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फिच रेटिंग्स का अपडेट: GDP अनुमान 6.9% से बढ़कर 7.4%, उपभोक्ता खर्च और GST सुधार से मिली ताकत

मुंबई साख निर्धारित करने वाली एजेंसी फिच रेटिंग्स ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया। मुख्य रूप से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि और जीएसटी सुधारों के साथ बेहतर धारणा के कारण वृद्धि अनुमान को बढ़ाया गया है। गुरुवार को फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले यह अनुमान 6.9 प्रतिशत था. फिच ने अपने आर्थिक विश्लेषण में कहा कि उपभोक्ता खर्च में तेजी, व्यावसायिक माहौल में सुधार और हाल ही में लागू किए गए जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था की गति तेज हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत थी. हालांकि, फिच का अनुमान है कि मार्च 2026 के अंत तक वृद्धि दर थोड़ी धीमी रह सकती है. बावजूद इसके, पूरे वर्ष के लिए एजेंसी ने अपनी वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत पर रखा है. फिच ने क्या कहा फिच ने कहा कि घटती मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को दिसंबर में नीतिगत दरों में एक और कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत पर लाने गुंजाइश देती है। आरबीआई इस साल अब तक मुख्य नीतिगत दर रेपो में एक प्रतिशत की कटौती कर चुका है। उसने कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गई जो इससे पिछली अप्रैल-जून तिमाही के 7.8 प्रतिशत थी। रेटिंग एजेंसी ने दिसंबर के लिए अपनी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2025-26 (मार्च के अंत तक) की शेष अवधि में वृद्धि धीमी रहेगी, लेकिन हमने पूरे वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि अनुमान को सितंबर के 6.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है।’’ इस वर्ष वृद्धि को मुख्य रूप से निजी उपभोक्ता खर्च गति दे रहा है। इसका कारण मजबूत वास्तविक आय गतिशीलता, उपभोक्ता धारणा में सुधार और हाल ही में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों का प्रभाव है। क्या है डिटेल जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत लगभग 375 वस्तुओं पर कर की दरें कम की गई है। इससे 99 प्रतिशत से अधिक उपभोग की वस्तुएं सस्ती हुई हैं। जीएसटी में संशोधित दरें 22 सितंबर से प्रभावी हुई हैं। फिच को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर धीमी होकर 6.4 प्रतिशत रहेगी। इसने अनुमान लगाया है कि वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ अगले वित्त वर्ष (2026-27) की दूसरी छमाही में निजी निवेश में तेजी आएगी। खाने-पीने की चीजों की कम कीमतों के कारण अक्टूबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत के अबतक के सबसे निचले स्तर पर आ गई। फिच ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि घटती मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को दिसंबर में नीतिगत दर में एक और कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत करने की गुंजाइश देगी…।’’ आरबीआई शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगा। फिच के अनुसार, मुख्य मुद्रास्फीति में सुधार और गतिविधियों के मजबूत बने रहने के अनुमान के साथ आरबीआई नीतिगत दर में कटौती के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है और अगले दो साल तक नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बनी रहेगी। उपभोक्ता खर्च बना मुख्य चालक फिच के अनुसार, निजी उपभोक्ता खर्च इस वित्त वर्ष की वृद्धि का मुख्य स्तंभ है. इसे मजबूत वास्तविक आय, उपभोक्ता विश्वास में बढ़ोतरी और जीएसटी सुधारों से समर्थन मिला है. अक्तूबर में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत के सर्वकालिक निम्न स्तर पर आ गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य और पेय पदार्थों की कम कीमतें रही. वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटने की संभावना एजेंसी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. फिच ने कहा कि वित्तीय स्थिति में नरमी आने पर अगले वर्ष की दूसरी छमाही में निजी निवेश में तेजी आ सकती है. आरबीआई को दरों में कटौती का अवसर मुद्रास्फीति में कमी के कारण फिच का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर में नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत तक ले जा सकता है. साल 2025 में अब तक कुल 100 आधार अंकों की कटौती हो चुकी है, साथ ही नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में भी कई बार कमी की गई है. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति शुक्रवार को अपनी नीति समीक्षा की घोषणा करेगी. फिच ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति में सुधार और आर्थिक गतिविधियों के मजबूत बने रहने के कारण, केंद्रीय बैंक ने अपने सहजता चक्र के अंत तक पहुंच गया है और अगले दो वर्षों तक ब्याज दरें 5.25 प्रतिशत पर बनी रह सकती हैं.

