड़क के दोनों ओर कई अवैध निर्माण खड़े हो गए हैं। प्रशासन का मानना है कि अतिक्रमण हटने के बाद ही इस महत्वपूर्ण हिस्से में काम तेजी पकड़ सकेगा। इसके लिए एमपीआरडीसी ने जिला प्रशासन को औपचारिक पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

बजट सरप्राइज: शादीशुदा दंपतियों को मिल सकती है भारी टैक्स छूट

नई दिल्ली  केंद्र सरकार यूनियन बजट 2026 से पहले शादीशुदा टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है। खबर है कि वित्त मंत्रालय वैकल्पिक जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम लाने की तैयारी में है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो पति-पत्नी मिलकर एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकेंगे। इसका सबसे ज्यादा फायदा उन परिवारों को होगा, जहां एक ही कमाने वाला सदस्य है। अभी ऐसे परिवार दूसरे जीवनसाथी की छूट और टैक्स स्लैब का पूरा फायदा नहीं उठा पाते, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। क्या है सिस्टम फिलहाल भारत में टैक्स सिस्टम ऐसा है कि शादीशुदा होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है, अलग PAN, अलग छूट और अलग कटौती मिलती हैं। अगर पत्नी की इनकम नहीं है, तो उसकी बुनियादी छूट सीमा बेकार चली जाती है। इसी समस्या को देखते हुए भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान (ICAI) ने सरकार को सुझाव दिया है कि USA और Germany की तरह भारत में भी जॉइंट टैक्स फाइलिंग का विकल्प होना चाहिए, जहां परिवार को एक इकोनॉमिक यूनिट माना जाता है। जॉइंट टैक्सेशन में पति-पत्नी की कुल इनकम जोड़कर टैक्स लगाया जाएगा और इसके लिए अलग टैक्स स्लैब हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है। जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को ₹3 लाख तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा ₹6 लाख या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मिडिल क्लास फैमिली को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, मेडिकल इंश्योरेंस और दूसरे कटौती को भी बेहतर तरीके से एडजस्ट किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने की बात कही जा रही है। सरचार्ज पर भी राहत मिल सकती है साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी ₹50 लाख से ज्यादा इनकम पर सरचार्ज लगता है, लेकिन जॉइंट टैक्सेशन में इसकी सीमा ₹75 लाख या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे हाई टैक्स ब्रैकेट में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अब सबकी नजरें यूनियन बजट 2026-27 पर टिकी हैं, जो 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। बजट सेशन 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा।

1 अप्रैल से बदलेंगे टोल टैक्स के नियम, बिना रुके सीधे कटेगा शुल्क

नई दिल्ली अगर आप अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। केंद्र सरकार ने टोल प्लाजा पर कैश लेन-देन को पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, देश को डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। 1 अप्रैल के बाद टोल प्लाजा पर केवल FASTag और UPI ही भुगतान के मान्य माध्यम होंगे। वर्तमान में कई टोल प्लाजा पर FASTag होने के बावजूद लोग कैश लेन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। नए नियम के लागू होने के बाद:     टोल प्लाजा से कैश लेन पूरी तरह हटा दी जाएगी।     वाहन चालकों को जाम से निजात मिलेगी और यात्रा समय की बचत होगी।     पारदर्शिता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होगी। सरकार 'मल्टी लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम लाने की तैयारी में है। इसके तहत…     बिना बैरियर के टोल: शुरुआत में देशभर के 25 टोल प्लाजा पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू किया जाएगा।     सेंसर तकनीक: इस सिस्टम में कोई बैरियर नहीं होगा। वाहन बिना रुके गुजरेंगे और ऊपर लगे कैमरे व सेंसर FASTag के जरिए अपने आप टोल काट लेंगे।     सुगम यात्रा: पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा, जिससे हाईवे पर वाहनों की गति बाधित नहीं होगी।

