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मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली में सम्मानित

मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर उल्लेखनीय कार्य के लिये नई दिल्ली में होंगे सम्मानित मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली में सम्मानित शिक्षक दिवस पर मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा सम्मान भोपाल प्रदेश के 2 शिक्षकों को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया जायेगा। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों में दमोह जिले की प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल शासकीय प्राथमिक शाला देवरान टपरिया में पदस्थ हैं। आगर-मालवा जिले के भेरूलाल ओसारा माध्यमिक शिक्षक शासकीय ईपीईएस माध्यमिक शाला खेरिया सुसनेर में पदस्थ हैं। प्रदेश के समस्त 55 जिलों में से 45 जिलों में 145 शिक्षकों द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 के लिये अपना पंजीयन कराया गया था। इसके बाद राज्य स्तरीय चयन समिति ने 6 शिक्षकों की अनुशंसा केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को भेजी थी। इस प्रक्रिया के बाद प्रदेश के 2 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिये हुआ है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय पुरस्कार के लिये चयनित शिक्षकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय कार्यों के लिये सम्मानित होने वाले शिक्षक प्रदेश के अन्य शिक्षकों के लिये भी प्रेरणा का कार्य करेंगे। शीला पटेल प्राथमिक शिक्षक श्रीमती शीला पटेल ने अपनी शाला में बच्चों को खेल-खेल में आनंदमयी शिक्षा दी है। उन्होंने गीत, कविता, कहानी और अभिनय के माध्यम से फाउण्डेशन लिटरेसी मिशन (एफएलएन) का क्रियान्वयन किया है। इसी के साथ उन्होंने अवकाश के दिनों में महिला साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये विशेष कक्षाओं का संचालन किया। श्रीमती शीला पटेल ने अवकाश के दिनों में समर कैम्प एवं विंटर कैम्प का आयोजन किया। उन्होंने अपनी पदस्थापना के शाला के गाँव की हर गली व मोहल्लों में जगह-जगह पर बच्चों को सिखाने के उद्देश्य से शैक्षिक पटल व लर्निंग प्लेस तैयार करवाया। शिक्षिका श्रीमती पटेल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये शून्य लागत पर टीचिंग लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार किया। बच्चों में समझ को बढ़ावा देने के लिये समूह में आपस में चर्चा और उनकी सहभागिता को बढ़ाने का काम प्रमुख रूप से किया। प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा प्राथमिक शिक्षक भेरूलाल ओसारा ने अपनी पदस्थ शाला में विषय-वस्तु की गहन समझ के साथ शिक्षण कार्य किया और बच्चों में नैतिकता और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित किया। विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिये ईको क्लब और क्लैप क्लब के संयोजन से ठोस कार्य किया। बच्चों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पौधरोपण, प्लास्टिक उन्मूलन और हरित जीवन-शैली के बारे में नवाचार करते हुए शिक्षा दी। शिक्षक भेरूलाल ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिये नुक्कड़ नाटक, रैलियों, पोस्टर, निबंध प्रतियोगिता के साथ लेखन की वर्कशॉप भी निरंतर आयोजित की। उन्होंने डिजिटल युग की महत्ता को समझते हुए विद्यार्थियों में ऑनलाइन सुरक्षा जागरूकता फैलाने के लिये महत्वपूर्ण काम किया। बच्चों को साइबर अपराध के खतरों, सोशल मीडिया का सुरक्षित रूप से उपयोग, पासवर्ड की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी दी। उनके इस कार्य से आसपास के अनेक शिक्षकों ने भी प्रेरणा ली है।  

