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मध्य प्रदेश: कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़े प्रदर्शन के लिए तैयार, सीएम के गृह क्षेत्र से भिड़ेगी

 उज्जैन   वर्ष 2023 में विधानसभा और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में करारी हार के बाद फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रही कांग्रेस राज्य की भाजपा सरकार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन से ललकारेगी। सरकार को घेरने कांग्रेस 12 सितंबर को उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन करेगी। बड़ी रैली के बाद सभा भी होगी। इसमें सिंहस्थ क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण, कानून-व्यवस्था, वोट चोरी, अवैध शराब के कारोबार सहित तमाम मुद्दों को उठाया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। बता दें, सिंहस्थ-2028 के लिए किसानों की जमीन लैंड पुलिंग के जरिये लिए जाने का किसान संगठन विरोध कर रहे हैं। संगठन के प्रतिनिधि भाजपा के बड़े नेताओं से भी मिल चुके हैं। प्रदेश में वर्ष 2027 से नगरीय निकायों के साथ चुनाव की शुरुआत होनी है। इसके बाद वर्ष 2028 में विधानसभा और वर्ष 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस इसके लिए खुद को तैयार कर रही है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेताओं से नाराजगी के चलते कांग्रेस से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता भाजपा में चले गए थे। इसका असर यह हुआ कि कई मतदान केंद्रों पर बैठाने के लिए कार्यकर्ता तक नहीं मिले। यह स्थिति आगे न बने और कार्यकर्ता हतोत्साहित न रहें, इसके लिए पीढ़ी परिवर्तन पर काम प्रारंभ किया गया। वोट चोर-गद्दी छोड़ अभियान के जरिये पूरे प्रदेश में माहौल बनाया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। प्रदर्शन को प्रभावी बनाने का जिम्मा उज्जैन से लगे जिलों की टीम को दिया है। इसकी सफलता के आधार पर नए अध्यक्षों की क्षमता का आकलन भी होगा। नेतृत्व नए नेताओं के हाथ दे रही कांग्रेस मध्य प्रदेश में भाजपा से मुकाबला करने कांग्रेस नया नेतृत्व तैयार कर रही है। ओबीसी वर्ग से आने वाले जीतू पटवारी को जहां प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो आदिवासी वर्ग के उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाकर मौका दिया। संगठन सृजन अभियान चलाकर जिला अध्यक्ष बनाए गए। जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह, ओमकार सिंह मरकाम जैसे वरिष्ठ नेताओं को जिला अध्यक्ष बनाकर संदेश दिया कि जिला इकाई सबसे महत्वपूर्ण है। जिले के बाद अब ब्लाक इकाइयों में परिवर्तन की तैयारी है। कार्यकर्ताओं को मिशन 2028 में जुटने का संदेश दिया जाएगा     अधिकतर जिलों में 'वोट चोर-गद्दी छोड़' अभियान के अंतर्गत प्रदर्शन हो चुके हैं इसलिए अब राज्य स्तरीय प्रदर्शन उज्जैन में होना है। मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के साथ-साथ उज्जैन मालवा अंचल का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बड़ा प्रदर्शन करके पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं को मिशन-2028 (विधानसभा चुनाव) में जुटने का संदेश दिया जाएगा। – संजय कामले, प्रदेश संगठन महामंत्री, कांग्रेस  

आई-बैंक की जानकारी अब हाथ में: एम्स का नया मोबाइल ऐप कार्निया ट्रांसप्लांट मरीजों के लिए

