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ईंधन पर GST लाना अभी संभव नहीं, सरकार ने साफ किए संकेत

नई दिल्ली पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल इन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाना संभव नहीं है। मिडिया की ओर से सवाल पूछे जाने पर कि क्या पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए, अग्रवाल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर फिलहाल केंद्रीय उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) लगता है और इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों से राज्यों को वैट के रूप में और केंद्र सरकार को केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने आगे कहा, "राजस्व संबंधी प्रभावों को देखते हुए, इन वस्तुओं को फिलहाल जीएसटी के दायरे में लाना संभव नहीं है।" सीबीआईसी चेयरमैन ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कहा था कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी परिषद के प्रस्ताव में शामिल नहीं किया है। उस दौरान वित्त मंत्री ने कहा था कि कानूनी तौर पर हम तैयार हैं, लेकिन यह फैसला राज्यों को लेना होगा। वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी लागू होने के समय ही शामिल किया जाना तय था, "मुझे याद है कि मेरे दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बात की थी।" वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "राज्यों की सहमति के बाद, उन्हें परिषद में कराधान की दर तय करनी होगी। एक बार यह फैसला हो जाने के बाद, इसे कानून में शामिल कर लिया जाएगा।" जुलाई 2017 में लागू हुए जीएसटी में पेट्रोल, डीजल और मादक पेय पदार्थों जैसे उत्पादों को तब से इसके दायरे से बाहर रखा गया था। ये वस्तुएं केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों के लिए उत्पाद शुल्क और वैट के माध्यम से राजस्व का प्रमुख स्रोत हैं। कई राज्यों के लिए, ये उनके कर राजस्व में 25-30 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।

बालिकाओं को सेनिटेशन-हाईजीन सहायता की राशि का भी सिंगल क्लिक से करेंगे अंतरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शासकीय हायर सेकेन्डरी स्कूलों की 12वीं कक्षा में प्रथम स्थान अर्जित करने वाले 7832 विद्यार्थियों को निःशुल्क स्कूटी प्रदाय योजना के तहत राशि प्रदान करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन 11 सितम्बर गुरूवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में प्रात: 11 बजे से होगा। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप और पिछड़ा वर्ग एंव अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रहेंगी। टॉपर विद्यार्थियों को मिलेंगी स्कूटी की राशि प्रदेश मे निःशुल्क ई-स्कूटी/आईसीईएस योजना शैक्षणिक सत्र 2022-23 से संचालित की जा रही हैं। इस योजना के अंतर्गत ऐसे छात्र-छात्राऐं पात्र होते हैं जिन्होंने प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग अन्तर्गत संचालित शासकीय हायर सेकेण्डरी शाला में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययन कर माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हायर सेकेण्ड्री कक्षा 12वीं में समस्त संकाय को शामिल कर अपनी शाला में नियमित परीक्षार्थी के रूप में टॉप किया हो। बालिका विद्यालय की दशा में स्कूल की टॉपर एक बालिका को, बालक विद्यालय होने की दशा में एक टॉपर बालक को एवं को-एड स्कूल जिसमें बालक बालिकाएं दोनों अध्ययनरत हों की दशा में स्कूल की एक टॉपर बालिका एवं एक टॉपर बालक अर्थात एक स्कूल से दो विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान किए जाने का प्रावधान है। वर्ष 2024-25 के लिए 12वीं की परीक्षा में 7,832 स्कूल टॉपर्स विद्यार्थियों को स्कूटी राशि प्रदान की जायेगी। बालिकाओं को मिलेगी व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सहायता कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव समग्र शिक्षा की सेनिटेशन एवं हाईजीन योजना अंतर्गत वर्ष 2025 में कक्षा 7वीं से 12वीं की 20 लाख 37 हजार 439 बालिकाओं को लगभग 61 करोड़ रूपये डीबीटी द्वारा बालिकाओं के बैंक खाते में अंतरित करेंगे। इस योजना के तहत शासकीय विद्यालयों की कक्षा सातवीं से 12वीं तक अध्ययनरत बालिकाओं को स्वास्थ्य स्वच्छता के लिये300 रूपये की राशि प्रतिवर्ष प्रदान की जाती है। 20 हजार से अधिक बालिकाओं के बैंक खातों में 7 करोड का स्टायपंड मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में 20 हजार 100 बालिकाओं के बैंक खातों में 7 करोड रूपयों की स्टायपंड राशि भी अंतरित करेंगे। उल्लेखनीय है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाईप (IV) योजना अंतर्गत छात्रावासों में निवासरत बालिकाओं को टी.एल.एम एवं स्टायपंड के लिए प्रति बालिका 3400 रूपये प्रति वर्ष प्रदान की जाती है। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी होगा स्कूल शिक्षा विभाग और जनसंपर्क विभाग के द्वारा उक्त कार्यक्रम का सजीव प्रसारण विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर किया जायेगा। एनआईसी वेबकास्ट के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफार्मस् पर उक्त कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जायेगा।  

