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पंजाब में गर्मी और बारिश का डबल अटैक, लुधियाना-पठानकोट में बरसे बादल, कई जिलों में अलर्ट जारी

अमृतसर  पंजाब में गर्मी व बारिश एक साथ देखने को मिल रही हैं। बुधवार जहां राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहे व बारिश हुई, वहीं अधिकतम तापमान एक बार फिर 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। हालांकि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव के चलते आने वाले दिनों में कई जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।चंडीगढ़ में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। लुधियाना और पठानकोट में गुरुवार को बारिश हुई, जबकि जालंधर समेत कई इलाकों में तेज हवाएं चल रही हैं। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ ने आज (25 जून) और कल के लिए राज्य में बारिश, आंधी और गरज-चमक का यलो अलर्ट जारी।  मौसम विभाग ने 25 और 26 जून के लिए राज्य के कई हिस्सों में यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान राज्य के कई जिलों में बारिश का असर देखने को मिलेगा। लेकिन 27 जून से मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। मौसम विभाग की तरफ से जारी बुलेटिन के अनुसार बुधवार को राज्य के अधिकतम तापमान में औसतन 0.7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि ये सामान्य के करीब बना हुआ हे। बठिंडा रहा सबसे गर्म राज्य में सबसे अधिक तापमान बठिंडा क्षेत्र में 41.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा फाजिल्का में 40.4 डिग्री, पठानकोट में 40.0 डिग्री, फरीदकोट में 39.5 डिग्री, बठिंडा शहर में 39.5 डिग्री और फिरोजपुर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। प्रमुख शहरों में चंडीगढ़ का अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री, पटियाला 38.6 डिग्री, लुधियाना 37.8 डिग्री और अमृतसर 37.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र में 30.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि पटियाला, पठानकोट, मोहाली और अन्य कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पंजाब के 12 जिलों में आंधी, गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर और मोहाली शामिल हैं। वहीं, राज्य के 15 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, बरनाला, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला और मोहाली शामिल हैं। 33 फीसदी कम बारिश दर्ज पंजाब में पिछले 24 घंटों के दौरान सबसे अधिक 30.5 मिमी बारिश श्री आनंदपुर साहिब (रूपनगर) में दर्ज की गई। इसके अलावा पठानकोट, थेन डैम (पठानकोट) और मोहाली में 1-1 मिमी, जबकि पटियाला में 0.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। अमृतसर में केवल ट्रेस बारिश दर्ज हुई, जबकि राज्य के अधिकांश अन्य जिलों में बारिश नहीं हुई। राज्य में अब तक सामान्य औसत 35.7 मिमी के मुकाबले 33 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। यानी इस सीजन में पंजाब में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि पिछले कुछ दिनों के दौरान कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे मौसम में बदलाव देखने को मिला है। जानिए गर्मी के दो असर:-     पंजाब में कुछ जिलों में बारिश होने के बावजूद उमस में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, धान की रोपाई का काम भी जोरों पर है। ऐसे में बिजली की मांग बढ़कर 15 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई। शाम 6:30 बजे बिजली की मांग 14,790 मेगावाट दर्ज की गई, जो रात 8 बजे बढ़कर 14,972 मेगावाट और पौने 9 बजे 15,150 मेगावाट तक पहुंच गई। इस दौरान पंजाब ने 49,717 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया, जबकि केंद्र से 10,051 मेगावाट बिजली प्राप्त की गई। शुरुआत में बिजली की मांग 9,700 मेगावाट रहने का अनुमान था, लेकिन खपत बढ़ने के कारण अतिरिक्त बिजली लेनी पड़ी।     रोपड़ के चार में से एक यूनिट व लहरा मोहब्बत के चार में से दो यूनिट बंद हैं। जबकि बाकी नियमित रूप से चल रहे हैं। हाइड्रो से 877 मेगावाट उत्पादन हुआ है। ऐसी है मौसम की स्थिति पंजाब और आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) अब पूर्व की ओर बढ़कर उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश व उससे सटे इलाकों तक पहुंच गया है। वहीं, हरियाणा के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) अब उत्तर हरियाणा के ऊपर सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से पंजाब के कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव बना रहने की संभावना है। तापमान बढ़ने के आसार मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल के अनुसार, 24 से 26 जून और 29 जून तक पंजाब के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। उन्होंने बताया कि अगले तीन दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने के आसार हैं। आज कई जिलों में यलो अलर्ट जारी 25 जून: मौसम विभाग ने अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। इन जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। 26 जून:  अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और लुधियाना समेत कई जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं का यलो अलर्ट रहेगा। दक्षिणी पंजाब के अधिकांश जिलों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने की संभावना है। 27 और 28 जून: मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 27 और 28 जून को पूरे पंजाब में किसी प्रकार की मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि कुछ स्थानों पर बादल छाए रहने और छिटपुट बारिश की संभावना बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय रहने के कारण अगले दो दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इससे दिन के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आएगी, लेकिन कई इलाकों में तेज हवाओं और बारिश के कारण लोगों को गर्मी से आंशिक राहत मिल सकती है।

