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सरकार का जवाब आया: 8वें वेतन आयोग के बाद पेंशन पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली कई महीनों से केन्द्र सरकार के पेंशनभोगी और कर्मचारी इस चिंता में थे कि क्या 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) उनकी पेंशन को फिर से तय किया जाएगा या नहीं. सरकार ने जैसे ही 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस जारी किए, अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि पेंशन संशोधन को भी इसमें साफ-साफ शामिल किया जाए. आम लोगों में भी भ्रम फैल गया था कि शायद पेंशन की समीक्षा इसमें नहीं है. इसी उलझन को दूर करते हुए वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में साफ कर दिया है कि 8वां वेतन आयोग पेंशन से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सिफ़ारिशें देगा. यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लाखों पेंशनर्स लंबे समय से किसी स्पष्ट जवाब का इंतजार कर रहे थे. राज्यसभा में सांसद जावेद अली खान और रामजी लाल सुमन ने अनस्टार्ड प्रश्न के जरिये पूछा कि क्या सचमुच 8वें CPC में पेंशन संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है? इसके जवाब में वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साफ कहा कि यह बात गलत है. उन्होंने कहा, “8वां आयोग वेतन, भत्तों और पेंशन आदि से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी सिफ़ारिशें देगा.” इस जवाब ने पेंशनभोगियों को राहत दी है, क्योंकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि पेंशन की समीक्षा भी आयोग की कार्यसूची में शामिल है. DA, DR को मूल वेतन में मर्ज करने का प्लान? इसके साथ ही, दोनों सांसदों ने यह भी पूछा कि क्या सरकार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्लान बना रही है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को तत्काल राहत मिल सके? इस पर पंकज चौधरी ने दो टूक जवाब दिया कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है. उन्होंने कहा, “वर्तमान में महंगाई भत्ता को मूल वेतन में मर्ज करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है.” जनवरी 2024 में जब DA 50 फीसदी तक पहुंच गया था, तब कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार से इस मर्जर की मांग की थी, क्योंकि इससे भविष्य की सैलरी और पेंशन दोनों बढ़ जाती हैं. लेकिन सरकार लगातार यह साफ करती रही है कि वह इस दिशा में कदम उठाने की योजना नहीं रखती. सांसदों का एक और सवाल था कि क्या 8वें वेतन आयोग के गठन के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया है? इस पर मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की कि सरकार ने 03.11.2025 की तारीख वाला नोटिफिकेशन जारी करके गठन को मंजूरी दे दी है और इसके टर्म ऑफ रेफरेंस भी जारी कर दिए गए हैं. इसके साथ ही आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई है. इसका मतलब है कि आयोग औपचारिक रूप से अपना काम शुरू कर चुका है और आने वाले समय में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नई सिफ़ारिशों का रास्ता खुल जाएगा.

