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बर्फीली हवाओं से बढ़ेगी ठिठुरन, मध्यप्रदेश में ठंड का प्रकोप जारी, पारा 2-3 डिग्री तक गिरेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब तेज ठिठुरन का दौर शुरू होने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी और उसके बाद बर्फ के पिघलने से उठने वाली ठंडी हवाएं प्रदेश की ओर बढ़ रही हैं। इससे आने वाले 48 घंटों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित कई शहरों के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, एक पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के तुरंत बाद 5 दिसंबर से नया सिस्टम हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित करेगा, जिसका प्रभाव दो दिन बाद MP में साफ दिखाई देगा। पहले से जमा बर्फ के पिघलने पर वहीं से उठने वाली बर्फीली हवा सीधे मध्यप्रदेश पहुंचेगी, जिससे इंदौर, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में सबसे ज्यादा सर्दी महसूस की जाएगी।  मध्य प्रदेश में अब कड़ाके की सर्दी का दौर शुरू होगा। बर्फीली हवाओं से और भी ठिठुरन बढ़ेगी। दिसंबर महीने में 20-22 दिन शीतलहर चलने का अनुमान है। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में तापमान 2 से 3 डिग्री और गिरेगा। इससे पहले बुधवार रात में भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 10 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम दर्ज किया। पचमढ़ी फिर सबसे ठंडा,पारा 6.7 डिग्री मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के कई हिस्सों में पारा 10 डिग्री से नीचे फिसल गया।भोपाल: 9.2°,इंदौर: 8.4°,जबलपुर: 10.6°,उज्जैन: 12°,ग्वालियर: 14.6°पचमढ़ी इस बार भी सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री दर्ज किया गया। कल्याणपुर (शहडोल) में 7.1°, उमरिया में 8.2°, अमरकंटक और शाजापुर में 8.7°, जबकि रीवा-नौगांव में 9° दर्ज हुआ। दिन में भी कई शहरों में अधिकतम तापमान 25 डिग्री से नीचे रहा। नवंबर ने तोड़े रिकार्ड,भोपाल में 15 दिन चली शीतलहर इस साल नवंबर में सांईठुरन ने पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। भोपाल में लगातार 15 दिन शीतलहर चली 1931 के बाद यह सबसे लंबा दौर रहा। 17 नवंबर की रात पारा 5.2 डिग्री तक गिर गया, जो अब तक का सर्वकालिक नवंबर रिकॉर्ड है। इंदौर में भी तापमान 6.4° तक फिसल गया 25 वर्षों में सबसे कम। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि उत्तर भारत में इस बार नवंबर की शुरुआत में ही बर्फबारी शुरू हो गई थी, जिससे ठंडी हवाएं जल्दी मध्यप्रदेश पहुंच गईं। हालांकि, नवंबर के अंतिम सप्ताह में हवा की दिशा बदलने से ठंड थोड़ी कम हुई। पचमढ़ी सबसे ठंडा, पारा 6.7 डिग्री इससे पहले मंगलवार-बुधवार की रात में भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 10 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम रहा। भोपाल में 9.2 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री, जबलपुर में 10.6 डिग्री, उज्जैन में 12 डिग्री और ग्वालियर में 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन बताती हैं, इस बार उत्तरी राज्यों में नवंबर के पहले ही सप्ताह में बर्फबारी होने लगी। इस वजह से ठंडी हवाएं प्रदेश में पहुंची। आखिरी सप्ताह में हवा की दिशा बदल गई। जिससे ठंड का असर कम रहा है। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडोरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी। 20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की माने तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का     मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार, वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से ही मध्य भारत को जकड़ लिया। पहाड़ों पर जल्दी बर्फबारी, ठिठुरन बढ़ाई     इस बार उत्तर भारत में हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में बर्फबारी सामान्य से काफी पहले शुरू हो गई। ऊंचे पर्वतीय इलाकों की जल्दी बर्फबारी मध्य भारत की ठिठुरन को 20 से 30% तक बढ़ा देती है। ठंडी हवाएं 25% ज्यादा अंदर तक घुसी     ठंड का असर सिर्फ सतह तक नहीं रहा। इस साल ग्वालियर-चंबल, भोपाल-विदिशा, रतलाम-मंदसौर, सागर-दमोह इन चार बड़े मौसम जोन में ठंडी हवाएं 20 से 25% ज्यादा गहराई तक घुस आईं। पश्चिमी विक्षोभ का लगातार … Read more

पुतिन दिल्ली में करेंगे बड़ी डील, पश्चिम से टकराव पर चर्चा, पांच लेयर सुरक्षा के बीच भारत पहुंचे राष्ट्रपति

