samacharsecretary.com

भाषा नियम पर सियासत गरमाई—रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, यूनियन ने जताया विरोध

मुंबई महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि 1 मई 2026 से, यानी महाराष्ट्र दिवस से राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसके तहत चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए। अगर कोई चालक इस भाषा में बुनियादी दक्षता नहीं दिखा पाता, तो उसके लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा। परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें चालकों की मराठी भाषा की जांच की जाएगी।  यह कदम यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और स्थानीय भाषा के सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए, ताकि मुसाफिरों की सुविधा बढ़े और कोई गलतफहमी न हो। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम मोटर वाहन नियमों के तहत आता है और इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। इस फैसले पर महाराष्ट्र ऑटोरिक्शा चालक-मालक संघटना संयुक्त कृती समिती ने तीखा विरोध जताया है। संगठन के अध्यक्ष शशांक राव ने कहा कि हम सरकार के इस निर्णय का पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने इसे चालकों पर अनुचित बोझ बताया और मांग की कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। शशांक राव ने आगे कहा, “हमारा संगठन परिवहन मंत्री के उस फैसले का विरोध करता है, जिसमें 1 मई 2026 से लाइसेंस प्राप्त रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बना दिया गया है।” संगठन का कहना है कि कई चालक अन्य राज्यों से आकर महाराष्ट्र में काम करते हैं। उन्हें अचानक इतना कम समय देकर नई भाषा सीखने की मजबूरी उनके जीवनयापन पर असर डाल सकती है। वहीं, यूनियन ने सरकार से अपील की है कि चालकों को पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस नियम का पालन कर सकें। विरोध जताते हुए संगठन ने कहा कि मराठी भाषा सीखना जरूरी हो सकता है, लेकिन अचानक सख्ती और लाइसेंस रद्द करने की धमकी से चालकों में आक्रोश फैल गया है।

IAS अधिकारी की 20 करोड़ की संपत्ति जब्त, करप्शन केस में बड़ी स्ट्राइक, प्रशासनिक हलचल

रायपुर  छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां IAS अधिकारी पर एक बड़ी कार्रवाई हुई है। दरअसल भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे IAS समीर विश्नोई के खिलाफ अहम कार्रवाई करते हुए 20 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली गई है। जानकारी के मुताबिक आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी समीर विश्नोई के खिलाफ कड़ा एक्शन अमल में लाया गया है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा है मामला आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विश्नोई के खिलाफ की गई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई के बाद अफरा-तफरी मच गई है। ACB/EOW की जांच के बाद विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, रायपुर ने विश्नोई और पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर अर्जित करीब 20 करोड़ रुपए की बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने के आदेश से हलचल है।राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है और अब बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई  हुई है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा मामला राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अपराध क्रमांक 23/2024 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया था। समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं एसीबी/ईओडब्ल्यू की जांच में करीब 4 करोड़ रुपए मूल्य की 9 अतिरिक्त संपत्तियों का खुलासा हुआ, जिनके अटैचमेंट के लिए विशेष अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती 17 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया। आदेश के बाद अब इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लग गई है। पहले भी हुई है कार्रवाई उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी मामले में आरोपी रहीं सौम्या चौरसिया की अवैध संपत्तियों की कुर्की न्यायालय के आदेश से की जा चुकी है। समीर विश्नोई ने पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर फर्म बनाकर की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि समीर विश्नोई ने अपनी पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम परफर्म बनाकर अवैध कमाई को उसमें निवेश किया और फिर कई संपत्तियां खरीदीं। करप्शन के मामले मे महासमुंद जिले में करीब 22 एकड़ जमीन, नया रायपुर में प्लॉट, जैसे अचल संपत्तियां शामिल हैं। यही नहीं रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर भी निवेश करके प्रापटी कमाई गई है। वहीं आपको बता दें कि इससे पहले भी ED द्वारा कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं अब पिछले कल यानीकि 17 अप्रैल को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया है। लिहाजा आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस विश्नोई के खिलाफ यह  बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

