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नोएडा बवाल के बाद सख्ती: 203 ठेकेदारों पर गिरी गाज, लाइसेंस निरस्तीकरण और 1.16 करोड़ की पेनल्टी नोटिस

नोएडा नोएडा में हुए बवाल, आगजनी और तोड़फोड़ के पीछे साजिश की आशंका है। पुलिस के साथ एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, त्रिपुरा समेत कई राज्यों के युवकों के शामिल होने का शक है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले 24 कारखानों से जुड़े 203 ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने, राशि की वसूली करने और एजेंसियों को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि श्रमिकों के उपद्रव में कई ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। वहीं, श्रम कानूनों का पालन नहीं करने पर ठेकेदारों के खिलाफ 1.16 करोड़ रुपये की पेनल्टी के नोटिस जारी किए गए हैं। अन्य ठेकेदारों की भी जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बताया गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिकों के वेतन में 21 फीसदी की वृद्धि की गई है। कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ और ईएसआई के अतिरिक्त कोई अन्य कटौती का मामला सामने आता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। वेतन भुगतान में देरी या कम भुगतान पर ठेकेदारों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। नोएडा बवाल की साजिश में शहर के चार युवकों पर शक की सुई नोएडा में हुए बवाल, आगजनी और तोड़फोड़ के पीछे साजिश की आशंका है। पुलिस के साथ एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, त्रिपुरा समेत कई राज्यों के युवकों के शामिल होने का शक है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और घटना के दौरान बनाए गए वीडियो खंगाले जा रहे हैं। शहर के चार से पांच युवकों पर भी शक है। शुक्रवार को नौबस्ता और बादशाहीनाका क्षेत्र से कुछ लोगों को इसी सिलसिले में उठाया गया है।   नोएडा और ग्रेटर नोएडा की फैक्टि्रयों में तोड़फोड़, आगजनी, पुलिस व अन्य सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटना हुई थी। पुलिस ने बवाल करने वालों को मशक्कत कर शांत कराया। अलग-अलग इकाइयों में एकदम से भीड़ उग्र हुई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के साथ प्रतिष्ठानों पर पथराव हुआ। पुलिस और प्रशासन ने खुफिया, इंटेलीजेंस, एलआईयू आदि से जांच कराई जिनकी प्रारंभिक जांच में बवाल के पीछे साजिश की आशंका जताई गई।   सूत्रों के मुताबिक कुछ प्रतिष्ठानों में फेस रिकग्नाइजेशन (चेहरे पहचानने वाले) कैमरे लगे हुए हैं। उनमें संदिग्धों के वीडियो मिले हैं। कुछ युवक पत्थर, तेल के गैलन, सब्बल लिए नजर आ रहे हैं। उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। कानपुर के चार से पांच युवकों पर भी शक है। इनमें से दो वहां रहने के साथ सब्जी व फल का कारोबार करते हैं। उनके बारे में नौबस्ता और बादशाहीनाका क्षेत्र से जानकारी जुटाई गई है। कुछ लोगों को उठाया गया है। अब तक किसी जांच एजेंसी ने कोई संपर्क नहीं किया है। एसटीएफ अपने स्तर पर जांच कर रही है। अगर जांच में कोई सहयोग मांगा जाता है तो कमिश्नरी पुलिस उनकी मदद करेगी।   श्रमिक आंदोलन को लेकर शुक्रवार को भी क्षेत्र में पुलिस अलर्ट पर रही। वहीं, सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी कंपनियों में पुलिस फोर्स के जवान भी तैनात रहे। यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित वीवो कंपनी में बृहस्पतिवार सुबह वेतन को लेकर कंपनी कर्मियों ने हंगामा किया था। इस दौरान कर्मचरियों ने वेतन बढ़ाने की मांग करते हुए कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की थी। पुलिस फोर्स ने मौके पर पहुंचकर कर्मियों को समझाया था।  

होर्मुज प्रतिबंध को लेकर तनाव बढ़ा, डोनाल्ड ट्रंप बोले—ईरान की ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए। होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।" इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, "जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।"

