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अब्दुल्ला आजम को बड़ा झटका: अदालत ने जुर्माने के साथ सुनाई सजा

रामपुर दो पैन कार्ड मामले में सात साल की सजा काट रहे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को दो पासपोर्ट केस में भी कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा उन पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। सुनवाई के दौरान अब्दुल्ला आजम वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए। सपा नेता आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो पासपोर्ट का मामला शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में 2019 में दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के पास दो पासपोर्ट हैं।  इसमें से एक पासपोर्ट का इस्तेमाल वह विदेश यात्रा में भी कर चुके हैं। यह मामला एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन था। इस मामले में दर्ज मुकदमे को निरस्त करने को लेकर अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू हुई। शुक्रवार को रामपुर कोर्ट ने फैसला सुनाया। सुनवाई के लिए पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को वीसी के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए सात साल की सजा सुनाते हुए  50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। क्या है मामला शहर विधायक आकाश सक्सेना की ओर से सिविल लाइंस थाने में वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। इसमें विधायक ने कहा था कि अब्दुल्ला आजम खां द्वारा असत्य व कूट रचित दस्तावेज तथा विवरण के आधार पर पासपोर्ट बनवाया है। वह इसका उपयोग कर रहे हैं। पासपोर्ट संख्या जेड4307442 दस जनवरी 2018 है। अब्दुल्ला आजम खां की जन्मतिथि शैक्षिक प्रमाण पत्रों हाईस्कूल बीटेक व एमटेक में  एक जनवरी1993 अंकित है। पासपोर्ट संख्या जेड 4307442 में जन्मतिथि  30 सितंबर 1990 अंकित है। पासपोर्ट का प्रयोग आर्थिक लाभ हेतु व्यापार व व्यवसाय संबंधी विदेश यात्राओं तथा विभिन्न संस्थाओं में पहचान पत्र  के रूप में तथा विभिन्न पदों के आवेदन में किया गया है। दूसरी ओर शैक्षिक प्रमाण पत्रों का प्रयोग भी आर्थिक लाभ हेतु शैक्षिक संस्थाओं की मान्यताओं व आईडी के लिए किया गया है। अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक प्रमाण पत्र तथा पासपोर्ट का विवरण जन्मतिथि व जन्म स्थान विरोधाभासी है फिर भी अब्दुल्ला आजम सभी दस्तावेजों का प्रयोग जरूरत के अनुसार जानबूझकर अनुचित लाभ लेने के लिए कर रहे है। केस में आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने असत्य विवरण अंकित पासपोर्ट संख्या जेड 4307442 बनवाया है जो जिसका दुरुपयोग किया जाना भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 तथा पासपोर्ट अधिनियम की धारा -12(1) एके अन्तर्गत दंडनीय अपराध है ।  

छत्तीसगढ़ पर्यटन में नया आयाम, ग्वालियर से गाइड ट्रेनिंग लेकर लौटे 45 युवा, CM ने किया स्वागत

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देनेे के लगातार प्रयास किए जा रहे है। छत्तीसगढ़ की नैसर्गिक सुन्दरता और यहां के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए देश-दुनिया के लोग छत्तीसगढ़ आये, इसे लेकर देश के विभिन्न हिस्सों विशेषकर महानगरों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी एवं कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को पर्यटन को वैश्विक मानचित्र पर लाना है। मुख्यमंत्री साय की पहल पर छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है और इसके लिए नई औद्योगिक पॉलिसी में कई रियायतों का प्रावधान भी किया गया है। होम-स्टे पॉलिसी बनायी गई है ताकि छत्तीसगढ़ बस्तर और सरगुजा अंचल में पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। छत्तीसगढ़ सरकार ने इन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए राज्य के युवाओं विशेषकर बस्तर अंचल के युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए टूरिस्ट गाइड प्रशिक्षण की अभिनव पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री के मंशानुरूप 45 युवाओं की टीम को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के सहयोग से भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान (आईआईटीटीएम) ग्वालियर में टूरिस्ट गाइड के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। युवाओं का यह दल वहां से एक माह का विशेष प्रशिक्षण हासिल कर छत्तीसगढ़ लौटा आया है। इन युवाओं को छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों में गाइड के तौर पर तैनात किया जाएगा।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने टूरिस्ट गाइड का सफल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य की प्राकृतिक सुन्दरता, यहां की हरी-भरी वादियां और मनोरम पर्यटन स्थल छत्तीसगढ़ को पर्यटन हब का स्वरूप देने में सक्षम हैं। पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में असीम संभावनाएं विद्यमान है, इससे रोजगार और व्यवसाय के नये द्वार खुलेंगे। उन्होंने प्रशिक्षित युवाओं से अपील की कि वे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और सुविधाओं के बारे में पर्यटकों को विशेष रूप से बताएं, ताकि पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो। इससे राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा 7 वर्षों के अंतराल के बाद टूरिस्ट गाइड प्रशिक्षण का यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें अधिकांश युवा बस्तर संभाग के रहने वाले हैं। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को पर्यटक मार्गदर्शन, संप्रेषण कौशल, सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन प्रबंधन तथा फील्ड का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकें। प्रशिक्षित युवा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का बेहतर प्रचार-प्रसार कर प्रदेश के पर्यटन उद्योग को ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम रोल अदा करेंगे।

