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भारत में टेक जॉब्स 1.23 लाख के पार, लेकिन फ्रेशर्स के लिए घटी नौकरियां; अनुभवी लोगों की बढ़ी मांग

भारत के टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट से एक बहुप्रतीक्षित और राहत भरी खबर आई है. देश में टेक नौकरियों की संख्या पिछले 18 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अक्टूबर में एक्टिव जॉब्स का आंकड़ा 1.23 लाख के पार हो गया है. लेकिन, अगर आप कॉलेज पासआउट हैं और यह सोच रहे हैं कि बाजार खुलने का सीधा फायदा आपको मिलेगा, तो ठहरिए—आंकड़ों की इस चमक के पीछे एक बड़ा कैच (पेच) छुपा है. स्टाफिंग फर्म 'Xpheno' की ताजा 'एक्टिव टेक जॉब्स आउटलुक' रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में नौकरियों की मांग सितंबर के मुकाबले 5% और पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 17% बढ़ी है. हालांकि, रिकवरी की यह बयार सबके लिए एक जैसी नहीं है, इस बाजार पर पूरी तरह से अनुभवी पेशेवरों का कब्जा दिख रहा है. 1.23 लाख नौकरियां… आखिर किसे मिल रहा है मौका? आंकड़ों का हिसाब-किताब देखें तो मिड-सीनियर (अनुभवी) रोल्स की मांग सबसे ज्यादा है. अकेले इस सेगमेंट में 68,000 वेकेंसी हैं, जो कुल ओपनिंग्स का 55% हिस्सा हैं. इसमें सालाना आधार पर 19% का उछाल दर्ज किया गया है. दूसरी तरफ, फ्रेशर्स या एंट्री-लेवल नौकरियों की संख्या महज 15,000 पर सिमट कर रह गई है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल से 15% ज्यादा है, लेकिन सितंबर के मुकाबले इसमें 6% की गिरावट दर्ज की गई है. साफ संदेश है कि बाजार तो बड़ा हो रहा है, लेकिन मलाई अनुभवी हाथों के हिस्से ही आ रही है. हायरिंग लेवल का पूरा गणित मिड-सीनियर: 68,000 (कुल का 55%, YoY +19%) एंट्री-लेवल: 15,000 (YoY +15%, लेकिन MoM -6%) मिड-जूनियर: 7,000 (MoM +40%, YoY +17%) सीनियर रोल्स: 2,000 (मांग का छोटा हिस्सा) अन्य/अपरिभाषित पद: 31,000 कंपनियों को कैसी स्किल्स की तलाश है? इस रिकवरी को सबसे ज्यादा सहारा आईटी सर्विसेज से मिल रहा है, जहां 66,000 एक्टिव नौकरियां हैं जो पिछले साल अक्टूबर से 57% ज्यादा हैं. कंपनियां अब सिर्फ डिग्री देखकर नौकरियां नहीं बांट रहीं. Xpheno के मुताबिक, एआई इंजीनियरिंग (AI Engineering), डेटा एनालिस्ट और टेक्निकल लीडरशिप जैसे रोल्स की जबरदस्त डिमांड है. टॉप 6 आईटी कंपनियों के डेटा से पता चलता है कि इन खास रोल्स में टैलेंट पूल पिछले दो तिमाहियों में 14% से 22% तक बढ़ा है. कोर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रोल्स 61,000 नौकरियों के साथ सबसे आगे हैं. इसके बाद टेक बिजनेस डेवलपमेंट व सेल्स (14,000), टेक कंसल्टिंग (5,000) और आईटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (3,000) का नंबर आता है. वर्क-फ्रॉम-होम का जमाना खत्म, ऑफिस वापसी का दौर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 18,000 वेकेंसी हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 64% ज्यादा हैं. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव काम करने के तरीके में आया है. वर्क-फ्रॉम-ऑफिस (WFO): 1 लाख नौकरियां (कुल मांग का 81%) पूरी तरह ऑफिस से काम करने वाली हैं. रिमोट और हाइब्रिड: वर्क-फ्रॉम-होम (रिमोट) नौकरियों में 23% और हाइब्रिड रोल्स में 19% की भारी गिरावट आई है. बेंगलुरु का दबदबा कायम, लेकिन टियर-2 और 3 शहरों ने चौकाया टेक जॉब्स के मामले में 31,000 नौकरियों के साथ बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा हब बना हुआ है. इसके बाद हैदराबाद (14,000) और दिल्ली-एनसीआर (9,000) का नंबर आता है. लेकिन असली चौंकाने वाला आंकड़ा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आया है. छोटे शहरों में एक्टिव टेक नौकरियों की संख्या बढ़कर 40,000 पहुंच गई है, जिसमें सालाना आधार पर 67% की रिकॉर्ड तेजी देखी गई है.

