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यूपी में तीसरी जीत का लक्ष्य, सांसद-विधायकों को बूथ स्तर तक सक्रिय रहने की नसीहत

लखनऊ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के सांसदों और विधायकों की बैठक में आपसी खींचतान से तौबा करने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि आपस में समन्वय बनाएं। संगठन के साथ भी तालमेल बेहतर रखें। आपसी खींचतान से पार्टी को नुकसान होता है। उन्होंने राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी और यूजीसी मामले पर भी अनर्गल टिप्पणी से बचने के निर्देश दिए। नितिन नवीन ने मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में शनिवार को गोमतीनगर स्थित होटल में कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश अराजकता, भ्रष्टाचार और जातिवाद की पहचान बन चुका था, भाजपा सरकार ने उसे विकास और सुशासन की पहचान दी है। विपक्षी सरकारों ने यूपी की छवि देशभर में धूमिल कर दी थी, भाजपा ने सम्मान और विश्वास दोनों लौटाए। यूपी में पहले कानून का नहीं, बाहुबलियों और क्षत्रपों का समानांतर राज था। विपक्षी सरकारों ने युवाओं, किसानों और महिलाओं की उम्मीदें तोड़ीं, भाजपा सरकार ने उन्हें अवसर, सुरक्षा और सम्मान दिया। यूपी में तीसरी बार भाजपा की जीत दिलानी है उन्होंने कहा कि यूपी में लगातार तीसरी बार भाजपा को बड़ी जीत दिलानी है। सभी मिलकर काम करें। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान विधायकों और सांसदों के बीच कई जगह टकराव के मामले आए थे। इसीलिए आपस और संगठन के साथ समन्वय बनाए रखने की बात कही है। भाजपा के सभी सांसदों, विधायकों, मंत्रियों को अभी से हर मतदाता तक केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं व पार्टी के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से पहुंचाना होगा। संगठन में काम के लिए खुद बढ़ें आगे नितिन नवीन ने कहा कि सभी सांसद और विधायक खुद संगठन के काम के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि अगर आप जिला अध्यक्ष से कहेंगे कि अपनी टीम में मेरा भी एक नाम जोड़ लीजिए तो वह आपको स्वयं सम्मान देगा। अगर आपने सोचा मैं जिला अध्यक्ष के ऊपर हूं, तो उस दिन से आपके लिए समस्या खड़ी होनी शुरू हो जाएगी। अब आप सबको खुद तय करना है कि आपको क्या चाहिए और अगर आप खुद तय कर सकते हैं, तो निश्चित रूप से राजनीति में आपके भविष्य उज्जवल होंगे। सांसदों और विधायकों से कहा कि आप क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाए रखें। बूथ स्तर तक संपर्क में रहें। आप स्वयं के बजाय पार्टी को ज्यादा महत्व दें। पार्टी से बड़ा कुछ नहीं होता है। जातियों की खींचतान से बचने और इससे दूरी बनाए रखने की भी नसीहत दी है। चंदे में हेरफेर करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई अयोध्या के राममंदिर में चंदा की रकम में हेरफेर पर प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक के बाद विधायकों और सांसदों की बैठक में भी की। इस मामले के दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि इस घटना से हिंदू समाज के साथ हम सभी आस्थावान लोग भी व्यथित हैं। घटना सामने आने के बाद सरकार और ट्रस्ट ने उचित कार्रवाई की है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी हो रही है, आगे भी होगी। हमें ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सावधान रहने की जरूरत है। इस मुद्दे को विपक्ष के वही लोग हवा देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी प्रभु श्रीराम में आस्था नहीं है। यही लोग मंदिर नहीं बनना देना चाहते थे। विपक्ष के लिए राम मंदिर सिर्फ एक मुद्दा है और हमारे लिए आस्था का केंद्र है। यूजीसी पर पर भी दी नसीहत यूजीसी के मुद्दे पर भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खुलकर अपनी बात रखी। हम भी मानते हैं शब्दों के चयन में कुछ गलतियां हुई हैं। इसे ठीक भी कर दिया गया है, लेकिन इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। अगर किसी परिवार में गलती होती है तो उसे मुद्दा नहीं बनाया जाता। भाजपा भी परिवार है। इस मुद्दे पर जातियों में बंटकर विरोध जताना उचित नहीं है। इसका फायदा विपक्ष उठाता है। हमें तो एकजुट होकर विपक्ष के भ्रामक सवालों का मुखरता से जवाब देना चाहिए।