संसद भवन में BJP की अहम बैठक: नया अध्यक्ष कौन बनेगा, रेस में इन नामों पर चर्चा

नई दिल्ली जेपी नड्डा के बाद अगला बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर लंबे समय से अटकलें जारी हैं। बिहार चुनाव के दौरान एक इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया था कि चुनाव खत्म होने के बाद अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो जाएगा। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, बीएल संतोष के बीच संसद भवन में एक अहम बैठक हुई। लगभग घंटेभर तक चली बैठक में अगले बीजेपी चीफ और यूपी बीजेपी चीफ पर चर्चा हुई। बीजेपी अध्यक्ष नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव से पहले ही खत्म हो गया था, लेकिन आम चुनाव तक पहले उसे बढ़ाया गया। इसके बाद फिर से उसे बढ़ाया जा चुका है। पार्टी के भीतर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान समेत कई नाम सामने आए हैं, जिनके रेस में होने की चर्चा है। हालांकि, आधिकारिक रूप से कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है। बीजेपी के नियम के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने से पहले पार्टी को 50 फीसदी स्टेट यूनिट्स में चुनाव करवाने होते हैं और अब तक यह पूरा भी हो चुका है। अध्यक्ष पद की रेस में कौन-कौन से नाम? पिछले एक दशक में बीजेपी का नया रूप देखने को मिला है, जिसके तहत बड़े पदों पर चुने जाने वाले नाम अक्सर चौंकाने वाले होते हैं। फिर चाहे वह यूपी 2017 में योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाया जाना हो या फिर हाल ही में दिल्ली में रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री चुना जाना हो। ऐसे में मौजूदा भाजपा में अगले अध्यक्ष के नाम का अंदाजा लगाना आसान नहीं होगा। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, रेस में कई नाम हैं। धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान के अलावा, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, निर्मला सीतारमण, विनोद तावड़े आदि के नाम भी रेस में चल रहे हैं। यूपी बीजेपी चीफ के लिए घंटों बैठक  यूपी में एक अहम बैठक हुई, जोकि तीन घंटे तक चली। सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास पर भाजपा और आरएसएस के बीच समन्वय बैठक हुई। माना जा रहा है कि इसी हफ्ते यूपी बीजेपी के अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए एक ब्राह्मण, दलित और तीन ओबीसी नेताओं के नाम रेस में आगे चल रहे हैं। नया अध्यक्ष, इन नेताओं के नाम की अटकलें भारतीय जनता पार्टी को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने के संकेत हैं। खबर है कि बुधवार को कई उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नाम शामिल हुए। अटकलें ये भी हैं कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश अध्यक्ष के नाम का भी फैसला कर लिया है और सिर्फ ऐलान बाकी है। हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। अब संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भाजपा 15 दिसंबर से पहले नया अध्यक्ष चुन सकती है। 15 दिसंबर से पहले क्यों मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा में चर्चाएं हैं कि 15 दिसंबर से पहले नया अध्यक्ष चुना जा सकता है। इसकी वजह 16 दिसंबर से खरमास महीना शुरू होना है। हालांकि, पार्टी ने अब तक साफ नहीं किया है कब तक नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, अगले साल यानी 2026 में कई राज्यों में चुनाव होने के चलते कई नेताओं का मानना है कि इन चुनावों से पहले नए अध्यक्ष का चुनाव हो। 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। बुधवार को एक के बाद एक हुईं बैठकों में पीएम मोदी, गृहमंत्री शाह, मौजूदा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और भाजपा महासचिव बीएल संतोष शामिल रहे। यूपी अध्यक्ष का भी जल्द हो सकता है ऐलान खास बात है कि कुछ दिनों पहले संतोष यूपी में भी थे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार समेत कई बड़े नामों से मुलाकात की थी। अटकलें हैं कि यूपी के लिए भाजपा अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग गई है और इसे लेकर जल्द ही बड़ी घोषणा हो सकती है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा बाकी है। ये नाम आगे अब तक साफ नहीं है कि भाजपा किसके नाम पर मुहर लगाएगी। हालांकि, अटकलें हैं कि रेस में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव और भाजपा नेता विनोद तावड़े का नाम है। महिला नेताओं में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, डी पुरंदेश्वरी और वनति श्रीनिवासन का नाम आगे चल रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद माना जा रहा है कि प्रधान का नाम रेस में सबसे आगे है। हालांकि, पार्टी ने इसपर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। प्रधान बिहार चुनाव प्रभारी थे। नड्डा का कार्यकाल साल 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले ही मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नड्डा का कार्यकाल पूरा हो चुका है। हालांकि, बाद में उन्हें कई बार विस्तार दिया गया।

1 जनवरी को खजराना गणेश मंदिर में भव्य भोग, तिल चतुर्थी पर लगेगा सवा लाख लड्डुओं का आशीर्वाद