प्रयागराज में सलीम से बने देवव्रत शुक्ला ने वायरल किया वीडियो, पुलिस बोली- किराएदार से विवाद का मामला

लखनऊ यूपी के प्रयागराज में घूरपुर थानाक्षेत्र के सारंगपुर गांव के एक शख्स ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर मुख्यमंत्री से सुरक्षा की गुहार लगाई है। वीडियो पोस्ट कर उसने अतीक परिवार के खौफ से धर्म परिवर्तन कर सलीम अंसारी से देवव्रत शुक्ला बनने का भी दावा किया। लेकिन, ‘हिन्दुस्तान’ अखबार वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। इधर, जानकारी होते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई। हालांकि पुलिस की जांच में करीब दो साल पहले धर्म परिवर्तन करने की पुष्टि हुई। वहीं, किराएदार से विवाद की वजह से वीडियो पोस्ट करने का मामला सामने आया। फिलहाल किराएदार ने कमरा खाली कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, कानपुर के मूल निवासी सलीम अंसारी पुत्र वाजिद अली का परिवार कई साल पहले घूरपुर के सारंगपुर गांव आकर बस गया था। सलीम अंसारी अधिवक्ता की गाड़ी चलाते हैं। घूरपुर पुलिस गुरुवार को उसके घर पहुंची और पड़ताल की तो सच्चाई का पता लगा। पुलिस का कहना है कि सलीम ने 12 फरवरी 2024 को स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाकर अपना नाम देवव्रत शुक्ला रखा था। उसके मकान में अतीक अहमद के चचेरे भाई हमजा की बहन किराए पर रहती थी। पिछले कुछ दिनों से देवव्रत कमरा खाली करने का दबाव बना रहा था। इसी को लेकर दोनों पक्ष में कहासुनी हुई थी। आरोप है कि देवव्रत ने दबाव बनाने की मंशा से वीडियो में गलत बयानबाजी कर पोस्ट कर दिया था। एसीपी कौंधियारा अब्दुस सलाम खान ने बताया कि दो साल पहले स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया गया था। किराएदार से विवाद की वजह से वीडियो पोस्ट किया गया था। हालांकि, किराएदार से कमरा खाली करवा दिया गया है। मामले में पुलिस जांच कर रही है वायरल वीडियो में… सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई वीडियो में देवव्रत ने सीएम योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाते हुए कहा था कि सीएम योगी आदित्यनाथ आप हिंदुत्व की बात करते हैं। हिंदू बनना मेरे लिए श्राप बन चुका है। मैंने धर्म परिवर्तन किया है। गांव के एक दबंग व्यक्ति, जिसका नाम हमजा है, उसके चार बेटों और उसका एक भांजा मुझे और मेरी वृद्ध मां को जान से मारने की धमकी देते हैं। वे कहते हैं कि मकान पर कब्जा कर लेंगे। तुम काफिर बन रहे हो। मेरा निवेदन है कि हमजा पर कार्रवाई हो और मुझे सुरक्षा प्रदान की जाए। मेरी सनातनिक धर्म भाइयों से विनती है कि मेरी वीडियो सभी तक पहुंचाएं। मैंने थाने में लिखित शिकायत दी है लेकिन पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।

