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पांचों तहसीलों में 5 एसडीएम, दो नगर क्षेत्र में सिटी मजिस्ट्रेट और एक टीम सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा के नेतृत्व में बनी

दीपोत्सव 2025 दीपोत्सव में श्रद्धालुओं की सेहत पर प्रशासन की पैनी नजर, 08 टीमें तैनात पांचों तहसीलों में 5 एसडीएम, दो नगर क्षेत्र में सिटी मजिस्ट्रेट और एक टीम सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा के नेतृत्व में बनी सीएम योगी के निर्देश पर जिलाधिकारी ने गठित की टीम, रखी जाएगी चप्पे चप्पे पर नजर दीपोत्सव को लेकर टोटल 54 निरीक्षण, 34 जगह छापे पड़े, 76 नमूने लिए गए 19657 किलो सामग्री बरामद की गई है, जिनकी कीमत 33 लाख रुपए से ज्यादा है 35 हजार से अधिक की 167 किलो खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई प्रदेश के अन्य जिलों से खाद्यान्न सुरक्षा  अधिकारियों की अयोध्या में तैनाती 19 और 20 अक्तूबर को अयोध्या में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिहाज से खाद्य सामग्री की जांच करेंगे अयोध्या दीपोत्सव 2025 को लेकर अयोध्या प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिलाधिकारी ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 08 विशेष टीमें गठित की हैं। इन टीमों का उद्देश्य है कि दीपोत्सव के दौरान अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री ही उपलब्ध हो। पांच तहसीलों और दो नगर क्षेत्रों में निगरानी तंत्र सक्रिय अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे के आदेश पर पांचों तहसीलों में पांच एसडीएम के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जबकि नगर क्षेत्र में सिटी मजिस्ट्रेट की दो टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। इसके अलावा, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मानिक चन्द्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम मुख्यालय स्तर पर गठित की गई है, जो जिलेभर में सक्रिय है। 54 निरीक्षण, 34 जगह छापे और 76 नमूने लिए गए दीपोत्सव से पहले खाद्य विभाग ने बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान चलाया है। अब तक कुल 54 निरीक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें 34 स्थानों पर छापेमारी की गई है। इस दौरान खाद्य सामग्री के 76 नमूने लिए गए हैं, ताकि कोई भी मिलावटी या खराब खाद्य पदार्थ श्रद्धालुओं तक न पहुंच सके। 33 लाख की खाद्य सामग्री बरामद, 167 किलो नष्ट सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मानिक चन्द्र सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान खाद्य विभाग की टीमों ने 19,657 किलो खाद्य सामग्री बरामद की है, जिसकी कीमत 33 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। इनमें से 167 किलो खराब या मिलावटी खाद्य सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया, जिसका मूल्य 35 हजार रुपये से अधिक है। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव के मद्देनजर यह अभियान लगातार जारी रहेगा। अन्य जिलों से भी आईं टीमें, 19-20 अक्तूबर को सघन जांच सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मानिक चन्द्र सिंह ने बताया कि अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए अन्य जिलों से भी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती की गई है। ये अधिकारी अयोध्या में विभिन्न स्थलों पर पहुंचकर खाद्य सामग्री की जांच करेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की खाद्य अनियमितता की गुंजाइश न रहे। 19 और 20 अक्तूबर को बड़ी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं के लिहाज से सघन जांच की जाएगी। सख्ती और सतर्कता दोनों का संतुलन बनाएगा प्रशासन जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि दीपोत्सव जैसे विशाल आयोजन में खाद्य सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए जहां एक ओर विभाग सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं व्यापारियों और भोजनालय संचालकों को भी साफ-सफाई और शुद्धता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही है।

लखीमपुर खीरी की माटी से बने 25 हजार इको-फ्रेंडली दीयों से जगमगाएगी रामनगरी अयोध्या

