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17 सितंबर को मध्यप्रदेश दौरे पर पीएम मोदी, राज्य को मिलेंगी दो बड़ी गिफ्ट्स

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर एक बड़ी सौगात देने मध्यप्रदेश दौरे पर आ रहे हैं. पीएम मोदी 17 सितंबर को धार जिले के भैंसोला में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलांन्यास करेंगे. इसके अलावा स्वस्थ्य नारी सशक्त परिवार अभियान का भी शुभारंभ उनके द्वारा किया जाएगा. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री अपने 75वें जन्मदिन पर मध्य प्रदेश को करोड़ों के गिफ्ट देने आ रहे हैं. मील का पत्थर साबित होगी पीएम की यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मध्यप्रदेश यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, '' 17 सितंबर को पीएम मोदी पीएम मित्रा पार्क का शिलांन्यास करने के लिए आ रहे हैं. धार जिले के आदिवासी अंचल को एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है. खासतौर से किसानों के लिए यह एक बड़ी सौगात रहेगी. धार, झाबुआ, उज्जैन, खंडवा, खरगौन बड़वानी कपास आधारित क्षेत्र हैं. कॉटन पर आधारित यह बड़ा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होने से प्रदेश के 1 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. यह सभी मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है. हम सभी प्रयास कर रहे हैं कि पीएम का यह दौर मध्यप्रदेश और देश के लिए मील का पत्थर साबित हो.'' पीएम मित्र पार्क बदलेगा एमपी की तस्वीर धार जिले के भैसोला में 2177 एकड़ में तैयार हो रहा पीएम मित्र पार्क मध्यप्रदेश के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड एपेरल पार्क को पीएम के 5 एफ विजन फार्म टू फाइवर टू, फैशन टू, फॉरेन के तहत डेवलप किया जा रहा है. इस पर 2050 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी. पहले चरण के लिए केन्द्र सरकार 773 करोड़ के टेंडर जारी कर चुका है. पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए मध्यप्रदेश सरकार को कई निवेशकों द्वारा निवेश प्रस्ताव भी दिए गए हैं. 75 वर्ष के हो जाएंगे मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष 17 सितंबर को अपना 75वां जन्मदिन मनाएंगे. पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पूरे देशभर में कार्यक्रम रखे गए हैं. 17 सितंबर से 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक पूरे देश में बीजेपी द्वारा 'सेवा पखवाड़ा' मनाया जाएगा. सेवा पखवाड़ा में रक्तदान शिविर से लेकर स्वच्छता अभियान जैसे कई आयोजन होंगे. वहीं, पीएम मोदी इस दिन मध्य प्रदेश के भी दौरे पर होंगे.  

बिना टैरिफ के व्यापार, 2025 में भारत का 24 देशों के साथ आर्थिक दांव

नई दिल्‍ली.  अमेरिका की ओर से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने से हुए नुकसान की भरपाई एक झटके में करने की तैयारी है. भारत के हाथ ऐसा दांव लगने वाला है, जिससे टैरिफ से हुए नुकसान की सारी भरपाई हो जाएगी. यह काम पूरा होने पर भारत को 135 अरब डॉलर का व्‍यापार बिना किसी टैक्‍स के करने का मौका मिलेगा. इस पर बातचीत भी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और माना जा रहा है कि इसी साल करीब 2 दर्जन देशों के साथ बिना टैक्‍स के व्‍यापार का रास्‍ता खुल जाएगा. मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ अपने महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द अंतिम रूप देने के लिए अगले एक महीने में दो दौर की महत्वपूर्ण वार्ता करेंगे. इस दौरान उत्पत्ति के नियमों, बाजार पहुंच और वाइन तथा डेयरी उत्पादों पर शुल्क के क्षेत्रों में मतभेदों को दूर करने की कोशिश की जाएगी. इन पर सहमति बनती है तो इसी साल यह डील पूरी होने की संभावना है. दिसंबर हो जाएगी एफटीए डील यूरोपीय आयोग के कृषि आयुक्त क्रिस्टोफ हैनसेन और व्यापार प्रमुख मारोस सेफ्कोविक इस सप्ताह अपने भारतीय वार्ताकारों के साथ बातचीत करने के लिए भारत का दौरा कर रहे हैं. दोनों पक्ष इस साल के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर करना चाहते हैं. यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका वित्तवर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 135 अरब डॉलर था. यह आंकड़ा चीन और अमेरिका से भी ज्‍यादा है. जाहिर है कि एफटीए डील पक्‍की होने पर भारत को इसका बड़ा लाभ मिलेगा. 17 सितंबर को बड़ा दिन व्यापार समझौते के अलावा, भारत और यूरोपीय संघ कई परिवर्तनकारी पहलों को भी आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं, जिनमें एक नया राजनीतिक-रणनीतिक नजरिया और रक्षा संबंधों का विस्तार शामिल हैं. ये कदम बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के मद्देनजर उठाए गए हैं. गौरतलब है कि यूरोपीय संघ 17 सितंबर को भारत के साथ संबंधों के लिए अपने नए रणनीतिक नजरिये को जारी करेगा. नए उपायों को भारत-यूरोपीय संघ वार्षिक शिखर सम्मेलन में जारी करने की उम्मीद है. 27 देशों से एकसाथ बातचीत भारत और ईयू दोनों पक्ष अगले तीन महीनों में कई उच्च-स्तरीय बैठकें और वार्ताएं भी करेंगे, जिनमें यूरोपीय संघ की राजनीतिक और सुरक्षा समिति का भारत दौरा भी शामिल है. इसमें यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के दूत शामिल होंगे. इसका मतलब है कि भारत एकसाथ 27 देशों से एफटीए पर बातचीत करेगा और यह पूरा होता है तो भारत को 27 देशों के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता कराने का अवसर मिलेगा.