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा आज से शुरू हो रही है और दिल्ली इस हाई-प्रोफाइल विजिट के लिए पूरी तरह तैयार है. यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है, इसलिए कूटनीतिक, सुरक्षा और लॉजिस्टिक स्तर पर बेहद सख्त व्यवस्थाएं की गई हैं. शहर के कई हिस्सों में उनके स्वागत के लिए फ्लेक्स बोर्ड और रूसी झंडे लगा दिए गए हैं, जबकि ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा कवच पहले से लागू कर दिए गए हैं. पुतिन की यात्रा के कारण ट्रैफिक डायवर्जन पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल जाएंगे. इस दौरान एनएच–S, धौला कुआं और दिल्ली कैंट के आसपास ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है. शाम को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें प्राइवेट डिनर पर होस्ट करेंगे, जिसके कारण सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग और शांति पथ के आसपास भी वाहनों की आवाजाही धीमी रहेगी. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन दावा किया है कि ट्रैफिक को लंबी अवधि तक ब्लॉक नहीं रखा जाएगा. शुक्रवार को हालात और चुनौतीपूर्ण होंगे क्योंकि पुतिन का पूरा दिन लगातार कार्यक्रमों से भरा है. सुबह वह राजघाट जाएंगे, इसके बाद हैदराबाद हाउस में औपचारिक बैठकें होंगी. दोपहर में भारत मंडपम् में कार्यक्रम तय है, जबकि शाम को राष्ट्रपति भवन में स्टेट बैंक्वेट का आयोजन होगा. इन गतिविधियों के चलते राजघाट, आईटीओ, रिंग रोड, तिलक मार्ग, इंडिया गेट, भैरो रोड, मथुरा रोड, मंडी हाउस और दिल्ली गेट जैसे इलाकों में ट्रैफिक रुक-रुक कर चलता रह सकता है. जरूरत पड़ने पर कुछ मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है. पुतिन की सिक्योरिटी कैसी होगी? इधर सुरक्षा इंतजाम भी अपनी चरमसीमा पर हैं. पुतिन की हर विदेश यात्रा की तरह इस दौरे में भी उनकी सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर कवच तैयार किया गया है. पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में NSG कमांडो, स्नाइपर्स, जैमर, ड्रोन सर्विलांस और AI आधारित निगरानी तकनीक तैनात की गई है. महत्वपूर्ण जगहों पर हाई-टेक फेशियल रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं. 40 से ज्यादा रूसी सुरक्षा अधिकारी दिल्ली पहुंचकर NSG और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काफिले की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान एसपीजी का विशेष सुरक्षा घेरा भी सक्रिय रहेगा. इस यात्रा को भारत-रूस संबंधों के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है. शुक्रवार को होने वाली 23वीं वार्षिक शिखर बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी है. राजधानी में तैयारियों की रफ्तार और सुरक्षा का स्तर बताता है कि यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है. रूस को 10 लाख मजदूरों की जरूरत, पुतिन दिल्‍ली में करेंगे बड़ी डील इस दौरे पर पुतिन भारत के साथ मजदूरों को लेकर इजरायल की तरह से ही बड़ी डील कर सकते हैं। दोनों देश सामाजिक और मजदूरों से जुड़े मुद्दे पर सहयोग करेंगे। रूस की योजना है कि 10 लाख विदेशी मजदूरों की भर्ती की जाए। इसमें भारत भी शामिल है। रूस लेबर म‍िनिस्‍ट्री का मानना है कि साल 2030 तक देश में मजदूरों की यह कमी 31 लाख तक पहुंच सकती है। विश्‍लेषकों का कहना है कि रूसी के हजारों युवा यूक्रेन युद्ध में मारे जा चुके हैं और देश के फिर से निर्माण के लिए अब लाखों लोगों की जरूरत है। वह भी तब जब रूस में आबादी कम हो रही है और लोग बच्‍चे कम पैदा कर रहे हैं। रूसी राष्‍ट्रपति ने देश में बच्‍चे पैदा करने पर भारी आर्थिक सहायता मुहैया कराने का ऐलान किया है। रूस में अब तक मध्‍य एशिया के देशों से लाखों रूसी बोलने वाले लोग काम करने जाते रहे हैं लेकिन इससे मास्‍को को सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होता रहा है। यही वजह है कि रूस अब 7 लाख से ज्‍यादा मध्‍य एशिया के विदेशी मजदूरों से मुक्ति पाना चाहता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत तब तेज हुई जब मास्‍को में मार्च 2024 में आतंकी हमला हुआ। पश्चिम से टकराव गहरा होगा? PM Modi से इन मुद्दों पर होगी चर्चा अमेरिका का दबाव और रूस के साथ मजबूरी यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत पर अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल आयात घटाए और अमेरिकी उत्पादों व रक्षा उपकरणों के लिए अपने बाजार खोले. वहीं दूसरी तरफ रूस भारत के लिए सस्ता तेल, हथियारों की सप्लाई और रणनीतिक सुरक्षा का बड़ा स्रोत बना हुआ है. GTRI के मुताबिक, “पुतिन की यह यात्रा शीत युद्ध की याद में की जा रही कोई औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि यह जोखिम, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा को लेकर सीधी बातचीत है. यह किसी एक पक्ष को चुनने की नहीं, बल्कि टूटती वैश्विक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की रणनीति है.” भारत-रूस रिश्तों की ऐतिहासिक मजबूती भारत और रूस की दोस्ती की जड़ें शीत युद्ध के दौर तक फैली हैं. 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया और USS एंटरप्राइज भेजा. तब सोवियत संघ ने भारत को हथियार, कूटनीतिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र में समर्थन दिया. 1962 के चीन युद्ध के बाद भी रूस भारत के साथ खड़ा रहा. 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तब भी रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बना रहा. आज भी भारत के 60 से 70% सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी तकनीक पर आधारित हैं। तीन स्तंभों पर टिका भारत-रूस रिश्ता GTRI के अनुसार, आज भारत-रूस संबंध तीन मुख्य स्तंभों पर टिके हैं— 1- ऊर्जा (Energy)     रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है.     2024 में रूस से भारत की कुल तेल खरीद का हिस्सा 37% से ज्यादा रहा.     2021 में जहां भारत ने रूस से सिर्फ 2.3 अरब डॉलर का तेल खरीदा था.     वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 52.7 अरब डॉलर पहुंच गया.     यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल सस्ते दामों पर एशियाई बाजारों की ओर मुड़ गया, जिससे भारत को भारी फायदा हुआ.  2- रक्षा (Defence) … Read more

