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प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपलब्धि, सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतें हुईं बाल विवाह मुक्त

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के 75वें जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को “बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत” घोषित किया गया है। विगत दो वर्षों में इन पंचायतों में बाल विवाह का एक भी प्रकरण दर्ज न होने के आधार पर यह मान्यता प्रदान की गई। इस उपलब्धि के पीछे राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े की सतत पहल, सक्रिय मार्गदर्शन और नेतृत्व को निर्णायक माना जा रहा है।उनके नेतृत्व में विभाग ने गाँव-गाँव तक जागरूकता अभियान चलाया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय किया तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की। मती राजवाड़े ने कहा, कि सूरजपुर जिले की यह पहल केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का कार्य करेगी। प्रधानमंत्री जी के अमृत महोत्सव वर्ष में यह उपलब्धि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सशक्त संदेश है। सामुदायिक भागीदारी की सराहना जिला प्रशासन ने इस पहल की सफलता में महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की संयुक्त भूमिका की सराहना की। सभी के सामूहिक प्रयास से यह सुनिश्चित हुआ कि शिक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता मिले और कोई भी बाल विवाह न हो। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” की शुरुआत हुई थी। यह अभियान यूनिसेफ के सहयोग से और मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।राज्य सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में रखा है और विभाग लगातार जनजागरूकता, निगरानी और सामाजिक सहभागिता को मजबूत कर रहा है। सूरजपुर की इस सफलता से प्रेरित होकर अब छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को “बाल विवाह मुक्त” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिन जिलों में विगत दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, वहां शीघ्र ही प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

UPITS 2025 मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना ‘सीएम युवा’ का पवेलियन होगा आकर्षण का केंद्र

प्रदेश के युवाओं को उद्यमिता की ओर आकर्षित करेगा यूपीआईटीएस 2025 मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना 'सीएम युवा' का पवेलियन होगा आकर्षण का केंद्र   27 सितंबर को सीएम युवा और 27 शैक्षिक संस्थानों के बीच होगा एमओयू हस्तांतरण शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े अंतिम वर्ष के छात्रों और पूर्व छात्रों को मिलेगा इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स से जुड़ने का अवसर गलगोटिया, जीएल बजाज, शारदा, एमिटी सहित प्रमुख यूनिवर्सिटीज जुड़ेंगी योजना से हॉल नंबर 18ए में लगेंगे टेक्नोलॉजी और फ्रेंचाइजी बेस्ड मॉडल्स से संबंधित 150 से अधिक स्टॉल्स   बैंकर्स और इंडस्ट्री लीडर्स भी करेंगे नए और इनोवेटिव बिजनेस आइडियाज का अवलोकन  प्रदेश के सभी 75 जिलों के सीएम युवा फेलोज भी जुड़ेंगे, अपने जिलों में देंगे ब्रांड्स की जानकारी  युवाओं को सीएम युवा से जोड़ने के लिए डिजिटल कैंपेन और conclave.cmyuva.org.in वेबसाइट भी की गई लॉन्च लखनऊ प्रदेश सरकार युवाओं को नए अवसर और मंच देने के लिए अब सीएम युवा योजना को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने जा रही है। इसी कड़ी में 25 से 29 सितम्बर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-2025) में सीएम युवा योजना प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना के जरिए प्रदेश के युवाओं को इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स, फ्रेंचाइजी मॉडल्स और टेक्नोलॉजी आधारित बिजनेस आइडियाज से जोड़ने की पहल की जा रही है। आयोजन के दौरान 27 सितम्बर को सीएम युवा और 27 प्रमुख शैक्षिक संस्थानों के बीच एमओयू का हस्तांतरण होगा। इसके साथ ही हॉल नंबर 18ए में 150 विशेष स्टॉल्स स्थापित किए जाएंगे, जहां विभिन्न क्षेत्रों के नए-नए बिजनेस मॉडल्स प्रदर्शित होंगे। इस प्रदर्शनी में प्रदेश भर से छात्र-छात्राएं, युवा फेलोज, यूनिवर्सिटी प्रतिनिधि और उद्योग जगत के लोग शामिल होंगे, जिससे युवाओं को सीखने, जुड़ने और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। अंतिम वर्ष और पढ़ाई पूरी कर चुके युवाओं के लिए होगा अवसर सीएम युवा योजना के नोडल अधिकारी और ज्वॉइंट कमिश्नर इंडस्ट्रीज सर्वेश्वर शुक्ला ने बताया कि इस एमओयू का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों को सीएम युवा योजना से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है। इसके माध्यम से अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं और संस्थानों के पूर्व छात्रों को इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित करेगी बल्कि प्रदेश सरकार के स्टार्टअप और इनोवेशन विजन को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 150 इनोवेटिव स्टॉल्स होंगे आकर्षण का केंद्र उन्होंने बताया कि यूपीआईटीएस में हॉल नंबर 18ए को विशेष रूप से सीएम युवा प्रदर्शनी के लिए निर्धारित किया गया है। यहां 150 से अधिक स्टॉल्स स्थापित होंगे, जिनमें फ्रेंचाइजी मॉडल्स, टेक्नोलॉजी-आधारित बिजनेस, एग्रीटेक, हेल्थटेक और अन्य स्टार्टअप बिजनेस आइडियाज को प्रदर्शित किया जाएगा। यह स्टॉल्स युवाओं को न सिर्फ नए व्यापारिक मॉडल्स से परिचित कराएंगे बल्कि उन्हें यह भी समझने का अवसर देंगे कि कैसे इन मॉडल्स को अपने क्षेत्र में लागू किया जा सकता है। एनसीआर क्षेत्र में आयोजित होने के कारण हम इसे लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम से भी एक लेवल और ऊपर ले गए हैं। इसमें कई नए और बेहतरीन ब्रांड्स को भी शामिल किया गया है, जो देश-विदेश से आए विजिटर्स का ध्यान आकर्षित करेगा।  यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की साझेदारी सीएम युवा योजना के अंतर्गत जिन संस्थानों के साथ एमओयू किया जा रहा है, उनमें गलगोटिया यूनिवर्सिटी, जीएल बजाज, चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ, अजय कुमार गर्ग यूनिवर्सिटी, शारदा यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी और एबीईएस जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों के छात्र और फैकल्टी टीमें प्रदर्शनी में सक्रिय भागीदारी करेंगी। इससे युवाओं को प्रत्यक्ष रूप से उद्योग जगत से जुड़ने और नई संभावनाओं की पहचान करने का अवसर मिलेगा। बैंकर्स और इंडस्ट्री जगत की मौजूदगी युवाओं के बिजनेस आइडियाज को केवल पहचान ही नहीं बल्कि वित्तीय सहयोग भी दिलाने की व्यवस्था की गई है। प्रदर्शनी में कई बैंकर्स और इंडस्ट्री लीडर्स मौजूद रहेंगे। वे नए बिजनेस मॉडल्स का आंकलन करेंगे और यह तय करेंगे कि किन प्रोजेक्ट्स को वित्तपोषण दिया जा सकता है। इससे उद्यमिता के इच्छुक युवाओं को फाइनेंसिंग और मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध होगा। प्रदेश भर से आएंगे युवा और अधिकारी प्रदेश सरकार ने सभी 75 जिलों के सीएम युवा फेलोज को प्रदर्शनी में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें प्रत्येक स्टॉल का डाटा और कांटैक्ट डिटेल एकत्र करने तथा इन ब्रांड्स को अपने-अपने जिलों में प्रचारित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, सहारनपुर, मेरठ, आगरा और अलीगढ़ मंडल से जुड़े कॉलेजों के छात्र-छात्राएं और अधिकारी भी इस प्रदर्शनी का हिस्सा बनेंगे। यह प्रयास युवाओं को प्रत्यक्ष रूप से इनोवेशन और उद्यमिता से जोड़ने का अवसर देगा। सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए डिजिटल मीडिया कैंपेन पहले ही सक्रिय हो चुका है। बड़ी संख्या में युवाओं ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इस उद्देश्य से एक विशेष वेबसाइट conclave.cmyuva.org.in भी लॉन्च की गई है, जिसके माध्यम से इच्छुक युवा न केवल योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि यूपीआईटीएस विजिट के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी यह कैंपेन युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।  