इंडियन नेवी की ताकत बढ़ी, आंख उठाकर भी नहीं देख पाएंगे चीन-पाकिस्तान के जहाज

नई दिल्ली भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत और आधुनिक बना रहा है. बदलते हालात में समुद्री क्षेत्र की अहमियत और बढ़ गई है, इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना का फोकस अब एक मज़बूत और नेटवर्क्ड ब्लू-वॉटर फोर्स बनाने पर है. लक्ष्य है कि वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना के पास 200 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हों, ताकि समुद्री हितों की रक्षा की जा सके और चीन-पाकिस्तान से पैदा होने वाले किसी भी खतरों का मुकाबला किया जा सके. 55 युद्धपोतों पर चल रहा काम फिलहाल भारतीय शिपयार्ड में 55 बड़े और छोटे युद्धपोतों का निर्माण चल रहा है, जिसकी कुल लागत लगभग 99,500 करोड़ रुपये है. इसके अलावा नौसेना को 74 नए युद्धपोत और जहाज़ के स्वदेशी निर्माण के लिए 2.35 लाख करोड़ रुपये की शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है. इनमें नौ डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां, सात मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट, आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कोरवेट और 12 माइन काउंटरमेज़र पोत शामिल हैं. इसके साथ ही अगली पीढ़ी के चार विध्वंसक पोत और दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की योजना भी आगे बढ़ाई जा रही है, जो मौजूदा रूसी मूल के आईएनएस विक्रमादित्य की जगह लेगा. भारत के पास होंगे 230 युद्धपोत टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना अधिकारियों का कहना है कि एक मज़बूत नौसेना रातों-रात नहीं बनाई जा सकती. इसके लिए वर्षों की योजना और निर्माण की आवश्यकता होती है. आज की तारीख में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा भारत ही ऐसा देश है, जो स्वदेशी स्तर पर एयरक्राफ्ट कैरियर और परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां बना और चला सकता है. इस वक्त नौसेना के पास कुल 140 युद्धपोत हैं, जिनमें 17 डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां (ज्यादातर पुरानी) और दो परमाणु-संचालित एसएसबीएन शामिल हैं. इसके अलावा नौसेना के पास 250 से अधिक विमान और हेलिकॉप्टर हैं. पुरानी पनडुब्बियों और युद्धपोतों को चरणबद्ध तरीके से हटाते हुए नौसेना का लक्ष्य अगले दशक में 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ 350 नौसैनिक विमान और हेलिकॉप्टरों की क्षमता विकसित करना है. 2037 तक यह संख्या 230 युद्धपोत तक पहुंच सकती है. पाकिस्तानी नौसेना की ताकत बढ़ा रहा चीन इधर, चीन दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बनाकर (370 युद्धपोत और पनडुब्बियां) हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पैठ लगातार बढ़ा रहा है. अफ्रीका के जिबूती, पाकिस्तान के कराची और ग्वादर, और कंबोडिया के रीम जैसे ठिकानों के बाद बीजिंग और भी विदेशी अड्डों की तलाश में है. चीन पाकिस्तान की नौसैनिक ताकत बढ़ाने में भी मदद कर रहा है. पाकिस्तान के पास फिलहाल पांच पुरानी अगोस्ता श्रेणी की पनडुब्बियां हैं, लेकिन अगले साल से उसे आठ नई युआन या हंगोर श्रेणी की डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलने लगेंगी, जिनमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होगी और वे लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकेंगी. इससे पाकिस्तान की समुद्र में लड़ने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी. छह पनडुब्बियों के लिए भी चल रही बात भारत के लिए चिंता की बात यह है कि उसकी पारंपरिक पनडुब्बी क्षमता धीरे-धीरे घट रही है. इस कमी को पूरा करने के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के बीच छह नई डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपये की बातचीत जारी है. इनमें एआईपी तकनीक और लैंड-अटैक क्रूज़ मिसाइलें होंगी. वहीं, फ्रांसीसी मूल की तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण 32,000 करोड़ रुपये की लागत से करने की योजना फिलहाल अटकी हुई है. मौजूदा समय में भारतीय नौसेना के पास छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के अलावा सात पुरानी रूसी किलो क्लास और चार जर्मन एचडीडब्ल्यू पनडुब्बियां हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नई परियोजनाओं के समय पर पूरे होने और मौजूदा बेड़े के अपग्रेडेशन के बाद भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान की चुनौतियों का मजबूती से मुकाबला कर सकेगा.