मुख्यमंत्री ने कोलकाता में निवेश केलिए उद्योगपतियों की वन-टू-वन चर्चा

प्रधानमंत्री श्री मोदी के मेक इन इंडिया और विकसित भारत के संकल्प को करेंगे साकार अपार संभावनाओं और स्थिरता का आदर्श निवेश स्थल हैं मध्यप्रदेश प्रदेश में हैं विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सहज कनेक्टिविटी ऑर्गेनिक कॉटन और गारमेंट उद्योग का हब है मध्यप्रदेश   भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में उत्पादित आर्गेनिक कॉटन की मांग अनेक देशों में है। प्रदेश टेक्सटाइल का हब बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में 7 पीएम मित्रा पार्क स्वीकृत किये, उसमें से पहले पीएम मित्रा पार्क का भूमि-पूजन करने प्रधानमंत्री श्री मोदी 17 सितम्बर को धार जिले में आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों का आहवान किया कि वे मध्यप्रदेश आये, राज्य सरकार निवेशकों को पीएम मित्रा पार्क में हर संभव सहायता और सुविधा उपलब्ध करवायेगी। धार का पीएम मित्रा पार्क भारत के औद्योगिक विकास की यात्रा में महत्वपूर्ण आयाम जोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को कोलकाता के.जे. डब्ल्यू मैरियट होटल में निवेश संभावनाओं पर इंटरैक्टिव सेशन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के इंटरैक्टिव सेशन में मध्यप्रदेश को निवेश और औद्योगिक विकास के लिए सबसे भरोसेमंद और अवसरों से भरा राज्य बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, देश के मध्य में स्थित होने के कारण उत्तम कनेक्टिविटी, विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचा और औद्योगिक शांति इसे उद्योगपतियों के लिए आदर्श निवेश स्थल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पार्क राज्य के टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने के साथ रोजगार और आर्थिक विकास में नए आयाम खोलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की शुद्ध और ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता इसे टेक्सटाइल निवेश के लिए विशेष बनाती है। पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से राज्य में उत्पादन और प्रोसेसिंग के उच्च मानक स्थापित होंगे, जिससे निवेशकों को लाभ के साथ रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित होंगे। उन्होंने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि राज्य में निवेश स्थिर, पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण में किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों का आहवान किया कि आइये हम संकल्प लें कि स्वदेशी अपनायेंगे, हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे और प्रधानमंत्री श्री मोदी के 'मेक इन इंडिया' और विकसित भारत के संकल्प को पूरी शक्ति के साथ साकार करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोलकाता की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा का सम्मान करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों ने देश को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि यह प्रेरक इतिहास और बौद्धिक परंपरा उद्योग जगत के लिए प्रेरक है और मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश के दृष्टिकोण से साथ जुड़ती है। मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से कहा कि कोलकाता जैसे ऐतिहासिक और बौद्धिक केंद्र से संवाद करना राज्य में निवेश के लिए उत्साह और नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि राज्य में विकसित औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक हब और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों को मजबूत प्रतिस्पर्धी लाभ देते हैं। सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क के माध्यम से पूरे देश में उत्पाद और सेवाओं की आपूर्ति सरल और त्वरित रूप से की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेशकों को सरल प्रक्रियाओं, सुलभ नीतियों और सक्रिय सरकारी सहयोग के माध्यम से व्यवसाय का विस्तार करने का पूर्ण अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की निवेश नीतियों पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में उद्योगपतियों को हर प्रकार की सुविधा, सुगमता और सुरक्षा प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य में औद्योगिक शांति सुनिश्चित है और किसी प्रकार की हड़ताल या व्यवधान के कारण निवेश प्रभावित नहीं होता। उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश में फैक्ट्री लगाना और संचालन करना सहज है, और राज्य के मध्य में होने के कारण पूरे देश में अपने उत्पाद और सेवाओं की आपूर्ति आसानी से की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को बताया कि पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में राज्य की औद्योगिक क्षमता और रोजगार सृजन को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों का उद्देश्य किसानों, उद्योगपतियों और युवाओं को समान रूप से लाभ पहुंचाना है। राज्य में किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य और प्रोसेसिंग का सही अवसर मिलता है, उद्योगपतियों को व्यवसाय विस्तार की सुविधा है और युवाओं को रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग जगत को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं है, बल्कि सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भागीदारी का अवसर है। उन्होंने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि पीएम मित्रा पार्क और अन्य औद्योगिक हब राज्य की टेक्सटाइल, गारमेंट और अन्य सेक्टरों में निवेशकों के लिए लाभकारी और सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में उत्पादन, लॉजिस्टिक्स और वितरण की सुव्यवस्था निवेशकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों को यह भरोसा भी दिलाया कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में निवेश करने से वे सिर्फ व्यावसायिक लाभ ही नहीं, बल्कि राज्य की स्थिरता, सतत विकास और आर्थिक समृद्धि में भी भागीदार बनेंगे।  निवेशक-हितैषी नीतियों से मध्यप्रदेश बना आकर्षक निवेश स्थल इन्वेस्ट इन एमपी इंटरएक्टिव सेशन में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक संपदा और निवेशक-हितैषी नीतियों के कारण उद्योगों का पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में एक लाख एकड़ से अधिक का इंडस्ट्रियल लैंड बैंक, मजबूत एयर कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कॉपर, मैंगनीज और डायमंड का सबसे बड़ा उत्पादक है और सीमेंट उत्पादन में भी अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2030 तक भारत को 500 गीगावाट से अधिक ग्रीन एनर्जी उपलब्ध कराने के संकल्प में प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रमुख सचिव ने बताया कि नर्मदापुरम के पास स्थापित औद्योगिक क्षेत्र की सफलता के बाद उसे 880 एकड़ तक विस्तारित किया गया है, जिसे हाल ही में कैबिनेट की स्वीकृति भी मिली है। राज्य सरकार ग्रीन इंडस्ट्रीज़ को 100% छूट, एक्सपोर्ट यूनिट्स को 50% प्रोत्साहन और कस्टमाइज्ड पैकेज पॉलिसी जैसी … Read more