इंदौर  लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में 31 दिसंबर और 1 जनवरी को भक्तों की ज्यादा संख्या को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। नए साल और तिल चतुर्थी महोत्सव के दौरान भक्तों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। मंदिर परिसर में भीड़ मैनेजमेंट, पानी की व्यवस्था, पार्किंग, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम समय पर पूरे करने के लिए कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है। इसके साथ ही ऑनलाइन सुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा, साथ ही श्रद्धालुओं को सुगम और आधुनिक सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंदिर में भगवान गणेश का विशेष श्रंगार किया जाएगा। इन दिनों पूरे मंदिर परिसर में विशेष लाइटिंग और फूलों से सजावट भी की जाएगी। दुनिया भर में हजारों लोगों की आस्था का केंद्र इंदौर का खजराना गणेश मंदिर अब उन करोड़पति मंदिरों में शुमार है, जहां हर साल करोड़ों का दान आता है. अब यहां भगवान के लिए 6 किलो सोने का मुकुट तैयार किया जा रहा है. गणेश जी का मुकुट तैयार हो जाने के बाद माता रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ के भी मुकुट बनाने की तैयारी चल रही है. बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी की सुबह मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर में कई व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिससे भक्तों को दर्शन करने में आसानी हो। इसके साथ ही पुलिस व्यवस्था भी मंदिर में लगाई जाती है। मंदिर में दर्शन के लिए स्टेप्स के साथ कई बदलाव किए जाते हैं। साथ ही ये प्रयास भी किए जाते हैं कि भक्तों को ज्यादा देर तक लाइन में इंतजार ना करना पड़े। सालाना बढ़ रही खजराना मंदिर की दान राशि इंदौर में होलकर रियासत के समय से ही खजराना गणेश मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र रहा है. इस मंदिर को देवी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया था. तभी से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने को लेकर मंदिर की प्रसिद्धि दुनिया भर में फैली हुई है. यही वजह है कि न केवल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ रही है, बल्कि मंदिर में आने वाले दान की राशि भी सालाना कई करोड़ रुपये हो चुकी है. 31 दिसंबर को 11 बजे तक ही एंट्री     नव वर्ष की पूर्व संध्या और पहले दिन श्रद्धालुओं के लिए कई व्यवस्था की जाएंगी।     31 दिसंबर की रात 11 तक ही श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।     इसके बाद मंदिर में 1 जनवरी को सुबह 4 बजे से मंदिर में दोबारा दर्शन शुरू किए जाएंगे।     31 दिसंबर को पुजारी जयदेव भट्ट महाआरती करेंगे। खजराना गणेश मंदिर में 6 जनवरी से तिल चतुर्थी महोत्सव शुरू होगा। जिसमें सात दिवसीय तिल चतुर्थी मेला भी लगेगा। तिल चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश का सवा लाख लड्‌डूओं का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। इस महोत्सव की शुरुआत ध्वजा पूजन के साथ होगी। मंदिर में विशेष सजावट भी की जाएगी। कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि श्रद्धालुओं के लिए अनेक ऑनलाइन सुविधाएं शुरू की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि मंदिर की वेबसाइट को अपडेट किया जाए। नया पोर्टल और एप भी शुरू कि जाए। सहयोग राशि के लिए क्यूआर कोड की सुविधा भी शुरू की जाए। बता दे कि बुध‌वार को कलेक्टर ने मंदिर का दौरा भी किया जहां उन्होंने मंदिर के विकास के लिए बनाए गए मास्टर प्लान को भी देखा और मीटिंग में दिशा-निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने विकास कामों को जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश भी दिए। दान राशि से बन रहा सोने का मुकुट इतना ही नहीं मंदिर के कई ऐसे प्रमुख दानदाता हैं, जो मंदिर परिसर में चाहे धर्मशाला हो, शैक्षणिक परिसर हो या फिर अन्य कोई संसाधन, वे गुप्त दान के जरिए मंदिर की हर व्यवस्था के लिए तैयार रहते हैं. अब यहां पर दान राशि से ही भगवान का मुकुट बनाया जा रहा है, जो करीब 6 किलो सोने से तैयार किया जा रहा है. 8 करोड़ रुपए का तैयार हो रहा है मुकुट मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट बताते हैं कि "मंदिर में हर महीने में 40 से 50 लाख रुपए का दान प्राप्त हो रहा है. इसी अनुपात में सालाना दान राशि करोड़ों में जमा हो जाती है. भगवान के लिए सोने का मुकुट जो बनाया जा रहा है उसकी कीमत करीब 7-8 करोड़ रुपए है. फिलहाल डेमो के लिए चांदी का मुकुट तैयार किया गया है, जिनकी डिजाइन और स्वरूप फाइनल होने के बाद उन्हें स्वर्ण में तैयार किया जाएगा." तिल चतुर्थी पर लगेगा सवा लाख लड्डुओं का भोग आगामी तिल चतुर्थी के अवसर पर खजराना गणेश मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का भोग लगेगा. इस दौरान यहां 3 दिवसीय मेला भी लगेगा, जो 6, 7 और 8 जनवरी को आयोजित होगा. तिल चतुर्थी पर बड़ी संख्या में भक्त खजराना मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं. इनके लिए इंदौर जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने सुविधाजनक दर्शन की व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है. प्रतिवर्ष होने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग भगवान को गुड-तिल भी अर्पित करने आते हैं. मध्य प्रदेश के 5 धनी मंदिर की लिस्ट सबसे ज्यादा कमाई करने वाला मंदिर है उज्जैन का बाबा महाकाल ज्योतिर्लिंग. इसकी नेटवर्थ सैकड़ों करोड़ में है. वहीं, दूसरे नंबर पर मैहर का मां शारदा देवी धाम है. इसके बाद ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है जिसकी सालाना इनकम 37 से 40 करोड़ के आसपास है. वहीं, चौथे स्थान पर है सलकनपुर की दुर्गा माता का मंदिर जो देवी बीजासन के रूप में जाना जाता है. इंदौर का खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश का 5वां सबसे धनी मंदिर खजराना गणेश इस लिस्ट में पांचवे नंबर पर है जिसकी सालाना नेटवर्ट 6 से 7 करोड़ रुपए आंकी गई है. यह दान और चढ़ावे से आने वाली रकम है.

GST राहत पर रुपये की मार, रोजमर्रा की चीज़ों के दाम होंगे बढ़े हुए: फोन से लिपस्टिक तक