महाकाल मंदिर में नई गाइडलाइन: अजगर माला पहनाने पर रोक, भक्तों को दिया गया निर्देश

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है। मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से भक्तों को नए नियम की जानकारी देने के लिए लगातार उद्घोषणा की जा रही है। मंदिर समिति का भक्तों से अनुरोध है कि वे भगवान के लिए अजगर माला न खरीदें। मंदिर के आसपास फूल प्रसाद की दुकान संचालित करने वाले व्यवसायियों को भी फूलों की भारी व बड़ी माला विक्रय न करने के आदेश जारी किए जाएंगे। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी एक जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की तथा ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए अनेक सुझाव दिए। इसमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था। 10 से 15 किलो वजनी माला लेकिन पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए भगवान को फूलों की मोटी व बड़ी माला पहनाई जा रही थी। मंदिर के आसपास हारफूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे।मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था। मामले में नईदुनिया ने 28 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। एक-दो दिन में औपचारिक आदेश मंदिर प्रशासन ने भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में पुष्प अर्पण की शुरुआत कर दी है। इसके आदेश इसलिए एक दो दिन में जारी होंगे ताकि भक्तों को पहले नए नियम की जानकारी मिल जाए, एक दम रोक लगाने से जो भक्त फूलों की बड़ी माला लेकर आए हैं उनकी भावना आहत होगी। प्रवेश द्वार पर पड़ताल के बाद मिलेगा प्रवेश नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के विभिन्न द्वारों पर तैनात गार्ड भक्तों द्वारा भगवान को अर्पण करने के लिए लाई जा रही पूजन सामग्री की जांच करेंगे। बड़ी व भारी फूल माला को गेट पर ही अलग रखवा दिया जाएगा। किसी भी सूरत में बड़ी फूल माला मंदिर के भीतर जाने नहीं दी जाएगी। महाकाल मंदिर में भारी फूलों पर रोक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की और ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए कई सुझाव दिए। इनमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था, लेकिन कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए पूजन परंपरा से जुड़े लोगों द्वारा भगवान को फूलों की मोटी व बड़ी माला पहनाई जा रही थी। भक्तों से अजगर माला न खरीदने की अपील इसमें भक्तों द्वारा लाई गई मालाएं भी शामिल हैं। मंदिर के आसपास हार-फूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे। मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था। मामले में नईदुनिया ने 28 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला अर्पित करने पर रोक लगाई जा रही है। एक दो दिनों में इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिए जाएंगे।- प्रथम कौशिक, प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति।    

राजस्थान एसआईआर में अव्वल, 99.5% प्रपत्र डिजिटलीकरण के साथ दूसरे चरण में बढ़त

जयपुर  बिहार के बाद देश के 12 राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जारी है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने एसआईआर के दूसरे चरण में एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है। इस बीच राजस्थान ने ईएफ के डिजिटलाइजेशन में पहला स्थान हासिल किया है। आयोग द्वारा दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, देशभर में 47.5 करोड़ से अधिक यानी 93 प्रतिशत से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है। इस अभियान के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे व्यापक मतदाता सत्यापन कार्य में 99.83 प्रतिशत यानी 50.88 करोड़ से भी अधिक मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बताया कि कुल 5.46 करोड़ गणना प्रपत्रों में से 5.43 करोड़ से अधिक ईसीआई-नेट पर अपलोड कर दिए गए हैं, जिससे निर्धारित समय से पहले 99.5 प्रतिशत गणना पूरी हो गई है। यह असाधारण प्रगति राजस्थान के मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और सुव्यवस्थित क्षेत्रीय समन्वय को दर्शाती है, जो दर्शाती है कि कैसे तकनीक और जमीनी स्तर के प्रयास एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं। राजस्थान मतदाता मानचित्रण में भी अग्रणी है, जहां राज्य ने कुल मिलाकर 95 प्रतिशत से अधिक मानचित्रण पूरा कर लिया है। विशेष रूप से, नौ विधानसभा क्षेत्रों कपासन, बायतु, सलूंबर, लोहावट, नगर, सीकरी, ओसियां, शाहपुरा और बामनवास ने 99 प्रतिशत मानचित्रण का आंकड़ा पार कर लिया है। कपासन सबसे आगे है, जहां 2.73 लाख मतदाताओं में से 99.46 प्रतिशत का मानचित्रण हो चुका है, जिसका अर्थ है कि अब केवल लगभग 1,500 व्यक्तियों को ही संशोधन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता है। मानचित्रण से बेहतर सटीकता, बेहतर मतदाता सेवाएं, और बिना किसी अतिरिक्त कागजी कार्रवाई के सुचारू मतदाता सूची सत्यापन सुनिश्चित होता है। यह प्रगति 46,000 मतदान केंद्रों पर कार्यरत बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के प्रयासों का परिणाम है। राजस्थान डिजिटलीकरण में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है, जहां बाड़मेर, सलूंबर, बालोतरा, झालावाड़, फलौदी, भरतपुर, चूरू, दौसा, और बारां ने 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण हासिल कर लिया है और देश के लिए आदर्श बन गए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसआईआर केवल आंकड़ों पर आधारित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और सटीकता के साथ निभाई जाने वाली एक सामूहिक जिम्मेदारी है। राजस्थान का प्रदर्शन अधिक सटीक, मतदाता-अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत मतदाता सूची तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