दिल्ली विश्वविद्यालय में ABVP का दबदबा, डूसू अध्यक्ष समेत 3 पदों पर कब्जा

नई दिल्ली  दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव (डूसू चुनाव 2025) के नतीजे आ गए हैं। 17 राउंड की फाइनल गिनती के बाद डूसू चुनाव में एबीवीपी ने अध्यक्ष समेत तीन पदों पर बाजी मार ली है, जबकि एक पद एनएसयूआई के खाते में आया है। एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का पद जीता है। उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई ने बाजी मारी है। डूसू चुनाव की मतगणना से पहले नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी के स्पोर्ट्स स्टेडियम में मतगणना केंद्र के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। गुरुवार को बेहद कड़ी सुरक्षा में संपन्न हुए डूसू चुनाव में इस बार 39.36 प्रतिशत मतदान हुआ। रामानुजन में 63 फीसदी तो मिरांडा हाउस में 60 फीसदी विद्यार्थियों ने मतदान में हिस्सा लिया। मिरांडा हाउस, हंसराज, रामजस, किरोड़ीमल, रामानुजन सहित अन्य कॉलेजों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने मतदान किया। वहीं, कुछ कॉलेजों में मतदान के दौरान दो गुटों में आपसी झड़प और ईवीएम खराब होने की बात भी सामने आईं। डूसू चुनाव में पहली बार हुआ ऐसा डीयू में पहली बार ऐसा हुआ कि कैंपस और कॉलेजों की दीवारों पर किसी तरह का पोस्टर या बैनर दिखाई नहीं दिया। दिल्ली पुलिस के अलावा अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे कैंपस को छावनी में तब्दील कर दिया था। कैंपस लॉ सेंटर में मतदान के लिए पहली बैरिकेडिंग पर छात्रों का आईकार्ड चेक किया जा रहा था और बाद में दूसरी बैरिकेडिंग पर फिर से जांच हो रही थी। इसके बाद मतदान परिसर में छात्रों को जाने दिया जा रहा था। आज दिनभर चली मतगणना  डूसू चुनाव में फाइनल राउंड की काउंटंग के बाद एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का पद जीता है। उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई ने बाजी मारी है। डूसू चुनाव के फाइनल राउंड के नतीजे एबीवीपी प्रत्याशी:- अध्यक्ष – आर्यन मान 28841 उपाध्यक्ष – गोविंद तंवर 20547 सचिव – कुणाल चौधरी 23779 संयुक्त सचिव- दीपिका झा 21825 एनएसयूआई अध्यक्ष – जोश्लिन नंदिता चौधरी 12645 उपाध्यक्ष – राहुल झांसला 29339 सचिव – कबीर 16117 संयुक्त सचिव- लवकुश भड़ाना 17380 आइसा -एसएफआइ अध्यक्ष : अंजलि -5385 उपाध्यक्ष सोहन -4163 सचिव: अभिनंदना – 228 संयुक्त सचिव : अभिषेक – 8425 अध्यक्ष: 59882 उपाध्यक्ष: 59869 सचिव: 59863 संयुक्त सचिव: 69919 डूसू चुनाव के 16वें राउंड की मतगणना के नतीजे 16th Round तक कुल वोट एबीवीपी अध्यक्ष – आर्यन मान 21854 उपाध्यक्ष – गोविंद तंवर 16013 सचिव – कुणाल चौधरी 18506 संयुक्त सचिव- दीपिका झा 16501 एनएसयूआई अध्यक्ष – जोश्लिन नंदिता चौधरी 9973 उपाध्यक्ष – राहुल झांसला 22770 सचिव – कबीर 12419 संयुक्त सचिव- लवकुश भड़ाना 13996 आईसा -एसएफआई अंजलि -4414 सोहन -3185 अभिनंदना -7672 अभिषेक -6439  