नईदिल्ली   आजकल रुपया जिस रफ्तार से गिर रहा है, उसने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ने ही वाला है. असर सीधा उन चीज़ों पर पड़ने वाला है, जिन्हें आप और हम रोज़मर्रा में इस्तेमाल करते हैं, जैसे मोबाइल फोन, टीवी, लैपटॉप, एसी, फ्रिज, मेकअप और यहां तक कि गाड़ियां भी. हाल ही में सरकार ने जीएसटी कम किया था, जिससे ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन रुपये की यह गिरावट से वह भी कम होती दिख रही है. रुपये की कमजोरी सबसे ज्यादा उन कंपनियों को दिक्कत दे रही है, जो अपने प्रोडक्ट्स के पुर्ज़े या पूरा प्रोडक्ट विदेश से मंगाती हैं. पिछले कुछ महीनों से कच्चे माल की लागत बढ़ रही थी, फिर भी कंपनियां दाम बढ़ाने से हिचक रही थीं, क्योंकि जीएसटी घटने के बाद सरकार का रुख सख्त था. लेकिन अब जब डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर हो गया है, तो कंपनियां इस नुकसान को और ज़्यादा झेल नहीं पा रही हैं. इकॉनमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और बड़े घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों ने साफ़ कर दिया है कि दिसंबर से जनवरी के बीच वे कीमतों में 3 से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेंगी. इसका कारण मेमोरी चिप, कॉपर और दूसरे जरूरी हिस्सों के दाम काफी बढ़ जाना बताया जा रहा है. कई चीज़ों की लागत का 30 से 70 प्रतिशत तक हिस्सा विदेशों पर निर्भर है, इसलिए रुपये की कमजोरी सीधे लागत को बढ़ा देती है. GST का फायदा रुपये ने खाया सुपर प्लास्ट्रोनिक्स (Super Plastronics) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीत सिंह मारवाह ने कहा, “GST में कटौती का जो फायदा मिला था, वह पूरा का पूरा रुपये की कमजोरी और पुर्जों की बढ़ी कीमतों से खत्म हो जाएगा.” उन्होंने यह भी बताया कि मेमोरी चिप्स के दाम चार महीनों में छह गुना बढ़ गए हैं. उनके अनुसार, “हमें डर है कि जीएसटी कटौती से जो मांग बढ़ी थी, वह फिर से कमजोर पड़ सकती है.” कंपनियां पहले रुपये को 85–86 रुपये प्रति डॉलर के बीच मानकर अपनी प्लानिंग बना रही थीं, लेकिन सीधा 90 रुपये का स्तर पार कर जाने से स्थिति बिगड़ गई है. हैवल्स (Havells) ने LED टीवी पर लगभग 3 फीसदी, सुपर प्लास्ट्रोनिक्स ने 7–10 फीसदी, और गोदरेज एप्लायंसेज़ ने एसी और फ्रिज पर 5–7 फीसदी बढ़ोतरी का संकेत दिया है. कंपनियों ने सरकार को निजी तौर पर यह भी बताया है कि लगातार बढ़ती लागत को अब वे खुद से झेलना संभव नहीं है. ब्यूटी प्रोडक्ट्स भी प्रभावित रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स के बाद सौंदर्य उत्पादों का क्षेत्र भी प्रभावित होगा. शिसेडो (Shiseido), मैक (MAC), बॉबी ब्राउन (Bobbi Brown), क्लीनिक (Clinique) और द बॉडी शॉप (The Body Shop) जैसे विदेशी ब्रांडों के उत्पाद पहले से ही महंगे थे, और अब रुपये की कमजोरी इन्हें और अधिक महंगा बना देगी. शॉपर्स स्टॉप ब्यूटी (Shoppers Stop Beauty) के मुख्य अधिकारी बीजू कासिम ने कहा कि कमजोर रुपया हमारे विदेश से मंगाए जाने वाले सौंदर्य उत्पादों की लागत बढ़ा देता है. इसलिए कुछ महंगे आयातित उत्पादों में कीमत बढ़ाना आखिरकार आवश्यक हो ही जाता है. वाहन सेक्टर भी इससे अछूता नहीं है. हाल ही में दोपहिया और छोटी कारों पर जीएसटी घटा था, जिससे बिक्री में अक्टूबर में 17 फीसदी और नवंबर में 19 फीसदी उछाल आया. लेकिन रुपये की गिरावट इस गति को फिर से रोक सकती है. Mercedes-Benz India के प्रमुख संतोष अय्यर ने कहा, “लग्जरी वाहनों की कीमतें आगे बढ़ेंगी… हम 26 जनवरी से कीमतों में बदलाव पर विचार कर रहे हैं.” ऑडी इंडिया के प्रमुख बलबीर सिंह ढिल्लों का कहना है कि रुपये की गिरावट का सीधा और पूरा असर लागत पर पड़ता है… हालांकि कंपनी अभी बढ़ोतरी का स्तर तय नहीं कर पाई है.