वाल्मीकि से कावर झील तक, बिहार बना रहा इको-टूरिज्म का नया पर्यटन हब

 पटना राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इको-टूरिज्म को प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में इको टूर‍िज्‍म का व्‍यापक व‍िस्‍तार होगा। वर्तमान में बिहार में 10 से 15 सक्रिय इको-टूरिज्म स्थल हैं, जबकि 24 से अधिक प्रमुख स्थलों का विकास तेजी से किया जा रहा है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, जलप्रपात और पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं। सरकार ने 50 से अधिक नए संभावित इको-टूरिज्म स्थलों की पहचान भी की है। लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में राज्य में इको-टूरिज्म स्थलों की संख्या बढ़ाकर 60 से 70 तक पहुंचाई जाए। विभाग के अनुसार बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (पश्चिम चंपारण) सबसे महत्वपूर्ण है। यह राज्य का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। कैमूर को टाइगर र‍िजर्व के रूप में क‍िया जा रहा वि‍कसित यह तराई के घने जंगलों, बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। नेपाल की सीमा से सटा हुआ है। बड़ी संख्‍या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा कैमूर वन्यजीव अभयारण्य, जिसे झरनों और ट्रेकिंग के लिए जाना जाता है, दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित किया जा रहा है। भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य, विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, कावर झील पक्षी अभयारण्य, राजगीर का पहाड़ी क्षेत्र, ककोलत जलप्रपात, घोड़ा कटोरा, बराबर-गुरुपा पहाड़ियां और सूरजपुर वेटलैंड भी राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हैं। विशेष रूप से विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य में नाव से डॉल्फिन देखने का अनूठा अनुभव मिलता है, जबकि कावर झील, जो एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में शामिल है, सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा बनती है। 2026-27 तक कई परियोजनाएं होंगी पूरी सरकार ने सहरसा स्थित मत्स्यगंधा झील के समग्र विकास की योजना बनाई है। यहां सॉवेनियर शॉप, सुपर ट्री, ग्लास ब्रिज, एक्सपीरियंस सेंटर समेत कई आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का निर्माण वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, पश्चिम चंपारण के लव-कुश पार्क और वाल्मीकिनगर आइकॉनिक टूरिज्म पार्क के व्यापक विकास कार्य को वर्ष 2027 तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा मां मुंडेश्वरी धाम में धर्मशाला के बेहतर उपयोग के लिए आसपास जंगल सफारी और अन्य इको-टूरिज्म गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे पर्यटन स्थल पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए विकसित किए जा रहे सभी इको-टूरिज्म स्थलों पर नेचर ट्रेल, वॉच टावर, इको-कॉटेज, होमस्टे, डिजिटल साइनेज और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच सुरक्षित और सुविधाजनक पर्यटन का अनुभव मिलेगा। स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि बिहार इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य सतत (सस्टेनेबल) पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न केवल देश-विदेश के पर्यटक बिहार की ओर आकर्षित होंगे, बल्कि राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। पर्यटन विभाग ने अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से 20 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

बिहार की हाई-प्रोफाइल सीट पर पीके की एंट्री से मुकाबला हुआ और दिलचस्प

 पटना  बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर पर होने वाले उपचुनाव में अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे। रविवार को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगा दी गई। कोर कमेटी की बैठक में हुआ पीके पर फैसला इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने प्रशांत किशोर को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए जन सुराज का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया। प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में थी, लेकिन अब पार्टी के औपचारिक एलान के साथ इस पर विराम लग गया है। जन सुराज इसे केवल एक उपचुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत और वैकल्पिक राजनीति की परीक्षा के रूप में देख रही है। पांच बार से लगातार जीतते रहे हैं न‍ित‍िन नवीन बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट का प्रतिनिधित्व लगातार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करते रहे हैं। उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई, जिस पर अब उपचुनाव कराया जा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला सीधे तौर पर हाई-प्रोफाइल बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर के उम्मीदवार बनने से इस सीट पर चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति, जन सुराज के जनाधार और विपक्षी राजनीति की दिशा पर भी नजर रहेगी। तेज प्रताप की पार्टी ने भी ठोका है दावा तेज प्रताप यादव ने इस सीट पर वीणा मानवी को जेजेडी का उम्‍मीदवार बनाया है। बताया जा रहा है क‍ि महागठबंधन की ओर से पीके को समर्थन क‍िया जाएगा। भाजपा जहां अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं जन सुराज इस चुनाव को अपने संगठन और राजनीतिक अभियान की बड़ी परीक्षा के रूप में पेश करेगी। उल्लेखनीय है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। अब सभी प्रमुख दलों की नजर इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।