गवर्नर एस. गुरमीत सिंह ने श्री दरबार साहिब में माथा टेका, एडवोकेट धामी ने गोल्डन मॉडल देकर किया सम्मान

अमृतसर उत्तराखंड के गवर्नर एस. गुरमीत सिंह ने आज सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका। गुरु घर के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा दिखाते हुए उन्होंने दिव्य भजनों का कीर्तन सुना और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इन्फॉर्मेशन सेंटर में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह भी पढ़ें उत्तराखंड के गवर्नर गुरमीत सिंह ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेका सिख विरासत और पवित्र स्थानों पर चर्चा यह भी पढ़ें ढुलक स्कूल की पायलप्रीत अव्वल श्री दरबार साहिब के इन्फॉर्मेशन सेंटर में हुए एक खास सम्मान समारोह के दौरान, एडवोकेट धामी ने गवर्नर को सिरोपा, श्री हरमंदिर साहिब का एक सुनहरा मॉडल और धार्मिक किताबें भेंट कीं। पड़ोसी राज्य के साथ सहयोग: एडवोकेट धामी ने कहा कि उत्तराखंड में सिखों के पवित्र स्थानों (जैसे श्री हेमकुंट साहिब) के बारे में गवर्नर के साथ ज़रूरी चर्चा हुई। पॉजिटिव जवाब: गवर्नर गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड में सिख विरासत को बचाने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर मुमकिन मदद का भरोसा दिया। "यह गेट पूरी इंसानियत को एकता और विनम्रता का संदेश देता है। यहां मत्था टेककर मुझे एक नई स्पिरिचुअल एनर्जी मिली है।" — एस. गुरमीत सिंह, गवर्नर (उत्तराखंड) गवर्नर अमृतसर के रहने वाले हैं एडवोकेट धामी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि अमृतसर जिले के रहने वाले एस. गुरमीत सिंह आज एक ऊंचे संवैधानिक पद पर सेवा कर रहे हैं और अपनी कामयाबी के लिए गुरु साहिब का शुक्रिया अदा करने आए हैं। इस मौके पर मौजूद जानी-मानी हस्तियां शिरोमणि कमेटी के चीफ सेक्रेटरी कुलवंत सिंह मनन, सेक्रेटरी बलविंदर सिंह काहलवां, डिप्टी सेक्रेटरी हरभजन सिंह वक्ता, मैनेजर नरिंदर सिंह मथरेवाल और इन्फॉर्मेशन ऑफिसर अमृतपाल सिंह के साथ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर ADC अमित श्रीवास्तव, AIG जगजीत सिंह वालिया और ADCP हरपाल सिंह भी इस मौके पर मौजूद थे।

कपल्स के लिए पुलिस विभाग का कदम: 33 ट्रांसफर, पति-पत्नी एक ही जिले में करेंगे सेवा

