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नई रेलवे परियोजना के लिए 277 पेड़ों की कटाई, MP प्रशासन ने तय की शर्तें

इंदौर  इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण किया जाना है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने तेजी से प्रक्रिया करने में लगा है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत डकाच्या और सांवेर में आने वाले गांव से रेलवे लाइन गुजरना है। निर्माण के दौरान बाधक पेड़ों को चिन्हित कर लिया है। 35 प्रजातियों के 277 पेड़ों को काटा जाएगा। जिला प्रशासन की तरफ से सशर्त पेड़ों की कटाई को लेकर निर्देश दिए है। यह अनुमति रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भोपाल के मुख्य परियोजना प्रबंधक के आवेदन पर दी गई है। रेल लाइन प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई जमीन नहीं आ रही है, बल्कि पटरियां राजस्व भूमि में बिछाई जाना है। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने इंदौर वनमंडल के दायरे में आने वाले गांवों में पेड़ काटने के लिए वन विभाग को दिए है। डाकच्या, लसूडिया परमार, मेलकलमा, डकाच्या, कदवाली बुजुर्ग, कदवाली खेर्द, बीसाखेडी सहित अन्य गावों में लाइन निकलेगी। यहां 35 प्रजातियों के 277 से अधिक पेड़ है। मार्च 2025 में जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को पत्र दिया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सांवेर ने पहले वन विभाग से राय मांगी गई थी, लेकिन समय-सीमा में कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे मौन स्वीकृति माना गया। इसके बाद नायब तहसीलदार के माध्यम से प्रकरण आगे बढ़ाया गया और सभी पहलुओं पर विचार के बाद अनुमति प्रदान की गई। वनमंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई भूमि नहीं है। सिर्फ पेड़ों को काटने के लिए विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी दी। इन शर्तों पर दी अनुमति प्रशासन ने पेड़ों की कटाई को लेकर कड़ी शर्तें लगाई हैं ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो सके। इसके लिए वन विभाग को निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है। पेड़ काटते समय वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे और केवल चिन्हित पेड़ ही काटे जाएंगे। पहले ट्रांसप्लांट की कोशिश पेड़ों को काटने से पहले उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने का प्रयास किया जाएगा। असफल होने पर ही कटाई होगी। इस बारे में वन विभाग को निगरानी करना है। उचित मूल्यांकन और नीलामी पेड़ों का मूल्यांकन संबंधित विभाग से कराया जाएगा और तय मूल्य से कम पर नीलामी नहीं होगी। कटाई का खर्च अलग से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक जितने पेड़ काटे जाएंगे। उनसे तीन गुना अधिक नए पेड़ रेलवे मार्ग के दोनों ओर लगाए जाएंगे। वहीं लगाए जाने वाले पेड़ कम से कम 3 साल पुराने होंगे। उन्हें ट्री गार्ड या वायर फेंसिंग से सुरक्षित किया जाएगा और 5 साल तक उनकी देखभाल की जाएगी। बकायादा हर साल वीडियोग्राफी कर रिपोर्ट वन समिति और एसडीएम कार्यालय को दी जाएगी। अन्य पेड़ों की कटाई पर रोक बबूल, नारियल, खजूर, आम, जाम, नीम, इमली सहित 35 प्रजातियों के पेड़ों को चिन्हित किया है। इनकी सूची बनाई गई है। इन पेड़ों के अलावा कोई भी अन्य पेड़ नहीं काटा जाएगा। जबकि निजी जमीन के पेड़ों और सागौन (टीक) के पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वहीं यदि भूमि या पेड़ों से जुड़ा कोई मामला कोर्ट में लंबित है, तो न्यायालय का आदेश सर्वोपरि होगा। जबकि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर यह अनुमति अपने आप रद्द मानी जाएगी। यह होगा फायदा इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन से इंदौर और भोपाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। यहां तक कि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।माल परिवहन आसान होगा। क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

एफआईआर दर्ज, JNU में विवादित नारे पर छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान

नई दिल्ली जेएनयू के सबरमती ढाबा वाली वो सड़क जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ गूंजे नारों ने लोकतंत्र की अभिव्यक्ति और मर्यादा के बीच की धुंधली लकीर को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि जिसे छात्र आजादी समझ रहे हैं वह कानून की नजर में नफरत की प्रयोगशाला है और अब इस प्रयोगशाला के किरदार कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जांच के आधार पर दोषी छात्रों को विश्वविद्यालय से तत्काल निलंबित होंगे. यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक एक्‍स हेंडल पर कहा, ‘किसी भी तरह की हिंसा, गैर-कानूनी हरकत या देश विरोधी गतिविधि को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस घटना में शामिल छात्रों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें तुरंत सस्पेंशन, निष्कासन और यूनिवर्सिटी से स्थायी रूप से बाहर निकालना शामिल है.’ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी. प्रशासन ने पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजकर इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है. प्रशासन के अनुसार 5 जनवरी 2020 की हिंसा की छठी बरसी मनाने के लिए करीब 30-35 छात्र सबरमती हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए थे. लेकिन कार्यक्रम का स्वरूप तब बदल गया जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसलों के बाद वहां उकसाने वाले नारे लगने शुरू हो गए. प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अनादर और जेएनयू की आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है. इन छात्रों पर गिर सकती है गाज विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी शिकायत में कुछ प्रमुख छात्रों की पहचान की है, जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है:    पहचाने गए छात्र: अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान और शुभम आदि.      गवाह: घटना के समय सुरक्षा निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और गार्ड जय कुमार मीणा व पूजा मौके पर मौजूद थे. ‘नफरत की प्रयोगशाला’ बनाम अभिव्यक्ति का अधिकार जेएनयू प्रशासन का यह बयान कि “विश्वविद्यालयों को घृणा की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा”, एक गहरे बदलाव की ओर इशारा करता है. यह कार्रवाई केवल नारों तक सीमित नहीं है: 1.      न्यायिक गरिमा का प्रश्न: प्रशासन ने इसे केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि कोर्ट के फैसलों के प्रति ‘अनादर’ माना है. यह छात्रों की सक्रियता को कानूनी कटघरे में खड़ा करता है. 2.      कैंपस की छवि और सुरक्षा: प्रशासन का मानना है कि इस तरह की नारेबाजी से परिसर की शांति, सौहार्द और सुरक्षा माहौल को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. 3.      अभिव्यक्ति की सीमाएं: प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रविरोधी हरकतों या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह घटना दर्शाती है कि जेएनयू में छात्र राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ प्रशासन और छात्रों के बीच का संवाद पूरी तरह कानूनी प्रक्रियाओं (FIR और निलंबन) में तब्दील हो चुका है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, और उन्हें किसी भी कीमत पर अराजकता का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा.

विकसित भारत जी राम जी कानून 2025: भाजपा करेगी लोगों को जागरूक, प्रदेशभर में अभियान शुरू

भोपाल  विकसित भारत जी राम जी कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी प्रदेशभर में जन जागरूकता अभियान चलाएगी। ये अभियान गांव-गांव तक पहुंचेगा। इसके माध्यम से भाजपा आमजन को बताएगी कि ये कानून पहले के मनरेगा से कितना अच्छा है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने  मुख्यमंत्री निवास में मंत्रियों के साथ बैठक की। इस दौरान भाजपा पदाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विपक्षी दल इस कानून को लेकर जनता में भ्रम फैला रहे है। विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का जवाब देने के लिए भाजपा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर इस कानून की विशेषताएं बताएंगे। मंत्रियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है कि वे अपने प्रभार के जिलों जाकर जी राम जी कानून की जनहितैषी विशेषताएं बताएंगे। मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि जी राम जी कानून की मूल भावना पारदर्शी प्रक्रिया, रोजगार की अधिकतम गारंटी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर आधारित है। यही अधिनियम विकसित भारत-2047 के विजन की मजबूत आधारशिला बनेगा। नए कानून में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साप्ताहिक भुगतान होगा और देरी पर मुआवजा व अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन गया है। खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक कार्य स्थगित करने का अधिकार दिया गया है। बता दें कि केंद्र सरकार ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005) के नाम में संशोधन कर विकसित भारत-गारंटी फार रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी विकसित भारत जी राम जी कानून 2025 किया है।