सैनी सरकार का बड़ा तोहफा: दिवाली से पहले 25 हजार परिवारों को मिलेगा अपना प्लॉट

चंडीगढ़   हरियाणा के लोगों के लिए दिवाली से पहले एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार करीब 25,000 पात्र परिवारों को प्लॉट आवंटित करने जा रही है। ये प्लॉट उन लोगों को दिए जाएंगे जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत सरकार 17 अक्टूबर को राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित कर सकती है, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं। सभी जिलों से डीसी की रिपोर्ट भी सरकार को प्राप्त हो चुकी है, और आवंटन की प्रक्रिया पंचायत विभाग द्वारा पूरी की जाएगी। ड्रॉ पहले से हो चुका है, सूची तैयार जिन लाभार्थियों ने पहले आवेदन किया था, उन्हीं में से ड्रॉ के माध्यम से चयन किया गया है। राज्य सरकार ने 561 गांवों और 16 कस्बों की सूची तैयार की है, जहां यह प्लॉट दिए जाएंगे। ये प्लॉट करीब 50 गज क्षेत्रफल के होंगे। इस योजना के तहत 14 जिलों के 55 ब्लॉकों को शामिल किया गया है। यह कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, यानी जैसे-जैसे ज़मीन उपलब्ध होगी, वैसे-वैसे प्लॉटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। इस संबंध में सभी जिलों से डीसी की रिपोर्ट भी सरकार को मिल गई है। सभी तरह की कार्यवाही पंचायत विभाग की ओर से की जाएगी।  सभी के ड्रॉ पहले ही कर दिए जाएंगे। सरकार ने प्रदेश के 561 गांवों की सूची तैयार की है, जिनमें यह प्लॉट मुहैया कराए जाएंगे। इनके अलावा 16 अन्य कस्बों में भी 50 गज के प्लॉट दिए जाएंगे, यानी कुल मिलाकर आंकड़ा 25 हजार प्लॉट तक पहुंचेगा। 14 जिलों के 55 ब्लॉकों के गांवों में यह प्लाट मिलेंगे। जिनको ये मकान मिलेंगे, उन्होंने पहले से आवेदन किया है। आवेदनों में से ही ड्रॉ निकाले जाएंगे। हरियाणा में जिला के हिसाब से मिलेंगे प्लाट हरियाणा सरकार ने बीपीएल परिवारों को प्लाट देने की योजना बना ली है। जहां पर हर जिले के हिसाब से प्लाटों का निर्धारण कर लिया गया है। इसके तहत भिवानी 39 प्लाट, फरीदाबाद में 33 प्लाट, फतेहाबाद में 165 प्लाट, हिसार में 766 प्लाट,  कैथल में 87 प्लाट, करनाल में 2111 प्लाट, कुरुक्षेत्र में 1834 प्लाट, महेंद्रगढ में 313 प्लाट, नूंह में 449 प्लाट, पानीपत में 258 प्लाट, रोहतक में 252 प्लाट, सिरसा में 2398 प्लाट, सोनीपत में 784 प्लाट, यमुनानगर में 86 प्लाट दिए जाएंगे।  सरकार पंचायतों को देगी राशि सरकार की योजना है कि प्रति एकड़ पंचायत को राशि भी दी जाएगी। इसके तहत महाग्राम में प्रति एकड़ 50 लाख रुपए और अन्य गांवों में प्रति एकड़ 35 लाख रुपए की राशि पंचायत के खाते में जाएगी। इसके तहत चरण वाइज काम होगा। यानी जैसे-जैसे जमीन उपलब्ध होगी, प्लॉटों की संख्या बढ़ती जाएगी। जिला अनुसार प्लॉटों का आवंटन     भिवानी- 39 प्लाट     फरीदाबाद- 33 प्लाट     फतेहाबाद-165 प्लाट     हिसार- 766 प्लाट     कैथल- 87 प्लाट     करनाल- 2111 प्लाट     कुरुक्षेत्र- 1834 प्लाट     महेंद्रगढ़- 313 प्लाट     नूंह- 449 प्लाट     पानीपत- 258 प्लाट     रोहतक- 252 प्लाट     सिरसा- 2398 प्लाट     सोनीपत- 784 प्लाट     यमुनानगर- 86 प्लाट पंचायतों को मिलेगी वित्तीय सहायता इस योजना के तहत राज्य सरकार पंचायतों को प्रति एकड़ के हिसाब से वित्तीय सहायता भी देगी। महाग्रामों में: प्रति एकड़ ₹50 लाख अन्य गांवों में: प्रति एकड़ ₹35 लाख यह राशि पंचायतों के खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके। 

