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शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव और स्किल डेवलपमेंट पर जोर

– थर्मल पावर को न्यूक्लियर पावर में बदलने की जरूरत : विशेषज्ञ – हर गांव में वॉटर एटीएम और स्वच्छ पेयजल पर फोकस – ओडीओपी, मिठाई और दूध उत्पादों के देशव्यापी प्रसार पर जोर – संस्कृति, समाज और परिवार को 2047 के विकास मॉडल में प्रमुखता दिये जाने की जरूरत – बजट का 5% हिस्सा रिसर्च पर खर्च करने का सुझाव लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत @2047” विज़न को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को एक बड़े अभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047” अभियान का शुभारंभ हुआ। राजधानी के लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और विशेषज्ञ जनों ने अपने विचार रखे और प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के रोडमैप पर गहन विमर्श किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने और 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, अनुसंधान, संस्कृति और सामाजिक संरचना पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी प्रेरणा की आवश्यकता प्रो. विघ्नेश कुमार ने सुझाव दिया कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी गाथाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया जाए ताकि समाज में ऊर्जा और विरासत के सम्मान का मोमेंटम लगातार बना रहे। कृषि और शिक्षा व्यवस्था पर जोर डॉ. विजय सिंह निरंजन, पूर्व अधिकारी, ने किसानों के हित में खाद्य का भंडारण सीधे उनके घर पर करने की व्यवस्था का सुझाव दिया। उन्होंने कोचिंग संस्थानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक कोचिंग बंद रहनी चाहिए, ताकि बच्चे नियमित रूप से स्कूल-कॉलेज जा सकें और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही, विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही एक समान योजनाओं को एकीकृत कर कार्यकुशलता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। प्रजेंटेशन और जागरूकता का विस्तार रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रंजन द्विवेदी ने सुझाव दिया कि इस पूरे अभियान को क्षेत्रवार प्रस्तुत किया जाए और सोशल मीडिया के जरिए इसका प्रसार होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। शिक्षा और रिसर्च में क्रांति रिटायर्ड आईएएस आनंद कुमार ने शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ट्यूशन कल्चर को कम करना होगा और स्कूलों में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना होगा। साथ ही, भारतीय संस्कारों को शिक्षा में समाहित करना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में रिसर्च हब और रिसर्च सेंटर बनाने की आवश्यकता भी बताई। बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव रिटायर्ड रेलवे अफसर विजय कुमार दत्त ने कहा कि प्रदेश में 78 हजार किलोमीटर लंबे मार्गों को रेलवे लाइनों के साथ मैप करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि थर्मल पावर प्लांट्स को न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में बदलने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। संस्कृति और परंपरा का महत्व संस्कृत प्रोफेसर विपिन त्रिपाठी ने विकास योजना में भारतीय परंपराओं को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योजना को 12 माह और 12 राशियों से जोड़कर देखा जा सकता है और संस्कृत विद्या को इसमें प्रमुखता दी जानी चाहिए। उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था रिटायर्ड रेलवे अधिकारी शैलेन्द्र कपिल ने सुझाव दिया कि दूध उत्पादों का देशव्यापी प्रसार और मिठाई उद्योग को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की मिठाइयों की प्रसिद्धि को देश के अन्य राज्यों तक पहुंचाना होगा। टाउनशिप और उच्च शिक्षा पूर्व प्रोफेसर ए.के. जयंतली ने बताया कि बैरन लैंड पर छोटे-छोटे टाउनशिप बनाए जाने चाहिए ताकि गांव भी विकसित हों। उन्होंने खेती की जमीन पर शहरीकरण को रोकने, उच्च शिक्षा में “एंड्रोगोगी” पद्धति अपनाने और स्किल डेवलपमेंट पर जोर देने की बात कही। अन्य महत्वपूर्ण सुझाव – ओडीओपी (ODOP) पर फोकस करना। – एम्स की तरह प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना। – बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, हर गांव में वॉटर एटीएम की स्थापना। – आपदा राहत और थ्रेट प्रोटेक्शन की योजनाएं। – ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के ठेकों पर नियंत्रण। – जनता से संवाद के लिए अधिक समय उपलब्ध कराना। – 2047 विकसित यूपी अभियान में संस्कृति, समाज और परिवार को प्राथमिकता। – पशु-पक्षियों के कल्याण को भी विकास योजना में शामिल करना। – कुल बजट का 5% हिस्सा रिसर्च के लिए निर्धारित करना। – सामाजिक समरसता और क्षेत्रवार विकास को महत्व देना। कार्यक्रम के अंत में विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास की राह शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, संस्कृति और सामाजिक समरसता से होकर ही गुजरती है। यदि इन बिंदुओं पर ध्यान दिया गया, तो 2047 तक “विकसित उत्तर प्रदेश” का संकल्प अवश्य पूरा होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्रदेव सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, वरिष्ठ अधिकारीगण, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अवकाश प्राप्त अधिकारीगण, प्रोफेसर आदि गणमान्य मौजूद रहे।