इंद्रेश उपाध्याय की शादी की भव्य तैयारियाँ, करीबी दोस्तों के साथ धूमधाम से मनाया गया विवाह समारोह

छतरपुर वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज 5 दिसंबर को जयपुर के होटल ताज आमेर में हरियाणा की शिप्रा के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। इस शुभ अवसर पर देशभर के साधु-संतों और कई प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी रहेगी। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी उनके परम मित्र हैं और विवाह समारोह में शामिल हो रहे हैं। शादी की रस्में शुरु हो गई है। मशहूर है दोनों की दोस्ती वृंदावन के इंद्रेश महाराज और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री दोनों की ही दोस्ती काफी मशहूर है। दोनों अक्सर साथ में देखे जाते हैं। जब हाल ही में धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा निकली थी, तब इंद्रेश महाराज उनके साथ ही थे। दोनों एक-दूसरे की कथाओं में जाते रहते हैं। इंद्रेश महाराज के विवाह को लेकर भी शास्त्री ने कहा था कि इंद्रेश के विवाह में उनकी मां ही गीत गाएंगी। हाल ही में आए थे घर प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय हाल ही में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की जन्मस्थली आए थे। उन्होंने शास्त्री की मां के हाथों से बने देशी चूल्हे पर कड़ी-पुड़ी और चाय का स्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने उस झोपड़ी को भी देखा जहां धीरेंद्र शास्त्री का बचपन बीता था। बाबा रामदेव ने भी लिए मजे हाल ही में सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में बागेश्वर बाबा और बाबा रामदेव भी पहुंचे हुए थे। वहां अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि यशस्वी मुख्यमंत्री अपने बालक की शादी यहां कर रहे, इससे बड़ी-बड़ी जगहों में डेस्टिनेशन वेडिंग कर लाखों-करोड़ों खर्च करने वालों का खर्चा बचेगा। लोग कहेंगे कि मैं भी अपने बालक का विवाह सामूहिक कन्या विवाह समारोह में कराउंगा। इसका मतलब यह नहीं कि आप लोग कहें कि आप भी कर लो।' इस पर परिसर में जोर के ठहाके लगने लगे। तभी बाबा रामदेव उठे और उन्होंने बाबा बागेश्वर को संबोधित करते हुए कहा कि 'चिंता मत करो महाराज आपका भी विवाह यहीं सामूहिक कन्या विवाह समारोह में ही कराएंगे।' सिर्फ बात ही हो रही लंबे समय से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विवाह की बातें मीडिया और उनके समर्थकों में हो रही हैं। हालांकि कभी भी धीरेंद्र शास्त्री ने इन बातों का खंडन नहीं किया। वह विवाह की बात को बड़ी ही होशियारी से टाल देते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में उनका नाम कभी कथावाचक जया किशोरी तो कभी देवी चित्रलेखा से जुड़ा है। वह खुद कई बार इन बेसिर-पैर की बातों का खंडन कर चुके हैं। बागेश्वर बाबा अपनी कथाओं में भी बिना तारीख बताए कई बार श्रोताओं को अपने विवाह के प्रीतिभोज में आमंत्रित कर चुके हैं। मित्र के विवाह से पड़ेगा दवाब अब उनके परम मित्र इंद्रेश महाराज के विवाह के बाद उनके ऊपर भी विवाह का दवाब बनेगा। उनकी माताजी कई बार उनसे निवेदन कर चुकी हैं। उनके पैतृक मकान में एक तस्वीर भी लगी है, जिसमें शास्त्री की मां उनके कान ऐंठ रही हैं, और उस पर लिखा है,'अब तो शादी कर ले मेरे लाल…' अब उनकी शादी की शुभ घड़ी कब आएगी, यह तो किसी को नहीं पता है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि वह जल्द ही शादी के बंधन में बंध जाएंगे।  

नक्सल-रोधी अभियान में निर्णायक वार: 18 इनामी नक्सली मारे गए, AK-47 व LMG समेत हथियार जब्त