रोहतास  शाहाबाद पुलिस प्रक्षेत्र के चारों जिलों रोहतास, भोजपुर, बक्सर और कैमूर में तैनात 33 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया गया है। इस निर्णय के बाद अब प्रक्षेत्र में कार्यरत पति-पत्नी एक ही जिले में रहकर अपनी ड्यूटी कर सकेंगे। प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश के अनुसार, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर यह तबादला आदेश जारी किया गया है। यह कदम पुलिसकर्मियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। पांच वर्ष की सेवा का तय था पैमाना  तबादलों के लिए कड़े मानक निर्धारित किए गए थे। इसके तहत केवल उन्हीं कर्मियों के आवेदनों पर विचार किया गया, जिन्होंने अपनी वर्तमान तैनाती स्थल पर कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। नियमानुसार किसी भी पुलिसकर्मी को उसके गृह जिले में पोस्टिंग नहीं दी गई है। साथ ही, पूरे सेवाकाल में इस आधार पर अधिकतम दो बार ही स्थानांतरण की सुविधा दी जाएगी। चूंकि ये सभी तबादले कर्मियों के स्वयं के अनुरोध पर किए गए हैं, इसलिए विभाग की ओर से किसी प्रकार का यात्रा या स्थानांतरण भत्ता नहीं दिया जाएगा। इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। मुख्यालय के निर्देशानुसार, कर्मियों को नए जिले के लिए विरमित करने से पहले संबंधित कार्यालय प्रमुख उनकी सर्विस बुक और अन्य अभिलेखों की गहन जांच करेंगे। किसी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर स्थानांतरण रोक दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कुल 70 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 37 आवेदनों को तकनीकी कारणों से निरस्त कर दिया गया। पात्रता पूरी करने वाले 33 पुलिसकर्मियों के तबादले की सूची जारी की गई है। पारिवारिक आधार पर प्रमुख तबादले     अनि राधिका रमण का सारण से कैमूर जिला बल में तबादला किया गया है। उनकी पत्नी रोहतास में शिक्षिका हैं।     अनि रश्मि का रोहतास से बांका जिला बल में स्थानांतरण हुआ है। उनके पति भागलपुर में पदस्थापित हैं।     अनि रणधीर कुमार का सहरसा से रोहतास जिला बल में तबादला किया गया है। उनकी पत्नी औरंगाबाद में शिक्षिका हैं।     सिपाही स्मृति का रोहतास से जमुई जिला बल में स्थानांतरण हुआ है। उनके पति जमुई में सहायक प्राध्यापक हैं। क्यों खारिज हुए 37 आवेदन? पुलिस मुख्यालय की समिति ने 70 में से 37 आवेदनों को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया। इसके प्रमुख कारण रहे:  

अक्षय तृतीया 2026: सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त और पूरी तिथि का विवरण

 हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को बेहद शुभ और फलदायी तिथि माना जाता है. यह पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, जो इस बार 19 अप्रैल 2026 को पड़ रही है. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी खत्म नहीं होता है, इसलिए इसे 'अक्षय' कहा गया है. इस खास मौके पर लोग सोना-चांदी खरीदना, दान-पुण्य करना और नए काम शुरू करना शुभ मानते हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार खरीदारी के लिए पूरे दिन के साथ अगले दिन सुबह भी अच्छा समय मिल रहा है. कब पड़ेगी यह शुभ तिथि? इस साल तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से हो रही है, जो 20 अप्रैल सुबह 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगी. ऐसे में मुख्य रूप से 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी, लेकिन 20 अप्रैल की सुबह भी कुछ समय तक शुभ योग बना रहेगा. सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त (Gold Buying Muhurat) अगर आप अक्षय तृतीया पर सोना या चांदी खरीदना चाहते हैं, तो 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट के बाद पूरे दिन खरीदारी कर सकते हैं. इसके अलावा 20 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 51 बजकर सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक भी शुभ समय रहेगा. इस बार लोगों को खरीदारी के लिए लंबा समय मिल रहा है, जो इसे और खास बनाता है. चौघड़िया मुहूर्त में कब करें खरीदारी? सुबह का समय (चर, लाभ, अमृत)- 10 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट दोपहर का समय (शुभ)- दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 35 मिनट तक शाम का समय (शुभ, अमृत, चर)- शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 57 मिनट तक इन समयों में खरीदारी करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है. अक्षय तृतीया का महत्व क्या है? अक्षय तृतीया को 'अखा तीज' भी कहा जाता है. यह दिन अबूझ मुहूर्त होता है, यानी बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी आप शुभ काम कर सकते हैं. शादी, गृह प्रवेश, मुंडन या नया बिजनेस शुरू करने के लिए यह दिन बहुत अच्छा माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी और भगवान परशुराम का जन्म भी इसी तिथि पर हुआ था.

