samacharsecretary.com

रेखा गुप्ता अटैक केस: गंभीर धाराओं में FIR, हत्या का प्रयास भी शामिल

 नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने हत्या की कोशिश  का मामला दर्ज किया है. आरोपी की पहचान राजेश के रूप में हुई है, जिससे दिल्ली पुलिस, खुफिया ब्यूरो (IB) और स्पेशल सेल की टीमें पूछताछ कर रही हैं. पुलिस आरोपी की 5 से 7 दिन की रिमांड मांगेगी. राजेश बुधवार सुबह ही ट्रेन से राजकोट से दिल्ली आया था और सिविल लाइंस के गुजराती भवन में रुका था.  दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता पर हमला: आरोपी पर पहले से दर्ज हैं पांच मामले . मुख्यमंत्री पर हमले के मामले में पुलिस स्टेशन सिविल लाइंस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1)/132/221 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने सरकारी कर्मचारी पर हमला करने के आरोप में बीएनएस की धारा 132, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के आरोप में बीएनएस की धारा 221 और हत्या कोशिश के लिए धारा 109 के तहत मामला दर्ज किया है.  पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. मामले की आगे की जांच चल रही है. पुलिस सभी संभावित पहलुओं से जांच कर रही है. आईबी और स्पेशल सेल की टीम भी आरोपी राजेश से पूछताछ कर रही हैं. हमले से पहले दोस्त से किया बात… आरोपी राजेश ने हमले से पहले गुजरात में अपने दोस्त को फोन पर बताया था कि वह शालीमार बाग स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुच गया है. जांच में पता चला है कि यह पहली बार था जब आरोपी दिल्ली आया था. अब पुलिस आरोपी राजेश की 5 से 7 दिन की रिमांड मांगेगी, जिससे उससे मामले से जुड़ी और जानकारी हासिल की जा सके. सीएम पर हमला करने वालों को कितनी कड़ी मिलती है सजा दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर उनके सरकारी आवास सिविल लाइंस में जनसुनवाई के दौरान हमला किए जाने का मामला सामने आया है. बुधवार सुबह जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने पहले सीएम को कुछ कागज सौंपे और उसके बाद अचानक उन पर हमला करने की कोशिश की. मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने तुरंत आरोपी को काबू कर लिया और हिरासत में ले लिया. बताया जा रहा है कि सीएम रेखा गुप्ता को कंधे और सिर पर चोट आई है. इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. आरोपी की पहचान और पूछताछ दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपना नाम राजेश भाई खीमजी बताया है और दावा किया है कि वह गुजरात के राजकोट का रहने वाला है. फिलहाल पुलिस उसकी सीएम को चोट पहुंचाने की मंशा की जांच कर रही है. पूछताछ में पता चला कि वह किसी रिश्तेदार की जेल से रिहाई के लिए आवेदन लेकर आया था. घटना के समय मौजूद लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता लोगों की शिकायतें सुन रही थी. तभी अचानक यह हमला हुआ एक चश्मदीद ने कहा हमने पीछे से शोर सुना. वहीं जब तक समझ पाए पुलिस ने हमलावर को पकड़ लिया था. हमले के बाद ही मुख्यमंत्री बिल्कुल सदमे में थी. कानून क्या कहता है-बीएनएस धारा115 कानूनन मुख्यमंत्री या किसी भी व्यक्ति पर इस तरह हमला करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 के तहत अपराध है. इसमें स्वेच्छा से चोट पहुंचाने की बात कही गई है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य को चोट पहुंचाने का काम करता है तो इसे अपराध माना जाएगा. वहीं इसके लिए अपराधी पर एक साल तक की सजा या 10 हजार तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. हालांकि यह मामला सिटिंग सीएम पर हमले का है इसलिए पुलिस अन्य धाराओं के तहत भी गंभीर जांच कर सकती है. ऐसे मामले जो बीएनएस 115 में आते हैं     बीएनएस 115 में किसी को थप्पड़ या मुक्का मारने का मामला आता है.     इसके अलावा किसी को जानबूझकर धक्का देना भी इसी धारा के अंतर्गत आता है.     अगर किसी पर कोई व्यक्ति वस्तु फेंकता है तो भी उस व्‍यक्‍त‍ि पर बीएनएस 115 के अंदर मामला दर्ज किया जा सकता है     अगर किसी के शरीर को जोर से पकड़कर चोट पहुंचाने की कोशिश की गई तो उस पर भी बीएनएस 115 के तहत मामला दर्ज किया जाता है विपक्ष और नेताओं की प्रतिक्रियाएं हमले की घटना के बाद भाजपा ने इसे सुरक्षा में गंभीर चूक बताया है और जिम्मेदारी तय करने की मांग की. वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी इस घटना की निंदा की और कहा कि अगर राजधानी में मुख्यमंत्री ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा होता है.

ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप्स पर नियंत्रण: लोकसभा में नया कानून पारित, ,समझें क्यों जरूरी है ये नया कानून

नई दिल्ली सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को रेग्युलेट करने वाला महत्वपूर्ण बिल लोकसभा से पास हो गया है. इसका मकसद ऑनलाइन मनी गेम्स और सट्टेबाजी पर पूरी तरह से बैन लगाना और ई-स्पोर्ट्स व सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है. एक अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 45 करोड़ लोग इन ऑनलाइन मनी गेम्स के चक्कर में फंसकर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक गंवा देते हैं.   भारत ने मोदी सरकार के कार्यकाल में बीते एक दशक में यूपीआई, सेमीकंडक्टर से लेकर 5जी टेक्नोलॉजी में तेजी से डेवलप किया है. हमारे देश में जो डिजिटल क्रांति आई है उसे देख दुनिया भी हैरान है. डिजिटल दुनिया में भारत ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं. लेकिन, इसी तेजी के बीच ऑनलाइन गेमिंग की अंधेरी दुनिया में खतरे भी कई गुना बढ़ गए हैं. इसलिए मोदी सरकार ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने जा रही है. बुधवार को मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में 'प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025' को पेश किया गया.  प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 को ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 भी कहा जा रहा है. सरकार का उद्देश्य इसके पीछे असली पैसे वाले खेलों पर लगाम लगाना है. साथ ही ई-स्पोर्ट्स और स्किल-बेस्ड सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है.  आने वाले समय में फैंटेसी लीग, कार्ड गेम्स, ऑनलाइन लॉटरी, पोकर, रमी और सट्टेबाजी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने जा रही है. इनसे जुड़ी फाइनेंशियल लेन-देन और एडवरटाइजमेंट भी अब अपराध के कैटेगरी में आएंगे. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए कैबिनेट बैठक में ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को मंजूरी दे दी गई थी.      ऑनलाइन मनी गेमिंग को बैन करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में अहम विधेयक पेश किया है.     हर साल अनुमानित 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेम्स की लत में फंसकर आर्थिक नुकसान करते हैं.     इन गेम्स की वजह से भारत में लोगों को हर साल 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होता है. सरकार क्यों लाई ये विधेयक? केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग से लोगों को हो रहे वित्तीय और सामाजिक नुकसान को रोकने के लिए यह बिल लाई है. इसका नाम प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 है. सरकारी अनुमानों के मुताबिक, हर साल करीब 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेम्स के जाल में फंसकर नुकसान उठाते हैं. इन गेम्स की लत सिर्फ पैसों का नुकसान ही नहीं बल्कि एक सामाजिक संकट बन चुकी है.  सरकारी सूत्रों ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार, इन गेम्स की वजह से आम लोगों को हर साल करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है. इसकी लत की वजह से सैकड़ों परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके हैं. कई तो आत्महत्या और हिंसा जैसा गंभीर कदम भी उठा लेते हैं.  ऑनलाइन गेमिंग बिल के 3 प्रमुख हिस्से ई-स्पोर्ट्स: इस बिल के जरिए ई-स्पोर्ट्स को पहली बार कानूनी मान्यता दी जा रही है. अब तक देश में ऑनलाइन स्पोर्ट्स गेम्स का कोई कानूनी आधार नहीं है.  ऑनलाइन सोशल गेम्स: सरकार ने ऑनलाइन सोशल गेम्स को कानूनी मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है. ये गेम्स आम लोगों के एजुकेशन के काम आते हैं ऑनलाइन मनी गेम्स: ऐसे ऑनलाइन गेम, जिनमें पैसों का लेन-देन होता है, उन पर बैन लगाने का प्रस्ताव है. इन गेम्स को प्रमोट करने वाले और ऐसी गेमिंग सर्विस देने वाली कंपनियों पर भी सख्त कार्रवाई के प्रावधान हैं. ऑनलाइन मनी गेम्स का प्रचार करने वालों और फंड ट्रांसफर करने वालों पर भी गाज गिरेगी.  नियम तोड़ने पर कितनी होगी सजा?     ऑनलाइन मनी गेमिंग सर्विस देने वालों को तीन साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.     ऑनलाइन मनी गेम्स का विज्ञापन करने वालों को दो साल तक की जेल या 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा.     अगर कोई बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी सजा बढ़कर पांच साल तक हो सकेगी, जुर्माना भी ज्यादा लगेगा.  ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) के चीफ एग्जिक्यूटिव रोलैंड लैंडर्स के मुताबिक, यह सेक्टर अब 2 खरब रुपये तक बढ़ चुका है. वित्त वर्ष 2025 में इस सेक्टर को 31 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल हुआ था और 20 हजार करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का भुगतान किया गया था.  लैंडर्स के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष तक भारत में 50 करोड़ से अधिक लोगों ने ऑनलाइन गेमिंग सर्विस का इस्तेमाल किया था. उनका कहना है कि इस बिल के कानून बनने से 400 से ज्यादा कंपनियां बंद हो सकती हैं और दो लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो जाएंगी.  कड़ाई क्यों जरूरी? सरकारी सूत्रों ने बताया है कि ये प्लेटफॉर्म केवल गेम्स नहीं हैं. बल्कि ये लोगों को मनोवैज्ञानिक जाल में फंसाते हैं और लोग इसकी लत के शिकार हो जाते हैं. उन्हें वित्तीय घाटा भी होता है. कई मामले तो ऐसे भी हैं जिसमें लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं.  इसके साथ ही इन प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे देश से अवैध रूप से भारत में पैसे आते हैं (मनी लॉन्ड्रिंग), आतंकियों को फंडिंग और डिजिटल धोखाधड़ी की जाती है. बिल के बड़े प्रावधान क्या हैं? ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: वैध खेल के रूप में मान्यता, ट्रेनिंग, नीति समर्थन और इवेंट्स. सोशल और शैक्षिक गेम्स को मंजूरी: जो सीखने, जागरूकता और सकारात्मक उपयोग को बढ़ाएं. रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध: ऑफर, विज्ञापन और लेन-देन सब बैन. ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी: राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी, रजिस्ट्रेशन और कार्रवाई की ताकत. कड़े दंड: ऑपरेटरों को 3 साल तक जेल और 1 करोड़ तक जुर्माना. विज्ञापन करने वालों को 2 साल जेल और 50 लाख जुर्माना. बार-बार अपराध करने वालों पर 5 साल तक की सजा और 2 करोड़ तक का दंड. कॉर्पोरेट पर भी शिकंजा इस बिल के पास होने के बाद इसके ज़रिए कॉर्पोरेट पर भी शिकंजा कसा जाएगा. कंपनी के अधिकारी और मैनेजमेंट सीधे जिम्मेदार होंगे. हालांकि स्वतंत्र निदेशकों को बचाव मिलेगा.  भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के साथ इसके प्रावधान को जोड़े गए हैं. जिसके तहत जांच एजेंसियां बिना वारंट सर्च, सीज और गिरफ्तारी कर पाएंगी. ये बिल क्यों है जरूरी? रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यह बिल भारत को वैश्विक गेमिंग … Read more

