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ओवैसी का सियासी तीर: NDA जीती तो नीतीश नहीं, कोई और होगा बिहार का मुख्यमंत्री

पटना  बिहार चुनाव में अपनी पार्टी की किस्मत आजमाने के लिए एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी कूद चुके हैं। कल उन्होंने सीमांचल में रैली का आगाज कर दिया। इस दौरान वह सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों पर भी खूब बरसे। साथ ही उनके बीजेपी की बी टीम कहने पर भी पलटवार किया। ओवैसी ने एक इंटरव्यू के दौरान यह भी दावा किया है कि बिहार में अगर एनडीए गठबंधन की जीत होती है इसबार नीतीश कुमार की जगह भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री बनेगा। ओवैसी ने कहा, 'बिहार में अगर एनडीए की सरकार बनी तो इसबार नीतीश कुमार नहीं, बल्कि भाजपा का सीएम होगा।' जब उनसे पूछा गया कि आप भाजपा की बी टीम बनने का आरोप लगता है। आप मुस्लिम वोट काटने के लिए बिहार आए हैं। उन्होंने कहा कि यह महज आरोप है। लालू यादव के घर के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं के पहुंचने पर उन्होंने कहा कि दुश्मन भी आपके घर पर पहुंचता है तो उसे बिठाकर बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लालू यादव और तेजस्वी यादव को किस बात का डर है मुझे नहीं मालूम। मेरे दिल में कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह इस चुनाव में भी सीमांचल में जो भी दल रहेगा उनके हराएंगे। आपको बता दें कि 2020 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल में पांच सीटों पर जीत हासिल कर लोगों को चौंका दिया था। यह राजद के लिए बड़ा झटका साबित हुआ था। हालांकि, बाद में चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे। इससे पहले बिहार में भाजपा की मदद करने के आरोपों पर नाराजगी जताते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा था कि आगामी विधानसभा चुनाव में अगर उनकी पार्टी को छह सीट दी जाती हैं तो वह विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल हो जाएंगे। हैदराबाद से सांसद ओवैसी किशनगंज में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। किशनगंज उत्तर बिहार का एक ऐसा जिला है जहां की लगभग दो-तिहाई आबादी मुस्लिम है। यहीं से उन्होंने तीन दिवसीय ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ की शुरुआत की। ओवैसी ने कहा, “मेरी पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को कई पत्र लिखे हैं। आखिरी पत्र में अनुरोध किया गया है कि विधानसभा की 243 सीटों में से एआईएमआईएम को छह सीटें दी जाएं।” उन्होंने कहा, “अब गेंद ‘इंडिया’ गठबंधन के पाले में है। हमने यह पहल इसलिए की ताकि हम पर भाजपा की मदद करने का आरोप न लगे। अगर गठबंधन की तरफ से उचित जवाब नहीं मिलता है तो यह साफ हो जाएगा कि वास्तव में भाजपा की मदद कौन कर रहा है।”

‘भारत से दिक्कत है…’ बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस का विवादित बयान फिर चर्चा में

ढाका  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक बार फिर भारत पर तीखी टिप्पणी की है. न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में यूनुस ने आरोप लगाते हुए कहा कि फिलहाल भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण हैं क्योंकि भारत को उनके देश के छात्रों द्वारा किए गए हालिया आंदोलन पसंद नहीं आए. यूनुस ने कहा, "हमें अभी भारत के साथ कुछ दिक्कते हैं. उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि बांग्लादेश में छात्र क्या कर रहे हैं. और वे शेख हसीना की मेजबानी कर रहे हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ये सारी समस्याएं पैदा कीं और अपने कार्यकाल में कई युवा लोगों को मारने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया. यही चीज भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव पैदा कर रही है. उन्होंने आगे दावा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से लगातार भारत की ओर से फर्जी खबरें और प्रचार फैला रहे हैं, जिसमें इस आंदोलन को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. वे इसे इस्लामी आंदोलन और छात्रों को तालिबानी बता रहे हैं. कह रहे हैं कि उन्हें ट्रेनिंग दी गई है. वे तो यहां तक कहते हैं कि मैं भी तालिबानी हूं. हालांकि मेरे पास दाढ़ी नहीं है और मैं घर पर ही रहा. फिर भी, मेरा प्रचार लगातार जारी है. यूनुस ने जोर देते हुए कहा कि इसलिए मुझे सामने आकर अपनी पहचान दिखानी पड़ी. उन्होंने कहा, "देखिए, यह मुख्य तालिबान है. यही स्थिति वास्तविकता में है." बता दें कि यह टिप्पणी तब आई है जब बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार न्यूयॉर्क में हैं और संयुक्त राष्ट्र की सत्र में भाग लेने आए हैं. यूनुस का कहना है कि भारत के साथ यह तनाव केवल छात्रों के आंदोलनों और मीडिया प्रचार के कारण उत्पन्न हुआ है और इसे राजनीतिक रूप से बढ़ाया जा रहा है.

तेजस Mk1A से दोगुनी होगी वायुसेना की ताकत, HAL को मिला अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर

नई दिल्ली भारत ने अपनी हवाई ताकत को नया आयाम देते हुए 62,370 करोड़ रुपये की मेगा डील पर मुहर लगा दी है. रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 97 तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA Mk-1A) खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट साइन कर दिया है. यह सौदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से मंजूरी मिलने के एक महीने बाद हुआ. इससे पहले फरवरी 2021 में सरकार ने 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 48,000 करोड़ रुपये की डील की थी. तेजस Mk-1A की खासियतें तेजस पूरी तरह स्वदेशी मल्टी-रोल फाइटर है, जो दुश्मन के सबसे खतरनाक वातावरण में भी उड़ान भर सकता है. इसमें आधुनिक Swayam Raksha Kavach सिस्टम और अत्याधुनिक कंट्रोल एक्ट्यूएटर्स होंगे. इस वर्जन में 64% से ज्यादा इंडिजिनस कॉन्टेंट और 67 नई देसी टेक्नॉलॉजीज शामिल की जा रही हैं. तेजस के ऑपरेशन सिर्फ एयर डिफेंस तक सीमित नहीं, बल्कि यह मैरिटाइम रिकॉनिसेंस और सटीक स्ट्राइक रोल्स भी अंजाम देने में सक्षम है. 2027 से शुरू होंगी डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक तेजस Mk-1A की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी. यह सिंगल-इंजन जेट भारतीय वायुसेना के पुराने हो चुके MiG-21 बेड़े की जगह लेगा. स्क्वॉड्रन गैप भरेगा तेजस IAF की मंजूर ताकत 42 स्क्वॉड्रन की है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 31 स्क्वॉड्रन ही सक्रिय हैं. नए तेजस फाइटर्स इस खालीपन को भरेंगे और दुश्मनों को जवाब देने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. ‘मेक इन इंडिया’ का सशक्त प्रतीक तेजस प्रोजेक्ट न सिर्फ भारतीय वायुसेना को मजबूती देगा, बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा प्रतीक भी बनेगा. HAL की यह डील घरेलू उद्योग को नई तकनीक, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा धक्का देगी. तेजस एमके-1ए डिलीवरी में आएगी तेजी इसी महीने HAL को तेजस LCA MK-1ए के लिए तीसरा जीई-404 इंजन मिल गया. सितंबर 2025 के अंत तक चौथा इंजन भी मिलने की उम्मीद है. यह इंजन अमेरिकी कंपनी से भारत को सप्लाई हो रहे हैं. इंजन की उपलब्धता से तेजस उत्पादन और डिलीवरी की गति बढ़ेगी. एचएएल का कहना है कि तय योजना के मुताबिक भारतीय वायुसेना को विमान सौंपने में अब आसानी होगी. सूत्रों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के अंत तक एचएएल को कुल 12 इंजन मिल सकते हैं. तेजस का सफर: 1983 से शुरू हुई कहानी LCA तेजस कार्यक्रम की शुरुआत 1980 के दशक में हुई. 1983 में भारत सरकार ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को प्रोजेक्ट सौंपा. इसका मकसद था रूस के पुराने मिग-21 को बदलना. 2001 में पहली उड़ान भरी गई. 2003 में नाम पड़ा 'तेजस' – जो संस्कृत में 'चमकदार' या 'रेडिएंट' होता है.  2015 में IAF को पहला उत्पादन मॉडल मिला. 2016 में पहला ऑपरेशनल तेजस सौंपा गया. लेकिन देरी हुई – टेक्नोलॉजी चैलेंजेस और फंडिंग की वजह से. फिर भी, भारतीय वैज्ञानिकों ने एवियोनिक्स और रडार खुद बनाए. आज तेजस 4.5 जेनरेशन का मल्टीरोल फाइटर है, जो हवा-हवा, हवा-जमीन और रेकॉन मिशन कर सकता है. पहले सौदे: 2006 में 20 तेजस का ऑर्डर मिला. 2021 में 83 और तेजस Mk1A के लिए 48,000 करोड़ का सौदा हुआ. अब यह 97 का तीसरा बड़ा ऑर्डर है. कुल 220 विमान IAF को मिलेंगे. IAF 324 विमान (18 स्क्वाड्रन) खरीदने की योजना बना रहा है. Mk1A में क्या खास? एडवांस फीचर्स की पूरी लिस्ट तेजस Mk1A तेजस का सबसे एडवांस वर्जन है. यह सिंगल-इंजन, डेल्टा विंग वाला विमान है. इसमें हॉरिजॉन्टल टेल नहीं है, लेकिन फिन लगा है. खाली वजन करीब 5,450 किलोग्राम, अधिकतम टेकऑफ वजन 13,500 किलोग्राम. इंजन GE F404-IN20 है, जो 85 KN थ्रस्ट देता है. अधिकतम स्पीड 1.6 मैक (लगभग 1,900 किमी/घंटा).  मुख्य फीचर्स     उत्तम AESA रडार: एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे. दुश्मन को 200 किमी दूर पकड़ता है. मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग.     स्वयं रक्षा कवच: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम. दुश्मन रडार से बचाता है.     कंट्रोल सरफेस एक्ट्यूएटर्स: बेहतर मैन्यूवरिंग.     स्वदेशी कंटेंट: 64% से ज्यादा. पहले सौदे से 67 नई चीजें जोड़ी गईं.     अन्य: डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले, मिड-एयर रिफ्यूलिंग. हल्का वजन (6,560 किग्रा), एडवांस एवियोनिक्स, स्टेल्थ फीचर्स.  यह विमान IAF की ऑपरेशनल जरूरतें पूरी करेगा. बालाकोट जैसे मिशनों में उपयोगी. IAF के लिए क्यों जरूरी? रणनीतिक महत्व पुराने मिग-21 रिटायर हो रहे हैं. तेजस Mk1A से नई स्क्वाड्रन बनेंगी. यह स्वदेशी फाइटर दुश्मन (पाकिस्तान, चीन) के खिलाफ मजबूत होगा. सरकार का फोकस इंडिजेनाइजेशन पर है. डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत यह सौदा 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देगा. अर्थव्यवस्था और नौकरियों को बूस्ट यह प्रोजेक्ट 105 भारतीय कंपनियों को जोड़ेगा. वे डिटेल्ड पार्ट्स बनाएंगी. 6 साल में हर साल 11,750 डायरेक्ट और इंडायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी. HAL के शेयर 2% ऊपर चढ़ गए. एयरोस्पेस इकोसिस्टम मजबूत होगा. MSME और एकेडेमिया को फायदा. भविष्य की योजनाएं: Mk2 और AMCA तेजस Mk1A के बाद Mk2 आएगा, जो बड़ा और ज्यादा ताकतवर होगा. AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) 5th जेन स्टेल्थ फाइटर पर काम चल रहा है. HAL और प्राइवेट कंपनियां मिलकर भारत को एयरोस्पेस पावर बनाएंगी.  IAF दुनिया की टॉप एयरफोर्स बनेगी.

‘रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद नहीं रहूंगा राष्ट्रपति’ – जेलेंस्की का चौंकाने वाला ऐलान

कीव रूस के साथ करीब चार साल से चल रही जंग के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने साफ कहा कि रूस के खिलाफ युद्ध खत्म होने के बाद वह राष्ट्रपति पद छोड़ने को तैयार हैं. जेलेंस्की ने कहा कि मेरा मकसद जंग खत्म करना है और उसके बाद इस पद पर नहीं रहना चाहता. 'सीजफायर हुआ तो कराएंगे चुनाव'  जेलेंस्की ने कहा कि उनका इरादा शांतिकाल में अपने देश का नेतृत्व करने का नहीं है. जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अगर रूस के साथ सीजफायर हो जाता है, तो वह यूक्रेन की संसद से चुनाव कराने के लिए कहेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या जंग खत्म समाप्त होने पर वह अपना काम खत्म मानेंगे, जेलेंस्की ने कहा कि वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'मेरा मकसद जगं खत्म करना है, न कि पद के लिए भाग-दौड़ को जारी रखना.' यूक्रेन में जंग की वजह से चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर तमाम आलोचकों ने इस मुद्दे को उठाया है. जेलेंस्की ने कहा कि सुरक्षा स्थिति और यूक्रेन का संविधान, दोनों ही चुनाव कराने में चुनौतियां पेश करते हैं. लेकिन उनका मानना है कि चुनाव मुमकिन हैं. ट्रंप को बताई अपने दिल की बात संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से कीव लौटने से ठीक पहले जेलेंस्की ने न्यूयॉर्क में यह इंटरव्यू दिया है. जब उनसे पूछा गया कि अगर कई महीनों के सीजफायर पर सहमति बन जाती है, तो क्या वह चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध होंगे, तो उन्होंने 'हां' में जवाब दिया. जेलेंस्की ने कहा कि मंगलवार को जब वह राष्ट्रपति ट्रंप से मिले थे तो उन्होंने उनसे कहा था कि अगर सीजफायर होता है तो हम इस टाइम पीरियड का इस्तेमाल कर सकते हैं और मैं संसद को यह संकेत दे सकता हूं.' जेलेंस्की ने कहा कि वह समझते हैं कि लोग एक नए जनादेश वाले नेता की चाहत रखते हैं, जो हमेशा के लिए शांति कायम करने के लिए जरूरी फैसले ले सके. उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण फिलहाल चुनाव आयोजित करना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन उनका मानना है कि ऐसा किया जा सकता है. मई 2024 में ही खत्म हो चुका है कार्यकाल यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की 2019 में भारी वोटों से निर्वाचित हुए थे. अगर रूस के खिलाफ जंग नहीं छिड़ती तो उनका पांच साल का कार्यकाल मई 2024 में ही खत्म हो जाता. युद्ध के शुरुआती महीनों में उनकी लोकप्रियता करीब 90% तक बढ़ गई थी. फरवरी में ट्रंप ने दावा किया था कि यह घटकर 4% रह गई है, लेकिन हाल के ज़्यादातर सर्वे में यह 60% से कहीं ज़्यादा बताई गई है. जुलाई में जब उनके संसदीय सहयोगियों ने यूक्रेन की स्वतंत्र भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसियों को कमज़ोर करने का कदम उठाया, तो ज़ेलेंस्की को घरेलू विरोध का सामना करना पड़ा. हालांकि इस कदम को तुरंत पलट दिया गया, लेकिन इसने जेलेंस्की के नेतृत्व में यूक्रेन की लोकतांत्रिक प्रगति को लेकर चिंताएं जरूर पैदा कर दीं. जंग के बीच चुनाव कराने पर पाबंदी अगर जेलेंस्की चुनाव आयोजित करने के लिए किसी विधेयक का समर्थन करते हैं, तो संसद में उनकी पार्टी के बड़े बहुमत को देखते हुए यह आसानी से पारित हो जाएगा. असल बात यह है कि यूक्रेन के संविधान के तहत मार्शल लॉ के दौरान चुनावों पर साफ तौर पर प्रतिबंध है. अगर उस पर काबू पा भी लिया जाए, तो सुरक्षा स्थिति के कारण रसद व्यवस्था बेहद मुश्किल हो जाएगी. यूक्रेन का लगभग 20% हिस्सा रूस के कब्ज़े में है और लाखों यूक्रेनी विस्थापित हैं. अगर मॉस्को इस प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो पूरा देश रूसी हमलों की जद में होगा. ज़ेलेंस्की ने कहा, 'मुझे लगता है कि सीजफायर के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चुनाव कराने की संभावना दे सकती है, ऐसा हो सकता है.'

मुख्यमंत्री साय से राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में 2024 बैच के 13 एवं 2021 बैच के एक अधिकारी शामिल थे। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशासन की धुरी हैं। जनता की समस्याओं को हल करने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ आपको प्रबुद्ध नागरिक के रूप में समाज की भी चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज के निर्माण में आप सभी अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अधिकारियों को पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं। छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री  साय को अवगत कराया कि इन अधिकारियों का 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ इंडक्शन कोर्स अब समाप्त हो रहा है। इसके बाद ये सभी अधिकारी राज्य के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा देंगे, जहाँ वे शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को समझेंगे। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण के अनुभव भी जाने। उन्होंने कहा कि यह आपका सौभाग्य है कि आपको राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला है। यह अवसर सभी को नहीं मिलता। पूरे मनोयोग से इस अवसर का लाभ उठाते हुए निष्ठा और समर्पण के साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन का काम जनहित की नीतियाँ बनाना है, लेकिन उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ही रहती है। छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज और वन संपदा है, मिट्टी उर्वरा है और पावर सेक्टर बहुत मजबूत है। राज्य के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी रुकावट था, जो अब अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है। हमारे जवान पूरी मुस्तैदी से नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या का उन्मूलन कर दिया जाएगा। हमारे बहादुर जवान डटकर मुकाबला कर रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के बाद छत्तीसगढ़ और तेजी से विकसित होगा। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के रूप में आपकी जिम्मेदारी भी और अधिक बढ़ जाएगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज को आगे लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता लाना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहाँ सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में  ई-ऑफिस प्रणाली भी लागू की गई है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। अब तक हमें साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने में आप सभी की भूमिका होगी। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राजस्व मामले सीधे जनता से जुड़े होते हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों की एक छोटी-सी पहल से भी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजस्व मामलों के समयबद्ध निराकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। राजस्व प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरल बनाया जा रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संयुक्त संचालक प्रणव सिंह तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार राज्य सरकार की नीति के आधार स्तंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर किया नमन लालघाटी स्थित प्रतिमा पर किया माल्यार्पण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सुख की कामना करते हुए एकात्म मानववाद का दर्शन दिया। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता ही हमारी संस्कृति और गांवों की व्यवस्था का आधार रही है, यह स्वावलंबन की भावना ही पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का आधार थी। पं. दीनदयाल उपाध्याय और महात्मा गांधी के विचारों में बहुत समानता थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पं. दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती पर लालघाटी स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत सिंदूर का पौधा भी रोपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल के विचार राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं। हम प्रदेश के गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी सुधारों के माध्यम से देशवासियों को बड़ी सौगात दी है। इससे छोटे व्यापारियों और कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों, कारीगरों, छोटे व्यापारियों की बेहतरी के लिए सभी से स्वदेशी अपनाने का आव्हान किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष  हेमंत खंडेलवाल, संगठन मंत्री  हितानंद शर्मा, सांसद  आलोक शर्मा, विधायक  रामेश्वर शर्मा, विधायक  भगवानदास सबनानी तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

धर्मेंद्र प्रधान को सौंपी गई बिहार की जिम्मेदारी, BJP ने बनाया चुनाव प्रभारी

नई दिल्ली बिहार चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अपनी चाल चल दी है. भारतीय जनता पार्टी ने बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे अहम सियासी राज्यों के लिए चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा की है. भाजपा ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार का चुनाव प्रभारी बनाया है. यह नियुक्ति बिहार में एनडीए की मजबूती को बढ़ावा देने के लिए अहम मानी जा रही है. बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव है. धर्मेंद्र प्रधान के साथ सह-प्रभारी के रूप में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और गुजरात BJP के पूर्व अध्यक्ष सीआर पाटिल को नियुक्त किया गया है. भाजपा के लिए धर्मेंद्र प्रधान का चयन इसलिए खास है क्योंकि वे ओडिशा से आते हैं और पहले भी उत्तर प्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. भाजपा सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल बिहार में तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन को चुनौती देने में कारगर साबित होगा. हालांकि, बिहार में NDA पहले से सत्ता में है, मगर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की यात्राओं से माहौल थोड़ा बदला है. ऐसे में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि अच्छा-खासा सियासी अनुभव रखने वाले धर्मेंद्र प्रधान को बिहार फतह करने की जिम्मेदारी दी गई है. बंगाल में किसे कमान? पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब सह-प्रभारी होंगे. पश्चिम बंगाल में टीएमसी की मजबूत पकड़ को तोड़ने के लिए BJP की यह रणनीति अगम है. वैसे भी अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं. 2026 में होने वाले चुनावों में भूपेंद्र यादव की भूमिका अहम होगी. भूपेंद्र यादव के पास भी अच्छा खासा संगठनात्मक अनुभव है. वहीं, बिप्लब देब का अनुभव पूर्वोत्तर राज्यों से बंगाल की राजनीति को मजबूत करेगा. तमिलनाडु का प्रभारी कौन? तमिलनाडु के लिए BJP ने ओडिशा से सांसद बैजयंत पांडा को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि महाराष्ट्र से सांसद मुरलीधर मोहोल सह-प्रभारी होंगे. पश्चिम बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी साल 2026 में विाधानसभा चुनाव हैं. अगले साल होने वाले चुनाव के लिए भाजपा DMK-AIADMK के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर काम कर रही है. पांडा की नियुक्ति दक्षिण भारत में भाजपा की विस्तार योजना का हिस्सा है. हाल ही में BJP की कोर कमिटी मीटिंग में 2026 चुनाव रणनीति पर चर्चा हुई, जिसमें जिला स्तर के प्रभारियों की नियुक्ति और गठबंधन वार्ता शामिल थी.

बस्तर में नक्सलियों की धरती पर बदलाव की बयार, CM साय बोले – 2026 तक खत्म करेंगे नक्सलवाद

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्ला नार योजना ने दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर अंचल में नया विश्वास जगाया है। माओवादी हिंसा के झूठे नारों से भटके लोग अब विकास और शांति की राह चुन रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग में चलाए जा रहे पूना मारगेम अभियान तथा दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर हाल ही में 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 30 नक्सलियों पर 50 हजार से 8 लाख रुपये तक का कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हमारी नीतियों की प्रभावशीलता और जन-विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है। Cm  साय ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन की शुरुआत के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए हैं। साथ ही उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और भरोसेमंद वातावरण के कारण अब तक 1770 से अधिक माओवादी मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। डबल इंजन की सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और आत्मसमर्पित साथियों को सम्मानजनक पुनर्वास एवं बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर बदल रहा है और नक्सलवाद का अंधियारा छंट रहा है। यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य और शांति की ओर बढ़ते कदमों का सशक्त संकेत है।

रात में अकेले बुलाता, कमरे में कैमरा छिपाया – स्वामी चैतन्यानंद के खिलाफ महिलाओं का खुलासा

नई दिल्ली खुद को आध्यात्मिक गुरु और शिक्षा के क्षेत्र का मार्गदर्शक बताने वाला स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती अब फरार है. यह वही चेहरा है, जो किताबों के सहारे खुद को 'महान लेखक और दार्शनिक' की पहचान बनाता रहा, मगर असलियत में वह उन मासूम छात्राओं का शिकारी निकला जिन्हें उसने ज्ञान और सुरक्षा का भरोसा देकर अपने जाल में फंसाया. चौंकाने वाली ये कहानी किसी उपन्यास की तरह लग सकती है, लेकिन एफआईआर की कॉपी और दर्ज बयानों ने साफ कर दिया है कि यह कोई गढ़ी हुई कथा नहीं, बल्कि काली हकीकत है. FIR में दर्ज काली करतूत एफआईआर की पन्नों में दर्ज आरोप पढ़कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की छात्राओं को देर रात स्वामी अपने क्वार्टर में बुलाता था. छात्राओं के हॉस्टल में “सुरक्षा” के नाम पर गुप्त कैमरे लगाए गए. एक छात्रा को उसकी मर्जी के खिलाफ नया नाम अपनाने पर मजबूर किया गया. छात्राओं को विदेश यात्राओं और देर रात प्राइवेट रूम में बुलाने के लिए दबाव बनाया जाता था. डीन सहित कुछ स्टाफ छात्राओं को स्वामी की मांगें मानने पर मजबूर करते और शिकायतों को दबा देते. विरोध करने वाली छात्राओं को निलंबन और निष्कासन की धमकी मिलती. व्हाट्सऐप और एसएमएस के जरिए अश्लील संदेश भेजे जाते थे. एफआईआर में साफ लिखा है कि छात्राओं को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया. विरोध करने पर न सिर्फ पढ़ाई बल्कि करियर दांव पर लगाने की धमकी दी जाती. छात्राओं के बयान ने खोल दी पोल जांच एजेंसियों ने अब तक 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए हैं. इनमें से 17 ने मजिस्ट्रेट के सामने साफ कहा कि बाबा गालियां देता, अश्लील मैसेज भेजता और अनुचित हरकतें करने की कोशिश करता था. कई छात्राओं ने बताया कि तीन महिला वार्डन उन्हें जबरन बाबा के कमरे तक ले जातीं. यानि पूरा सिस्टम एक साजिश की तरह रचा गया था, ताकि कोई बाहर आवाज न उठा सके. पहले भी रहा विवादों में ये पहली बार नहीं है जब चैतन्यानंद विवादों में आया हो. 2009 में डिफेंस कॉलोनी थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ. जबकि 2016 में वसंत कुंज थाने में भी छेड़छाड़ की शिकायत हुई. हर बार उसने रसूख, पैसे और नेटवर्क का इस्तेमाल करके खुद को बचा लिया. लेकिन इस बार छात्राओं की गवाही और डिजिटल सबूतों ने उसके लिए बच निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं. फरारी पर पुलिस की नजर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही चैतन्यानंद फरार है. दिल्ली पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की हैं. सभी एयरपोर्ट्स और बॉर्डर इलाकों पर निगरानी बढ़ा दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, उसकी अंतिम लोकेशन आगरा में मिली थी. पुलिस को शक है कि वह लगातार ठिकाने बदल रहा है और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बच रहा है, ताकि ट्रैक न हो सके. संस्थान से मिले सीसीटीवी फुटेज के डीवीआर और हार्ड डिस्क को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है. जांचकर्ताओं को आशंका है कि कई रिकॉर्ड्स से छेड़छाड़ की गई है. किताबों के सहारे बनाई थी पहचान शायद सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यही स्वामी चैतन्यानंद शिक्षा और अध्यात्म की दुनिया में बड़ा नाम बनाने की कोशिश कर रहा था. उसने 28 किताबें लिखी थीं. इन किताबों पर नामी-गिरामी हस्तियों के नाम से प्रस्तावना और समीक्षाएं दर्ज थीं. ‘फॉरगेट क्लासरूम लर्निंग’ नाम की किताब की प्रस्तावना तो एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स के नाम से बताई जाती थी. ई-कॉमर्स साइट्स पर उसे “प्रोफेसर, स्पीकर, लेखक और आध्यात्मिक दार्शनिक” कहा गया. अब पुलिस का कहना है कि यह सब उसकी सोची-समझी रणनीति थी. किताबों और चमकदार छवि के पीछे उसका असली चेहरा छिपा था – एक शातिर शिकारी, जो मासूम छात्राओं को अपना शिकार बना रहा था. समाज में डर और गुस्सा यह खुलासा होते ही संस्थान के भीतर दहशत फैल गई है. कई छात्राएं डर के कारण सामने आने से कतरा रही हैं. वे साफ कह रही हैं कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है. अभिभावकों में गुस्सा है. उनका कहना है कि अगर संस्थान के भीतर ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो वे किस पर भरोसा करें? पुलिस का दावा और अगला कदम दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित षड्यंत्र है. चैतन्यानंद और उसके सहयोगियों ने संस्थान के सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए छात्राओं को शिकार बनाया. एफआईआर में दर्ज धाराओं के तहत यह मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. जांच एजेंसियां जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का दावा कर रही हैं.

टीम इंडिया का सेलेक्शन: पडिक्कल इन, करुण आउट – जडेजा को मिली उपकप्तानी

नई दिल्ली वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान हो गया है. शुभमन गिल की कप्तानी वाली इस टीम में करुण नायर शामिल हैं, जिन्हे इंग्लैंड में 8 साल बाद मौका मिला था. रवींद्र जडेजा उपकप्तान हैं. ऋषभ पंत अभी पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं, उनकी गैरमौजूदगी में ध्रुव जुरेल के साथ एन जगदीसन दूसरे विकेट कीपर हैं. टीम इंडिया अभी एशिया कप 2025 में खेल रही है, जहां शुभमन गिल उपकप्तान हैं. भारत फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी है. टूर्नामेंट का फाइनल 28 सितंबर को दुबई में होगा. इसके बाद प्लेयर्स भारत लौटेंगे, जहां 2 अक्टूबर से वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज शुरू होगी. वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय स्क्वाड शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा (उपकप्तान), वाशिंगटन सुन्दर, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, नितीश कुमार रेड्डी, एन जगदीसन (विकेट कीपर), मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, कुलदीप यादव. टेस्ट टीम के मुख्य बिंदु     करुण नायर और अभिमन्यु ईस्वरन को जगह नहीं     देवदत्त पडिक्कल, नितीश रेड्डी की हुई वापसी     रवींद्र जडेजा चुने गए उपकप्तान     जसप्रीत बुमराह भी शामिल करुण नायर पर क्या बोले अजीत अगरकर चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने करुण नायर को लेकर कहा, "हम करुण नायर से अधिक की उम्मीद करते हैं, सिर्फ़ एक पारी काफी नहीं होती. पडिक्कल बेहतर कर सकते हैं. हम सभी को 15-20 मौके देना चाहेंगे, लेकिन इन परिस्थितियों में यह संभव नहीं है." बता दें कि करीब 8 साल बाद उन्हें इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज में मौका मिला था, लेकिन उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था. भारत का 15 सदस्यीय स्क्वॉड: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, वाशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, नीतीश रेड्डी, एन जगदीशन, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और कुलदीप यादव. क्या करुण नायर का करियर खत्म? करुण नायर को आठ साल बाद हाल ही में खत्म हुए इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम में मौका मिला था. लेकिन एंडरसन-तेंदुलकर सीरीज में वह बुरी तरह फ्लॉप रहे थे. चार टेस्ट की आठ पारियों में वह सिर्फ 25 से थोड़ी ज्यादा की औसत से 205 रन ही बना पाए थे. ऐसे में सिलेक्टर्स ने उन्हें वेस्टइंडीज सीरीज के लिए ड्रॉप कर दिया. 33 साल के अनुभवी बल्लेबाज को अब शायद ही दोबारा भारतीय टीम में मौका मिले! देवदत्त पडिक्कल की क्यों हुई वापसी? कुछ दिन पहले लखनऊ में ऑस्ट्रेलिया ए टीम के खिलाफ शानदार 150 रनों की पारी खेलने वाले देवदत्त पडिक्कल की टेस्ट स्क्वॉड में वापसी हुई है. बाएं हाथ का यह बल्लेबाज पिछली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में टीम का हिस्सा था. इंजर्ड ऋषभ की जगह ध्रुव जुरेल ओल्ड ट्रैफर्ड टेस्ट के दौरान अपने दाहिने पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर वाले ऋषभ पंत अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं और वह अभी भी टीम से बाहर रहेंगे. फिलहाल वह बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे हैं. उनकी जगह ध्रुव जुरेल फर्स्ट चॉइस विकेटकीपर होंगे. कब-कब और कहां होंगे दो टेस्ट मैच टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 2 अक्टूबर से 6 अक्टूबर के बीच होगा जबकि दूसरा टेस्ट अरुण जेटली स्टेडियम में 10 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच खेला जाएगा. भारत बनाम वेस्टइंडीज टेस्ट सीरीज 2025 शेड्यूल 2 से 6 अक्टूबर के बीच भारत और वेस्टइंडीज के बीच पहला टेस्ट अहमदबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. दूसरा टेस्ट 10 से 14 अक्टूबर के बीच दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में होगा. दोनों मुकाबले भारतीय समयनुसार सुबह 9:30 बजे से शुरू होंगे.