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सामूहिक विवाह योजना से बेटियों को सम्मान, कमजोर परिवारों के लिए मुख्यमंत्री की पहल

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: आर्थिक कमजोर परिवारों को बड़ा सहारा, बेटियों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन योगी सरकार की पहल से सुनिश्चित हुआ प्रदेश की बेटियों का रीति-रिवाज के मुताबिक विवाह  खाने से लेकर जरूरी सामान तक की पूरी व्यवस्था, पारदर्शी प्रक्रिया से मदद सीधे लाभार्थियों तक लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर सामने आई है। योगी सरकार की इस पहल ने प्रदेश की लाखों बेटियों के विवाह को न केवल आसान बनाया है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक तरीके से नई जिंदगी शुरू करने का अवसर भी दिया है। शादी जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक आयोजन में होने वाले भारी खर्च से जूझ रहे परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, योगी सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 76,522 विवाह इस योजना के तहत सम्पन्न करा चुकी है। योगी सरकार की पहल से बढ़ा भरोसा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की शुरुआत वर्ष 2017-18 में की गई थी, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों का सम्मानजनक विवाह सुनिश्चित करना है। योजना के तहत प्रति जोड़े 1 लाख की सहायता दी जाती है। इसमें 60,000 सीधे वधू के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं, जबकि 25,000 के उपहार और आवश्यक सामान तथा 15,000 विवाह आयोजन की व्यवस्था पर खर्च किए जाते हैं। पारदर्शी प्रक्रिया के तहत धनराशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है और लोगों का भरोसा इस योजना पर लगातार बढ़ा है। खाने से लेकर जरूरी सामान तक पूरी व्यवस्था इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि योगी सरकार विवाह की पूरी जिम्मेदारी अपने स्तर पर सुनिश्चित करती है। सामूहिक विवाह समारोह में खान-पान, पंडाल, सजावट और अन्य व्यवस्थाएं सरकारी स्तर पर की जाती हैं। इसके साथ ही नवविवाहित जोड़े को कपड़े, बर्तन, पायल, बिछिया सहित अन्य जरूरी घरेलू सामान भी उपलब्ध कराया जाता है। इन सभी के चीजों लिए रुपये निर्धारित हैं। इससे गरीब परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत मिलती है और वह अपनी बेटियों की शादी बिना किसी तनाव के कर पाते हैं। पारदर्शी प्रक्रिया, सीधे खाते में सहायता योजना की पारदर्शिता इसकी सफलता का प्रमुख आधार है। लाभार्थियों का चयन निर्धारित पात्रता के आधार पर किया जाता है, जिसमें परिवार की वार्षिक आय 3 लाख से कम होना जरूरी है। आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है, जिससे इच्छुक परिवार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। सहायता राशि सीधे वधू के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और लाभ सीधे जरूरतमंद तक पहुंचता है। लाखों बेटियों का हुआ सम्मानजनक विवाह योजना की लोकप्रियता और प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025- 26 में करीब 76,522 विवाह इस योजना के तहत सम्पन्न कराए जा चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना ने प्रदेश के हर वर्ग तक अपनी पहुंच बनाई है और गरीब परिवारों को बड़ी राहत दी है। इससे न केवल आर्थिक सहायता मिली है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है। सामाजिक समरसता को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा दे रही है। सामूहिक विवाह के माध्यम से समाज में समानता और एकता का संदेश दिया जा रहा है। अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोग एक ही मंच पर विवाह कर एक सकारात्मक सामाजिक वातावरण का निर्माण कर रहे हैं। पात्रता और आवेदन प्रक्रिया आसान समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 3 लाख से कम है। लाभार्थी शादी अनुदान पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार योजना से जुड़ सकें।