हमले के बाद और सख़्त हुई रेखा गुप्ता, नई व्यवस्था के साथ फिर शुरू की ‘जन सुनवाई’

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने ‘कैंप कार्यालय’ में जनसुनवाई फिर से शुरू की। एक पखवाड़े पहले ही जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया था। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने अपनी-अपनी शिकायतें दर्ज कराईं और मुख्यमंत्री से मदद की गुहार की। अब टेबल-कुर्सी और माइक्रोफोन वाली व्यवस्था गुप्ता एक कुर्सी पर बैठी थीं, जबकि लोग एक-एक करके उनके सामने आकर अपने आवेदन जमा कर रहे थे और इस उद्देश्य के लिए उनकी मेज पर लगाए गए माइक्रोफोन के माध्यम से उनसे बातचीत कर रहे थे। इससे पहले गुप्ता अपने आवास-सह-कैंप कार्यालय में ‘जन सुनवाई’ के लिए एकत्रित लोगों के बीच जाती थीं और उनसे खुलकर बातचीत करती थीं। सुरक्षा में इजाफा मुख्यमंत्री के जनसुनवाई करने के दौरान महिला सुरक्षाकर्मियों सहित पुलिसकर्मियों ने उनके चारों ओर घेरा बना रखा था। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिसमें मेटल डिटेक्टर से प्रतिभागियों की तलाशी लेना और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से कार्यवाही की निगरानी करना शामिल था। गुप्ता पर 20 अगस्त को राज निवास मार्ग स्थित उनके ‘कैंप कार्यालय’, मुख्यमंत्री जन सेवा सदन में जनसुनवाई के दौरान राजकोट (गुजरात) के एक व्यक्ति ने हमला किया था। 165 लोगों की सुनीं शिकायतें अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद और सरकार से मदद की गुहार लगाने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं मुख्यमंत्री आवास पर एकत्रित हुए। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 165 लोगों ने मुख्यमंत्री को अपनी शिकायतें और सुझाव सौंपे, जिन पर उन्होंने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इस अवसर पर कई लोगों ने गुप्ता को गुलदस्ते देकर बधाई दी। क्या बोलीं सीएम दिल्ली की मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने समूची दिल्ली से आए लोगों से मुलाकात की और अधिकारियों को उनकी शिकायतों के तत्काल निवारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, ‘जनता से बातचीत मुझे हमेशा एक नई ऊर्जा से भर देती है और सेवा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता को और गहरा करती है। जन सुनवाई एक नई परंपरा है।’ उन्होंने कहा, ‘जन सुनवाई के दौरान हर नागरिक की बात सुनी जाती है और हर सुझाव दिल्ली के विकास का प्रतीक बन जाता है।’ उन्होंने कहा कि जनसेवा और हर शिकायत का निवारण दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।  

जंग का नया दौर… रूस ने यूक्रेन पर बरसाए सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें

कीव  रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ युद्ध 42 महीने से अधिक समय से चल रहा है और अभी भी इसके रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस युद्ध के कारण हर दिन जान-माल का नुकसान हो रहा है। यूक्रेन में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और कई शहर तबाह हो चुके हैं। रूस के भी कई सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं। इतने नुकसान के बावजूद, रूस के यूक्रेन पर हमले जारी हैं। बीती रात रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। रूस ने यूक्रेन पर दागे 500 ड्रोन-मिसाइलें रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला करते हुए देर रात 526 ड्रोन-मिसाइलें दागीं, जिनमें 502 ड्रोन और 24 मिसाइलें शामिल थीं। यूक्रेन की वायुसेना ने इस रूसी हमले की जानकारी दी। इस हमले में मुख्य रूप से यूक्रेन का पश्चिमी हिस्सा निशाना बना। यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, रूस द्वारा दागे गए 69 ड्रोन और 3 मिसाइलें 14 अलग-अलग स्थानों पर गिरीं। बाकी ड्रोन और मिसाइलों को यूक्रेनी वायुसेना ने नष्ट कर दिया, लेकिन उनका मलबा भी कई जगहों पर गिरा। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस हमले से कई घरों, इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। हाल के दिनों में हमले तेज हाल के दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हवाई हमले तेज हो गए हैं। रूस, यूक्रेन की बिजली और परिवहन व्यवस्था को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करना चाहते हैं। अगस्त में ट्रंप ने रूसी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों से अलग-अलग मुलाकात की थी। जेलेंस्की ने ट्रंप के युद्धविराम और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आमने-सामने शांति वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, लेकिन क्रेमलिन ने इस पर आपत्ति जताई है। हाल ही में कूटनीतिक गतिविधियों के बीच, पुतिन ने चीन में चीनी नेता शी जिनपिंग, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वाशिंगटन का दावा है कि ये देश रूस के युद्ध प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। चीन और भारत ने रूसी तेल खरीदा है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को मदद मिल रही है। वहीं, यूक्रेन पर लगातार हो रहे हमलों के बीच जेलेंस्की ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। मंगलवार शाम को अपने संबोधन में जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ रही है, जिसमें दिन के उजाले में भी हमले शामिल हैं। उन्होंने सहयोगी देशों से और समर्थन मांगा है, ताकि रूस के हमलों का जवाब दिया जा सके।  

क्या है DF-5C सिस्टम? US-चीन तनातनी के बीच भारत के लिए क्यों बना खतरे की घंटी

बीजिंग दुनिया की दो आर्थिक महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच तनातनी और व्यापार प्रतिस्पर्धा से लेकर सामरिक प्रतिस्पर्धा तक की होड़ किसी से छिपी हुई नहीं है। दो दिन पहले चीनी शहर तियनाजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक-दूसरे का हाथ थामे और हंसते-मुस्कुराते सम्मेलन हॉल में प्रवेश किया तो इस तिकड़ी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत पूरी दुनिया को एक नया संदेश दिया था। यह संदेश ऐसे वक्त में आया, जब दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाकर वैश्विक आलोचनाएं झेल रहा है। अब चीन ने द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ को मौके पर आयोजित वि क्ट्री परेड में न केवल राजधानी बीजिंग में अमेरिका के कट्टर दुश्मनों को एक मंच पर लाने की कोशिश की बल्कि कुल 26 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को इसमें शामिल कर ट्रंप को नई टेंशन दी है। इसी विक्ट्री परेड के जरिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को तीसरी टेंशन भी दे दी। अमूमन अपने हथियारों का प्रदर्शन नहीं करने वाले चीनी सैनिकों ने इस बार न सिर्फ भव्य परेड किया बल्कि अपने अत्याधुनिक हथियारों का भी प्रदर्शन किया। अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन चीन ने बुधवार को अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए जेट लड़ाकू विमान, मिसाइल और नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हार्डवेयर सहित अपने कुछ आधुनिक हथियारों को पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाया है। चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पहली बार हवाई-प्रक्षेपित परमाणु मिसाइल, जेएल-1, का एक सैन्य ट्रक पर प्रदर्शन किया है। यह मॉडल, मौजूद JL-3 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल से काफ़ी छोटा है, जो पनडुब्बी से ही प्रक्षेपित हो सकता है। सैन्य विश्लेषकों ने बताया है कि चीन ने इन दो मिसाइलों के अलावा DF-61 और DF-31 मिसाइलों का भी प्रदर्शन किया है, जो चीनी सेना को जल,थल और नभ -तीनों जगहों से दुश्मनों के ठिकानों पर न्यूक्लियर हमला करने में सक्षम बनाता है और चीन को पूरी सुरक्षा कवच उपलब्ध कराता है। इसी परेड में चीनी सेना ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल DF-5C का भी प्रदर्शन किया है। इस मिसाइल के प्रदर्शन ने दुनिया को संदेश दिया है कि चीन की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता विश्वसनीय, भरोसेमंद और पर्याप्त है। क्या है DF-5C मिसाइल सिस्टम? यह डोंग फेंग-5 सीरीज का अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक न्यूक्लियर मिसाइल सिस्टम है। DF-5C लिक्विड-ईंधन से संचालित मिसाइल है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल की मारक क्षमता 20,000 किलोमीटर से ज्यादा है और यह टारगेट पर निशाना साधने के मामले में सर्वश्रेष्ठ है। इसका सीधा सा मतलब है कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया में कहीं भी यह मिसाइल सर्वनाश कर सकता है। एक ही समय में 10 अलग-अलग ठिकानों पर निशाना DF-5C कथित तौर पर 10 स्वतंत्र ठिकानों पर एक साथ हमले कर सकता है। इसका सीधा सा मतलब ये हुआ कि एक ही मिसाइल एक ही समय में 10 अलग-अलग स्थानों को निशाना बना सकती है। यह मिसाइल दुश्मन के सैन्य ठिकानों और अन्य अहम ठिकानों को एक बार में ही निशाना बना सकती है, और हमलों के क्रम को एडजस्ट कर सकता है। यह दुनिया के किसी भी हिस्से में परमाणु बम गिरा सकता है लेकिन इसे कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इंटरस्पेट नहीं कर सकता है। भारत की भी बढ़ी चिंता इसका ट्रांसपोर्टेशन तीन अलग-अलग सेक्शन में होता है। इस वजह से इसकी तैनाती गुप्त हो जाकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि DF-5C की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्पीड है। यह आवाज से भी कई गुणा तेज गति से चल सकती है, इसकी वजह से दुनिया का कोई भी एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे इंटरसेप्ट कर पाने में नाकाम रह सकता है। चीन के अत्याधुनिक हथियारों के प्रदर्शन ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन एक साझेदार देश के अलावा एक बड़ी चुनौती भी रहा है।  

