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‘एज ऑफ कंसेंट’ कम करना कितना सुरक्षित? जानिए दिमागी परिपक्वता, सामाजिक खतरे और वैश्विक अनुभव

नई दिल्ली तीन साल पहले तक फिलीपींस में यौन रिश्तों के लिए सहमति की उम्र महज 12 साल थी. ईसाई देश में यौन शोषण का ग्राफ इतना ऊपर पहुंच गया कि हर पांच में से एक बच्चा एक्सट्रीम हालात का शिकार होने लगा. भारी हंगामों के बाद आखिरकार साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 कर दिया गया. जापान में भी यौन संबंधों पर सहमति की उम्र 13 साल थी, जिसे कुछ वक्त पहले ही बढ़ाया गया. क्या वजह है कि बाकी देश एज ऑफ कंसेंट को बढ़ा रहे हैं और क्यों हमारे यहां इसे घटाने की चर्चा हो रही है? फिलीपींस, दुनिया के उन गिने-चुने देशों में रहा है जहां यौन सहमति की उम्र बेहद कम, केवल 12 साल थी. साल 1930 से वहां यही नियम रहा. असल में इससे पहले ये देश अमेरिकी कॉलोनी था. उसके बाद पीनल कोड रिवाइज हुआ. उस दौर के लोग मानते थे कि 12 साल की उम्र बचपन से युवावस्था की तरफ बढ़ने वाली उम्र है और लड़की शादी के लिए तैयार हो सकती है.  धर्म का भी रहा एंगल ये कैथोलिक-बहुल देश है  चर्च का मानना रहा कि शादी के बाद ही यौन संबंध बनना चाहिए. यही वजह है कि लड़कियों की जल्दी शादियां होने लगीं और उम्र बढ़ाने को लेकर गंभीर बहस नहीं हो सकी. अस्सी के दशक में पहली बार महिला अधिकारों की बात शुरू हुई लेकिन तब भी सरकार इस मुद्दे पर चुप रही. चूंकि चर्च गर्भनिरोधक और यौन शिक्षा के विरोध में रही तो एज ऑफ कंसेंट बढ़ाने की मांग दबी ही रही.  क्या नुकसान दिखने लगा टीन-एज प्रेग्नेंसी लगातार बढ़ने लगी. कोई वयस्क 13 या 14 साल की लड़की के साथ संबंध बनाकर भी साफ बच निकलता था. अब शादियां तो नहीं हो रही थीं, लेकिन रेप बढ़ रहे थे. नतीजा ये हुआ कि लाखों लड़कियां नाबालिग लड़कियां मां बन गईं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि फिलीपींस दक्षिण-पूर्व एशिया में टीन-एज प्रेग्नेंसी कैपिटल बन चुका था. खुद स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि साल 2020 में हर दिन लगभग 500 बच्चियां गर्भवती हो रही थीं. उनके स्कूल छूट गए और जिंदगी ठहर गई.  यूएन एजेंसियां लगातार दबाव बनाने लगीं कि फिलीपींस अपना नियम बदले. साल 2021 में यूएन की कमेटी ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड ने साफ कहा कि 12 साल में कंसेंट इंटरनेशनल मानकों के खिलाफ है. अब देश पर प्रेशर था कि उसने बात न सुनी तो मुश्किल पड़ सकती है. मातृत्व और शिशु मृत्यु दर भी बढ़ चुकी थी. तब तक 9 दशक बीत चुके थे. अब जाकर फिलीपींस को लगा कि यह कानून न सिर्फ पुराना है, बल्कि खतरनाक भी है. 12 साल की उम्र को कानूनी सहमति मानना असल में अपराधियों को बचने का रास्ता देना था. साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 साल किया गया.  विकसित देश जापान के हाल भी अलग नहीं रहे वहां का क्रिमिनल कोड 1907 से चला आ रहा था, जिसमें सहमति की उम्र 13 साल तय थी. इसका मतलब यह था कि कानूनन 13 साल की बच्ची भी यौन संबंध के लिए सहमति दे सकती थी. अगर कोई मामला अदालत में जाता, तो यौन अपराधी झूठ बोलकर बच निकलता था. यहां तक कि वहां रेप की परिभाषा तक बहुत सीमित थी. कानून कहता था कि बलात्कार तभी माना जाएगा जब जबरन यौन संबंध बनाया गया हो. पीड़िता को साबित करना पड़ता था कि उसने पूरी ताकत से विरोध किया, लेकिन फिर भी खुद को बचा नहीं पाई. अगर लड़की डर गई, चुप रही, या विरोध करने की स्थिति में न हो तो कोर्ट मान लेती थी कि ये रेप नहीं, सहमति है.  वैसे जापान में टीन-एज प्रेग्नेंसी उतनी ज्यादा नहीं थी जितनी फिलीपींस में, लेकिन छोटी बच्चियों का ऑनलाइन शोषण तेज हो चुका था. अपराधी जानते थे कि वे बच निकलेंगे. साल 2020 के समय वहां यौन अपराधों के खिलाफ भारी प्रोटेस्ट हुए. यूएन ने भी दबाव डाला कि वो सहमति की उम्र को ग्लोबल मानकों के आसपास लाए. आखिरकार दो साल पहले जापान की संसद ने नया कानून पास किया, जिसमें सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 16 साल कर दी गई. साथ ही, नशे में या दबाव में बनाए गए संबंधों को रेप की कैटेगरी में डाला गया.  16 साल में कितना विकसित हो पाता है मस्तिष्क अब कई देश कंसेंट की आयु 16 से बढ़ाते हुए 18 तक जाने की सोच रहे हैं, वहीं भारत में इसे कम करने की बात हो रही है. इस पक्ष की दलील है कि कई बार टीन-एजर्स रोमांटिक रिश्ते में होते हैं लेकिन उम्र की वजह से इसे भी रेप की श्रेणी में डाल दिया जाता है और लड़कों को कड़ी सजा मिलती है.  हालांकि इसका दूसरा पहलू ज्यादा गंभीर है. 16 साल की उम्र में बच्चे शारीरिक तौर पर तो बड़े हो चुके होते हैं लेकिन ब्रेन अभी पूरी तरह डेवलप नहीं हुआ होता. खासकर, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स,जो फैसला लेने, जोखिम समझने और भावनाओं को कंट्रोल करने का काम करता है, वो पूरी तरह बना ही नहीं होता. यानी इस उम्र के लोग इमोशनली तैयार नहीं हो सकते कि वे पूरी समझदारी से यौन संबंध बनाएं. हो सकता है कि इसके बाद वो गिल्ट ट्रिप पर चला जाए, डिप्रेशन का शिकार हो जाए या लगातार गलत रिश्तों में फंसता चला जाए. अगर एक पार्टनर बड़ी उम्र का हो तो दूसरा कम उम्र के चलते प्रेशर का शिकार भी हो सकता है. पढ़ाई छूटती है, सो अलग. यही वजह है कि सेंटर खुद मौजूदा आयु सीमा को बनाए रखने पर जोर दे रहा है.

