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‘कोरोना वैक्सीन और अचानक होने वाली मौतों के बीच कोई संबंध नहीं’, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिया जवाब, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली कोविड-19 वैक्सीन और अचानक हो रही मौतों को लेकर जो डर और सवाल थे, अब उन पर जवाब मिल गया है. ICMR और AIIMS की नई स्टडी में साफ कहा गया है कि भारत में वैक्सीन और अचानक मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन मौतों की वजह वैक्सीन नहीं, बल्कि पहले से मौजूद बीमारियां, खराब जीवनशैली और शरीर की बनावट (आनुवांशिक कारण) हैं. यानी अगर किसी को दिल की बीमारी, शुगर या हाई ब्लड प्रेशर पहले से है और इलाज सही नहीं हुआ तो मौत का खतरा बढ़ सकता है. इसका वैक्सीन से कोई लेना-देना नहीं है. स्टडी से ये भी साफ हुआ है कि कोविड वैक्सीन सुरक्षित है और लोगों को इसे लेकर डरने की जरूरत नहीं है. स्टडी से क्या चला पता? स्टडी में पता चला है कि वैक्सीन और अचानक मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है. ज्यादातर मामलों में मौत की वजह पहले से मौजूद बीमारियां, आनुवांशिक कारण और अस्वस्थ जीवनशैली रही. साथ ही वैक्सीन से होने वाले गंभीर दुष्प्रभाव बेहद दुर्लभ हैं. विशेष रूप से 18 से 45 वर्ष के युवाओं में अचानक हुई मौतों की जांच के लिए दो अहम रिसर्च स्टडीज की गई हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि युवाओं में हो रहे हार्ट अटैक और कोरोना वैक्सीन के बीच कोई लिंक नहीं है. मंत्रालय का कहना है कि आईसीएमआर की ओर से की गई स्टडीज में कोरोना वैक्सीन और हार्ट अटैक के बीच किसी लिंक का पता नहीं चला है.  यह स्टडी देश के 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 47 अस्पतालों में मई से अगस्त 2023 के बीच की गई थी. यह स्टडी ऐसे लोगों पर की गई, जो पूरी तरह से स्वस्थ थे लेकिन अक्टूबर 2021 से मार्च 2023 के बीच उनकी अचानक मौत हो गई. स्टडी से पता चला कि कोरोना वैक्सीन की वजह से युवाओं में हार्ट अटैक का जोखिम नहीं बढ़ा है. युवाओं की अचानक हो रही मौतों का इससे कोई कनेक्शन नहीं है. यह स्टडी ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में युवाओं में हार्ट अटैक से हो रही मौतों के मामले बढ़े है. आईसीएमआर और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल अचानक हो रही इन मौतों के पीछे का कारण समझने की दिशा में काम कर रही है. इस स्टडी में जीवनशैली और पूर्व की स्थितियों को अचानक हो रही मौतों का प्रमुख कारण माना गया है. सिद्धारमैया के बयान के एक दिन बाद स्टडी हुई सार्वजनिक आईसीएमआर और एम्स की इस स्टडी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस बयान के एक दिन बाद सार्वजनिक किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोरोना वैक्सीन को जल्दबाजी में दी गई मंजूरी  और उसका डिस्ट्रीब्यूशन राज्य में युवाओं की अचानक हो रही मौतों का कारण हो सकता है. उन्होंने कोरोना वैक्सीन के संभावित साइट इफैक्ट की स्टडी के लिए एक पैनल के गठन करने का भी ऐलान किया था.  कर्नाटक के सीएम के बयान पर सरकार की सफाई दरअसल कर्नाटक के हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से कई युवाओं की मौत हुई है, जिसके बाद कर्नाट के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने एक बयान में दिल का दौरा पड़ने के लिए कोरोना वैक्सीन को जिम्मेदार बताया था, लेकिन केंद्र सरकार ने उनके दावे को खारिज कर दिया है। सिद्धारमैया ने मंगलवार को कहा कि जल्दबाजी में कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दी गई और फिर तेजी से वैक्सीन का वितरण किया गया, ऐसे में हो सकता है कि अचानक हो रही मौतों की वजह कोरोना वैक्सीन भी हो सकती है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि 'अगर किसी को भी सीने में दर्द, या सांस लेने में तकलीफ की समस्या हो तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में अपना चेकअप कराएं और लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।' सरकार ने कहा- अचानक मौत होने के कई कारण स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अचानक हो रहीं मौतों की देश की विभिन्न एजेंसियों ने जांच की है और जांच में पाया गया है कि इनका कोरोना वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं हैं। आईसीएमआर और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने भी अपने अध्ययन में इसकी पुष्टि की है। सरकार ने कहा कि कोरोना वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावकारी है और इसके दुर्लभ ही किसी पर गंभीर परिणाम दिखे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अचानक हो रही मौतों के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें जेनेटिक्स, हमारा रहन-सहन और दिनचर्या, पहले से कोई बीमारी और कोरोना संक्रमित होने के बाद की दिक्कतें शामिल हैं।  आईसीएमआर और एनसीडीसी ने 18 से 45 साल के लोगों के बीच अध्ययन किया। यह अध्ययन मई 2023 से लेकर अगस्त 2023 तक 47 क्षेत्रीय अस्पतालों और 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया। इस अध्ययन में उन लोगों की जांच की गई जो अक्तूबर 2021 से लेकर मार्च 2023 के बीच अचानक मौत का शिकार हुए। अध्ययन में पता चला कि इन अचानक मौतों का कोरोना वैक्सीन से संबंध नहीं है। अब एम्स द्वारा भी ऐसा ही एक अध्ययन किया जा रहा है, जिसकी फंडिंग आईसीएमआर द्वारा की गई है।   अध्ययन में पाया गया है कि जेनेटिक म्यूटेशन के चलते दिल का दौरा पड़ने जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। अभी अध्ययन चल रहा है और इसके पूरा होने के बाद ही रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। सरकार ने चेताया कि जो दावे किए जा रहे हैं, वे आधारहीन हैं और इनसे आम जनता का कोरोना वैक्सीन में विश्वास कमजोर होगा, जबकि कोरोना वैक्सीन की वजह से ही कोरोना महामारी के दौरान लाखों लोगों की जान बची थी। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक सीएम ने दावा किया कि बीते महीने में हासन जिले में 20 से ज्यादा लोगों की मौत अचानक हुई है।   

