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सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: लक्ष्मी राजवाड़े

सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ -लक्ष्मी राजवाड़े  मंत्री, महिला एवं बाल विकास, छत्तीसगढ़ शासन     रायपुर  विकास का अर्थ केवल नई सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार नहीं है। विकास तब सार्थक होता है, जब एक महिला अपने भविष्य के निर्णय आत्मविश्वास से ले सके, एक मां को अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता में सहयोग मिले और हर बच्चे को पोषण, शिक्षा तथा सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी मानवीय सोच को जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने का अवसर है।     प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य है कि योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ उन परिवारों तक भी पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। महिलाओं का आत्मविश्वास ही समाज की शक्ति     छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। आज वे अपनी मेहनत और प्रतिभा से उद्यमिता तथा सामाजिक नेतृत्व में भी नई पहचान बना रही हैं। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार के खर्च से जुड़े निर्णय लेने में संबल दिया है। किसी ने इस राशि से बचत शुरू की है, तो किसी ने इसे छोटे आजीविका प्रयासों का आधार बनाया है।     स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाएं बचत, कौशल और उद्यम से जुड़ रही हैं। हमारा प्रयास है कि उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आगे बढ़ने के अवसर भी मिलें। जब महिला आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार के जीवन पर पड़ता है। आँगनवाड़ी से जुड़ें परिवार और समुदाय     एक स्वस्थ और सक्षम समाज की नींव बचपन में पड़ती है। आँगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ माताओं को आवश्यक जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन केंद्रों की सफलता में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों के साथ परिवार और समुदाय का सहयोग भी जरूरी है। ‘हमारी आँगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ इसी साझा दायित्व की भावना को व्यक्त करता है।     25 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘आँगन मिलन’’ इस भागीदारी को और मजबूत करेगा। इस दौरान अभिभावकों और समुदाय के लोगों को आँगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जुड़ने, बच्चों के भोजन और स्वच्छता की व्यवस्था को समझने तथा पोषण पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। घर में बच्चों को क्या खिलाया जाए, भोजन में विविधता कैसे लाई जाए और स्वच्छता की अच्छी आदतें कैसे विकसित हों-इन विषयों पर संवाद पोषण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाएगा।          पोषण केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। बच्चे को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार मिले, उसकी वृद्धि पर ध्यान दिया जाए और परिवार उसकी देखभाल में सक्रिय रहे-यह हम सबकी जिम्मेदारी है। ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सोच को हर घर तक ले जाने का आह्वान है। सुरक्षित बचपन के लिए साझा संकल्प     हर बच्चे को भय और शोषण से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए। बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों का सामना केवल कानून के भरोसे नहीं किया जा सकता। परिवार, विद्यालय, पंचायत, आँगनवाड़ी और समुदाय को मिलकर सजग रहना होगा। बच्चों की बात सुनना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और आवश्यकता पड़ने पर समय से सहायता पहुंचाना सुरक्षित बचपन की दिशा में आवश्यक कदम हैं।     सेवा संकल्प अभियान हमें याद दिलाता है कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों तक पहुंचना और उनकी जरूरतों को समझना है। किसी मां को पोषण संबंधी सही जानकारी मिलना, किसी महिला को आजीविका का अवसर मिलना और किसी बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिलना-यही इस अभियान की सार्थक उपलब्धियां होंगी।     आइए, ‘आँगन मिलन’ से शुरू होने वाले संवाद और सहभागिता को निरंतर बनाए रखें। जब परिवार, समुदाय और शासन साथ मिलकर जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित, सुरक्षित बचपन के संकल्प से विकसित छत्तीसगढ़ का आधार मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का आगाज, MP में आज से शुरू होगी नई सुविधा

मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू होगी. 15 हजार बसों, PPP मॉडल, GPS-CCTV, डिजिटल ट्रैकिंग और EV-CNG बसों की योजना है।  भोपाल  मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया है कि आने वाली तारीख 25 सितंबर से 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' शुरू की जाएगी. करीब दो दशक बाद प्रदेश में राज्य परिवहन व्यवस्था को नए मॉडल के साथ फिर से खड़ा करने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज 25 सितंबर को बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत सावर्जनिक यात्री बसों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत शुरू होने वाली इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके अंतर्गत सड़कों पर दौड़ने वाली बसों का स्टेयरिंग एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित ड्राइवरों के हाथों में होगा। इसके लिए बस चालकों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों से परिचित कराने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नई तकनीक वाली बसों का सुरक्षित और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पैनिक बटन और जीपीएस से बढ़ेगी सुरक्षा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस की सुविधा रहेगी। जीपीएस के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी। पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करेगा। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट-2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य नागरिकों को सरल, सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बस सेवा उपलब्ध कराना है. सरकार की योजना में भविष्य में प्रदेश में करीब 15 हजार बसों के संचालन की क्षमता विकसित करने की बात कही गई है।  20 साल बाद नई व्यवस्था के साथ बस सेवा की वापसी 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट का प्लान परिवहन सचिव मनीष सिंह के मुताबिक, प्रदेश के सभी 55 जिलों में रूट सर्वे किया जा चुका है. डेटा के आधार पर करीब 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट विकसित किए जाने की योजना है।  बसों में CCTV, GPS, पैनिक बटन और रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा होगी. साथ ही EV और CNG बसों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।  सरकार की व्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे      PPP मॉडल के तहत बस संचालन     Intelligent Transport Management System (ITMS)     आधुनिक बस टर्मिनल, बस स्टैंड, डिपो और बस स्टॉप का विकास सरकार का लक्ष्य है कि यात्रियों को 'सही बस, सही मार्ग और सही समय' के आधार पर भरोसेमंद परिवहन सेवा मिल सके।  भोपाल-इंदौर में Rapido के साथ पायलट प्रोजेक्ट समिट के दौरान MPYPIL और Rapido के बीच फर्स्ट और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एमओयू भी हुआ. इसके तहत बस स्टैंड, बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशन जैसी परिवहन सुविधाओं की जानकारी Rapido के तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ी जाएगी।  महिलाओं की संचालित Rapido Pink बाइक-टैक्सी सेवा को भी बढ़ावा देने की योजना है. शुरुआती चरण में यह व्यवस्था भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू की जाएगी।  15 हजार बसों के साथ रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में करीब 5 लाख किमी का सड़क नेटवर्क है और यहां 15 हजार से अधिक बसें चलाने की संभावना है. प्रदेश में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करना सरकार के लिए चुनौती के साथ बड़ा अवसर भी है. उन्होंने निजी बस ऑपरेटरों, बस निर्माता कंपनियों, इंडस्ट्री पार्टनर्स और अन्य हितधारकों से मध्यप्रदेश की इस विकास यात्रा में भागीदार बनने की अपील की।  मुख्यमंत्री के मुताबिक नई बस सेवा से यात्रियों के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।  ई-बस और ग्रीन मोबिलिटी पर जोर नई परिवहन व्यवस्था में पर्यावरण-अनुकूल तकनीक को भी प्राथमिकता दी जा रही है. इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि PPP मॉडल पर तैयार होने वाला क्लीन और सेफ बस सिस्टम गांवों को शहरों से जोड़ेगा।  वहीं, एका मोबिलिटी के अध्यक्ष सुधीर मेहता ने बताया कि कंपनी पीथमपुर में अपना इलेक्ट्रिक बस निर्माण संयंत्र स्थापित कर रही है. इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 हजार ई-बसों की बताई गई है।  MP Mobility Innovation Challenge भी लॉन्च समिट में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने MP Mobility Innovation Challenge 2026 की भी शुरुआत की. इसका उद्देश्य प्रदेश की वास्तविक परिवहन समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीक और इनोवेशन तलाशना है।  चैलेंज में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस रहेगा     AI और डेटा आधारित इंटेलिजेंट मोबिलिटी     वित्तीय और परिचालन स्थिरता     समावेशी मोबिलिटी     इंफ्रास्ट्रक्चर और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी     ग्रीन मोबिलिटी इस पहल के जरिए स्टार्टअप, MSME, शोधकर्ता, शैक्षणिक संस्थान और नवप्रवर्तक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में भाग ले सकेंगे।  25 सितंबर को मिलेगा ‘प्रदेश की अपनी बस सेवा’ का तोहफा मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान शुरू होगा और 25 सितंबर को प्रदेशवासियों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए ‘प्रदेश की अपनी बस सेवा’ की सौगात मिलेगी।  इस योजना के जरिए सरकार सार्वजनिक परिवहन को सिर्फ बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे डिजिटल, सुरक्षित, तकनीक-सक्षम, पर्यावरण-अनुकूल और यात्री-केंद्रित व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।  7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी, भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें 23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें 14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 … Read more

मुख्यमंत्री बोले- अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का किया काम