मध्यप्रदेश में 45 जर्जर पुलों की तुरंत रिपेयरिंग, PWD ने जारी किया बजट

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में स्थित 45 जर्जर पुलों की मरम्मत का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा। यह निर्णय रायसेन जिले में हाल ही में हुए पुल गिरने की घटना के बाद लिया गया। इस हादसे ने राज्य में पुराने और कमजोर ब्रिजों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सतर्कता बढ़ा दी है। विधानसभा सत्र के दौरान रायसेन में पुल गिरने की घटना के बाद सुरक्षा को लेकर उठे सवालों को लेकर बढ़े दबाव का परिणाम माना जा रहा है।PWD के जारी आदेश में बताया गया कि 03.11.2025 को हुई राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति की 295वीं बैठक में यह फैसला लिया गया कि प्रदेश के कई जिलों से तात्कालिक मरम्मत की जो मांगें आई थीं, उन्हें प्राथमिकता पर स्वीकृत किया जाए। राज्य PWD (Public Works Department) ने मरम्मत के लिए आवश्यक फंड जारी कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, मरम्मत के काम में प्राथमिकता उन पुलों को दी जाएगी जो यातायात की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण हैं या जिनका ढांचा सबसे जर्जर स्थिति में है। इस सूची में ग्रामीण और शहरी दोनों प्रकार के पुल शामिल हैं। PWD अधिकारी बताते हैं कि इन पुलों की मरम्मत में आधुनिक तकनीक और मजबूत सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। केवल सतही मरम्मत नहीं, बल्कि ढांचे की जड़ से मजबूती सुनिश्चित करने का काम किया जाएगा। इससे भविष्य में किसी भी तरह के दुर्घटना या हादसे की संभावना कम हो जाएगी। रायसेन में हाल ही में एक पुल गिरने की घटना में वाहन चालक और राहगीर घायल हुए थे। इस घटना ने राज्य में पुराने पुलों की स्थिति की जांच को और जरूरी बना दिया। मरम्मत अभियान के तहत पुलों की सुरक्षा संकेत, रेलिंग और सड़क की स्थिति भी बेहतर की जाएगी। मध्यप्रदेश सरकार और PWD का कहना है कि सभी पुलों की मरम्मत की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इस कदम से न केवल सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा। सड़क परिवहन और यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि जर्जर पुलों की मरम्मत और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना किसी भी राज्य के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि यातायात सुरक्षित और व्यवस्थित रहे। जानिए किस जिले के कौन से पुल की होगी रिपेयरिंग ग्वालियर जिला     डबरा-जंगीपुर रोड़ पर 13/4 किमी पर छंदूद नदी पर बने पुल की 8.22 लाख रूपए से रिपेयरिंग होगी।     डबरा-चीनोर रोड पर 16/8 किमी पर मेंघरा नाले पर बने पुल को 10.34 लाख से सुधारा जाएगा।     एजी ऑफिस के पास रेलवे ओवर ब्रिज(ROB) की रिपेयरिंग के लिए 99.63 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।     ग्वालियर शहर में तानसेन नगर के पास बने पुल की रिपेयरिंग पर 27.49 लाख रुपए खर्च होंगे। मुरैना जिला     जडे़रूआ-सुमावली रोड पर कररई नाले पर बने पुल की रिपेयरिंग के लिए 27.49 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।     आसन पुल 8/8 सुमावली-खनेता रोड पर बने ब्रिज की रिपेयरिंग के लिए 22.02 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।     एमएस रोड जरैना-सुमावली पहुंच मार्ग के 2/4 किमी पर आसन नदी पर बने उच्चस्तरीय पुल का विशेष मजबूती करण कार्य के लिए 46.03 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।     महावीरपुर-जैतपुरा तिलावली के बीच क्वारी नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 24.88 लाख रुपए से होगी। भिंड जिला     लहार-अमायन रोड पर बने सिंध पुल की रिपेयरिंग के लिए 99.43 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।     भोनपुर सिंहोनिया मार्ग के किमी 2/4 में आसन नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 97.59 लाख से होगी।     खितोली-धमसा मार्ग के 1/4 किमी पर वैशली नदी पर बने पुल को 88.57 लाख रुपए खर्च होंगे।     कनाथर-बरासो मार्ग के 9/10 किमी में वैशली नदी पर बने पुल को रिपेयर करने में 8.93 लाख रुपए खर्च होंगे।     हटीले हनुमान से गंगादास का पुरा मार्ग में वैशली नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग में 59.47 लाख रुपए खर्च होंगे।     प्रतापपुरा-गिरगांव रोड पर खार नाले पर बने पुल की रिपेयरिंग में 99.18 लाख रुपए खर्च होंगे।     सिमराव-कमई मार्ग के बीच क्वारी नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग पर 3.75 लाख रुपए खर्च होंगे।     खरगपुरा-एनो मार्ग में आसन नदी पर बने पुल के सुधार कार्य में 56.38 लाख रुपए खर्च होंगे। दतिया जिला     इंदरगढ़–भांडेर मार्ग के किमी 13/8 पर सिंध नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग के लिए 18.86 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। अशोकनगर जिला     बीना–अशोकनगर मार्ग के किमी 7/8 पर बेतवा नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 93.58 लाख रुपए से होगी। गुना जिला     बीना–अशोकनगर मार्ग के किमी 6/6 पर सिंध नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग में 79.77 लाख रुपए खर्च होंगे।     गुना–रुठियाई मार्ग के किमी 4/6 पर बने पुल की रिपेयरिंग पर 83.12 लाख रुपए खर्च होंगे।     गुना–मक्सी मार्ग के किमी 8/2 पर नदी पर बने पुल की तत्काल रिपेयरिंग 0.00 लाख (आपातकालीन स्वीकृति) के रूप में दर्ज है।     गुना–ब्यावरा मार्ग के किमी 2/2 पर नदी पर बने पुल की विशेष रिपेयरिंग 80.57 लाख रुपए से होगी।     गुना जिला अस्पताल (R.O.B.) के पास बने पुल की रिपेयरिंग 16.44 लाख रुपए से की जाएगी। सीहोर जिला     सलकनपुर–सीहोर मार्ग पर महादेव मंदिर के पास पुल की रिपेयरिंग 67.18 लाख रुपए से होगी।     सलकनपुर–रायसेन मार्ग के किमी 34/6 पर बने पुल की रिपेयरिंग 85.30 लाख रुपए से की जाएगी। रायसेन जिला     रायसेन–सुल्तानपुर मार्ग पर A.B. रोड (किमी 264) के पास स्थित पुल की रिपेयरिंग पर 37.55 लाख रुपए खर्च होंगे। नरसिंहपुर जिला     गाडरवारा शहर के CMO कार्यालय के पास बने पुल की रिपेयरिंग 22.29 लाख रुपये से होगी।     मॉडल स्टेशन गाडरवारा के पास रेलवे अंडरब्रिज (RUB) की विशेष रिपेयरिंग 99.45 लाख रुपए से होगी। मंदसौर जिला     मंदसौर–सीतामऊ मार्ग के किमी 10/0 पर शिवना नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 98.17 लाख रुपए से होगी। रतलाम जिला     आलोट–सैलाना मार्ग के किमी 7/8 पर शेर नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग में 70.85 लाख … Read 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शहबाज के फैसले से अटका आसिम मुनीर का CDF नोटिफिकेशन, पाकिस्तान में सुर्खियों में मामला

