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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 3.77 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को अंतरित की 810 करोड़ रुपए भावांतर राशि

प्रदेश के हर युवा को रोजगार दिलाएगी सरकार विकास का कारवां यूं हीं चलता रहेगा – हमने जो कहा, वो करके भी दिखाया जावरा में बनेगा आऊटडोर-इनडोर स्टेडियम, वन स्टॉप सेंटर भी बनाया जाएगा जावरा में हेरिटेज भवन निर्माण और स्कूल मरम्मत के लिए दिए जाएंगे 2-2 करोड़ रुपए ग्राम शुजापुर और पिपलौदा में बनेगा बालिका छात्रावास 145 करोड़ की लागत वाले 33 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन जावरा में हुआ सोयाबीन भावांतर राशि अंतरण का राज्य स्तरीय सम्मेलन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर, केवल एक योजना नहीं किसानों के प्रति सरकार का श्रद्धाभाव है। भावांतर की राशि किसानों के अधिकार की राशि है। यह राशि किसानों की समृद्धि के प्रति सरकार के संकल्प का प्रतीक है। किसानों के कल्याण के लिए हम कभी भी पीछे नहीं रहेंगे। नए वर्ष 2026 को हमने अन्नदाताओं के कल्याण को ही समर्पित किया है। अगले वर्ष हम कृषि उत्सव मनाएंगे। किसान भाइयों की समृद्धि का उल्लास मनाएंगे। आधुनिक तरीके से खेती, कृषि विस्तार सेवाएं और नई-नई तकनीकों को हम गांव-गांव तक पहुंचाएंगे, जिससे किसान भाई अपनी खेती-किसानी को और बेहतर बनाने के लिए सही समय पर सही निर्णय ले सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश की जनता से जो वादा किया, वह पूरा करके भी दिखाया है। प्रदेश के विकास का यह कारवां कभी रूकेगा नहीं। हम विकास के प्रकाश से किसी को भी वंचित नहीं रहने देंगे। प्रदेश की प्रगति में सबकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों को अभी 1500 रुपए दिए जा रहे हैं, इस राशि को 3 हजार रूपये तक बढ़ाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर जरूरतमंद और हुनरमंद युवा को हमारी सरकार रोजगार उपलब्ध कराएगी। प्रदेश के 32 लाख से अधिक किसानों को सरकार सोलर पम्प उपलब्ध कराएगी। सोलर पंप की कुल लागत पर हम किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान भी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रतलाम जिले के जावरा में सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत किसानों को भावांतर राशि वितरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 3.77 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को 810 करोड़ रुपए की भावांतर राशि बैंकखातों में सिंगल क्लिक से अंतरित की। इसमें रतलाम जिले के 12 हजार 386 किसान भी शामिल हैं, जिनके खातों में 20.74 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से भेजे गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की भावांतर राशि को मिलाकर हमारी सरकार अबतक प्रदेश के 6.25 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को करीब 1300 करोड़ रुपए की भावांतर राशि का भुगतान कर चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने करीब 145 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले 33 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर रतलाम जिलेवासियों को भी नये साल की अग्रिम सौगातें दीं। इसमें 18 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 127 