West Asia संकट पर मंथन: ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक की कमान संभालेंगे राजनाथ सिंह

नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करने में जुटी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज मंत्रियों के समूह के साथ बैठक कर पेट्रोल, डीजल और खाद की उपलब्धता की समीक्षा करेंगे। सरकार का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखना है।   पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने मंत्रियों का एक विशेष समूह (जीओएम) गठित किया है। इस समूह की एक अहम बैठक आज फिर आयोजित की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार शाम चार बजे इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के ताजा हालातों और भारत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर चर्चा होगी। बैठक में एलपीजी सप्लाई, पेट्रोल डीजल, फर्टिलाइजर्स आदि की सप्लाई को लेकर समीक्षा की जाएगी।   इससे पहले 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस समूह की तीसरी बैठक हुई थी। उस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। उस दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि सरकार देश के भीतर जरूरी सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने विशेष रूप से रसोई गैस, ईंधन और किसानों के लिए खाद की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया था। सरकार का प्रयास है कि देशभर में जरूरी सामानों की सप्लाई सुचारु रहे ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया था कि सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को पहले से ही मजबूत कर रही है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लगातार निगरानी रखना और समय पर सही निर्णय लेना बहुत आवश्यक हो गया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के प्रभाव से देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर स्तर पर तालमेल बिठाकर काम कर रही है। इस समूह की दूसरी बैठक दो अप्रैल को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुई थी। उस बैठक में भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन मंथन हुआ था और खतरों को कम करने की रणनीति बनाई गई थी। रक्षा मंत्री ने तब कहा था कि भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके लिए 24 घंटे निगरानी रखना और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य है कि देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति पर कोई बुरा असर न पड़े। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

पहले अभिषेक शर्मा, फिर हेनरिक क्लासेन का जलवा—सनराइजर्स हैदराबाद का 194 रन का बड़ा स्कोर