नई दिल्ली पाकिस्तान में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) नोटिफिकेशन की देरी ने सियासी हलचल तेज कर दी है. पाकिस्तान में सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PMLN) सूत्रों के मुताबिक यह देरी सिर्फ तकनीकी मामला नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे बड़ी सौदेबाजी चल रही है. दावा है कि नवाज शरीफ अगली बार भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने सेना प्रमुख असिम मुनीर के सामने सीधे डील रखी है. सूत्रों का कहना है कि नवाज शरीफ और मरियम नवाज ने असिम मुनीर के CDF और COAS दोनों पदों पर पांच साल का कार्यकाल मंजूर करने के बदले में अपनी शर्तें रखीं. PMLN की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया कि अगर असिम मुनीर को पांच साल का टेन्योर चाहिए, तो उन्हें नवाज शरीफ की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करनी होगी. इसी वजह से CDF नोटिफिकेशन को रोककर मोलभाव किया जा रहा है. पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यह पूरा सत्ता-संतुलन अगस्त के आखिरी हफ्ते में हुए मरी प्लान का हिस्सा है. इस मीटिंग में नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ, असिम मुनीर, मरियम नवाज, असीम मलिक और मोहसिन नकवी शामिल थे. मीटिंग में दस साल के एक नए संयुक्त सत्ता ढांचे पर सहमति बनी थी. PMLN का कहना है कि उन्होंने अपनी तरफ से वादा पूरा कर दिया, यानी असिम मुनीर के लिए पांच साल का रास्ता खोल दिया. अब बारी सेना प्रमुख की है कि वे मरी प्लान के मुताबिक नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाएं. शरीफ खानदान की क्या है डिमांड? इसी के साथ नवाज शरीफ और मरियम नवाज सेना से भविष्य की सुरक्षित गारंटियां भी मांग रहे हैं. मरियम नवाज के एक करीबी साथी के अनुसार शरीफ परिवार चाहता है कि आने वाले वर्षों के लिए भी उनका राजनीतिक स्पेस सुरक्षित किया जाए. टॉप सूत्रों का दावा है कि नवाज शरीफ ने फौज में कुछ अहम प्रमोशन और पोस्टिंग को भी अपनी कंसल्टेंसी और सहमति के साथ मंजूर किए जाने की मांग रखी है. दावा है कि लेफ्टिनेंट जनरल नौमान जकारिया को वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया जाए और लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक को कमांडर NSC की जिम्मेदारी दी जाए. इसके अलावा कुछ अन्य मेजर और लेफ्टिनेंट स्तर के अधिकारियों को भी अहम पदों पर लगाने की मांग की गई है. CDF नोटिफिकेशन का क्या है विवाद? इस बीच पाकिस्तान की राजनीति में एक और सवाल उठ रहा है. क्या शहबाज शरीफ खुद अटकाव की वजह हैं? CDF का नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है, जबकि असिम मुनीर का कार्यकाल 29 नवंबर को बढ़ना था. शहबाज लंदन यात्रा पर थे और स्वास्थ्य कारणों से उनकी वापसी में देरी हुई, जिससे कई नई चर्चाओं को हवा मिली. कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि शहबाज शरीफ जानबूझकर दूरी बनाए हुए थे, ताकि असिम मुनीर को पांच साल का कार्यकाल और CDF का पद देने में अपनी राजनीतिक जोखिम को कम कर सकें. उनके साइन का इंतजार होने की वजह से पाकिस्तान में एक तरह का संवैधानिक खालीपन भी बन गया है.

गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय

संस्थापक सप्ताह समारोह 'गोरक्षनगरी' में उतरा 'हिंदुस्तान' महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने निकाली शोभायात्रा   गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के छात्रों की शोभायात्रा, संस्कृति और जोश का अद्भुत संगम गोरखपुर  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 में गुरुवार को गोरक्षनगरी में ‘समूचा हिंदुस्तान’ उमड़ पड़ा। एक तरफ उत्साह, उमंग से लबरेज युवाओं ने भारतीय संस्कृति, अनुशासन व विरासत के सम्मान का संदेश दिया तो दूसरी तरफ भारत के शौर्य, पराक्रम के साथ ही सम्मान के प्रतीक महापुरुषों के प्रति श्रद्धा निवेदित की। गोरखपुर की सड़कों पर युवाओं ने अनुशासन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। भारत की सांस्कृतिक धरोहरों, तकनीकी विकास, सुरक्षा व महापुरुषों की विचारधारा संग भारतीय वेशभूषा संग निकली शोभायात्रा ने सभी को अपनी ओर आकर्षित किया।  अतिथियों ने किया पुस्तक का विमोचन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूषड़ द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ की संक्षिप्त रिपोर्ट का विमोचन किया। समारोह स्थल पर पहुंचने के उपरांत एनसीसी के कैडेट्स ने मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मुख्य अतिथि ने पुस्तिका पर अपने विचार भी लिखे। मुख्यमंत्री व मुख्य अतिथि ने ‘विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह स्थल पर 9000 से अधिक विद्यार्थी मौजूद रहे। समारोह के शुभारंभ समारोह में महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना व कुलगीत प्रस्तुत किया। युवाओं के अनुशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा के शुभारंभ की घोषणा की। मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा में शामिल युवाओं से मार्च पास्ट की सलामी ली। शोभायात्रा में सबसे आगे महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज की एनसीसी कैडेट्स रहीं। उनके पीछे महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज रामदत्तपुर की एनसीसी कैडेट्स, दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज चौक बाजार के एनसीसी कैडेट्स, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी सीनियर डिवीजन, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी जूनियर डिवीजन, एनसीसी दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज व ताइक्वांडो टीम शामिल रही। ज्ञान ज्योति, सच्चिदानंद बैंड, हंस वाहिनी भी आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा में शिक्षा परिषद के संस्थाओं के विद्यार्थी शामिल रहे।  महापुरुषों के प्रति सम्मान का भाव  शोभायात्रा में मां सरस्वती, भारत माता, महायोगी गुरु गोरखनाथ, महाराणा प्रताप, महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्र भी रहे। शोत्रायात्रा में एक तरफ 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से भारत के शौर्य की कहानी प्रस्तुत की जा रही थी तो वहीं राम मंदिर के जरिए विरासत का सम्मान भी युवाओं ने प्रस्तुत किया। युवाओं ने शोभायात्रा के माध्यम से विरासत, संस्कृति के प्रति सम्मान के भाव को प्रदर्शित किया। शोभायात्रा कॉलेज परिसर से निकलकर इंदिरा बाल बिहार से सीधे पोस्ट ऑफिस तिराहे से गणेश चौराहा से गोलघर होते हुए कचहरी चौराहा, फिर महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के स्वर्ण जयंती द्वार से शोभायात्रा स्थल पर पहुंची। भारतीय परिधान व विद्यालय के गणवेश में युवा सभी के आकर्षक का केंद्र बने रहे। संस्थापक-सप्ताह समारोह में शुक्रवार को होने वाली प्रतियोगिताएं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह समारोह में शुक्रवार को गोरखवाणी प्रतियोगिता-कनिष्ठ वर्ग दिग्विजयनाथ एल.टी. प्रशिक्षण महाविद्यालय, वरिष्ठ वर्ग महाराणा प्रताप इण्टर कॉलेज (सभागार), योगासन प्रतियोगिता-प्रताप आश्रम गोलघर, चित्रकला प्रतियोगिता-दिग्विजयनाथ पी.जी.कॉलेज (कला संकाय), कबड्डी प्रतियोगिता बालक वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप पालिटेक्निक गोरखनाथ एवं बालिका वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप बालिका इण्टर कॉलेज सिविल लाइन्स में सम्पन्न होगी। यह जानकारी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संचालन समिति के सदस्य डॉ. नितीश शुक्ला ने दी।