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 21 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सभी विकास कार्य रतलाम जिले को सुंदर, स्वच्छ और नागरिक सुविधाओं के मामले में अव्वल बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मालवा के गांधी के नाम से प्रसिद्ध डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डेय की जीवनी पर केन्द्रित पुस्तिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगी कृषि विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सम्मेलन में आए किसानों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर जावरा नगर में एक आधुनिक आऊटडोर-इनडोर स्टेडियम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि निराश्रित महिलाओं के अल्प आश्रय के लिए जावरा में वन स्टॉप सेंटर बनाया जाएगा। जावरा में हेरिटेज भवन के निर्माण और एक बेहद पुराने जीर्ण-शीर्ण स्कूल की सम्पूर्ण मरम्मत के लिए मुख्यमंत्री ने इन दोनों कार्यों के लिए 2-2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बेटियां भी पढ़ाई-लिखाई में किसी से पीछे नहीं रहेंगी। उन्होंने रतलाम जिले के ग्राम शुजापुर और ग्राम पिपलौदा में एक-एक नवीन बालिका छात्रावास भवन बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का लाभ रतलाम जिले को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय परियोजना से राजस्थान के 15 जिले और मध्यप्रदेश के मालवा और चंबल अंचल के 15 जिले (30 से अधिक जिले) कृषि सिंचाई की स्थायी सुविधा से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध पालन में भी वृहद स्तर पर वृद्धि करने की ओर तेजी से अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मालवा क्षेत्र में करीब 5 हजार करोड़ रुपए लागत से एक नया आधुनिक फोर-लेन हाई-वे बनने जा रहा है। यह हाई-वे रतलाम जिले की सीमा से भी गुजरेगा। इस हाई-वे के निर्माण के लिए किसानों की सभी मांगे मानी जाएंगी। आवश्यकता हुई तो, भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि भी बढ़ा दी जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि जावरा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे एक ऐसा व्यक्तित्व है जिनके कृतित्व से क्षेत्र आलोकिक हुआ है। डॉ. पांडे ने अपने परिश्रम से जन सेवा की मिसाल कायम की है। मुझे प्रसन्नता है कि मुझे उनका सानिध्य मिला है और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है। डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे के चरित्र को हमें अंगीकार करना चाहिए उनका व्यक्तित्व बहुआयामी रहा है। मध्यप्रदेश शासन की जनहित कार्य नीतियों का जिक्र करते हुए श्री तोमर ने कहा कि आज प्रदेश के लाखों किसान भावांतर जैसी योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार सफलतापूर्वक सर्वाहारा वर्ग के लिए कार्य कर रही है। किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीड है। जहां-जहां फसलों को नुकसान हुआ प्रदेश सरकार द्वारा वहां किसानों को राहत राशि प्रदान की गई है। कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभिनव रूप से जनकल्याणकारी कार्यों की शुरुआत की है। किसान के हित में कार्य करने वाले मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक हित में सदैव अग्रणी रहे हैं। कंषाना ने प्रदेश के किसानों की ओर से … Read more