नई दिल्ली आईपीएल 2026 के 27वें मुकाबले में आज चेन्‍नई सुपर किंग्‍स का सामना सनराइजर्स हैदराबाद से हो रहा है हैदराबाद के होम ग्राउंड राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में मुकाबला खेला जा रहा है। चेन्‍नई सुपर किंग्‍स के कप्‍तान ऋतुराज गायकवाड़ ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी है। दोनों टीमों की नजर तीसरी जीत दर्ज करने पर है। पहले 3 मैच में हार के बाद चेन्‍नई ने इस सीजन जोरदार वापसी की। होम ग्राउंड पर चेन्‍नई ने दिल्‍ली कैपिटल्‍स और कोलकाता नाइट राइडर्स को हराया। दूसरी ओर हैदराबाद ने भी 5 में से 2 मैच जीते हैं। अपने पिछले मैच में ईशान किशन की कप्‍तानी वाली टीम ने राजस्‍थान रॉयल्‍स को 57 रन से शिकस्‍त दी थी। 20वें ओवर में गिरे 2 विकेट 20वें ओवर में अंशुल कंबोज ने एक और विकेट अपने नाम किया। उन्‍होंने चौथी गेंद पर शिवांग सिंह का शिकार किया। शिवांग बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में कैच आउट हुए। गुरजापनीत सिंह की गोद में उनकी पारी ने दम तोड़ा। ओवर की आखिरी गेंद पर लियाम लिविंगस्टोन कैच आउट हुए। 20 ओवर के बाद हैदराबाद ने 9 विकेट खोकर 194 रन बना लिए हैं। चेन्‍नई को अगर यह मैच जीतना है तो तय ओवर में 195 रन बनाने होंगे। सलिल अरोड़ा कैच आउट हैदराबाद का 7वां विकेट गिर गया है। गुरजापनीत सिंह ने सलिल अरोड़ा को अपने जाल में फंसाया। डेवाल्ड ब्रेविस ने सलिल का कैच लिया। सलिल ने 12 गेंदों पर 13 रन की पारी खेली। हैदराबाद को लगा बड़ा झटका अंशुल कंबोज ने हेनरिक क्‍लासेन को क्‍लीन बोल्‍ड किया। क्‍लासेन ने 39 गेंदों पर 59 रन की पारी खेली। इस दौरान उन्‍होंने 6 चौकों के साथ ही 2 छक्‍के भी लगाए । अब इम्‍पैक्‍टर प्‍लेयर लियाम लिविंगस्टोन मैदान पर आए हैं। हैदराबाद की आधी टीम लौटी पवेलियन तेज शुरुआत के बाद हैदराबाद की पारी लड़खड़ा गई है। नीतीश रेड्डी के रूप में हैदराबाद को 5वां झटका लगा। नीतीश ने 8 गेंदों पर 12 रन की पारी खेली। जेमी ओवर्टन ने आज का तीसरा विकेट अपने नाम किया।   हैदराबाद को लगा चौथा झटका गेंदबाजों ने मुकाबले में चेन्‍नई की वापसी करा दी है। 11वें ओवर की पहली गेंद पर जेमी ओवर्टन ने अनिकेत वर्मा का विकेट अपने नाम कर लिया। अनिकेत ने 4 गेंदों का सामना किया और 2 रन बनाए। अब नीतीश कुमार रेड्डी मैदान में आए हैं। अभिषेक शर्मा आउट तूफानी फिफ्टी लगा चुके अभिषेक शर्मा को जेमी ओवर्टन ने पवेलियन भेजा। विकेट के पीछे संजू सैमसन ने अभिषेक का कैच लिया। अभिषेक ने 22 गेंदों पर 59 रन की पारी खेली। हैदराबाद को लगे 2 झटके अभिषेक शर्मा के तूफान के बीच चेन्‍नई सुपर किंग्‍स के 2 विकेट गिर चुके हैं। पावरप्‍ले के आखिरी ओवर में मुकेश चौधरी ने हैदराबाद को बैक टू बैक झटके दिए। 5वीं गेंद पर उन्‍होंने ट्रेविस हेड को और आखिरी गेंद पर ईशान किशन को ऋतुराज गायकवाड़ के हाथों कैच आउट कराया। ईशान पहली गेंद पर आउट हुए। वहीं हेड ने 20 गेंदों पर 23 रन की पारी खेली। हैदराबाद की तूफानी शुरुआत हैदराबाद की शुरुआत तूफानी रही है। 5वें ओवर में अभिषेक शर्मा ने बाउंड्री की लाइन लगा दी और 3 चौकों के साथ 2 छक्‍के लगाए। अभिषेक ने 15 गेंदों पर अर्धशतक लगाया। 5 ओवर के बाद हैदराबाद का स्‍कोर 63 रन है।