किसानों को राहत की उम्मीद: बजट 2026 में PM-KISAN की राशि बढ़ाने की तैयारी, अब मिल सकते हैं इतने हजार

नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026 अब ज्यादा दूर नहीं है और इसे लेकर देशभर के किसानों की नजर सरकार पर टिकी हुई है। खेती की बढ़ती लागत और महंगाई के बीच किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बजट में उनके लिए कोई बड़ा एलान हो सकता है। खासतौर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 6,000 से बढ़कर 10,000 रुपये हो सकती है सालाना मदद फिलहाल पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को साल में 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। लेकिन मौजूदा हालात में किसानों का कहना है कि यह राशि अब जरूरतों के मुकाबले कम पड़ रही है। ऐसे में बजट 2026 में इस मदद को बढ़ाकर 10,000 रुपये सालाना करने की उम्मीद जताई जा रही है। क्यों जरूरी मानी जा रही है बढ़ोतरी पिछले कुछ वर्षों में खेती से जुड़ा खर्च तेजी से बढ़ा है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और कृषि उपकरणों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को मिलने वाली सीमित सहायता से खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। अगर सरकार पीएम किसान योजना की रकम बढ़ाती है, तो इससे किसानों को खेती में निवेश करने, फसल उत्पादन सुधारने और आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसानों के हाथ में ज्यादा पैसा आता है, तो उनकी खरीदारी की क्षमता बढ़ेगी। इससे गांवों में खर्च बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसका असर कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। कब शुरू हुई थी पीएम किसान योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत दिसंबर 2018 में की गई थी। इसका मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा देना है। योजना के तहत हर साल 6,000 रुपये की मदद सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए किसानों के खातों में भेजी जाती है। अब सभी की नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। अगर सरकार इस योजना की राशि बढ़ाने का ऐलान करती है, तो यह किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।    

महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को मोदी जी जमीन पर उतार रहे हैं

– वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को बनाएगी समृद्ध – वीबी-जी रामजी योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी, मनरेगा में मिलता था सिर्फ 100 दिन का काम – ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी वीबी-जी रामजी योजना – प्रधानमंत्री जी ने 35 हजार करोड़ से 95 हजार करोड़ कर योजना का बजट करीब तीन गुना बढ़ाया – कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाएगी सरकार – कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगा नया विस्तार – 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना से खेती बनेगी रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम – ‘विकसित भारत‘ संकल्प को धरातल पर उतारने वाला मिशन बनेगी वीबी-जी रामजी योजना – वीबी-जी रामजी योजना से गांवों में अधोसंरचना का होगा विकास, आएगी विकास की क्रांति भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में वीबी-जी रामजी योजना को लेकर पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है वीबी-जी रामजी जी योजना। प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच से आज दुनिया भारत की ओर देख रही हैं। वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को समृद्ध बनाएगी। इस योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी है, जबकि मनरेगा में सिर्फ 100 दिन काम मिलता था। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी। कांग्रेस के शासनकाल में इस योजना में 35 हजार करोड़ मिलते थे, जिसे बढ़ाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 74 हजार करोड़ किया और अब सुधारों के साथ लागू की जा रही इस योजना का बजट बढ़ाकर 95 हजार करोड़ कर दिया है। बजट में यह बढ़ोत्तरी कांग्रेस के शासनकाल के समय से लगभग तीन गुना अधिक है। प्रधानमंत्री जी महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को जमीन पर उतार रहे हैं। कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर सरकार किसानों की आय बढ़ाने का कार्य करेगी। कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को नया विस्तार मिलेगा। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना बनाकर कृषि को रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम बनाएगी। यह सुधार प्रक्रिया का एक हिस्सा है, कांग्रेस को इस योजना का विरोध की बजाय तथ्यात्मक बात करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि वीबी-जी रामजी अधिनियम से गांवों में अधोसंरचना का विकास होगा और विकास की नई क्रांति आएगी। वीबी-जी रामजी योजना में गरीबों, मजदूरों को अब 100 दिन के बजाय बजाय 125 दिन मजदूरी मिलेगी। कांग्रेस योजना को लेकर भ्रम फैलाकर ग्रामीणों को गुमराह कर रही है। इस योजना में पंचायतों को भी कार्य करने का अधिकार दिया गया है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकसित भारत” संकल्प को धरातल पर उतारने वाला राष्ट्रीय स्तर का मिशन है। अधोसंरचना के स्थाई निर्माण के साथ आजीविका का दायरा भी बढ़ाया गया है- डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार मानता हूं कि उन्होंने महात्मा गांधी नरेगा योजना को आवश्यकता के अनुरूप सुधार करके देश भर में लागू किया है। इस योजना को लेकर छह माह में राज्य सरकारों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया पूरी करनी है। अब मजदूरों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी निश्चित रूप से रोजगार को बढ़ावा देने वाला है। कौशल और उद्यमिता के साथ इस योजना को जोड़कर रोजगार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सुधारों के साथ लागू की जा रही नई योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत की राशि वहन करेगी। कई मामलों में पहले केंद्र सरकार ही निर्णय लेता था, लेकिन अब राज्य सरकारें भी गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास को ध्यान में रखकर कार्यों को शामिल कर सकते हैं। नरेगा में विद्यालय भवन, पुस्तकालय, कोल्ड स्टोरेज, ग्रामीण पार्किंग, सौर ऊर्जा, नवकरणीय ऊजा, जैविक खाद इकाई, बाढ़ आश्रय स्थल, आपदा में क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, जल जीवन मिशन के कार्यों में सुधार एवं रखरखाव जैसे कार्य शामिल नहीं थे। नई योजना में यह सभी कार्य शामिल किए गए हैं। जैविक खाद निर्माण इकाइयां, पशुपालन, मुर्गी-पालन शेड, मत्स्य पालन संबंधी निर्माण कार्यां, नर्सरी निर्माण, भवन-निर्माण सामग्री उत्पादन इकाई निर्माण का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को बढ़ाने के लिए किया गया है। योजना में पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए होने वाले कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा नियोजित सभी श्रमिकों को त्वरित एवं उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तथा बायोमेट्रिक भुगतान प्रणाली का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता के लिए ग्राम-सभा द्वारा सोशल ऑडिट भी कराने का प्रावधान है। नई योजना में पंचायतीराज संस्थाओं  जैसे ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य परिषद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। श्रीमिकों का पंजीकरण करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने तथा कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। भौगोलिक स्थिति, नगरीकरकण की दिशा में प्रगति जैसी बातों को योजना निर्माण के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। नई योजना से जनकल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार को कानूनी अधिकार बनाया गया है, काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 125 दिन रोजगार या आजीविका का अवसर वैधानिक अधिकार है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों, खानाबदोस, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, छोटे व सीमांत किसानों के लिए भी रोजगार का प्रावधान किया गया है। अकुशल शारीरिक कार्यों की मजदूरी दरें केंद्र सरकार … Read more

अब और सुरक्षित होगा भारतीय पासपोर्ट! e-Passport में लगी होगी चिप, जानिए कितना खर्च और कैसे करें अप्लाई