यूपी की प्रशासनिक दक्षता को मिली मान्यता, मिशन कर्मयोगी में दूसरे स्थान पर रहा राज्य

प्रशासनिक दक्षता में यूपी को बड़ी उपलब्धि, मिशन कर्मयोगी में बड़े राज्यों में यूपी को दूसरा पुरस्कार केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों व यूटी के बीच असाधारण प्रदर्शन किया यूपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से तैयार हुआ कर्मयोगी कार्यबल नई दिल्ली/लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश को सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच असाधारण प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अलावा प्रदेश ने मिशन कर्मयोगी के तहत ‘साधना सप्ताह’ के दौरान 5 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले प्रदेशों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों में दूसरा पुरस्कार हासिल किया है। नई दिल्ली में एक प्रतिष्ठित समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के इस शानदार प्रदर्शन के लिए एम. देवराज, प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) उत्तर प्रदेश को सम्मानित किया। यह उपलब्धि सशक्त, कुशल और भविष्य के लिए तैयार उत्तर प्रदेश के निर्माण में मिशन कर्मयोगी की ठोस भूमिका का प्रमाण है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस विजन को भी दर्शाती है, जिसके तहत राज्य में नागरिक-केंद्रित, भविष्य के लिए तैयार और डिजिटली सशक्त ‘कर्मयोगी’ कार्यबल तैयार किया गया है। उत्तर प्रदेश को मिली इस सफलता के पैमाने भी ऐतिहासिक हैं। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 21.5 लाख से अधिक कर्मचारियों को जोड़ा गया। इसके साथ ही राज्य में रिकॉर्ड 1.25 करोड़ कोर्स पूरे किए गए, जो सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक हैं। कौशल विकास के क्षेत्र में भी योगी सरकार के खाते में जबरदस्त उपलब्धि दर्ज की गई। राज्य ने 10 लाख एआई दक्ष बैज और 16,000 कर्मयोगी उत्कर्ष बैज अर्जित किए, जो यूपी में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल को दर्शाते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ने क्षमता निर्माण में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर फ्रंटलाइन कर्मचारियों (समूह सी एवं डी) तक,  शासन में हर स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की।

चीन द्वारा ईरान को हथियार भेजने का शक, रहस्यमय विमान पहुंचे तेहरान – क्या ले आए?

तेहरान  मध्य एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान ईरान में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे। अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो। चीन का क्या कहना है? रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को साफ कहा कि सैटेलाइट जानकारी देने का दावा ‘पूरी तरह मनगढ़ंत’ हैं और अगर अमेरिका ने इन आधारहीन आरोपों के आधार पर कोई कार्रवाई की, तो जवाब दिया जाएगा. दूसरी तरफ, अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर कोई देश ईरान की सैन्य मदद करता पाया गया, तो उसके खिलाफ आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं।  ट्रांसपोंडर बंद करना क्या संकेत है? विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसपोंडर बंद करना असामान्य जरूर है, लेकिन हमेशा गलत इरादे का संकेत नहीं होता. कभी-कभी यह सुरक्षा या तकनीकी कारणों से भी हो सकता है. लेकिन यहां एक साथ कई विमानों का ऐसा करना और वह भी कम समय में संदेह को बढ़ाता है. इस बीच, जमीन पर कूटनीति भी जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने के संकेत हैं और लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य भी आंशिक रूप से खुल चुका है।  जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी। वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए राज्य सरकार ने शुरू किया ऑनलाइन प्रशिक्षण