दीपोत्सव-2025 योगी सरकार का दीपोत्सव-25 जनसहभागिता, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण का बना प्रतीक लखीमपुर खीरी की माटी से बने 25 हजार इको-फ्रेंडली दीयों से जगमगाएगी रामनगरी अयोध्या महिला स्वयं सहायता समूह की दीदियों ने संभाली दीपोत्सव-25 की कमान सीएम योगी के इको-फ्रेंडली दीपोत्सव संकल्प को जनआंदोलन बना रहीं प्रदेश की महिलाएं प्रति दीया ₹5 की आय से महिलाओं ने अर्जित किए ₹1.25 लाख, दीपोत्सव बना आत्मनिर्भरता का अवसर दीपोत्सव-2025 से लौटा त्रेतायुगीन वैभव, मिट्टी और खुशबू से सजेगी रामनगरी गोबर और मिट्टी से बने प्राकृतिक दीये बिखेरेंगे रोशनी के साथ सकारात्मक ऊर्जा की खुशबू लखनऊ योगी सरकार के अयोध्या दीपोत्सव से न केवल भगवान श्रीराम की नगरी का त्रेतायुगीन वैभव पुनर्जीवित हुआ है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, जनसहभागिता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक भी बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘इको-फ्रेंडली दीपोत्सव’ के संकल्प को साकार करने के लिए प्रदेश की आधी आबादी ने आगे आकर अपनी भूमिका निभाई है। अयोध्या में होने वाले नौवें दीपोत्सव-2025 को दिव्य और भव्य बनाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों की दीदियों ने अहम योगदान दिया है। इस वर्ष लखीमपुर खीरी की माटी से बने 25 हजार इको-फ्रेंडली दीये अयोध्या धाम की पवित्र भूमि पर रोशनी बिखेरेंगे। ये दीये खीरी की माटी और जड़ी-बूटियों की प्राकृतिक खुशबू से तैयार किए गए हैं, जो रामनगरी की फिजाओं में प्रकाश के साथ सकारात्मक सुगंध भी फैलाएंगे। इसके अलावा, प्रदेश के कई अन्य जिलों की महिलाओं ने भी दीपोत्सव-25 के लिए हजारों की संख्या में दीये भेजे हैं। 3 स्वयं सहायता समूहों की 44 महिलाओं ने बनाए 25 हजार दीये लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में अयोध्या का दीपोत्सव अब जनसहभागिता, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण बन गया है। इसी के तहत लखीमपुर की तीन स्वयं सहायता समूहों की 44 महिलाओं ने प्रभु श्रीराम की नगरी को आलोकित करने के लिए 25 हजार दीये तैयार किए। उन्होंने बताया कि “लखीमपुर की रौशनी से समृद्धि की दिवाली” की थीम पर अयोध्या में दीये भेजने की तैयारी जुलाई माह से ही प्रारंभ कर दी गई थी। इन दीयों को बनाने में महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इस पहल को आगे बढ़ाया गया। महिलाओं को प्रति दीया 5 रुपये का भुगतान किया गया, जिससे उन्होंने कुल ₹1.25 लाख की आय अर्जित की। “मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं, जो मुझे दीपोत्सव के लिए दीये बनाने का अवसर मिला” खीरी के धौरहरा ब्लॉक की ज्योति प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की सदस्य ग्राम पंचायत गुदरिया की संजू देवी ने बताया कि उन्होंने पहली बार दीपोत्सव के लिए दीये तैयार किए हैं और वह बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि दीये बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से आधुनिक चाक उपलब्ध कराई गई। ग्राम पंचायत हरदी की सुंदर प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की सदस्य बिट्टू देवी ने बताया कि उन्हें आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराई गई, जिससे न केवल उत्पादन में तेजी आई, बल्कि दीयों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा दीये बनाने की यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी पहल है। ग्राम पंचायत हरदी की सीता प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी फूलमती ने कहा कि “रामनगरी के दीपोत्सव के लिए दीये तैयार करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इससे जहां एक ओर सांस्कृतिक परंपराएं पुनर्जीवित हुई हैं, वहीं आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।” ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण की यह मिसाल अब पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय बन गई है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंचे PM मोदी, चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण ने दिया साथ

