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राज्यसभा में बदलता गणित: शरद-सिंघवी की कुर्सी खाली, BJP कब्जे की तैयारी में

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्‍यसभा में भी इंडिया अलायंस की ताकत घटने जा रही है. चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान क‍िया है. लेकिन यह महज एक रूटीन चुनाव नहीं है; यह भारतीय राजनीति के उन दिग्गजों की विदाई और नए समीकरणों के उदय की कहानी है, जो संसद के गलियारों में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है. सबसे बड़ी सुगबुगाहट उन कुर्सियों को लेकर है जो खाली होने जा रही हैं. विपक्षी एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी जैसे चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी इन खाली होती कुर्सियों पर अपना ‘कमल’ खिलाकर राज्‍यसभा में अपनी बादशाहत बनाने जा रही है? 10 राज्य और 37 सीटें चुनाव आयोग के मुताबिक, अप्रैल में खाली हो रही 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. ये सीटें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से आती हैं. सीटों का गणित एक नजर में महाराष्ट्र    7    असम    3 पश्चिम बंगाल    6    हरियाणा    2 बिहार    6    छत्तीसगढ़    2 तमिलनाडु    6    हिमाचल प्रदेश    1 ओडिशा    4    स्रोत-    ECI शरद पवार से सिंघवी तक… दिग्गजों की विदाई एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीति में, जहां अजित पवार की पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हैं, शरद पवार के लिए दोबारा सदन पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज वकील और रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी की सीट भी खाली हो रही है. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-UBT), केटीएस तुलसी (कांग्रेस), और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नाम भी रिटायर होने वालों की सूची में हैं. इन दिग्गजों की विदाई विपक्ष के लिए एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक वैक्यूम पैदा कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार: एनडीए के लिए ‘लॉटरी’ का मौका महाराष्ट्र में 7 सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी यहां बीजेपी और शरद पवार गुट के पास 2-2 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और रामदास आठवले के पास 1-1 सीट है. लेकिन राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए यानी बीजेपी, एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार यहां ‘क्लीन स्वीप’ की स्थिति में दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी यहां अपनी सीटों की संख्या में भारी इजाफा करेगी, जिससे शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खेमे को बड़ा नुकसान हो सकता है. बिहार में भी 5 सीटों का समीकरण एनडीए के पक्ष में झुकता दिख रहा है. यहां जेडीयू की 2 और आरजेडी की 2 सीटें खाली हो रही हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद अब एनडीए यहां 3 सीटों पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा: बीजेपी मारेगी सेंध? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है. यहां 6 सीटों पर चुनाव हैं. वर्तमान में TMC के पास 4 सीटें हैं और एक लेफ्ट (सीपीआई-एम) के पास. जिस तरह से बंगाल विधानसभा में वामपंथ का सफाया हुआ है, बीजेपी यहां सीपीआई-एम की सीट छीनकर अपना खाता खोलने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है. ओडिशा में भी 4 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. नवीन पटनायक की बीजेडी और बीजेपी के बीच यहां सीटों का बंटवारा विधानसभा की ताकत के आधार पर होगा, जहां बीजेपी अपनी मौजूदा 2 सीटों को बरकरार रखने या बढ़ाने की कोशिश करेगी. NDA vs INDIA… क‍िसके पास क‍ितने नंबर अनुमानों के मुताबिक, 16 मार्च के चुनाव एनडीए के लिए ‘सुपर संडे’ साबित हो सकते हैं. अनुमान है कि एनडीए को इन चुनावों में कम से कम 6 सीटों का फायदा होगा इससे एनडीए का आंकड़ा 21 के करीब पहुंच सकता है. दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लगभग 4 सीटों का नुकसान होने की संभावना है. कांग्रेस के लिए तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबरें आ सकती हैं, जहाँ वह अपनी स्थिति में थोड़ा सुधार कर सकती है. बीजेपी कर रही रिकॉर्ड की तैयारी     साल 2026 बीजेपी के लिए राज्यसभा में ऐतिहासिक होने जा रहा है. मार्च के इन 37 सीटों के अलावा, पूरे साल में कुल 71 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. अप्रैल में 32 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 9 बीजेपी से हैं. जून में 22 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 12 बीजेपी से हैं. इसी तरह नवंबर के अंत में 11 सदस्य रिटायर होंगे, इनमें से 9 बीजेपी से हैं.     बीजेपी न केवल अपनी सीटें बचा रही है, बल्कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के कमजोर राज्यों से अतिरिक्त सीटें खींच रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बीजेपी अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.     राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं. साधारण बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 123 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में बीजेपी के पास लगभग 95-98 सदस्य हैं. NDA का आंकड़ा 115 से 118 के आसपास पहुंचता है.इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए 123 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है. बदल जाएगा राज्‍यसभा का मिजाज शरद पवार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कद्दावर नेताओं की कमी विपक्ष को खलेगी, जबकि बीजेपी के लिए यह अपनी विधायी ताकत को और अधिक धार देने का अवसर है. राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि सरकार को अब विवादास्पद बिलों को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए की बढ़ती ताकत ने साफ कर दिया है कि ‘उच्च सदन’ की चाबी अब मजबूती से सत्तापक्ष के हाथों में जाने वाली है.  

बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ी, NDA जल्द करेगा विधायक दल की बैठक

पटना बिहार में चुनावी नतीजों के बाद नई सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। जल्द ही NDA विधायक दल की बैठक होगी। सुत्रों ने अनुसार, कल जदयू विधायक दल की बैठक होने वाली है। उम्मीद है कि जदयू की बैठक में नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जिसके बाद सरकार गठन की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ लेगी। वहीं दूसरी तरफ BJP की बैठक भी कल होने की संभावना है। इस बैठक में मंत्री पदों का फॉर्मूला, डिप्टी सीएम का चयन, पर अंतिम चर्चा होगी।   20 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं नीतीश सीएम हाउस सूत्रों के मुताबिक, 17 नवंबर को नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। इसी दिन वे नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, 20 नवंबर को नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। खबर है कि JDU के 11नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। कुल मिलाकर करीब 18 मंत्री शपथ लेंगे।

बिहार चुनाव परिणाम पर शेखावत का बयान—‘जनता ने सच का साथ दिया’

जोधपुर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शनिवार को जोधपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों, जम्मू-कश्मीर विस्फोट और अंता उपचुनाव सहित कई मुद्दों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन के सभी घटक दलों ने इस चुनाव में मजबूत एकजुटता का परिचय दिया और सामूहिक संगठन शक्ति का उपयोग करते हुए चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि बिहार के चुनाव में मुख्य मुकाबला ‘जंगल राज बनाम विकास’ के बीच था, और जनता ने जब चुनाव का समय आया, तो प्रचंड बहुमत देकर यह संदेश दिया कि अब देश की राजनीति का मुख्य आधार केवल और केवल विकास होगा। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि झूठे नैरेटिव गढ़कर, वोट चोरी जैसे अर्थहीन और आधारहीन आरोप लगाकर, संवैधानिक संस्थाओं पर लांछन लगाने वालों को जनता ने इस चुनाव में सख्त संदेश दिया है। शेखावत ने कहा कि देश में कई बार जनता ने सरकार बदलने के लिए घर से बाहर निकलकर अधिक मतदान किया, लेकिन इस बार जनता ने नकारात्मक और झूठ की राजनीति का जवाब देने के लिए लगभग 10% अधिक मतदान किया और एनडीए को प्रचंड बहुमत दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद के नेताओं ने चुनाव को हल्के स्तर पर ले जाने की कोशिश की। माननीय प्रधानमंत्री की माता जी से लेकर छठ मैया तक को उन्होंने नहीं बख्शा। बिहार की जनता ने इनके मुंह पर तमाचा मारकर जवाब दिया है। उन्होंने दावा किया कि जो दल सरकार बनाने की बातें कर रहे थे, वे दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए। शेखावत ने आगे कहा कि एनडीए के सभी घटक दल भाजपा, जदयू, लोजपा और जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ ने एक-दूसरे का समर्थन करते हुए 80 से 90% स्ट्राइक रेट हासिल किया। आतंकवाद पर सरकार का जीरो टॉलरेंस जम्मू-कश्मीर में हुए विस्फोट पर प्रतिक्रिया देते हुए शेखावत ने कहा कि अभी तक पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दिल्ली हादसे से पहले ही सभी एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उससे पहले 2900 किलो विस्फोटक की बरामदगी ने एक बड़े नुकसान को टाल दिया। शेखावत ने कहा, “सरकार का संकल्प है कि आतंकवाद के प्रति हमारा जीरो टॉलरेंस है। ऐसे कृत्यों को अंजाम देने वाले, चाहे देश के भीतर हों या बाहर, उन्हें निश्तेनाबूत किया जाएगा।” अंता उपचुनाव पर कही ये बात अंता उपचुनाव पर शेखावत ने कहा कि उपचुनाव कई मुद्दों से जुड़े होते हैं और इन्हें सामान्य चुनाव की तरह नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि अंता सीट ज्यादातर समय भाजपा के पास रही है, लेकिन जो भी कारण रहे हैं, वह आत्म अवलोकन का विषय है। शेखावत ने कहा, “हम सभी इस पर विचार करेंगे और आगे इस बात पर काम करेंगे कि भाजपा सरकार की नीतियों का प्रभाव देश की जनता के हृदय तक पहुँचे।”  

