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एमपी में शाकाहारी-मांसाहारी होटलों की होगी अलग पहचान, सरकार लाई नया प्लान

भोपाल  शाकाहारी व मांसाहारी भोजन परोसने वाले होटलों और उनके मालिकों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने मध्य प्रदेश सरकार ऐसी व्यवस्था करवाने की तैयारी कर रही है ताकि बाहर से ही पता चल जाए कि होटल में भोजन शाकाहारी है या मांसाहारी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के एक्ट में ऐसा प्रविधान करवाने का प्रयास है कि होटल-रेस्टोरेंट के बाहर लगने वाले बोर्ड में पूर्णतः शाकाहारी के लिए हरा गोल निशान और पूर्णतः मांसाहारी के लिए लाल गोल निशान लगाया जाए। क्या है प्रस्ताव? खाने के पैकेट पर भी इस तरह के निशान लगाए जाते हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ लेता है। होटल-रेस्टोरेंट में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन मिलता है तो आधा हरा और आधा लाल निशान रखने का भी प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त होटल चलाने का लाइसेंस लेने वाले का नाम भी बोर्ड पर लिखना अनिवार्य करवाने का सुझाव दिया गया है। मालिक का नाम भी अनिवार्य अब एफएसएसएआइ इसका परीक्षण कर ड्राफ्ट जारी करेगा। इसके बाद एफएसएसएआइ के एक्ट में इसे लेकर संशोधन की उम्मीद है। संशोधन होने पर यह व्यवस्था मध्य प्रदेश ही नहीं, देशभर में लागू करना अनिवार्य हो जाएगी। इसके अतिरिक्त कई बार होटल के बोर्ड से उसके मालिक का पता नहीं चलता। इस तरह का मामला तब चर्चा में आया था जब कावड़ यात्रा के दौरान इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में मेरठ के आसपास कुछ होटलों के बाहर लगे बोर्ड में होटलों के नाम हिंदू रीति-रिवाज वाले थे पर उनके मालिक अन्य समुदाय के थे। इसके बाद उप्र सरकार ने दुकान, रेस्टोरेंट पर मालिक का नाम लिखने का आदेश दिया था। सरकार का प्लान प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि सरकार यह प्रयास कर रही है कि खाने के पैकेट की तरह होटलों के बोर्ड में भी हरा और लाल निशान रहे। यह कोशिश भी है कि विभिन्न कंपनियों द्वारा घरों में खाने-पीने की चीजें पहुंचाने वाले भी उसी तरह का भोजन करने वाले हों यानी शाकाहारी खाद्य सामग्री पहुंचाने वाले भी शाकाहारी हों।  

इजरायल का UN पर निशाना, गाजा रिपोर्ट को खारिज किया; एक दिन में 150 हमले, हालात बिगड़े

