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200 टन का बॉयलर और 308 पहियों वाला ट्रक बना आकर्षण, ओवरब्रिज काटकर निकाला गया

लखीमपुर खीरी लखीमपुर खीरी जिले के ग्राम कुंभी में लगने वाली शुगर मिल के लिए जा रहे इस भारी भरकम बॉयलर से ज्यादा 308 पहियों वाले बाहुबली ट्रक की चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर ये ट्रक छाया है। इस ट्रक को पास कराने के लिए साथ में पुलिस भी चल रही है। बेल्जियम से समुद्र के रास्ते आए बॉयलर और बाहुबली ट्रक को देखने के लिए लोगों की सड़कों पर लाइनें लग रही हैं। लोग वीडियो और सेल्फी लेने के लिए उमड़ रहे हैं, जिसके चलते ट्रक आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसको लेकर देखते हुए अब ट्रक का रूट बदलना पड़ गया है। पहले जिस रूट से होकर ट्रक को लखीमपुर पहुंचना था, अब उस रास्ते से ट्रक नहीं जाएगा। गुरुवार को 308 पहियों वाला ट्रेलर हरहुआ से रिंग रोड फेज-1 होते हुए संदहा के पास पहुंचा था, यहां स्वर्वेद मंदिर के पास फुट ओवरब्रिज को देर शाम तक काटा गया। इसके बाद ट्रक को फुट ओवरब्रिज को काटकर नीचे से गुजारा गया। हरहुआ से चलकर उमरहां के पास जैसे ही 200 टन वजनी बॉयलर लेकर चल रहे 308 पहियों वाला विशाल ट्रेलर पहुंचा, स्वर्वेद महामंदिर के सामने बना पैदल फुट ओवरब्रिज बाधा बन गया। ट्रेलर को सुरक्षित निकालने के लिए फुट ओवरब्रिज को काटकर हटाना शुरू कर दिया गया। स्थानीय लोगों की निगाहें भी इस विशाल ट्रेलर पर टिकी रहीं। संभावना जताई गई कि ट्रेलर गुरुवार देर रात उमरहां पहुंचेगा। इसके बाद गाजीपुर से होते हुए आगे रवाना होगा। उधर वाहन के गुजरने के दौरान हरहुआ, संदहा, उमरहा आदि जगहों पर रीलबाज जमा थे। सभी वीडियो, फोटो, सेल्फी ले रहे थे। डाफी प्लाजा पर ट्रक का कटा 693 रुपये का टोल लखीमपुर खीरी की शुगर मिल के लिए वेसल बॉयलर लेकर जा रहा 308 पहियों वाला मल्टी एक्सल वैक्यूम ट्रेलर बुधवार दोपहर 12 बजे के बाद डाफी टोल प्लाजा से आगे बढ़ा। वह उल्टे लेन से होता हुआ रखौना से रिंग रोड गया। गंजारी स्टेडियम के पास वह अपने लेन में आ गया और देर शाम कोईराजपुर के पास पहुंचा। यहां से गुरुवार सुबह संदहा होते हुए गाजीपुर के लिए रवाना हुआ। डाफी प्लाजा पर इसका 693 रुपये का टोल कटा। बॉयलर बुधवार को डाफी टोल प्लाजा से चलकर अखरी, लठिया, कन्नाडाड़ी, मोहनसराय होते हुए राजातालाब पहुंचा। ट्रक के लिए काटना पड़ा ओवरब्रिज 308 पहियों वाला 200 टन वजनी यह ‘बाहुबली’ ट्रेलर वॉयलर लेकर 1:30 बजे मोहनसराय पहुंचा। मोहन सराय में संकेतक बोर्ड खोला गया जबकि मोहन सराय-गंगापुर मोड़ पर फुट ओवर ब्रिज पहले से काट दिया गया था। ट्रेलर के पहुंचने पर जेसीबी से संकेतक एवं एफओबी के हिस्से को ऊपर उठाया गया। ट्रेलर के गुजरने के पुन: एफओबी को सही किया गया। ट्रेलर रखौना होते हुए रिंग रोड फेज-2 से आगे बढ़ा। उसके गुजरने के दौरान संबंधित मार्गों पर आम ट्रैफिक रोकी जाती रही। एक दिन पहले बदला गया था सर्विस लेन बेल्जियम से समुद्र के रास्ते ओडिशा पहुंची ओवर डायमेंशन कार्गो बॉयलर मशीन बीते शुक्रवार को बिहार से जिले के नौबतपुर बार्डर पर पहुंच गई थी। करीब दो सौ टन वजनी मशीन को 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लादकर ओडिशा से सड़क मार्ग से लाया जा रहा है। इस मशीन को यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के बलरामपुर में बन रहे प्लांट में लगाया जाना है। शुक्रवार को नौबतपुर से रवाना ट्रेलर के कटसिला के पास हाइवे पर शाम होने की वजह से रोक दिया गया था। शनिवार को पचफेड़वा के पास हाइवे पर रिंग रोड का पुल होने के कारण वैकल्पिक मार्ग के रूप में उसे पहले रिंग रोड पर ले जाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दलदल में फंस चुका है 308 पहियों वाला ट्रक रविवार को मशीन रेवसा के पास रिंग रोड की पूर्वी सर्विस लेन पर पहुंची। लेकिन आगे जमीन दलदली होने से मशीन को सर्विस लेन पर ही रोक दिया गया था। लेकिन देर शाम ट्रेलर रिंग रोड पार करके पश्चिमी लेन पर पहुंच गया। दो दिनों से ये ट्रक चंदौली में ही फंसा था। ट्रक को निकालने के लिए रास्ता बनाया जा रहा है। बतादें कि लखीमपुर खीरी जिले के ग्राम कुम्भी में मैसर्स बलराम चीनी मिल लिमिटेड द्वारा निर्मित हो रहे देश के पहले बायोप्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए यह बॉयलर लाया जा रहा है। इस अति-विशिष्ट व भारी-भरकम इक्विपमेंट की लंबाई 41 मीटर, चौड़ाई 6 मीटर, ऊंचाई 7 मीटर और वजन 164.28 मीट्रिक टन है। ट्रैफिक पुलिस ने इस ट्रक को चंदौली की सीमा से पार कराकर जनपद वाराणसी में प्रवेश कराया है।