हेमंत खंडेलवाल बने भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष, धर्मेंद्र प्रधान समेत कई नेता रहे मौजूद

भोपाल  बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल मध्य प्रदेश भाजपा के निर्विरोध नए प्रदेश अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। इसकी औपचारिक घोषणा धर्मेन्द्रप्रधान ने की और मंच पर सीएम डॉ. मोहन यादव सहित अन्य नेताओं ने खंडेलवाल को प्रमाण-पत्र देकर उनका स्वागत किया। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में प्रदेश अध्यक्ष के लिए उनका इकलौता नामांकन आया। इस पद के लिए खंडेलवाल का नाम लंबे समय से चर्चा में सबसे आगे था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद के चलते वह अध्यक्ष बने हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव भी खंडेलवाल के पक्ष में थे। खंडेलवाल ने प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का स्थान लिया। प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया के दौरान विष्णु दत्त शर्मा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र कुमार, सावित्री ठाकुर, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, प्रदेश शासन के मंत्री राकेश सिंह, प्रहलाद सिंह पटेल एवं कैलाश विजयवर्गीय की ओर से पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने हेमंत खंडेलवाल के नाम का प्रस्ताव रखा। मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में हुई भाजपा की वृहद कार्यसमिति की बैठक में निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान खंडेलवाल पहली पंक्ति में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक और विधायक गोपाल भार्गव के बीच बैठे थे। नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद का इशारा मिलते ही मुख्यमंत्री यादव, खंडेलवाल की पीठ पर हाथ रखकर मंच की ओर बढ़े। फिर हाथ पकड़ केंद्रीय मंत्री व मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के चुनाव अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान, पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक सरोज पांडेय और राज्य निर्वाचन अधिकारी विवेक नारायण शेजवलकर के समक्ष प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन-पत्र जमा कराया। नामांकन जमा करने के लिए निर्धारित समय अवधि में आधा घंटा शेष था ऐसे में चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदेश कार्यालय में मंच से ही कहा कि किसी अन्य को नामांकन पत्र जमा करना हो तो आधा घंटा है, वह जमा कर सकते हैं लेकिन कोई अन्य नामांकन नहीं आया। मथुरा में जन्मे हेमंत, पिता के निधन के बाद राजनीति में आए     उत्तर प्रदेश के मथुरा में तीन सितंबर 1964 को जन्मे हेमंत खंडेलवाल को राजनीति और समाजसेवा के संस्कार पिता स्वर्गीय विजय कुमार खंडेलवाल से विरासत में मिले।     उनके पिता विजय खंडेलवाल भाजपा से बैतूल हरदा संसदीय सीट से सांसद रह चुके हैं। पिता के निधन के बाद खाली हुई इसी सीट से उप चुनाव में हेमंत खंडेलवाल कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे को हराकर निर्वाचित हुए और राजनीतिक व सामाजिक विरासत संभाली।     2008-09 तक लोकसभा सदस्य रहे। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हेमंत वागद्रे को हराकर विधायक बने और 2018 तक बैतूल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।     2018 के विस चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार वह कांग्रेस के निलय डागा से चुनाव हार गए। वर्ष 2014 से 2018 तक मध्य प्रदेश भाजपा के कोषाध्यक्ष रहे।     पांच साल बाद 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर खंडेलवाल पर भरोसा जताया। इस दौरान निलय डागा को हराकर उन्होंने अपनी पारिवारिक सीट पर विजय हासिल की। मालवा-निमाड़ से 8 बार बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष बने मालवा-निमाड़ क्षेत्र से भाजपा ने सबसे ज्यादा 8 बार संगठन को नेतृत्व दिया। भाजपा के पहले प्रदेशाध्यक्ष रहे सुंदरलाल पटवा (सामान्य) मंदसौर के थे। इस पद पर वे दो बार रहे। पहली बार 1980 से 1983 तक और दूसरी बार 1986 से 1990 तक। इसके बाद रतलाम के लक्ष्मीनारायण पाण्डे (सामान्य) 1994 से 1997 तके प्रदेशाध्यक्ष रहे। मालवा क्षेत्र से धार के विक्रम वर्मा (ओबीसी) 2000 से 2002 तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। इसी तरह देवास से पूर्व सीएम कैलाश जोशी (सामान्य) ने 2002 से 2005 तक संगठन का नेतृत्व किया। उज्जैन के सत्यनारायण जटिया (एससी) फरवरी 2006 से नवंबर 2006 तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। खंडवा सांसद रहे नंदकुमार सिंह चौहान (सामान्य) इस पद पर 2016 से 2018 तक रहे। 2019 में रहे प्रदेश चुनाव अधिकारी, प्रदेश संयोजक रहते लोकसभा चुनाव कराया संपन्न बीकाॅम-एलएलबी की शिक्षा प्राप्त हेमंत खंडेलवाल कृषि क्षेत्र से जुड़े है एवं व्यवसायी है। वर्ष 2019 में संगठन चुनाव के प्रदेश चुनाव अधिकारी रहे। वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रवासी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 15 जिलों के 61 विधानसभा क्षेत्रों में प्रवासी कार्यकर्ता के प्रभारी का दायित्व निर्वहन किया। वर्ष 2024 में प्रदेश संयोजक रहते लोकसभा चुनाव कराया। खंडेलवाल, कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी समारोह के सचिव रहे। वर्तमान में कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट के अध्यक्ष है। इनके अलावा राजेंद्र शुक्ला, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंत्री प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह ने भी पत्र दिया। कैलाश विजयवर्गीय नहीं पहुंचे। बुधवार को रहेंगे उपस्थित। यशपाल सिसोदिया ने भी नामांकन का प्रस्ताव दिया। धर्मेंद्र प्रधान ने हेमंत खंडेलवाल के अलावा अन्य किसी अन्य के नाम के प्रस्ताव के लिए भी पूछा और इसके लिए 10 मिनट का समय दिया। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद के नामांकन पत्र आमंत्रित किए गए। बीजेपी के लिए क्यों खास हैं खंडेलवाल? रिपोर्ट्स के अनुसार, हेमंत खंडेलवाल सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाने के लिए भी जाने जाते हैं। बताया जाता है कि उनका राजनीतिक सफर उनके पिता विजय कुमार खंडेलवाल की देखरेख में शुरू हुआ। उनके पिता भी हमेशा बीजेपी के साथ जुड़े रहे। वह बीजेपी के एक दिग्गज नेता रहे। साल 2007 में उनका निधन हो गया था।  पिता ने सिखाई राजनीति की ABCD जानकारी के अनुसार, जब हेमंत खंडेलवाल ने अपनी बीकॉम एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर ली इसके बाद वह अपने पिता के साथ राजनीति में सक्रिय हो गए थे। हेमंत खंडेलवाल के पिता विजय कुमार खंडेलवाल साल 1996 से साल 2004 तक लगातार चार बार बैतूल से सांसद रहे। बता दें कि साल 2007 में विजय कुमार खंडेलवाल का निधन हो गया। इसके बाद हुए लोकसभा उप चुनाव में पहली बार हेमंत खंडेलवाल ने किस्मत आजमाई और सफलता भी पाई। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सुखदेव पांसे को भारी अंतर से हराया था। इस जीत के साथ ही हेमंत खंडेलवाल ने पहली बार सांसद बनकर राजनीति प्रवेश किया। बैतूल बीजेपी के जिला अध्यक्ष भी रहे हेमंत खंडेलवाल गौरतलब है कि साल 2008 में हुए परिसीमव के बाद बैतूल लोकसभा सीट अनुसूचित … Read more