धमाकेदार कामयाबी की ओर एनडीए, साय कैबिनेट में उत्सव, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को दी बधाई

रायपुर बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत एनडीए की ऐतिहासिक प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पूरा कैबिनेट जश्न मना रहा है. आज हो रही अहम कैबिनेट की बैठक के पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रिमंडल के तमाम सदस्यों को मिठाई खिलाकर एनडीए के प्रदर्शन पर बधाई दी. बता दें कि दोपहर डेढ़ बजे तक बिहार विधानसभा चुनाव में सामने आए रुझान में एनडीए को 201 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल नीत महागठबंधन 36 सीटों पर संघर्ष कर रही है, जिसमें से राजद 27 सीटों पर, कांग्रेस 4 सीटों पर अन्य 5 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

एनडीए की प्रचंड बढ़त पर ओपी चौधरी का बयान– बिहार में एनडीए की सुनामी

रायपुर बिहार चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों में एनडीए गठबंधन की बढ़त पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होने कहा कि यह सिर्फ एनडीए की बढ़त ही नहीं आंधी और सुनामी भी है. बिहार की जनता ने एनडीए को आशीर्वाद दिया. एनडीए विकसित भारत की नींव डाल रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार की जनता भी समझ रही हैं कि भाजपा और उनके सहयोगियों की सरकार बेहतर हैं. भाजपा और एनडीए को आशीर्वाद मिल रहा है. वहां सुशासन स्थापित किया जा रहा है. कांग्रेस पर वित्तमंत्री चौधरी ने साधा निशाना कांग्रेस के वोट चोरी वाले अभियान को लेकर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कांग्रेस डूबती नांव हैं. महागठबंधन को जनता ने महठगबंधन करार दिया है. उनकी पार्टी के लोग अपनी जान बचाने इधर उधर भाग रहे हैं. इन्हें देश की जनता सबक सिखा रही है. जनता के बीच ये लोग नकारात्मक एजेंडा लेकर जाते हैं, अनर्गल आरोप लगाते हैं, जिसका जवाब जनता दे रही हैं.