टाइगर सफारी के बाद अब चीता सफारी का रोमांच, कूनो में करें बुकिंग

भोपाल   टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश अब चीता स्टेट भी बन गया है. मध्यप्रदेश में अब पर्यटक खुले जंगलों में चीता सफारी का मजा ले सकेंगे. दरअसल, मध्यप्रदश के कूनो नेशनल पार्क में रोमांचक चीता सफारी शुरू होने जा रही है. इसमें पर्यटक खुली जीप में बैठकर कूनो के खुले जंगल में घूम रहे चीतों को देख सकेंगे. कूनो में हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी. कूनो में चीता सफारी 1 अक्टूबर के बाद कूनो पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए कूनो सफारी यादगार बनाने के लिए पर्यटन विभाग 5 अक्टूबर से कूनो नेशनल पार्क के पास कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट एंड फेस्टिवल और 12 सितंबर से गांधी सागर फॉरेस्ट रिट्रीट शुरू करने जा रहा है. इसमें पर्यटकों के लिए टेंट सिटी, एडवेंचर गेम्स जैसी की सुविधाएं मिलेंगी. खुली जीप में बैठकर नजदीक से देखें चीते मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में कूनो को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं. 17 सितंबर 2022 को 8 चीते नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे. इसके बाद 18 फरवरी 2023 के 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से भारत आए थे. अब कूनो नेशनल पार्क में पर्यटक खुले जंगल में चीतों का दीदार कर सकेंगे. चीतों के दीदार के साथ प्राकृतिक सुंदरता का मजा ले सकेंगे टूरिस्ट  पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया, '' कूनो में चीतों के दीदार होने की उम्मीद अब बहुत ज्यादा है. चीतों की संख्या भी अब बढ़ गई है. कूनो के हीरा गेट और टिक्टोली गेट से 1 अक्टूबर के बाद से सफारी शुरू होगी. टूरिज्म जोन इस बार ओपन रहेगा. इस बार जो भी कूनो जाएंगे वह चीता देख पाएंगे. भारत में चीता देखना अपने आप में सपने जैसा है, जो अब संभव हो सकेगा.'' कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर हुई 30 कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हालांकि, पिछले तीन सालों के दौरान कई बार कूनो से दुखद खबरें भी आईं, लेकिन अब कूनो में चीतों के कुनबे में संख्या 30 पहुंच गई है. कूनो नेशनल पार्क में 9 वयस्क सहित कुल 26 चीते मौजूद हैं. 9 वयस्क चीतों में 6 मादा और 3 नर हैं. खासबात यह है कि इनमें 17 भारत में ही जन्मे शावक हैं और खुले जंगल में घूम रहे हैं. कूनो में पर्यटन बढ़ाने पर वन विभाग व पर्यटन विभाग का जोर कूनो में 16 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं. बाकी दो मादा चीता वीरा और नीरवा अपने नन्हें शावकों के साथ हैं, जबकि बाकी दो नर चीतों को गांधी सागर में शिफ्ट किया गया है. इस तरह मध्यप्रदेश में कुल 30 चीता मौजूद हैं. कूनो और गांधी सागर में कर रहे डेवलपमेंट अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया, '' चीता आने के पहले कूनो टूरिज्म के मैप पर नहीं था, लेकिन अब कूनो टूरिज्म साइट के मैप पर प्रमुखता से आ गया है. इसी उद्देश्य के लिए कूनो और गांधीसागर साइट को डेवलप किया गया है. दूसरे प्रदेश जो नहीं कर पा रहे, वह मध्यप्रदेश कर रहा है. दूसरे राज्यों में उनके प्रचलित स्थान है, जहां लगातार पर्यटकों की भीड़ बढ़ती जा रही है, जबकि मध्यप्रदेश में नए 50 स्थानों को टूरिज्म के लिए डेवलप किया जा रहा है.'' अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इससे मध्यप्रदेश का पर्यटन में विविधता बढ़ रही है और पर्यटक अलग-अलग स्थानों पर पहुंच रहे हैं. कूनो और बांधवगढ़ भी तेजी से पर्यटन स्थल के रूप में अपना स्थान तेजी से बना रहे हैं.  