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ‘सुशिक्षा मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में हुए शामिल

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार विकास के आधार स्तंभ: उप मुख्यमंत्री शुक्ल मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ रहा है आगे: उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ‘सुशिक्षा मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में हुए शामिल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के सशक्त आधार हैं। उचित शिक्षा से कौशल विकास होता है, और कौशल ही रोजगार और आत्मनिर्भरता का मूल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अभूतपूर्व विकास के पथ पर अग्रसर है, और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट, रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव एवं सेक्टोरल इन्वेस्टमेंट कॉनक्लेव से मध्यप्रदेश में देश-विदेश से निवेश आ रहा है। इससे बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन हो रहा है, और एमएसएमई, टेक्सटाइल, फार्मा, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन एवं कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश देश के अग्रणी विकसित होते राज्यों की पंक्ति में खड़ा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल एक निजी मीडिया समूह के ‘सुशिक्षा मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और मैनपॉवर विकास की योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली संस्थाओं को सम्मानित किया। चिकित्सकों को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा के लिए आना चाहिए आगे उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त हो रही हैं। टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से अब प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को बेहतर इलाज उनके निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में मिल रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की योजना अनुसार आगामी वर्षों में 5,000 से अधिक एमबीबीएस सीटों और 2,500 से अधिक पीजी सीटों की वृद्धि की जा रही है। इससे प्रदेश में डॉक्टर्स की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नवीन शिक्षित चिकित्सकों को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा के लिए आगे आना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में हरित, औद्योगिक और पर्यटन क्रांति एक साथ हो रही है, जिससे रोजगारों का सृजन हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुगठित और समन्वित प्रयासों से हर क्षेत्र में विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में शासकीय और निजी दोनों क्षेत्रों में तकनीकी, चिकित्सा एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। चिकित्सा अधोसंरचना को मज़बूत करने के लिए नवीन उपकरणों की आपूर्ति एवं चिकित्सकीय मैनपॉवर की बड़े स्तर पर भर्ती भी की जा रही है। मीडिया समूह के वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद उपस्थित रहे।  

अंगदान को बढ़ावा देने की पहल, MP सरकार करेगी डोनर्स का राष्ट्रीय पर्वों पर सम्मान

भोपाल अंगदान को महादान की संज्ञा दी जाती है, क्योंकि इसके जरिए एक व्यक्ति जाते-जाते भी कई जिंदगियों को नया जीवन देने की क्षमता रखता है। ऐसे लोग जो अंगदान करते हैं, उनको सम्मानित करने का ऐलान मध्य प्रदेश की मौहन सरकार ने किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की तरफ से जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि देहदान अथवा हृदय, लीवर व गुर्दा दान करने वाले महान लोगों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसकी जानकारी अपने एक्स अकाउंट पर दी। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी लिखित आदेश की कॉपी शेयर करते हुए लिखा- मृत्यु के बाद जीवन का उपहार देना, यह केवल दान नहीं, अमरता है। मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है कि देहदान अथवा हृदय, लीवर व गुर्दा दान करने वाले महान लोगों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी जाएगी, साथ ही उनके परिजनों को 26 जनवरी एवं 15 अगस्त को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। अर्थात देहदान करने वालों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने खास इंतजाम किया है, ताकि और लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जा सके। इसके अलावा अपने अंगों को दान करने वाले शख्स और उसके परिजनों को इसके लिए सम्मानित महसूस कराया जा सके।  