घोषणापत्र लॉन्च कर 26 सेकेंड में गायब हुए NDA, कांग्रेस ने कहा – जनता को दिखा दिया सच

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए के ‘संकल्प पत्र 2025’ पर विपक्ष ने जबरदस्त हमला बोला है। कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने इसे झूठ का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ 26 सेकेंड में घोषणापत्र जारी किया गया और फिर मीडिया के सवालों से बचकर भाग खड़े हुए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” पटना के होटल मौर्या में आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, “बीस साल से सरकार में रहकर एनडीए ने क्या काम किए, कौन-से वादे पूरे हुए, इसका जवाब क्यों नहीं दे रहे? और इस मौके पर नीतीश कुमार कहां थे? क्या वे बीमार हैं, या फिर उन्हें खुद अपने वादों पर भरोसा नहीं रहा?” गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से भागने का लगाया आरोप उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो वादे कर रही है, उसे निभाने का साहस रखती है। गहलोत ने कहा, “हम हर वादा कैबिनेट से पास कराकर पूरा करेंगे। जनता अब जुमले नहीं, जवाब चाहती है।” मोकामा कांड की जांच हो: अनुपम कांग्रेस नेता अनुपम ने मोकामा में हुई हत्या की घटना पर कहा कि “एनडीए प्रत्याशी के काफिले में हथियार कहां से आया? इसकी न्यायिक जांच जरूरी है।” आरजेडी बोली- एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है कांग्रेस की बातों का समर्थन देते हुए आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है जिसमें न योजना है, न नीयत। उन्होंने कहा, “महागठबंधन के काम को कॉपी करके अपने नाम पर बेचने की कोशिश की जा रही है। मगर जनता अब समझ चुकी है कि असली मुद्दा रोजगार, शिक्षा और उद्योग का है, और उस पर एनडीए के पास कोई जवाब नहीं।” गगन ने तंज करते हुए कहा, “नीतीश कुमार अब एनडीए में मुख्यमंत्री कम, मेहमान ज्यादा लग रहे हैं। बीजेपी ने उन्हें किनारे कर दिया है, और जनता इसे साफ देख रही है।”  

नीतीश का सीधा वार चिराग पर, JDU की पहली लिस्ट में उठा सियासी खेल; NDA में खलबली?

पटना बिहार की राजनीति में आज नई हलचल देखी गई जब नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने विधानसभा चुनाव 2025 के लिए पहली 57 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इस सूची ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कुछ प्रमुख दावों पर सीधे चुनौती दी, जिससे गठबंधन के भीतर तनाव और नाराजगी की स्थिति बन सकती है। चिराग पासवान के लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पांच प्रमुख दावों वाली सीटों – मोरवा, सोनबरसा, राजगीर, गायघाट और मटिहानी पर जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसा बताया जा रहा था कि ये सीटें पहले चिराग की झोली में जाने वाली थीं। एनडीए में बढ़ेगा तनाव? पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि मोरवा और गायघाट पर 2020 में आरजेडी का दबदबा था, राजगीर और सोनबरसा पर जेडीयू जीता था, जबकि मटिहानी पिछली बार लोक जनशक्ति पार्टी ने जीती थी, लेकिन विजयी राजकुमार सिंह बाद में जेडीयू में शामिल हो गए थे। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते इन सीटों पर सियासी निगाहें खास हैं और उम्मीदवारों की हर चाल का चुनावी मायने बढ़ गया है। इन सीटों पर जेडीयू का उम्मीदवार उतारना गठबंधन में संतुलन बदल सकता है और चिराग समर्थक ताकतों के साथ टकराव के अवसर बढ़ा सकता है जिससे एनडीए की मौजूदा स्थिति जटिल हो सकती है। जेडीयू की लिस्ट में 3 बाहुबली भी शामिल जेडीयू के उम्मीदवारों की सूची में तीन बाहुबली और कई अनुभवी नेता शामिल हैं। विशेष रूप से, मौजूदा सरकार के पांच कैबिनेट मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों से फिर मैदान में उतारे गए हैं। इसमें ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार (नालंदा), जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी (सरायरंजन), सूचना व जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी (कल्याणपुर), समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी (बहादुरपुर) और मद्य निषेध मंत्री रत्नेश सदा (सोनबरसा) शामिल हैं। जेडीयू ने 30 नए चेहरों को उतारा गौरतलब है कि जेडीयू की पहली सूची में 30 नए चेहरे और 27 पुराने प्रत्याशी शामिल हैं। चार महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा गया है, जिनमें मधेपुरा से कविता साहा, गायघाट से कोमल सिंह, समस्तीपुर से अश्वमेध देवी और विभूतिपुर से रवीना कुशवाहा का नाम शामिल है।  

