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क्वाड सम्मेलन 2026 की शुरुआत में भारत में, ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने जताई उम्मीद

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने उम्मीद जताई है कि क्वाड देशों की अगली बैठक अगले साल की पहली तिमाही में हो सकती है। उन्होंने चार देशों- भारत, अमेरिका, जापान के साथ ऑस्ट्रेलिया के गठजोड़ वाले इस समूह को एक अहम मंच करार दिया। गौरतलब है कि भारत में इसी साल क्वाड सम्मेलन होना था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैये और जापान में जारी सियासी उठापटक के चलते अब इस बैठक की उम्मीद कम ही है। अल्बनीज  आसियान सम्मेलन के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्वाड एक अहम फोरम है, जो ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान और भारत को जोड़ता है। मुझे उम्मीद है कि इसकी बैठक अगले साल की पहली तिमाही में होगी।” उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक की मेजबानी करेंगे। क्वाड सम्मेलन में देरी को लेकर पर पूछे गए सवाल पर अल्बनीज ने कहा कि यह व्यस्त शिखर सम्मेलन सत्र है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी व्यस्त कार्यक्रम में बंधें हैं। आसियान देशों के दौरे पर हैं ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों एशिया के तीन देशों के दौरे पर हैं। वे मलयेशिया में आसियान सम्मेलन में शामिल होने के बाद जापान रवाना हुए और वहां से दक्षिण कोरिया जाएंगे, जहां वे एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं। इससे पहले अगस्त में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ट्रंप ने इस वर्ष भारत यात्रा की योजना रद्द कर दी है, क्योंकि उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते तब से तनाव में हैं जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क और रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर लगा दिया। भारत ने इस कदम को अनुचित, अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य करार दिया था।