महाराष्ट्र शिक्षण मंडल जबलपुर के शताब्दी समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच का संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संत परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और समाज सुधार की साझी विरासत से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को जबलपुर में महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के शताब्दी वर्ष समारोह को इंदौर से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे। शिक्षा के क्षेत्र में गौरवशाली इतिहास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्था के 100 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 1926 में स्थापित इस संस्था ने आजादी से पहले और बाद में शिक्षा के क्षेत्र में महती भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों के आधार पर बाजीराव पेशवा, शिंदे, होलकर और गायकवाड़ राजवंशों ने मध्यप्रदेश के विकास और संस्कृति के संरक्षण में अहम योगदान दिया है। नई शिक्षा नीति और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नई शिक्षा नीति को लागू करने में मध्य प्रदेश अग्रणी राज्यों में से एक है। प्रदेश सरकार ने 55 जिलों में 'पीएम एक्सीलेंस कॉलेज' प्रारंभ किए हैं। साथ ही, पाठ्यक्रमों में लोकनायकों और जननायकों की जीवनियों को शामिल किया गया है, जिससे युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके। उन्होंने बताया कि सरकार ने खरगोन में टंट्या मामा विश्वविद्यालय, गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और ग्वालियर में रानी अवंतिबाई विश्वविद्यालय शुरू किये हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना होगा : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि अब केवल इतिहास पर गर्व करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना होगा। श्री फडणवीस ने कहा कि यदि महाराष्ट्र शिक्षण मंडल जबलपुर में मराठी भाषा सिखाने के लिए कोई नया उपक्रम या कोर्स शुरू करता है, तो महाराष्ट्र सरकार उसके लिए आवश्यक निधि और पूरा सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा, यहां तक कि मेडिकल और इंजीनियरिंग में भी मातृभाषा को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने 'स्वराज्य' के साथ 'स्वधर्म' और 'स्वभाषा' का नारा दिया था। उन्होंने पानीपत के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि मराठों ने केवल अपने साम्राज्य के लिए नहीं, बल्कि समूचे भारत की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि मराठी व्यक्ति कभी संकुचित विचार नहीं रखता बल्कि उसका दृष्टिकोण हमेशा राष्ट्रव्यापी और वैश्विक होता है। उन्होंने संस्था को भविष्य के लिए आगाह करते हुए कहा कि हमने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन का दौर देखा है, लेकिन अब दुनिया 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की लहर की ओर बढ़ रही है। इसका शिक्षा क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों का आह्वान किया कि वे अगले 25 से 50 वर्षों की योजना बनाएं और विद्यार्थियों को एआई की चुनौतियों के लिए तैयार करें। श्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री के मंत्र 'विकास भी और विरासत भी' का उल्लेख करते हुए कहा कि वही समाज आगे बढ़ता है, जिसे अपनी विरासत पर गर्व होता है। उन्होंने प्रशांत पाल द्वारा लिखित पुस्तकों का जिक्र करते हुए कहा कि अब भारत का सच्चा इतिहास साक्ष्यों के साथ सामने आ रहा है, जो पुरानी भ्रांतियों को तोड़ रहा है। श्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव की व्यस्तता के बावजूद वे इस कार्यक्रम में शामिल हुए, क्योंकि जहां महाराष्ट्र का नाम और शिक्षण का विषय जुड़ा हो, वहां वे आए बिना नहीं रह सकते। कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र शिक्षण मंडल की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। जबलपुर के विकास की रूपरेखा में श्री फडणवीस का विजनरी योगदान: लोक निर्माण मंत्री सिंह लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर के विकास के वर्तमान स्वरूप की नींव रखने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस की अहम भूमिका रही है। उन्होंने श्री फडणवीस को एक 'विजनरी' नेता बताया। उन्होंने एक पुराना संस्मरण साझा करते हुए बताया कि जब श्री फडणवीस विधायक थे, तब उन्होंने जबलपुर प्रवास के दौरान देर रात 'बड़ा फुहारा' और 'छोटा फुहारा' जैसी घनी बस्तियों का दौरा किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि इच्छाशक्ति हो तो जबलपुर तेजी से आगे बढ़ सकता है। उनके द्वारा सुझाए गए बिंदुओं पर ही शहर के विकास की रूपरेखा तैयार की गई। मंत्री श्री सिंह ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में अधोसंरचना विकास के लिए वे महाराष्ट्र के नवाचारों का अनुसरण करेंगे और वहां के 'इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉडल' का अध्ययन करेंगे।  स्थानीय भाषा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक : परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे स्वयं इस विद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं और यहां उन्होंने 4 महीने तक शिक्षा ग्रहण की है। उन्होंने कहा कि 40-42 साल पहले जबलपुर में अच्छी शिक्षा के लिए महाराष्ट्र हाई स्कूल, क्राइस्ट चर्च और मॉडल स्कूल जैसे कुछ ही प्रतिष्ठित संस्थान थे। उन्होंने नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि अब स्थानीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति, जैसे रामायण और गीता को भी शिक्षण पद्धति में शामिल किया जा रहा है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। समारोह में राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अजय विश्नोई, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, वरिष्ठ समाज सेवी व चिंतक प्रशांत पाल, अखिलेश जैन, नगर अध्यक्ष  रत्नेश सोनकर, प्रख्यात चिकित्सक डॉ. जामदार सहित महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के पदाधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।  