तेल अवीव संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट को इजरायल ने खारिज कर दिया है, जिसमें 'फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार' का आरोप लगाया गया था। इजरायल ने इसे 'विकृत और झूठा' करार दिया और लेखकों को 'हमास प्रॉक्सी' बताकर खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र जांच आयोग की 72 पृष्ठों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल गाजा में नरसंहारकारी कृत्य कर रहा है। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से हमास के झूठ पर आधारित है, जिसे दूसरों ने दोहराया और प्रचारित किया। इजरायल इस विकृत और झूठी रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से खारिज करता है और इस जांच आयोग को तत्काल समाप्त करने की मांग करता है। मंत्रालय ने आयोग के लेखकों पर यहूदी-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि तीनों सदस्यों ने जुलाई में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी, जबकि अध्यक्ष नवी पिल्लै का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इजरायल विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि इजरायल नागरिक हताहतों से बचने की कोशिश करता है और हमास पर गैर-लड़ाकों को खतरे में डालने का आरोप लगाया। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट के झूठ के विपरीत, हमास ने ही इजरायल में नरसंहार की कोशिश की, 1200 लोगों की हत्या की, महिलाओं के साथ बलात्कार किया, परिवारों को जिंदा जलाया और हर यहूदी को मारने के अपने लक्ष्य की खुलेआम घोषणा की। इजरायली विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को झूठे दावों की पुनरावृत्ति बताकर खारिज किया, जिन्हें स्वतंत्र शोध, जिसमें सितंबर की शुरुआत में जारी एक अध्ययन शामिल है, पहले ही खारिज किया जा चुका है। बार-इलान विश्वविद्यालय के बेगिन-सादात सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि नरसंहार के दावे त्रुटिपूर्ण आंकड़ों पर आधारित हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करते हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र आयोग ने दावा किया कि 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजरायल में हुए हमले क्रूर युद्ध अपराध थे, लेकिन इनसे इजरायल के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं था। इजरायल अपनी आबादी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, लेकिन इसके तरीकों में यह तथ्य ध्यान में रखना होगा कि उसने बलपूर्वक फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्जा किया है और अवैध रूप से बस रहा है, जिससे फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का हनन हो रहा है। गाजा में धमाकों के बीच गुजरी रात; 4 लाख भागे इजरायल की ओर से गाजा पर लगातार भीषण हमले जारी हैं।  रात को इजरायल ने कुल 50 हमले गाजा पर किए हैं। इसके साथ ही बीते एक दिन के अंदर इजरायल ने गाजा पर 150 से ज्यादा हमले किए हैं। हालात ऐसे हैं कि गाजा से कुछ दिनों के अंदर ही 4 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। गाजा की आबादी 10 लाख के करीब थी और वहां से लगभग 4 लाख लोग पलायन कर गए हैं। स्पष्ट है कि करीब 40 फीसदी आबादी गाजा से पलायन कर चुकी है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बीते दो दिनों के अंदर ही 150 ठिकानों पर गाजा में हमले किए गए हैं। बीती रात में ही 12 लोगों की इजरायली हमलों से मौत हो गई है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने अपने हमलों में सुरंगों को टारगेट किया है तो वहीं कई इमारतों को भी निशाना बनाया है। इजरायल का कहना है कि इन इमारतों में हमास के आतंकी छिपे हुए थे। इजरायली सेना ने कहा कि हमारे सुरक्षा बल लगातार आतंकियों को खत्म कर रहे हैं। अब तक आतंकी संगठन के कई ढांचों को ध्वस्त किया जा चुका है। गाजा को हमास का शक्ति केंद्र माना जाता है। ऐसे में इजरायल का कहना है कि हमास को खत्म करने के लिए गाजा को टारगेट करना होगा। सोमवार से ही इजरायल की सेना ने गाजा पर जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं। इससे पहले बीते सप्ताह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला कर दिया था। इस हमले के बाद से मुसलमान देशों में गुस्सा है। मंगलवार को दोहा में 60 मुसलमान देशों की मीटिंग थी, जिसमें इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। इस मीटिंग में आने वाले देशों में पाकिस्तान, सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और बहरीन जैसे मुस्लिम देश शामिल थे। इस दौरान मौजूद नेताओं ने कहा कि इजरायल के खिलाफ एकजुट होना होगा। यही नहीं पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों ने तो इस्लामिक नाटो की स्थापना की भी बात की। हालांकि किसी चीज पर सहमति नहीं बनी है बल्कि एक निंदा प्रस्ताव ही पारित किया जा सका। आरोपों पर नई बहस आयोग के तीन सदस्यों (नवी पिल्लै, क्रिस सिडोटी और मिलून कोठारी) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इजरायल-विरोधी पूर्वाग्रह के आरोपों पर नई बहस छेड़ दी है। 2014 में अमेरिकी कांग्रेस के 100 से अधिक सदस्यों ने उनके नेतृत्व की निंदा करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कहा गया कि परिषद इजरायल के प्रति पूर्वाग्रह का पैटर्न दर्शाता है और इसे मानवाधिकार संगठन के रूप में गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। कोठारी 2022 में विवाद के केंद्र में थे, जब उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया 'काफी हद तक यहूदी लॉबी द्वारा नियंत्रित' है और इजरायल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर सवाल उठाया। उनके बयान की यहूदी-विरोधी बताकर निंदा की गई। पिल्लै ने इस प्रतिक्रिया को 'दिखावा' बताकर खारिज किया और यहूदी-विरोधी चिंताओं को 'झूठ' करार दिया। सिडोटी की भी यहूदी समूहों पर यहूदी-विरोधी आरोपों को 'शादी में चावल की तरह' उछालने के लिए आलोचना हुई। 2021 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा स्थापित इस आयोग को इजरायल और फिलिस्तीनी पक्षों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघनों की जांच का कार्य सौंपा गया था। लेकिन इसके निष्कर्षों ने मुख्य रूप से इजरायल को निशाना बनाया, जिसके कारण यरुशलम, दुनिया भर के यहूदी संगठनों और कई पश्चिमी सरकारों ने इसकी निंदा की। यह आयोग अभूतपूर्व था, क्योंकि इसकी कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं थी और यह परिषद की सर्वोच्च स्तर की जांच थी।