साइबर ठगों ने वर्ष 2024 में देशभर में नए-नए तरीकों से 22,811 करोड़ रुपये उड़ाए

नई दिल्ली साइबर क्राइम के कई मामले हमें हर रोज देखने को मिलते हैं. स्कैमर्स लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. अगर आंकड़ों की बात करें, तो साल 2024 में 22811.95 करोड़ रुपये की ठगी लोगों से साइबर अपराधियों ने की है. ये वो आंकड़ा है, जिसे लोगों ने रिपोर्ट किया है.  इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर I4C के मुताबिक, साल 2024 में NCRP पर 19.18 लाख शिकायतें आई हैं. ये शिकायतें साइबर क्राइम से जुड़ी हुई हैं, जिसमें लोगों ने 22,811.95 करोड़ रुपये गंवा दिए हैं. इन आंकड़ों के साथ भारत दुनिया के सबसे ज्यादा साइबरक्राइम का शिकार होने वाले देशों में शामिल हो जाता है.  हर साल बढ़ रहे साइबर अटैक के मामले भारत में साल-दर-साल साइबर क्राइम का आंकड़ा बढ़ रहा है. GIREM की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मैलवेयर अटैक्स में 11 फीसदी, रैंसमवेयर में 22 परसेंट, IoT अटैक्स में 59 परसेंट और क्रिप्टो हमलों में कुल मिलाकर 409 परसेंट की चौंका देने वाली बढ़ोतरी हुई है.  साल 2023 में साइबर क्राइम की 15.56 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो साल 2024 में बढ़कर 19.18 लाख हो गई हैं. इनमें से ज्यादा पैसों से जुड़े हुए फ्रॉड्स हैं. साल 2023 में भारतीयों ने 7496 करोड़ रुपये साइबर क्राइम में गंवाए थे, जबकि साल 2022 में लोगों ने 2306 करोड़ रुपये गंवाए थे.  जमा-पूंजी गंवा रहे लोग साल 2024 में ये आंकड़ा 2023 के मुकाबले तीन गुना और 2022 के मुकाबले 10 गुना बढ़ गया है. पिछले चाल सालों में लोगों ने लगभग 33,165 करोड़ रुपये साइबर फ्रॉड में गंवा दिए हैं. GIREM की रिपोर्ट की मानें, तो साल 2024 में हुए फिशिंग हमलों में 82.6 फीसदी AI जनरेटेड हैं. हाल फिलहाल में QR कोड बेस्ड साइबर फ्रॉड के मामलों की संख्या बढ़ी है.  अपराधी फर्जी पोस्टर्स, वॉट्सऐप मैसेज और लिंक का इस्तेमाल लोगों का टार्गेट करने के लिए कर रहे हैं, जिससे यूजर्स एक बार QR कोड को स्कैन कर लें. कोड स्कैन होने के बाद पीड़ित एक फर्जी UPI पेमेंट पोर्टल पर पहुंचते हैं, जहां से उनके बैंकिंग डेटा को चुरा लिया जाता है. इस तरीके का भारत में बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहा है. साइबर फ्रॉड में सिर्फ QR कोड स्कैन के जरिए ही नहीं बल्कि कई दूसरे तरीकों से भी लोगों को फंसाया जा रहा है. यहां फर्जी पुलिस बनने से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक, तमाम तरीकों का इस्तेमाल लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए साइबर अपराधी कर रहे हैं. इस तरह के अपराधों का शिकार कोई शख्स हो सकता है. आपके साथ भी हो सकता है फ्रॉड, रखें इन बातों का ध्यान साइबर वर्ल्ड में कोई भी फ्रॉड का शिकार हो सकता है. ऑनलाइन हो चुकी दुनिया में हर कदम पर साइबर ठगों ने जाल बिछा रखा है. ऐसे में आपकी जागरूकता ही आपको इस दुनिया में सुरक्षित रख सकती है. साइबर वर्ल्ड में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.      कभी भी अनजान लिंक पर क्लिक ना करें.      किसी दूसरे से अपने OTP, बैंकिंग डिटेल्स और दूसरे पासवर्ड्स शेयर ना करें.      वॉट्सऐप पर भी आप ठगी का शिकार हो सकते हैं, इसलिए किसी अनजान शख्स से चैट करते हुए सावधान रखें.      अपनी पर्सनल डिटेल्स को किसी से भी शेयर ना करें.      डिजिटल अरेस्ट या पुलिस के नाम पर अगर कोई आपको डराता है, तो बिना डरे ऐसे मामलों को रिपोर्ट करें.      ज्यादा प्रॉफिट के लिए अनजान ऐप्स को डाउनलोड ना करें.  

जुलाई में लाडली बहना योजना के 1500 रुपये आएगे खाते में, 250 रुपये रक्षाबंधन पर देंगे