ज्ञानदायिनी, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली कथा है श्रीमद्भागवत : सीएम योगी

युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के विराम पर बोले मुख्यमंत्री गोरखपुर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव बना रहे, यही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का वास्तविक मर्म है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन के ज्ञान का भान कराने वाली, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली कथा है।  सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार शाम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण करने तथा व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पांच हजार वर्ष पहले पहली बार स्वामी शुकदेव जी ने महाराजा परीक्षित को मृत्यु के भय से अभय करने के लिए सुनाई थी। तबसे यह कथा कोटि-कोटि सनातन धर्मावलंबियों की मुक्ति का माध्यम बन रही है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा उद्घोष करती है कि भारत में जन्म लेना दुर्लभ है। उसमें भी मनुष्य रूप में जन्म लेना और भी दुर्लभ है। सनातन भारत ने ही ज्ञान, भक्ति और मुक्ति की दाता, जीवन के रहस्यों का उद्घाटन करने वाली श्रीमद्भागवत कथा का उपहार दिया है। उन्होंने कहा कि कथा का वास्तविक मर्म यह है कि हम हरहाल में अपने धर्म और देश के प्रति अडिग रहें। किसी भी परिस्थिति में बिना झुके, बिना रुके, बिना डिगे सनातन और भारत के प्रति समर्पण का भाव बनाए रखें।  व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास, परिधान पीठ गोपाल मंदिर श्रीअयोध्याधाम से पधारे जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इसका आनंद यहां आए श्रद्धालुओं के साथ मीडिया के जरिये लाखों लोगों ने प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी रामानंदाचार्य परंपरा से आते हैं। अगले वर्ष उनके श्रीमुख से यहां श्रीराम कथा का भी श्रवण कराया जाएगा।  कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर मस्तनाथ पीठ रोहतक हरियाणा के महंत राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, जूनागढ़ गुजरात से आए महंत शेरनाथ, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, काशी से आए जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा, नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य, हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए महंत राजूदास, यज्ञमान पूर्व विधायक अतुल सिंह, अजय सिंह, महेश पोद्दार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना का किया शुभारंभ