नंद्याल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश दौरे पर हैं, जहां वह कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. आंध्र प्रदेश पहुंचते ही सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उनका स्वागत किया. इस दौरान पीएम मोदी ने नंद्याल जिले के श्रीशैलम में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश दौरे पर हैं, जहां वह कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. आंध्र प्रदेश पहुंचते ही सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उनका स्वागत किया. इस दौरान पीएम मोदी ने नंद्याल जिले के श्रीशैलम में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने बिहार की मशहूर मधुबनी पेंटिंग से सजा हुआ अंगवस्त्र पहना. यह अंगवस्त्र बिहार की कला, संस्कृति और परंपरा के प्रति उनके गहरे लगाव और गर्व का प्रतीक है. मधुबनी पेंटिंग, जो बिहार के मिथिला इलाके की बेहद मशहूर लोक कला है, अपने नेचुरल रंगों, मोटी लाइनों और ज्योमेट्रिक पैटर्न के लिए जानी जाती है. प्रधानमंत्री मोदी की मंदिर से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें वह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के साथ बैठे नज़र आ रहे हैं. तीनों नेताओं का साथ आना केवल धार्मिक भाव-प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में कई स्तरों पर बड़े संकेत देती है.  तीनों नेता साथ आकर दक्षिण भारत में बीजेपी-टीडीपी-जनसेना एकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है. साथ आकर मतदाताओं को यह संदेश भी दे रहे हैं कि वे पारंपरिक मूल्यों और धार्मिक भावनाओं के संरक्षक हैं. इसके साथ ही राज्य-केंद्र संबंधों की मजबूत छवि को पेश किया जा रहा है.  मल्लिकार्जुन मंदिर में पूजा-अर्चना प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक तरीके से पूजा करते हुए पंचामृत से रुद्राभिषेक किया. पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण होता है, जो भगवान शिव को समर्पित खास अभिषेक में इस्तेमाल किया जाता है. पूजा के दौरान मंदिर के पुजारियों ने उन्हें मंदिर के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से बताया. मंदिर दर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने कुरनूल में 13,430 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई विकास प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन किया, जिनमें एनर्जी, डिफेंस, रेलवे और पेट्रोलियम जैसे अहम सेक्टर शामिल थे. बिहार की संस्कृति और कला का प्रेम मधुबनी कला को पीएम मोदी ने न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी बढ़ावा दिया है. वे कई देशों के नेताओं को मधुबनी पेंटिंग गिफ्ट करके इस कला को ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद करते रहे हैं. साथ ही, बिहार की इस सांस्कृतिक परंपरा के प्रति उनका प्यार और सपोर्ट बिहार की जनता के बीच गहरा सम्मान और जुड़ाव बनाता है. पीएम मोदी का यह कदम न सिर्फ बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और आस्था को दिखाता है, बल्कि बिहार के लोगों के साथ उनकी मजबूत पहचान और विकास की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है. 

शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान: मनमोहन सिंह को बताया पूरे देश का प्रधानमंत्री

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस देश की संस्कृति और परंपरा की कोई समझ नहीं है. इस कारण वह विदेश की धरती पर देश की आलोचना करते हैं. उन्होंने कहा कि इस देश पर कांग्रेस की सरकारों का भी राज रहा है. उन्होंने दिवंगत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उस वक्त वह बतौर मुख्यमंत्री अमेरिका गए थे और अमेरिका में उनसे पूछा गया कि क्या मनमोहन सिंह ‘अंडर एचीवर’ पीएम हैं? उन्होंने जवाब दिया था कि मनमोहन सिंह कांग्रेस पार्टी के पीएम नहीं हैं. बल्कि वह भारत के प्रधानमंत्री हैं. उनके बारे में वह ऐसी कोई बात नहीं कर सकते. एक साथ चुनाव की वकालत शिवराज सिंह ने इस कार्यक्रम में पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की वकालत की और कहा कि इसको लेकर सहमति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस देश में कुछ हो या नहीं लेकिन कहीं न कहीं चुनाव जरूर होते रहते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले साल वह कृषि मंत्री बने तो उसके कुछ दिनों बाद ही झारखंड के चुनाव शुरू हो गए. अब बिहार चुनाव चल रहा है. अगले साल बंगाल और फिर असम में चुनाव है. उन्होंने कहा कि इन चुनावों में काफी ऊर्जा लगती है. पार्टी मंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक सबसे चुनाव में लगा देती है. इस कारण काम पर पूरा समय देना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने देश में अनाज के पर्याप्त भंडार होने की बात कहते हुए कहा कि बीते 11 साल साल में खाद्यान्न उत्पादन 44 फीसदी बढ़ा है. देश में गेहूं-चावल का पर्याप्त भंडार है. उन्होंने कहा कि देश में थोड़ा दलहन और तेलहन की कमी है. उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर कहा कि जेडीयू और भाजपा के बीच स्वाभाविक गठबंधन है. दूसरी तरफ, महागठबंधन आपस में उलझा हुआ है. बिहार में एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार हैं. वह सुशासन बाबू हैं. उनके नेतृत्व में एनडीए चुनाव लड़ रहा है.