NEP-2020 को लेकर मंत्री परमार का बड़ा बयान, बोले- शोध और नवाचार में महाविद्यालयों की भूमिका अहम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने में महाविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण : मंत्री परमार मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल की शोध पत्रिका एवं जर्नल का विमोचन भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की सशक्त संस्कृति विकसित होने से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्राप्त होगी तथा देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। उच्च शिक्षा मंत्री परमार बुधवार को भोपाल स्थित अपने निवास कार्यालय में शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका एवं जर्नल का विमोचन कर अपने विचार साझा कर रहे थे। मंत्री परमार ने कहा कि शोध पत्रिकाएं एवं जर्नल ज्ञान के सृजन, संरक्षण एवं प्रसार के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे प्रकाशनों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध कार्यों को व्यापक मंच प्रदान करने का अवसर मिलता है तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को रोजगारपरक, शोधोन्मुख एवं समाजोपयोगी बनाना है। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में ऐसे प्रयास प्रदेश की उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान करेंगे तथा विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा "रोजगारपरक शिक्षा के विविध आयाम" विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया था। इस वेबिनार का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा को रोजगारपरक बनाने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जागरूक करने तथा शिक्षण संस्थानों, शोध एवं उद्योग जगत के मध्य समन्वय स्थापित करना था। वेबिनार में देशभर के विभिन्न शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता रही तथा 54 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिन्हें समीक्षित एवं संकलित कर शोध जर्नल के रूप में प्रकाशित किया गया। इस अवसर पर शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता मोदी, समन्वयक डॉ. अलका प्रधान, डॉ. आर. एस. रघुवंशी, शोध एवं प्रकाशन समिति के सदस्य डॉ. चन्द्रभान माकोड़े, डॉ. उमाशंकर पटेल, डॉ. नीतू शर्मा तथा डॉ. एल.एन. गौड़ सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित थे।  