e-KYC अनिवार्य: 30 सितंबर डेडलाइन, छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों की सैलरी रुकने का खतरा

रायपुर  प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत 60 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने अब तक केवायसी (नो योर कस्टमर) अपडेट नहीं कराया है। वित्त विभाग ने इस संबंध में सख्त रुख अपनाते हुए अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। तय समय-सीमा में अपडेट नहीं कराने पर संबंधित कर्मचारियों की सैलरी रुक सकती है। वित्त विभाग की ओर से सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की केवायसी अपडेट कराकर उसकी जानकारी समय पर संबंधित ट्रेजरी कार्यालय को भेजें। साथ ही सभी कर्मचारियों से समय रहते केवायसी प्रक्रिया पूरी कराने की अपील की गई है, ताकि सैलरी भुगतान में किसी प्रकार की बाधा न आए। गौरतलब है कि केवायसी अपडेट करने के लिए कर्मचारियों को पहले 24 अप्रैल तक का समय दिया गया था। इसके बाद कोष एवं लेखा संचालनालय ने 15 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी थी। बावजूद इसके अब तक सिर्फ 35 से 40 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही प्रक्रिया पूरी की है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय रहते केवायसी नहीं कराए जाने पर संबंधित कर्मियों के वेतन भुगतान में रुकावट आ सकती है। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे इस कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण कराएं। प्रदेश के सभी जिलों में बनेगा मॉडल स्कूल प्रदेश के सभी जिलों में माडल स्कूल बनेगा। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जिला शिक्षा अधिकारियों से 19 दिन के भीतर सूची मंगाई है। गुरुवार को मंत्रालय में मंत्री यादव ने समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने माडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। माडल स्कूल स्थापित करने योग्य स्कूलों की जानकारी 10 दिन में संचालनालय को प्रस्तुत की जाए। शिक्षा मंत्री ने कहा डीएवी, इग्नाइट और पीएमश्री विद्यालयों को माडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव रेणु जी पिल्ले, स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी एवं प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा संजीव झा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में भी शुरू होगी वोटर लिस्ट की जांच प्रक्रिया (SIR), BLO को मिल रही ट्रेनिंग

जगदलपुर  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। एसआइआर कोई नया प्रविधान नहीं है। पहले भी ऐसा किया जा चुका है। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद छत्तीसगढ़ में पहले विधानसभा चुनाव 2003 के पूर्व मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। बता दें कि 22 वर्ष बाद इस साल दोबारा एसआइआर प्रस्तावित है। यहां बस्तर में भी इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। हालांकि भारत निर्वाचन आयोग ने अभी इसके लिए कार्यक्रम विवरण जारी नहीं किया है। निर्वाचन आयोग से मिले दिशा निर्देशों के अनुसार हाल ही में बूथ लेवल आफिसर्स (बीएलओ) को पहले चरण का प्रशिक्षण दिया गया है। बस्तर जिले में 783 मतदान केंद्र और इतने की बूथ लेवल आफिसर्स हैं जो इस कार्य को करेंगे। जिले में साढ़े छह लाख से अधिक मतदाता हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय में कार्यरत रहे कुछ पुराने कर्मचारियों से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि एसआइआर सामान्य प्रक्रिया है और पहले भी हो चुकी है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए दो प्रविधान है। विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआइआर और दूसरा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण। 2003 में विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। इसके बाद प्रति वर्ष और विशेषकर विधानसभा, लोकसभा चुनाव से पहले विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान चलाकर मतदाता सूची को अपडेट किया जाता रहा है। इसके तहत नाम जोड़ने, विलोपित करने, निवास पता की जानकारी परिवर्तित करने आदि किया जाता है। विशेष गहन पुनरीक्षण में एक-एक मतदाता का नए सिरे से दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर सत्यापन का प्रविधान है। इससे गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले बाहर हो जाएंगे। चुनाव कार्यालय में लंबे समय तक कार्य कर चुके सेवा निवृत कर्मचारियों-अधिकारियों की माने तो पांच वर्ष में एक बार एसआइआर जरूर होना चाहिए। 2003 और 2025 की सूची की जांच होगी बताया गया कि एसआइआर में 2003 और 2025 की मतदाता सूची की जांच की जाएगी। प्रशिक्षण में बीएलओ को एक प्रपत्र दिया गया है। जिसमें ऐसे मतदाता जिनका नाम दोनों मतदाता सूची में हैं उनकी सूची तैयार की जाएगी। ऐसे मतदाता जिनका नाम 2025 की मतदाता सूची में हैं लेकिन 2003 की सूची में नहीं है उनकी पहचान की जाएगी। 2025 की सूची में शामिल ऐसे मतदाता जिनके माता-पिता में किसी का भी नाम 2003 की सूची में शामिल है उनकी सूची भी तैयार की जाएगी। ऐसे मतदाताओं के साथ कोई दिक्कत नहीं है उनका सत्यापन बीएलओ सूची तैयार करने के बाद घर-घर जाकर करेंगे। ऐसे मतदाता जो 2003 के बाद जुड़े हैं और उनके माता-पिता में किसी का नाम पुरानी सूची में नहीं है उन्हें अपनी यहां का निवासी होने और पहचान स्थापित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करना होगा।