ट्रंप के फैसलों के बीच पीएम मोदी की दूरी — जानिए असली कारण

नई दिल्ली कभी मंच साझा करते हुए ‘दो मजबूत नेताओं’ की दोस्ती का प्रतीक माने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अब रिश्तों की गर्माहट noticeably कम हो गई है। न अमेरिका में आमने-सामने मुलाकात, न किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साझा उपस्थिति बस औपचारिक बधाइयों और प्रशंसाओं का सिलसिला जारी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों के बीच यह दूरी क्यों बढ़ रही है?   निमंत्रण पर ‘ना’ और बढ़ती खामोशी इस साल जून में ट्रंप ने पीएम मोदी को कनाडा से लौटते वक्त अमेरिका रुकने का निमंत्रण दिया, मगर मोदी ने वह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके बाद शर्म अल-शेख सम्मेलन के लिए भी आमंत्रण आया — जो ट्रंप की मध्यपूर्व शांति पहल का जश्न था पर प्रधानमंत्री ने इसमें भी शिरकत नहीं की और भारत की ओर से एक जूनियर मंत्री को भेजा गया। अब जब ट्रंप मलेशिया में हो रहे आसियान शिखर सम्मेलन में पहुंचे, मोदी ने वहां भी वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। यह पिछले एक दशक में दूसरा मौका है जब प्रधानमंत्री ने आसियान मंच पर भौतिक उपस्थिति दर्ज नहीं की। आगामी नवंबर में जब दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन होगा, ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे उसमें शामिल नहीं होंगे। यानि, दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात अब लगभग एक साल बाद ही संभव दिख रही है।  अब ट्रंप मलेशिया में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन में हैं, जिसमें पीएम मोदी ने भाग नहीं लिया, बल्कि वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए. यह पिछले दस वर्षों में सिर्फ दूसरी बार है, जब उन्होंने आसियान सम्मेलन में उपस्थिति नहीं दर्ज की. और अब नवंबर में प्रधानमंत्री दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग जाने वाले हैं, जहां G20 शिखर सम्मेलन आयोजित होगा. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि वे उस सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. इसका मतलब है कि दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात अब लगभग एक साल तक नहीं होगी. पिछली बार उनकी मुलाकात फरवरी में वॉशिंगटन डीसी में हुई थी. कई लोगों को यह दूरी कुछ अजीब लग रही है. क्वाड शिखर सम्मेलन की तारीख को लेकर भी अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. कभी दो ‘मजबूत नेताओं’ के बीच हाई-प्रोफाइल ‘ब्रोमांस’ कहा जाने वाला रिश्ता अब एक अजीब कूटनीतिक दूरी में बदल गया है. अब मुलाकातें कम हो गई हैं. हाल ही में दोनों नेताओं के बीच तीन बार फोन पर बातचीत हुई है, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. इस बीच सार्वजनिक बयानों में गर्मजोशी बनी हुई है. पीएम मोदी ट्रंप की ‘शांति प्रयासों’ की प्रशंसा करते हैं और ट्रंप उन्हें ‘अच्छा दोस्त’ कहते हैं, लेकिन सतह के नीचे यह रिश्ता कुछ तनावपूर्ण दिखाई देता है. तो सवाल है कि आखिर दोनों एक-दूसरे से बच क्यों रहे हैं? पुरानी नज़दीकी कैसे बन गई दूरी 2019-2020 के दौरान मोदी-ट्रंप के रिश्ते बहुत सार्वजनिक रूप से मजबूत दिखाई देते थे. ‘हाउडी मोदी!’ और ‘नमस्ते ट्रंप!’ जैसे विशाल आयोजनों ने इस दोस्ती की झलक पूरी दुनिया को दिखाई. दोनों नेता बड़े वादे करते थे… भारत-अमेरिका व्यापार बढ़ाना, रक्षा सहयोग गहरा करना, ऊर्जा समझौते करना. भारत के लिए ट्रंप एक ऐसे सहयोगी थे, जिनके साथ नई दिल्ली अपनी वैश्विक भूमिका मजबूत करना चाहती थी, जबकि अमेरिका के लिए भारत हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार था. जब ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति पद संभाला, तो पीएम मोदी ने फरवरी में उनसे मुलाकात की. दोनों ने अगली मुलाकात भारत में क्वाड शिखर सम्मेलन के दौरान करने का वादा किया, लेकिन मई आते-आते रिश्तों में दरारें दिखने लगीं. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया था. हालांकि पीएम मोदी ने सार्वजनिक रूप से इस दावे को खारिज कर दिया. जून तक आते-आते दोनों के रिश्ते में तनाव और बढ़ गया. रिश्ते में खटास के प्रमुख कारण 1. ट्रेड और टैरिफ: अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार असंतुलन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. भारत पर 50% तक टैरिफ लगाया गया है और अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र में प्रवेश की मांग कर रहा है. मोदी ने साफ कहा है कि भारत समझौता नहीं करेगा. 2. रूसी तेल का खेल: भारत अभी भी रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है. अमेरिका चाहता है कि भारत इसे कम करे. यह विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है. हाल ही में भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के उस दावे को खारिज किया कि भारत ‘लगभग शून्य’ स्तर तक रूसी तेल खरीद घटा देगा. 3. कूटनीतिक छवि: दोनों नेताओं के अपने घरेलू राजनीतिक आधार हैं जो उन्हें ताकतवर छवि बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं, न कि समझौता करने के लिए. 4. रणनीतिक स्वायत्तता बनाम गठजोड़: भारत हमेशा यह रेखांकित करता है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलेगा, किसी एक देश के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ेगा. इन सभी तत्वों ने एक गर्मजोशी भरे रिश्ते को कठिन बना दिया है. क्या मोदी ट्रंप से मुलाकात टाल रहे हैं? ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी किसी असहज या अनुचित माहौल में बैठक से बचना चाहते हैं. जैसे 47वें आसियान शिखर सम्मेलन (कुआलालंपुर) में उन्होंने वर्चुअल रूप से शामिल होना चुना, जिसे व्यापक रूप से ट्रंप से आमने-सामने मुलाकात से बचने के रूप में देखा गया. ट्रंप ने अपनी यात्रा के दौरान फिर से यह दावा दोहराया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म कराया और भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने वाला है, जबकि भारतीय अधिकारियों ने ऐसे किसी भी फोन कॉल या बातचीत से इनकार किया. ऐसी स्थितियों में सार्वजनिक विरोधाभास से दोस्ती की छवि कमजोर पड़ती है. पीएम मोदी यह दिखाना चाहते हैं कि भारत किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा. ट्रंप से मिलना और वहां किसी ‘समझौते’ का संकेत देना, घरेलू राजनीति के लिहाज से मोदी के लिए असुविधाजनक हो सकता है. उसी तरह, ट्रंप भी ऐसी बैठक में दिलचस्पी नहीं रखते जहां उन्हें कोई ‘स्पष्ट जीत’ दिखाई न दे. इसलिए भारत का यह रवैया (बहुत जल्दी मुलाकात न करना) एक रणनीतिक लचीलापन बनाए रखने की कोशिश है. शर्म अल-शेख समिट में क्यों नहीं गए मोदी पीएम मोदी ने शर्म अल-शेख समिट में शामिल होने के लिए अमेरिकी न्योते … Read more