झारखंड शिक्षक नियुक्ति विवाद में बड़ा अपडेट, करीब 100 अपील याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई

रांची  स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़े मीना कुमारी मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से दायर अपील याचिकाओं पर 13 अक्तूबर को सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने सुनवाई के लिए उक्त तिथि निर्धारित की है. यह जानकारी प्रतिवादी मीना कुमारी की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने दी. पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय और जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिप्रावाल ने अदालत को बताया था कि मामले से जुड़ी कुछ अन्य अपीलें भी हैं, जिनमें इसी तरह के मुद्दे उठाये गये हैं. इस पर अदालत ने सरकार और जेएसएससी को संबंधित अपील याचिकाओं की सूची सौंपने का निर्देश दिया था. बताया गया कि राज्य सरकार और जेएसएससी की ओर से अलग-अलग लगभग 100 अपील याचिकाएं दायर कर मीना कुमारी व अन्य के मामले में एकल पीठ द्वारा पारित आदेशों को चुनौती दी गयी है. पूर्व में खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश के अनुपालन को लेकर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई पर रोक लगा दी थी. एक सितंबर को एकल पीठ ने दिया था फैसला एकल पीठ ने एक सितंबर को मीना कुमारी सहित 258 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति से जुड़े विवाद की जांच के लिए हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमीशन गठित किया था. कमीशन को पूरे मामले की जांच और सुनवाई कर तीन माह के अंदर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपनी थी. कमीशन की रिपोर्ट को मंत्रिमंडल के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया था. राज्य सरकार को अधिकतम छह सप्ताह के अंदर रिपोर्ट पर निर्णय लेने को कहा गया था. वहीं, अन्य रिक्त 2034 सीटों पर नियुक्ति के लिए याचिकाकर्ताओं को आठ सप्ताह के अंदर अपना अभ्यावेदन जेएसएससी के सचिव को देने का निर्देश दिया गया था. प्राप्त अभ्यावेदनों पर जेएसएससी को छह माह के अंदर नियुक्ति की कार्रवाई पूरी करनी थी. हालांकि, जस्टिस एसएन पाठक द्वारा कमीशन में शामिल होने में असमर्थता जताये जाने के बाद हाइकोर्ट ने सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन का अध्यक्ष बनाया. वर्तमान में कमीशन मामले की जांच कर रहा है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कमीशन ने सरकार और जेएसएससी से मेरिट लिस्ट, नियुक्त अभ्यर्थियों के नाम, प्राप्तांक और नियुक्ति तिथि समेत संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं. कमीशन को इन बिंदुओं पर देनी है रिपोर्ट कमीशन को मुख्य रूप से यह जांच करनी है कि जेएसएससी ने 2 अगस्त 2022 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद नियुक्तियां करने से पहले उसके निर्देशों के अनुरूप संशोधित योग्यता सूची और अन्य योग्यता सूचियां तैयार की थीं या नहीं. इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं से कम अंक प्राप्त करने वाले पहले से नियुक्त और संरक्षित अभ्यर्थियों में से कितने अभ्यर्थियों को समायोजित किया गया तथा उनकी नियुक्ति और कार्यभार ग्रहण करने की वास्तविक तिथियां सुप्रीम कोर्ट के 2 अगस्त 2022 के निर्णय से पहले की हैं या उसके अनुरूप हैं, इसकी भी जांच होनी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में शामिल मूल रिट याचिकाकर्ताओं में से कितने ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिनके अपने-अपने विषयों में याचिकाकर्ताओं से कम अंक हैं और जिन्हें प्रतिवादियों द्वारा नियुक्त किया गया है, इसकी भी जांच की जानी है. साथ ही यह भी देखा जाना है कि वे उक्त श्रेणी में नियुक्ति के लिए योग्य थे या नहीं. कमीशन को यह भी सत्यापित करना है कि वर्ष 2019 में अनुपस्थित रहने या कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले अभ्यर्थियों से संबंधित रिक्तियां, जिनकी संख्या काफी अधिक बतायी गयी है और जिन्होंने अभ्यावेदन नहीं दिया है, वास्तव में कम योग्यतावाले अभ्यर्थियों से भरी गयी हैं या नहीं. इसके अतिरिक्त, जिन अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी वैध कारणों से अस्वीकृत की गयी थी, उन्हें बाद में नियुक्ति दी गयी या नहीं और जिन अभ्यर्थियों के अंक याचिकाकर्ताओं से कम हैं, उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले या 2 अगस्त 2022 के बाद हुई या नहीं, इसका भी सत्यापन किया जाना है. 9613 रिक्तियों को लेकर भी होगी जांच कमीशन को यह भी देखना है कि राज्य सरकार के 23 फरवरी 2024 के संकल्प के अनुसार कुल 9613 रिक्तियां भरी जानी थीं, तो ये रिक्तियां कैसे और कब भरी गयी. इसके साथ ही विज्ञापित कुल 17,784 रिक्तियों में से 12,046 अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावी रूप से दिये जाने और उन्हें नियुक्ति मिलने से संबंधित स्थिति की भी जांच की जानी है. इसके अलावा वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन मामले से जुड़े किसी अन्य पहलू या मुद्दे को भी अपनी जांच में शामिल कर सकता है. वर्ष 2016 में शुरू हुई थी चयन प्रक्रिया जेएसएससी ने वर्ष 2016 में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की थी. इसके माध्यम से राज्य के हाइस्कूलों में 17,752 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी. नियुक्ति जिलावार मेरिट लिस्ट और स्टेटवाइज मेरिट लिस्ट के आधार पर की गयी थी.मामले में बड़ी संख्या में पद खाली रहने और एक ही नियुक्ति परीक्षा में दो तरह की मेरिट लिस्ट होने को लेकर विवाद सामने आया. इसी विवाद से जुड़े अभ्यर्थियों ने हाइकोर्ट का रुख किया था. मीना कुमारी और अन्य से संबंधित याचिकाओं पर हाइकोर्ट की एकल पीठ के फैसले के बाद अब वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन पूरे मामले की जांच कर रहा है.