Gold Rate में बड़ी गिरावट की संभावना, निवेशकों के लिए अलर्ट — सोना फिलहाल न खरीदें

नई दिल्ली चंद दिन के बाद से देश में फेस्टिव सीजन (Festive Season) का आगाज हो जाएगा. दुर्गा पूजा के बाद दिवाली और धनतेरस है, इस मौके पर देश में सोना-चांदी खरीदने की परंपरा रही है. लेकिन इस बार त्योहार थोड़ी फीकी रह सकती है, क्योंकि सोना-चांदी इतना महंगा हो चुका है कि भाव सुनते ही लोग सोच में पड़ जाते हैं.  दरअसल, पिछले एक साल में सोना (Gold) करीब 46% महंगा हो चुका है. हैरानी तो इस बात होती है कि इसी साल यानी 2025 में ही सोने की कीमत 40 फीसदी तक बढ़ चुकी है. एक साल पहले 24K कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत करीब 75 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 1,10,000 रुपये को पार कर चुकी है.  फेस्टिव सीजन में खरीदने वालों के अलावा वो लोग भी परेशान हैं, जिनके यहां इस साल शादी है, बिना ज्वेलरी की शादी कैसे हो सकती है, और ज्वेलरी की कीमत इतनी बढ़ चुकी है कि आम परिवार का बजट बिगड़ता जा रहा है. क्योंकि एक साल में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 35000 रुपये उछल चुका है.  एक साल में सोना कहां के कहां (24 कैरेट)  सितंबर-2024         सितंबर- 2025  ₹75,930               ₹1,11,000 इस बीच पिछले दो दिनों से सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. गुरुवार को 24 कैरेट गोल्ड करीब 500 रुपये सस्ता हुआ है. IBJA के मुताबिक सोने का भाव गुरुवार को 1,09,264 रुपये प्रति 10 ग्राम है. जबकि बुधवार को भाव 1,09,733 रुपये प्रति 10 ग्राम था. इससे पहले मंगलवार को भाव 1,10,869 रुपये प्रति 10 ग्राम था, बता दें, यही सोने का ऑलटाइम हाई रेट भी है. यानी मंगलवार के मुकाबले सोना 1600 रुपये से ज्यादा सस्ता हो चुका है. सोने के भाव में बड़ी गिरावट संभव वहीं बुधवार के मुकाबले चांदी में गुरुवार को मामूली गिरावट देखने को मिल रही है. 17 सितंबर को एक किलो चांदी का भाव 125756 रुपये था, जो कि गुरुवार को गिरकर 125563 रुपये पर पहुंच गया. जबकि चांदी 16 सितंबर को चांदी का भाव बढ़कर 129300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था. यानी दो दिन में चांदी की कीमत लगभग 3500 रुपये घट चुकी है.  दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में कटौती कर दी है, फेड ने बेंचमार्क दर को 4.25% से घटाकर 4.0% कर दिया है. इस फैसले से सोने-चांदी की कीमतों पर असर पड़ा है, और भाव टूटने लगा है. टैरिफ का असर आभूषण उद्योग पर भी पड़ रहा है. ये इससे भारतीय निर्यात प्रभावित हुए हैं, खासकर अमेरिका होने वाला कारोबार.  लेकिन अब जिस तरह ब्याज दरों में कटौती की गई और आगे भी कटौती के संकेत दिए गए हैं, इससे सोने-चांदी पर दबाव बढ़ सकता है, साथ ही टैरिफ को लेकर भी धीरे-धीरे बीच का रास्ता निकल रहा है. जानकारों की मानें तो सोने-चांदी में फिलहाल मुनाफावसूली का भी वक्त है, क्योंकि इस साल सोने में एकतरफा रैली देखने को मिली है. सोने में कीमतों में क्यों आ सकती हैंं गिरावट? अगर भारत के परदृश्य से देखें तो टैरिफ के मोर्चे पर राहत और रुपया डॉलर की तुलना में मजबूत होने पर सोने की कीमतों को कुछ हद तक बढ़ने से रोका जा सकता है. जानकार मानते हैं कि फेस्टिव सीजन में भले ही कीमतों में और हल्की बढ़त देखने को मिल जाए, लेकिन सोने-चांदी में करक्शन आ सकता है. यहां से सोने की कीमत 10 फीसदी तक गिर सकती है. यानी सोने भाव फिर से 1 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकता है. ये करक्शन लंबा भी चल सकता है, संभव भी ये है कि लंबे समय तक सोने का भाव एक दायरे में बना रहे. जबकि कुछ एक्सपर्ट्स तो शॉर्ट टर्म में ही 5-6 फीसदी गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं. हालांकि चांदी में बड़ी गिरावट की संभावना कम है.    अनुमान है कि फेस्टिव सीजन के दौरान भारत में सोने की कीमतें ₹1,10,000 से ₹1,12,000 प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकती हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत प्रति औंस US$ 3600 से US$ 3700 के बीच होने की भविष्यवाणी की जा रही है. लेकिन अगर ग्लोबल तनाव कम हुए तो फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रति औंस US$ 3300 तक फिसल सकता है, यानी 10% करक्शन संभव है. इस हिसाब में भारत में सोने की कीमत गिरकर 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे भी फिसल सकती है. हालांकि ग्लोबल कारोबार में टेंशन बढ़ने पर भाव में यहां से भी उछाल देखने को मिल सकता है.  एक्सपर्ट्स ने बताए- कब खरीदें सोना दरअसल इस दौर में करीब-करीब हर मध्यमवर्गीय परिवार का एक ही सवाल है कि सोना-चांदी अभी खरीदा जाए, या फिर यहां से गिरावट की कोई उम्मीद है? इसके जवाब में अधिकतक एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं, कि आंख मूंदकर फिलहाल सोने-चांदी में निवेश से बचें, क्योंकि भाव बहुत बढ़ चुका है, गिरावट की ज्यादा आशंका है. ऐसे में अगर आप मौजूदा भाव में निवेश करते हैं तो फिर आगे गिरावट आने पर पछताना पड़ सकता है. इसलिए अभी कम से कम 3-6 महीने इंतजार करें. अगर आपने खरीदने का मन बना ही लिया है, तो फिर थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करें. सोना महंगा होने पर अब क्या विकल्प?    बता दें, सोने की कीमतों में उछाल का सीधा असर ज्वेलरी बाजार पर भी दिख रहा है. ज्वेलर्स की बिक्री में गिरावट आई है और कई दुकानदार किस्तों पर गहने देने की योजना ला रहे हैं. यही नहीं, भारी नेकलेस और कंगन की जगह अब लोग हल्के डिजाइन चुन रहे हैं. छोटे चेन, स्लीक रिंग्स और मिनिमल ब्रेसलेट्स की डिमांड बढ़ी है. इससे सोना भी खरीदा जाता है और बजट पर बोझ भी कम पड़ता है. इसके अलावा पहले लोग ज्यादातर 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड खरीदते थे, लेकिन अब 18K और 14K के गहने बनवा रहे हैं. इससे सोना सस्ता भी पड़ रहा है और फैशनेबल डिजाइनों की भी बड़ी रेंज मिलती है. साथ ही सोने के विकल्प के तौर पर लोग अब सिल्वर और प्लैटिनम ज्वेलरी की तरफ रुख कर रहे हैं.