आतंकी फंडिंग का पर्दाफाश! TRF ने मलेशिया से जुटाए लाखों रुपये, NIA जांच में खुलासा

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन, द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) के खिलाफ अपनी जांच में महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं। एनआईए ने श्रीनगर के एक व्यक्ति के मोबाइल फोन से 450 से अधिक कॉन्टैक्ट लिस्ट हासिल की है, जिससे टीआरएफ को धन मुहैया कराने वालों की पहचान करने में मदद मिली है। बता दें कि यह संगठन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद बाद इससे पीछे हट गया था। जांच के दौरान, एनआईए को मलेशिया के जरिए हवाला मार्ग के संभावित इस्तेमाल का पता चला है जिससे टीआरएफ को फंडिंग की जा रही थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच में मलेशिया निवासी सज्जाद अहमद मीर का नाम सामने आया है। एक अन्य संदिग्ध, यासिर हयात के फोन कॉल डिटेल से पता चला कि वह मीर के संपर्क में था और पैसों की व्यवस्था कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, हयात ने टीआरएफ के लिए धन जुटाने के लिए कई बार मलेशिया की यात्रा की। हयात ने मीर की मदद से टीआरएफ के लिए 9 लाख रुपये जुटाए, जो संगठन के एक अन्य ऑपरेटिव शफात वानी को दिए गए। वानी टीआरएफ का एक प्रमुख ऑपरेटिव है और संगठन की गतिविधियों को संचालित करता है। यह भी पता चला कि वानी ने मलेशिया में एक विश्वविद्यालय में सम्मेलन में भाग लेने के बहाने यात्रा की थी, हालांकि विश्वविद्यालय ने इस यात्रा को स्पॉन्सर नहीं किया था। एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि हयात न केवल मीर के संपर्क में था, बल्कि वह दो पाकिस्तानी नागरिकों के साथ भी संपर्क में था। उसका मुख्य काम विदेशी ऑपरेटिव्स से संपर्क बनाए रखना और आतंकी संगठन के लिए धन जुटाना था। 13 अगस्त को, एनआईए ने कहा था कि उसने विदेशी फंडिंग के एक निशान का पता लगाया है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। टीआरएफ को 2019 में लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी के रूप में बनाया गया था, ताकि इसे जम्मू-कश्मीर का स्थानीय संगठन दिखाया जा सके। इसका उद्देश्य हिजबुल मुजाहिदीन को रिप्लेस करना और स्थानीय आतंकी गतिविधियों को नई पहचान देना था। पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा को जवाबदेही से बचाने के लिए टीआरएफ को बनाया गया था, ताकि कश्मीर में कथित संघर्ष को स्थानीय दिखाया जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान चाहता था कि आतंकी हमले जारी रहें और साथ ही वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी से भी बच सके। भारत ने टीआरएफ को एक आतंकी संगठन घोषित किया है और पाकिस्तान पर इसका समर्थन करने का आरोप लगाया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद, अमेरिका ने टीआरएफ को एक विदेशी आतंकी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकी इकाई घोषित किया, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था। इस कदम ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को उजागर कर दिया। एनआईए की जांच अभी भी जारी है, और एजेंसी इस आतंकी संगठन के नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

