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राष्ट्र प्रथम की भावना पर जोर, मुख्यमंत्री बोले—गुमनाम नायकों की कहानी है ‘भारत भाग्य विधाता’

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को जयपुर के जवाहर सर्किल स्थित एंटरटेनमेंट पैराडाइज मिराज सिनेमा में फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ की स्पेशल स्क्रीनिंग देखी। इस अवसर पर फिल्म की अभिनेत्री एवं सांसद कंगना रनौत, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा एवं फिल्म के निर्माता- निर्देशक , नर्स प्रोफेशनल्स एवं छात्राएं उपस्थित रही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम‘ की भावना और समाज के प्रति संवेदनशीलता ही नागरिक की सबसे बड़ी पहचान होती है। राष्ट्र को सर्वाेपरि मानकर अपना सर्वस्व समाज और देश के लिए समर्पित करने वाले गुमनाम नायकों की प्रेरक गाथा को फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ में प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि देश ने 26/11 जैसे आतंकी हमलों से लेकर कोविड महामारी जैसे कठिन दौर में भी अनगिनत कर्मयोगियों की सेवा भावना को देखा है। चिकित्सकों, नर्सों, सुरक्षाकर्मियों तथा अन्य सेवा प्रदाताओं ने ऐसे समय में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए मानवता और राष्ट्रसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। यह फिल्म उन असंख्य लोगों के त्याग, साहस और समर्पण को रेखांकित करती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए निरंतर कार्य करते हैं। उन्होंने फिल्म के निर्माता एवं उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी प्रेरणादायी फिल्में युवाओं को कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सभी समाज में सेवा एवं सहयोग के लिए आगे बढ़े। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य के लिए नर्सेज को सम्मानित भी किया गया।

इमाम हुसैन की सीख: गलत के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची इंसानियत है

इमाम हुसैन की ये सीख हमें बताती है कि अगर हमारे सामने कुछ गलत हो रहा है और हम चुपचाप उसे देख रहे हैं, तो हम भी उस गलत काम में साथ दे रहे हैं. गलत के आगे घुटने टेक देना हमें अंदर से कमजोर बना देता है. अपनी इज्जत की रक्षा करें इंसान की असली पहचान उसकी इज्जत और उसके उसूलों (सिद्धांतों) से होती है. इमाम हुसैन का जीवन हमें सिखाता है कि डरकर जीने से बेहतर है कि हम अपनी गरिमा के लिए खड़े हों.  जब आप अपनी इज्जत बचाने के लिए लड़ते हैं, तो आप यह दिखाते हैं कि आप एक स्वाभिमानी इंसान हैं. यह लड़ाई केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह बताने के लिए होती है कि गलत के आगे झुकना नहीं चाहिए. इंसानियत का मतलब क्या है? अक्सर लोग समझते हैं कि इंसानियत का मतलब सिर्फ दान-पुण्य करना है, लेकिन असली इंसानियत का एक बड़ा हिस्सा यह भी है कि आप बुराई के खिलाफ आवाज़ उठाएं. यह संघर्ष जरूरी नहीं कि हमेशा लड़ाई-झगड़ा ही हो; कभी-कभी सच का साथ देना और गलत बात को गलत कहना भी बड़ा संघर्ष होता है. हम क्या सीख सकते हैं? आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी परेशानियों में उलझे रहते हैं और अपने आसपास हो रहे अन्याय को नजरअंदाज कर देते हैं. इमाम हुसैन की ये बातें हमें याद दिलाती हैं कि अगर आप सच के रास्ते पर हैं, तो आपको किसी से डरने की जरूरत नहीं है, निडर होकर सच का साथ देना ही सबसे बड़ी इंसानियत है.  