अक्टूबर 2026 में इन 7 राशियों की चमकेगी किस्मत, ग्रहों के बदलाव से धन लाभ के योग

 साल 2026 का अक्टूबर महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद उथल-पुथल और बड़े बदलावों वाला साबित हो रहा है. इस महीने एक के बाद एक कई प्रमुख ग्रह अपनी चाल, राशि और नक्षत्र में परिवर्तन कर रहे हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार, जहां कुछ ग्रहों की चाल बदल चुकी है, वहीं आने वाले दिनों में देवगुरु बृहस्पति, शनि, सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल जैसे शक्तिशाली ग्रह भी अपनी स्थिति में फेरबदल करने जा रहे हैं. अक्टूबर के इन बचे हुए 26 दिनों में होने वाले ये खगोलीय परिवर्तन देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालेंगे. प्रसिद्ध एस्ट्रोलॉजर नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, ग्रहों की इस बदलती चाल से 7 भाग्यशाली राशियों के लिए यह पूरा दौर 'गोल्डन पीरियड' जैसा साबित होने वाला है. आइए जानते हैं कि आने वाले 26 दिन किन राशियों के लिए मालामाल होने के योग बना रहे हैं. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के लोगों के लिए अक्टूबर के शेष दिन बेहद शुभ परिणाम लेकर आ रहे हैं. इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से स्टेबल बनी रहेगी, जिससे पैसों को लेकर चल रही किसी भी प्रकार की चिंता से राहत मिलेगी. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के लोगों के लिए आने वाले 26 दिन पूरी तरह से पॉजिटिव परिणाम लेकर आए हैं. इस अवधि में आपको किसी भी बड़ी सफलता को पाने के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष या अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ेंगे, बल्कि कम मेहनत में ही आपको मनचाहे परिणाम हासिल हो जाएंगे. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए अक्टूबर के ये बचे हुए दिन बेहद लाभदायक रहने वाले हैं. इस दौरान आपको अपने भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा, जिससे आपके कई रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. इसके साथ ही आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े धन लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं, जिससे आपकी तिजोरी मजबूत होगी. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि वालों के लिए अक्टूबर के आगामी दिन अत्यधिक फायदेमंद साबित होंगे. इस समयावधि में आपके सामने करियर या व्यापार से जुड़ा कोई नया और बेहतरीन मौका आ सकता है, जिसके जरिए आपके जीवन में धन का आगमन होने की पूरी संभावना है. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों के लिए यह समय काफी अच्छा और उत्साहवर्धक माना जा रहा है. इस पूरे दौर में आप गजब के आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे, जिसके बल पर आप अपने कार्यक्षेत्र में और अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और लोगों को प्रभावित करेंगे. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के जातकों के लिए यह पूरा समय बेहद शानदार और सुखद रहने वाला है. इस दौरान घर-परिवार में किसी खास बात को लेकर प्रसन्नता का माहौल रहेगा और आपको अपनी संतान पक्ष से कोई बहुत अच्छी और सुकून देने वाली खबर सुनने को मिल सकती है. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए आने वाले 26 दिन हर लिहाज से लाभकारी और प्रगतिशील रहेंगे. इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपको अपने दोस्तों और सहपाठियों/सहयोगियों का पूरा-पूरा सपोर्ट मिलेगा, जिससे कठिन से कठिन प्रोजेक्ट भी आसानी से पूरे हो जाएंगे.

दिल्ली की झुग्गियों में रहने वालों के लिए बड़ी खबर, 2 हफ्ते में शुरू होगा सर्वे; पुनर्वास के लिए बदले नियम