शैंपू-साबुन पर GST घटा, डव-लाइफबॉय के नए रेट जारी – जानें कितनी होगी बचत

नई दिल्ली 22 सितंबर से लागू होने वाले नए जीएसटी रेट के चलते अब हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के कई पॉपुलर प्रॉडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। दरअसल, कंपनी ने अपने इन प्रॉडक्ट्स के प्राइस में बड़ी कटौती की है। डव शैंपू, किसान जैम, हॉर्लिक्स, लक्स साबुन और लाइफबॉय साबुन जैसे प्रॉडक्ट्स की प्राइस अब 15% तक कम हो जाएगी। 22 सितंबर से ये बदलाव वाले रेट लागू होंगे। बता दें कि हाल ही में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया था। सरकार द्वारा जीएसटी के मेथड को और भी सरल बनाने के लिए दो टैक्स स्लैब्स को इंट्रोड्यूस किया गया। पहले टैक्स स्लैब्स 5%, 12% और 18% के थे, लेकिन अब इन सभी को सिर्फ दो टैक्स स्लैब्स 5% और 18% में लाया गया। सस्ते होने वाले हैं डव शैंपू, हॉर्लिक्स और लाइफबॉय साबुन जैसे HUL के कई प्रोडक्ट्स, जानिए कितनी कम हो जाएगी कीमत ये प्रोडक्ट्स हो जाएंगे सस्ते जीएसटी में हुए इन बदलावों के चलते कई प्रॉडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। इनमें खास तौर पर फूड आइटम्स शामिल हैं। दूध, पनीर और जैम्स को जीएसटी से छूट मिली है, यानी इन पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि कुछ प्रॉडक्ट्स ऐसे हैं जिन्हें 5% टैक्स स्लैब में डाल दिया गया है। वहीं साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट जैसे प्रॉडक्ट्स पर लगने वाला 18% का टैक्स अब 5% कर दिया गया है। टैक्स कटौती से अब सीधा फायदा कंज्यूमर्स को पहुंचेगा। ऐसे में कई बड़ी कंपनियों के प्रॉडक्ट्स के रेट भी घट जाएंगे। 22 सितंबर से लागू होंगे नए रेट सरकार की ओर से 22 सितंबर से लागू होने वाले नए रेट के चलते कंपनियों को अपने पुराने बचे हुए स्टॉक की एमआरपी बदलने की इजाजत भी दी गई है। अब मैन्युफैक्चरर, पैकर्स और इंपोर्टर्स पुराने स्टॉक पर नई कीमतें स्टांप, स्टीकर या ऑनलाइन प्रिंटिंग से लगा सकेंगे, जिससे मैन्युफैक्चर का स्टॉक खराब नहीं होगा। हालांकि 31 दिसंबर 2025 तक पुराना स्टॉक खत्म करना जरूरी होगा। नई कीमतों के साथ कंपनियों को अब पुराना एमआरपी दिखाना भी जरूरी होगा। कंपनी ने ये क्यों किया? इसी महीने 3 सितंबर 2025 को GST काउंसिल की 56वीं मीटिंग हुई। इस मीटिंग में सरकार ने GST को सरल बनाने का फैसला लिया। पहले टैक्स स्लैब 5%, 12% और 18% के थे, लेकिन अब 12% वाला स्लैब हटा दिया गया। इससे सिर्फ दो स्लैब 5% और 18% बचे रहेंगे। कई फूड आइटम्स जैसे UHT मिल्क, पनीर और जैम्स को या तो GST से छूट मिल गई या फिर 5% टैक्स स्लैब में डाल दिया गया। इसके अलावा साबुन, शैम्पू और टूथ पेस्ट पर GST को 18% से घटाकर 5% कर दिया है। सरकार ने साफ कहा कि ये टैक्स कटौती का फायदा कंज्यूमर्स तक पहुंचना है। इसी के चलते कंपनी ने दाम घटाने का फैसला किया है। सरकार ने कंपनियों को पुराने स्टॉक की MRP बदलने की इजाजत दी सरकार ने 22 सितंबर से लागू हो रहीं नई GST दरों से पहले सरकार ने कंपनियों को अपने पुराने बचे हुए माल (अनसोल्ड स्टॉक ) की मैक्सिमम रिटेल प्राइज (MRP) बदलने की इजाजत दे दी है। मैन्युफैक्चरर्स, पैकर्स और इम्पोर्टर्स अब पुराने स्टॉक पर नई कीमतें स्टैंप, स्टिकर या ऑनलाइन प्रिंटिंग से डाल सकेंगे। भारत के कंज्यूमर अफेयर डिपार्टमेंट ने मंगलवार को आदेश जारी कर कहा कि ये अनुमति 31 दिसंबर 2025 तक या पुराना स्टॉक खत्म होने तक लागू रहेगी। नई कीमतों के साथ कंपनियों को पुराना MRP दिखना जरूरी होगा। लग्जरी आइटम्स पर ज्यादा टैक्स लगेगा लग्जरी आइटम्स और तंबाकू प्रोडक्ट्स पर अब 28% की जगह 40% GST लगेगा। मध्यम और बड़ी कारें, 350cc से ज्यादा इंजन वाली मोटरसाइकिलें इस स्लैब में आएंगे। इससे इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।

मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायतों को मिला नया अधिकार, विकसित करेंगी आवासीय कॉलोनी