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार लाडली बहनों (MP Ladli Behan Yojana) को दीपावली से हर महीने 1500 रुपये देने जा रही है. फिलहाल उन्हें 1250 रुपये महीने मिलते हैं. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ये ऐलान किया है. हालांकि विपक्ष का मनना है कि इस खर्च से पहले से ही लाखों करोड़ के कर्ज में डूबी सरकार का वित्तीय प्रबंधन और गड़बड़ हो जाएगा. दीवाली से लाडली बहनों को मिलेंगे 1500 रुपये मध्य प्रदेश के सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि 3000 रुपये देने का ऐलान बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में किया था. हमने कहा है डंके की चोट पर कहा है और इसे पूरा करेंगे. यह योजना पहले 1000 रुपए प्रति माह से शुरू हुई थी. फिर हमने इसे 1250 रुपए किया, 250 रुपये रक्षाबंधन पर देंगे, दीवाली से 1500 चालू कर देंगे. बहुत सी लाभार्थियों को लेकर यह भी संशय है कि जुलाई में आने वाली लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त में कितना पैसा खाते में आएगा? क्या 25वीं किस्त की तरह इस बार भी 1250 रुपये ही खाते में आएंगे? क्या 250 रुपये के शगुन के लिए महिलाओं को अगस्त तक का इंतजार करना होगा? चलिए आप ज्यादा परेशान न हों, हम आपके लिए इन सवालों के जवाब लेकर आए हैं। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक लाभार्थियों को जुलाई में ही गुड न्यूज मिल जाएगी। इस वजह से जुलाई में आएंगे 1500 रुपये लाडली बहना योजना की 26वीं किस्त में महिलाओं को 1250 नहीं बल्कि 1500 रुपये मिलेंगे। मतलब जुलाई में ही रक्षा बंधन का शगुन मिल जाएगा। दरअसल यह पैसा जुलाई में इसलिए आ रहा है क्योंकि रक्षा बंधन 9 अगस्त को है। जबकि लाडली बहना योजना का पैसा खाते में 10 से 15 तारीख के बीच में ही ट्रांसफर किया जाता है। ऐसे में अगर अतिरिक्त 250 रुपये का भुगतान अगस्त में करने की योजना बनाई जाती तो लाडली बहनों को यह लाभ रक्षा बंधन के बाद ही मिल पाता। इसलिए सरकार ने यह एक्स्ट्रा पैसा जुलाई में ही देने का फैसला कर लिया है। अक्टूबर से हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये मध्य प्रदेश की महिलाओं को महज दो महीने ही 1250 रुपये की किस्त से संतोष करना पड़ेगा। इसके बाद उन्हें हर महीने 1500 रुपये मिलने शुरू हो जाएंगे। सीएम ने ऐलान किया है कि दिवाली से महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे। इसका मतलब हुआ कि जुलाई में 1500 रुपये मिलने के बाद सिर्फ अगस्त और सितंबर में ही 1250 रुपये मिलेंगे। अक्टूबर से हर महीने 1500 रुपये मिलने शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक हर साल पैसा बढ़ाकर 2028 तक लाभार्थी महिलाओं को 3000 रुपये हर महीने मिलने शुरू हो जाएंगे। कब शुरू होंगे नए रजिस्ट्रेशन हालांकि लाडली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई अपडेट नहीं दी जा रही है। 2023 के बाद से ही नए रजिस्ट्रेशन बंद पड़े हैं। ऐसे में लाखों महिलाएं लिस्ट में अपना नाम नहीं जुड़वा पा रही हैं। अभी जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक फिलहाल सरकार की नए रजिस्ट्रेशन खोलने की योजना नहीं है। लाडली बहनों को दिवाली पर तोहफा     अब हर महीने मिलेंगे1500 रुपये     राज्य पर पड़ेगा 310 करोड़ मासिक भार     सालाना खर्च 22 हजार करोड़ के पार     योजना की शुरुआत 1000 से हुई थी     2023 में बढ़कर हुई 1250 रुपये     अब दिवाली से मिलेंगे1500 रुपये     योजना में 1.27 करोड़ लाभार्थी     कर्ज़ में डूबी सरकार पर सवाल     राज्य पर कुल कर्ज़ 4.31 लाख करोड़ रुपये     5 साल में कर्ज़ 115% बढ़ा      संकल्प पत्र में 3000 रुपये प्रति माह का वादा पूरा होगा  3,000 रुपये देने का वादा मध्यप्रदेश सरकार दीपावली से लाडली बहनों को 1250 रुपये की जगह 1500 रुपये महीना देगी. इस बढ़ोतरी से राज्य पर हर महीने करीब 310 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा, जिससे सालाना खर्च 22,000 करोड़ के पार पहुंच जाएगा. ये योजना 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई थी और इसे बीजेपी की सत्ता वापसी का सबसे बड़ा चुनावी दांव माना गया. योजना की शुरुआत 1,000 प्रति माह से हुई थी, जिसे बाद में अक्टूबर 2023 में 1,250 कर दिया गया था. अब इसे दिवाली से 1,500 रुपये करने की घोषणा हुई है. सरकार का वादा है इस राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह तक पहुंचाया जाएगा.     योजना की शुरूआत में 1.29 करोड़ महिलाओं को योजना का लाभ मिला     अक्तूबर 2023 में संख्या 1.31 करोड़ तक पहुंच गई     अब ये संख्या 1.27 करोड़ है, सरकार ने खुद विधानसभा में माना है कि योजना में फिलहाल नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं,  हालांकि उम्र और दूसरी शर्तों के आधार पर नाम कट रहे हैं 5 साल में बढ़ा 115 फीसदी कर्ज मध्यप्रदेश सरकार का बजट 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए है. सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक 9500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. कुल कर्ज की राशि बढ़कर लगभग 4 लाख 31 हजार 740 करोड़ रुपए हो गई है. पांच साल पहले राज्य पर करीब 2 लाख करोड़ का कर्ज था यानी 5 साल में राज्य का कर्ज लगभग 115 फीसदी बढ़ चुका है.