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार 12 साल बाद झुग्गी-बस्तियों और जेजे क्लस्टर का नया सर्वे करने जा रही है। इसका मकसद ऐसी बस्तियों और परिवारों की संख्या का पता लगाना और अपने प्रस्तावित 'जहां झुग्गी, वहां मकान' (इन-सीटू पुनर्वास) प्रोग्राम के लिए लाभार्थियों की पहचान करना है, ताकि उन्हें बेहतर सुविधाएं दी जा सकें। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सर्वे के दो हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है। यह साबित करने के लिए कि कोई व्यक्ति कट-ऑफ तारीख से पहले झुग्गी में रह रहा था और पुनर्वास के लिए योग्य है, वोटर ID कार्ड, राशन कार्ड और बिजली के बिल जैसे दस्तावेजों की जरूरत होगी। 'इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल' के तहत दिए जाएंगे फ्लैट: आशीष सूद मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली की बीजेपी सरकार ने पुनर्वास के नियमों का दायरा बढ़ाया है ताकि 2014 के बाद झुग्गी में आए लोगों को भी सम्मानजनक घर मिल सकें। योग्य परिवारों को 'इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल' के तहत फ्लैट दिए जाएंगे, जिसका मतलब है कि उन्हें उसी जगह के पास बसाया जाएगा जहां वे अभी रह रहे हैं। दिल्ली सरकार के 2014 के पिछले बड़े सर्वे में लगभग 700 जेजे बस्तियों और करीब 3.3 लाख परिवारों की पहचान की गई थी। अभी सरकार के पास झुग्गी क्लस्टर या उनमें रहने वाले परिवारों की संख्या के बारे में कोई वेरिफाइड आंकड़े नहीं हैं। 'जहां झुग्गी, वहां मकान' पॉलिसी एक अधिकारी ने कहा कि 'जहां झुग्गी, वहां मकान' पॉलिसी को लागू करने से पहले इस कवायद में बस्तियों की मैपिंग की जाएगी, परिवारों की संख्या का आकलन किया जाएगा और लाभार्थियों का वेरिफिकेशन किया जाएगा। दिल्ली विधानसभा ने हाल ही में 'दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (संशोधन) बिल, 2026' पास किया है। इसमें DUSIB एक्ट, 2010 में संशोधन करके झुग्गी क्लस्टर को जेजे बस्ती के तौर पर पहचानने के लिए कट-ऑफ तारीख एक जनवरी, 2006 को बदलकर एक जनवरी, 2025 करने का प्रस्ताव था मौजूदा कानून की बड़ी बातें     मौजूदा कानून के तहत, किसी बस्ती को जेजे बस्ती के तौर पर तब मान्यता मिल सकती है जब उसमें कम से कम 50 घर हों और वह कुछ शर्तों को पूरा करती हो     इनमें से एक शर्त यह है कि वह 1 जनवरी, 2006 से मौजूद रही हो, अभी दिल्ली में 675 मान्यता प्राप्त जेजे क्लस्टर हैं     हालांकि अधिकारियों का अनुमान है कि असल संख्या लगभग 750 है     2015 के बाद कई नई बस्तियां बसीं।     जेजे क्लस्टरों में ड्राइवर, घरेलू कामगार, सब्जी बेचने वाले और ऑटो-रिक्शा चलाने वाले जैसे हजारों कामकाजी लोग रहते हैं, जो शहर की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। पुनर्वास के लिए कट-ऑफ तारीख अब 2025 19 साल की इस समय-सीमा को बढ़ाने का मकसद पात्रता और तय शर्तों के आधार पर, बड़ी संख्या में नई बस्तियों को कानूनी पुनर्वास ढांचे के दायरे में लाना है। प्रस्तावित कट-ऑफ तारीख अब 2025 होने के कारण, अधिकारियों को उम्मीद है कि जिन बस्तियों और घरों का आकलन किया जाना है, उनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी।  

8 लोगों की हत्या के दोषियों की रिहाई पर SC में सुनवाई पूरी, सोनिया और संजीव की किस्मत पर फैसला सुरक्षित

हिसार  पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के आठ सदस्यों की हत्या मामले में दोषी करार दिए गए सोनिया व संजीव कुमार की समय पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। पीड़ित परिवार के सदस्यों की तरफ से दायर याचिकाओं में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से दिसंबर 2025 में दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत दोषियों की समयपूर्व रिहाई के मामले पर पुनर्विचार करने और उन्हें अंतरिम जमानत देने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता आईना वर्मा खोवाल और लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि सुनवाई के दौरान दोषियों के अपराध की गंभीरता, जेल में उनके आचरण, सुधार की वास्तविक स्थिति और समयपूर्व रिहाई से जुड़े विभिन्न पहलुओं को न्यायालय के समक्ष रखा गया। उन्होंने बताया कि न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि केवल लंबे समय तक कारावास में रहने अथवा हाल के कुछ वर्षों के आचरण के आधार पर समयपूर्व रिहाई का अधिकार स्वतः उत्पन्न नहीं होता। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने भी मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने और उसके बाद दोषियों की रिहाई से जुड़े व्यापक प्रश्न पर गंभीर टिप्पणी की। माफ कर देने वाले स्वभाव के कारण बढ़ रहे अपराध: सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के माफ करने वाला स्वभाव के कारण देश आज अपराधों की स्थिति का सामना कर रहा है और इस क्षमाशील रवैये की भी कहीं न कहीं सीमा तय होनी चाहिए। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। यह है मामला वर्ष 2001 में रेलूराम परिवार के आठ सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें तीन नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। मृतकों में एक बच्ची की उम्र लगभग डेढ़ माह थी यह है मामला वर्ष 2001 मेंरेलूराम परिवार के आठ सदस्यों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें तीन नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। मृतकों में एक बच्ची की उम्र लगभग डेढ़ माह थी।