आरक्षण विवाद गहराया: मंत्री नाराज, OBC संगठनों ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा

मुंबई  अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार को मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने की मांग स्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ओबीसी समुदाय इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा। इधर, राज्य सरकार के फैसले पर कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल पहले ही नाराजगी दर्ज करा चुके हैं। हाके ओबीसी समूह के तहत मराठों को आरक्षण दिए जाने का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को कम करना चाहते हैं। उन्होंने पहले मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण दिए जाने की मनोज जरांगे की मांग के खिलाफ आंदोलन किया था। देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा पात्र मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने सहित अधिकतर मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मंगलवार शाम को मुंबई में अपना पांच दिन से जारी अनशन समाप्त कर दिया। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को मराठा समुदाय के सदस्यों को उनकी कुनबी विरासत के ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एक समिति के गठन की घोषणा की। कुनबी राज्य में एक पारंपरिक कृषक समुदाय है और उन्हें नौकरियों एवं शिक्षा में सरकारी आरक्षण का पात्र बनाने के लिए महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी की सूची में शामिल किया गया है। सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश (जीआर) में हैदराबाद राजपत्र को लागू करने का भी उल्लेख किया गया है। हाके ने जीआर और वंशावली दस्तावेज वाले पात्र मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया कि सरकार को आरक्षण के संबंध में इस तरह का जीआर जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राजपत्र में यह नहीं लिखा है कि मराठा सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए। कार्यकर्ता ने पूछा, 'कौन कहता है कि राजपत्र में दर्ज राजस्व रिकॉर्ड उन्हें आरक्षण के योग्य बनाते हैं?' उन्होंने कहा, 'हैदराबाद राजपत्र में बंजारा को अनुसूचित जनजाति बताया गया है। क्या सरकार बंजारों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण देगी? सरकार को एक मुद्दे को सुलझाने के लिए 10 और मुद्दे नहीं पैदा करने चाहिए। ओबीसी और वीजेएनटी (विमुक्त जाति और घुमंतू जनजातियां) अब सड़कों पर उतरेंगे।' उन्होंने कहा कि नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे ओबीसी आरक्षण में कटौती को तैयार हैं।  