ट्रंप की घोषणा का असर: 5 बड़ी फार्मा कंपनियों के शेयर धड़ाम

मुंबई   डोनाल्‍ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात फार्मा समेत कई सेक्‍टर पर टैरिफ का ऐलान कर दिया.फार्मा पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है, जिसका असर आज भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है. भारतीय शेयर बाजार आज दबाव में कारोबार कर रहा है. सेंसेक्‍स 412.67 अंक गिरकर 80,747.01 पर है और निफ्टी 115 अंक गिरकर 24,776 पर कारोबार कर रहा है. वहीं फार्मा शेयर, जिनका अमेरिका में बड़ा एक्‍सपोजर है, आज बिखर गए. ट्रंप टैरिफ के ऐलान के बाद भारत के 5 फार्मा शेयर तेजी से बिखरे हैं, जिसमें अरबिंदो, ल्यूपिन, डीआरएल, सन और बायोकॉन शामिल हैं. Arvindo Pharma आज 1.91 फीसदी गिरकर 1,076 रुपये पर कारोबार कर रहा है. Lupin शेयर में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 1918.60 रुपये पर कारोबार कर रहा है. सन फार्मा के शेयर करीब 3.8 फीसदी टूटकर 1580 पर कारोबार कर रहा है. Cipla के शेयर में 2 फीसदी की गिरावट आई है. Strides Pharma Science 6 फीसदी, नैट्को फॉर्मा 5 फीसदी, बॉयोकॉन 4 फीसदी, ग्‍लैनफार्मा 3.7%, डिविलैब 3%, IPCA लैब 2.5% और Zydus life 2 % टूटे हैं. मैनकाइंड फार्मा में भी 3.30 फीसदी की गिरावट रही.  बीएसई टॉप 30 शेयरों की बात करें तो सबसे ज्‍यादा ग‍िरावट सनफार्मा के शेयर में 3.8 फीसदी की रही. इसके बाद इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एशियन पेंट्स जैसे 25 शेयर 2 फीसदी तक टूटे हैं. बाकी 5 शेयरों में तेजी है. भारी दबाव में ये सेक्‍टर्स टैरिफ ऐलान के बाद आज फार्मा सेक्‍टर में सबसे बड़ा दबाव दिखाई दे रहा है. यह सेक्‍टर 1.80  फीसदी टूट चुका है. इसके अलावा, H-1B वीजा के कारण आईटी 1.30 फीसदी और हेल्‍थकेयर सेक्‍टर 1.50 फीसदी टूटकर कारोबार कर रहे हैं. 88 शेयर 52वीक के लो पर  बीएसई के 3,073 शेयरों में से 864 शेयरों में तेजी देखी जा रही है, जबकि 2,062 शेयर गिर हुए हैं. 147 शेयरों में कोई एक्‍शन नहीं दिखाई दे रहा है. 76 शेयरों में अपर सर्किट और 65 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है. 88 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर कारोबार कर रहे हैं.  निवेशकों को तगड़ा नुकसान  शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों को आज भी तगड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. बीएसई मार्केट कैपिटलाइजेशन आज 454 लाख करोड़ हो चुका है, जबकि कल 457 लाख करोड़ रुपये था. इसका मतलब है कि निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है.     