फीफा विश्व कप टिकट विवाद: महंगे दामों ने आम दर्शकों की पहुंच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली  फीफा विश्व कप के 100 साल के इतिहास में टिकटों के लिहाज से अब तक के सबसे महंगे विश्व कप को अगर सिर्फ अमीरों का टूर्नामेंट कहा जाए तो अतिशियोक्ति नहीं होगी। बड़ी मुश्किल से इस विश्व कप की टिकट खरीदकर मैदान पहुंच रहे कुछ आम प्रशंसकों को इसका अहसास भी हो रहा है। स्टेडियमों की सीटों पर उन्हें अधिकतर लोग ऊंचे तबके के नजर आ रहे हैं, जिनमें से अधिकतर को वह पहले ही सुर्खियों या टीवी पर देख चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध इस विश्व कप के पहले मुकाबले को देखने पहुंचे मेक्सिको के फुटबॉल प्रशंसक मार्सेलो गोंजालेस की मानें तो उन्होंने मेक्सिको सिटी के एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम के एंट्री गेट की ओर जाते हुए हरे रंग की शर्ट पहने लोगों की जो भीड़ देखी तो वह खुद से सवाल करने लगे कि क्या यह भीड़ असली मेक्सिको का नेतृत्व करती है, क्योंकि उन लोगों में अधिकतर ने राष्ट्रीय टीम की बिल्कुल नई जर्सी पहनी हुई थी। गोंजालेस ने महसूस किया कि वहां मौजूद ज्यादातर लोग मेक्सिको के अमीर और ऊंचे तबके से थे। जिनमें कई राजनेता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि मैं उनमें से लगभग 10 लोगों को तो पहले ही देख चुका था। गोंजालेस और उनके एक दोस्त को सिर्फ तीन दिन पहले ही टिकट मिले थे और प्रत्येक टिकट के लिए लगभग 3.32 लाख रुपये (3,500 अमेरिकी डालर) खर्च करने के बाद भी इन हालातों में गोंजालेस को लग रहा है कि गनीमत है कि उन्हें टिकट सस्ती मिल गईं। खस्ता हाल मेक्सिको के स्टेडियम में महंगी बीयर मैच देखने पहुंचे एक और आम प्रशंसक 40 वर्षीय अल्फोंसो एसेवेज ने बताया कि एक और मेक्सिको में शिक्षक संघ वेतन और पेंशन के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान परेशान हैं। दूसरी और स्टेडियम में अमीर लोग करीब 2000 रुपये की बीयर का मजा ले रहे हैं। अल्फोंसो के अनुसार असल में इन लोगों में से कई मैक्सिकन मूल के अमेरिकी हैं, जो टूर्नामेंट के मैक्सिकन चरण में अपने समर्थन के साथ-साथ अपनी खर्च करने की क्षमता का दिखावा करने आए हैं। मेक्सिको की राष्ट्रपति नहीं आईं स्टेडियम मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने महीनों पहले फैसला किया था कि वह उद्घाटन मैच में शामिल नहीं होंगी। शिनबाम को इस मुकाबले के लिए फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के बगल वाली सीट टिकट मिली थी, लेकिन शिनबाम ने अपने देश की आदिवासी एथलीट वेराक्रूज को यह टिकट दे दी थी। शिनबाम ने शहर में प्रशंसको के साथ स्क्रीन पर मैच देखा और शायद इस तरह उन्होंने फीफा की आम लोगों की पहुंच से दूर महंगी टिकटों का मूक विरोध किया। अमेरिका में हो रही कानूनी कार्रवाई फीफा ने मुकाबलों के लिए टिकटों की कीमतों को सही ठहराते हुए कहा है कि उसे वैश्विक फुटबॉल के लिए अपनी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस कमाई की जरूरत है। हालांकि इन कीमतों की वजह से न सिर्फ प्रशंसक नाराज हुए हैं, बल्कि अमेरिका में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।  

असोला भाटी अभयारण्य में बढ़ी तेंदुओं की मौजूदगी, कैमरा ट्रैप में जोड़े बार-बार रिकॉर्ड