शपथ से पहले भावुक पल: पिता नीतीश कुमार का पैर छूकर लिया आशीर्वाद

पटना  आखिरकार नीतीश कुमार ने अपने बेटे को सत्ता का सारथी बना दिया। सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल के विस्तार में कुल 31 मंत्रियों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें सबसे अधिक चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की हो रही है। निशांत कुमार की सरकार में डायरेक्ट एंट्री कैबिनेट के तौर पर हो रही है। मंत्री पद की गरिमा संभालने से ठीक पहले निशांत ने अपनी पारिवारिक परंपरा को निभाया। उन्होंने अपने पिता नीतीश कुमार का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान नीतीश कुमार ने भावुक होकर अपने बेटे को गले लगाया निशांत को मिला पिता नीतीश का आशीर्वाद निशांत कुमार ने शपथ ग्रहण समारोह के लिए निकलने से पहले अपने पिता नीतीश कुमार का पैर छूकर अभिवादन किया। नीतीश कुमार ने न केवल उनके सिर पर हाथ रखकर विजयी होने का आशीर्वाद दिया, बल्कि उन्हें गले से भी लगा लिया। पिता-पुत्र के बीच का ये भावुक पल वहां मौजूद सभी लोगों के लिए खास रहा। बेटे को आशीर्वाद देने के बाद नीतीश ने लगाया गले बेटे निशांत को आशीर्वाद देने के बाद नीतीश कुमार गले लगा लिया। जब निशांत आशीर्वाद ले रहे थे, तब वहां पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह सहित जदयू के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। निशांत ने अपने पिता के बाद ललन सिंह के भी पैर छुए, जिस पर ललन सिंह ने उनकी पीठ थपथपाकर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। नीतीश ने संजय झा और ललन सिंह ​से दिलवाया आशीर्वाद फिर नीतीश कुमार ने निशांत को संजय झा और ललन सिंह से भी आशीर्वाद दिलवाया। नई कैबिनेट के गठन में गठबंधन के सभी दलों का ध्यान रखा गया है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली इस नई टीम में भाजपा के 15, जदयू के 13 और चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) के 2 मंत्रियों को स्थान दिया गया है। निशांत कुमार को जदयू कोटे से मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है।  

IPL 2026 का 50वां मैच आज: विराट vs लखनऊ स्पिनर्स, किसका चलेगा जादू?

लखनऊ आईपीएल 2026 में आज मैचों का अर्धशतक पूरा हो जाएगा। लखनऊ सुपर जायंट्स वर्सेस रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु मैच आईपीएल के इस सीजन का 50वां लीग मैच है। यह मैच लखनऊ के लिए काफी अहम है, क्योंकि उन्हें प्लेऑफ्स की रेस में बने रहने के लिए हर एक मुकाबला जीतना है। वहीं, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु यानी आरसीबी चाहेगी कि एक बड़ी जीत के साथ पॉइंट्स टेबल में शीर्ष पर पहुंचा जाए। यही कारण है कि मुकाबला दिलचस्प होगा, क्योंकि यहां से एक हार एलएसजी को टूर्नामेंट से बाहर कर देगी। ऐसे में मुकाबला टक्कर का होगा। इससे पहले जान लीजिए कि लखनऊ की पिच का मिजाज कैसा रहने वाला है? क्या विराट कोहली का बल्ला बोलेगा या फिर लखनऊ सुपर जायंट्स के स्पिनर यहां अपना जादू बिखेरेंगे? लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में अब तक आईपीएल के 26 मुकाबले खेले गए हैं, क्योंकि आईपीएल की टीम ही लखनऊ सुपर जायंट्स 2022 से इस टूर्नामेंट का हिस्सा है। इन 26 मैचों में से एक मैच का नतीजा नहीं निकला था, क्योंकि बारिश ने खेल बिगाड़ दिया था। अब तक खेले गए 26 मैचों में से यहां 11 मैचों में पहले बल्लेबाजी करते हुए टीमों को जीत मिली है, जबकि रन चेज करते हुए 14 बार टीमों ने बाजी मारी है। टॉस को लेकर आंकड़े बताते हैं कि यहां टॉस जीतने वाली टीम 61.54 फीसदी मैच जीतती है, जबकि टॉस हारने वाली टीम को सिर्फ 34.62 फीसदी जीत मिलती है। टॉस जीतने वाली टीमों ने 26 में से 16 मुकाबले जीते हैं और 9 मैच टॉस हारने वाली टीम जीती है। पहली पारी की औसत स्कोर इकाना में आईपीएल में 172 से ज्यादा का है, जो इम्पैक्ट प्लेयर को देखते हुए थोड़ा सा कम लगता है, लेकिन यहां टीमें 200 रन तक बना लेती हैं। हालांकि, सबसे कम स्कोर यहां 108 रन है, जबकि सबसे ज्यादा स्कोर 235 रन एक पारी में बना है, लेकिन साल 2026 के आंकड़ों पर जाएं तो आपको लखनऊ में एक भी बार 200 का आंकड़ा नजर नहीं आएगी। यहां इस सीजन सबसे बड़ा स्कोर 165 है, जो एलएसजी के खिलाफ गुजरात टाइटन्स ने बनाया था और रन चेज में उनको जीत मिली थी। लखनऊ में गेंदबाज रहते हैं हावी गेंदबाजों का औसत रन रेट यहां 8.65 रन प्रति ओवर है, जबकि करीब 27 का औसत यहां विकेट चटकाने के मामले में है। ये दर्शाता है कि यहां विकेट खूब गिरते हैं और रन भी उतनी गति से गेंदबाज नहीं देते हैं। इस सीजन भी यहां खूब विकेट गिरे हैं और रन भी अन्य स्टेडियमों के मुकाबले कम पड़े हैं। हालांकि, आरसीबी एक ताकतवर टीम है, जबकि एलएसजी के बल्लेबाज भी अब रंग में लौटने लगे हैं। ऐसे में बड़ा स्कोर यहां पहली बार इस सीजन बन सकता है।