छत्तीसगढ़ बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमावर्ती क्षेत्र में बुधवार से जारी मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. लगभग 20 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में जवानों ने 1 करोड़ 30 लाख रुपये इनामी 18 नक्सलियों को मार गिराया. हालांकि, इस मुठभेड़ में सुरक्षा बल के 3 जवान शहीद हो गए, जबकि दो जवान घायल हैं, जिनका इलाज रायपुर में जारी है. मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने मारे गए नक्सलियों के शवों के साथ बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं. इनमें AK-47, LMG 303 रायफल और ऑटोमैटिक हथियार शामिल हैं. 16 नक्सलियों की हुई पहचान अब तक 18 में से 16 नक्सलियों की पहचान की जा चुकी है, जबकि दो शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है. मारे गए नक्सलियों में 9 पुरुष और 9 महिला माओवादी शामिल हैं. सभी पर कुल मिलाकर 1 करोड़ 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था. यह मुठभेड़ हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मानी जा रही है. ऐसे हुआ था मुठभेड़ यह मुठभेड़ बुधवार सुबह 9 बजे उस समय शुरू हुई जब DRG, STF, COBRA और CRPF की संयुक्त टीम बीजापुर-दंतेवाड़ा बॉर्डर के वेस्ट बस्तर डिवीजन क्षेत्र में सर्चिंग कर रही थी। इसी दौरान नक्सलियों ने अचानक फायरिंग की, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर आत्मनिर्भर व विकसित भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया। सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान देशवासियों के सामने लक्ष्य रखा कि 2047 में देश जब आजादी का शताब्दी महोत्सव मना रहा होगा, तब हमें आत्मनिर्भऱ, विकसित भारत चाहिए। जहां हर व्यक्ति खुशहाल और परस्पर सौहार्द के साथ मिलकर दुनिया की महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा हो। वहां जाति, भाषा, क्षेत्र का विवाद और अभाव न हो। कोई नागरिक आपदा का शिकार न हो। हर व्यक्ति आत्मनिर्भर व स्वावलंबन का जीवन व्यतीत करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके। सीएम ने कहा कि भारत विकसित तब हो सकता है, जब हर व्यक्ति पंच प्रण पर ध्यान दे।  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ किया।  सीएम ने पंच प्रण को बताया शाश्वत मंत्र  सीएम ने पंच प्रण को शाश्वत मंत्र बताया और कहा कि यह हर नागरिक पर समान रूप में लागू होते हैं।  पहला प्रणः विरासत पर गौरव की अनुभूति यानी पूर्वजों की थाती। हर भारतवासी को पूर्वजों, संस्कृति, महापुरुषों पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन सिंह उसी परंपरा के नायक हैं, जिसे हर भारतवासी विरासत कहता है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण व धर्मध्वजा का आरोहण विरासत की श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है।  दूसरा प्रणः गुलामी के अंशों को पूरी तरह समाप्त करना- सीएम ने कहा कि बीच के कालखंड में हर देशवासी भूल गया कि जब दुनिया अंधकार में थी, तब भारत बड़ी ताकत था। दो हजार वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा 46 फीसदी और चार सौ वर्ष पहले भारत की भागीदारी का हिस्सा 26 फीसदी था। देश जब आजाद हुआ, तब दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा महज डेढ़ फीसदी रह गया था। अंग्रेज व विदेशी आक्रांता जब भारत को लूटकर ले गए थे, उसकी कीमत उस समय लगभग 32-35 ट्रिलियन डॉलर के बराबर थी। आज भारत की अर्थव्यवस्था मात्र चार ट्रिलियन डॉलर की है। अब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हुआ है। हाल के सर्वे के मुताबिक दुनिया ने माना है कि भारत सबसे तेज गति के साथ बढ़ने वाला राष्ट्र बन गया है। भारत की यात्रा शानदार इसलिए है, क्योंकि हमने विरासत पर गौरव की अनुभूति की और गुलामी के अंशों को समाप्त किया।  तीसरा प्रणः सैन्य बलों का सम्मानः सैनिक, यूनिफॉर्म धारी फोर्स (सेना, अर्धसेना, पुलिस बल) का सम्मान करना है। उनके बलिदान व सेवाओं के प्रति सम्मान व कृतज्ञता होनी चाहिए।  चौथे प्रण की चर्चा कर सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांता इसलिए सफल हुए, क्योंकि हम विभाजित थे, जाति-क्षेत्र, भाषा के नाम पर बंटे थे। पड़ोस में आग लगी है और हम निश्चिंत बैठे हैं तो देर-सवेर आग आप तक भी पहुंचेगी। सामाजिक विद्वेष की खाई को चौड़ा होने से रोकना होगा। हमारी पहचान राष्ट्रीयता के आधार पर होनी चाहिए। सामाजिक भेदभाव की खाई को दूर करना, राष्ट्रीय एकता के लिए प्राण प्रण से जुड़ना होगा।  पांचवें प्रण के रूप में नागरिकों कर्तव्यों का निर्वहन का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि दूसरों के ऊपर कानून लागू होगा और हमारे ऊपर नहीं होगा। यही प्रवृत्ति ही सारी समस्याओं की जड़ है। कानून दूसरों के लिए है तो मेरे लिए भी होना चाहिए। सीएम ने कहा कि छात्र, शिक्षक, व्यापारी, जनप्रतिनिधि समेत हर नागरिक अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करता है तो पंच प्रण आत्मनिर्भर व विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगा। यदि देश एक दिशा में कार्य करने लग जाएगा तो 2047 आते-आते भारत विकसित होगा।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

पुतिन के आगमन के साथ भारत को मिली खुशखबरी, रूस में बढ़ेगा भारतीय कारोबार का दबदबा