भारत की सराहना करते हुए नोबेल विजेता मारिया मचाडो ने PM मोदी से की बड़ी मांग

नई दिल्ली 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए 20 साल से संघर्ष कर रहीं मारिया कोरिना मचाडो ने भारत को महान लोकतंत्र और दुनिया के लिए आदर्श बताया है. एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में मचाडो ने कहा कि भारत वेनेजुएला का महत्वपूर्ण साथी बन सकता है और दोनों देश लोकतंत्र के बहाली के बाद कई क्षेत्रों में साथ काम कर सकते हैं. मचाडो ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी से बात करना चाहती हूं और उन्हें स्वतंत्र वेनेजुएला में जल्दी आमंत्रित करना चाहती हूं.” उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक भूमिका की भी तारीफ की और कहा कि लोकतंत्र को मजबूत रखना बहुत जरूरी है. मचाडो ने महात्मा गांधी की अहिंसात्मक लड़ाई से प्रेरणा लेने की बात कही. उन्होंने कहा, “शांति रखना कमजोरी नहीं है, गांधी ने पूरी दुनिया को यह दिखाया.” वेनेजुएला के 2024 राष्ट्रपति चुनाव पर क्या कहा? उन्होंने वेनेजुएला के 2024 राष्ट्रपति चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी, लेकिन निकोलस मादुरो सरकार ने चुनाव रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने मादुरो को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता छोड़ने का प्रस्ताव दिया, लेकिन मादुरो ने इनकार कर दिया और देश में सख्त दमन शुरू कर दिया. मचाडो ने जताई ये उम्मीद मचाडो ने कहा कि यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लोकतंत्र बहाली में उनके मुख्य सहयोगियों में से हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समर्थन के चलते मादुरो समझेंगे कि अब उनका समय खत्म हो गया है और उन्हें शांति से सत्ता छोड़नी होगी. मचाडो ने भारत से कहा कि वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाल होने के बाद भारत की कंपनियां ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार में निवेश कर सकती हैं. भारत और वेनेजुएला के संबंधों के लिए अवसर मचाडो ने भारत को भी लोकतंत्र और मानवाधिकार के लिए अपनी आवाज उठाने वाले देशों में शामिल होने का आमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बहाल होने के बाद भारत की कंपनियां ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार के क्षेत्रों में निवेश कर सकती हैं. मचाडो ने यह भी कहा कि भारत की लोकतांत्रिक ताकत और अनुभव वेनेजुएला के लोकतंत्र के पुनर्निर्माण में मार्गदर्शन कर सकता है.  मचाडो ने अंत में यह संदेश दिया कि लोकतंत्र को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए और भारत जैसे बड़े लोकतंत्र की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है, क्योंकि पूरी दुनिया ऐसे उदाहरण से सीखती है.