मध्य प्रदेश पराली जलाने में देश में पहले स्थान पर, किसानों की जागरूकता प्रयास विफल

ग्वालियर  पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश लगातार दूसरी बार पहले नंबर पर रहा है। यही स्थिति अंचल के श्योपुर जिले की है, यह जिला भी लगातार दूसरी बार देश में अव्वल रहा है। लेकिन इस बार अधिक पराली जलाने वाले जिलों की टॉप टेन सूची में प्रदेश के आठ जिले हैं। जबकि पिछले साल चार ही जिले थे और 2023 में दो जिले व 2022 में एक भी जिला नहीं था। यानि पिछले तीन साल से प्रदेश में रोक के बाद भी किसान अधिक पराली जला रहे हैं। ग्वालियर जहां टॉप टेन सूची में कभी नहीं आता था और पूरी देश की सूची में काफी नीचे रहता था। तीसरे स्थान पर आया है। बता दें कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की संस्था कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोकोसिस्टम मॉनीटरिंग 15 सितंबर से 30 नवंबर तक पराली जलाने की घटनाओं की सैटेलाइट से निगरानी करता है। इस बार प्रदेशों की बात करें तो मध्य प्रदेश 17067 घटनाओं के साथ पहले नंबर, 7290 घटनाओं के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे, 5114 घटनाओं के साथ पंजाब तीसरे नंबर पर व 2890 घटनाओं के साथ राजस्थान चौथे नंबर पर रहा। जबकि इस साल जिलों में 2643 घटनाओं के साथ श्योपुर पहले, 1973 घटनाओं के साथ जबलपुर दूसरे, 1930 घटनाओं के साथ ग्वालियर तीसरे, 1797 घटनाओं के साथ दतिया चौथे, 1580 घटनाओं के साथ होशंगाबाद पांचवें, 1142 घटनाओं के साथ सिवनी छठे, 1054 घटनाओं के साथ सतना आठवें व 719 घटनाओं के साथ रायसेन 10वें नंबर पर रहे।

रेपो रेट में कमी से ईएमआई पर बचत, लाखों लोगों के लिए राहत की खबर

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने रेपो रेट में कटौती कर दी है। यह 0.25 प्रतिशत की है, जिसके बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत रह गई है। मजबूत आर्थिक वृद्धि और महंगाई में नरमी के बीच RBI ने नीतिगत दर में यह कटौती की है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समिति के फैसलों की जानकारी दी। इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा है कि इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत हुई है। बड़ी इंडस्ट्रीज़ में भी क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पहले के रेट कट का असर सभी सेक्टरों में बड़े पैमाने पर हुआ है। साल 2025 में रेपो रेट में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी से जून तक रेपो रेट में कुल 1 प्रतिशत की कटौती की थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वो इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। यानी, आने वाले दिनों में होम और ऑटो जैसे लोन 0.25% तक सस्ते हो जाएंगे। ताजा कटौती के बाद 20 साल के ₹20 लाख के लोन पर ईएमआई 310 रुपए तक घट जाएगी। इसी तरह ₹30 लाख के लोन पर ईएमआई 465 रुपए तक घट जाएगी। नए और मौजूदा ग्राहकों दोनों को इसका फायदा मिलेगा। रेट कट के बाद शेयर बाजार में तेजी RBI की ओर से रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती किए जाने के बाद शेयर बाजार में तेजी है। सुबह 11 बजे के ​करीब BSE 311.74 अंकों की बढ़त के साथ 85,577.06 पर है। सुबह यह गिरावट में खुला था। एनएसई भी 90.70 अंकों की बढ़त के साथ 26,124.45 पर है। NSE के सेक्टोरल इंडेक्सेज में गिरावट और तेजी का मिलाजुला रुख है। 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा RBI- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक कैश मैनेजमेंट के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा। उन्होंने बैंक, एनबीएफसी से अपनी पॉलिसी और संचालन के केंद्र में ग्राहकों को रखने का भी निर्देश दिया। साथ ही कहा कि स्थिरता सुनिश्चित करते हुए अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को हम सक्रिय तरीके से पूरा करना जारी रखेंगे। रेपो रेट के घटने से हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर ब्याज दरें कम करते हैं। ब्याज दरें कम होने पर हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। RBI ने महंगाई अनुमान घटाया, GDP अनुमान बरकरार रखा इस साल 4 बार घटी रेपो रेट, 1.25% की कटौती हुई RBI ने फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। अब एक बार फिर इसमें 0.25% की कटौती की गई है। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1.25% घटाई। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं। यानी, बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हुई थी। अब हर साल ईएमआई पर बचेंगे हजारों रुपये, इन पैसों से बनेगा मोटा फंड रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार 5 दिसंबर को इस साल का एक और बड़ा तोहफा देते हुए लोन की ब्‍याज दरों में बड़ी कटौती कर दी है. गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की तो बैंक से लोन लेने वाले हर आदमी के चेहरे पर मुस्‍कान खिल उठी. उन्‍हें लग गया कि अब उनके मकान खरीदने और वाहन खरीदने के सपने और भी सस्‍ते होने जा रहे हैं. गवर्नर के इस फैसले का एक आदमी पर कितना असर पड़ेगा, इसकी झलक एक छोटे से कैलकुलेशन से ही साफ समझ आ जाती है. दरअसल, रिजर्व बैंक की रेपो रेट यानी नीतिगत ब्‍याज दरों में कटौती होते ही सभी बैंकों को अपने खुदरा लोन की ब्‍याज दरें भी घटानी पड़ेंगी. इन खुदरा कर्ज में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सहित हर तरह के छोटे-मोटे लोन आते हैं. रिजर्व बैंक ने इस साल तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की है और … Read more