विदेशी आक्रांताओं ने भारत का वैभव ही नहीं लूटा, ज्ञान परंपरा को भी नष्ट करने का किया प्रयास: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर सप्त दिवसीय समारोह के व्याख्यान-सत्र का शुभारंभ   मुख्यमंत्री बोले- अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का किया काम   मुख्यमंत्री ने कहा- भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण था विश्वगुरु, तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय इसके प्रमाण   मुख्यमंत्री बोले- सत्य को प्रमाण के साथ रखना होगा, विरोधी असत्य बताएंगे और दुष्प्रचार करने वाले पैदा करेंगे संशय   मुख्यमंत्री ने कहा- भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का किया आह्वान   गोरखपुर  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत का वैभव लूटना नहीं था, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा और बुद्धि को नष्ट करना भी था। मंदिरों पर हमले इसी सोच का हिस्सा थे। ब्रिटिश काल में तरीका बदला और भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया। अब अपनी ज्ञान परंपरा को पहचानने, उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का समय है।   मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान-सत्र को संबोधित कर रहे थे।   मंदिरों पर हमले के पीछे सनातन परंपरा पर प्रहार की सोच मुख्यमंत्री ने रामायण काल में दंडकारण्य में ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राक्षसी और दानवी शक्तियां हों या विदेशी आक्रांता, भारत पर हमले का उद्देश्य वैभव लूटने के साथ उसकी ज्ञान धरोहर को नष्ट करना भी रहा। उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर को तोड़ने का उद्देश्य केवल लूटपाट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को नष्ट करना भी था।   अंग्रेजों ने भ्रम पैदा कर जड़ों से काटा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया। भारतीयों को अपनी भाषा, चिकित्सा पद्धति और ज्ञान परंपरा को लेकर भ्रमित किया गया। संस्कृत के स्थान पर अंग्रेजी और परंपरागत चिकित्सा पद्धति के स्थान पर आधुनिक चिकित्सा को महत्व दिया गया। परिणाम यह हुआ कि हम धीरे-धीरे अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से कटते गए।   ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु था भारत मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था। आज के कई विकसित देशों का इतिहास 400 से 500 वर्षों का है, जबकि भारत में 2600 वर्ष पहले तक्षशिला और करीब 1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप भी ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे।   उन्होंने कहा कि कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं था। प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में संत और विद्वान अपने शोध और नवाचार पर चर्चा करते थे। भारतीय समाज ने अपने पर्व, त्योहार और मांगलिक कार्यों को आज भी भारतीय पंचांग से जोड़ रखा है।   एक लाख से अधिक पांडुलिपियों का हो रहा संरक्षण मुख्यमंत्री ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं और उनके संरक्षण तथा डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है। परिवारों, विद्वानों के घरों, प्राचीन मठों और मंदिरों में भी ऐसी ज्ञान धरोहर मौजूद है। अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और शिलालेख मिले हैं।   सत्य के साथ प्रमाण भी रखना होगा योगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में तीन पक्ष सामने होंगे। पहला सत्य का है, इसलिए जो भी कहें, प्रमाणित करके कहें। दूसरा विरोधियों का है, जो उसे असत्य ठहराने का प्रयास करेंगे और तीसरा दुष्प्रचार करने वालों का है, जो संशय पैदा करेंगे। तकनीक ऐसे संशय को दूर करने में बड़ी मदद कर सकती है। इसे समयानुकूल बनाकर ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा।   पाणिनि से चाणक्य तक की विरासत को जानें मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा, व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद, शिल्प और तकनीक समेत हर क्षेत्र में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है। नई पीढ़ी को पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेद के आचार्यों और चाणक्य के अर्थशास्त्र जैसी विरासत से परिचित कराना होगा। करीब तीन हजार वर्ष पहले नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि श्रवण परंपरा से प्राप्त ज्ञान को लिपिबद्ध करने के लिए एकत्र हुए थे।   जड़ों से कटकर विकास संभव नहीं: विश्वकर्मा उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना में भारतीय ज्ञान परंपरा के सूत्र मौजूद हैं। अपनी जमीन और मूल से कटकर विकास संभव नहीं है। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर ही भारत विश्वगुरु के पथ पर आगे बढ़ सकता है।   नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ें: रामनाथन आईआईटी बीएचयू के प्रो. वी. रामनाथन ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने ज्ञान को हमेशा प्राथमिकता दी है। नई पीढ़ी को आधुनिक माध्यमों से अपनी विरासत की जानकारी देनी होगी। अपनी धरोहर को भूलना समाज में अलगाव का कारण बनता है।   संस्कारयुक्त शिक्षा लोककल्याण का माध्यम: श्रीधराचार्य जगद्गुरु स्वामी श्रीधराचार्य ने कहा कि संस्कार के अभाव वाली शिक्षा अमंगलकारी है। भारतीयता से जुड़ी शिक्षा लोककल्याण का माध्यम बनती है। ज्ञान वही है, जो मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाए।   योग केवल आसन नहीं: विश्वेश प्रपन्नाचार्य जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, आसन, ध्यान और समाधि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय योग परंपरा व्यापक है। इसे केवल आसन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद व्याख्यान-सत्र की शुरुआत संतों ने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। कार्यक्रम में जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा, महंत नारायण गिरि, महंत राजू दास, महंत शेरनाथ, स्वामी नरसिंह दास, महंत राम बालक दास व अन्य संतजन के साथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े संस्थानों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

35.42 लाख पेंशन हितग्राहियों को मिली राहत, देवास में CM मोहन यादव ने किया राशि ट्रांसफर