योगी सरकार ने दी सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारी

देश में कहीं भी उर्वरक की दिक्कत नहीं, कालाबाजारी पर योगी सरकार सख्त योगी सरकार ने दी सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारी पहली अप्रैल से 18 अगस्त 2025 तक हुई 42.64 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री  पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 4.37 लाख मीट्रिक टन अधिक यूरिया की हुई बिक्री मुख्यमंत्री ने दिया निर्देश- जनपदों में निरंतर मॉनीटरिंग करें अधिकारी, किसानों को न हो परेशानी सीएम योगी ने किसानों से की अपील- भंडारण न करें, जब चाहें, आवश्यकतानुरूप लें खाद   लखनऊ  योगी सरकार ने एक बार फिर साफ किया है कि प्रदेश में कहीं भी उर्वरकों की दिक्कत या कमी नहीं है। किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। सरकार ने खाद के अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है। कृषि विभाग ने सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारी दी। खरीफ सत्र 2024 में इस अवधि (18 अगस्त) तक 36.76 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हुई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 42.64 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री की जा चुकी है।  मुख्यमंत्री ने की किसानों से अपील  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से अपील की कि खाद का भंडारण न करें। जितनी आवश्यकता है, उतना खाद लें, जब-जब आवश्यकता है, तब-तब खाद लें। हर जनपद में शिकायत प्रकोष्ठ है। किसी भी परेशानी की स्थिति में अवगत कराएं। मुख्यमंत्री ने उर्वरक की ओवररेटिंग, कालाबाजारी करने वालों को कड़ी चेतावनी भी दी है। उन्होंने जनपद में तैनात अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण करने, किसानों से संवाद स्थापित करने और समस्याओं का निस्तारण करने का निर्देश दिया है। कृषि विभाग ने बताया कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है। पिछले वर्ष से अधिक हुआ खाद वितरण प्रदेश में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अभी तक अधिक खाद वितरण किया जा चुका है। विगत वर्ष 27.25 लाख मीट्रिक टन यूरिया वितरण हुआ था, इस वर्ष अभी तक 31.62 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। डीएपी 2024 में वितरण 5.28 लाख मीट्रिक टन का रहा, इस वर्ष यह बिक्री 5.38 लाख मीट्रिक टन हुई। एनपीके उर्वरक (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व पोटेशियम मिश्रण) का वितरण विगत वर्ष 2.07 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष 2.39 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) 0.25 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष इस वर्ष 0.46 लाख मीट्रिक टन वितरित हुआ। वहीं एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का वितरण 2024 में 1.91 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष किसानों को 2.79 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। खाद की उपलब्धता यूरियाः 18 अगस्त तक प्रदेश में 37.70 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता रही। इसमें से 31.62 लाख मीट्रिक टन की खरीद किसानों द्वारा की जा चुकी है।  डीएपी: 18 अगस्त तक 9.25 लाख मी. टन की उपलब्धता रही, जिसमें से 5.38 लाख मी. टन की खरीद किसानों ने कर ली है।   एनपीके: 18 अगस्त तक 5.40 लाख मी०टन की उपलब्धता रही। इसमें से 2.39 लाख मीट्रिक टन की खरीद किसानों ने कर ली।  गत वर्ष की तुलना में 4.37 लाख मीट्रिक टन अधिक यूरिया की बिक्री खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य पूर्ण हो गया है। मुख्य फसल धान में टॉप-ड्रेसिंग हेतु प्रतिदिन औसतन 49564 मी०टन यूरिया की खपत/बिक्री हो रही है। गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष 16.04% (मात्रा 4.37 लाख मी०टन) अधिक यूरिया उर्वरक की बिक्री हुई है। बॉक्स  खाद उपलब्धता की सम्पूर्ण स्थिति (को-ऑपरेटिव स्टॉक और प्राइवेट स्टॉक) मंडल                  यूरिया           डीएपी         एनपीके                           सहारनपुर               18734         4577         3075 मेरठ                       39089       17195        8858 आगरा                    43824        28329       21502 अलीगढ़                 29597        18377       16464 बरेली                    41610         20790       28159 मुरादाबाद              46450         18159       27402 कानपुर                  52100         41168       30301 प्रयागराज               57212         21286       25580 झांसी                     28267        27164       16506   चित्रकूट                  25650          9110         3975 वाराणसी                43294         27689       14627 मीरजापुर                13626          7840         3804    आजमगढ़               34184         24481        9070 गोरखपुर                 34126         25756        15755 बस्ती                     12306        10439            4611 देवीपाटन               17955         18681          9017 लखनऊ                 41066         37964         36736 अयोध्या                28960          27997         25250 कुल-                  608049         387003     300693  नोटः यह आंकड़े खऱीफ सत्र 2025 में 18 अगस्त तक के हैं। यह मात्रा मीट्रिक टन में है।

दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 25.5 लाख का इनाम घोषित 13 शामिल

दंतेवाड़ा बस्तर में नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है. लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. 21 में से 13 नक्सलियों पर कुल 25 लाख 50 हजार का इनाम घोषित था. सभी आत्मसर्पित माओवादी अपने-अपने क्षेत्र में नक्सली बंद सप्ताह के दौरान रोड खोदना, पेड़ काटना, नक्सली बैनर, पोस्टर एवं पाम्प्लेट लगाने जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं.

यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना

अखिलेश के समय आत्महत्या को मजबूर होते थे किसान, 86 लाख किसानों का योगी सरकार ने किया कर्जमाफ : कृषि मंत्री  – यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना – बोले- सपा सरकार में न बोआई कर पाते थे किसान, न मिलता था न्यूनतम समर्थन मूल्य  – प्रदेश में खाद-यूरिया की कोई कमी नहीं, जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वालों के खिलाफ कसा जा रहा शिकंजा : शाही  – अनियमिता पाए जाने पर अबतक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस किये गये निरस्त : कृषि मंत्री  – हाई प्राइज़ और टैगिंग करने वाले 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 के लाइसेंस सस्पेंड और 4 के रद्द : कृषि मंत्री – खाद-यूरिया की कालाबाजारी करने वाले 93 लोगों के खिलाफ दर्ज किये गये हैं मुकदमे : सूर्य प्रताप शाही  – सीमावर्ती जनपदों में बढ़ाई गई है चौकसी, खाद-यूरिया के तस्करों और माफिया को बख्शा नहीं जाएगा : कृषि मंत्री  – रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य : शाही  – प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध : कृषि मंत्री – खाद वितरण में अनियमिता पाए जाने पर सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को किया गया है निलंबित : शाही  लखनऊ  प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने  प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को किसानों के बारे में बोलने का कोई हक नहीं है। उनके शासनकाल में किसान न तो समय से बोआई कर पाते थे और न ही उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की सुविधा मिलती थी। उस दौर में कर्ज में डूबे 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये योगी सरकार को माफ करने पड़े। यदि सपा सरकार इतनी ही किसान हितैषी थी तो किसानों को आत्महत्या क्यों करनी पड़ी। कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार कस रही शिकंजा कृषि मंत्री ने साफ कहा कि प्रदेश में खाद और यूरिया की कोई कमी नहीं है। दिक्कत केवल जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले तत्व पैदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 को निलंबन और 4 का लाइसेंस रद्द किया गया है। 93 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को निलंबित किया गया है। वहीं, महाराजगंज और सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पकड़े गए हैं जिन्होंने बिना जोत के ही दर्जनों बोरी यूरिया उठा ली। मंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसे माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों को हर हाल में मिलेगी खाद सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि राज्य सरकार हर किसान को समय से खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। फिलहाल प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध हैं। खरीफ 2024 में अब तक 32 लाख 7 हजार मीट्रिक टन खाद की बिक्री हुई है, जो पिछले साल की तुलना में साढ़े चार लाख मीट्रिक टन अधिक है। उन्होंने कहा कि 15 से ज्यादा जनपदों में 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की खपत हुई है, फिर भी कहीं कमी नहीं होने दी गई। रबी सीजन के लिए सरकार ने किये हैं बड़े इंतजाम कृषि मंत्री ने बताया कि रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले वर्ष 132.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई हुई थी। इस बार 4 लाख हेक्टेयर का विस्तार किया जाएगा। किसानों को 10 लाख क्विंटल अनुदानित बीज उपलब्ध कराया जाएगा। गेहूं, जौ, मक्का, राई और अलसी समेत दलहन-तिलहन के बीज किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 12.80 लाख मिनी किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। गन्ना किसानों को गन्ने के साथ ही दलहन-तिलहन की बोवाई के लिए प्रेरित किया जाएगा और उन्हें नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराई जाएगी।  