नई दिल्ली नेत्रदान को लेकर जागरूकता का स्तर बढ़ा है। दान में मिले कार्निया नेत्र बैंकों में जमा हो रहे हैं। यहीं से प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध होते हैं। मरीजों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती और वे दूसरे राज्यों का चक्कर लगाते रहते हैं। इसमें समय, श्रम और धन तीनों अनावश्यक बर्बाद होते हैं। देश में 100 से अधिक नेत्र बैंक हैं। सभी जगह कार्निया के उपयोग की दर भी अलग है। कहीं कार्निया का उपयोग नहीं हो पाता तो कहीं उसकी कमी से प्रत्यारोपण नहीं हो पाते। इन समस्याओं के समाधान के लिए एम्स के डाॅ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र स्थित राष्ट्रीय नेत्र बैंक (एनईबी) आगे आया है। आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से एप विकसित कर रहा है। इसकी मदद से न केवल अपने राज्य के नेत्र बैंकों में कार्निया की उपलब्धता का पता चलेगा, बल्कि वाॅट्सएप के जरिए लोकेशन भी प्राप्त होगी। वहीं, सभी नेत्र बैंक एक साझा प्रणाली से भी जुड़ेंगे। कम उपयोग होने पर कार्निया ज्यादा उपयोग वाले नेत्र बैंकों को भेजे जा सकेंगे। राष्ट्रीय नेत्र बैंक 40वां नेत्रदान पखवाड़ा मना रहा है, जो आठ सितंबर तक चलेगा। आरपी सेंटर की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन के मुताबिक एप पर तेजी से काम चल रहा है। अगले दो से तीन महीने में इसे लांच कर दिया जाएगा। नेत्र बैंकों का सारा डाटा इस पर उपलब्ध होगा। हर शहर में वाॅट्सएप के जरिए लोकेशन भी आ जाएगी। एआई चैटबाट भी लाॅन्च किया जाएगा, जिस पर मरीज या तीमारदार टाइप करके या वाइस नोट के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं के जवाब पा सकेंगे। इसके अलावा देश के अन्य नेत्र बैंकों के कामकाज में भी लगातार मदद की जा रही है। इसके लिए कार्नियल संरक्षण भंडारण माध्यमों (एमके मीडिया और एक्सस्टोरसोल मीडिया) का निर्माण और वितरण किया जा रहा है, जो भारत सरकार के एनपीसीबी से वित्तपोषित है। यह एम्स के नेत्र औषध विज्ञान विभाग में ही निर्मित किया जाता है। वर्ष 2024 में 24 राज्यों के 114 नेत्र बैंकों में एक्सस्टोरसोल मीडिया की 2824 से अधिक वायल वितरित की गईं। डोनर कार्निया के विकल्प के तौर पर बायो इंजीनियर्ड कार्निया आईआईटी-दिल्ली के सहयोग से तैयार किया है। खरगोश में इसका प्रत्यारोपण सफल रहा। अब क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी है। राष्ट्रीय नेत्र बैंक एक नजर में     36,000 कार्निया एकत्र की पिछले 60 वर्षों में।     26,000 से अधिक कार्निया प्रत्यारोपण पिछले छह दशक में।     500 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों को एंडोथेलियल केराटोप्लास्टी तकनीक की ट्रेनिंग।     1,931 कार्निया मिले देशभर से वर्ष 2024 में।     1,611 कार्निया अस्पताल कार्निया प्राप्ति कार्यक्रम (एचसीआरपी) से मिले।     1,636 कार्निया प्रत्यारोपण वर्ष 2024 में     50 प्रतिशत है कार्निया उपयोग की राष्ट्रीय दर।     85 प्रतिशत है आरपी सेंटर के एनईबी में कार्निया उपयोगी की दर। संक्रमण और चोट बन रही कार्निया डैमेज की वजह प्रो. टंडन के मुताबिक संक्रमण और चोट के चलते कार्निया डैमेज के सबसे ज्यादा मामले आते हैं। आंख में कुछ चले जाने पर आमतौर पर लोग रगड़ने लगते हैं। इसका कार्निया पर असर पड़ता है। वहीं, चोट लगने की स्थिति में भी लोग खुद से स्टेरायड डाल लेते हैं। ये आंख में संक्रमण की वजह बनता है। कई बच्चों को जन्मजात भी कार्निया की बीमारी होती है। ऐसी स्थिति में भी कार्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। देश में हर वर्ष लगभग एक लाख लोगों को कार्निया प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। जबकि केवल 25 से 30 हजार को ही इसके लिए कार्निया उपलब्ध हो पाता है।  

