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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा पर त्वरित कार्रवाई, ग्रामीणों की मांगों को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा पर त्वरित अमल, ग्रामीणों की मांगों को मिली स्वीकृति सुशासन तिहार में किए गए वादे हो रहे पूरे, पंचायत भवन, पीडीएस भवन और मुक्तिधाम निर्माण को मिली मंजूरी रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं को शीघ्रता से पूरा करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर की गई घोषणाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर अमल में लाया गया है। उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा विभिन्न विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम सिलमा में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन, डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की लागत से नवीन पीडीएस भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार ग्राम कुनकुरीकला में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणाओं पर त्वरित अमल के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। उनका कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर न केवल समस्याएं सुन रहा है, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित कर रहा है। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त मांगों और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंच रहा है और सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार हो रही है।

PCC दफ्तर का VIDEO बना चर्चा का विषय, दिग्विजय सिंह ने बदली सीट; पटवारी बोले- वे हमारे मार्गदर्शक हैं

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। जिसका एक और वीडियो सामने आया है। जोकी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। इसी दौरान खुले मंच पर दिग्गज नेताओं के बीच तनातनी देखने को मिली। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जीतू पटवारी के सामने दिग्विजय सिंह अपनी कुर्सी छोड़कर हटे है। दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले मंच पर सभी नेताओं को सीट पर बैठने हेतु ठीक करते नजर आए। इस दौरान पटवारी ने हाथ का इशारा करते हुए कहा कि “ऐसा कर लो तो हरीश चौधरी भी आ जाएंगे।” जीतू पटवारी की यह बात सुनते ही वहां बैठे पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह तुरंत अपनी कुर्सी से उठ खड़े होते हैं और साइड में जाने लगते हैं। दिग्विजय सिंह को नाराज होता देख जीतू पटवारी उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं और कहते हैं, “आप इधर ही रुक जाओ सर…”। लेकिन, दिग्विजय सिंह उनकी बात अनसुनी कर देते हैं और मुख्य जगह छोड़कर साइड में रखी एक अन्य कुर्सी पर जाकर बैठ जाते हैं। जबकि सह-प्रभारी हरीश चौधरी उनकी छोड़ी कुर्सी पर बैठ गए। ऐसे में पार्टी के भीतर नेताओं में तनातनी की स्थिती बनी हुई है। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला. पार्टी के नेता ने कहा- कांग्रेस में वर्चस्व और कुर्सी की लड़ाई चल रही है, सभी नेता एक दूसरे को निपटने में लगे हैं. आइए, विस्तार से जानते हैं वीडियो में कुर्सी को लेकर क्या खींचतान हुई, जीतू पटवारी ने क्या कहा, भाजपा ने किस तरह निशाना साधा. कांग्रेस ने किस तरह बचाव किया?    दरअसल, कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस की ओर से भोपाल प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी. कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले नेता बैठ रहे थे. इस दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सिटिंग अरेंजमेंट संभालते हुए नजर आ रहे हैं।  'कुर्सी पर बैठ चुके पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को हाथ से इशारा करते हुए पटवारी कहते हैं, "ऐसा कर लो तो हरीश चौधरी भी आ जाएंगे." जीतू पटवारी की यह बात सुनते ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तुरंत अपनी कुर्सी छोड़कर साइड की तरफ जाने लगते हैं. पटवारी उन्हें बीच में टोकते हुए कहते हैं, "आप इधर ही रुक जाओ सर", लेकिन दिग्विजय सिंह उनकी बात अनसुनी कर बगल की कुर्सी पर जाकर बैठ जाते हैं. इसके बाद उनकी खाली हुई जगह पर हरीश चौधरी बैठते हैं' . भाजपा- कांग्रेस में वर्चस्व और कुर्सी की लड़ाई  इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मुद्दा चुनाव हार का न होकर एक दूसरे की कुर्सी छीनने का है. जिस तरह से वरिष्ठ नेताओं का अपमान किया जा रहा है, उन्हें अपमानित करके ना बोलने दिया जा रहा है और ना कुर्सी पर बैठने दिया जा रहा है. यह कांग्रेस की रीति नीति जनता के सामने है. इसी तरह के बर्ताव की वजह से जनता कांग्रेस को गंभीरता से नहीं लेती है. कांग्रेस में वर्चस्व और कुर्सी की लड़ाई चल रही है, सभी नेता एक दूसरे को निपटने में लगे हैं।  पीसी शर्मा- दिग्विजय सिंह को कोई साइडलाइन करे यह संभव इस सियासी ड्रामे के वायरल होने के बाद पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने पार्टी का बचाव किया. उन्होंने कहा कि आज के समय में दिग्विजय सिंह को कोई साइडलाइन करे यह संभव नहीं है. कमलनाथ और दिग्विजय की आवश्यकता है. दिग्विजय सिंह जो कहते हैं, सोच समझकर कहते हैं. सभी सीनियर लीडर हैं, बैठकर चर्चा करेंगे आगे क्या करना है. हाईकमान फैसला करेगा। 