पूर्वी चंपारण में बड़ा हादसा, नहाने के दौरान गहरे पानी में गईं 4 बच्चियां; डूबने से मौत

 पूर्वी चंपारण बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक बड़ा हादसा हो गया है। यहां एक साथ 8 बच्चियां एक पोखर में डूब गईं। इस हादसे में 4 बच्चियों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि पहाड़पुर में स्नान के दौरान पोखर में डूबने से चार बच्चियों की मौत हो गई। घटना पहाड़पुर थाना क्षेत्र के इनरवाभार पंचायत के बनकट गांव में शुक्रवार सुबह करीब दस बजे की है। मृतकों में दो सगी बहनें भी हैं। मिली जानकारी के अनुसार 8 बच्चियां 1 बच्चा पोखर में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान चार बच्चियां गहरे पानी में चली गई। जिससे डूबने से उनकी मौत हो गई। इसके बाद अन्य बच्चों ने पानी से निकल घर वालों को सूचना दी। जिसके बाद ग्रामीणों ने पहुंच कर शवों को निकाला। मृतकों में प्रमोद महतो उर्फ भिखारी महतो की दो पुत्री सोनामती कुमारी(13) व फूलमती कुमारी(11), अच्छेलाल पासवान की पुत्री प्रतिमा कुमारी( 7) और वीरेंद्र महतो की पुत्री कृति कुमारी(11) शामिल हैं। इनमें सोनमती वर्ग 6, फूलमती वर्ग 4, कृति वर्ग 5 व प्रतिमा वर्ग 1 की छात्रा थी। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। इस दर्दनाक हादसे की खबर पुलिस को भी मिला। इसके बाद अरेराज डीएसपी पंकज कुमार मिश्र ने सूचना पर घटनास्थल का जायजा लिया। इधऱ घटना के बाद से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। उनका रो रो कर बुरा हाल है। गांव के लोग हादसे से सन्न हैं।

गांधी जयंती पर खादी को बढ़ावा, CM योगी ने किया 25% छूट का ऐलान; 30 जनवरी 2027 तक मिलेगा लाभ