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी को मिला विकास का बड़ा तोहफ़ा, सीएम बोले—आदिवासी हित सर्वोपरि

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार एवं छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों के हितों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री आज मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के अंबागढ़ चौकी में आयोजित जनजाति गौरव दिवस एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर 475 करोड़ रुपए से अधिक विकास कार्यों का भूमि पूजन एवं लोकार्पण किया। उन्होंने अंबागढ़ चौकी को राजस्व अनुभाग बनाने तथा अंबागढ़ चौकी में सर्व सुविधायुक्त ऑडिटोरियम निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की लाभार्थी महिलाओं के खाते में 22वीं किस्त की राशि का अंतरण भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण और जनजाति समाज के कल्याण में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री जनमन एवं ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 13 दिसंबर को छत्तीसगढ़ सरकार के दो वर्षों का कार्यकाल पूर्ण होने जा रहा है। हमारी सरकार ने दो वर्षों के कार्यकाल में मोदी की गारंटी के तहत किए गए सभी वायदों को पूरा किया है। महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह माता-बहनों के खातों में हर माह 1000 रुपए की राशि अंतरित की जा रही है। किसानों से 3100 रुपए की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण दर प्रति मानक बोरा 5500 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरण पादुका का वितरण फिर से शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा देश एवं राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा माओवाद को मार्च 2026 तक समाप्त करने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर माओवाद आतंक से मुक्त करने की दिशा में अत्यंत ठोस एवं सार्थक कार्य किया जा रहा हैं। जल्द ही छत्तीसगढ़ राज्य माओवाद के आतंक से मुक्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को आदिवासी समाज सहित संपूर्ण भारतवर्ष का गौरव बताते हुए, स्वाधीनता आंदोलन एवं राष्ट्र के नव निर्माण में जनजाति समाज के महापुरुषों एवं राष्ट्र भक्तों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा में आयोजित भगवान बिरसा मुंडा के जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन हम सभी के लिए सौभाग्य एवं गर्व का विषय है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के परिणाम स्वरूप छत्तीसगढ़ राज्य में भी व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में जनजाति समाज के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ में विकास नई इबारत लिखी जा रही है। जिसके फलस्वरूप आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इस मौके पर उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी कार्यों और नीतियों की विस्तार से जानकारी दी। समारोह को उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, सांसद संतोष पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह और जनजाति समाज के प्रदेश अध्यक्ष एमडी ठाकुर ने भी सम्बोधित किया। समारोह में विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनजातीय समाज के प्रतिभाओं को सम्मानित करने के अलावा प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को आवास पूर्णता प्रमाण पत्र एवं विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता अर्जित करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विधायक भोलाराम साहू, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा सहित कई पूर्व विधायक, पंचायत एवं नगरीय संस्थाओं के जनप्रतिनिधि, सामाजिक बंधु और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ेगी, CM मोहन यादव तीन चीते करेंगे रिलीज