यूपी भाजपा में चुनावी बिगुल, नितिन नवीन ने दिया संगठन को जीत का मंत्र

 लखनऊ राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार शनिवार को लखनऊ पहुंचे नितिन नवीन ने पार्टी के चुनावी रण का आगाज़ करते हुए दावा किया कि 2027 में भाजपा जीत की हैट्रिक लगाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को विपक्ष के नकारात्मक मुद्दों का पूरी आक्रामकता के साथ न केवल जवाब देना होगा बल्कि जनता को मोदी-योगी सरकार की उपलब्धियों के साथ सच्चाई सामने रखनी होगी। नितिन नवीन ने ये बातें पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में कहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, यूपी भाजपा के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, दोनों उप मुख्यमंत्रियों केशव व ब्रजेश पाठक और राज्य सरकार के मंत्रियों ने नितिन नवीन और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी एल संतोष का एयरपोर्ट पर स्वागत किया। एयरपोर्ट से भाजपा के प्रदेश कार्यालय तक निकाली गई अभिनंदन यात्रा में पार्टी कार्यकर्ताओं का जबर्दस्त उत्साह दिखा। प्रदेश भाजपा कार्यालय में यूपी भाजपा की नई टीम को उन्होंने चुनाव में जीत का मंत्र दिया। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर मसले पर भी बात हुई। इसे रामभक्तों का आस्था पर गहरा आघात बताया गया और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भरोसा कर संयम रखने की बात कही गई। इससे पहले चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे से विशेष रथ पर नितिन नवीन, पंकज चौधरी के साथ सवार थे। 42 जगहों पर नितिन नबीन का स्वागत हवाई अड्डे से भाजपा प्रदेश कार्यालय तक तकरीबन 18 किलोमीटर लंबी इस अभिनंदन यात्रा के दौरान 42 जगहों पर नितिन नवीन का भव्य स्वागत किया गया। विधान सभा चुनाव के पहले दो नितिन नवीन का पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के साथ दो दिवसीय लखनऊ दौरा अहम माना जा रहा है। प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठक के दौरान नितिन ने पदाधिकारियों से कहा कि यूपी में 2027 में भाजपा की सरकार तीसरी बार बनेगी इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन सभी को मेहनत करनी होगी। पार्टी कार्यालय पर बैठक के बाद गोमतीनगर स्थित एक होटल में विधायकों, सांसदों और पार्टी की कोर कमेटी की भी बैठकें हुईं। इनमें भी चुनाव की रणनीति के अलावा सरकार और संगठन के समन्वय को लेकर चर्चा हुई। मैंने प्रवास शुरू किया है, आप भी गांवों में प्रवास करें नितिन नवीन ने यूपी भाजपा की नई टीम, मोर्चों के अध्यक्षों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और जिला व महानगर अध्यक्षों की बैठक में पार्टी को चुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मैंने प्रवास कार्यक्रम शुरू किए हैं। आप भी गांव-गांव प्रवास करिए। इसी महीने से मैं अपना क्षेत्रीय प्रवास भी शुरू करूंगा। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि हर महीने के अंतिम रविवार को 'मन की बात' का कार्यक्रम होता है। उस दिन इस कार्यक्रम के बाद वहीं पर बूथ की बैठक जरूर होनी चाहिए। मन की बात वाले रविवार से पहले के रविवार को शक्ति केंद्र की बैठक करिए। इसमें तय करिए कि कितने बूथों पर ‘मन की बात’ का कार्यक्रम हो सकेगा। तभी हम मजबूत बूथ और मजबूत शक्ति केंद्र की कल्पना को साकार कर पाएंगे। आपके जिले के 100 प्रतिशत बूथों पर ‘मन की बात’ का प्रसारण होना चाहिए। हर महीने का कार्यक्रम पिछले से बेहतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर महीने मंडल, जिला और पदाधिकारियों बैठक की प्रदेश स्तरीय बैठक होनी है। सपा-कांग्रेस ध्यान भटका रहे नवीन ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने हर क्षेत्र में कीर्तिमान बनाया है। मोदी-योगी की जोड़ी ने यूपी को उत्तम प्रदेश बनाया है। सपा-कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे जनता का ध्यान भटकाने के लिए नकारात्मक राजनीति कर रहे हैं। हमें विपक्ष के झांसे में नहीं आना है। हमें यूपी के विकास के लिए काम करना है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि विपक्ष के अनर्गल आरोपों का सोशल मीडिया पर आक्रामक ढंग से जवाब दें। ‘सीएम योगी बोले, प्रभु श्री राम एवं भगवान श्रीकृष्ण के चरणरज से पावन हुई संस्कृति, संस्कार और सृजन की साधना स्थली उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन। ’ 'यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी बोले, उत्तर प्रदेश की पवित्र धरती पर राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐतिहासिक स्वागत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन का लखनऊ हवाई अड्डे पर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। 'स्वागत यात्रा' में जगह-जगह उत्तर प्रदेश की देवतुल्य जनता और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं ने पूरे उत्साह और गर्मजोशी के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत किया।' ‘डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि पूरा लखनऊ शहर और भाजपा की राज्य इकाई प्रदेश कार्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का गर्मजोशी से स्वागत कर रही है। आज और कल उनके साथ बैठकों का दौर तय है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार होगा।’ ‘उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का कहना हे कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आपका भगवान लक्ष्मणजी की पावन धरा लखनऊ में पहले आगमन पर हार्दिक स्वागत और अभिनंदन।’