शनिवार से शुरू होगी बदरीनाथ यात्रा, हाईवे पर यातायात रहेगा सामान्य

गोपेश्वर पांच दिनों से हेमकुंड व बदरीनाथ धाम की यात्रा पर मानसून के चलते लगाई गई रोक हटा दी गई है। कल,आज से विधिवत्त हेमकुंड व श्री बदरीनाथ धाम की यात्रा शुरु हो जाएगी। हालांकि प्रशासन ने चमोली के पडावों में मौजूद यात्रियों को शुक्रवार को बदरीनाथ धाम भेजा है। सुबह से चमोली जिले में मौसम साफ होने के साथ धूप खिली हुई थी। बदरीनाथ हाईवे भी सुचारु था। यात्रा पडाव ज्योतिर्मठ,चमोली ,पीपलकोटी सहित आस पास के क्षेत्र में लगभग 500 से अधिक यात्रियों को बदरीनाथ भेजा गया,हालांकि उनको वर्षा के दौरान सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की हिदायदी दी गई लेकिन दिनभर मौसम साफ होने के चलते यात्रियों ने राहत की सांस ली है। हेमकुंड साहिब में स्थानीय लोगों को छोड यात्री नहीं गए हैं। बताया गया कि क्षेत्र के स्थानीय लोग हेमकुंड यात्रा पर गए जिन्होंने हेमकुंड ,लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के दर्शन किए। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने कहा कि हेमकुंड यात्रा पर यात्रियों को नहीं भेजा गया है। कहा कि स्थानीय लोग हेमकुंड यात्रा पर गए हैं। पांच दिनाें से बंद यात्रा कल,आज से सुचारु कर दी गई है।  

राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ धोखाधड़ी मामले में लुकआउट नोटिस

मुंबई बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने व्यापारी दीपक कोठारी से लगभग 60 करोड़ रुपये की ठगी की है। इस मामले में अब EOW ने उनकी मूवमेंट पर नज़र रखने के लिए लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है, जिससे दोनों देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।   व्यापारी का आरोप शिकायतकर्ता दीपक कोठारी का कहना है कि उन्होंने 2015 से 2023 के बीच शिल्पा-राज की कंपनी Best Deal TV Pvt. Ltd. में निवेश किया था। यह कंपनी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म चलाती थी। कोठारी ने आरोप लगाया कि कंपनी में निवेश किए गए 60 करोड़ 48 लाख रुपये का इस्तेमाल बिज़नेस के बजाय निजी खर्चों में कर लिया गया। कोठारी के मुताबिक, 2016 में खुद शिल्पा शेट्टी ने पैसों की वापसी की पर्सनल गारंटी भी दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने कंपनी के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया और कंपनी दिवालिया घोषित हो गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनका पैसा लौटाया गया। पुलिस की जांच EOW ने अब इस मामले में IPC की धारा 403, 406 और 34 के तहत FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि निवेश की रकम का इस्तेमाल किन-किन कामों में हुआ और पैसों का फ्लो कहां गया। पुलिस ने दंपति के ट्रैवल रिकॉर्ड की भी जांच शुरू कर दी है। लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब दोनों बिना अनुमति देश से बाहर यात्रा नहीं कर पाएंगे।