नई दिल्ली  दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी ने वन अधिकारियों को खासा उत्साहित कर दिया है। अब यहां आए दिन तेंदुए देखे जा रहे हैं। खास तौर पर कैमरा ट्रैप में लगातार तेंदुओं के जोड़े रिकॉर्ड हो रहे हैं। इसे अधिकारी अभयारण्य में बेहतर होते प्राकृतिक आवास और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि असोला भाटी क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या 2022 के लगभग 12-14 से बढ़कर अब करीब 16 हो गई है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि यह आंकड़ा ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड और एरिया निगरानी पर आधारित है और विस्तृत गणना के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकती है। असोला वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी से गुड न्यूज वन्यजीव अधिकारियों को जिस बात ने सबसे ज्यादा उत्साहित किया है, वह है अभयारण्य के भीतर जलाशयों के पास तेंदुओं के जोड़ों का बार-बार दिखना। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे नजारे बेहद दुर्लभ हैं क्योंकि तेंदुए आमतौर पर एकांत प्रिय होते हैं और वे आमतौर पर केवल प्रणय काल, प्रजनन के दौरान या फिर शावकों के पालन-पोषण के समय ही साथ दिखाई देते हैं। क्या कह रहे वन विभाग के अधिकारी वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ साल पहले तेंदुए इतनी बार दिखना असामान्य था। आज हमारे ‘कैमरा ट्रैप’ लगभग हर रोज उन्हें रिकॉर्ड कर रहे हैं। तेंदुओं के जोड़े भी बार-बार दिख रहे हैं, जो काफी महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की आबादी में बढ़ोतरी सिर्फ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि चीतल और जंगली सूअर भी काफी देखे जा रहे हैं, जबकि मोर तो इतने हैं कि अब वे अभयारण्य के कई हिस्सों में आम तौर पर दिख जाते हैं। इसलिए खास है ये उपलब्धि     एक अधिकारी ने कहा कि मोर अब लगभग हर जगह दिखते हैं। उनकी आबादी काफी बढ़ी है और कुछ रास्तों पर तो वे पूरे झुंड में नजर आते हैं।     अधिकारियों के मुताबिक वन्यजीव गतिविधि में यह वृद्धि अभयारण्य के भीतर व्यापक पारिस्थितिक सुधार का संकेत है।     कई प्रजातियों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि भोजन, पानी और आश्रय अब परिदृश्य में अधिक सुलभ होते जा रहे हैं।     एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियां आवास की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं।     अधिकारी ने कहा कि कुछ प्रजातियां ऐसी होती हैं जिन्हें हम संकेतक प्रजाति कहते हैं।     उनकी मौजूदगी से हम समझ सकते हैं कि आवास बेहतर हो रहा है या बिगड़ रहा है।     मोर, फ्रैंकोलिन और हिरण जैसी प्रजातियों की बढ़ोतरी बताती है कि आवास की स्थिति सुधर रही है। अधिकारियों ने बताया कैसे बदल रही स्थिति अधिकारी इस बदलाव का श्रेय पिछले कई वर्षों में किए गए आवास प्रबंधन उपायों को देते हैं। अभयारण्य में 200 से अधिक जलकुंड बनाए और संधारित किए गए हैं, जिससे वन्यजीवों को साल भर पानी मिलता रहता है। साथ ही कई साल पहले किए गए वृक्षारोपण अब घने हरे-भरे क्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं और अनेक पेड़ घना छत्र बना चुके हैं। चीतल और जंगली सूअर की भी बढ़ी संख्या अधिकारियों ने बताया कि चीतल और जंगली सूअर की संख्या काफी बढ़ी है, जिससे तेंदुए जैसे शिकारियों के लिए अभयारण्य के भीतर रहने के अनुकूल हालात बने हैं। ऐतिहासिक रूप से तेंदुए असोला भाटी क्षेत्र को हरियाणा के अरावली के जंगलों और दिल्ली को जोड़ने वाले एक बड़े गलियारे के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। यह आवाजाही जारी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हाल के ‘कैमरा ट्रैप’ रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि कुछ जानवर अब अभयारण्य में अधिक समय बिताने लगे हैं।  

‘तुम देना साथ मेरा’ में बड़ा ट्विस्ट: अपराजिता को मिला सरप्राइज, रक्षित से बढ़ी दोस्ती