मोदी नहीं जाएंगे आसियान समिट में! ट्रंप से संभावित मीटिंग की चर्चा तेज, जानें भारत की ओर से कौन जाएगा

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया में होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. आसियान समिट की शुरुआत रविवार यानी 26 अक्टूबर से हो रही है. पीएम मोदी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण आसियान शिखर सम्मेलन से संबंधित बैठकों में भाग लेने के लिए संभवत: मलेशिया नहीं जाएंगे. इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की मानें तो भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस बैठक में हिस्सा लेंगे और भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. यहां बताना जरूरी है कि इस आसियान बैठक में डोनाल्ड ट्रंप भी आ रहे हैं. ऐसे में संभावना थी कि अगर मोदी जाते हैं तो ट्रंप संग उनकी मुलाकात हो सकती है. मगर अब मुलाकात का इंतजार बढ़ गया है. दरअसल, आसियान (दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) शिखर सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर तक कुआलालंपुर में आयोजित किया जा रहा है. आसियान शिखर सम्मेलन से संबंधित विचार-विमर्श में भारत की भागीदारी के स्तर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. सूत्रों ने बताया कि भारत ने मलेशिया को सूचित किया है कि एस जयशंकर आसियान बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल माध्यम से भाग लेने की संभावना है. ट्रंप हो रहे शामिल प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया है. मलेशिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ आसियान के कई संवाद साझेदार देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है. डोनाल्ड ट्रंप 26 अक्टूबर को दो दिवसीय यात्रा पर कुआलालंपुर जाएंगे. सूत्रों ने बताया कि शुरुआती योजना के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया के साथ-साथ कंबोडिया की यात्रा पर भी विचार किया जा रहा था, चूंकि वह मलेशिया नहीं जा रहे हैं, इसलिए कंबोडिया की प्रस्तावित यात्रा स्थगित कर दी गई है. क्या है आसियान आसियान-भारत संवाद संबंध 1992 में एक क्षेत्रीय साझेदारी की स्थापना के साथ शुरू हुए. ये दिसंबर 1995 में पूर्ण संवाद साझेदारी और 2002 में शिखर सम्मेलन स्तर की साझेदारी में परिवर्तित हुए. इन संबंधों को 2012 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया. आसियान के 10 सदस्य देश इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमा और कंबोडिया हैं.  

मोदी-ट्रंप रिश्तों में आएगा नया मोड़? जल्द हो सकती है अहम मुलाकात

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी मलयेशिया के दौरे पर आसियान समिट में जा सकते हैं। यदि वह ASEAN समिट में गए तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात हो सकती है और इस पर दुनिया भर की नजरें होंगी। वह आसियान समिट से इतर डोनाल्ड ट्रंप से मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर इस दौरान बात हो सकती है। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच बीते कुछ महीनों में करीबी बढ़ती दिखी है और ऐसी स्थिति में नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मुलाकात के मायने क्या होंगे, यह देखने वाली बात होगी। अमेरिका ने जिस तरह पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को तवज्जो दी है और उन्हें वाइट हाउस तक बुलाया था, उससे कयास लग रहे हैं कि एक बार फिर से शीत युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं। तब भारत गुटनिरपेक्षता की राजनीति करते हुए एक तरह से रूस के ब्लॉक में था। वहीं अमेरिका की गोद में पाकिस्तान बैठा था। एक बार फिर से रूस और भारत का विरोध करते हुए अमेरिका उसी रणनीति पर आगे बढ़ता दिखता है। ऐसे हालात में पीएम नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मीटिंग में क्या निकलता है, यह चर्चा का विषय है। अब तक सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट नहीं किया है कि पीएम नरेंद्र मोदी का ASEAN समिट में जाना तय है या नहीं। लेकिन दौरे से इनकार भी नहीं है। बता दें कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि वह 26 अक्तूबर से होने वाले ASEAN समिट में जाएंगे और पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की उम्मीद है। इससे पहले दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात इस साल फरवरी में हुई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी द्विपक्षीय वार्ता के लिए अमेरिका गए थे। लेकिन रिश्तों के बिगड़ने की शुरुआत तब हुई, जब अमेरिका की ओर से भारत पर मोटा टैरिफ लगाया गया। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बार-बार दावे हुए कि उन्होंने जंग रुकवाई है। इस बात ने भी भारत को असहज किया है और दोनों देशों के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंचे हैं।