बस एक दिन का इंतजार… GST छूट से TV-AC समेत 175 सामान होंगे सस्ते

नई दिल्ली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक  शुरू हो चुकी है और कल इस बैठक के तहत लिए गए फैसले का ऐलान होगा, जिसका ब्रेसब्री से इंतजार कंपनियों से लेकर आम आदमी तक को है. क्‍योंकि 15 अगस्‍त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से एक बड़ा ऐलान करते हुए दिवाली पर नए GST रिफॉर्म लाने की बात कही थी. इस ऐलान के बाद जीएसटी परिषद (GST Council) की यह पहली बैठक है.  जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में कई बड़े ऐलान हो सकते हैं. साथ ही दिवाली पर लागू होने वाले नए GST Reform के तहत दो टैक्‍स स्‍लैब और आम आदमी से जुड़ी चीजें सस्‍ती करने पर मुहर लग सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि दो दिन चलने वाले इस बैठक में दरों को युक्तिसंगत बनाने के मुद्दे पर चर्चा होने की उम्‍मीद है, जिसमें डेली यूज के साथ-साथ महंगी वस्‍तुएं भी सस्‍ती होंगी.  2 स्‍लैब करने पर होगी चर्चा  केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार, अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब हो सकते हैं. इसमें 28 प्रतिशत वाले स्लैब में आने वाली सभी वस्तुएं, हानिकारक वस्तुओं को छोड़कर, 18 प्रतिशत वाले स्लैब में शामिल हो सकती हैं और 12 प्रतिशत वाले स्लैब की वस्‍तुएं 5 प्रतिशत वाले स्लैब में आ सकती हैं. 40 प्रतिशत का एक और स्लैब होगा, जो 6-7 वस्तुओं पर लगाया जाएगा, जिनमें से ज्‍यादातर हानिकारक और लग्‍जरी वस्‍तुएं होंगी. भारत में टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। बुधवार, 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST काउंसिल की 56वीं बैठक चल रही है। इस बैठक में 175 से ज्यादा सामानों और सेवाओं पर GST दरें घटाने का प्रस्ताव चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) रखने का प्लान है। वहीं, लक्ज़री आइटम्स और ‘सिन गुड्स’ पर 40% का अलग टैक्स स्लैब भी लाने पर विचार हो रहा है। 12-28% स्‍लैब में आने वाली कुछ खास वस्‍तुएं     घी     मक्खन     चीज     पैक्ड फ्रोजन सब्जि‍यां     फ्रूट जूस (अधिकतर, नॉन-एरेटेड)     छाता      सोलर वॉटर हीटर     कृषि उपकरण      एयर कंडीशनर     सीमेंट      कार/एसयूवी हेल्‍थ और इंश्‍योरेंस को जीएसटी से छूट  मंत्रियों के समूहों का प्रस्‍ताव है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम को जीएसटी दायरे से अलग रखना चाहिए. यानी इसपर टैक्‍स नहीं लगाया जाना चाहिए. हालांकि इससे राजस्‍व में गिरावट आएगी. तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के अनुसार, व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर पूरी छूट से अनुमानित रूप से सालाना 9,700 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा.  क्या हो सकते हैं बड़े बदलाव?     5% GST स्लैब में आएंगे: टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू, रेडी-टू-ईट फूड्स, बटर, चीज़, स्नैक्स और आम कपड़े-खाद्य उत्पाद।     18% GST स्लैब में: टीवी, AC, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, सीमेंट और ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट (पहले 28% टैक्स लगता था)।     40% टैक्स स्लैब: लक्ज़री कारें, 350cc से ऊपर की बाइकें, तंबाकू और प्रीमियम प्रोडक्ट्स। ऑटो सेक्टर पर बड़ा असर     छोटी कारें और हाइब्रिड गाड़ियां (1200cc तक) पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो सकता है।     ₹20-40 लाख तक की महंगी इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स 5% से बढ़कर 18% हो सकता है।     दोपहिया वाहनों पर राहत: इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक 28% से घटकर 18% GST की उम्मीद।     350cc से ऊपर की बाइक (जैसे रॉयल एनफील्ड) पर 40% टैक्स का प्रपोजल, कंपनियों को झटका लग सकता है। ️ आम जनता को क्या मिलेगा फायदा?     रोजमर्रा की चीज़ें जैसे साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और खाने का सामान सस्ता होगा।     टीवी, AC, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमत घट सकती है।     टू-व्हीलर्स और कई कारें सस्ती होंगी।     लक्ज़री प्रोडक्ट्स और प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें महंगी हो जाएंगी। क्यों हो रहे हैं GST रिफॉर्म्स? प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से कहा था कि भारत को नए GST ढांचे की जरूरत है। हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर 50% इंपोर्ट ड्यूटी लगाने के बाद यह कदम उपभोक्ताओं की जेब को राहत और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उठाया जा रहा है।     SBI रिसर्च का अनुमान: GST सुधारों से अगले 1 साल में GDP में 0.60% की बढ़त हो सकती है।     खुदरा महंगाई में भी 20-25 बेसिस पॉइंट की गिरावट की उम्मीद। सरकार को कितना होगा नुकसान?     टैक्स कटौती और स्लैब घटाने से सरकार को सालाना ₹60,000 करोड़ से ₹1.7 लाख करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।     सरकार इसे GST कम्पनसेशन सेस फंड (₹45,581 करोड़ सरप्लस) और सिन गुड्स पर 40% टैक्स से भरने की योजना बना रही है।     कम टैक्स से खपत बढ़ने की उम्मीद, जिससे लंबी अवधि में राजस्व फिर बढ़ सकता है। ️ राज्यों को भी मिलेगा सुरक्षा कवच राज्यों को GST कटौती से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए नया कंपनसेशन मैकेनिज्म बनाने पर भी चर्चा हो रही है।

रूस का संकेत: भारत को अतिरिक्त S-400 डिफेंस सिस्टम की सप्लाई होगी तेज

नई दिल्ली भारत और रूस के रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं. दोनों देशों के संबंधों में मजबूती का एक और प्रमाण है हथियारों की डील. ऐसे में रूस और भारत S-400 मिसाइल सिस्टम की सप्लाई बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं.रूस के डिफेंस एक्सपोर्ट अधिकारी के मुताबिक, भारत और रूस के बीच सतह से हवा में मार करने वाली S-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त सप्लाई के लिए बातचीत जारी है. रूस के मिलिट्री विभाग के एक बड़े अधिकारी दिमित्री शुगायेव का कहना है कि भारत के पास पहले से ही S-400 मिसाइल सिस्टम है और इसकी नई खेप के लिए बातचीत जारी है. दरअसल भारत ने पांच S-400 Triumf सिस्टम के लिए 2018 में रूस के साथ 5.5 अरब डॉलर के एग्रीमेंट पर साइन किया था. चीन की लगातार बढ़ती जा रही सैन्य शक्ति का मुकाबला करने के लिए भारत ने रूस के साथ यह एग्रीमेंट किया था. हालांकि, हथियारों की इस सप्लाई में देरी हुई. इस डील के तहत आखिरी दो यूनिट 2026 और 2027 तक मिलेगी.  बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के हर हमले को भारत के S-400 डिफेंस सिस्टम ने बखूबी ध्वस्त किया था. एयर डिफेंस में मजबूत साझेदारी S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम रूस की सबसे उन्नत तकनीक है. इसकी रेंज 400 किलोमीटर है जो 36 लक्ष्यों को एक साथ नष्ट कर सकती है. साथ ही विमान, मिसाइल और ड्रोन से बचाव करती है.  S-400 मिसाइल सिस्टम भारत की हवाई सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. यह मिसाइल सिस्टम 80 लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और निशाना बना सकता है, जो इसे दुश्मन के लिए खतरनाक बनाता है. ऑपरेशन सिंदूर में इसकी सफलता ने भारत को क्षेत्र में हवाई वर्चस्व बनाए रखने में मदद की है.  भारत ने 2021 से पंजाब, राजस्थान और पूर्वोत्तर में S-400 को तैनात किया है. यह डील अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी को दिखाती है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जिलों में उर्वरक वितरण में अव्यवस्था के लिए कलेक्टर होगें उत्तरदायी