उद्धव खेमे में बढ़ी बेचैनी, शिंदे गुट के मंत्री के कार्यक्रम में पहुंचे संजय देशमुख

 मुंबई महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा खेला होने जा रहा है. टीएमसी में बगावत के बाद अब उद्ध ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में टूट का खतरा मंडराने लगा है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 5 लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' पर बुलाई गई अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिसके चलते 'ऑपरेशन टाइगर' के कयास लगाए जाने लगे हैं।  शिवसेना (यूबीटी) के पास मौजूदा समय में कुल 9 लोकसभा सांसद हैं, जिनमें से रविवार को हुई बैठक में सिर्फ 4 सांसद ही पहुंचे थे बाकी 5 सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया. इसे  उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।  शिवसेना (यूबीटी) की टूट के लगाए जा रहे कयास पर उद्धव ठाकरने अपनी चुप्पी तोड़ दी है. उद्धव ठाकरे ने अब साफ-साफ कह दिया है कि अगर वे जाना चाहते हैं, तो खुशी-खुशी जाएं।  आज नहीं,  कल मेरा वक्त आएगा-उद्धव महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की आशंका के बीच उद्धव ठाकरे ने एक तरह से चेतावनी के लहजे में अपने सांसदों से कहा है कि आज मेरा वक्त नहीं है, लेकिन कल जरूर आएगा. तब तक हमें सहना पड़ेगा और संघर्ष करना पड़ेगा. रविवार को मातोश्री में उद्धव ठाकरे ने अपना लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 4 ही सांसद पहुंचे थे और पांच नहीं शामिल हुए थे।  उद्धव ने कहा था कि जिन लोगों ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ी है, उन्हें एक दिन पछतावा जरूर होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. चार साल पहले पार्टी में बड़ी फूट पड़ी थी, जब 40 विधायक अलग हो गए थे. उस समय मैं राज्य का मुख्यमंत्री था. क्या लोगों को सच में लगता था कि मुझे उस बात का पता नहीं था, जो बाकी सभी लोग साफ-साफ देख और समझ सकते थे? कोई जाना चाहता है, तो वह जा सकता है-उद्धव उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना में चार साल पहते हुई बगावत की मुझे भनक लग गई थी कि क्या हो रहा है, लेकिन मैंने किसी से कुछ भी नहीं कहा, न ही उन पर कोई दबाव नहीं डाला और न ही उनके घोटालों की जांच के लिए कोई फाइल खुलवाई. अगर कोई पहले से ही जाना चाहता है, तो उसे जबरदस्ती रोकने का क्या मतलब है? ऑपरेशन टाइगर की चल रही चर्चा के बीच उद्धव ठाकरे ने बहुत अहम बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर कोई जाना चाहता है, तो वह जा सकता है. मैं बस उनके अच्छे राजनीतिक भविष्य की कामना करूंगा. इस तरह से उद्धव ठाकरे ने मान लिया है कि जिन्हें जाना है, वो पार्टी को छोड़कर जा सकता है।  उद्धव की बैठक में जो पांच सांसद नहीं पहुंचे उद्धव ठाकरे के द्वारा मातोश्री पर बुलाई गई बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के जो पांच सांसद नहीं पहुंचे थे, उसमें संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टिकर हैं. इन पांच सांसदों के कारण पार्टी में फिर से फूट पड़ने की चर्चा शुरू हो गई।  हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) खेमे ने तुरंत दावा किया कि ये सांसद बैठक में वर्चुअली (ऑनलाइन) शामिल हुए थे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उद्ध ठाकरे सिर्फ नागेश पाटिल अष्टिकर से ही सीधे बात कर पाए. वहीं, बैठक में न शामिल होने वाले शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में एकनाथ शिंदे खेमे के मंत्री प्रताप राव जाधव से मुलाकात की है, जिसके बाद सियासी चर्चा तेज हो गई।  उद्धव के सांसद शिंदे के संपर्क में है-प्रताप जाधव उद्धव ठाकरे खेमे के नेता और केंद्रीय मंत्री प्रताप राव जाधव ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सभी सांसद मेरे दोस्त हैं, हमने पहले साथ काम किया है. हमारी मुलाकात और बातचीत होती रहती है. एक बात साफ है कि शिवसेना (UBT) के कई सांसद पार्टी नेतृत्व (उद्धव ठाकरे) से वाकई नाखुश हैं।  प्रताप जाधव कहते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद उसी तरह से पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं, जैसे टीएमसी के सांसद थे. शिंदे के अगुवाई वाली ही शिवसेना असली शिवसेना हैं, जो बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों पर काम कर रही है. शिवसेना (UBT) के सभी सांसदों का हमारी पार्टी में स्वागत है. UBT के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे जी के संपर्क में हैं। 