अरावली की परिभाषा और खनन पर होगी पड़ताल, 11 से 13 अक्टूबर तक वागड़ में रहेगी सुप्रीम कोर्ट की कमेटी

 जयपुर अरावली हिल्स और रेंज की परिभाषा, पारिस्थितिक स्थिति और संरक्षण से जुड़े मामलों की पड़ताल के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) एक बार फिर राजस्थान के दौरे पर आ रही है। गुजरात के अरावली क्षेत्र का दौरा करने के बाद कमेटी 11 से 13 अक्टूबर तक डूंगरपुर और बांसवाड़ा में रहेगी। इस बार फोकस वागड़ के उन इलाकों पर है, जहां पहाड़ियों, जंगल, खनन और स्थानीय लोगों, खासकर आदिवासी समुदायों की आजीविका के बीच सीधा संबंध है। क्यों बनी कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई, 2026 के आदेश में आइसीएफआरई के महानिदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एचपीसी गठित की थी। इसका मकसद पहले तैयार की गई अरावली की परिभाषा और उसके आधार पर होने वाले सीमांकन का स्वतंत्र और विशेषज्ञ मूल्यांकन करना है। दोनों जिलों में सरकार ने लगाया पूरा प्रशासन कमेटी के दौरे को लेकर राज्य सरकार ने भी संबंधित अधिकारियों को लगाया है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को फील्ड कोऑर्डिनेटर के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जबकि डूंगरपुर और बांसवाड़ा के उप वन संरक्षक और फील्ड स्टाफ कमेटी के साथ रहेंगे। रिपोर्ट पेश करेगी कमेटी कमेटी पहले भी राजस्थान के पांच दिवसीय दौरे पर आ चुकी है। उस दौरान विभिन्न स्थानों पर फील्ड विजिट और हितधारकों से संवाद किया गया था, लेकिन सभी संबंधित पक्षों, विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों की पर्याप्त भागीदारी नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में दोबारा जमीनी पड़ताल और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद की मांग उठी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 7 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया कि कमेटी को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत सभी संबंधित हितधारकों को अपनी बात रखने का उचित अवसर देना होगा। कोर्ट ने कमेटी को 30 नवंबर, 2026 तक व्यापक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जमीनी तथ्य जुटाकर तैयार होगी रिपोर्ट राजस्थान के इस दौरे में कमेटी चयनित स्थलों पर खनन, क्वारी, स्टोन क्रशर, भूमि उपयोग, वन क्षेत्र, जलस्रोत और आसपास के पर्यावरणीय परिदृश्य का आकलन करेगी। जिलों में शाम को होने वाली बैठकों में पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों, खनन पट्टाधारकों, ग्रामीणों, किसानों, श्रमिकों और आदिवासी समुदायों समेत अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। 11 को डूंगरपुर और 12 को बांसवाड़ा हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) 8 से 10 अक्टूबर तक गुजरात के अरावली क्षेत्रों का दौरा करेगी। 11 अक्टूबर को दक्षिणी राजस्थान में प्रवेश के बाद डूंगरपुर जिले के पालदेवल-सरकन क्षेत्र में फील्ड विजिट होगी। इसके बाद 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा जिले के केवड़िया-कोठारा क्षेत्र में पड़ताल की जाएगी। शाम को संबंधित हितधारकों से संवाद होगा। दोनों दिन शाम को करीब तीन घंटे तक स्थानीय लोगों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होगी।