 श्योपुर  इंटरनेशनल चीता-डे के अवसर पर आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो नेशनल पार्क में तीन चीतों को खुले जंगल में छोड़ेंगे। कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने किया। कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी सुधीर अग्रवाल ने कूनो पार्क के अहेरा गेट, हेलीपैड और चीता रिलीज प्वाइंट पर व्यवस्थाओं को परखा। अधिकारियों ने शिवपुरी जिले के अहेरा गांव के पास बने अस्थायी हेलीपैड का भी निरीक्षण किया। शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र चौधरी और एसपी अमन सिंह राठौर भी इस दौरान मौजूद रहे। टीम ने आगमन मार्ग से लेकर रिलीज स्थल तक सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और वन विभाग की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। जानकारी के अनुसार सीएम मोहन यादव आज गुरुवार दोपहर को लगभग 2:30 बजे श्योपुर पहुंचेंगे। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। श्योपुर के कलेक्टर, एसपी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चीता रिलीज प्वाइंट पर सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया। डीएफओ आर. थिरुकुराल, एएसपी प्रवीण भूरिया और अन्य अधिकारियों ने भी निरीक्षण में भाग लिया। वन विभाग ने बताया कि उन्नत ट्रैकिंग सिस्टम, निगरानी टीम और सुरक्षा उपकरणों की तैनाती कर दी गई है, ताकि चीतों की मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा सके। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 29 चीते हैं, जिनमें से 16 पहले से खुले जंगल में घूम रहे हैं। एनक्लोजर में रखे चीतों में से तीन मादा चीता वीरा और उसके दो 10 महीने के शावकों को खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। रिलीज का उद्देश्य चीतों को प्राकृतिक वातावरण में ढालना, उन्हें जंगली व्यवहार के अनुकूल बनाना और प्राकृतिक शिकार पर निर्भरता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री यादव इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क का 2026 कैलेंडर जारी करेंगे। इसके साथ ही “फ्री-रेंजिंग चीतों के क्लिनिकल मैनेजमेंट के लिए फील्ड मैनुअल” भी लॉन्च किया जाएगा।पार्क में बनी नई सुविनियर शॉप का उद्घाटन भी इसी मौके पर किया जाएगा, जिससे पर्यटकों के अनुभव को और समृद्ध करने के साथ ही संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। 