धनतेरस, दिवाली, दशहरा समेत अक्टूबर के सभी व्रत-त्योहारों की तारीखें एक क्लिक में

नईदिल्ली  साल 2025 का अक्टूबर  भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में बेहद खास रहने वाला है. इसी महीने 1 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र का समापन होगा. इसके बाद करवा चौथ, दशहरा, धनतेरस, दिवाली और छठ महापर्व भी मनाए जाएंगे. देश के हर हिस्से में ये सभी त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाए जाते हैं. आइए अक्टूबर में आने वाले व्रत त्योहारों पर एक नजर डालते हैं. अक्टूबर में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट 1 अक्टूबर 2025 – महानवमी शारदीय नवरात्र की महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस दिन नवमी तिथि का कन्या पूजन किया जएगा. 2 अक्टूबर 2025 – दशहरा/विजयादशमी दशहरा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है. इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और माता दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की. देशभर में रावण दहन और विजयादशमी उत्सव बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं. यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. 3 अक्टूबर 2025 – पापांकुशा एकादशी सनातन धर्म में पापांकुशा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की उपासना से समस्त पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है. 4 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत शनि प्रदोष व्रत का महत्व ग्रह शांति और आयु वृद्धि में होता है. इस दिन शनि देव की पूजा और हनुमानजी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है. 6 अक्टूबर 2025 – शरद पूर्णिमा शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं. कोजागर पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी की आराधना से धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. 7 अक्टूबर 2025 – वाल्मीकि जयंती / मीराबाई जयंती संत वाल्मीकि और भक्ति मार्ग की आदर्श महिला मीराबाई की जयंती इस दिन मनाई जाती है. ये हमें सच्चे भक्ति भाव और जीवन में नैतिकता का महत्व सिखाते हैं. 8 अक्टूबर 2025 – कार्तिक माह प्रारंभ कार्तिक माह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है. इस महीने में किए जाने वाले व्रत और पूजा विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं. 10 अक्टूबर 2025 – करवा चौथ / संकष्टी चतुर्थी करवा चौथ विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं. संकष्टी चतुर्थी भी इस दिन विशेष महत्व रखती है. 13 अक्टूबर 2025 – अहोई अष्टमी अहोई अष्टमी व्रत माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस व्रत में माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए कामना करती हैं. 17 अक्टूबर 2025 – रमा एकादशी / तुला संक्रांति रमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. तुला संक्रांति के दिन सूर्य तुला राशि में प्रवेश करता है, जो कृषक और व्यापारियों के लिए शुभ माना जाता है. 18 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत / धनतेरस / यम दीपम धनतेरस पर मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. इस दिन धातु और गहनों की खरीदारी शुभ मानी जाती है. यम दीपम का उत्सव यमराज के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए मनाया जाता है. 20 अक्टूबर 2025 – नरक चतुर्दशी / लक्ष्मी पूजा / दिवाली दीवाली का पर्व इस साल 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है. इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा कर धन, समृद्धि और सुख की प्राप्ति की जाती है. इस वर्ष दिवाली का पूजा मुहूर्त शाम 07:08 से 08:18 बजे तक रहेगा. 21 अक्टूबर 2025 – कार्तिक अमावस्या कार्तिक अमावस्या को पितरों की स्मृति में तर्पण और पितृपक्ष संबंधित धार्मिक कर्म किए जाते हैं. 22 अक्टूबर 2025 – गोवर्धन पूजा गोवर्धन पूजा पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर जीवन में संपन्नता और खुशहाली की कामना की जाती है. 23 अक्टूबर 2025 – भाई दूज भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व है. बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. 25 अक्टूबर 2025 – विनायक चतुर्थी गणपति भगवान की पूजा इस दिन की जाती है. यह दिन विशेष रूप से व्यापारियों और गृहस्थों के लिए मंगलकारी माना जाता है. 27 अक्टूबर 2025 – छठ पूजा छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होती है. यह व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार में खुशहाली लाने वाला माना जाता है. 31 अक्टूबर 2025 – अक्षय नवमी अक्षय नवमी को अक्षय संपत्ति और अक्षय लाभ की कामना के साथ मनाया जाता है. इस दिन की गई पूजा और दान स्थायी लाभ प्रदान करता है.