युद्ध में सफलता की कुंजी: CDS अनिल चौहान ने बताया ‘सरप्राइज’ फैक्टर

गोरखपुर ‘भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध में सफलता हासिल करने के लिए सरप्राइज एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है। उरी सर्जिकल स्ट्राइक में भारत ने जमीन के रास्ते जाकर आतंकी ठिकानों को बर्बाद किया, बालाकोट में एयर स्ट्राइक का सहारा लिया गया। जबकि पहलगाम हमले के बाद लो एयर स्पेस, ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। भारतीय सेनाओं ने हर बार दुश्मन को सरप्राइज कर अपना टारगेट पूरा किया।   उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भारतीय सेनाएं 365 दिन, 24×7 के फार्मूले पर हमेशा तैयार हैं। आतंकवादी कहीं भी हो, उसे ढूढ़कर मारा जाएगा। सीडीएस जनरल चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक व्यापक और महत्वपूर्ण विषय है। हर वर्ग और व्यक्ति इसे अपने नजरिए से देखता है। किसी देश के राजदूत इसे द्विपक्षीय या बहुपक्षीय दृष्टि से देखतेहैं, तो अर्थशास्त्री इसे आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से। सैनिक का दृष्टिकोण भिन्न होता है। उन्होंने बताया कि आचार्य चाणक्य ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए चार तथ्य बताएहैं:, राष्ट्र के आंतरिक खतरे, बाह्य खतरे, बाहरी सहयोग से आंतरिक खतरे और आंतरिक सहयोग से बाहरी खतरे। सीडीएस ने कहा कि समग्र रूप से राष्ट्र की सुरक्षा के लिए तीन घटक महत्वपूर्ण होते हैं। भूमि की सुरक्षा, विचारधारा की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इन तीनों की सुरक्षा अनिवार्य है। इस संदर्भ में उन्होंने तीन घेरों सैन्य सुरक्षा, राष्ट्र की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सैन्य तत्परता के लिए रक्षा संसाधनों, अनुसंधान एवं विकास के साथ रणनीतिक संस्कृति अहम होती है। इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी भी जरूरी है। सीडीएस जनरल चौहान ने एक जर्मन विद्वान के उद्धरण के हवाले से कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में युद्ध, राजनीति का ही विस्तार है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को अल-अलग नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसी राष्ट्र की सरकार यह सोचती है कि दूसरे राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग करने की जरूरत है तो वह सैन्य अफसरों को कार्य करने के लिए निर्देशित करती है। इसमें सैन्य क्षमता पर भरोसा और सैन्य विकल्पों की विविधता महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमता की मजबूती इस बात पर भी निर्भर होती है कि किसी राष्ट्र ने शांति काल में रक्षा क्षेत्र में कितना खर्च किया। सीडीएस ने बताया कि भारत की तीनों सेनाओं ने गलवान, बालाकोट में मजबूत सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बालाकोट हमले के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने अलग-अलग सीख ली। पाकिस्तान ने एयर डिफेंस पर ध्यान दिया तो भारत ने लंबी दूरी तक हमला करने वाले हथियारों पर। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व से सैन्य बलों को दिशा मिलती है। ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व से क्लियर कट दिशा निर्देश था कि आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाना है, नागरिक ठिकानों को नहीं। दुश्मन के किसी भी उकसावे पर सेना को जवाबी कार्रवाई की खुली छूट दी गई थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ बदला लेना नहीं था, धैर्य का स्तर भी बढ़ाना था। ऑपरेशन सिंदूर ऐसा पहला युद्ध था जिसमें दुश्मन से आमने सामने की लड़ाई काफी कम थी। इसमें न फ्रंट था और न रियर। ऑपरेशन सिंदूर अभी ऑफिशियली टर्मिनेट नहीं किया गया है। सीडीएस ने कहा कि भारत में राष्ट्र की सुरक्षा की पहली चुनौती सीमा विवाद की है। पाकिस्तान और चीन से हुई लड़ाइयां सीमा विवाद का ही परिणाम हैं। पाकिस्तान की तरफ से प्रॉक्सी वार, पड़ोसी देशों में अस्थिरता और युद्ध के बदलते स्वरूप अन्य चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप अब विकेंद्रित होता जा रहा है। भविष्य में नई तकनीकी आधारित, रोबोटिक्स और मानवरहित युद्ध हो सकते हैं। सीडीएस ने कहा कि ‘न्यू नॉर्मल’ नीति ऐसी स्थिति होती है जो संकट खत्म होने के बाद बनती है। जैसे कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम और नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन की अभ्यस्तता। पर, न्यू नॉर्मल में यह स्पष्ट है कि आतंकवाद और बातचीत, व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते। सीडीएस ने अपने संबोधन में पीएम मोदी द्वारा घोषित ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा प्रणाली की चर्चा करते हुए कहा कि इसे 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सुदर्शन चक्र स्वार्ड (तलवार) और शील्ड (ढाल) दोनों का काम करेगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और सशक्त भारत वसुधैव कुटुम्बकम की भूमिका निभाना चाहता है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- मध्यप्रदेश मातृ-शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सतत सुधार की राह पर