माओवादी मुठभेड़ में बड़ा धक्का: बीजापुर के जंगल में 18 शव मिले, अभी पहचान शेष

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के जंगल में मारे गए नक्सलियों की संख्या 18 हो गई है. इन सभी के शवों को सुरक्षा बलों ने बरामद कर लिया है. आसपास के इलाके की सर्चिंग अभी जारी है. इन सभी नक्सलियों के शवों की पहचान भी पुलिस कर रही है. पहचान होने के बाद एसपी नामों का खुलासा करेंगे. इधर इस मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों के पार्थिव शरीर को भी बीजापुर लाया गया. जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है.  दरअसल बुधवार को बीजापुर जिले के केशकुतुल के जंगल में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. इसमें पहले तो मारे गए नक्सलियों की संख्या 12 बताई जा रही थी. लेकिन जब इलाके में सुरक्षा बलों ने सर्चिंग की तो 18 नक्सलियों के शव यहां से  बरामद हुए. इतनी बड़ी संख्या में एक साथ नक्सलियों का एनकाउंटर पुलिस की फिर से बड़ी उपलब्धि है. इन सभी शवों की पहचान की जा रही है.  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर मुठभेड़ में शहीद होने वाले तीन जवानों को श्रद्धांजलि दी है। गुरुवार को राजधानी रायपुर से बिलासपुर के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से बात की। इस दौरान सीएम साय ने नक्सल मुठभेड़ में मिली सफलता और जवानों की शहादत पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं। हमारे जवान मजबूती के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं।  सीएम साय ने कहा, "कल ऑपरेशन में डीआरजी के तीन जवान शहीद हुए। हम उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनके साहस को नमन करते हैं। भगवान उनके परिवार को इस शोक को सहने की  शक्ति प्रदान करें। ऐसी प्रार्थना करते हैं और बड़ी सफलता मिली है।" रात भर चली मुठभेड़, 6 और माओवादी मारे गए रात भर चली मुठभेड़ के बाद छह और माओवादी मारे गए हैं। मारे गए 18 माओवादियों के शव के पास से मिले एके–47, एसएलआर, इंसास, एलएमजी और .303 राइफल सहित भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद मिले हैं। इन हथियारों को लेकर जवान मुख्यालय की ओर लौट रहे हैं। मारे गए माओवादियों के शवों की औपचारिक पहचान की प्रक्रिया जारी है। डीआरजी के तीन जवान बलिदान बता दें कि इस भीषण मुठभेड़ में डीआरजी के तीन जवान प्रधान आरक्षक मोनू बड़डी, आरक्षक दुकारू गोंडे और जवान रमेश सोड़ी बलिदान हुए हैं। दो घायल जवानों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। इधर, बीजापुर पुलिस लाइन में माहौल भावुक है। बलिदान जवानों को अंतिम सलामी देने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लाइन में पहुंच चुके हैं। सर्च ऑपरेशन अभी भी क्षेत्र में जारी है और अतिरिक्त बल तैनात कर पूरे इलाके सुरक्षित कर लिया गया है। इस इलाके को कहा जाता रहा है माओवादियों की राजधानी उत्तर बस्तर माड़ का इलाका माओवादियों का सबसे सुरक्षित किला रहा है। इसे उनकी राजधानी भी कहा जाता रहा है। इसके बाद पश्चिम बस्तर में इंद्रावती रिजर्व टाइगर एरिया तथा सीमावर्ती घने जंगल भी लंबे समय तक उनके लिए सुरक्षित ठिकाने रहे हैं। अब केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक माओवादियों के समूल खात्मे के संकल्प के बीच सुरक्षा बलों के निर्णायक आक्रामक अभियान ने माओवादियों का आखरी किला भी ढहा दिया है। बस्तर में वर्ष 2025 में 255 माओवादी मारे गए बीजापुर से सुकमा-आंध्र व दंतेवाड़ा के सरहदी जंगलों में तगड़ी घेरेबंदी के चलते भूमिगत माओवादी जवानों का निशाना बन रहे हैं। बुधवार को दंतेवाड़ा सीमा पर केशकुतूल में हुई मुठभेड़ में बड़े काडर के माओवादी ढेर हुए हैं। माओवाद विरोधी अभियान के दौरान संगठन के शीर्ष नेताओं समेत दुर्दात कमांडर हिडमा के मारे जाने के बाद माओवादी संगठन रेत की तरह बिखरने लगा है। बस्तर में वर्ष 2025 में 255 माओवादी मारे गए, इनमें 236 माओवादियों के शव मिले। 2024 में 239 माओवादी मारे गए थे 2024 में 239 माओवादी मारे गए थे, जिनमें 217 के शव मिले थे। दो वर्ष में 494 माओवादी मारे गए। जिनमें 453 के शव मिले। अन्य माओवादियों के मारे जाने की पुष्टि माओवादियों ने अपने पत्र में की है। बड़ी संख्या में पीएलजीए समेत आनुसांगिक संगठनों से जुड़े माओवादी हथियार समेत पुनर्वास कर रहे हैं। वहीं शेष बचे जान बचाने माओवादी माड़ के गलियारे से आंध्र की ओर भागने की फिराक में हैं, लेकिन सुरक्षा बलों के तगड़ी घेराबंदी के चलते वे बस्तर से नहीं निकल पा रहे हैं। वर्ष 2025 में मिली बड़ी सफलताएं     31 माआवादी मारे गए कर्रेगुट्टा अभियान में।     31 माओवादी मारे गए 09 फरवरी को बीजापुर में     26 माओवादी मारे गए 20 मार्च को बीजापुर में।     17 माओवादी मारे गए 29 मार्च को सुकमा में।     18 माआवादी मारे गए 16 जनवरी को बीजापुर में। शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि  बीजापुर में माओवादी विरोधी अभियान के दौरान नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में DRG के तीन जवान प्रधान आरक्षक मोनू मोहन बड़डी, शहीद आरक्षक दुकारू गोंडे और  जवान रमेश सोड़ी   बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त हुए हैं. इन जवानों को अंतिम सलामी बीजापुर–गंगालूर मार्ग पर स्थित  पुलिस लाइन शहीद वाटिका परिसर में श्रद्धांजलि दी गई.  मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का वादा किया है। इसी वजह से सुरक्षाबल लगातार नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन कर रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकारों ने नक्सलियों के पुनर्वास के लिए कई योजनाएं भी बनाई हैं, जिसके कारण बड़े पैमाने पर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में साल 2025 में हुए मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या करीब 275 पहुंच गई है। बीजापुर समेत सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में 246 नक्सली मारे गए हैं। 27 नक्सली रायपुर क्षेत्र के गरियाबंद में और दुर्ग क्षेत्र के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 2 नक्सली मारे गए हैं।