IG का दावा: कांकेर-सुकमा समेत बस्तर में 1,800 से ज्यादा नक्सलियों ने छोड़ा हथियार

रायपुर   बीते 24 घंटे में नक्सल सरेंडर के सारे रिकॉर्ड टूट गए। महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ तक 138 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर भूपति उर्फ सोनू दादा का है। सोनू ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के के सामने सरेंडर किया। उसके सरेंडर की खबर एक दिन पहले मंगलवार को ही सामने आ गई थी। नक्सल प्रभावित इलाकों से एक बड़ी खबर आई है. बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि बीते 20 महीनों में कुल 1,876 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण (सरेन्डर) किया है. इनमें कई कुख्यात नक्सली शामिल हैं, जिन पर लाखों रुपए के इनाम थे. नक्सल विरोधी अभियान में लगातार सफलता के बीच शनिवार को कांकेर और सुकमा जिलों में एक बार फिर 127 माओवादियों ने हथियार डाल दिए. इनमें कांकेर जिले में 100 और सुकमा में 27 नक्सली शामिल हैं. यह सभी नक्सली अलग-अलग संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय थे और वर्षों से पुलिस व सुरक्षा बलों की नजर में थे. बड़े कमांडर कर रहे सरेंडर  छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के बड़े कमांडरों ने सरेंडर करना शुरू कर दिया है.चर्चा है कि बड़े कमांडर रुपेश और रनिता भी सरेंडर कर सकते हैं, बताया जा रहा है कि उनकी छत्तीसगढ़ के पुलिस अधिकारियों से बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई है. अगर ऐसा होता है तो यह नक्सल संगठनों के लिए बड़ा झटका माना जाएगा, क्योंकि यह दोनों माओवादी बडे़ नेता माने जाते हैं. इससे पहले माओवादी रणनीतिकार मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ ​​सोनू या भूपति ने हथियार डाल दिए हैं. उसने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में समर्पण कर दिया था, जबकि सुकमा और कांकेर जिले में भी नक्सलियों ने कल छत्तीसगढ़ में सरेंडर किया था.  आईजी सुंदरराज ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को बसों के जरिए BSF कैंप तक लाया गया, जहां उन्होंने अपने हथियार सुरक्षा बलों को सौंपे. इसके बाद सभी से नियमों के मुताबिक पूछताछ की गई और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई है. उन्होंने कहा कि यह सरेंडर सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह साबित करता है कि सरकार की विकास और विश्वास की नीति जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है. पहले जहां नक्सली खौफ और हथियार के सहारे शासन चलाने की कोशिश करते थे, वहीं अब गांवों में सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र खुलने लगे हैं जिसकी वजह से लोग मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. बस्तर में अब डर नहीं, भरोसा बढ़ा है आईजी सुंदरराज पी. ने आगे कहा कि बस्तर में अब डर नहीं, भरोसा बढ़ा है. जो कभी जंगल के रास्तों में बंदूक लेकर घूमते थे, वे अब अपने बच्चों के भविष्य की बात कर रहे हैं. ये बदलाव आसान नहीं था, लेकिन सुरक्षा बलों, प्रशासन और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से यह संभव हुआ. बिखर रहा नक्सलवाद  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद बिखरना शुरू हो गया है. कांकेर जिले में जिन 100 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, उनमें टॉप कमांडर राजू सलाम, कमांडर प्रसाद और मीना ने भी हथियार डाले हैं, जो नक्सल संगठनों के लिए सबसे ज्यादा आगे रहते थे. राजू सलाम डिवीजनल कमेटी मेंबर था और वह 5 नंबर का कमांडर था, जो कई बड़ी घटनाओं में भी शामिल रहा है, बताया जाता है कि पिछले 20 सालों के दौरान जो बड़ी नक्सली घटनाएं हुई थी, उसमें कही न कही राजू सलाम का हाथ था. इसी तरह कमांडर प्रसाद और मीना भी नक्सल संगठनों में बड़े नाम थे, जो नक्सल संगठन के लिए कई चीजें उपलब्ध कराते थे.   कई महिला नक्सली भी शामिल आत्मसमर्पण करने वालों में कई महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो वर्षों से भूमिगत थीं. कुछ पर 5 लाख से 10 लाख रुपए तक के इनाम भी घोषित थे. पुलिस ने इन्हें सामाजिक पुनर्वास योजना के तहत लाभ देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.कांकेर में 100 और सुकमा में 27 नक्सली सरेंडर करने वालों में कई वारदातों में शामिल रहे हैं इनमें पुलिस कैंप पर हमले, सड़क निर्माण में बाधा और ग्रामीणों को डराने जैसे अपराध शामिल हैं.बस्तर पुलिस का कहना है कि अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां नक्सली सक्रिय हैं, लेकिन अब उनका जनाधार तेजी से कमजोर हो रहा है. पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने नक्सल इलाकों में लगातार सफल सर्च ऑपरेशन चलाए हैं, जिससे संगठन का नेटवर्क कमजोर पड़ा है. जानकारी के मुताबिक, राजू सलाम डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) कंपनी नंबर 5 का कमांडर था। वह रावघाट एरिया में सक्रिय था। राजू सलाम कांकेर में पिछले 20 साल में घटी सभी बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा है। इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने से इलाके में नक्सलवाद के खात्मे की उम्मीदें बढ़ गई हैं। फिलहाल, कांकेर पुलिस आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की पहचान करने में जुटी हुई है। संभावना है कि इन्हें जल्द ही जिला मुख्यालय या संभागीय मुख्यालय में मीडिया के सामने पेश किया जाएगा। इसके अलावा एक दिन पहले ही 6 करोड़ के इनामी और पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति ने 60 साथियों के साथ महाराष्ट्र में सरेंडर किया था। सुकमा में भी 50 लाख के इनामी 27 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें 10 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं। कोंडागांव जिले में 5 लाख की इनामी महिला नक्सली गीता उर्फ कमली सलाम (40) ने भी हथियार छोड़ दिए हैं। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि पिछले 20 महीनों में अब तक 1,876 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ ले रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में और भी माओवादी इस सकारात्मक रास्ते को अपनाएंगे। 20 महीने में 1876 का सरेंडर  बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने नक्सलियों के सरेंडर को लेकर बड़ी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि 20 महीने में अब तक 1876 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं और सभी पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. जबकि आने वाले दिनों में भी और नक्सलियों का सरेंडर हो सकता है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि माओवादी अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं.  2026 तक नक्सलवाद खात्में का प्लान  दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद खात्में को लेकर डेडलाइन … Read more