दिवाली की बधाई पर ट्रंप को मोदी का जवाब –दो लोकतंत्र कर रहे हैं दुनिया का नेतृत्व

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए दिवाली पर बधाई संदेश देने के लिए शुक्रिया अदा किया है. पिछले दिनों दिवाली के मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को फोन करके बधाई दी थी. नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप, आपके फ़ोन कॉल और दिवाली की हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद. प्रकाश के इस पर्व पर, हमारे दो महान लोकतंत्र दुनिया को उम्मीद की रोशनी दिखाते रहें और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट रहें." ट्रंप ने दिवाली पर दी थी बधाई… व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रोशनी के त्योहार दिवाली मनाने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "आज, मैं दिवाली, 'रोशनी का त्योहार' मनाने वाले हर अमेरिकी को अपनी शुभकामनाएं देता हूं." ट्रंप ने आगे कहा, "कई अमेरिकियों के लिए, दिवाली अंधकार पर प्रकाश की विजय का एक शाश्वत स्मरण है. यह परिवारों और दोस्तों को एक साथ लाकर समुदाय का जश्न मनाने, उम्मीद से ताकत हासिल करने और नवीनीकरण की स्थायी भावना को अपनाने का भी वक्त है." उन्होंने आगे कहा, "लाखों नागरिक दीये और लालटेन जलाते हैं, और हम इस शाश्वत सत्य पर प्रसन्न होते हैं कि अच्छाई की हमेशा बुराई पर विजय होती है. दिवाली मनाने वाले प्रत्येक अमेरिकी के लिए, ईश्वर करे कि यह त्यौहार स्थायी शांति, समृद्धि, आशा और शांति लाए."

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंचे PM मोदी, चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण ने दिया साथ

नंद्याल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश दौरे पर हैं, जहां वह कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. आंध्र प्रदेश पहुंचते ही सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उनका स्वागत किया. इस दौरान पीएम मोदी ने नंद्याल जिले के श्रीशैलम में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश दौरे पर हैं, जहां वह कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. आंध्र प्रदेश पहुंचते ही सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उनका स्वागत किया. इस दौरान पीएम मोदी ने नंद्याल जिले के श्रीशैलम में स्थित श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने बिहार की मशहूर मधुबनी पेंटिंग से सजा हुआ अंगवस्त्र पहना. यह अंगवस्त्र बिहार की कला, संस्कृति और परंपरा के प्रति उनके गहरे लगाव और गर्व का प्रतीक है. मधुबनी पेंटिंग, जो बिहार के मिथिला इलाके की बेहद मशहूर लोक कला है, अपने नेचुरल रंगों, मोटी लाइनों और ज्योमेट्रिक पैटर्न के लिए जानी जाती है. प्रधानमंत्री मोदी की मंदिर से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें वह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के साथ बैठे नज़र आ रहे हैं. तीनों नेताओं का साथ आना केवल धार्मिक भाव-प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में कई स्तरों पर बड़े संकेत देती है.  तीनों नेता साथ आकर दक्षिण भारत में बीजेपी-टीडीपी-जनसेना एकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है. साथ आकर मतदाताओं को यह संदेश भी दे रहे हैं कि वे पारंपरिक मूल्यों और धार्मिक भावनाओं के संरक्षक हैं. इसके साथ ही राज्य-केंद्र संबंधों की मजबूत छवि को पेश किया जा रहा है.  मल्लिकार्जुन मंदिर में पूजा-अर्चना प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक तरीके से पूजा करते हुए पंचामृत से रुद्राभिषेक किया. पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण होता है, जो भगवान शिव को समर्पित खास अभिषेक में इस्तेमाल किया जाता है. पूजा के दौरान मंदिर के पुजारियों ने उन्हें मंदिर के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से बताया. मंदिर दर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने कुरनूल में 13,430 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई विकास प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन किया, जिनमें एनर्जी, डिफेंस, रेलवे और पेट्रोलियम जैसे अहम सेक्टर शामिल थे. बिहार की संस्कृति और कला का प्रेम मधुबनी कला को पीएम मोदी ने न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी बढ़ावा दिया है. वे कई देशों के नेताओं को मधुबनी पेंटिंग गिफ्ट करके इस कला को ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद करते रहे हैं. साथ ही, बिहार की इस सांस्कृतिक परंपरा के प्रति उनका प्यार और सपोर्ट बिहार की जनता के बीच गहरा सम्मान और जुड़ाव बनाता है. पीएम मोदी का यह कदम न सिर्फ बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और आस्था को दिखाता है, बल्कि बिहार के लोगों के साथ उनकी मजबूत पहचान और विकास की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है. 