‘अगली बार CM नहीं बन पाएंगी ममता?’—हुमायूं कबीर ने किया विवादित बयान

कलकत्ता  बाबरी मस्‍ज‍िद की नींव डालने का ख्‍वाब देखना हुमायूं कबीर को भारी पड़ा. ममता को लगा क‍ि इससे ह‍िन्‍दू एकजुट हो जाएंगे और उनका सिंहासन डोल जाएगा. आनन फानन में उन्‍होंने हुमायूं कबीर को ही पार्टी से सस्‍पेंड कर द‍िया. लेकिन ममता के इस एक्‍शन ने पश्च‍िम बंगाल का सियासी समीकरण उलझा द‍िया है. ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ जैसी हो गई है. एक तरफ भाजपा का बढ़ता हिंदुत्व कार्ड है, तो दूसरी तरफ उनकी अपनी पार्टी का कोर वोटर मुस्लिम समुदाय, जो अब हुमायूं कबीर की बर्खास्तगी को एक ‘विश्वासघात’ की तरह देख सकता है. क्या आगामी विधानसभा चुनावों में ममता का यह दांव उल्टा तो नहीं पड़ेगा? हुमायूं कबीर कोई साधारण विधायक नहीं हैं. मुर्शिदाबाद की राजनीति में उनकी हैसियत एक मास लीडर की है. उनका करियर कांग्रेस से शुरू हुआ, वे मंत्री बने, फिर टीएमसी में आए, बीच में 2019 में भाजपा में गए और फिर टीएमसी में लौट आए. इतनी बार पाला बदलने के बावजूद, उनकी निजी लोकप्रियता खासकर भारतपुर और रेजीनगर इलाके में कभी कम नहीं हुई. अगली बार CM नहीं बन पाएंगी ममता पश्चिम बंगाल में बाबरी जैसी मस्जिद बनाने का ऐलान कर चुके विधायक हुमायूं कबीर के निशाने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। उन्होंने दावा किया है कि अगले विधानसभा चुनाव के बाद बनर्जी सीएम नहीं बन पाएंगी। मस्जिद की नींव रखने के ऐलान के बाद राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें निलंबित कर दिया था। अब कबीर ने खुद की पार्टी बनाने के संकेत दिए हैं। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कबीर ने कहा, 'मुख्यमंत्री को पूर्व मुख्यमंत्री बनना है। 2026 में मुख्यमंत्री फिर मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी। वह शपथ नहीं लेंगी और पूर्व मुख्यमंत्री कहलाएंगी।' उन्होंने शुक्रवार को टीएमसी से इस्तीफा देने की बात कही है। कबीर ने दावा किया था कि वह 6 दिसंबर को बाबरी से मिलती जुलती मस्जिद की नींव रखेंगे। बंगाल में साल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। नई पार्टी बनाने की तैयारी कबीर ने कहा था, 'मैं कल टीएमसी से इस्तीफा दे दूंगा। अगर जरूरत पड़ी तो मैं 22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा करूंगा।' उन्होंने पार्टी के जिला अध्यक्ष के साथ बैठक को लेकर कहा, 'मैं यहां जिला अध्यक्ष के साथ मीटिंग के लिए आया हूं और प्रतिक्रिया बाद में दूंगा। लेकिन मुझे पार्टी से निलंबित किया है, विधायक पद से नहीं। पहले मीटिंग होने दीजिए।' बाबरी जैसी मस्जिद बनाने का ऐलान विधायक कबीर ने पहले ऐलान किया था, 'हम 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलदांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे।' इससे पहले उन्होंने कहा था, 'इसे पूरा होने में 3 साल का समय लगेगा। उस कार्यक्रम में कई मुस्लिम नेता शामिल होंगे।' रैली में थे और पार्टी ने निलंबित कर दिया निलंबन की खबर तब सामने आई जब कबीर बहरामपुर में मुख्यमंत्री की एसआईआर विरोधी रैली के आयोजन स्थल पर बैठे थे, जहां तृणमूल ने उन्हें पहले आमंत्रित किया था। कबीर ने इसे 'जानबूझकर किया गया अपमान' बताया और कहा कि उनके खिलाफ 'साजिश' रची गई है। उन्होंने कहा, 'मुझे कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन मैं शुक्रवार या सोमवार को विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दूंगा।' कबीर ने कहा कि उनका नया संगठन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कुल 294 में से 135 सीट पर उम्मीदवार उतारेगा। सत्तारूढ़ पार्टी में लौटने से पहले कभी कांग्रेस, कभी तृणमूल और कभी भाजपा में रहे कबीर ने कहा कि बेलडांगा में छह दिसंबर का शिलान्यास कार्यक्रम रद्द नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा, '(शिलान्यास कार्यक्रम में) लाखों लोग शामिल होंगे। अगर प्रशासन हमें रोकने की कोशिश करेगा, तो एनएच-12 जाम किया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि उन्हें चुप कराने के लिए उनकी हत्या भी की जा सकती है। कबीर ने कहा कि अगर उन्हें रोका गया, तो वह धरने पर बैठेंगे और 'गिरफ्तारी देंगे'। उन्होंने कहा कि उन्हें 'न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।' अधिकारियों ने कहा कि कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। ममता बनर्जी हुईं नाराज? एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि विधायक कबीर के फैसले से सीएम बनर्जी नाराज हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सीएम और उनकी पार्टी इस फैसले के साथ नहीं हैं और यह संदेश विधायक को पहुंचा दिया गया है। एक दिन पहले भी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी भी इस फैसले से दूरी बनाते हुए नजर आए थे। मुस्लिमों में उनकी पकड़ हुमायूं कबीर की छवि एक ऐसे नेता की है जो समुदाय के मुद्दों पर अपनी ही सरकार से भिड़ने को तैयार रहता है. जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में 6 दिसंबर 2025 को ‘बाबरी मस्जिद’ की आधारशिला रखने की बात कही, तो यह महज एक बयान नहीं था. उन्होंने साफ कहा, 25 बीघा जमीन पर इस्लामिक अस्पताल, रेस्ट हाउस, होटल-कम-रेस्टोरेंट, हेलीपैड, पार्क और मेडिकल कॉलेज बनेगा… हुमायूं कबीर को कौन रोक सकता है? मैं चुनौती देता हूं. उनका यह ‘रॉबिनहुड’ वाला अंदाज उन्हें मुस्लिम युवाओं और ग्रामीण वोटरों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है. उनके समर्थकों को लगता है कि ममता दीदी दिल्ली के डर से या हिंदू वोटों के लिए मुस्लिम मुद्दों को दबा रही हैं, जबकि हुमायूं कबीर उनकी आवाज उठा रहे हैं. बाबरी मस्जिद का दांव और ममता की मजबूरी ममता बनर्जी खुद को सेक्यूलरिज्म की सबसे बड़ी पैरोकार मानती हैं. लेकिन हुमायूं कबीर का दांव उनके लिए गले की हड्डी बन गया. अगर ममता बनर्जी हुमायूं कबीर को बाबरी मस्जिद या उसके नाम पर कोई स्मारक बनाने देतीं, तो भाजपा इसे पूरे बंगाल और देश भर में भुना लेती. भाजपा इसे ‘तुष्टिकरण की पराकाष्ठा’ और ‘हिंदुओं का अपमान’ बताकर ध्रुवीकरण करती. यही वजह है कि ममता के सिपहसालार फिरहाद हकीम ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कबीर को सस्पेंड किया. हकीम ने तर्क दिया, हम धर्म के नाम पर भेद करने वाली राजनीति नहीं करते. हुमायूं कबीर भाजपा की मदद कर रहे हैं और बंगाल में आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं. ममता बनर्जी ने भी अपनी रैली में बिना नाम लिए कहा, हम सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ हैं, मुर्शिदाबाद के लोग दंगा नहीं चाहते.