RTO ने कसा शिकंजा: कानपुर देहात में 1400 वाहन मालिकों पर नोटिस, बकाया रोड टैक्स ₹47 करोड़

कानपुर  कानपुर देहात आरटीओ विभाग ने रोड टैक्स बकाया वसूली को लेकर सख्त रुख अपनाया है. जिले में करीब 46 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया होने की वजह से विभाग ने 1400 वाहन मालिको को नोटिस थमाया है. विभाग का कहना है कि यदि वाहन मालिक समय पर टैक्स नहीं जमा करेंगे तो उनकी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) निरस्त कर दी जाएगी. आरटीओ प्रशासन प्रशांत तिवारी ने बताया कि जिले में हजारों वाहन टैक्स बकाया सूची में हैं. इनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और नोटिस भेजने की प्रक्रिया को तेज किया गया है. उन्होंने कहा कि यदि बकाया जमा नहीं हुआ तो संबंधित वाहनों की आरसी को भू-राजस्व की भांति वसूली के लिए जिलाधिकारी को भेजा जाएगा. इस स्थिति में वाहन सीज करने या नीलामी की कार्रवाई भी की जा सकती है. टैक्स वसूली को लेकर आरटीओ विभाग हुआ सख्त विभाग ने वाहन मालिकों को सुविधा देने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए हैं. परिवहन विभाग की वेबसाइट पर वाहन नंबर डालकर ओटीपी और एसबीआई पेमेंट गेटवे से भुगतान किया जा सकता है. वहीं, विभागीय कार्यालयों में ऑफलाइन भुगतान की व्यवस्था भी की गई है. जिले में 1400 वाहन मालिको को नोटिस थमाया आरटीओ विभाग ने साफ कर दिया है कि अब बकाया टैक्स वालों के खिलाफ कड़ाई से कदम उठाए जाएंगे. इसके साथ ही नियमित चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है और वाहन मालिकों को समय-समय पर संदेश भेजकर जागरूक भी किया जा रहा है. विभाग का उद्देश्य न केवल राजस्व वसूली बढ़ाना है बल्कि सड़क पर चलने वाले वाहनों की वैधता सुनिश्चित करना भी है.