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भारत, 95 हजार करोड़ के निवेश से समुद्र मंथन मिशन तेज

नई दिल्ली  मिडिल ईस्ट संघर्ष ने भारत समेत कई देशों को एनर्जी को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की सीख दी। भारत बहुत पहले से ही कच्चे तेल और गैस में आत्मनिर्भर होने की दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रहा है। और अब भारत जल्द ही अपने इतिहास के सबसे बड़े तेल और गैस खोज अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। केंद्र सरकार करीब 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर (96,500 वर्ग मील) के ऐसे क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की तलाश शुरू करेगी, जहां अब तक बड़े पैमाने पर खोज नहीं हुई है। इस अभियान का मकसद घरेलू उत्पादन बढ़ाकर रूस, सऊदी अरब, इराक समेत दूसरे देशों से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार जल्द ही इन नए क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए नीलाम करेगी। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं और अब समय आ गया है कि देश अपने ही संसाधनों का अधिकतम उपयोग करे। इसके लिए भारत लगभग 95 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा जहां नहीं हुई खोज वहां महाअभियान चलाएगा भारत भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऑयल मिनिस्ट्री के अनुसार, 2025-2026 में देश में कच्चे तेल का उत्पादन 25.98 मिलियन मीट्रिक टन था। यह भारत की कच्चे तेल की जरूरतों का सिर्फ 10 प्रतिशत है, जो लगभग 5,22,000 बैरल प्रति दिन (bpd) के बराबर है। यह आंकड़ा 2011 में 9,00,000 bpd से ज्यादा के पीक प्रोडक्शन से काफी कम है। भारत ने ईरान, वेनेजुएला, रूस से ज्यादा खरीद और कई अफ्रीकी देशों सहित कच्चे तेल के सप्लायर देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 करके ऊर्जा संकट का सामना किया। अब कच्चे तेल की निर्भरता दूसरे देशों पर कम करने के लिए भारत अपने यहां बड़े स्तर महाअभियान चलाएगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने AFP को बताया, "हम अभी लगभग 2,50,000 वर्ग किलोमीटर (96,500 वर्ग मील) के ऐसे इलाके की बोली लगाने की प्रक्रिया में हैं, जहा अभी तक कोई खोज नहीं हुई है।" उन्होंने कहा, "हम 10 अरब डॉलर (लगभग 95 हजार करोड़ रुपये) के प्रोग्राम के जरिए तेल और गैस की खोज में बड़े पैमाने पर पैसा लगा रहे हैं।" हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर ने यह साफ कर दिया कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी वजह से सरकार ने घरेलू तेल और गैस खोज अभियान को तेज करने का फैसला लिया है। समुद्र में छिपा है तेल का खजाना! सरकार की नजर खासतौर पर समुद्र के गहरे इलाकों पर है। अंडमान एवं निकोबार के आसपास के अपतटीय क्षेत्रों को तेल और गैस के लिहाज से काफी संभावनाशील माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हाइड्रोकार्बन समृद्ध क्षेत्रों जैसी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास मौजूद "ऊर्जा के मौकों के भंडार" की तारीफ की है। यह द्वीप समूह 800 किलोमीटर (500 मील) लंबी द्वीपों की एक श्रृंखला है, जो पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील हैं और थाईलैंड व इंडोनेशिया से सटे समुद्रों में स्थित हैं। हालांकि गहरे समुद्र में तेल निकालना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक, भारी निवेश और कई वर्षों तक लगातार काम करने की जरूरत होती है। इसी कारण सरकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों का भी सहयोग ले रही है। पीएम मोदी ने की थी 'समुद्र मंथन मिशन' की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण के दौरान "समुद्र मंथन" मिशन की शुरुआत की। यह नाम हिंदू पौराणिक कथाओं की एक अहम घटना से लिया गया है, जिसका अर्थ है "समुद्र का मंथन"। पीएम मोदी ने उस समय कहा था, "हम समुद्र के नीचे तेल और गैस के भंडार खोजने के लिए मिशन मोड में काम करना चाहते हैं और इसलिए भारत 'नेशनल डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन' शुरू करने जा रहा है।"