एक तरफ NDA तैयार, दूसरी तरफ महागठबंधन में सीटों को लेकर खींचतान जारी

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख (17 अक्टूबर) में अब केवल चार दिन शेष हैं, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध गहराता जा रहा है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी सीट-बंटवारा रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है, हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। महागठबंधन में सीट बंटवारे पर तनाव महागठबंधन की बातचीत में मुख्य विवाद आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों की संख्या को लेकर है। विपक्षी खेमे के सूत्रों के अनुसार, आरजेडी अपने प्रमुख सहयोगी कांग्रेस को 243 सदस्यीय विधानसभा में 55 से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं है, जबकि कांग्रेस कम से कम 60 सीटों की मांग कर रही है। कांग्रेस ने पहले ही 90 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की छंटनी कर ली है और सीट बंटवारे पर सहमति बनने का इंतजार कर रही है। सोमवार को बिहार के लिए एआईसीसी प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने पत्रकारों से कहा, "सीट बंटवारे के अंतिम रूप लेने के बाद उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। हमारा प्रयास है कि बिहार के लोगों के लिए एक अच्छी सरकार बने। गठबंधन को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और बिहार को इसका लाभ मिलना चाहिए।" तेजस्वी और कांग्रेस नेताओं की बैठक महागठबंधन में शामिल आरजेडी, कांग्रेस, वामपंथी दल, मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और अन्य सहयोगी दलों ने अपनी बातचीत को तेज कर दिया है। सोमवार शाम को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और कृष्णा अल्लावरु के साथ बंद कमरे में चर्चा की। इससे पहले, तेजस्वी ने बिहार कांग्रेस प्रमुख राजेश राम और पार्टी नेता शकील अहमद खान के साथ प्रारंभिक विचार-विमर्श किया था। पटना में, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के बाहर टिकट के दावेदारों की भीड़ लगी रही। लालू ने कुछ उम्मीदवारों को पार्टी के चुनाव चिह्न सौंपे, लेकिन सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। वहीं, वामपंथी दलों, विशेष रूप से सीपीआई (एमएल) लिबरेशन ने कुछ चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को पार्टी चिह्न जारी करना शुरू कर दिया है। महागठबंधन में जल्द समझौते की उम्मीद महागठबंधन के कुछ नेताओं का मानना है कि अगले एक-दो दिनों में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो सकता है। कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, “हमें अपने नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव पर पूरा भरोसा है। हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वे जल्द से जल्द सीट बंटवारे को अंतिम रूप दें और इसकी घोषणा करें।” एनडीए ने सीट बंटवारे को दिया अंतिम रूप दूसरी ओर, एनडीए ने अपनी सीट-बंटवारा रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (यूनाइटेड) (जेडी(यू)) दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 29 सीटें दी गई हैं। इसके अलावा, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को छह-छह सीटें आवंटित की गई हैं। राज्य बीजेपी प्रमुख दिलीप जायसवाल ने कहा कि एनडीए के सभी पांच सहयोगी दलों द्वारा मंगलवार तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने की संभावना है और दोनों चरणों के लिए नामांकन इस सप्ताह पूरा कर लिया जाएगा। चुनाव की तारीखें चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को 121 सीटों पर होगा, जिसके लिए नामांकन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर है। दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को 122 सीटों पर होगा, और परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। जैसे-जैसे नामांकन की समय सीमा नजदीक आ रही है, बिहार की सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है। महागठबंधन के लिए समय की कमी एक बड़ी चुनौती है, जबकि एनडीए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। अब यह देखना बाकी है कि विपक्षी गठबंधन कब तक अपने मतभेदों को सुलझा पाता है और अपने उम्मीदवारों की घोषणा करता है।