S-400 की ढाल और Su-57 का वार… भारत का घातक कॉम्बो पाकिस्तान पर पड़ेगा भारी

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी ताकत को और मजबूत करने की योजना बना रही है. अगर रूस के साथ चल रही Su-57E स्टील्थ फाइटर जेट की बातचीत सफल होती है, तो यह S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर दक्षिण एशिया में सबसे खतरनाक जोड़ी बन सकता है. यह जोड़ा पाकिस्तान वायुसेना (PAF) के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.  S-400: भारत का आसमानी कवच भारत ने रूस से 5 S-400 ट्रायम्फ सिस्टम खरीदे हैं, जिनमें से तीन 2025 तक तैनात हो चुके हैं. यह सिस्टम 400 किलोमीटर की दूरी तक हवाई हमलों को रोक सकता है. यह विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक और नष्ट कर सकता है. इसकी खासियत है…     लंबी रेंज: 600 किमी तक दुश्मन के विमान-मिसाइल को देख सकता है. 400 किमी तक नष्ट कर सकता है.     मल्टी-टारगेट: एक साथ 300 टारगेट ट्रैक और 36 को नष्ट कर सकता है.     मोबाइल सिस्टम: इसे फटाफट एक जगह से दूसरी पर ले जाया जा सकता है, जिससे दुश्मन के लिए निशाना बनाना मुश्किल है.  भारत ने इसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनात किया है, जैसे पंजाब, राजस्थान और गुजरात में. इससे पाकिस्तान के F-16, JF-17 और नए J-10CE विमान भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही पकड़े और नष्ट किए जा सकते हैं. S-400 को भारत में सुदर्शन चक्र नाम दिया गया है, जो इसका दमदार प्रभाव दर्शाता है.  Su-57E: भारत का स्टील्थ तलवार Su-57E रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है. अगर भारत इसे खरीदता है, तो यह IAF का सबसे ताकतवर हथियार बन सकता है. इसकी खासियतें…     स्टील्थ टेक्नोलॉजी: इसका रडार क्रॉस-सेक्शन कम है, यानी दुश्मन के रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ सकते.     लंबी रेंज हथियार: यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल ले जा सकता है.     सुपर मैन्यूवरेबिलिटी: यह तेज और चुस्त है, जिससे युद्ध में बेहतर प्रदर्शन करता है.     एडवांस सेंसर: इसके सेंसर और नेटवर्क-सेंट्रिक सिस्टम IAF के अन्य हथियारों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं. Su-57E दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर सकता है, बिना पकड़े गए. यह पाकिस्तान के रडार और डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकता है. S-400 और Su-57E का जोड़ा क्यों है खतरनाक? S-400 और Su-57E मिलकर भारत को डिफेंस और ऑफेंस में बेजोड़ ताकत देते हैं. इसे इस तरह समझें… S-400: आसमानी ढाल S-400 भारत के आसमान को दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइल से बचाता है. यह पाकिस्तान के विमानों को भारतीय सीमा के पास आने से पहले ही नष्ट कर सकता है. इसकी रेंज इतनी है कि पाकिस्तान के कई एयरबेस इसके निशाने पर हैं. सरगोधा और कामरा जैसे बेस से उड़ान भरते ही PAF के विमान पकड़े जा सकते हैं. Su-57E: हमलावर कटार Su-57E स्टील्थ होने से पाकिस्तान के रडार से बचकर उनके इलाके में घुस सकता है. यह PAF के विमान, बेस या अन्य टारगेट पर सटीक हमला कर सकता है. इसके हथियार लंबी दूरी तक मार कर सकते हैं, जिससे PAF जवाब देने से पहले ही नुकसान उठाए. PAF की रणनीति बेकार पाकिस्तान अक्सर अपने JF-17 और J-10CE विमानों की संख्या बढ़ाकर IAF की तकनीकी बढ़त को कम करने की कोशिश करता है. लेकिन S-400 की लंबी रेंज और Su-57E की स्टील्थ क्षमता के सामने यह रणनीति फेल हो सकती है. PAF के विमान न तो भारत में घुस पाएंगे और न ही अपने बेस पर सुरक्षित रहेंगे. मनोवैज्ञानिक दबाव युद्ध में तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है. S-400 और Su-57E की मौजूदगी से PAF का आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है. उन्हें पता होगा कि भारत का डिफेंस सिस्टम उनके हर हमले को रोक सकता है. Su-57E उनके बेस पर चुपके से हमला कर सकता है. इससे उनकी रणनीति सीमित हो जाएगी. पाकिस्तान के लिए चुनौती पाकिस्तान के पास अभी F-16, JF-17 और J-10CE जैसे विमान हैं, लेकिन ये S-400 की रडार रेंज और Su-57E की स्टील्थ क्षमता के सामने कमजोर पड़ते हैं. पाकिस्तान के पास चीनी HQ-9 डिफेंस सिस्टम है, जिसकी रेंज 250 किमी है, लेकिन यह S-400 से कमजोर है.  भारत की रणनीति IAF अपनी रणनीति को लेयर्ड डिफेंस (कई परतों वाला रक्षा तंत्र) पर बना रही है. S-400 के साथ भारत के पास अकाश, बराक-8 और स्पाइडर जैसे सिस्टम भी हैं. Su-57E के आने से IAF को स्टील्थ हमले की ताकत मिलेगी. भारत की स्वदेशी नेत्रा AEW&C और अकाशतीर सिस्टम S-400 और Su-57E के साथ मिलकर एक मजबूत नेटवर्क बनाएंगे. यह नेटवर्क दुश्मन के हर हमले को रोक सकता है. जवाबी हमला कर सकता है.