शो ‘तुम देना साथ मेरा’ की कहानी में इन दिनों लगातार नए ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. एपिसोड की शुरुआत में अपराजिता, रक्षित पर नाराज होती नजर आती है. उसे लगता है कि रक्षित ने उसकी निजी कहानी पूरे ऑफिस में फैला दी है. लेकिन जल्द ही उसे सच्चाई का पता चलता है. दरअसल, ऑफिस के सभी कर्मचारी अपराजिता के लिए एक सरप्राइज प्लान कर रहे थे. सभी लोग तालियां बजाकर उसका स्वागत करते हैं. रक्षित सबके सामने अपराजिता की तारीफ करते हुए बताता है कि उसने कंपनी की कंसाइनमेंट और शास्त्री की साड़ी को बचाकर बड़ी जिम्मेदारी निभाई है. अपराजिता बनेगी रक्षित की दोस्त कर्मचारियों की तारीफ देखकर अपराजिता भावुक हो जाती है. बाद में सभी के कहने पर रक्षित और अपराजिता मिलकर सेलिब्रेशन केक काटते हैं. हालांकि यह सब देखकर इरा खुश नहीं होती. जश्न खत्म होने के बाद अपराजिता, रक्षित से उसके केबिन में मिलती है और हमेशा उस पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद कहती है. रक्षित उसे समझाता है कि उसकी नई जिंदगी का सफर आसान नहीं होगा. अपराजिता भी जवाब देती है कि वह हर मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार है. बातचीत के दौरान अपराजिता, रक्षित से दोस्ती का हाथ बढ़ाती है. ललित और उसकी मां ने बढ़ाई अपराजिता की मुश्किलें दूसरी तरफ मंदिर में सुधा और चंद्रभागा की मुलाकात होती है. बातचीत के दौरान चंद्रभागा, मालती को बुलाकर ललित की बदलती सोच और उसके प्रयास दिखाती है. अपराजिता को पता चलता है कि ललित और उसकी मां उसके पड़ोस में आकर रहने लगे हैं. आने वाले एपिसोड में मालती, अपराजिता को कुबेर कलेवा रस्म के लिए तैयार होने को कहेगी. वहीं ललित बिना बुलाए वहां पहुंच जाएगा और अपराजिता को साड़ी गिफ्ट करेगा. कहानी में बड़ा मोड़ तब आएगा जब अपराजिता ललित को तलाक का नोटिस थमा देगी. इसके बाद मालती कहेगी कि अगर अपराजिता केस वापस नहीं लेती है तो उसे घर छोड़ना पड़ेगा.

मानसून से पहले महंगाई का झटका, हरी सब्जियों के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा रसोई का बजट

रांची राजधानी रांची में बदलते मौसम और मानसून की दस्तक के साथ हरी सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बाजारों में टमाटर से लेकर अधिकांश सब्जियां 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं, जबकि कुछ चुनिंदा सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। महंगाई का सीधा असर निम्न मध्यम और मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार एक सप्ताह पहले तक 10 से 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाली भिंडी अब 30 से 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं स्थानीय टमाटर 50 से 55 रुपये प्रति किलो और हाइब्रिड टमाटर 50 से 70 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। फ्रेंच बीन की कीमत सबसे अधिक बढ़ी है और यह 40 से 50 रुपये प्रति पाव तक बिक रही है। बीन की कीमत 150 से 200 रुपये केजी तक पहुंच गई है। आलू और प्याज को छोड़कर लगभग सभी सब्जियों के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रांची में बुंडू, तमाड़, जोन्हा, सिल्ली, झालदा, बेड़ो समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में सब्जियों की आपूर्ति होती है। यहां से आने वाली खेप नागाबाबा खटाल, मोरहाबादी, लालपुर, डोरंडा, रेलवे स्टेशन बाजार और बहुबाजार जैसी प्रमुख मंडियों तक पहुंचती है। अंतिम फसल और कम आपूर्ति बनी महंगाई की वजह सब्जी व्यापारी ने कहा कि वर्तमान में कई सब्जियों की अंतिम फसल बाजार में आ रही है। मानसून शुरू होने के बाद कई हरी सब्जियों की खेती और उत्पादन प्रभावित हो जाता है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। विक्रेताओं का कहना है कि जब तक नई फसल तैयार होकर बाजार में नहीं आती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम है। सब्जियों के क्या हैं, रेट सब्जी का नाम     भाव (रुपये प्रति किलो) फ्रेंच बीन                   40 – 50 टमाटर                       50 – 60 झींगी / तोरई                40 – 60 खीरा                            30 – 40 भिंडी                            30 – 40 कद्दू                              20 सफेद आलू                    15 लाल आलू                      20 प्याज                            25 बैंगन                            40 पटल                             40 शिमला मिर्च                   50 – 70 बोदी                                40     पहले 300 रुपये में सब्जियां पूरी होती थी, अब हालत ऐसी हैं, कि 500 रुपये में भी थैला नहीं भरता है।     प्रति दिन 200 रुपये में पर्याप्त सब्जियां मिल जाती थीं, लेकिन अब 400 रुपये खर्च करने के बाद 2 दिन में सब्जियां खत्म हो रही।     बारिश तक महंगाई की समस्या बनी, महंगी सब्जी खरीद ही नहीं रही।     पहले टमाटर की चटनी बनती थी, अब सब्जी में आधा कटा टमाटर इस्तेमाल कर रही।  