जिला प्रशासन, उर्वरक उपलब्धता और वितरण के संबंध में किसान संगठनों से निरंतर सम्पर्क और संवाद बनाए रखें उर्वरक वितरण व्यवस्था की हो सघन मॉनीटरिंग और अनुचित गतिविधियों पर करें कठोर कार्यवाही अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत के लिए हो तत्काल कार्यवाही जनहानि और पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलब्ध कराई जाए राज्य शासन हर स्थिति में किसानों के साथ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिलों में उर्वरक वितरण के संबंध में जिला प्रशासन आवश्यक व्यवस्था बनाए। उपलब्ध उर्वरक की उचित वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से निरंतर संवाद और संपर्क में रहे। उर्वरक वितरण की व्यवस्था में किसान संगठन के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाए। जिलों में यदि उर्वरक वितरण को लेकर अव्यवस्था होती है तो उसके लिए जिला कलेक्टर उत्तरदायी होंगे। राज्य सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों और जिलों में उर्वरक वितरण की स्थिति की बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना सहित अधिकारी उपस्थित थे। सभी जिले के कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारी वर्चुअली जुड़े। किसानों को जिले में उपलब्ध उर्वरक की वास्तविक स्थिति से निरंतर करावाये अवगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में उर्वरक उपलब्धता की सघन समीक्षा की जाए। साथ ही जिले में उपलब्ध उर्वरक के स्टॉक की जानकारी जनप्रतिनिधियों से भी साझा करें, इससे किसानों को जिले में उर्वरक उपलब्धता की वास्तविक स्थिति से अवगत कराने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन डबल लॉक, पैक्स और निजी विक्रय केंद्रों का आकस्मिक सत्यापन और उनकी मॉनिटरिंग अनिवार्य रूप से करें। अतिरिक्त विक्रय केन्द्र की आवश्यकता होने पर उनका संचालन तत्काल आरंभ किया जाए। कृषि, सहकारी बैंक, विपणन संघ के अधिकारी निरंतर सम्पर्क में रहें। उर्वरक से संबंधित अवैध गतिविधियों के लिए हुईं 53 एफ.आई.आर और 88 लायसेंस किए निरस्त बैठक में खरीफ 2025 के लिए यूरिया, डी.ए.पी, एन.पी.के, एस.एस.पी, एम.ओ.पी तथा डी.ए.पी + एन.पी.के की उपलब्धता, ट्रांजिट की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही नेनो एवं जैविक उर्वरक वितरण कार्यक्रम के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बताया गया कि उर्वरक की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अवैध परिवहन और नकली उर्वरक आदि से संबंधित प्रकरणों पर कार्यवाही करते हुए 53 एफ.आई.आर दर्ज की गई और 88 लायसेंस निरस्ती, 102 लायसेंस निलंबन सहित 406 विक्रय प्रतिबंधित की कार्यवाही की गई। उर्वरक की बेहतर वितरण व्यवस्था में हुए नवाचारों का करें अनुसरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उर्वरक वितरण व्यवस्था के संबंध में धार, दमोह, जबलपुर और रीवा जिले के कलेक्टरों से चर्चा की। दमोह कलेक्टर ने बताया कि किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से सतत् सम्पर्क और संवाद सुनिश्चित करते हुए वितरण व्यवस्था में उनका सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही टोकन वितरण और उर्वरक वितरण को अलग-अलग किया गया है। टोकन तहसील कार्यालय से बांटे जा रहे हैं और वितरण विक्रय केन्द्रों से किया जा रहा है। जबलपुर कलेक्टर ने बताया कि किसानों के लिए टोकन वितरण की व्यवस्था फोन कॉल द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। उर्वरक वितरण केन्द्रों पर डिस्पले बोर्ड लगाए गए हैं। बोर्ड न पर टोकन नंबर प्रदर्शित कर उर्वरक वितरण किया जा रहा है। डिस्पले बोर्ड पर जिले में उपलब्ध उर्वरकों की मात्रा भी प्रदर्शित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य जिलों को भी इस प्रकार के नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति में सजग और सक्रिय रहे पुलिस प्रशासन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जिन-जिन क्षेत्रों में भी अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को क्षति हुई है, वहां राहत के लिए तत्काल कार्रवाई आरंभ की जाए। साथ ही जनहानि और पशु हानि की स्थिति में 24 घंटे में राहत उपलबध कराई जाए। बाढ़ के दौरान अस्थाई कैम्प व्यवस्था, राशन वितरण, भोजन वितरण आदि की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सामग्री सभी संभावित स्थानों पर उपलब्ध हो। आगामी दिनों में भी भारी वर्षा की संभावना है। सभी जिलों में पुलिस प्रशासन सक्रिय और सजग रहते हुए पुल-पुलिया में बैरिकेटिंग और बाढ़ की स्थि‍ति में पुल क्रास न करने की चेतावनी की व्यवस्था जैसी सभी आवश्यक सावधानियां सुनिश्चित करें। प्रदेश में दर्ज की गई औसत से 21 प्रतिशत अधिक वर्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1 जून से 2 सितम्बर तक 971.5 एमएम अर्थात् 38.24 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जो औसत से 21 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 21 जिलों में भिण्ड, छतरपुर, श्योपुर, ग्वालियर, नीमच, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, अलीराजपुर, सिंगरौली, राजगढ़, मण्डला, सीधी, टीकमगढ़, गुना, नरसिंहपुर, दतिया, रतलाम, उमरिया, रायसेन और सिवनी में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। सर्वाधिक वर्षा गुना, मण्डला, श्योपुर, रायसेन और अशोकनगर में दर्ज हुई। प्रदेश के प्रमुख बांधों में जलभराव की स्थित की जानकारी भी प्रस्तुत की गई।  