‘महतारी गौरव वर्ष’ पर आधारित 2026 का शासकीय कैलेंडर जारी, CM साय ने किया लॉन्च

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वर्ष 2026 के शासकीय कैलेंडर का विमोचन किया। वर्ष 2026 को राज्य सरकार द्वारा ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी थीम पर आधारित यह कैलेंडर सशक्त एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प को अभिव्यक्त करता है। बता दें कि कैलेंडर के मुख्य पृष्ठ पर छत्तीसगढ़ के पांच प्रमुख शक्तिपीठ मां बमलेश्वरी डोंगरगढ़, मां महामाया रतनपुर, मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा, मां चंद्रहासिनी चंद्रपुर और मां कुदरगढ़ी सूरजपुर के पावन धाम को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के छायाचित्र भी अंकित हैं। पृष्ठभूमि में सिरपुर एवं राजिम के मंदिर, आदिवासी संस्कृति, मधेश्वर पहाड़ तथा चित्रकोट जलप्रपात के आकर्षक ग्राफिकल प्रतिरूप सम्मिलित किए गए हैं, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि “राज्य सरकार के लिए मातृशक्ति का सम्मान और सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकता है। महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा यह वर्ष महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को समर्पित है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह शासकीय कैलेंडर महिला सशक्तिकरण, राज्य की प्राथमिकताओं और हमारी उपलब्धियों का सशक्त प्रतीक है। इसमें जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सरोकारों को समाहित किया गया है, जो सशक्त एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।” कैलेंडर के विभिन्न मासिक पृष्ठों में विषयानुसार योजनाओं एवं अभियानों को समाहित किया गया है। जनवरी माह के पृष्ठ पर राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों का दर्शन कराया गया है। फरवरी माह में राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान को दर्शाया गया है, वहीं मार्च माह को महतारी वंदन योजना को समर्पित किया गया है। अप्रैल माह में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, मई माह में तेंदूपत्ता संग्रहण एवं चरण पादुका योजना, तथा जून माह में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ अभियान को प्रमुखता दी गई है। जुलाई माह में महिला मुखिया के नाम से पीडीएस राशनकार्ड की व्यवस्था को दर्शाया गया है। अगस्त माह में रक्षाबंधन उत्सव, सितंबर में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना और अक्टूबर माह में शौर्य का सम्मान विषय को स्थान दिया गया है। नवंबर माह को “सेवा ही संकल्प” की भावना के साथ प्रस्तुत किया गया है, जबकि दिसंबर माह को महिला सशक्तिकरण के प्रतीक रूप में दर्शाया गया है। शासकीय कैलेंडर 2026 के विमोचन के इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, जनसंपर्क सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत और आयुक्त जनसंपर्क रवि मित्तल उपस्थित थे।

बस्तर पंडुम 2026 की तैयारियां शुरू: सीएम साय ने अधिकारियों के साथ की अहम बैठक

रायपुर  बस्तर अंचल की समृद्ध लोकपरंपराओं, जनजातीय संस्कृति, कला और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा. इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई. बैठक में आयोजन की विस्तृत तैयारियों की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है. इसके अंतर्गत 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 30 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 1 से 5 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इस वर्ष बस्तर पंडुम में विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है. जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं. मुख्यमंत्री साय ने तैयारियों के संबंध में विभागीय अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और आयोजन को सुव्यवस्थित, गरिमामय तथा अधिक प्रभावी स्वरूप में संपन्न कराने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है. बैठक में यह बताया गया कि बस्तर पंडुम 2026 का लोगो, थीम गीत और आधिकारिक वेबसाइट का विमोचन माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में ही मुख्यमंत्री साय द्वारा किया जाएगा. इस अवसर पर वरिष्ठ मांझी–चालकी, गायता–पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकार उपस्थित रहेंगे. इस बार विशेष रूप से भारत के विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके. साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया. प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों और समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके. उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खान-पान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुड़ियों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों के 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा. इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है. बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे.

बिहार में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती, नए साल में दो नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत

पटना बिहार में नए साल के आगाज के साथ ही राज्य को दो नए अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मिलने जा रहे हैं, जिससे बिहार में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वैशाली जिले के महुआ में निर्मित मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और भोजपुर जिले के आरा में स्थापित वीर कुंवर सिंह मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का संचालन जनवरी, 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। दोनों संस्थानों में 500- 500 बेड की सुविधा होगी। 100-100 यूजी छात्रों को मिलेगा नामांकन इन दोनों के निर्माण में क्रमश: 500 करोड़ और 543 करोड़ रुपये की लागत आई है। इन मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक में 100-100 यूजी छात्रों को नामांकन दिया जाएगा। छात्रों के लिए आधुनिक छात्रावास भवन और डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। दोनों संस्थान नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानकों के अनुरूप संचालित होंगे। मेडिकल कॉलेजों में जनरल मेडिसिन, सर्जरी, पीडियाट्रिक्स, गायनेकोलॉजी, आईसीयू जैसी प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही मरीजों को इंडोर- आउटडोर इलाज, जांच, दवा वितरण, ऑप्टोसी ब्लॉक, डेमो रूम और म्यूजियम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। 10 वर्ष पहले केवल 6 राजकीय मेडिकल कॉलेज थे उल्लेखनीय है कि 10 वर्ष पहले बिहार में केवल 6 राजकीय मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन बीते एक दशक में यह संख्या बढ़कर 11 जिलों में 13 मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच गई है। वर्तमान में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, मधेपुरा, बेतिया, नालंदा, छपरा, पूर्णिया और समस्तीपुर समेत कई जिलों में मेडिकल कॉलेज सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आने वाले पांच वर्षों में शेष जिलों में भी एक-एक मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। सीवान और बेगूसराय में निर्माण कार्य लगभग 45 से 50 प्रतिशत, जबकि बक्सर, मधुबनी सहित अन्य जिलों में 60 से 80 प्रतिशत तक कार्य पूरा हो चुका है।  

जबलपुर–दमोह फोरलेन परियोजना का सर्वे पूरा, 150 फीट चौड़ी सड़क से बदलेगा क्षेत्र का ट्रैफिक नक्शा

जबलपुर जबलपुर से दमोह के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबी सड़क को दो लेन से फोर लेन करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस मार्ग का सर्वे कर चुका है। 150 फीट सड़क की चौड़ाई तय की गई है, जिसमें फोरलेन बनाया जाना है। इस सड़क को तीन फेज में बनाया जाएगा। अभी दो फेज के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। जहां से प्रक्रिया अंतिम दौर में आ गई है। जल्द ही इसकी निविदा जारी कर कार्य प्रारंभ होगा। पहले जबलपुर से कटंगी और जबेरा से दमोह के बीच सड़क का निर्माण होगा। इसके अलावा कटंगी से जबेरा तक का हिस्से में अभयारण्य की जमीन होने की वजह से इसका सर्वे किया जा रहा है। इसमें वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी स्वीकृति लेनी होगी। बता दें कि सड़क की चौडाई को लेकर कुछ परेशानी आ रही थी जिस वजह से प्रस्ताव को दोबारा भेजा गया है। अभी दमोह से जबेरा के बीच 350 करोड़ रुपये की लागत से बनाने की प्रकिया होगी। यह पैकेज 43 किलोमीटर लंबा होगा। वहीं दूसरा पैकेज 24 किलोमीटर लंबी सड़क जबेरा से कटंगी के बीच बनेगी।

Labour Code Update: इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा असर? नए लेबर कानून को लेकर क्या बदलेगा आपके लिए

नई दिल्ली साल 2026 से निजी और सरकारी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए सैलरी का कैलकुलेशन बदलने वाला है। सरकार ने 28 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। इसमें सबसे चर्चित है '50% वेतन नियम' (50% Wage Rule)। आइए समझते हैं कि इसका आपकी जेब और भविष्य पर क्या असर पड़ेगा? क्या है 50% सैलरी का फॉर्मूला? नए नियमों के मुताबिक आपकी कुल सैलरी (CTC) में 'मूल वेतन' (Basic Pay) और 'महंगाई भत्ता' (DA) का हिस्सा कम से कम 50% होना चाहिए। बाकी के 50% में HRA, बोनस और अन्य भत्ते आएंगे। उदाहरण के तौर पर अगर किसी की सैलरी 50,000 रुपये है और उसकी बेसिक सैलरी अभी सिर्फ 15,000 रुपये है, तो कंपनी को इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये (कुल सैलरी का 50%) करना होगा। PF और ग्रेच्युटी में होगा बड़ा फायदा PF और ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ योगदान भी बढ़ जाएगा। इससे आपको रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड (PF और ग्रेच्युटी) काफी बड़ा हो जाएगा। इसके अलावा पेंशन और अन्य लाभों का दायरा भी बढ़ेगा। इन-हैंड सैलरी और टैक्स पर क्या होगा असर? जहाँ एक तरफ भविष्य सुरक्षित होगा, वहीं महीने के अंत में घर ले जाने वाली सैलरी  में थोड़ी कमी आ सकती है क्योंकि पीएफ की कटौती ज्यादा होगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार बेसिक सैलरी बढ़ने से टैक्स छूट वाले भत्तों का हिस्सा कम हो सकता है, जिससे कुछ कर्मचारियों की टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी चाहें तो 15,000 रुपये की वैधानिक सीमा पर ही पीएफ कटवाना जारी रख सकते हैं, जिससे इन-हैंड सैलरी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