गरबा में गैर-हिंदू युवाओं की एंट्री पर सख्त रामेश्वर शर्मा, कहा – अगर आना है तो माता-पिता को भी लाएं साथ

भोपाल  मध्य प्रदेश में नवरात्रों से पहले अब गरबा की 'सनातनी क्रांति' शुरू हो गई है. गरबा उत्सव कार्यक्रमों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को बेन करने को लेकर हिंदू संगठन से लेकर विधायक तक सामने आ गए है. हिंदू संगठनों ने गरबा संचालकों से कहा है गरबा पंडाल के बाहर वराह अवतार की फोटो लगाकर उसकी पूजन कर ही लोगों को प्रवेश दें जिससे गैर हिंदू प्रवेश न कर सके. दरअसल, प्रदेश में 'लव जिहाद', 'लैंड जिहाद', 'धर्म जिहाद' की खबरों के बीच अब हिंदू संगठन और भाजपा के विधायक 'गरबा जिहाद' रोकने की बात कर रहे हैं. नवरात्रि के पहले ही गरबा पंडालों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर एमपी में अब जमकर राजनीति शुरू हो गई है. हिंदू संगठन सख्त विरोध कर रहे हैं किसी भी कीमत पर गैर हिंदुओं को पंडालों में प्रवेश न दिया जाए नवरात्रि और गरबा में दूसरे धर्मों के लोगों की एंट्री को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, ''गरबे में गैर हिंदुओं का प्रवेश नहीं होना चाहिए, अगर आना है तो अपनी मां को अपनी अम्मी, बहन, मौसी, अब्बा और चच्चा को लेकर आओ. देवी का प्रसाद खाओ. आशीर्वाद लो और हिंदू धर्म स्वीकार करो.'' नवरात्रि का पर्व आने वाला है. 22 सितंबर से यह पर्व शुरू होगा. हिंदू मां दुर्गा के 9 रूपों की उपासना करते हैं. नवरात्रि पर गरबे का बड़ा महत्व होता है. जगह-जगह गरबा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है लेकिन राजधानी भोपाल में इसपर एक अलग ही तरह का विवाद छिड़ा हुआ है. गरबे में भाईजान की एंट्री को लेकर एक तरफ हिंदू संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि कोई भी गैर-हिंदू गरबे में दिखाई दिया, तो उसे बजरंग दल की शैली में जवाब दिया जाएगा. वहीं भाजपा नेता भी अलग-अलग बयान दे रहे हैं. भाजपा विधायक ऊषा ठाकुर ने कहा कि यह सनातन का पर्व है. मां शक्ति की उपासना की जाती है. इस्लाम को मानने वाले मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते हैं. वे लोग हमारे त्योहारों में आते ही क्यों हैं और अगर आना हैं, तो सनातन अपना लो, जनेऊ धारण करो. इतना ही नहीं, भाजपा विधायक ने आगे कहा कि चार-पांच पीढ़ी ऊपर देखेंगे, तो इनके पूर्वज भी सनातनी ही निकलेंगे. 'मुसलमान गरबे में जाता ही क्यों है?' वहीं, 'भाईजान' की एंट्री पर पाबंदी लगाने के बयानों के बाद कांग्रेस के मुस्लिम विधायक भी सामने आए. भोपाल मध्य सीट से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा, ''मुसलमान गरबे में जाता ही क्यों है? उसे नहीं जाना चाहिए. बाकी बीजेपी को हर त्योहार से पहले विवाद खड़ा करने की आदत है.  नवरात्रि से पहले मध्य प्रदेश की सियासत में गरबा पर सियासी संग्राम छिड़ गया है. बीजेपी नेताओं ने गरबा पंडालों में दूसरे धर्म के लोगों पर बैन लगाने की मांग की है. भोपाल से बीजेपी सांसद आलोक शर्मा ने पंडालों में भाईजान की एंट्री पर बैन लगाने की बात कही, तो इंदौर से बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला ने कहा कि आयोजक गरबा पंडालों में एंट्री से पहले आईडी चेक करें. विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि नवरात्रि पर घर वापसी अभियान चला रहे हैं. हम तो अब सनातन का प्रचार-प्रसार तेजी से बढ़ा रहे हैं. गरबे में कोई भी आए, आपत्ति नहीं है. जो लोग ईसाई, मुसलमान बन गए हैं, अगर वे सनातन धर्म में वापसी करते हैं, तो कोई दिक्कत नहीं है. अकेले लड़के क्यों आ रहे हैं, अपनी बहन, अब्बा-अम्मी को भी लेकर आएं. वे आएं, उन्हें गंगाजल पिलवाएंगे. जय श्रीराम, जय गुरुनानक के नारे लगवाएंगे. दुर्गा जी की आरती करवाएंगे. तिलक लगाएंगे. कब तक दूर-दूर रहेंगे, आ जाएं सभी लोग, सनातन में उनका स्वागत है. वहीं गरबा को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि बीजेपी नेता त्योहारों से पहले जान-बूझकर इस तरह की बयानबाजी करते हैं. भाजपा के लोग माहौल खराब करने के लिए बयानबाजी करते हैं. जब मुस्लिम गरबे में जाता ही नहीं है, उसका गरबे से कोई लेना-देना ही नहीं है, नवरात्रि मनाता ही नहीं है, तो फिर क्यों हम धर्म परिवर्तन कर लें. बीजेपी अभियान चलाए, परिचय पत्र चेक करें, आधार चेक करें. सरकार आपकी है, कानून आपका है, अगर कोई जान-बूझकर ऐसा करता है और गरबा कार्यक्रम में घुसता है, तो उसपर कार्रवाई कीजिए. माहौल बनाने के लिए इस तरह की बयानबाजी की जाती है. हमारा गरबे से कोई लेना-देना नहीं है. मुस्लिम समाज को कोई समिति आमंत्रण नहीं भेजती है. मुस्लिमों को भी गरबे में नहीं जाना चाहिए. जबा मना है, तो नहीं जाना चाहिए. बताते चलें कि खंडवा में इस बार नवरात्रि पर गरबा कार्यक्रमों में न फिल्मी गाने बजेंगे और न ही महिलाएं बैकलेस ड्रेस पहन सकती हैं. गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर भी बैन लगाया गया है. आयोजक खुद सुरक्षा इंतजाम करेंगे. संस्कृति, देशभक्ति और नारी शक्ति पर फोकस रहेगा. हिंदू संगठनों ने कहा कि अगर सनातन धर्म के त्योहारों का मजाक बना, तो जिसकी करनी होगी, वही भुगतेगा.  

ED का खुलासा: ‘BIG BOSS’ वॉट्सएप ग्रुप के जरिए घोटालों की प्लानिंग, चैतन्य के लिए पप्पू और सौम्या के लिए दीपेंद्र पहुंचाते थे पैसा

