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गर्मी में बच्चों की सेहत का ख्याल: डाइट में शामिल करें ये ठंडक देने वाले फूड्स

 गर्मियों में तापमान बढ़ते ही बच्चों और बुजुर्गों के लिए की सेहत का बहुत ख्याल रखना पड़ता है. जैसे-जैसे सूरत की किरणें आग बरसाना शुरू करती हैं, वैसे-वैसे ही इसका असर बच्चों पर देखने को मिलने लगता है. तेज धूप, उमस और गर्म हवाओं की वजह से बच्चे जल्दी थकने लगते हैं, चिड़चिड़े हो जाते हैं और कई बार उनके शरीर में पानी की कमी भी होने लगती है. बाहर खेलते-कूदते समय उनका शरीर बहुत जल्दी ही डिहाइड्रेट होता है, इसलिए इस मौसम में उनकी डाइट सही होना बेहद जरूरी है. ऐसे में माता-पिता की सबसे बड़ी टेंशन ये होती है कि आखिर बच्चों को क्या खिलाया जाए. अगर आप भी प्रचंड गर्मी में बच्चों के लिए ऐसा डाइट चार्ट ढूंढ रहे हैं, जो उन्हें एनर्जी दे, उनके शरीर को ठंड रखे और उनके शरीर में पानी की बिल्कुल भी कमी न होने दे तो ये खबर आपके लिए है. आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो गर्मियों में बच्चों की डाइट में शामिल करना हर माता-पिता के लिए जरूरी है. तरबूज: लिस्ट में सबसे पहला नाम तरबूज का आता है. इसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए ये शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. इसे खाने से बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होती और उन्हें ताजगी महसूस होती है. साथ ही इसमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं. खीरा: खीरा भी गर्मियों में खाना बहुत अच्छा माना जाता है. ये न केवल बड़ों के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी हेल्दी होता है. इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसे सलाद या हल्के नमक के साथ स्नैक की तरह उनकी डाइट में शामिल किया जा सकता है. दही चावल: आप बच्चों की डाइट में दही और चावल भी शामिल कर सकते हैं. दही और चावल का कॉम्बिनेशन तपती गर्मी में काफी राहत देता है. ये पेट को ठंडा रखता है और पाचन भी बेहतर बनाता है. बच्चों को ये खाने में टेस्टी भी लगता है और उनके पेट के लिए हल्वा भी रहता है. नारियल पानी: गर्मी में बच्चे जब खेलते हैं तो उनके शरीर से खूब पसीने बहते हैं, जिसकी वजह से जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं और वो डिहाइड्रेटेड महसूस करते हैं. नारियल पानी इनकी कमी पूरी करने में मदद करता है. इसमें नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो बच्चों को एक्टिव बनाए रखते हैं और पानी की कमी भी पूरी करते हैं. छाछ: छाछ पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और खाना भी आसानी से पचता है. इसमें कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बच्चों की हेल्थ के लिए अच्छे होते हैं. नींबू पानी: आप अपने बच्चों को नींबू पानी भी दे सकते हैं. नींबू पानी बनाकर रख लें और जब भी वो बाहर से खेलकर या स्कूल से वापस आएं तो उन्हें पिला दें. गर्मी में बच्चों के लिए शानदार ड्रिंक है. इसमें विटामिन सी होता है जो शरीर को तरोताजा रखने में मदद करता है. इसे हल्का मीठा बनाकर बच्चों को आसानी से दिया जा सकता है. गुलकंद: गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलकंद शरीर की गर्मी कम करने में मदद करता है. इसे दूध में मिलाकर बच्चों को दिया जा सकता है. ये पेट को भी आराम पहुंचाता है. बेल का शरबत: बेल का फल शरीर को ठंडक देने के लिए जाना जाता है. इसका शरबत बच्चों को गर्मी और लू से बचाने में मदद कर सकता है. साथ ही ये पेट के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. टमाटर: लिस्ट में आखिरी नाम टमाटर का है. इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसे सलाद के रूप में बच्चों की डाइट में शामिल किया जा सकता है. ये शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है.