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो अक्टूबर शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनको नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लखनऊ के हजरतगंज में श्री गांधी आश्रम खादी ग्रामोद्योग बोर्ड भवन भंडार से खादी के वस्त्रों की खरीदादारी करने के साथ लोगों से खादी को अपनाने की अपील भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम गांधी आश्रम के कपड़ों को हम बचपन मे बड़ी उत्सुकता से देखते थे। आज उसको अंगीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांधी आश्रम का यह चरखा केवल चरखा नही,बल्कि भारत के स्वावलंबन आत्मनिर्भरता का आधार है। ग्राम स्वराज की जो परिकल्पना बापू ने की थी, उसको लेकर पहले बड़े-बड़े दावे होते थे। सच्चाई क्या थी, हमने गांव को उपेक्षित छोड़ दिया। बापू की जयंती पर खादी को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हजरतगंज (लखनऊ) के गांधी आश्रम से खादी का गमछा खरीदकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि खादी अपनाएं, स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाएं। गांव भी स्वावलम्बन का आधार बनेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूज्य बापू के सपने को साकार करते हुए गांव भी स्वावलम्बन का आधार बनेगा, इसके लिए सरकार ने हर गांव में ग्राम सचिवालय का गठन किया है। ग्राम सचिवालय के माध्यम से चार से सात लोगों को गांव में ही रोजगार की सुविधा प्राप्त हो रही है। जो समाज अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव रखकर कृतज्ञता ज्ञापित करेगा,भावी पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा उसका भविष्य अवश्य उज्ज्वल होगा। नया भारत आज उसी सपने को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से लगा हुआ है। गांधी जयंती पर प्रदेशवासियों को बड़ा उपहार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर प्रदेशवासियों को बड़ा उपहार भी दिया। उन्होंने कहा कि खादी भारत की स्वाधीनता का मंत्र है, प्रदेश सरकार ने खादी के वस्त्रों पर 30 जनवरी 2027 तक 25 फीसदी की छूट उपलब्ध कराई है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि हर व्यक्ति खादी को जीवन का हिस्सा बनाकर कारीगरों, हस्तशिल्पियों व बुनकरों के हुनर को सम्मान दे। भारत की आजादी का मंत्र बना था ‘स्वदेशी से स्वावलंबन’ सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की स्वाधीनता के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 157वीं तथा सादगी, सज्जनता के लिए प्रसिद्ध भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती है। बापू का ‘स्वदेशी से स्वावलंबन’ भारत की आजादी का मंत्र बना था। आजादी का जो आंदोलन पहले बिखरा था, वह बापू के नेतृत्व में जनांदोलन बना। जिसके कारण ब्रिटिश हुकूमत को भारत छोड़कर भागने को मजबूर होना पड़ा। स्वाधीनता के महानायकों के प्रति कृतज्ञता मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी का आत्मनिर्भरता व स्वावलंबन का मंत्र ही विकसित भारत की आधारशिला बनेगा, इसीलिए पीएम मोदी जी ‘लोकल टू ग्लोबल’ की चर्चा करते हैं। उनका मानना है कि गांवों, कारीगरों, हस्तशिल्पियों, बुनकरों द्वारा बनाए गए उत्पादों को प्रोत्साहित करना और प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना भारत की स्वाधीनता के महानायकों के प्रति कृतज्ञता भी है। आंदोलन को नेतृत्व देकर बनाया जनांदोलन उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को नेतृत्व देकर जनांदोलन में बदलने का काम किया। आंदोलन को जनांदोलन बनाने को लेकर उनके मंत्र आज भी प्रासंगिक हैं। हर नागरिक स्वदेशी और स्वच्छता,स्वावलंबन को अपने जीवन का मंत्र बनाये इसके लिए बापू के उस समय के वचन आज भी एक मंत्र के रूप में काम कर रहे हैं। जिस देश मे हताशा,निराशा थी,पूज्य बापू के मार्गदर्शन में ही वह निराशा हताशा से निकल कर भारतीय समाज उत्साह के साथ आंदोलन का हिस्सा बन गया। यह चंद नगरों तक नही,बल्कि हर गांव पहुंचा,हर नर नारी बच्चे इस अभियान का हिस्सा बने। जो संकल्प बापू ने स्वाधीनता के रूप में संकल्प लिया था,आज उसी सपने को स्वतंत्र भारत मे आज प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छ भारत अभियान को पूज्य बापू के सपने को लागू किया। यह स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत की आधारशिला बनी,साथ ही नारी गरिमा का पाठ भी पढ़ाया।

ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा सैन्य कदम, 10 हजार सैनिकों के साथ तीसरा कैरियर तैनात

वाशिंगटन  अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध शांत होने के बजाय एक नए और अत्यधिक विस्फोटक स्टेज में पहुंच गया है. पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य बल को अत्यधिक मजबूत करते हुए एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात करने का निर्णय लिया है।  सैन डिएगो से रवाना हुआ नौसेना का विमानवाहक पोत 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' (USS Theodore Roosevelt) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इसके साथ ही मरीन सैनिकों से लैस 'यूएसएस मेकिन आइलैंड' (USS Makin Island) एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है, जिससे इलाके में लगभग 9,000 से 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों और नौसैनिकों की तैनाती होने जा रही है।  पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन (USS George Washington) पहले से ही मोर्चा संभाले हुए हैं. यदि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन क्षेत्र में बना रहता है, तो अक्टूबर के अंत तक रूजवेल्ट के पहुंचने पर एक ही समय में तीन-तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स की उपस्थिति दर्ज की जाएगी।  अप्रैल 2026 के बाद यह पहला अवसर होगा जब अमेरिका ने एक साथ तीन परमाणु-संचालित युद्धपोत बेड़ों को इस संवेदनशील क्षेत्र में उतारा है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका के 50,000 से अधिक सैनिक और लगभग 20 अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत पहले से तैनात हैं, जो किसी भी बड़े सैन्य टकराव के लिए अमेरिका की पूर्ण युद्ध तत्परता को दर्शाते हैं।  चौतरफा दबाव बनाने का प्रयास अमेरिका की इस भारी सैन्य वृद्धि को ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने और क्षेत्रीय सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजरानी की सुरक्षा के साथ-साथ ईरान समर्थित गुटों के किसी भी हमले को विफल करना इसका मुख्य लक्ष्य है।  विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर युद्धपोतों, उन्नत लड़ाकू विमानों और नौसैनिक मरीन बलों का जमावड़ा केवल सुरक्षात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियानों की पूर्व-तैयारी का संकेत भी देता है।  दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी सैन्य जमावड़े के जवाब में अपने मिसाइल रक्षा प्रणालियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को हाई-अलर्ट पर रख दिया है. तेहरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि किसी भी अमेरिकी उकसावे या संप्रभुता के उल्लंघन का कड़ा और सीधा जवाब दिया जाएगा।  इस कूटनीतिक और सैन्य खींचतान के कारण अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है और फारस की खाड़ी के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. तनाव का यह नया चरण वैश्विक शांति के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो रहा है।  पेंटागन द्वारा अतिरिक्त 10,000 सैनिकों की तैनाती और नौसेना की इस आक्रामक गोलबंदी ने कूटनीतिक वार्ताओं की गुंजाइश को लगभग समाप्त कर दिया है. यदि किसी भी पक्ष से छोटी सी भी रणनीतिक चूक होती है, तो यह तनाव एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके गंभीर दुष्परिणाम न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भुगतने पड़ सकते है। 