 देवास मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है। देवास में गुरुवार को कई कार्यक्रम हुए, जिसमें मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सिंगल क्लिक पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वितरण किया, इसी कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअल जुड़े, उन्होंने बाइक राइडर्स से संवाद किया और उनके अनुभव पूछे। मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार को देवास में बाइक राइडर्स के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवाद किया। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन का पैसा सीएम मोहन यादव ने सिंगल क्लिक पर 35.42 लाख हितग्राहियों के खाते में डाला। यह आयोजन देवास जिले के पुंजापुरा में हुआ। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, बागली विधायक भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवास जिले के पुंजापुरा में "सेवा संकल्प अभियान" अंतर्गत वड़नगर से वाराणसी सेवा यात्रा कार्यक्रम में सेवा संकल्प बाइक राइडर्स से वर्चुअली संवाद किया। प्रधानमंत्री ने ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ में शामिल देवास के दीपेश गोटी से संवाद किया। आपने तो गुजराती और राजस्थानी को पीछे छोड़ दिया पीएम नरेंद्र मोदी ने जब बाइक राइडर्स से बात कर रहे थे तो ऐसा वाकया भी हुआ जब जमकर ठहाके लग गए। देवास जिले के पुंजापुरा में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने यात्रा में शामिल शाजापुर जिले के दीपेश गोठी से बात कर रहे थे। मोदी ने दीपेश से पूछा कि यात्रा के दौरान जिनसे मिल रहे हो उनसे कुछ सीखने को मिला क्या? इस पर दीपेश ने कहा कि हम अलग-अलग क्षेत्रों की भाषा सीखने का प्रयास करते हैं। वहीं पीएम मोदी ने पूछा कि आप वडनगर में किसी से पहचान बनाई है कि छोड़ दिया सब। इस पर दीपेश ने कहा कि मैं वहां के व्यापारियों का नंबर लेकर आया हूं, क्योंकि मेरा भी व्यापार है। इस पर पीएम ने दीपेश से कहा कि अच्छा आपने तो सेवा के साथ अपना काम भी कर लिया। इस पर दीपेश के साथ बैठे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सहित अन्य ठहाके लगाकर हंसे। पीएम ने कहा कि आपने तो गुजराती और राजस्थानी को हरा दिया। अच्छी बात है कि मप्र का मिजाज एंटरप्रेन्योर का बन रहा है। मप्र का जवान भी व्यापार-कारोबार में रुचि ले रहा है। मोदी ने हरदा की माहेश्वरी धर्मशाला में भी बाईक राइडर्स से वर्चुअल संवाद किया। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने सहभागिता की। इस अवसर पर प्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग, पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रभुराम चौधरी, पूर्व मंत्री कमल पटेल सहित पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पीएम के लिए क्या बोले मोहन यादव इस मौके पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात भी बदला और देश भी बदला है। हमें गर्व है कि गुजरात से मुख्यमंत्री के रूप में तीन बार प्रदेश का नेतृत्व करने वाले नरेंद्र मोदी आज तीन बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में भारत को नई दिशा दे रहे हैं। यह वास्तव में एक अनूठा समय है। हमने राम राज्य की कल्पना साहित्य में पढ़ी और सुनी है। आज प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर राम राज्य की भावना को साकार करने का कार्य किया है। गरीब से गरीब व्यक्ति के पक्के मकान, उसके घर का चूल्हा, रोजगार और बच्चों की शिक्षा की चिंता करते हुए सरकार निरंतर जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ा रही है। बस सेवाओं के लिए क्या बोले सीएम मोहन यादव ने कहा कि कल पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर मुझे प्रसन्नता है कि 21 वर्ष पहले बंद हुई मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम की बस सेवाएं पुनः प्रारंभ होने जा रही हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण हो चुका है और गांव-गांव तक सड़क एवं हाई-वे कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के साथ आवागमन की सुविधाओं को और सुदृढ़ करने के लिए सड़क परिवहन निगम की बसें तीन स्तरों पर संचालित की जाएंगी। नगरीय क्षेत्रों में, प्रदेश के भीतर विभिन्न मार्गों पर तथा अंतरराज्यीय मार्गों पर। इससे प्रदेश के यात्रियों को आवागमन की बेहतर और सुविधाजनक सेवा उपलब्ध होगी। पुलिस के 18000 पदों पर भर्ती प्रदेश में पुलिस इंस्पेक्टर से लेकर जवान तक 18,000 पदों पर भर्ती की जा रही है। इसके साथ ही सरकार द्वारा कुल 85,000 नए पदों पर भर्ती का कार्य किया जा रहा है। एमएसएमई के माध्यम से प्रदेश के 1 करोड़ 20 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर देश के राज्यों में सबसे कम है, यह हमारे लिए गर्व की बात है। हमारे बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए सरकार लैपटॉप, साइकिल और किताबों के साथ स्कूटी भी प्रदान कर रही है, ताकि वे अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ सकें। कांग्रेस ने लोगों को प्यासा रखा मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के लोगों ने वर्षों तक इस क्षेत्र को प्यासा रखा। खेत सूखे रहे और लोग गरीब होते गए। भाजपा के मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती, स्वर्गीय बाबूलाल गौर एवं शिवराज सिंह चौहान के साथ हमारी सरकार में लगातार ₹65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर सबके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। अब किसान भाई – बहन वर्ष में दो से तीन फसल आसानी से ले सकते हैं।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में स्मार्ट सिंचाई की झलक, बाढ़ नियंत्रण का दिखेगा मॉडल