मन की बात में पीएम मोदी बोले– एंटीबायोटिक दवाइयों का बेवजह इस्तेमाल बन रहा है बड़ी चुनौती

नई दिल्ली वर्ष 2025 के आखिरी 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल भारत की उपलब्धियों पर चर्चा की। इसके अलावा पीएम मोदी ने कई मुद्दों पर अपनी राय भी रखी। पीएम ने सबसे बड़ी चिंता एंटी बायोटिक के उपयोग पर जताई। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक बीमारियों के खिलाफ इसकी उपयोगिता कम हो रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम भारतीयों के अंदर एंटी बायोटिक के उपयोग को लेकर उदासीनता है। हम बिना डॉक्टर की सलाह के भी यह दवाईयां खाने लगे हैं। पीएम ने आग्रह किया कि किसी भी तरह की दवाई डॉक्टर की सलाह के बिना न खाएं। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि कुछ ही दिनों में 2026 दस्तक देने वाला है। मन में इस साल की कई यादें घूम रही हैं। कई उपलब्धियां ऐसी हैं, जिन्होंने पूरे देश को एक साथ जोड़ दिया और गर्व करने का मौका दिया। पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा, "इस साल ऑपरेशन सिंदूर ने हर भारतीय को गर्व करवाया। पूरी दुनिया ने देखा कि आज का भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया के हर कोने में भारत माता के प्रति प्यार और भक्ति की तस्वीरें सामने आईं।" 2025 में खेलों में भारत की उपलब्धि की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "इस साल पुरुष क्रिकेट टीम ने आईसीसी चैंम्पियंस ट्रॉपी जीती, महिला टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप अपने नाम किया। भारत की बेटियों ने विमेंट ब्लाइंड वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया। एशिया कप में भी भारतीय टीम ने अपना परचम लहराया।" इसके बाद पीएम मोदी ने 2025 में विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंन कहा, "भारत ने साइंस और स्पेस के क्षेत्र में भी इस वर्ष बड़ी छलांग लगाई है। शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। पर्यावरण सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी कई पहल भी इस साल शुरू हुईं। इसके अलावा अब भारत में चीतों की संख्या भी 30 से ज्यादा हो गई है। इस साल में आयोजित कुंभ मेले का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस भव्य आयोजन ने दुनिया को हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, "2025 में आस्था, संस्कृति और भारत की अनोखी विरासत सब एक साथ देखने को मिली। इस आयोजन ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। साल के आखिर में राम मंदिर में झंडा फहराने की सेरेमनी ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। पीएम मोदी ने काशी तमिल संगमम का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, "इस साल वाराणसी में काशी तमिल संगमम के दौरान बच्चों ने तमिल सीखने पर खासा जोर दिया। तमिल भाषा दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है। मुझे खुशी है कि आज देश के दूसरे हिस्सों में भी युवाओं और बच्चों में तमिल भाषा के प्रति एक नया आकर्षण दिख रहा है। यही भाषा की ताकत है और भारत की एकता है।

भूकंपों की डरावनी श्रृंखला: 30 घंटे में 24 बार कांपी धरती, क्या बड़े झटके का संकेत?