छात्राओं के स्वास्थ्य पर जोर: सरोजनी नायडू महाविद्यालय में हुआ बड़ा हेल्थ चेकअप कैंप

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सरोजनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार” अभियान का मूल किशोरियों और युवतियों का संपूर्ण स्वास्थ्य है। स्वस्थ परिवार की आधारशिला महिलाओं का स्वास्थ्य है। उन्होंने कहा कि हीमोग्लोबिन जांच, पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर जीवन के लक्ष्यों को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में जाकर नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएँ, जहाँ जांच, परामर्श और उपचार निःशुल्क उपलब्ध है। स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत सरोजनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 4,518 छात्राओं की स्वास्थ्य जांच की गई। साथ ही, विषय विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गयीं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने छात्राओं से कहा कि अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को छुपाने से वे और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए बेझिझक होकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या संस्थाओं से परामर्श लेना चाहिए। विधायक भगवानदास सबनानी, माननीय महापौर श्रीमती मालती राय, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना सहित स्वास्थ्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। शिविर में हीमोग्लोबिन, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सिकल सेल स्क्रीनिंग, क्षय रोग तथा नेत्र रोग की जांच कर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्श दिया गया। छात्राओं ने ‘खुल के पूछो’ कार्यक्रम में पोषण, मासिक धर्म स्वच्छता, त्वचा व सौंदर्य संबंधी प्रश्न पूछे जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया। स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों के अंतर्गत स्वास्थ्य खेल, जुम्बा सत्र (थोड़ी सेहत, थोड़ी मस्ती) का आयोजन किया गया। कई छात्राओं ने स्वैच्छिक रक्तदान भी किया। शिविर में आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ आईडी एवं आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए। कुल 439 आभा और आयुष्मान कार्ड बनाए गए, 459 छात्राओं का दंत परीक्षण, 152 को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, 381 को आयुष एवं पोषण सेवाएँ तथा 120 की सिकल सेल टेस्टिंग की गई। साथ ही, 20 यूनिट रक्तदान भी हुआ।  

आयुर्वेद से नई उम्मीद: मध्य प्रदेश में ओजोन थेरेपी से होगा कैंसर पीड़ितों का इलाज आसान

भोपाल  कैंसर रोगियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रेडिएशन से होने वाली पीड़ा कम करने के लिए आयुर्वेद चिकित्सकों ने ओजोन थेरेपी की शुरुआत की है। इंदौर के आयुर्वेद शासकीय अस्तपताल में प्रयोग के तौर पर यह थेरेपी शुरू कर दी गई है। इसके सकारात्मक परिणाम देख प्रदेश भर के शासकीय आयुर्वेद अस्पतालों में शुरू करने की तैयारी है। दरअसल आयुष मंत्रालय ने ही इस तरह की थेरेपी का सुझाव दिया था, जिसके बाद इसे शुरू किया गया है। आयुर्वेद में ओजोन थेरेपी नई प्रक्रिया है, जिसे पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के संतुलित मेल से विकसित किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह प्रक्रिया शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को कमजोर करती है। वहीं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए तैयार करती है। इसमें आयुर्वेदिक औषधियों का ही इस्तेमाल होता है। एक महीने पहले इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय अस्पताल में प्रायोगिक तौर पर इसे शुरू किया गया था। 50 रोगियों पर हुआ इसका प्रयोग 50 रोगियों पर इसका प्रयोग हुआ। उनमें दर्द, सूजन में कमी और जीवन स्तर में सुधार दिखा है। उसके बाद इसे कारुण्य कार्यक्रम में शामिल किया गया है, जो कैंसर, अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे रोगों में सहायक उपचार के लिए वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के इस्तेमाल के लिए है। अधिकारियों का कहना है कि इसी महीने से भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय अस्पताल में इसकी सुविधा मिलने लगेगी। उसके बाद प्रदेश के सभी सात शासकीय आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों में इसकी सुविधा मिलेगी। ऐसे काम करती है ओजोन थेरेपी विशेषज्ञों के मुताबिक ओजोन ऑक्सीजन का सक्रिय रूप है। इसे शरीर में अलग-अलग तरीकों से पहुंचाया जाता है। इसे अंतःशिरा (आईवी), इंजेक्शन, ऑटोहेमोथेरेपी, ओजोन साना और ओजोनेटेड तेल या पानी का उपयोग कर शरीर में पहुंचाया जाता है। इसका असर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, संक्रामक तत्वों को रोकने, दर्द और सूजन कम करने तथा कोशिकाओं के पुनर्जन्म को बढ़ावा देने में दिखता है। दूसरी बीमारियों में भी उपयोगी कैंसर के अलावा ओजोन थेरेपी का प्रयोग गठिया, घुटनों और कमर दर्द, त्वचा रोग, मधुमेह, हृदय रोग और घाव भरने की प्रक्रिया में भी कारगर पाया गया है। इंदौर में शुरू किया गया है उपचार     ओजोन थेरेपी से कैंसर के मरीजों का उपचार इंदौर में शुरू किया गया है। प्रयास है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी प्रमुख आयुर्वेद अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। हम भी इसकी तैयारी कर रहे हैं। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल।  