MP में दिवाली तोहफा: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द शुरू, यात्रा होगी और तेज़

भोपाल   देश में दिवाली से पहले वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की तैयारी है। रेलवे सूत्रों के अनुसार दिल्ली से पटना के रूट पर देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सितंबर में ही शुरू की जाएगी। बाद में दिल्ली से भोपाल और अहमदाबाद के लिए ये सेवा शुरू होगी। बता दें कि इससे पहले चर्चा थी कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सबसे पहले एमपी की राजधानी भोपाल से नई दिल्ली के लिए चलाई जाएगी। लेकिन अब नई दिल्ली-भोपाल के रूट पर चलाई जाने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारत की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी। दिल्ली से अहमदाबाद जाने वाली वंदे भारत का मार्ग अभी तय नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि यह जयपुर हो कर जा सकती है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दिल्ली से करीब 1000 किमी दूरी पर बसे शहरों के लिए शुरू करने की योजना है। माना जा रहा है कि पटना के लिए पहली वंदे भारत स्लीपर बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले शुरू की जाएगी जिसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का इंतजार है। वहीं भोपाल वासियों समेत पूरे एमपीको वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का बेसब्री से इंतजार है। देशभर में अभी दौड़ रहीं 150 चेयरकार वंदे भारत ट्रेनें देश में अभी 150 चेयरकार वंदे भारत ट्रेनें दिन के शिड्यूल में चल रही है। रात के सफर को सुगम व बेहतर बनाने के लिए अब वंदेभारत स्लीपर ट्रेन (Vande Bharat Sleeper Train) तैयार की गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों संसद में कहा था कि चेन्नई की इंट्रीगल कोच फैक्ट्री में वंदे भारत स्लीपर के 10 सैट तैयार हो जाएंगे और फैक्ट्री ने 50 अतिरिक्त वंदेभारत स्लीपर का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। ऐसे होगी समय की बचत नई दिल्ली से पटना: 972 किमी, अन्य ट्रेनों में समय- 17 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- 11 घंटे नई दिल्ली से अहमदाबाद: (वाया जयपुर): 1000 किमी, अन्य ट्रेन-14 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- करीब 8-9 घंटे नई दिल्ली से भोपाल (New Delhi to Bhopal): 790 किमी, अन्य ट्रेनों में समय 13 घंटे, वंदे भारत स्लीपर- 6-7 घंटे

नए वाहनों पर बड़ी राहत: सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट से मोटरयान कर में 50% छूट