अंडा, चिकन या मटन: किसका प्रोटीन सबसे जल्दी पचता है? जानें सही जवाब

नॉन-वेजिटेरियन लोग प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए अपनी डाइट में अंडा, चिकन या मटन को शामिल करते हैं. कई लोग दिन भर में 10-20 अंडे, 500-800 ग्राम चिकन मटन खा लेते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तीनों में से कौन सा प्रोटीन आपका पेट सबसे जल्दी और आसानी से पचा पाता है? दरअसल, डाइजेशन के मामले में हर प्रोटीन का असर शरीर पर अलग होता है लेकिन अक्सर लोग ज्यादा प्रोटीन के चक्कर में ऐसा फूड चुन लेते हैं जिसे पचाने में पेट को भारी मेहनत करनी पड़ती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि इन तीनों में से कौन सा प्रोटीन सोर्स सबसे जल्दी पचता है. अंडे के प्रोटीन को समझें हेल्थलाइन के मुताबिक, जब बात सबसे जल्दी और पूरी तरह से पचने वाले प्रोटीन की आती है तो अंडा इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोटीन डाइजेस्टिबिलिटी स्कोर में अंडे को 1.0 रेटिंग मिली है जो सबसे बेस्ट मानी जाती है. इसका मतलब है कि अंडे का प्रोटीन खाने के बाद शरीर इसे बहुत तेजी से और आसानी से तोड़कर अवशोषित कर लेता है. 1 पूरे अंडे को पचने में 2 से 3 घंटे का समय लगता है. चिकन ब्रेस्ट अंडे के बाद चिकन तेजी से डाइजेस्ट होता है. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकन ब्रेस्ट में फैट की मात्रा बहुत कम यानी न के बराबर होती है. लीन मीट होने की वजह से पेट को इसे ब्रेकडाउन करने में अधिक समय नहीं लगता. मटन की तुलना में चिकन काफी हल्का होता है और इसका प्रोटीन डाइजेस्टिबिलिटी स्कोर भी लगभग 1.0 के करीब होता है. यदि आपका डाइजेशन थोड़ा कमजोर भी है तो भी उबला या ग्रिल्ड चिकन पेट पर भारी नहीं पड़ता. चिकन को पूरी तरह पचने में 2.5 से 3.5 घंटे का समय लगता है. मटन पचने में लगती है देरी मटन यानी रेड मीट प्रोटीन का एक बहुत ही रिच सोर्स है लेकिन इसे पचाना सबसे मुश्किल काम है. डाइजेशन टाइमलाइन रिपोर्ट बताती है कि हाई-फैट और कॉम्प्लेक्स मॉलिक्यूल्स वाले रेड मीट जैसे मटन को पूरी तरह पचने में काफी लंबा समय लगता है. मटन में सैचुरेटेड फैट और डेंस मसल्स फाइबर्स होते हैं, जिन्हें तोड़ने के लिए पेट के एसिड और एंजाइम्स को कई घंटों तक लगातार काम करना पड़ता है. इसलिए रात के समय मटन खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. मटन या रेड मीट को पचने में 4 से 6 घंटे या उससे अधिक का समय लग सकता है.

CM रेखा गुप्ता समेत मंत्री घर से कर रहे काम, सचिवालय में पसरा सन्नाटा

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, अधिकारी और कर्मचारी बुधवार को वर्क फ्रॉम होम पर रहे। सिर्फ जरूरी सेवाओं से जुड़े अधिकारी ही दिल्ली सचिवालय में नजर आए। सचिवालय में सन्नाटा पसरा हुआ था। सीएम रेखा गुप्ता बुधवार को खुद वर्क फ्रॉम होम पर रहीं। सिविल लाइंस स्थित जनसेवा सदन के अपने आवास से ही उन्होंने हाइब्रिड मॉडल में बैठकें की। ईंधन बचाने के मकसद से दिल्ली सरकार ने सप्ताह में दो दिन बुधवार व शनिवार को वर्क फ्रॉम होम रखा है। हालांकि इससे जरूरी सेवा से जुड़े कर्मचारियों को बाहर रखा गया है '2 दिन WFH रखें उद्योगपति' सीआईआई दिल्ली स्टेट काउंसिल की बैठक में दिल्ली के पर्यटन, स्किल डिवेलपमेंट, इवेट इंडस्ट्री और उद्योग जगत से जुड़े विभिन्न नीति विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने अपनी चिंताओं और सुझावों को रखा। इस दौरान दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन और आयोजन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार साझा किए। कपिल मिश्रा ने करते हुए उद्योग जगत से सप्ताह में दो या तीन दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की अपील की। सिविल लाइंस स्थित आवास से CM ने हाइब्रिड मॉडल में बैठकें की दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि बुधवार को वर्क फ्रॉम होने के कारण सीएम और मंत्री ने घर से ही काम किया। सीएम ने व्यय-वित्त समिति की बैठक की, जिसमें ज्यादातर अधिकारी घर से ऑनलाइन शामिल हुए। स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बुधवार को अपने घर से ऑनलाइन बैठकें कीं। सीएम रेखा गुप्ता ने सरकार के अलावा निजी कंपनियों से भी सप्ताह में एक से दो दिन वर्क फ्रॉम होम करने की अपील की है।  