देश का सबसे बड़ा PM मित्र पार्क धार में, निवेशकों के लिए CM मोहन यादव का खुला न्योता

भोपाल 'मध्यप्रदेश कपास उत्पादन में अग्रणीय राज्य है। गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच टैक्सटाइल सेक्टर का पीएम मित्र पार्क बनाया जा रहा है। इसके संचालन के लिए प्रदेश में कच्चे माल से लेकर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह विक्रमादित्य का परिक्षेत्र रहा है, जहां बेहतर कानून व्यवस्था है। मध्यप्रदेश निवेशकों की अपेक्षाओं पर हमेशा खरा उतरे इसके लिए हर संभव व्यवस्थाएं विकसित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश नहीं, अब यह मॉडल प्रदेश हो गया है।' यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 सितंबर को नई दिल्ली में कही। सीएम डॉ. यादव 'इंवेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन पीएम मित्र पार्क' के इंटरेक्टिव सेशन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए सारी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां निवेश करने उद्योगपतियों को लाभ होगा। उनके लिए प्रदेश में सारी सुविधाएं मौजूद हैं। बता दें, देश के 7 पीएम मित्र पार्क से एक लाख करोड़ का निवेश और 10 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर स्तर पर किसान, बाजार और परंपराओं को गति प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में टैक्सटाइल सेक्टर को नई दिशा मिल रही है। भारत प्राचीन काल से कपड़ा उद्योग, मसाला व्यापार और स्वर्ण आभूषण के मामले में दुनिया में अग्रणी था। लेकिन, तकनीक के अभाव ने हमारी क्षमता को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। भारत सरकार कठिन समय में सभी के साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आयात शुल्क में छूट मिलना उद्योगों को पुनर्स्थापित करने के लिए एक मदद है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्र पार्क युवाओं के लिए रोजगार और प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए अहम सिद्ध होगा। वर्तमान में समय थोड़ा कठिन है, लेकिन यही समय है सही समय है निवेश का। उद्योगपतियों के सुझावों पर गंभीरता से विचार केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कपड़ा मंत्रालय उद्योगपतियों की ओर से आ रहे सुझावों पर संवेदनशीलता से विचार कर रहा है। जीएसटी काउंसिल की बैठक और मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उद्योगपतियों को खुशखबरी मिल सकती है। दुनिया में टैक्सटाइल सेक्टर का 800 बिलियन डॉलर का मार्केट है। मंत्रालय ने 40 देशों में निर्यात के लिए कार्ययोजना तैयार की है। पिछले दिनों इंदौर में टैक्सटाइल सेक्टर के उद्यमियों से मिला था। आज भी उद्योगपतियों का वही उत्साह नजर आ रहा है। भारत किसी के लिए दरवाजा बंद नहीं करता है, लेकिन अपने स्वाभिमान से खिलवाड़ भी बर्दाश्त नहीं करते हैं। उद्योगपति धार के पीएम मित्र पार्क में निवेश के लिए जाएं। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रो इंडस्ट्रलियस्ट हैं। एमपी पहला ग्रीन फील्ड राज्य केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय सचिव नीलम शमी राव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला ग्रीन फील़्ड राज्य है। राज्य ने पीएम मित्र पार्क में औद्योगिक जमीन आवंटन के लिए आवेदन आमंत्रित करना शुरू कर दिया है। प्रदेश में लॉजिस्टिक की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। धार का बाघ प्रिंट मशहूर है। इस प्रिंट को पूरी तरह से नदी के पानी का उपयोग कर प्राकृतिक तरीके से बनाया जाता है। राज्य सरकार यहां एक क्राफ्ट विलेज बनाने के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश की चंदेरी और महेश्वरी साड़ियां भी प्रसिद्ध हैं।  