जब झारखंड पहुंचे महात्मा गांधी, मजदूरों-किसानों से किया संवाद; जानें उनकी 6 ऐतिहासिक यात्राएं

रांची राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का झारखंड से गहरा और ऐतिहासिक नाता रहा है, जिन्होंने अपनी विभिन्न यात्राओं के दौरान इस क्षेत्र में चंपारण सत्याग्रह की रणनीति से लेकर रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन तक अहम भूमिका निभाई। कोयला खदानों से लेकर दलित उत्थान तक, बापू के कदम झारखंड की माटी पर अमिट छाप छोड़ गए। आइए जानते हैं उनकी इन ऐतिहासिक यात्राओं के बारे में। एक ऐसी भूमि जहां कोयला की कालिमा और किसानों की पीड़ा के बीच उन्होंने अहिंसा की मशाल जलाई। तत्कालीन बिहार के हिस्से रहे झारखंड में गांधीजी की कम से कम छह प्रमुख यात्राएं दर्ज हैं, जो चंपारण सत्याग्रह से लेकर रामगढ़ कांग्रेस तक फैली हैं। इनमें रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, झरिया (धनबाद) और डालटनगंज जैसे इलाकों में उन्होंने मजदूरों, किसानों और हरिजनों से संवाद किया, फंड संग्रह किया और सामाजिक सुधारों को गति दी। कोयला उद्योगपतियों से मिले दान से लेकर हिंसक विरोध तक, ये यात्राएं गांधीजी की विरासत का जीवंत हिस्सा हैं। आइए, क्रमवार इन ऐतिहासिक पड़ावों पर नजर डालते हैं। 1917: चंपारण की राह में रांची गांधीजी की झारखंड से पहली मुलाकात 4 जून 1917 को हुई, जब वे वर्धा आश्रम से चंपारण जा रहे थे। रांची पहुंचकर उन्होंने स्थानीय नेताओं से चर्चा की और चंपारण के नील किसानों के शोषण पर रणनीति बनाई। इसी साल जमशेदपुर (तत्कालीन कालिमाटी) से गुजरते हुए उन्होंने किसानों की दुर्दशा पर ध्यान केंद्रित किया। यह यात्रा सत्याग्रह की नींव रखने वाली थी, जिसने गांधीजी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। 1921: असहयोग की लहर झरिया तक 1921 में असहयोग आंदोलन के सिलसिले में गांधीजी झरिया (धनबाद) पहुंचे, जहां कोयला मजदूरों की समस्याओं पर फोकस किया। उन्होंने सार्वजनिक सभाओं में अहिंसा और स्वदेशी का प्रचार किया, जिससे मजदूरों में जागृति आई। इसी साल नवंबर में झरिया में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस का दूसरा सत्र हुआ, जो गांधीजी के प्रभाव से प्रेरित था। हालांकि फंड संग्रह अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन यह दौरा झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने वाला साबित हुआ। जब जमशेदपुर आए थे गांधी जी, युनाइटेड क्लब में लगी बापू की तस्वीर। (सौजन्य: सुरेश संथोलिया) 1925: जमशेदपुर में मजदूरों से संवाद सितंबर 1925 में गांधीजी रांची पहुंचे, जहां खादी और ग्रामोद्योग जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया। हजारीबाग में सरस्वती देवी और अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। जमशेदपुर में उन्होंने टाटा वर्कर्स यूनियन की नींव रखी, मजदूरों की समस्याएं सुनीं और यूनाइटेड क्लब में सभा को संबोधित किया।टाटा परिवार की सराहना की और देवघर में हरिजनों को मंदिर प्रवेश की परंपरा की प्रशंसा की। राजेंद्र प्रसाद और फ्रंटियर गांधी उनके साथ थे। 1927: डालटनगंज में दलित उत्थान का आह्वान 1927 में गांधीजी डालटनगंज (पलामू) पहुंचे, जहां राजेंद्र प्रसाद के साथ दलित उत्थान पर फोकस किया। ग्रामीण समुदायों से बातचीत की और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया। यह यात्रा झारखंड के पिछड़े इलाकों में गांधीवादी विचारों को फैलाने में सहायक रही। 1934: देवघर में खतरे का सामना 1934 में गांधीजी झरिया (धनबाद) पहुंचे, जहां हरिजन उत्थान और राष्ट्रीय शिक्षा के लिए फंड संग्रह किया। स्थानीय लोगों ने 60 हजार रुपये दान दिए, जिसमें कोयला उद्योगपतियों और मारवाड़ी व्यापारियों का बड़ा योगदान था। जमशेदपुर में जवाहरलाल नेहरू के साथ स्टील वर्क्स का दौरा किया और हरिजन बस्तियों में धन संग्रह किया। लेकिन देवघर में 25 अप्रैल को जसीडीह स्टेशन पर पंडों ने लाठियों से हमला किया, कारण था हरिजन मंदिर प्रवेश अभियान। गांधीजी की अहिंसा ने स्थिति को शांत किया। 1940 में रामगढ़: झारखंड का ऐतिहासिक क्षण 1940 में गांधीजी की अंतिम प्रमुख यात्रा रांची में हुई, जहां रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन में भाग लिया। कोकर में जायसवाल परिवार के घर रुके। कार से रामगढ़ गए। खादी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। नेहरू, पटेल जैसे नेताओं के साथ यह सत्र स्वतंत्रता की दिशा तय करने वाला था। वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ चौधरी कहते हैं- गांधीजी की झारखंड यात्राएं स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय, मजदूर अधिकार और हरिजन उत्थान पर केंद्रित रहीं। आज उनका कमरा और कार संरक्षित हैं। झरिया की खदानें उनकी स्मृतियों को सहेजे हुए हैं। ये यात्राएं झारखंड की विरासत को रोशन करती रहेंगी, युवाओं को प्रेरित करती हुईं।