संशोधन बिल गिरा तो नरेंद्र मोदी का कड़ा रुख—‘हर गांव तक ले जाएंगे सच’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक के गिर जाने पर गहरी नाराजगी और निराशा व्यक्त की है। महिला आरक्षण से जुड़े इस महत्वपूर्ण बिल का समर्थन न करने को लेकर पीएम मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को अपने इस फैसले के लिए 'जिंदगी भर पछताना पड़ेगा।' संसद भवन में CCS की बैठक के दौरान की टिप्पणी खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने ये टिप्पणियां दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक के दौरान कीं। बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि विपक्षी दलों को इस बिल को समर्थन न देने की भारी 'कीमत चुकानी होगी।' उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अब अपने इस कदम का बचाव करने और इस पर पर्दा डालने के लिए तरह-तरह के बहाने ढूंढ रहे हैं। हर गांव तक संदेश पहुंचाने का आह्वान प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को सीधे जनता के बीच ले जाने पर जोर दिया है। पीएम ने कहा: उन्हें (विपक्ष को) इसकी कीमत चुकानी होगी। हमें देश के हर गांव तक यह बात पहुंचानी होगी कि विपक्ष की मानसिकता पूरी तरह से महिला विरोधी है। वे पहले से ही अपनी इस गलती को छिपाने के लिए कारण ढूंढने में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाएगी और विपक्ष के इस कदम को पूरे देश में 'महिला विरोधी' कृत्य के तौर पर पेश करेगी। 131वां संविधान संशोधन बिल क्या था? केंद्र सरकार द्वारा 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किए गए 131वें संविधान संशोधन बिल के मुख्य रूप से तीन बड़े और दूरगामी उद्देश्य थे। लोकसभा सीटों का विस्तार: इस बिल के तहत लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। इसमें राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्यों के चुने जाने की व्यवस्था थी। समय से पहले परिसीमन: संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन करके परिसीमन प्रक्रिया में बदलाव लाना। मौजूदा नियम के मुताबिक अगला परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर होना था। लेकिन यह बिल उस रोक को हटाकर 2011 की जनगणना के आधार पर ही तुरंत नया परिसीमन लागू करने का रास्ता साफ कर रहा था। महिला आरक्षण का तत्काल क्रियान्वयन: 2023 में पास हुए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है। सरकार इसको इसी नए परिसीमन के लागू होते ही धरातल पर उतारना चाहती थी। यह बिल कैसे गिर गया? 17 अप्रैल को लोकसभा में दो दिनों की लंबी बहस के बाद जब इस बिल पर वोटिंग हुई, तो यह तकनीकी और राजनीतिक कारणों से जरूरी आंकड़ा नहीं जुटा सका। संविधान संशोधन की शर्त: किसी भी संविधान संशोधन बिल को पास करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले कुल सदस्यों के दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत की आवश्यकता होती है। वोटिंग के आंकड़े: वोटिंग के दौरान लोकसभा में कुल 528 सांसद उपस्थित थे। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 230 वोट डाले गए। दो-तिहाई बहुमत (लगभग 352 वोट) का अनिवार्य जादुई आंकड़ा न छू पाने के कारण यह ऐतिहासिक बिल 54 वोटों की कमी से गिर गया। इस प्रमुख बिल के गिरने के ठीक बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि सरकार परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े अन्य दो संबंधित बिलों पर भी अब आगे नहीं बढ़ेगी। विपक्ष ने क्यों किया इसका कड़ा विरोध? विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन उनका असली विरोध बिल में शामिल 'परिसीमन' के पेंच को लेकर था। दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान की आशंका: विपक्ष का सबसे बड़ा तर्क यह था कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ, तो दक्षिण भारतीय राज्यों को भारी नुकसान होगा। इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतरीन काम किया है, इसलिए नए परिसीमन से लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व घट जाएगा और उत्तर भारतीय राज्यों का दबदबा बढ़ जाएगा। सियासी फायदे का आरोप: विपक्षी धड़े ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह 'महिला आरक्षण' जैसे संवेदनशील मुद्दे की आड़ में जल्दबाजी में परिसीमन थोपना चाहती है, ताकि देश के चुनावी नक्शे को बदलकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके। विपक्ष के इसी एकजुट विरोध के कारण सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही और 2014 के बाद पहली बार मोदी सरकार को संसद में किसी इतने बड़े विधायी प्रस्ताव पर हार का सामना करना पड़ा।  