नई दिल्ली भारत में अब पासपोर्ट सेवा का नया दौर शुरू हो चुका है। अब हर नए या रिन्यू किए जाने वाले पासपोर्ट के साथ आपको e-passport मिलेगा, जो पुराने पासपोर्ट से कहीं अधिक सुरक्षित और आधुनिक है। यह बदलाव ‘पासपोर्ट सेवा 2.0’ के तहत लागू किया गया है। ई-पासपोर्ट क्या है? e-passport सामान्य पासपोर्ट की तरह दिखता है, लेकिन इसके अंदर एक स्मार्ट चिप लगी होती है। यह चिप आपकी फोटो, उंगलियों के निशान और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तिगत जानकारी को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखती है। चिप की वजह से इसे नकली बनाना या इसमें छेड़छाड़ करना बेहद मुश्किल हो गया है। फीस और चार्जेस e-passport की फीस सामान्य पासपोर्ट के बराबर रखी गई है। -36 पन्नों वाला ई-पासपोर्ट: सामान्य प्रक्रिया के लिए 1,500 रुपये, जबकि तत्काल पासपोर्ट के लिए 3,500 रुपये (1500 फीस + 2000 तत्काल चार्ज)। -60 पन्नों वाला ई-पासपोर्ट: सामान्य प्रक्रिया के लिए 2,000 रुपये, और तुरंत पासपोर्ट चाहने पर 4,000 रुपये। कौन कर सकता है आवेदन? e-passport के लिए पात्रता वही है जो सामान्य पासपोर्ट के लिए होती है। यानी कोई भी भारतीय नागरिक, चाहे बच्चा, किशोर या बुजुर्ग, आवेदन कर सकता है। 75 साल से ऊपर उम्र वाले नागरिकों को कुछ मामलों में प्राथमिकता भी मिलती है।   पहली बार पासपोर्ट बनवाने वाले या पुराने पासपोर्ट के एक्सपायर होने, खो जाने या पन्नों के भर जाने पर ई-पासपोर्ट जारी किया जाएगा। वर्तमान साधारण पासपोर्ट वैध होने तक मान्य रहेगा, इसलिए तुरंत बदलना जरूरी नहीं है। विदेश में रहने वाले भारतीय भी अपने नजदीकी दूतावास के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त या लंबित मुकदमे वाले नागरिकों को पासपोर्ट मिलने में परेशानी हो सकती है। जरूरी दस्तावेज ई-पासपोर्ट बनवाने के लिए कुछ प्रमाण पत्र जरूरी हैं: पहचान पत्र जैसे आधार या पैन कार्ड पते का प्रमाण जन्म तिथि का प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट) ई-पासपोर्ट न केवल सुरक्षा में बेहतर है, बल्कि यह भारत की डिजिटल पहल का हिस्सा भी है, जिससे पासपोर्ट प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनती है।  

उड़ान के दौरान बिगड़ी तबीयत: इंदौर में एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान की आपात लैंडिंग, मासूम ने तोड़ा दम

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जयपुर से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट (IX-1240) को उस वक्त इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी, जब विमान में सवार एक साल के मासूम बच्चे की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। मंगलवार शाम उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। परिजनों ने तत्काल केबिन क्रू को सूचना दी। हालात बिगड़ते देख पायलट ने शाम करीब 7:20 बजे इंदौर एयरपोर्ट से संपर्क कर मेडिकल इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तुरंत इंदौर एयरपोर्ट पर मेडिकल इमरजेंसी घोषित की। एयरोब्रिज पर डॉक्टरों और एम्बुलेंस की टीम पहले से तैनात कर दी गई।   शाम 7:50 बजे जैसे ही विमान इंदौर में उतरा, बच्चे को तुरंत बाहर निकाला गया। विमान में मौजूद एक डॉक्टर पहले से ही सीपीआर दे रहे थे। एयरपोर्ट पर तैनात मेडिकल टीम ने भी लगातार प्रयास किए और बच्चे को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। बच्चे को पहले नजदीकी अस्पताल और फिर डॉल्फिन हॉस्पिटल रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया।   कौन था मासूम? हॉस्पिटल प्रबंधन के अनुसार, बच्चे का नाम मोहम्मद अबरार, उम्र एक साल थी। वह अपने पिता मोहम्मद अजलान, मां फिरोजा और बड़े भाई के साथ जयपुर से बेंगलुरु अपने घर लौट रहा था। क्या रही वजह? जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट में बैठने से पहले ही बच्चे की तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं थी। आशंका जताई जा रही है कि उड़ान के दौरान पानी या दूध पिलाते समय तरल पदार्थ श्वासनली में चला गया, जिससे उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। मासूम की मौत ने कई सवाल छोड़े इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर हवाई यात्रा के दौरान शिशुओं की मेडिकल सुरक्षा, प्राथमिक उपचार और जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार खुशियों के साथ घर लौट रहा था… लेकिन सफर के बीच आसमान में ही उनकी दुनिया उजड़ गई।  

भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती, वित्त वर्ष 2026 में 7.4% विकास का अनुमान