शहबाज शरीफ के सामने ट्रंप ने की पीएम मोदी की खुलकर तारीफ

मिस्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है और मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त वहीं शीर्ष पर हैं। उन्होंने शानदार काम किया है। ट्रंप ने यह बयान मिस्र के शहर शर्म अल-शेख में हुए विश्व नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान दिया, जो गाजा में युद्धविराम समझौते के बाद आयोजित किया गया था। गाजा समझौते के बीच ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ  गाजा में युद्धविराम समझौते के बाद मिस्त्र में आयोजित  वैश्विक नेताओं के शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना बहुत अच्छा मित्र करार दिया और भारत की तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि भारत एक महान देश है और उसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा मित्र है, जिसने शानदार काम किया है। मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान अब बहुत अच्छे से साथ रहेंगे। बता दें कि इस दौरान खास बात यह रही कि जब ट्रंप पीएम मोदी की तारीफ कर रहे थे तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ उनके पीछे ही खड़े थे। मोदी की तारीफ करते समय ट्रंप ने शहबाज की ओर भी देखा। इस पर शरीफ ने मुस्कुराते हुए ट्रंप की बात का स्वागत किया।  बंधकों का पुनर्मिलन हो रहा है… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वर्षों की पीड़ा और रक्तपात के बाद, गाजा में युद्ध समाप्त हो गया है। अब मानवीय सहायता पहुंच रही है, जिसमें सैकड़ों ट्रक भरकर भोजन, चिकित्सा उपकरण और अन्य सामग्री शामिल है, जिसका अधिकांश भुगतान इस कमरे में बैठे लोगों द्वारा किया जा रहा है। नागरिक अपने घरों को लौट रहे हैं। बंधकों का पुनर्मिलन हो रहा है… एक नए और खूबसूरत दिन को उगते देखना बहुत ही सुंदर है और अब पुनर्निर्माण शुरू हो रहा है। मध्य पूर्व से परे दुनिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण इस दौरान ट्रंप ने गाजा शांति शिखर सम्मेलन में कहा कि यह मध्य पूर्व से परे दुनिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। हम सभी इस बात पर सहमत हैं कि गाजा का समर्थन लोगों के उत्थान के लिए ही किया जाना चाहिए। लेकिन हम अतीत में हुए रक्तपात, घृणा या आतंक से जुड़ी किसी भी चीज को वित्तपोषित नहीं करना चाहते। हम इस बात पर भी सहमत हैं कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि इसे विसैन्यीकृत किया जाए और गाजा में लोगों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए एक नए ईमानदार नागरिक पुलिस बल की स्थापना की जाए। मैं एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में भागीदार बनने का इरादा रखता हूं। उम्मीद है कि तीसरा विश्व युद्ध नहीं होगा, लेकिन यह मध्य पूर्व में शुरू नहीं होने वाला है। हम तीसरा विश्व युद्ध नहीं लड़ेंगे। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की ट्रंप से मुलाकात इससे पहले विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने मध्य पूर्व शांति समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प से मुलाकात की। इस शिखर सम्मेलन की संयुक्त रूप से मेजबानी संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने की और इसमें कई विश्व नेताओं ने भाग लिया।  भारत ने गाजा शांति समझौते का स्वागत किया, स्थायी शांति की उम्मीद जताई  भारत ने इस्राइल और हमास के बीच युद्ध विराम और गाजा में शांति के लिए समझौते का स्वागत किया है। भारत ने उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।   विदेश मंत्रालय ने देर रात जारी बयान में बातचीत द्वारा दो राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के दीर्घकालिक समर्थन को दोहराया तथा कहा कि वह क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी प्रयासों का समर्थन करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत करता है और आशा करता है कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी। मंत्रालय ने कहा कि हम राष्ट्रपति ट्रंप की गाजा शांति योजना का समर्थन करते हैं और इसे प्राप्त करने और शांति के मार्ग को आगे बढ़ाने में मिस्र और कतर की बहुमूल्य भूमिका की सराहना करते हैं। मंत्रालय ने कहा कि शांति शिखर सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रयासों को मजबूत करना था, जो क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह बातचीत के जरिये द्विराष्ट्र समाधान के लिए भारत के दीर्घकालिक समर्थन के अनुरूप भी है। भारत क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी प्रयासों का समर्थन करेगा। शहबाज शरीफ ने ट्रंप को बताया ‘शांति दूत’ शिखर सम्मेलन में बोलते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित होने का श्रेय राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम को जाता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पहले भी ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था और अब वे उन्हें दोबारा नामित करना चाहते हैं।  