विश्वास सारंग का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

वार्ड 68 में 1 करोड़ 37 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया भोपाल गोविंदपुरा क्षेत्र के विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वार्ड 68 में 1.37 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण के दौरान मंत्री ने निर्माण कार्य में देरी और अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने और टेंडर निरस्त करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने वार्ड 68 अयोध्या नगर में परशुराम चौराहे से जोन कार्यालय मंगल भवन तक पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य का भूमिपूजन किया , जिसकी लागत 26 लाख रुपए है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय रहवासियों और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए ठेकेदार मेसर्स वैभव सक्सेना को निर्माण कार्य में लापरवाही पर कमिश्नर से शिकायत और टेंडर रद्द करने के आदेश मौजूद अधिकारियों को दिए। वार्ड 68 में 4 लाख रुपए की लागत से एल सेक्टर पार्क में पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य, प्लेग्राउंड इक्यूपमेंट्स एवं ओपन जीप इक्विपमेंट लगाने के निर्माण कार्य और 10 लाख की लागत से जी सेक्टर में बाबूलाल गौर पार्क में बाउंड्री वॉल व पाथवे निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। उन्होंने गीत बंगलो फेस 4 में लगभग 7 लाख की लागत से बनने वाली आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया और एम सेक्टर में कम्युनिटी हॉल के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 4 लाख रुपए है। राज्यमंत्री ने अयोध्या नगर मारुति विहार के पास आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया, जिसकी लागत 3 लाख रुपए आएगी। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 में कम्यूनिटी हाल की बाउंड्री वाल का काम 10 लाख की लागत से किया जाएगा। अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 2 में सीवेज कार्य का भूमिपूजन भी किया गया, जिसकी लागत 31 लाख रुपए है। सुख सागर फेस-1 में 4 लाख रुपये की लागत से कम्यूनिटी हाल का निर्माण कार्य भी किया जाएगा और भवानी केम्पस में शेड लगाने का कार्य लगभग 2 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। उन्होंने अयोध्या नगर फेस-5 पार्ट 1 के रहवासियों के लिए लोकार्पण कर सामुदायिक भवन की सौगात दी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों से चर्चा की और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी निर्देशित किया। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती उर्मिला मौर्य, श्रीमती शिरोमणी शर्मा, श्री लवकुश यादव, श्री भीकम सिंह बघेल समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।  

भिंड में तापमान 43.1 डिग्री के पार, लू से हड़कंप—स्वास्थ्य विभाग ने दी चेतावनी

भिंड अप्रैल माह में पहली बार शनिवार को गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाए। अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी 27.2 डिग्री दर्ज किया गया। तेज धूप और गर्म हवाओं ने शहरवासियों को दिनभर परेशान किया। हालात यह रहे कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा छा गया और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। लू के थपेड़ों से सड़कें सूनी रहीं और दोपहर में लोग घरों में कैद रहे। गर्म हवाओं का बढ़ा असर मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को आर्द्रता 27 प्रतिशत रही, जबकि हवाएं करीब 4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं। इससे पहले गुरुवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री दर्ज किया गया था, लेकिन शनिवार को पारा और चढ़ गया। सुबह 9 बजे के बाद ही गर्म हवाओं का असर शुरू हो गया, जो दोपहर 2 बजे के बाद और तेज हो गया। गर्मी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हुई। बिना मुंह ढके बाहर निकलना मुश्किल हो गया। लोग सिर और चेहरे को कपड़े से ढककर ही बाहर निकले। बाजारों में भी दोपहर के समय भीड़ काफी कम दिखाई दी। वायरल और मलेरिया का बढ़ा खतरा मौसम में बदलाव के साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। इन दिनों अस्पतालों में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में मलेरिया का खतरा भी अधिक रहता है, जो अन्य संक्रमणों के कारण शरीर को प्रभावित कर सकता है। डाक्टरों ने सलाह दी है कि तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाव बेहद जरूरी है। घर से बाहर निकलते समय मुंह और कान ढककर रखें तथा दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें। पर्याप्त पानी पिएं और स्वच्छता का ध्यान रखें। मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें और तबीयत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर की सलाह तापमान बढ़ने से वायरल और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों को धूप से बचाव करना चाहिए और स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। – डा. आरएन राजौरिया, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल भिंड

एमपी ई-सेवा’ से डिजिटल गवर्नेंस को मिला सशक्त आधार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