छत्तीसगढ़ में एनडीए उम्मीदवारों की घोषणा आज, दिलीप जायसवाल ने जताया एकजुटता का भरोसा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के अंतर्गत एनडीए आज (सोमवार) की शाम अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगा। यह जानकारी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने दी। उन्होंने रविवार को घोषित सीट बंटवारे को लेकर एनडीए के भीतर किसी तरह के मतभेद होने से इनकार किया और कहा कि गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा। दिलीप जायसवाल ने पत्रकारों से कहा कि एनडीए ने पहले ही सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है। अब भाजपा समेत राजग के सभी घटक दलों के उम्मीदवारों की घोषणा शाम में की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में राजग के पांच घटक दल ‘पांच पांडव’ की तरह हैं और सभी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे तथा भारी बहुमत से सरकार बनाएंगे। बता दें कि सीट बंटवारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि शेष 243 सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की एलजेपी (राम विलास) 29 सीटों पर, जबकि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। हम और आरएलएम ने सीट बंटवारे को लेकर नाराजगी जताई है। सुबह दिल्ली से लौटने के बाद उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि सीट बंटवारे की व्यवस्था आपसी सहमति से तय की गई है। उन्होंने दावा किया कि हम पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे।  

गठबंधन में मोह या मजबूरी? मांझी-कुशवाहा की खामोशी और BJP की चालाकी

पटना  बिहार चुनाव के जारी नामांकन प्रक्रिया के बीच सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे का ऐलान हो गया है. एनडीए के सबसे बड़े घटक भारीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सीट शेयरिंग फॉर्मूले का ऐलान कर दिया. बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेड) 101-101, जबकि चिराग पासवान की पार्टी 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को छह-छह सीटें मिली हैं. जीतनराम मांझी 15 सीटों की डिमांड पर अड़े थे. वहीं, उपेंद्र कुशवाहा 12 सीटें मांग रहे थे. सहयोगी दलों के अड़ियल रुख से फंसे सीट शेयरिंग के पेच को बीजेपी ने आखिर कैसे सुलझाया? बीजेपी 15 सीटों की मांग पर अड़े मांझी और 10 सीटों की डिमांड कर रहे कुशवाहा को 6–6 सीट पर कैसे ले आई?  दरअसल, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा परिवार और रिश्तेदार के मोह में फंस गए. सीट शेयरिंग को लेकर मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के साथ हर दौर की बातचीत में बीजेपी ने उनसे अपनी दावेदारी वाली सीटों से संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने रखने को कहा. जीतनराम मांझी की अगुवाई वाली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत के दौरान बीजेपी को एक बात समझ आ गई. बीजेपी यह समझ गई कि दोनों ही नेता (मांझी और कुशवाहा) अपने परिजनों या रिश्तेदारों के लिए मनपसंद सीटें चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक इस बात का अंदाजा लगते ही बीजेपी ने जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा पर सीटों की संख्या कम करने के लिए प्रेशर बनाना शुरू कर दिया. मांझी और कुशवाहा परिवार और रिश्तेदार के मोह में फंस गए और सीटों का पेच सुलझ गया. जीतनराम मांझी अपनी समधन ज्योति मांझी को बाराचट्टी से चुनाव लड़ाएंगे. वहीं, इमामगंज सीट से उनकी बहू दीपा मांझी उम्मीदवार होंगी. कुछ ऐसी ही रणनीति आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की भी है. उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी पत्नी और बेटे, बहू को विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी में हैं. उपेंद्र कुशवाहा अपनी पत्नी स्नेह लता को सासाराम विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारेंगे. वहीं, महुआ सीट से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक कुशवाहा या बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा में से किसी एक के चुनावी जंग में उतरने की चर्चा है. आरएलएम प्रमुख ने सीट शेयरिंग पर बातचीत के दौरान दिनारा विधानसभा सीट से आलोक सिंह और उजियारपुर से प्रशांत पंकज के नाम बतौर उम्मीदवार रखे. यह दोनों ही नए नाम हैं.