झीलों की नगरी भोपाल में शिकारा का आनंद, बड़े तालाब में मिलेगा कश्मीर वाला नज़ारा

भोपाल  बड़े तालाब में अब डल झील वाला आनंद मिलेगा। झीलों की नगरी भोपाल में अब आप शिकारा का लुत्फ उठा सकते हैं। इसकी शुरुआत आज से हो गई है। अभी बड़े तालाब में 20 शिकारा को उतारा गया है। इसे दुल्हन की तरह सजाया भी गया है। उद्घाटन के बाद सीएम मोहन यादव ने भी इसका आनंद उठाया है। शिकार में मौजूद रहेंगी सारी सुविधाएं कश्मीर की तरह बड़े तालाब में चलने वालीं शिकारा नाव में भी सारी सुविधाएं मौजूद होंगी। पर्यटकों को शिकारा में खाने पीने की चीजें भी मिलेंगी। सीएम ने मोहन यादव ने शिकारा-बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे और फलों का नाश्ता लेकर जायके का आनंद उठाया। साथ ही भ्रमण के दौरान उन्होंने बोट मार्केट से कपड़ों की खरीदी भी की है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि इससे वाटर-टूरिज्म और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, इसके जल संपर्क से किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं होगा। अत्याधुनिक तकनीक से बनी इन नौकाओं से जल-पर्यटन के लिए अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आकर्षक बनाया गया है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि भोपाल वाटर-टूरिज्म हब के रूप में विकसित होगा। शिकारा राइड के दौरान पर्यटकों के लिए बर्ड वॉचिंग की विशेष व्यवस्था भी की गई है। इसके लिए नावों में दूरबीन उपलब्ध रहेगी। साथ ही यात्रियों के लिए अन्य शिकारों से हस्तशिल्प उत्पाद, ऑर्गेनिक सब्जियां-फ्रूट्स तथा स्थानीय व्यंजन खरीदने और उनका स्वाद लेने की सुविधा भी रहेगी। इससे स्थानीय कलाकारों व उत्पादकों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इस शुभारंभ कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। पर्यटन को मिलेगा नया आयाम सीएम मोहन यादव ने कहा कि भोपाल के सबसे सुंदर बड़े तालाब पर शिकारा नावों का शुभारंभ हुआ ,है जिससे यहां के पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। डल झील की तर्ज पर शिकारे जब यहां चलेंगे, तो पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश का केंद्र बिंदु होने की वजह से पर्यटकों का मध्यप्रदेश के प्रति आकर्षण रहता है। प्रदेश में वन्यजीवों की बड़ी संख्या है। पिछले साल देश में सबसे ज्यादा पर्यटन मध्यप्रदेश में हुआ। हमारा पर्यटन सभी क्षेत्रों में बढ़ रहा है। उज्जैन में पिछले साल 7 करोड़ से अधिक पर्यटक आए। उन्होंने कहा कि वन्य संपदा-धार्मिक व्यवस्था-देवस्थान के साथ-साथ अब वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी के माध्यम से वॉटर टूरिज्म भी बढ़ेगा। खाने-पीने से लेकर फैशन तक का सामान मिलेगा वहीं, शिकारा बोट पर आपको खाने-पीने से लेकर फैशन तक का सामान मिलेगा। यह भोपाल में पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव होगा। प्रदूषण की वजह से झील में चलने वाले क्रूज को पहले रोक दिया गया था। अब शिकारा की शुरुआत हो गई है। 4 लोगों किराया लगेगा 400 रुपए हर शिकारे में चार लोग बैठ सकेंगे और आधे घंटे की सैर के लिए 400 रुपए शुल्क देना होगा। हर एक शिकारा करीब 2.40 लाख रुपए में तैयार हुआ है। शिकारे सुबह 9 बजे से सूर्यास्त तक अवेलेबल रहेंगे। सैर के दौरान नाविक पर्यटकों को बड़े तालाब और भोपाल की विरासत से जुड़ी जानकारी भी देंगे। प्रदूषण रहित तकनीक से निर्माण इन सभी 20 शिकारों का निर्माण आधुनिक और प्रदूषण रहित तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण 'फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन' (FRP) और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से किया गया है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करती। इससे तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा तैयार किए गए हैं, जिन्होंने केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों के लिए शिकारे बनाए थे। कांग्रेस की तरफ से सिर्फ सिंघार आए सरकार की ओर से बीजेपी और कांग्रेस के सभी विधायकों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। लेकिन नेता प्रतिपक्ष सिंघार के अलावा कोई अन्य कांग्रेसी विधायक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। सिंघार ने कहा कि अच्छा काम होता है तो सरकार की सराहना करेंगे। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इन शिकारों को कश्मीर की डल झील की तर्ज पर तैयार किया गया है। इससे वॉटर टूरिज्म और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। इन शिकारों का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन निगम करेगा। शिकारे से हैंडीक्राफ्ट, फल-सब्जियां खरीद सकेंगे पर्यटक इन शिकारों का आनंद लेने के साथ-साथ बर्ड वॉचिंग भी कर सकेंगे। शिकारे में हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, स्थानीय व्यंजन, ऑर्गेनिक सब्जियां और फल खरीदने की भी व्यवस्था की गई है। राइड के दौरान पर्यटक दूरबीन से तालाब और उसके आसपास के पक्षियों को देख सकेंगे और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी ले सकेंगे। मध्यप्रदेश पर्यटन निगम का उद्देश्य भोपाल में डल झील जैसी फिलिंग देता है, जिससे राजधानी भोपाल एक वाटर-टूरिज्म हब के रूप में विकसित होगी। बता दें कि इससे पहले नगर निगम ने 13 जून 2024 को प्रायोगिक रूप से एक शिकारा चलाया था। अब एकसाथ 20 शिकारे बड़े तालाब में उतारे गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने करीब 10 महीने पहले, 12 सितंबर को क्रूज और मोटर बोट पर रोक लगा दी थी, इसलिए अब केवल सामान्य शिकारे ही चलाए जा रहे हैं। क्या होता है शिकारा? शिकारा एक प्रकार की लकड़ी की नाव है, जो डल झील समेत अन्य झीलों में पाई जाती है। शिकारे अलग-अलग आकार के होते हैं और लोगों के परिवहन सहित कई उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। एक सामान्य शिकारा आधा दर्जन लोगों को बैठाता है। जिसमें चालक पीछे की तरफ से ये शिकारा चलाता है। डल झील में पर्यटकों की पहली पसंद होता है। इन्हें आकर्षक तरीके से सजाया जाता है। देशभर से आते हैं पर्यटक श्रीनगर की डल झील में ऐसे ही शिकारे चलते हैं। चूंकि, भोपाल में मध्यप्रदेश-देश के कई हिस्सों से पर्यटक आते हैं। वहीं, स्थानीय स्तर पर भी हजारों लोग बोट क्लब में घूमने जाते हैं, इसलिए शिकारा चलाने की पहल की गई है। NGT ने यह दिए थे आदेश दो साल पहले भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब), नर्मदा समेत प्रदेश के किसी भी वाटर बॉडीज में क्रूज और मोटर बोट के संचालन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी थी। एनजीटी ने इसे अवैध गतिविधि ठहराते हुए बड़ा तालाब … Read more