पूर्वांचल-तराई में तेज हवाओं और बिजली गिरने की चेतावनी, IMD ने जारी किया अलर्ट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मौसम इन दिनों लगातार करवट बदल रहा है। कहीं तेज धूप और उमस लोगों को परेशान कर रही है तो कहीं बादलों की आवाजाही, बारिश और तेज हवाएं राहत दे रही हैं। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में बुधवार को मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिला। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। वहीं 8 मई के बाद प्रदेश के तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल लू जैसी स्थिति बनने के आसार नहीं हैं। लखनऊ में दिनभर बदलता रहा मौसम राजधानी लखनऊ में बुधवार को सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। दिन में तेज धूप के बीच बादलों की आवाजाही बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार शहर का अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि गुरुवार को भी आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना बनी हुई है। पूर्वांचल और तराई बेल्ट में येलो अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 7 मई के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण वातावरण में अस्थिरता बनी हुई है। इसी वजह से अचानक मौसम बदलने और तेज आंधी-बारिश की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटों के दौरान कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि झोंकों की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। इन जिलों में ज्यादा असर की संभावना मौसम विभाग के अनुसार देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच समेत आसपास के क्षेत्रों में तेज हवाओं और आंधी का ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। इन जिलों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा आजमगढ़, मऊ, बलिया, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। तापमान में गिरावट से मिलेगी राहत मौसम विभाग के अनुसार मौजूदा मौसमी गतिविधियों के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लोगों को भीषण गर्मी और लू से राहत मिलेगी। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि तेज आंधी और संभावित ओलावृष्टि का असर फसलों पर पड़ सकता है। 8 मई के बाद तेजी से बढ़ेगा तापमान वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक 8 मई के बाद प्रदेश के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक इजाफा हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ का असर कमजोर पड़ने और आसमान साफ होने के बाद गर्मी का असर बढ़ेगा। हालांकि अभी प्रदेश में लू चलने की संभावना नहीं जताई गई है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिलेगी।  