अंतरराष्ट्रीय MSME दिवस पर 27 जून को होगा ‘सशक्त उद्यमी-समृद्ध मध्यप्रदेश’ समिट

अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 27 जून को सशक्त उद्यमी-समृद्ध मध्यप्रदेश समिट रवीन्द्र भवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे शामिल 2000 प्रतिभागी-विभागों की प्रगति की प्रदर्शनी और 3 विशेष सत्र होंगे आकर्षण भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 पर 'सशक्त उ‌द्यमी समृद्ध मध्यप्रदेश समिट' शनिवार 27 जून  को रविन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्‌यम विभाग द्वारा किया जा रहा है। सू्क्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप और मुख्य सचिव अनुराग जैन समिट में विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव भूमि आवंटन, भूमिपूजन, लोकार्पण तथा एमएसएमई, स्टार्टअप एवं स्वरोजगार लाभार्थियों को चेक प्रदान करेंगे। समिट में खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र एवं परिधान तथा अभियांत्रिकी क्षेत्रों के एमएसएमई के लिए बायर-सेलर मीट आयोजित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एमएसएमई प्रदर्शनी एवं ईज़ ऑफ डूइंग क्लिनिक का उ‌द्घाटन करेंगे। प्रदर्शनी में लगभग 50 स्टॉल होंगे, जिनमें एमएसएमई, स्टार्टअप, विभागीय स्टॉल, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ओ.डी.ओ.पी, योजना लाभार्थी, महिला स्व-सहायता समूह, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी भोपाल, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर भोपाल, भारतीय मानक ब्यूरो, GeM, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एन.आइ.टी.टी.आर) तथा बैंकों के प्रतिनिधि सम्मिलित रहेंगे, जो प्रतिभागियों को संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान करेंगे। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पी.एफ.आर.डी.ए) भी समिट में भाग लेंगे। मुख्य सत्र में प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेन्द्र कुमार सिंह स्वागत उद्‌बोधन देंगे। इस दौरान एमएसएमई, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण एवं कुटीर उद्‌योग, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्‌योगिकी, एसआरएलएम (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) तथा आईपीआईपी विभागों की विगत ढाई वर्ष की उपलब्धियों एवं आगामी ढाई वर्ष की कार्ययोजना पर आधारित लघु वीडियो फिल्म का प्रदर्शन किया जाएगा। एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के समर्थन के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिनमें आरएजेडओआरपीएवाय (आरजीपीएक्स प्रा. लि.). प्लग एण्ड प्ले इंडिया प्रा. लि. तथा बीआईसीसीआई (बैकवर्ड क्लासेज़ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) सम्मिलित है। एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप और मुख्य सचिव अनुराग जैन भी समिट को संबांधित करेंगे। समिट में राज्य के उद्‌यमशील पारिस्थितिकी तंत्र के 2000 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें एमएसएमई, उ‌द्यमी, स्टार्टअप, वित्तीय संस्थान, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एवं महिला स्व-सहायता को एक ही सशक्त मंच दिया गया है। समिट में विगत ढाई वर्षों की समस्त संबद्ध विभागीय उपलब्धियों तथा आगामी ढाई वर्षों की कार्ययोजना प्रदर्शित होगी। एमओयू का आदान-प्रदान, राज्य में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध संस्थागत सहयोग को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम होंगे।  3 विषयगत सत्र भी होंगे समिट में तीन विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रथम सत्र, ' नये बाजार, नई उडान' (एमएसएमई एवं एसएचजी के लिए नए बाजार अवसर) में एफआईईओ, सीएसआईआर-एएमपीआरआई ओएनडीसी, ईसीजीसी एवं इंडिया पोस्ट के पैनलिस्ट भाग लेंगे। दवितीय सत्र 'पूंजी तक पहुँच' (फंडिंग द नेक्स्ट जनरेशन एमएसएमई), में एनपीसीएल, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आरएक्सआईएल ट्रेन्ड्स प्लेटफॉर्म, आरएजेडओआरपीएवाय एवं नाबार्ड के पैनलिस्ट सम्मिलित हैं। तृतीय सत्र 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेण्डर्ड' (बीआईएस) के सहयोग से उत्पाद गुणवत्ता पर होगा। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ‌द्वारा अप्रैल 2017 में पारित संकल्प के माध्यम से प्रत्येक वर्ष 27 जून को 'सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्‌यम दिवस" के रूप में घोषित किया गया है। यह दिवस सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजीएस) की प्राप्ति में एमएसएमई की अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह वर्ष अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के आयोजन का दसवां वर्ष है।

दिल्ली-एनसीआर को बड़ी सौगात, ₹7000 करोड़ की टनल परियोजना से IGI पहुंचना होगा आसान