200MP कैमरे वाला Samsung Galaxy S26 Ultra सस्ता हुआ, जानें फीचर्स और कीमत

सैमसंग गैलेक्सी एस 26 अल्ट्रा, एक फ्लैगशिप ग्रेड का स्मार्टफोन है. इस हैंडसेट में पावरफुल परफॉर्मेंस, 200 मेगापिक्सल का कैमरा और कई अच्छे फीचर्स मिलते हैं. सैमसंग ने कुछ महीने पहले ही इस हैंडसेट को लॉन्च किया है और अब इस पर 15 हजार रुपये बचाने का मौका मिल रहा है. Samsung Galaxy S26 Ultra को भारत में 1,39,999 रुपये में लॉन्च किया था. ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐमेजॉन इंडिया पर इसको 1,30,999 रुपये में लिस्ट किया है, जिसमें 9 हजार रुपये का फ्लैट डिस्काउंट मिल रहा है. सैमसंग के इस हैंडसेट पर 9 हजार रुपये सीधे बचाने का मौका मिल रहा है. वहीं, 6 हजार रुपये का इंस्टैंट बैंक डिस्काउंट भी मिल रहा है, जिसके लिए चुनिंदा बैंक के कार्ड का यूज करना होगा. ऐसे में यूजर्स को पूरे 15 हजार रुपये तक बचाने का मौका मिलेगा. Samsung Galaxy S26 Ultra के स्पेसिफिकेशन्स Samsung Galaxy S26 Ultra में कई कमाल के फीचर्स दिए गए हैं. इसमें 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया है. साथ ही इसमें 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस, 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो और 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस दिया गया है. Samsung Galaxy S26 Ultra का डिस्प्ले Samsung Galaxy S26 Ultra में 6.9 इंच का डायनेमिक LTPO AMOLED 2X डिस्प्ले पैनल का इस्तेमाल किया गया है. कॉर्निंग गोरिल्ला आर्मर 2 ग्लास प्रोटेक्शन दी गई है. Samsung Galaxy S26 Ultra का प्रोसेसर Samsung Galaxy S26 Ultra में क्वालकॉम का स्नैपड्रैगन 8 इलाइट जेन 5 (3nm) चिपसेट का यूज किया है. साथ इसमें 5000 mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 60W फास्ट चार्जर मिलता है. इसमें रिवर्स और वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है.