सरकारी योजनाओं में साइबर फ्रॉड पर सख्ती, DBT और PM-KISAN प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बढ़ेगी

झालावाड़ जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा को लेकर शासन सचिवालय में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने साइबर अपराध के खिलाफ जिले में की जा रही कार्रवाई और ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ के निष्कर्षों पर प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए राजस्थान पुलिस को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी झालावाड़ एसपी के प्रयासों की प्रशंसा की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दिए गए प्रस्तुतीकरण में एसपी अमित कुमार ने ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ के दौरान साइबर अपराध से जुड़े मामलों में की गई कार्रवाई, आरोपियों के तौर-तरीकों (Modus Operandi) और जांच के दौरान सामने आई प्रणालीगत कमियों की जानकारी दी। साथ ही, भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए संबंधित विभागों के साथ किए जा रहे समन्वय और निवारक उपायों पर भी चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), आपदा प्रबंधन सूचना प्रणाली (DMIS), सामाजिक सुरक्षा पेंशन और जन आधार से जुड़ी व्यवस्थाओं में साइबर सुरक्षा के पहलुओं को भी शामिल किया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करना जरूरी है। मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया पर की तारीफ मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 1 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर झालावाड़ एसपी के प्रस्तुतीकरण को “brilliant presentation” बताया। उन्होंने डीबीटी से जुड़ी व्यवस्थाओं में साइबर अपराध से मुकाबले के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए राजस्थान पुलिस को बधाई दी। उन्होंने संबंधित विभागों को डिजिटल प्लेटफॉर्म की नियमित सुरक्षा समीक्षा करने और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक तकनीकी अपडेट सुनिश्चित करने पर जोर दिया। एसओजी को सौंपी गई सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी की जांच बैठक के एजेंडे में सरकारी योजनाओं में हुई धोखाधड़ी की जांच और उसकी प्रभावी निगरानी भी शामिल रही। सरकारी योजनाओं से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों की जांच एसओजी को सौंपी गई है। बैठक में जांच की प्रभावी निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर चर्चा की गई। DMIS और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी समीक्षा आपदा प्रबंधन, राहत एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से संचालित DMIS योजना के तहत ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ के दौरान बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का पता चला है। बैठक में इस मामले से सामने आए अनुभवों और अन्य योजनाओं की सुरक्षा के लिहाज से उनके उपयोग पर चर्चा की गई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं में धोखाधड़ी की स्थिति और उसके निराकरण के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। IT सिस्टम और PM-KISAN पर भी चर्चा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के तहत विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के पोर्टल और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंधन एवं रखरखाव से जुड़े सुधारात्मक उपायों पर चर्चा हुई। वहीं, सहकारिता विभाग, जो PM-KISAN योजना के क्रियान्वयन में नोडल प्राधिकरण है, से जुड़ी धोखाधड़ी वाली दावों की स्थिति पर भी विचार किया गया। बैठक में साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों के अनुरूप सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा मजबूत करने, तकनीकी कमियों की पहचान करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।

बिहार के शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट, 2015 से पहले नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों को करना होगा D.El.Ed