चार्जिंग अधोसंरचना के लिये केन्द्र सरकार से मिलेगी 100 प्रतिशत राशि

प्रदेश के शहरी मार्गों पर 582 इलेक्ट्रिक बस चलाने की योजना ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत 6 शहरों  में 582 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिये प्रस्ताव तैयार  चार्जिंग अधोसंरचना के लिये केन्द्र सरकार से मिलेगी 100 प्रतिशत राशि भोपाल  प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 तैयार की गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य सरकार द्वारा परिवहन कर में छूट और अनुदान दिये जाने की भी व्यवस्था की गई है। प्रदेश के बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन सेवा के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बस सेवा को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में इंदौर में शहरी मार्गों पर 80 इलेक्ट्रिक बसों को संचालन किया जा रहा है। फेम योजना के अंतर्गत 40 और अमृत योजना 1.0 में 40 बसें संचालित हो रही हैं। 582 इलेक्ट्रिक बसों के चलाने का प्रस्ताव ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत 6 शहरों  में 582 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिये प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया था, जिसे केन्द्रीय शहरी मंत्रालय नई दिल्ली से स्वीकृति मिल गयी है। इंदौर में 150, भोपाल में 100, ग्वालियर में 100, जबलपुर में 100, सागर में 32 एवं उज्जैन में 100 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का प्रस्ताव है। प्रदेश के 6 शहरों में बस संचालन के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा निविदा जारी कर बस संचालकों का चयन किया जा चुका है। पीएम ई-बस सेवा के अंतर्गत बस डिपो अधोसंरचना निर्माण के लिये भी प्रस्ताव तैयार किया गया है, इसमें 60 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा और शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा प्रदाय की जायेगी। इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग अधोसंरचना निर्माण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि प्रदान की जायेगी। नगरीय निकायों द्वारा बस डिपो एवं चार्जिंग स्टेशन निर्माण के लिये प्राक्कलन तैयार कर राज्य स्तरीय संचालन समिति से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया है। अनुमोदन के बाद प्रस्ताव केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय को भेजा गया है। भोपाल एवं जबलपुर शहर द्वारा बस डिपो अधोसंरचना निर्माण के लिये निविदा जारी की जा चुकी है। प्रदेश के शहरों में लाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल के संचालन को बढ़ावा देने के लिये भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर शहर में 34 चार्जिंग स्टेशन पर 190 चार्जिंग पाइंट लगाये गये हैं।    

उत्तर प्रदेश में नेपियर घास किसानों की बदलेगी किस्मत, लाभार्थी किसानाें को मुफ्त मिलेंगी घास की जड़ें

लखनऊ  घास लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को हजारों रुपये दे रही है. केवल रुपये ही नहीं, बल्कि घास लगाने के लिए घास की जड़ें भी उपलब्ध कराई जा रही है. घास भी कोई सामान्य घास नहीं है, बल्कि अफ़्रीकन प्रजाति की है. अगर आपके पास भी घास लगाने के लिए जमीन है तो सरकार आपको आर्थिक मदद करेगी. दरअसल, योगी सरकार द्वारा नेपियर घास की खेती को बढ़ावा देने के लिए यह पहल की जा रही है. इस घास से बिजली उत्पादन होगा. अगर आप घास को लगाते हैं तो सरकारी मदद मिलने के साथ-साथ मोटी कमाई भी कर सकते हैं. नेपियर घास अफ्रीकन प्रजाति की घास है. नेपियर घास का वैज्ञानिक नाम Pennisetum purpureum है. नेपियर घास पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल की जाती है. विशेषकर दूध देने वाले पशुओं के लिए यह घास बेहद लाभदायक होती है. इस घास में प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है. यदि पशू नेपियर घास का सेवन करते हैं तो पशुओं का दुग्ध उत्पादन बढ़ता है. साथ ही तेज़ी के साथ शारीरिक विकास होता है. मार्केट में नेपियर घास की काफी डिमांड बतायी जाती है. उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एक और खास योजना लाने की तैयारी है। इस योजना के लागू होने से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। यूपी सरकार की इस योजना के तहत हाइब्रिड नेपियर घास (इसे हाथी घास भी कहा जाता है) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार की ओर से इसके लिए अनुदान भी मिलेगा। इस योजना का मकसद है कि प्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़े और जानवरों को साल भर हरा चारा मिलता रहे। यूपी सरकार किसानों के साथ चारा बनाने वाली संस्थाओं को भी हाइब्रिड नेपियर घास उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अभी इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सिर्फ प्रयागराज में शुरू किया गया है। यह एक 'Buy Back' योजना है, जिसमें किसानों को 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से ग्रांट मिलेगी। इस योजना के तहत सरकार की ओर से हाइब्रिड नेपियर घास की जड़ किसानों को मुहैया कराई जाएगी और उसके बाद सरकार ही दोगुने दाम पर किसानों से घास खरीदेगी। अभी इतने लोगों को मिलेगा लाभ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.एन. यादव ने बताया कि सरकार ने पहली बार प्रयागराज में यह योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को नेपियर घास उगाने के लिए 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की ग्रांट दी जाएगी। जिले में 10 लोगों को इस योजना का लाभ मिलेगा। ये लाभार्थी किसान, किसान उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह या गौशाला चलाने वाले लोग हो सकते हैं। चारे की कमी नहीं होगी नेपियर घास को किसान इसे अपने जानवरों को हरे चारे के रूप में खिला सकते हैं। यह घास दूध देने वाले जानवरों के लिए बहुत फायदेमंद है। यह प्रोटीन सेभरपूर हरा चारा है। इससे जानवरों का दूध बढ़ता है। डेयरी मालिक आमतौर पर 12 रुपये प्रति किलो की दर से सूखा भूसा खरीदते हैं। जबकि इस हरे चारे को उगाने का खर्च सिर्फ 50 पैसे प्रति किलो है। इन योजनाओं से किसान हर महीने हजारों रुपये कमा सकते हैं। वे यह घास डेयरी फार्म मालिकों को बेच सकते हैं। नेपियर चारा बैंक योजना: बता दें कि पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालकों के दुधारू पशुओं को हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए नेपियर चारा बैंक की योजना चलायी गई है. किसान, स्वयं सहायता समूह, पंजीकृत गौशाला, गो आश्रयस्थल, FPO और स्वयंसेवी संस्था इसका लाभ ले सकते हैं. इस योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी के पास 0.2 हेक्टेयर सिंचित भूमि होना आवश्यक है. गाजियाबाद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ एस पी पांडे के मुताबिक, इस योजना के तहत गाजियाबाद में 10 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा. भारतीय चयनित लाभार्थी को खेत की तैयारी के लिए 4 हज़ार रुपए भुगतान किए जाएंगे. लाभार्थी को नैपी और घास की जड़ें उपलब्ध कराई जाएंगी. एक साल के बाद लाभार्थी से दोगुनी जड़ें ली जाएंगी, जो अगले साल चयनित लाभार्थियों को वितरित की जाएगी. यदि योजना के लिए 10 से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं तो मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा. इसके बाद पहले आओ पहले पाओ के आधार पर 10 योग्य लाभार्थियों का चयन होगा. नेपियर घास केवल पशुओं के चारे के तौर पर ही नहीं बल्कि बिजली उत्पादन के लिए भी इसका प्रयोग किया. नेपियर घास की खासियत: एक बार नेपियर घास लगाने पर कई सालों तक उपज देती है. नेपियर घास काफी तेजी के साथ बढ़ती है. जिससे साल में 5-7 बार कटाई की जा सकती है. नेपियर घास को लगाने के बाद खाद या फिर बार-बार पानी देने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है. एक एकड़ भूमि में नेपियर घास लगाने से सालाना 300 टन से अधिक की पैदावार होती है. क्या है नेपियर घास नेपियर घास गन्ने की तरह दिखती है। मूल रूप से थाईलैंड में पाई जाने वाली इस घास की खास बात है कि इसे बंजर जमीन और खेतों की सीमाओं पर भी उगाया जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ 20-25 दिनों में पानी की मदद से तैयार हो जाती है। एक एकड़ में लगभग 300-400 क्विंटल घास का उत्पादन होता है। कटाई के बाद इसकी शाखाएं अपने आप फिर से बढ़ने लगती हैं। इस तरह, एक बार लगाने के बाद इसे दस साल तक उगाया जा सकता है। यही मुख्य कारण है कि इसे कम लागत में अधिक आय वाली फसल कहा जाता है। यह किसानों और पशुपालकों दोनों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है।