AI मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक है: डेका; समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का शुभारंभ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं-डेका समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया राज्यपाल ने रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन  विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए। एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित में करें            राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए।  उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए। आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग          राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।  भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता          छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।  सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का कर रही है प्रयास           कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे  युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि  देने वाले बने। राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी            कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मअजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है। कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन            इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता  और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया।  इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया गु्रप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।

तक बढ़ी समर्थ सिंह और उनकी मां को राहत नहीं, कोर्ट ने 14 दिन और बढ़ाई न्यायिक हिरासत

भोपाल  भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। अदालत ने इस मामले में आरोपी ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह कि न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। CBI ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। अब दोनों आरोपी 30 जून तक जेल में रहेंगे। फिलहाल दोनों आरोपी भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद हैं। कोर्ट में दोनों आरोपियों की वर्चुअल सुनवाई की गई। सुरक्षा कारणों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। आज की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने मामले की मीडिया ट्रायल पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो रही है। गिरिबाला के वकील जॉर्ज कार्लो ने कोर्ट में कहा, मीडिया को मामलें से दूर रखा जाए। गिरिबाला और समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत बढ़ी गिरिबाला सिंह वकील ने कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि  ट्विशा के परिजनों और वकीलों को भी मीडिया में बयान देने से रोका जाए। वहीं, आज की सुनवाई के दौरान CBI ने कोर्ट से कहा, फॉरेंसिक और डिजिटल एविडेंस की स्टडी कर रहे हैं, केस से जुड़ कुछ और लोगों से पूछताछ बाकी है। CBI ने कोर्ट में कहा कि हमें अभी ट्विशा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच एजेंसी की मांग पर कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी। 30 जून तक कर जेल में रहेंगे दोनों आरोपी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को 2 जून को भोपाल की सेंट्रल जेल भेजा गया था। उस समय भोपाल कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखने के आदेश दिए थे। अब रिमांड बढ़ाकर 30 जून तक कर दी गई है। जेल में VIP ट्रीटमेंट देने का आरोप समर्थ और गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधाएं देने का भी आरोप लगा। जेल जाने के एक दिन बाद दोनों आरोपियों को बैरक से निकालकर जेल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था, जिसके बाद भारी बवाल मचा था। ट्विशा के परिवार ने इस VIP ट्रीटमेंट का विरोध जताया था। कैस हुई थी ट्विशा की मौत बता दें कि भोपाल में पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव ससुराल के टेरेस पर फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिवार ने दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मामले की जांच अब CBI कर रही है। जेल में वकील से मिलने की छूट मांगने कोर्ट पहुंचीं गिरिबाला सिंह बता दें, ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई थी, जो पेशे से वकील हैं. परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को कम दहेज लाने को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था. परिवार का कहना है कि शादी के कुछ ही समय बाद से उसके साथ लगातार मानसिक और अन्य प्रकार का उत्पीड़न किया जाने लगा था।  मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य घटना वाली रात की आखिरी फोन कॉल भी है. 12 मई 2026 की रात 9 बजकर 41 मिनट पर ट्विशा ने अपनी मां से बात की थी. परिजनों का दावा है कि बातचीत के दौरान फोन के बैकग्राउंड में उसके पति समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी. इसके कुछ ही क्षण बाद फोन अचानक कट गया।  परिजनों के अनुसार जब बाद में दोबारा फोन किया गया तो कॉल उठाने वाली गिरिबाला सिंह थीं. उन्होंने सीधे ट्विशा की मौत की जानकारी दी. इस घटनाक्रम ने परिवार की शंकाओं को और बढ़ा दिया. रिकॉर्ड के अनुसार उसी रात करीब 10 बजकर 20 मिनट पर समर्थ सिंह ट्विशा को बेहोशी की हालत में भोपाल एम्स लेकर पहुंचे थे. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।  15 मई 2026 को सामने आई शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को और उलझा दिया. रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया, लेकिन साथ ही ट्विशा के शरीर पर कई चोटों के निशान भी मिलने की बात कही गई. रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें मौत से पहले लगी थीं और संभव है कि किसी कुंद वस्तु के प्रहार से लगी हों।  दहेज प्रताड़ना के आरोपों के बीच CBI जांच पर टिकी सबकी नजर बाद में मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) ने भी की और पति समर्थ सिंह से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स में दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया और CBI ने भी इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की. अब इस पूरे मामले में दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. CBI का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. फिलहाल गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। 