रूसी तेल पर ट्रंप के आरोपों को भारत का जवाब – पहले देशहित, बाकी बाद में

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के रूसी तेल वाले दावे पर भारत का जवाब आ गया है. भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता भारत के लोग हैं और कुछ नहीं. ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का तेल आयात भारत के हितों की रक्षा के आधार पर तय होता है. भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भारत की प्राथमिकता है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्हें पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. इसी दावे पर विदेश मंत्रालय ने बयान दिया है. ट्रंप के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, ‘भारत तेल और गैस का एक प्रमुख आयातक देश है. अस्थिर वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी निरंतर प्राथमिकता रही है. हमारी आयात नीतियां पूरी तरह इसी उद्देश्य से निर्देशित होती हैं. ऊर्जा की स्थिर कीमतें सुनिश्चित करना और आपूर्ति को सुरक्षित रखना हमारी ऊर्जा नीति के दो प्रमुख लक्ष्य रहे हैं. इसके तहत हमने अपने ऊर्जा स्रोतों का विस्तार किया है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार विविधीकरण किया है.’ अमेरिका संग संबंधों पर क्या कहा? विदेश मंत्रायल ने आगे भारत संग संबंधों पर कहा, ‘जहां तक अमेरिका का संबंध है, हम कई वर्षों से अपनी ऊर्जा खरीद को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. पिछले एक दशक में इसमें लगातार प्रगति हुई है. वर्तमान प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने में रुचि दिखाई है. इस विषय पर बातचीत जारी है.’ डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा था?  डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समाचार एजेंसी एएनआई की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया. एएनआई ने एक सवाल किया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को एक विश्वसनीय साझेदार मानते हैं? इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां, बिल्कुल. वह (पीएम मोदी) मेरे मित्र हैं. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. भारत रूस से तेल खरीद रहा है, इससे मैं खुश नहीं था. हालांकि, उन्होंने अब मुझे आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. यह एक बड़ा कदम है. अब हमें चीन से भी यही करवाना होगा.’ क्यों निराश हैं ट्रंप? ट्रंप यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने में अपनी असमर्थता के कारण निराश हैं. इस युद्ध की शुरुआत लगभग चार साल पहले रूस के आक्रमण से हुई थी. उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति असंतोष व्यक्त किया है, जिन्हें वह सुलह की राह में सबसे बड़ी बाधा बताते रहे हैं. ट्रंप का शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने का कार्यक्रम है. चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और ट्रंप ने इसके दंड के तौर पर अगस्त में भारत पर शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था.  