गर्मी में ठंडक का शाही उपाय: घर पर बनाएं केसर-पिस्ता शरबत

गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और उमस से राहत पाने के लिए लोग अक्सर मार्केट में मिलने वाले पैक्ड जूस या कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में अगर आप बिना चीनी के कुछ बेहद शाही, पौष्टिक और रिफ्रेशिंग ट्राई करना चाहते हैं तो घर पर बनाएं केसर-पिस्ता का यह खास शरबत. 2 हजार रुपये किलो मिलने वाले प्रीमियम केसर और पिस्ता से तैयार यह होममेड ड्रिंक आपके शरीर को अंदर से AC जैसी ठंडक देगी. यह न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि डायबिटीज के मरीजों और वेट लॉस करने वालों के लिए भी एक बेहतरीन समर ड्रिंक है. आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और क्विक रेसिपी.केसर-पिस्ता शरबत रेसिपी केसर-पिस्ता शरबत बनाने की सामग्री पिस्ता: 1/2 कप (बिना नमक वाले) केसर के धागे: 15-20 (एक चम्मच गुनगुने पानी या दूध में भीगे हुए) दूध: 1 लीटर (लो-फैट या टोंड) हरी इलायची पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच भीगा हुआ बादाम गोंद (Almond Gum): 2 चम्मच (वैकल्पिक, एक्स्ट्रा ठंडक के लिए) मीठे के लिए नेचुरल विकल्प: 1/2 कप धागे वाली मिश्री का पाउडर या शहद/स्टीविया (स्वादानुसार) बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार बनाने का तरीका सबसे पहले पिस्ता को 2 से 3 घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद उनका छिलका उतार लें. छिले हुए पिस्ता को मिक्सी के जार में डालें और थोड़े से ठंडे दूध के साथ पीसकर एकदम स्मूथ और बारीक पेस्ट बना लें. अब एक भारी तले वाले बर्तन में दूध को उबलने के लिए रखें. जब दूध में एक उबाल आ जाए, तो आंच धीमी कर दें और इसमें तैयार किया हुआ पिस्ता का पेस्ट मिला दें. दूध को लगातार चलाते हुए 5-7 मिनट तक पकाएं. अब इसमें भीगा हुआ केसर (रंग और खुशबू के लिए) और हरी इलायची पाउडर डालें. अगर आप धागे वाली मिश्री का इस्तेमाल कर रहे हैं (जो पेट के लिए ठंडी होती है) तो इस स्टेज पर मिला लें. अगर शहद या स्टीविया का उपयोग कर रहे हैं तो दूध के पूरी तरह ठंडा होने के बाद मिलाएं. जब दूध थोड़ा गाढ़ा हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसे रूम टेम्परेचर पर आने दें. इसके बाद शरबत को 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. सर्विंग ग्लास में बर्फ के टुकड़े और भीगा हुआ बादाम गोंद डालें. ऊपर से चिल्ड केसर-पिस्ता शरबत डालकर ठंडे-ठंडे स्वाद का आनंद लें.