PM मोदी का किसानों को तोहफा, ₹35,000 करोड़ की योजनाओं का शुभारंभ, खेती में आत्मनिर्भरता पर ज़ोर

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित एक भव्य कृषि कार्यक्रम में देश भर के किसानों के साथ सीधा संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने किसान कल्याण और कृषि आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 35,440 करोड़ रुपए की दो महत्वाकांक्षी योजनाओं का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व सफलता हासिल करने वाले किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख योजनाओं, प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना और दलहन में आत्मनिर्भर मिशन की घोषणा की। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना में 24,000 करोड़ रुपए का परिव्यय रखा गया है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि पद्धतियों में सुधार करना है। वहीं, दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन में 11,440 करोड़ रुपए के बजट के साथ यह मिशन देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। इन योजनाओं के अलावा, प्रधानमंत्री ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी 5,450 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। हरियाणा के हिसार जिले के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट किसान ने बताया कि वे काबुली चने की खेती के साथ-साथ मूल्य संवर्धन पर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने 'दुगारी वाले' ब्रांड के नाम से चना, लहसुन और पापड़ जैसे उत्पाद बनाने के लिए 20 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया है। उनके उत्पाद जीएएम पोर्टल के माध्यम से सेना को भी बेचे जा रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने छोटे किसानों को समूह बनाकर खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसका एक सफल उदाहरण साझा करते हुए एक किसान ने बताया कि लगभग 1200 एकड़ भूमि पर अवशेष-मुक्त काबुली चने की खेती की जा रही है, जिससे बेहतर बाजार पहुंच और आय सुनिश्चित हुई है। गुजरात के अमरेली जिले के एक एफपीओ ने बताया कि कैसे 2 करोड़ रुपए के जमानत-मुक्त सरकारी ऋण ने उनके 1,700 किसानों के संगठन को सशक्त बनाया।एक किसान ने होटल में रूम बॉय के रूप में काम करने से लेकर 250 से अधिक गिर गायों की गौशाला के मालिक बनने तक की अपनी यात्रा साझा की, जिसमें पशुपालन मंत्रालय की 50 प्रतिशत सब्सिडी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के लाभार्थियों ने बताया कि कैसे इस योजना ने उन्हें नौकरी खोजने वाले से नौकरी देने वाला बना दिया है। कश्मीर के एक युवक ने मात्र दो वर्षों में 15 लाख रुपए का वार्षिक मुनाफा कमाया और 14 लोगों को रोजगार दिया। मध्य प्रदेश के जबलपुर के एक युवा उद्यमी ने एरोपोनिक तकनीक से बिना मिट्टी के आलू के बीज उगाने की अपनी विधि का प्रदर्शन किया, जिसे प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में "जैन आलू" कहा। कश्मीरी सेब उत्पादकों ने बताया कि कैसे रेल कनेक्टिविटी ने उनके उत्पादों को दिल्ली तक पहुंचाना आसान और सस्ता बना दिया है। किसानों ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जैसी योजनाओं से उन्हें बीज खरीदने और समय पर बुवाई करने में बहुत मदद मिली है। 6000 रुपए की वार्षिक सहायता हमारे लिए एक वरदान साबित हुई है। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने बाजरा जैसे मोटे अनाजों (श्री अन्न) को पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा बताया और प्राकृतिक खेती को धीरे-धीरे अपनाने का सुझाव दिया। सत्र का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने देश भर के किसानों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उनकी सफलता की कहानियां दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। किसानों ने भी प्रधानमंत्री से सीधे बात करने का अवसर मिलने पर भावुक कृतज्ञता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से बदलेगी किसानी की तस्वीर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री  मोदी ने इंदौर में 30 लाख टन क्षमता के अत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण संयंत्र का शुभारंभ किया प्रधानमंत्री  मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पी एम कृषि धन-धान्य कृषि योजना कृषि विकास के क्षेत्र में नया अध्याय लिखेगी। मुख्यमंत्री डॉ यादव शनिवार को इंदौर से केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा दिल्ली में आयोजित 'अन्नदाताओं का सम्मान, समृद्ध राष्ट्र का निर्माण" कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने संबोधित किया और इंदौर में 30 लाख टन क्षमता के अत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण संयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने इंदौर, ग्वालियर सहित अन्य सहकारी संघों को पैक्स से जोड़े जाने को भी ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री  मोदी का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  मोदी के संबोधन का ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर से वर्चुअली श्रवण किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री  लखन पटेल, विधायकगण  मधु वर्मा,  रमेश मेंदोला,  मनोज पटेल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर  शिवम वर्मा, मध्यप्रदेश दुग्ध महासंघ के एमडी डॉ. संजय गोवानी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देशभर के किसानों के लिए दो बड़ी योजना – प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्म-निर्भरता मिशन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना देश के कृषि विकास और इससे जुड़े सेक्टर्स में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 10 हजार एफपीओ के अंतर्गत 50 लाख किसान सदस्यता ले चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण कृषि मिशन में एक लाख किसानों का प्रमाणन, 4275 मैत्रीय का प्रमाणन, कंप्युटराइजेशन में 10 हजार से अधिक बहुउद्देशीय पैक्स को मंजूरी, डेयरी, मत्यपालन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण जैसे कई प्रकार के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  मोदी ने मध्यप्रदेश के इंदौर में 30लाख टन की क्षमता और 79 करोड़ रुपये की लागत वाले आत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण सयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया है। साथ ही प्रदेश के इंदौर और ग्वालियर सहकारी संघों को पैक्स से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री  मोदी का आभार माना। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से जहां कम उपज वाले देश के 100 जिलों में पैदावार बढ़ाने के प्रयासों को बल मिलेगा, वहीं दालों के उत्पादन में भी तेजी आएगी। इस विशेष कार्यक्रम में कृषि और इससे जुड़े सेक्टर्स की करीब 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं शामिल हैं। इनसे न केवल देश के किसान भाई-बहनों के जीवन में नई खुशहाली आएगी, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी और मजबूत होगा। वर्चुअल कार्यक्रम की समाप्ति के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर जिले के किसानों द्वारा आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया गया।