यूपीआईटीएस-26 में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई व्यवस्था, तकनीक से जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण का बना यूपी मॉडल – सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के पवेलियन में लाइव इंजीनियरिंग मॉडल, स्काडा और एआई तकनीक का होगा प्रदर्शन – बाढ़ नियंत्रण, नदी जोड़ो परियोजनाओं, ड्रेजिंग और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की मिलेगी जानकारी लखनऊ, योगी सरकार द्वारा प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर जल प्रबंधन और टिकाऊ इंजीनियरिंग से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की झलक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 में देखने को मिलेगी। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाले यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से हॉल नंबर-6 में पवेलियन लगाया गया है। यहां तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी छात्रों, प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के संकाय सदस्यों, छात्रों और आमजन को विभाग की परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और पिछले एक दशक की उपलब्धियों से रूबरू कराया जाएगा। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि पवेलियन में आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं के साथ जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में अपनाई जा रही तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। विजटर्स को लाइव इंजीनियरिंग मॉडल के माध्यम से प्रमुख परियोजनाओं की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा। इनमें बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना सहित अन्य प्रमुख परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। विभागीय प्रदर्शनी में नहर नेटवर्क और लिफ्ट कैनाल के कार्यात्मक मॉडलों के साथ बांधों और बैराजों की कार्यप्रणाली को ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझाया जाएगा। प्रदर्शनी में पिछले साढ़े नौ वर्षों में पूरी की गई प्रमुख, मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं की उपलब्धियों को प्रमुखता दी गई है। बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, महुआगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना, लहचुरा बांध परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, यूपी वाटर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट फेज-2 और जरगो नहर प्रणाली के पुनर्गठन जैसी परियोजनाओं से सिंचाई क्षमता में विस्तार हुआ है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ जबकि 2.19 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया गया। इस तरह कुल 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार/पुनर्स्थापन हुआ और 44.81 लाख किसान परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं। स्काडा और एआई से किया जा रहा स्मार्ट जल प्रबंधन मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि पवेलियन में प्रमुख आकर्षण स्मार्ट सिंचाई प्रणाली होगी। विभाग सिंचाई जल के वितरण, नहर संचालन और सरकारी नलकूपों के संचालन में स्काडा, एआई और आईओटी जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहा है। 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर स्काडा सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिसके माध्यम से कंट्रोल रूम से गेटों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन और बांध-बैराज से संबंधित रियल-टाइम डेटा ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। केंद्रीयकृत नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित बैराजों, सरकारी नलकूपों और पंप नहरों की स्थिति की निगरानी और नियंत्रण भी किया जा रहा है। प्रदर्शनी में बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में अपनाए जा रहे आधुनिक उपाय भी प्रदर्शित होंगे। विभाग के अनुसार तटबंधों के सुदृढ़ीकरण, संवेदनशील स्थलों की निगरानी और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कंक्रीट मैट्रेस टेक्नोलॉजी, सिल्ट वेन, बॉटम पैनल्स, शीट पाइल, परमेबल स्ट्रक्चर और टेट्रापॉड जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। प्रदेश की गंगा, यमुना, सोलानी, रामगंगा, सुवाओन, खोकरी, मंदाकिनी, केन, बेतवा, बूढ़ी गंगा और टेढ़ी नदियों पर फल्ड प्लेन जोनिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस कार्य में उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही नदी के प्रवाह को सुचारु बनाने और तटबंधों पर बाढ़ के दबाव को कम करने के लिए प्रदेश में 58 स्थानों पर ड्रेजिंग का कार्य किया गया है। गंगा, घाघरा, शारदा और रामगंगा जैसी नदियों में ड्रेजिंग के माध्यम से नदी के प्रवाह को व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए हैं। महाकुम्भ के दौरान गंगा की तीन धाराओं को ड्रेजिंग के जरिए एक धारा में चैनलाइज किया गया था। वहीं बिजनौर में सेक्टोरल ड्रेजिंग के जरिए गंगा को चैनलाइज कर रिवर ट्रेनिंग का कार्य किया गया। 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' पर जोर विभाग की ओर से कम पानी वाले क्षेत्रों में जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रेशर इरिगेशन और स्प्रिंकलर आधारित सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया है। हमीरपुर में महुआगांव चिल्ली, महोबा में कुलपहाड़ और ललितपुर में शहजाद बांध स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजनाओं का उल्लेख प्रदर्शनी में किया गया है। सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में सात प्रेशर सिंचाई प्रणालियां विकसित की गई हैं, जिनसे करीब 4,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता और लगभग 15 हजार किसान परिवारों को लाभ मिला है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत सिंचाई विभाग ने नलकूपों, लिफ्ट नहरों, स्प्रिंकलर और प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं, मुख्य नहर प्रणालियों के उपकरणों एवं सेंसरों और कार्यालयों में सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों के वाटरवेज पर सोलर पावर प्लांट लगाने की संभावनाओं को भी प्रदर्शनी में दिखाया जा रहा है। विभाग की प्रदर्शनी में नहरों की सिल्ट सफाई और अंतिम छोर के किसानों तक सिंचाई जल पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी। नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य 27,551 किलोमीटर से बढ़ाकर 55,320 किलोमीटर किया गया है। खरीफ में पानी की पहुंच 9,517 टेल से बढ़कर 10,422 टेल और रबी में 9,376 से बढ़कर 10,932 टेल तक हुई है। इस अवधि में कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 106.82 लाख हेक्टेयर हुआ है।

CM योगी का जनता दर्शन, बोले- कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों पर होगी कानूनी कार्रवाई

कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री बारिश के बावजूद सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया जनता दर्शन गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं जनता से बोले सीएम – घबराइए मत, सबकी समस्या का होगा समाधान गोरखपुर  जनता की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह बारिश होने के बावजूद ‘जनता दर्शन’ किया। दूरदराज से आए लोगों से उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों को मुख्यमंत्री ने समाधान का भरोसा दिया। इस अवसर पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए।  बारिश की वजह से मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की सुविधा के लिए जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं।  इस दौरान कुछ महिलाओं ने उनकी जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए।  हर बार की तरह जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे मामलों में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

अमेरिका में बैठकर संगम पर पिंडदान, 28 सितंबर को ऑनलाइन होगी पूजा

 प्रयागराज पितृ पक्ष के दिन पास आने के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में पितरों के तर्पण और पिंडदान को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचते हैं. इस बार भी पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है. खास बात यह है कि जो लोग किसी कारणवश प्रयागराज नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।  इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा. इस दौरान अपने पितरों के निमित्त लोग प्रयागराज पहुंचकर भी तर्पण और पिंडदान करते हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह समय अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक आस्था व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं. संगम पर पिंडदान और तर्पण करने के बाद श्रद्धालु आगे की धार्मिक यात्रा भी पूरी करते हैं।  प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पिंडदान की परंपरा में प्रयागराज, काशी और गया का विशेष महत्व बताया जाता है. लोग प्रयागराज से इसकी शुरुआत करते हैं, इसके बाद काशी होते हुए गया पहुंचकर पिंडदान की प्रक्रिया को पूरा करते हैं. इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान सुबह से ही श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आते हैं. जैसे-जैसे पितृ पक्ष आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे संगम क्षेत्र में लोगों की संख्या भी बढ़ने लगेगी।  अमेरिका से 28 सितंबर को होगा पिंडदान प्रदीप पांडे बताते हैं कि इस बार पितृ पक्ष के दौरान विदेश में बैठे लोग भी प्रयागराज की धार्मिक परंपरा से जुड़ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक अमेरिका से एक श्रद्धालु 28 सितंबर को प्रयागराज में पिंडदान करेगा. इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था का सहारा लिया जाएगा. पिछले दो-तीन वर्षों से ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था भी शुरू हुई है. इसका लाभ ऐसे लोग उठा रहे हैं जो किसी कारणवश प्रयागराज नहीं आ पाते. किसी को यात्रा में परेशानी है तो किसी के पास समय या दूसरी तरह की समस्या है. ऐसे में वे ऑनलाइन माध्यम से अपने पितरों के लिए पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं. इस व्यवस्था के जरिए विदेशों में रहने वाले लोगों को भी अपने पितरों के प्रति धार्मिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिल रहा है. अमेरिका से 28 सितंबर को होने वाला पिंडदान इसी व्यवस्था का एक उदाहरण है. प्रदीप पांडेय बताते हैं कि ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा का इस्तेमाल केवल विदेश में रहने वाले लोग ही नहीं कर रहे हैं. गांव और देहात में रहने वाले ऐसे लोग भी इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जो किसी कारण से प्रयागराज आने में असमर्थ हैं. कई परिवारों के सामने यात्रा से जुड़ी परेशानी होती है. कुछ लोगों के लिए लंबी दूरी तय करना मुश्किल होता है. ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था उनके लिए अपने पितरों के निमित्त पिंडदान कराने का माध्यम बन रही है।  तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि लोगों की आस्था और अपने पितरों के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है. परिस्थितियां भले बदल गई हों, लेकिन लोग किसी न किसी तरीके से अपने पितरों के लिए धार्मिक कर्मकांड पूरा करना चाहते हैं।  युवा पीढ़ी भी निभा रही परंपरा प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान एक और खास बात देखने को मिल रही है. आज की युवा पीढ़ी भी सनातन धर्म की परंपराओं और पितरों से जुड़े कर्मकांडों को लेकर रुचि दिखा रही है. लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का सहारा ले रहे हैं. जो संगम तक पहुंच सकते हैं, वे स्वयं आकर पिंडदान और तर्पण करते हैं और जो नहीं आ सकते, वे ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए इससे जुड़ रहे हैं. तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक यह बात महत्वपूर्ण है कि आधुनिक दौर में भी युवा अपने परिवार और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं को निभाने के लिए आगे आ रहे हैं।  पीले वस्त्रों में नजर आएंगे श्रद्धालु प्रदीप पांडे के मुताबिक पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की वेशभूषा भी अलग दिखाई देती है. पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने के लिए आने वाले कई श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर आते हैं. जिस तरह भगवा रंग की अपनी अलग धार्मिक पहचान है, उसी तरह पितृ पक्ष के दौरान पीले वस्त्र पहनकर आने की परंपरा भी श्रद्धालुओं के बीच देखने को मिलती है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग पीले वस्त्रों में दिखाई देंगे. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार जो श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं, वे पिंडदान के दौरान निर्धारित वेशभूषा का भी ध्यान रखते हैं. यही वजह है कि पितृ पक्ष में संगम क्षेत्र का दृश्य सामान्य दिनों से काफी अलग नजर आता है।  26 सितंबर के बाद बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो रहा है. अभी से लोग धीरे-धीरे पहुंचने लगे हैं. माना जा रहा है कि 26 सितंबर के बाद संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी. पितरों के प्रति श्रद्धा रखने वाले परिवार देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रयागराज पहुंचेंगे. कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान करेगा तो कोई अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेगा. संगम की धरती पर पितरों के निमित्त होने वाले इन धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित भी श्रद्धालुओं को विधि-विधान से कर्मकांड कराने में जुटेंगे। 

पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी, दलित और मजदूर वर्ग सपा के असली चेहरे से परिचिति: अनिल राजभर

'जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को': अनिल राजभर पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी, दलित और मजदूर वर्ग सपा के असली चेहरे से परिचिति: अनिल राजभर दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश को घेरा, बोले- पीडीए मतलब 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस' लखनऊ  समाजवादी पार्टी की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर विफल होने के बाद अब जाति का जहर घोलने की राजनीति कर रही है, लेकिन उसे इसमें कोई सफलता मिलने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा चाहे एक यात्रा निकाले या 100 यात्राएं, जनता अब उसके बहकावे में आने वाली नहीं है। पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी अनिल राजभर ने कहा कि पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी यात्रा है। उत्तर प्रदेश का पिछड़ा, दलित, कमजोर और मजदूर वर्ग समाजवादी पार्टी के असली चेहरे से भलीभांति परिचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सपा सत्ता में रहती है तो उसे गरीबों की याद नहीं आती और पूरा सैफई परिवार प्रदेश की गाढ़ी कमाई को लूटने में लगा रहता है। आज वही लोग चोला बदलकर पिछड़ों और दलितों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता सब समझती है। पीडीए की परिभाषा तय करे सपा उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले पीडीए की परिभाषा ही तय कर ले। पार्टी के नेता खुद ही पीडीए को लेकर भ्रमित हैं और रोज इसकी नई परिभाषा बताते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीतिक तिकड़मों से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। चुनाव आने पर समाजवादी पार्टी का कहीं नामोनिशान नहीं दिखाई देगा। इस दौरान नए वोटर फॉर्म में सर्विलांस से जुड़ी जानकारी जोड़े जाने और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के सवाल पर अनिल राजभर ने कहा कि हाल में सामने आए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है। चुनाव आयोग किसी भी विषय पर नियमों और परंपराओं के अनुसार आपसी राय-मशविरा और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लेता है। अलग-अलग राय लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती है। स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार से कब मिलेंगे अखिलेश? वहीं, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव और उनकी पीडीए राजनीति पर निशाना साधा। रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने नेताओं के घर जरूर जाना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार के पास वे आज तक क्यों नहीं गए। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को दूसरे मुख्यमंत्री के परिवार के प्रति शिष्टाचार और संवेदना दिखानी चाहिए थी। यदि अखिलेश यादव कल्याण सिंह के परिवार के पास जाकर श्रद्धांजलि और संवेदना व्यक्त करते, तो यह राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय और संवैधानिक मर्यादा का परिचय होता। उन्होंने कहा कि अब जब वे लोध समाज के बीच जा रहे हैं तो उन्हें अपने पुराने व्यवहार का भी जवाब देना चाहिए। पीडीए मतलब परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस पीडीए रथ यात्रा पर हमला बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीडीए का वास्तविक अर्थ 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस' है। उन्होंने दावा किया कि आज न पिछड़ा समाज, न दलित समाज और न ही अल्पसंख्यक समाज समाजवादी पार्टी के साथ है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा समाज पूरी मजबूती के साथ एनडीए के साथ खड़ा है। दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में ऐसे पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं जिनमें अखिलेश यादव से पूछा जा रहा है कि दलितों पर अत्याचार कब रुकेंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितना नया चोला पहन ले, उत्तर प्रदेश की जनता उसके असली चरित्र को पहचान चुकी है। जनता अब भ्रमित होने वाली नहीं है और समय आने पर अपना जवाब देगी।

पुंजापुरा के लोगों से PM मोदी की बातचीत, बोले- एंटरप्रेन्योरशिप में आगे बढ़ रहा MP