शमी का पौधा: घर में लगाने से दूर होते हैं वास्तु दोष और बढ़ती है समृद्धि

 हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शमी का पौधा बहुत ही शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इस पवित्र पौधे में कर्मफल दाता शनि का वास होता है, जो कि भगवान शिव का भी प्रिय है. मान्यता है कि यह पौधा घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है, जिसके रहते नकारात्मक ऊर्जा भी घर से कोसों दूर रहती है. इस पौधे की लकड़ियों का उपयोग अग्नि में किया जाता है ताकि घर का वातावरण शुद्ध रहे और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर घर की शमी के पौधे को सही दिशा लगाए जाए तो यह जातक मालामाल भी कर देता है. वास्तु के अनुसार शमी का सही स्थान 1. इसे घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना शुभ माना जाता है. 2. अगर बाहर निकलते समय यह दाईं ओर पड़े, तो और भी अच्छा फल देता है. 3. उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखना भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. 4. यह पौधा घर के आसपास एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. मान्यता है कि जहां शमी का पौधा हरा-भरा रहता है, वहां वास्तु दोष धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं और घर का माहौल शांत रहता है. धन और तरक्की से जुड़ा है शमी का पौधा वास्तु के अनुसार, शमी का पौधा घर में धन आकर्षित करने वाला माना जाता है. 1. घर में इसे लगाने से आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे कम हो सकती हैं. 2. यह नकारात्मक ऊर्जा को रोककर घर में मां लक्ष्मी जी के आगमन करवाता है. 3. जिन लोगों को कर्ज या पैसों की दिक्कत हो, उनके लिए यह खास लाभकारी माना जाता है. शनिवार के दिन शमी के पौधे के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से रुका हुआ धन मिलने और आय के नए रास्ते खुलने की मान्यता है. घर में कहां रखना चाहिए शमी का पौधा? वास्तु शास्त्र के अनुसार, शमी का पौधा घर के अंदर नहीं रखना चाहिए. इस पौधा को छत या बालकनी में रखना ज्यादा शुभ माना जाता है. इसकी सबसे अच्छी और लाभकारी दिशा दक्षिण मानी जाती है. इसके अलावा, इसको शनिवार के दिन ही लगाना चाहिए और सूरज के सामने इसे भूलकर भी ना रखें. शनि दोष और शमी का उपाय ज्योतिष में शमी का संबंध शनिदेव से बताया गया है. शमी की पूजा करने से शनि का प्रभाव शांत होता है. साढ़ेसाती या ढैय्या में राहत मिल सकती है. इसलिए, हर शनिवार की शाम को इसके पास दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है.

पश्चिमी यूपी में लू का प्रकोप, नौतपा से पहले ही झुलसाने लगी गर्मी

मेरठ यूपी के मेरठ में तेज धूप और लू ने लोगों को झुलसा दिया है। सूरज निकलते ही सुबह से ही आसमान से आग बरसती महसूस हो रही है। बुधवार को दिन चढ़ने के साथ तापमान बढ़ता गया। दोपहर तक हालात इतने खराब हो गए कि सड़क और बाजारों में सन्नाटा रहा। तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक गर्म दिन रहा। 25 मई से गर्मी का प्रकोप नौतपा शुरू होने से पारा और बढ़ेगा। वहीं, जिलाधिकारी ने भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग इन दिनों भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। सुबह से ही ऐसा महसूस होने लगता है जैसे आसमान से आग बरस रही हो। लू के थपेड़ शरीर को झुलसा रहे हैं।  नौतपा का भी 25 मई से आगाज हो जाएगा, ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आसमान से आग बरसेगी। 29 मई को एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। बुधवार का दिन सीजन में सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि वर्तमान में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कहा कि पश्चिमी हवाओं के प्रभाव और साफ आसमान के चलते गर्मी में और इजाफा हो रहा है।    दोपहर के समय लू चलने से स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया है। बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही काफी कम देखने को मिल रही है। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग सिर और चेहरे को ढककर ही निकले। पिछले पांच दिन का तापमान 16 मई- 39.6 17 मई- 41.3 18 मई- 42.4 19 मई- 43.6 20 मई – 44.0 गर्मी और लू के कारण 23 मई तक स्कूलों में अवकाश मेरठ में बढ़ती गर्मी और लू के मद्देनजर जिलाधिकारी वीके सिंह ने 21 से 23 मई तक प्री-प्राइमरी से कक्षा दस तक के सभी बोर्डों के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। जिलाधिकारी ने कहा कि छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।   भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है। अत्यधिक गर्मी के दौरान बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें। पर्याप्त पानी और सावधानियों का ध्यान रखने को कहा गया है। सहारनपुर : 12 साल का टूटा रिकॉर्ड, 44 डिग्री पर पहुंचा पारा सहारनपुर जनपद में गर्मी का 12 साल का रिकॉर्ड टूट गया। बीते 12 वर्षों में 20 मई को अधिकतम तापमान 42 डिग्री से ऊपर नहीं गया था। बुधवार को अधिकतम तापमान 44 व न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मेरठ में भी अधिकतम तापमान 44 डिग्री पर पहुंच गया। बागपत में 43, मुजफ्फरनगर में 42, शामली में 42 और बिजनौर में 41 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।    