बिहार विधानसभा चुनाव में कूदे सीएम मोहन, आज करेंगे जनसंपर्क और रैलियां

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर खास रणनीति बनाई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को मंत्र दिया है कि पार्टी तब जीतती है, जब हर बूथ मजबूत होता है। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि हर बूथ कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में मोदी है। इस तरह उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है। उनकी ही परिपाटी पर चलते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बिहार चुनाव के लिए कमर कस ली है। वे 16 अक्टूबर को बिहार दौरे पर रहेंगे। सीएम डॉ. यादव बिहार की कुम्हरार निर्वाचन क्षेत्र के कदमकुआं और विक्रम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पार्वती स्कूल स्पोर्ट्स ग्राउंड में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। वे विधानसभा कुम्हरार में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजय गुप्ता और विक्रम नर्वाचन क्षेत्र में सिद्धार्थ सौरभ के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे। इसके अलावा सीएम डॉ. यादव कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में भी हिस्सा लेंगे।  गौरतलब है कि, पार्टी संगठन के बीच सीएम डॉ. मोहन यादव की स्टार प्रचारक की छवि है। यही वजह है कि प्रदेश के मुखिया ने इसी साल हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में जबरदस्त प्रचार किया था। उन्होंने दिल्ली चुनाव में हरी नगर, मुस्तफाबाद, मालवीय नगर, विकासपुरी, नफजगढ़, त्रिनगर, उत्तम नगर, नांगलोई, बादली, रोहिणी और मादीपुर सीटों पर प्रचार किया था। इनमें से एक छोड़कर पार्टी बाकी सारी सीटें जीत गई थी।। पिछले साल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने उत्तर प्रदेश में प्रचार किया था। उन्होंने देवरिया लोकसभा से पार्टी प्रत्याशी  शशांक मणि त्रिपाठी और राबर्ट्सगंज लोकसभा की दुद्धी विधानसभा उप चुनाव के प्रत्याशी श्रवण सिंह गोंड के समर्थन में जनसंपर्क और रोड शो किया था।  हरियाणा-कश्मीर में चला था सीएम डॉ. मोहन का जादू इसी तरह सीएम यादव ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर लोकसभा चुनाव में भी जोरदार प्रचार किया। उनके दौरों की खास बात यह रही कि वे हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में जहां-जहां गए, वहां-वहां की सीटें बीजेपी जीत गई। उन्होंने हरियाणा की 5 विधानसभा सीटों भिवानी, दादरी, तोशाम, झज्जर और बवानी खेड़ा में जनसभाएं की थीं। इनमें चार सीटों पर पार्टी जीत गई थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की सांबा में प्रचार किया था। यह सीट भी पार्टी के खाते में गई थी।

तेल भुगतान में भारत का नया कदम, रूबल के साथ युआन का भी इस्तेमाल!

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर बड़ा दावा कर रहे हैं कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा. वहीं दूसरी ओर रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक का कहना है कि रूस लगातार भारत को कच्चे तेल के टॉप सप्लायर्स की लिस्ट में बना हुआ है. उन्होंने तो अब यहां तक दावा किया है कि भारत Russian Oil Import के पेमेंट के लिए अब सिर्फ रूबल ही नहीं, बल्कि चीनी करेंसी युआन में भी पेमेंट करने लगा है.  नोवाक बोले- 'चीनी करेंसी में पेमेंट का हिस्सा कम'  सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में रूसी डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि भारत ने रूसी तेल के लिए कुछ पेमेंट चीनी युआन में करना शुरू कर दिया है, हालांकि ज्यादातर लेनदेन अभी भी रूसी करेंसी रूबल में ही किए जाते हैं. उन्होंने बड़ा दावा करते हुए बताया कि, 'मुझे पता है कि इस तरह के भुगतान शुरू हो गए हैं और मेरा मानना ​​है कि वर्तमान में यह प्रतिशत कम है.' बता दें कि पुरानी रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत रूसी तेल के लिए मुख्यतः भारतीय करेंसी Rupee में भुगतान कर रहा था. चीन के बाद दूसरा बड़ा खरीदार रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) के अनुसार, सितंबर में चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद उस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों ने तेल व्यापार के निपटान के लिए युआन और यूएई करेंसी दिरहम समेत वैकल्पिक मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने का काम किया है, जिन पर लंबे समय से अमेरिकी डॉलर का ही वर्चस्व रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल की बढ़ी खरीद भारत, जो कि पारंपरिक रूप से मिडिल ईस्ट क्रूड ऑयल पर निर्भर है. इसने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से ही रूसी तेल के अपने आयात में जोरदार बढ़ोतरी की है. इसके पीछे रूस की ओर से किफायती दरों पर क्रूड ऑयल मुहैया कराना बड़ा कारण है. पश्चिमी प्रतिबंधों और यूरोपीय डिमांड में कमी के कारण Russian Oil पर भारी छूट मिलती है, जिसके चलते भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात कम ही समय में कुल कच्चे तेल आयात तब के के 1 फीसदी से बढ़कर अब करीब 40 फीसदी हो चुका है.  Trump कर रहे हैं ये दावे एक ओर जहां रूस के डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक भारत की रूसी तेल खरीद बढ़ने और इसके पेमेंट के लिए चीनी करेंसी तक के इस्तेमाल की बात कह रहे हैं. तो दूसरी ओर व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के सामने भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल के निरंतर आयात पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने आगे दावा किया कि पीएम मोदी ने आज मुझे आश्वस्त किया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह एक बड़ा कदम है. अब हमें चीन को भी यही करने के लिए कहना होगा. हालांकि ट्रंप के दावे को लेकर भारत की तरफ से अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है.

