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संपत्ति रजिस्ट्री में अब नहीं होगी परेशानी, Sampada 2.0 के नए नियम लागू

भोपाल  संपदा 2.0 पोर्टल में घर बैठे रजिस्ट्री (online registry) को सुरक्षित करने बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। खासतौर पर वीडियो केवाईसी सॉल्यूशन को अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाने यूजर लाइवनेस प्रयास, नॉन इंटरएक्टिव वीडियो में डॉक्यूमेंट कैप्चर करने जैसे नियमों को बदला गया है, ताकि वास्तविक व्यक्ति ही पंजीयन में शामिल हो। इसके लिए बकायदा एक एजेंसी को हायर किया जा रहा है। अगले दो से तीन माह में नए बदलाव के साथ संपदा 2.0 में घर बैठे पंजीयन की सुविधा में बेहतर तरीके से नजर आएगी। गौरतलब है कि पोर्टल (property Registry) से नागरिक घर बैठे ऑनलाइन भुगतान, ई-स्टांपिंग और संपत्तियों का पंजीकरण आसानी से कर सकते हैं। इस नए सिस्टम में लॉग-इन, डिजिलॉकर एकीकरण, दस्तावेज ड्राफ्टिंग, और वीडियो केवाईसी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। दस्तावेज के सत्यापन और बेहतर होंगे (Sampada 2.0) -यूजर लाइवेनेस के अधिकतम प्रयासों को तीन से घटाकर 2 कर दिया है।  समय बचाने नॉन-इंटरैक्टिव वीडियो केवाईसी वर्क फ्लो से सीधे डॉक्यूमेंट कैप्चर (Sampada 2.0) करने के एक स्टेप को हटा दिया गया है। – धोखाधड़ी रोकने के लिए सिस्टम यूजर की लाइव फोटो का मिलान, अपलोड किए गए दस्तावेज और डेटाबेस में मौजूद इमेज के साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर करेगा। -चेहरे से सिस्टम दिए गए आधार दस्तावेज और रिकॉर्ड में दर्ज आधार दस्तावेज (Sampada 2.0) का मिलान कर यूजर की पहचान सुनिश्चित कर लेगा। -नए नियमों के तहत डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और आधार नियमों का कड़ाई से पालन करने अब किसी भी यूजर के बायोमेट्रिक डेटा या चेहरे की पहचान से जुड़े डेटा का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। – तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद मध्य प्रदेश के नागरिकों को जमीनों और संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया बेहद सुरक्षित और उंगलियों पर उपलब्ध होगी। अधिक सुरक्षित और सरल संपदा 2.0 (Sampada 2.0) में वीडियो ई-केवायसी (e-KYC)को अधिक सुरक्षित और सरल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स टीम तय की जा रही है। -स्वप्रेश शर्मा, जिला पंजीयक

Higher Education Reform: AI और डिजिटल जांच पर फोकस, छात्रों के मूल्यांकन में होंगे बड़े बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आने वाले समय में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का फोकस अब एआई आधारित शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान पर है। हालही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन बदलावों की रूपरेखा पर मंथन किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में देखने को मिल सकता है। विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में काम कर रहा है। इसके लागू होने के बाद कॉपियों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय होने की उम्मीद है। इससे परिणामों में देरी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आ सकती है।  परीक्षा पैटर्न में बदलाव के संकेत उच्च शिक्षा विभाग वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा भी कर रहा है। अभी 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा का प्रावधान है, लेकिन इसे 40:60 करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य और कक्षा में सहभागिता को अधिक महत्व मिलेगा। कॉलेजों में बढ़ेगा एआई का दायरा विभाग एआई को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। महाविद्यालयों में  एआईसे जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी नई तकनीकों को समझ सकें और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। साथ ही एआई टूल्स के जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। हर विद्यार्थी की बनेगी डिजिटल पहचान विद्यार्थियों के लिए  अपार आईडी तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके जरिए छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे प्रवेश, अंकसूची, प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं आसान हो सकेंगी। मोबाइल ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे कॉलेजों में उपस्थिति की निगरानी आसान होगी और कक्षाओं में नियमित सहभागिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारतीय भाषाओं में भी मिलेगा पढ़ाई का विकल्प नई शिक्षा नीति के तहत तेलुगु, तमिल, मराठी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रयास उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का भी सशक्त साधन है। विभाग का लक्ष्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाई जा सके। 