चार युगों की अवधारणा: कितनी लंबी है कलयुग की वास्तविक अवधि?

हिंदू धर्म में समय को चार युगों जैसे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग, में बांटा गया है, जिन्हें मिलाकर एक महायुग बनता है. इनमें कलयुग को सबसे अंतिम और नैतिक रूप से सबसे कमजोर युग माना जाता है. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि कलयुग की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद, लगभग 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. इस हिसाब से देखा जाए तो अभी कलयुग का बहुत छोटा हिस्सा ही बीता है और इसका लंबा समय बाकी है. सबसे प्रचलित मान्यता मान्यता के अनुसार, चारों युगों की अवधि इस प्रकार है जैसे सतयुग 17,28,000 वर्ष, त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष, द्वापर युग 8,64,000 वर्ष और कलयुग 4,32,000 वर्ष. इस गणना के अनुसार कलयुग की कुल आयु 4 लाख 32 हजार वर्ष मानी जाती है. यही कारण है कि इसे एक बहुत लंबा और धीरे-धीरे बदलने वाला युग माना गया है, जिसमें समय के साथ धर्म और नैतिकता का ह्रास होता जाता है. 1250 वर्ष वाली मान्यता कुछ पौराणिक मान्यताओं में युगों की अवधि को बहुत छोटे पैमाने पर भी समझाया गया है. इस मत के अनुसार हर युग की अवधि लगभग 1250 वर्ष होती है और इस तरह चारों युगों का पूरा चक्र केवल 5000 वर्षों में पूरा हो जाता है. इस दृष्टिकोण में युगों को प्रतीकात्मक रूप में देखा जाता है, जहां बदलाव अपेक्षाकृत तेजी से होते हैं. कुछ विद्वानों, जैसे परमहंस राजनारायण जी, ने युगों की अवधि को एक अलग तरीके से समझाया है. उनके अनुसार सतयुग 1200 वर्ष, त्रेता 2400 वर्ष, द्वापर 3600 वर्ष और कलयुग 4800 वर्ष का होता है. इस मत में युगों को मानव आधारित समय से जोड़ा गया है, न कि देवताओं के समय से. इससे यह समझने की कोशिश की गई है कि युगों की गणना को अधिक व्यावहारिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी देखा जा सकता है. वैदिक और ज्योतिष दृष्टिकोण वैदिक ग्रंथों में “युग” शब्द का अर्थ हमेशा लाखों वर्षों की अवधि नहीं रहा है. कई जगह इसे समय, काल या दिन-रात के रूप में भी प्रयोग किया गया है. वहीं ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी को राशि मंडल का एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग 25,920 वर्ष लगते हैं, जिसे कुछ विद्वान एक युग चक्र के रूप में भी देखते हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग काल और विद्वानों के अनुसार युग की परिभाषा बदलती रही है. कलयुग का अंत और भगवान कल्कि हिंदू धर्म के अनुसार जब कलयुग में पाप, अधर्म, झूठ और अन्याय अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे, तब भगवान विष्णु का अंतिम अवतार, यानी कल्कि अवतार, प्रकट होगा. मान्यता है कि भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार लिए अवतार लेंगे और पृथ्वी से अधर्म का नाश करेंगे. उनके आगमन के साथ ही कलयुग समाप्त हो जाएगा और एक बार फिर से सतयुग की शुरुआत होगी, जिसे सत्य और धर्म का युग माना जाता है.