बिजली बिल से मिलेगी राहत, 14 जून से शुरू होगी बिहार की सोलर रूफटॉप महायोजना

पटना  बिहार के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सम्राट सरकार एक बेहद शानदार और बड़ी राहत देने वाली योजना की शुरुआत करने जा रही है। राज्य के लाखों परिवारों को अब हर महीने भारी-भरकम बिजली बिल से पूरी तरह मुक्ति मिलने वाली है। सूबे के 10 लाख गरीब परिवारों (कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं) के घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप यानी सोलर प्लेट लगाने की महायोजना की शुरुआत 14 जून से होने जा रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस बेहद महत्वाकांक्षी योजना का भव्य उद्घाटन करेंगे। इस योजना के जमीन पर उतरते ही गरीब परिवारों के घरों में न सिर्फ मुफ्त बिजली की रोशनी जगमगाएगी, बल्कि राज्य में हरित ऊर्जा को भी एक नया और मजबूत पंख मिलेगा। पहले चरण में ढाई लाख घरों पर लगेंगी सोलर प्लेट इस योजना को लेकर ऊर्जा विभाग ने अपनी सभी प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां पूरी तरह से पूरी कर ली हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस महाअभियान की शुरुआत पहले चरण में 2.50 लाख गरीब परिवारों के घरों की छतों पर सोलर प्लेट लगाने से होगी। इन ढाई लाख परिवारों के घरों को सौर ऊर्जा से लैस करने के लिए सरकार कुल 1512 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने जा रही है। केंद्र सरकार की लोकप्रिय 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत इस पूरी स्कीम को जमीन पर उतारा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, एक घर की छत पर लगने वाले इस सोलर रूफटॉप से करीब 1.1 किलोवाट बिजली का बंपर उत्पादन होगा, जो एक गरीब परिवार की दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह पर्याप्त होगा। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल का बड़ा एलान बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने इस योजना के भविष्य के रोडमैप का खुलासा करते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों के भीतर सूबे के करीब 58 लाख गरीब परिवारों के घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप लगाने का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में एक परिवार के घर की छत पर इस पूरे सिस्टम को इंस्टॉल करने में लगभग 60 हजार रुपये की राशि का खर्च आएगा। ऊर्जा मंत्री ने याद दिलाया कि इससे पहले 'जल-जीवन-हरियाली अभियान' के तहत बिहार के सभी प्रमुख सरकारी भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाकर बिजली उत्पादन का काम पहले ही सफलतापूर्वक शुरू किया जा चुका है। अब इसी कड़ी में आम और गरीब जनता को सीधे तौर पर इस मुफ्त बिजली क्रांति से जोड़ा जा रहा है।

सिर्फ पानी से बाल धोना कितना सही? जानें ‘नो-शैम्पू’ ट्रेंड के फायदे और नुकसान

बिना शैंपू के सिर्फ पानी से बाल धोना (Water-Only Hair Washing) आजकल एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है, जिसे 'नो-शू मूवमेंट' भी कहा जा रहा है. लोग केमिकल से बचने के लिए इसे अपना रहे हैं, लेकिन क्या यह वाकई बालों के लिए फायदेमंद है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ पानी से सिर धोने से धूल-मिट्टी तो साफ हो सकती है, लेकिन बालों में जमा एक्स्ट्रा ऑयल (Sebum) और डर्ट पूरी तरह साफ नहीं होते. ऑयल और पानी का कॉम्बिनेशन न मिलने के कारण स्कैल्प पर चिपचिपाहट बनी रहती है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.   क्या कहते हैं विदेशी एक्सपर्ट्स और रिसर्च? हेल्थलाइन के अनुसार, शैंपू न लगाने से स्कैल्प के नेचुरल ऑयल्स सुरक्षित रहते हैं जिससे बाल कम ड्राई होते हैं. लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि पानी अकेले तेल को ब्रेकडाउन नहीं कर सकता. बालों में जमा नेचुरल ऑयल (सीबम) और हेयर प्रोडक्ट्स के केमिकल पानी से नहीं निकलते. इसके लिए शैंपू में मौजूद सर्फेक्टेंट्स यानी क्लींजिंग एजेंट्स की जरूरत होती है. सिर्फ पानी से बाल धोने के फायदे हेल्थकेयर रिसर्च फर्म Hims के मुताबिक, अगर आप बिना शैंपू के बाल धोते हैं तो इसके कुछ फायदे भी हैं. केमिकल्स से बचाव: शैंपू में मिलने वाले सल्फेट और पैराबेंस जैसे हार्ड केमिकल्स से बाल बच जाते हैं. कम ड्राइनेस: जो लोग बहुत ज्यादा शैंपू करते हैं, उनके बाल रूखे हो जाते हैं. पानी से धोने पर बालों की नेचुरल नमी बनी रहती है. सस्ता ऑप्शंस: यह पूरी तरह से फ्री है और प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल कम होने से पर्यावरण को भी फायदा होता है. स्कैल्प इन्फेक्शन और डैंड्रफ का खतरा सिर्फ पानी के इस्तेमाल से फायदे कम और नुकसान ज्यादा हो सकते हैं. हेयर केयर और ट्राइकोलॉजी एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब बालों से तेल साफ नहीं होता तो स्कैल्प के पोर्स बंद हो जाते हैं. इससे स्कैल्प पर गंदगी जमा होने लगती है जो आगे चलकर डैंड्रफ, तेज खुजली और हेयर फॉल का कारण बन सकती है. जिन लोगों के बाल पतले या बहुत ऑयली हैं उनके बाल सिर्फ पानी से धोने पर ज्यादा चिपचिपे और बेजान दिखने लगते हैं. क्या है सही तरीका? एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आपको पूरी तरह शैंपू बंद करने की जरूरत नहीं है. आप हफ्ते में 1 या 2 बार माइल्ड या सल्फेट-फ्री शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं. बीच के दिनों में बालों को फ्रेश रखने के लिए केवल सादे पानी से रिंस (Rinse) किया जा सकता है. इससे बालों का नेचुरल ऑयल बैलेंस भी नहीं बिगड़ेगा और स्कैल्प भी पूरी तरह क्लीन और हेल्दी रहेगी.