यूपी में रोजगार और पर्यावरण पर बड़ा फोकस, 5 से 21 जून तक चलेगा विशेष कार्यक्रम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बड़ा अभियान चलाने जा रही है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग प्रदेश में पांच से 21 जून तक '12 साल विश्वास के, विकास के' जनकल्याण अभियान चलाएगा। अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण, श्रमिक कल्याण योजनाओं के प्रचार, रोजगार सेवाओं, ईएसआई कवरेज विस्तार और योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसकी तैयारियों को लेकर मंगलवार को योगी सरकार में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को विस्तृत निर्देश दिए गए। श्रम मंत्री ने निर्देश दिए कि पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर विभागीय कार्यालयों, अटल आवासीय विद्यालयों, विहान विद्यालयों तथा ईएसआई अस्पतालों में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान चलाया जाएगा। परिसर को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए विशेष अभियान भी संचालित होगा। आठ से 14 जून तक विशेष जनसंपर्क अभियान के तहत श्रम संहिताओं, श्रमिक समस्याओं और ईएसआई सेवाओं पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानकारी देने के लिए शिविर लगाए जाएंगे पात्र श्रमिकों को ईएसआई योजना से जोड़ने और योजनाओं की जानकारी देने के लिए शिविर लगाए जाएंगे। इसी अवधि में जनकल्याण मेले आयोजित कर रोजगार संगम पोर्टल, सेवामित्र योजना, विदेशों में रोजगार के अवसर और बाल श्रम उन्मूलन अभियान की जानकारी दी जाएगी। श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। 17 से 20 जून तक विभागीय योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जबकि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सभी कार्यालयों, अस्पतालों और फैक्ट्रियों में योग कार्यक्रम आयोजित होंगे। बैठक में प्रमुख सचिव डा. एमके शन्मुगा सुंदरम, विशेष सचिव, अपर श्रमायुक्त, सेवायोजन निदेशक, कर्मचारी राज्य बीमा योजना के निदेशक, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड और असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश भर में 07 जून तक चलेगा विश्व दुग्ध दिवस अभियान वहीं विश्व दुग्ध दिवस’ के अवसर पर प्रदेश भर में 1 से 7 जून तक ‘विश्व दुग्ध दिवस अभियान’ चलाया जा रहा है। सभी गौशालाओं में विशेष जागरूकता अभियान चल रहा है। अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही प्रदेश की सभी गौशालाओं में स्वच्छता, पशु कल्याण, गोसंवर्धन एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, गोसंवर्धन और पशु स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जनजागरूकता पैदा करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

अस्पताल पहुंचने से पहले प्रसव: खरगोन के सार्वजनिक शौचालय में गूंजी नवजात की किलकारी

खरगोन  भीकनगांव बस स्टैंड स्थित एक सार्वजनिक शौचालय में बुधवार सुबह एक गर्भवती महिला ने बच्चे को जन्म दिया। प्राथमिक उपचार के बाद महिला और नवजात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है। भीकनगांव के बीएमओ विजय वर्मा ने बताया कि बुधवार सुबह सूचना मिली थी कि बस स्टैंड के सार्वजनिक शौचालय में एक महिला की डिलीवरी हो गई है। सूचना मिलते ही एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को मौके पर भेजा गया। महिला की पहचान झिरनिया ब्लाक के तेड़ गांव निवासी अनीता के रूप में हुई है। यह उसकी दूसरी डिलीवरी है। वर्मा के अनुसार अनीता को उसके पति अमर सिंह ने मंगलवार को जिला अस्पताल खरगोन में भर्ती कराया था। बाद में वे किसी कारणवश घर लौटने लगे। इसी दौरान भीकनगांव पहुंचने पर महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और उसने बस स्टैंड के सार्वजनिक शौचालय में बच्चे को जन्म दे दिया। उन्होंने बताया कि मौके पर पहुंची स्वास्थ्य टीम ने महिला और नवजात को प्राथमिक उपचार दिया और एंबुलेंस से लगभग 40 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल खरगोन भेजा। महिला ने 1.8 किलोग्राम वजन के बालक को जन्म दिया है। भीकनगांव के शासकीय अस्पताल में नर्सिंग आफिसर व मैटरनिटी इंचार्ज ज्योति पिंडरे ने बताया कि ब्लाॅक मेडिकल ऑफिसर के निर्देश पर स्वास्थ्य दल मौके पर पहुंचा और आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल लाया गया। सिर्फ रेफर किए जाने की बात कही जिला स्वास्थ्य अधिकारी चंद्रजीत सांवले ने बताया कि गर्भवती महिला का गर्भकाल लगभग 32 सप्ताह का था और उसे मंगलवार को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। जांच के दौरान पीलिया और अन्य संभावित जटिलताओं को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ शारदा कनास ने परिजनों को इंदौर रेफर किए जाने की संभावना के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि, रेफरल की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। सांवले ने बताया कि बुधवार सुबह महिला और उसके परिजन बिना अस्पताल को सूचित किए जिला अस्पताल से चले गए।     आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल से एंबुलेंस के माध्यम से उन्हें इंदौर भेजा जाता।     उन्होंने कहा कि भीकनगांव से सूचना मिलते ही महिला और नवजात को जिला अस्पताल रेफर किया गया।     जहां महिला को हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) और नवजात को स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती किया गया है। दोनों की स्थिति फिलहाल स्थिर है।  