नई दिल्ली  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उन्हें रिसीव करने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे। इस बीच रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने कहा कि रूस अपने बाजार में भारतीय वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में रूस व्यापार आदान-प्रदान बढ़ाने में रुचि रखता है। हम रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाने और व्यापार संतुलन बनाने में रुचि रखते हैं, क्योंकि वर्तमान में रूसी सामान भारतीय बाजार में बहुत अधिक मात्रा में हैं, जबकि भारतीय सामान रूसी बाजार में उस अनुपात में नहीं हैं। रेशेतनिकोव ने आगे कहा कि हम भारत से उत्पाद खरीदने में बहुत रुचि रखते हैं। हम इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी के लिए आभारी हैं, जिसमें दोनों देशों के कई मंत्री शामिल हैं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है, जिससे हमारे नेताओं की वार्ता सफल होगी और 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य की प्राप्ति की उम्मीद जगेगी। 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य इससे पहले रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने विश्वास जताया कि रूस और भारत 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। हाल के वर्षों में तेज़ व्यापार वृद्धि और कई क्षेत्रों में सहयोग विस्तार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वीटीबी बैंक के नई दिल्ली में नए प्रमुख कार्यालय का उद्घाटन बढ़ते व्यापार को सहारा देने के लिए वित्तीय बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने भारत से आयात बढ़ाने के राष्ट्रपति के निर्देश को लागू करने के लिए चल रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला और कहा, “हम वर्तमान में भारत से आयात बढ़ाने के राष्ट्रपति के कार्य को लागू करने में जुटे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों से इन मुद्दों का समाधान आसान होगा। जितने समझौते सरल होंगे, उतना ही हमारे देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन बढ़ेगा। क्या बोले रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री तथा भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग) के रूसी सह-अध्यक्ष डेनिस मंटुरोव ने 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को 'वास्तव में महत्वाकांक्षी' बताया और कहा कि इसे हासिल करने के लिए दोनों देशों की सरकारों, व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों के संयुक्त एवं समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि हम रूस-भारत सहयोग के विस्तार के लिए अनुकूल माहौल और जरूरी परिस्थितियां बनाकर व्यापारिक समुदाय का समर्थन कर रहे हैं। अंतर-सरकारी आयोग की नियमित बैठकों को निवेश परियोजनाओं पर चर्चा का प्रमुख मंच बताते हुए मंटुरोव ने कहा कि 100 अरब डॉलर का लक्ष्य सचमुच महत्वाकांक्षी है। इसके लिए द्विपक्षीय व्यापार की गुणवत्ता और संरचना पर काम करना होगा। इसके लिए सरकारों के साथ-साथ व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों के ठोस प्रयास अपेक्षित हैं।

भोपाल में ही पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा लुत्फ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में जल-पर्यटन का केंद्र बनेगी शिकारा सेवा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में ही पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा लुत्फ प्रदेश के जल-पर्यटन को राष्ट्रीय पटल पर मिलेगी एक नई पहचान पर्यटकों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने का मिलेगा मौका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया बड़े तालाब के बोट क्लब पर 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजा भोज की नगरी भोपाल में लगभग एक हजार साल पहले बने बड़े तालाब में 'शिकारा नाव' सेवा का शुभारंभ ऐतिहासिक अवसर है। इन नवीन 20 शिकारों के माध्यम से पर्यटकों को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील का आनंद, झीलों की नगरी भोपाल में ही मिल जाएगा। शिकारों में पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। ये शिकारे प्रदेश के जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलवाएंगे। प्रदेशवासी पर्यटन सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। एम.पी. टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रहा है। शिकारा सेवा का आनंद उठाते हुए पर्यटक स्वदेशी उत्पादों की खरीद भी कर पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के पुनर्वास में भी इतिहास रचा है। आज अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को बोट क्लब भोपाल पर 'शिकारा नाव' सेवा को झंडी दिखाने के बाद यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष  हरविंदर कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष  उमंग सिंघार, विधायक एवं अध्यक्ष  हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं विद्यमान हैं। नर्मदा वैली सहित प्रदेश की बड़ी-बड़ी जल परियानाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पिछले एक साल में उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंच गई। शिकारे की सैर का लिया आनंद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकारों को फ्लेगऑफ करने के बाद बड़े तालाब में शिकारे की सैर का आनंद लिया और उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गणमान्य नागरिकों ने शिकारा बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे एवं फलों का जायका लिया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की पारम्परिक कला बाघ और बटिक वस्त्रों, जैविक उत्पादों आदि की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब पर मौजूद छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली और अथितियों के साथ टेलीस्कोप से सूर्य के दर्शन किए। टेलीस्कोप की बोट क्लब पर व्यवस्था वैज्ञानिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा की गई थी। पर्यटन विकास से स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर : वि.स. अध्यक्ष  तोमर विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि राजधानी की इतनी बड़ी झील में शिकारा सेवा की शुरुआत बहुत आकर्षक है। इससे प्रदेश में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। देश के दिल भोपाल का विशेष दर्जा है – हरियाणा वि.स. अध्यक्ष  हरविंदर शिकारा सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष  हरविंदर कल्याण भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल सभी भारतवासियों के दिल के करीब है, यह शहर देशभर में अलग दर्जा हासिल किए हुए है। बड़े तालाब में शिकारे चलते देखने का दृश्य अविस्मरणीय है। वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेशवासियों को कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव भोपाल में होगा। नेता प्रतिपक्ष  उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव, डल झील के शिकारों के माध्यम से कश्मीर को मध्यप्रदेश ले आएं हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म की यह पहल सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर शिकारों का संचालन किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण 'फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन' और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से हुआ है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया नहीं करती। इससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा निर्मित किए गए हैं, जिनके द्वारा निर्मित शिकारे केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा अत्यंत पसंद किए जा रहे हैं। भोपाल का बोट क्लब इन आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। शिकारों पर नौकायन का आनंद लेने के साथ पर्यटक बर्ड वाचिंग, हैंडीक्रॉफ्ट प्रोडक्ट, स्थानीय व्यंजन, आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूट्स आदि भी खरीद सकेंगे। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार, महापौर भोपाल मती मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष  किशन सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष  रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में पर्यटन प्रेमी उपस्थित थे।  