   अहमदाबाद गुजरात के कच्छ में शुक्रवार सुबह 4.6 की तीव्रता से आए भूकंप ने कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाया, लेकिन इसने 24 साल पहले की उस तबाही के जख्म जरूर हरे कर दिए हैं जिसमें हजारों लोग की जिंदगी बर्बाद हो गई थी। इस ताजा भूकंप के बाद करीब दो दर्जन हल्के झटकों और जमीन के नीचे हलचल ने भी वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भूवैज्ञानिकों को इन झटकों के बाद क्षेत्र में तीन फॉल्ट लाइंस का पता चला है जो अब ऐक्टिव हो गए हैं। इनकी वजह से पहले से ही भूकंप के लिए संवेदनशील कच्छ को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य झटके के बाद 30 घंटे के अंदर 23 आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद हल्के झटके) भी लगे। शुक्रवार को तड़के 4.30 बजे से शनिवार सुबह 9.45 बजे के बीच ये कंपन नॉर्थ वागड फॉल्ट से उत्पन्न हुए। इसे इस क्षेत्र में सबसे सक्रिय माना जाता है। भूकंप के हालिया डेटा से पता चला है कि कथरोल हिल, गोरा डोंगर और नॉर्थ वागड़ फॉल्ट लाइनें एक साथ ऐक्टिव हो गईं हैं। इसकी वजह से भारत के सबसे प्रमुख भूकंप संभावित क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ गई है। कच्छ पहले से ही 10 से अधिक फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिनमें कच्छ मेनलैंड फॉल्ट और साउथ वागड़ फॉल्ट शामिल हैं, जो 2001 के विनाशकारी भूकंप (रिक्टर स्केल पर 7.7) के दौरान टूट गए थे। हाल तक अधिकांश भूकंपीय गतिविधियां इन्हीं ज्ञात क्षेत्रों के आसपास केंद्रित थीं। हालांकि, 2025 में दर्ज किए गए हालिया झटकों से संकेत मिलता है कि तनाव नए फॉल्ट सिस्टमों में स्थानांतरित होकर फैल रहा है। तीन फॉल्ट लाइनें एक साथ ऐक्टिव भुज स्थित कच्छ यूनिवर्सिटी में जियोसाइंसेज डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर गौरव चौहान ने टीओआई को बताया, ‘ नागर पार्कर और अल्लाह बंड जैसी पारंपरिक रूप से सक्रिय फॉल्ट लाइनों ने वर्षों से भूकंप उत्पन्न किए हैं। लेकिन अब चिंता की बात यह है कि हालिया झटकों ने नॉर्थ वागड़ फॉल्ट पर गतिविधि की पुष्टि की है, जबकि पिछले कुछ महीनों में काठरोल हिल और गोरा डोंगर फॉल्ट लाइनों पर दर्ज भूकंप यह संकेत देते हैं कि 2025 की शुरुआत से ही तीनों फॉल्ट लाइनें फिलहाल सक्रिय हो चुकी हैं।’ एक साथ कई फॉल्ट लाइन ऐक्टिव होने से खतरा चौहान के मुताबिक 1 से 3 तीव्रता के आफ्टरशॉक्स ने एकत्रित ऊर्जा को निकलने में मदद की है जिससे तुरंत किसी बड़े भूकंप की आशंका कम होती है। उन्होंने कहा, 'आफ्टरशॉक्स दबाव घटाते हैं, लेकिन कई फॉल्ट लाइंस का ऐक्टिव होना भी चेतावनी है। ये फॉल्ट बड़े भूकंप को उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं और इसलिए तैयारी बहुत अहम है।' हालांकि शुक्रवार का भूकंप तीव्रता में मध्यम दर्जे का था, लेकिन इसके झटके पूरे कच्छ में महसूस किए गए। झटके इतने तेज थे कि लोग डरकर घर से बाहर भागे। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज झटकों का कारण भूकंप के केंद्र की कम गहराई थी। तैयारी रखने की सलाह भूकंप वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कच्छ में आने वाला कोई शक्तिशाली भूकंप केवल इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र की भू-आकृतिक संरचना को देखते हुए, तेज झटके पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सतर्कता की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। चौहान ने अधिकारियों से हालिया भूकंपीय गतिविधि को एक चेतावनी के रूप में लेने का आग्रह किया और नियमित भूकंप मॉक ड्रिल, भवन निर्माण मानकों के सख्त पालन और स्कूल शिक्षा में आपदा तैयारी को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।