रांची एयरपोर्ट पर पार्किंग व्यवस्था बदलेगी, अब ऑटोमेटेड सिस्टम से कटेगा शुल्क; कतारों से मिलेगी राहत

 रांची बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर वाहन पार्किंग के नाम पर मनमानी शुल्क वसूली और निकासी के दौरान लगने वाली कतारों से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) एयरपोर्ट की पार्किंग व्यवस्था को ऑटोमेटेड बनाने की तैयारी में है। इसके लिए नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नई एजेंसी पार्किंग प्रबंधन के साथ ऑटोमेटेड सिस्टम से पार्किंग और पिकअप लेन शुल्क की वसूली करेगी। इससे वाहनों के प्रवेश और निकासी का समय दर्ज होगा। निर्धारित अवधि के आधार पर शुल्क की गणना होने से अधिक वसूली की शिकायतों पर अंकुश लगने की उम्मीद है। शुल्क को लेकर विवाद होंगे कम ऑटोमेटेड पार्किंग व्यवस्था लागू होने से वाहन चालकों को सबसे अधिक फायदा शुल्क वसूली में पारदर्शिता का मिलेगा। वाहन कितने बजे एयरपोर्ट परिसर में दाखिल हुआ और कब बाहर निकला, इसका रिकार्ड उपलब्ध रहेगा। इससे निर्धारित निशुल्क अवधि और पार्किंग शुल्क को लेकर होने वाले विवाद कम हो सकते हैं। साथ ही शुल्क भुगतान और निकासी की प्रक्रिया तेज होने से वाहनों की कतार घटने की उम्मीद है। पांच साल के लिए नई एजेंसी की तलाश एएआई ने 14 सितंबर को पार्किंग प्रबंधन के लिए निविदा निकाली थी। अनुबंध की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। निविदा जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दी गई है, जबकि तकनीकी निविदा 13 अक्टूबर को खोली जाएगी। वर्तमान एजेंसी ने कही थी पार्किंग छोड़ने की बात इधर, वर्तमान पार्किंग एजेंसी ने भी पार्किंग संचालन छोड़ने की बात कही थी। ऐसे में नई निविदा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, वर्तमान एजेंसी कब तक संचालन करेगी और नई एजेंसी कब कार्यभार संभालेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शुल्क वसूली में कितनी पारदर्शिता आएगी और एयरपोर्ट परिसर में वाहनों की आवाजाही कितनी सुगम होगी। नई एजेंसी को पार्किंग प्रबंधन के साथ वाहनों से पार्किंग और पिकअप लेन शुल्क वसूलने की जिम्मेदारी मिलेगी। इसके लिए ऑटोमेटेड व्हीकल पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम लगाना और उसका संचालन करना होगा।

दशहरा पर पटना प्रशासन अलर्ट, रात 10 बजे से लाउडस्पीकर पर रोक; विसर्जन जुलूसों की होगी वीडियोग्राफी