योगी सरकार की नई पहल: 34 सवालों के जवाब देकर बनाएं अपनी Census ID

लखनऊ उत्तर प्रदेश के निवासी गुरुवार से अपनी जनगणना खुद कर सकेंगे। जनगणना का पहला चरण शुरू होने से पहले गुरुवार से स्वगणना शुरू होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम आवास पर अपनी जानकारी पोर्टल पर भरने के साथ स्वगणना का शुभारंभ करेंगे। स्वगणना की यह प्रक्रिया 21 मई तक चलेगी, जिसके बाद 22 मई से प्रगणक खुद जाकर आंकड़ों की तस्दीक करेंगे। इसके अलावा जिन्होंने स्वगणना की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया होगा, उनका ब्योरा दर्ज करेंगे। 22 मई से शुरू होने वाला यह चरण 20 जून तक चलेगा, जिसमें मकानों की गणना प्रगणक घर-घर जाकर करेंगे। जनगणना का दूसरा चरण अगले साल होगा। इस बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल मोड में की जा रही है। निदेशक व मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार से शुरू होने वाली स्वगणना में लोग विशेष तौर पर तैयार किए गए पोर्टल, se.census.gov.in पर जाकर जानकारी दर्ज करवा सकेंगे। उन्हें 34 सवालों के जवाब देने होंगे। इसके बाद उन्हें एक विशेष स्वगणना आईडी (एसई आईडी) मिलेगी। जब प्रगणक उनके पास तक पहुंचेंगे तो वे उसकी तस्दीक करके आईडी जनगणना पोर्टल पर दर्ज करेंगे। एक रसोई – एक परिवार जनगणना के नियमों के मुताबिक एक साथ रहने वाले और एक रसोई में भोजन करने वालों को एक ही परिवार के तौर पर दर्ज किया जाएगा। परिवार की गिनती के लिए साझा रसोई को ही निर्णायक कारक माना जाएगा। वहीं, जनगणना की प्रक्रिया में मकान उसे माना जाएगा जिसमें आंगन, सड़क, सीढ़ी के इतर अलग से मुख्य प्रवेश द्वार होगा। स्वगणना के लिए अपनानी होगी ये प्रक्रिया -स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in खोलें -परिवार पंजीकरण करें (नाम व मोबाइल नंबर) -भाषा चुनें और ओटीपी सत्यापन करें -पता दर्ज करें और मानचित्र पर घर चिह्नित करें -जनगणना प्रश्नावली भरें और अंतिम सबमिट कर एसई आईडी प्राप्त करें -प्रगणक द्वारा एसई आईडी की प्रविष्टि व क्षेत्रीय सत्यापन इन 34 सवालों का देना होगा जवाब 1-मकान नंबर (स्थानीय या जनगणना नंबर)। 2-मकान की छत, दीवार और फर्श में इस्तेमाल की गई मुख्य सामग्री। 3-मकान का उपयोग (आवासीय, आवासीय-सह-अन्य, या गैर-आवासीय)। 4-मकान की स्थिति (अच्छी, रहने योग्य या जर्जर)। 5-परिवार नंबर। 6-परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या। 7-परिवार के मुखिया का नाम। 8-मुखिया का लिंग (पुरुष/महिला/थर्ड जेंडर)। 9-क्या मुखिया अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) से है? 10-मकान के स्वामित्व की स्थिति (अपना, किराये का या अन्य)। बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल 11-परिवार के पास रहने के लिए कमरों की संख्या। 12-परिवार में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या। 13-पीने के पानी का मुख्य स्रोत। 14-पानी के स्रोत की उपलब्धता (परिसर के भीतर, पास में या दूर)। 15-प्रकाश (बिजली) का मुख्य स्रोत। 16-शौचालय की उपलब्धता (प्रकार और उपयोग)। 17-गंदे पानी की निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था। 18-स्नान सुविधा की उपलब्धता। 19-रसोई घर की उपलब्धता और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन। 20-खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला मुख्य ईंधन। संपत्ति और संसाधनों से जुड़े सवाल 21-रेडियो/ट्रांजिस्टर की उपलब्धता। 22-टेलीविजन (TV) की उपलब्धता। 23-इंटरनेट सुविधा (हाँ/नहीं)। 24-लैपटॉप/कंप्यूटर की उपलब्धता। 25-टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्टफोन की उपलब्धता। 26-साइकिल की उपलब्धता। 27-स्कूटर/मोटर साइकिल/मोपेड की उपलब्धता। 28-कार/जीप/वैन की उपलब्धता। 29-क्या परिवार के पास मुख्य रूप से खेती की जमीन है? 30-परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज। अन्य महत्वपूर्ण जानकारी 31-मोबाइल नंबर (संपर्क के लिए)। 32-क्या परिवार का कोई सदस्य शारीरिक/मानसिक रूप से अक्षम है? 33-परिवार के पास बैंक खाता/डाकघर खाता है या नहीं? 34-क्या परिवार किसी सरकारी आवास योजना का लाभ ले रहा है? ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को तबादला नीति से राहत नहीं राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है, जिसमें जनगणना में लगे कर्मचारियों को इससे अलग नहीं रखा गया है। तबादला सत्र की आखिरी तारीख 31 मई रखी गई है, जबकि तमाम राज्य कर्मचारी भी 22 मई से जनगणना कार्य में लगाए गए हैं। ऐसे में अगर इनका तबादला होता है तौर तत्काल प्रभाव से इन्हें नई तैनाती स्थल में पदभार ग्रहण करने के लिए कहा जाता है तो जनगणना कार्य प्रभावित हो सकता है। जनगणना का पहला चरण 22 मई से 20 जून तक चलना है। प्रशिक्षण कार्य में तेजी जनगणना के काम में प्रदेश भर से तकरीबन पांच लाख कर्मचारियों का इस्तेमाल होगा। इस संख्या में अतिरिक्त या रिजर्व में रखे गए कर्मचारी भी शामिल हैं। बड़े स्तर पर प्रशिक्षण हो चुका है। हालांकि अब भी प्रशिक्षण का काम पूरा नहीं हुआ है। स्वगणना प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अब बचे हुए कर्मचारियों के प्रशिक्षण में तेजी लाई जा रही है। कर्मचारियों को संदेश भेजा जा रहा है और उन्हें प्रशिक्षण में हिस्सा लेने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