सिवान से पटना तक सफर पर बढ़ा खर्च, यात्रियों को अब देने होंगे ज्यादा पैसे

 सिवान  बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने बसों के किराये में बढ़ोतरी कर दी है। अब साधारण से लेकर डीलक्स बसों में सफर करना महंगा हो गया है। 2021 की तुलना में अब यात्रियों को 15 प्रतिशत अधिक पैसे देने होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीलक्स बसों से सिवान से पटना (वाया छपरा) का सफर पहले 213 रुपये में होता था, अब उसे लिए यात्रियों को 245 रुपये देने होंगे। इसी प्रकार लग्जरी बसों का किराया भी काफी बढ़ गया है। किराये में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। ऐसे में छपरा, हाजीपुर, पटना आने-जाने वाले यात्रियों का मासिक बजट बिगड़ना तय माना जा रहा है। बता दें कि डीजल और स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इससे निगम को लगातार हीं आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। डीलक्स बस से सिवान से छपरा के लिए लगेगा 114 रुपये किराया गौर करने वाली बात है कि डीलक्स बस से सिवान से दारौंदा के लिए पहले 30 रुपये किराया देना पड़ता था, जो अब बढ़कर 35 रुपये हो गया है। एकमा के लिए पहले 50 रुपये और अब 58 रुपये, छपरा के लिए पहले 98 रुपये और अब 114 रुपये, शीतलपुर के लिए 154 रुपये और अब 181 रुपये तथा हाजीपुर के लिए पहले 186 रुपये और अब 219 रुपये किराया देना होगा। इसी प्रकार पटना से हाजीपुर तक सफर के लिए 58 रुपये, शीतलपुर के लिए 91 रुपये, छपरा के लिए 148 रुपये, एकमा के लिए 200 रुपये तथा सिवान के लिए 245 रुपये किराया देना होगा। पीपीपी मोड में चलने वाली गाड़ियों पर भी लागू होगा किराया गौर करने वाली बात है कि किराया में यह बढ़ोतरी केवल निगम की अपनी बसों के लिए हीं नहीं हैं, बल्कि लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) योजना के तहत चलने वाली सभी निजी बसों पर भी यहीं किराया लागू होगा। इस नए आदेश के जारी होने के साथ हीं किराये से संबंधित पूर्व में निर्गत सभी आदेश व नियम अब संशोधित माने जाएंगे। वहीं निजी बसों का किराया ट्रांसपोर्टरों की आगामी दिनों में होने वाली बैठक के बाद बढ़ने की संभावना है। शहर के मजहरूल हक बस स्टैंड स्थित सरकारी बस डिपो से मिली जानकारी के अनुसार, सिवान से छपरा होते हुए पटना जाने के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की कुल पांच बसें चलाई जाती है। इसमें से एक बस में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण उसका परिचालन पूरी तरह से बंद है। ऐसे में वर्तमान समय में चार बसें अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं। पदाधिकारियों की मानें तो पहली बस सुबह पांच बजे पटना के लिए रवाना होती है, जो पटना से दोपहर 12.20 बजे यात्रियों को लेकर लौटती है। वहीं, दूसरी बस दोपहर 12.20 बजे व तीसरी बस दोपहर 1.20 बजे पटना जाती है। वहीं पटना से शाम पांच बजे व 5.30 बजे वापसी करती हैं।  

NFHS-6 रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश में शराब और तंबाकू सेवन बढ़ा, गांवों में ज्यादा असर