56 विभागों की 1700 सेवाएँ एक ही पोर्टल पर उपलब्ध सेवा वितरण प्रणाली हुई अधिक जवाबदेह एवं सुव्यवस्थित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप’ के माध्यम से प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस को सशक्त आधार मिला है। इससे नागरिक सेवाएँ अब अधिक सरल, सुगम और सुलभ हुई हैं। डिजिटल तकनीक आज सुशासन की आधारशिला बन चुकी है और प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए देश में नई पहचान स्थापित कर रहा है। अब प्रदेशवासियों को विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक ही मंच पर सभी सुविधाएँ सहज, त्वरित और पारदर्शी रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल से सेवा वितरण प्रणाली अधिक जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनी है। साथ ही नागरिकों के समय एवं संसाधनों की बचत सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एकीकृत नागरिक सेवा मंच 56 विभागों की 1700 से अधिक सरकारी सेवाओं और योजनाओं को एक ही डिजिटल विंडो पर उपलब्ध करा रहा है। वर्ष 2026 तक 100 प्रतिशत ई-सेवा डिलीवरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) के सेंटर फॉर एक्सीलेंस द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म नागरिकों, विभागों एवं सेवाओं को एकीकृत डिजिटल इको-सिस्टम में जोड़ते हुए सुशासन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगा। एकीकृत पोर्टल पर सभी सेवाएँ: प्रक्रिया हुई सरल एमपी ई-सेवा पोर्टल पर विभिन्न विभागों की 1700 सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों को बार-बार अलग-अलग पोर्टल पर जाने और दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता समाप्त की गई है। नागरिक अब eseva.mp.gov.in और मोबाइल ऐप के माध्यम से पात्रता जांच, आवेदन, स्टेटस ट्रैकिंग और अनुमोदन जैसी सभी सुविधाएँ एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल प्रमाणपत्र की व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और फेसलेस बनाई गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है। समग्र पोर्टल से एकीकरण: ऑटो-वेरिफिकेशन की सुविधा ‘एमपी ई-सेवा’ को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के समग्र पोर्टल से जोड़ा गया है। प्रत्येक परिवार को 8 अंकीय परिवार आईडी और हर सदस्य को 9 अंकीय सदस्य आईडी दी गई है। इससे ऑटो-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को सक्षम बनाया गया है। इससे पात्रता निर्धारण स्वतः हो जाता है और अनावश्यक देरी व दोहराव समाप्त होता है। पोर्टल की प्रमुख विशेषता ‘ऑटो-फेचिंग डॉक्युमेंट्स’ है, जिससे नागरिकों को बार-बार दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता नहीं रहती।एक बार अपलोड किए गए दस्तावेज आगे की सेवाओं में स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं। सुगम, सुरक्षित एवं नागरिक केंद्रित ‘ऐप-डिज़ाइन’ एमपी ई-सेवा पोर्टल को मोबाइल-फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ विकसित किया गया है। इसमें बहुभाषीय सुविधा के साथ दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष डिज़ाइन किया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिक आसानी से इसका उपयोग कर सकें। प्लेटफ़ॉर्म पर अब तक 2 लाख 14 हजार से अधिक ट्रांसेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 3 हजार 446 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 1 लाख 64 हजार 600 से अधिक ट्रैक/डाउनलोड गतिविधियाँ और 45 हजार 954 समग्र पात्रता जांचें की गई हैं। डिजिटल गवर्नेंस में प्रदेश की सशक्त उपस्थिति राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) 2025 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश ने 1752 ई-सेवाओं को मैप कर सभी 56 अनिवार्य विभागीय सेवाओं को 100 प्रतिशत एकीकृत करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।प्रदेश को ‘सायबर तहसील’ के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार तथा ‘संपदा 2.0’ के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को दर्शाते हैं।  