इंडिगो की फ्लाइट्स कैंसिल होने से मुंबई-हैदराबाद सहित कई एयरपोर्ट्स पर पड़ा असर, 550 फ्लाइट्स रद्द

 नई दिल्ली   देश की प्रमुख एयरलाइंस इंडिगो के परिचालन संकट ने गुरुवार को भी यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं. एयरलाइन ने पूरे देश में 550 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, जिनमें अकेले दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद में 191 उड़ानें प्रभावित हुईं. हजारों यात्रियों को लंबी कतारों, इंतजार और अनिश्चितता का सामना करना पड़ा. अब हालात बिगड़ने और डीजीसीए की सख्ती के बीच इंडिगो ने आधिकारिक बयान जारी कर मौजूदा स्थिति पर माफी मांगी और जल्द सामान्य संचालन बहाल करने का भरोसा दिया. एयरलाइन ने कहा, “पिछले दो दिनों में इंडिगो के नेटवर्क और संचालन में व्यापक व्यवधान आया है. हम सभी यात्रियों और हितधारकों से खेद प्रकट करते हैं. हमारी टीमें MOCA, DGCA, BCAS, AAI और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के साथ समन्वय कर स्थिति को सामान्य करने में जुटी हैं. ग्राहकों को लगातार अपडेट दिया जा रहा है और उनसे अपने उड़ानों की स्थिति जांचने की अपील की गई है.” नवबंर महीने में 1200 से अधिक फ्लाइट्स रद्द बता दें कि इंडिगो, जो प्रतिदिन लगभग 3.8 लाख यात्रियों को सेवा देती है, पिछले कुछ दिनों से गंभीर परिचालन चुनौतियों से जूझ रही है. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन मानी जाने वाली इंडिगो सामान्य दिनों में करीब 2,300 उड़ानें संचालित करती है. आंकड़ों के अनुसार, नवंबर महीने में ही एयरलाइन को 1,232 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई उड़ानें घंटों देरी से चलीं. डीजीसीए ने लगाई फटकार इस प्रदर्शन में गिरावट के बाद डीजीसीए ने जांच का आदेश दिया और एयरलाइन से विस्तृत कारण बताए जाने को कहा. जवाब में इंडिगो ने बताया कि 1,232 उड़ानों में से 755 उड़ानें स्टाफ की कमी के कारण रद्द हुईं. 92 ATC फेलियर, 258 एयरपोर्ट प्रतिबंध और 127 अन्य कारणों के कारण रद्द हुईं. डीजीसीए ने सेवा गुणवत्ता में सुधार के लिए नए कदम उठाने, अधिक क्रू भर्ती, बेहतर योजना और निगरानी की सलाह दी है. सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन के कारण हजारों यात्रियों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई, वीडियो और तस्वीरें शेयर करके एयरलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. कई यात्रियों ने टिकट रिफंड, रीबुकिंग में देरी और जानकारी की कमी को लेकर शिकायतें कीं. इस बीच, इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्ट ने कर्मचारियों के नाम भेजे ईमेल में स्थिति पर चिंता जताई और इसे कई परिचालन चुनौतियों का मिश्रित परिणाम बताया. यह ईमेल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. उन्होंने लिखा, “हम रोजाना 3.8 लाख यात्रियों की सेवा करते हैं और चाहते हैं कि हर ग्राहक को अच्छा अनुभव मिले. पिछले दिनों हम यह वादा पूरा नहीं कर सके और हमने सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी मांगी है.” उन्होंने परिचालन संकट के कारण गिनाए, जिनमें शामिल हैं- मामूली तकनीकी खामियां, शेड्यूल बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में भीड़भाड़ और नई FDTL नॉर्म्स का प्रभाव. संकट से उबरने की कवायद इंडिगो ने दावा किया है कि परिचालन सुधार के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है. एयरलाइन का कहना है कि वह DGCA के निर्देशों का पालन करेगी और स्टाफ तथा प्रबंधन की कमी से जुड़ी समस्याओं को शीघ्र सुलझाएगी. फिलहाल यात्रियों को उड़ान स्थितियों की लगातार जांच करने और आवश्यक यात्रा दस्तावेजों के साथ समय से पहले एयरपोर्ट पहुंचने की सलाह दी गई है.