DMK-AIADMK-BJP ने राज्यपाल से की शिकायत, थलपति विजय सरकार पर दबाव

 नई दिल्ली तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है। राज्य की तीन बड़ी पार्टियों (DMK, AIADMK, BJP) ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को तीनों पार्टियों के नेताओं ने राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के साथ अलग-अलग समय पर मुलाकात की और सत्ताधारी पार्टी के ऊपर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोप लगाए। इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर सरकारी मशीनरी के गलत उपयोग और राज्य कैबिनेट की मीटिंग में गैर अधिकृत लोगों के प्रवेश का भी आरोप लगाया। राज्यपाल से मिलकर आए डीएमके नेता आरएस भारती ने मीडिया के सामने अपने तर्कों को रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की विजय सरकार मशीनरी का गलत उपयोग कर रही है और विधायकों की खरीद फरोख्त करने की कोशिश कर रही है। इसके खिलाफ ऐक्शन होना ही चाहिए। उन्होंने कहा, "हमने गवर्नर से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात है और उन्हें तमिलनाडु में जारी हॉर्स ट्रेडिंग और सत्ता के गलत इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। दो लोग जॉन और विष्णु रेड्डी, जिनका सरकार से कोई संबंध नहीं है वह राज्य के मंत्रियों से ज़्यादा ताकतवर लगते हैं। वे सभी हाई-लेवल मीटिंग में शामिल होते हैं और अधिकारियों को आदेश देते हैं। तमिलनाडु में ऐसी खराब स्थिति पैदा हो गई है। हमने पहले भी एक याचिका दी थी, लेकिन गवर्नर शहर में नहीं थे, इसलिए आज हमने मुलाकात की और इन सभी मुद्दों पर जोर दिया। बता दें, यह पहली बार नहीं है जब राज्य की डीएमके की तरफ से मुख्यमंत्री विजय के ऊपर आरोप लगाए गए हों। एक हफ्ते पहले ही स्टालिन की पार्टी ने हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप में विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की थी। CM थलपति विजय पर लगा विधायकों को तोड़ने का आरोप एक हफ्ते पहले ही MDMK के नेता वाइको ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री विजय ने व्यक्तिगत रूप से भी विधायकों को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने DMK के दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा देने और उनके साथ जाने के लिए मनाने की कोशिश की है। इस दावे को लेकर डीएमके ने सीधे तौर पर राज्यपाल से इसकी शिकायत की। इसके अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने विधायकों को भरोसा दिलाया कि अगर वह अपनी सीट छोड़ देते हैं, तो उन्हें उपचुनाव के दौरान TVK से टिकट और आर्थिक मदद दी जाएगी। भाजपा और AIADMK ने भी की राज्यपाल से मुलाकात DMK के अलावा AIADMK और भाजपा ने भी राज्यपाल से मुलाकात करके राज्य में चल रही गतिविधियों पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की। दोनों पार्टियों ने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर हॉर्स ट्रेडिंग और राज्य कैबिनेट में निजी लोगों को शामिल करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने गवर्नर से संविधान के अनुच्छेद 167 का इस्तेमाल करते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगने और ज़रूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया। भारतीय जनता पार्टी ने भी लगभग समान आरोप लगाते हुए जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया और विजय के खिलाफ जांच की मांग की। राज्यपाल ने तीनों पार्टियों के नेताओं से मिलने की पुष्टि की शनिवार को हुई इन हाई प्रोफाइल बैठकों से राज्य की राजनीति भी गर्म रही। राज्यपाल विश्वानाथ आर्लेकर ने इन पार्टियों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि की। लोकभवन ने एक बयान जारी करके बताया कि डीएमके ने अपने ज्ञापन में पुलिस मशीनरी के गलत इस्तेमाल से कथित गैर-कानूनी गिरफ्तारी, कस्टडी में दबाव डालने और चुने हुए प्रतिनिधियों को पाला बदलने के लिए उकसाने की कोशिशों पर चिंता जताई गई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि विधायकों को पाला बदलने के लिए लालच दिया गया और सरकारी कामकाज में निजी लोगों की भागीदारी पर सवाल उठाए। 'जॉन और विष्णु अब मुख्यमंत्री के सलाहकार' TVK ने दिया जवाब तीन तरफ से आए इस हमले का जवाब थलपति विजय की पार्टी ने भी जोरदार तरीके से दिया। पार्टी की तरफ से कहा गया कि हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। जहां तक जॉन और विष्णु रेड्डी के कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने की बात है। उन दोनों को मुख्यमंत्री का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है। इसलिए अब वह निजी व्यक्ति नहीं रह गए बल्कि सरकारी मशीनरी का हिस्सा हैं।