पटना 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आलोक में शिक्षा विभाग ने ऐसी नियुक्तियों को अवैध माना है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक निशांत विवेक ने सभी जिलाधिकारियों को ऐसे शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई का निर्देश दिया है। वहीं 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा में डीएलएड करना अनिवार्य होगा। 31 मार्च 2015 बनी नियुक्ति की कटऑफ शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षक इस कार्रवाई के दायरे में आएंगे। दूसरी ओर, इस तारीख से पहले नियुक्त शिक्षकों को अपनी निर्धारित शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यता पूरी करनी होगी। ऐसे शिक्षकों को 31 अगस्त तक अनिवार्य रूप से डीएलएड करना होगा। बर्खास्त शिक्षकों की फिर हो सकती है बहाली प्राथमिक शिक्षा निदेशक के आदेश में यह भी कहा गया है कि जिन अप्रशिक्षित शिक्षकों को उच्च न्यायालय के 30 मार्च 2024 के आदेश के आलोक में बर्खास्त किया गया था, उन्हें दोबारा सेवा में लेने की कार्रवाई की जाएगी। संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे। डीएलएड परीक्षा का परिणाम जल्द होगा जारी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में आयोजित डीएलएड परीक्षा का परिणाम यथाशीघ्र घोषित करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि 31 मार्च 2028 के बाद समय विस्तार की कोई प्रार्थना स्वीकार नहीं की जाएगी। ऐसे में शिक्षकों के लिए निर्धारित योग्यता हासिल करना जरूरी होगा। आरटीई एक्ट के बाद योग्यता हुई अनिवार्य आरटीई एक्ट 2009 लागू होने के बाद प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए एनसीटीई की ओर से निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यता अनिवार्य की गई थी। केंद्र सरकार ने कुछ राज्यों को सीमित अवधि के लिए इस न्यूनतम योग्यता में छूट दी थी। बिहार को यह छूट 31 मार्च 2015 तक मिली थी। तय अवधि में योग्यता हासिल करना था जरूरी छूट की अवधि के दौरान नियुक्त शिक्षकों को निर्धारित समय में जरूरी शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यता हासिल करनी थी। अब शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया होगी, जबकि पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए डीएलएड पूरा करना जरूरी रहेगा।

दुर्गापूजा-दीपावली-छठ पर यात्रियों को राहत, रांची से चलेंगी कई पूजा स्पेशल ट्रेनें

 रांची  दुर्गापूजा, दीपावली और छठ के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रांची रेल मंडल ने यात्री सुविधाओं और ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली है। यात्रियों की अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए रांची रेल मंडल से और रांची होकर कई पूजा स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। साथ ही कई नियमित ट्रेनों में स्थायी रूप से अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। रांची और हटिया स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण के लिए होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त टिकट काउंटर, सुरक्षा बलों की तैनाती और 24 घंटे वार रूम की व्यवस्था की गई है। इसकी जानकारी डीआरएम करुणा निधि सिंह ने गुरुवार को डीआरएम कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिकता है। ट्रेनों के परिचालन से लेकर स्टेशन प्रबंधन, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं की लगातार निगरानी की जाएगी। कई रूटों पर पूजा स्पेशल ट्रेनें अजमेर-रांची-अजमेर साप्ताहिक पूजा स्पेशल ट्रेन संख्या 09619 अजमेर से रांची के लिए दो अक्टूबर से 27 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी। वापसी में 09620 रांची-अजमेर ट्रेन चार अक्टूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक रविवार को चलेगी। दोनों दिशाओं में नौ-नौ ट्रिप होंगे। रांची-अलीपुरद्वार-रांची स्पेशल ट्रेन संख्या 08661 रांची से 12 अक्टूबर से नौ नवंबर तक प्रत्येक सोमवार और 08662 अलीपुरद्वार-रांची 14 अक्टूबर से 11 नवंबर तक प्रत्येक बुधवार को चलेगी। दोनों दिशाओं में पांच-पांच ट्रिप होंगे। रांची-आनंद विहार टर्मिनल स्पेशल 02877 तीन अक्टूबर से 28 नवंबर तक प्रत्येक शनिवार और वापसी में 02878 आनंद विहार टर्मिनल-रांची चार अक्टूबर से 29 नवंबर तक प्रत्येक रविवार को चलेगी। दोनों दिशाओं में नौ-नौ ट्रिप होंगे। इसके अलावा रांची होकर सांतरागाछी-अजमेर-सांतरागाछी साप्ताहिक स्पेशल, हटिया-लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक पूजा स्पेशल तथा हटिया-सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल, बेंगलुरु साप्ताहिक पूजा स्पेशल का भी परिचालन होगा। पटना-चर्लपल्ली-पटना द्वि-साप्ताहिक स्पेशल भी रांची होकर चलेगी। स्थानीय यात्रियों के लिए भी अतिरिक्त ट्रेन स्थानीय यात्रियों की सुविधा के लिए हटिया-बानो और बानो-हटिया अनारक्षित स्पेशल ट्रेनें भी चल रही हैं। ट्रेन संख्या 08631 और 08632 का परिचालन एक सितंबर से 30 नवंबर तक प्रतिदिन किया जाएगा। दोनों दिशाओं में 91-91 ट्रिप होंगे। नियमित ट्रेनों में भी बढ़ी क्षमता यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए जून के पहले सप्ताह से कई ट्रेनों में स्थायी रूप से अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं। रांची-गोड्डा एक्सप्रेस 18603/18604 में चार अतिरिक्त कोच, रांची-गोड्डा एक्सप्रेस 18619/18620 में दो अतिरिक्त वातानुकूलित तृतीय श्रेणी कोच, रांची-चोपन एक्सप्रेस 18631/18632 में चार अतिरिक्त कोच। रांची-सासाराम एक्सप्रेस 18635/18636 में एक अतिरिक्त वातानुकूलित चेयर कार तथा रांची-आरा एक्सप्रेस 18640/18639 में पांच अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। भीड़ नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया रांची और हटिया स्टेशन पर अधिक भीड़ वाले दिनों में यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर जाने से पहले निर्धारित होल्डिंग एरिया में व्यवस्थित किया जाएगा। यहां बैठने, पेयजल, प्रकाश, पंखे और ट्रेन संबंधी सूचना की व्यवस्था रहेगी। इससे प्लेटफॉर्म और फुटओवर ब्रिज पर भीड़ नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। स्टेशनों पर आरपीएफ, जीआरपी और अन्य विभागों के साथ समन्वय कर विशेष निगरानी रखी जाएगी। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात होंगे और सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त टिकट और यूटीएस काउंटर भी संचालित किए जाएंगे। 10 अक्टूबर से प्लेटफॉर्म टिकट 20 रुपये अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रांची और हटिया स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकट की दर 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये की जाएगी। यह व्यवस्था 10 अक्टूबर से 29 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। दक्षिण दिशा की ओर जाने वाली हटिया-लोकमान्य तिलक टर्मिनस और हटिया-बेंगलुरु स्पेशल ट्रेनों के लिए बलसिरिंग, गोविंदपुर रोड और बानो में वैकल्पिक ठहराव की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य हटिया स्टेशन पर भीड़ कम करना है। रांची स्टेशन का दक्षिणी प्रवेश द्वार 10 अक्टूबर से आंशिक रूप से खोला जाएगा। मांग के अनुसार प्लेटफॉर्म संख्या छह से शुरू होने वाली ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा। यात्रियों की सहायता के लिए 24 घंटे वॉर रूम सक्रिय रहेगा।  