लखनऊ यूं तो देश के कई राज्यों में शराब के शौकीनों की संख्या बहुत अधिक है। मगर यूपी में शराब पीने वालों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट इसकी गवाही दे रही है। यह बढ़ोतरी 4.2 फीसदी की है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले में गिरावट आई है। यूपी में शहरों से ज्यादा गांवों में शराब पीने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। खास बात यह है कि प्रदेश में शराब की शौकीन महिलाओं का आंकड़ा स्थिर बना हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में शराब पीने की प्रवृत्ति में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। एनएफएचएस-5 में प्रदेश में 15 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या 14.5 प्रतिशत थी। वहीं एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट बताती है कि यूपी के पुरुषों में यह आंकड़ा बढ़कर 18.7 फीसदी हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। यह वृद्धि देश में सर्वाधिक है। महिलाओं में नहीं बढ़ी शराब की लत जबकि महिलाओं के मामले में यूपी की स्थिति यथावत बनी हुई है यानि 2019 से 2021 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 0.3 फीसदी था, जो 2023-24 की रिपोर्ट में भी जस का तस है। वहीं यदि राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो देश में शराब के शौकीन पुरुषों की संख्या 18.9 फीसदी से घटकर 18.7 प्रतिशत हो गई है जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 1.3 फीसदी से घटकर 1.1 फीसदी पर आ गया है। राष्ट्रीय स्तर पर शराब पीने वालों के आंकड़े देखें तो अरुणाचल प्रदेश के पुरुष और महिलाएं इस फेहरिस्त में शीर्ष पर हैं। शराब पीने के मामले में देश के पांच शीर्ष राज्यों की स्थिति राज्य पुरुष महिलाएं अरुणाचल प्रदेश- 50.2 फीसदी 23.2 फीसदी तेलंगाना- 43.9 फीसदी 7.1 फीसदी सिक्किम- 42.2 फीसदी 19.9 फीसदी हिमाचल प्रदेश- 30.2 फीसदी 0.6 फीसदी उत्तराखंड- 27.2 फीसदी 0.3 फीसदी देश में घटे पर यूपी में बढ़े तंबाकू खाने वाले स्त्री-पुरुष यूपी में तंबाकू खाने वालों की बात करें तो पुरुष और महिलाओं दोनों में ही इसकी लत बढ़ी है। खासतौर से ग्रामीणों में यह बढ़ोत्तरी अधिक देखी गई है। प्रदेश में 15 साल से अधिक आयु की तंबाकू का सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या वर्ष 2023-24 में 9.6 फीसदी रही। यह पहले 8.5 प्रतिशत थी। वहीं इसी आयु वर्ग के तंबाकू खाने वाले पुरुषों का आंकड़ा 45.2 फीसदी है, जो इशारा करता है कि लगभग हर दूसरा व्यक्ति तंबाकू या उससे जुड़े उत्पादों का सेवन करता है। पुरुषों में पहले यह 44.0 फीसदी था। वहीं यदि तंबाकू खाने वालों के राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े देखें तो महिलाओं और पुरुषों में इसमें कमी दर्ज की गई है। तंबाकू खाने वाली महिलाओं की संख्या 2019-21 की तुलना में 2023-24 में 8.9 प्रतिशत से घटकर 8.4 फीसदी रही है। पुरुषों में तंबाकू खाने की लत 38 प्रतिशत से घटकर 36.3 फीसदी रह गई है।

पश्चिम बंगाल कार्रवाई के बाद सीमावर्ती बिहार में चौकसी सख्त, वाहनों की गहन जांच जारी

किशनगंज पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के सहारे निवास कर रहे लोगों के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई का असर अब सीमावर्ती बिहार-नेपाल क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कार्रवाई के दबाव में कुछ संदिग्ध तत्व सीमावर्ती रास्तों का उपयोग कर बिहार और नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए किशनगंज जिले से सटे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया गया है। सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने किशनगंज के लगभग 122 किलोमीटर लंबे भारत-नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट जारी कर दिया है। सीमा पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में वाहनों और यात्रियों की हो रही जांच दिघलबैंक, ठाकुरगंज, गलगलिया, खानीबाड़ी और फतेहपुर सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। सीमा से होकर गुजरने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है, जबकि यात्रियों की पहचान का सत्यापन भी किया जा रहा है। सीमा चौकियों के अलावा वैकल्पिक रास्तों और पगडंडियों पर भी सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। सीमा पार करने के नियम हुए सख्त सुरक्षा कारणों से सीमा पार करने की प्रक्रिया को भी अधिक कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अब केवल आधार कार्ड के आधार पर सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यात्रियों को वोटर पहचान पत्र, पासपोर्ट अथवा अन्य वैध सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। वहीं, बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा। घुसपैठ और तस्करी रोकना प्राथमिकता सीमावर्ती इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। खुली भारत-नेपाल सीमा का लाभ उठाकर घुसपैठ, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं हैं। एसएसबी के सहायक कमांडेंट प्रियरंजन चकमा ने बताया कि सीमा क्षेत्र में गश्त और निगरानी को और मजबूत किया गया है। जवानों को हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है तथा संदिग्ध व्यक्तियों की गहन जांच की जा रही है। आम लोगों से भी सहयोग की अपील सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से भी सतर्क रहने और किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन अथवा सुरक्षा बलों को देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की सतर्कता से भी मजबूत होती है।  

उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने वाले विश्वविद्यालयों को जल्द मिलेगा वेतन-पेंशन का भुगतान

पटना  राज्यपाल सैयद अता हसनैन की सख्ती के बाद राज्य के पांच विश्वविद्यालयों ने पूर्वमें खर्च राशि का हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने 213 करोड़ 34 लाख रुपये का हिसाब नहीं दिया था। तब राज्यपाल ने इस मामले में कुलसचिवों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इन विश्वविद्यालयों ने अपना हिसाब क्लियर करते हुए पूरी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। विश्वविद्यालयों को वेतन-पेंशन में 434.86 करोड़ जल्द मिलेगा इसे महालेखाकार कार्यालय को उपलब्ध करा दिया गया है क्योंकि इस मामले में महालेखाकार कार्यालय से वित्तीय अनियमितता का संदेह जताया था। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित विश्वविद्यालयों की आडिट में कमियों काे भी चिन्हित किया है जिस पर स्पष्टीकरण कुलसचिवों से मांगा गया है। वहीं विभाग द्वारा अगले सप्ताह तक विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मियों के पेंशन मद में तीन माह का वेतन एकमुश्त राशि 434 करोड़ 86 लाख रुपये जारी करने की तैयारी हो रही है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो.एनके अग्रवाल ने अन्य विश्वविद्यालयों से भी खर्च राशि का आडिट रिपोर्ट के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने को कहा है। विभाग के स्तर से महालेखाकार कार्यालय को भेजी गई आडिट रिपोर्ट उन्होंने अक्टूबर, 2021 से नवंबर, 2022 के बीच महालेखाकार द्वारा किए गए आडिट में पायी गयी कमियों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह पांच विश्वविद्यालयों ने सभी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किया है उसी तरह अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी उपयोगिता प्रमाण पत्र जल्द जमा किया जाना चाहिए। उन विश्वविद्यालयों के लिए वेतन और पेंशन के भुगतान के संबंध में, जितनी जल्दी संभव हो, निर्णय लिया जा सकता है, जिनकी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने में लंबित मामलों की दर शून्य प्रतिशत है।

11 से 13 जून तक बनेगा महालक्ष्मी राजयोग, इन 4 राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की विशेष कृपा