पटना दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण,सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए पटना जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। पंडालों का फायर ऑडिट और सीसीटीवी लगाना अनिवार्य है तो विसर्जन जुलूसों की ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई जाएगी। पटना डीएम कुंदन कुमार ने विधि-व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और विसर्जन कार्यक्रमों के सुचारू संचालन को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी करते कहा कि कानून-व्यवस्था पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी है। दुर्गा पूजा जनभागीदारी का बड़ा पर्व है। इसमें कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्व के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी व संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता बरतनी है। शांति समिति की बैठक अनिवार्य रूप से कराएं डीएम ने सभी थानाध्यक्षों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने-अपने क्षेत्रों में दुर्गा पूजा को लेकर शांति समिति की बैठक अनिवार्य रूप से करा लें। पूजा समितियों और स्थानीय लोगों से निरंतर संवाद कर उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाए। पूजा पंडाल का लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। पूजा समितियों को लाइसेंस की सभी शर्तों से अवगत कराने के साथ उन्हें पढ़कर सुनाना भी है। विसर्जन जुलूस में शामिल जिम्मेदार व्यक्तियों और आयोजकों के नाम व पहचान दस्तावेज नियमानुसार दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। मेन प्वाइंट्स ● लाउडस्पीकर का उपयोग लाइसेंस के साथ होगा और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंधित रहेगा ● विसर्जन जुलूसों की ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई जाएगी ● संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा सोशल मीडिया पर पैनी नजर सोशल मीडिया पर पैनी नजर, जबरन चंदा वसूली पर रोक के अलावा लाउडस्पीकर का उपयोग लाइसेंस के साथ ही होगा और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंधित रहेगा। सोशल मीडिया पर अफवाह, भ्रामक सूचना और धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाली पोस्ट करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। जबरन चंदा वसूली पर भी पूरी तरह रोक लगाना है। बैठक में पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा ने कहा कि सभी अधिकारी अपने ड्यूटी स्थलों पर पूरी मुस्तैदी से तैनात रहें। सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा सभी पूजा पंडालों में अग्नि सुरक्षा, बिजली व्यवस्था, सुरक्षित वायरिंग, प्रवेश-निकास के रास्ते और अन्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। बड़े और महत्वपूर्ण पंडालों का फायर ऑडिट कराना और पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। भीड़ नियंत्रण के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग, सुगम प्रवेश-निकास और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। मूर्ति विसर्जन के लिए चिह्नित कृत्रिम घाटों और तालाबों पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी। सभी विसर्जन स्थलों पर रोशनी, मजबूत बैरिकेडिंग, गोताखोर, बचाव दल और आपदा प्रबंधन से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता रहेगी। विसर्जन जुलूसों की ड्रोन से वीडियोग्राफी होगी। जुलूस के निर्धारित मार्ग, समय और शर्तों का सख्ती से पालन कराना होगा।

विराट कोहली पर बयान से बढ़ा विवाद, फलाहारी बाबा ने मांगी माफी; प्रेमानंद महाराज आश्रम लौटे

लखनऊ दावन के संत प्रेमानंद महाराज अपने शिष्य रसिक दुलारी की मौत और उसे लेकर चल रही चर्चाओं के बीच 14 दिन बाद गुरुवार को अपने आश्रम पहुंचे। उनके पहुंचने की खबर मिलते ही दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ जुट गई। प्रेमानंद अपने राधा केलि कुंज आश्रम और गुरु स्थान पर करीब आधा घंटे रुकने के बाद फिर से यमुनापार के लिए रवाना हो गए। वहीं, प्रेमानंद को लेकर क्रिकेटर विराट कोहली को विवाद में घसीटने वाले फलाहारी बाबा बैकफुट पर आ गए। उन्होंने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है। पिछले शुक्रवार को प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी ने आश्रम की इमारत से कूदकर जान दे दी थी। उनकी मौत के बाद सनसनी इसलिए ज्यादा फैली क्योंकि रसिक दुलारी का प्राइवेट पार्ट भी कटा हुआ था। पुलिस जांच के लिए पहुंची तो कमरे में प्राइवेट पार्ट का टुकड़ा और काटने में इस्तेमाल कटर भी मिला था। इसके बाद से कई तरह के रहस्य गहरा गए थे। मौत से संबंधित कुछ सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए। इसमें आत्महत्या करते रसिक दुलारी दिखाई दिए लेकिन प्राइवेट पार्ट कटने का राज सामने नहीं आया। इसी के बाद से तरह तरह की चर्चाएं तैरने लगीं। आश्रम देश दुनिया में सुर्खियों में आ गया। इसी बीच गुरुवार की सुबह करीब साढ़े पांच बजे संत प्रेमानंद महाराज अचानक राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचे। करीब 20 मिनट तक आश्रम में रहकर श्री जी के दर्शन कर पूजा अर्चना की। उसके बाद अपने प्रमुख शिष्यों के साथ वारहा घाट स्थित गुरु गौरांगी शरण महाराज के आश्रम पहुंचे और एकांत ध्यान किया। गुरुजी से आशीर्वाद लेने के बाद करीब छह बजे फिर से यमुनापार स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम के लिए रवाना हो गए। इस दौरान भक्तों की भीड़ उनकी एक झलक पाने के लिए इकट्ठा हो गई। जिन्हें महाराज के शिष्यों ने बमुश्किल काबू किया। इसके बाद संत प्रेमानंद महाराज ने यमुना विहार कुंज आश्रम पहुंचकर प्रवचन भी दिए। संतों के विरोध के बाद बैकफुट पर फलाहारी महाराज उधर, विराट कोहली को लेकर प्रेमानंद महाराज और उनके आश्रम पर आरोप लगाने वाले श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण के एक पक्षकार दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी महाराज ने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है। फलाहारी महाराज ने एक बयान जारी कर कहा था कि प्रेमानंद महाराज के आश्राम आने के लिए विराट कोहली को पांच करोड़ रुपए दिए गए थे। दावा किया था कि राजस्थान की एक निजी कंपनी ने विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के आश्रम तक लाने के लिए यह रुपये खर्च किए थे। इन आरोपों के बाद मथुरा-वृंदावन के संतों ने फलाहारी बाबा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। सिद्ध पीठ हनुमान टेकरी पर संत समाज ने बैठक कर फलाहारी महाराज का सामाजिक और धार्मिक बहिष्कार करने की घोषणा की थी। साथ ही भविष्य में किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित नहीं करने का निर्णय लिया था। माना जा रहा है कि संतों के इसी कदम के बाद फलाहारी बाबा बैकफुट पर आए हैं। अब माफी मांगते हुए फलाहारी महाराज ने कहा कि मैंने आज तक प्रेमानंद महाराज जी के लिए एक शब्द नहीं बोला, मैं पूज्य महाराज जी से माफ़ी मांगता हूं। कहा कि उनके बयान को मीडिया में गलत तरीके से पेश किया गया है। यह भी दावा किया कि इस मामले पर उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