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ताजा चार्जशीट ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है। कोर्ट में पेश चार्जशीट में दावा किया गया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 'बिग बास ग्रुप' नामक एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसमें बड़े अधिकारी, कारोबारी, नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल और उनके करीबी मित्र शामिल थे। यह नेटवर्क शराब, कोयला और ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसे अवैध कारोबार से अरबों रुपये की कमाई के साथ-साथ अधिकारियों के खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र रचता था। चार्जशीट में दर्ज चैट्स और दस्तावेजों से ईडी का कहना है कि यह गैंग फिल्मी स्क्रिप्ट और मनगढ़ंत कहानियों का सहारा लेकर अफसरों की छवि को खराब करने में लगा था। खासकर एक विवादित आइपीएस की 'कल्पनाओं पर आधारित डायरी' को हथियार बनाकर ईमानदार अधिकारियों के खिलाफ अफवाहें फैलाकर उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की गई। इससे कई अधिकारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हुए। वॉट्सएप ग्रुप में शराब घोटाले से जुड़ी चर्चा और पैसों के लेन-देन की बातें हैं। ED ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रही सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट के लोगों से बातचीत के दौरान IAS अफसरों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करती थी, उन्हें गाली देती थी। इसके साथ ही उन्होंने कई बार सिंडिकेट के कुछ सदस्यों काे हिसाब किताब की जानकारी नहीं देने की बात भी लिखी है। चैट में इस बात का भी जिक्र है कि चैतन्य के लिए पप्पू बंसल, सौम्या के लिए दीपेंद्र कुरियर बॉय का काम करता था, ये उन्हें पैसे पहुंचाते थे, जिसे वह डिलीवर कहकर बात करते थे। चैट्स से खुला सिंडिकेट का राज, चैतन्य का नंबर बिट्टू नाम से सेव था शराब घोटाले में गिरफ्तार अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच में कई चौंकाने वाले राजफाश हुए हैं। अनवर के मोबाइल में चैतन्य बघेल का नंबर 'बिट्टू' नाम से सेव था, जिसमें पैसों की डीलिंग से लेकर नकली होलोग्राम बनाने तक की बातचीत सामने आई है। ईडी की चार्जशीट के अनुसार, ‘बिग बॉस’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप में चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर, सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा और पुष्पक जैसे प्रमुख सदस्य जुड़े थे। इस ग्रुप के जरिए शराब घोटाले की प्लानिंग, मनी लाड्रिंग, रकम के वितरण और हेराफेरी की सूचनाएं साझा की जाती थी। चैट्स में कब, किसे कॉल किया गया और कितनी देर बातचीत हुई, इसका पूरा विवरण भी चार्जशीट में शामिल है। 1000 करोड़ का कैश मैनेज किया भिलाई के शराब कारोबारी पप्पू बंसल ने ईडी की पूछताछ में बताया है कि उसने चैतन्य के साथ मिलकर 1000 करोड़ से अधिक कैश मैनेज किया। यह राशि अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा होते हुए कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई गई। बंसल ने यह भी माना कि उसे तीन महीने में 136 करोड़ रुपये मिले थे। पप्पू बंसल ने खोला राज दुर्ग-भिलाई के शराब कारोबारी और भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने माना कि उन्होंने और चैतन्य ने मिलकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश को मैनेज किया। बंसल ने बताया कि यह रकम अनवर ढेबर से दीपेंद्र चावड़ा और फिर कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई जाती थी। बंसल ने यह भी स्वीकार किया कि तीन महीने की अवधि में ही उन्हें 136 करोड़ रुपए मिले। रियल एस्टेट में लगाया ब्लैक मनी ED ने आरोप लगाया कि चैतन्य ने अपने विठ्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट और बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में शराब घोटाले की रकम निवेश की। असल खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, लेकिन दस्तावेजों में मात्र 7.14 करोड़ दिखाया गया। वहीं डिजिटल डिवाइस की जांच से पता चला कि एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश में भुगतान किया गया, जिसका हिसाब रिकॉर्ड में नहीं था। इसी प्रोजेक्ट में त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने 19 फ्लैट खरीदे, लेकिन भुगतान खुद किया। ED के मुताबिक यह सब ब्लैक मनी को सफेद दिखाने के लिए किया गया। मोबाइल चैट्स से खुलासा ED ने जब अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच की तो चौंकाने वाले चैट्स मिले। अनवर के मोबाइल में चैतन्य का नंबर ‘बिट्टू’ नाम से सेव था। इसमें पैसों की डीलिंग और नकली होलोग्राम बनाने तक की चर्चा थी।