विदिशा  मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतें भी शहरों में गृह निर्माण मंडल और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की तरह आधुनिक आवासीय कालोनियां विकसित करेंगी। शुरुआत विदिशा जिले से हो रही है। स्थानीय प्रशासन ने जिले की 12 ग्राम पंचायतों के 14 गांवों को इसके लिए चिन्हित किया है। इन गांवों में कॉलोनी बनाने के लिए पंचायतों को जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गांवों में आधुनिक आवासीय कालोनियों का विचार जिला प्रशासन का है। तय हुआ कि एकीकृत टाउनशिप नीति के तहत शहरी क्षेत्रों से लगे गांवों में भी इस तरह की सुविधा विकसित की जाए। उसके बाद जिला पंचायत ने जनपद पंचायतों से ऐसे गांवों के नाम मांगे थे, जहां शासकीय भूमि उपलब्ध हो, गांव शहरी सीमा से सटे हों और क्षेत्रफल व आबादी के लिहाज से बड़े हों। इस मापदंड पर 13 गांवों की सूची बनाई गई है, जहां कालोनियां विकसित की जानी है। विदिशा से प्रायोगिक परियोजना शुरू हो रही है इन गांवों को दो एकड़ से पांच एकड़ तक की जमीन कॉलोनी विकसित करने के लिए आवंटित की गई है। जिन गांवों में ये कालोनियां बननी हैं, उनकी नजदीकी कस्बे से दूरी 500 मीटर से 10 किमी तक है। यहां कॉलोनियों के विकास की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों को दी गई है। विदिशा से यह प्रायोगिक परियोजना शुरू हो रही है, जिसमें ग्राम पंचायत प्लाट बेचेंगी। उसपर भवन निर्माण खरीददार ही करेंगे। इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हैं। पिपलधार ग्राम पंचायत की सरपंच केसर बाई रामराज सिंह यादव का कहना है कि उनके गांव पट्टन में 0.65 हेक्टेयर जमीन कॉलोनी के लिए आवंटित हुई है। गांव बड़ा है, इस योजना से लोगों को काफी फायदा होगा, लेकिन जो जमीन आवंटित है उसके बड़े हिस्से पर अतिक्रमण है। उसे हटाना हमारे लिए बड़ी चुनौती होगा। 2000 वर्गफीट तक के भूखंड होंगे योजना के मुताबिक इन ग्रामीण कालोनियों में भूखंड का आकार 800 वर्गफीट से लेकर दो हजार वर्गफीट तक होगा। उनकी कीमत ग्राम पंचायत तय करेगी। योजनाबद्ध विकास होगा इनका विकास योजनाबद्ध होगा। सबसे पहले सड़कों का निर्माण होगा। इसके साथ ही बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसकी निगरानी जिला एवं जनपद पंचायतें करेंगी। शुरुआती विकास पंचायत के बजट से होगा और बाद में प्लाट बिकने पर विकास कार्यों की गति बढ़ाई जाएगी। इन 14 गांवों में बनेगी पहली कॉलोनी गंज पंचायत का पठारी बासौदा, ग्यारसपुर विकासखंड का खुजराहर, सिरोंज का बगरोदा, चौड़ाखेड़ी पंचायत का कमरिया, नटेरन का रुसल्ली, पट्टन और डंगरवाड़ा, कुरवाई का मेहलुआ चौराहा और पठारी, लटेरी का मुरवास तथा विदिशा विकासखंड का ढोलखेड़ी, रंगई, करैयाहवेली और आमखेड़ा हवेली। कॉलोनियों में सभी सुविधाएं दी जाएंगी     पंचायतों में कॉलोनियां बनाने के लिए शहर से सटी और बड़ी पंचायतों का चयन किया गया है। यहां शहरों की तरह बिजली, सड़क और पानी जैसी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। भूमि आवंटित कर दी गई है और अब लेआउट डिजाइन पर काम शुरू कर दिया गया है। – ओपी सनोडिया, सीईओ, जिला पंचायत, विदिशा  

नायता मुंडला बस स्टैंड तैयार, इंदौर में नौलखा बस स्टैंड के स्थानांतरण का रास्ता साफ

 इंदौर  इंदौर में नायता मुंडला बस स्टैंड से बसों का संचालन अब संभव हो सकेगा। मंगलवार को हाईकोर्ट ने बस संचालकों की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे नायता मुंडला से बसों के संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। साथ ही तीन इमली बस स्टैंड को स्थानांतरित करने की याचिका भी कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब आने वाले समय में दोनों बस स्टैंड को स्थानांतरित किया जा सकेगा। पिछले वर्ष फरवरी में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार इंदौर संभाग ने नायता मुंडला स्थित आईएसबीटी को बस स्टैंड के रूप में अधिसूचित किया था, जबकि नौलखा बस स्टैंड को गैर अधिसूचित घोषित किया गया था। इस निर्णय के अनुसार, डबल चौकी, खातेगांव, चापड़ा, कन्नौद, नेमावर, हरदा, होशंगाबाद, बैतूल आदि शहरों के लिए बसों का संचालन नायता मुंडला से होना था, लेकिन बस संचालकों ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके कारण मामला लंबित रहा। तीन इमली से चलने वाली बसों को किया जाएगा स्थानांतरित अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद बसों को नायता मुंडला स्थानांतरित करने की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। तीन इमली से संचालित होने वाली बसों को भी स्थानांतरित किया जाना है, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि इन्हें नायता मुंडला भेजा जाएगा या एमआर-10 स्थित आईएसबीटी। नौलखा बस स्टैंड से प्रतिदिन 80 से अधिक बसों का संचालन होता है, जिनमें से अधिकांश बसें नेमावर रोड से होकर विभिन्न शहरों के लिए चलती हैं। सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाली इन बसों के कारण तीन ईमली से नौलखा तक कई बार जाम की स्थिति उत्पन्न होती है, इसलिए प्रशासन ने इन्हें स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। विरोध के कारण रुकी थी प्रक्रिया जिला प्रशासन ने पिछले वर्ष नौलखा और तीन इमली बस स्टैंड को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। नायता मुंडला बस स्टैंड पर नौलखा की बसों को भेजने की तैयारी पूरी हो गई थी, लेकिन बस संचालकों के विरोध के कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया रुक गई थी। अब कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी गई है। यात्रियों का खर्च बढ़ेगा नायता मुंडला में बसों के स्थानांतरण से पहले जिला प्रशासन को लोक परिवहन की व्यवस्था करनी होगी। वर्तमान में यहां से बसों का संचालन नहीं होता है। देर रात आने वाले यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को भी सुनिश्चित करना होगा। शहर के बाहर होने के कारण यात्रियों को ऑटो से आने-जाने में अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। नोटिफिकेशन के अनुसार होगा बसों का संचालन     नोटिफिकेशन के अनुसार नौलखा से बसों का संचालन कराया जाएगा। यहां से चलने वाली बसों के लिए नायता मुंडला बस स्टैंड अधिसूचित किया गया है। – प्रदीप शर्मा, आरटीओ  

मोदी जी का जीवन देश के नाम, अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान

नई दिल्ली केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन के अवसर पर कहा कि पीएम मोदी ने खुद को पूरे राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने स्व को भुलाकर समाज को सामने रखा है। मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा, "पीएम मोदी ने हर तरीके से अपने हर कार्य के पल-पल को राष्ट्र के प्रति समर्पित कर दिया है। देश ने उनकी इस भावना, समर्पण के इस रूप को हृदय से स्वीकार किया है।" उन्होंने कहा कि देश में कई जगह जैसे महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्यप्रदेश और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में मुझे काम करने का मौका मिला। मैं मानता हूं कि जन जन के जीवन में, जो स्थायी परिवर्तन पीएम मोदी लेकर आए हैं वह अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को देश की माताओं-बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। देश की आधी आबादी, एक ऐसे वर्ग जिस पर देश की नींव टिकी है, उस आबादी के बारे में सोचना, उनके लिए कार्यक्रम बनाना, उन कार्यक्रमों को लागू करना पीएम मोदी द्वारा लाया गया एक बड़ा परिवर्तन है। देश की माताओं-बहनों के जीवन में जो परिवर्तन आए हैं, उसे लेकर वे उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएम मोदी हमेशा एक लॉन्ग टर्म विजन की बात करते हैं। उन्होंने सेमीकंडक्टर का उदाहरण देते हुए कहा, "जब सेमीकंडक्टर में तीन-चार साल का कार्यक्रम पीएम मोदी के समक्ष लेकर गए तो उनका स्पष्ट निर्देश था की आप कम से कम 20 वर्ष का कार्यक्र बनाएं। जैसे हमने फैब की बात की तो पीएम मोदी ने कहा कि नहीं पूरा इकोसिस्टम डेवलप करें। न केवल चिप बनानी है, बल्कि चिप जिन मशीनों से बनती है उन मशीनों को भी बनाया जाए। जिन मटेरियल से चिप बनती है, उन मटेरियल को भी बनाया जाए।" उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने एक सुदृढ़ नेतृत्व, एक स्पष्ट सोच और विजन के साथ एक सॉलिड फांउडेशन बनाने का काम किया है।

ई-वेस्ट कलेक्शन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ स्वच्छता के लिए श्रमदान किया। उन्होंने इस दौरान नगर निगम इंदौर के ई-वेस्ट कलेक्शन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन को प्रदेश में "स्वच्छता ही सेवा" अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एम.वाय.हॉस्पिटल के अंदर और बाहर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि एम. वाय. अस्पताल में विकास कार्यों के लिए प्रदेश सरकार हर तरह की मदद देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थिति नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और स्वच्छता के प्रति सजग रहकर सप्ताह में 2 घंटे और वर्ष में 100 घंटे स्वच्छता के लिए श्रमदान करने की सभी से अपील की। उन्होंने नागरिकों का आहवान किया कि न तो गंदगी करें और न होने दें। "स्वच्छता ही सेवा अभियान" के लाँचिंग लोगो का विमोचन भी किया। इंदौर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि ई-वेस्ट आज के समय में सबसे गंभीर प्रदूषण कारक अपशिष्ट है, जिसका निपटान यदि वैज्ञानिक पद्धति से न किया जाए, तो यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। नगर निगम इन्दौर द्वारा शहर को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक "स्वच्छता ही सेवा अभियान" के तहत ई-वेस्ट संग्रहण अभियान प्रारंभ किया गया है। इस विशेष अभियान के प्रथम चरण में निगम मुख्यालय, नेहरु पार्क स्थित इंदौर स्मार्ट सिटी ऑफिस में ई-वेस्ट ड्रॉप बॉक्स स्थापित किए गए हैं। इन ड्रॉप बॉक्स में निगम के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घर अथवा कार्यालय से निकलने वाले अनुपयोगी एवं खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे – मोबाइल, चार्जर, पंखे, कंप्यूटर पार्ट्स, बैटरी, टीवी, रिमोट इत्यादि जमा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम न होकर लगातार जारी रहने वाला विशेष अभियान है। अभियान के आगामी चरणों में नागरिकों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि शहर में चिन्हित स्थानों पर ई-वेस्ट ड्रॉप बॉक्स रखे जाएंगे, जहाँ नागरिक अपने अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा कर सकेंगे। साथ ही नगर निगम द्वारा घर- घर से भी वेस्ट कलेक्शन किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अभियान में अपने घर, दुकान एवं कार्यालयों से निकलने वाले पुराने एवं खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निर्धारित स्थानों पर ही जमा करें। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक श्री गोलू शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि और नागरिक मौजूद थे।  

सीट बंटवारे पर अटका मामला, बिहार में महागठबंधन में फिर दरार?