फ्लाइट कैंसिलेशन पर यात्रियों में नाराज़गी, पायलटों की शिकायतें सामने आने पर DGCA सक्रिय

 नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द होने और देरी के बाद नागर विमानन महानिदेशालय DGCA ने सख्त रुख अपनाया है. नागर विमानन मंत्रालय MoCA के तहत आने वाले DGCA ने इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर बैठक बुलाई है. यह कदम उस वक्त उठाया गया है, जब देशभर के हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द होने से अफरातफरी का माहौल बना हुआ है. इस बीच पायलट एसोसिएशन ALPA इंडिया ने भी DGCA से अपील की है कि स्लॉट देने और उड़ान शेड्यूल मंजूर करते समय एयरलाइन के पास उपलब्ध पायलटों की संख्या और उनकी पर्याप्तता को भी गंभीरता से देखा जाए, खासकर हाल ही में लागू हुए फैटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (FRMS) को ध्यान में रखते हुए. 100 से ज्यादा उड़ानें रद्द बुधवार को इंडिगो की 100 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो गईं, जबकि कई सेवाएं घंटों देरी से चलीं. सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु एयरपोर्ट से 42, दिल्ली से 38, मुंबई से 33 और हैदराबाद से 19 उड़ानें रद्द हुईं. एयरलाइन रोजाना करीब 2,300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करती है. DGCA ने एयरलाइन से मांगी रिपोर्ट DGCA ने कहा है कि वह इंडिगो की उड़ान बाधाओं की जांच कर रहा है और एयरलाइन से मौजूदा हालात के कारणों के साथ उड़ान रद्द होने और देरी को कम करने की विस्तृत योजना मांगी गई है. इंडिगो ने बयान जारी कर कहा कि पिछले दो दिनों से 'कई तरह की अचानक आई परिचालन दिक्कतों' के कारण नेटवर्क पर गंभीर असर पड़ा है. इसमें तकनीकी खामियां, सर्दियों के शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम, एयर ट्रैफिक में बढ़ी भीड़ और नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) व्यवस्था को जिम्मेदार बताया गया है. पायलट एसोसिएशन की अपील वहीं पायलट संघ ALPA India ने DGCA से अपील की है कि स्लॉट देने और उड़ान शेड्यूल मंजूर करते समय एयरलाइंस के पास उपलब्ध पायलटों की वास्तविक संख्या को गंभीरता से देखा जाए. ALPA ने कहा कि नई FDTL व्यवस्था को जनवरी 2024 में जारी किया गया था और इसके बावजूद कई एयरलाइंस ने समय रहते तैयारी नहीं की. कुछ विमानन विशेषज्ञों का यह भी आरोप है कि लगातार रद्द हो रहीं उड़ानों और देरी को नियमों में ढील दिलाने के दबाव हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