मध्य प्रदेश: तेज रफ्तार ने ली 14 हजार से ज्यादा जानें, ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुनी मौतें

भोपाल  मध्य प्रदेश में तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों पर अंकुश लगाया जाए तो हर साल 10 हजार से अधिक लोगों की जान बच सकती है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 75 प्रतिशत मामले तेज रफ्तार के रहे। पुलिस ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरआई) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 14 हजार 791 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हुई है, जबकि 2023 से 13 हजार 798 लोगों की जान चली गई थी।ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर हुई मौतों की संख्या शहरी क्षेत्र की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर दुर्घटनाओं से लगभग नौ हजार लोगों की मौत हुई है। पिछले चार वर्ष से यह संख्या आठ हजार से नौ हजार के बीच है। इसका कारण यह है कि भीड़ नहीं होने के कारण लोग तेज गति से वाहन चलाते हैं। दूसरा यह की सड़कों पर संरक्षा (सेफ्टी) मापदंडों का पालन भी ठीक से नहीं हो पाता। अंधेरा, अंधा मोड़, संकरी सड़क जैसे ब्लैक स्पाट भी यहां दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुल मौतों में शराब पीकर और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने के कारण 500 से अधिक लोगों की मौत हुई है। पुलिस मुख्यालय अब इस रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों और संबंधित एजेंसियों को दुर्घटनाएं रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए निर्देशित करने जा रहा है। ये है दुर्घटनाओं की बड़ी वजह     मध्य प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस का अमला मात्र साढ़े तीन हजार है, जबकि जिस तरह से वाहनों की संख्या बढ़ रही है उससे इसका दोगुना पुलिस बल चाहिए।     मध्य प्रदेश में ब्लैक स्पाट यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की संख्या घटने की जगह बढ़ रही है। इनकी संख्या 400 से अधिक है। स्थायी तौर पर इस समस्या को हल करने के लिए जिम्मेदार एजेंसिया रुचि नहीं ले रही हैं। पुलिस की चेकिंग के दौरान चालान की कार्रवाई में सबसे अधिक ध्यान हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं लगाने वालों पर रहता है। दोनों को मिला लें तो प्रतिवर्ष आंकड़ा औसत 10 लाख के ऊपर रहता है, जबकि तेज गति से वाहन चलाने वालों में 50 हजार के विरुद्ध भी कार्रवाई नहीं होती। वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी     यह सही है कि सड़क हादसों की बड़ी वजह तेज गति से वाहन चलाना है। सभी को गति सीमा का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सड़कें बेहतर होने से रफ्तार भी बढ़ी है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए विशेष अभियान चलाकर भी यातायात नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। – शाहिद अबसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पीटीआरआई)।  