जेडीयू में मंत्री पद पर निशांत कुमार की संभावना, नीतीश से हो रही है बैठक

पटना  बिहार में आज  7 मई को कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है. पटना के गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी पूरी हो चुकी है. इस बीच एक बड़ी चर्चा यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसको लेकर जेडीयू की तरफ से कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।  बता दें कि कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. जेडीयू नेता संजय झा और डिप्टी सीएम विजय चौधरी पटना स्थित 7 सर्कुलर रोड पहुंचे. जहां उनकी नीतीश कुमार से मुलाकात हुई. माना जा रहा है कि इस बैठक में मंत्रिमंडल के नामों के साथ-साथ निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा हुई है. यह बैठक कैबिनेट विस्तार से पहले काफी अहम मानी जा रही है।  क्या है निशांत की इच्छा? इस बीच जेडीयू एमएलसी संजय गांधी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी के कई नेता चाहते हैं कि निशांत कुमार मंत्री बनें. लेकिन निशांत की इच्छा है कि वे पहले बिहार का दौरा पूरा करें, उसके बाद ही मंत्रिमंडल में शामिल होने पर फैसला लें. संजय गांधी ने साफ कहा कि अंतिम फैसला निशांत कुमार को ही लेना है. बता दें कि वे नीतीश कुमार और निशांत के करीबी माने जाते हैं. यह बयान उन्होंने पटना के सात सर्कुलर रोड से बाहर निकलने के बाद दिया।  जिम्मेदारी लेने से किया था मना पिछले महीने नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद चर्चा थी कि उनके बेटे निशांत कुमार डिप्टी सीएम बन सकते हैं. पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें इसके लिए मनाने की कोशिश भी की. लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया. सूत्रों के मुताबिक, निशांत का कहना था कि बिना चुनाव जीते वे कोई बड़ा पद नहीं लेना चाहते. उनका मानना है कि पहले जनता के बीच काम करके अनुभव लेना जरूरी है. इसलिए उन्होंने तय किया कि वे पहले चुनाव लड़कर विधायक बनेंगे, उसके बाद ही बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके लिए वे करीब छह महीने तक जमीनी स्तर पर काम करेंगे और लोगों के बीच रहेंगे. इन दिनों वे बिहार के अलग-अलग इलाकों का दौरा भी कर रहे हैं. निशांत कुमार 8 मार्च को जेडीयू में शामिल हुए थे।  कौन-कौन बनेंगे मंत्री सूत्रों के मुताबिक एनडीए की ‘टीम सम्राट’ लगभग तैयार है. इस बार मंत्रिमंडल में पुराने और अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी मौका मिल सकता है. बीजेपी अपने कोटे से बड़े नेताओं को शामिल कर रही है, वहीं जेडीयू भी अपने भरोसेमंद नेताओं पर दांव लगा रही है. चर्चा है कि बीजेपी से विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, डॉ. दिलीप जायसवाल और डॉ. प्रमोद कुमार जैसे नेताओं को जगह मिल सकती है. वहीं युवा चेहरों में श्रेयसी सिंह और आनंद मिश्रा जैसे नाम भी चर्चा में हैं। 