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने राज्य सरकार ने उठाये कदम, दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण विशेषज्ञों ने संबद्ध अधिकारियों को दिया ऑनलाइन प्रशिक्षण भोपाल आगामी अक्षय तृतीया 20 अप्रैल के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों की संभावनाओं को पूरी तरह से रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग द्वारा 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006' के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रदेश भर के नामित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम, शुक्रवार को संचालनालय महिला बाल विकास भोपाल में हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करना और सूचना मिलते ही वैधानिक प्रक्रियाओं को गति देना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति के वरिष्ठ सलाहकार एवं अधिवक्ता श्री गुरमुख सिंह लाम्बा तथा यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के बाल संरक्षण अधिकारी श्री गोविंद बेनीवाल उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञों ने बाल विवाह प्रतिषेध कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को संविधान प्रदत्त उनकी शक्तियों और कर्तव्यों का बोध कराया। वरिष्ठ सलाहकार श्री लाम्बा ने कानूनी प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं श्री बेनीवाल ने सामाजिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक तालमेल के महत्व को रेखांकित किया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को विस्तृत रूप से बताया गया कि बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही किस प्रकार निषेधाज्ञा जारी करवाई जाए और यदि विवाह संपन्न हो चुका हो, तो उसे शून्य घोषित कराने की विधिक प्रक्रिया क्या होनी चाहिए। विशेषज्ञों ने पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर की जाने वाली त्वरित कार्रवाइयों और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली विभिन्न वैधानिक प्रक्रियाओं के बारे में भी ओरिएंटेशन किया। प्रशिक्षण में अधिकारियों ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और चुनौतियों को साझा किया, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान करते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अक्षय तृतीया के दौरान निगरानी तंत्र को अत्यंत संवेदनशील और सक्रिय रखा जाएगा जिससे किसी भी मासूम का भविष्य असुरक्षित न हो। इस महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्रशिक्षण में विभाग के राज्य और जिला कार्यालयों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।  

राजस्थान में ‘बहू-बेटी’ का फर्क खत्म, नौकरी पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

जयपुर राजस्थान में अब अनुकंपा नियुक्ति को लेकर 'बहू और बेटी' के बीच का कानूनी फर्क खत्म हो गया है. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट कर दिया कि ससुर की मौत के बाद उनकी बहू भी उतनी ही हकदार है, जितनी एक बेटी होती है. जस्टिस रवि चिरानियां की एकल पीठ ने सुंदरी देवी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए विभाग की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जो बहू को परिवार का हिस्सा मानने से कतरा रही थीं. कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग की सुस्ती और आपत्तियों पर सख्त नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि बहू को नौकरी से रोकना कानून की मूल भावना के खिलाफ है. डिवीजन बेंच के फैसले का दिया हवाला सुनवाई के समय अदालत ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को आइना दिखाया. कोर्ट ने याद दिलाया कि साल 2023 में ही डिवीजन बेंच यह तय कर चुकी है कि बहू को बेटी के समान ही माना जाए. जब कानूनी रूप से बहू अनुकंपा नियुक्ति के लिए पूरी तरह योग्य है, तो विभाग का तकनीकी अड़ंगे लगाना समझ से परे है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब न्यायपालिका पहले ही इस मुद्दे पर स्थिति साफ कर चुकी है, तो प्रशासन को इसमें नई आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है. बेटे की बीमारी और मौत ने बढ़ाई मुश्किलें इस मामले के पीछे एक परिवार के संघर्ष की लंबी कहानी है. याचिकाकर्ता के वकील आरसी गौतम ने कोर्ट को बताया कि सुंदरी देवी के ससुर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात थे और 19 नवंबर 2016 को ड्यूटी के दौरान ही उनकी मौत हो गई. उस समय मृतक के इकलौते बेटे यानी सुंदरी के पति एक गंभीर हादसे का शिकार होकर बिस्तर पर थे. ऐसे में बहू ने ही परिवार को संभालने के लिए अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन किया, जिसे विभाग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया. इस बीच 25 मई 2020 को सुंदरी के पति का भी निधन हो गया, जिससे पूरे परिवार के गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया. 30 दिन की नियुक्ति पत्र सौंपने के आदेश हाईकोर्ट ने सुंदरी देवी के हक में फैसला देते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग को अल्टीमेटम दिया है. अदालत ने कहा कि विभाग बिना किसी बहानेबाजी के अगले 30 दिनों में याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र सौंपे. कोर्ट ने कड़ी हिदायत दी है कि अब किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन नहीं आनी चाहिए और प्रक्रिया में एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं होगी. 45 दिन में पेश करनी होगी रिपोर्ट अदालत ने इस मामले में सीधे अधिकारियों की जवाबदेही तय की है. कोर्ट ने आदेश दिया कि 45 दिनों के भीतर इस फैसले पर अमल की रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की जाए. जस्टिस चिरानियां ने सख्त चेतावनी दी कि यदि आदेश लागू करने में लापरवाही हुई, तो जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी. इस फैसले ने उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद जगाई है जो ससुराल में रहकर पूरे परिवार का सहारा बनी हुई हैं.