मोहन सरकार का एक जगह सभी ऑफिस की योजना, अरेरा हिल्स को सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर डेवलप किया जाएगा

भोपाल  करीब 43 साल पहले 9.56 करोड़ रुपए खर्च कर बनाए गए सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को तोड़कर अरेरा हिल्स क्षेत्र को दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर डेवलप किया जाएगा। री-डेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट के तहत यह जिम्मेदारी मप्र हाउसिंग बोर्ड को सौंपी गई है। करीब 4 महीने में बोर्ड ने इसका कंप्रेहेंसिव प्लान तैयार कर लिया है। हालांकि, इस प्लान पर अंतिम मुहर आज  बुधवार को वल्लभ भवन में होने वाली मुख्य सचिव की बैठक में लगेगी। फिलहाल बोर्ड का प्लान है कि वल्लभ भवन के इर्द-गिर्द अलग-अलग खंडों में कई भवन बनाए जाएंगे और इन्हीं में भोपाल के सभी एचओडी स्तर के दफ्तर संचालित किए जाएंगे। इससे पहले सतपुड़ा-विंध्याचल भवन को तोड़कर दोगुने क्षेत्र में बनाने की योजना भोपाल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (बीडीसी) ने बनाई थी। जिसे मुख्यमंत्री ने नामंजूर कर दिया था। 43 साल पहले… 9.56 करोड़ खर्च कर बनाए गए थे सतपुड़ा-विंध्याचल भवन     नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एसीएस संजय शुक्ला ने बताया कि सतपुड़ा- विंध्याचल भवनों को तोड़कर वहां नए भवनों के निर्माण का एक समग्र (कंप्रेहेंसिव) प्लान मप्र हाउसिंग बोर्ड ने तैयार किया है। प्रस्तावित योजना पर अंतिम निर्णय आगामी बैठक के बाद लिया जाएगा।     मेट्रो का रूट भी: इस क्षेत्र को दो तरफ से ऑरेंज और ब्लू मेट्रो का रूट भी मिलेगा।     वल्लभ भवन और इसके आसपास 8 ऐसी झुग्गी बस्तियां हैं, जिनमें 32 हजार लोग रहते हैं। इनमें पत्रकार कॉलोनी के पास मालवीय नगर, ओम नगर-2,3, भीम नगर, वल्लभ नगर-1,2, राजीव नगर व अर्जुन नगर शामिल हैं। यहां 9197 हाउस होल्ड हैं।

पीएम Modi की विदेश नीति को नई दिशा देने की तैयारी, पीएम की सबसे लंबी राजनयिक यात्रा, BRICS में लेंगे हिस्सा