भारत-वेस्टइंडीज दूसरा T20 आज रांची में, टीम इंडिया का पलड़ा भारी; घरेलू मैदान पर जीत का रिकॉर्ड दमदार

नई दिल्ली भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शुक्रवार को रांची के जेएससीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। सीरीज का आगाज धमाकेदार जीत के साथ करने के बाद टीम इंडिया अपनी बढ़त को दोगुना करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। आइए आपको बताते हैं कि रांची में कैसा रहा है भारतीय टीम का टी20 में रिकॉर्ड। टीम इंडिया के नाम चार मैच में तीन जीत टीम इंडिया ने रांची के इस मैदान पर अब तक कुल चार टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं। इस दौरान टीम को तीन मुकाबलों में जीत नसीब हुई है, जबकि एक मैच में हार का सामना करना पड़ा है। भारतीय टीम ने यहां पर अपना आखिरी मैच साल 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इस मुकाबले में टीम इंडिया को 21 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। इससे पहले, 2021 में भारत ने इस ग्राउंड पर न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराया था। वहीं, 2017 में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रांची में 9 विकेट से जीत दर्ज की थी। 2016 में टीम श्रीलंका को 69 रनों से हराने में भी सफल रही थी। वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 में पलड़ा भारी भारत और वेस्टइंडीज के बीच क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में अब तक कुल 32 मुकाबले खेले गए हैं। इसमें से 21 मैचों में टीम इंडिया ने जीत दर्ज की है, जबकि 10 मुकाबलों में कैरेबियाई टीम ने बाजी मारी है। सीरीज के पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम का प्रदर्शन रहा था। पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की पूरी टीम 171 रन बनाकर ऑलआउट हुई थी। टीम की ओर से कप्तान शाई होप ने 37 गेंदों में 52 रनों की दमदार पारी खेली थी, जबकि शेरफेन रदरफोर्ड ने 34 गेंदों में 6 चौके और 3 छक्कों की मदद से 56 रन बनाए थे। श्रेयस अय्यर ने तूफानी शतक ठोका था टीम इंडिया ने 172 रनों के लक्ष्य को आसानी से सिर्फ 14.4 ओवर में 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया था। कप्तान श्रेयस अय्यर बेहतरीन फॉर्म में नजर आए थे और उन्होंने अपने टी20 इंटरनेशनल करियर का पहला शतक लगाया था। अय्यर ने 43 गेंदों में 102 रनों की नाबाद पारी खेली थी। भारतीय टी20 कप्तान ने अपनी इस पारी में 10 चौके और 6 छक्के लगाए थे। वहीं, ईशान किश 37 रन बनाकर नाबाद रहे थे।