एमएमआर में 17, यू5 एमआर में 5, आईएमआर और एनएमआर में 2-2 अंकों का सुधार भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के केन्द्रित एवं समन्वित प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहे हैं। मध्यप्रदेश मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में सही मार्ग पर है। हम स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मैनपावर की वृद्धि, बेहतर लक्ष्यीकरण, सतत् मॉनिटरिंग और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान के माध्यम से आगामी वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम-2023 की रिपोर्ट में प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए हैं—मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 159 से घटकर 142, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 29 से घटकर 27, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 40 से घटकर 37 और 5 वर्ष से कम आयु बाल मृत्यु दर (यू5 एमआर) 49 से घटकर 44 हो गई है। ये आँकड़े सकारात्मक संकेत हैं कि हमारे प्रयास सही दिशा में हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने यह उपलब्धि प्रदेश की स्वास्थ्य टीम की अथक मेहनत का परिणाम है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ, नर्स, डॉक्टर, विशेषज्ञ, प्रशासक और नीति निर्धारक सभी ने मिलकर निरंतर कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह सफलता आगे बढ़ने की प्रेरणा है। सतत प्रयास, वैज्ञानिक योजना और जनभागीदारी के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 7 अप्रैल 2025 को मातृ शिशु संजीवन मिशन और अनमोल 2.0 पोर्टल का शुभारंभ इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 80 प्रति लाख, नवजात मृत्यु दर को 10 प्रति हजार से कम और शिशु मृत्यु दर को 20 प्रति हजार से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। अनमोल 2.0 और ई-पीएमएसएमए जैसे डिजिटल टूल्स के माध्यम से हाई रिस्क गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और प्रबंधन किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जाँच हर माह की 9 और 25 तारीख को की जा रही है तथा पोषण किट, आयरन सप्लीमेंट और आवश्यक इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चिन्हित अस्पतालों को एफआरयू के रूप में सक्रिय कर एचडीयू/आईसीयू, एसएनसीयू/एनबीएसयू को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के साथ-साथ सीएचसी और पीएचसी को सुदृढ़ बनाने, टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ सेवाएँ उपलब्ध कराने, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की पहचान और समय पर देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुस्कान और लक्ष्य कार्यक्रमों से गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है तथा ई-रूपी और “यू कोट वी पे” योजनाओं के तहत सोनोग्राफी और एनेस्थीसिया सेवाएँ सुलभ हुई हैं। उन्होंने कहा कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारों के साथ-साथ किशोर स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में स्वस्थ गर्भधारण सुनिश्चित हो सके। शत-प्रतिशत ट्रैकिंग, मातृ एवं शिशु प्रकरणों की रिपोर्टिंग और समीक्षा, टीबी व सिकल सेल स्क्रीनिंग, कैंसर नियंत्रण, एनसीडी स्क्रीनिंग और एचपीवी टीकाकरण जैसे उपायों से व्यापक स्वास्थ्य सुधार का रोडमैप तैयार किया गया है।  

राहत शिविर का दौरा करने पहुंचे केजरीवाल, लोगों ने जताई असंतोष की भावना

नई दिल्ली  दिल्ली में बाढ़ और जलभराव ने एक बार फिर राजधानी की तैयारियों की पोल खोल दी है। जिन इलाकों में पहले राहत शिविरों में समय पर टेंट लगते थे, मच्छरदानी, खाना, पीने का पानी और डॉक्टरों की व्यवस्था रहती थी, आज उन्हीं शिविरों में बदइंतज़ामी और लापरवाही साफ देखी जा सकती है। बढ़ते संकट के बीच लोग खुद यह कहते नजर आ रहे हैं कि जब अरविंद केजरीवाल की सरकार थी, तो राहत का इंतज़ाम तेज़ और मानवीय होता था। कहीं पानी भरने से पहले पंप लगाए जाते थे, नाले समय से साफ होते थे, और राहत शिविरों में व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाता था। अब जबकि दिल्ली की सत्ता में आम आदमी पार्टी नहीं है, और MCD व केंद्र दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, ऐसे में हालात काबू से बाहर होते दिख रहे हैं। टेंट समय पर नहीं लगे, लोगों को खाना नहीं मिला, पीने का साफ पानी नहीं है और मच्छरों से परेशान लोग खुद दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। लोगों की नाराज़गी इस बात से भी है कि जिन समस्याओं को पहले खुद मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर पहुंचकर हल करते थे, अब उन पर ध्यान देने वाला कोई नहीं दिखता। न तो कोई ज़िम्मेदार मंत्री हालात का जायज़ा लेने आया, न कोई ठोस कार्रवाई की गई। हर ओर एक किस्म की ‘प्रशासनिक चुप्पी’ पसरी हुई है।   केजरीवाल ने राहत शिविरों में जाकर जो हालात देखे, वो बताने के लिए काफी हैं कि आज की सरकारें सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त हैं, ज़मीन पर कुछ नहीं कर पा रहीं। उन्होंने सरकारों से अपील की कि राहत व्यवस्था को राजनीति से ऊपर रखकर देखें, क्योंकि यह मानवीय संकट है, और इसमें देरी का मतलब है जनता को और तकलीफ़ देना। दिल्ली के लोगों को अब वो दिन याद आ रहे हैं जब अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में हर संकट को तुरंत जवाब मिलता था। अब जबकि सत्ता में वे नहीं हैं, तो लोग कह रहे हैं, "आज के हालात देखकर समझ आता है कि पहले अरविंद केजरीवाल की सरकार वाकई हमारे लिए काम करती थी।  