 नई दिल्‍ली भारत की अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से भाग रही है . 7 जनवरी को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था पिछले वित्त वर्ष के 6.5% की तुलना में 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है. यह उछाल वैश्विक दबाव और अमेरिकी निर्यात में रुकावट के बीच है. अर्थव्‍यवस्‍था में यह उछाल भारत के मजबूत निवेश और निवेशकों के भरोसे को दिखाता है. साथ ही देश के नीतिगत बदलाव, कंजम्‍पशन और घरेलू इंफ्रा के मजबूती को भी दिखाता है.  अर्थव्‍यस्‍था में इस तेजी को मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने सपोर्ट किया है, जिसने इस वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी राष्ट्रीय आय के पहले एडवांस अनुमानों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट हासिल होने का अनुमान है.  इन सेक्‍टर्स में सामान्‍य ग्रोथ का अनुमान  MoSPI ने कहा कि सर्विस सेक्टर में अच्छी ग्रोथ FY 2025-26 में अनुमानित रियल GVA (ग्रॉस वैल्‍यू असेट) ग्रोथ रेट 7.3 प्रतिशत का एक प्रमुख कारण रही है. हालांकि, एग्रीकल्‍चर और संबंधित क्षेत्र और 'बिजली, गैस, पानी की सप्लाई और अन्य यूटिलिटी सेवाओं के क्षेत्रों में 31 मार्च को खत्म होने वाले मौजूदा वित्त वर्ष में सामान्य ग्रोथ रेट रहने का अनुमान है. नॉमिनल जीडीपी 8 फीसदी से ग्रो करेगी मंत्रालय ने आगे कहा कि नॉमिनल GDP या मौजूदा कीमतों पर GDP में 2025-26 के दौरान 8 प्रतिशत की ग्रोथ होने का अनुमान है. एडवांस अनुमानों के डेटा का इस्तेमाल केंद्रीय बजट तैयार करने में किया जाता है, जिसे 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है.  निवेश से मजबूत हुई ग्रोथ  आर्थिक उछाल का एक प्रमुख कारण निवेश गतिविधि थी.सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) वित्त वर्ष 2026 में 7.8% बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 7.1% से अधिक है. यह व्यवसायों द्वारा बुनियादी ढांचे, मशीनरी और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर अधिक खर्च को दर्शाता है. पॉलिसी चेंज से बढ़ी मांग  विकास को गति देने में सरकारी उपायों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है . आयकर में राहत और जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के फैसले ने  उपभोक्ता मांग को बढ़ाने में मदद की, भले ही वैश्विक परिस्थितियां अनिश्चित बनी रहीं. वैश्विक व्यापार तनाव और टैरिफ संबंधी चुनौतियों के कारण निर्यात की संभावनाएं भले ही प्रभावित हुईं, लेकिन मजबूत घरेलू मांग ने इस प्रभाव को कम करने और विकास को पटरी पर लाने में मदद की है. 

ISRO की 2040 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना, पूर्व प्रमुख ने किया खुलासा

अहमदाबाद भारत 2040 तक चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना बना रहा है, यह जानकारी पूर्व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) प्रमुख ए. एस. किरण कुमार ने बुधवार को दी।कुमार, जो वर्तमान में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) के प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष हैं, यह बयान 5वें भारतीय खगोलशास्त्र समाज (ASI) सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान दे रहे थे। कुमार ने कहा, "अब से 2040 तक कई अंतरिक्ष मिशन होंगे। 2040 तक हमारा लक्ष्य भारतीयों को चंद्रमा पर भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसके अलावा, भारत 2040 तक एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।" इस कार्यक्रम के दौरान, कुमार ने मीडिया से बात करते हुए भारत के अंतरिक्ष रोडमैप के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, "निकट भविष्य में चंद्रयान का एक अनुसरण मिशन होगा, और जापान के साथ मिलकर लैंडर और रोवर पर काम चल रहा है। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में कुछ विशिष्ट जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। यह केवल शुरुआत है, इसके बाद कई गतिविधियाँ होंगी। भारत अंतरिक्ष अवलोकन और ब्रह्मांड को समझने के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने आगे कहा कि यह मिशन भारतीय शैक्षिक संस्थानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण में योगदान देने के कई अवसर खोलेगा।कुमार ने अपने उद्घाटन भाषण में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बारे में कहा, "भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने मुख्य रूप से समाजिक लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का निर्माण किया और न कि सैन्य उपयोग के लिए।" उन्होंने डॉ. विक्रम साराभाई के योगदान की भी सराहना की, जिनके प्रयासों से देश के स्वतंत्रता के 10 वर्षों बाद अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास हुआ था। साराभाई ने यह समझने की कोशिश की कि कैसे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से प्रसारण संचार और मौसम निगरानी में सुधार किया जा सकता है। यह तीन दिवसीय सत्र खगोलशास्त्र, अंतरिक्ष विज्ञान, ग्रह विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान और उभरते हुए क्षेत्रों, जैसे क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकियों में ऑप्टिक्स और उन्नत उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका पर केंद्रित है। उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय रेडियो एस्टोफिजिक्स केंद्र के निदेशक प्रोफेसर यशवंत गुप्ता, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर की निदेशक प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमणियम और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के निदेशक प्रोफेसर अनिल भारद्वाज भी उपस्थित थे।  