नए वाहनों पर "सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉजिट" से मोटरयान कर में 50 प्रतिशत की छूट दिये जाने का निर्णय मध्यप्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश-2025 की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार कोमंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा पंजीकृत वाहन स्क्रेपिंग सुविधा में स्क्रेपिंग को बढ़ावा देने के लिए बीएस-I और पूर्ववती तथा बीएस-॥ व्यापक उत्सर्जन मानक मानदंडों वाले वाहनों को जारी "सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉजिट" के विरुद्ध पंजीकृत किये जाने वाले नए गैर परिवहन यानों तथा नए परिवहन वाहनों पर 50 प्रतिशत की मोटरयान कर में छूट प्रदान किये जाने की स्वीकृति शर्तों के अधीन प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार समस्त यान जो व्यापक उत्सर्जन मानक भारत चरण 1 (बीएस-1) मानक और पूर्ववती व्यापक उत्सर्जन मानक मानदंडों अनुसार विनिर्मित किये गए है तथा मध्यम मालयान/भारी मालयान/ मध्यम यात्री मोटरयान/भारी पात्री मोटरयान जो व्यापक उत्सर्जन मानक भारत चरण 2 (बीएस-।।) मानदंडों के अनुसार विनिर्मित किये गए हैं, को इसके तहत छूट प्रदान की गयी हैं। प्रदेश में वर्ष 2024-25 में 1563 नए वाहन पंजीकरण पर लगभग 17 करोड़ 5 लाख रूपये की छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में BS-1 एवं BS-II श्रेणी के लगभग 99 हजार मोटरयान ऑनरोड है। इनको मोटरयान कर में 50% छूट दिए जाने पर 100 करोड़ रूपये का वित्तीय भार आएगा। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पंजीकृत वाहन स्क्रेपिंग सुविधा में स्क्रेपिंग को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश को 200 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्राप्त होगी। भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारत स्टेज (बीएस-1) उत्सर्जन मानदण्डों को सबसे पहले अप्रैल 2000 में लाया गया था। स्वीकृति अनुसार जिस व्यक्ति के नाम से तत्समय "Certificate of Deposih धारित होगा उसी व्यक्ति के नाम पर नया वाहन क्रय किये जाने पर मोटर यान कर में छूट प्रदान की जाएगी। वाहन स्वामी दवारा नया वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन और लाभ प्राप्त करने के लिए, "Certificate of Deposit एक आवश्यक और पर्याप्त दस्तावेज होगा, इस प्रमाण-पत्र की वैधता जारी होने की तिथि से 3 वर्ष होगी। "सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉज़िट" इलेक्ट्रॉनिक रूप से विनिमय योग्य होगा। प्रत्येक नए मालिक को "Certificate of Deposit" का हस्तांतरण फॉर्म 2 डी के अनुसार ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। "Certificate of Deposit" का एक बार उपयोग हो जाने पर, उस क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय या डीलर दवारा उसे वाहन डेटाबेस में "रद्द" के रूप में चिह्नित कर दिया जाएगा, जिसके द्वारा उक्त प्रमाण-पत्र के धारक को लाभ प्रदान किया गया है। मोटरयान कर में छूट तभी प्रदान की जाएगी, जब नया वाहन मध्यप्रदेश राज्य में पंजीकृत किसी आर.वी.एस.एफ द्वारा ही जारी "Cerificate of Deposit के विरुद्ध पंजीकृत किया जाये। यदि "Certificate of Deposit" मध्यप्रदेश राज्य के अलावा किसी अन्य राज्य में स्थित आर.वी.एस.एफ. दवारा जारी किया गया हो तो मोटरयान कर में छूट प्रदान नहीं की जाएगी। जिस श्रेणी का वाहन स्क्रैप किया गया है उसी श्रेणी का नया वाहन क्रय करने पर मोटर यान कर में छूट प्रदान की जाएगी। जीवनकाल कर जमा किये जाने की स्थिति में गैर-परिवहन/परिवहन यानों पर 50% मोटरयान कर में एकमुश्त छूट प्रदान की जाएगी। जिन वाहनों पर मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक आधार पर कर उद्ग्रहित किया जाता है, उन्हें मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक कर में 8 वर्ष तक 50% की छूट प्रदान की जाएगी। मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग द्वारा 8 सितंबर 2022 को जारी अधिसूचना के अंतर्गत प्रदाय की जाने वाली मोटरयान कर की छूट उन वाहनों पर लागू नहीं होगी, जिन्हें इस अधिसूचना के अंतर्गत मोटर यान कर छूट प्रदान की गई है। मध्यप्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की नगर पालिका परिषद नगर परिषदों के अध्यक्ष पद का निर्वाचन आगामी आम-निर्वाचन में प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा कराये जाने के लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 लाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा वर्ष 1999 से 2014 तक लगातार किया जाता रहा है। कोविड महामारी के आ जाने से वर्ष 2019 में निर्वाचन नहीं हो सके। इसके बाद वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से किया गया। वर्ष 2027 के नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाना है। उपरोक्त स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की संबंधित धाराओं में संशोधन के लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 लाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।  

कृषि उद्योग समागम नवंबर में सीहोर में, कार्यक्रम के लिए गठित हुई समिति

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि विकास एवं किसानों को आधुनिक तकनीकों से सीधे जोड़ने के दृष्टिकोण को क्रियान्वित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य शासन द्वारा इस वर्ष 'कृषि उद्योग समागम-2025 (एग्रीकल्चर इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव) का आयोजन नवंबर माह में सीहोर में किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन वृहद स्तर पर कई विभागों की सहभागिता से किया जाएगा। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन द्वारा समिति गठित की गई है। समिति के अध्यक्ष सचिव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग होंगे। आयुक्त सह संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विभाग को सदस्य एवं आयुक्त सह संचालक, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को सदस्य सचिव बनाया गया है। सदस्यों में आयुक्त, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, आयुक्त औद्योगिकी नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, आयुक्त सहकारिता, आयुक्त जनसंपर्क, संचालक मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास, संचालक पशुपालन एवं डेयरी, संचालक कृषि0 अभियांत्रिकी, प्रबंध संचालक मण्डी बोर्ड, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम और मिशन संचालक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन शामिल हैं।  

PM ओली के बाद राष्ट्रपति ने भी दिया इस्तीफा, काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की जीत परेड

काठमांडू  नेपाल में बीते 30 घंटे के समय में सब कुछ बदल चुका है. युवाओं के प्रदर्शन के सामने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक ने घुटने टेक दिए और इस्तीफा देने को मजबूर हुए. सोशल मीडिया बैन के ख़िलाफ़ युवाओं के आक्रोश से ज्यादातर शहरों में हिंसा हुई. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से लेकर गृहमंत्री के घर तक जला दिए. नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में आग लगा दी। इसके अलावा, पीएम ओली, राष्ट्रपति, गृहमंत्री के निजी आवास पर तोड़फोड़ के बाद आगजनी की।प्रदर्शनकारियों ने पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा को घर में घुसकर पीटा। वहीं, वित्त मंत्री विष्णु पोडौल को काठमांडू में उनके घर के नजदीक दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक प्रदर्शनकारी उनके सीने पर लात मारता दिख रहा है। इन हिंसक घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। उन्हें सेना हेलिकॉप्टर से अ‍ज्ञात स्थान पर ले गई है। इस हिंसा में अब तक 22 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं।प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, शेर बहादुर देउबा और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के निजी आवासों को भी आग के हवाले कर दिया। इस्तीफे के बाद भी क्यों शांत नहीं हो रहा है नेपाल? नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा तक राष्ट्रपति की ओर से स्वीकार कर लिया गया है. हालांकि, राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शनकारी शांत क्यों नहीं हो रहे हैं.  दिल्ली में नेपाल दूतावास की बढ़ाई गई सुरक्षा नेपाल में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों की ओर से बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग तेज होते जा रही है. इस बीच भारत में नेपाल दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली में नेपाल का दूतावास बाराखंभा रोड पर स्थित है.  चार साल में भारत के 4 पड़ोसी देशों में 'तख्तापलट' बीते चार सालों में भारत के कई पड़ोसी मुल्कों में तख्तापलट हुआ है. इनमें अफगानिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद अब नेपाल भी शामिल हो गया है. पड़ोसी मुल्कों की तख्तापलट की कहानी आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं – भारत के चार पड़ोसी देशों में जन आक्रोश के आगे झुकी सरकार  बीरगंज में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया बिहार में पूर्वी चंपारण के रक्सौल शहर से सटे नेपाल के बीरगंज में आज सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. स्थिति तनावपूर्ण बना हुआ है. प्रशासन ने हिंसक प्रदर्शन पर लगाम लगाने के लिए पूरे शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया. काठमांडू ने प्रदर्शनकारियों ने निकाला जुलूस मार्च नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.  राजधानी काठमांडू की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा है. पुतलीसडक में जुलूस मार्च निकाला गया. प्रदर्शनकारी पुलिस के दंगा निरोधक उपकरण के साथ मार्च करते नज़र आए. युवाओं के आंदोलन की 7 प्रमुख वजहें 1. नेपोटिज्म: जेन-जी को भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी ने निराश किया। भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) और चहेतों को कुर्सी पर बैठाने से नेताओं के बच्चों की विदेशी यात्राएं, ब्रांडेड सामान, शानो शौकत की पार्टियां सोशल मीडिया पर चर्चित होने लगीं। 2. सोशल मीडिया बैन: लोगों को लगा कि उनकी आवाज दबा दी गई है। कई युवा इसके जरिए कमाई भी कर रहे थे। इससे गुस्सा भड़का। 3. तीन बड़े घोटाले: 4 साल में 3 बड़े घोटाले सामने आए। 2021 में 54,600 करोड़ रुपए का गिरी बंधु भूमि स्वैप घोटाला, 2023 में 13,600 करोड़ रुपए का ओरिएंटल कोऑपरेटिव घोटाला और 2024 में 69,600 करोड़ रुपए का कोऑपरेटिव घोटाला। इससे युवाओं में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था। 4. सियासी अस्थिरता: 5 साल में 3 सरकारें आईं। जुलाई 2021 में शेर बहादुर देउबा पीएम। दिसंबर 2022 में प्रचंड पीएम बने। जुलाई 2024 से ओली आए। 5. बेरोजगारी-आर्थिक असमानता: बेरोजगारी दर 2019 में 10.39% थी, अभी 10.71% है। महंगाई दर 2019 में 4.6% थी। अब 5.2% है। आर्थिक असमानता हावी। 20% लोगों के पास 56% संपत्ति। 6. विदेशी दबाव: ओली सत्ता में आए तो चीन की ओर झुकाव बढ़ा। पहले सरकारों ने कई फैसले अमेरिकी प्रभाव में लिए। सोशल मीडिया बैन के बीच सिर्फ चीनी ऐप टिक-टॉक चलता रहा। युवाओं को लगता है कि बड़े देशों के दबाव में नेपाल मोहरे जैसा इस्तेमाल हो रहा है। 7. भारत से बढ़ती दूरी: ओली पीएम बने तो लिपुलेख दर्रे को नेपाल के नक्शे में दिखाया। चीन से नजदीकी बढ़ाई। दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हुए तो नेपाल पर आर्थिक दबाव पड़ा। इससे भी युवाओं में बेचैनी।