 गुरुग्राम   देश की राजधानी होने के चलते दिल्‍ली का महत्‍व काफ बढ़ जाता है. यहां विभिन्‍न प्रांतों के लोग हजारों-लाखों की तादाद में रहते हैं. कोई रोजगार के तलाश में तो कोई हायर एजुकेशन के सिलसिले में दिल्‍ली और आसपास के शहरों में रहते हैं. ऐसे में दिल्‍ली-एनसीआर में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को दुरुस्‍त करना जरूरी है, ताकि लाखों लोग रोजाना आरामदायक तरीके से सफर कर सकें. इसी को ध्‍यान में रखते हुए सरकार एक बड़े प्रोजेक्‍ट पर काम कर रही है. इस रोड-टनल प्रोजेक्‍ट के पूरा होने से दिल्‍ली-गुरुग्राम एक्‍सप्रेसवे और द्वारका एक्‍सप्रेसवे तक जाना और आना काफी आसान हो जाएगा. इसके अलावा साउथ से लेकर वेस्‍ट और ईस्‍ट दिल्‍ली तक की यात्रा भी बिना जाम के पूरा किया जा सकेगा। दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के बीच यातायात को तेज, सुगम और सिग्नल-फ्री बनाने की दिशा में केंद्र सरकार जल्द एक बड़ा फैसला ले सकती है. केंद्र सरकार की केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) बहुप्रतीक्षित करीब 7,000 करोड़ रुपये की उस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे सकती है, जिसके तहत वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग को दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे के शिव मूर्ति इंटरचेंज से जोड़ने के लिए एक अत्याधुनिक टनल और उससे जुड़े संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे. इस परियोजना में टनल के अलावा फ्लाईओवर, एलिवेटेड यू-टर्न और अप्रोच रोड्स भी शामिल होंगे, जिससे आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल-3, गुरुग्राम और द्वारका एक्सप्रेसवे तक पहुंच काफी आसान हो जाएगी।  करीब पांच साल से अधिक समय से विचाराधीन इस परियोजना को अब निर्णायक चरण में माना जा रहा है. 'टाइम्‍स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC), जो निजी निवेश वाली परियोजनाओं का मूल्यांकन करने वाली शीर्ष समिति है, इस प्रोजेक्ट की सिफारिश कर चुकी है. अब इसे जल्द ही अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सकता है।  राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने PPPAC को दी अपनी प्रस्तुति में बताया है कि नेल्सन मंडेला मार्ग से शिव मूर्ति इंटरचेंज तक 6 लेन की टनल बनाई जाएगी. यह टनल पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच तेज कनेक्टिविटी का नया गलियारा बनेगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यूनिफाइड एक्सेस रोड-II (UER-II) और द्वारका एक्सप्रेसवे से आने-जाने वाला ट्रैफिक सीधे वसंत कुंज और दक्षिण दिल्ली से जुड़ सकेगा. साथ ही गुरुग्राम और आईजीआई एयरपोर्ट से दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।  NHAI ने इस परियोजना के महत्‍व को बताते हुए ट्रैफिक का विस्तृत अनुमान भी पेश किया है. उसके अनुसार, इस कॉरिडोर पर फिलहाल करीब 38,015 पैसेंजर कार यूनिट (PCU) प्रतिदिन का दबाव है, जो वर्ष 2053 तक बढ़कर लगभग 1.3 लाख PCU प्रतिदिन तक पहुंच सकता है. ऐसे में भविष्य की यातायात जरूरतों को देखते हुए यह परियोजना सिर्फ वर्तमान समस्या का समाधान नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के लिए दिल्ली के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करने की तैयारी भी है।  टनल परियोजना सिर्फ भूमिगत संपर्क तक सीमित नहीं होगी. NHAI ने बताया है कि नेल्सन मंडेला मार्ग की ओर टनल के निकास बिंदु से आगे एक छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर भी प्रस्तावित है. यह कॉरिडोर महिपालपुर-छतरपुर चौराहे के पास डीडीए कार्यालय के नजदीक से ऊपर गुजरेगा और फिर वसंत कुंज के बी और सी ब्लॉक (बी-10 मार्केट) के चौराहे को पार करते हुए एम्बियंस मॉल के पास समाप्त होगा. इससे वसंत कुंज, छतरपुर और आसपास के इलाकों से एयरपोर्ट, द्वारका और गुरुग्राम की ओर जाने वाले ट्रैफिक को नया, तेज मार्ग मिलेगा।  इस परियोजना के साथ दिल्ली की एक और बड़ी सड़क कड़ी को जोड़ने की तैयारी चल रही है. अधिकारियों के अनुसार, AIIMS से नेल्सन मंडेला रोड तक छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना भी अंतिम रूप में है. यह कॉरिडोर उस स्थान से शुरू होगा जहां बारापुला एलिवेटेड रोड समाप्त होती है. यदि यह योजना भी समय पर मंजूर होती है, तो गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे से आने वाले यात्रियों को AIIMS, सराय काले खां और पूर्वी दिल्ली तक निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी. अधिकारियों का कहना है कि AIIMS से नेल्सन मंडेला रोड तक के एलाइनमेंट को जल्द अंतिम रूप देकर मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।  परियोजना में ट्रैफिक के विभिन्न दिशाओं से आने-जाने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त संरचनाएं भी शामिल की गई हैं. इसके तहत छतरपुर से महिपालपुर की ओर आने वाले ट्रैफिक के लिए मौजूदा दो लेन के एलिवेटेड हिस्से के समानांतर दो लेन का नया फ्लाईओवर बनाया जाएगा. इसके अलावा टनल से बाहर निकलकर छतरपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एक एलिवेटेड यू-टर्न भी प्रस्तावित है. इससे अलग-अलग दिशाओं में ट्रैफिक का दबाव बांटा जा सकेगा और चौराहों पर रुकावट कम होगी. यह प्रोजेक्‍ट हर दिशा से आने वाले ट्रैफिक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. इसका उद्देश्य आने वाले कई दशकों तक इस पूरे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना है. AIIMS लिंक समेत प्रस्तावित सड़क नेटवर्क टनल परियोजना के पूरा होने तक तैयार होने की उम्‍मीद है।   