नर्सिंग कॉलेजों में अब महिलाओं को नहीं मिलेगा 100% आरक्षण, पुरुष उम्मीदवारों को 13 जनवरी तक करने होंगे आवेदन

जबलपुर  मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूटर के कुल 286 पदों पर अब महिला उम्मीदवारों को 100% आरक्षण नहीं मिलेगा। एमपी हाईकोर्ट ने पुरुष उम्मीदवारों की याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में विभिन्न फैकल्टी की भर्ती में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा। यह जानकारी मंगलवार को हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की ओर से दी गई। ईएसबी के अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है, किंतु लिखित निर्देश की कॉपी अभी नहीं मिली। जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता नौशाद अली द्वारा इस भर्ती में महिला अभ्यर्थियों को दिए जा रहे 100 फीसद आरक्षण को चुनौती दी गई है। सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 पदों पर सीधी भर्ती वकील विशाल बघेल ने कहा- 16 दिसंबर को प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के जरिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 7 जनवरी थी। पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर किया गया था बघेल ने बताया कि इस मामले में जितने भी पुरुष उम्मीदवार हैं, जो मध्य प्रदेश से डिग्रीधारी हैं और वो महिलाओं के बराबर ही योग्यता रखते हैं। उन्हें सिर्फ इस आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया गया था कि वह पुरुष हैं। जबलपुर निवासी नौशाद अली और अन्य याचिकाकर्ताओं ने याचिका दाखिल की। कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में इन भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया। जबकि भर्ती नियम और अपेक्स काउंसिल आईएनसी के सभी मापदंड लिंग भेद की अनुमति नहीं देते हैं। इन सबके बाद भी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 (2) और भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही है। याचिका में आरोप- 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन हुआ याचिका में आरोप लगाया गया कि सरकार की इस भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत यह सीधे-सीधे लिंग भेदभाव है। इसके अलावा मध्य प्रदेश शासन ने आरक्षण नीति बनाई हुई है। महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। उसके साथ-साथ भर्ती नियम-2023 बनाया है। इनमें भी कहीं ये नहीं लिखा है कि पुरुषों को सिर्फ पुरुष होने के आधार पर भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जाएगा। इस मामले में 29 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया था। मंगलवार को भी प्रिंसिपल बेंच में सुनवाई हुई। सरकार ने मौखिक रूप से कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा। 68 पदों पर भर्ती में पुरुषों को अपात्र करार दिया था बता दें मामला सामने आने के बाद सरकार ने ट्यूटर के 218 विज्ञापित पदों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था, लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 68 पदों पर भर्ती में पुरुषों को अपात्र करार देते हुए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। उनकी ओर से बताया गया कि आवेदन की अंतिम तिथि सात जनवरी है। ऐसे में कोर्ट ने अगली सुनवाई सात जनवरी को निर्धारित कर सरकार को लिखित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पक्ष रखा। उनका आरोप है कि 16 दिसंबर को ईएसबी द्वारा जारी ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर सहित कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इनमें पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर किया जाना न सिर्फ भर्ती नियम तथा इंडियन नेशनल काउंसिल के मापदंडों का उल्लंघन है। बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 और सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का भी उल्लंघन है। विज्ञापन के अनुसार, आवेदन 24 दिसंबर से आमंत्रित किए गए थे। सात जनवरी, 2026 इसकी अंतिम तिथि है।