सफलता की मिसाल: ड्रोन के साथ हौसलों को नई उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा

सफलता की कहानी: ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं और आजीविका मिशन से मिली पहचान भोपाल सरकार द्वारा संचालित आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। रायसेन जिले के सांची विकासखण्ड के ग्राम रतनपुर गिरधारी निवासी श्रीमती सरूपी मीणा आजीविका मिशन से जुड़कर आज आर्थिक रूप में ना सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी हैं। श्रीमती सरूपी मीणा द्वारा सांची में रूरल मार्ट का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने ड्रोन दीदी के नाम से भी अपनी अलग पहचान बनाई है। आर्थिक तंगी से उभरकर आत्मनिर्भर बनीं सरूपी मीणा श्रीमती सरूपी मीणा ने बताया कि वे 10वीं तक शिक्षित थीं। उनके पति कृषि कार्य करते थे, जिससे बड़ी मुश्किल से परिवार का भरण-पोषण हो पाता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपनी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं, जबकि उनकी इच्छा पढ़ाई जारी रखने की थी। कुछ वर्ष पहले आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने गांव में भ्रमण कर महिलाओं को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उस समय सरूपी मीणा बेरोजगार थीं और आगे बढ़ने के अवसर तलाश रही थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और समूह से ऋण लेकर अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की। साथ ही, उन्होंने समूह निर्माण और सर्वे कार्य सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के रूप में काम करना शुरू किया, जिससे उन्हें मानदेय मिलने लगा। समूह से प्राप्त ऋण और मानदेय के सहयोग से उन्होंने एक किराना दुकान प्रारंभ की। इसके अलावा, उन्हें बैंक सखी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनके समूह का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) भी स्वीकृत हुआ। इन सभी कार्यों से उनकी मासिक आय 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच गई। बाद में उन्होंने सीएससी सेंटर का संचालन भी शुरू किया, जिससे उनकी आय में और वृद्धि हुई। निरंतर मेहनत और लगन के चलते श्रीमती सरूपी मीणा ने अपनी शिक्षा जारी रखते हुए स्नातक तक की पढ़ाई पूर्ण कर ली। आजीविका मिशन से मिली पहचान, ड्रोन तकनीक से बढ़ी आय श्रीमती सरूपी मीणा की लगन और मेहनत के कारण उन्हें सांची में रूरल मार्ट का संचालन करने का अवसर मिला। वह रूरल मार्ट में दीदी समूहों के उत्पादों का विक्रय एवं अन्य सामग्री का विक्रय करने का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त श्रीमती सरूपी मीणा को वर्ष 2023-24 में नमो ड्रोन योजना का भी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि नमो ड्रोन योजना में चयनित होने के बाद उन्हें ग्वालियर में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन दिया गया। कम्पनी से आए इंजीनियर ने भी उन्हें ड्रोन चलाने का पूरा प्रशिक्षण दिया। जिसके बाद वह खेतों में ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करने लगी। इस प्रकार उन्हें प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख रू की आमदनी हो जाती है। श्रीमती सरूपी मीणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ ही समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है।