डिजिटल अपराध से निपटने की तैयारी, छत्तीसगढ़ के 9 नए जिलों में Cyber थाने शुरू होंगे

रायपुर मार्च 24 और मार्च 25 के स्टेट बजट में घोषित 9 जिलों में सायबर थाने (Cyber Police Station) खोलने की अधिसूचना नवंबर में जारी कर दी गई है. पीएचक्यू ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं. उम्मीद है कि जनवरी में ये थाने शुरू कर दिए जाएंगे. वर्तमान में राज्य में पांच रेंज स्तरीय सायबर थाने काम कर रहे हैं. माना जा रहा है कि जिलों में सायबर थाने खुलने से रेंज थानों पर भी केस का दबाव कम होगा. चूंकि रेंज सायबर थाने सीमित साधनों के साथ संचालित हो रहे हैं, ऐसे में जिलों के सायबर थानों को पर्याप्त विवेचक, स्टाफ और तकनीकी सुविधाओं के साथ खोले जाने की जरूरत है. रायपुर रेंज में हो जाएंगे चार सायबर थाने पहले बजट मार्च 2024 में पांच जिलों और दूसरे बजट मार्च 2025 में 4 जिलों में सायबर थाने मंजूर किए गए थे. सभी 9 थानों को खोलने की अधिसूचना नवंबर में जारी की गई है. ये सायबर थाने बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़, राजनांदगांव, कबीरधाम, जांजगीर चाम्पा और जशपुर में खोले जाने हैं. रायपुर रेंज में जल्द ही चार सायबर थाने हो जाएंगे. वर्तमान में रेंज स्तरीय थाना रायपुर में है. जबकि बलौदाबाजार, धमतरी महासमुंद में जिला सायबर थाने खोले जाने हैं. वर्तमान में पांचों संभागों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और बस्तर में रेंज सायबर थाने काम कर रहे हैं. अभी रेंज सायबर थानों के लिए भी पद मंजूर नहीं हैं इसलिए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अपने अधीनस्थ जिलों से डीएसपी, निरीक्षक समेत अन्य स्टाफ की पदस्थापना करके सायबर अपराधों की विवेचना और कार्रवाई करवा रहे हैं. फिर भी नियमित मंजूर स्टाफ नहीं होने से कई तरह की तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं. 2026 के बजट में फंड की उम्मीद इसलिए हाल ही में संपन्न डीजीपी आईजीपी कॉन्फ्रेंस में सायबर क्राइम पर भी खासतौर पर चर्चा हुई थी. PM, यूएचएम समेत 9 से ज्यादा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे. देश भर में सायबर ठगों से निपटने के लिए पुलिस के पास मौजूद संसाधन नाकाफी माने गए. दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में दो साल में बजट में घोषित 9 सायबर थानों का संचालन शुरू नहीं होने से भी किरकिरी हुई है. यही वजह है कि कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद अधिसूचना जारी की गई. मार्च 2026 के स्टेट बजट में सायबर थानों के लिए पृथक से फंड मिलने की उम्मीद भी अधिसूचना जारी करने की एक वजह है. राज्य में 39 हजार सिम और सेलफोन ब्लॉक, 1116 गिरफ्तार तारांकित प्रश्न पर विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक राज्य में 2782 पुलिस अधिकारी, कर्मचारी व जिला लोक अभियोजन अधिकारियों को सायबर, महिला व बाल अपराधों की विवेचना पर कार्रवाई हेतु प्रशिक्षण दिया गया है. अब तक फर्जी सिम विक्रेताओं पर 103 प्रकरणों में 159 लोगों एवं म्यूल एकाउंट पर 253 प्रकरणों में 863 लोगों कुल 1116 पर कार्रवाई की गई है. सायबर फ्रॉड में शामिल 28946 मोबाइल नंबर व 10409 आईएमईआई नंबर को अवरुद्ध कराया गया है. सायबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1030 के माध्यम से 82.5 करोड़ रुपए सायबर अपराधियों के हाथों में पहुंचने से पहले होल्ड कराए गए हैं.