रवि किशन का रिएक्शन: रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से फिर चर्चा में आई पुरानी भोजपुरी फिल्म

आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धु्रंधर के दोनों पार्ट पर दुनियाभर के लोगों ने जमकर प्यार लुटाया. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर चुन-चुनकर रिकॉर्ड तोड़ डाले. अब इस फिल्म के बीच एक्टर रवि किशन की भी मौज हो गई. इसके पीछे की वजह खुद एक्टर ने बताई है. दरअसल साल 2014 में आई रवि किशन की फिल्म 'धुरंधर: द शूटर', रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर के आने के बाद से अचानक सुर्खियों में आ गई. उस दौरान भोजपुरी 'धुरंधर' के सीन सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे थे. लोगों ने तो इसे ही बॉलीवुड की धुरंधर का रीमेक तक बता दिया. अब इस पर रवि किशन ने रिएक्ट किया है. रवि किशन ने क्या कहा? धमाल 4 के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान रवि किशन से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए अपनी बात रखी. रवि किशन ने अपने खास और देसी अंदाज में जवाब देते हुए कहा, 'हां भाई, मुझे इस बात की पूरी खबर है. मेरी जिंदगी में ऐसी धमाकेदार और अजीबोगरीब चीजें अक्सर होती रहती हैं.' उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने बहुत पहले 'धुरंधर' नाम की फिल्म में काम किया था और उसका जोन भी कुछ वैसा ही था, जैसी 2025-26 में आई बॉलीवुड वाली 'धुरंधर' है. हालांकि, उनकी फिल्म भोजपुरी में थी और उसे एक सीमित बजट के साथ बनाया गया था. हंसते हुए रवि किशन ने आगे कहा कि आज के समय में बॉलीवुड की 'धुरंधर' को ढूंढने के चक्कर में या फिर उस फिल्म की जबरदस्त लहर की वजह से लोगों ने उनकी पुरानी भोजपुरी 'धुरंधर' को भी पूरा देख डाला. इसके लिए उन्होंने दर्शकों का हंसते हुए शुक्रिया अदा किया. मजाकिया लहजे में चुटकी लेते हुए रवि किशन बोले, 'मेरी इस फिल्म के जो प्रोड्यूसर्स और राइट्स होल्डर्स हैं, वो तो इस चक्कर में रातोरात अचानक करोड़पति बन गए हैं.' बता दें कि भोजपुरी फिल्म धुरंधर: द शूटर को दीपक तिवारी ने डायरेक्ट किया था. इसमें रवि किशन ने पुलिस ऑफिसर का रोल किया था. उनके किरदार का नाम रणवीर था. धमाल 4 का ट्रेलर हुआ रिलीज बीते दिन मुंबई के पास एक एम्यूजमेंट पार्क में जब फिल्म 'धमाल 4' के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान मूवी की स्टारकास्ट जुटी. इस खास मौके पर अजय देवगन, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, उपेंद्र लिमये और मशहूर भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन के साथ-साथ बाल कलाकार रियांश डाभी और अक्षरा पडवाल भी मौजूद रहे. फिल्म के प्रोड्यूसर भूषण कुमार, अशोक ठकेरिया और डायरेक्टर इंद्र कुमार ने भी इस इवेंट में शिरकत की. फिल्म 10 जुलाई को रिलीज होने वाली है.