फर्टिलाइजर की मांग और सब्सिडी की दी जानकारी शाही ने कहा कि रबी सीजन के लिए 41 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 17 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 7.08 लाख मीट्रिक टन एनपी, 1.78 लाख मीट्रिक टन एसएसपी और 2 लाख मीट्रिक टन पोटाश की मांग भारत सरकार से की जाएगी। उन्होंने बताया कि यूरिया पर केंद्र सरकार 1908 रुपये प्रति बोरी तक सब्सिडी दे रही है और किसानों को मात्र 266.50 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर यह सब्सिडी न हो तो यूरिया की कीमत 2200 रुपये तक पड़ती। डीएपी, एनपी, एसएसपी और पोटाश पर भी सरकार बड़ी मात्रा में सब्सिडी दे रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। खाद्यान उत्पादन और जीएसवीए में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कृषि मंत्री ने दावा किया कि समय से खाद, बेहतर बीज और सिंचाई सुविधाओं के कारण प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में करीब 200 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है। इस समय यह 737 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। गन्ना उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। किसानों की बढ़ी पैदावार का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जीएसवीए में जबरदस्त उछाल आया है, जो सपा शासन के दौरान दो लाख करोड़ रुपये था और अब बढ़कर सात लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। किसानों को किया आश्वस्त प्रेस वार्ता के अंत में सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों को किसी भी हाल में निराश नहीं होने दिया जाएगा। राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है। सीमावर्ती जिलों में खाद की तस्करी रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने दोहराया कि असली किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले माफियाओं को हर हाल में सख्त कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। पत्रकार वार्ता के दौरान राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और कृषि विभाग के अधिकारीगण मौजूद रहे।  प्रेस वार्ता के महत्वपूर्ण बिंदु * प्रदेश में खरीफ 2024 का रकबा बढ़कर 105.93 लाख हेक्टेयर पहुंचा। * 2013-14 में खरीफ का रकबा 90.46 लाख हेक्टेयर था। * अब तक खरीफ रकबे में 15.47 … Read more

डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस

16 सितम्बर से शुरू होगा विशेष अभियान, किसानों की 100% रजिस्ट्री का लक्ष्य डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक जनपद बिजनौर सबसे आगे  लखनऊ उत्तर प्रदेश में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री को लेकर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 16 सितम्बर, 2025 से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जिलाधिकारियों को फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि राजस्व अधिकारियों को मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिकार अभिलेख में “मालिकों के नाम” को आधार के अनुसार सही किया जा सके।  फार्मर रजिस्ट्री में बिजनौर सबसे आगे  प्रदेश में कुल 2.88 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक 50 प्रतिशत से अधिक लगभग 1.45 करोड़ किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक बिजनौर जिला सबसे आगे है, जहां 58% से अधिक रजिस्ट्री पूर्ण हो चुकी है। इसके बाद हरदोई (57.84%), श्रावस्ती (57.47%), पीलीभीत (56.89%) और रामपुर (56.72%) टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। जो किसान अभी तक रजिस्ट्री का हिस्सा नहीं हैं, उनके डाटा का फील्ड ऑफिसर्स द्वारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसमें अमरोहा, आजमगढ़, बलरामपुर, एटा और जौनपुर जैसे जिलों में 100 प्रतिशत वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। पीएम किसान योजना में 100% पंजीकरण पर जोर योगी सरकार ने जिलाधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किसानों का 100% पंजीकरण अगली किस्त जारी होने से पहले पूरा हो। इसके साथ ही सभी जिलाधिकारियों को व्यापक आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियां चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से चेताया गया है कि पिछड़ रहे जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं।

साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर

चीन, पाकिस्तान जैसे देशों की 'ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी' का डटकर मुकाबला करना बेहद जरूरी  -सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपीएसआईएफएस में जारी तीन दिनी सेमिनार के अंतिम दिन एक्सपर्ट्स ने कई प्रमुख विषयों पर पैनल डिस्कशन में लिया हिस्सा -साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर -अपराधियों को सजा दिलाने तथा न्यायिक प्रक्रिया को सही तरीके से लागू कराने के लिए पारंपरिक तौर-तरीकों से साथ भविष्य आधारित तकनीक के प्रयोग पर हुआ मंथन -फॉरेंसिक साइंस में उन्नति, जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे विषयों और बदलते परिदश्यों को लेकर हुई सकारात्मक चर्चा लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए प्रदेश के समक्ष उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस (यूपीएसआईएफएस) में जारी तीन दिवसीय सेमिनार के तीसरे व अंतिम दिन बुधवार को कई अहम विषयों पर लेकर चर्चा हुई। इसमें साइबर सुरक्षा से लेकर फॉरेंसिक साइंस की उन्नति से लेकर कई विषयों पर पैनल डिस्कशन का आयोजन हुआ जिसमें जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण, एआई व आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।              इसी कड़ी में साइबर क्राइम को लेकर एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की ओर से भारत की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की बढ़ती कोशिशों पर लगाम लगाने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान की ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी का सामना करने के लिए भारत को तेजी से सिक्योर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करनेकी जरूरत है। साइबर क्राइम की सबसे अहम कड़ी साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। वहीं, फॉरेंसिक की फील्ड में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए पीड़ितों को न्याय व सहायता दिलाने के साथ दोषियों को दंड दिलाने पर जोर दिया गया। इस दौरान भारत समेत विश्व के कई मामलों का न केवल उल्लेख किया गया बल्कि, उससे मिलने वाली सीख पर भी चर्चा की गई।         छोटा सा परिवर्तन ला सकता है बहुत बड़ा इंपैक्ट बुधवार को पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेते हुए महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव ब्रजेश सिंह ने साइबर खतरे व पुलिसिंग के वैश्विक परिदृश्य को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज छोटा सा परिवर्तन बहुत बड़ा इंपैक्ट ला सकता है। हिज्बुल्ला पेजर अटैक इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि साइबर किल चेन रक्तबीज की तरह है। भारत का सबसे बड़े पोर्ट यानी 3 महीने के लिए जीएनपीटी का पोर्ट ऑपरेट नहीं हो पाया एक मालवेयर के कारण। यह साइबर किल चेन का उदाहरण था। साइबर क्राइम इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि लॉकबिट को तोड़ने के लिए 11 देशों की सुरक्षा एजेंसियों को साथ आकर काम करना पड़ा। यानी, साइबर क्राइम पर आकर ट्रेडिशनल पुलिसिंग के मेथड फेल हो जाते हैं। साइबर किल चेन मॉड्यूलर होता है। रेकॉन, वेपनाइजेशन, डिलीवरी व उत्पीड़न समेत 7 स्टेज इसका हिस्सा हैं।  संकट को रियल टाइम में मैप करना जरूरी ब्रजेश सिंह ने कहा कि संकट को रीयल टाइम में मैप करना जरूरी है। एक बार खतरा भांपने के बाद सबूतों को चिह्नित कर उन्हें सुरक्षित करने की जरूरत है। साइबर केसेस की भी चेन ऑफ कस्टडी भी फॉरेंसिक्स की तरह ही काम करती है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में मनी कटऑफ जरूरी हो जाता है। इसमें वॉलेट, ब्लॉकचेन, डिजिटल मनी समेत जैसी सभी तथ्यों पर कार्य करने की जरूरत है। इसके अगले चरण में क्रिमिनल इंफ्रास्ट्रक्चर को सीज करने की जरूरत है। इसके अतिरिक्त, पोटेंशियल विक्टिम को अलर्ट करने व रिस्पॉन्स मैकेनिज्म पर कार्य करने की जरूरत है और उनकी मदद की जानी चाहिए। साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए मदद, परामर्श और न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया त्वरित होनी चाहिए। डिजिटल अरेस्ट समेत जितने भी साइबर फ्रॉड हैं उसे न केवल रोकना है बल्कि हर केस से सीख लेकर एक विस्तृत मैकेनिज्म तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने आरबीआई का साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की तारीफ करते हुए जोर देकर कहा कि भारत में डिजिटल सॉवरेनिटी में फोकस करना होगा, इससे केस सॉल्विंग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी कहा कि हेल्थ डेटा कितना जरूरी है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अगर हमें पता होता कि जिन्ना को तपेदिक है तो शायद स्थिति अलग होती। साइबर सिक्योरिटी भी कृषि की तरह है, इसे बाहर से इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है, इसे भारत में ही विकसित करना होगा।  तेजी से बदल रही है हैकिंग की प्रक्रिया ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट रॉबी अब्राहम ने वर्चुअल माध्यम से पैनल डिस्कशन में जुड़कर हैकिंग की बदलती प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले प्रोग्रामिंग, स्क्रिप्टिंग, ओएस, नेटवर्किंग प्रोटेकॉल,शेलकोड राइटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता था। उन्होंने विभिन्न मालवेयर की जानकारी देते हुए बताया कि फिलीपींस के एक स्टूडेंट ने आई लव यू वॉर्म बनाया था जिसे ईमेल से सर्कुलेट किया गया जिससे 8.7 बिलियन यूएस डॉलर का विश्व को नुकसान हुआ। इसी प्रकार, कन्फिगर वॉर्म के जरिए एक रूसी साइबर क्राइम ग्रुप ने 9 बिलियन यूएस डॉलर का नुकसान कुल 190 देशों में किया। क्रिप्टोलॉकर के पीछे रूसी साइबर क्राइम ग्रुप का हाथ होने की आशंका है जिसके जरिए 27 मिलियन बिटक्वॉइन की ग्लोबली कमाई की गई और इसको फिरौती के रूप में इस्तेमाल किया गया। पर आज के परिदृष्य में चीजें बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, अब ई-मेल व सोशल मीडिया पर रैनसमवेयर और फिशिंगवेयर के जरिए साइबर हमले हो रहे हैं। इसके जरिए ब्राउजिंग डाटा, क्रिप्टो वॉलेट समेत कॉन्फिडेंशियल जानकारियों तक हैकर्स का एक्सेस बढ़ जाता है। अब हैकिंग के बजाए हैकर्स लॉगिंग पर फोकस करते हैं। इससे वह सिस्टम एक्सेस कर ऐसे क्रिडेंशियल्स को हासिल कर लेते हैं जो या तो सीधे तौर पर फायदा पहुंचाता है या उसे डार्क वेब पर बेच देते हैं। इसे रोकने के लिए रेगुलर सिक्योरिटी ट्रेनिंग, सभी अकाउंट को एमएफए इनेबल करना, एंटीवायरस का इस्तेमाल, ई-मेल और मैसेज के प्रति … Read more

निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान

फुटवियर-लेदर नीति 2025 : निजी औद्योगिक पार्कों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान 25 से 100 एकड़ तक के पार्कों को 45 करोड़ तक मिलेगी आर्थिक सहायता  100 एकड़ से बड़े औद्योगिक पार्कों को 80 करोड़ रुपए तक मिलेगा प्रोत्साहन  औद्योगिक पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को मिलेंगे रोज़गार के अवसर  फुटवियर और लेदर सेक्टर को मिलेगी वैश्विक पहचान, यूपी बनेगा निवेश का नया केंद्र लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फुटवियर, लेदर और नॉन लेदर क्षेत्र विकास नीति-2025 के तहत सबसे ज़्यादा फोकस निजी औद्योगिक पार्कों पर किया है। इन पार्कों को निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट दी जाएगी। सरकार ने नीति में स्पष्ट किया है कि ऐसे पार्कों को विकसित करने वाले डेवलपर्स को 25 प्रतिशत पात्र पूंजी निवेश या अधिकतम राशि के रूप में वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह मदद पार्क के आकार के अनुसार होगी।  सरकार की मंशा, रोजगार के साथ मिले वैश्विक पहचान इस नीति के जरिये सरकार चाहती है कि राज्य में बड़े पैमाने पर निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना हो। ऐसे पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा। फुटवियर और लेदर सेक्टर को वैश्विक पहचान मिलेगी। यूपी निवेश का नया केंद्र बनेगा। यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से 5 साल तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत सभी नए प्रोजेक्ट, विस्तार या विविधीकरण करने वाले औद्योगिक उपक्रम वित्तीय प्रोत्साहनों के पात्र होंगे। पात्र औद्योगिक इकाइयों में कंपनी, साझेदारी, सोसाइटी, ट्रस्ट और निजी उपक्रम शामिल होंगे। कैसा होना चाहिए निजी औद्योगिक पार्क? ▪️न्यूनतम 25 एकड़ भूमि पर विकसित होना अनिवार्य। ▪️प्रत्येक पार्क में कम से कम 5 औद्योगिक इकाइयां होंगी। ▪️कोई भी इकाई 80% से अधिक भूमि का उपयोग नहीं कर सकेगी। ▪️कुल क्षेत्रफल का 25% हिस्सा हरियाली और सामान्य अवसंरचना के लिए सुरक्षित रखना होगा। ▪️25 एकड़ से 100 एकड़ तक के पार्कों का निर्माण 5 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  ▪️100 एकड़ एवं इससे अधिक के पार्कों का निर्माण 6 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी? ▪️25 से 100 एकड़ तक के पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹45 करोड़। ▪️100 एकड़ से बड़े पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹80 करोड़। ▪️सभी पार्क विकासकर्ताओं को 100% स्टाम्प शुल्क में छूट। किन मदों पर खर्च मान्य वित्तीय सहायता केवल बुनियादी ढांचा विकास पर खर्च की जा सकेगी। इसमें सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, ड्रेनेज, बाउंड्री वॉल, पावर सप्लाई, जल आपूर्ति, बैंकिंग सुविधाएं, वेयरहाउस, होटल, हॉस्पिटल, ट्रेड फेयर/डिस्प्ले सेंटर, ट्रांसपोर्ट सुविधा और स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट जैसे कार्य शामिल होंगे। किस पर नहीं मिलेगा लाभ? ▪️भूमि की खरीद लागत। ▪️ईंधन, वाहन, फर्नीचर, पुरानी मशीनरी। ▪️अन्य सेवा शुल्क।    

खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन

बिहार राज्य फसल सहायता योजना: 31 अक्टूबर तक करें आवेदन  खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगा  20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगी सहायता राशि  नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इस योजना के लिए हैं पात्र   पटना राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत खरीफ 2025 के मौसम के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन 31 अक्टूबर, 2025 तक निःशुल्क किए जा सकते हैं। इस योजना के तहत फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए ही सहायता राशि दी जाएगी। रैयत, गैर-रैयत तथा आंशिक रूप से रैयत एवं गैर-रैयत श्रेणी के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इसके लिए पात्र हैं। योजना के तहत अधिसूचित फसलों से संबंधित जिलों के नाम विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इस योजना के बारे में बताते हुए सहकारिता विभाग के मंत्री डॉ॰ प्रेम कुमार ने कहा है कि बिहार राज्य फसल सहायता योजना बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी, पूर्णतः निःशुल्क पहल है, जिसकी मदद से प्राकृतिक आपदाओं में क्षतिग्रस्त फसलों के लिए बिना किसी प्रीमियम के किसानों को वित्तीय सहारा प्रदान किया जाता है। सहकारिता विभाग इसे और अधिक पारदर्शी एवं सरल बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है।  यह है आवेदन की प्रक्रिया कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसान सीधे योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा सत्यापित रैयत श्रेणी के किसान केवल रैयत श्रेणी अथवा आंशिक रूप से रैयत तथा गैर-रैयत श्रेणी में ही आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय किसानों को फसल और बुआई के रकबे की जानकारी देनी होगी। फसल कटाई के समय प्रयोग आधारित उपज दर के आंकड़ों के आधार पर योग्य ग्राम पंचायतों या अधिसूचित क्षेत्र इकाई का चयन किया जाएगा। इसके बाद चयनित पंचायतों के आवेदक किसानों को नियमानुसार दस्तावेज अपलोड करने होंगे। योजना के निर्देशों के अनुसार, चयनित ग्राम पंचायतों के आवेदक किसानों का सत्यापन होने के बाद उनके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। गलत या भ्रामक जानकारी देने पर आवेदन अस्वीकार कर दिए जाएंगे। इस संबंध में अधिक जानकारी सहकारिता विभाग की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।

राजधानी में इमारत ढही, मलबे में दबे कई लोग; अब तक 3 की मौत

नई दिल्ली  बारिश के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़ा हादसा हुआ है। दिल्लीमें तीन मंजिला इमारत ढह गई। दरियागंज में बिल्डिंग के मलबे में कई लोग दब गए। प्रारंभिक रिपोर्ट में हादसे में तीन लोगों की मौत की खबर है। वहीं कई लोग मलबे में दबे हुए हैं। रेसक्यू ऑपरेशन जारी है। मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। यह घटना दोपहर 12.14 बजे की है। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस के अलावा दमकल की चार गांड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं। बचाव कार्य जारी है। पुलिस ने बताया कि दरियागंज थाना क्षेत्र में बुधवार को एक इमारत गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने सूचना मिलते ही राहत और बचाव का काम शुरू किया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि तीन लोगों के शवों को मलबे से निकाला गया। इनकी पहचान जुबैर, गुलसागर, तौफीक के तौर पर हुई है। शवों को एलएनजेपी अस्पताल ले जाया गया है। सूचना मिलते ही डीडीएमए सहित नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बताया कि बुधवार को एक इमारत के ढह जाने से तीन लोगों की मौत हो गई। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के एक अधिकारी ने बताया कि घटना की सूचना दोपहर 12 बजकर 14 मिनट पर मिली, जिसके बाद दमकल की चार गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। पुलिस बोली- कानूनी कार्रवाई होगी डीएफएस अधिकारी ने कहा कि तीन लोगों को मलबे से निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट मिलने तक बचाव अभियान जारी था। इमारत ढहने के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने बताया कि बचाव कार्य जारी है। तथ्यों की पुष्टि के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।