पटना  बिहार में महागठबंधन के हिसाब से तो वोटर अधिकार यात्रा अच्छी रही, लेकिन लगता है कांग्रेस और आरजेडी के बीच रिश्तों को उलझा दिया है. ऐसा लगता है राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के बीच फिर से ठन गई है. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी ये सब हुआ था. और, तब सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि जब बात नहीं बन पा रही थी, तब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को दखल देना पड़ा था.  सीटों का बंटवारा तभी फाइनल हो सका, जब प्रियंका गांधी और लालू यादव के बीच सीधी बात कराई गई. तब लालू यादव बिहार से बाहर थे, और चारा घोटाले के लिए रांची जेल में सजा काट रहे थे. एक बार फिर बात उसी मोड़ के आस पास आकर अटक गई लगती है.  तेजस्वी यादव के बिहार अधिकार यात्रा पर निकलने को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है. और, सीट बंटवारे का मामला फंसे हुए होने के जो कारण माने जा रहे हैं, उनमें से एक ये भी है – हालांकि, सबसे बड़ा मसला है मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर कांग्रेस का रुख है.  तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा मानने का सवाल राहुल गांधी ने तो बस टाल दिया था, लेकिन बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने तो जैसे सिरे से खारिज ही कर डाला है – ऐसे में तकरार तो बढ़नी ही है.     तेजस्वी यादव जैसा बड़ा दिल राहुल गांधी क्यों नहीं दिखा रहे हैं 2025 की शुरुआत से ही राहुल गांधी के करीब करीब हर दौरे में एक बात कॉमन नजर आती है. आरजेडी के मुकाबले कांग्रेस को श्रेष्ठ बताना. जैसे लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी क्षेत्रीय दलों की विचारधारा की बात करते थे. कहते थे, क्षेत्रीय दलों के पास कोई विचारधारा नहीं है. तब अखिलेश यादव निशाने पर थे, और अब तेजस्वी यादव हैं. अखिलेश यादव ने तब आंख भी दिखाई थी, शायद तेजस्वी यादव भी अब वैसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं.   चुनाव तो राहुल गांधी महागठबंधन के साथ ही लड़ने की करते हैं, लेकिन हर कदम पर लगता है जैसे कांग्रेस अकेले मैदान में उतरने जा रही हो. तेजस्वी यादव का बिहार की सभी 243 सीटों पर लड़ने की बात करना भी, राहुल गांधी के व्यवहार का जवाब ही लगती है.  1. बिहार में हुए SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ ही INDIA ब्लॉक के बैनर तले वोटर अधिकार यात्रा निकाला जाना तय हुआ, लेकिन राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा को भी भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा जैसा बना देने की कोशिश की. फर्क बस यही था कि वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी के साथ तेजस्वी यादव और बिहार महागठबंधन के और भी नेता शामिल थे.  फिर भी ऐसा लगा जैसे राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा को हाइजैक कर लिया हो. पूरी यात्रा में राहुल गांधी आगे आगे और तेजस्वी यादव पीछे पीछे नजर आए. कहां प्रशांत किशोर जैसे नेता कांग्रेस को लालू परिवार की पिछलग्गू पार्टी कहा करते थे, और कहां वोटर अधिकार यात्रा में लगने लगा जैसे आरजेडी ही कांग्रेस की पिछलग्गू बन गई हो.  2. तेजस्वी यादव की तरफ से तो राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए भी प्रस्तावित कर दिया गया, लेकिन राहुल गांधी पूरी तरह टाल गए. बल्कि, राहुल गांधी का जवाब सुनकर तो ऐसा लगा जैसे वो चाहते ही न हों कि तेजस्वी को बिहार में विपक्ष की तरफ से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए.  3. राहुल गांधी के बयान में जो कसर बाकी रह गई थी, कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने पूरी कर दी. अव्वल तो पहले भी कृष्णा अल्लावरु भी तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित किए जाने पर वैसी ही प्रतिक्रिया देते थे जैसा राहुल गांधी का रिएक्शन था, लेकिन हाल के एक प्रेस कांफ्रेंस में तो चार कदम आगे ही बढ़ गए.  कृष्णा अल्लावरु ने तो अब यहां तक बोल दिया है कि इंडिया ब्लॉक के मुख्यमंत्री पद का चेहरा अब बिहार के लोग ही तय करेंगे. निश्चित तौर पर तेजस्वी यादव और लालू यादव के लिए ऐसी बातें बर्दाश्त कर पाना काफी मुश्किल होगा.  फिर तो तेजस्वी यादव का बिहार अधिकार यात्रा शुरू करना जरूरी हो जाता है. और, सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात करना भी – तेजस्वी यादव के पास सीटों पर अपनी बात मनवाने का बेहतर तरीका भी यही लगता है. कैसा चल रहा है सीटों के बंटवारे पर मोलभाव 2020 के चुनाव में कांग्रेस को महागठबंधन में 70 सीटें मिली थीं, और चुनाव में कांग्रेस 19 सीटें जीतने में कामयाब हुई. उस चुनाव में आरजेडी ने 2015 में जीती हुई अपनी 10 सीटें सहयोगियों को दी थी, जिनमें दो कांग्रेस को मिली थीं – और वो एक सीट जीतने में सफल भी रही.  2020 के मुकाबले 2015 में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट बेहतर पाया गया था. तब 41 सीटों पर चुनाव लड़कर कांग्रेस ने 27 सीटें जीती थी. लेकिन, 2020 में आरजेडी नेतृत्व को लगा कि महागठबंधन के सत्ता न हासिल करने में कांग्रेस अपने हिस्से की सीटें हार जाना बड़ी वजह रही. चुनाव नतीजे आने के बाद तेजस्वी यादव या लालू यादव तो नहीं, लेकिन आरजेडी नेताओं ने खुल कर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला बोला था.  2025 के चुनाव में भी कांग्रेस की तरफ से 70 सीटों पर दावा पेश किए जाने की बात सुनी जा रही है. ऐसी दावेदारी के पीछे राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस अपने प्रभाव में हुआ इजाफा मान रही है. इंडियन एक्सप्रेस की  रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस उन 70 सीटों में से 27 अपने लिए अच्छी सीटें मान रही है. 27 सीटों में ही कांग्रेस की जीती हुई 19 सीटें भी शामिल हैं. 8 वे सीटें हैं, जहां कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे नंबर पर थे, और हार का फासला करीब पांच हजार वोट थे.  दिल्ली की प्रेस कांफ्रेंस में कृष्णा अल्लावरु ने भी कहा था, हर राज्य में अच्छी और खराब सीटें होती हैं. और, ऐसा कभी नहीं होना चाहिए कि एक पार्टी सभी अच्छी सीटों पर चुनाव लड़े, और दूसरी खराब सीटों पर. कृष्णा अल्लावरु का कहना था कि सीटों के बंटवारे के वक्त इस … Read more