मुख्यमंत्री ने पन्ना जिले के अमानगंज में महिला सम्मेलन में हितलाभ वितरित किये

पन्ना में शीघ्र होगा मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पन्ना हीरा और महावीरों की धरती है। ईश्वर ने पन्ना को विशेष आशीर्वाद दिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण के लिए हमारी सरकार कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी बहनों को अनेक योजनाओं की सौगात दीं। लाड़ली बहनों को 250 रुपए राखी का शगुन अलग से भेजा गया है। अब लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद भाई-दूज से हर माह 1500 रुपए प्रति माह मिलेंगे। धीरे-धीरे वर्ष 2028 तक लाड़ली बहनों को 3000 रुपए देंगे। लाड़ली बहनों के लिए सरकार के खजाने में कोई कमी नहीं है। कुछ दिन पहले एक सर्वे आया है कि जहां-जहां लाड़ली बहना योजना लागू की गई हैं। वहां घरों में सुख-समृद्धि आई है। प्रदेश सरकार हर कीमत पर माताओं-बहनों के सम्मान की रक्षा करेगी और उन्हें आर्थिक समृद्धि प्रदान करने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को पन्ना जिले के अमानगंज में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना जिले को 106 करोड़ लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पन्ना और बुंदेलखंड में आज भी महाराज छत्रसाल और आल्हा-ऊदल की वीरता की गाथाएं गाई जाती हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र त्याग और बलिदान में कभी पीछे नहीं रहा। इसी प्रकार प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय सेना ने पराक्रम दिखाया और बहनों के सिंदूर उजाड़ने वालों को सबक सिखाकर बदला लिया। पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की बड़ी निर्ममता से हत्या की थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सेना दुश्मन देश में घुसी और आतंकियों को मिट्टी में मिला दिया। कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा बुंदेलखंड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार हर जिले में उद्योगों को बढ़ावा दे रही है और युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए हर संभव कार्य कर रही है। प्रदेश में पुलिस के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती की जा रही है। सालभर में कुल 1 लाख से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां होंगी। अब मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रदेश को 1 लाख करोड़ की नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से पन्ना सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। बुंदेलखंड के किसान अपनी जमीन न बेचें। भविष्य में बुंदेलखंड कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार ने गरीब-जरूरतमंदों को पक्के मकान दिए हैं। नल जल योजना के माध्यम से घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है। आयुष्मान योजना से 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त हो रहा है। राज्य सरकार भी स्कूली बच्चों को स्कूटी, लैपटॉप, छात्रवृत्ति, गणवेश, साइकिल, कॉपी-किताब सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की विकास कार्यों की घोषणाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे जल्द ही मेडिकल कॉलेज का भूमि-पूजन करने के लिए पन्ना आएंगे। पन्ना को खजुराहो से रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। पन्ना में एक स्टेडियम और स्थाई हेलीपैड बनाया जाएगा। अमानगंज में अस्पताल के उन्नयन सहित विधानसभा क्षेत्र गुनौर में सात उप स्वास्थ्य केन्द्र खोलने, सलेहा में नवीन महाविद्यालय की स्थापना, देवेन्द्रनगर के शासकीय महाविद्यालय में नवीन संकाय प्रारंभ करने एवं स्कूल उन्नयन, अगस्त्य मुनि आश्रम के सौंदर्यीकरण, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के तहत बरगी नहर सिंचाई प्रणाली की उद्वहन सिंचाई परियोजना की घोषणा की। इस परियोजना के क्रियान्वयन से क्षेत्र के 114 गांव लाभांवित होंगे और 25 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। मुख्यमंत्री ने गढ़ीपडरिया के वृन्दावन बांध की क्षमता बढोत्तरी कर नहरों के जीर्णोद्धार कार्य सहित गुनूसागर सिंचाई परियोजना की भी घोषणा की। सांसद श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं। 12 हजार 500 करोड़ के जल जीवन मिशन में पन्ना जिले की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पन्ना और गुनौर विधानसभा क्षेत्र में अस्पताल, नदी के पुल, खेल मैदान, सड़क जैसे अनेक विकास कार्य प्रगति पर हैं। पन्ना विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और विधायक गुनौर श्री राजेश वर्मा ने भी संबोधित किया। विकास प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की योजनाओं पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित सामग्री देखी। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग आयोग श्री रामकृष्ण कुसमरिया, विधायक पवई श्री प्रहलाद लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मीना राजे परमार, नगर पालिका अध्यक्ष पन्ना श्रीमती मीना पाण्डेय, कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी, पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती हिमानी खन्ना, पुलिस उपमहानिरीक्षक श्री ललित शाक्यवार, कलेक्टर श्री सुरेश कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री साईं कृष्ण एस थोटा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक एवं माताएं-बहनें उपस्थित थीं।  