अयोध्या के कुम्हारों के जीवन में ‘दीप’ जला रही योगी सरकार

दीपोत्सव 2025 दीपोत्सव से रोशन हुए कुम्हारों के घर, अयोध्या में युवाओं को मिल रहा रोजगार अयोध्या के कुम्हारों के जीवन में ‘दीप’ जला रही योगी सरकार 2017 के बाद बदला हाल : कभी हजारों में कमाने वाले अब दीपोत्सव में कमा रहे लाखों दीपोत्सव से अयोध्या के सैकड़ों कुम्हार परिवारों को मिला रोजगार इलेक्ट्रिक चाक से बढ़ा उत्पादन, आधुनिकता और परंपरा का संगम योगी सरकार की पहल से मिट्टी के दीयों को मिली नई पहचान 26 लाख 11 हजार 101 दीप जलाकर अयोध्या रचेगी नया कीर्तिमान अयोध्या दीपोत्सव शुरू होने के बाद से अयोध्या के कुम्हार परिवारों के घरों में खुशहाली का उजाला फैल गया है। जो युवा कभी काम की तलाश में बाहर जाते थे, वे अब अपनी ही धरती पर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योगी सरकार के प्रयासों से शुरू हुए दीपोत्सव ने न केवल अयोध्या की अर्थव्यवस्था को बल दिया है बल्कि पारंपरिक मिट्टी कला को भी नई पहचान दी है। नौवें दीपोत्सव में इस बार 26 लाख 11 हजार 101 दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। अवध विश्वविद्यालय के छात्र, अधिकारी और स्वयंसेवी संगठन भी इस महाउत्सव को ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं। जयसिंहपुर गांव के बृज किशोर प्रजापति बताते हैं कि जबसे दीपोत्सव मनाया जा रहा है, तब से वे और उनका परिवार लगातार दीए बना रहे हैं। इस बार उन्हें दो लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की परंपरा शुरू कर हमारे जैसे परिवारों को रोजगार से जोड़ा है। अब हम आत्मनिर्भर हैं। आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादन क्षमता पुराने ढर्रे को छोड़कर अब कुम्हार आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन में तेजी आई है बल्कि दीयों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। जयसिंहपुर गांव के करीब 40 से अधिक कुम्हार परिवार दीपोत्सव के लिए दिन-रात मिट्टी के दीए बनाने में जुटे हैं। कभी हजारों में कमाते थे, अब बन रहे लखपति 2017 से पहले ये कुम्हार रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करते थे। दीपोत्सव शुरू होने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। पहले जहां ये परिवार महीने में 20 से 25 हजार रुपये कमाते थे, वहीं अब दीपोत्सव के दौरान ही लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है। सोहावल की पिंकी प्रजापति बताती हैं कि इस बार उन्हें एक लाख दीए बनाने का ऑर्डर मिला है। उन्होंने कहा, पहले दीपावली के समय दीए सस्ते बिकते थे, अब सरकार के आह्वान से बाजार में अच्छा रेट मिल रहा है। दीपोत्सव ने दी नई पहचान और बाजार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दीपोत्सव में मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे स्थानीय कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर मिल रहे हैं। जयसिंहपुर, विद्याकुण्ड, सोहावल और आसपास के गांवों में इस समय उत्सव जैसा माहौल है।  अयोध्या के स्थानीय निवासी रामभवन प्रजापति, गुड्डू प्रजापति, राजू प्रजापति, जगन्नाथ प्रजापति, राम भवन प्रजापति, सुनील प्रजापति और संतोष प्रजापति समेत यहां सैकड़ों की संख्या में पूरा परिवार मिट्टी गूंथने, आकार देने और दीयों को सुखाने-बेचने में जुटा है। जानिए, कब कितने दीप जले  वर्ष                जले दीप 2017             1.71 लाख 2018             3.01 लाख 2019             4.04 लाख 2020             6.06 लाख 2021             9.41 लाख 2022           15.76 लाख 2023           22.23 लाख 2024                25.12 लाख