सीजी पीएससी 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की मुलाकात

रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने की सौजन्य भेंट मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं, लोकहित में कार्य करने की दी सीख रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री  साय ने सभी चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को सफलता के लिए शुभकामनाएं और बधाई दी। इस अवसर पर विधायक  ललित चंद्राकर और राजभाषा अधिकारी  छगन लाल नागवंशी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से उनकी तैयारी के अनुभव, परीक्षा के दौरान आने वाली चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के कारण विद्यार्थियों ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 में प्रदेश के युवाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन हम सबके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आपको हमेशा यह भी याद रखना होगा कि आगे आपकी भूमिका लोकसेवक की होगी। आपको अपने दायित्वों के निर्वहन में धैर्य, विनम्रता और लोक सेवक की सीमाओं का हमेशा ध्यान रखना होगा। आम जनमानस में प्रशासन का विश्वास कायम रखने की दिशा में आप सभी को संवेदनशीलता से प्रयास करना है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि  हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया है और वह परीक्षा परिणामों में  साफ नजर आ रहा है।  टॉपर विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए जिम्मेदारी का नया अध्याय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ जनता की सेवा करेंगे और प्रदेश के विकास में योगदान देंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 चयनित अभ्यर्थी  देवेश प्रसाद साहू,  स्वप्निल वर्मा,  यशवंत कुमार देवांगन,  पोलेश्वर साहू,  पारस शर्मा, सु शताक्षी पाण्डेय,  अंकुश बैनर्जी, सु सृष्टि गुप्ता,  प्रशांत वर्मा और  सागर वर्मा सपरिवार उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश की अनूठी धरोहर को जीआई टैग की मान्यता

मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार मध्यप्रदेश की सम्पदा खजुराहो स्टोन क्रॉफ्ट, छतरपुर फर्नीचर, बैतूल भरेवा मेटल क्रॉफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे क्रॉफ्ट को मिला जी आई टैग मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्री  काश्यप ने माना आभार और अधिकारियों को दी बधाई  पद्म रजनीकांत ने बताया ऐतिहासिक पल भोपाल  भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की 5 बहुत ही प्राचीन शिल्प कला को जीआई टैग के द्वारा भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। एमएसएमई मंत्री  चैतन्य कुमार काश्यप ने मध्यप्रदेश की विरासत को मिली इस ऐतिहासिक पहचान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। इस उपलब्धि को जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रख्यात पद्म डॉ. रजनी कांत ने  अत्यंत गर्व का पल बताया है। जीआई रजिस्ट्री चेन्नई के वेबसाइट पर इन उत्पादों के सामने रजिस्टर्ड का स्टेटस आते ही संबंधित शिल्पियों में खुशी की लहर दौड़ गई और मध्यप्रदेश के लिए यह पहल करने वाले सूक्ष्म,लघु,मध्यम उद्यम विभाग सहित अन्य विभागों में भी नई चेतना आ गईं है। लगभग एक वर्ष पूर्व ही इन सभी के लिए जीआई का आवेदन खजुराहो स्टोन क्रॉफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्रॉफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए नाबार्ड, मध्यप्रदेश ने और छतरपुर फर्नीचर के लिए सिडबी मध्यप्रदेश ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया था। एमएसएमई विभाग मध्यप्रदेश के प्रयास से स्थानीय शिल्पियों की संबंधित संस्थाओं द्वारा यह सभी जीआई एप्लिकेशन पद्म डॉ. रजनीकांत के तकनीकी सहयोग से भेजे गए थे। नवम्बर माह में ही पन्ना डायमंड को जीआई टैग प्राप्त हुआ है और लगभग 25 उत्पादों की जीआई मिलने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।  

सीएम डॉ. यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा को दिया MP में 4 मेडिकल कॉलेजों के भूमि पूजन का निमंत्रण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री  नड्डा से की भेंट मध्य प्रदेश में 4 मेडिकल कॉलेजों के भूमि पूजन का दिया आमंत्रण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री  जेपी नड्डा से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री  नड्डा से मध्यप्रदेश में पीपीपी मॉडल पर प्रारंभ होने वाले चार मेडिकल कॉलेज के भूमि-पूजन के लिए आमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम इस माह प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि मध्यप्रदेश में अन्य क्षेत्रों के साथ स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर जन सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। अभी और चार नए मेडिकल कॉलेज का भूमि-पूजन कार्यक्रम प्रस्तावित है। इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पन्ना, बैतूल, कटनी और धार में होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री  नड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आंमत्रण को स्वीकार करते हुए सहमति प्रदान की है। शीघ्र ही तिथि निर्धारित कर 4 नये मेडिकल कॉलेजों का भूमि-पूजन किया जायेगा।