यूएई राष्ट्रपति का भारत आगमन आज तय, अहम समझौतों पर लग सकती है मुहर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनकी तीसरी आधिकारिक भारत यात्रा होगी और पिछले एक दशक में उनकी पांचवीं भारत यात्रा होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सौहार्दपूर्ण, घनिष्ठ और बहुआयामी संबंध हैं, जो मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए), स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) प्रणाली और द्विपक्षीय निवेश संधि द्वारा समर्थित ये संबंध दोनों देशों के शीर्ष व्यापारिक और निवेश साझेदारों में से हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक मजबूत ऊर्जा साझेदारी भी है, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह दौरा दोनों नेताओं को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए नए आयाम स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगा। इससे पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी संभव होगा, जहां भारत और यूएई के बीच उच्च स्तर की समानताएं हैं। अमेरिका से तनाव के बीच भारत और यूएई के बीच होगी कोई बड़ी डील? अमेरिका से तनाव के बीच भारत को कई देशों से बड़ी उम्मीद है। अब यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के आने के बाद किस तरह की डील होती है, इसपर आधिकारिक घोषणा के बाद ही पता चलेगा। लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से मिली सूचना के आधार पर ऊर्जा के क्षेत्र में कोई बड़ा समझौता हो सकता है। यूएई और भारत के बीच पहले से रहे हैं मजबूत संबंध बता दें कि यूएई और भारत एक-दूसरे के लिए बड़े व्यापारिक भागीदार और निवेशक हैं। दोनों देशों के बीच CEPA यानी व्यापार समझौता जिससे द्विपक्षीय व्यापार करना आसान हुआ है। LCS यानी स्थानीय मुद्रा प्रणाली, इसके तहत दोनों देश अपनी खुद की करेंसी में लेनदेन कर सकते हैं। निवेश संधि, इससे एक-दूसरे के देश में पैसा लगाना सुरक्षित हुआ है।

ई-बस योजना पर ब्रेक! मध्यप्रदेश के 8 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से लटकी सेवा

भोपाल भारत सरकार ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के आठ शहरों के लिए 972 ई-बसें स्वीकृत की हैं। इनमें से 472 बसें इन शहरों में चलने को तो तैयार हैं, लेकिन डिपो और चार्जिंग स्टेशन न होने से बसों का संचालन रुका हुआ है। प्रदेश की नगर सरकारें यहां अब तक डिपो ही नहीं बना सकी हैं। इंदौर और भोपाल में बस डिपो बनाने का केवल 15-15 प्रतिशत तो ग्वालियर में पांच प्रतिशत ही काम हो पाया है। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर पिछड़े चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण में भी इंदौर, भोपाल और ग्वालियर पिछड़े हैं। केवल जबलपुर का काम संतोषजनक है। यहां कंठौंदा बस डिपो का निर्माण कार्य 70 प्रतिशत हो चुका है। इन शहरों की हवा दूषित है, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत चिह्नित किया है और इस दिशा में ई-बसों का संचालन महत्वपूर्ण माना जा रहा है लेकिन ई-बस संचालन में डिपो के निर्माण की धीमी गति बताती है कि इन शहरों के आमजनों को ई-बस सेवा की सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।   उज्जैन और सागर में टेंडर ही नहीं हो पाया उज्जैन में 100 ई-बस चलनी है। इसके लिए ओल्ड बस डिपो मक्सी रोड पर डिपो निर्माण किया जाना है, लेकिन यहां मेयर इन काउंसिल (एमआइसी) में दर स्वीकृति ही नहीं हो सकी। यही हाल यहां चार्जिंग स्टेशन का है। इसी तरह सागर में 32 ई-बस संचालन के लिए नवीन आरटीओ कार्यालय तिलीमाफी में बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन का अधोसंरचना विकास होना है। सागर नगर निगम इसकी निविदा ही जारी नहीं कर सका है। इन आठ शहरों में 972 इलेक्ट्रिक बस स्वीकृत भोपाल 195, इंदौर 270, ग्वालियर 100, जबलपुर 200, उज्जैन 100, सागर 32, देवास 55 एवं सतना में 20 कुल 972 इलेक्ट्रिक बस स्वीकृत की गई है। इनमें भोपाल के लिए 100, इंदौर 150, ग्वालियर 60, जबलपुर 100, उज्जैन 30 एवं सागर में 32 इस तरह 472 ई बस के लिए सफल निविदाकार को लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी किए जा चुके हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में में दो-दो उज्जैन व सागर में एक-एक कुल 10 डिपो के लिए सिविल एवं चार्जिंग अधोसंरचना निर्माण के लिए कार्रवाई चल रही है।   ई-बस डिपो एवं चार्जिंग स्टेशनों की अधोसंरचना की प्रगति शहर — बस डिपो– डिपो निर्माण प्रगति– चार्जिंग स्टेशन निर्माण प्रगति जबलपुर — कठौंदा — 70 — 60 आइएसबीटी — 10– 00 इंदौर — आइएसबीटी नायतामुंडला — 15 — 15 देवास नाका निरंजनपुर — 15– 15 भोपाल — संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) — 15– 15 कस्तुरबा नगर आइएसबीटी– 0 — 10 ग्वालियर — रमौआ — 5 — 5 आइएसबीटी– 50– 10