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तैयारियों की समीक्षा की, 20 अक्टूबर पंजीयन की अंतिम तिथि

रायपुर : बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियां जोरों पर, अब तक 3.09 लाख खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने तैयारियों की समीक्षा की, 20 अक्टूबर पंजीयन की अंतिम तिथि बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाएं समय के पहले सुनिश्चित करने के निर्देश बस्तर ओलंपिक की ख्याति पूरे देश में, यह मात्र क्षेत्रीय आयोजन नहीं –  अरुण साव रायपुर बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में आयोजित होने वाले बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियाँ जोरों पर हैं। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारियों की बैठक लेकर इसकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए विकासखंड स्तरीय आयोजनों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने खेल मैदानों की उपलब्धता, उनकी मैपिंग, भोजन, यातायात, आवास, प्राथमिक चिकित्सा, निर्णायकों एवं रेफरियों की व्यवस्था के साथ ही सभी मूलभूत जरूरतों की अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार और संचालक मती तनूजा सलाम भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थीं। बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में भागीदारी के लिए अब तक तीन लाख नौ हजार से अधिक खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें कांकेर जिले के 42 हजार 228, कोंडागांव के 43 हजार 333, दंतेवाड़ा के 44 हजार 395, नारायणपुर के 46 हजार 074, बस्तर के 52 हजार 312, बीजापुर के 40 हजार 437 तथा सुकमा जिले के 40 हजार 830 प्रतिभागी शामिल हैं। विगत 22 सितम्बर से बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन की शुरूआत की गई थी। खिलाड़ियों के पंजीयन का काम आगामी 20 अक्टूबूर तक जारी रहेगा। बस्तर ओलंपिक का विकासखंड स्तर पर आयोजन 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक, जिला स्तरीय आयोजन 5 नवम्बर से 15 नवम्बर तक तथा संभाग स्तरीय आयोजन 24 नवम्बर से 30 नवम्बर तक किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने बैठक में बस्तर ओलंपिक की पंजीयन प्रक्रिया एवं व्यापक प्रचार-प्रसार की समीक्षा की। उन्होंने ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रचार-प्रसार की योजनाओं—जैसे दीवार लेखन, मशाल यात्रा, पोस्टर, बैनर, पैंपलेट वितरण, हाट-बाज़ारों में प्रचार इत्यादि की जानकारी ली। उन्होंने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।  साव ने प्रत्येक विकासखण्ड में पंजीयन की स्थिति की समीक्षा कर जिन क्षेत्रों में पंजीयन कम हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिलाओं की तुलना में पुरुष प्रतिभागियों के कम पंजीयन को देखते हुए जिला खेल अधिकारियों को पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा।  साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि बस्तर ओलंपिक अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि इसकी ख्याति पूरे देश में फैल चुकी है। अतः इसे राष्ट्रीय महत्व का आयोजन मानते हुए विकासखंड से लेकर संभाग स्तर तक उच्च गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ आयोजित किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के निर्णायकों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रेरणा स्रोत के रूप में आमंत्रित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक होने वाले विकासखंड स्तरीय आयोजनों के लिए सभी जिलों को समय पूर्व संपूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।  साव ने फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल जैसे खेलों में पंजीयन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने तथा खेल विभाग से प्राप्त बजट के अतिरिक्त जिला कलेक्टरों के सहयोग से सीएसआर निधि से वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक मती रश्मि ठाकुर तथा खेल अधिकारी  गिरीश शुक्ला भी बैठक में मौजूद थे। 11 खेलों की स्पर्धाएं होंगी, नक्सल हिंसा के दिव्यांग और आत्मसमर्पित नक्सली भी दिखाएंगे अपना दमखम विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर एक महीने से भी अधिक समय तक चलने वाले बस्तर ओलंपिक में 11 खेलों को शामिल किया गया है। जूनियर वर्ग में बालक और बालिकाओं तथा सीनियर वर्ग में महिला और पुरूषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी। नक्सल हिंसा के दिव्यांगों तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी संभाग स्तर पर पुरूषों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बस्तर ओलंपिक के दौरान एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में पूरे बस्तर के खिलाड़ी अपना खेल कौशल दिखाएंगे।