गुजरात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहावतों और मीम डायलॉग से बांधा माहौल

 साणंद  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर असेंबलिंग एंड टेस्टिंग प्लांट का उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में लोकप्रिय संवाद "सुन रहे हो न विनोद" का इस्तेमाल किया, जिस पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं और ठहाके लगाए। दरअसल, उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए "सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल साल्यूशंस" के चेयरमैन वेल्लायन सुबैया ने गुजराती की दो कहावतों का इस्तेमाल किया। जब पीएम मोदी बोलने आए, तो उन्होंने भी इन कहावतों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने क्या कहा? पीएम ने कहा-सुबैया जी ने गुजराती की एक कहावत कही-निशान चूक माफ, पण नहीं माफ नीचू निशान (ऊंचा लक्ष्य चूकना माफ है, लेकिन कम लक्ष्य तय करना नहीं)। मैं कभी छोटे लक्ष्य नहीं रखता, न ही छोटा सोच रखता हूं। यदि मुझे कोई प्रतिमा बनानी हो, तो मैं उसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाऊंगा। प्रधानमंत्री का यह बयान स्पष्ट रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल की "स्टेच्यू आफ यूनिटी" के संदर्भ में था। पंचायत वेब सीरीज का फेमस डायलॉग इसके बाद मोदी ने कहा- और सुबैया जी ने "काम बोले छे" भी कहा…। "सुन रहे हो न विनोद"… काम बोलता है। यह सुनते ही सभा में मौजूद लोग और मंच पर उपस्थित अन्य लोग ठहाके लगाने लगे। उल्लेखनीय है कि "सुन रहे हो न विनोद" (या "देख रहा है विनोद") लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत का एक प्रसिद्ध डायलॉग है। इंटरनेट पर यह संवाद बहुत बड़ा मीम बन गया है।  