किसान मुद्दों पर प्रदेश में गर्माई राजनीति, कांग्रेस करेगी आज आंदोलन और जाम

भोपाल  मध्य प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। आज 7 मई को कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है, जिसमें मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नेशनल हाईवे जाम कर किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है, जिससे कई जिलों में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल में पीसी शर्मा ने बताया कि सरकार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। बार-बार खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने से सिस्टम की कमजोरी उजागर हो गई है। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया के पहले 14 दिनों में केवल 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा गया है। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसान स्लॉट बुकिंग, रजिस्ट्रेशन पर्ची अपलोड करने और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को गेहूं का दाम 2625 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए। साथ ही, जिन किसानों ने कम कीमत पर गेहूं बेचा है, उन्हें अंतर की राशि “भावांतर योजना” के तहत सीधे उनके बैंक खातों में दी जाए। इसके अलावा, पार्टी ने मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस के इस आंदोलन के कारण 11 जिलों में करीब 747 किलोमीटर तक यातायात प्रभावित होने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन किसानों के हित में किया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस की मांगें पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए और कम कीमत पर बेचे गए गेहूं का अंतर भावांतर योजना के तहत सीधे खातों में डाला जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी जवाब मांगा गया है। मंत्री बोले- वेयरहाउस की क्षमता में 20% बढ़ाई मध्यप्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री और विभाग द्वारा गेहूं खरीदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की अनुमति थी, लेकिन किसानों के अधिक पंजीयन को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करा लिया गया है। मंत्री ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अब तक करीब 15 लाख स्लॉट बुक हो चुके हैं। 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी भी हो चुकी है। राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटे बढ़ाए गए हैं और वेयरहाउस की क्षमता में 20% तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि भंडारण में दिक्कत न आए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं और वे स्वयं भी विभिन्न केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना- कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते और आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस इस तरह के कदम उठा रही है, लेकिन हाईवे जाम से आम जनता को परेशानी होगी। राजपूत ने कहा कि सड़कों को जाम करने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और इससे आम नागरिकों को अनावश्यक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कांग्रेस से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की। मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और पार्टी को आंदोलन करने के बजाय आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले कांग्रेस ने आज तक अन्नदाता की चिंता नही की कांग्रेस को तो यह बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं। हमारी सरकार बनने के बाद हम अन्नदाता को किसान सम्मान निधि दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जा रही हैं, जबकि बारदाने का संकट था। जीतू पटवारी को किसानों से माफी मांगना चाहिए। वो बताएं कि 2003-04 के पहले उन्होंने अन्नदाता के लिए क्या किया? जीतू पटवारी को आत्ममंथन और आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

इंदौर में सड़क विकास: मधु मिलन–छावनी मार्ग होगा 60 फीट चौड़ा, अवरोध हटाने की तैयारी

इंदौर  मधुमिलन-छावनी मार्ग पर वर्षों से ट्रैफिक जाम की समस्या रहती थी, लेकिन अब यह समस्या हल होगी। नगर निगम ने इस मार्ग को 60 फीट चौड़ा करने का मन बना लिया है और इसके लिए दो-तीन दिन में 100 से ज्यादा अतिक्रमण भी हटाने की तैयारी की जा रही है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव खुद इस मार्ग पर अतिक्रमण हटाने से पहले रहवासियों से मिलने पहुंचे और रहवासियों से आग्रह किया कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर अपने-अपने अतिक्रमण खुद हटा लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाएगा। कुछ रहवासी स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिए तैयार हो चुके हैं। भार्गव ने बताया कि मधुमिलन चौराहे से छावनी तक का यह मार्ग शहर के ट्रैफिक के लिए महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण निगम की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के तहत इस सड़क को प्रथम चरण में 60 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके बाद यातायात की स्थिति के अनुसार आगे की योजना बनाई जाएगी।   उन्होंने यह भी बताया कि 60 फीट चौड़ाई को लेकर क्षेत्र के अधिकांश रहवासी सहमत हैं, जिससे कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। आपको बता दें कि छह साल पहले भी तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इस सड़क को चौड़ा करने की योजना बनाई थी और तब मथुरवाला स्वीट्स का निर्माण भी तोड़ा गया था, लेकिन बाद में उनका तबादला हो गया और सड़क चौड़ी नहीं हो पाई थी।

लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रदेश में 9 मई को नेशनल लोक अदालत आयोजित