  प्रदेश के शासकीय विद्यालयों से 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को उच्च शिक्षा हेतु मिलेगी वित्तीय सहायता देश के किसी भी संस्थान में पढ़ाई के लिए बालिकाओं को मिलेंगे वार्षिक 30 हजार रुपए बेटियों की उच्च शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान, आर्थिक दिक्कतें नहीं बनेंगी बाधा रायपुर, बेटियों को शिक्षा मिलने से हमारी पीढ़ियाँ शिक्षित होती हैं। प्रदेश सरकार बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना के शुभारंभ अवसर पर यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को बधाई देते हुए कहा कि इस छात्रवृत्ति योजना से हजारों बेटियों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ का चहुंमुखी विकास हुआ है और इसमें बेटियों ने भी अपनी भूमिका निभाकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। बेटियाँ आर्थिक दिक्कतों के कारण अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़ें—इसी उद्देश्य से यह पहल की गई है। यह योजना प्रदेश में बालिकाओं की उच्च शिक्षा में नामांकन दर को और अधिक बढ़ाने में सहायक होगी। श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ संकल्प को यह स्कॉलरशिप आगे बढ़ाएगी। इसके माध्यम से शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाली निम्न आय वर्ग की छात्राओं को विशेष रूप से मदद मिलेगी और वे अपनी उच्च शिक्षा जारी रख पाएँगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बेटियाँ पढ़ती हैं तो वे केवल दो परिवारों को ही नहीं बल्कि पूरी पीढ़ियों को शिक्षित करती हैं। उन्होंने सभी महाविद्यालयों में इस योजना की जानकारी व्यापक रूप से पहुँचाने के निर्देश दिए। उल्लेखीय है कि इस योजना के तहत प्रदेश के शासकीय विद्यालयों से 10वीं एवं 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली नियमित छात्राएँ पात्र होंगी। जो छात्राएँ शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक के प्रथम वर्ष अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष में देश के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश लेंगी, उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा।योजना का लाभ पाने के लिए वेबसाइट https://azimpremjifoundation.org/what-we-do/education/azim-premji-scholarship/ पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही, क्यूआर कोड स्कैन कर भी आवेदन किया जा सकता है। आवेदन दो चरणों में स्वीकार किए जाएँगे—पहला चरण 10 सितम्बर से 30 सितम्बर 2025 तथा दूसरा चरण 10 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक। फाउंडेशन द्वारा छात्रवृत्ति योजना की पूरी प्रक्रिया नि:शुल्क संचालित की जाएगी। यदि योजना से संबंधित किसी प्रकार की धोखाधड़ी या शिकायत की जानकारी हो, तो उसे scholarship@azimpremjifoundation.org पर प्रेषित किया जा सकता है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, आयुक्त उच्च शिक्षा श्री संतोष देवांगन, संचालक तकनीकी शिक्षा श्री विजय दयाराम के., तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के स्टेट हेड श्री सुनील शाह उपस्थित थे।

देशभर में वोटर लिस्ट SIR की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू, बिहार मॉडल को बनाया उदाहरण