भूकंप के तेज झटकों से दहला रूस, रिक्टर स्केल पर 7.8 की तीव्रता दर्ज

मॉस्को  रूस के पूर्वी क्षेत्र कामचटका में शुक्रवार को 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। इस शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि, भूकंप की वजह से अभी तक किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है। भूकंप का केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। मुख्य भूकंप के बाद 6 घंटे तक झटकों का सिलसिला जारी रहा। USGS के आंकड़ों के अनुसार, 30 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिनकी तीव्रता 4.4 से 5.8 के बीच रही। इन झटकों ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी और कई लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में चले गए।। क्षेत्रीय गवर्नर व्लादिमीर सोलोदोव ने कहा कि आपातकालीन टीमें हाई अलर्ट पर हैं। भूकंप के तेज झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल है। सोशल मीडिया पर भूकंप के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें फर्नीचर, कारें, लाइट्स तेजी के साथ हिलते दिखाई दे रहे हैं। आफ्टरशॉक्स के सिलसिले     12:28 AM – 7.8 (मुख्य झटका)     12:38 AM – 5.8     12:56 AM – 5.6     1:33 AM – 5.6     3:07 AM – 5.7     5:52 AM – 5.4 इसके अलावा, दर्जनों झटके 4.4 से 5.4 तीव्रता के बीच रहे। सुनामी का अलर्ट जारी भूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर आवासीय भवनों और सार्वजनिक सुविधाओं का निरीक्षण शुरू कर दिया गया। कई तटीय क्षेत्रों में 0.5 मीटर से 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठने का अनुमान है। अधिकारियों ने निवासियों से तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की है। इससे पहले शनिवार (13 सितंबर) को भी कामचटका में 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी। 7.8 रही भूकंप की तीव्रता अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की मानें तो भूकंप का केंद्र कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट से के पास धरती से करीब 85 किलोमीटर नीचे था. तो वहीं दूसरे भूकंप का केंद्र धरती के नीचे 30 किलोमीटर नीचे था. रूस की स्टेट जियोफिजिकल सर्विस के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 7.8 रही और उसके बाद करीब 5 आफ्टरशॉक लगे. भूकंप के झटकों के तुरंत बाद अमेरिकी मौसम विभाग ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है. इसके साथ ही लोगों से समुद्री तटों से दूर रहने की अपील की है. क्यों कामचटका में आते हैं भूकंप? पेट्रोपावलोव्स्क-कमचाट्स्की दुनिया के सबसे भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में आता है. यहां प्रशांत प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेट आपस में टकराती हैं, जिसके चलते अक्सर भूकंप आते रहते हैं. एक सप्ताह पहले शनिवार को इसी इलाके में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था. हालांकि, तब प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) ने कहा था कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है. लगातार खतरे में कामचटका लगातार आने वाले तेज भूकंप यह दिखाते हैं कि रूस का यह इलाका हमेशा खतरे में रहता है. यहां रहने वाले लोग हर बार नई दहशत के बीच जीते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार नज़र बनाए हुए हैं. इससे पहले बुधवार को भी नेपाल में भूकंप आया था. तब 4 की तीव्रता वाले भूकंप से देश हिला था. भूकंप की गहराई 10 किमी थी. एक हफ्ते में तीसरी बार भूकंप के झटके रूस के कामचटका में पिछले एक महीने के भीतर कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. बीते एक सप्ताह में ये तीसरी बार है कि जब कामचटका की धरती भूकंप के कारण कांपी है. शुक्रवार रात को यहां 2 बार झटके महसूस किए गए हैं. इससे पहले, 29 जुलाई 2025 को कामचटका तट के पास 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था. इसे पिछले एक दशक के सबसे बड़े भूकंपों में गिना गया. इस भूकंप के बाद कई देशों में अलर्ट जारी किया गया था. भूकंप के बाद समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगी थी. हालांकि मौसम विभाग के अलर्ट के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था.