बिल पर असफलता के बाद CM राज्यसभा पहुंचे, संसद के बजट सत्र में बना रिकॉर्ड

नई दिल्ली संसद का शनिवार को संपन्न हुआ बजट सत्र कई बातों को लेकर संसदीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। इसी दौरान महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार लोकसभा की मंजूरी दिलवाने में विफल रही। सत्र के दौरान एक दुर्लभ बात उस समय भी देखने को मिली जब राष्ट्रपति अभिभाषण का धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के बिना ही पारित हो गया। हालांकि राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इसी सत्र के दौरान लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध लाए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई और निचले सदन ने बाद में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव पर चर्चा और इसे खारिज किए जाने तक बिरला ने अध्यक्ष के तौर पर सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं किया। राज्यसभा में इस सत्र के दौरान एक नया इतिहास तब दर्ज किया गया जब कोई मनोनीत सदस्य उप सभापति पद पर निर्वाचित हुआ। मनोनीत सदस्य हरिवंश को शुक्रवार को निर्विरोध उपसभापति निर्वाचित किया गया। इससे पहले भी हरिवंश लगातार दो बार उच्च सदन के उप सभापति पद पर निर्वाचित हो चुके हैं। मगर उस दौरान वह जनता दल (यू) सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए मुख्यमंत्री यह भी एक ऐतिहासिक घटनाक्रम रहा जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया हो और उन्होंने पद छोड़ दिया। नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिया। उन्होंने बजट सत्र के दूसरे चरण में उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली। देश में संभवत: पहली बार आम बजट रविवार को पेश किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी, 2026 यानी रविवार को अगले वित्त वर्ष के लिए बजट पेश किया। उन्होंने अपना लगातार नौवां बजट पेश किया। इसी सत्र में एक नया इतिहास यह भी बना कि सत्र का समापन होने से ठीक पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम की केवल धुन बजाए जाने के स्थान पर इसके पूरे छह अंतरों का पहले से रिकॉर्ड किया गया गान बजाया गया। लोकसभा में गुरुवार और शुक्रवार को महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर एकसाथ चर्चा की गई। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान में यह पारित नहीं हो पाया। इस कारण से सरकार ने अन्य दो विधेयक पारित करवाने के लिए नहीं रखा। मोदी सरकार के लगभग 12 वर्ष के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई सरकारी विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ था और इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला था। इसका दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू हुआ और सरकार ने पहले घोषणा की थी कि यह दो अप्रैल तक चलेगा। मगर 2 अप्रैल को संसद के दोनों सदनों में घोषणा की गई कि अगली बैठक 16 अप्रैल को होगी। सत्र को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।  

भाषा नियम पर सियासत गरमाई—रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, यूनियन ने जताया विरोध

मुंबई महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि 1 मई 2026 से, यानी महाराष्ट्र दिवस से राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसके तहत चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए। अगर कोई चालक इस भाषा में बुनियादी दक्षता नहीं दिखा पाता, तो उसके लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा। परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें चालकों की मराठी भाषा की जांच की जाएगी।  यह कदम यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और स्थानीय भाषा के सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए, ताकि मुसाफिरों की सुविधा बढ़े और कोई गलतफहमी न हो। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम मोटर वाहन नियमों के तहत आता है और इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। इस फैसले पर महाराष्ट्र ऑटोरिक्शा चालक-मालक संघटना संयुक्त कृती समिती ने तीखा विरोध जताया है। संगठन के अध्यक्ष शशांक राव ने कहा कि हम सरकार के इस निर्णय का पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने इसे चालकों पर अनुचित बोझ बताया और मांग की कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। शशांक राव ने आगे कहा, “हमारा संगठन परिवहन मंत्री के उस फैसले का विरोध करता है, जिसमें 1 मई 2026 से लाइसेंस प्राप्त रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बना दिया गया है।” संगठन का कहना है कि कई चालक अन्य राज्यों से आकर महाराष्ट्र में काम करते हैं। उन्हें अचानक इतना कम समय देकर नई भाषा सीखने की मजबूरी उनके जीवनयापन पर असर डाल सकती है। वहीं, यूनियन ने सरकार से अपील की है कि चालकों को पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस नियम का पालन कर सकें। विरोध जताते हुए संगठन ने कहा कि मराठी भाषा सीखना जरूरी हो सकता है, लेकिन अचानक सख्ती और लाइसेंस रद्द करने की धमकी से चालकों में आक्रोश फैल गया है।