पंजाब में बाढ़ से हाहाकार, शिक्षा ठप, राहत-बचाव में जुटा प्रशासन

पंजाब  पंजाब में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात इतने बिगड़े कि राज्य सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और पॉलिटेक्निक संस्थान 7 सितंबर तक बंद करने का आदेश जारी करना पड़ा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी सक्रियता दिखाते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पंजाब भेजने का फैसला किया है। चौहान गुरुवार को प्रभावित जिलों का दौरा करेंगे और किसानों की स्थिति का जायजा लेंगे। प्रदेश में अब तक 30 लोगों की मौत और चार लोगों के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है। साढ़े तीन लाख से अधिक लोग इस आपदा की चपेट में हैं। भारी बारिश और नदियों के उफान ने राज्य के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया है। पंजाब सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए पूरे राज्य को प्राकृतिक आपदा ग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है।   मुख्यमंत्री-राज्यपाल का दौरा मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया बुधवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा शुरू कर दिया है। दोनों नेता राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं और पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद भी उन्होंने किया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राहत कार्यों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री भगवंत मान से बात कर ताजा हालात की जानकारी ली है। इसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि पंजाब के लोगों को इस आपदा में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। चौहान ने बताया कि उन्होंने पंजाब के राज्यपाल और कृषि मंत्री से फोन पर बातचीत कर विस्तृत रिपोर्ट ली है। वे बृहस्पतिवार को पंजाब आकर हालात देखेंगे। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से जो भी मदद ज़रूरी होगी, उसे तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा संस्थान 7 सितंबर तक बंद शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि पहले तीन सितंबर तक छुट्टियां घोषित की गई थीं, लेकिन हालात बिगड़ने पर इन्हें 7 सितंबर तक बढ़ाना पड़ा। उन्होंने सभी संस्थानों को आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा है। हालांकि, परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और कॉलेज स्तर पर दाखिला लेने वाले युवाओं में इसे लेकर चिंता है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि अकादमिक कैलेंडर प्रभावित न हो, इसके लिए विकल्प तैयार किए जा रहे हैं। फसल और पशुधन को बड़ा नुकसान राज्य सरकार ने माना है कि बाढ़ से लगभग 3.75 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जिनमें से अधिकांश धान की खड़ी फसल थी। कटाई से पहले ही फसल का जलमग्न होना किसानों पर दोहरी मार साबित हो रहा है। साथ ही पशुधन के नुकसान से ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह आपदा लंबे समय तक आर्थिक असर छोड़ सकती है। सरकार ने केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।   आगे और बिगड़ सकते हैं हालात मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में राज्य सरकार को राहत और बचाव कार्यों को और तेज करना होगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि नदियों का जलस्तर और बढ़ता है तो अधिक गाँवों के डूबने का खतरा है। कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, वार फुटिंग पर सेवाएं मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द की जाती हैं। सभी विभागीय कर्मचारी सातों दिन और चौबीसों घंटे ड्यूटी पर रहेंगे। किसी को भी अनुपस्थित रहने की छूट नहीं होगी। डीसी को आपदा कानून के तहत अधिकार जिला उपायुक्तों को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2025 की धारा 34 के तहत अधिकार दिया गया है कि वे तत्काल ज़रूरी आदेश जारी कर सकें। इसका मकसद यह है कि राहत और बचाव कार्यों में कोई देरी न हो और फैसले सीधे ज़मीनी स्तर पर लागू किए जा सकें। सभी विभागों पर कड़ी निगरानी आदेश में कहा गया है कि सभी विभागीय अधिकारी अपने-अपने आपातकालीन कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करें। पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन विभाग और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को तुरंत सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया गया है। वहीं टेलीकॉम कंपनियों को मोबाइल और लैंडलाइन नेटवर्क सुचारु बनाए रखने को कहा गया है। पंचायतों और शहरी निकायों की भूमिका पंचायत राज संस्थान और शहरी निकायों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने का दायित्व सौंपा गया है। सरकार ने साफ कहा है कि स्थानीय निकाय ही सबसे पहले प्रभावित लोगों तक पहुँचेंगे और उन्हें जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार से पूरा सहयोग मिलेगा।

राजनीति और विचारों पर हुई चर्चा, वसुंधरा राजे ने मोहन भागवत से की बैठक

जोधपुर  पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने जोधपुर में RSS सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की है. जोधपुर में दोनों के बीच यह मुलाकात करीब 25 मिनट तक चली. हालांकि दोनों के बीच की बातचीत का ब्यौरा अभी तक बाहर नहीं आ पाया है लेकिन इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. बीजेपी सूत्रों की मानें तो सूबे में फिलहाल भाजपा संगठन में बदलाव को लेकर चर्चा चल रही है. माना जा रहा है कि दोनों के बीच इस पर चर्चा हुई है. राजे और भागवत की इस मुलाकात के राजनीति के जानकार कई मायने निकाल रहे हैं. जोधपुर फिलहाल आरएसएस के चिंतन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में शामिल होने के लिए जोधपुर आए हैं. यह बैठक 5 से 7 सितंबर तक आयोजित होगी. बैठक की तैयारियों को लेकर बड़े स्तर पर स्वयंसेवक जुटे हुए हैं. भागवत का यहां 10 सितंबर तक रहने का कार्यक्रम बताया जा रहा है. भागवत दो दिन पहले सोमवार को जोधपुर आए थे. संघ के बड़े पदाधिकारियों का जोधपुर में लगा है जमावड़ा सोमवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के जोधपुर आने के बाद मंगलवार को संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, सी. आर. मुकुंदा, अरुण कुमार, रामदत्त चक्रधर, आलोक कुमार, अतुल लिमये और कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैध सहित अन्य अखिल भारतीय अधिकारी जोधपुर बैठक स्थल पर पहुंचे. वनवास आता है तो जाता भी है राजे ने बीते दिनों अपने दिल्ली दौरे के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी. राजे हाल ही में धौलपुर भी गईं थी. वहां उन्होंने एक धार्मिक कार्यक्रम में कहा था कि वनवास सभी के जीवन में कभी न कभी आता है. लेकिन यह भी सच है कि वनवास आता है तो जाता भी है. राजे इससे पहले भी कई कार्यक्रमों में इस तरह के बयान दे चुकी हैं जो राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा में रहे हैं. अब राजे की संघ प्रमुख से मुलाकात ने कई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है.