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 26 सितंबर को रूस–इंडिया बिजनेस डायलॉग 2025 का होगा आयोजन

यूपीआईटीएस 2025: रूस के साथ नए व्यापारिक अवसरों की मिलेगी सौगात  यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 26 सितंबर को रूस–इंडिया बिजनेस डायलॉग 2025 का होगा आयोजन इस वर्ष पार्टनर कंट्री के रूप में यूपीआईटीएस में सम्मिलित हो रहा है रूस  भारत और रूस के शीर्ष उद्योगपतियों, वित्तीय संस्थानों, बीमा कंपनियों, शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों की होगी भागीदारी  संवाद में दोनों देशों के सरकारी नीति-निर्माताओं के द्वारा तय होगी भविष्य की नीति  भारत और रूस के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य  तकनीकी सहयोग और संयुक्त उपक्रमों को प्रोत्साहित करने पर भी होगा जोर  बैंकिंग एवं निवेश, बीमा, शिक्षा और सामान्य व्यापार जैसे क्षेत्रों पर होगी विशेष चर्चा  तकनीकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और नए निवेश मॉडल पर भी किया जाएगा विचार  दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध होंगे मजबूत, प्रदेश के उद्योग और कारोबारी भी होंगे लाभान्वित  योगी सरकार की निवेशोन्मुख नीतियों से यूपी बना वैश्विक आर्थिक साझेदारी का केन्द्र लखनऊ  उत्तर प्रदेश की धरती एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय निवेश और साझेदारी का मंच बनने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल की वजह से प्रदेश वैश्विक स्तर पर तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। इसी कड़ी में आगामी रूस–इंडिया बिजनेस डायलॉग का आयोजन 26 सितम्बर 2025 को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS 2025) के दौरान इंडिया एक्सपोज़िशन मार्ट, ग्रेटर नोएडा में किया जाएगा। यह संवाद सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। विशेष बात यह है कि इस वर्ष रूस पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल हो रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश और भारत को नए व्यापारिक अवसरों की बड़ी सौगात मिलेगी। नीति-निर्माताओं की होगी भागीदारी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने में जुटे हैं। उनकी सरकार द्वारा लागू की गई ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों, पारदर्शी नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने विदेशी निवेशकों का विश्वास जीता है। यही कारण है कि आज यूपी में बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक आयोजन हो रहे हैं। रूस–इंडिया बिजनेस डायलॉग इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है, जो प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। इस संवाद में भारत और रूस के शीर्ष उद्योगपतियों, वित्तीय संस्थानों, बीमा कंपनियों, शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों और दोनों देशों के सरकारी नीति-निर्माताओं की भागीदारी होगी।  और बढ़ेंगे रोजगार और विकास के अवसर  कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत और रूस के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाना, तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना और संयुक्त उपक्रमों को प्रोत्साहित करना है। बैंकिंग एवं निवेश, बीमा, शिक्षा और सामान्य व्यापार जैसे क्षेत्रों पर विशेष चर्चा होगी। इससे दोनों देशों के बीच न केवल आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि प्रदेश के उद्योग और कारोबारी भी लाभान्वित होंगे। संवाद में तकनीकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और नए निवेश मॉडल पर भी विचार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और भारत की साझेदारी शिक्षा, बीमा और निवेश क्षेत्रों में नई संभावनाओं को जन्म देगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश में चल रही औद्योगिक नीतियों और मेगा प्रोजेक्ट्स में रूस की कंपनियों की भागीदारी से रोजगार और विकास के अवसर और बढ़ेंगे। आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई गति  इस आयोजन से उम्मीद है कि भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्तों को नई गति मिलेगी और उत्तर प्रदेश एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विज़न है कि प्रदेश न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निवेशकों के लिए पहला विकल्प बने। यह बिजनेस डायलॉग उसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।