पंजाब में संगठन विस्तार पर जोर, 2027 की तैयारी में आम आदमी पार्टी का बड़ा प्लान

 चंडीगढ़ पंजाब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) ने संगठन और सरकार के कामकाज को सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर जनसंपर्क अभियान शुरू करने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों और हलका इंचार्जों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले दो महीनों तक अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार लोक मिलनियां आयोजित कर लोगों के बीच रहें और सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे है। पार्टी ने संभावित चुनावी उम्मीदवारों को हर दिन तीन लोक मिलनियां आयोजित करने का लक्ष्य दिया है। इन बैठकों के जरिए न केवल सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी दी जा रही है, बल्कि क्षेत्र के लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को भी जाना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि 15 अगस्त तक हर विधानसभा क्षेत्र के सभी गांवों और प्रमुख शहरी वार्डों तक पहुंच बनाई जाए। 2027 की शुरुआती चुनावी तैयारी पार्टी के अंदर इसे 2027 के लिए शुरुआती चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पहले से ही विभिन्न इलाकों में लोक मिलनियां कर रहे हैं, जबकि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल समेत कई मंत्री भी अपने-अपने क्षेत्रों में जनसभाएं और संवाद कार्यक्रम शुरू कर चुके हैं। जिन विधायकों और हलका इंचार्जों को पार्टी संभावित उम्मीदवार मान रही है, उन्हें अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए रंगला पंजाब फंड से राशि भी उपलब्ध कराई जा सकती है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए करीब 10 करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की योजना बनाई गई है, ताकि चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर काम दिखाई दे सके। जनाप्रतिनिधियों को बाहर न जाने की सलाह पार्टी नेतृत्व ने जनप्रतिनिधियों को अगले दो महीनों तक अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधिकतम समय देने और अनावश्यक रूप से क्षेत्र से बाहर न जाने की सलाह भी दी है। वहीं, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी आने वाले समय में व्यापारियों और उद्योग जगत से जुड़े वर्गों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं, जिससे पार्टी का समर्थन आधार और व्यापक बनाया जा सके। मानना है कि लगातार जनसंपर्क, विकास कार्यों की प्रस्तुति और लाभार्थी वर्गों से सीधा संवाद, आप की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। पार्टी इस अभियान के जरिए सरकार की योजनाओं को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश में जुटी है।

ड्रग्स फैक्ट्री कार्रवाई पर उठे सवाल, कोर्ट के आदेश के बाद 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज

आगर मालवा  मध्य प्रदेश के आगर मालवा पुलिस की कार्रवाई पर राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने दो टीआई समेत 100 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। लेकिन पिछले दो दिनों से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बीती रात प्रकरण दर्ज हुआ है। तत्कालीन एसपी विनोद सिंह ने बताया था कि 28 जनवरी को दी गई दबिश के दौरान बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद करने का दावा किया था। राजस्थान में मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामला जनवरी 2026 में राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में हुई NDPS कार्रवाई से जुड़ा है। चौमहला कोर्ट के 13 जून को दिए आदेश पर डग थाने में सोमवार (15 जून) को आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस ने कहा कि जांच में अन्य आरोपियों की पहचान भी की जाएगी। बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ पकड़ने का दावा किया था 21 जनवरी 2026 को आगर पुलिस ने फैजान नाम के युवक को 330 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने बताया था कि ड्रग्स घाटाखेड़ी के शाहिर, मुनव्वर और ताहिर से लाया था। एसपी विनोद सिंह के मुताबिक फैजान की निशानदेही पर 28 जनवरी को 80 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ दबिश दी गई थी। यहां बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद करने का दावा किया गया था। इस दौरान दो भाई शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा गिरफ्तार किए गए थे। पांच पॉइंट्स, जिनसे कार्रवाई पर उठे सवाल     आगर मालवा के तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्रवाई के दौरान दो बंदूकें, एक ग्राइंडर मशीन और दो ड्रम जब्त करने का दावा किया था। जांच के दौरान सामान नया दिखने पर सवाल उठे, लेकिन एसपी ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया था।     दावा किया गया कि कार्रवाई में राजस्थान पुलिस भी शामिल थी, लेकिन जांच में सामने आया कि उसे इसकी जानकारी ही नहीं थी।     एसपी विनोद कुमार सिंह ने कहा था कि ई-साक्ष्य ऐप से कार्रवाई की रिकॉर्डिंग की गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि वीडियोग्राफी नहीं हुई थी।     पुलिस रिकॉर्ड में शाहिर की गिरफ्तारी सुबह 4:40 बजे, मुनव्वर की 4:45 बजे और जब्ती 5:40 बजे दर्शाई गई। जांच में वीडियोग्राफी और सीसीटीवी से सामने आया कि आगर पुलिस की डग थाना क्षेत्र में आखिरी मौजूदगी 5:05 बजे तक ही थी।     बताया गया कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन घाटाखेड़ी में करीब 30 मिनट ही रुके थे। इसी दौरान तलाशी, गिरफ्तारी, जब्ती और अन्य कार्रवाई का दावा किया गया, जबकि इतने कम समय में NDPS अधिनियम की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं था। परिवार ने शुरुआत से पुलिस कार्रवाई को फर्जी बताया गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान शुरुआत से ही कार्रवाई को फर्जी बताते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने स्थानीय राजस्थान पुलिस को सूचना दिए बिना घर में प्रवेश किया, परिजन से बदसलूकी की और उनके बेटों को झूठे NDPS प्रकरण में फंसाया। जानें जांच में क्या-क्या सामने आया? कोर्ट के आदेश पर पुलिस विभाग के जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच में सामने आया कि पुलिस द्वारा किए गए जब्ती के दावे से संबंधित कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे और वीडियोग्राफी का दावा भी झूठा था। इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में केवल 30 मिनट ही रुके थे, जबकि इतने कम समय में एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है। इस कार्रवाई पर अब कानूनी सवाल उठ रहे इसी जांच रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट और पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा व शुभम सहित पूरी टीम पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। ऐसे में अब कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा यहां से की गई पांच करोड़ की मादक पदार्थ जब्ती की कार्रवाई का खुलासा मध्य प्रदेश में टीम द्वारा किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई पर अब कानूनी सवाल उठ रहे हैं। दस लाख रुपये मांगने का भी पुलिस पर आरोप इस्तगासे में पीड़ित ने बताया कि उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने कहा कि किसान लोग इतने रुपये कहां से लाएंगे और रुपये देने में असमर्थता जताई, तो उन्हें आगर थाने ले जाया गया। वहां गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों के खिलाफ दो किलो एमडी, 1 किलो स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम, 2 राइफलें आदि यानी 5 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त होना बताकर केस दर्ज कर दिया गया। जबकि इनके परिवार के घरों की तलाशी लेने पर 1 ग्राम सामग्री यानी कुछ भी नहीं मिला। केवल एक लाइसेंसशुदा एकनाली बंदूक, एक एयर गन और 7 मोबाइल जब्त किए गए। शाहिर खान और मनोवर खान को पकड़कर ले जाया गया था और वहां ले जाकर उनके ऊपर मादक पदार्थ की सामग्री का केस बना दिया गया। तलाशी-गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े रिकॉर्ड नहीं मिले हमीद खान ने 21 फरवरी 2026 को चौमहला कोर्ट में परिवाद (शिकायती आवेदन) दायर किया। कोर्ट ने उसी दिन जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़ अमित को जांच के आदेश दिए। एसपी ने जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) भागचंद्र मीणा को सौंपी। एएसपी मीणा ने आगर आकर दबिश में शामिल थाना प्रभारी शशि उपाध्याय समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान लिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई रिकॉर्ड नहीं मिले। जांच रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर FIR के आदेश जांच रिपोर्ट और उपलब्ध सबूतों पर विचार के बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद डग थाने में शशि उपाध्याय, रूप सिंह राजपूत, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई … Read more