अमेरिकी टैरिफ के बीच भारत का अचूक खेल, दुनिया ने देखा चौंकाने वाला मोड़

नई दिल्ली  भारत ने अमेरिकी टैरिफ की परवाह किए बिना ऐसा गेम खेला कि पूरी दुनिया देखती रह गई। रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदकर भारत ने न सिर्फ अमेरिका के 25% अतिरिक्त टैक्स को ठेंगा दिखाया, बल्कि उस तेल को प्रोसेस करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में जमकर बेचा और भारी मुनाफा भी कमाया। अब भारत का डीजल यूरोप तक में धड़ल्ले से बिक रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अगस्त 2025 में डीजल शिपमेंट के मामले में यूरोप को चौंका दिया है। भारत की तेल नीति से बदला ग्लोबल गेमप्लान रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते जब पश्चिमी देशों ने रूसी तेल और ऊर्जा संसाधनों पर सख्त प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया। इसे घरेलू रिफाइनरियों में प्रोसेस कर भारत ने वैश्विक बाजार, खासकर यूरोप, में डीजल की आपूर्ति तेज कर दी। एक्सपोर्ट में ऐतिहासिक उछाल आंकड़ों की बात करें तो भारत का डीजल निर्यात अगस्त 2025 में सालाना आधार पर 137% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ प्रतिदिन 2,42,000 बैरल तक पहुंच गया। ग्लोबल रियल टाइम डेटा एंड एनालिटिक्स प्रोवाइडर Kpler के अनुसार, सिर्फ यूरोप को भारत ने अगस्त में 73% अधिक डीजल भेजा, जबकि सालाना आंकड़ा 124% की ग्रोथ दिखाता है। वहीं, Vortexa की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त में यूरोप को भारत का डीजल एक्सपोर्ट 228,316 बैरल प्रतिदिन रहा, जो पिछले साल की तुलना में 166% अधिक है और जुलाई 2025 के मुकाबले 36% ज्यादा। रिलायंस जैसी कंपनियों को झटका लग सकता है भले ही फिलहाल भारत की ऊर्जा नीति फायदेमंद नजर आ रही हो, लेकिन 2026 की शुरुआत में यूरोपीय यूनियन के प्रस्तावित प्रतिबंधों के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख कंपनियों को बड़ा धक्का लग सकता है, जो रूस के तेल पर आधारित रिफाइनिंग करती हैं और यूरोप को सप्लाई देती हैं।   क्यों बढ़ा भारत का डीजल निर्यात? इस बूम के पीछे कई कारण हैं:- -यूरोप में शीतकालीन मांग (Winter Demand) की तेजी। -रिफाइनरियों द्वारा की गई अन्यतम मेंटेनेंस। -रूस पर प्रतिबंधों से उत्पन्न आपूर्ति की कमी। -भारत की गंभीर सप्लाई चेन क्षमताएं और लो-कोस्ट रिफाइनिंग। -इन सभी कारकों ने भारत को यूरोपीय ऊर्जा संकट के बीच एक प्रमुख सप्लायर बना दिया है। पश्चिमी आलोचना और भारत का जवाब भारत की इस ऊर्जा रणनीति पर अमेरिका और उसके सहयोगी तीखी आलोचना कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि भारत, रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे प्रोसेस करने के बाद यूरोप को ऊंचे दाम पर बेच रहा है- और ऐसा करके मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए अप्रत्यक्ष फंडिंग मिल रही है। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा है: “हम बाजार से खरीदते हैं और उसे वैश्विक बाजार में बेचते हैं। यदि किसी देश को इससे आपत्ति है, तो वे खरीद बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं।” क्या डीजल की मांग बनी रहेगी? ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के अंत तक डीजल की वैश्विक मांग मजबूत बनी रहेगी। विशेषकर यूरोप जैसे बाजार, जो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश में हैं, फिलहाल भारतीय सप्लायर्स पर निर्भर रह सकते हैं।  