गर्मी में पेट के लिए रामबाण: चुकंदर-राई कांजी बनाने की आसान रेसिपी

 उत्तर भारत में चिलचिलाती गर्मी दस्तक दे चुकी है और तेज धूप और लू कहर बनकर लोगों को सता रही है. इस मौसम में अक्सर हमारा पेट सुस्त पड़ जाता है, भूख कम लगती है और कुछ ठंडा-खट्टा पीने का मन करता है. आज के समय में लोग पेट को ठीक रखने के लिए बाजार के महंगे प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स या डिब्बाबंद जूस की तरफ भागते हैं, मगर हमारी रसोई में छुपा एक पुराना खजाना आपकी इस समस्या का रामबाण इलाज है. रसोई में मौजूद कुछ चीजें पेट से जुड़ी बीमारियोंं में बहुत असरदार साबित होती हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. गर्मी में शरबत, जूस के अलावा कांजी भी लोग खूब पीते हैं, लेकिन इस गर्मी आप चुकंदर-राई की कांजी ट्राई कीजिए. यह सिर्फ एक ड्रिंक नहीं है, बल्कि दादी-नानी के जमाने का एक ऐसा पारंपरिक अमृत है, जो टेस्ट में जितना चटपटा है, सेहत के लिए उतना ही वरदान. आइए जानते हैं चुकंदर और राई के पोषण से भरपूर इस देसी प्रोबायोटिक ड्रिंक को बनाने का आसान तरीका. चुकंदर-राई कांजी के लिए आपको यह सारी चीजें लेनी हैं.     काली राई : 2 बड़े चम्मच     पीली सरसों : 1 बड़ा चम्मच     गाजर (लंबे टुकड़ों में कटी हुई): 1 कप     चुकंदर (लंबे टुकड़ों में कटा हुआ): 1 कप     हरी मिर्च: 2 (स्वादानुसार)     हींग: एक चुटकी     काला नमक: 1 ½ छोटा चम्मच     सादा नमक: स्वादानुसार     पानी: 4 कप     सर्विंग के लिए: 2 बड़े चम्मच खारी बूंदी और कुछ ताजी पुदीने की पत्तियां कांजी बनाने का आसान तरीका कांजी बनाने की असली खूबसूरती इसके फर्मेंटेशन में है, अगर आप घर पर देसी स्टाइल में राई वाली कांजी बनाना चाहते हैं तो इन स्टेप्स को जरूर फॉलो करें. मसाला तैयार करें: सबसे पहले काली राई और पीली सरसों को मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें. इसका बारीक पाउडर नहीं बनाना है, क्योंकि दरदरा टेक्सचर ही इसे असली स्वाद देता है. पानी गुनगुना करें: पानी को अच्छी तरह उबाल लें और फिर उसे थोड़ा ठंडा होने दें. पानी गर्म होना चाहिए, लेकिन खौलता हुआ नहीं. जार में सामग्री मिलाएं: एक कांच के साफ और सूखे जार में कटी हुई गाजर, चुकंदर, हरी मिर्च, हींग, काला नमक, सादा नमक और पिसी हुई राई-सरसों का पाउडर डालें. फर्मेंटेशन की शुरुआत: अब इस जार में गुनगुना पानी डालें और चम्मच से अच्छी तरह मिला लें. जार के मुंह को एक साफ मलमल के कपड़े से बांध दें. धूप का जादू: इस जार को दो दिनों के लिए तेज धूप में रख दें. धूप की गर्मी से राई एक्टिव होगी और पानी में खट्टापन आना शुरू होगा. देखभाल: इन दो दिनों के दौरान रोजाना जार को एक बार हिलाएं और अगर ऊपर कोई सफेद झाग या परत दिखे, तो उसे साफ चम्मच से हटा दें. सर्विंग: 2 दिन बाद कांजी का कलर गहरा गुलाबी हो जाएगा और इसमें से एक तीखी-खट्टी खुशबू आने लगेगी. अब इसे फ्रिज में रखकर ठंडा करें, सर्व करते समय ऊपर से कुरकुरी खारी बूंदी और पुदीने की पत्तियां डालें.