रांची के तीनों डैम में भरपूर पानी, हटिया 37 फीट तो गोंदा डैम पहुंचा 28 फीट के करीब

रांची रांची में लगातार हुई बारिश का असर शहर के प्रमुख जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी के तीनों प्रमुख डैम हटिया, गोंदा और गेतलसूद में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। अच्छी बारिश के कारण जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है, जिससे अगले साल गर्मी के मौसम में शहरवासियों को पेयजल संकट से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जल संसाधन विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान जल भंडारण से अगले एक से दो साल तक शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सहारा मिल सकता है। हटिया डैम का जलस्तर 37.01 फीट दर्ज किया गया है। डैम की अधिकतम जलधारण क्षमता 38 फीट है। यानी जलस्तर अपनी क्षमता से महज करीब एक फीट नीचे पहुंच चुका है। हटिया डैम से धुर्वा, एचईसी, एयरपोर्ट, रेलवे, तुपुदाना, सीआरपीएफ कैंप आदि क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में प्रतिदिन करीब 10 मिलियन गैलन पर डे (एमजीडी) पानी की आपूर्ति की जाती है। वहीं, गोंदा डैम भी पूरी क्षमता के करीब पहुंच गया है। डैम का जलस्तर 28 फीट तक पहुंचने के बाद फाटक खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। फाटक खोलने के बाद जलस्तर घटकर 27.09 फीट हो गया। गोंदा डैम की अधिकतम क्षमता 28 फीट है। इस डैम से राजधानी के कई शहरी इलाकों में प्रतिदिन करीब पांच एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है। गेतलसूद डैम में भी जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका जलस्तर 1932.30 आरएल फीट दर्ज किया गया, जबकि डैम का उच्चतम जलस्तर 1936 आरएल फीट है। गेतलसूद डैम राजधानी की सबसे बड़ी जलापूर्ति व्यवस्था का आधार है। इससे रुक्का जलशोधन केंद्र के माध्यम से रांची शहर के बड़े हिस्से में प्रतिदिन करीब 37 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जाती है। गर्मी में नहीं सताएगी पानी की चिंता पिछले वर्षों में गर्मी के दौरान डैमों का जलस्तर तेजी से नीचे जाने से शहर में जल संकट की स्थिति बनती रही है। लेकिन इस बार मानसून के दौरान अच्छी बारिश होने से तीनों प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है। इससे आने वाले गर्मी के महीनों में जलापूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने में मदद मिलेगी। पेयजल विभाग के अभियंता प्रमुख निरंजन कुमार का कहना है कि जल संरक्षण और पाइपलाइन लीकेज को नियंत्रित करना भी जरूरी है, ताकि उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग किया जा सके। पर्याप्त जल भंडारण के बावजूद शहर में पानी की बर्बादी रोकना और नियमित आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बनी रहेगी। फिलहाल डैमों की स्थिति राजधानीवासियों के लिए राहत लेकर आई है।