इंदौर मेट्रो के सुरंग निर्माण में तेजी, थाइलैंड से पहुंचेंगी 4 अत्याधुनिक TBM

इंदौर  इंदौर के बहुप्रतीक्षित मेट्रो अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट की तैयारियां तेज हो गई हैं। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन और आगे खजराना तक बनने वाले भूमिगत कॉरिडोर के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) जल्द इंदौर पहुंचने वाली हैं। खास बात यह है कि, रेलवे स्टेशन से दो मशीनें और आएंगी। ये एक साथ सुरंग निर्माण शुरू करेंगी जो अलग-अलग ट्रैक तैयार करते हुए आगे बढ़ेंगी और बाद में एयरपोर्ट की ओर से आने वाले रूट से जुड़ जाएंगी। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट में कुल चार टीबीएम काम करेंगी। इनमें से पहली दो मशीनों के जून माह के अंत तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। ये अत्याधुनिक मशीनें थाईलैंड से लाई जा रही हैं। इनके पहुंचते ही एयरपोर्ट क्षेत्र में सुरंग निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए आवश्यक तकनीकी तैयारी और सॉफ्टवेयर कॉन्फिग्रेशन का काम भी अंतिम चरण में है। काम की गति बढ़ाने की कवायद अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट क्षेत्र में विशेष शाफ्ट तैयार किए जा रहे हैं, जहां से मशीनों को जमीन के नीचे उतारा जाएगा। इसके बाद टीबीएम धीरे-धीरे सुरंग बनाते हुए रेलवे स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ेंगी। इस दौरान दोनों ट्रैक समानांतर रूप से विकसित किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्य की गति बढ़ सके। दूसरे चरण में खजराना से रेलवे स्टेशन के बीच बनने वाले अंडरग्राउंड हिस्से के लिए भी दो अतिरिक्त टीबीएम लगाई जाएंगी। ये मशीनें रेलवे स्टेशन से अपना काम शुरू करेंगी और विभिन्न भूमिगत स्टेशनों से गुजरते हुए खजराना तक सुरंग तैयार करेंगी। आपस में जुड़ जाएंगे दोनों अंडरग्राउंड रूट पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग इस तरह की गई है कि, एयरपोर्ट और खजराना की दिशा से बनने वाले दोनों अंडरग्राउंड रूट बीच में आपस में जुड़ जाएंगे। इससे पूरा भूमिगत कॉरिडोर एक सतत नेटवर्क के रूप में तैयार होगा और संचालन में सुविधा मिलेगी। टेंडर जल्द ही हालांकि, मशीनों के संचालन से पहले तकनीकी परीक्षण और टेंडर जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं, लेकिन मेट्रो प्रबंधन ने निर्माण के अगले चरण की विस्तृत योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस रूट के लिए भी जल्दी टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और कंपनी को कम अलर्ट कर दिया जाएगा इसके बाद में कंपनी अपने स्तर पर भी परीक्षण शुरू करेगी।

उच्च शिक्षा विभाग की पहल, नए सत्र में कॉलेजों में होंगे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम

भोपाल उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा नवप्रवेशित विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में इंडक्शन (अभिमुखीकरण) कार्यक्रम के दौरान “मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम” आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें तनाव, अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई से प्रारंभ होने वाले नवप्रवेशित विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक सोच, ध्यान एवं जीवन कौशल जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग एवं सहायता सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग नियमों, शिकायत निवारण तंत्र, मेंटर-मेंटी प्रणाली, साइबर बुलिंग से बचाव तथा जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के संबंध में भी जागरूक किया जाएगा। महाविद्यालयों में उपलब्ध काउंसलर, मेंटर, एंटी-रैगिंग समिति, आंतरिक शिकायत समिति एवं अन्य सहायता तंत्रों की जानकारी भी विद्यार्थियों को प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी महाविद्यालयों को निर्देशित किया है कि कार्यक्रम के लिए स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए तथा नवप्रवेशित विद्यार्थियों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जाए। कार्यक्रम के आयोजन से संबंधित प्रतिवेदन, फोटोग्राफ्स, वीडियो एवं समाचार प्रकाशन की प्रतियां विभाग को निर्धारित समय सीमा में भेजी जाएंगी। उल्लेखनीय है कि यह पहल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित नेशनल टास्‍क फोर्स की अनुशंसाओं के अनुरूप की जा रही है। विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यक्तित्व विकास और समग्र कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को संस्थागत रूप दिया जा रहा है, जिससे महाविद्यालयों में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण हो सके।  