ड्रोन और क्रूज मिसाइल का घातक कॉम्बो बनी S8000 बांडेरोल, जानिए कारण

नई दिल्ली रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में तकनीक और हथियारों का स्तर लगातार बदल रहा है. इस कड़ी में रूस द्वारा तैनात की गई नई S8000 बांडेरोल (Banderol) क्रूज मिसाइल ने यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. यह हथियार पारंपरिक क्रूज मिसाइल और सुसाइड ड्रोन का एक घातक मिश्रण है, जिसका इस्तेमाल हाल ही में कीव पर हुए बड़े हमलों में बड़े पैमाने पर देखा गया है. सुरक्षा विशेषज्ञों और यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस मिसाइल को मार गिराना इतना कठिन क्यों है? मशीन गन की पहुंच से बाहर बांडेरोल मिसाइल को मार गिराने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी गति और इसका इंजन है. यूक्रेनी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मिसाइल की क्रूज गति 520 से 560 किमी/घंटा है, जो अधिकतम 650 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है. यूक्रेन की सेना अक्सर मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के लिए मोबाइल फायर टीमों का उपयोग करती है, जो जमीन पर मौजूद भारी मशीन गन से हवाई टारगेट्स पर निशाना साधती हैं. बांडेरोल की जेट इंजन की वजह से गति इतनी अधिक है कि ये मैन्युअल मशीन गन टीमें इसका पीछा करने और सटीक निशाना लगाने में पूरी तरह बेकार साबित हो रही हैं. इसे रोकने के लिए 'गेपार्ड' जैसी अत्यधिक एडवांस और ऑटोमैटिक एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों की आवश्यकता होती है, जो तेज गति से चलने वाले लक्ष्यों को ट्रैक कर सकें.   छोटा आकार और बेजोड़ चालाकी पारंपरिक रूसी क्रूज मिसाइलों (जैसे Kh-101 या कैलिबर) की तुलना में बांडेरोल का आकार काफी छोटा है. लगभग 5 मीटर लंबाई और 2.2 मीटर विंगस्पैन के साथ यह रडार की नजरों से आसानी से बच निकलती है. यूक्रेनी सैन्य खुफिया विभाग (HUR) की रिपोर्ट से पता चलता है कि यह मिसाइल बेहद कम जगह में मुड़ने के साथ हवा में तेजी से मैन्यूवर कर सकती है. इसकी यही चालकी इसे यूक्रेन के हवाई सुरक्षा रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देती है, क्योंकि इसके फ्लाइट पाथ का अनुमान लगाना बेहद कठिन होता है. जैमिंग-रोधी 'कोमेटा' एंटीना तकनीक हवाई सुरक्षा को भेदने के लिए इस मिसाइल में रूस की एडवांस कोमेटा (Kometa) डिजिटल सैटेलाइट नेविगेशन एंटीना प्रणाली का उपयोग किया गया है. यह तकनीक यूक्रेन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यानी जैमिंग सिस्टम को पूरी तरह से बेअसर कर देती है. जब यूक्रेन की सेना मिसाइल के जीपीएस या नेविगेशन को बाधित करने की कोशिश करती है, तो यह जैमिंग-रोधी एंटीना मिसाइल को सुरक्षित रूप से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद करता है. इस वजह से इसे बिना भौतिक रूप से नष्ट किए, केवल सिग्नल ब्लॉक करके रोकना लगभग असंभव हो जाता है.    रूस की बेहतरीन ई-कॉमर्स वाली चालाकी इस मिसाइल का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका निर्माण और सप्लाई चेन है. यूक्रेन के 'वॉर एंड सैंक्शंस' पोर्टल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद इस मिसाइल में 30 अलग-अलग विदेशी कंपनियों के 20 से अधिक मुख्य पार्ट्स और लगभग 20 माइक्रोचिप्स लगाए गए हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है इसका इंजन- चीन का Swiwin SW800Pro जेट इंजन, जो आमतौर पर रिमोट-कंट्रोल विमानों के लिए उपयोग किया जाता है. यह ई-कॉमर्स वेबसाइट 'AliExpress' पर मात्र $16,000 में आसानी से मौजूद है. इसके अलावा, इसमें जापान की मुराता बैटरियां, साउथ कोरिया के डायनामिक्सल सर्वो मोटर्स और अमेरिकी तथा स्विस मूल के वोल्टेज रेगुलेटर और माइक्रोकंट्रोलर्स शामिल हैं. प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस ने आर्मेनिया, कजाकिस्तान, चीन, तुर्की और यूएई जैसे देशों के मध्यस्थों और शेल कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क तैयार किया है, जिसके माध्यम से ये कलपुर्जे रूसी वितरकों तक पहुंच जाते हैं.    बड़े हमलों में रणनीति का हिस्सा रूस इस मिसाइल का उपयोग स्वतंत्र रूप से करने के बजाय एक सोची-समझी रणनीति के तहत कर रहा है. इसे बड़े पैमाने पर 'शहीद' ड्रोनों और भारी बैलिस्टिक मिसाइल के साथ मिलाकर दागा जाता है. जब सैकड़ों हथियार एक साथ यूक्रेन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो वहां की हवाई सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह व्यस्त हो जाती है. ऐसे समय में अपनी गति, छोटे आकार और चपलता के कारण बांडेरोल मिसाइलें सुरक्षा घेरे को तोड़कर नागरिक और बुनियादी ढांचों पर भारी तबाही मचाने में सफल हो जाती हैं.