F-35 फाइटर जेट की बिक्री पर अमेरिका का बड़ा कदम, कनाडा को लेकर कड़ा रुख

न्यूयॉर्क कनाडा और अमेरिका के बीच रक्षा सौदे को लेकर तनाव बढ़ गया है. कनाडा अपने 88 F-35 फाइटर जेट्स खरीदने के प्लान की समीक्षा कर रहा है. 22 सितंबर तक फैसला आने की उम्मीद है. अगर कनाडा इस डील को रद्द करता है, तो अमेरिका ने गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है. कनाडा स्वीडिश ग्रिपेन जेट को विकल्प के रूप में देख रहा है, लेकिन अमेरिका दो अलग-अलग फाइटर फ्लीट चलाने के खिलाफ है. यही विमान अमेरिका भारत को भी बेंचना चाहता है. लेकिन अभी तक भारत ने इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.   F-35 डील क्या है और कनाडा क्यों कर रहा है समीक्षा? F-35 अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा बनाया गया एक एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट है. यह पांचवीं पीढ़ी का विमान है, जो रडार से बचने की क्षमता रखता है. आधुनिक हथियारों से लैस है. कनाडा ने 2010 के दशक में 88 ऐसे जेट्स खरीदने का फैसला किया था, जिसकी अनुमानित लागत 19 बिलियन कनाडाई डॉलर (करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये) है. यह सौदा कनाडा की पुरानी CF-18 फाइटर जेट्स को बदलने के लिए था. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल सरकार ने इस साल मार्च में इस डील की समीक्षा शुरू की. कारण ये है कि F-35 प्रोग्राम में देरी और लागत में बढ़ोतरी हो रही है. अमेरिकी सरकारी संगठन GAO (गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस) ने 3 सितंबर 2025 को रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि F-35 प्रोजेक्ट में और देरी और खर्च बढ़ रहा है. कनाडा के तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर (अब प्रधानमंत्री) मार्क कार्नी ने समीक्षा का आदेश दिया, ताकि यह देखा जा सके कि क्या यह सौदा देश के हित में है. कनाडा की सेना ने अगस्त 2025 में सिफारिश की कि F-35 ही खरीदना चाहिए, लेकिन सरकार अभी फैसला ले रही है. अमेरिका ने साफ कह दिया है कि अगर कनाडा F-35 डील रद्द करता है, तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा ने मई 2025 में CTV को इंटरव्यू में कहा कि यह कनाडा-अमेरिका के संयुक्त NORAD (नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड) गठबंधन को खतरा पहुंचा सकता है. NORAD दोनों देशों की हवाई रक्षा के लिए है. इसके लिए दोनों को एक ही तरह के विमान उड़ाने चाहिए. होकस्ट्रा ने कहा कि अगर कनाडा एक विमान उड़ाएगा और हम दूसरा, तो वे एक-दूसरे के साथ बदलाव योग्य नहीं रहेंगे. अगस्त 2025 में होकस्ट्रा ने पॉडकास्टर जैस्मिन लेन को बताया कि कनाडा दो फाइटर प्रोग्राम नहीं चला सकता. होकस्टा ने कहा कि आपको फैसला करना चाहिए कि F-35 चाहिए या कोई और. लेकिन दोनों नहीं चला सकते. अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि F-35 डील रद्द करने से कनाडा को स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और ट्रेनिंग में दिक्कत होगी. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते भी प्रभावित हो सकते हैं.  डिफेंस इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने कनाडा को चेतावनी दी है कि यह सौदा रद्द करने से रक्षा सहयोग कमजोर हो जाएगा. ग्रिपेन: कनाडा का विकल्प क्यों? कनाडा स्वीडन की कंपनी साब द्वारा बनाए गए ग्रिपेन (JAS 39 Gripen) जेट को वैकल्पिक विकल्प के रूप में देख रहा है. ग्रिपेन एक हल्का, सस्ता और बहुमुखी फाइटर जेट है, जो F-35 से कम खर्चीला है. कनाडा को लगता है कि इससे पैसे बचेंगे और घरेलू उद्योग को फायदा होगा. लेकिन अमेरिका इसका विरोध कर रहा है, क्योंकि ग्रिपेन F-35 जितना उन्नत नहीं है और NORAD में एकरूपता बिगड़ जाएगी. कनाडा पहले से ही पुराने F-18 जेट्स चला रहा है. दो अलग फ्लीट चलाना महंगा और जटिल होगा. कनाडा का फाइटर जेट प्रोग्राम कनाडा की वायुसेना को नई फाइटर जेट्स की सख्त जरूरत है. पुराने CF-18 जेट्स 1980 के दशक के हैं और अब खराब हो रहे हैं. 2010 में कनाडा ने F-35 चुना लेकिन लागत और देरी की शिकायतें बढ़ीं. 2022 में कनाडा ने औपचारिक रूप से F-35 के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, लेकिन अब समीक्षा हो रही है. यह विवाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है, खासकर ट्रेड और डिफेंस में. दुनिया में F-35 प्रोग्राम एफ-35 कार्यक्रम में वर्तमान में 17 देश भाग ले रहे हैं. अब तक, 1870 से अधिक पायलटों और 13,500 रखरखाव कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है. एफ-35 बेड़े ने 602,000 से अधिक संचयी उड़ान घंटों को पार कर लिया है. क्रैश होने का खतरा  दुनिया का सबसे खतरनाक स्टेल्थ फाइटर जेट F-35 कई बार क्रैश हो चुका है. एक विमान गिरने पर अमेरिका को करीब 832 करोड़ रुपए का नुकसान होता. यह अमेरिका का सबसे महंगे जेट प्रोग्राम का विमान था. पिछले साल न्यू मेक्सिको के अल्बुकर्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ करते ही अमेरिकी एयरफोर्स का F-35 लाइटनिंग-2 स्टेल्थ फाइटर जेट क्रैश हो गया.  इससे पहले साउथ कैरोलिना में ऐसा ही एक फाइटर जेट लापता हो गया था. जो बाद में एक घर के पीछे क्रैश मिला. इसका मलबा साउथ कैरोलिना के ज्वाइंट बेस चार्ल्सटन से 96 KM दूर विलियम्सबर्ग काउंटी में मिला. 