अमेरिका में बड़ा विमान हादसा, B-52 बॉम्बर क्रैश; 8 लोगों ने गंवाई जान

कैलिफोर्निया अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर सोमवार को भयानक हादसा देखने को मिला. यहां B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर विमान हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई. विमान नियमित टेस्ट्स मिशन पर था और स्थानीय समय के मुताबिक 11.20 am पर उड़ा भरी. उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद ये क्रैश हो गया. अमेरिकी वायुसेना ने इसे असहनीय और दुखद हादसा बताया है. एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के अधिकारियों के मुताबिक हादसा इतना भीषण था कि उसमें किसी के बचने की संभावना नहीं थी. दुर्घटना के बाद घटनास्थल से काले धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया।  वायुसेना ने बताया कि विमान रडार आधुनिकीकरण कार्यक्रम से जुड़े एक टेस्ट मिशन पर था. हादसे में मारे गए लोगों में सैन्य अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और सरकारी ठेकेदार शामिल थे. अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह दुर्घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि B-52 अमेरिकी वायुसेना के सबसे प्रतिष्ठित और लंबे समय से सर्विस में मौजूद विमानों में से एक है।  आखिर क्यों बनाया गया था B-52? B-52 का विकास 1950 के दशक की शुरुआत में शीत युद्ध (Cold War) के दौरान किया गया था. उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच परमाणु हथियारों की होड़ चरम पर थी. अमेरिका को ऐसे विमान की जरूरत थी जो हजारों किलोमीटर दूर तक उड़कर परमाणु बम पहुंचा सके और दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर सके. इसी टार्गेट को लेकर अमेरिकी कंपनी बोइंग ने B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस का निर्माण किया. यह विमान पहली बार 1952 में उड़ा और 1955 में अमेरिकी वायुसेना में शामिल किया गया।  B-52 हुआ क्रैश. B-52 की सबसे बड़ी खासियतें     ये करीब 31,700 किलोग्राम तक बम और मिसाइलें ले जाने की क्षमता रखता है.     लंबी दूरी तक बिना रुके उड़ सकता है. रास्ते में रीफ्यूलिंग की जरूरत पड़ सकती है.     पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियार ये ले जा सकता है.     हवा में ईंधन भरने के बाद लगभग दुनिया के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकता है.     ये क्रूज मिसाइलों और परमाणु हथियारों को लॉन्च करने में सक्षम है.     मौजूदा B-52H संस्करण आज भी अमेरिकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का अहम हिस्सा है. किन-किन युद्धों B-52 का हुआ इस्तेमाल हुआ?     वियतनाम युद्ध: 1960 और 1970 के दशक में B-52 ने वियतनाम युद्ध में बड़े पैमाने पर बमबारी की. ‘ऑपरेशन लाइनबैकर’ जैसे अभियानों में इसका व्यापक इस्तेमाल हुआ. अमेरिका का एक B-52 क्रैश भी हुआ और एक झील में गिर गया. इसी कारण वियतनाम में आज भी B-52 लेक है, जहां उसका मलबा पड़ा है।      1991 का खाड़ी युद्ध : इराक के खिलाफ ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म में B-52 ने लंबी दूरी से भारी बमबारी कर अमेरिकी सेना को बढ़त दिलाई।      अफगानिस्तान युद्ध: 2001 में 9/11 हमलों के बाद अफगानिस्तान में तालिबान और अल-कायदा के ठिकानों पर हमलों में इस विमान का इस्तेमाल किया गया।      इराक युद्ध: 2003 में इराक पर अमेरिकी हमलों के दौरान भी B-52 ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।      ISIS के खिलाफ हमले: सीरिया और इराक में ISIS के ठिकानों पर भी B-52 से हमले किए गए।      ईरान युद्ध: हालिया अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान भी B-52H बमवर्षकों को मिशनों में तैनात किया गया था. इसकी मौजूदगी को अमेरिका की सैन्य चेतावनी के तौर पर देखा जाता है।  B-52 अब नहीं बनते हैं दिलचस्प बात यह है कि B-52 का उत्पादन 1962 में ही बंद हो गया था. इसके बावजूद अमेरिकी वायुसेना लगातार इसे आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करती रही है. फिलहाल अमेरिकी वायुसेना के पास B-52H के 76 विमान हैं. अमेरिका ने हाल ही में इसके नए इंजन और आधुनिक रडार सिस्टम लगाने के लिए अरबों डॉलर का प्रोजेक्ट शुरू किया है, ताकि यह विमान 2050 के दशक तक सेवा में बना रह सके। 