2500 तक के कपड़े और फुटवियर पर राहत, अब देना होगा कम GST

नई दिल्ली  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक के नतीजे आ गए हैं। इस बैठक में आम लोगों की जेब से जुड़े कई अहम ऐलान किए गए। इसके साथ ही जीएसटी काउंसिल ने प्रस्तावित दो-स्तरीय 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत स्लैब को मंजूरी दे दी है। वहीं, 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब हटा दिए गए हैं। आइए सिलसिलेवार जानते हैं कि क्या फैसले हुए हैं। जूते और परिधान होंगे सस्ते जीएसटी काउंसिल ने बुधवार को 2,500 रुपये तक की कीमत वाले फुटवियर एवं परिधानों को पांच प्रतिशत कर के स्लैब में रखने का निर्णय लिया। अभी तक केवल 1,000 रुपये तक की कीमत वाले जूते-चप्पल एवं परिधान पर ही पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता था जबकि इससे अधिक कीमत वाले उत्पादों पर 12 प्रतिशत कर लगाया जाता था। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित मामलों में निर्णय लेने वाले सर्वोच्च निकाय जीएसटी परिषद में लिए गए इस फैसले के बाद 2,500 रुपये तक के फुटवियर और परिधान अब सस्ते हो जाएंगे।     बैठक में 12 और 28 प्रतिशत वाले कर स्लैब को खत्म करने का भी निर्णय लिया गया है। इन दोनों श्रेणियों के अधिकांश उत्पादों को क्रमशः पांच और 18 प्रतिशत के स्लैब में स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम से उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर राहत मिलने के साथ ही परिधान एवं फुटवियर उद्योग को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।     जीएसटी काउंसिल ने छोटे व्यवसायों को राहत देने के लिए कई सुधारों को मंजूरी दे दी है, जिसमें गैर-जोखिम वाले व्यवसायों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को तीन दिन तक कम करना, पूर्व-भरे रिटर्न के प्रस्ताव पर काम करना शामिल है। इसके अलावा कपड़ा, रसायन, उर्वरक और फार्मा क्षेत्र जैसे क्षेत्रों के लिए सात दिन में रिफंड देना शामिल है।     इस बीच, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रस्तावित जीएसटी सुधारों से केंद्र शासित प्रदेश के राजस्व में 10 से 12 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे वित्तीय संकट और बढ़ सकता है क्योंकि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद राज्य का राजस्व कम हो गया है।     विपक्ष शासित राज्यों ने मांग की है कि जीएसटी पुनर्गठन के कार्यान्वयन के बाद सभी राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई की जाए। ये राज्य हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल थे।     झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि अगर केंद्र का जीएसटी सुधार प्रस्ताव लागू होता है, तो उनके राज्य को 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर केंद्र हमें होने वाले नुकसान की भरपाई करने के लिए सहमत हो जाता है, तो उन्हें इस एजेंडे को मंजूरी देने में कोई दिक्कत नहीं है।     बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया।  