 देवास  सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बागली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पुंजापुरा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से हितग्राहियों एवं उपस्थित जनसमुदाय से संवाद किया। प्रधानमंत्री ने युवाओं से बात कर सेवा कार्यों में उन्हें क्या अनुभव मिला, यह जाना। इससे उन्होंने क्या सीखा। उन्होंने युवाओं से वॉट्सएप ग्रुप बनाने की बात कही ताकि लोगों तक उनके काम पहुंचे। इसके साथ ही इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इसे शेयर करने को कहा। देवास जिले के पुंजापुरा में यात्रा के दौरान आये शाजापुर जिले के दीपेश गोटी से भी प्रधानमंत्री ने किया संवाद किया। प्रधानमंत्री ने गोटी से पूछा कि वडनगर में किसी से पहचान बनाई है या नहीं, इस पर गोटी ने अपनी कपड़े की दुकान के संबंध में जानकारी दी और बताया कि व्यापारियों से पहचान यात्रा के दौरान बनाई है। गोटी की इस बात पर प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आपने गुजराती ओर मारवाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया और सेवा के साथ काम भी कर लिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के युवा भी व्यापार-कारोबार में रुचि ले रहे हैं, यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा- मध्य प्रदेश एंटरप्रेन्योरशिप में बहुत आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में माय प्रॉमिस मोदी जी के भाजयुमो अभियान की पीएम मोदी को जानकारी दी गई।प्रधानमंत्री ने कहा- वडनगर और वाराणसी पौराणिक ऐतिहासिक शहर हैं। दोनों शहर हजारों साल से जीवंत है। एक मेरी जन्मभूमि तो दूसरी कर्मभूमि है। उल्लेखनीय है कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वडनगर से वाराणसी तक जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 22 सितंबर को यात्रा ने डबलचौकी से देवास में प्रवेश किया। अगला पड़ाव पुंजापुरा गांव हैं, जहां प्रधानमंत्री वर्चुअली संवाद किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल रहे।  उन्होंने युवाओं से वॉट्सएप ग्रुप बनाने की बात कही ताकि लोगों तक उनके काम पहुंचे। इसके साथ ही इंस्टाग्राम और फेसबुक पर इसे शेयर करने को कहा।  देवास जिले के पुंजापुरा में यात्रा के दौरान आये शाजापुर जिले के दीपेश गोटी से भी प्रधानमंत्री ने किया संवाद किया। प्रधानमंत्री ने गोटी से पूछा कि वडनगर में किसी से पहचान बनाई है या नहीं, इस पर गोटी ने अपनी कपड़े की दुकान के संबंध में जानकारी दी और बताया कि व्यापारियों से पहचान यात्रा के दौरान बनाई है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के युवा भी व्यापार-कारोबार में रुचि ले रहे हैं, यह अच्छी बात है। मध्य प्रदेश एंटरप्रेन्योरशिप में बहुत आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में माय प्रॉमिस मोदी जी के भाजयुमो अभियान की पीएम मोदी को जानकारी दी गई।प्रधानमंत्री ने कहा- वडनगर और वाराणसी पौराणिक ऐतिहासिक शहर हैं। दोनों शहर हजारों साल से जीवंत है। एक मेरी जन्मभूमि तो दूसरी कर्मभूमि है। उल्लेखनीय है कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वडनगर से वाराणसी तक जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। 22 सितंबर को यात्रा ने डबलचौकी से देवास में प्रवेश किया। अगला पड़ाव पुंजापुरा गांव हैं, जहां प्रधानमंत्री वर्चुअली संवाद किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल रहे।

मध्य प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 10 जिलों में तेज बारिश; 25-26 सितंबर को स्ट्रॉन्ग सिस्टम

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बने अवदाब के प्रभाव से प्रदेश में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हो रहा है। 25 और 26 सितंबर को इसका ज्यादा असर रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्यप्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है। आज इन 10 जिलों में तेज बारिश का अनुमान गुरुवार को छतरपुर, पन्ना, सतना, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अनुमान है।वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। 25-26 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब अगले 24 घंटे के बाद और मजबूत हो सकता है। इसके प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।खासकर पूर्वी हिस्से में 25 और 26 सितंबर को भारी से अति भारी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया मौसमी सिस्टम एक बार फिर राज्य में मानसूनी गतिविधियां बढ़ा रहा है. आज पूर्वी जिलों में इसका खासा असर देखने को मिलेगा. शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सतना, पन्ना और छतरपुर में गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना बन रही है. इन सभी जिलों में 64.5 मिमी से लेकर 115.5 मिमी तक वर्षा दर्ज की जा सकती है. तीव्र वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है. नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है. IMD ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. प्रभावित जिले वासियों को सावधानीपूर्वक यात्रा करने की सलाह दी है।  शेष जिलों में हल्की से मध्यम बारिश वहीं मध्य प्रदेश के शेष जिलों में आज कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं. प्रदेश के लगभग सभी जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चलने का अनुमान भी जताया गया है. इस दौरान खुले में, टिन शेड, हल्की नुकीली या धारदार वस्तुओं आदि के आसपास न खड़े हों।  मध्य प्रदेश में अब तक 34.2 इंच बारिश गौरतलब है कि इस सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक 34.2 इंच बारिश हुई है. सामान्य से 6 फीसदी कम वर्षा दर्ज हुई है. बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से अगले चार दिन प्रदेश में तेज बारिश के आसार हैं. कई जिलों में गरज-चमक के साथ बरसात होगी. प्रदेश के 100 से ज्यादा शहरों-कस्बों में बारिश हो सकती है. पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में अब भी बारिश का कोटा अधूरा है. भोपाल समेत 23 जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है. कई क्षेत्रों में मानसून के आंकड़ों में सुधार हुआ है लेकिन मानसून जून की कमी पूरी नहीं कर सका. जुलाई-अगस्त का कोटा पूरा हो चुका है. भोपाल में लगातार चौथे साल सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है. बड़े तालाब का जलस्तर भी बढ़ गया है।  34.3 इंच बारिश, कोटे का 91.9% पूरा मध्यप्रदेश में अब तक औसतन 34.3 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का करीब 91.9 प्रतिशत है। मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है।राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है और मध्यप्रदेश में भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से मानसून विदाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। बुधवार को भी कई जिलों में तेज बारिश इससे पहले बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई। भोपाल में रुक-रुककर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम के इटारसी में करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। इसके अलावा खंडवा, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई।