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SC-ST के खिलाफ अपराध रोकने MP पुलिस का बड़ा एक्शन: 23 जिलों में कड़ी निगरानी, 63 थाना क्षेत्र सेंसिटिव घोषित

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने 23 जिलों के 63 थाना क्षेत्रों और लगभग 100 वार्डों एवं गांवों को अत्याचार प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। इन क्षेत्रों में अब विशेष सतर्कता और निगरानी रखी जाएगी। सरकार का मानना है कि प्रदेश के कुछ हिस्से ऐसे हैं, जहां SC-ST वर्ग के लोगों पर अत्याचार की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक सामने आती हैं। ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित कर कड़ी निगरानी की जरूरत है। इसी उद्देश्य से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 एवं उसके नियमों के तहत यह अधिसूचना जारी की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चिह्नित थाना क्षेत्रों में SC-ST वर्ग के लोगों के साथ होने वाले अत्याचार पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेष निगरानी के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें पुलिस चौकियों की स्थापना, जागरूकता के कार्यक्रम, पुराने विवादों को हल कराने जैसे प्रयास होंगे। घटनाओं को लेकर पुलिस को त्वरित कार्यवाही करने के लिए भी कहा गया है। गृह विभाग ने केंद्र सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया है। जिन थाना क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है उनमें मंडला जिले का कोतवाली, बालाघाट का कोसमी, भरवेली, विदिशा का कोतवाली, गंज बासौदा, सिविल लाइन, धार का कोतवाली, खंडवा का पदम नगर, मांधाता, पंधाना, इंदौर का सिमरोल, मुरैना कोतवाली, स्टेशन रोड, सिविल लाइन, बामनोर, भिंड में देहात, देवास में औद्योगिक क्षेत्र, पिपलावा, शाजापुर में शुजालपुर सिटी, शुजालपुर मंडी, मंदसौर का वायडीनगर, नर्मदापुरम के देहात, इटारसी, कोतवाली, पिपरिया और शिवपुर, बैतूल में सारणी, आमला, रायसेन में औबेदुल्लागंज, जबलपुर में गोराबाजार, गुना में कोतवाली, कैंट, विजयपुर, आरोन, मधुसूदनगढ़, शिवपुरी में सिरसोद, दिनारा, आमोला, इंमदौर, भौंती, अशोकनगर में कोतवाली, देहार, बहादुरपुर, ग्वालियर में जनकगंज, झांसी रोड, विश्वविद्यालय, ठाठीपुर, बहोड़ापुर, ग्वालियर, डबरा, सागर में कैंट, बहेरिया, बंडा, राहतगढ़, दमोह में कोतवाली, छतरपुर में सिविल लाइन, लवकुशनगर, जुझारपुर और टीकमगढ़ जिले का कोतवाली थाना क्षेत्र शामिल है। 4 केस से समझिए थाना क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित करने की वजह केस-1: सागर दलित युवक हत्या, मां को निर्वस्त्र कर पीटा ये मामला 24 अगस्त 2023 का है। सागर जिले के खुरई देहात थाना क्षेत्र के बरोदिया नौनागिरी गांव में दबंगों ने दलित युवक लालू उर्फ नितिन अहिरवार की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बेटे को बचाने गई मां को भी निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया। दरअसल, लालू की बहन से दबंगों के छेड़छाड़ की थी। जिसकी शिकायत थाने में की गई थी। दबंग पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने का दबाव बना रहे थे। जब परिवार ने इनकार किया, तो इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में 9 नामजद और 4 अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, मारपीट और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। खास बात ये है कि नितिन अहिरवार के इस केस में घटना के चश्मदीद उसके चाचा और बहन की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। जिसकी जांच अभी भी चल रही है। केस-2: 30 हमलावरों ने महिला की गोली मारकर हत्या की ये मामला मंदसौर जिले के गरोठ थाना क्षेत्र के ढाकनी गांव का है। 6 दिसंबर 2024 को करीब 30 हमलावर 5 गाड़ियों में सवार होकर गांव में ही रहने वाले बलराम के घर पहुंचे थे। यहां पहुंचकर उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें बलराम की पत्नी 45 साल की सुगना बाई की मौत हो गई, जबकि बलराम सहित 3 लोग घायल हो गए थे। ये विवाद सरकारी जमीन पर गाय बांधने को लेकर हुआ था। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और गांववालों ने शव रखकर बोलिया, शामगढ़ भानपुरा और खड़ावदा रोड पर करीब 5 घंटे तक चक्काजाम किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के बाद ही प्रदर्शन खत्म हुआ। उस समय पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए तीन लोगों की गिरफ्तारी भी की थी। केस-3: गैंगरेप के बाद आरोपियों ने घर में लगाई आग भिंड जिले के आरोली गांव में इसी साल 13 जनवरी 2025 को गांव के दबंगों ने दलित युवती के साथ गैंगरेप किया था। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने गैंगरेप के आरोपी सोनी गुर्जर और धर्मेंद्र गुर्जर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मगर, कोर्ट में बयान दर्ज कराने से पहले ही आरोपियों ने पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। समझौते से इनकार करने पर आरोपी बड़ी संख्या में अपने साथियों के साथ पीड़िता के घर पहुंचे और परिवार से मारपीट की। इसके बाद घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। इस आगजनी में परिवार के दो लोग झुलस गए थे। केस-4 : गैंगरेप पीड़िता की आंत-बच्चेदानी बाहर थी खंडवा जिले में एक आदिवासी महिला के साथ दरिंदगी हुई। घटना 23 मई की रात हुई जब महिला शादी समारोह से लौट रही थी। आरोपी हरी और सुनील ने शराब के नशे में महिला के साथ बर्बरता की थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि महिला की आंत 6 फीट शरीर से बाहर निकली थी। उसके प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें भी थीं। इन्हीं चोटों की वजह से महिला की मौत हो गई थी। महिला का पोस्टमॉर्टम करने वाली डॉक्टर सीमा सूटे के मुताबिक उसके गर्भाशय और रेक्टम तक को गंभीर चोटें लगी थीं।। उन्होंने कहा, "मैंने अपने पूरे करियर में इतनी क्रूरता नहीं देखी।" रिपोर्ट के अनुसार, महिला के शरीर से खून बहुत अधिक बहा और इसके कारण उसकी मौत हो गई। पीड़िता ने मरने से पहले अपने बेटे को आरोपियों के नाम बताए थे, जिन्होंने पुलिस को बयान भी दिया। क्या होगा आइडेंटिफाई एरिया में.. गृह विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक ये कदम केंद्र सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत उठाया है। 23 जिलों के 63 थानों को संवेदनशील घोषित किया है और इन थानों के तहत आने वाले क्षेत्र को 'आइडेंटिफाई एरिया' के रूप में चिह्नित किया गया है। एक्सपर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार किसी थाना क्षेत्र को आइडेंटिफाई एरिया घोषित करती है तो इसका मतलब है कि वहां और ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। वहां की … Read more

पेंशन स्कीम पर बड़ा अपडेट: कर्मचारियों को 30 सितंबर तक करना होगा विकल्प चयन, वरना छूट सकते हैं फायदे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन को लेकर बड़ा फैसला किया है. वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी कर्मचारियों से अपील की है कि वे 30 सितंबर 2025 की समयसीमा से पहले ही यूनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) का विकल्प चुन लें, ताकि उनके आवेदन समय पर निपटाए जा सकें और भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े. सबसे बड़ी बात यह है कि निर्धारित समयसीमा के अंदर इस विकल्प को नहीं चुनने पर सरकारी कर्मचारियों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा. एनपीएस में शामिल कर्मचारियों के लिए यूपीएस का विकल्प सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के अंतर्गत यूनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) की शुरुआत की थी. इसके तहत कर्मचारियों को निश्चित पेंशन की सुविधा मिलेगी. एनपीएस में शामिल पात्र कर्मचारी और पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारी 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस का विकल्प चुन सकते हैं. मंत्रालय का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी एनपीएस में बने रहने का विकल्प चुनता है, तो वह अंतिम तिथि के बाद यूपीएस में शामिल नहीं हो सकेगा. इसीलिए सभी पात्र कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे समयसीमा से पहले ही अपना निर्णय स्पष्ट करें. 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस चुनें वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि एनपीएस के तहत काम करने वाले मौजूदा कर्मचारी और रिटायर्ड लोग 30 सितंबर 2025 तक यूपीएस चुन सकते हैं. अभी तक 20 जुलाई तक करीब 31,555 सेंट्रल गवर्नमेंट कर्मचारियों ने इस स्कीम का ऑप्शन लिया है. मंत्रालय ने सलाह दी है कि देर न करें, क्योंकि अंतिम समय में भीड़ से प्रोसेस में देरी हो सकती है. अगर आपका मन बदल जाए तो 25 अगस्त को दी गई एक खास सुविधा का फायदा ले सकते हैं. मंत्रालय ने एक बार का एकतरफा स्विच ऑप्शन शुरू किया है, जिससे यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी बाद में एनपीएस में वापस जा सकते हैं. मिलेंगे ये सभी फायदे ये स्विच सुविधा रिटायरमेंट से एक साल पहले या वॉलंटरी रिटायरमेंट से तीन महीने पहले तक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी यूपीएस ले ले और बाद में लगे कि एनपीएस बेहतर है, तो एक बार मौका मिलेगा. ये फैसला सोच-समझकर लेना होगा, क्योंकि ये सिर्फ एक तरफा है. यूपीएस का फायदा ये है कि रिटायरमेंट पर आधी सैलरी पेंशन के रूप में मिलेगी, जो मार्केट की चाल पर निर्भर नहीं. अगर कर्मचारी की सर्विस के दौरान मौत हो जाए या वे अक्षम हो जाएं, तो सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021 या सीसीएस (एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन) रूल्स 2023 के तहत लाभ मिलेगा. इसके अलावा, रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का फायदा भी यूपीएस में बढ़ाया गया है. टैक्स में भी राहत है, क्योंकि यूपीएस को इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत एनपीएस जितने ही छूट मिलेंगे. ये सुविधाएं कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देती हैं. मंत्रालय का मकसद है कि हर कर्मचारी को फायदा मिले, इसलिए ऑनलाइन क्रेजी सिस्टम से आवेदन करें. अगर तकनीकी दिक्कत हो तो नोडल ऑफिस में फॉर्म जमा कर सकते हैं. लंबे समय से कर्मचारी एनपीएस से नाखुश थे, क्योंकि उसमें मार्केट रिस्क था. यूपीएस आना जैसे उनकी सुनवाई हुई. लेकिन 30 सितंबर की डेडलाइन नजदीक है, तो जल्दी फैसला लें. दिल्ली में एक कर्मचारी ने कहा, “मैं यूपीएस लेना चाहता हूं, लेकिन डर है कि समय निकल न जाए.” मंत्रालय का कहना है कि देर करने से नुकसान हो सकता है. अगर आप सेंट्रल गवर्नमेंट में हैं, तो अपने डिपार्टमेंट से बात करें और पोर्टल चेक करें. ये स्कीम परिवारों को मजबूत करेगी और रिटायरमेंट की चिंता कम करेगी. सरकार का ये कदम कर्मचारी हित में बड़ा है, लेकिन समय पर एक्शन जरूरी है. कितने कर्मचारियों ने चुना यूपीएस? सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई 2025 तक करीब 31,555 केंद्र सरकार के कर्मचारी यूपीएस से जुड़ चुके हैं. मंत्रालय का मानना है कि अंतिम समय में विकल्प चुनने पर तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए जल्द निर्णय लेना कर्मचारियों के हित में होगा.

कार्यक्रम स्थल के पास हुआ दर्दनाक हादसा, शिवकुमारी जायसवाल के परिजनों की मौत पर सीएम मोहन यादव ने रद्द किया दौरा

सीधी   सीधी। सीधी जिले के जेठूला गांव में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सीएम डॉ मोहन यादव के कार्यक्रम स्थल के नजदीक खड़े ट्रक में एक एसयूवी घुस गई। हादसा इतना भीषण था कि इसमें तीन लोगों की मौत हो गई। ये तीनों बीजेपी नेता के परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं। वहीं, तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। उनको इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ट्रक शुक्रवार के दिन बहरी में होने वाले सीएम के कार्यक्रम के लिए टेंट और अन्य सामान लेकर जा रहा था। दरअसल, दर्दनाक सड़क हादसा सीधी-सिंगरौली नेशनल हाईवे पर गुरुवार की शाम हुआ। इस हादसे में मयापुर बीजेपी मंडल अध्यक्ष शिवकुमारी जायसवाल के परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि टकराने के बाद बोलेरो का हिस्सा ट्रक के नीचे जा घुसा। इसे जेसीबी की मदद से बाहर निकालना पड़ा। इस हादसे पर सीएम मोहन यादव ने दुख जताया है। सीएम के कार्यक्रम की चल रही थी तैयारी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सिहावल विधानसभा के बहरी तहसील के जेठूला गांव में सीएम डॉ मोहन यादव का कार्यक्रम प्रस्तावित है। सीएम शुक्रवार को यहां पर सोन नदी पर बने पुल का उद्घाटन करने वाले हैं। इसकी तैयारी के लिए टेंट से लोड ट्रक खड़ा था। इसमें पीछे से आ रही तेज रफ्तार एसयूवी बोलेरो जा घुसी। हादसे के बाद सिंहावल विधायक विश्वामित्र पाठक ने सीएम से कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की थी। कैंसिल हुआ सीएम का दौरा विधायक ने सीएम से अपील में कहा कि हमारे मंडल अध्यक्ष के परिवार की तीन लोगों की मौत हुई है। इसलिए किसी और दिन कार्यक्रम करें। वहीं, हादसे पर सीएम ने दुख जताते हुए शु्क्रवार के दिन अपना प्रस्तावित सीधी दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा कि सीधी में हुई सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। दुर्घटना में घायलों को इलाज और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए प्रशासन को निर्देशित किया है। उन्होंने बाबा महाकाल से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान दें। साथ ही घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। बोलेरो में 6 लोग थे सवार मिली जानकारी के अनुसार जगदीश जायसवाल का बेटा प्रिंस घर से कार लेकर निकला था। पहले तो इसमें दो लोग सवार थे। लेकिन रास्ते में कुछ और लोग बैठे तो कुल 6 लोग हो गए। इस दौरान कार ट्रक से जाकर टकरा गई। हादसे में धर्मेंद्र पिता चूड़ामणि जायसवाल और गीता उर्फ आदित्य पिता रघुनाथ की मौत हो गई। इसके साथ ही एक मृतक की पहचान सोहैब के रूप में हुई। वह राहतगढ़ का रहने वाला था। मृतक सीएम के कार्यक्रम के लिए टेंट की व्यवस्था करने वाले दल के साथ आया था।

अभियान में स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण सहित चल रही हैं अन्य गतिविधियां

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्म-दिन 17 सितम्बर से प्रदेश में शुरू हुए 'सेवा पखवाड़ा' अभियान में सामूहिक भागीदारी से सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई का अभियान चल रहा है। इसी के साथ महिला सशक्तिकरण सहित अन्य गतिविधियां भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही हैं। सेवा पखवाड़ा अभियान 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक निरंतर चलेगा। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास के निर्देश पर 1250 से अधिक स्वच्छता श्रमदान गतिविधियाँ हुईं। स्वच्छता लक्षित इकाइयों पर विशेष ध्यान देकर सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया। इस आयोजन में 6 हजार से अधिक जन-प्रतिनिधि और एक लाख 50 हजार से अधिक सामाजिक संगठन के सदस्य, युवा, विद्यार्थी, स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर और सफाई मित्र शामिल हुए। जन-प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वच्छता ही सेवा अभियान का उद्देश्य न केवल सफाई को बढ़ावा देना बल्कि नागरिकों के बीच स्वच्छता को निंरतर उत्सव के रूप में आत्मसात करना है। नर्मदापुरम जिले की विभिन्न तहसीलों और विकासखण्डों में स्वच्छता को लेकर साफ-सफाई अभियान चलाया गया। इटारसी में जन-सामान्य को स्वच्छता का संदेश दिया गया। नागरिकों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने की समझाइश दी गई। हरदा जिले में अननान नदी के तट पर श्रमदान किया गया। नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती, नागरिकों और अधिकारी-कर्मचारियों ने श्रमदान किया। बैतूल में कलेक्टर श्री नरेन्द्र सूर्यवंशी के निर्देश पर कोठी बाजार और गंज क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रबंधन को लेकर जागरूकता एवं कार्यवाही की गयी। स्वच्छता अमले ने व्यापारियों को पॉलिथिन का उपयोग न करने के स्थान पर कपड़े के थैले का उपयोग करने की समझाइश दी। प्रशासनिक कार्यवाही करते हुए अमले ने सिंगल यूज प्लास्टिक का यूज करने वाले व्यापारियों पर 16 हजार रुपये चालान की राशि वसूल की और 54 किलो पॉलीथिन जप्त किया। अनूपपुर जिले के अमरकंटक में वन एवं पर्यावरण और प्रभारी मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने अभियान के अंतर्गत पौध-रोपण किया। प्रभारी मंत्री ने नर्मदा नदी के दक्षिण घाट पर बेल का पौधा रोपित किया। उनके साथ महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने नींबू, जामुन, आम और अमरूद के पौधे लगाये। शहडोल में मोहनराम तालाब की साफ-सफाई की गयी। नगर के गाँधी स्टेडियम में एनसीसी, एनएसएस, स्कूल के छात्र-छात्राओं, नगरपालिका के स्टॉफ ने मानव श्रंखला बनाकर स्वच्छता का संदेश दिया। दमोह जिले के पथरिया में पशुपालन राज्यमंत्री श्री लखन पटेल 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' कार्यक्रम में शामिल हुए। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा को मजबूत कर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य स्तर को सुधारा जा सकता है। कार्यक्रम में 8वाँ राष्ट्रीय पोषण माह और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को गर्भावस्था के समय दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी दी गयी। अभियान में 'एक पेड़ माँ के नाम' कार्यक्रम में नागरिकों ने फलदार पौधे लगाये। सागर में सामूहिक भागीदारी से स्वच्छता कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम दीनदयाल चौराहे पर लगी पं. दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति की सफाई से किया गया और माल्यार्पण किया गया। बस स्टैण्ड पर नागरिकों की भागीदारी से सफाई की गयी। कार्यक्रम में विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, महापौर सागर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी एवं नागरिक शामिल हुए। जिले के खुरई में डम्प साइट स्थानों पर सफाई करवायी गयी। जन-सामान्य को स्पॉट के कायाकल्प का संकल्प दिलाया। कचरा गाड़ी में ही डालने के लिये प्रेरित किया गया। सुरखी में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर लगाया गया। कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत शामिल हुए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की फिल्म चलो जीते हैं की मुक्त कंठ से सराहना

प्रधानमंत्री मोदी के जीवन से सीख देती है 'चलो जीते हैं': मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वक्तव्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की फिल्म चलो जीते हैं" की मुक्त कंठ से सराहना 24 सितंबर तक पूरे प्रदेश में फिल्म का प्रदर्शन होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के बाल्यकाल की परिस्थितियों पर एक आदर्श फिल्म है, जो अतीत से वर्तमान में लाकर छोड़ती है। आधे घंटे की अवधि में फिल्म कथा सार को समेटना एक अद्भुत प्रयोग है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को सिनेपोलिस बंसल प्लाजा, भोपाल में "चलो जीते हैं" फिल्म का शो देखने के बाद मीडिया से चर्चा में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुक्त कंठ ने फिल्म की सराहना की। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, विधायक  रामेश्वर शर्मा,  भगवानदास सबनानी, पूर्व मंत्री मती अर्चना चिटनिस तथा बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी की जन्म वर्षगांठ के अवसर पर 18 से 24 सितंबर तक पूरे प्रदेश में फिल्म "चलो जीते हैं" का प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के बाल्यकाल और जीवन पर केंद्रित फिल्म के सेवा पखवाड़े के अंतर्गत संगठन द्वारा प्रदेश भर में प्रदर्शन की पहल सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म देखने के बाद कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  मोदी ने 17 सितंबर को मध्यप्रदेश के जनजाति बहुल धार जिले में अपना 75वां जन्मदिवस मनाया। राष्ट्र नायक  मोदी का गौरव पक्ष और शालीन पक्ष इस फिल्म में देखने को मिलता है। "चलो जीते हैं" फिल्म में  मोदी ने ध्येय वाक्य "चलो जीते हैं" को लेकर कठिनाइयों के बीच जीते हुए अपने जन्म और जीवन को सिद्ध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोयले की खदान से हीरा निकले तो खदान धन्य हो जाती है। प्रधानमंत्री  मोदी दुनिया के सबसे बड़े गणतंत्र का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने जीवन में अन्य परेशानियां झेलते हुए अपने साथी विद्यार्थी को भी सहारा दिया। वे किस तरह युक्ति निकालते हैं, आज यह दुनिया के सामने है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के दीर्घायु और शतायु होने की कामना की। प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है। वर्ष 2019 तक वे और भी शक्तिशाली बनकर पूरे विश्व को संदेश देंगे। भारत विश्व में सिरमौर बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज के समय में नई तकनीक और बड़े खर्चे से फिल्में बनती हैं, लेकिन इस शॉर्ट फिल्म में सीमित साधनों के उपयोग से अल्प अवधि में बिना मध्यांतर की फिल्म बनाकर फिल्म का मूल कथा पक्ष दृढ़ इच्छा शक्ति का फिल्मांकन बखूबी किया गया है। इस नाते फिल्म निर्माण में यह नया प्रयोग भी है। फिल्म अतीत का वर्तमान से तादात्म्य मिलाकर मोदी जी के पूरे जीवन पर प्रकाश डालती है। इसके लिए फिल्म निर्माता बधाई के पात्र हैं। इस शॉर्ट फिल्म को सभी नागरिकों को देखना चाहिए। उल्लेखनीय है कि "चलो जीते हैं" वर्ष 2018 में बनी एक शॉर्ट फिल्म है, जो प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के बचपन से प्रेरित है। यह फिल्म बॉलीवुड स्टार्स वाली कमर्शियल मूवी नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक लघु फिल्म है। फिल्म के निर्देशक  महावीर जैन, निर्माता  भूषण कुमार, महावीर जैन हैं। फिल्म की कहानी एक छोटे बालक की है जो अपने जीवन में "दूसरों की सेवा" और "देशभक्ति" को सबसे बड़ा धर्म मानता है। फिल्म में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के बचपन से जुड़े आदर्श और संस्कारों को दर्शाया गया है। फिल्म "चलो जीते हैं" में बड़े स्टार कलाकार नहीं हैं बल्कि ज्यादातर नए कलाकारों ने काम किया है। इस फिल्म में बालक नरेन्द्र (नन्हें मोदी) की मुख्य भूमिका में समर्थ शुकला, नरेन्द्र के मित्र के रूप में राहुल पटेल, बाल कलाकार आरोही राय और आदित्य शामिल हैं। यह फिल्म मुख्यत: बाल नरेन्द्र मोदी के विचारों और समाजसेवा की सोच पर केंद्रित है, इसलिए इसमें स्टार कॉस्ट से ज्यादा संदेश और प्रेरणा पर जोर दिया गया है। फिल्म 6 वर्ष बाद रिलीज हुई है।  

बाजार में बड़ी गिरावट से मचा हड़कंप, अडानी स्टॉक्स ने फिर जीता भरोसा

मुंबई  पूरे हफ्ते के दौरान तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय बाजार में गिरावट देखी जा रही है. सेंसेक्‍स-निफ्टी गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि अडानी के शेयरों ने आज कमाल का प्रदर्शन किया है. अडानी के शेयर शुक्रवार को शानदार कारोबार कर रहे हैं. अडानी के शेयरों में यह तेजी, सेबी द्वारा हिंडनबर्ग केस खत्‍म करने के बाद आया है.  सप्‍ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्‍स 240 अंक गिरकर 82771 पर और निफ्टी 60 अंक गिरकर 25361 पर कारोबार कर रहा है. निफ्टी बैंक में भी गिरावट देखी जा रही है, जो करीब 150 अंक टूट चुका है.  BSE के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 7 शेयर ही उछाल पर थे, जिसमें अडानी पोर्ट सबसे ऊपर कारोबार कर रहा था. वहीं 23 शेयर मामूली गिरावट पर थे. टीसीएस में एक फीसदी की गिरावट रही.  क्‍यों आई ये गिरावट?  यह गिरावट लार्जकैप के शेयरों में आई गिरावट के कारण है. सप्‍ताहभर तेजी के बाद आज इन शेयरों में बिकवाली हो रही है. इसके अलावा, अमेरिका से टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर भी रुख स्‍पष्‍ट नहीं हो रहा है. अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा भी फेड रेट में कटौती के कारण भी शेयर बाजार में दबाव दिख रहा है.  कौन से शेयर सबसे ज्‍यादा टूटे?  Zydus Wellness, डीसीएम श्रीराम, जेन टेक्‍नोलॉजी के शेयर 2 प्रतिशत से ज्‍यादा टूटकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा, आईएफसीआई, इंडियामार्ट और सोनट सॉफ्टवेयर जैसे शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली.  अडानी के शेयरों ने किया कमाल!  अडानी पावर का शेयर 7 फीसदी चढ़कर 675 के करीब पहुंच गया. अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी रही. अडानी एनर्जी सॉल्‍यूशन 3 फीसदी, अडानी पोर्ट 2 फीसदी और अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर में भी करीब 3 फीसदी की तेजी रही.  132 शेयरों में अपर सर्किट BSE पर आज कुल 3538 शेयर ट्रेड कर रहे हैं, जिसमें से 1,980 शेयरों में तेजी और 1,380 शेयरों में गिरावट है. बाकी 178 शेयर अनचेंज हैं. वहीं 132 शेयरों ने अपर सर्किट टच किया है, जबकि 61 ने लोअर सर्किट टच किया है. 87 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर और 29 52 सप्‍ताह के लो पर कारोबार कर रहे हैं. 

ट्रंप का बदला रुख? भारत पर से हट सकता है 25% एक्स्ट्रा टैक्स का बोझ

नई दिल्ली अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में बड़ी राहत मिल सकती है और रूसी तेल खरीद पर ट्रंप द्वारा लगाया गया एक्स्ट्रा 25% टैरिफ हटाया जा सकता है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार ये उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका जल्द ही भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ हटा सकता है और रेसिप्रोकल टैरिफ को भी घटाकर 10 से 15% किया जा सकता है. इसके साथ ही सीईए ने भारत-US ट्रेड डील के आगे बढ़ने का भी संकेत दिया है.  8-10 हफ्ते में निकल आएगा हल कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए सीईए नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें टैरिफ मसले का अगले 8 से 10 हफ्तों के भीतर समाधान होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि अगले कुछ महीनों में कम से कम 25% के एक्स्ट्रा टैरिफ का समाधान जरूर निकल आएगा.' बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, नागेश्वरन ने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे करीब 50 अरब  डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर दबाव कम हो सकता है. ट्रंप ने क्यों लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ? गौरतलब है कि भारत पर पहले अमेरिकी की ओर से 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था, लेकिन अगस्त में भारत की रूसी तेल खरीद को युक्रेन युद्ध में पुतिन की आर्थिक मदद करने का जरिया करार देते हुए जुर्माने के रूप में 25% का एक्स्ट्रा टैरिफ जुर्माने के तौर पर लगाया था. इसके बाद भारत पर कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया था और इससे ये ब्राजील के साथ सबसे ज्यादा ट्रंप टैरिफ को झेलने वाले देशों में शामिल हो गया था. अपने संबोधन में नागेश्वरन ने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों ही सरकारों के बीच सतह के नीचे तमाम मुद्दों को हल करने के लिए काफी बातचीत हो रही है. भारत-US ट्रेड डील में क्या प्रोग्रेस?   भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील एग्रीकल्चर और डेयरी प्रोडक्ट्स समेत अन्य मुद्दों को लेकर अटकी हुई थी और इस पर बातचीत भी ट्रंप के एक्स्ट्रा टैरिफ के बाद थमी हुई थी. लेकिन बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताते हुए ट्रेड डील के सफल निष्कर्ष निकलने की बात कही थी.  इसके बाद इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका की ओर से प्रमुख वार्ताकर ब्रेंडेन लिंच ट्रेड डील पर छठे चरण की बैठक करने के लिए नई दिल्ली आए थे और भारत के मुख्य व्यापार वार्ताकार राजेश अग्रवाल के साथ करीब 7 घंटे की लंबी चर्चा की थी.  55% सामान हाई टैरिफ के अंदर रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में अमेरिका को भारत के निर्यात का लगभग 55% हिस्सा ट्रंप के हाई टैरिफ के अंदर आ रहा है. इसकी मार से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स की बात करें, तो कपड़ा, केमिकल, मरीन फूड, जेम्स एंड ज्वेलरी के साथ ही मशीनरी शामिल हैं. ये इसलिए भी खास हैं, क्योंकि भारत की श्रम-प्रधान निर्यात अर्थव्यवस्था के प्रमुख हिस्से हैं. टैरिफ के असर को देखें, तो अगस्त महीने में अमेरिका को निर्यात घटकर 6.87 अरब डॉलर रह गया, जो 10 महीने का सबसे निचला स्तर है.

सिंगरौली में छिपा खजाना अब आएगा बाहर! एग्रीमेंट फाइनल, जल्द शुरू होगा गोल्ड एक्सट्रैक्शन

 सिंगरौली  मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में कोयले और बिजली उत्पादन के बाद अब सोने का भी उत्खनन होगा. चितरंगी इलाके में 23 हेक्टेयर भूमि से 18 हजार 356 टन सोना निकाला जाएगा. गोल्ड ब्लॉक का एग्रीमेंट हो चुका है और जल्द ही यहां सोना निकालने का काम शुरू हो जाएगा. जिला खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल ने बताया कि चकरिया गोल्ड ब्लॉक के लिए एग्रीमेंट हो चुका है. कंपनी 5 साल तक यहां गोल्ड माइंस चलाएगी. इसके बाद यहां से कुल 18 हजार 356 टन सोना निकलेगा. पिछले एक साल से कंपनी ने यहां ड्रिलिंग करके सोने का रेशियो पता कर लिया है.  1.33 लाख टन स्वर्ण भंडार का अनुमान सोने के भंडार के खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है. चकरिया गोल्ड ब्लाॅक का ई-नीलामी के जरिए प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है. चकरिया गोल्ड ब्लाॅक 23.57 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है. इस ब्लॅक में थोड़ा बहुत नहीं, बल्कि 1 लाख 33 हजार 785 टन सोने के भंडार का अनुमान लगाया गया है. अनुमान है कि इसके खनन से 1 लाख 76 हजार 600 ग्राम सोने की रिकवरी हो सकती है. सोने के खनन के लिए खनिज विभाग ने सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां भी प्राप्त कर ली हैं. 4 दूसरे गोल्ड ब्लाॅक की हो चुकी नीलामी मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने कहा कि, ''प्रदेश में सोने और दूसरे खनिज के मामले में जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं. इसको लेकर लगातार खोज की जा रही है. इसी का ही नतीजा है कि कटनी और सिंगरौली में खनिजों को लेकर सकरात्मक संकेत मिले हैं. प्रदेश में अभी तक 4 दूसरे गोल्ड ब्लाॅक की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं. इनमें गुहर पहाड़, इमलिया, ईस्टर्न एक्सटेंशन आफ सोनकुरवा और अम्लीय वाह हैं. प्रदेश के प्रयासों और केन्द्र के सहयोग से मध्य प्रदेश खनिज के क्षेत्र में तेजी से उभरा है और देश-विदेश के निवेशकों का ध्यान मध्य प्रदेश ने खींचा है.'' मुख्यमंत्री बोले- प्रदेश में स्वर्ण खनिज में जबरदस्त संभावना मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने स्वर्ण खनन की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने को लेकर कहा कि, ''प्रदेश में सोने और दूसरे खनिज के मामले में जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं. इससे मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास में नए पंख लगेंगे. खनिज साधन के अलावा मध्य प्रदेश कई दूसरे औद्योगिक क्षेत्र में भी लगातार आगे बढ़ रहा है. खास तौर से रिफाइनिंग, लाॅजिस्टिक सहित दूसरे उद्योगों में निवेश आए और प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को और मजबूरी मिलेगी.'' 2 वर्षों में कंपनी माइंस के डेवलपमेंट का करेगी काम जिला खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल बताती हैं कि, ''इस गोल्ड ब्लॉक की नीलामी के बाद एग्रीमेंट की जो प्रक्रिया है वह पूरी कर ली गई है और गरिमा नेचुरल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लीज दे दी गई है. जल्द ही कंपनी काम शुरू करेगी और 18356 टन सोने के उत्पादन का जो लक्ष्य रखा गया है उस पर काम करना शुरू करेगी. पहले 2 वर्षों में कंपनी माइंस के डेवलपमेंट का काम करेगी, उसके बाद कंपनी आगामी तीन वर्षों में सोना उत्पादन का कार्य करेगी.'' उन्होंने यह भी कहा कि, ''इस गोल्ड माइंस के आने से सरकार को जाने वाले राजस्व में बढ़ोतरी होगी और राजस्व का जो लक्ष्य है वह बड़ा बनेगा. यह देश के विकास में अहम योगदान के साथ-साथ जिले का भी विकास होगा.'' अधिकारी ने बताया कि इस गोल्ड माइंस का रकबा बहुत बड़ा हिस्सा शासकीय जमीन का है और कुछ हिस्सा निजी भूमि का है. सिंगरौली जिले में पहले से ही कोयले की 11 खदानें चल रही हैं. इसके अलावा, अब सोने का उत्खनन भी होगा. यह सिंगरौली के लिए गौरव की बात है.  उन्होंने यह भी बताया कि अभी इस गोल्ड माइंस के अलावा दो और गोल्ड ब्लॉक बनाए गए हैं. उनकी नीलामी हो चुकी है. अभी उनमें ड्रिलिंग का काम चल रहा है. उसके बाद पता चलेगा कि बाकी की दो अन्य खदानों में कितना सोना निकलेगा? फिलहाल कोयला और बिजली उत्पादन के बाद अब सिंगरौली की धरती सोना उगलेगी.

राजधानी भोपाल की सड़कों पर दौड़ेंगी 100 इलेक्ट्रिक बसें, नए साल से होगी शुरुआत

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सार्वजनिक परिवहन के हाल इन दिनों कुछ ठीक नहीं है। पिछले एक साल में ढाई सौ के करीब सिटी बसों का संचालन ठप्प पड़ गया है। नए साल में नगर निगम की ओर से दावा किया जा रहा है कि 100 ई-बसें चलेंगी। जिससे आम आदमी को बड़ी मिलेगी। पहले चरण में मिलेंगी 100 ई-बसें पहले चरण में पीएम ई-बस सेवा के तहत 100 बसें मिलेंगी। इसके लिए दो डिपो भी तैयार किए जा रहे हैं। जो कि बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में होंगे। जबकि, दूसरे चरण में 95 बसें आएंगी। जिनका डिपो आरिफ नगर और कोलार में बनाया जाएगा।  पीएम ई-बस सेवा के फेस-1 में 100 बसें मिलेंगी। इसके लिए दो नए डिपो संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) और कस्तूरबा नगर में बनाए जा रहे हैं। नए बस ऑपरेटर का चयन भी हो चुका है। वहीं, दूसरे फेस में 95 बसें आएंगी। आरिफ नगर और कोलार रोड पर नए डिपो बनेंगे। इसके ऑपरेटर के चयन समेत अन्य प्रक्रिया बाकी है। बता दें कि हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सिटी बसों का मुद्दा भी उठा था। 368 में से सिर्फ 95 सिटी बसें चलने पर सांसद आलोक शर्मा ने भी हैरानी जताई। सांसद शर्मा ने निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण से पूछा था कि किस ऑपरेटर की कितनी बसें चल रही हैं, ये बताएं? इतनी संख्या में बसें क्यों बंद हुईं? जबकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को तो बढ़ाना चाहिए। सांसद की बात से विधायक भगवानदास सबनानी ने भी सहमति जताई थी। सांसद बोले-पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत हो इस मामले में सांसद शर्मा ने कहा, भोपाल का पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होना चाहिए। जब मैं भोपाल का महापौर था, तब छात्र-छात्राएं, दिव्यांगजन, महिला, सीनियर सिटीजन, कर्मचारियों को महापौर स्मार्ट पास का फायदा किया था। यदि महापौर स्मार्ट पास बनने फिर से शुरू होंगे तो सबको फायदा मिलेगा। अब जानिए, आखिर बसों का संचालन क्यों बंद हुआ? भोपाल की सड़कों से एक साल में ढाई सौ सिटी बसें गायब होने का मुद्दा विधानसभा में भी उठा है। 25 रूट पर चलने वाली 368 बसों में से अभी सिर्फ 95 बसें ही दौड़ रही हैं। ऐसे में महिला, स्टूडेंट्स और नौकरीपेशा लोगों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। हर रोज करीब 1 लाख लोग परेशान हो रहे हैं। दरअसल, टिकट कलेक्शन पर विवाद, पेनल्टी और हाईकोर्ट में याचिका दायर होने से ऑपरेटर्स ने इन बसों का संचालन बंद कर दिया। इस पर हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने विधानसभा में तारांकित प्रश्न लगाया था। पहले बीसीएलएल के जरिए 4 एजेंसी कर रही थीं संचालन भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में सिटी बसों का संचालन BCLL (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) के जरिए 4 एजेंसी कर रही थीं। इनमें मां एसोसिएट्स, एपी मोटर्स, श्री दुर्गांबा और आई-मोबिलिटी एजेंसी शामिल हैं। ये एजेंसियां 25 रूट पर बसें चला रही थीं। इनमें से सबसे पहले पिछले साल 4 जुलाई को मां एसोसिएट्स ने 149 बसों का संचालन बंद किया था। इसकी वजह इन बसों में टिकिट कलेक्शन करने वाली एजेंसी 'चलो एप' की ओर से प्रति​ किमी दी जाने वाली राशि घटाने की मांग थी। इस मामले में कोई निराकरण नहीं हुआ। ऐसे में इन बसों में रोजाना सफर करने वाले यात्री परेशान हैं। अन्य एजेंसियां भी अपने हाथ पीछे खींचने लगी। दोगुनी होनी चाहिए बसों की संख्या एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मुख्य माध्यम सिटी बसों की संख्या दोगुनी, यानी 800 होनी चाहिए। भविष्य में ई-बसों का संचालन भी होना है, लेकिन उसके उलट भोपाल से बसों की संख्या लगातार कम हो रही है। शहर में ऑपरेटर की कितनी बसें चल रही है?- सांसद  जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में सिटी बसों को लेकर सांसद आलोक शर्मा ने निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण से पूछा था कि किस ऑपरेटर की कितनी बसें चल रही हैं? इतनी संख्या में बसें क्यों बंद हुईं। जबकि सार्वजनिक परिवहन को और बढ़ाना चाहिए। सांसद ने स्पष्ट किया कि भोपाल का सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होना चाहिए। क्यों बंद हुई थी बसें टिकट कलेक्शन, पेनल्टी और हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। इसको लेकर रामेश्वर शर्मा ने एक साल के भीतर 250 बसें गायब होने का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया था। भोपाल के अलग-अलग इलाकों में चलने वाली 368 बसों में से केवल 95 बसें ही दौड़ रही हैं। जिससे शहर के हजारों लोग परेशान हो रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में नई संक्रामक बीमारी का खतरा, AIIMS भोपाल की रिपोर्ट में सामने आए टीबी जैसे लक्षण

भोपाल  एम्स के डॉक्टर्स ने एक ऐसी बीमारी को लेकर बड़ा खुलासा किया है, जिसकी वजह से कई डॉक्टर्स खुद भ्रमित हो जाते हैं। साथ ही गलत बीमारी समझकर उसका इलाज करते हैं, लिहाजा 40 प्रतिशत मरीजों की जान चली जाती है। यह खुलासा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में हुआ है। एम्स भोपाल ने मेलियोइडोसिस नामक संक्रामक रोग को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। एमपी में मिले हैं अब तक 130 केस ववहीं, रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब तक 130 से ज्यादा मेलियोइडोसिस संक्रमण से ग्रसित मरीज पाए गए हैं। बैक्टीरिया जनित रोग बेहद खतरनाक है, समय पर सही इलाज न मिलने पर मरीज की मौत हो जाती है। इस रोग के हर 10 मरीजों में 4 काल के गाल में समा जाते हैं। टीबी जैसे होते हैं लक्षण रिपोर्ट में सबसे बड़ी चुनौती यह बताई गई है कि इस बीमारी के लक्षण टीबी जैसे होते हैं। इसक कारण अधिकतर मामलों में मरीज का गलत इलाज कर दिया जाता है। इसके बाद जब समस्या ज्यादा बढ़ जाती है तो सही इलाज शुरू होता है तब तक संक्रमण पूरे शरीर में फैल चुका होता है । मरीज मौत तक पहुंच जाता है। रिपोर्ट के अनुसार बीते 6 वर्षों में मध्यप्रदेश के 20 से अधिक जिलों से मेलियोइडोसिस के 130 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। बीमारी के लक्षण डॉक्टर्स के अनुसार किसी को 2–3 हफ्तों से अधिक बुखार रहता है, एंटी-टीबी दवा से कोई फायदा नहीं हो रहा या बार-बार फोड़े बन रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से मेलियोइडोसिस की जांच करवाएं। सावधान, सतर्क रहने की जरूरत डॉक्टर्स ने कहा कि यह बीमारी अब प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) रूप ले चुकी है। संस्थान ने डॉक्टरों और आम जनता दोनों से अपील की है कि लंबे समय तक ठीक न होने वाले बुखार और टीबी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें। एम्स की पहल से सटीक अनुमान एम्स भोपाल इस बीमारी से संबंधित प्रशिक्षण आयोजित कर रहा है, जिनमें पूरे राज्य के 25 स्वास्थ्य संस्थाओं के 50 से अधिक माइक्रोबायोलॉजिस्ट और चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया है। इस कारण 14 नए केस जीएमसी भोपाल, बीएमएचआरसी, जेके हॉस्पिटल, सागर और इंदौर में जांच में सामने आए।