पीएम मित्रा पार्क बनेगा टेक्सटाइल सेक्टर का गेमचेंजर, मध्य प्रदेश को मिलेगी वैश्विक पहचान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हम सब बदलते दौर के साथी हैं। उम्मीदों और अवसरों का विराट क्षितिज हमारे सामने है। अपने सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए निवेश का एक स्वर्णिम अवसर आप सबके सामने है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से आग्रह किया कि वे बेहिचक मध्यप्रदेश में पूंजी लगाएं। निवेश आपका, बिजनेस आपका, प्रॉफिट भी आपका और सरकार की सभी सुविधाएं भी आपके लिए ही हैं। उन्होंने निवेशकों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि आप सभी अपने कारोबार में आगे बढ़ें, आपके व्यापार-व्यवसाय की सफलता की गारंटी हमारी सरकार है। मध्यप्रदेश पूंजी निवेश के लिए देश का मॉडल स्टेट बन रहा है। शीघ्र ही धार के पीएम-मित्रा पार्क का भूमि-पूजन होगा। यह पार्क भारत को विश्व की टेक्सटाइल केपिटल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। हम मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी अभियान अंतर्गत मेक इन इंडिया और विकसित भारत के संकल्प को साकार करेंगे।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली के होटल आईटीसी मौर्या में मध्यप्रदेश के धार स्थित पीएम-मित्रा पार्क में इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज के इंटरैक्टिव सेशन को संबोधित कर रहे थे। इंटरैक्टिव सेशन में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह भी मौजूद रहे। सेशन में देश के टेक्सटाइल सेक्टर के बिजनेस टायकून्स, कॉमर्शियल हाउसेस और इन्वेस्टर्स शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार जिले के बदनावर के समीप स्थापित होने वाले पीएम-मित्रा पार्क में निवेश की अपार संभावनाओं पर कपड़ा उद्योग से जुड़े विभिन्न उद्योगपतियों से विचार-विमर्श भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम-मित्रा पार्क युवाओं के लिए रोजगार और प्रदेशों के आर्थिक विकास के लिए अहम सिद्ध होगा। धार पीएम-मित्रा पार्क में 15 कंपनियों ने दिखाई रूचि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आज दिल्ली में हुए इंटरैक्टिव सेशन में शामिल उद्योगपतियों ने मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश की रूचि दिखाई है। इससे 15 बड़ी कंपनियों से 12,508 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है। इनमें लगभग 18 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। निवेश करने वाली कंपनियों में ट्राइडेंट ने 4500 करोड़ रूपये, ए.बी. कॉटस्पिन इंडस्ट्री ने 1300 करोड़ रूपये, अरविंद मिल्स ने 1024 करोड़ रूपये, सनातन टेक्सटाइल्स ने 1000 करोड़ रूपये, बीएसएल सदस्यों ने 1000 करोड़ रूपये, बेस्ट कॉर्पोरेशन तिरूपुर ने 832 करोड़ रूपये, शर्माजी यार्न प्रा. लि. ने 800 करोड़ रूपये, आरएसवीएम (एलएनजे भीलवाड़ा) ने 700 करोड़ रूपये, आर. आर. जैन इंडस्ट्रीज ने 550 करोड़ रूपये, फेबयान टेक्सटाइल प्रा. लि. ने 308 करोड़ रूपये, वंश टेक्नोफैब प्रा. लि. ने 237 करोड़ रूपये, मोहिनी एक्टिव लाइफ प्रा. लि. ने 141 करोड़ रूपये, अनीका टेक्सफैब ने 100 करोड़ रूपये, वेदांत कॉटन प्रा. लि और एनटीपी सॉल्यूशन्स प्रा. लि. ने 8-8 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव दिए। प्रधानमंत्री की पहल पर मध्यप्रदेश को मिली बड़ी सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल पर देश का पहला पीएम-मित्रा पार्क धार जिले में स्थापित किया जा रहा है, जिसका भूमि-पूजन शीघ्र ही होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 5एफ विजन 'फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन' को मध्यप्रदेश सरकार ने एक मिशन के रूप में अपनाया है। हमारा उद्देश्य है कि स्वदेशी कपड़े की गुणवत्ता को वर्ल्ड क्लास का बनाकर इन्हें वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए सम्पूर्ण वैल्यू चेन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हर स्तर पर किसान, बाजार और परंपराओं को गति प्रदान करने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में टेक्सटाइल सेक्टर को नया विजन और नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से कपड़ा उद्योग, मसाला व्यापार और स्वर्ण आभूषण के मामले में दुनिया में अग्रणी रहा। तकनीक के अभाव में किसी समय व्यापार के माध्यम से हमारी क्षमता को प्रभावित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। केंद्र सरकार कठिन समय में सभी उद्योगपतियों के साथ है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आयात शुल्क में छूट मिलना उद्योगों को पुनर्स्थापित करने के लिए एक प्रकार की मदद है, सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश कपास उत्पादन में देश में 7वें स्थान पर है। पहले स्थान पर चल रहे गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच टेक्सटाइल सेक्टर का पीएम-मित्रा पार्क बनाया जा रहा है, जिसके संचालन के लिए मध्यप्रदेश में कच्चे माल की उपलब्धता से लेकर अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सम्राट विक्रमादित्य के न्याय से पोषित धरती है। यहां हमेशा ही बेहतर कानून व्यवस्था की स्थापना रही है। निवेश के लिए आदर्श राज्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के केंद्र में स्थित है और निवेशकों के लिए अनेक अनुकूलताएं उपलब्ध कराता है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर मध्यप्रदेश से होकर गुजरता है। मध्यप्रदेश में 8 एयरपोर्ट हैं। विस्तृत रेल नेटवर्क हमारे राज्य को देश के सभी बड़े शहरों से जोड़ता है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि आप मध्यप्रदेश में जहां भी उद्योग स्थापित करना चाहें, वहां भूमि, बिजली, पानी, एप्रोच रोड, नियर-टू-डोर कनेक्टिविटी, सस्ती श्रम दरें, कुशल श्रम शक्ति सहित अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का संभवतः ऐसा पहला राज्य है, जहां कभी औद्योगिक हड़ताल (इन्डस्ट्रियल अनरेस्ट) भी नहीं होतीं। उन्होंने निवेशकों से कहा कि आपके बिजनेस के विकास में सरकार हर घड़ी आपके साथ खड़ी है। आपको यहां समुचित रूप से बिजनेस करने की पूरी छूट, मिलेगी साथ ही गारंटी सहित निवेश प्रोत्साहन के लिए इन्सेंटिव (अनुदान) भी हमारी सरकार देगी। ‘मॉडल स्टेट’ के रूप में उभरता मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश को लेकर पूरे देश में आज सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है, वह है मध्यप्रदेश। उन्होंने कहा कि निवेश के मामले में हमारा प्रदेश देश का मॉडल स्टेट बनकर उभरा है। प्राकृतिक सौंदर्य, विभिन्न प्रकार की वनस्पति और जलीय एवं वन्य जीवों की मौजूदगी से समृद्ध मध्यप्रदेश की पावन धरती पर सभी निवेशकों का हृदय से स्वागत है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी हर अपेक्षा पर खरी उतरेगी और उनके सपनों को साकार करने में सहयोगी बनेगी। इसके लिए हम सभी प्रबंध कर रहे हैं।