‘जिहाद पसंद लोगों’ पर सख्त उत्तराखंड: 550 अवैध मजारें हटाने का वीडियो खुद सीएम ने जारी किया

हल्द्वानी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि में सुनियोजित तरीके से डेमोग्राफी बदलने की कोशिश हो रही है। उन्होंने बताया कि हरी, नीली और पीली चादर ओढ़कर कब्जे की नीयत से बनाई गई करीब 550 अवैध मजारों को सरकार ने हटाया है। धामी ने कहा कि जेहाद पसंद लोग पहाड़ों पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं। जहां भी खाली या सरकारी जमीनें दिखीं, वहां अवैध बसावट करने की साजिश रची गई, लेकिन सरकार इसे किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देगी। सीआरपीएफ समूह काठगोदाम में पूर्व अर्द्धसैनिक सम्मेलन में सीएम ने कहा कि बाहरी राज्यों के कई लोगों को अवैध रूप से उत्तराखंड के स्थायी समेत अन्य प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जिन पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। पूरे प्रदेश में प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए गए हैं। 10 हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई उन्होंने कहा कि अवैध रूप से देवभूमि में बसे घुसपैठियों से दस हजार हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई गई है। हल्द्वानी के वनभूलपुरा प्रकरण पर सीएम ने कहा कि अतिक्रमण मामले में जो भी फैसला आएगा, उसके लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। पूर्व में हल्द्वानी में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दंगाइयों से पाई-पाई की वसूली की गई है। जेहाद प्रेमियों को पनपने नहीं देंगे प्रदेश के सामाजिक एवं सुरक्षा मुद्दों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध बसावट, लैंड जिहाद और अन्य गलत गतिविधियों के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठा रही है। 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि कब्जामुक्त कराई गई है तथा 550 से अधिक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। राज्य में समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-रोधी कानून और भू-कानून लागू कर सामाजिक समरसता एवं आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है। घुसपैठिये होंगे चिह्नित मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए गए हैं। अवैध रूप से देवभूमि में बसे घुसपैठियों से 10 हजार हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी के वनभूलपुरा में अतिक्रमण को लेकर जो भी फैसला आएगा, उसके लिए सरकार की पूरी तैयारी है। सीआरपीएफ ने नक्सलवाद, धामी ने भ्रष्टाचार खत्म किया कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सीआरपीएफ ने देश से जिस तरह नक्सलवाद को खत्म किया, उसी तरह उत्तराखंड में मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने का काम कर रहे हैं। जोशी ने कहा कि सीआरपीएफ समेत अर्धसैनिक बलों के जवानों ने नक्सलवाद को आज लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उन्होंने उत्तराखंड की बात करते हुए कहा कि यहां पर सरकार ने भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसा है। सीएम धामी खुद सैनिक परिवार से हैं और उन्हें सैनिक के जीवन का मोल पता है। उनकी रगों में सैनिक का खून है। वह सैनिक परिवारों के लिए हमेशा ही कल्याणकारी योजनाएं शुरू करते आए हैं। हम सैनिकों के सिपाही जोशी ने कहा कि सीमा पर देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जांबाज शहीदों के परिवार में से किसी एक को सरकारी नौकरी देने का काम धामी सरकार कर रही है। अब तक 28 लोगों को प्रदेश में नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘मैं और मुख्यमंत्री सैनिकों के सिपाही हैं। हम हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं’।

जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो वह अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ  महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने 1932 में गोरखपुर में की थी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापनाः गोरक्षपीठाधीश्वर  गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर स्वदेश, स्वधर्म व राष्ट्रीय स्वाभिमान का जिक्र किया और कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं या कोई राष्ट्रीय चुनौती होती है तो महापुरुषों के चित्र, उनके शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैं। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई समेत सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले भारत मां के बहादुर जवान देश के लिए प्रेरणा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र की पहचान वहां की संस्कृति, परंपराएं और महापुरुष होते हैं, यह एक-दूसरे से जुड़े हैं। राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो राष्ट्र अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता है। संस्कृति उन राष्ट्रीय मूल्यों से बनती है, जिन्हें समय-समय पर अलग-अलग युगांतकारी घटनाओं ने संबल और शक्ति दी। जिन्हें विभिन्न पर्वों के माध्यम से पूरा भारत बिना भेदभाव के आत्मसात करता है। पर्व में मतभेदों को समाप्त करके हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते है।  महंत दिग्विजयनाथ महाराज द्वारा 1932 में गोरखपुर में स्थपित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले स्मृतिशेष प्रो. यूपी सिंह व अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।   यह आत्ममंथन का अवसर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अगले छह वर्ष के अंदर होने वाले शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षा परिषद व संस्थाओं के सामने 100 वर्षों की इस यात्रा के आत्ममंथन का अवसर है। यह समारोह इस पर आत्मावलोकन का अवसर प्रस्तुत कर रहा है कि छात्र के सर्वांगीण विकास, समाज व राष्ट्र के प्रति हमने अपनी भूमिका का निर्वहन किस रूप में किया है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापकों ने जो विराट लक्ष्य रखा है, वह समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी सेवाएं-कर्तव्य के समय-समय पर मूल्यांकन का भी है। हमारे संस्थापकों ने छात्र-छात्राओं के सामने महाराणा प्रताप के रूप में आदर्श रखा।  शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि आदि पर जोर दे रहा परिषद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण, अपनी संकल्पना और भावना को बढ़ाने के लिए संस्थापकों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। परिषद शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराणा प्रताप पॉलीटेक्निक आदि के जरिए तकनीक पर जोर दे रहा है तो वहीं महिलाओं की शिक्षा, अन्नदाता किसानों के प्रशिक्षण के लिए महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र या अन्न संस्थाएं दूरदराज के क्षेत्रों में नए प्रयास को बढ़ाने के साथ ही कार्य कर रही हैं।  संस्थापक समारोह का उद्देश्य- हम कर्तव्य व तैयारियों का कर सकें आत्मावलोकन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्थापक समारोह का उद्देश्य है कि हम संस्थापकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कर्तव्यों व तैयारियों का आत्मावलोकन कर सकें कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें खुद को कैसे तैयार करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भावी भारत के निर्माण में अपने उत्तरदायित्वों को भी बखूबी समझना होगा। संस्थाएं जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रतिवर्ष नयापन करने का प्रयास कर रही हैं।  शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को बनना ही होगा मॉडल स्टडी का माध्यम  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज द्वारा शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ के विमोचन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षित बेरोजगारों की फौज खड़ी होती है तो दूसरी तरफ निरक्षरता की लंबी खाई दिखाई पड़ती है। महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज को इसमें योजक की भूमिका में दिखाई दिया है। यहां के शिक्षा संकाय के छात्रों द्वारा गांव को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को बढ़ाने की दिशा में गोद लिया गया, उन्होंने इसे मॉडल स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को मॉडल स्टडी का माध्यम बनना ही होगा।  समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं संस्थान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसी भी मनुष्य के लिए अयोग्य शब्द नहीं कहा गया है। अयोग्य मतलब उसकी मनुष्यता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अयोग्य है तो इसका मतलब कोई योजक नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोग्यता-निरक्षरता शैक्षिक समाज पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सीएम योगी ने परिषद के सभी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं द्वारा सेवा भाव के कार्यों का जिक्र किया। बताया कि कोई कुष्ठ सेवाश्रम तो कोई संस्थान थारू, वनटांगिया के छात्रों को गोद लेकर पढ़ा रहा है तो कोई संस्थान अन्य जिम्मेदारियों के साथ समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है और यही राष्ट्र के प्रति हमारी सेवा भी है।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश वास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)     महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   गोरखपुर गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।   उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।  अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है। असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

महिला आतंकी नेटवर्क पर पर्दा फाश: जैश की योजना, 5000 महिलाओं की फिदायीन ट्रेनिंग और मकसद का खुलासा