नई दिल्ली देशभर में अक्टूबर से मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) शुरू होने की संभावना है. निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हो रही बैठक में इस पर सहमति बनी है. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के CEO से कहा है कि 30 सितंबर तक कागज़ी कार्यवाही और जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं. अधिकांश राज्यों ने भरोसा जताया है कि वे सितंबर के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएंगे. जल्द हो सकता है ऐलान बिहार विधानसभा चुनाव खत्म होने से पहले ही देशव्यापी SIR की औपचारिक घोषणा की जा सकती है. हालांकि, अंतिम तारीखें तभी तय होंगी जब सभी राज्यों के सीईओ अपनी प्रगति रिपोर्ट आयोग को सौंप देंगे. चुनाव आयोग अपडेट करेगा मतदाता सूची निर्वाचन आयोग का मानना है कि SIR के ज़रिए न सिर्फ नई मतदाता सूची अपडेट होगी, बल्कि पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रियाओं पर भरोसा भी और मज़बूत होगा. चुनाव आयोग के इस विशिष्ट आयोजन में राज्यों के सीईओ के समक्ष विभिन्न सत्रों में SIR की तैयारियों सहित साढ़े तीन घंटे से अधिक के प्रेजेंटेशन दिए गए. आयोग ने अलग अलग राज्यों के मुख्य निर्वाचन आधिकारियों को वहां होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए मतदाताओं की तस्दीक के लिए जमा कराए जाने वाले सनदी प्रमाणपत्रों की सूची बनाने को भी कहा गया है. राज्यों के हिसाब से मांगे जाएंगे दस्तावेज ये सूची राज्य में स्थानीय स्तर पर मान्य सहज उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित होगी. अलग-अलग राज्यों में दस्तावेजों के नाम और प्रकार होंगे. जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में, उत्तर पूर्वी समीवर्ती राज्यों में, समुद्र तटीय राज्यों में कई जगह पहचान और आवास के विशिष्ट प्रमाणपत्र भी होते हैं. कई जगह क्षेत्रीय स्वायत्त बोर्ड और निकाय भी ऐसे प्रमाण पत्र जारी करते हैं. चुनाव आयोग द्वारा 25 जून से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने का कार्य किया. इस प्रक्रिया के पहले चरण में एक अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की गई थी, जिसमें 7.24 करोड़ नाम दर्ज थे जो पहले की तुलना में 65 लाख कम थे. एक अगस्त से एक सितंबर तक दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान कुल 16 लाख 56 हजार 886 लोगों ने नए नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया. इसके अलावा 2 लाख 17 हजार 49 लोगों ने नाम हटाने और 36 हजार 475 लोगों ने मतदाता सूची में सुधार के लिए आवेदन जमा किए. बिना नोटिस के नहीं कटेगा किसी का नाम: EC बिहार में SIR प्रकिया चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया, उनका पक्ष सुने बिना उनकी मतदाता पात्रता पर ERO कोई अंतिम फैसला नहीं लेंगे. आयोग ने ये भी भरोसा दिलाया था कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा और बिना नोटिस के किसी का नाम नहीं काटा जाएगा. बिहार में कैसे हुआ SIR SIR प्रक्रिया के तहत 24 जून से 25 जुलाई तक पहले चरण (गणना चरण) में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण सत्यापित किए गए. एक अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची के बाद एक सितंबर तक लोगों को दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया गया. फिलहाल 2 सितंबर से नए आवेदनों की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, सुधार करने और नाम हटाने के आवेदन शामिल होंगे.

मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद शहडोल का कन्या शिक्षा परिसर अब माता शबरी के नाम से जाना जाएगा

शहडोल  मध्य प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के कन्या शिक्षा परिसरों का नाम अब 'माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर' होगा. राज्य सरकार ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं. इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया था.  प्रदेश में जनजातीय वर्ग की बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 82 कन्या शिक्षा परिसरों और 8 आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है. इन संस्थानों में विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधा के साथ आवासीय सुविधा भी दी जा रही है. कन्या शिक्षा परिसर में कक्षा छठवीं से 12वीं तक प्रति कक्षा 70 विद्यार्थी के मान से 490 लड़कियां और आदर्श विद्यालयों में कक्षा छठवीं से 12वीं तक प्रति कक्षा 35 विद्यार्थी के मान से 245 विद्यार्थी पढ़ कर रहे हैं.  सरकार की ओर से बताया गया कि  छात्राओं को यूनिफॉर्म, ब्लू ब्लेजर, किताब, स्टेशनरी, पोषण आहार दिया जाता है. प्रति विद्यार्थी 15 हजार रुपए प्रतिवर्ष दिए जाते हैं. कन्या शिक्षा परिसर में तमाम गतिविधियों जैसे खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, चिकित्सा, आकस्मिक चिकित्सा के लिए प्रति विद्यालय 7 लाख 10 हजार वार्षिक खर्च का प्रावधान हो. 

इंदौर और उज्जैन में जल्द शुरू होगी सस्ती सुगम परिवहन सेवा, मार्च से यात्रियों के लिए सुविधा