खुद पर लगे आरोपों को भगवंत मान ने किया खारिज, कहा- छवि खराब करने की कोशिश जारी

चंडीगढ़ पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त के फैसले पर अपनी सफाई दी. उन्होंने कहा कि पिछले दिन तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की ओर से एक वीडियो के संबंध में मेरे खिलाफ कुछ हुकमनामे जारी किए गए हैं. भगवंत मान ने कथित विवादित वायरल वीडियो को को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।  सीएम भगवंत मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स दिखाई दे रहा है वह मैं नहीं हूं. मैं हैरान हूं कि पंथ के इतने बड़े ओहदे पर बैठे लोग सियासी मोहरे की तरह काम कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स है, न तो उसके चेहरा-मोहरा मिलता है और न ही कद काठी मुझसे मिलती है, उसके शारीरिक बनावट पूरी तरह उनसे बिल्कुल अलग है. ये मेरे खिलाफ एक प्रोपेगंडा है।  सीएम भगवंत मान ने कहा कि मैं पंजाब में गुरु की बाणी, पानी, किसानी और जवानी के लिए जो सरकारी फैसला ले रहा हूं वह मेरे विरोधियों को बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं. इसलिए मुझे बदनाम करने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं और इसके लिए धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. मान ने कहा कि मैं श्री अकाल तख्त को सर्वोच्च संस्था मानता हूं और उसके आगे नतमस्तक होता हूं।  भगवंत मान ने कहा  श्री अकाल तख्त से मत्था लगाने के बारे में न तो मैं सोच सकता हूं और न ही मेरी आने वाली कई पीढ़ियां ऐसा सोच सकती हैं लेकिन श्री अकाल तख्त पर जो सियासी नियुक्तियां हुई हैं और ये लोग जिस तरह के फैसले ले रहे हैं, वह सारी संगत अच्छी तरह जानती है।  ऐसे समय में जब अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान हाल ही में 2027 चुनाव के लिए पार्टी का चेहरा घोषित किया, यह विवाद पंजाब की चुनावी राजनीति पर कितना असर डालेगा, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है ।  1. आखिर कौन सा वीडियो बना भगवंत मान के लिए मुसीबत? पूरा विवाद एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें एक व्यक्ति कथित तौर पर हाथ में शराब का गिलास लिए सिख गुरुओं और जनरल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों पर शराब के छींटे मारता दिखाई देता है. वीडियो सामने आने के बाद इसे सिख धार्मिक भावनाओं और मर्यादा के अपमान से जोड़कर देखा गया. विपक्षी दलों और कई धार्मिक संगठनों ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं. हालांकि, शुरुआत से ही आम आदमी पार्टी और भगवंत मान इस दावे को खारिज करते रहे. सीएम भगवंत मान से जुड़ा यह वीडियो दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में खूब वायरल हुआ था।  2. भगवंत मान ने क्या कहा था? वीडियो वायरल होने के बाद भगवंत मान ने आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उनका कहना था कि वीडियो नकली है और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से तैयार किया गया है. उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक विरोधी उनकी छवि खराब करने और पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह की सामग्री फैला रहे हैं. मान ने यह भी कहा कि किसी वीडियो की मौजूदगी मात्र से उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान सिद्ध नहीं हो जाती।  5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने भगवंत मान को तलब किया और वीडियो की सत्यता की जांच कराने की घोषणा की. 15 जनवरी को मान अकाल तख्त के समक्ष पेश भी हुए।  3. अकाल तख्त की रिपोर्ट में क्या निकला? वायरल वीडियो को बेअदबी का गंभीर मामला मानते हुए इसे गंभीरता को देखते हुए अकाल तख्त ने जनवरी 2026 में भगवंत मान को तलब किया. मुख्यमंत्री ने पेश होकर अपना पक्ष रखा और कुछ दस्तावेज भी जमा कराए. इसके बाद वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञ संस्थानों के पास भेजा गया।  जून 2026 में सामने आई रिपोर्ट में कहा गया कि वीडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग या एआई जनरेशन के संकेत नहीं मिले. रिपोर्ट के आधार पर अकाल तख्त ने माना कि वीडियो तकनीकी रूप से प्रामाणिक है. हालांकि रिपोर्ट में यह प्रश्न अलग बना रहा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से भगवंत मान हैं या नहीं।  4. अकाल तख्त ने भगवंत मान को पंथ विरोधी क्यों घोषित किया? जून 2026 में सामने आए फॉरेंसिक रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु द्रोही" और "पंथ विरोधी" घोषित किया. धार्मिक नेतृत्व का तर्क था कि वीडियो में दिखाई गई गतिविधि सिख परंपराओं और गुरुओं के सम्मान के खिलाफ है. मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की।  आकल तख्त ने सिख समुदाय से अपील की गई कि वे इस मामले को गंभीरता से लें. यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है और उसके निर्णयों का पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक चर्चा पर प्रभाव पड़ता है।  15 से 16 जून 2026 को पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु-दोखी" और "खालसा पंथ विरोधी" घोषित किया. अकाल तख्त का कहना है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े घटनाक्रम ने सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई तथा मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की।  5. विपक्षी दलों ने इस विवाद को कैसे भुनाया? अकाल तख्त के फैसले के बाद कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल तीनों ने मुख्यमंत्री पर दबाव बढ़ा दिया. बीजेपी ने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री खुद ऐसे विवाद में घिरे हैं तो राज्य में नशा मुक्ति और नैतिक शासन की बात कैसे कर सकते हैं. कांग्रेस ने इसे नैतिकता का मुद्दा बताते हुए इस्तीफे की मांग की. वहीं अकाली दल ने इसे सिख मर्यादा और धार्मिक सम्मान का प्रश्न बताते हुए अकाल तख्त के फैसले का खुलकर समर्थन किया. इससे विपक्ष को लंबे समय बाद एक ऐसा मुद्दा मिला है जिस पर लगभग सभी दल एक सुर में दिखाई दे रहे हैं।  6. आम आदमी पार्टी का बचाव क्या है? आम आदमी पार्टी का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल यह बताती है कि वीडियो तकनीकी रूप से असली है, लेकिन इससे यह साबित … Read more