नई दिल्ली  आतंकी मसूद अजहर पाकिस्तान में बैठकर लगातार जिहादी साजिशों में लगा है. वह जिहाद के नाम पर महिला आतंकियों की फौज खड़ी कर रहा है. लगातार महिला आतंकियों की संख्या में इजाफा कर रहा है. इस बीच जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ‘जमात-उल-मुमीनात’ पर अब बड़ा खुलासा है. आतंकी मसूद अजहर ने खुद एक पोस्ट कर अपना नापाक प्लान लीक किया है. जी हां, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जैश-ए-मोहम्मद ने अपना नापाक प्लान बता दिया है. जैश की वुमन विंग यानी जमात-उल-मुमीनात में अब तक पांच हजार जिहादी महिलाओं की भर्ती की गई है. इन महिला आतंकियों का ब्रेन वॉश कर इन्हें फिदायीन ट्रेनिंग दी जा रही है. आतंकी मसूद अजहर ने पोस्ट में लिखा कि जैसे-जैसे जैश की इस महिला विंग में महिला सदस्यों की संख्या बढ़ रही है, अब जरूरत है जिलावार जमात-उल-मुमीनात तंजीम तैयार की जाए. यानी पीओके (POK) के हर जिले में जमात-उल-मुमीनात का ऑफिस होगा, जहां भर्ती से लेकर आतंकी ट्रेनिंग पूरी होगी. आतंकी मसूद ने पोस्ट में ये भी लिखा है कि जमात उल मुमीनात में शामिल कुछ महिलाओं ने चिट्ठी लिखकर बताया कि जमात में शामिल होते ही उन्हें अपनी ज़िंदगी का मकसद मिल गया है. सोशल मीडिया पोस्ट में क्या?     आतंकी मसूद अजहर ने अपनी पोस्ट में अमेरिका की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए लिखा है कि अमेरिका की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी ने पाकिस्तान में जिहादी माहौल पैदा किया. हालांकि यह ऐसा झूठ है जो शायद शैतान को भी न सूझे, लेकिन हमारे कई कॉलमिस्ट, कुछ मंत्री और कुछ बुद्धिजीवी इसे सच मान बैठे हैं. अजीब बात है कि एक यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम ने लाखों मुजाहिद खड़े कर दिए…और एक सुपर पावर को हरा दिया? आतंकी मसूद अजहर का क्या मकसद उसने अपनी पोस्ट में आगे लिखा है, ‘अल्लाह तआला हर मुसलमान को अपनी ज़िंदगी का मकसद समझने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए. आज कुछ बातें संक्षेप में पेश कर रहा हूं… अगर मौका मिला तो आने वाले दिनों में इनकी तफसील भी लिखूंगा, इंशाअल्लाह.’ दरअसल, अपने पोस्ट के जरिए आतंकी मसूद अजहर महिला आतंकियों की फौज का गुनगान कर रहा है. वह क्लास में महिला आतंकियों को सुसाइड बॉम्बर बनने की ट्रेनिंग दे रहा है. क्या है जैश का महिला विंग अब सवाल है कि आखिर जैश की यह महिला विंग क्या है. दरअसल, आतंकी संगठन जैश की महिला विंग का नाम है जमात-उल-मोमीनात. इस विंग में आंतकवादी पतियों की विधवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर महिला को बहला-फुसला कर शामिल किया जा रहा है. उन्हें जिहाद के लिए बरगलाया जा रहा है. उन्हें बहला-फुसला कर जिंदगी का वह मकसद बताया जा रहा है, जो कहीं से उनकी जिंदगी के लिए सही नहीं है. बीते कुछ दिनों से पाकिस्तान बेस्ड इस आतंकी संगठन में महिलाओं को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ट्रेन किया जा रहा था. उन्हें डिजिटल क्लासेस में हिंदू महिलाओं के खिलाफ हेट स्पीच दी जा रही थी और यही नहीं पुरुष आंतकवादियों की तरह महिलाओं को भी फिदायीन बनने के लिए फिजिकल ट्रेनिंग भी दी जा रही थी. किसके हाथ में कमान खबरों की मानें तो आतंकी मसूद अजहर ने अपनी बहन सादिया अजहर को जैश की महिला विंग का प्रमुख बनाया है. दूसरी बहन समायरा अजहर (उर्फ उम्मे मसूद) और पुलवामा हमलावर उमर फारूक की पत्नी अफीरा फारूक ऑनलाइन भर्ती और प्रचार का काम संभाल रही हैं. यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जा रहा है. उसके इस वीडियो के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. महिलाओं को शामिल कर जैश खुफिया जानकारी जुटाने, फंडिंग और हमलों में नई रणनीति अपना रहा है.