CMRS और पीएम मोदी का ग्रीन सिग्नल, भोपाल मेट्रो ट्रैक पर दौड़ेगी और 3 महीने तक किराए में छूट

भोपाल  राजधानी भोपाल के रहवासियों के लिए अच्छी खबर है. कमिश्नर इन मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) ने भोपाल में मेट्रो के संचालन के लिए हरी झंडी दे दी है. यानि अब एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक मेट्रो के संचालन की तैयांरियां पूरी हो चुकी हैं. पहले भोपाल मेट्रो के संचालन के लिए 13 दिसंबर 2025 की तारीख तय की गई थी. लेकिन मध्य प्रदेश मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि 6.22 किलोमीटर का कारिडोर मेट्रो के संचालन के लिए तैयार है, लेकिन इसका संचालन राज्य सरकार तय करेगी. पीएम मोदी कर सकते हैं वर्चुअल शुभारंभ मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि, भोपाल मेट्रो का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल शुभारंभ कर सकते हैं. चूंकि प्रायोरिटी कारिडोर में काम पूरा हो गया है और सीएमआरएस ने भी संचालन के लिए हरी झंडी दिखा दी है. ऐसे में माना जा रहा है कि दिसंबर में ही प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो का कमर्शियल रन हो सकता है. सीएमआरएस रिपोर्ट में सब कुछ ओके होने के बाद यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को दी गई है. वहीं, नई दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत हो जाएगी. भोपाल मेट्रो में मैन्युअल लेना होगा टिकट मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पाेरेशन के एमडी एस कृष्णा चौतन्य ने बताया कि, ''भोपाल और इंदौर मेट्रो स्टेशन में ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन का काम 186 करोड़ रुपये में तुर्की की कंपनी को दिया गया था. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करने का मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश मेट्रो ने इसका टेंडर कैंसिल करने का काम भी शुरु कर दिया है. वहीं ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन के लिए दूसरी कंपनी की तलाश की जा रही है. इसके लिए अभी टेंडर जारी किया जा चुका है. लेकिन इसमें अभी समय लग सकता है. ऐसे में भोपाल में भी मेट्रो का शुभारंभ इंदौर की तरह मैन्युअल टिकट के माध्यम से किया जाएगा.'' एक सप्ताह फ्री, 3 महीने तक छूट मेट्रो रेल कार्पाेेशन के अधिकारियों का कहना है कि इंदौर कि, तरह भोपाल मेट्रो में भी यात्रियों को पहले छूट दी जाएगी. शुभारंभ के बाद अगले एक सप्ताह तक भोपाल मेट्रो में यात्री निशुल्क सवारी कर सकेंगे. इसके बाद दूसरे सप्ताह में भी 70 प्रतिशत की छूट टिकट में दी जाएगी. जबकि तीसरे सप्ताह में 50 प्रतिशत और चौथे सप्ताह से शुभारंभ के तीन महीने तक मेट्रो के टिकट में यात्रियों को 25 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी. हालांकि इसका किराया क्या होगा. इसको लेकर कृष्णा चौतन्य का कहना है कि अभी इस पर कमेटी चर्चा कर रही है. जल्द ही इसे भी सार्वजनिक किया जाएगा. भोपाल मेट्रो में एक बार में 900 सवारी करेंगे सफर भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले चरण में 27 ट्रेन प्रस्तावित हैं. इनमें से 9 ट्रेनों की डिलीवरी हो चुकी है. इनकी कमीशनिंग और ट्रायल का काम भी पूरा हो गया है. ये सभी मेट्रो 3 कोच वाली हैं. बाद में जरुरत के अनुसार, इनमें कोच की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में मेट्रो करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. इसमें करीब 900 यात्री सफर कर सकेंगे. वहीं 150 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी. भोपाल मेट्रो स्टेशनों पर काम अधूरे आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''भले ही भोपाल मेट्रो को सीएमआरएस की हरी झंडी मिल गई है, लेकिन अभी रानी कमलापति, डीआरएम और अलकापुरी मेट्रो स्टेशनों पर फिनिशिंग समेत अन्य काम किए जा रहे हैं. ऐसे में अभी मेट्रो के संचालन में और समय लग सकता है.'' कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''यदि इससे पहले मेट्रो का कामर्शियल रन शुरु भी किया जाता है, तो शुरुआत में इन मेट्रो स्टेशनों पर सवारियों को मेट्रो का लाभ नहीं मिल पाएगा.''