CM मोहन यादव की सख्त चेतावनी: कलेक्टरों को लगाई फटकार, कहा- जिम्मेदारी निभाओ

भोपाल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल में खाद वितरण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कलेक्टरों को फटकार लगाई। कहा कि इस बार पिछले साल से अधिक खाद उपलब्ध हुआ है। फिर भी समस्या खड़ी हो रही है। वितरण व्यवस्था का प्रबंधन करने का दायित्व कलेक्टरों का है। यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो इसका मतलब यह हुआ कि जिला चलाना नहीं आता है। यदि जिला नहीं चला पा रहा है तो बता दें, हम दूसरी व्यवस्था करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दमोह और जबलपुर में किए गए नवाचार को देखें, जब वे कर सकते हैं तो फिर बाकी जिले क्यों नहीं। सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ है और उन्हें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।   कई जिलों में परेशान हो रहे किसान रीवा, पन्ना, अशोक नगर सहित कई जिलों में किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। ऐसे ही प्रदर्शन के दौरान रीवा में पुलिस ने बल प्रयोग भी किया था। इन स्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बुधवार को समीक्षा की, जिसमें सभी कलेक्टर वर्चुअली जुड़े। इस दौरान उन्होंने अव्यवस्था की सूचनाओं पर नाराजगी जताई। कलेक्टरों को निर्देश-खाद की उपलब्धता की समीक्षा करें उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि जानकारी जनप्रतिनिधियों से भी साझा करें, ताकि किसानों को वास्तविक स्थिति पता रहे। खाद वितरण केंद्रों का आकस्मिक सत्यापन और निगरानी करें। अतिरिक्त विक्रय केंद्र की आवश्यकता है, तो तत्काल आरंभ करें। 53 एफआईआर और 88 लाईसेंस निरस्त बैठक में बताया गया कि उर्वरक की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अवैध परिवहन और नकली उर्वरक आदि से संबंधित प्रकरणों पर कार्रवाई करते हुए 53 एफआईआर दर्ज की गईं। 88 लाइसेंस निरस्त और 102 निलंबित किए गए। 406 विक्रय प्रतिबंधित किए गए। 43 हजार टन अधिक यूरिया दिया बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि खाद की कमी नहीं है। मक्का का क्षेत्र बढ़ने के बावजूद दो सितंबर तक 15 लाख 46 हजार टन यूरिया विक्रय किया जा चुका है। यह पिछले साल 15.3 लाख टन था। इस प्रकार देखें तो 43 हजार टन अधिक यूरिया किसानों को उपलब्ध कराया जा चुका है। यही स्थिति डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी को लेकर है। पिछले साल अब तक 29.14 लाख टन खाद बेचा गया था, जो इस बार 30.20 लाख टन हो चुका है। 1.82 लाख टन यूरिया, 1.74 लाख टन डीएपी, 2.19 लाख टन एनपीके और 3.84 लाख टन एसएसपी भंडारित है। दमोह और जबलपुर की व्यवस्था बनी माडल-बैठक में दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर ने बताया कि खाद वितरण व्यवस्था में हमने किसान संगठनों को सहभागी बनाया है। टोकन तहसील कार्यालय से बांटे जा रहे हैं और वितरण विक्रय केंद्रों से किया जा रहा है। जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने बताया कि किसानों को टोकन फोन काल पर दिए जा रहे हैं। खाद वितरण केंद्रों पर डिस्पले बोर्ड लगाए हैं और नंबर प्रदर्शित होने पर खाद दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जिले की परिस्थितियों को देखते हुए इस माडल पर विचार करने के निर्देश दिए।

CM विष्णुदेव साय का संकल्प: हर नागरिक को मिले विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ और कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल तेलंगाना के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर बस्तर में शुरू होगा 200 करोड़ की लागत से 240 बिस्तरों का हाई-टेक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, अब मरीजों को इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा रायपुर और बिलासपुर रायपुर, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ और कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल तेलंगाना के बीच लाइसेंस समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह अनुबंध प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के अंतर्गत किया गया है। इस अवसर पर वन एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, आयुक्त स्वास्थ्य डॉ. प्रियंका शुक्ला, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के अधिकारी जयदीप दास गुप्ता एवं श्रीनिवास राव तथा कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल हैदराबाद के अध्यक्ष डॉ. गुरुनाथ रेड्डी, डॉ. रघुनाथ रेड्डी और के.वी. रेड्डी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आदिवासी अंचलों सहित प्रदेश के हर नागरिक तक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचे। उन्होंने कहा कि आठ वर्ष पूर्व इस अस्पताल के निर्माण की शुरुआत की गई थी और आज जब छत्तीसगढ़ अपनी रजत जयंती मना रहा है, तब इस एमओयू का होना ऐतिहासिक महत्व रखता है। गणेश महोत्सव के पावन अवसर पर हुआ यह समझौता प्रदेशवासियों के लिए शुभ संकेत है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बस्तर क्षेत्र के लोग लंबे समय से उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रहे हैं, किंतु अब यह अस्पताल उनके लिए वरदान साबित होगा। विशेषकर नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों के लिए यह जीवनरक्षक सिद्ध होगा। पहले घायल जवानों को एयर एंबुलेंस से रायपुर भेजना पड़ता था, अब जगदलपुर में ही उन्हें अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध होगा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि हर नागरिक को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें। बस्तर अंचल में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना राज्य और क्षेत्रवासियों के लिए गर्व की बात है। पहले ये सेवाएँ केवल रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में उपलब्ध थीं, लेकिन अब बस्तर के लोग भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगा। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने जानकारी दी कि इस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निर्माण पर 200 करोड़ रुपये की लागत आई है, जिसमें से 120 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 80 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने वहन किए हैं। राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) ने भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि यह अस्पताल 11 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और अत्याधुनिक मशीनों एवं उपकरणों से सुसज्जित है। यह 10 मंजिला अस्पताल 240 बिस्तरों की क्षमता वाला होगा। इसमें हृदय रोग (कार्डियोलॉजी), किडनी रोग (नेफ्रोलॉजी), मस्तिष्क रोग एवं न्यूरो सर्जरी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसे विभाग संचालित होंगे। ओपीडी, आईसीयू और आपातकालीन सेवाओं सहित गहन चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधाएँ यहाँ उपलब्ध होंगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सरकारी दर पर उपचार प्रदान करेगी। सरकारी दर पर उपलब्ध इन सेवाओं का लाभ न केवल बस्तर संभाग बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देशभर के मरीज उठा सकेंगे। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक पहल को प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया। इससे बस्तर अंचल के लाखों लोगों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा और बड़े शहरों पर उनकी निर्भरता कम होगी। यह अस्पताल न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के मरीजों के लिए नई आशा और जीवनदायी सुविधा साबित होगा।