कर्मचारियों को बड़ी राहत: जनवरी से ATM के ज़रिए मिलेगी PF की सुविधा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के मेंबर्स के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है. ईपीएफओ जनवरी 2026 से एटीएम से पैसा निकालने की सर्विस शुरू कर सकता है. खबरों के मुताबिक, ईपीएफओ की सर्वोच निर्णय लेने वाली संस्‍था CBT अक्‍टूबर के दूसरे सप्‍ताह में होने वाली अपनी आगामी बोर्ड बैठक में ATM से पैसे निकालने की सुविधा को मंजूरी दे सकती है.  ATM से पैसा निकालने की सुविधा से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी. उन्‍हें पैसा निकालने के लिए किसी तरह के ऑनलाइन क्‍लेम की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी. साथ ही लंबे इंतजार की भी जरूरत खत्‍म हो जाएगी. कर्मचारी सीधे एटीएम ब्रांच जाकर ATM से पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं.   सीबीटी के एक सदस्य ने मनीकंट्रोल को बताया कि हमें पता चला है कि ईपीएफओ का आईटी ढांचा ATM जैसे ट्रांजेक्‍शन की अनुमति देने के लिए तैयार है. उन्होंने आगे कहा कि एटीएम से पैसे निकालने की एक सीमा होगी, लेकिन इस पर चर्चा होनी बाकी है.  मंत्रालय ने आरबीआई से की बात  लेबर मिनिस्‍ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने ईपीएफओ एटीएम की सुविधा शुरू करने के लिए बैंकों के साथ-साथ, RBI से भी बात की है. अधिकारी ने कहा कि एटीएम सुविधा को एक जरूरत के तौर पर देखा जा रहा है, क्‍योंकि सरकार लोगों को उनके पीएफ अकाउंट तक ज्‍यादा पहुंच देना चाहती है.  ईपीएफओ के पास कुल 28 लाख करोड़ ईपीएफओ के तहत अभी 7.8 करोड़ लोग रजिस्‍टर्ड हैं, जिन्‍होंने मिलकर EPFO के पास 28 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा डिपॉजिट किया है. 2014 में यह आंकड़ा- 7.4 लाख करोड़ रुपये और 3.3 करोड़ था.  PF विड्रॉल के लिए जारी होगा कार्ड  सूत्रों ने बताया कि संभावना है कि EPFO अपने सदस्यों को एक विशेष कार्ड जारी करेगा, जिससे वे ATM से अपनी राशि का एक हिस्सा निकाल सकेंगे. इस साल की शुरुआत में EPFO ने कस्‍टमर्स के लिए पैसे की उपलब्‍धता को आसान बनाने के लिए ऑटोमैटिव क्‍लेम सेटलमेंट अमाउंट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया था. इस प्रॉसेस के तहत ऑटोमैटिक सिस्‍टम क्‍लेम की पात्रता की पुष्टि के लिए डिजिटल जांच और एल्‍गोरिदम के एक सेट का उपयोग करती है. पूरी प्रक्रिया सिस्टम-संचालित है और सदस्य के केवाईसी विवरण पर आधारित है.  विशेषज्ञों का कहना है कि ATM के माध्यम से ईपीएफओ फंड विड्रॉल की अनुमति देने से सदस्यों के लिए धन तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हो जाएगी. खासतौर से इमरजेंसी के समय में, क्योंकि वर्तमान में विड्रॉल में अक्सर प्रक्रियागत देरी और कागजी कार्रवाई शामिल होती है. 

पेमेंट का नया दौर: QR कोड की छुट्टी, अब अंगूठा लगाएंगे और हो जाएगा भुगतान

नई दिल्ली भारत में कई लोगों को स्मार्टफोन से QR Code स्कैन करके UPI पेमेंट करते हुए देखा होगा, लेकिन जिनके पास मोबाइल ना हो वे क्या करें. ऐसे ही लोगों के लिए अब Proxgy स्टार्टअप ने ThumbPay नाम का प्रोडक्ट अनवील किया है, जो बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन की मदद से पेमेंट करने की सुविधा देता है. यानी आप सिर्फ अंगूठा लगाकर दुकान, पेट्रोल पंप और शोरूम आदि पर पेमेंट कर सकेंगे. यह सिस्टम आधार ऑथेंटिकेशन को UPI से कनेक्ट करता है. इसके लिए फोन, कार्ड या वॉलेट को कनेक्ट करने की जरूरत नहीं होगी. कस्टमर्स को पेमेंट करने के लिए सिर्फ डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाना होगा.  ThumbPay में पेमेंट का प्रोसेस ?  ThumbPay से पेमेंट करने के लिए कस्टमर्स को डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाना होगा, जिसके बाद उसकी स्कैनिंग होगी. आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम (AEPS) सिस्टम पहले अंगूठे की मदद से शख्स को वेरिफाई करेगा. ऑथेंटिकेशन कंप्लीट होने के बाद UPI सिस्टम बैंक टू बैंक पेमेंट कंप्लीट करेगा. इसके लिए कस्टमर्स को QR Code, स्मार्टफोन और कैश रखने की जरूरत नहीं होगी.  सिक्योरिटी और हाइजीन का भी रखा ध्यान कंपनी ने बताया है कि इस डिवाइस में सर्टिफाइड फिंगरप्रिंट स्कैनर लगाया है, जो फ्रॉड डिटेक्शन के साथ आता है. इसमें वेरिफिकेशन्स के लिए एक छोटा कैमरा भी दिया है. इसमें हाइजीन के लिए UV स्टेरेलाइजेशन भी दिया जाता है.  ThumbPay में QR कोड और NFC पेमेंट का सपोर्ट डिवाइस को और बेहतर बनाने के लिए इसमें QR कोड और NFC पेमेंट का सपोर्ट दिया है. UPI साउंडबॉक्स और 4G का सपोर्ट मिलेगा. इसमें वाईफाई कनेक्शन की भी सुविधा है.   ThumbPay की कीमत ThumbPay की कीमत करीब 2 हजार रुपये है. यह बैटरी पावर के साथ भी काम कर सकेगा, जिसकी मदद से इसे बड़े शोरूम, छोटी दुकानों और गांवों की दुकानों में भी यूज किया जा सकेगा.  असल में यह आधार से कनेक्टेड बैंक खाते से सीधे जुड़ता है. इसके बाद कोई भी शख्स जिसका आधार कार्ड से बैंक अकाउंट लिंक है, वो इस डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाकर कर पेमेंट कर सकते हैं.  दुकान वालों के लिए कब से होगा उपलब्ध  जानकारी के मुताबिक, इस डिवाइस ने पायलट ट्रायल को कंप्लीट कर लिया है. अब इसको UIDAI और NPCI की तरफ से कंप्लाइंस चेक मिलना है. एक बार सिक्योरिटी का अप्रूवल मिलने के बाद Proxgy इसे स्टेप बाई स्टेप तरीके से डिस्ट्रीब्यूट करेगी. 

सुपरमार्केट्स को मिली GST छूट, छोटे दुकानदारों को छोड़ दिया बाहर

 ग्वालियर  जीएसटी कम होने के बाद मंगलवार को कांच मिल क्षेत्र के निवासी बीपी श्रीवास्तव ने दुकान से घी का पैकेट खरीदा। घी का पैकेट 595 रुपए में दुकानदार ने दिया। पहले भी उन्हें घी का पैकेट इतनी ही कीमत में मिलता था। जब उन्होंने दुकानदार से जीएसटी कम करके घी देने के लिए कहा तो उसने कहा कि अभी तो पुरानी रेट में ही मिलेगा। जब हमें कम कीमत पर मिलेगा तब हम भी आपको कम कीमत पर देंगे। ऐसा केवल एक व्यक्ति के साथ नहीं हो रहा है, बल्कि शहर में बड़े सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर को छोड़ दें, गली मोहल्लों सहित अन्य जगहों की दुकानों पर जीएसटी कम होने के बाद भी सामान पुरानी कीमत या एमआरपी पर ही मिल रहा है। बिस्किट हो, चिप्स का पैकेट हो या अन्य ऐसी ही कोई पैक्ड सामग्री हो, उपभोक्ताओं को जीएसटी की छूट लागू होने के दो दिन बाद भी एमपीआरपी पर ही मिल रहे है। ऐसे में अभी लोगों को जीएसटी कम होने से कम ही राहत मिल पा रही है। सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर पर क्यों मिल रही है छूट     सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर न केवल जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं, बल्कि वे बिलिंग भी सॉफ्टवेयर से करते हैं। ऐसे में उनके साफ्टवेयर में जीएसटी कम कर दिया गया है। इसलिए इन स्टोर पर लोगों को कम कीमत में सामान मिल रहा है। जबकि छोटी व गली मोहल्लों की दुकानों में से अधिकतर जीएसटी में रजिस्टर्ड ही नहीं है, साथ ही इन दुकानों पर बिलिंग के लिए किसी तरह का साफ्टवेयर भी उपयोग नहीं करते। ऐसे में ये दुकानदार अभी भी जीटएसटी कम होने के बाद भी पुरानी एमआरपी पर ही चीजें बेच रहे हैं। शहर में अधिकतर दुकानदारों को सामान डिस्ट्रीब्यूटर या उनके एजेंट ही सप्लाई करते हैं। ये लोग सीधे सीधे कच्चे बिल पर ही माल सप्लाई करते हैं। ऐसे में दुकानदारों का कहना है कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को तो हम माल के पैसे दे चुके हैं, अब वो वापस नहीं करेगा। इसलिए जब तक पुराना माल है तब तक पुरानी ही कीमत में बेचेंगे। जिन मेडिकल स्टोरों पर कंप्यूटर से बिलिंग हो रही है वहां पर लोगों को दवाओं पर जीएसटी से राहत मिल रही है। हालांकि मेडिकल स्टोर वाले अब पहले जो 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट दवा पर देते थे, वह नहीं दे रहे हैंं। ऑनलाइन ग्रोसरी का सामान बेचने वाली कंपनियों ने भी कीमत घटाई ऑनलाइन ग्रोसरी सहित अन्य आयटम बेचने वाली कंपनियों ने अपने यहां सभी सामग्रियों की कीमतों को जीएसटी कटौती के मुताबिक घटा दिया है। आर्डर मिलने के बाद वे तुरंत डिलेवरी भी दे रही हैं। ऐसे में लोग अब दुकानों से पुरानी दरों की जगह ऑनलाइन चीजें मंगा रहे हैं। दुकानदारों की यह भी समस्या गोले का मंदिर चौराहे पर एक दुकानदार से जब 5 रुपए का बिस्किट पैकेट और एक 10 रुपये का चिप्स का पैकेट लिया गया और उससे जीएसटी कम करने की बात की तो उसने कहा कि माल नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि आप तो 5 और 10 का सिक्का या नोट दोगे। बिस्किट पर 20 पैसे कम होंगे और चिप्स पर 40 पैसे। ऐसे में अब 60 पैसे मैं कहां से लाउंगा। ये सिक्के तो अब चलन में भी नहीं है। इस वजह से 5 से लेकर 50 रुपये की चीजें पुरानी कीमतों पर ही बिक रही हैं। क्या कहते हैं दुकानदार     पांच से दस रुपये या सौ रुपये तक के पैकेट पर जीएसटी कम करके बेचें भी, लेकिन छोटे सिक्के चलन में नहीं है। ऐसे में इन चीजों को एमआरपी पर ही बेचना पड़ रहा है। जिन चीजों पर 20 से 30 या अधिक राशि छूट की होती है उसमें जरूर कम करते हैं। – प्रमोद जैन, किराना दुकानदार जब नया स्टॉक आएगा तभी कम करेंगे     अभी तक घर के उपयोग की जो भी चीजें खरीदी हैं, उन वे सभी एमपीआरपी या पुरानी दर पर मिल रही थी, उसी पर मिल रही हैं। दुकानदार कह देते हैं, जब नया स्टॉक आएगा तभी ही कम पर मिलेंगी। – सुधीर झा, निवासी मुरार क्या कहते हैं व्यापारी संघ के पदाधिकारी     जब भी नई व्यवस्था होती है तो उसमें स्थिरता आने में समय लगता है। वर्तमान में जीएसटी का फायदा 5 हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर ही दिखेगा। दुकानदारों के पास 10 से 15 दिन या एक महीने का ही स्टाक होगा। तब तक छोटे आयटमों पर ही जीएसटी का फायदा आम आदमी को नहीं मिलेगा। लेकिन एक महीने में यह व्यवस्था पूरी तरह से सेटल हो जाएगी। इसके बाद सभी को राहत मिलेगी और बचत होगी। – प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ कॉमर्स  

MiG-2 ने भरी आखिरी उड़ान, भारतीय वायुसेना ने किया सलामी के साथ विदा

चंडीगढ़   चंडीगढ़ के इंडियन एयरफोर्स स्टेशन से भारतीय वायुसेना के प्रसिद्ध जंगी विमान मिग-21 की विदाई का महत्त्वपूर्ण क्षण नजदीक आ गया है। आज 12 विंग एयरफोर्स स्टेशन में इसके अंतिम प्रस्थान से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन हुआ, जिसमें मिग-21 को वाटर कैनन सैल्यूट के साथ सम्मानित किया गया। आसमान में सूर्य किरण एरोबेटिक टीम और आकाश गंगा स्काई डाइवर्स ने शानदार एरोबेटिक प्रदर्शन कर समारोह को यादगार बना दिया। जब मिग-21 ने गर्जना करते हुए उड़ान भरी, तो पूरा शहर गूंज उठा। 62 वर्षों के गौरवशाली इतिहास के साथ अब मिग-21 भारतीय वायुसेना से विदा हो रहा है। मिग-21 को पहली बार 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। मिकोयन ग्युरेविच (मिग-21) का चंडीगढ़ से करीब छह दशक पुराना गहरा नाता रहा है, और यहीं से इसकी विदाई हो रही है। यह विमान न केवल वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय रहा है। इसकी विदाई भावुक कर देने वाला क्षण होगा, क्योंकि इसने दशकों तक देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा की है। 26 सितंबर को मिग-21 की आखिरी उड़ान भारतीय वायुसेना ने मिग-21 को आधिकारिक तौर पर 26 सितंबर को रिटायर करने का ऐलान किया है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के आगरा से विशेष टीम भी चंडीगढ़ पहुंच रही है, ताकि इस ऐतिहासिक विदाई में हिस्सा ले सके। मिग-21 का गौरवशाली इतिहास      1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।     भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान, जिसकी गति ध्वनि की गति से भी अधिक थी।     1971 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के कई विमानों को मार गिराकर निर्णायक भूमिका निभाई।     कारगिल युद्ध (1999) में भी वीरता और ताकत का परिचय दिया।     ‘वायुसेना की रीढ़’ के रूप में विख्यात, देश की हवाई सुरक्षा की आधारशिला रहा।     62 वर्षों तक भारतीय वायुसेना की ताकत बना रहा। मिग-21 की तकनीकी खूबियां     अधिकतम गति लगभग 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा (Mach 2.05)।     उड़ान की अधिकतम ऊंचाई 17,500 मीटर।     हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस।     छोटा, परंतु अत्यंत शक्तिशाली डिजाइन, जो तेज हमलों और हवाई युद्ध के लिए उपयुक्त। मिग-21 की विदाई न केवल भारतीय वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक भावुक और गौरवशाली क्षण है। यह विमान वर्षों तक हमारी हवाई सीमाओं की रक्षा करता रहा और अब अपनी आखिरी उड़ान के साथ इतिहास बन जाएगा।