1.5 लाख जनसेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से परिवहन की सेवाएं उपलब्ध कराने का शुभारंभ करेंगे सीएम योगी

शनिवार को विभिन्न योजनाओं का करेंगे शुभारंभ व लोकार्पण  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हॉल में होगा कार्यक्रम  आईआईटी खड़गपुर व परिवहन विभाग के बीच होगा एमओयू राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तीन महिला परिचालकों को दिया जाएगा नियुक्ति पत्र  सड़क सुरक्षा के लिए 11 इंटरसेप्टर को हरी झंडी दिखाएंगे मुख्यमंत्री 8 डबल डेकर इलेक्ट्रिक बस, 16 इलेक्ट्रिक बस, 1 रेट्रोफिट इलेक्ट्रिक बस, 10 सीएनजी, दो एसी बस, 20 टाटा बस, 43 आशयर सहित 400 बीएस- सिक्स बसों का करेंगे शुभारंभ  डिजिटल बस ट्रैकिंग (मार्गदर्शी) ऐप का भी शुभारंभ करेंगे सीएम, इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट की नई बुकलेट का करेंगे विमोचन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को परिवहन विभाग के जरिए प्रदेशवासियों को अनेक सौगात देंगे। वे परिवहन विभाग की अनेक योजनाओं का शुभारंभ व लोकार्पण भी करेंगे। यह आयोजन शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हॉल में होगा। कार्यक्रम में परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह भी उपस्थित रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1.5 लाख जनसेवा केंद्रों (सीएससी)के माध्यम से परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने का भी शुभारंभ करेंगे।  परिवहन विभाग की इस पहल से आमजन को बड़ी सुविधाएं प्राप्त होंगी।  आईआईटी खड़गपुर व परिवहन विभाग के मध्य होगा एमओयू परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सरल परिवहन हेल्पलाइन 149 का शुभारंभ भी करेंगे। आईआईटी खड़गपुर व परिवहन विभाग तथा परिवहन निगम व सीएससी के मध्य भी एमओयू होगा। सीएम योगी इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट की नई बुकलेट और डिजिटल बस ट्रैकिंग (मार्गदर्शी) ऐप का भी शुभारंभ करेंगे।  बस स्टेशन के विकासकर्ताओं को भी सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री  श्री सिंह ने बताया कि पीपीपी के अंतर्गत व अनुदान आधारित बस स्टेशनों का डिजिटल उद्घाटन व शिलान्यास भी होगा। इसके पश्चात पीपीपी मोड पर विकसित किए जाने के लिए चयनित बस स्टेशनों के विकासकर्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा। एडीटीसी व आरवीएसएफ के 4-4 नवीनतम केंद्रों के प्रमाण पत्र का भी वितरण होगा। सीएम योगी के हाथों चार नवीनतम ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर के निवेशकों को प्रमाण पत्र का भी वितरण किया जाएगा। जनसेवा केंद्रों के माध्यम से परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने विषयक चार व्यक्तियों को भी प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।  तीन महिला परिचालकों को नियुक्ति पत्र भी देंगे सीएम योगी   परिवहन आयुक्त ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ मंच पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तीन महिला परिचालकों को नियुक्ति पत्र भी वितरित करेंगे। सीएम योगी सड़क सुरक्षा के लिए 11 इंटरसेप्टर को हरी झंडी दिखाएंगे। साथ ही 8 डबल डेकर इलेक्ट्रिकबस, 16 इलेक्ट्रिक बस, 1 रेट्रोफिट इलेक्ट्रिक बस, 10 सीएनजी, दो एसी बस, 20 टाटा बस, 43 आशयर सहित 400 बीएस- सिक्स बसों का शुभारंभ भी करेंगे।