इंदौर  मध्य प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डेडलाइन तय कर दी है। अब हर हाल में मार्च के पहले बसों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। सबसे पहले इंदौर और इसके बाद उज्जैन से सेवा प्रारंभ की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय में परिवहन विभाग के कामकाज की समीक्षा की। यहां अधिकारियों ने बताया कि अब यातायात नियम तोड़ने पर चालानी कार्रवाई का अधिकार प्रधान आरक्षक को भी दिया जाएगा। इस संबंध में शीघ्र ही अधिसूचना जारी होने वाली है। बता दें कि वर्ष 2006 में मप्र राज्य सड़क परिवहन निगम बंद होने के बाद से सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि उज्जैन जिले में सार्वजनिक बस संचालन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। जबलपुर और इंदौर में रूट सर्वे और श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और सर्वे भी लगभग पूरा हो गया है। वाहनों की स्पीड पर नियंत्रण जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अंतरविभागीय बैठक नियमित रूप से हो। सड़कों पर सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने पर उन्हें तत्काल दूर किया जाए। बस स्टाप पर नागरिकों को साफ-सफाई के साथ आवश्यक सुविधाएं मिलें। परिवहन विभाग की राजस्व संग्रह निगरानी प्रणाली को और मजबूत करें। वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। इसके साथ गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास आवश्यक कागजों की वैधता की जांच भी नियमित हो। परिवहन विभाग में बेहतर प्रबंधन के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। सुगम परिवहन सेवा में हो कम से कम किराया मुख्यमंत्री ने कहा कि सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुविधाओं और कम से कम किराये पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसमें इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग को प्रोत्साहित करें। परिवहन सेवा के लिए बने नियमों का सख्ती से पालन हो। बसों में शहरों एवं गांवों के नाम सामने के कांच पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। इसके साथ ही बस स्टाप पर भी गांव और नगरों के नाम लिखे हों। यात्री बसों का बीमा अनिवार्य हो। सभी कार्य नियमों के अंतर्गत हों, पारदर्शिता रहे। दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा जाए। बसें फिट हों, स्टाफ का व्यवहार अच्छा हो। अप-डाउनर्स को भी आवश्यक सुविधाएं दी जाएं। इस वर्ष 16 लाख 60 हजार नए वाहन आए, जिनमें 15 प्रतिशत ईव्ही बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 16 लाख 60 हजार वाहनों का पंजीयन किया गया है। इसमें 2 लाख 58 हजार यानी 15 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल वाहन हैं। प्रदेश में आन रोड वाहनों की संख्या एक करोड़ 80 लाख के करीब है। परिवहन से प्राप्त होने वाली राजस्व में पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बैठक में राजस्व वृद्धि के किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई।

फार्मेसी पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन होगा, उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पारदर्शिता पर जोर दिया

मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अब ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अपूर्ण हैं, जिन्हें समय पर पूरा करवाना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल होटल पलाश भोपाल में मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएँ। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार के लिये सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है। नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष संजय कुमार जैन, सदस्य राजू चतुर्वेदी, गौतमचंद धींग, रामरतन गर्ग, सत्येन्द्र सिंह चौहान, देवेंद्र कुमार बजाजत्य, अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, म.प्र.), आत्री मुख्य विश्लेषक और चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

शिक्षा विभाग में हड़कंप, संकुल प्रिंसिपल रिश्वत लेते पकड़ी गईं, लोकायुक्त ने किया कार्रवाई

  सांवेर सांवेर क्षेत्र के कछालिया गांव के शासकीय सांदीपनी स्कूल में रिश्वत का मामला सामने आया है। एक महिला प्रिंसिपल ने दो शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक पहुंचाने के एवज में दो हजार रुपए की रिश्वत मांगी। प्रिंसिपल मनीषा पहाड़िया ने शिक्षकों से कहा था कि वह रिश्वत के पैसे लिफाफे में रखकर लाए। फाइल बढ़ाने के लिए दो हजार की रिश्वत मांगने पर दोनों शिक्षक हैरान थे। उन्होंने लोकायुक्त विभाग को इसकी शिकायत की। लोकायुक्त पुलिस ने महिला प्रिंसिपल को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया। केमिकल लगे नोट लिफाफे में रखवा कर शिकायतकर्ता शिक्षकों को दिए।  बुधवार को दोनों शिक्षक प्रिंसिपल मनीषा के केबिन में पहुंचे और लिफाफा टेबल पर रख दिया। प्रिंसिपल ने लिफाफा पर्स में रखकर कहा कि अब फाइल आगे बढ़ा दूंगी।  इस बीच लोकायुक्त की टीम इशारा पाते ही केबिन में पहुंची और महिला प्रिंसिपल को रिश्वत लेते रहेंगे हाथों पकड़ लिया। उन्होंने मनीषा के हाथ धुलवाए तो हाथ केमिकल के कारण पीले हो गए।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रिंसिपल के खिलाफ केस दर्ज किया और रिश्वत लेने के उपयोग में लाया गया पर्स भी टीम ने जप्त कर लिया है।  पकड़े जाने के बाद प्रिंसिपल मनीषा ने कहा कि उससे गलती हो गई ,उसे रिश्वत के पैसे नहीं लेना चाहिए थे। शिकायतकर्ता शिक्षकों की चार साल पहले स्कूल में नियुक्ति हुई थी। उन्होंने तय नियम के तहत स्थाई करने के लिए प्राचार्य को फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजने के लिए कहा था। प्रिंसिपल ने दोनों से फाइल आगे बढ़ाने की एवज में दोनों से एक- एक हजार रुपए मांगे थे। अब महिला प्रिंसिपल को निलंबित किया जा सकता है।