हिंदू लड़की का मुस्लिम युवक से जबरन निकाह, वाराणसी पुलिस ने मौलवी समेत 5 को पकड़ा

वाराणसी  वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है. इस घटना में 12 साल की एक नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा करके मौलवी ने मुस्लिम लड़के से निकाह करा दिया. इस मामले में पुलिस ने देर से ही सही, लेकिन नाबालिग लड़के निहाल, उसकी मां, पिता शरीफ उर्फ राजू, चाचा लालू और मौलवी मोहम्मद हसीन समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.  पीड़ित पिता नंदू मौर्य लगभग 3 महीने तक थाने-चौकी के चक्कर लगाता रहा, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई. थक-हारकर उन्होंने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी, जिसके बाद कार्रवाई हुई. मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.  पीड़ित पिता की आपबीती पीड़ित पिता नंदू मौर्य ने अपनी शिकायत में बताया कि लगभग 3 महीने पहले उनकी 12 साल की बेटी को निहाल नाम का लड़का जबरन अपने घर उठा ले गया था. जब वह अपनी बेटी को वापस लेने गए, तो निहाल, उसके पिता शरीफ, चाचा लालू और कुछ अन्य लोगों ने उन पर हमला कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अब उनके मजहब की हो गई है, उसका निकाह हो चुका है और वह काफिर (नंदू मौर्य) की हत्या करके उसे जहन्नुम भेज देंगे.  पुलिस ने कराया आरोपियों से उठक-बैठक इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनसे थाने में ही उठक-बैठक करवाई. मौलवी मोहम्मद हसीन ने कबूल किया कि उसने 12 साल की नाबालिग का निकाह कराया था और अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी. सभी पांच आरोपियों पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम समेत अन्य कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. देखें वीडियो-  पुलिस कमिश्नर की पहल पर कार्रवाई एसीपी प्रज्ञा पाठक ने बताया कि पुलिस कमिश्नर को शिकायत मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की गई और लड़की को बरामद करने के लिए टीम लगा दी गई. टीम ने लड़की को ढूंढ लिया. पूछताछ में पता चला कि निहाल के परिवार ने उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर निकाह करवा दिया था. एसीपी ने यह भी बताया कि पीड़ित पिता पहले थाने नहीं आए थे, सीधे पुलिस कमिश्नर के पास गए, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हो पाई. 

मुख्यमंत्री ने मनीषा के परिजनों से की मुलाकात, न्याय सुनिश्चित करने का दिया वादा

हिसार   भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी 19 वर्षीय लेडी टीचर मनीषा की संदिग्ध मौत के मामले में अब परिजनों को जल्द CBI जांच शुरू होने की उम्मीद बंधी है।  मनीषा के परिजन हरियाणा बैरागी समाज के राज्य प्रधान शिव कुमार पंवार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिले। यह मुलाकात मुख्यमंत्री आवास संत कबीर कुटीर पर करीब आधे घंटे तक चली। मुख्यमंत्री ने परिवार को आश्वस्त किया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। उन्होंने बताया कि मामला CBI को सौंप दिया गया है और एक विशेष अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, "मनीषा हमारी बेटी थी, उसे न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।" CBI जांच और आर्थिक मदद की मांग बैठक में मनीषा के पिता संजय कुमार, दादा राजकुमार, मामा संदीप सहित बैरागी समाज के पदाधिकारी — प्रवीण स्वामी, डॉ. दीपक स्वामी, चेयरमैन बख्शी राम और समाजसेवी धर्मेंद्र सैनी मौजूद रहे। सभी ने CBI जांच में तेजी लाने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। CBI का फोन, जल्द शुरू होगी जांच मनीषा के दादा रामकिशन ने बताया कि मंगलवार सुबह उनके बेटे संजय कुमार को CBI अधिकारियों का फोन आया था। अधिकारियों ने बुधवार से जांच शुरू करने की जानकारी दी, हालांकि टीम के आने की तारीख को लेकर अभी तक कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोमवार को भी टीम के पहुंचने की चर्चा थी, लेकिन वे नहीं आए। घटनास्थल पर बारिश बना रही बाधा 13 अगस्त को सिंघानी गांव के खेतों में मनीषा का शव मिला था। अब घटनास्थल पर बारिश का पानी भर गया है, जिससे सबूतों के नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल को रिफ्लेक्टिंग पट्टी लगाकर सुरक्षित कर रखा है।