स्वदेशी भारत टैक्सी ऐप से सस्ती और सुरक्षित यात्रा का दावा, जीरो कमीशन मॉडल

जयपुर सहकार सप्ताह के छठवें दिन सहकार भवन में युवाओं के लिये सहकारिता की महत्ता एवं भारत टैक्सी सेवा पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ​की अध्यक्षता एसएलडीबी (SLDB) के प्रबंध निदेशक जितेंद्र शर्मा ने की । इस दिन को यूथ दिवस (युवा दिवस) के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। शर्मा ने बताया कि भारत टैक्सी भारत की अपनी टैक्सी है। इस सेवा में कोई भी विदेशी प्रदाता सम्मिलित नहीं है। इस स्वदेशी टैक्सी ऐप ने बहुत कम समय में बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। उन्होंने बताया कि भारत टैक्सी एप्प से पहली राइड बुकिंग करने पर उपभोक्ता को अमूल आइसक्रीम का एक विशेष कूपन जारी किया जायेगा, जिसे ब्लिंकिट से मंगवाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि भारत टैक्सी सेवा एक किफायती एवं सुरक्षित सेवा है, जिसमें किराया अन्य सेवा प्रदाताओं की तुलना में 10 प्रतिशत तक कम है। भारत टैक्सी का किराया सर्ज फ्री प्राइसिंग पर आधारित है और इसमें टैक्सी ड्राइवर के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित किया गया है। भारत टैक्सी के नोडल अधिकारी भोमाराम ने कहा कि उपभोक्ता द्वारा भारत टैक्सी की बुकिंग को किसी कारण से केन्सिल भी करना पडता है तो उससे किसी प्रकार का कैंसिलेशन चार्ज वसूला नहीं जायेगा। महिला की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने एवं उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिये महिला ड्राइवर्स को भी रोजगार के विशेष अवसर दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ड्राइवर्स का पुलिस वेरिफिकेशन पूर्ण होने पर ही उन्हें भारत टैक्सी सेवा से जोडा गया है। भारत टैक्सी सेवा जीरो कमीशन मॉडल पर काम करता है, जिससे ड्राइवर्स को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिलेगा तथा उपभोक्ताओं को भी कम मूल्य पर बेहतर, सुरक्षित एवं विश्वसनीय सेवा मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में सहकारिता और स्वदेशी के इस अनूठे संगम की सराहना की गई और युवाओं से इस स्वदेशी मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया गया।  

बिहार का बलिराजगढ़ बना पुरातत्व का केंद्र, 10 साल तक चलेगी एएसआई खुदाई

पटना  बिहार का मधुबनी जिला इन दिनों चर्चा में है। दररअसल मधुबनी जिले में स्थित ऐतिहासिक बलिराजगढ़ उत्खनन स्थल से अनेक बहुमूल्य संरचनात्मक अवशेष और प्राचीन वस्तुएं पूरा शेष प्राप्त हुई हैं। यह जानकारी जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद एवं पर्यटन, परिवहन तथा संस्कृति संबंधी संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है। संजय झा ने अधिकारियों से प्राप्त विस्तृत जानकारी साझा करते हुए लिखा है कि बलिराजगढ़ पुरातात्विक स्थल पर वर्तमान में चल रही खुदाई मुख्य रूप से दो हिस्सों- किले की दीवार और उसके दक्षिणी क्षेत्र में केंद्रित है। उन्होंने बताया है कि बलिराजगढ़ में उत्खनन के दौरान प्राचीन ईंटों की दीवार, 7 परतों वाली ईंटों की संरचना, आंगन, फर्श, रिंग वेल-कुआं और विशेष जल निकासी प्रणाली के साथ सोख्ता गड्ढा आदि मिले हैं। इसके साथ ही विभिन्न आकृतियों के बर्तन, सिक्के, मुहरें, मिट्टी की मूर्तिया, खिलौने और पत्थर की गेंदें भी मिली हैं। यह इस क्षेत्र के विभिन्न सांस्कृतिक चरणों और प्राचीन समृद्ध जीवनशैली को दर्शाती हैं। यहां फिलहाल एएसआई का दफ्तर खोलने पर काम चल रहा है। बताया ज रहा है कि यहां अगले 10 सालों तक खुदाई होगी। संजय झा ने बलिराजगढ़ में हो रही खुदाई की प्रगति के संबंध में शनिवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव से बात की। सचिव द्वारा उन्हें बताया गया कि मंत्रालय बलिराजगढ़ में आगामी 10 वर्षों तक निरंतर खुदाई कराने, वहां एएसआई का कार्यालय खोलने और एक संग्रहालय के निर्माण पर आगे की कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले उन्होंने इस सिलसिले में गत 19 मई को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर बलिराजगढ़ के संरक्षण और वैज्ञानिक उत्खनन के संबंध में विस्तृत चर्चा की थी। पर्यटन और आर्थिक विकास की संभावनाएं रामायण सर्किट और मिथिला पर्यटन में इस स्थल के पूर्ण उत्खनन से यह बिहार में रामायण सर्किट और सांस्कृतिक पर्यटन का एक बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। पर्यटकों को यह जगह काफी पसंद आ सकती है। खुदाई में हाई-टेक उपकरणों का इस्तेमाल एक खास बात यह भी है कि इस बार की खुदाई में पिछली बाधाओं (जैसे भूजल स्तर का ऊपर आना) से निपटने के लिए सैटेलाइट इमेजिंग, जीपीएस मैपिंग और आधुनिक वैज्ञानिक ट्रेंचिंग का उपयोग किया जा रहा है।