जून 2026 में बनेगा ग्रहों का महासंयोग, कई राशियों की बदलेगी किस्मत

 साल 2026 का छठा महीना यानी जून, ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद ऐतिहासिक और चमत्कारी रहने वाला है. इस महीने ब्रह्मांड में ग्रहों की एक ऐसी दुर्लभ जुगलबंदी होने जा रही है, जो कई राशियों की बंद किस्मत के ताले खोल सकती है. जून के महीने में देवगुरु बृहस्पति, धन के दाता शुक्र, ग्रहों के राजा सूर्य, ऊर्जा के कारक मंगल और बुद्धि के प्रदाता बुध का बड़ा गोचर होने जा रहा है. ग्रहों के इस महापरिवर्तन से इस महीने गजलक्ष्मी योग, हंस राजयोग और रूचक राजयोग जैसे 3 सबसे शक्तिशाली और शुभ योगों का निर्माण होगा. इन राजयोगों के प्रभाव से कुछ राशियों को करियर में छप्परफाड़ सफलता, नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में तगड़ा मुनाफा और अचानक धन लाभ होने के प्रबल संकेत हैं. आइए जानते हैं ग्रहों के इस बड़े फेरबदल का मेष से लेकर कर्क राशि तक पर क्या असर पड़ने वाला है. 1. मेष राशि (Aries) – संभलकर चलने का समय मेष राशि वालों के लिए जून 2026 का महीना मिलाजुला रहने वाला है. राहु और केतु की स्थिति के कारण आपके स्वभाव में थोड़ा चिड़चिड़ापन या गुस्सा बढ़ सकता है, जिससे बचने की जरूरत है.  हालांकि, इस दौरान आपका रुझान आध्यात्मिकता और धार्मिक कार्यों की तरफ ज्यादा रहेगा. करियर और बिजनेस: कार्यक्षेत्र में काम का दबाव थोड़ा बढ़ सकता है. मेहनत का पूरा फल मिलने में कुछ देरी हो सकती है, इसलिए सीनियर्स और सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाकर रखें. आर्थिक स्थिति: धन के मामले में हाथ थोड़ा खींचकर चलना होगा. अचानक कुछ बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ सकता है. फिजूलखर्ची से बचें. लव और फैमिली: पार्टनर के साथ छोटी-छोटी बातों पर बहस हो सकती है.  रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए धैर्य रखें. परिवार में भी शांत रहकर बातचीत करें. सेहत: मानसिक तनाव, आंखों में जलन या कमजोरी की समस्या हो सकती है. फिट रहने के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें. 2. वृषभ राशि (Taurus) – चमकेगी किस्मत, होगा बड़ा लाभ वृषभ राशि के जातकों के लिए जून का महीना बेहद सकारात्मक और तरक्की लेकर आने वाला साबित होगा. शनि और देवगुरु बृहस्पति की शुभ स्थिति आपके जीवन में कई बड़े और अच्छे बदलाव लेकर आएगी. करियर और बिजनेस: नौकरीपेशा लोगों को इस महीने करियर के नए और बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं. वहीं, व्यापारियों के लिए कोई बड़ी और फायदेमंद डील फाइनल हो सकती है. काम के सिलसिले में की गई यात्राएं लाभ देंगी. आर्थिक स्थिति: आर्थिक रूप से यह समय शानदार है. अचानक धन लाभ होने और बचत बढ़ने के मजबूत योग हैं, हालांकि घरेलू सुख-सुविधाओं पर कुछ खर्च भी हो सकता है. लव और फैमिली: प्रेम और वैवाहिक जीवन में खुशियां ही खुशियां रहेंगी. पार्टनर के साथ आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा. पारिवारिक माहौल भी बेहद खुशनुमा और सपोर्टिव रहेगा. सेहत: इस महीने आपका आत्मविश्वास और ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा रहेगा. सेहत अच्छी रहेगी, बस खानपान को संतुलित रखें. 3. मिथुन राशि (Gemini) – तरक्की के साथ बढ़ेगा मान-सम्मान मिथुन राशि वालों के लिए जून 2026 का महीना काफी हद तक अनुकूल रहेगा. हालांकि काम की व्यस्तता बढ़ेगी, लेकिन बुध देव की शुभ कृपा से आपकी निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास में गजब का सुधार देखने को मिलेगा. करियर और बिजनेस: कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमेगी. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. बिजनेस में भी नए रास्ते खुलेंगे, लेकिन मानसिक तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें. आर्थिक स्थिति: आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी. पुराने किए गए किसी निवेश या पैतृक संपत्ति से बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. घर की जरूरतों पर खर्च बढ़ सकता है. लव और फैमिली: पार्टनर के साथ रिश्ते मजबूत होंगे, लेकिन अहंकार और गुस्से से दूरी बनाकर रखना बेहद जरूरी है, वरना हंसता-खेलता माहौल बिगड़ सकता है. परिवार में कुछ मतभेद हो सकते हैं, जिन्हें आप समझदारी से सुलझा लेंगे. सेहत: काम की अधिकता के कारण कंधे, गर्दन या पैरों में दर्द की शिकायत हो सकती है. योग और नियमित व्यायाम से शरीर को आराम दें.

संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी

मुगलों द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता, अखिलेश पर संजय निषाद का तीखा हमला संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी फूलन देवी ने आरक्षण मांगा था तो पार्टी से बाहर कर दी गई थीं, वह मार भी दी गईं: संजय निषाद लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। निषाद ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछड़ों का हक मारकर मुगलों द्वारा लाए गए धर्म को आरक्षण देना चाहते हैं। निषाद ने जोर देते हुए कहा कि संविधान सभा ने भी ऐसा करने से मना कर दिया था। संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस ने पीडीए के एजेंडे की पोल खोल दी है। पिछड़ों के अधिकारों पर डांका डालने का काम किया गया है। उन्होंने कहा, 'जब संविधान सभा की बैठक हुई और जब संविधान सभा में आरक्षण की बात आई, उस समय धर्म के आधार पर इसको देना मना कर दिया था क्योंकि जो भारतीय धर्म हैं भारतीय सभ्यता है, उस पर मुगलों ने आक्रमण किया। भारत के ऊपर अंग्रेजों ने आक्रमण किया। तो मुगलों के द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। भीम राव अंबेडकर ने भी इसका विरोध किया था। ' सपा और इंडी गठबंधन पर साधा निशाना संजय निषाद ने सपा और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, ‘इन लोगों ने जस्टिस रंगनाथ मिश्र कमेटी बनाकर ओबीसी आरक्षण में से हिस्सा काटकर मुसलमानों को आरक्षण देने का प्रयास किया था। आंध्र प्रदेश में इनकी दोस्त कांग्रेस ने मुसलमानों को ओबीसी आरक्षण दिया। कर्नाटक में मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल कर पिछड़ों के अधिकारों को कमजोर किया।’ पश्चिम बंगाल का जिक्र पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए निषाद ने कहा,  ‘पश्चिम बंगाल में 118 मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल करके वर्षों तक पिछड़ों के हक पर डकैती डाली। कोलकाता हाई कोर्ट ने इस असंवैधानिक कदम को रद्द किया। जिस तरीके से वहां पिछड़ों के हक पर डकैती डाली गई। उनका आरक्षण मुसलमानों को दिया गया। वहां के लोग एक हुए और वहां की सरकार को हटा दिया।’ निषाद ने कहा ने आगे कहा, ‘यहां पर (यूपी में) भी इंडी गठबंधन मुसलमानों की आवाज तो उठाता है, लेकिन देश को आजाद कराने वाली पिछड़ी और उजड़ी जातियों की आवाज नहीं उठाता। समाजवादी पार्टी का अगर यही रवैया रहा तो जिस तरीके से बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरीके सपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा।’ निषाद ने किया फूलन देवी का जिक्र संजय निषाद ने यह भी कहा कि अन्य जातियों के नेता यह भी सोचें कि उन्हें सपा के समय में क्या मिला? फूलन देवी ने जैसे ही आरक्षण की बात की, किसानों के हक की बात की, उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बाद में वह मारी भी गईं। आप इस अन्याय को समझ सकते हैं। ओबीसी की किसी भी जाति के साथ अन्याय नहीं होगा, ये हमारे एनडीए का संकल्प है। ****