नेशनल लोक अदालत लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए प्रदेश में 9 मई को नेशनल लोक अदालत संपत्ति एवं जल कर के सरचार्ज (अधिभार) में मिलेगी 100 प्रतिशत तक की छूट भोपाल मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदेश में 9 मई शनिवार को 'नेशनल लोक अदालत' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। नागरिकों के कल्याण और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। नेशनल लोक अदालत में नागरिकों को विशेष सुविधा प्रदान करते हुए संपत्तिकर, जलकर एवं अन्य उपभोक्ता कर के लंबित प्रकरणों में देय अधिभार (सरचार्ज) पर 100 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व छूट प्रदान की जा रही है। योजना के प्रावधानों के अंतर्गत 50 हजार रुपये तक के संपत्तिकर और 10 हजार रुपये तक के जल कर की बकाया राशि वाले प्रकरणों में सरचार्ज पूर्णतः माफ किया जाएगा। इससे अधिक की बकाया राशि होने पर निर्धारित स्लैब के अनुरूप सरचार्ज में 25 से 75 प्रतिशत तक की रियायत का प्रावधान किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक की बकाया राशि पर यह विशेष छूट वन टाइम सेटलमेंट के रूप में देय होगी। इसयोजना का लाभ प्राप्त करने वाले नागरिकों को छूट के उपरांत शेष राशि अधिकतम दो आसान किश्तों में जमा करने की सुविधाजनक व्यवस्था प्रदान की गई है, जिसके अंतर्गत कम से कम 50 प्रतिशत राशि लोक अदालत के दिन ही जमा करना अनिवार्य होगा। राज्य शासन ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस नेशनल लोक अदालत में सहभागिता कर अपने लंबित प्रकरणों का निराकरण करवाएं और शासन द्वारा प्रदाय की जा रही इस विशेष छूट का अधिकतम लाभ उठाएं।    लोक अदालत के माध्यम से नगरीय निकायों के लंबित प्रकरणों का त्वरित एवं सुलभ निराकरण किया जाएगा, जिससे आमजनों को व्यापक राहत मिलेगी। शासन की इस जन-कल्याणकारी पहल से नागरिकों को न केवल करों के भारी बोझ से मुक्ति प्राप्त होगी, बल्कि इसके फलस्वरूप नगरीय निकायों को भी एकमुश्त राजस्व की प्राप्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

09 मई को नेशनल लोक अदालत आयोजित, लंबित मामलों का समाधान होगा

09 मई को होगा नेशनल लोक अदालत का आयोजन, लम्बित मामलों का होगा निराकरण  रायपुर भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आम जनता तक पहुचने तथा आपसी सहभागिता एवं सहमति से विवादों के समाधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समाधान समारोह विशेष लोक अदालत 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह आगामी 09 मई 2026 को नेशनल लोक अदालत आरंभ होकर 21, 22 एवं 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों का निराकरण सम्पन्न होगा।  विशेष लोक अदालत का आयोजन सर्वोच्च न्यायालय परिसर में 21, 22, 23 अगस्त को किया जाएगा। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित मामलों को भी शामिल किया जाएगा। इस दौरान पूर्व सुलह बैठको का आयोजन राज्य, जिला, तालुका एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के मध्यस्थता केन्द्र में किया जाएगा। वार्ता की प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से ही प्रारभ हो चुकी है। इस समाधान शिविर के आयोजन का मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित उपयुक्त मामलों का आपसी सहमति एवं सुलह के माध्यम से निष्पादन करना है। अधिवक्ता वादीगणों एवं संबंधित सभी पक्षों से अपील की गई है कि, सक्रिय रूप से भाग ले एवं आपसी सहमति से  समाधान की दिशा में प्रयास करें।  सुलाह बैठक में पक्षकार शारीरिक एवं अभासी माध्यम से भी सम्मिलित हो सकते है, इस बैठकों में प्रशिक्षित मध्यस्थता एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी सहयोग प्रदान करेगें। अपने मामले को समाधान समारोह विशेष लोक अदालत में सम्मिलित करने केे लिए सर्वोच्च न्यायालय के वेबसाईट पर गुगल फार्म भरना होगा फार्म भरने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई। अधिक जानकारी एवं समाधान के लिए वन स्टाप सेन्टर (बार रूम) के सम्पर्क नम्बर, या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर से भी सम्पर्क कर सकते है।  आधिक जानकारी के लिए समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) हेतु बनाये गये (वन स्टॉप सेन्टर ) (वार रूम) इंचार्ज का सम्पर्क नम्बर 011-2311565652, 011-23116464, सी.आर.पी निदेशक का सम्पर्क नं.-011-23115652  वन स्टॉप सेन्टर (कक्ष क्रं.806 एवं 808 बी ब्लाक), अतिरिक्त भवन परिसर सर्वोच्च न्यायालय लेण्डलाइन नं.-011-23116464 से संपर्क कर सकते है वहीं ई.मेल आई. डी speciallokadalat 2026@sci.in तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर जिला न्यायालय परिसर मो.नं. 0771-24259’44 मो.नं.-8301508992 से भी सम्पर्क किया जा सकता है।