दहलीज पर ठहरा मानसून, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कब बरसेंगे बादल? IMD ने दिया अपडेट

भोपाल / रायपुर   दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon 2026) की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है. दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है, तो वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद मानसून बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रुक गया है. मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 16 राज्यों में बारिश का इंतजार बढ़ गया है।  मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ वालों को करना होगा मानसून का इंतजार मौसम विभाग के अनुसार, 13 जून 2026 तक केरलम, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, असम, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक मानसून पहुंच चुका है. वहीं छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश,जम्मू खस्वीर,पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को अभी थोड़ा और इंतेजार करना होगा।   छत्तीसगढ़ की दहलीज पर अटका मानसून बता दें कि मानसून की रफ्तार फिलहाल छत्तीसगढ़ की दहलीज पर आकर अटक गया है. इधर, मौसम विभाग ने बताया कि 15 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के बचे हुए हिस्सों- तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है।  मौसम विभाग ने बताई संभावित तारीख मौसम विभाग ने बताया कि अगले 4-5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगी. बता दें कि छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मानसून की दस्तक 13 जून और मध्य प्रदेश में 15 जून के आसपास हो जाती है, लेकिन इस मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने के कारण इसकी रफ्तार थम गई है. मौसम विभाग की माने तो मध्य प्रदेश में 18-19 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक दे सकता है. हालांकि दोनों राज्यों में प्री मानसून एक्टिव है, जिसके चलते लगातार बारिश हो रही है।  MP-छत्तीसगढ़ में प्री मानसून एक्टिव इस बीच मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई स्थानों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना है. कई जगहों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी भी चल सकता है. वहीं मध्य प्रदेश में 30 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. राजधानी भोपाल, सागर, रायसेन, सीहोर में तेज बारिश होगी, जिससे मौसम सुहाना रहेगा. हालांकि कई जिलों में तेज धूप रहेगी।