बिल गेट्स के निजी जीवन पर बड़ा खुलासा, शादी के बाद तीन महिलाओं से रिश्तों का जिक्र

वाशिंगटन  माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने अपने तीन एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का खुलासा किया है. गेट्स ने यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन पर आरोप लगाया कि वो उनके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के बारे में जानता था. बिल गेट्स की मानें तो एपस्टीन उन्हें ब्लैकमेल करने की साजिश रच रहा था।  जेफरी एपस्टीन के नेटवर्क और उसके संपर्कों की जांच कर रही यूएस हाउस ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में बिल गेट्स को लेकर ये खुलासा हुआ है. हाल ही में न्याय विभाग ने कुछ नए दस्तावेज जारी किए थे, जिसके बाद एपस्टीन के साथ बिल गेट्स के पुराने संबंधों की फिर से जांच शुरू हुई।  इसी सिलसिले में सांसदों ने गेट्स का बयान दर्ज किया. वो 10 जून को खुद इस कमेटी के सामने पेश हुए थे. इस दौरान गेट्स ने बताया कि एपस्टीन को उनके दो रूसी महिलाओं के साथ अफेयर्स के बारे में पूरी जानकारी थी।  इन तीन महिलाओं संग चल रहा था गेट्स का अफेयर गेट्स ने बताया कि उनका रूसी ब्रिज खिलाड़ी मिला अंतोनोवा और न्यूक्लियर फिजिसिस्ट करीमा निगमातुलिना के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था. गेट्स ने मेडिकल इंडस्ट्रलिस्ट एलिस जैकब्स नेसेलरॉड के साथ भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने की पुष्टि की।  जारी किए गए गवाही के ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक, बिल गेट्स ने कहा, 'इन अफेयर्स का एपस्टीन के साथ मेरी बातचीत से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन ये मेरे परिवार के लिए दर्दनाक थे. एपस्टीन मेरी बेवफाई की जानकारी का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था. इसके साथ ही उसने कई झूठ भी जोड़े थे. ताकि वो मुझ पर दोबारा उसके साथ जुड़ने के लिए दबाव बना सके।  हालांकि बिल गेट्स ने एपस्टीन के किसी भी जुर्म में शामिल होने से साफ इनकार किया. उन्होंने माना कि उसके साथ संपर्क बनाए रखना एक गलती थी. गेट्स ने बताया कि वो फिलांथ्रोपी के कामों पर चर्चा को लेकर एपस्टीन से मिलते थे. उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि वो दोषी ठहराया गया था. मुझे इसके बारे में पता था. मैं एक सीमित भूमिका में उससे मिलने का रिस्क उठाने के लिए तैयार था।  क्या एपस्टीन ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की? बिल गेट्स ने दावा किया कि एपस्टीन उनकी पर्सनल लाइफ की जानकारी का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था. एपस्टीन उनके अफेयर्स के बारे में जानने के बाद उन्हें ब्लैकमेल करने के बारे में सोच रहा था. हालांकि, उसने ऐसा कभी नहीं किया. गेट्स ने कहा, 'उसने मुझे कभी ब्लैकमेल नहीं किया, लेकिन इन ईमेल्स को देखने से ये खतरा पैदा होता है कि उसने मुझे ब्लैकमेल करने के बारे में सोचा था। 

कोदो-कुटकी की खेती से बढ़ेगी आय और सेहत, किसानों के लिए बेहतर विकल्प

विशेष लेख कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं पारंपरिक धरोहर से आधुनिक पहचान तक रायपुर  छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं। कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं। आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं। बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं। पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं। (एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