 11 जून 2026 से 13 जून 2026 तक मंगल और चंद्रमा की युति से बनने वाला महालक्ष्मी राजयोग बनेगा. यह योग ज्योतिष शास्त्र में बेहद शुभ और धन-समृद्धि देने वाला माना गया है. चंद्रमा को मन और धन का कारक माना जाता है, जबकि मंगल ऊर्जा, भूमि और साहस के प्रतीक हैं. जब ये दोनों एक साथ आते हैं, तो धन के नए मार्ग खुलते हैं. इस बेहद शुभ राजयोग से विशेष रूप से 4 राशियों की किस्मत चमकने वाली है. आइए जानते हैं कि किन राशियों को इससे सबसे ज्यादा लाभ होने जा रहा है. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए यह महालक्ष्मी राजयोग बेहद फलदायी साबित होगा. क्योंकि मंगल आपकी ही राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस समय आपका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा. धन लाभ: रुके हुए धन की प्राप्ति होगी. अगर कहीं पैसा फंसा था, तो वह वापस मिल सकता है. करियर व व्यापार: नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी या पदोन्नति मिल सकती है. व्यापार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. विशेष: भूमि या वाहन खरीदने के योग बनेंगे. 2. कर्क राशि (Cancer) चंद्रमा कर्क राशि के स्वामी हैं, इसलिए मंगल के साथ उनकी यह युति आपके लिए आर्थिक मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी लेकर आ रही है. आर्थिक पक्ष: आपकी इनकम के सोर्स बढ़ेंगे. आकस्मिक धन लाभ (अचानक पैसा मिलना) के प्रबल योग हैं. पारिवारिक जीवन: परिवार में सुख-शांति रहेगी और पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है. निवेश: इस अवधि में किया गया निवेश भविष्य में बड़ा मुनाफा देगा. 3. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए महालक्ष्मी राजयोग भाग्य का पूरा साथ लेकर आ रहा है. आपके सोचे हुए सभी काम इस अवधि में पूरे होने लगेंगे. मान-सम्मान: समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलेगा. करियर: यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं, तो इन तीन दिनों के भीतर कोई अच्छा प्रस्ताव मिल सकता है. व्यापार: जो लोग पार्टनरशिप में बिजनेस करते हैं, उन्हें अच्छा मुनाफा होगा. 4. वृश्चिक राशि (Scorpio) मंगल की दूसरी स्वराशि वृश्चिक है, इसलिए इस राशि के जातकों पर भी मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसने वाली है. आपकी आर्थिक स्थिति में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा. कर्ज से मुक्ति: अगर आप लंबे समय से कर्ज से परेशान थे, तो उससे राहत पाने का कोई रास्ता साफ होगा. साहस और पराक्रम: आपके निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी, जिससे व्यापार में बड़ा फायदा हो सकता है. करियर: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को कोई शुभ समाचार मिल सकता है.

कोचिंग सेंटर विवाद के बाद बिहार में सियासत गर्म, छात्रों की पढ़ाई पर असर

पटना राजधानी पटना में खान ग्लोबल कोचिंग सेंटर में तोड़फोड़, मारपीट और बवाल की घटना से सभी हैरान हैं। खान सर ने छात्रों से कह दिया है कि कोचिंग सेंटर को अगले आदेश तक बंद रखा जाएगा। इधर अचानक कोचिंग सेंटर बंद होने से कई छात्र परेशान दिखे और खान सर के समर्थन में सड़क पर भी बैठ गए। इस पूरे हो-हंगामे ने सम्राट चौधरी सरकार का भी ध्यान खींचा है। बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस घटना के बाद स्पष्ट तौर से कहा है कि अब राज्य में कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति बनाई जाएगी। शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि सरकार चाहती है कि कोचिंग संस्थानों पर उसका नियंत्रण हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों ताकि छात्रों को परेशानी ना झेलनी पड़े। खान सर के कोचिंग सेंटर में हुई घटना को लेकर शुरू से ही कहा जा रहा है कि यह दो कोचिंग संस्थानों के आपसी वर्चस्व का नतीजा है। खुद खान सर ने पास के ही एक अन्य कोचिंग सेंटर को इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदार बताया। उनका कहना था कि छात्रों से कम फीस लेने की वजह से दूसरे कोचिंग सेंटर वाले नाराज चल रहे थे और उन्होंने पहले धमकी भी दी थी। बहरहाल इस तोड़फोड़ और बवाल के बाद सरकार ने अब सख्त रवैया अपनाने का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने कहा है कि सरकार अगले तीन महीने में कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति बनाएगी। एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कोचिंग सेंटर ये सब जो षड़यंत्र कर रहे हैं वो सब अब बंद हो जाएगा। कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसेंगे। कोचिंग संस्थान सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है। इससे छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो गई है। मंत्री ने आगे कहा कि मंगलवार को कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के मामले में वो खुद डीजीपी से बात करेंगे और पूरे मामले की जांच करवाएंगे। जो भी इसमें दोषी पाया जाएग उसपर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार की सरकार विधि-व्यवस्था के नियंत्रण में जो भी बाधा होगी उसे दूर करेगी। जो गड़बड़ करेगा वो जेल के अंदर रहेगा और जिसने भी यह परिस्थिति उत्पन्न की है उसे पुलिस छोड़ेगी नहीं। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया आपको बता दें कि खान सर के कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के मामले में पुलिस ताबड़तोड़ ऐक्शन ले रही है। अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें एक शख्स एक अन्य कोचिंग सेंटर का डायरेक्टर बताया जा रहा है। पुलिस ने 4 लोगों पर नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। कोचिंग सेंटर पर हमले और तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। इसमें कुछ लोग खान सर के गार्ड की बेरहमी से धुनाई करते और कोचिंग सेंटर पर ईंट फेंकते नजर आ रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई में जुटी हुई है।