पीएम मोदी की त्रिनिदाद व टोबैगो की ऐतिहासिक यात्रा न सिर्फ 180 वर्षों की विरासत से जुड़ी हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ दिनों के डिप्लोमैटिक दौरे पर आज रवाना होंगे, यात्रा से पहले चर्चा में ये कुर्सी  पीएम Modi की विदेश नीति को नई दिशा देने की तैयारी, पीएम की सबसे लंबी राजनयिक यात्रा, BRICS में लेंगे हिस्सा नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 2 जुलाई, 2025 से 5 देशों की यात्रा के लिए रवाना होने वाले हैं. 2 जुलाई से शुरू होने वाली पीएम की ये यात्रा 9 जुलाई को पूरी होगी. पीएम के इस दौरे में दो महाद्वीप भी शामिल हैं. इस दौरे में प्रधानमंत्री घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया की यात्रा करने वाले हैं. इस यात्रा में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर प्रधानमंत्री 4 दिनों तक ब्राजील में रहेंगे. 11 सालों के अपने कार्यकाल में पीएम मोदी दूसरी बार 5 देशों के दौरे पर जा रहे हैं. इससे पहले साल 2016 में उन्होंने 5 देशों को दौरा किया था, जिसमें अमेरिका, स्विट्जरलैंड, अफगानिस्तान, मैक्सिको और कतर देश शामिल था. 2 जुलाई से पीएम की ये यात्रा घाना से शुरू होगी. भारत के प्रधानमंत्री 30 साल बाद घाना का दौरा करने वाले हैं. 2 से 3 जुलाई तक पीएम मोदी यहां घाना के राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक सम्बन्धों पर चर्चा करेंगे.     ऐतिहासिक यात्रा न सिर्फ 180 वर्षों की विरासत से जुड़ी हुई पीएम मोदी का इस कैरेबियाई देश का दौरा इसलिए भी कई मायनों में अहम है, क्योंकि 180 साल पहले भारतीयों ने समुद्री रास्ते से पहली बार इस धरती पर कदम रखा था। पीएम मोदी के दौरे को लेकर प्रवासी भारतीयों में जबरदस्त उत्साह है। विदेश मंत्रालय में सचिव नीना मल्होत्रा ने सोमवार को मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि इस दौरे के दौरान पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कांगालू और प्रधानमंत्री कमला पर्साड-बिसेसर से मुलाकात करेंगे। वे देश की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के साथ संवाद का भी आयोजन होगा। इस देश की कुल जनसंख्या का लगभग 45% हिस्सा भारतीयों का है। जहाज पर सवार होकर पहुंचे थे 225 भारतीय करीब 180 साल पहले 30 मई 1845 को भारत से रवाना हुए 'फतेह-अल-रज़ाक' नामक जहाज ने त्रिनिदाद और टोबैगो के तट पर 225 भारतीय गिरमिटिया मजदूरों को उतारा था। भारतीयों का इस देश में यह पहला दौरा था। ये लोग गिरमिटिया मजदूर के रूप में ब्रिटिश उपनिवेश में काम करने भेजे गए थे। तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन भारत का प्रधानमंत्री उसी धरती पर आधिकारिक यात्रा पर पहुंचेगा। ब्रिटिश शासन के दौरान चीनी और कैरेबियाई गन्ना बागानों में सस्ता श्रम जुटाने के लिए भारत से मजदूरों को भेजा गया था। फतेह-अल-रज़ाक से त्रिनिदाद पहुंचे पहले भारतीयों में ज़्यादातर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से थे। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों भारतवंशी पीएम मोदी की यह यात्रा इसलिए भी विशेष है, क्योंकि कैरेबियाई देश में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों भारतवंशी महिलाएं हैं, वे स्वयं को "भारत की बेटियां" बताती हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता न सिर्फ भारत की विरासत से जुड़ी हैं, बल्कि भारत के साथ राजनयिक और विकास सहयोग को नई दिशा देने को लेकर उत्सुक हैं। द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा पीएम मोदी के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, अक्षय ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंध भी एजेंडे में शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया, “दोनों देश एक विस्तृत सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।” प्रधानमंत्री मोदी को त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में संयुक्त सत्र को संबोधित करने का विशेष सम्मान मिलेगा। साथ ही, प्रधानमंत्री कमला बिसेसर पीएम मोदी के सम्मान में औपचारिक रात्रिभोज का भी आयोजन करेंगी। घाना के साथ भारत के अच्छे सम्बन्ध घाना पश्चिम एशिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में से एक है. साथ ही घाना के साथ भारत के व्यापारिक सम्बन्ध काफी अच्छे हैं. भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय व्यापार 3,137.29 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें भारत से सोने का आयात काफी ज्यादा होता है. इसके अलावा भारत की कई कंपनियों ने घाना में कृषि, विनिर्माण, निर्माण, शिक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, आईसीटी और ऑटोमोटिव जैसी कंपनियों में भी काफी पैसे निवेश किए हैं. घाना के बाद पीएम इस देश की करेंगे यात्रा घाना के बाद पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा करेंगे. त्रिनिदाद और टोबैगो में लगभग 40 से 45 प्रतिशत भारतीय प्रवासी निवास करते हैं. त्रिनिदाद और टोबैगो कैरिबियन क्षेत्र का पहला देश बन गया है, जिसने भारत के यूपीआई प्लेटफॉर्म प्रोजेक्ट को अपने देश में मंजूरी दी है. 4 जुलाई को पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो से अर्जेंटिना जाएंगे. भारत का अर्जेंटिना में कुल निवेश 1.2 बिलियन अमरीकी डॉलर है. पीएम मोदी अर्जेंटिना में वहां के प्रमुख क्षेत्रों, जैसे आर्थिक, रक्षा, खनिज, तेल और गैस, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान पर चर्चा कर सकते हैं. 4 दिनों तक ब्राजील में रहेंगे पीएम मोदी उसके बाद 5 से 8 जुलाई तक प्रधानमंत्री ब्राजील की यात्रा पर रहेंगे और वहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. पीएम मोदी अपने कार्यकाल में चौथी बार ब्राजील की यात्रा करने वाले हैं. पीएम यहां राष्ट्रपति लूला से वैश्विक स्तर में सुधार, शांति और सुरक्षा, एआई, जलवायु परिवर्तन और हेल्थ सहित कई मुद्दों पर बात करेंगे. नामीबिया की यात्रा करेंगे पीएम मोदी अपनी यात्रा के आखिरी दौरे में पीएम मोदी नामीबिया पहुचेंगे. नामीबिया में पीएम मोदी की पहली यात्रा होगी. साथ ही मार्च में पदभार संभालने के बाद नामीबिया के राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी की भारत देश से पहली द्विपक्षीय वार्ता होगी. हालांकि भारत और नामीबिया के बीच व्यापार में तेजी आई है. भारत और नामीबिया के बीच व्यापार बढ़कर 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया है, जो दोनों देशों के सम्बन्धों को मजबूत करने का काम करता है. PM मोदी की विदेश यात्रा से पहले चर्चा में क्यों ये कुर्सी इस दौरे से पहले एक कुर्सी भी चर्चा में आ गई है. खास बात यह है कि विदेशी सरजमीं के संसद में रखी इस कुर्सी पर … Read more