यूपी में खेलों का नया दौर शुरू, सीएम योगी के आदेश पर सभी जिलों में अमल

 गोरखपुर  उत्तर प्रदेश में कभी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित रहने वाली खेल सुविधाएं अब गांवों और ब्लॉकों तक पहुंचाने की योजना पर सरकार ने तेजी से काम शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि खेलों को लेकर उनकी सरकार किसी भी स्तर पर समझौता करने को तैयार नहीं है. उन्होंने घोषणा की प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ स्टेडियम और हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम का निर्माण तेजी से शुरू किया जा चुका है. यह घोषणा मुख्यमंत्री ने वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में 69वीं राष्ट्रीय स्कूली खेल प्रतियोगिता 2025 (ग्रीको-रोमन) कुश्ती के प्रतिभागियों और विजेताओं को सम्मानित करते हुए की. कार्यक्रम में अंडर-17 और अंडर-19 श्रेणी के पदक विजेताओं को मंच पर सम्मानित किया गया, लेकिन असली चर्चा मुख्यमंत्री की उस दूरदर्शी खेल नीति की रही, जिसकी वजह से यूपी देश के खेल नक्शे पर एक तेज़ी से उभरता हुआ राज्य बनता दिख रहा है. हमारी तैयारी उससे दो कदम आगे होगी अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत आज दुनिया में खेलों की शक्ति बनकर उभर रहा है. उन्होंने कहा, यह गर्व की बात है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ा रहे हैं. खेल व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करते हैं और इसी सोच के साथ हम उत्तर प्रदेश में खेलों का मजबूत ढांचा तैयार कर रहे हैं. 75 जिलों में एक-एक स्टेडियम, हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सबसे बड़ा ऐलान करते हुए कहा राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक अत्याधुनिक स्टेडियम बनेगा और हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा. यह निर्णय सिर्फ घोषणा नहीं है, बल्कि कई जिलों में काम तेजी से शुरू भी हो चुका है. 18 जिलों के सरकारी कॉलेजों में मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए लगभग 5-5 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है. गोरखपुर और महाराजगंज के सरकारी कॉलेजों में भी खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार की मंशा साफ है अब खेल अब शहरों की सीमा में नहीं रहेंगे, खेल की संस्कृति गांव-गांव पहुंचेगी. शिक्षण संस्थानों को पहली बार मिला इतना बड़ा खेल बजट मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए आवश्यक है कि खेलों को शिक्षा जितना महत्व दिया जाए. इसी उद्देश्य से सरकार ने एक नई पहल शुरू की है कि प्रत्येक कॉलेज को 25,000 रुपये, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों को 5,000 रुपये, जूनियर हाई स्कूलों को 10,000 रुपये खेल सामग्री खरीदने, कोचिंग गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जा रही है. यह पहली बार है जब राज्य में इतने व्यापक स्तर पर संस्थागत खेल बजट दिया जा रहा है. मेरठ में बनेगी अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मुख्यमंत्री ने मेरठ में निर्माणाधीन स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय उत्तर भारत में खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा केंद्र बनेगा. उन्होंने बताया कि इसका नाम हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा जा रहा है. यह विश्वविद्यालय खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, फिटनेस और कोचिंग के क्षेत्र में नई दिशा देगा. 2030 राष्ट्रमंडल खेलों पर फोकस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का लक्ष्य लेकर तैयारी करने की प्रेरणा दी. उन्होंने कहा, कि अंडर-17 और अंडर-19 के यह युवा खिलाड़ी 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की रीढ़ बन सकते हैं. अहमदाबाद में होने वाले इस आयोजन में आपको तिरंगा लहराना है. यह लक्ष्य अभी से तय कर लें. मुख्यमंत्री ने उपविजेताओं और पदक से चूकने वाले खिलाड़ियों को भी संबोधित करते हुए कहा कि हार किसी भी खिलाड़ी की यात्रा का अंत नहीं है. उन्होंने कहा कि पहली प्रतिस्पर्धा हमेशा खुद से होती है. अपनी कमजोरियों को पहचानें, उनसे सीखें और आगे बढ़ते रहें. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत’ के विज़न का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मूल तत्व युवा शक्ति है. उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही सशक्त भारत की नींव बनेंगे. इसकी शुरुआत खेलों से होती है. इसलिए संस्थानों में खेलों को शिक्षा के बराबर स्थान दिया जाना चाहिए. देश की शीर्ष 3 राज्यों में शामिल होने का लक्ष्य अधिकारियों का मानना है कि जिस फोकस के साथ यूपी में खेलों की बुनियाद मजबूत की जा रही है, आने वाले वर्षों में राज्य खेलों के क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे पारंपरिक मजबूत राज्यों को कड़ी टक्कर दे सकता है. सरकारी स्तर पर जो संरचना तैयार हो रही है, वह यही संकेत देती है कि यूपी अब सिर्फ आबादी का सबसे बड़ा राज्य नहीं रहेगा, बल्कि खेलों में भी अपनी पहचान मजबूत करेगा.

पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट

पुतिन–मोदी मुलाकात: वेपन, मिसाइल और S-500 पर क्या बड़ी घोषणाएँ हो सकती हैं? पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट पुतिन–मोदी मीटिंग: न्यूक्लियर रिएक्टर से आर्थिक साझेदारी तक कई अहम मुद्दों पर बात होगी  नई दिल्ली    आज भारत और रूस के बीच 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हो रही है. यह मुलाकात सिर्फ दोस्ती की नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में बड़े सौदों की उम्मीद जगाने वाली है. हथियार, मिसाइलें, फाइटर जेट्स और खासतौर पर रूसी Su-57 फाइटर जेट तथा S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर डिफेंस कंपनियों और विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं.  अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत रूस के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को मजबूत करने को तैयार है. आइए, जानते हैं कि इस सम्मेलन से क्या-क्या उम्मीदें हैं. सम्मेलन का बैकग्राउंड: पुरानी दोस्ती, नई चुनौतियां रूसी राष्ट्रपति पुतिन 4 दिसंबर को दिल्ली पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. यह चार साल बाद पुतिन का भारत दौरा है. सम्मेलन का मुख्य फोकस रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर है. रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, 2024 में भारत के 36 फीसदी हथियार रूस से आए थे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूसी S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन्स को 95 फीसदी नष्ट कर दिया था, जिससे भारत को इसकी ताकत का पता चला. अब भारत और पांच और S-400 यूनिट्स खरीदने की योजना बना रहा है, साथ ही उन्नत S-500 पर बातचीत हो सकती है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि रूस के साथ हमारी रक्षा साझेदारी लंबे समय से चली आ रही है. इस सम्मेलन से सहयोग गहरा होगा. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी पुष्टि की कि S-400 और Su-57 पर चर्चा होगी.  मुख्य ऐलान जिन पर नजरें टिकीं डिफेंस सेक्टर की कंपनियां जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इन ऐलानों से फायदा उठाने को बेताब हैं. यहां हैं प्रमुख मुद्दे… Su-57 फाइटर जेट्स: भारत की पांचवीं पीढ़ी की ताकत रूस का Su-57 (नाटो नाम: फेलॉन) एक स्टील्थ फाइटर जेट है, जो अमेरिकी F-35 का मुकाबला कर सकता है. इसमें सुपरक्रूज, एडवांस्ड रडार और लंबी दूरी की मिसाइलें लगी हैं. भारत को कम से कम दो स्क्वाड्रन (लगभग 84 जेट्स) चाहिए, ताकि वायुसेना की कमी पूरी हो सके. कीमत: प्रति जेट करीब 30 करोड़ डॉलर. रूस 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार है, ताकि भारत में ही इन्हें बनाया जा सके. HAL नासिक में प्रोडक्शन हो सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं- यह भारत के स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट का स्टॉप-गैप होगा. क्रेमलिन ने कहा कि यह दुनिया का सबसे अच्छा फाइटर है. हम भारत के साथ जॉइंट प्रोडक्शन चाहते हैं. अगर डील हो गई, तो यह 74 अरब डॉलर का सौदा हो सकता है. S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम: हाइपरसोनिक हमलों का जवाब S-500 'प्रोमिथियस' S-400 से भी आगे है. यह हाइपरसोनिक मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और लोअर ऑर्बिट के सैटेलाइट्स को नष्ट कर सकता है. रेंज: 600 किलोमीटर. भारत को 5.4 अरब डॉलर का सौदा चाहिए, जिसमें 60 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो. रूस की अल्माज-एंटे कंपनी के साथ जॉइंट प्रोडक्शन की बात चल रही है. अगर यह ऐलान हुआ, तो भारत की एयर डिफेंस सबसे मजबूत हो जाएगी. बीईएल जैसी कंपनियां इससे फायदा उठाएंगी. अन्य हथियार और अपग्रेड: ब्रह्मोस से लेकर टैंक्स तक       S-400 अपग्रेड: बाकी डिलीवरी पर बात, साथ ही 280 अतिरिक्त मिसाइलें (3 अरब डॉलर का डील).       ब्रह्मोस मिसाइल: रेंज बढ़ाकर 800 किलोमीटर, नई जनरेशन ब्रह्मोस-एनजी. दो और रेजिमेंट्स.       Su-30MKI अपग्रेड: 100 जेट्स का बड़ा ओवरहॉल, 7.4 अरब डॉलर. HAL के साथ रूस पार्टनरशिप.       R-37 मिसाइलें: 200 किलोमीटर रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें.       अन्य: स्प्रूट लाइट टैंक्स, पंतसिर सिस्टम, तलवार क्लास फ्रिगेट्स (ब्रह्मोस से लैस) और अकुला क्लास सबमरीन की डिलीवरी (2028 तक).  ये सौदे मेक इन इंडिया को बढ़ावा देंगे, क्योंकि ज्यादातर में लोकल प्रोडक्शन होगा.  डिफेंस सेक्टर पर असर: शेयर बाजार में उछाल की उम्मीद ये ऐलान डिफेंस स्टॉक्स को बूस्ट देंगे. HAL, BDL, मझगांव डॉक और एलएंडटी जैसी कंपनियों के शेयर पहले से ही 5-10 फीसदी ऊपर हैं. विशेषज्ञों का कहना है, अगर Su-57 और S-500 पर डील हुई, तो सेक्टर में 20-30 फीसदी ग्रोथ हो सकती है. भारत की वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ 30 हैं. ये डील्स कमी पूरी करेंगी. अमेरिका का दबाव, भारत की आजादी अमेरिका ने CAATSA सैंक्शंस की चेतावनी दी है, लेकिन भारत ने कहा है कि वह अपनी जरूरतें खुद तय करेगा. पुतिन ने कहा कि मोदी ने अमेरिकी दबाव नहीं माना. यह डील चीन और पाकिस्तान को भी संदेश देगी. ऊर्जा क्षेत्र में भी बात होगी: रूस भारत को सस्ता तेल देगा. रुपे-मीर पेमेंट सिस्टम को लिंक किया जाएगा.  मजबूत साझेदारी का नया अध्याय पुतिन-मोदी मुलाकात भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगी. यह सिर्फ हथियारों का सौदा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप है. विशेषज्ञ कहते हैं कि ये ऐलान दक्षिण एशिया की सैन्य संतुलन बदल देंगे. पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली में हैं. भारत के दौरे में पुतिन कई अहम समझौतों पर पीएम मोदी के साथ बात करेंगे. जिसमें दुनिया के बदलते पावर बैलेंस, यूरोप और अमेरिका के साथ तनाव और भारत के साथ मजबूत संबंधों के फ्यूचर ब्लूप्रिंट सबपर पुतिन ने खुलकर बात की. रूस की राजधानी मॉस्को के क्रेमलिन में  इंटरव्यू में व्लादिमीर पुतिन ने हर एक सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. दुनिया के लिए सख्त संदेश और भारतीयों को दोस्ती का पैगाम देते पुतिन ने इस इंटरव्यू में ये 10 मैसेज दिए. बदलते वैश्विक समीकरण और भारत का महत्व 1. दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और वक्त के साथ उसके बदलने की रफ्तार तेज होती जा रही है. ये बात सब जानते हैं. नये समीकरण और नये पावर सेंटर बन रहे हैं. इन समीकरणों पर प्रभाव डालने वाली शक्तियां भी समय के साथ बदल रही हैं. ऐसे हालात में … Read more

छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों की हाजिरी अब आधार से जुड़ेगी, 1 जनवरी 2026 से लागू होगा नया नियम

रायपुर मंत्रालय में आधार-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के सभी सरकारी दफ्तरों में इसे लागू करने जा रही है। इसी संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को आदेश जारी किया है, जिसमें आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) को 1 जनवरी 2026 से अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है। जारी आदेश के अनुसार सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि 31 दिसंबर 2025 तक सभी शासकीय सेवकों की AEBAS में ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से उपस्थिति केवल AEBAS के माध्यम से ही दर्ज की जाएगी। साथ ही कार्यालय में उपस्थिति की नियमित निगरानी करने और कर्मचारियों को समय पर कार्यालय आने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

MP के बाद अब छत्तीसगढ़ में लगेगी राहुल गांधी की पाठशाला, जिलाध्यक्षों को मिलेगा प्रशिक्षण

रायपुर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में पाठशाल लगाएंगे। दरअसल, AICC ने छत्तीसगढ़ में 41 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है, जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग देने के लिए पार्टी नेतृत्व सक्रिय हो गया है। ऐसे में मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी राहुल गांधी सभी नव नियुक्त जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग देने के लिए आएंगे। छत्तीसगढ़ PCC चीफ दीपक बैज ने बताया कि 10 दिनों तक सभी नए जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग दी जाएगी।इस 10 दिवसीय कार्यक्रम में नए जिला अध्यक्षों को संगठन संचालन, संवाद कौशल, लीडरशिप, बूथ मैनेजमेंट, अनुशासन, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया जाएगा। कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग के लिए जगह चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और संभावनाएं हैं कि यह कार्यक्रम बस्तर में आयोजित किया जाएगा। पार्टी चाहती है कि नवनियुक्त जिला अध्यक्ष आगामी महीनों में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकार की नीतियों को मजबूती से चुनौती दे सकें और संगठनात्मक ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाएं। सूत्रों के अनुसार ट्रेनिंग अलग- अलग सेशनों में होगी, जिसमें राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेता अपने अनुभव साझा करेंगे। 2028 विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हो, लेकिन कांग्रेस ने अभी से ही तैयारियां तेज कर दी हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि राहुल गांधी छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान मिलने वाली ट्रेनिंग जिला अध्यक्षों को कितना सक्षम बनाती है और इसका असर आने वाले महीनों में संगठन पर कैसे दिखता है। बता दें कि इसके पहले मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में कांग्रेस संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा की थी और कांग्रेस कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए टिप्स भी दिए थे। इतना ही नहीं राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों के सुझाव भी सुने थे। पचमढ़ी दौरे पर आए राहुल गांधी ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बाघ देखने के लिए नीम घाम में जंगल सफारी का आनंद भी लिया था। दिल्ली में हुई बैठक के बाद अंतिम निर्णय कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान को लेकर 23 अक्टूबर को दिल्ली में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इसमें AICC महासचिव केसी. वेणुगोपाल, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पहले चरण में भूपेश बघेल और टीएस. सिंहदेव से वन-टू-वन चर्चा हुई थी। दूसरे चरण में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत से बातचीत हुई थी। इन बैठकों के बाद राहुल गांधी की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लिया गया है।