प्राइवेट मेडिकल कॉलेज फीस मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, EWS याचिका खारिज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने EWS आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेज फीस को लेकर याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता क्योंकि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों में अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकते तो स्कॉलरशिप समेत अन्य विकल्प जैसे सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं. जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान अपनी फीस से चलते हैं और अगर निजी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फीस लेने से रोका गया तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान प्रभावित होगा।  जो वहन नहीं कर सकते हैं फीस  इस मु्द्दे पर फैसला देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकता है, तो स्कॉलरशिप, सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं।  देश को डॉक्टरों की जरूरत उन्होंने आगे कहा कि देश को अधिक डॉक्टरों की जरूरत है और निजी मेडिकल कॉलेज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में निजी कॉलेजों की फीस अधिक है केवल इसलिए उन्हें सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने का आदेश नहीं दिया जा सकता. हालांकि,  सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ा कोई व्यापक कानूनी प्रश्न भविष्य में उठाया जा सकता है।  राजस्थान का भी उठा मामला वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को वैध माना था और कहा था कि राज्य की फीस नियामक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार ही फीस तय की गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 8 लाख रुपये के वार्षिक आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के बीच कथित विरोधाभास को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। 

सुबह खाली पेट भीगी मेथी के 5 जबरदस्त फायदे, सेहत के लिए वरदान

हमारे इंडियन किचन में मेथी दाना एक बहुत ही आम मसाला है. तड़के से लेकर अचार तक, यह हर चीज का स्वाद बढ़ाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटा सा पीला दाना सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि आपकी सेहत के लिए एक वरदान है. खासकर जब आप मेथी को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाते हैं, तो इसके गुण कई गुना बढ़ जाते हैं. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़े लाइफस्टाइल में भीगी हुई मेथी को अपनी डाइट में शामिल करना एक बेहद समझदारी भरा फैसला हो सकता है. आइए जानते हैं सुबह खाली पेट भीगी हुई मेथी खाने के 5 बड़े फायदों (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) के बारे में. 1. डायबिटीज को कंट्रोल करने में मददगार आज के समय में शुगर या डायबिटीज की समस्या बहुत आम हो चुकी है. भीगी हुई मेथी ब्लड शुगर लेवल को काबू में रखने के लिए एक रामबाण इलाज मानी जाती है. मेथी के दानों में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट और शुगर के सोखने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है. इससे खून में अचानक शुगर का लेवल नहीं बढ़ता. अगर आप रोज सुबह इसका पानी पीते हैं और इसके दाने चबाकर खाते हैं, तो इंसुलिन का सिक्रीशन भी बेहतर होता है. 2. पेट की दिक्कतों और कब्ज से छुटकारा गलत खानपान की वजह से आजकल हर दूसरा व्यक्ति गैस, एसिडिटी और कब्ज से परेशान रहता है. भीगी हुई मेथी में घुलनशील फाइबर होता है, जो हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है. रातभर भीगने के कारण मेथी थोड़ी सॉफ्ट हो जाती है और इसे पचाना आसान होता है. यह पेट को साफ करने में मदद (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) करती है और पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या को भी धीरे-धीरे खत्म कर देती है. 3. वजन घटाने में मिलती है मदद अगर आप अपने बढ़ते वजन या पेट की चर्बी से परेशान हैं, तो भीगी हुई मेथी आपकी इस मुश्किल को आसान कर सकती है. सुबह खाली पेट इसे खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे कैलरी तेजी से बर्न होती है. इसके अलावा, मेथी में मौजूद फाइबर के कारण इसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा-भरा महसूस होता है. इससे आपको असमय भूख नहीं लगती और आप ओवरईटिंग यानी ज्यादा खाने से बच जाते हैं. 4. खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करे (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) दिल की सेहत के लिए भीगी हुई मेथी बहुत फायदेमंद होती है. यह शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करने में मदद करती है. जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है, तो नसों में ब्लॉकेज का खतरा कम हो जाता है, जिससे दिल की बीमारियाँ और हार्ट अटैक आने की संभावना काफी हद तक घट जाती है. 5. त्वचा और बालों के लिए वरदान भीगी हुई मेथी सिर्फ अंदरूनी सेहत ही नहीं, बल्कि आपकी बाहरी खूबसूरती को भी निखारती है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स चेहरे के कील-मुंहासों को दूर करते हैं और स्किन पर एक नेचुरल ग्लो लाते हैं. इसके साथ ही, अगर आपके बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं या उनमें डैंड्रफ की समस्या है, तो भीगी हुई मेथी खाने (Benefits of Soaked Fenugreek Seeds) से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बाल चमकदार बनते हैं.