मंत्री सारंग ने किया रक्तदान शिविर का शुभारंभ

’सेवा पर्मो धर्मः’ की भावना के साथ राष्ट्र सेवा व जनकल्याण के लिये कार्य करें युवा : मंत्री  सारंग मंत्री  सारंग ने किया रक्तदान शिविर का शुभारंभ महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण में बेटियों ने सीखी आत्मरक्षा की तकनीकें: मंत्री  सारंग भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत बुधवार को तात्या टोपे खेल स्टेडियम, भोपाल में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर एवं खिलाड़ियों द्वारा सेवा कार्य कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंत्री  सारंग ने स्कूली छात्राओं व खिलाड़ियों के साथ प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा धार जिले के भैंसोला में पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास एवं स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी देखा। रक्तदान: जीवनदान का पवित्र कार्य रक्तदान शिविर में खिलाड़ियों और युवाओं में काफी उत्साह था। सुबह से ही बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने रक्तदान कर मानवता का संदेश दिया। मंत्री  सारंग ने कहा कि रक्तदान निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है। यह केवल एक मानवीय कर्तव्य नहीं बल्कि किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का पवित्र कार्य है। उन्होंने कहा कि आज के दिन खिलाड़ियों ने जिस उत्साह के साथ रक्तदान किया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान से शरीर में नई रक्त कोशिकाएँ बनने की प्रक्रिया तेज़ होती है। समय-समय पर रक्तदान से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है। रक्तदान करने से आत्मिक शांति और संतोष की अनुभूति होती है। कहा भी गया है "रक्तदान महादान है।" मंत्री  सारंग ने कहा कि खेल और समाजसेवा का यह अनूठा संगम युवाओं को नई दिशा देगा। हमारा उद्देश्य है कि युवा उत्कृष्ट खिलाड़ी के साथ ही समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। जब खेल भावना और सेवा भावना मिलती है, तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और भी सशक्त होती है। कार्यक्रम में छात्राओं और महिलाओं के लिये महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर की भी शुरुआत की गई, जिसमें प्रशिक्षकों ने आत्मरक्षा की तकनीकें सिखाईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन से लें प्रेरणा मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का जीवन सेवाभाव और राष्ट्रहित को समर्पित है। गरीब परिवार में जन्म लेकर कठिन संघर्षों के बाद देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर सभी के लिए अनुकरणीय है। उनके नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं और आज विकसित भारत 2047 के संकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ‘सेवा पर्मो धर्मः’ की भावना के साथ युवाओं को राष्ट्र सेवा और जनकल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। सेवा पखवाड़ा उसी प्रेरणा का प्रतीक है, जो युवाओं को राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय योगदान देने का संदेश देता है। महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास कार्यक्रम के अंतर्गत महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर में छात्राओं और महिलाओं ने मार्शल आर्ट अकादमी के प्रशिक्षकों से आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकें सीखीं। यह प्रशिक्षण महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना भी जगाता है।मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि बहन-बेटियां हर परिस्थिति में सुरक्षित और सशक्त रहें। इस प्रकार के शिविर उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से मजबूत बनाते हैं। सेवा पखवाड़ा में विविध आयोजन खेल और युवा कल्याण विभाग ने सेवा पखवाड़ा के दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया है। इनमें रक्तदान शिविर, महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण, वृद्धाश्रम और अनाथालय में खिलाड़ियों द्वारा सहयोग और भोजन वितरण, शासकीय अस्पतालों में सेवा कार्य, अनाथाश्रम के बच्चों का स्टेडियम भ्रमण, खेलकूद प्रतियोगिताएं, स्वच्छता अभियान और नमो मैराथन जैसे आयोजन शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से खेल, युवा और समाजहित को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।